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  • अमेरिका-ईरान के बीच फिर गहराया तनाव, नए सैन्य हमले के संकेत, व्हाइट हाउस ने तेहरान को दी चेतावनी

    अमेरिका-ईरान के बीच फिर गहराया तनाव, नए सैन्य हमले के संकेत, व्हाइट हाउस ने तेहरान को दी चेतावनी


    नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर तनाव गहराता नजर आ रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि ईरान के खिलाफ नए सैन्य हमले किए जा सकते हैं। व्हाइट हाउस का आरोप है कि तेहरान ने युद्धविराम समझौते की शर्तों का पालन नहीं किया और क्षेत्र में आक्रामक गतिविधियां जारी रखीं।

    व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि अमेरिका चाहता है कि ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा पूरी तरह खोले और पिछले महीने हुए सीजफायर समझौते का सम्मान करे। उन्होंने आरोप लगाया कि समझौते पर हस्ताक्षर के बावजूद ईरान ने उस पर अमल नहीं किया, व्यावसायिक जहाजों को निशाना बनाया और अमेरिकी सैनिकों की जान ली। उनके अनुसार, ऐसे कदम आतंकवादी गतिविधियों जैसे हैं और अमेरिका इसका जवाब देगा।

    हालांकि बीती रात ईरान पर कोई अमेरिकी हमला नहीं हुआ, लेकिन ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने दावा किया कि उसने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में दो और तेल टैंकरों को निशाना बनाया। वहीं कुवैत ने भी अपने हवाई क्षेत्र में घुसे ड्रोन को मार गिराने की जानकारी दी।

    ‘ईरान को कीमत चुकानी होगी’
    कैरोलिन लेविट ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप ऐसी गतिविधियों को नजरअंदाज नहीं करेंगे। उनका कहना था कि जब तक ईरान अमेरिका की शर्तों के अनुसार बातचीत के लिए तैयार नहीं होता, तब तक उसे अपने कदमों की कीमत चुकानी पड़ेगी।

    ट्रंप बोले- जोरदार कार्रवाई करेंगे
    मैरीलैंड स्थित कैंप डेविड में पत्रकारों से बातचीत के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने भी ईरान पर सख्त कार्रवाई के संकेत दिए। उन्होंने कहा कि अमेरिका जरूरत पड़ने पर “बहुत जोरदार हमला” करेगा और अंततः ईरान को पीछे हटना पड़ेगा। ट्रंप ने कहा कि उनका उद्देश्य केवल जीत हासिल करना है।

    भारत-पाकिस्तान का भी किया जिक्र
    बातचीत के दौरान ट्रंप ने भारत-पाकिस्तान तनाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने एक बार फिर दावा किया कि उन्होंने दोनों देशों के बीच संघर्ष रुकवाने में भूमिका निभाई और टैरिफ का हवाला देकर संभावित परमाणु टकराव टालने की बात कही। हालांकि भारत सरकार पहले भी ट्रंप के इस दावे को स्पष्ट रूप से खारिज कर चुकी है।

  • चीन पर ईरान को पाकिस्तान के रास्ते हथियार भेजने के आरोप, ट्रंप बोले- ऐसा हुआ तो होगी निराशा

    चीन पर ईरान को पाकिस्तान के रास्ते हथियार भेजने के आरोप, ट्रंप बोले- ऐसा हुआ तो होगी निराशा

    नई दिल्ली । अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच हाल के महीनों में बढ़े तनाव के बीच एक नई रिपोर्ट ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई चर्चा छेड़ दी है। दावा किया गया है कि चीन, पाकिस्तान के रास्ते ईरान को 400 मैन-पोर्टेबल एयर डिफेंस सिस्टम (MANPADS) या रॉकेट लॉन्चर उपलब्ध कराने की तैयारी में है। इन दावों के सामने आने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हैरानी जताते हुए कहा कि यदि चीन वास्तव में ईरान को हथियार उपलब्ध करा रहा है तो यह बेहद निराशाजनक होगा। दूसरी ओर चीन ने ऐसे सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है।

    हालिया संघर्ष के बाद ईरान अपनी हवाई सुरक्षा प्रणाली को मजबूत करने की दिशा में लगातार प्रयास कर रहा है। इसी संदर्भ में यह दावा सामने आया कि ईरान ने चीन से 400 मैन-पोर्टेबल एयर डिफेंस सिस्टम खरीदने का समझौता किया है। रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि इन हथियारों की आपूर्ति पाकिस्तान के माध्यम से गुप्त तरीके से की जा रही है। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और चीन ने आधिकारिक तौर पर किसी भी प्रकार की सैन्य आपूर्ति से इनकार किया है।

    बताया जा रहा है कि इस कथित रक्षा सौदे का मूल्य लगभग 6 से 7 करोड़ डॉलर के बीच हो सकता है। यदि ऐसी कोई डील होती है तो इससे ईरान की कम दूरी की हवाई सुरक्षा क्षमता को मजबूती मिल सकती है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि MANPADS जैसे सिस्टम कम ऊंचाई पर उड़ने वाले विमानों, हेलीकॉप्टरों और ड्रोन के खिलाफ प्रभावी माने जाते हैं। हालांकि इस पूरे मामले को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक दस्तावेज या सार्वजनिक प्रमाण सामने नहीं आया है।

    व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने उन्हें पहले भरोसा दिलाया था कि चीन ईरान को हथियार उपलब्ध नहीं कराएगा। ट्रंप ने कहा कि यदि इन रिपोर्टों में सच्चाई है तो यह उनके लिए निराशाजनक होगा। उन्होंने यह भी कहा कि अंतरराष्ट्रीय राजनीति में कई अप्रत्याशित घटनाएं होती रहती हैं, लेकिन देशों के बीच किए गए भरोसे का सम्मान किया जाना चाहिए।

    चीन ने इन आरोपों का स्पष्ट रूप से खंडन करते हुए कहा है कि वह किसी भी अवैध हथियार आपूर्ति में शामिल नहीं है। चीन का कहना है कि उसकी विदेश नीति जिम्मेदार और संतुलित सिद्धांतों पर आधारित है तथा वह क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने का पक्षधर है। ऐसे में सामने आए दावों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

    इस घटनाक्रम के बीच अमेरिका और चीन के बीच रणनीतिक प्रतिस्पर्धा भी चर्चा में बनी हुई है। ट्रंप ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि अमेरिका इस तकनीकी दौड़ में चीन से आगे है। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब दोनों देशों के बीच तकनीकी, आर्थिक और सुरक्षा से जुड़े कई मुद्दों पर प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है।

    फिलहाल ईरान को कथित हथियार आपूर्ति से जुड़े दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। चीन इन आरोपों को नकार चुका है, जबकि अमेरिका ने इस मामले पर चिंता व्यक्त की है। आने वाले दिनों में यदि इस संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी या अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया सामने आती है तो उसका प्रभाव क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक कूटनीतिक संबंधों पर भी पड़ सकता है।

  • ईरान समर्थित हमले के बाद ट्रंप का कड़ा संदेश, सैन्य जवाबी कार्रवाई के संकेतों से मध्य पूर्व में बढ़ा तनाव

    ईरान समर्थित हमले के बाद ट्रंप का कड़ा संदेश, सैन्य जवाबी कार्रवाई के संकेतों से मध्य पूर्व में बढ़ा तनाव


    नई दिल्ली । मध्य पूर्व में लगातार बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान समर्थित समूहों की ओर से हुए हालिया हमले के बाद कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना ने आने वाली मिसाइलों को सफलतापूर्वक निष्क्रिय कर दिया, लेकिन इस घटना के बाद अब अमेरिका की ओर से जवाबी कार्रवाई का समय आ गया है। ट्रंप के इस बयान ने क्षेत्र में पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा दिया है।

    वाशिंगटन में एक कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए ट्रंप ने कहा कि हालिया हमले में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की कोशिश की गई थी। उनके अनुसार अमेरिकी रक्षा प्रणाली ने सभी मिसाइलों को रास्ते में ही रोक दिया, जिससे किसी बड़े नुकसान की स्थिति नहीं बनी। उन्होंने अमेरिकी सैनिकों और रक्षा प्रणाली की सराहना करते हुए कहा कि उनकी तत्परता के कारण संभावित खतरे को समय रहते टाल दिया गया।

    राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि अमेरिका इस तरह के हमलों को नजरअंदाज नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि जिन समूहों ने हमला किया है, उन्हें इसका परिणाम भुगतना होगा और अमेरिका आवश्यक होने पर सैन्य कार्रवाई करेगा। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि यदि भविष्य में बातचीत और समझौते की कोई संभावना बनती है तो उसके लिए भी दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं हैं। इस बयान से यह संकेत मिला कि अमेरिका एक ओर सुरक्षा के मुद्दे पर सख्त रुख अपनाना चाहता है, वहीं दूसरी ओर कूटनीतिक विकल्पों को भी पूरी तरह खारिज नहीं कर रहा है।

    ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिकी बलों को क्षेत्र से हटाने का फिलहाल कोई विचार नहीं है। उनके अनुसार मध्य पूर्व में तैनात अमेरिकी सैनिकों की मौजूदगी रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है और मौजूदा परिस्थितियों में उनकी तैनाती जारी रहेगी। उन्होंने भरोसा जताया कि अमेरिकी सेना किसी भी संभावित खतरे का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

    बयान के दौरान ट्रंप ने ईरान को संभावित हथियार आपूर्ति से जुड़ी खबरों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यदि किसी तीसरे देश के माध्यम से ईरान को बड़े पैमाने पर हथियार उपलब्ध कराए जाते हैं तो यह चिंताजनक होगा। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि इस विषय पर उन्हें पहले सकारात्मक आश्वासन मिल चुके हैं और उन्हें उम्मीद है कि क्षेत्रीय तनाव को बढ़ाने वाले कदम नहीं उठाए जाएंगे।

    अमेरिकी राष्ट्रपति ने ईरान के खिलाफ आर्थिक दबाव बढ़ाने की भी वकालत की। उन्होंने कांग्रेस से आग्रह किया कि मौजूदा प्रतिबंधों के अलावा अतिरिक्त आर्थिक उपायों पर भी विचार किया जाए। उनका मानना है कि आर्थिक और कूटनीतिक दबाव के साथ-साथ सुरक्षा संबंधी रणनीति अपनाना आवश्यक हो सकता है।

    इस दौरान ट्रंप ने यूक्रेन संकट का भी उल्लेख किया और कहा कि उनकी इच्छा युद्ध को समाप्त करने की है। उन्होंने दोनों पक्षों के साथ संवाद की आवश्यकता पर बल देते हुए उम्मीद जताई कि कूटनीतिक प्रयास आगे भी जारी रहेंगे। हालांकि उनका मुख्य फोकस मध्य पूर्व की मौजूदा स्थिति और अमेरिकी सुरक्षा हितों पर रहा।

    हाल के दिनों में ईरान समर्थित समूहों और क्षेत्र में तैनात अमेरिकी बलों के बीच कई घटनाएं सामने आई हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में सुरक्षा संबंधी चिंताएं बढ़ी हैं। अमेरिका पहले भी स्पष्ट कर चुका है कि उसके सैनिकों और सैन्य प्रतिष्ठानों पर किसी भी हमले का जवाब दिया जाएगा। ऐसे में ट्रंप का ताजा बयान यह संकेत देता है कि आने वाले दिनों में क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति और अधिक संवेदनशील बनी रह सकती है।

  • जॉर्डन मिसाइल हमले के बाद अमेरिका का पलटवार, ईरान पर फिर शुरू हुई एयरस्ट्राइक

    जॉर्डन मिसाइल हमले के बाद अमेरिका का पलटवार, ईरान पर फिर शुरू हुई एयरस्ट्राइक


    नई दिल्ली। जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य अड्डे को निशाना बनाने की कथित कोशिश के बाद अमेरिका ने ईरान के खिलाफ एक बार फिर हवाई हमले शुरू कर दिए हैं। अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, गुरुवार रात ईरान के भीतर कई सैन्य ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की गई, जिससे कुछ समय के लिए रुका सैन्य अभियान दोबारा शुरू हो गया।

    रिपोर्ट के मुताबिक, एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने पुष्टि की कि ईरान के भीतर कई रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया। इससे पहले इस सप्ताह ईरान की ओर से जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागे जाने का दावा किया गया था।

    मिसाइल हमले के जवाब में सैन्य कार्रवाई
    अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, ईरान से दागी गई सभी मिसाइलों को बीच रास्ते में ही निष्क्रिय कर दिया गया और किसी तरह का नुकसान नहीं हुआ। अमेरिकी सेना ने इसे मध्य-पूर्व में तैनात अपने सैनिकों पर हमला करने की कोशिश बताया। CENTCOM ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि गुरुवार रात (अमेरिकी समयानुसार) ईरान के खिलाफ जवाबी हवाई अभियान शुरू किया गया। सेना का कहना है कि यह कार्रवाई अमेरिकी ठिकानों पर कथित मिसाइल हमले के जवाब में की गई है।

    ट्रंप ने दी थी कड़ी चेतावनी
    एयरस्ट्राइक शुरू होने से कुछ घंटे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया था कि अमेरिकी सैनिकों पर किसी भी हमले का कड़ा जवाब दिया जाएगा। उन्होंने कहा था कि यदि अमेरिकी हितों को निशाना बनाया गया तो जिम्मेदार पक्ष को इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी।

    इराक में भी संयुक्त अभियान
    इस बीच अमेरिका और सऊदी अरब ने इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया के खिलाफ संयुक्त हवाई अभियान भी चलाया। पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्सेज (PMF) के अनुसार, इन हमलों में कम से कम 20 लोगों की मौत हुई है।

    अमेरिकी सेंट्रल कमांड का कहना है कि कार्रवाई के दौरान पूर्वी इराक में मिलिशिया के हथियार भंडार और लॉजिस्टिक ठिकानों को निशाना बनाया गया। अमेरिका का आरोप है कि पिछले तीन दिनों में उसके सैन्य ठिकानों और सऊदी अरब के ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर 30 से अधिक ड्रोन हमलों के पीछे ईरान समर्थित इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) का हाथ है।

    कूटनीतिक प्रयासों के बीच बढ़ा तनाव
    हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थों के जरिए अप्रत्यक्ष बातचीत की खबरें भी सामने आई थीं। इसी वजह से अमेरिका ने पिछले सप्ताह अपने हवाई अभियान को अस्थायी रूप से रोक दिया था, ताकि कूटनीतिक समाधान की संभावनाओं का आकलन किया जा सके। हालांकि, जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य अड्डे पर कथित मिसाइल हमले के बाद दोनों देशों के बीच तनाव फिर बढ़ गया और अमेरिका ने दोबारा सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी।

    नेतन्याहू से मुलाकात के बाद तेज हुई रणनीति
    अमेरिका की ताजा कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल ही में व्हाइट हाउस में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात की थी। दोनों नेताओं के बीच ईरान को लेकर व्यापक चर्चा हुई थी। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बैठक में कूटनीति, आर्थिक प्रतिबंध और सैन्य विकल्पों सहित कई संभावित रणनीतियों पर विचार किया गया।

  • मिडिल ईस्ट में युद्ध का नया मोर्चा: अमेरिका-सऊदी की संयुक्त कार्रवाई, ईरान समर्थक ठिकानों पर हमला, तनाव चरम पर

    मिडिल ईस्ट में युद्ध का नया मोर्चा: अमेरिका-सऊदी की संयुक्त कार्रवाई, ईरान समर्थक ठिकानों पर हमला, तनाव चरम पर


    नई दिल्ली । मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष अब एक नए और अधिक संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिका और सऊदी अरब ने संयुक्त सैन्य अभियान चलाते हुए इराक में ईरान समर्थित पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्स यानी पीएमएफ के ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक इन हमलों में कम से कम 20 लड़ाकों की मौत हुई है जबकि 32 अन्य घायल बताए जा रहे हैं। इस कार्रवाई के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है तथा युद्ध के व्यापक रूप लेने की आशंका गहरा गई है।

    अमेरिकी सेना का दावा है कि जिन ठिकानों को निशाना बनाया गया वहां से अमेरिकी सैनिकों और सऊदी अरब के महत्वपूर्ण ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमलों की तैयारी की जा रही थी। सुरक्षा एजेंसियों को मिली खुफिया जानकारी के आधार पर यह संयुक्त कार्रवाई की गई। हमलों के कुछ ही घंटों बाद ईरान की ओर से जवाबी कदम उठाया गया और जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकाने की दिशा में कई बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं। हालांकि अमेरिकी रक्षा प्रणाली ने सभी मिसाइलों को लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही हवा में नष्ट कर दिया।

    इस घटनाक्रम के बीच व्हाइट हाउस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की महत्वपूर्ण बैठक भी चर्चा का केंद्र रही। बैठक के बाद नेतन्याहू ने कहा कि दोनों देशों के बीच इस बात पर स्पष्ट सहमति बनी है कि ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिए जाएंगे। माना जा रहा है कि यह बैठक मिडिल ईस्ट की भविष्य की रणनीति तय करने के लिहाज से बेहद अहम रही।

    इसी दौरान यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने भी ट्रंप से मुलाकात कर एयर डिफेंस सिस्टम रक्षा सहयोग और रूस यूक्रेन युद्ध पर विस्तार से चर्चा की। दूसरी ओर ओमान ने होर्मुज जलडमरूमध्य के नियंत्रण को लेकर नया प्रस्ताव रखा है जिसमें इस रणनीतिक समुद्री मार्ग का संचालन क्षेत्र के सभी देशों की साझेदारी से करने की बात कही गई है। इस प्रस्ताव को खाड़ी क्षेत्र के कई देशों का समर्थन मिलने की खबर है।

    बढ़ते तनाव के बावजूद अमेरिका और ईरान के बीच संभावित बातचीत की खबरों से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में कुछ नरमी देखने को मिली है। हालांकि सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मौजूदा हालात और बिगड़ते हैं तो वैश्विक ऊर्जा बाजार पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है।

    उधर यमन के हूती विद्रोहियों की चेतावनी के बाद रेड सी में जहाजों की सुरक्षा भी बड़ा मुद्दा बन गई है। रिपोर्टों के अनुसार चीन ने अपने तेल टैंकरों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए हूती प्रतिनिधियों से सीधे संपर्क किया है ताकि समुद्री व्यापार प्रभावित न हो।

    संयुक्त राष्ट्र में भी इस पूरे घटनाक्रम पर चिंता जताई गई है। पाकिस्तान ने कहा कि सऊदी अरब को इस संघर्ष में घसीटने की कोशिश हो रही है और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। वहीं गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल ने सऊदी अरब पर हुए हमलों की कड़ी निंदा करते हुए उसकी सुरक्षा और संप्रभुता के समर्थन का भरोसा दोहराया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कूटनीतिक प्रयास सफल नहीं हुए तो यह संघर्ष केवल ईरान और इजरायल तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि पूरे पश्चिम एशिया की स्थिरता और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी गंभीर असर डाल सकता है।

  • ट्रंप ने ईरान को लेकर दिया सकारात्मक संकेत, लेकिन समझौता नहीं हुआ तो सैन्य कार्रवाई की भी दी चेतावनी

    ट्रंप ने ईरान को लेकर दिया सकारात्मक संकेत, लेकिन समझौता नहीं हुआ तो सैन्य कार्रवाई की भी दी चेतावनी


    नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ जारी कूटनीतिक बातचीत को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं, लेकिन साथ ही साफ किया है कि यदि कोई समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका फिर से सैन्य कार्रवाई का रास्ता अपना सकता है। ट्रंप के इस बयान के बीच पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है।

    पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच “बेहद दोस्ताना बातचीत” चल रही है और उन्हें समझौते की उम्मीद है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि यदि बातचीत सफल नहीं हुई तो अमेरिका फिर वही कदम उठाएगा, जो कुछ दिन पहले सैन्य मोर्चे पर उठा रहा था।

    चुनावी रैली में दिखाया सख्त रुख

    मिशिगन में आयोजित एक चुनावी रैली के दौरान ट्रंप ने ईरान के प्रति और कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि ईरान को “रिश्वत देकर नहीं, बल्कि हराकर” ही रोका जा सकता है। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी कार्रवाई से ईरान की नौसेना, वायुसेना, सैन्य नेतृत्व, एयर डिफेंस सिस्टम और ड्रोन-मिसाइल निर्माण क्षमता को भारी नुकसान पहुंचा है।

    उन्होंने यह भी कहा कि अगर अमेरिका ने सख्त रुख नहीं अपनाया होता तो ईरान बातचीत की मेज पर नहीं आता। ट्रंप ने अमेरिकी नौसेना की सराहना करते हुए दावा किया कि ईरान की समुद्री गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण बनाया गया है।

    क्षेत्रीय तनाव फिर बढ़ा

    ट्रंप के बयान ऐसे समय आए हैं जब सऊदी अरब, जॉर्डन और इराक ने ड्रोन हमलों की घटनाओं की जानकारी दी है। इन घटनाओं ने क्षेत्र में तनाव कम होने की उम्मीदों को झटका दिया है। हालांकि अमेरिका ने हाल ही में करीब दो सप्ताह से जारी ईरान के खिलाफ हवाई अभियान को फिलहाल रोक दिया था।

    क्यों रोका गया हवाई अभियान?

    अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, सैन्य कमांडरों ने राष्ट्रपति को बताया था कि लगातार हवाई हमलों के बाद संभावित सैन्य लक्ष्य सीमित रह गए हैं। साथ ही हमलों में इस्तेमाल होने वाले हथियारों और गोला-बारूद के भंडार को लेकर भी चिंता जताई गई थी। हालांकि ट्रंप ने हथियारों की कमी की बात को खारिज करते हुए कहा कि अमेरिकी सेना तेजी से अपने भंडार को फिर से मजबूत कर रही है और आधुनिक हथियार प्रणालियों पर काम जारी है।

    ईरान ने बातचीत की मांग से किया इनकार

    ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि मध्यस्थों के जरिए दोनों देशों के बीच संदेशों का आदान-प्रदान जारी है, लेकिन तेहरान ने अमेरिका से बातचीत की कोई औपचारिक पहल नहीं की है। उन्होंने ऐसी खबरों को निराधार बताया। हालांकि ईरानी अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि यदि घोषित युद्धविराम प्रभावी रहता है तो ईरान भी अपने हमले रोक सकता है।

    सऊदी और हूती फिर आमने-सामने

    सऊदी अरब ने दावा किया कि उसने तेल प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने वाले कई ड्रोन हमलों को विफल कर दिया। रियाद ने इन हमलों के लिए इराक में सक्रिय ईरान समर्थित समूहों को जिम्मेदार ठहराया। वहीं यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट ऑयल पाइपलाइन पर हमले की जिम्मेदारी लेते हुए इसे सऊदी सैन्य गतिविधियों का जवाब बताया।

    होर्मुज जलडमरूमध्य बना केंद्र

    इस बीच ईरान ने अमेरिका पर अपने समुद्री क्षेत्र में जहाजों और तेल टैंकरों को डराने-धमकाने का आरोप लगाया है। तेहरान ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर उसका नियंत्रण बरकरार है और यह वैश्विक तेल आपूर्ति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है। ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, बिना अनुमति गुजरने की कोशिश करने वाले छह जहाजों को सोमवार को वापस लौटा दिया गया।

  • अमेरिका-ईरान तनाव में नरमी से कच्चे तेल में बड़ी गिरावट, वैश्विक बाजार में ब्रेंट और WTI करीब 5% टूटे

    अमेरिका-ईरान तनाव में नरमी से कच्चे तेल में बड़ी गिरावट, वैश्विक बाजार में ब्रेंट और WTI करीब 5% टूटे


    नई दिल्ली । 
    अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव में फिलहाल नरमी आने के संकेतों का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर तुरंत देखने को मिला। सोमवार को अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट दर्ज की गई और प्रमुख तेल बेंचमार्क लगभग पांच प्रतिशत तक टूट गए। निवेशकों ने तनाव कम होने की संभावना के बीच मुनाफावसूली की, जिससे पिछले कुछ सप्ताह की तेज बढ़त के बाद बाजार में दबाव बढ़ गया।

    कारोबार के शुरुआती घंटों में अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 4.8 प्रतिशत गिरकर लगभग 87.55 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। वहीं अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) कच्चा तेल भी करीब 5.09 प्रतिशत टूटकर लगभग 85 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार करता दिखाई दिया। एक ही कारोबारी सत्र में आई यह गिरावट हाल के समय की बड़ी गिरावटों में शामिल रही।

    बाजार में नरमी की मुख्य वजह अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य गतिविधियों में विराम की संभावना रही। ईरान की ओर से यह संकेत दिए गए कि यदि अमेरिका सैन्य अभियान आगे नहीं बढ़ाता है तो वह भी जवाबी कार्रवाई नहीं करेगा। इस घटनाक्रम के बाद निवेशकों को लगा कि पश्चिम एशिया में तनाव फिलहाल और नहीं बढ़ेगा, जिससे तेल आपूर्ति पर तत्काल संकट की आशंका कुछ कम हुई है।

    हालांकि मौजूदा गिरावट के बावजूद ऊर्जा बाजार पूरी तरह सामान्य स्थिति में नहीं पहुंचा है। पिछले तीन सप्ताह के दौरान पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया था। उस दौरान ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया था। बाजार को आशंका थी कि संघर्ष बढ़ने पर हॉर्मुज जलडमरूमध्य और बाब-अल-मंदेब जलमार्ग जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों से तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर गंभीर असर पड़ता।

    विशेषज्ञों का मानना है कि ताजा गिरावट के बावजूद भू-राजनीतिक जोखिम पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं। हाल के दिनों में लाल सागर क्षेत्र में ऊर्जा प्रतिष्ठानों और समुद्री मार्गों को लेकर बढ़ी गतिविधियों ने बाजार की चिंता को पूरी तरह खत्म नहीं होने दिया है। यदि क्षेत्र में फिर से तनाव बढ़ता है तो तेल की कीमतों में दोबारा उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

    बाजार विश्लेषकों के अनुसार, जुलाई महीने के दौरान आई तेज गिरावट के बावजूद कच्चे तेल की कीमतें अभी भी महीने की शुरुआत की तुलना में काफी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। इसका प्रमुख कारण यह है कि आपूर्ति से जुड़े जोखिम पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं और वैश्विक व्यापार के लिए महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर सामान्य आवाजाही अभी पूरी तरह बहाल नहीं हो सकी है। इसलिए निवेशकों की नजर अब भी पश्चिम एशिया के घटनाक्रम पर बनी हुई है।

    कच्चे तेल की कीमतों में नरमी का असर विदेशी मुद्रा बाजार पर भी दिखाई दिया। सोमवार को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूत होकर खुला। शुरुआती कारोबार में रुपया पिछले कारोबारी सत्र की तुलना में 41 पैसे की मजबूती के साथ 96.15 प्रति डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट लंबे समय तक बनी रहती है तो इसका सकारात्मक प्रभाव तेल आयात करने वाले देशों की अर्थव्यवस्था और मुद्रास्फीति पर भी पड़ सकता है।

    आने वाले दिनों में वैश्विक निवेशकों की नजर अमेरिका-ईरान संबंधों, पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति और प्रमुख समुद्री मार्गों पर तेल आपूर्ति की सामान्य स्थिति पर रहेगी। इन कारकों के आधार पर ही कच्चे तेल की कीमतों की अगली दिशा तय होने की संभावना है।

  • सैन्य कार्रवाई के वीडियो में गाने के उपयोग से नाराज हुईं कैटी पेरी, कहा- मेरी मंजूरी के बिना नहीं होना चाहिए था इस्तेमाल

    सैन्य कार्रवाई के वीडियो में गाने के उपयोग से नाराज हुईं कैटी पेरी, कहा- मेरी मंजूरी के बिना नहीं होना चाहिए था इस्तेमाल


    नई दिल्ली । अमेरिकी पॉप सिंगर और गीतकार कैटी पेरी ने ईरान पर अमेरिकी सैन्य हमलों से जुड़े एक वीडियो में उनके लोकप्रिय गीत ‘Firework’ के इस्तेमाल पर कड़ा विरोध जताया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस गाने को उपयोग करने से पहले उनसे किसी प्रकार की अनुमति नहीं ली गई थी और वह इस तरह के किसी भी उपयोग का समर्थन नहीं करती हैं। इस मामले ने एक बार फिर राजनीतिक और सैन्य संदेशों में लोकप्रिय संगीत के इस्तेमाल को लेकर बहस तेज कर दी है।

    विवाद तब सामने आया जब सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से प्रसारित होने लगा, जिसमें ईरान पर अमेरिकी सैन्य कार्रवाई से जुड़े दृश्य दिखाए गए थे। वीडियो की पृष्ठभूमि में कैटी पेरी का वर्ष 2010 में रिलीज हुआ चर्चित गीत ‘Firework’ सुनाई दे रहा था। वीडियो के व्यापक रूप से साझा होने के बाद सिंगर ने सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी व्यक्त की और कहा कि इस उपयोग के लिए उनकी सहमति नहीं ली गई थी।

    कैटी पेरी ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सैन्य हमलों के दृश्यों के साथ उनके गीत का इस्तेमाल देखकर उन्हें गहरा आश्चर्य और दुख हुआ। उन्होंने कहा कि उनसे न तो इस संबंध में कोई अनुमति मांगी गई और न ही उन्हें इसकी जानकारी दी गई। उनके अनुसार, वह किसी भी प्रकार की हिंसा या सैन्य कार्रवाई को बढ़ावा देने वाले संदेश से अपने संगीत को जोड़कर नहीं देखना चाहतीं।

    सिंगर ने अपने बयान में यह भी स्पष्ट किया कि ‘Firework’ गीत का मूल उद्देश्य लोगों को कठिन परिस्थितियों में आशा, आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा देना था। उन्होंने कहा कि यह गीत आत्मबल और प्रेरणा का प्रतीक है, इसलिए इसे युद्ध या सैन्य कार्रवाई से जुड़े दृश्यों के साथ प्रस्तुत करना उसके मूल संदेश के विपरीत है। उनका मानना है कि संगीत लोगों को जोड़ने और उनका मनोबल बढ़ाने का माध्यम होना चाहिए, न कि संघर्ष या हिंसा का प्रतीक।

    कैटी पेरी लंबे समय से सामाजिक और मानवीय मूल्यों के समर्थन में अपनी राय खुलकर रखती रही हैं। वर्ष 2021 में अमेरिका के राष्ट्रपति पद के शपथ ग्रहण समारोह के अवसर पर उन्होंने इसी गीत ‘Firework’ की प्रस्तुति दी थी। उस समय भी उन्होंने इसे एकता, उम्मीद और सकारात्मक बदलाव के संदेश से जोड़ा था। यही वजह है कि मौजूदा विवाद में उन्होंने विशेष रूप से इस गीत के उद्देश्य और उसके भावनात्मक महत्व का उल्लेख किया।

    यह पहली बार नहीं है जब किसी लोकप्रिय कलाकार ने राजनीतिक या सरकारी प्रचार से जुड़े वीडियो में अपने गीत के इस्तेमाल पर आपत्ति जताई हो। इससे पहले भी कई अंतरराष्ट्रीय कलाकार अपने संगीत के अनधिकृत उपयोग को लेकर सार्वजनिक रूप से विरोध दर्ज करा चुके हैं। हाल के महीनों में गायिका अरियाना ग्रांडे ने भी एक वीडियो में अपने गीत के उपयोग को लेकर नाराजगी व्यक्त की थी और स्पष्ट किया था कि उनके संगीत का इस्तेमाल उनकी सहमति के बिना नहीं किया जाना चाहिए।

    इस तरह के मामलों ने बौद्धिक संपदा अधिकारों, कलाकारों की सहमति और सार्वजनिक मंचों पर रचनात्मक सामग्री के उपयोग से जुड़े कानूनी और नैतिक पहलुओं को फिर चर्चा में ला दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी रचनात्मक कृति का उपयोग उसके निर्माता की अनुमति और लागू नियमों के अनुरूप होना चाहिए, विशेषकर तब जब उसका संबंध राजनीतिक, सरकारी या सैन्य संदेशों से जुड़ा हो। कैटी पेरी की आपत्ति ने इसी संवेदनशील मुद्दे को एक बार फिर वैश्विक स्तर पर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

  • ईरान पर अमेरिका ने रोके रात के हवाई हमले, उपराष्ट्रपति वेंस और जनरल कैन ने युद्ध के विस्तार पर जताई गंभीर चिंता

    ईरान पर अमेरिका ने रोके रात के हवाई हमले, उपराष्ट्रपति वेंस और जनरल कैन ने युद्ध के विस्तार पर जताई गंभीर चिंता

    नई दिल्ली । अमेरिका ने ईरान के खिलाफ पिछले कई दिनों से जारी रात के हवाई हमलों को फिलहाल रोक दिया है। इस फैसले के साथ ही वाशिंगटन में युद्ध के संभावित विस्तार, सैन्य संसाधनों की उपलब्धता और कूटनीतिक विकल्पों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। अमेरिकी प्रशासन के भीतर हुई उच्चस्तरीय बैठकों में सुरक्षा, रणनीति और क्षेत्रीय स्थिरता से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार किया गया, जिसके बाद अभियान को अस्थायी रूप से रोकने का निर्णय सामने आया।

    जानकारी के अनुसार, व्हाइट हाउस में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अध्यक्षता में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक के दौरान ईरान के खिलाफ जारी सैन्य कार्रवाई के प्रभाव, संभावित जोखिम और आगे की रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई। इसी क्रम में अभियान को कुछ समय के लिए रोकने का फैसला किया गया।

    बताया गया कि अमेरिकी सेना ने लगभग दो सप्ताह तक लगातार रात के समय सैन्य अभियान चलाया था। इसके बाद रक्षा प्रतिष्ठान की ओर से संकेत मिला कि फिलहाल सभी अभियान ‘होल्ड’ पर रखे गए हैं। हालांकि प्रशासन की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया कि यह निर्णय स्थायी है या परिस्थितियों के अनुसार भविष्य में इसमें बदलाव किया जा सकता है।

    बैठक के दौरान जनरल डैन केन ने विशेष रूप से सैन्य हथियारों के भंडार और लंबे समय तक अभियान जारी रहने के संभावित प्रभावों को लेकर चिंता व्यक्त की। उन्होंने उपलब्ध सैन्य विकल्पों की प्रभावशीलता पर विश्वास जताते हुए यह भी कहा कि किसी भी आगे की कार्रवाई से पहले उसके व्यापक परिणामों का गंभीरता से आकलन किया जाना आवश्यक है। माना जा रहा है कि इस मुद्दे पर विस्तृत चर्चा के बाद ही सैन्य अभियान को अस्थायी रूप से रोकने का निर्णय लिया गया।

    सूत्रों के अनुसार, हथियारों के भंडार की स्थिति बैठक में उठाए गए कई महत्वपूर्ण विषयों में से एक थी। हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया गया कि यही कारण अंतिम निर्णय का आधार बना या फिर क्षेत्रीय तनाव बढ़ने की आशंका और अन्य रणनीतिक कारकों ने भी इसमें भूमिका निभाई। अमेरिकी प्रशासन ने इस संबंध में विस्तृत आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।

    व्हाइट हाउस की ओर से जारी बयान में कहा गया कि अमेरिका अब भी कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता देता है। प्रशासन का कहना है कि यदि ईरान क्षेत्र में तनाव बढ़ाने वाली गतिविधियां जारी रखता है या अपने सहयोगियों के माध्यम से सुरक्षा चुनौतियां उत्पन्न करता है, तो अमेरिका के पास सभी विकल्प उपलब्ध रहेंगे। साथ ही यह भी संकेत दिया गया कि प्रतिबंधों और सैन्य दबाव के बाद ईरान के लिए बातचीत का रास्ता अपनाना अधिक व्यावहारिक होगा।

    बैठक के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अमेरिकी अधिकारी ईरान के साथ संपर्क बनाए हुए हैं और विभिन्न स्तरों पर संवाद जारी है। उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य की रणनीति परिस्थितियों पर निर्भर करेगी। यदि आवश्यक हुआ तो सैन्य अभियान दोबारा शुरू किया जा सकता है या उसकी तीव्रता भी बढ़ाई जा सकती है। उनके अनुसार, मौजूदा बातचीत में ईरान पहले की तुलना में अधिक गंभीर रुख अपनाता दिखाई दे रहा है।

    अमेरिका के इस कदम को पश्चिम एशिया की बदलती सुरक्षा स्थिति के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। फिलहाल दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि कूटनीतिक प्रयास कितने सफल होते हैं और आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच तनाव कम होता है या सैन्य गतिविधियां फिर से तेज होती हैं। ऐसे में क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक सुरक्षा पर इस घटनाक्रम का प्रभाव लगातार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है।

  • मध्य पूर्व में बढ़ा तनाव ट्रंप का बड़ा दावा ईरान के पास समझौते के अलावा कोई विकल्प नहीं अमेरिका पूरी तरह तैयार

    मध्य पूर्व में बढ़ा तनाव ट्रंप का बड़ा दावा ईरान के पास समझौते के अलावा कोई विकल्प नहीं अमेरिका पूरी तरह तैयार


    नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर तनाव गहराता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा है कि ईरान के पास समझौते के अलावा अब कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका किसी भी संभावित सैन्य कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार है लेकिन उनकी पहली प्राथमिकता अब भी कूटनीतिक समाधान और बातचीत ही है। ट्रंप के इस बयान ने एक बार फिर मध्य पूर्व की सुरक्षा और वैश्विक राजनीति को लेकर नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।

    व्हाइट हाउस में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी है और वाशिंगटन हर परिस्थिति के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो मौजूदा सैन्य अभियान को और तेज किया जा सकता है लेकिन अगर ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को छोड़ने पर सहमत हो जाता है तो बातचीत के जरिए समाधान निकालना सबसे बेहतर रास्ता होगा। उनके मुताबिक अमेरिका की नीति स्पष्ट है कि ईरान को किसी भी कीमत पर परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिए जाएंगे।

    ट्रंप ने कहा कि फिलहाल दो रास्ते खुले हैं। पहला रास्ता सैन्य कार्रवाई का है जिसमें अमेरिका अपनी ताकत का इस्तेमाल कर सकता है जबकि दूसरा रास्ता बातचीत और समझौते का है। उन्होंने दावा किया कि ईरान पहले की तुलना में अब ज्यादा गंभीरता से वार्ता कर रहा है हालांकि उन्होंने यह भी माना कि किसी अंतिम समझौते की अभी कोई गारंटी नहीं है। उनके अनुसार हालात लगातार बदल रहे हैं और आने वाले समय में तस्वीर और साफ होगी।

    अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि यदि ईरान ने परमाणु हथियार विकसित करने की दिशा में कोई कदम बढ़ाया तो अमेरिका पहले से कहीं अधिक कड़ी कार्रवाई करेगा। उन्होंने इसे अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा और उसके सहयोगी देशों की सुरक्षा से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बताया। ट्रंप का कहना था कि अमेरिका इस मामले में किसी भी तरह का जोखिम उठाने के लिए तैयार नहीं है।

    उन्होंने जानकारी दी कि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस विदेश मंत्री मार्को रुबियो और प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी ईरानी प्रतिनिधियों के साथ लगातार संपर्क में हैं। ट्रंप के मुताबिक कूटनीतिक प्रयास जारी हैं और अमेरिका बातचीत के सभी विकल्प खुले रखना चाहता है। हालांकि उन्होंने यह भी दोहराया कि यदि वार्ता विफल होती है तो सैन्य विकल्प पूरी तरह तैयार रहेगा।

    अपने संबोधन में ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिका की पिछली सैन्य कार्रवाइयों से ईरान की सैन्य क्षमता को बड़ा नुकसान पहुंचा है। उन्होंने कहा कि ईरान के कई अहम सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया गया जिससे उसकी ताकत काफी कमजोर हुई है। ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका के दबाव अभियान ने पूरे क्षेत्र का रणनीतिक संतुलन बदल दिया है और अब ईरान पहले जैसी स्थिति में नहीं है।

    रूस और चीन की संभावित भूमिका पर पूछे गए सवाल के जवाब में ट्रंप ने कहा कि दोनों देशों ने फिलहाल किसी बड़े स्तर पर ईरान के समर्थन में हस्तक्षेप नहीं किया है। उन्होंने दावा किया कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने उन्हें भरोसा दिलाया है कि वे इस विवाद में सीधे तौर पर शामिल नहीं होंगे। हालांकि उन्होंने स्वीकार किया कि ईरान के इन दोनों देशों के साथ लंबे समय से संबंध रहे हैं।

    ट्रंप ने अपने पिछले सैन्य अभियानों का बचाव करते हुए कहा कि इन्हीं कदमों की वजह से ईरान परमाणु हथियार हासिल करने में सफल नहीं हो पाया। उन्होंने यह भी दावा किया कि यदि अमेरिका ने समय रहते कार्रवाई नहीं की होती तो क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति कहीं अधिक गंभीर हो सकती थी। उनके अनुसार अमेरिका का उद्देश्य युद्ध नहीं बल्कि स्थायी शांति और क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करना है।

    दूसरी ओर ईरान लगातार यह कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और उसका मकसद परमाणु हथियार बनाना नहीं है। इसके बावजूद अमेरिका और कई पश्चिमी देश लंबे समय से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर चिंता जताते रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच जारी बातचीत और संभावित समझौता पूरी दुनिया की नजरों का केंद्र बना रहेगा।