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  • पहलगाम आतंकी हमले की चार्जशीट में सनसनीखेज खुलासे, धर्म पूछकर की गई थी हत्या, आतंकियों की पूरी साजिश सामने आई

    नई दिल्ली। पहलगाम आतंकी हमले को लेकर दाखिल चार्जशीट ने उस भयावह साजिश की पूरी तस्वीर सामने रख दी है, जिसने देश को झकझोर दिया था। जांच एजेंसियों के अनुसार यह हमला अचानक नहीं बल्कि पूरी तरह योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया गया था, जिसमें आतंकियों ने पर्यटकों को चुन-चुनकर निशाना बनाया और उनकी पहचान धर्म के आधार पर करने की कोशिश की। इस हमले में 26 लोगों की जान चली गई थी जबकि कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

    जांच के दौरान सामने आया कि इस हमले में लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े संगठन टीआरएफ की भूमिका थी, जिसने शुरुआत में जिम्मेदारी ली थी लेकिन बाद में अपने बयान से पीछे हट गया। जांच एजेंसियों ने पाया कि हमले को तीन आतंकियों ने अंजाम दिया था, जिनकी पहचान फैसल जट्ट, हबीब ताहिर और हमजा अफगानी के रूप में हुई। इसके अलावा इस पूरी साजिश का मास्टरमाइंड सज्जाद जट्ट बताया गया है, जिसने हमले की रणनीति तैयार की थी।

    चार्जशीट के अनुसार आतंकियों ने बैसरन पार्क जैसे सुनसान और रणनीतिक स्थान को जानबूझकर चुना, जहां सुरक्षा व्यवस्था कमजोर थी और कोई सीधा सीसीटीवी कवरेज नहीं था। हमले से पहले आतंकियों ने इलाके की रेकी की और स्थानीय मददगारों के जरिए उन्हें लॉजिस्टिक सपोर्ट मिला। जांच में यह भी सामने आया कि आतंकियों ने पर्यटकों को रोककर उनका धर्म पूछा और जो लोग उनकी मांगों पर खरे नहीं उतरे, उन्हें गोली मार दी गई।

    गवाहों के बयान के अनुसार हमलावर लगातार लोगों से कलमा पढ़ने के लिए कह रहे थे और कई लोगों को बेहद नजदीक से गोली मारी गई। इस दौरान आतंकियों ने बार-बार ऐसे नारे और शब्दों का इस्तेमाल किया जो यह दर्शाते हैं कि उनका उद्देश्य सिर्फ हत्या नहीं बल्कि दहशत फैलाना भी था। जांच में यह भी सामने आया कि आतंकियों ने हमले के दौरान अलग-अलग पोजिशन लेकर पूरे इलाके को घेर लिया था ताकि किसी को भागने का मौका न मिले।

    चार्जशीट में यह भी उल्लेख किया गया है कि आतंकियों ने हमले के लिए आधुनिक हथियारों का इस्तेमाल किया, जिसमें M-4 कार्बाइन और AK-47 शामिल थे। पहले जिपलाइन वाले हिस्से से गोली चलाई गई और उसके बाद पूरे इलाके में अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी गई। कुछ मिनटों में ही पूरा पर्यटन स्थल चीख-पुकार और अफरा-तफरी में बदल गया।

    जांच एजेंसियों ने स्थानीय लोगों और गवाहों से पूछताछ के आधार पर यह भी पाया कि आतंकियों को इलाके की पूरी जानकारी स्थानीय मददगारों से मिली थी। कुछ लोगों ने उन्हें खाना, ठहरने की जगह और मार्गदर्शन तक उपलब्ध कराया, जिससे उन्हें हमला करने में आसानी हुई। बाद में इन्हीं मददगारों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई, जिससे पूरे नेटवर्क की परतें खुलने लगीं।

    चार्जशीट में यह भी दर्ज है कि हमले के बाद आतंकियों ने मौके से भागते समय भी कई लोगों को रोका और उनसे पहचान पूछी। कई गवाहों ने बताया कि आतंकियों का व्यवहार बेहद संगठित और योजनाबद्ध था, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह कोई अचानक की गई वारदात नहीं बल्कि एक बड़ी साजिश का हिस्सा थी।

    इस पूरे मामले में जांच एजेंसियों ने फॉरेंसिक साक्ष्यों, घटनास्थल की मैपिंग और सैकड़ों गवाहों के बयान के आधार पर चार्जशीट तैयार की है। अब यह मामला न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ रहा है, लेकिन इस खुलासे ने एक बार फिर देश को उस दर्दनाक घटना की याद दिला दी है जिसने सुरक्षा और आतंकवाद को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे।

  • MP: कॉल रिकॉर्ड खोलेंगे ट्विशा शर्मा की मौत का राज? 46 मोबाइल नंबर जांच के घेरे में

    MP: कॉल रिकॉर्ड खोलेंगे ट्विशा शर्मा की मौत का राज? 46 मोबाइल नंबर जांच के घेरे में


    भोपाल।
    भोपाल की ट्विशा शर्मा (Twisha Sharma) की मौत से जुड़े मामले में बुधवार को कई अहम घटनाएं सामने आईं. एक तरफ अदालत ने दोबारा पोस्टमार्टम (Post mortem) कराने की याचिका स्वीकार करने से इनकार कर दिया, वहीं दूसरी ओर मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) ने पीड़ित परिवार को आश्वासन दिया कि राज्य सरकार इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपने के लिए औपचारिक पत्र भेजेगी.

    33 वर्षीय ट्विशा शर्मा मॉडलिंग और एक्टिंग से जुड़ी थीं, 12 मई को भोपाल के कटारा हिल्स इलाके में स्थित अपने ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाई गई थीं. परिजनों ने आरोप लगाया है कि विवाह के बाद से उन्हें दहेज को लेकर प्रताड़ित किया जा रहा था और मानसिक व शारीरिक रूप से परेशान किया जाता था.


    46 मोबाइल नंबरों के कॉल डिटेल सुरक्षित रखने की मांग

    इस बीच परिवार ने 46 मोबाइल नंबरों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड, लोकेशन डाटा, व्हाट्सऐप और डिजिटल मेटाडाटा सुरक्षित रखने की भी मांग की है. इसमें परिवार, घरेलू कर्मचारी, ड्राइवर, करीबी सहयोगी और घटना से पहले व बाद में जुड़े लोगों के नंबर शामिल हैं.


    परिवार ने जांच पर उठाए सवाल

    ट्विशा के परिवार ने स्थानीय पुलिस जांच पर सवाल उठाते हुए कहा कि बिना वजह प्रशासनिक देरी से शव खराब हो सकता है और अहम फॉरेंसिक साक्ष्य नष्ट होने का खतरा है. परिवार ने आरोप लगाया कि जमानत पर बाहर मौजूद मुख्य आरोपी गिरिबाला सिंह ने न्यायिक कार्यालय परिसर का उपयोग कर मीडिया से बातचीत की और मृतका के खिलाफ बयान दिए.

    इस पर मृतका के पिता नवनीधि शर्मा ने मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगूभाई सी पटेल को संवैधानिक ज्ञापन सौंपकर गिरिबाला सिंह की अर्ध-न्यायिक पद पर भूमिका की समीक्षा की मांग की है.


    FIR और मेडिकल रिपोर्ट में क्या?

    परिवार ने कहा कि एफआईआर और प्रारंभिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट में ‘एंटीमॉर्टम हैंगिंग’ के साथ शरीर के अन्य हिस्सों पर कई चोटों का भी उल्लेख है. उनका कहना है कि इन तथ्यों ने परिवार के मन में मौत की वास्तविक परिस्थितियों को लेकर गंभीर संदेह पैदा कर दिया है.


    पूर्व सैनिकों का प्रदर्शन

    इसी बीच भोपाल में 50 से अधिक पूर्व सैनिक मोटरसाइकिल रैली निकालकर ट्विशा शर्मा को न्याय दिलाने और मामले की जांच मध्य प्रदेश से बाहर कराने की मांग करते नजर आए. उल्लेखनीय है कि ट्विशा शर्मा के भाई भारतीय सेना में मेजर हैं।

  • हाई-प्रोफाइल नीट पेपर लीक केस: शुभम खैरनार CBI हिरासत में, बाकी आरोपियों की न्यायिक हिरासत 2 जून तक

    हाई-प्रोफाइल नीट पेपर लीक केस: शुभम खैरनार CBI हिरासत में, बाकी आरोपियों की न्यायिक हिरासत 2 जून तक


    नई दिल्ली। नीट यूजी 2026 पेपर लीक मामला देशभर में सुर्खियों में बना हुआ है। इस हाई-प्रोफाइल जांच में सीबीआई लगातार सक्रिय है और मुख्य आरोपी शुभम खैरनार की कस्टडी को पांच दिन के लिए बढ़ा दिया गया है। अदालत ने मामले में गिरफ्तार बाकी पांच आरोपियों को 2 जून तक न्यायिक हिरासत में भेजा है। इस मामले की जांच दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट में चल रही है।

    इस घटना के बाद, कुल छह आरोपियों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया। ये आरोपियों महाराष्ट्र, राजस्थान और हरियाणा से जुड़े हुए हैं। मुख्य आरोपी नासिक निवासी शुभम खैरनार के अलावा जयपुर के मांगीलाल बिवाल, विकास बिवाल और दिनेश बिवाल, गुरुग्राम के यश यादव और महाराष्ट्र के अहिल्या नगर निवासी धनंजय लोखंडे शामिल हैं।

    सीबीआई ने अदालत से शुभम खैरनार की कस्टडी बढ़ाने की मांग की। एजेंसी ने यह बताया कि अन्य गिरफ्तार आरोपियों के साथ उसका सामना कराना जरूरी है और इलेक्ट्रॉनिक सबूतों के आधार पर उससे आगे भी पूछताछ होनी है। साथ ही जांच एजेंसी ने कहा कि मामले में और रिकवरी की आवश्यकता है और शुभम खैरनार को महाराष्ट्र लेकर जांच के सिलसिले में ले जाना पड़ेगा।

    अदालत ने बाकी पांच आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। मांगीलाल बिवाल, विकास बिवाल, दिनेश बिवाल, यश यादव और धनंजय लोखंडे अब 2 जून तक हिरासत में रहेंगे। इस दौरान सीबीआई उनके खिलाफ चल रही जांच को आगे बढ़ा सकेगी और नेटवर्क की पूरी जानकारी जुटा सकेगी।

    वहीं, शुभम खैरनार के वकील ने सीबीआई की कस्टडी बढ़ाने की मांग का विरोध किया। बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि सात दिन की पूछताछ के दौरान एजेंसी को क्या जानकारी मिली, उसे स्पष्ट करना चाहिए। इसके बावजूद अदालत ने सीबीआई की मांग को स्वीकार कर उनके रिमांड को बढ़ा दिया।

    नीट UG 2026 पेपर लीक मामले में लगातार हुई गिरफ्तारियों और पूछताछ के बीच यह स्पष्ट हो गया है कि जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क और इससे जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं। देशभर में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है, और आगे की जांच की दिशा पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

  • भारत में आतंकी मिशन छोड़ मेकओवर में उलझे लश्कर के आतंकी, स्लीपर सेल प्लान बीच में रह गया अधूरा!

    भारत में आतंकी मिशन छोड़ मेकओवर में उलझे लश्कर के आतंकी, स्लीपर सेल प्लान बीच में रह गया अधूरा!

    नई दिल्ली । भारत में आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने की साजिश के बीच एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े दो आतंकियों की प्राथमिकता उनका मिशन नहीं बल्कि उनका लुक और व्यक्तिगत दिखावट बन गई। इन दोनों आतंकियों की योजना भारत में घुसपैठ कर स्लीपर सेल नेटवर्क तैयार करने की थी, लेकिन जांच से जुड़े तथ्यों के अनुसार उनका ध्यान अपने उद्देश्य से हटकर निजी इच्छाओं की ओर चला गया, जिससे पूरा ऑपरेशन प्रभावित हो गया।

    पहला आतंकी उस्मान जट्ट पाकिस्तान से भारत में घुसा था और उसका मकसद देश के भीतर एक संगठित नेटवर्क तैयार करना था, जो भविष्य में बड़ी आतंकी गतिविधियों को अंजाम दे सके। लेकिन भारत में आने के बाद उसने अपने मिशन को प्राथमिकता देने के बजाय अपने रूप-रंग में बदलाव पर ध्यान देना शुरू कर दिया। बताया जाता है कि वह श्रीनगर में स्थित एक निजी क्लिनिक पहुंचा और वहां हेयर ट्रांसप्लांट जैसी प्रक्रिया करवाई। इस प्रक्रिया में समय और ध्यान लगाने के कारण उसका मूल उद्देश्य पीछे छूटता चला गया और उसकी गतिविधियां संदेह के घेरे में आ गईं।

    इसी तरह एक अन्य आतंकी शब्बीर अहमद लोन भी इसी नेटवर्क से जुड़ा हुआ बताया गया है, जिसका काम भारत और आसपास के क्षेत्रों में एक स्लीपर सेल तैयार करना था। लेकिन जांच में सामने आया कि वह भी अपने काम से भटक गया और अपने स्वास्थ्य तथा व्यक्तिगत लुक से जुड़ी प्रक्रियाओं में उलझ गया। वह इलाज और डेंटल ट्रीटमेंट के लिए कई स्थानों पर गया, जिनमें एक निजी चिकित्सा केंद्र भी शामिल बताया जाता है। इस दौरान उसका ध्यान लगातार अपने मिशन से हटता गया और उसकी गतिविधियां सामान्य संदिग्ध व्यवहार से अलग दिखने लगीं।

    सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, यह मामला केवल व्यक्तिगत लापरवाही का नहीं बल्कि एक बड़ी विफल योजना का संकेत देता है, जिसमें आतंकी संगठन अपने सदस्यों को अनुशासित रखने में सफल नहीं हो पाया। आधुनिक समय में जहां सुरक्षा एजेंसियां लगातार निगरानी बढ़ा रही हैं, वहीं ऐसे मिशन में शामिल लोगों का भटक जाना पूरी साजिश को कमजोर कर देता है।

    जांच से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि यह घटनाक्रम इस बात का भी संकेत देता है कि आतंकियों की योजनाएं केवल हथियारों और नेटवर्क पर ही निर्भर नहीं होतीं, बल्कि उनकी मानसिक स्थिति और व्यक्तिगत प्राथमिकताएं भी उनके मिशन की सफलता या विफलता को प्रभावित कर सकती हैं। इस मामले ने सुरक्षा तंत्र को भी सतर्क कर दिया है कि घुसपैठ के बाद संदिग्ध गतिविधियों पर लगातार नजर रखना कितना आवश्यक है।

    फिलहाल दोनों मामलों की गहन जांच जारी है और एजेंसियां यह समझने की कोशिश कर रही हैं कि आखिर कैसे ये आतंकी अपने मूल उद्देश्य से इतनी आसानी से भटक गए। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर सुरक्षा व्यवस्था और आतंकी नेटवर्क की अंदरूनी कमजोरियों को उजागर कर दिया है।

  • हैदराबाद में शर्मनाक वारदात: चाय के बहाने कार में घुमाया, फिर क्लासमेट को जबरन शराब पिलाकर बीटेक छात्र ने किया दुष्कर्म, आरोपी सलाखों के पीछे

    हैदराबाद में शर्मनाक वारदात: चाय के बहाने कार में घुमाया, फिर क्लासमेट को जबरन शराब पिलाकर बीटेक छात्र ने किया दुष्कर्म, आरोपी सलाखों के पीछे

    नई दिल्ली /हैदराबाद: महानगर के शैक्षणिक हलकों को झकझोर देने वाली एक बेहद संवेदनशील और गंभीर घटना में पुलिस ने एक तकनीकी संस्थान के छात्र को अपनी ही सहपाठी के साथ कथित तौर पर दुष्कर्म करने के आरोप में गिरफ्तार किया है। पीड़ित युवती और आरोपी दोनों ही क्षेत्र के एक प्रतिष्ठित कॉलेज से बीटेक की पढ़ाई कर रहे हैं और एक ही कक्षा में होने के कारण दोनों के बीच सामान्य जान-पहचान थी। इसी परिचय का फायदा उठाकर आरोपी ने इस घिनौनी वारदात को अंजाम दिया। पुलिस प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित कार्रवाई की और पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए कानूनी प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया है।

    घटनाक्रम के अनुसार, यह पूरी वारदात बीते सप्ताह की रात को घटित हुई थी। आरोपी छात्र पीड़िता को उसके घर के पास से महज चाय पीने और साथ घूमने के बहाने अपनी कार में बिठाकर ले गया था। वह काफी देर तक युवती को कार में इधर-उधर घुमाता रहा, जिससे पीड़िता को उसकी वास्तविक और दुर्भावनापूर्ण मंशा का जरा भी अंदाजा नहीं हुआ। वापसी के दौरान आरोपी ने बीच रास्ते में गाड़ी रोककर शराब खरीदी। इसके बाद उसने कार के भीतर ही खुद भी शराब का सेवन किया और युवती को भी जबरन अत्यधिक मात्रा में शराब पीने पर मजबूर कर दिया। युवती के विरोध को दरकिनार करते हुए उसे पूरी तरह नशे की हालत में ला दिया गया।

    जब पीड़िता अत्यधिक नशे के कारण खुद को संभालने की स्थिति में नहीं रही, तब आरोपी उसे इब्राहिमपटनम इलाके में स्थित एक सुनसान कमरे पर लेकर गया। वहां उसने युवती की बेबसी का फायदा उठाते हुए उसके साथ जबरन दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया। होश में आने और घटना की भयावहता को समझने के बाद, बीस वर्षीय पीड़िता ने हिम्मत दिखाई और सीधे स्थानीय पुलिस थाने पहुंचकर अपने साथ हुई इस बर्बरता की लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने पीड़िता की मानसिक और शारीरिक स्थिति को समझते हुए तुरंत उसकी शिकायत के आधार पर संबंधित कानूनी धाराओं के तहत मामला पंजीकृत कर लिया।

    मामला दर्ज होते ही स्थानीय पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया और वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर एक विशेष टीम का गठन कर आरोपी की तलाश शुरू कर दी गई। पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए आरोपी छात्र को चौबीस घंटे के भीतर धर दबोचा। शुरुआती पूछताछ और प्राथमिक जांच के बाद आरोपी को स्थानीय अदालत के समक्ष पेश किया गया, जहां से विद्वान न्यायाधीश ने उसे न्यायिक हिरासत के तहत जेल भेजने का आदेश जारी कर दिया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून के तहत सख्त से सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है और मामले से जुड़े तमाम वैज्ञानिक व परिस्थितिजन्य साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं ताकि आरोपी को कड़ी सजा मिल सके।

  • NEET UG 2026 पेपर लीक: जांच में बड़ा खुलासा, 150 से ज्यादा छात्रों के नाम आए सामने

    NEET UG 2026 पेपर लीक: जांच में बड़ा खुलासा, 150 से ज्यादा छात्रों के नाम आए सामने


    नई दिल्ली ।
    देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG 2026 एक बड़े विवाद के केंद्र में आ गई है। पेपर लीक से जुड़े मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए और चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। ताजा जानकारी के अनुसार जांच एजेंसियों को अब तक 150 से अधिक अभ्यर्थियों की पहचान मिली है, जिन्हें कथित रूप से लीक हुआ प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया गया था।

    जांच में यह संकेत मिले हैं कि यह पूरा मामला किसी एक जगह तक सीमित नहीं था, बल्कि एक सुनियोजित और संगठित नेटवर्क के माध्यम से इसे कई राज्यों में फैलाया गया। शुरुआती कड़ी महाराष्ट्र से जुड़ती नजर आई, जहां से प्रश्नपत्र के बाहर आने की बात सामने आई, जिसके बाद यह हरियाणा और अन्य राज्यों तक पहुंचा।

    सूत्रों के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क में कई बिचौलियों की भूमिका भी सामने आई है, जिन्होंने प्रश्नपत्र को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने का काम किया। आरोप है कि डिजिटल माध्यमों और कुछ एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग सिस्टम के जरिए प्रश्नपत्र साझा किया गया, जिससे इसकी पहचान और ट्रैकिंग कठिन हो गई।

    जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ स्थानों पर छात्रों को परीक्षा की तैयारी के नाम पर ऐसे प्रश्न दिए गए, जो असली प्रश्नपत्र से काफी हद तक मेल खाते थे। कई मामलों में प्रश्नों की संरचना, भाषा और पैटर्न लगभग समान पाए गए, जिससे यह संदेह और मजबूत हुआ कि पेपर पहले से ही लीक हो चुका था।

    इसके अलावा, कुछ एजेंटों और मध्यस्थों की भूमिका भी जांच के घेरे में है, जो कथित रूप से छात्रों तक प्रश्नपत्र पहुंचाने और आर्थिक लेन-देन में शामिल थे। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह नेटवर्क कई स्तरों पर काम कर रहा था, जिसमें अलग-अलग राज्यों के लोग जुड़े हुए थे।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए परीक्षा को रद्द कर दिया गया है। इस निर्णय के बाद देशभर के लाखों छात्रों पर बड़ा असर पड़ा है, जिन्होंने महीनों तक इस परीक्षा की तैयारी की थी। परीक्षा रद्द होने से छात्रों में निराशा और नाराजगी दोनों देखने को मिल रही है।

    इसी बीच, मामला अब न्यायिक प्रक्रिया तक पहुंच गया है। परीक्षा को दोबारा कराने और पूरी प्रक्रिया की निगरानी किसी स्वतंत्र व्यवस्था के तहत करने की मांग की जा रही है। इसके साथ ही परीक्षा आयोजित करने वाली व्यवस्था की संरचना और कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।

    जांच एजेंसियां अब पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं और यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि पेपर सबसे पहले कैसे बाहर आया और किन-किन स्तरों पर इसे आगे बढ़ाया गया। कई स्थानों पर पूछताछ और कार्रवाई भी जारी है।

    यह पूरा मामला न केवल परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा पर सवाल खड़ा कर रहा है, बल्कि यह भी दिखा रहा है कि आधुनिक तकनीक के दौर में पेपर लीक जैसे मामलों को रोकना कितना चुनौतीपूर्ण हो गया है। अब सभी की नजरें आगे की जांच और अंतिम निष्कर्ष पर टिकी हुई हैं।

  • यूपी में बड़ा खुलासा: सोशल मीडिया और विदेशी नेटवर्क के जरिए युवाओं के ब्रेनवॉश का खतरनाक मॉडल सामने आया

    यूपी में बड़ा खुलासा: सोशल मीडिया और विदेशी नेटवर्क के जरिए युवाओं के ब्रेनवॉश का खतरनाक मॉडल सामने आया



    नई दिल्ली। यूपी में पिछले कुछ वर्षों में एटीएस और पुलिस की जांचों के दौरान एक ऐसा गंभीर और जटिल पैटर्न सामने आया है, जिसमें सोशल मीडिया, हनीट्रैप, आर्थिक लालच और विदेशी फंडिंग के जरिए युवाओं को पहले प्रभावित किया गया और फिर कथित रूप से उन्हें अवैध गतिविधियों में इस्तेमाल करने की कोशिश की गई। जांच एजेंसियों के अनुसार यह पूरा नेटवर्क एक संगठित तरीके से काम करता है, जिसमें डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल करके ब्रेनवॉश और संपर्क स्थापित किए जाते हैं।

    रिपोर्ट्स और जांचों के मुताबिक कुछ मामलों में यह भी सामने आया है कि इस नेटवर्क में ऐसे युवाओं को शामिल किया गया जिनकी पहचान बदलकर या फर्जी नामों के जरिए उन्हें आगे इस्तेमाल किया गया। एटीएस की कार्रवाई में कुछ ऐसे मॉड्यूल पकड़े गए हैं जिनमें धर्मांतरण से जुड़े मामलों के साथ-साथ संदिग्ध विदेशी संपर्क और फंडिंग के संकेत मिले हैं।

    वर्ष 2021 में उत्तर प्रदेश में एक बड़ा मामला सामने आया था, जिसमें उमर गौतम और मुफ्ती काजी जहांगीर आलम कासमी की गिरफ्तारी हुई थी। आरोप था कि ये लोग विदेशी फंडिंग के जरिए ट्रस्ट और संस्थानों के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को विभिन्न प्रलोभन देकर कथित रूप से धर्मांतरण गतिविधियों में शामिल कर रहे थे। इसी तरह मौलाना कलीम सिद्दीकी का नाम भी एक अलग मामले में सामने आया था, जिसमें जांच एजेंसियों ने अवैध नेटवर्क से जुड़े आरोप लगाए थे।

    हाल के वर्षों में बलरामपुर और आगरा जैसे जिलों में भी इसी तरह के अलग-अलग मामले सामने आए हैं, जहां सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों के जरिए संपर्क बनाकर लोगों को प्रभावित करने और कट्टरपंथी सामग्री तक पहुंचाने की बात जांच में सामने आई है। कुछ मामलों में विदेश से फंडिंग और संपर्क के संकेत भी जांच एजेंसियों द्वारा बताए गए हैं, हालांकि हर केस की कानूनी प्रक्रिया अभी जारी है।

    जांच एजेंसियों के अनुसार ऐसे नेटवर्क आमतौर पर तीन चरणों में काम करते हैं—पहला भावनात्मक या डिजिटल संपर्क, दूसरा आर्थिक या सामाजिक प्रलोभन, और तीसरा विचारधारा आधारित प्रभाव। इसके लिए टेलीग्राम, इंस्टाग्राम और अन्य मैसेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है।

    एटीएस का कहना है कि यह एक गंभीर सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है, जिसकी जांच लगातार जारी है और कई मामलों में गिरफ्तारियां और पूछताछ की प्रक्रिया चल रही है। हालांकि, हर मामले में निष्कर्ष अदालत और विस्तृत जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

  • MP: इंदौर में रोड पर लावारिश पड़े मिले 3 बैगों से 2.83 करोड़ रुपये कैश बरामद, जांच में जुटी पुलिस

    MP: इंदौर में रोड पर लावारिश पड़े मिले 3 बैगों से 2.83 करोड़ रुपये कैश बरामद, जांच में जुटी पुलिस


    इंदौर।
    मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) में इंदौर (Indore) के सांवेर-उज्जैन रोड (Sanwer-Ujjain Road) पर गुरुवार सुबह उस वक्त हड़कंप मच गया, जब सड़क किनारे पड़े तीन लावारिस बैगों (Unclaimed bags) से करोड़ों रुपये की संदिग्ध नकदी बरामद हुई. बैगों में 500 रुपये के नोटों की सैकड़ों गड्डियां मिलीं, लेकिन जांच में सामने आया कि कई गड्डियों में असली नोटों के साथ नकली नोट और रंगीन कागज भी रखे गए थे।

    सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी. दरअसल इंदौर जिले के सांवेर-उज्जैन रोड स्थित भुट्टा चौराहे के पास गुरुवार सुबह एक संदिग्ध मामला सामने आया. सड़क किनारे पेड़ के नीचे रखे तीन लावारिस बैगों को देखकर स्थानीय किसान को शक हुआ, जिसके बाद उसने पुलिस को सूचना दी।

    सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और बैगों को कब्जे में लेकर जांच शुरू की. जब बैग खोले गए तो उनके अंदर 500 रुपये के नोटों की बड़ी संख्या में गड्डियां मिलीं. शुरुआती अनुमान के मुताबिक कुल रकम करीब 2 करोड़ 83 लाख रुपये बताई जा रही है. हालांकि जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि गड्डियों के ऊपर रखे कुछ नोट असली दिखाई दे रहे थे, लेकिन अंदर नकली नोटों के साथ रंगीन सादे कागज भरे गए थे।

    आशंका जताई जा रही है कि किसी बड़ी ठगी या अवैध लेनदेन के लिए इन बैगों को तैयार किया गया होगा. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने आसपास के इलाके की घेराबंदी कर जांच शुरू कर दी है. हाईवे और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले जा रहे हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि बैग वहां कौन छोड़कर गया और इसके पीछे क्या मकसद था. फिलहाल पुलिस ने संदिग्ध नोटों को जब्त कर लिया है और पूरे मामले की विस्तृत जांच जारी है।

  • किसानों के पैसे पर हाथ साफ, 41 लाख के घोटाले में 4 गिरफ्तार, 35 लाख जमीन में छिपाए मिले

    किसानों के पैसे पर हाथ साफ, 41 लाख के घोटाले में 4 गिरफ्तार, 35 लाख जमीन में छिपाए मिले


    भोपाल । मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में सहकारी समिति से जुड़े एक बड़े वित्तीय घोटाले का खुलासा हुआ है, जहां करीब 41 लाख रुपए के गबन के मामले में पुलिस ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह पूरा मामला ईटखेड़ी थाना क्षेत्र के अंतर्गत प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति रायपुर से जुड़ा है, जहां किसानों से वसूली गई रकम में भारी गड़बड़ी सामने आई।

    जानकारी के अनुसार 26 और 27 मार्च को किसानों से लगभग 41 लाख 94 हजार रुपए की ऋण वसूली की गई थी। लेकिन इस राशि को बैंक या समिति के खाते में जमा करने के बजाय उसमें हेरफेर कर दिया गया। 2 अप्रैल को जब मामले की शिकायत समिति के प्रशासक रामचरण सिलावट ने दर्ज कराई तो पूरे मामले की जांच शुरू हुई।

    पुलिस ने शिकायत के बाद विशेष टीम का गठन किया और जांच को आगे बढ़ाते हुए बड़े पैमाने पर सीसीटीवी फुटेज खंगाले। करीब 100 से अधिक कैमरों की रिकॉर्डिंग की जांच के बाद पुलिस को अहम सुराग मिले, जिसके आधार पर चार संदिग्धों को हिरासत में लिया गया। पूछताछ के दौरान चारों आरोपियों ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया।

    जांच में चौंकाने वाला खुलासा तब हुआ जब आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने जमीन में गाड़ी गई एक लोहे की पेटी से भारी मात्रा में नकदी बरामद की। बताया जा रहा है कि लगभग 35 लाख रुपए इसी तरह जमीन में छिपाकर रखे गए थे। इसके अलावा कुल 33 लाख 46 हजार 430 रुपए की नगद बरामदगी पुलिस ने की है।

    पुलिस अधिकारियों के मुताबिक इस घोटाले में अभी और लोग भी शामिल हो सकते हैं, जिसकी जांच जारी है। गिरफ्तार आरोपियों से लगातार पूछताछ की जा रही है और नरेश नागर नाम के एक अन्य व्यक्ति को हिरासत में लेकर भी पूछताछ की गई है।

    इस पूरे मामले ने सहकारी समितियों की कार्यप्रणाली और वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। किसानों की मेहनत की कमाई में हुई इस तरह की गड़बड़ी ने स्थानीय स्तर पर भी नाराजगी बढ़ा दी है। पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि गबन की योजना कितने समय से चल रही थी और इसमें किन किन लोगों की भूमिका रही है।

  • TCS धर्म परिवर्तन मामले में जांच का दायरा बढ़ा…. फरार HR मैनेजर निदा खान की तलाश तेज

    TCS धर्म परिवर्तन मामले में जांच का दायरा बढ़ा…. फरार HR मैनेजर निदा खान की तलाश तेज


    नासिक।
    टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) (Tata Consultancy Services – TCS) में यौन उत्पीड़न और धर्म परिवर्तन मामले में जांच का दायरा अब राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच गया है। मामले की गंभीरता और इसके संभावित अंतरराष्ट्रीय संबंधों को देखते हुए गठित विशेष जांच दल ने अब राज्य खुफिया विभाग (एसआईडी) (State Intelligence Department – SID)), आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) (Anti-Terrorism Squad -ATS) और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) से तकनीकी सहायता मांगी है। उधर, जांच एजेंसियों ने फरार एचआर मैनेजर निदा खान की तलाश तेज कर दी है। 

    पुलिस आयुक्त संदीप कार्णिक ने बताया कि आरोपियों के संपर्कों और गतिविधियों की गहन छानबीन के लिए जांच एजेंसियों को पत्र लिखकर सभी विवरण सौंप दिए गए हैं। अब तक कर्मचारियों की शिकायतों के आधार पर नौ एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। इनमें यौन उत्पीड़न, धमकी देकर बार-बार शारीरिक संबंध बनाने और जबरन धर्म परिवर्तन कराने जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। पुलिस ने मामले में अब तक छह कर्मचारियों और यूनिट ऑपरेशन मैनेजर अश्विनी चैनानी को गिरफ्तार किया है, जो 28 अप्रैल तक पुलिस कस्टडी में हैं। हालांकि, मुख्य साजिशकर्ता एचआर मैनेजर निदा खान अभी भी फरार है।

    सुरक्षा के चलते वर्क फ्रॉम होम के निर्देश
    मामले के तूल पकड़ने के बाद टीसीएस ने नासिक कार्यालय में बिजनेस प्रोसेसिंग आउटसोर्सिंग (बीपीओ) का परिचालन अस्थाई रूप से बंद कर दिया है। कंपनी ने सभी कर्मचारियों को अगले आदेश तक घर से काम करने के निर्देश दिए हैं। कंपनी सूत्रों का कहना है कि यह निर्णय कर्मचारियों की सुरक्षा और सुविधा को प्राथमिकता देते हुए लिया गया है।