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  • खंडवा के धरमपुरी गौशाला में भूख-प्यास से गायों की मौत, कलेक्टर ने इंजीनियर-डॉक्टर को नोटिस जारी किया

    खंडवा के धरमपुरी गौशाला में भूख-प्यास से गायों की मौत, कलेक्टर ने इंजीनियर-डॉक्टर को नोटिस जारी किया


    खंडवा । जिले से करीब 25 किलोमीटर दूर धरमपुरी की नंद मोहन समिति गौशाला में एक महीना से लगातार गायों की मौत का सिलसिला चल रहा है। बुधवार को गौशाला के पास लगभग छह गायों के शव और छह के कंकाल मिलने से मामला सार्वजनिक हुआ तो जिला प्रशासन में हड़कंप मच गया। सरकारी अनुदान से संचालित इस गौशाला में गायों की मौत की खबर फैलते ही कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने घटना की गंभीरता को देखते हुए मौके पर पहुंचकर औचक निरीक्षण किया।

    जांच के दौरान गौशाला की स्थिति बेहद खराब मिली। फर्श टूटा हुआ पानी की टंकी लीकेज में और चरनौई भूमि पर चारे की बजाय गेहूं की फसल उगती हुई दिखी। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि मृत गायों के शवों को दफनाने की बजाय वन विभाग की जमीन पर खुले में छोड़ दिया गया था। इससे प्रशासन की कार्रवाई तेज हो गई और कलेक्टर ने संबंधित इंजीनियरों और पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।

    कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने कहा कि धरमपुरी की गौशाला मुख्य मार्ग से लगभग 4 किलोमीटर दूर है। वहां पहले भी कुछ गायों के मृत और बचे हुए कंकाल मिलने की शिकायत आई थी। उस समय निरीक्षण के बाद गौशाला के संचालकों और ग्राम पंचायत के सरपंच-सचिव को बेहतर प्रबंधन के निर्देश दिए गए थे। साथ ही हर महीने गौशाला का दौरा करने वाले डॉक्टर को भी नोटिस जारी किया गया है।

    गौशाला के संचालक जब कलेक्टर से पूछे गए तो नंद मोहन गौशाला के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर के सदस्य आशीष बरोले ने कहा कि आसपास के गांवों के लोग मृत गायों को यहां छोड़ जाते हैं हम क्या कर सकते हैं। इस बयान के बाद ग्रामीणों ने आरोपों को गलत बताया और कहा कि गायों की मौत गौशाला के खराब प्रबंधन और खाने-पीने की कमी से हुई है।

    पशु चिकित्सा विभाग के उप-संचालक हेमंत शाह ने बताया कि गायों की मौत एक दिन में नहीं हुई बल्कि लगभग 15 दिनों के अंतराल में यह घटना सामने आई है। मौके पर सिर्फ एक गाय का शव मिला जबकि अन्य के कंकाल पाए गए जिन्हें सही तरीके से डिस्पोजल कराया गया। उन्होंने कहा कि पूरी जांच की रिपोर्ट कलेक्टर को दे दी गई है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।मामले की जांच जिला प्रशासन द्वारा जारी है और अब इस गौशाला के प्रबंधन पानी-चारे की व्यवस्था और विभागीय लापरवाही की जाँच की जा रही है।

  • मशहूर फिल्म निर्देशक रोहित शेट्टी के बंगले के बाहर फायरिंग… जांच में जुटी पुलिस, भारी सुरक्षाबल तैनात

    मशहूर फिल्म निर्देशक रोहित शेट्टी के बंगले के बाहर फायरिंग… जांच में जुटी पुलिस, भारी सुरक्षाबल तैनात


    मुम्बई।
    बॉलीवुड के मशहूर निर्माता-निर्देशक (Famous Bollywood Producer-Director) रोहित शेट्टी (Rohit Shetty) को लेकर एक बड़ी खबर सामने आ रही है। रोहित शेट्टी (Rohit Shetty) के जुहू (Juhu) स्थित आवास के बाहर फायरिंग की खबर सामने आ रही है। इस खबर ने हर तरफ हड़कंप मच गया। पुलिस के मुताबिक, उनके घर के बाहर चार राउंड फायरिंग (Four Rounds Firing) की गई है। फायरिंग की खबर सामने आते ही मुंबई पुलिस और फोरेंसिक टीम मौके पर पहुंची। फिलहाल, पुलिस ने अपनी जांच शुरू कर दी है। इसके साथ रोहित के घर के बाहर पुलिस ने सुरक्षा को बढ़ा दिया है और बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है।


    अज्ञात हमलावरों ने की चार राउंड फायरिंग

    रोहित शेट्टी के करीबी ने बताया कि उनके घर के बाहर से एक अज्ञात शख्स ने गोलीबारी की और मौके से भाग निकला। मुंबई पुलिस ने इस मामले की जानकारी देते हुए कहा कि रोहित शेट्टी के घर के बाहर कुछ अज्ञात हमलावरों ने चार राउंड फायरिंग की। इसके बाद जुहू में रोहित शेट्टी के घर के आसपास बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है। राहत की राहत की बात यह है कि इस गोलीबारी में अब तक किसी के घायल होने की खबर नहीं मिली है।


    इस घटना से फैंस परेशान

    बता दें कि फिलहाल अभी तक पता नहीं चला कि आखिरकार डायरेक्टर के घर के बाहर फायरिंग क्यों और किस वजह से की गई। पुलिस मामले की जांच कर रही है। इस घटना ने सेलिब्रिटीज की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर अपना ध्यान खींचा है। वहीं, दूसरी तरफ फैंस इस घटना से काफी परेशान हैं। वहीं, अभी तक रोहित शेट्टी या उनके परिवार की तरफ से इस पूरे मामले को लेकर कोई भी आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

  • ग्वालियर: रिटायर्ड अधिकारी से डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 1 करोड़ 12 लाख की ठगी, पुलिस जांच में जुटी

    ग्वालियर: रिटायर्ड अधिकारी से डिजिटल अरेस्ट के नाम पर 1 करोड़ 12 लाख की ठगी, पुलिस जांच में जुटी


    ग्वालियर । साइबर क्राइम के प्रति पुलिस और सरकार की ओर से चलाए जा रहे जागरूकता अभियानों के बावजूद डिजिटल अरेस्ट और ऑनलाइन ठगी के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। ताजा मामला ग्वालियर का सामने आया है, जहां रिटायर्ड रजिस्ट्रार अधिकारी से एक करोड़ 12 लाख रुपए की ठगी हो गई। ठगों ने उन्हें डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर चार अलग-अलग बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करवा लिए।

    दरअसल, रिटायर्ड अधिकारी बिहारी लाल गुप्ता 75 को साइबर अपराधियों ने पुलिस अधिकारी बनकर फंसाया। ठगों ने मनी लॉन्ड्रिंग के केस में अरेस्ट करने का डर दिखाते हुए उन्हें झांसे में लिया और डिजिटल अरेस्ट का हवाला देकर एक करोड़ 12 लाख रुपये की ठगी कर डाली। ठगी का एहसास तब हुआ जब गुप्ता साहब ने हाल ही में साइबर जागरूकता से संबंधित एक वीडियो देखा। वीडियो में ठगी के तरीके और सावधानियां बताई गई थीं, जिससे उन्हें अपने साथ हुई ठगी का एहसास हुआ।

    16 नवंबर 2025 को ठगों का पहला कॉल आया था, जबकि गुप्ता साहब ने 3 जनवरी 2026 तक ठगों के साथ आखिरी ट्रांजैक्शन किया।जब गुप्ता साहब को ठगी का एहसास हुआ, तो उन्होंने पुलिस थाने में शिकायत दर्ज करवाई। साइबर क्राइम पुलिस ने इस मामले में अज्ञात ठगों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह मामला डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी का एक और उदाहरण है, जो साइबर अपराधियों के बढ़ते मंसूबों को दर्शाता है।

  • सरकारी राशन दुकान से 70 क्विंटल चावल गायब, 3 साल बाद भी नहीं हुई कोई कार्रवाई

    सरकारी राशन दुकान से 70 क्विंटल चावल गायब, 3 साल बाद भी नहीं हुई कोई कार्रवाई


    कांकेर । कांकेर जिले के ग्राम मूंगवाल में स्थित सरकारी राशन दुकान से 70 क्विंटल चावल गायब हो गया है। यह चावल स्थानीय राशन कार्ड धारकों को वितरण के लिए निर्धारित किया गया था, लेकिन चावल के गायब होने की जानकारी के बावजूद अब तक किसी भी अधिकारी ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। मामले की जांच के आदेश तो दिए गए हैं, लेकिन तीन साल का समय गुजरने के बावजूद अब तक जांच में कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।

    सेल्समैन का बयान

    दुकान के सेल्समैन, परमेश्वर तेता, ने कहा कि वह पिछले तीन साल से दुकान का संचालन कर रहे हैं और जब उन्हें यह दुकान सौंपी गई थी, तब से ही स्टॉक में कमी थी। उनका कहना है कि उन्होंने अधिकारियों को पहले ही इसकी जानकारी दे दी थी, लेकिन अब तक कोई हल नहीं निकला है। सेल्समैन का दावा है कि उन्होंने किसी भी तरह के घोटाले या अनियमितताओं में शामिल होने की बात से इनकार किया और कहा कि स्टॉक की कमी का कारण दुकान की शुरुआत में ही था।

    कलेक्टर का आश्वासन

    कलेक्टर निलेश महादेव क्षीरसागर ने इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “हमें इस मामले में शिकायत मिली है और हम इसकी जांच कर रहे हैं। निष्पक्ष जांच के बाद दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।” कलेक्टर ने यह भी बताया कि वे इस मामले की गंभीरता से जांच कर रहे हैं और जांच के परिणाम के आधार पर जिम्मेदार व्यक्तियों को दंडित किया जाएगा।

    सरपंच की शिकायत

    ग्राम पंचायत के सरपंच, जैसारो कोर्राम ने भी इस मामले में खाद्य विभाग से शिकायत की है। उनका कहना है कि यह मामला ग्रामवासियों के अधिकारों से जुड़ा हुआ है और अगर अधिकारियों की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो वे उच्च अधिकारियों से इस मुद्दे को उठाएंगे यह मामला सरकारी राशन वितरण प्रणाली में बड़े पैमाने पर घोटाले की ओर इशारा कर रहा है, जहां राशन कार्ड धारकों को निर्धारित चावल वितरित नहीं किया जा सका। इस मामले की तीन साल बाद भी सही से जांच नहीं हो पाई है, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या सरकारी सिस्टम में यह तरह की अनियमितताएं सामान्य हो गई हैं। अब तक जांच की प्रक्रिया लंबी खींची गई है, लेकिन कलेक्टर के द्वारा जांच और कार्रवाई का आश्वासन दिया गया है, जिससे यह उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही इस मामले में कोई ठोस कदम उठाए जाएंगे।

  • मुरैना में वकील मृत्युंजय सुसाइड केस में नया मोड़,मां ने एसपी से मांगी न्यायिक कार्रवाई, महिला एसआई और आरक्षक के खिलाफ मुरैना में भी FIR दर्ज होने की मांग

    मुरैना में वकील मृत्युंजय सुसाइड केस में नया मोड़,मां ने एसपी से मांगी न्यायिक कार्रवाई, महिला एसआई और आरक्षक के खिलाफ मुरैना में भी FIR दर्ज होने की मांग




    मुरैना।
    वकील मृत्युंजय चौहान के सुसाइड केस में नया मोड़ आया है। बुधवार को मृतक वकील की मां, शिवकुमारी जादौन, मुरैना एसपी समीर सौरभ से मिलने पहुंचीं और भावुक होकर बोलीं कि उनके बेटे के साथ जो अत्याचार हुआ, उसकी न्यायिक कार्रवाई सिर्फ ग्वालियर में नहीं, बल्कि मुरैना में भी हो। उन्होंने कहा, “मुझे भी यहीं मार डालो, मेरा बेटा तो चला ही गया।

    मृत्युंजय की मां ने आरोप लगाया कि मुरैना पुलिस अब तक किसी ठोस कार्रवाई में नहीं जुटी है।

    12 दिसंबर को मुरैना सिविल लाइन की महिला एसआई प्रीति जादौन और कॉन्स्टेबल अराफात खान ने मृत्युंजय के साथ मारपीट की थी। इसी के चलते मृत्युंजय ने 15 दिसंबर को ग्वालियर में अपने किराए के मकान में फांसी लगाई। उन्होंने मांग की कि आरोपी महिला एसआई और आरक्षक के खिलाफ मुरैना में भी एफआईआर दर्ज की जाए, अवैध पिस्टल जब्त की जाए और दोनों को जिले से बाहर अटैच किया जाए क्योंकि वे परिवार को धमका रहे हैं।

    ग्वालियर पुलिस की जांच में सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और मोबाइल लोकेशन से पुष्टि हुई कि घटना वाले दिन आरोपी और वकील साथ थे।

    जांच में यह भी खुलासा हुआ कि महिला एसआई ने शादी का दबाव बनाया, पूर्व पत्नी से तलाक, जमीन-जायदाद और जेवरात हड़पने की कोशिश की। इस मामले में ग्वालियर पुलिस ने बीएनएस की धारा 108 और 3(5) के तहत महिला एसआई और आरक्षक के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    एसपी ने कहा कि जांच जारी है और जैसे ही ग्वालियर पुलिस का एफआईआर प्रतिवेदन मिलेगा, दोनों आरोपियों को पुलिस मुख्यालय अटैच कर दिया जाएगा। शिवकुमारी जादौन की यह मांग न्यायपालिका और पुलिस पर दबाव डालती है कि किसी भी तरह की अवहेलना या विलंब न्याय में बाधक न बने।

    इस पूरे मामले ने मुरैना और ग्वालियर में पुलिस और न्याय व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतक वकील के परिवार ने स्पष्ट किया कि केवल ग्वालियर में कार्रवाई से संतोष नहीं होगा, बल्कि मुरैना में भी एफआईआर दर्ज होना जरूरी है ताकि न्याय सुनिश्चित हो सके।

  • तमिलनाडु में खौफनाक वारदात: अज्ञात लोगों ने 53 वर्षीय व्यक्ति और उनकी लिव-इन पार्टनर को जिंदा जलाया

    तमिलनाडु में खौफनाक वारदात: अज्ञात लोगों ने 53 वर्षीय व्यक्ति और उनकी लिव-इन पार्टनर को जिंदा जलाया


    नई दिल्ली । तिरुवनमलाई जिले के पक्कीरिपालयम गांव में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई हैजहां अज्ञात लोगों ने 53 वर्षीय किसान पी शक्तिवेल और उनकी 40 वर्षीय लिव-इन पार्टनर एस अमृतम को झोपड़ी में बंद कर आग लगा दीजिससे दोनों की मौत हो गई। यह वारदात पुलिस के लिए एक चुनौती बन गई हैक्योंकि हमलावरों का कोई सुराग अभी तक नहीं मिल पाया है।

    पुलिस के मुताबिकघटना शनिवार सुबह की है जब गांव के लोगों ने झोपड़ी में आग लगने की सूचना दी। पुलिस और फोरेंसिक टीम मौके पर पहुंचीलेकिन शवों की हालत इतनी खराब थी कि पहचान करना मुश्किल हो गया। शवों की पहचान बाद में जांच के दौरान की गईऔर पता चला कि मृतक शक्तिवेल और अमृतम पिछले तीन सालों से लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे थे।

    हमलावरों की पहचान और जांच

    चेंगम के पुलिस इंस्पेक्टर एम सेल्वराज ने बताया कि प्रारंभिक जांच से पता चला है कि शक्तिवेल अपनी पत्नी एस तमिलारसी से तीन साल पहले अलग हो गए थे और अब वह बेंगलुरु में अपने बच्चों के साथ रह रही हैं। वहींअमृतम भी अपने पति से अलग हो चुकी थीं। दोनों के बीच पिछले तीन साल से संबंध थे और उनके भी दो बेटे और एक बेटी है।पुलिस ने दोनों के पूर्व जीवनसाथियों की भूमिका की जांच शुरू कर दी हैऔर यह पता करने की कोशिश की जा रही है कि क्या उनके पुराने रिश्तों का इस खौफनाक वारदात से कोई संबंध है।

    पोस्टमार्टम और आगे की कार्रवाई

    पुलिस और फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल पर गहन जांच कीजिसमें खोजी कुत्ते की मदद भी ली गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट का अभी इंतजार किया जा रहा हैलेकिन पुलिस का मानना है कि यह हत्या का मामला है।पुलिस ने संदिग्ध मौत का मामला दर्ज किया है और मामले की जांच तेज कर दी है। गांव में इस घटना के बाद से दहशत का माहौल बना हुआ हैऔर लोग इस प्रकार की वारदात से डर गए हैं।

  • गोवा अग्निकांड: लूथरा ब्रदर्स को जल्द लाया जा सकता है भारतथाइलैंड से प्रत्यर्पण प्रक्रिया शुरू

    गोवा अग्निकांड: लूथरा ब्रदर्स को जल्द लाया जा सकता है भारतथाइलैंड से प्रत्यर्पण प्रक्रिया शुरू


    नई दिल्ली । गोवा के बर्च बाय रोमियो लेन नाइटक्लब में 6 दिसंबर को हुए भयंकर अग्निकांड में कम से कम 25 लोग मारे गए थेजिनमें क्लब के कई कर्मचारी भी शामिल थे। इस हादसे के बाद नाइटक्लब के मालिक सौरभ और गौरव लूथरादोनों भाईथाइलैंड के फुकेट भाग गए थे। गोवा पुलिस ने उनकी तलाश शुरू कर दी थीऔर अब खबर है कि उन्हें अगले 24 से 48 घंटे में भारत लाया जा सकता है।

    सरकारी सूत्रों के अनुसारलूथरा भाइयों के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया तेज़ी से चल रही हैऔर जल्द ही उन्हें थाइलैंड से भारत लाया जा सकता है। विदेश मंत्रालय ने उनके पासपोर्ट को कैंसल कर दिया है और इंटरपोल ने उनके खिलाफ ब्लू कॉर्नर नोटिस जारी किया है। इसके अलावादिल्ली की एक अदालत ने उनकी जमानत याचिका भी खारिज कर दी थीजिसमें उन्होंने यह दावा किया था कि गोवा में उनकी जान को खतरा है और उन्हें पीट-पीट कर मार डाला जाएगा।

    अग्निकांड के बाद गोवा पुलिस ने क्लब के पांच कर्मचारियों और प्रबंधकों को गिरफ्तार किया है। इन कर्मचारियों से पूछताछ की जा रही हैजबकि सौरभ और गौरव लूथरा की गिरफ्तारी के लिए कार्यवाही चल रही है। जांच समितिजो इस घटना की गहन जांच कर रही हैने गोवा के अन्य प्रमुख व्यक्तियोंजैसे क्लब के जमीन के मालिक प्रदीप घाडी अमोणकर और आरपोरा-नागोवा के सरपंच रोशन रेडकर से भी पूछताछ की है। अमोणकर को गहन पूछताछ के लिए शनिवार देर रात तक तलब किया गया था।
    सरकार की ओर से लूथरा भाइयों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है। उनके प्रत्यर्पण के बाद यह स्पष्ट होगा कि इस भीषण अग्निकांड के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों को न्याय दिलाया जा सके।

  • महिला सिपाही के ब्लैकमेल नेटवर्क का खुलासा, कई दारोगा और सिपाही बने शिकार

    महिला सिपाही के ब्लैकमेल नेटवर्क का खुलासा, कई दारोगा और सिपाही बने शिकार



    नई दिल्ली ।
    उत्तर प्रदेश पुलिस की एक महिला सिपाही मीनाक्षी शर्मा का ब्लैकमेलिंग नेटवर्क इन दिनों सुर्खियों में है जिसके कारण पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। मीनाक्षी की गतिविधियों का खुलासा कुठौंद थाना प्रभारी अरुण कुमार राय की गोली लगने से हुई मौत के बाद हुआ जिसके बाद से उसकी काली करतूतों की परत दर परत खुल रही है। जांच में यह सामने आया कि वर्ष 2022 में मीनाक्षी ने पीलीभीत जिले के पूरनपुर थाने में तैनाती के दौरान एक सिपाही को प्रेमजाल में फंसाकर उससे मोटी रकम की मांग की थी। इसके बाद यह सिलसिला बरेली और जालौन जिलों तक फैल गयाजहां उसने कई दारोगा और सिपाहियों को अपने जाल में फंसाया और उनसे पैसे की मांग की।

    प्रेमजाल और पैसों का दबाव

    मीनाक्षी की कार्यशैली बहुत ही चालाकी से भरी हुई थी। वह पहले जान-पहचान बनाने के लिए पुलिसकर्मियों से संपर्क करती फिर धीरे-धीरे निजी बातचीत और करीबी का हवाला देती थी। इसके बाद वह उन पर पैसों का दबाव बनाती थी। यह दबाव इस तरह से बनता था कि वह खुद को पीड़िता के रूप में प्रस्तुत करती थी जिसके बाद पुलिसकर्मी न चाहते हुए भी पैसों का भुगतान करने के लिए मजबूर हो जाते थे।

    चौंकाने वाली बात यह है कि मीनाक्षी ने इस पूरी प्रक्रिया में अपने परिवार के सदस्यों खासकर अपने पिता और भाई को भी शामिल किया था। मीनाक्षी के पिता और भाई उसे इस खेल में सहयोग करते थे और उसे हिम्मत भी देते थे। जेल जाने के दौरान भी मीनाक्षी के पिता ने उसे जल्द से जल्द बाहर निकालने का वादा किया था जिससे यह संकेत मिलता है कि यह पूरे परिवार का संगठित प्रयास था।

    मीनाक्षी का नेटवर्क और अन्य शिकार

    मीनाक्षी शर्मा के इस ब्लैकमेलिंग नेटवर्क का दायरा काफी बड़ा था। जांच में यह सामने आया कि वह अकेली नहीं थी बल्कि उसके परिवार के लोग भी इसमें शामिल थे। उसकी सक्रियता पीलीभीत के पूरनपुर थाने तक सीमित नहीं रही बल्कि बरेली और जालौन जिलों में भी उसने कई पुलिसकर्मियों को निशाना बनाया। मीनाक्षी का यह नेटवर्क न सिर्फ पुलिस महकमे के लिए शर्मिंदगी का कारण बना बल्कि यह भी बताता है कि कैसे एक सिपाही ने अपनी शक्ति का गलत उपयोग किया। उसके खिलाफ पुलिस ने जांच तेज कर दी है और अब तक कई अन्य पुलिसकर्मियों से भी पूछताछ की जा रही है जो मीनाक्षी के शिकार बने थे। वहीं अधिकारियों का कहना है कि मीनाक्षी के इस पूरे गिरोह को जल्द ही पकड़ा जाएगा और उसके परिवार के सदस्यों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

    जांच और गिरफ्तारी

    महिला सिपाही मीनाक्षी शर्मा के खिलाफ पुलिस ने गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है। उसकी गिरफ्तारी के बाद इस मामले में और भी कई चौंकाने वाले खुलासे हो सकते हैं। मीनाक्षी के पिता और भाई का भी पुलिस ने पता लगाकर उन्हें हिरासत में लिया है। अब जांच के दौरान यह जानने की कोशिश की जा रही है कि मीनाक्षी ने किन-किन अन्य पुलिसकर्मियों को अपने जाल में फंसाया और वह किस तरह से इन रकमों को इकट्ठा करती थी।इस मामले ने पुलिस महकमे में खलबली मचा दी है

    और अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या पुलिस महकमें में अन्य किसी महिला या पुरुष कर्मी की तरफ से भी ऐसी घटनाएं घटित हो रही हैं जिसे उजागर नहीं किया गया हो।उत्तर प्रदेश पुलिस के एक महिला सिपाही द्वारा किए गए इस ब्लैकमेलिंग नेटवर्क ने न केवल पुलिस महकमे को शर्मिंदा किया है बल्कि यह भी दिखाया है कि एक सिपाही अपने कद और शक्ति का गलत उपयोग कैसे कर सकता है। इस मामले की गहन जांच जारी है और पुलिस विभाग ने इसे गंभीरता से लिया है। मीनाक्षी और उसके परिवार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इस तरह की घटनाएं भविष्य में न घटित हों।