Tag: Iran

  • ट्रंप को बड़ा झटका… ईरान के सुप्रीम लीडर बोले- विदेश नहीं भेजेंगे देश का यूरेनियम भंडार

    ट्रंप को बड़ा झटका… ईरान के सुप्रीम लीडर बोले- विदेश नहीं भेजेंगे देश का यूरेनियम भंडार


    तेहरान।
    अमेरिका (America) के साथ यूरेनियम (Uranium) को लेकर चल रही तीखी तकरार के बीच ईरान (Iran) ने बड़ा फैसला लिया है। दो वरिष्ठ ईरानी सूत्रों के मुताबिक, देश के सर्वोच्च नेता आयातुल्लाखा मोजतबा मेनेई (Supreme Leader Ayatollah Mojtaba Menei) ने निर्देश जारी कर दिया है कि ईरान का लगभग हथियार-योग्य समृद्ध यूरेनियम भंडार विदेश नहीं भेजा जाएगा। इससे अमेरिका की प्रमुख मांग पर तेहरान का रुख और सख्त हो गया है। यह फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। इजरायल के साथ मिलकर चल रही शांति वार्ता अब और जटिल हो सकती है।

    रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, इजरायली अधिकारियों ने बताया कि ट्रंप ने इजरायल को आश्वासन दिया था कि ईरान का अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम भंडार देश से बाहर भेज दिया जाएगा और किसी भी शांति समझौते में इसे अनिवार्य शर्त बनाया जाएगा। नाम न छापने की शर्त पर बात करने वाले ईरानी सूत्रों ने बताया कि सर्वोच्च नेता का यह निर्देश और सत्ता के अंदरूनी हलकों में आम सहमति है कि समृद्ध यूरेनियम को देश से बाहर नहीं जाना चाहिए। अधिकारियों का मानना है कि ऐसा करने से ईरान भविष्य में अमेरिका-इजरायल हमलों के प्रति और अधिक कमजोर हो जाएगा।


    नेतन्याहू की सख्ती

    दूसरी ओर इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ कहा है कि जब तक ईरान से समृद्ध यूरेनियम हटाया नहीं जाता, उसके प्रॉक्सी मिलिशिया समर्थन बंद नहीं होते और बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता समाप्त नहीं की जाती, तब तक युद्ध समाप्त नहीं माना जाएगा।


    ईरान को विश्वास नहीं

    28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल के हमलों से शुरू हुए युद्ध के बाद अस्थिर युद्धविराम लागू है। इस दौरान ईरान ने खाड़ी राज्यों में अमेरिकी ठिकानों पर गोलीबारी की और लेबनान में हिजबुल्लाह के साथ लड़ाई तेज हुई। हालांकि शांति प्रयास अभी तक नाकाम रहे हैं। ईरानी सूत्रों ने कहा कि तेहरान को आशंका है कि युद्धविराम वाशिंगटन का सिर्फ रणनीतिक धोखा है, ताकि नए हमलों की तैयारी की जा सके। ईरान के शीर्ष शांति वार्ताकार मोहम्मद बाकर गालिबाफ ने बुधवार को कहा कि दुश्मन की गतिविधियां नए हमलों की तैयारी का संकेत दे रही हैं।


    अमेरिकी राष्ट्रपति ने क्या कहा?

    ट्रंप ने बुधवार को कहा कि यदि ईरान शांति समझौते के लिए तैयार नहीं हुआ तो अमेरिका नए हमलों के लिए तैयार है, हालांकि उन्होंने कुछ दिनों का इंतजार करने का भी संकेत दिया। दोनों पक्षों ने कुछ मुद्दों पर समझौता शुरू कर दिया है, लेकिन परमाणु कार्यक्रम को लेकर गहरे मतभेद बरकरार हैं, खासकर समृद्ध यूरेनियम के भविष्य और संवर्धन अधिकार पर।


    ईरान का रुख सख्त

    ईरानी अधिकारियों ने बार-बार कहा है कि उनकी प्राथमिकता युद्ध का स्थायी समाधान और अमेरिका-इजरायल से कोई हमला न होने की विश्वसनीय गारंटी है। इसके बाद ही वे परमाणु कार्यक्रम पर विस्तृत बातचीत के लिए तैयार होंगे। ईरान लंबे समय से परमाणु बम बनाने से इनकार करता रहा है। युद्ध से पहले ईरान ने अपने 60% समृद्ध यूरेनियम भंडार का आधा हिस्सा बाहर भेजने पर सहमति जताई थी, लेकिन ट्रंप की लगातार धमकियों के बाद यह रुख बदल गया, जिसका परिणाम अब सबके सामने है।


    क्या कह रहे आईएईए के आंकड़े?

    अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के अनुसार, जून 2025 के हमलों के समय ईरान के पास 440.9 किलोग्राम 60% समृद्ध यूरेनियम था। हमलों के बाद बचा हुआ भंडार मुख्य रूप से इस्फहान और नतांज के परमाणु केंद्रों में सुरक्षित है। दूसरी ओर ईरान का कहना है कि उसे चिकित्सा और अनुसंधान रिएक्टर के लिए सीमित मात्रा में अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम की जरूरत है।

  • पाकिस्तान-ईरान का सीक्रेट डील दावा: क्या है पूरा मामला?

    पाकिस्तान-ईरान का सीक्रेट डील दावा: क्या है पूरा मामला?



    नई दिल्ली। हाल में कुछ अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स और इज़रायली मीडिया दावों में यह कहा गया है कि पाकिस्तान और ईरान कथित तौर पर एक “सीक्रेट डील” पर काम कर रहे हैं, जिसमें अमेरिका से चल रही ईरान की बातचीत में पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।इस पूरे विवाद को लेकर अभी तक किसी भी सरकार ने आधिकारिक तौर पर इन दावों की पुष्टि नहीं की है, इसलिए इन्हें फिलहाल अनकन्फर्म्ड मीडिया रिपोर्ट्स के रूप में ही देखा जा रहा है।

    क्या दावा किया जा रहा है?
    रिपोर्ट्स के मुताबिक आरोप यह हैं कि:

    पाकिस्तान ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता कर रहा है

    बदले में आर्थिक मदद या वित्तीय लाभ मिलने की बात कही जा रही है

    ईरान को अमेरिका के साथ “बेहतर डील” दिलाने में मदद का दावा

    इस प्रक्रिया में पाकिस्तान की “निष्पक्षता” पर सवाल उठाए जा रहे हैं



    पाकिस्तान की भूमिका पर चर्चा
    इन दावों के बीच पाकिस्तान के कई शीर्ष नेताओं और अधिकारियों के तेहरान दौरे को भी जोड़ा जा रहा है। इसमें शामिल हैं:

    गृह मंत्री के स्तर की यात्राएं

    विदेश नीति से जुड़े प्रतिनिधिमंडल

    सैन्य और कूटनीतिक संपर्क

    इन यात्राओं को कुछ रिपोर्ट्स में ईरान-अमेरिका बातचीत में सक्रिय कूटनीतिक भूमिका के रूप में देखा जा रहा है।

    ईरान–अमेरिका तनाव की पृष्ठभूमि
    यह पूरा मामला उस बड़े भू-राजनीतिक तनाव से जुड़ा है जिसमें शामिल हैं:

    ईरान का परमाणु कार्यक्रम

    अमेरिका और इज़रायल की सुरक्षा चिंताएं

    पश्चिम एशिया में लगातार सैन्य तनाव

    समय-समय पर हमलों और जवाबी कार्रवाइयों का दौर

    इस स्थिति में कई देशों द्वारा मध्यस्थता के प्रयास किए जा रहे हैं, जिनमें पाकिस्तान का नाम भी सामने आता रहा है।

    इज़रायल की आपत्ति
    इज़रायली पक्ष की मीडिया रिपोर्ट्स और राजनीतिक बयानों में:

    ईरान पर सख्त रुख की मांग

    अमेरिका की बातचीत नीति की आलोचना

    पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल

    हालांकि ये बयान राजनीतिक दृष्टिकोण से जुड़े हैं और इन्हें स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं माना जा सकता।

  • ईरान को ट्रंप-वेंस की कड़ी चेतावनी: डील नहीं तो सैन्य कार्रवाई, परमाणु हथियारों पर बढ़ा तनाव

    ईरान को ट्रंप-वेंस की कड़ी चेतावनी: डील नहीं तो सैन्य कार्रवाई, परमाणु हथियारों पर बढ़ा तनाव



    नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान परमाणु समझौते पर सहमत नहीं होता है तो सैन्य कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

    वॉशिंगटन में मीडिया से बातचीत करते हुए जेडी वेंस ने कहा कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम न सिर्फ पश्चिम एशिया बल्कि पूरी दुनिया की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। उनके अनुसार, अगर ईरान परमाणु हथियार विकसित करता है तो इससे वैश्विक स्तर पर हथियारों की नई होड़ शुरू हो सकती है।

    वेंस ने कहा कि अमेरिका ने ईरान के सामने एक सरल प्रस्ताव रखा है, जिसमें या तो बातचीत के जरिए समझौता किया जाए या फिर तनाव बढ़ने की स्थिति में परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहना होगा। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि ईरान किसी भी हाल में परमाणु हथियार हासिल नहीं कर सकता।

    उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ईरान के साथ सद्भावना के आधार पर बातचीत करना चाहता है और बातचीत के जरिए समाधान की उम्मीद अभी भी बनी हुई है। वेंस के मुताबिक, कुछ संकेत ऐसे मिले हैं जिससे लगता है कि ईरान समझौते की दिशा में आगे बढ़ सकता है, लेकिन अंतिम स्थिति तभी साफ होगी जब किसी समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर होंगे।

    जेडी वेंस ने ईरान की आंतरिक राजनीतिक स्थिति को जटिल बताते हुए कहा कि वहां कई शक्तिशाली गुट सक्रिय हैं, जिससे यह समझना मुश्किल हो जाता है कि वास्तव में ईरान की नीति क्या है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका ईरान के यूरेनियम भंडार को रूस भेजने जैसी किसी रिपोर्ट की पुष्टि नहीं करता।

    इस बीच पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी बयान दिया है कि अमेरिका का लक्ष्य इस संघर्ष को जल्द खत्म करना है और ईरान को किसी भी स्थिति में परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि समाधान की दिशा में प्रयास तेज किए जा रहे हैं।

    गौरतलब है कि अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच लंबे समय से तनाव की स्थिति बनी हुई है। हाल के वर्षों में कई बार सैन्य टकराव और हमलों की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, हालांकि कुछ समय के लिए सीजफायर की स्थिति बनी थी। इसके बावजूद स्थायी समझौता अभी तक नहीं हो सका है और हालात फिर से तनावपूर्ण बने हुए हैं।

  • ईरान- अमेरिका तनाव फिर चरम पर, ट्रम्प-नेतन्याहू पर इनाम वाले बिल की चर्चा; पश्चिम एशिया में बढ़ा कूटनीतिक और सैन्य संकट

    ईरान- अमेरिका तनाव फिर चरम पर, ट्रम्प-नेतन्याहू पर इनाम वाले बिल की चर्चा; पश्चिम एशिया में बढ़ा कूटनीतिक और सैन्य संकट



    नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर गंभीर स्तर पर पहुंच गया है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान की संसद में एक ऐसे बिल पर चर्चा चल रही है, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ कार्रवाई करने वालों को भारी इनाम देने का प्रावधान हो सकता है। हालांकि यह अभी प्रारंभिक प्रस्ताव स्तर पर है और इस पर अंतिम वोटिंग बाकी है। इस कदम को पश्चिम एशिया में पहले से जारी तनाव का और बड़ा संकेत माना जा रहा है।

    ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के हवाले से सामने आई जानकारी में कहा गया है कि यह प्रस्ताव हाल के सैन्य और राजनीतिक तनावों के जवाब में तैयार किया जा रहा है। कुछ सांसदों ने यह भी संकेत दिया है कि इस पर जल्द ही संसद में मतदान हो सकता है। इसी बीच ईरान के शीर्ष नेतृत्व और सैन्य ढांचे में हालिया घटनाओं को लेकर भी नाराजगी बढ़ी हुई बताई जा रही है, जिससे क्षेत्रीय हालात और संवेदनशील हो गए हैं।

    दूसरी ओर, अमेरिका की ओर से भी सख्त रुख देखने को मिल रहा है। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि ईरान पर संभावित सैन्य कार्रवाई को फिलहाल टाल दिया गया है। ट्रम्प के मुताबिक कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे खाड़ी देशों के नेताओं ने बातचीत के लिए कुछ समय देने की अपील की थी, जिसके बाद यह निर्णय लिया गया। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगर कोई समझौता नहीं होता है तो अमेरिका कार्रवाई के लिए तैयार रहेगा।

    इस घटनाक्रम के बीच पश्चिम एशिया में तनाव कई मोर्चों पर बढ़ता दिख रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यापारिक जहाजों की आवाजाही को लेकर चिंता बनी हुई है, जहां हजारों नाविकों के साथ बड़ी संख्या में जहाज फंसे होने की रिपोर्ट सामने आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि या टकराव से वैश्विक तेल आपूर्ति पर असर पड़ सकता है।

    इसी दौरान क्षेत्र में ड्रोन गतिविधियों और सुरक्षा घटनाओं की खबरों ने भी स्थिति को और जटिल बना दिया है। सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था और हवाई रक्षा को और मजबूत किया है। वहीं ईरान ने भी अपने भीतर सुरक्षा और खुफिया गतिविधियों पर निगरानी बढ़ा दी है।

    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संयुक्त राष्ट्र ने स्पष्ट किया है कि होर्मुज स्ट्रेट में नौवहन की स्वतंत्रता किसी भी स्थिति में बाधित नहीं होनी चाहिए। UN ने सभी पक्षों से संयम बरतने और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने की अपील की है।

    इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर ईरान-अमेरिका संबंधों को तनावपूर्ण मोड़ पर ला दिया है, जहां एक ओर कूटनीतिक बातचीत जारी है, वहीं दूसरी ओर सैन्य और रणनीतिक तैयारी भी तेज होती दिख रही है।

  • ईरान का सख़्त संदेश: सरेंडर नहीं करेंगे, ट्रंप की धमकी पर राष्ट्रपति पेजेश्कियान का पलटवार

    ईरान का सख़्त संदेश: सरेंडर नहीं करेंगे, ट्रंप की धमकी पर राष्ट्रपति पेजेश्कियान का पलटवार



    नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के बीच ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने स्पष्ट कहा है कि उनका देश किसी भी हालत में सरेंडर नहीं करेगा। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों का जवाब देते हुए कहा कि बातचीत का मतलब झुकना नहीं होता, बल्कि अपने अधिकारों और गरिमा के साथ चर्चा करना होता है।

    राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि ईरान अपनी संप्रभुता और कानूनी अधिकारों से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि देश पूरी मजबूती और सम्मान के साथ बातचीत की प्रक्रिया में शामिल है, लेकिन दबाव या धमकी के आगे नहीं झुकेगा।

    इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया था कि खाड़ी देशों—कतर, सऊदी अरब और यूएई—के नेताओं के अनुरोध पर ईरान पर प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई को फिलहाल रोक दिया गया है। ट्रंप के अनुसार, इस समय क्षेत्र में शांति समझौते को लेकर गंभीर बातचीत चल रही है, लेकिन अगर डील नहीं होती है तो अमेरिका सैन्य विकल्पों के लिए तैयार है।

    ट्रंप ने यह भी कहा कि किसी भी समझौते में सबसे अहम शर्त यह होगी कि ईरान परमाणु हथियार विकसित न कर सके। उन्होंने अमेरिकी सेना को भी निर्देश दिया है कि जरूरत पड़ने पर कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार रहें।

    इस बीच ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा था कि समय तेजी से खत्म हो रहा है और अगर जल्द समझौता नहीं हुआ तो परिणाम गंभीर होंगे। वहीं, दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव के बावजूद कूटनीतिक बातचीत की संभावना अभी भी बनी हुई है।

    फिलहाल हालात यह हैं कि एक तरफ अमेरिका दबाव और चेतावनी की रणनीति अपना रहा है, तो दूसरी तरफ ईरान अपने रुख पर अडिग रहते हुए बातचीत को “सरेंडर नहीं” मानने की बात दोहरा रहा है।

  • ट्रंप की धमकी के बीच ईरान की बड़ी तैयारी, आम नागरिकों को दी जा रही हथियार चलाने की ट्रेनिंग

    ट्रंप की धमकी के बीच ईरान की बड़ी तैयारी, आम नागरिकों को दी जा रही हथियार चलाने की ट्रेनिंग



    नई दिल्ली(New Delhi)। 
    अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनावपूर्ण हालात के बीच ईरान की सैन्य तैयारियों को लेकर बड़े दावे सामने आए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (Islamic Revolutionary Guard Corps) द्वारा देशभर में आम नागरिकों को हथियार चलाने और सैन्य प्रशिक्षण दिए जाने की बातें सामने आ रही हैं।

    तेहरान सहित कई शहरों में कथित तौर पर सार्वजनिक स्थानों पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं, जहां महिलाओं, पुरुषों और युवाओं को हथियारों के उपयोग की जानकारी दी जा रही है। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी दावा किया गया है कि छोटी उम्र के बच्चों को भी प्रतीकात्मक रूप से हथियार चलाने का अभ्यास कराया गया।

    इसके साथ ही ईरानी सरकारी मीडिया से जुड़े कुछ वायरल वीडियो में एंकरों को हथियारों के साथ अभ्यास करते हुए दिखाया गया है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ी है।

    विशेषज्ञों के अनुसार यह घटनाक्रम उस व्यापक भू-राजनीतिक तनाव का हिस्सा है, जिसमें अमेरिका और ईरान दोनों एक-दूसरे पर दबाव बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं। रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक समाधान अभी भी अनिश्चित स्थिति में है।

    हालांकि इन सभी दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और सैन्य गतिविधियों के संकेतों ने वैश्विक स्तर पर चिंता जरूर बढ़ा दी है।

  • ईरान के राष्ट्रपति ने पोप लियो का किया धन्यवाद, अमेरिका-इजराइल हमलों के विरोध पर जताई सराहना, ट्रंप से बढ़ा विवाद

    ईरान के राष्ट्रपति ने पोप लियो का किया धन्यवाद, अमेरिका-इजराइल हमलों के विरोध पर जताई सराहना, ट्रंप से बढ़ा विवाद



    नई दिल्ली। तेहरान में एक बड़ा कूटनीतिक बयान सामने आया है, जहां ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने ईसाइयों के सबसे बड़े धर्मगुरु पोप लियो XIV को धन्यवाद दिया है। उन्होंने कहा कि पोप ने अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर किए गए सैन्य हमलों के खिलाफ जो नैतिक और निष्पक्ष रुख अपनाया है, वह सराहनीय है।

    ईरानी राष्ट्रपति के मुताबिक, पोप लियो ने लगातार ईरान पर हुए हमलों की आलोचना की है और इन्हें मानवता के खिलाफ बताया है। पेजेश्कियान ने कहा कि जब अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन करते हुए ईरान पर हमले किए गए, तब पोप ने सही और न्यायपूर्ण आवाज उठाई, जिसके लिए ईरान उनका आभारी है।

    रिपोर्ट्स के अनुसार, पोप लियो XIV ने अमेरिका और इजराइल के सैन्य हमलों को अस्वीकार्य बताते हुए कहा था कि इससे आम नागरिकों और बच्चों की मौत हो रही है, जो बेहद दुखद है। उन्होंने युद्ध के बजाय शांति और बातचीत की अपील की है। इसी रुख को लेकर उनकी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भी तनातनी देखने को मिली थी।

    ईरानी राष्ट्रपति ने अपने बयान में यह भी कहा कि इन हमलों में कई मासूम लोगों की जान गई, जिनमें दक्षिणी ईरान के मीनाब शहर के एक स्कूल के बच्चे भी शामिल थे। उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था और कानून के शासन को सीधी चुनौती देती है।

    इस बीच भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहली ने भी अमेरिका पर निशाना साधते हुए कहा कि मौजूदा वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था अब एक ही शक्ति के भरोसे नहीं चल सकती। उन्होंने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का जिक्र करते हुए कहा कि दुनिया अब बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ रही है, जहां किसी एक देश का दबदबा टिकाऊ नहीं है।

    कुल मिलाकर, पोप लियो के बयान और ईरान के समर्थन ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नया तनाव और बहस पैदा कर दी है, जिसमें अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच तनाव और बढ़ता नजर आ रहा है

  • ब्रिक्स बैठक में पश्चिम एशिया पर फूटा मतभेद, संयुक्त बयान अटका; 63 बिंदुओं का अलग दस्तावेज जारी

    ब्रिक्स बैठक में पश्चिम एशिया पर फूटा मतभेद, संयुक्त बयान अटका; 63 बिंदुओं का अलग दस्तावेज जारी



    नई दिल्ली। भारत की अध्यक्षता में हुई ब्रिक्स (BRICS) विदेश मंत्रियों की बैठक में पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को लेकर गंभीर मतभेद सामने आए, जिसके चलते इस बार कोई संयुक्त बयान जारी नहीं किया जा सका। बैठक में ईरान, इजरायल और अमेरिका से जुड़े मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच अलग-अलग राय देखने को मिली, जिससे साझा सहमति बनाना मुश्किल हो गया। इसके बाद अध्यक्ष की ओर से एक विस्तृत बयान जारी किया गया, जिसमें 63 बिंदुओं के जरिए सभी देशों के विचारों को शामिल किया गया।

    सूत्रों के अनुसार, बैठक में ईरान ने मांग रखी थी कि इजरायल और अमेरिका द्वारा किए गए हमलों की निंदा ब्रिक्स मंच से की जाए, लेकिन इस पर सभी सदस्य देश सहमत नहीं हो सके। कुछ देशों ने कहा कि किसी एक पक्ष को सीधे तौर पर निशाना बनाना कूटनीतिक संतुलन के खिलाफ होगा, जबकि अन्य देशों ने क्षेत्रीय तनाव को देखते हुए सख्त रुख अपनाने की वकालत की।

    इसी असहमति के कारण संयुक्त बयान पर सहमति नहीं बन सकी। बाद में जारी अध्यक्षीय बयान में कहा गया कि पश्चिम एशिया की स्थिति पर सदस्य देशों के विचार अलग-अलग हैं, लेकिन सभी देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि संकट का समाधान संवाद और कूटनीति के जरिए ही संभव है। बयान में अंतरराष्ट्रीय कानून, संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के सम्मान पर भी जोर दिया गया।

    बयान में यह भी कहा गया कि ब्रिक्स देशों ने एकतरफा प्रतिबंधों और अंतरराष्ट्रीय कानून के विपरीत दंडात्मक उपायों की आलोचना की है। साथ ही मानवीय संकटों से निपटने के लिए वैश्विक सहयोग को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया गया। बैठक में फलस्तीन के मुद्दे पर भी चर्चा हुई, जिसमें 1967 की सीमाओं के आधार पर स्वतंत्र फलस्तीन राज्य के समर्थन की बात दोहराई गई।

    इस तरह पश्चिम एशिया के संवेदनशील मुद्दों पर अलग-अलग दृष्टिकोण के कारण ब्रिक्स बैठक में एकजुटता की कमी दिखी, हालांकि संवाद और शांति की आवश्यकता पर सभी देशों ने सहमति व्यक्त की।

  • ईरान का बड़ा बयान: हमला हुआ तो बढ़ेगा परमाणु कार्यक्रम, 90% तक यूरेनियम संवर्धन की दी चेतावनी

    ईरान का बड़ा बयान: हमला हुआ तो बढ़ेगा परमाणु कार्यक्रम, 90% तक यूरेनियम संवर्धन की दी चेतावनी



    नई दिल्ली। ईरान ने साफ संकेत दिए हैं कि अगर अमेरिका या इजरायल उसकी जमीन पर दोबारा सैन्य कार्रवाई करते हैं तो वह अपने परमाणु कार्यक्रम को और तेज कर सकता है, जिसमें यूरेनियम संवर्धन को 90 प्रतिशत शुद्धता तक बढ़ाने का विकल्प शामिल है। इसे परमाणु हथियार-स्तर के बेहद करीब माना जाता है।

    यह बयान ईरान की संसद से जुड़े एक प्रवक्ता इब्राहिम रेजाई की ओर से सामने आया है, जिन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि किसी भी नए हमले की स्थिति में देश के पास अपने परमाणु विकल्पों को और मजबूत करने के अलावा अन्य रास्ते भी होंगे और इस पर संसद में चर्चा की जाएगी।

    यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब पश्चिम एशिया में पहले से ही तनाव बना हुआ है और अमेरिका व इजरायल की संभावित कार्रवाई को लेकर अटकलें तेज हैं। दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसे परमाणु अप्रसार समझौते के संदर्भ में गंभीर संकेत माना जा रहा है।

  • ऑपरेशन ‘एपिक फ्यूरी’ के बाद अमेरिका का बड़ा वार, ईरान की मदद करने पर चीनी कंपनियों पर लगाए सख्त प्रतिबंध

    ऑपरेशन ‘एपिक फ्यूरी’ के बाद अमेरिका का बड़ा वार, ईरान की मदद करने पर चीनी कंपनियों पर लगाए सख्त प्रतिबंध



    नई दिल्ली। ऑपरेशन ‘एपिक फ्यूरी’ के बाद अमेरिका ने ईरान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव और बढ़ा दिया है, जिसके तहत ईरान को तकनीकी और सैन्य सहायता देने के आरोप में तीन चीनी कंपनियों पर कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं। वॉशिंगटन का कहना है कि इन कंपनियों ने सैटेलाइट इमेजरी और डेटा उपलब्ध कराकर मध्य पूर्व में अमेरिकी और सहयोगी सैन्य ठिकानों की सुरक्षा को खतरे में डाला।

    अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार प्रतिबंधित कंपनियों में चीन की हैंगझोउ स्थित “मीएन्ट्रॉपी टेक्नोलॉजी (जिसे मिजारविजन भी कहा जाता है)”, बीजिंग की “द अर्थ आई” और “चांग गुआंग सैटेलाइट टेक्नोलॉजी कंपनी” शामिल हैं। अमेरिका का दावा है कि इन कंपनियों ने या तो ओपन-सोर्स सैटेलाइट तस्वीरें जारी कीं या सीधे ईरान को संवेदनशील सैन्य लोकेशन की इमेजरी उपलब्ध कराई।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन सैटेलाइट तस्वीरों का इस्तेमाल कथित तौर पर मध्य पूर्व में अमेरिकी सेना और उसके सहयोगी ठिकानों की गतिविधियों पर नजर रखने और संभावित हमलों की योजना बनाने में किया गया। हालांकि चीन और संबंधित कंपनियों की ओर से इन आरोपों पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।

    अमेरिका ने यह भी दावा किया है कि इनमें से एक कंपनी पर पहले भी प्रतिबंध लगाए जा चुके हैं, क्योंकि उस पर यमन में हूती विद्रोहियों को अमेरिकी सैन्य ठिकानों की जानकारी देने का आरोप था।

    इसके साथ ही अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने ईरान, चीन, बेलारूस और यूएई से जुड़े 10 व्यक्तियों और संस्थाओं पर भी कार्रवाई की है, जिन पर ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रमों के लिए तकनीक और कच्चा माल उपलब्ध कराने का आरोप है।

    वॉशिंगटन ने साफ किया है कि वह ईरान के सैन्य और परमाणु नेटवर्क को फिर से मजबूत होने से रोकने के लिए ऐसे प्रतिबंधों को आगे भी जारी रखेगा और अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन करने वाली किसी भी संस्था पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।