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  • ईरान पर परमाणु हथियार इस्तेमाल नहीं करेंगे ट्रंप, जमीनी सेना भेजने से भी किया इनकार, हमलों के लिए नए विकल्पों पर विचार

    ईरान पर परमाणु हथियार इस्तेमाल नहीं करेंगे ट्रंप, जमीनी सेना भेजने से भी किया इनकार, हमलों के लिए नए विकल्पों पर विचार


    नई दिल्ली ।अमेरिका और ईरान के बीच मध्य पूर्व में जारी संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सैन्य कार्रवाई को लेकर अपना रुख स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ परमाणु हथियारों का इस्तेमाल नहीं करेगा। इसके साथ ही उन्होंने ईरान की जमीन पर अमेरिकी सैनिकों को तैनात करने की संभावना से भी इनकार किया है। हालांकि, ईरान के ऊर्जा ढांचे और परमाणु ठिकानों को निशाना बनाने के लिए अमेरिकी सैन्य स्तर पर नए विकल्पों पर विचार किए जाने की जानकारी सामने आई है।

    ट्रंप ने एक साक्षात्कार के दौरान परमाणु हथियारों के इस्तेमाल से जुड़े सवाल पर कहा कि उन्हें इसकी जरूरत नहीं है और वह ईरान के खिलाफ परमाणु हथियारों का इस्तेमाल नहीं करेंगे। उनसे यह भी पूछा गया कि क्या अमेरिका ईरान की जमीन पर अपने सैनिक भेजने पर विचार कर रहा है। इस पर उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसा होता नहीं दिख रहा। उनके इस बयान से फिलहाल परमाणु हथियारों के इस्तेमाल और जमीनी सैनिकों की तैनाती को लेकर अमेरिकी प्रशासन की घोषित स्थिति सामने आई है।

    ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई को लेकर पारंपरिक हथियारों के इस्तेमाल पर भी चर्चा हो रही है। सामने आई जानकारी के मुताबिक, अमेरिकी सैन्य योजना से जुड़े अधिकारियों ने बताया है कि ट्रंप ने ईरान पर नए हमलों के विकल्प तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इन विकल्पों में ईरान के ऊर्जा ढांचे और परमाणु ठिकानों को निशाना बनाने की योजनाएं शामिल हैं। इनमें अमेरिका के शक्तिशाली गैर-परमाणु बम एमओएबी का इस्तेमाल भी एक संभावित विकल्प बताया गया है।

    एमओएबी को आम तौर पर ‘मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स’ कहा जाता है। यह एक शक्तिशाली पारंपरिक बम है, परमाणु हथियार नहीं। ट्रंप ने भी बातचीत के दौरान इसी अंतर को स्पष्ट किया। परमाणु हथियारों के इस्तेमाल से इनकार करने के बावजूद, ईरान के खिलाफ पारंपरिक हथियारों से संभावित हमलों के विकल्पों पर विचार किए जाने की जानकारी सामने आई है।

    ईरान के पिकैक्स माउंटेन क्षेत्र में स्थित ठिकाने को निशाना बनाने का विचार भी चर्चा में है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देना चाहता। उन्होंने दावा किया कि पहले किए गए अमेरिकी हमलों में ईरान के परमाणु ठिकानों को नुकसान पहुंचा है। उनके अनुसार, ईरान की कुछ परमाणु सुविधाएं पहाड़ों के नीचे स्थित हैं। इसी संदर्भ में पिकैक्स माउंटेन पर हमले की संभावना पर विचार किए जाने की बात कही गई है।

    हालांकि, उपलब्ध जानकारी से यह स्पष्ट नहीं है कि इन संभावित सैन्य विकल्पों में से किसी को अंतिम मंजूरी दी गई है या नहीं। फिलहाल नए हमलों की योजनाएं तैयार करने और विभिन्न विकल्पों पर विचार किए जाने की बात सामने आई है। इसलिए संभावित कार्रवाई और वास्तविक रूप से किए गए हमलों के बीच अंतर करना महत्वपूर्ण है।

    ट्रंप ने बातचीत के दौरान अमेरिका, रूस और चीन के परमाणु हथियार भंडार का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका के पास दुनिया का सबसे बड़ा परमाणु हथियार भंडार है, जबकि रूस दूसरे और चीन तीसरे स्थान पर है। उन्होंने यह भी कहा कि चीन अगले पांच वर्षों में अमेरिका के करीब पहुंच सकता है। यह उनका आकलन है, न कि भविष्य की स्थिति का स्वतंत्र रूप से प्रमाणित निष्कर्ष।

    अमेरिकी राष्ट्रपति के मुताबिक, अमेरिका रूस और चीन के साथ परमाणु हथियारों में कमी लाने को लेकर बातचीत कर रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इन चर्चाओं के जरिए परमाणु हथियारों को समाप्त करने की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं। इस तरह ट्रंप के बयान में एक ओर ईरान के खिलाफ परमाणु हथियारों और जमीनी सैनिकों के इस्तेमाल से इनकार किया गया है, वहीं दूसरी ओर संभावित पारंपरिक सैन्य कार्रवाई और वैश्विक परमाणु हथियारों में कमी को लेकर बातचीत का उल्लेख भी किया गया है।

  • ट्रंप का बड़ा ऐलान… बोले- 3 नवंबर के मध्यावधि चुनाव से पहले ईरान पर नहीं करेंगे हमला

    ट्रंप का बड़ा ऐलान… बोले- 3 नवंबर के मध्यावधि चुनाव से पहले ईरान पर नहीं करेंगे हमला


    वाशिंगटन।
    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) ने गुरुवार को ऐलान किया तीन नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनाव (Mid-term Election) से पहले अमेरिका (America) ईरान (Iran) पर फिर से हमला नहीं करेगा। रिपब्लिकन उम्मीदवारों के लिए इस सप्ताह प्रचार करते हुए ट्रंप ने संकेत दिया था कि उन्हें भरोसा है कि युद्ध का निर्णायक दौर चुनाव से पहले या उसके तत्काल बाद खत्म हो सकता है।

    उन्होंने यह भी संकेत दिया था कि उन्होंने ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान फिर शुरू करने के विकल्प को खुला रखा है। हालांकि, ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा कि अमेरिका तीन नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनाव से पहले ईरान पर हमला नहीं करेगा।

    इससे पहले, व्हाइट हाउस ने अमेरिकी रक्षा विभाग को मध्यावधि कांग्रेसी चुनावों से पहले ईरान पर हमले के विकल्प तैयार करने का निर्देश दिया था। ‘द अटलांटिक’ ने प्रशासन के दो अधिकारियों के हवाले से बुधवार को एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी थी। ट्रंप ने मंगलवार को कहा था कि अमेरिका को ईरान के साथ चल रहे टकराव को “अच्छे तरीके से या बुरे तरीके से” खत्म करना होगा।

    रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी केन्द्रीय कमान (सेंटकॉम) इन योजनाओं को तैयार कर रहा है और संभावित हमलों के दायरे और उद्देश्यों पर चर्चा अभी भी जारी है। रिपोर्टों के मुताबिक यह कदम मध्यावधि चुनावों से पहले पेट्रोल की कीमतें कम करने और टकराव के मामले में प्रगति हासिल करने की ट्रंप की इच्छा को दर्शाता है।

    ईरान ने परमाणु उद्योग की गतिविधियां नहीं रोकी
    वहीं, ईरान ने अपने परमाणु उद्योग की गतिविधियां बंद नहीं की हैं। ईरान के उपराष्ट्रपति और परमाणु ऊर्जा संगठन (एईओआई) के प्रमुख मोहम्मद इस्लामी ने बुधवार को यह बात कही। एईओआई के अनुसार, इस्लामी ने तेहरान में बाल कैंसर के निदान एवं उपचार केंद्र के उद्घाटन के अवसर पर कहा, “ईरान के परमाणु उद्योग पर दबाव, प्रतिबंध, धमकियां और हमले किए जा रहे हैं, लेकिन ईरान अपने विकास को बनाए रखने में सफल रहा है।”

    उन्होंने कहा कि एईओआई में स्वास्थ्य सेवा और खाद्य सुरक्षा को ईरान के विकास के लिए रणनीतिक प्राथमिकताओं के रूप में देखा जाता है। तमाम दबावों और प्रतिबंधों के बावजूद संगठन अपने विकास कार्यों को जारी रखे हुए है। इस्लामी ने कहा कि दबाव के साथ-साथ ईरान के खिलाफ आरोप भी लगाए जा रहे हैं। आरोप लगाने वाले भी जानते हैं कि ये वास्तविकता को प्रतिबिंबित नहीं करते। इसके बावजूद ईरान के परमाणु उद्योग के कर्मचारी अपने दायित्वों का उचित तरीके से निर्वहन कर रहे हैं।

  • ईरान में ‘लेडी गुरिल्ला’ की तैयारी! अमेरिका-इजरायल से जंग के लिए महिलाओं को हथियार चलाने की ट्रेनिंग

    ईरान में ‘लेडी गुरिल्ला’ की तैयारी! अमेरिका-इजरायल से जंग के लिए महिलाओं को हथियार चलाने की ट्रेनिंग


    वाशिंगटन।
    अमेरिका और इजरायल के साथ बढ़ते तनाव के बीच ईरान महिलाओं को सैन्य प्रशिक्षण दे रहा है। तेहरान में हिजाब और बुर्का पहने महिलाओं को स्वचालित राइफल, पिस्टल और रॉकेट लॉन्चर चलाने का अभ्यास कराया जा रहा है। ईरान की इस पहल को संभावित युद्ध की स्थिति में जमीनी हमले से निपटने की तैयारी के तौर पर देखा जा रहा है।

    ईरान और अमेरिका के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास सैन्य गतिविधियां बढ़ने और दोनों पक्षों की ओर से एक-दूसरे को चेतावनी दिए जाने के बीच तेहरान में महिलाओं की सैन्य ट्रेनिंग की तस्वीरें सामने आई हैं। राजधानी के इमाम हुसैन स्क्वायर में महिलाओं को हथियारों के साथ निशानेबाजी का अभ्यास करते देखा गया।

    राइफल से लेकर रॉकेट लॉन्चर तक की ट्रेनिंग

    तेहरान के सैन्य प्रशिक्षण केंद्र में ईरानी महिलाओं को स्वचालित राइफल चलाने के साथ-साथ छोटी पिस्टल और रॉकेट लॉन्चर के इस्तेमाल का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। प्रशिक्षण के दौरान महिलाएं कमांडो प्रशिक्षकों के निर्देशों का पालन करती नजर आती हैं।

    उन्हें बताया जा रहा है कि अगर अमेरिका या इजरायल की ओर से जमीनी सैनिक ईरान में प्रवेश करते हैं तो ऐसी स्थिति में किस तरह मुकाबला किया जा सकता है। प्रशिक्षण का जोर केवल हथियार चलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं को आपातकालीन परिस्थितियों में अपने परिवार और आसपास के इलाके की रक्षा के लिए तैयार करने पर भी है।

    ईरानी महिला राहेलेह गदीरी ने कहा कि यह कहना कि किसी व्यक्ति को बिल्कुल डर नहीं लगता, सही नहीं होगा। लेकिन अगर लोग पहले से तैयार हों और उन्हें आपातकालीन या युद्ध जैसी परिस्थितियों में दुश्मन का सामना करने तथा अपने परिवार और मोहल्ले की रक्षा करने का तरीका पता हो, तो डर और घबराहट का असर कम किया जा सकता है।

    ‘ईरान को गौरवान्वित करने के लिए तैयार’

    गदीरी ने कहा कि वे व्यवस्था और अपने नेता के साथ खड़ी हैं और हर क्षेत्र में ईरान को फिर से गौरवान्वित करने के लिए प्रयास कर रही हैं।

    उन्होंने कहा कि अगर इस बार वास्तव में युद्ध होता है तो उनकी इच्छा है कि यह निर्णायक युद्ध साबित हो और दुश्मनों की हार हो। उन्होंने ईरान के गौरव को बनाए रखने की बात भी कही।

    IRGC और बसीज की निगरानी में तैयारी

    ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) और बसीज रेजिस्टेंस फोर्स से जुड़े ढांचे के तहत महिलाओं को हथियारों की ट्रेनिंग दिए जाने की बात सामने आई है।

    ईरानी सुरक्षा तंत्र की सोच यह है कि अगर किसी विदेशी सेना की ईरान में जमीनी घुसपैठ होती है तो स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित नागरिक बल प्रतिरोध में भूमिका निभा सकते हैं। इसी रणनीति के तहत महिलाओं को भी हथियार चलाने और संभावित गुरिल्ला संघर्ष के लिए तैयार किया जा रहा है।

    ईरान में महिलाओं पर सामाजिक और कानूनी पाबंदियों को लेकर लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस होती रही है। ऐसे में सैन्य प्रशिक्षण में महिलाओं की भागीदारी की ये तस्वीरें ईरान की युद्धकालीन तैयारियों के एक अलग पहलू को सामने लाती हैं।

  • ईरान से कारोबार करने वाले विदेशी वित्तीय संस्थानों पर अमेरिका की सख्ती, बिना चेतावनी कार्रवाई की चेतावनी

    ईरान से कारोबार करने वाले विदेशी वित्तीय संस्थानों पर अमेरिका की सख्ती, बिना चेतावनी कार्रवाई की चेतावनी


    वाशिंगटन।
    ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाते हुए अमेरिका ने उन विदेशी वित्तीय संस्थानों को चेतावनी दी है, जो अब भी ईरान या उसके वित्तीय क्षेत्र के साथ कारोबार कर रहे हैं। अमेरिकी वित्त विभाग ने कहा है कि प्रतिबंधित ईरानी वित्तीय संस्थानों के साथ लेन-देन जारी रखने वाले विदेशी संस्थानों पर बिना किसी पूर्व सूचना के कार्रवाई की जा सकती है।

    अमेरिकी वित्त विभाग के मुताबिक, विदेशी वित्तीय संस्थानों को ईरान से जुड़े ऐसे कारोबारी संबंधों और गतिविधियों को तत्काल समाप्त करने की दिशा में कदम उठाने चाहिए। खास तौर पर प्रतिबंधित ईरानी संस्थाओं से जुड़े लेन-देन अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में आने पर संबंधित विदेशी संस्थानों के लिए जोखिम बढ़ सकता है।

    अमेरिकी वित्तीय व्यवस्था से कटने का खतरा

    अमेरिकी ट्रेजरी ने हालिया कार्रवाई में ईरान से जुड़े वित्तीय नेटवर्क और प्रतिबंधों से बचने के लिए इस्तेमाल होने वाले चैनलों को निशाना बनाया है। विभाग ने कहा है कि ईरान की ओर से प्रतिबंधों से बचने या अवैध वित्तीय गतिविधियों को सुविधा देने वाले संस्थानों पर कार्रवाई की जा सकती है।

    अमेरिका ने यह भी स्पष्ट किया है कि कुछ परिस्थितियों में विदेशी वित्तीय संस्थानों पर द्वितीयक प्रतिबंध (Secondary Sanctions) लगाए जा सकते हैं। इसके तहत अमेरिकी अधिकारियों के पास ऐसे विदेशी संस्थानों के अमेरिका में कॉरेस्पॉन्डेंट या पेयेबल-थ्रू खातों पर रोक लगाने या कड़ी शर्तें लगाने का अधिकार है, यदि वे प्रतिबंधित व्यक्तियों या संस्थाओं की ओर से महत्वपूर्ण लेन-देन जानबूझकर करते या करवाते हैं।

    ईरान की आर्थिक गतिविधियों पर बढ़ रहा दबाव

    अमेरिकी वित्त विभाग ने हाल के दिनों में ईरान के खिलाफ अपनी कार्रवाई तेज की है। 1 अक्टूबर को अमेरिका ने ईरान से जुड़े एक शैडो बैंकिंग नेटवर्क को निशाना बनाते हुए उसके खिलाफ प्रतिबंध लगाए और वित्तीय संस्थानों को उससे संबंधित संदिग्ध गतिविधियों की पहचान तथा रिपोर्टिंग के लिए अलर्ट जारी किया। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इस नेटवर्क के जरिए ईरान और अन्य प्रतिबंधित पक्षों के लिए अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था तक पहुंच बनाने की कोशिश की जा रही थी।

    अमेरिकी ट्रेजरी की हालिया कार्रवाई से संकेत मिलता है कि वाशिंगटन सिर्फ ईरानी संस्थाओं को ही नहीं, बल्कि ईरान के साथ कारोबार को वित्तीय रूप से संभव बनाने वाले विदेशी नेटवर्क और संस्थानों पर भी दबाव बढ़ा रहा है।

  • ईरान के तेल मंत्री मोहसिन पाकनेजाद ने दिया इस्तीफा, राष्ट्रपति ने स्वीकार किया, हमीद बोवार्ड को मिली कार्यवाहक जिम्मेदारी

    ईरान के तेल मंत्री मोहसिन पाकनेजाद ने दिया इस्तीफा, राष्ट्रपति ने स्वीकार किया, हमीद बोवार्ड को मिली कार्यवाहक जिम्मेदारी

    नई दिल्ली ।ईरान के तेल मंत्री मोहसिन पाकनेजाद ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। पाकनेजाद अगस्त 2024 से ईरान के तेल मंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे थे। उनके इस्तीफे के बाद सरकारी स्वामित्व वाली नेशनल ईरानी ऑयल कंपनी के प्रमुख हमीद बोवार्ड को कार्यवाहक तेल मंत्री नियुक्त किया गया है। इस बदलाव की जानकारी सरकारी मीडिया के माध्यम से सामने आई है। हालांकि, शुरुआत में इस्तीफे के पीछे किसी विशेष वजह की जानकारी नहीं दी गई थी।

    बाद में राष्ट्रपति कार्यालय के संचार उप प्रमुख मेहदी तबताबाई ने सरकारी टेलीविजन को बताया कि पाकनेजाद ने व्यक्तिगत कारणों से काफी पहले ही अपना इस्तीफा दे दिया था। उनके अनुसार, यह इस्तीफा हाल में लिया गया अचानक फैसला नहीं था। हालांकि, पाकनेजाद के पद छोड़ने के बारे में आधिकारिक तौर पर किसी अन्य विशेष कारण का खुलासा नहीं किया गया है। इस तरह फिलहाल सामने आई जानकारी में उनके इस्तीफे को व्यक्तिगत कारणों से जोड़ा गया है और किसी दूसरे कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

    मोहसिन पाकनेजाद ने अगस्त 2024 में ईरान के तेल मंत्री का पद संभाला था। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने देश के तेल राजस्व को लेकर भी बयान दिए थे। इस्तीफा देने से पहले उन्होंने कहा था कि ईरान की ओर से बेचे जा रहे तेल से प्राप्त होने वाली आय देश को मिल रही है और भविष्य में भी इसके जारी रहने की उम्मीद है। ईरान तेल उत्पादक देशों के समूह ओपेक का सदस्य है और उसकी अर्थव्यवस्था में तेल से होने वाली आय का महत्वपूर्ण स्थान है। पाकनेजाद के इस्तीफे के बाद अब मंत्रालय की जिम्मेदारी फिलहाल हमीद बोवार्ड संभालेंगे।

    हमीद बोवार्ड इससे पहले सरकारी स्वामित्व वाली नेशनल ईरानी ऑयल कंपनी के प्रमुख के रूप में काम कर रहे थे। उन्हें अब कार्यवाहक तेल मंत्री की जिम्मेदारी दी गई है। इस नियुक्ति के साथ वह फिलहाल तेल मंत्रालय का कामकाज संभालेंगे। पाकनेजाद के इस्तीफे को राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद यह प्रशासनिक बदलाव हुआ है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि कार्यवाहक व्यवस्था कितने समय तक जारी रहेगी या आगे तेल मंत्री के पद पर स्थायी नियुक्ति को लेकर क्या फैसला लिया जाएगा।

    पाकनेजाद का इस्तीफा ऐसे समय में सामने आया है, जब ईरान की अर्थव्यवस्था पर अमेरिका के साथ सात महीने से जारी युद्ध और उससे जुड़े दबावों का असर बताया जा रहा है। देश की आर्थिक स्थिति पर इन परिस्थितियों के प्रभाव के बीच तेल मंत्रालय में यह बदलाव हुआ है। हालांकि, इस्तीफे और ईरान-अमेरिका संघर्ष के बीच किसी सीधे संबंध की आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सरकार की ओर से पाकनेजाद के पद छोड़ने की वजह के तौर पर व्यक्तिगत कारणों का उल्लेख किया गया है। फिलहाल हमीद बोवार्ड कार्यवाहक तेल मंत्री के रूप में मंत्रालय की जिम्मेदारी संभालेंगे।

  • UN महासभा के बाद भी न्यूयॉर्क में रुके दो ईरानी राजनयिकों को अमेरिका ने देश छोड़ने के आदेश की अनदेखी पर निकाला

    UN महासभा के बाद भी न्यूयॉर्क में रुके दो ईरानी राजनयिकों को अमेरिका ने देश छोड़ने के आदेश की अनदेखी पर निकाला


    नई दिल्ली ।
    अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में शामिल होने के लिए न्यूयॉर्क पहुंचे ईरान के दो राजनयिकों को देश से बाहर कर दिया है। दोनों राजनयिक महासभा का सत्र समाप्त होने के बाद भी न्यूयॉर्क में रुके हुए थे। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, उन्हें पहले ही अमेरिका छोड़ने के लिए कहा गया था, लेकिन दोनों ने इन निर्देशों का पालन नहीं किया। इसके बाद उनके खिलाफ देश से निष्कासन की कार्रवाई की गई।

    बताया गया कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल के दोनों सदस्य संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाग लेने के लिए अमेरिका आए थे। अमेरिकी विदेश विभाग ने सोमवार को न्यूयॉर्क स्थित ईरानी मिशन को निर्देश दिया था कि महासभा में शामिल होने आए प्रतिनिधिमंडल के सभी सदस्य अमेरिका से रवाना हो जाएं। इसके बावजूद प्रतिनिधिमंडल के दो सदस्य महासभा समाप्त होने के काफी समय बाद तक न्यूयॉर्क में मौजूद रहे। इसी वजह से उन्हें अमेरिका से बाहर भेजने की कार्रवाई की गई।

    अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, दोनों राजनयिकों में से एक शुक्रवार रात न्यूयॉर्क से रवाना हुआ, जबकि दूसरा शनिवार सुबह वहां से गया। अधिकारियों ने बताया कि अमेरिका की ओर से दिए गए रवाना होने के आदेश की अनदेखी के कारण दोनों के खिलाफ कार्रवाई हुई। इस मामले में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के निर्देशों का भी उल्लेख किया गया है। अधिकारी ने कहा कि विदेश मंत्री अपने फैसले पर कायम हैं और ईरानी प्रतिनिधिमंडल के दोनों सदस्यों को अब अमेरिका से निकाल दिया गया है।

    यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बना हुआ है और पश्चिम एशिया में सैन्य टकराव का खतरा बढ़ने की बात सामने आ रही है। दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका की ओर से ईरानी राजनयिकों को देश से बाहर करना एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कार्रवाई का तत्काल कारण महासभा समाप्त होने के बाद भी दोनों राजनयिकों का न्यूयॉर्क में मौजूद रहना और अमेरिका छोड़ने के निर्देश का पालन नहीं करना था।

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस घटनाक्रम के बीच ईरान को लेकर कड़ा रुख जाहिर किया है। उन्होंने ईरान की सैन्य और आर्थिक स्थिति को बेहद कमजोर बताया और संघर्ष जल्द खत्म होने का दावा किया। इसके साथ ही उन्होंने ईरान के लिए सख्त चेतावनी भी दी। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ईरानी प्रतिनिधिमंडल के दोनों सदस्यों को पहले ही देश छोड़ने का निर्देश दिया गया था, लेकिन उनके न्यूयॉर्क में बने रहने के कारण उन्हें अब अमेरिका से बाहर कर दिया गया है।

    अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा ईरानी मिशन को दिए गए निर्देश और उसके बाद हुई निष्कासन की कार्रवाई से यह स्पष्ट है कि मामला केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा। महासभा में भाग लेने के बाद ईरानी प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों की अमेरिका में मौजूदगी को लेकर दिए गए निर्देशों के पालन पर कार्रवाई की गई। दोनों राजनयिकों के अमेरिका से रवाना होने के साथ यह घटनाक्रम समाप्त हुआ, जबकि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है।

  • होर्मुज स्‍ट्रेट में अमेरिका के पसीने छुड़ा रहा ईरान…. 72 घंटे में 5 जहाजों पर किया हमला

    होर्मुज स्‍ट्रेट में अमेरिका के पसीने छुड़ा रहा ईरान…. 72 घंटे में 5 जहाजों पर किया हमला


    तेहरान।
    लाल सागर (Red Sea) की तरफ से हूती (Houthis) और फारस की खाड़ी (Persian Gulf) से लेकर ओमान की खाड़ी तक ईरान (Iran) गदर मचाए हुए हैं. ताबड़तोड़ हमले से अमेरिका (America) और उसके सहयोगियों के माथे से पसीना निकल रहा है. ईरान ने खासकर होर्मुज स्‍ट्रेट (Strait of Hormuz) को श्‍मशान बना रखा है. दुनिया का एनर्जी कॉरिडोर कहे जाने वाला होर्मुज अमेरिका और ईरान की पंजे में फंसकर फड़फड़ा है. अब ईरान की तरफ से होर्मुज स्‍ट्रेट में एक बार फिर से हमला करने की खबर है।

    बताया जा रहा है कि ईरानी हमले का शिकार बने जहाज में आग लग गई है. पिछले 72 घंटे में 5 जहाजों पर अटैक किया गया है. पहले से ही वीरान हो चुके होर्मुज से अब हर कोई गुजरने से डर रहा है. अमेरिका ने इस समुद्री गलियारे में पूर्ण सुरक्षा देने का भरोसा दिलाया था, लेकिन तेल, गैस और अन्‍य जरूरी सामानों से लदे टैंकर्स को लगातार निशाना बनाया जा रहा है. ईरान जंग शुरू होने के बाद से होर्मुज स्‍ट्रेट से तेल और गैस लदे जहाजों की आवाजाही न के बराबर रह गई है।

    ओमान के पास रणनीतिक रूप से महत्‍वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य में एक और टैंकर पर हमला किए जाने की खबर है, जिसके बाद जहाज में आग लग गई. ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा एजेंसी UKMTO ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि चालक दल सुरक्षित है, जबकि जहाज को हुए नुकसान का तत्काल पता नहीं चल सका है. ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी फार्स ने स्थानीय सूत्रों के हवाले से बताया कि करीब 25 लाख बैरल क्षमता वाला सुपरटैंकर ओमान के तट से लगभग 8 किलोमीटर दूर प्रभावित हुआ है. हालांकि, हमले के लिए जिम्मेदारी की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. यह घटना ऐसे समय हुई है जब 29 सितंबर को तीन टैंकरों को निशाना बनाए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी. इससे क्षेत्र में कमर्शियल जहाजों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।


    ईरान में एंटी टेररिस्‍ट ऑपरेशन

    ईरान के दक्षिण-पूर्वी शहर जाहेदान में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने एक अभियान चलाकर 6 आतंकवादियों को मार गिराने का दावा किया है. अभियान के दौरान कई विस्फोटक उपकरण भी बरामद किए गए. ईरानी सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, क्षेत्र में हाल के हफ्तों में सुरक्षा बलों पर हमलों में वृद्धि हुई है, जिसके बाद आतंकवादी गतिविधियों के खिलाफ अभियान तेज किया गया है. IRGC के करीबी एक ईरानी सूत्र ने अभियान की जानकारी साझा की. हालांकि, मारे गए लोगों की पहचान और उनके किसी संगठन से जुड़े होने के संबंध में तत्काल विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है. जाहेदान और ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत के कुछ हिस्सों में सुरक्षा स्थिति लंबे समय से संवेदनशील रही है. अधिकारियों ने क्षेत्र में सुरक्षा अभियानों और निगरानी को बढ़ाया है।

    अमेरिका ने ईरान के खिलाफ सैन्य दबाव बढ़ाते हुए मध्य पूर्व में अपनी सैन्य मौजूदगी मजबूत करनी शुरू कर दी है. अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यूएसएस मेकिन आइलैंड एम्फीबियस रेडी ग्रुप करीब 2,000 मरीन के साथ क्षेत्र की ओर रवाना हुआ है. इस बल में उभयचर अभियानों के लिए प्रशिक्षित 13वीं मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट शामिल है. इसके अलावा यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप भी मध्य पूर्व की ओर बढ़ रहा है. इससे क्षेत्र में अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर की संख्या तीन तक पहुंच सकती है. कुल अमेरिकी सैन्य मौजूदगी में करीब 9,000 अतिरिक्त सैनिक शामिल हो सकते हैं. इसी बीच सऊदी अरब और कतर में ऊर्जा प्रतिष्ठानों की सुरक्षा के लिए दो अतिरिक्त पैट्रियट मिसाइल बैटरियां तैनात की गई हैं. यह कदम ईरान की संभावित जवाबी कार्रवाई की आशंका के बीच उठाया गया है।

  • ईरान ने UN पर कसा शोले के ठाकुर वाला तंज, मीम में बताया निहत्था और बेबस, सोशल मीडिया पर चर्चा तेज

    ईरान ने UN पर कसा शोले के ठाकुर वाला तंज, मीम में बताया निहत्था और बेबस, सोशल मीडिया पर चर्चा तेज

    नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनातनी के बीच ईरान ने अब संयुक्त राष्ट्र पर भी तंज कसा है। भारत में स्थित ईरानी दूतावास की ओर से सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक मीम में बॉलीवुड की चर्चित फिल्म शोले के किरदार ठाकुर बलदेव सिंह की तस्वीर का इस्तेमाल किया गया। इस मीम के जरिए संयुक्त राष्ट्र की वास्तविक प्रभावशीलता पर सवाल उठाने की कोशिश की गई है।

    ईरान पहले भी मीम के जरिए अमेरिका और उसके सहयोगियों पर निशाना साधता रहा है। अलग-अलग देशों में मौजूद ईरानी दूतावासों की ओर से सोशल मीडिया पर कई बार ऐसे पोस्ट साझा किए गए हैं, जिनमें राजनीतिक घटनाक्रम को हास्य और लोकप्रिय संस्कृति से जोड़कर संदेश देने की कोशिश की गई। इस बार संयुक्त राष्ट्र को निशाना बनाने के लिए भारतीय सिनेमा के बेहद चर्चित किरदार ठाकुर को चुना गया।

    मंगलवार को साझा किए गए इस मीम में दो अलग-अलग तस्वीरें दिखाई गई हैं। पहली तस्वीर में मार्वल के सुपरहीरो डॉक्टर स्ट्रेंज को दिखाया गया है, जिसके कई हाथ नजर आते हैं। इस तस्वीर के साथ लिखा गया है, “स्कूल की किताबों के मुताबिक यूएन।” इसके जरिए यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि आम तौर पर संयुक्त राष्ट्र को एक ऐसी शक्तिशाली वैश्विक संस्था के रूप में देखा जाता है, जो अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय मामलों में हस्तक्षेप करने और कार्रवाई करने की क्षमता रखती है।

    दूसरी तस्वीर में 1975 में रिलीज हुई चर्चित फिल्म शोले के किरदार ठाकुर बलदेव सिंह को दिखाया गया है। फिल्म की कहानी में ठाकुर के दोनों हाथ कटे हुए होते हैं। इसी तस्वीर का इस्तेमाल करते हुए मीम में लिखा गया है, “वास्तविकता में UN।” इसके माध्यम से संयुक्त राष्ट्र की वास्तविक स्थिति को एक ऐसे किरदार से जोड़ने की कोशिश की गई है, जिसके पास अपने हाथ नहीं हैं और जो परिस्थितियों के सामने असहाय नजर आता है।

    ईरान ने यह मीम ऐसे समय में साझा किया है, जब न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा का 81वां सत्र चल रहा है। इसी दौरान वैश्विक स्तर पर कई गंभीर संघर्ष और कूटनीतिक तनाव चर्चा में हैं। ईरान और अमेरिका के बीच जारी टकराव के दौरान संयुक्त राष्ट्र की ओर से तनाव कम करने और बातचीत के जरिए समाधान तलाशने की अपील की जाती रही है।

    मीम के जरिए ईरानी पक्ष का संकेत यह है कि जब बड़े और शक्तिशाली देश सीधे संघर्ष में शामिल होते हैं, तब संयुक्त राष्ट्र के पास उन्हें रोकने की सीमित क्षमता रह जाती है। इसी विचार को समझाने के लिए फिल्म शोले के ठाकुर के किरदार का इस्तेमाल किया गया है। एक तस्वीर में कई हाथों वाले डॉक्टर स्ट्रेंज के जरिए संगठन की कागजी ताकत दिखाई गई है, जबकि दूसरी तस्वीर में हाथ कटे ठाकुर के जरिए उसकी कथित वास्तविक बेबसी को दर्शाने का प्रयास किया गया है।

    ईरान की इस तरह की सोशल मीडिया गतिविधियों को मीम डिप्लोमेसी के तौर पर भी देखा जाता है। इसका उद्देश्य पारंपरिक कूटनीतिक बयानों के बजाय लोकप्रिय तस्वीरों, हास्य और इंटरनेट संस्कृति के माध्यम से राजनीतिक संदेश को लोगों तक पहुंचाना होता है। इस बार भारतीय फिल्म के चर्चित किरदार को शामिल किए जाने के कारण यह मीम खास तौर पर चर्चा में आया है।

  • ईरान के सुप्रीम लीडर का अमेरिका को लेकर बड़ा बयान…., बोले- दुश्मन को जल्द अरब सागर से निकाल देंगे

    ईरान के सुप्रीम लीडर का अमेरिका को लेकर बड़ा बयान…., बोले- दुश्मन को जल्द अरब सागर से निकाल देंगे


    तेहरान।
    ईरान (Iran) के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई (Supreme Leader Mojtaba Khamenei) ने सोमवार को बिना अमेरिका (America) का नाम लिए बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि दुश्मन ताकतों को जल्द अरब सागर से निकाल दिया जाएगा। उनके मुताबिक, हमलावर ताकतें अब खुद लड़ाई जारी रखने की बजाय युद्ध खत्म करने की अपील कर रही हैं। यह बयान ऐसे समय आया है जब क्षेत्र में तनाव पहले से काफी बढ़ा हुआ माना जा रहा है। खामेनेई ने यह बात ईरान-इराक युद्ध (Iran-Iraq War) की बरसी और हिजबुल्लाह नेता हसन नसरल्लाह (Hezbollah leader Hassan Nasrallah) की बरसी पर जारी संदेश में कही। नसरल्लाह की 2024 में हत्या कर दी गई थी। इन दोनों मौकों का जिक्र कर उन्होंने ईरान की सैन्य ताकत, क्षेत्रीय स्थिति और दुश्मन ताकतों के दबाव का भी जिक्र किया।

    उन्होंने कहा कि ‘सिस्टम ऑफ डोमिनेशन’ यानी दबदबा बनाने वाली ताकतों के हमलों के शुरुआती दिनों में ईरान की स्थिति बहुत कमजोर थी। उस समय देश को पिछली सरकार से कई खतरे विरासत में मिले थे। उनके शब्दों में, तब देश लगभग खाली हाथ था और अपने बचाव के लिए तैयारियां पर्याप्त नहीं थीं। खामेनेई का दावा है कि उसके बाद ईरान ने अपनी सैन्य क्षमता को तेजी से बढ़ाया। अब स्थिति इतनी बदल गई है कि हमलावर ताकतें खुद ईरानी सेना के हमलों से बचने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने कहा कि सच्चाई और खुदा की मदद से देश अब उस मुकाम पर पहुंच गया है जहां बहुत सी हमलावर ताकतें खुद, सिर्फ उनके साथी नहीं, इस्लामी गणराज्य के लड़ाकों के हमलों से बचने के लिए पनाह मांग रही हैं और युद्ध खत्म करने की गुहार लगा रही हैं।

    इस दौरान खामेनेई ने समुद्री मोर्चे का भी जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि ईरानी सेना ने दक्षिणी ईरान के पानी से दुश्मन को पीछे धकेल दिया है और उसे अरब सागर की ओर हटना पड़ा है। उनके अनुसार, होर्मुज की सुरक्षा करने वाले ईरानी लड़ाकों ने दुश्मन को बड़ा नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि हमारे बहादुर लड़ाकों और होर्मुज के रखवालों से दर्दनाक चोटें खाने के बाद वे अरब सागर से आगे जाने की हिम्मत नहीं करते। खामेनेई ने आगे कहा कि जब भी दुश्मन ताकतों ने आगे बढ़ने की कोशिश की, नुकसान उन्हें ही हुआ। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि वह समय तेजी से आ रहा है जब अरब सागर भी उनकी मौजूदगी से साफ हो जाएगा।

    इस दौरान उन्होंने ईरान की अंदरूनी एकता पर भी जोर दिया। खामेनेई ने कहा कि देश के अलग-अलग वर्गों में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन जब बात देश की सुरक्षा और सही मांगों की आती है, तो सब एक साथ खड़े हैं। इसमें सबसे अहम मुद्दा होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण बनाए रखना है। यह जलमार्ग दुनिया के तेल व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए इस पर कब्जा या दबाव बनाए रखना ईरान की रणनीति का बड़ा हिस्सा है।

  • ईरान ने अमेरिका के सामने रखी तीन शर्तें, मानने पर सात दिन में होर्मुज खोलने का प्रस्ताव

    ईरान ने अमेरिका के सामने रखी तीन शर्तें, मानने पर सात दिन में होर्मुज खोलने का प्रस्ताव

    नई दिल्ली । ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलने के लिए अमेरिका के सामने सात दिन का प्रस्ताव रखा है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के मुताबिक, अगर अमेरिका तेहरान की तीन प्रमुख शर्तें स्वीकार करता है, तो सात दिन के भीतर इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर सामान्य आवाजाही बहाल की जा सकती है। उन्होंने कहा कि प्रस्ताव स्वीकार करने का फैसला अब अमेरिका के हाथ में है।

    ईरान ने अपने प्रस्ताव को मध्यस्थता के जरिए अमेरिका तक पहुंचाया है। इसके तहत अमेरिका को ईरानी बंदरगाहों पर लगी नौसैनिक नाकाबंदी हटानी होगी, ईरान के तेल की बिक्री पर लगे प्रतिबंधों में छूट देनी होगी और ऐसा युद्धविराम लागू करना होगा, जिसमें लेबनान भी शामिल हो। ईरान का कहना है कि इन मांगों को स्वीकार किए जाने के बाद होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।

    अब्बास अराघची के मुताबिक, अमेरिका की ओर से जरूरी शुरुआती कदम पूरे करने में चार से पांच दिन लग सकते हैं। इसके बाद छठे दिन स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोला जा सकता है। सातवें दिन अमेरिका के साथ आगे की बातचीत शुरू करने का प्रस्ताव है। इस बातचीत में दोनों पक्ष आपसी सहमति वाले मुद्दों पर चर्चा कर सकते हैं, जिसमें ईरान का परमाणु कार्यक्रम भी शामिल हो सकता है।

    ईरान ने इस योजना को जून में हुए एक समझौते से भी जोड़ा है। ईरानी पक्ष का कहना है कि अमेरिका से अपेक्षित कुछ कदम पहले से उस समझौते में शामिल थे। तेहरान के मुताबिक, प्रस्ताव का उद्देश्य समुद्री आवाजाही बहाल करने के साथ-साथ दोनों देशों के बीच रुकी हुई कूटनीतिक प्रक्रिया को फिर से शुरू करना है।

    होर्मुज स्ट्रेट वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग माना जाता है। युद्ध से पहले दुनिया के समुद्री तेल और गैस कारोबार का करीब पांचवां हिस्सा इसी जलमार्ग से होकर गुजरता था। क्षेत्र में जारी संघर्ष और समुद्री आवाजाही में रुकावट का असर ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर भी पड़ सकता है।

    ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने भी अमेरिका के साथ बातचीत फिर शुरू करने की इच्छा जताई है। हालांकि, परमाणु कार्यक्रम को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद अभी बने हुए हैं। ईरानी पक्ष ने संकेत दिया है कि होर्मुज स्ट्रेट खोलने के प्रस्ताव और परमाणु मुद्दे पर रियायतों को अलग-अलग विषयों के रूप में देखा जा रहा है।

    अमेरिका की ओर से इस प्रस्ताव को लेकर अलग-अलग संकेत सामने आए हैं। कुछ दावों में प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किए जाने की बात कही गई है, जबकि दूसरी ओर मध्यस्थों के जरिए बातचीत जारी रहने की जानकारी भी सामने आई है। ऐसे में प्रस्ताव पर अंतिम सहमति और उसके बाद होने वाली कार्रवाई को लेकर स्थिति अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।

    ईरान के सात दिन के प्रस्ताव के तहत पहले अमेरिका से तीन शर्तों पर कदम उठाने की अपेक्षा है। इसके बाद होर्मुज स्ट्रेट खोलने और बातचीत दोबारा शुरू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। अब इस योजना पर अमेरिका की प्रतिक्रिया और दोनों देशों के बीच होने वाली कूटनीतिक बातचीत को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।