Tag: Iran

  • ईरान का 7 दिन का प्लान ट्रंप ने ठुकराया, नवंबर के बाद फिर हमले की आशंका

    ईरान का 7 दिन का प्लान ट्रंप ने ठुकराया, नवंबर के बाद फिर हमले की आशंका


    नई दिल्ली। ईरान ने अमेरिका के सामने तनाव कम करने के लिए 7 दिन का प्रस्ताव रखा था, जिसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने और परमाणु मुद्दे पर बातचीत फिर शुरू करने की पेशकश की गई थी। इसके बदले ईरान ने अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाने, तेल बिक्री प्रतिबंधों में राहत और लेबनान को शामिल करते हुए युद्धविराम की मांग की थी। अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, नवंबर के मिडटर्म चुनाव के बाद ईरान पर दोबारा अमेरिकी हमले की संभावना जताई गई है।

    ईरान ने रखा था सात दिन का फॉर्मूला

    ईरान का प्रस्ताव कतर के जरिए अमेरिका तक पहुंचाया गया था। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा था कि अमेरिका यदि प्रस्ताव स्वीकार करता है तो सात दिन की समयसीमा उसी दिन से शुरू हो जाएगी। उनका कहना था कि इसके लिए जरूरी तैयारियां पहले ही पूरी की जा चुकी हैं।

    प्रस्ताव के तहत ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने के लिए तैयार था। इसके साथ ही दोनों देशों के बीच परमाणु मुद्दे पर बातचीत दोबारा शुरू करने की बात कही गई थी।

    इसके बदले ईरान ने अमेरिका के सामने तीन शर्तें रखी थीं—

    ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाई जाए।
    ईरान के तेल की बिक्री पर लगे प्रतिबंधों में छूट दी जाए।
    ऐसा युद्धविराम लागू किया जाए, जिसमें लेबनान भी शामिल हो।

    अराघची के मुताबिक, अमेरिका इन कदमों को चार से पांच दिन में पूरा कर सकता था। इसके बाद छठे दिन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने और सातवें दिन अमेरिका के साथ बातचीत दोबारा शुरू करने का प्रस्ताव था।

    ट्रंप ने क्यों ठुकराया प्रस्ताव?

    वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि ट्रंप ने ईरान के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया है। ट्रंप को भरोसा नहीं है कि ईरान उनकी मांगों को पूरा करेगा। इसी वजह से उन्होंने अपने सहयोगियों से कहा है कि नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनाव के बाद ईरान के खिलाफ दोबारा बमबारी शुरू हो सकती है।

    हालांकि, रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि अगर अमेरिका दोबारा हमला करता है तो उसका स्तर कितना बड़ा होगा।

    रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप फिलहाल बड़े सैन्य अभियान को लेकर पूरी तरह तैयार नजर नहीं आ रहे हैं। इसकी एक वजह अमेरिका के हथियारों का घटता भंडार बताया गया है। अमेरिका अपने हथियारों को दूसरी संभावित सैन्य जरूरतों के लिए भी बचाकर रखना चाहता है।

    अराघची बोले- अब फैसला अमेरिका के हाथ में

    ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा था कि अब फैसला अमेरिका को करना है। उनका कहना था कि ईरान दबाव, धमकी या डराने की कोशिश के आगे अपने संप्रभु अधिकारों से पीछे नहीं हटेगा।

    इस बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजश्कियान ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के रुख का स्वागत किया है। उन्होंने बातचीत के जरिए मतभेदों को सुलझाने के समर्थन के लिए शी का शुक्रिया अदा किया।

    बातचीत और सैन्य कार्रवाई के बीच अटका मामला

    फिलहाल ईरान ने तनाव कम करने के लिए सात दिन का रास्ता सामने रखा है, लेकिन ट्रंप ने इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया है। अमेरिका को ईरान की ओर से अपनी मांगें पूरी किए जाने पर संदेह है। दूसरी ओर, नवंबर के मिडटर्म चुनाव के बाद ईरान पर दोबारा अमेरिकी हमले की संभावना सामने आई है।

    ऐसे में आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का रास्ता खुलता है या तनाव फिर सैन्य कार्रवाई की ओर बढ़ता है, यह ट्रंप के अगले रुख पर निर्भर करेगा।

  • ट्रंप नाकाबंदी हटाएंगे तो 7 दिन में खुल सकता है होर्मुज स्ट्रेट… ईरान ने दिए संकेत

    ट्रंप नाकाबंदी हटाएंगे तो 7 दिन में खुल सकता है होर्मुज स्ट्रेट… ईरान ने दिए संकेत


    न्यूयॉर्क।
    संयुक्त राष्ट्र महासभा (United Nations General Assembly) के दौरान ईरान और अमेरिका (Iran and America) के बीच बातचीत की कोशिशों के बीच होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) को लेकर बड़ा बयान सामने आया है. एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने कहा है कि अगर अमेरिका सैन्य दबाव कम करता है और ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी हटाता है तो ईरान 7 दिनों के भीतर होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोल सकता है. ईरान ने यह प्रस्ताव अमेरिका तक मध्यस्थों के जरिए पहले ही पहुंचाया है।

    ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ के साथ बातचीत में होर्मुज को लेकर तेहरान की शर्तें रखीं. ईरानी पक्ष के मुताबिक, इनमें अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाना, ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियां जारी करना और सभी मोर्चों पर जंग खत्म करना शामिल है. ईरानी प्रतिनिधिमंडल को न्यूयॉर्क में बातचीत आगे बढ़ाने का अधिकार भी दिया गया है।


    गल्फ देशों ने भी बढ़ाई बातचीत की कोशिश

    होर्मुज को लेकर कूटनीतिक कोशिशें सिर्फ ईरान और अमेरिका तक सीमित नहीं हैं. कतर ने कहा है कि वह पाकिस्तान के साथ मिलकर तेहरान और वॉशिंगटन के बीच बातचीत का रास्ता खोलने की कोशिश कर रहा है. सऊदी अरब, मिस्र, पाकिस्तान और तुर्की ने भी बातचीत और कूटनीति का समर्थन किया है।

    अराघची ने न्यूयॉर्क में कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान अल थानी से मुलाकात की. वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गल्फ देशों के नेताओं के साथ बैठक की. ट्रंप ने कहा कि अमेरिका सभी पक्षों की बात सुन रहा है और ईरान के साथ समझौते की दिशा में बातचीत आगे बढ़ सकती है।


    बातचीत के बीच जारी है सैन्य दबाव

    हालांकि बातचीत की कोशिशों के साथ दोनों तरफ से सख्त बयान भी जारी हैं. ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र में अपने संबोधन के दौरान ईरान को लेकर दबाव बढ़ाने की अपील की और बाद में तेहरान से जल्द फैसला लेने को कहा।

    ईरान की तरफ से भी होर्मुज को लेकर साफ संकेत दिए गए हैं कि यह उसके लिए बातचीत में एक अहम मुद्दा है. ईरानी संसद के डिप्टी स्पीकर अली निकजाद ने कहा कि बातचीत अब होर्मुज से जुड़ गई है और ईरान स्ट्रेट को लेकर पीछे नहीं हटेगा।

    यानी न्यूयॉर्क में चल रही कूटनीतिक हलचल के बीच होर्मुज स्ट्रेट अब ईरान-अमेरिका बातचीत का सबसे अहम मुद्दा बनता दिख रहा है. ईरान ने इसे खोलने के लिए 7 दिन का संकेत दिया है, लेकिन इसके लिए अमेरिका को पहले सैन्य दबाव कम करने और ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी हटाने जैसी शर्तें माननी होंगी।

  • ट्रंप की ईरान को ‘नेस्तनाबूद’ करने की धमकी पर तेहरान का जवाब, कहा- हमला हुआ तो देंगे और भी कड़ा जवाब

    ट्रंप की ईरान को ‘नेस्तनाबूद’ करने की धमकी पर तेहरान का जवाब, कहा- हमला हुआ तो देंगे और भी कड़ा जवाब


    नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र महासभा में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को दी गई कड़ी चेतावनी के बाद दोनों देशों के बीच तनाव फिर बढ़ गया है। ट्रंप ने कहा कि अगर ईरान के साथ समझौता नहीं होता है तो अमेरिका उसके खिलाफ और कड़ी सैन्य कार्रवाई कर सकता है। इसके जवाब में ईरान के सशस्त्र बलों के जनरल स्टाफ और खातम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर ने संयुक्त बयान जारी कर किसी भी हमले की स्थिति में बेहद कड़ी प्रतिक्रिया की चेतावनी दी है।

    ईरानी सैन्य कमांड ने ट्रंप के UNGA भाषण को ‘प्रोपेगेंडा’ बताया और कहा कि अमेरिकी धमकियों से ईरान की सैन्य तैयारी या उसके आकलन में कोई बदलाव नहीं आएगा। बयान के मुताबिक, किसी नए हमले की स्थिति में ईरान हमलावरों के खिलाफ पहले से अधिक गंभीर, विनाशकारी और अप्रत्याशित जवाब देने के लिए तैयार है।

    ट्रंप ने UNGA में क्या कहा?

    ट्रंप ने मंगलवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि ईरान को लेकर उनके सामने एक बड़ा फैसला है। उन्होंने एक समझौते की संभावना का जिक्र करते हुए कहा कि अगर डील होती है तो ईरान के पुनर्निर्माण का रास्ता खुल सकता है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ तो उन्होंने इस्लामिक रिपब्लिक को ‘नेस्तनाबूद’ करने की धमकी दी।

    अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान पर परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिश का आरोप भी लगाया। ईरान इन आरोपों को खारिज करता रहा है। ट्रंप ने अपने भाषण में ईरान पर दबाव बनाए रखने और बातचीत के जरिए समझौते की संभावना दोनों का संकेत दिया।

    धमकी के बीच बातचीत का रास्ता भी खुला

    एक ओर अमेरिका और ईरान के बीच बयानबाजी तेज हुई है, तो दूसरी ओर कूटनीतिक संपर्क भी जारी है। अमेरिकी राष्ट्रपति के दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर ने मंगलवार को ईरानी प्रतिनिधियों के साथ करीब तीन घंटे बातचीत की। यह वार्ता संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान मध्यस्थों के जरिए हुई। विटकॉफ ने कहा कि मध्यस्थ पूरे दिन दोनों पक्षों के बीच संपर्क कराते रहे और बातचीत को रचनात्मक एवं उम्मीद जगाने वाला बताया।

    ट्रंप ने भी इस बैठक को ‘बहुत अच्छी’ बताया, हालांकि उन्होंने कहा कि इसमें ईरान की ओर से उच्चतम स्तर के अधिकारी शामिल नहीं थे। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी कहा था कि ट्रंप ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान से मुलाकात के लिए तैयार हैं, बशर्ते बातचीत से सकारात्मक नतीजे की संभावना हो।

    ईरानी राष्ट्रपति के UNGA संबोधन पर नजर

    ईरानी सैन्य बयान में अमेरिकी प्रतिबंधों और दबाव का भी जिक्र किया गया। तेहरान ने इन कदमों को आर्थिक दबाव बढ़ाने की कोशिश बताया और कहा कि ऐसी धमकियों से उसका रुख नहीं बदलेगा।

    इस बीच ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान UNGA में हिस्सा लेने न्यूयॉर्क पहुंच चुके हैं। ऐसे में उनके संबोधन पर भी नजर है। अमेरिका की ओर से सैन्य कार्रवाई की चेतावनी और दूसरी तरफ मध्यस्थों के जरिए चल रही बातचीत ने ईरान-अमेरिका टकराव के बीच कूटनीतिक प्रयासों को भी अहम बना दिया है।

  • ईरान-अमेरिका तनाव और कच्चे तेल की कीमतों के बीच घरेलू आंकड़े तय करेंगे अगले हफ्ते बाजार की दिशा

    ईरान-अमेरिका तनाव और कच्चे तेल की कीमतों के बीच घरेलू आंकड़े तय करेंगे अगले हफ्ते बाजार की दिशा

    नई दिल्ली । भारतीय शेयर बाजार के लिए 22 सितंबर से शुरू होने वाला अगला कारोबारी सप्ताह कई वैश्विक और घरेलू घटनाक्रमों के लिहाज से महत्वपूर्ण रहने वाला है। निवेशकों की नजर मध्यपूर्व में ईरान-अमेरिका तनाव, कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिकी टैरिफ से जुड़े फैसलों, बॉन्ड यील्ड, रुपये की चाल और घरेलू आर्थिक आंकड़ों पर रहेगी। इन संकेतकों में होने वाले बदलाव का असर बाजार के उतार-चढ़ाव पर दिखाई दे सकता है।

    मध्यपूर्व में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बाजार के लिए प्रमुख वैश्विक जोखिमों में बना हुआ है। इस क्षेत्र से जुड़ी किसी भी नई खबर का असर निवेशकों की धारणा पर पड़ सकता है। खासकर कच्चे तेल की कीमतों में तेज बदलाव का असर भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

    अमेरिकी टैरिफ से जुड़े घटनाक्रम भी भारतीय बाजार के लिए अहम रहेंगे। अमेरिका में रूस पर प्रतिबंध लगाने से संबंधित एक विधेयक को प्रतिनिधि सभा से मंजूरी मिलने के बाद इस पर नजर बनी हुई है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है।

    इस तरह के किसी कदम का प्रभाव भारत और चीन जैसे बड़े ऊर्जा आयातकों पर पड़ सकता है। इससे वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े समीकरण प्रभावित होने की आशंका भी बनी रहेगी। इसलिए निवेशक अमेरिकी व्यापार नीति और उससे जुड़े अगले कदमों को करीब से देखेंगे।

    कच्चे तेल की कीमतें भारतीय शेयर बाजार के लिए एक अन्य महत्वपूर्ण संकेतक रहेंगी। तेल की लागत में बढ़ोतरी से महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है और इससे आर्थिक विकास को लेकर चिंताएं भी पैदा हो सकती हैं। बीते सप्ताह बाजार की धारणा पर ऊर्जा लागत को लेकर ऐसी ही चिंताओं का असर दिखाई दिया।

    विदेशी संस्थागत निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। 18 सितंबर को विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय नकद बाजार में शुद्ध खरीदार रहे और उन्होंने 599.54 करोड़ रुपये की खरीदारी की। इसी दिन घरेलू संस्थागत निवेशकों ने भी 1,019.69 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की।

    रुपये और अमेरिकी डॉलर की चाल पर भी निवेशकों की नजर रहेगी। मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव का असर कंपनियों की लागत, आयात और विदेशी निवेश के प्रवाह पर पड़ सकता है। इसके अलावा अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बदलाव भी वैश्विक निवेश प्रवाह को प्रभावित करने वाला प्रमुख संकेतक बना रहेगा।

    घरेलू मोर्चे पर पीएमआई और बुनियादी ढांचे से जुड़े आंकड़े अगले सप्ताह जारी होने हैं। इन आंकड़ों से देश की आर्थिक गतिविधियों की स्थिति का संकेत मिलेगा। निवेशक इन आंकड़ों को आर्थिक वृद्धि की गति और कारोबारी माहौल के आकलन के लिए देख सकते हैं।

    भारतीय शेयर बाजार ने पिछला सप्ताह कमजोर स्तर पर समाप्त किया। सेंसेक्स 0.65 प्रतिशत की गिरावट के साथ 74,294.46 अंक पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 0.22 प्रतिशत फिसलकर 23,346.40 अंक पर रहा। ऐसे में अगले सप्ताह वैश्विक तनाव, तेल की कीमत, टैरिफ और घरेलू आंकड़ों के बीच बाजार की गतिविधियों पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी।

  • ईरान की सात शर्तों और युद्ध की चेतावनी के बीच ट्रंप ने कैंप डेविड का दौरा छोड़ा, अमेरिका ने सुरक्षा अलर्ट जारी किया

    ईरान की सात शर्तों और युद्ध की चेतावनी के बीच ट्रंप ने कैंप डेविड का दौरा छोड़ा, अमेरिका ने सुरक्षा अलर्ट जारी किया

    नई दिल्ली । पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप शनिवार को अपना वीकेंड प्रवास बीच में छोड़कर व्हाइट हाउस लौट आए। वह मैरीलैंड स्थित कैंप डेविड से रविवार को वापस आने वाले थे, लेकिन निर्धारित कार्यक्रम से एक दिन पहले ही वॉशिंगटन पहुंच गए। ट्रंप की अचानक वापसी के पीछे प्रशासन की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया गया।

    ट्रंप की वापसी ऐसे समय हुई है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ा हुआ है। ईरान ने युद्ध समाप्त करने और बातचीत की दिशा में आगे बढ़ने के लिए अमेरिका के सामने सात शर्तें रखी हैं। ईरान की ओर से कहा गया है कि इन शर्तों को मध्यस्थ कतर के जरिए अमेरिकी पक्ष तक पहुंचाया जा चुका है।

    ईरान के सुरक्षा प्रमुख मोहसिन रेजाई ने बताया कि तेहरान अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के जवाब का इंतजार कर रहा है। ईरान की ओर से यह भी चेतावनी दी गई है कि यदि उसकी मांगों को स्वीकार नहीं किया गया तो वह निर्णायक युद्ध के लिए तैयार है।

    ईरान की ओर से रखी गई शर्तों और चेतावनी के बीच पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति को लेकर अमेरिका ने भी सतर्कता बढ़ाई है। अमेरिकी राजनयिक मिशनों के लिए हाई सिक्योरिटी अलर्ट जारी किया गया है। क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी नागरिकों को बदलती परिस्थितियों पर नजर रखने की सलाह दी गई है।

    सऊदी अरब और हूती समूह के बीच जारी सैन्य गतिविधियों ने भी क्षेत्रीय तनाव बढ़ाया है। हूती समूह ईरान समर्थित है और सऊदी अरब के खिलाफ पहले भी सैन्य कार्रवाई कर चुका है। इनमें नागरिक हवाई अड्डों को निशाना बनाने वाली घटनाएं भी शामिल रही हैं।

    अमेरिकी सुरक्षा चेतावनी में कहा गया है कि ईरान और उसके समर्थक समूह मध्य पूर्व के बाहर भी अमेरिकी हितों या अमेरिका और उसके नागरिकों से जुड़े स्थानों को निशाना बना सकते हैं। इस वजह से अलग-अलग देशों में मौजूद अमेरिकी राजनयिक प्रतिष्ठानों और नागरिकों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

    अमेरिकी चेतावनी में यात्रा को लेकर भी सावधानी बरतने को कहा गया है। क्षेत्र से आने-जाने वाले अमेरिकी नागरिकों को हवाई अड्डों और एयरलाइंस के संचालन से संबंधित जानकारी पर लगातार नजर रखने की सलाह दी गई है। सुरक्षा स्थिति में बदलाव होने पर उड़ानों और यात्रा कार्यक्रमों में भी असर पड़ सकता है।

    पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ट्रंप का कैंप डेविड से निर्धारित समय से एक दिन पहले व्हाइट हाउस लौटना महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि उनकी वापसी का आधिकारिक कारण स्पष्ट नहीं किया गया है।

    ईरान की ओर से एक तरफ बातचीत के लिए शर्तें सामने रखी गई हैं, जबकि दूसरी तरफ मांगें पूरी नहीं होने पर निर्णायक युद्ध की चेतावनी दी गई है। ऐसे में अमेरिका की अगली प्रतिक्रिया और ईरान के रुख पर क्षेत्रीय हालात की दिशा काफी हद तक निर्भर करेगी।

    फिलहाल पश्चिम एशिया में सैन्य गतिविधियां, अमेरिकी सुरक्षा अलर्ट और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ता तनाव चिंता का प्रमुख विषय बना हुआ है। क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी नागरिकों के लिए सुरक्षा और यात्रा संबंधी सावधानियां बढ़ा दी गई हैं।

  • ट्रंप ने रूस-ईरान प्रतिबंध कानून पर किए हस्ताक्षर, भारत और चीन जैसे ऊर्जा खरीदार देशों पर बढ़ा अमेरिकी दबाव

    ट्रंप ने रूस-ईरान प्रतिबंध कानून पर किए हस्ताक्षर, भारत और चीन जैसे ऊर्जा खरीदार देशों पर बढ़ा अमेरिकी दबाव

    नई दिल्ली ।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस और ईरान से जुड़े एचआर 5334 विधेयक पर 18 सितंबर 2026 को हस्ताक्षर कर इसे कानून का रूप दे दिया। इस कानून में रूस पर प्रतिबंधों, टैरिफ और अन्य पाबंदियों को लागू करने तथा उनका दायरा बढ़ाने का प्रावधान किया गया है। साथ ही ईरान पर पहले से लागू प्रतिबंधों को आगे जारी रखने की व्यवस्था भी की गई है।

    ट्रंप के इस फैसले पर भारत में कांग्रेस की ओर से प्रतिक्रिया सामने आई है। कांग्रेस महासचिव और राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने कहा कि किसी धौंस जमाने वाले का मुकाबला करने का एक ही तरीका है और वह है मजबूती से उसका प्रतिरोध करना।

    नए कानून में रूस के ऊर्जा क्षेत्र को लेकर भी कई महत्वपूर्ण प्रावधान किए गए हैं। इसमें रूस के ऊर्जा कारोबार और उससे जुड़े प्रमुख खरीदार देशों पर दबाव बढ़ाने की व्यवस्था है। रूस के साथ बड़े स्तर पर ऊर्जा व्यापार करने वाले देशों में भारत और चीन भी शामिल हैं।

    कानून के तहत रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रावधान किया गया है। इससे रूस के साथ ऊर्जा कारोबार करने वाले देशों के लिए अमेरिकी प्रतिबंध नीति का प्रभाव बढ़ सकता है। हालांकि कानून पर हस्ताक्षर होने के साथ भारत पर तत्काल कोई नया टैरिफ लागू किए जाने की घोषणा नहीं हुई है।

    विधेयक में रूस के नेतृत्व, ऊर्जा क्षेत्र और रक्षा कारोबार से जुड़े नेटवर्क पर कार्रवाई के प्रावधान भी शामिल हैं। रूस के साथ रक्षा क्षेत्र में सहयोग करने वाले देशों और संस्थाओं पर दबाव बढ़ाने की व्यवस्था की गई है। इसका उद्देश्य रूस के आर्थिक और रणनीतिक नेटवर्क पर प्रतिबंधों का प्रभाव मजबूत करना है।

    कानून में रूस के ऊर्जा निर्यात से जुड़े नेटवर्क पर भी ध्यान दिया गया है। इसके जरिए प्रतिबंधों को दरकिनार करने वाली गतिविधियों पर कार्रवाई का रास्ता तैयार किया गया है। रूस के खिलाफ आर्थिक दबाव बढ़ाने के लिए टैरिफ और अन्य प्रतिबंधों का इस्तेमाल किए जाने की व्यवस्था की गई है।

    ईरान को लेकर भी कानून में महत्वपूर्ण प्रावधान हैं। इसमें ईरान पर पहले से लागू प्रतिबंधों को आगे बढ़ाने की व्यवस्था की गई है। इस तरह रूस के साथ ईरान को लेकर भी अमेरिकी प्रतिबंध व्यवस्था को कानूनी आधार मिला है।

    अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने इस विधेयक को 16 सितंबर 2026 को मंजूरी दी थी। इसके बाद विधेयक को राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के लिए भेजा गया। 18 सितंबर को ट्रंप ने इस पर हस्ताक्षर कर इसे कानून का रूप दे दिया।

    भारत के लिए यह घटनाक्रम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि रूस के साथ उसका ऊर्जा कारोबार लंबे समय से जारी है। रूस भारत के लिए ऊर्जा आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण स्रोत रहा है। ऐसे में रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर संभावित अमेरिकी टैरिफ का मुद्दा भारत के आर्थिक और ऊर्जा हितों से जुड़ता है।

    जयराम रमेश की प्रतिक्रिया के बाद यह मुद्दा भारत की राजनीतिक बहस में भी सामने आया है। नए कानून के तहत भारत पर तत्काल कोई नया शुल्क लागू किए जाने की घोषणा नहीं हुई है। हालांकि आगे अमेरिकी प्रशासन इस कानून के प्रावधानों का किस तरह इस्तेमाल करता है, इससे भारत समेत रूस के साथ ऊर्जा कारोबार करने वाले देशों पर संभावित प्रभाव स्पष्ट होगा।

  • ईरान में महिलाओं का साहसिक कदम…. बिना हिजाब पहने 10 किमी दौड़ में लिया हिस्सा

    ईरान में महिलाओं का साहसिक कदम…. बिना हिजाब पहने 10 किमी दौड़ में लिया हिस्सा


    तेहरान।
    ईरान (Iran) की राजधानी तेहरान में महिलाओं के एक समूह ने देश के अनिवार्य हिजाब कानून का खुलेआम उल्लंघन करते हुए बिना हिजाब (Without Hijab) पहने 10 किलोमीटर की दौड़ (10 Kilometer Race) प्रतियोगिता में भाग लिया। यह साहसिक कदम ऐसे समय उठाया गया है जब ईरानी अधिकारी पहले भी इसी तरह बिना हिजाब के दौड़ के आयोजन पर सख्त कार्रवाई कर चुके थे। यह प्रतियोगिता वेलायात पार्क में आयोजित की गई थी, जिसमें पुरुषों और महिलाओं के लिए अलग-अलग दौड़ की व्यवस्था थी।


    10 किमी की दौड़ प्रतियोगिता में भाग लिया

    सोशल मीडिया पर बिना हिजाब के दौड़ती महिलाओं के वीडियो वायरल हो रहे हैं। इस घटना ने ईरान के सख्त हिजाब कानून की ओर दुनिया का ध्यान खींचा है।


    युद्ध के बीच ईरान का शक्ति प्रदर्शन 3,13,000 लोगों ने दिखाई ताकत

    तेहरान। ईरान में शुक्रवार को सरकार के आह्वान पर बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरे। सरकारी मीडिया के अनुसार, तेहरान में 3.13 लाख लोगों ने मार्च में हिस्सा लिया, जबकि रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के कमांडर जनरल हसन हसांजादेह ने दावा किया कि छह लाख से अधिक लोग सीमित सैन्य प्रशिक्षण के लिए पंजीकरण करा चुके हैं और प्रशिक्षण में 10 लाख से अधिक लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। तेहरान में प्रदर्शनकारियों ने ईरानी झंडे लेकर मार्च किया और देश की रक्षा के लिए हथियार उठाने की तैयारी जताई। सरकार ने इस अभियान को ‘जांफदाये ईरान’ यानी ‘ईरान के लिए जान कुर्बान करने वाले’ नाम दिया है। राज्य मीडिया कई दिनों से लोगों से इसमें शामिल होने की अपील कर रहा था।

  • ईरान को ट्रंप का सख्त संदेश…., बोले- अमेरिका की उम्मीदों के मुताबिक होगा समझौता…!

    ईरान को ट्रंप का सख्त संदेश…., बोले- अमेरिका की उम्मीदों के मुताबिक होगा समझौता…!


    वाशिंगटन।
    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने कहा कि ईरान (Iran) वाशिंगटन (Washington) के साथ समझौता करना चाहता है। लेकिन उनकी राय में ईरान अभी इसके लिए तैयार नहीं है। ट्रंप ने संकेत दिया कि कोई भी समझौता अमेरिका की उम्मीदों के मुताबिक होना चाहिए। यह बयान ऐसे समय आया है, जब अगले हफ्ते न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान ट्रंप की खाड़ी सहयोग परिषद यानी जीसीसी (Gulf Cooperation Council- GCC) के सदस्य देशों के नेताओं और विदेश मंत्रियों से मुलाकात होने की उम्मीद है।


    राष्ट्रपति ट्रंप ने क्या कहा?

    ट्रंप ने ‘एबीसी 11’ से बातचीत में कहा, ईरान समझौता करना चाहता है। मेरी राय में, वे तैयार नहीं हैं। हम या तो ऐसा समझौता करेंगे जो अच्छा हो या फिर कोई समझौता नहीं करेंगे। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है, जब उनका प्रशासन ईरान के साथ जारी संघर्ष के अगले चरण का आकलन कर रहा है। प्रशासन युद्ध के बाद की रणनीति भी तैयार कर रहा है।

    एक्सिओस ने तीन सूत्रों के हवाले से बताा कि ट्रंप की छह जीसीसी देशों के प्रतिनिधियों से मुलाकात होने की उम्मीद है। इन छह देशों में सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), कतर, बहरीन, कुवैत और ओमान शामिल हैं। प्रस्तावित बैठक में युद्ध के बाद की रणनीति को लेकर वाशिंगटन के विचारों पर चर्चा हो सकती है। संघर्ष में अगले कदमों पर भी बात हो सकती है।

    अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने बुधवार को शुरुआती निमंत्रण भेजे थे। इस बैठक में दूसरे अरब और इस्लामी देशों के नेताओं को भी शामिल किया जा सकता है। ट्रंप ने बुधवार को कहा था कि उन्हें उम्मीद है कि वाशिंगटन ‘युद्ध के अंत की ओर’ बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया था कि अमेरिका को ईरान की ओर से सीधे संदेश मिला है कि तेहरान समझौता करना चाहता है।

    खाड़ी देशों में अमेरिका के कई सैन्य अड्डे हैं। संघर्ष के दौरान इन देशों पर ईरान की ओर से हमले हुए हैं। तेल और प्राकृतिक गैस के निर्यात में रुकावटों का असर क्षेत्र की अर्थव्यवस्थाओं पर भी पड़ा है।


    ट्रंप ने किन सरकारी आदेशों पर हस्ताक्षर किए?

    ट्रंप ने गुरुवार शाम (स्थानीय समय) व्हाइट हाउस में 100 से ज्यादा शिकार करने वालों, मछली पकड़ने वालों और बाहरी गतिविधियों से जुड़े उद्योग (आउटडोर) के प्रतिनिधियों की मेजबानी की। इस दौरान उन्होंने कार्यकारी आदेशों पर हस्ताक्षर किए। इन आदेशों का मकसद शिकार और मछली पकड़ने के अवसरों को बढ़ाना है। कुछ संघीय नियमों में बदलाव करना भी इसका हिस्सा है।

    मछली पकड़ने के नियमों पर बात करते हुए ट्रंप ने राष्ट्रपति के अधिकारों के दायरे का जिक्र किया। ट्रंप ने कहा, इस पद की ताकत बहुत ज्यादा है। मैं मछली पकड़ने पर प्रतिबंध लगा सकता था और जॉनी का कारोबार पूरी तरह बंद कर सकता था। मुझे लगता है कि मैं ऐसा सिर्फ एक या दो दिन के लिए करने जा रहा हूं। जब तक वह मुझे फोन करके नहीं कहता- राष्ट्रपति जी, आप मेरा कारोबार बंद कर रहे हैं।

    ट्रंप ने यह भी कहा कि उन्होंने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किया है। इसके तहत लाखों एकड़ संघीय जमीन शिकारियों और मछली पकड़ने वालों के लिए खोली जाएगी। उन्होंने एक और आदेश पर भी हस्ताक्षर किए। इसका उद्देश्य समुद्री मछली पकड़ने वालों, नाव चलाने वालों, चार्टर कैप्टनों और तटीय समुदायों पर लागू संघीय नियमों को कम करना है।


    ट्रंप की शक्ति सीमित करने वाला प्रस्ताव

    इस बीच, अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने मंगलवार को एक प्रस्ताव पर मतदान किया। प्रस्ताव के पक्ष में 220 और विरोध में 204 वोट पड़े। इस प्रस्ताव का उद्देश्य ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान जारी रखने के ट्रंप के अधिकार को सीमित करना है। यह प्रस्ताव डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद सेठ मौल्टन ने पेश किया था। इसमें प्रशासन से कहा गया है कि वह ईरान के साथ संघर्ष से अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाए। हालांकि, इसमें कुछ खास रक्षात्मक परिस्थितियों को अपवाद रखा गया है। प्रस्ताव के समर्थन में सात रिपब्लिकन सांसदों ने डेमोक्रेट सांसदों के साथ वोट किया।

    अलग से, प्रतिनिधि सभा ने 2026 का लिंडसे ओ. ग्राहम रूस और ईरान पर प्रतिबंध कानून भी पारित कर दिया। इस कानून के तहत राष्ट्रपति को कुछ शर्तों के आधार पर उन देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार मिल सकता है, जो रूस से तेल और गैस खरीदना जारी रखते हैं।

  • सऊदी अरब जाने वाले अमेरिकी नागरिकों को अलर्ट, अमेरिका ने जारी की लेवल-3 ट्रैवल एडवाइजरी, यमन सीमा पर सबसे कड़ी चेतावनी

    सऊदी अरब जाने वाले अमेरिकी नागरिकों को अलर्ट, अमेरिका ने जारी की लेवल-3 ट्रैवल एडवाइजरी, यमन सीमा पर सबसे कड़ी चेतावनी


    नई दिल्ली ।पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और सुरक्षा संबंधी चिंताओं के बीच अमेरिका ने सऊदी अरब की यात्रा करने वाले अपने नागरिकों के लिए नई चेतावनी जारी की है। अमेरिकी प्रशासन ने सऊदी अरब के लिए लेवल-3 ट्रैवल एडवाइजरी जारी करते हुए नागरिकों से वहां की यात्रा पर पुनर्विचार करने को कहा है। इस चेतावनी में क्षेत्र में संभावित हमलों, आतंकवाद और सुरक्षा जोखिमों को प्रमुख कारण बताया गया है।

    सऊदी अरब के लिए जारी लेवल-3 चेतावनी का अर्थ है कि अमेरिकी नागरिकों को वहां जाने से पहले सुरक्षा परिस्थितियों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। पश्चिम एशिया में लगातार बने तनाव के बीच अमेरिकी हितों और नागरिकों को संभावित खतरे की आशंका भी जताई गई है। विशेष रूप से ईरानी ड्रोन और मिसाइल हमलों को सुरक्षा चिंता का प्रमुख कारण बताया गया है।

    यमन से लगे सऊदी अरब के कुछ सीमावर्ती इलाकों के लिए इससे भी सख्त लेवल-4 ट्रैवल एडवाइजरी जारी की गई है। इस स्तर की चेतावनी के तहत इन क्षेत्रों की यात्रा नहीं करने की सलाह दी गई है। यमन सीमा के आसपास सुरक्षा स्थिति को अधिक संवेदनशील माना गया है, जहां सशस्त्र समूहों की गतिविधियों और हमलों के कारण खतरा बढ़ने की बात कही गई है।

    चेतावनी में ड्रोन और मिसाइल हमलों के अलावा हवा में नष्ट किए गए हथियारों के मलबे से होने वाले नुकसान की आशंका का भी उल्लेख किया गया है। किसी हमले को रोकने के दौरान गिरने वाला मलबा भी लोगों और संपत्ति के लिए खतरा पैदा कर सकता है। ऐसे में यमन सीमा के आसपास रहने या यात्रा करने वाले अमेरिकी नागरिकों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत बताई गई है।

    सऊदी अरब में सैन्य ठिकानों और ऊर्जा से जुड़े बुनियादी ढांचे के आसपास के क्षेत्रों को भी संवेदनशील माना गया है। अमेरिकी नागरिकों के लिए इन इलाकों में सुरक्षा जोखिम अधिक होने की बात सामने आई है। क्षेत्रीय तनाव के चलते सऊदी अरब में अमेरिकी हितों को निशाना बनाए जाने की आशंका भी व्यक्त की गई है।

    यमन से लगी सीमा के अलावा उड़ानों पर पड़ने वाले असर को भी सुरक्षा स्थिति से जोड़ा गया है। क्षेत्र में तनाव बढ़ने के कारण हवाई सेवाओं में रुकावट की स्थिति पैदा हो सकती है। इसके साथ ही अमेरिकी कर्मचारियों की आवाजाही से संबंधित कुछ प्रतिबंध भी लागू किए गए हैं, जिससे वहां की सुरक्षा परिस्थितियों को लेकर चिंता का स्तर स्पष्ट होता है।

    अमेरिकी चेतावनी ऐसे समय में सामने आई है जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बना हुआ है। सऊदी अरब को लेकर जारी सलाह में आम इलाकों और विशेष रूप से संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों के बीच अलग-अलग स्तर की चेतावनी दी गई है। जहां पूरे सऊदी अरब के लिए यात्रा पर पुनर्विचार करने को कहा गया है, वहीं यमन सीमा से लगे कुछ क्षेत्रों के लिए यात्रा नहीं करने की सलाह दी गई है।

    अमेरिकी नागरिकों को सऊदी अरब की यात्रा की योजना बनाने से पहले मौजूदा सुरक्षा परिस्थितियों पर ध्यान देने और संभावित जोखिमों को समझने की सलाह दी गई है। सैन्य गतिविधियों, ड्रोन और मिसाइल हमलों तथा क्षेत्रीय तनाव के बीच जारी यह चेतावनी सऊदी अरब जाने वाले अमेरिकी यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण सुरक्षा संदेश के रूप में सामने आई है।

  • ईरान-हूती तनाव के बीच ट्रंप की अरब नेताओं से होगी बैठक, युद्ध की आगे की रणनीति पर होगी चर्चा

    ईरान-हूती तनाव के बीच ट्रंप की अरब नेताओं से होगी बैठक, युद्ध की आगे की रणनीति पर होगी चर्चा


    नई दिल्ली। सऊदी अरब पर हूती हमलों और ईरान के साथ जारी युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अगले सप्ताह खाड़ी देशों के नेताओं से मुलाकात कर सकते हैं। न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान मंगलवार को प्रस्तावित इस बैठक में खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के सदस्य देशों के नेता या विदेश मंत्री शामिल हो सकते हैं। बातचीत के केंद्र में ईरान के साथ युद्ध की आगे की रणनीति के साथ खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा और युद्ध के बाद की अमेरिकी योजना रह सकती है।

    Axios ने तीन सूत्रों के हवाले से बैठक की जानकारी दी है। संभावित बैठक में सऊदी अरब, यूएई, कतर, बहरीन, कुवैत और ओमान के नेता या विदेश मंत्री शामिल हो सकते हैं। हालांकि, बैठक का अंतिम एजेंडा अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है।

    ईरानी हमलों से खाड़ी देश भी प्रभावित

    ट्रंप की प्रस्तावित बैठक ऐसे समय हो रही है जब ईरान के साथ युद्ध के दौरान खाड़ी के उन देशों को भी ईरानी हमलों का सामना करना पड़ा है, जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं। इसके अलावा तेल और प्राकृतिक गैस के निर्यात में आई रुकावटों का असर इन देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर भी पड़ा है।

    ऐसे में अरब नेताओं के साथ बातचीत में क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक गतिविधियों से जुड़े मुद्दे भी उठ सकते हैं।

    मक्का के एयरस्पेस तक पहुंचा ड्रोन, सऊदी ने बताया ‘रेड लाइन’

    सऊदी अरब और हूतियों के बीच भी तनाव लगातार बना हुआ है। हाल में सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने दावा किया था कि हूतियों की ओर से लॉन्च किए गए ड्रोन को मक्का के प्रतिबंधित एयरस्पेस में पहुंचने से पहले ही रोक दिया गया।

    सऊदी गठबंधन ने कहा था कि दो पवित्र मस्जिदों की सुरक्षा उसके लिए “रेड लाइन” है। हालांकि, हूतियों ने मक्का को निशाना बनाने के दावे को खारिज करते हुए इसे झूठ बताया था।

    इस घटनाक्रम के बाद ट्रंप और अरब नेताओं की संभावित बैठक में ईरान युद्ध के साथ हूती गतिविधियों और खाड़ी देशों की सुरक्षा पर चर्चा की संभावना भी जताई जा रही है।

    युद्ध खत्म होने के बाद की योजना पर भी नजर

    Axios के मुताबिक, अमेरिकी प्रशासन ईरान के साथ युद्ध के बाद की रणनीति पर भी काम कर रहा है। ट्रंप और उनकी वरिष्ठ टीम इस योजना को तैयार कर रही है और इसे अमेरिकी मिडटर्म चुनाव के बाद अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद है।

    ट्रंप ने बुधवार को कहा था कि उन्हें उम्मीद है कि युद्ध अब खत्म होने के करीब है। उन्होंने यह भी दावा किया था कि ईरान समझौता करना चाहता है और अमेरिका को ईरानी पक्ष की ओर से सीधे इस संबंध में संदेश मिला है।

    हालांकि, इन बयानों के बीच युद्ध को लेकर अमेरिकी प्रशासन की अंतिम रणनीति अभी स्पष्ट नहीं है।

    विदेश विभाग ने भेजे शुरुआती निमंत्रण

    अमेरिकी विदेश विभाग ने बुधवार को संभावित बैठक के लिए शुरुआती निमंत्रण भेजे हैं। व्हाइट हाउस ने इस रिपोर्ट पर टिप्पणी करने से इनकार किया है। एक सूत्र के मुताबिक, बैठक में अन्य अरब और मुस्लिम देशों के नेताओं को भी शामिल किया जा सकता है।

    इससे बैठक का दायरा केवल GCC देशों तक सीमित रहने के बजाय व्यापक क्षेत्रीय बातचीत का रूप ले सकता है। हालांकि, अंतिम भागीदारी और एजेंडा की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।

    नेतन्याहू भी ट्रंप से मिलने की कोशिश में

    इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भी संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान न्यूयॉर्क में ट्रंप से मुलाकात करना चाहते हैं। हालांकि, एक इजरायली सूत्र के अनुसार दोनों नेताओं की बैठक अभी तय नहीं हुई है।

    पिछले साल संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान ट्रंप ने आठ अरब और मुस्लिम देशों के नेताओं से मुलाकात की थी। उस दौरान उन्होंने गाजा में शांति को लेकर अपनी योजना का ड्राफ्ट उनके सामने रखा था। करीब एक सप्ताह बाद योजना सार्वजनिक की गई थी और उसके कुछ समय बाद युद्ध खत्म करने को लेकर एक समझौता हुआ था।

    अब सबकी नजर न्यूयॉर्क बैठक पर

    इस बार फिर संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान ट्रंप और खाड़ी देशों के नेताओं की प्रस्तावित बैठक ऐसे वक्त हो रही है, जब ईरान युद्ध और हूती हमलों ने पूरे क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को प्रभावित किया है।

    बैठक का अंतिम एजेंडा सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि अमेरिका ईरान के साथ जारी संघर्ष, हूती खतरे और खाड़ी देशों की सुरक्षा को लेकर कौन से मुद्दे प्राथमिकता से उठाता है। फिलहाल बातचीत में युद्ध के अगले कदम के साथ संघर्ष खत्म होने की स्थिति में अमेरिकी रणनीति पर भी चर्चा होने की संभावना है।