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  • सीहोर में खूनी संघर्ष से दहला गांव, किसान की मौत के बाद पुलिस पर लापरवाही का आरोप, चौकी से मदद नहीं मिलने का दावा

    सीहोर में खूनी संघर्ष से दहला गांव, किसान की मौत के बाद पुलिस पर लापरवाही का आरोप, चौकी से मदद नहीं मिलने का दावा


    सीहोर । मध्य प्रदेश के सीहोर जिले में जमीन के पट्टे की लिखा पढ़ी को लेकर शुरू हुआ विवाद हिंसक घटना में बदल गया। भेरूंदा तहसील के एक गांव में मंगलवार रात घर में खाना खा रहे 50 वर्षीय किसान रामद्वार मेहर पर लाठी डंडों और तलवारों से हमला किए जाने का आरोप है। हमले में किसान के सिर पर गंभीर चोटें आईं। उन्हें बचाने पहुंचे परिवार के अन्य सदस्यों को भी पीटा गया। गंभीर रूप से घायल रामद्वार मेहर ने बुधवार सुबह भोपाल के हमीदिया अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। घटना में उनके बेटे का कान कटने और चार साल की पोती का पैर टूटने की बात भी सामने आई है। परिवार की अन्य महिलाएं भी घायल हुई हैं।

    परिजनों के मुताबिक मंगलवार रात परिवार घर में मौजूद था। रामद्वार मेहर खाना खा रहे थे तभी संतोष उसके बेटे रितेश बलराम दुर्गेश समेत अन्य लोग वहां पहुंचे। आरोप है कि सभी लाठी डंडों और तलवारों से लैस थे। उन्होंने घर में घुसकर हमला कर दिया। अचानक हुए हमले में परिवार को संभलने का मौका नहीं मिला। रामद्वार को बचाने के लिए जब उनके बेटे और अन्य परिजन आगे आए तो उन पर भी हमला किया गया। परिजनों ने घर में तोड़फोड़ किए जाने का आरोप भी लगाया है।

    पट्टे की लिखा पढ़ी के दौरान शुरू हुआ विवाद

    मृतक के बेटे अरुण के मुताबिक गांव में जमीन के पट्टे तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है। 26 अक्टूबर को पटवारी गांव आया था। इसी दौरान उनकी जमीन के पट्टे से जुड़ी लिखा पढ़ी की जा रही थी। अरुण का आरोप है कि वहां मौजूद संतोष ने धक्का लगने की बात पर विवाद शुरू कर दिया था। अरुण के अनुसार उन्होंने विवाद बढ़ाने के बजाय वहां से जाना उचित समझा क्योंकि संतोष उनसे उम्र में बड़ा था।

    अरुण ने बताया कि उन्होंने बाद में अपने पिता को इस घटना के बारे में बताया। उनके पिता ने संतोष को समझाने की कोशिश की थी। परिवार का आरोप है कि इसी बात से नाराज होकर आरोपियों ने तीन दिन बाद मंगलवार रात उनके घर पर हमला कर दिया। हालांकि विवाद की पूरी वजह और हमले में शामिल लोगों की भूमिका की पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

    बेटे का कान कटा और मासूम का पैर टूटा

    हमले में रामद्वार मेहर के सिर पर गंभीर चोटें आईं। उन्हें उपचार के लिए भोपाल के हमीदिया अस्पताल ले जाया गया था जहां बुधवार सुबह उनकी मौत हो गई। बेटे अरुण के मुताबिक हमले के दौरान उनका एक कान कट गया जबकि उनकी चार साल की बेटी का पैर टूट गया। उनकी मां और बहन को भी चोटें आई हैं। किसान की मौत के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है। एक ही घटना में परिवार के कई सदस्यों के घायल होने से परिजन सदमे में हैं।

    पुलिस चौकी से मदद नहीं मिलने का आरोप

    घटना के बाद परिवार ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। अरुण का आरोप है कि हमले के दौरान वह मदद मांगने के लिए गांव के पास स्थित लाड़कुई पुलिस चौकी पहुंचे थे। उनके मुताबिक उस समय हमलावर घर में तोड़फोड़ कर रहे थे और उन्होंने चौकी पर मौजूद पुलिसकर्मियों को इसकी जानकारी दी। अरुण का दावा है कि वहां करीब पांच पुलिसकर्मी मौजूद थे लेकिन उन्हें तत्काल मदद देने के बजाय भेरूंदा थाने जाकर शिकायत करने की सलाह दी गई।

    परिवार का कहना है कि यदि समय रहते पुलिस मौके पर पहुंचती तो स्थिति अलग हो सकती थी। हालांकि चौकी पर सूचना दिए जाने और पुलिस की प्रतिक्रिया को लेकर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। मामले में घटना के कारणों आरोपियों की भूमिका और पुलिस को सूचना मिलने के बाद की कार्रवाई की जांच महत्वपूर्ण होगी। किसान की मौत और परिवार के सदस्यों के घायल होने के बाद अब परिजन न्याय की मांग कर रहे हैं।

  • दूध लेने घर से निकला किसान फिर नहीं लौटा, उज्जैन में घेरकर हमला करने का आरोप, तीन पर केस दर्ज

    दूध लेने घर से निकला किसान फिर नहीं लौटा, उज्जैन में घेरकर हमला करने का आरोप, तीन पर केस दर्ज


    उज्जैन  । मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले में जमीन विवाद को लेकर एक किसान की हत्या का सनसनीखेज मामला सामने आया है। माकड़ोन थाना क्षेत्र में किसान जीवन शर्मा पर लोहे की रॉड से हमला कर दिया गया। गंभीर चोटें लगने के कारण उसकी मौके पर ही मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि जमीन को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था और इसी रंजिश के चलते जीवन को घेरकर हमला किया गया। घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल बन गया। पुलिस ने मामले में तीन नामजद आरोपियों के खिलाफ हत्या का प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    परिजनों के मुताबिक जीवन शर्मा बीती रात दूध लेने के लिए घर से निकला था। इसी दौरान आरोपियों ने उसे घेर लिया और लोहे की रॉड से हमला कर दिया। हमले में जीवन को गंभीर चोटें आईं और उसकी जान चली गई। घटना की खबर मिलते ही परिवार में मातम छा गया। परिजनों का कहना है कि जमीन को लेकर कई दिनों से विवाद चल रहा था। दशहरे के दिन भी इसी मुद्दे पर विवाद हुआ था। परिवार को आशंका है कि पुरानी रंजिश के कारण ही इस वारदात को अंजाम दिया गया।

    परिजनों ने कई लोगों पर लगाया हमले का आरोप
    मृतक के भाई ने आरोप लगाया कि राजाराम कृष्णपाल नंदकिशोर बाबूलाल सहित अन्य लोगों ने जीवन को घेरकर हमला किया था। हालांकि पुलिस ने शिकायत के आधार पर वीरेंद्र शर्मा नंदकिशोर और बाबूलाल के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि वारदात में अन्य लोगों की भूमिका होने की जानकारी भी सामने आई है। इस पहलू को ध्यान में रखते हुए जांच की जा रही है। आरोपियों की भूमिका और घटना के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए पुलिस संबंधित लोगों से पूछताछ कर सकती है।
    पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे परिजन और समर्थक
    घटना की सूचना मिलने पर माकड़ोन थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए उज्जैन भेजा गया। घटना की जानकारी फैलने के बाद बड़ी संख्या में परिजन और समर्थक पोस्टमार्टम हाउस पहुंच गए। मृतक के कांग्रेस से जुड़े होने के कारण राजनीतिक हलकों में भी मामला चर्चा में आ गया। विधायक महेश परमार भी समर्थकों के साथ पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे और आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग की।
    पुलिस जांच में जुटी
    जमीन विवाद से जुड़ी इस घटना के बाद पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है। परिजनों के आरोपों के साथ ही पुराने विवाद और वारदात में संभावित रूप से शामिल अन्य लोगों की भूमिका को भी जांच में शामिल किया जा रहा है। फिलहाल तीन आरोपियों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज किया गया है। पुलिस की जांच के बाद ही घटना की पूरी परिस्थितियां स्पष्ट हो सकेंगी। इस घटना ने एक बार फिर जमीन संबंधी विवादों के हिंसक रूप लेने और आपसी रंजिश के गंभीर परिणामों को सामने ला दिया है।
  • JCB के आगे लेट गए थे पेट्रोल पंप कर्मचारी, अब सुप्रीम कोर्ट से भी नहीं मिली राहत, जमीन विवाद में नया मोड़

    JCB के आगे लेट गए थे पेट्रोल पंप कर्मचारी, अब सुप्रीम कोर्ट से भी नहीं मिली राहत, जमीन विवाद में नया मोड़


    शिवपुरी । शिवपुरी के झांसी तिराहा स्थित गांधी पेट्रोल पंप की जमीन को लेकर चल रहा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचने के बाद एक नए मोड़ पर आ गया है। मंगलवार को सर्वोच्च न्यायालय में इस मामले की सुनवाई हुई जहां मैसर्स जय भारत ऑटोमोबाइल्स की ओर से दायर याचिका को खारिज कर दिया गया। इस मामले में शिवपुरी नगर पालिका परिषद और मुख्य नगर पालिका अधिकारी को पक्ष बनाया गया था। सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट के अनुसार यह मामला 28 सितंबर को दर्ज हुआ था और मंगलवार को जस्टिस एमएम सुंदरेश तथा जस्टिस प्रसन्ना बी वराले की पीठ के सामने सुनवाई हुई।

    दरअसल गांधी पेट्रोल पंप जिस जमीन पर संचालित हो रहा है उसे शिवपुरी नगर पालिका ने वर्ष 1960 में मैसर्स जय भारत ऑटोमोबाइल्स को लीज पर दिया था। यह लीज 25 साल के लिए थी। इसके लिए 4472 रुपए प्रीमियम तय किया गया था जबकि सालाना किराया 279 रुपए 50 पैसे रखा गया था। इसी जमीन पर बाद में पेट्रोल पंप का संचालन शुरू हुआ। निर्धारित 25 साल की लीज अवधि पूरी होने के बाद जमीन की लीज का नवीनीकरण नहीं कराया गया। इसके बाद नगर पालिका ने जमीन वापस लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी और मामला कानूनी विवाद में बदल गया।

    जमीन खाली कराने को लेकर नगर पालिका और पेट्रोल पंप संचालक के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है। इस मामले में हाईकोर्ट का फैसला नगर पालिका के पक्ष में आया था। इसके बाद नगर पालिका की ओर से जमीन खाली कराने के लिए नोटिस भी जारी किया गया। हालांकि इसके बावजूद जमीन को लेकर विवाद समाप्त नहीं हुआ और मामला आगे बढ़ते हुए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया।

    सुप्रीम कोर्ट में याचिका खारिज होने के एक दिन पहले ही शिवपुरी में इस जमीन को लेकर काफी हंगामा देखने को मिला था। सोमवार को नगर पालिका अध्यक्ष गायत्री शर्मा जेसीबी और डंपर लेकर गांधी पेट्रोल पंप पहुंची थीं। उद्देश्य जमीन को खाली कराने की कार्रवाई शुरू करना था। जैसे ही जेसीबी से कार्रवाई शुरू करने की कोशिश हुई पेट्रोल पंप के कर्मचारियों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। कुछ कर्मचारी जेसीबी के सामने ही लेट गए जिसके बाद मौके पर स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
    सुप्रीम कोर्ट में याचिका खारिज होने के एक दिन पहले ही शिवपुरी में इस जमीन को लेकर काफी हंगामा देखने को मिला था। सोमवार को नगर पालिका अध्यक्ष गायत्री शर्मा जेसीबी और डंपर लेकर गांधी पेट्रोल पंप पहुंची थीं। उद्देश्य जमीन को खाली कराने की कार्रवाई शुरू करना था। जैसे ही जेसीबी से कार्रवाई शुरू करने की कोशिश हुई पेट्रोल पंप के कर्मचारियों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। कुछ कर्मचारी जेसीबी के सामने ही लेट गए जिसके बाद मौके पर स्थिति तनावपूर्ण हो गई।

    विरोध के कारण नगर पालिका की कार्रवाई रोकनी पड़ी और करीब दो घंटे तक मौके पर हंगामे की स्थिति बनी रही। इस दौरान जमीन खाली कराने की कोशिश और कर्मचारियों के विरोध के चलते मामला काफी चर्चा में रहा। नगर पालिका की ओर से जमीन पर अपने अधिकार और लीज अवधि पूरी होने का हवाला दिया जा रहा है जबकि पेट्रोल पंप संचालक की ओर से मामले को लेकर कानूनी रास्ता अपनाया गया।

    अब सुप्रीम कोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद इस जमीन विवाद में नगर पालिका की आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सोमवार को जेसीबी के सामने कर्मचारियों के विरोध के बाद कार्रवाई रुक गई थी लेकिन सर्वोच्च न्यायालय के ताजा फैसले के बाद प्रशासनिक स्तर पर अगला कदम क्या होगा इस पर सभी की नजर बनी हुई है। गांधी पेट्रोल पंप की जमीन को लेकर कई वर्षों से चल रहा यह विवाद अब निर्णायक कार्रवाई की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है।

  • PM मोदी से मिले असगर अली तो कुछ ही दिनों में बदली तस्वीर: 15 साल पुराने जमीन विवाद में आया नया मोड़

    PM मोदी से मिले असगर अली तो कुछ ही दिनों में बदली तस्वीर: 15 साल पुराने जमीन विवाद में आया नया मोड़


    नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के कुछ दिनों बाद मुंबई के पास रहने वाले 81 वर्षीय असगर अली वोरा के करीब 15 साल पुराने जमीन विवाद में नया मोड़ सामने आया है। असगर अली वोरा ने अपनी जमीन पर कब्जे का आरोप लगाया था। उनका कहना था कि भायंदर ईस्ट के नवघर इलाके में स्थित उनकी जमीन को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा है। अब इस मामले में भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता ने विवादित जमीन का कब्जा छोड़ने और जमीन से जुड़ी निर्माण अनुमति वापस करने की बात कही है। इसके साथ ही उन्होंने असगर अली वोरा के खिलाफ पहले दर्ज कराई गई शिकायत वापस लेने की जानकारी भी दी है।

    असगर अली वोरा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात 8 सितंबर को हुई थी। दोनों गुजरात के वडनगर स्थित बीएन स्कूल में साथ पढ़ चुके हैं। मुलाकात के दौरान वोरा ने प्रधानमंत्री के सामने अपनी जमीन से जुड़े पुराने विवाद को रखा था। उन्होंने बताया था कि उन्होंने वर्ष 1989 में करीब 2810 वर्ग मीटर जमीन खरीदी थी। उनके अनुसार वर्ष 2011 में इस जमीन पर कब्जे का विवाद शुरू हुआ था। वोरा का आरोप था कि स्वयम् बिल्डर्स और सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शंस से जुड़े लोगों ने जमीन पर कब्जा कर लिया था।

    वोरा का कहना था कि वह लंबे समय से इस मामले को लेकर अलग अलग सरकारी विभागों के चक्कर लगा रहे थे। करीब 15 वर्षों तक मामला अधिकारियों के सामने उठाने के बावजूद उन्हें समाधान नहीं मिला। इसी बीच प्रधानमंत्री से मुलाकात हुई और उन्होंने अपनी समस्या सीधे उनके सामने रखी। मुलाकात के बाद वोरा ने सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलने की बात कही थी।

    मामला सामने आने के बाद महाराष्ट्र मंत्रालय में भी इस विवाद को लेकर बैठक हुई। मंगलवार को मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव श्रीकर परदेशी की अध्यक्षता में अधिकारियों और दोनों पक्षों के बीच बैठक हुई। बैठक में असगर अली वोरा और नरेंद्र मेहता के साथ मीरा भायंदर नगर निगम के नगर आयुक्त राधा बिनोद शर्मा और टाउन प्लानर पुरुषोत्तम शिंदे भी मौजूद रहे।

    बैठक के दौरान नरेंद्र मेहता ने टाउन प्लानिंग विभाग को एक पत्र सौंपा। इसमें उन्होंने विवादित जमीन का कब्जा छोड़ने और प्लॉट के लिए मिली निर्माण अनुमति को सरेंडर करने की बात कही। मेहता के अनुसार उन्होंने यह जमीन वर्ष 2019 में मर्विन फर्नांडिस से खरीदी थी। जमीन को लेकर दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से विवाद चला आ रहा था।

    इस मामले में भाजपा विधायक ने पुलिस कमिश्नर को भी अलग पत्र दिया है। इसमें उन्होंने असगर अली वोरा के खिलाफ पहले की गई शिकायत वापस लेने की जानकारी दी। मेहता ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया है। इस घटनाक्रम के बाद करीब डेढ़ दशक से जमीन विवाद को लेकर संघर्ष कर रहे असगर अली वोरा को राहत मिलने की उम्मीद बनी है।

    अब इस पूरे मामले में आगे की प्रक्रिया जमीन के कब्जे और निर्माण अनुमति से जुड़े प्रशासनिक कदमों पर निर्भर करेगी। प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद विवाद में आए इस बदलाव ने मामले को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।

  • अवैध प्लॉटिंग विवाद में कारोबारी को पहले धमकाया फिर घर पर बरसाईं गोलियां 6 ऑडियो से जांच में नया मोड़ भोपाल में धमकी के बाद फायरिंग से सनसनी

    अवैध प्लॉटिंग विवाद में कारोबारी को पहले धमकाया फिर घर पर बरसाईं गोलियां 6 ऑडियो से जांच में नया मोड़ भोपाल में धमकी के बाद फायरिंग से सनसनी


    भोपाल । भोपाल के रातीबड़ थाना क्षेत्र के गोरेगांव में रियल एस्टेट कारोबारी के घर के बाहर फायरिंग का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। जमीन और कथित अवैध प्लॉटिंग से जुड़े विवाद में पहले कारोबारी को फोन पर धमकियां मिलने का दावा किया गया और इसके बाद देर रात उनके घर के बाहर गोलियां चलाने की घटना सामने आई। अब फरियादी पक्ष की ओर से जारी किए गए छह कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग ने मामले को और चर्चा में ला दिया है। इन ऑडियो में एक व्यक्ति कथित तौर पर कारोबारी को गाली गलौज करते हुए भोपाल में काम नहीं करने की धमकी देता सुनाई दे रहा है। वह खुद को मुरैना निवासी सौरभ चौहान बताता है और ग्वालियर से जमीन का काम करने की बात कहता है। हालांकि इन ऑडियो में सुनाई दे रही आवाज और उनमें किए गए दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

    मामला 60 वर्षीय रियल एस्टेट कारोबारी संतोष सिंह तोमर से जुड़ा है। फरियादी के अनुसार गोरेगांव में कथित अवैध प्लॉटिंग को लेकर शिकायत करने के बाद उनका कुछ लोगों से विवाद चल रहा था। इसी विवाद के बीच उन्हें कथित तौर पर फोन पर धमकियां दी गईं। इसके बाद 10 सितंबर की दरमियानी रात करीब ढाई बजे एक SUV में आधा दर्जन से ज्यादा लोग उनके घर पहुंचे। आरोप है कि घर के गेट के बाहर कई राउंड फायरिंग की गई और जान से मारने की धमकी देकर आरोपी मौके से फरार हो गए।

    फरियादी पक्ष का दावा है कि फायरिंग की घटना अचानक नहीं हुई बल्कि इसके पहले से ही धमकियों का सिलसिला चल रहा था। जारी किए गए छह ऑडियो में कथित तौर पर जमीन विवाद को लेकर बातचीत और धमकी जैसी बातें सामने आती हैं। एक ऑडियो में खुद को सौरभ चौहान बताने वाला व्यक्ति कारोबारी को चुनौती देता सुनाई देता है। बातचीत में वह भोपाल में काम नहीं करने की बात कहता है। हालांकि पुलिस जांच में इन ऑडियो की वास्तविकता और कॉल करने वाले व्यक्ति की पहचान की पुष्टि होना बाकी है।

    फायरिंग के बाद पुलिस को रात करीब 2 बजकर 55 मिनट पर डायल 112 के जरिए सूचना दी गई। इसके करीब आधे घंटे बाद फरियादी पक्ष रातीबड़ थाने पहुंच गया। इसके बावजूद FIR अगले दिन 11 सितंबर की शाम करीब 5 बजे दर्ज होने की बात सामने आई है। FIR में फिलहाल किसी आरोपी को नामजद नहीं किया गया है। पुलिस ने मामले में उस SUV के नंबर MP 13 ZD 5656 का उल्लेख किया है जिससे आरोपी मौके पर पहुंचे थे।

    फरियादी ने पुलिस कमिश्नर कार्यालय में भी शिकायत देकर मामले में कार्रवाई की मांग की है। कारोबारी ने गांव में रहने वाले लखन मारण पर भी संदेह जताया है। पुलिस अब जमीन विवाद से लेकर धमकी वाले कथित ऑडियो और फायरिंग तक की पूरी कड़ी को जोड़ने में जुटी है। जांच का अहम हिस्सा यह पता लगाना होगा कि फायरिंग से पहले किन लोगों ने फरियादी से संपर्क किया था और वारदात के बाद किन नंबरों से उन्हें धमकी या दबाव देने की कोशिश की गई।

    इस मामले में पुलिस के सामने कई अहम सवाल हैं। क्या फायरिंग जमीन विवाद के चलते हुई थी। कथित ऑडियो में आवाज किस व्यक्ति की है। SUV से मौके पर कौन लोग पहुंचे थे और फायरिंग में कितने हथियारों का इस्तेमाल हुआ। इन सवालों के जवाब जांच आगे बढ़ने के साथ सामने आने की उम्मीद है। फिलहाल धमकी के कथित ऑडियो और घर के बाहर हुई फायरिंग ने भोपाल के इस जमीन विवाद को गंभीर बना दिया है और पुलिस की जांच अब घटनाक्रम की पूरी कड़ी जोड़ने पर केंद्रित है।

  • जमीन के झगड़े में ग्रामीण को पीटकर जिंदा जलाने का आरोप: इलाज के दौरान मौत, पोते ने कहा- मेरी आंखों के सामने डीजल डालकर लगा दी आग

    जमीन के झगड़े में ग्रामीण को पीटकर जिंदा जलाने का आरोप: इलाज के दौरान मौत, पोते ने कहा- मेरी आंखों के सामने डीजल डालकर लगा दी आग


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले के पोहरी थाना क्षेत्र के नयागांव में जमीन विवाद को लेकर एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहां एक ग्रामीण को कथित तौर पर पहले बेरहमी से पीटा गया और फिर उस पर डीजल डालकर आग लगा दी गई। गंभीर रूप से झुलसे ग्रामीण की शनिवार सुबह जिला अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। घटना के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर जांच शुरू कर दी है और परिजनों के बयानों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

    मृतक की पहचान अरविंद धाकड़ के रूप में हुई है। परिजनों के मुताबिक परिवार में काफी समय से जमीन को लेकर विवाद चल रहा था, जिसका मामला अदालत में विचाराधीन है। गुरुवार को अरविंद धाकड़ और उनके परिजनों ने विवादित जमीन पर बोवनी की थी। शुक्रवार दोपहर वह अपने पोते अंशुल धाकड़ के साथ खेत पर फसल देखने पहुंचे थे। इसी दौरान आरोप है कि दूसरे पक्ष के कुछ लोग वहां पहुंचे और विवाद हिंसक हो गया।

    मृतक के पोते अंशुल धाकड़ ने आरोप लगाया कि प्रकाश धाकड़, आशा धाकड़, बंटी धाकड़, हरिओम धाकड़, हरिशंकर और विमल धाकड़ ने आते ही उन पर और उनके दादा पर लाठियों से हमला कर दिया। अंशुल किसी तरह जान बचाकर वहां से भाग निकला, लेकिन उसने दूर से देखा कि आरोपी उसके दादा की लगातार पिटाई कर रहे थे। अंशुल का आरोप है कि इसके बाद आरोपियों ने ट्रैक्टर से डीजल निकालकर अरविंद धाकड़ के ऊपर डाला और उन्हें आग के हवाले कर दिया।

    घटना के समय अंशुल के पास मोबाइल फोन नहीं था। वह दौड़कर घर पहुंचा और परिजनों को पूरी घटना की जानकारी दी। इसके बाद गंभीर रूप से झुलसे अरविंद धाकड़ को पहले पोहरी स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उनकी गंभीर हालत को देखते हुए जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। शनिवार सुबह करीब पांच बजे इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।

    पोहरी थाना प्रभारी रवि चौहान ने बताया कि पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया है। घटना के संबंध में परिजनों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट तथा जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ उचित धाराओं में मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    प्राथमिक जांच में मामला जमीन विवाद से जुड़ा बताया जा रहा है, लेकिन पुलिस सभी पहलुओं की बारीकी से जांच कर रही है। घटना के बाद गांव में तनाव का माहौल है और पुलिस स्थिति पर नजर बनाए हुए है। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे घटनाक्रम की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

  • सीमांकन के बाद फिर जोती जमीन, विरोध करने पहुंचे पिता-पुत्र पर हमला, 10-12 लोगों पर मारपीट का आरोप

    सीमांकन के बाद फिर जोती जमीन, विरोध करने पहुंचे पिता-पुत्र पर हमला, 10-12 लोगों पर मारपीट का आरोप


    शिवपुरी। जिले के तेंदुआ थाना क्षेत्र के लाड़करन गांव में कृषि भूमि के विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। सीमांकन के बाद दोबारा खेत जोतने का विरोध करने पहुंचे पिता-पुत्र पर कथित तौर पर 10 से 12 लोगों ने लाठी-डंडों और अन्य हथियारों से हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल दोनों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका उपचार जारी है।

    जिला अस्पताल में भर्ती 32 वर्षीय संजीव परिहार ने बताया कि उनकी आठ बीघा कृषि भूमि पर खेरौना गांव के भरत रावत और हजारी रावत ने पहले कब्जा कर रखा था। करीब दो माह पहले राजस्व विभाग ने सीमांकन कराकर जमीन से कब्जा हटवाया था और उन्हें खेत का कब्जा दिलाया गया था।

    संजीव के मुताबिक तीन दिन पहले उन्होंने अपनी जमीन की जुताई कराई थी। गुरुवार शाम सूचना मिली कि भरत रावत और हजारी रावत दोबारा ट्रैक्टर से उनकी जमीन जोत रहे हैं। जानकारी मिलते ही वह अपने पिता राम सिंह परिहार के साथ खेत पहुंचे और इसका विरोध किया।

    आरोप है कि खेत पर पहले से मौजूद भरत रावत, हजारी रावत, राजेश रावत, बुद्धा, टिल्लू, बलवीर रावत समेत 10 से 12 लोगों ने एकजुट होकर दोनों पर हमला कर दिया। हमलावरों ने लाठी-डंडों और अन्य हथियारों से पिता-पुत्र की बेरहमी से पिटाई की और उन्हें घायल अवस्था में छोड़कर मौके से फरार हो गए।

    घटना के बाद परिजन दोनों घायलों को तत्काल जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां उनका इलाज जारी है। चिकित्सकों की निगरानी में दोनों की हालत पर नजर रखी जा रही है।

    तेंदुआ थाना प्रभारी नीतू सिंह धाकड़ ने बताया कि घायलों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। जांच पूरी होने और बयानों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है।

  • जमीन कब्जे के विवाद में बवाल: देवास में तीन लोगों पर जानलेवा हमला, सिर में आई गंभीर चोटें

    जमीन कब्जे के विवाद में बवाल: देवास में तीन लोगों पर जानलेवा हमला, सिर में आई गंभीर चोटें


    मध्यप्रदेश । देवास जिले के सोनकच्छ थाना क्षेत्र के देवगुराड़िया गांव में जमीन विवाद को लेकर दो पक्षों के बीच खूनी संघर्ष हो गया। खेत बखरने के दौरान हुए इस विवाद में डंडों और धारदार हथियारों से हमला किए जाने से तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। सभी घायलों का जिला अस्पताल में उपचार चल रहा है।

    घायलों की पहचान निर्भय गुर्जर, जितेंद्र गुर्जर और शांतिलाल गुर्जर के रूप में हुई है। पीड़ितों के अनुसार वे अपने खेत में बखरने का कार्य कर रहे थे, तभी कुछ लोग वहां पहुंचे और उन पर डंडों तथा धारदार हथियारों से हमला कर दिया।

    घायलों ने आरोप लगाया कि आरोपी उनकी जमीन पर कब्जा करना चाहते हैं और इसी विवाद के चलते हमला किया गया। शांतिलाल गुर्जर का कहना है कि वह विवाद शांत कराने के लिए मौके पर पहुंचे थे, लेकिन हमलावरों ने उन्हें भी नहीं छोड़ा और मारपीट कर घायल कर दिया।

    हमले में तीनों के सिर पर गंभीर चोटें आई हैं। इनमें एक घायल के सिर पर 20 से अधिक टांके लगाने पड़े। पीड़ितों ने यह भी आरोप लगाया कि हमलावरों ने खेत में खड़े ट्रैक्टर में तोड़फोड़ कर उसे क्षतिग्रस्त कर दिया।

    घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और घायलों को तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाया। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि दोनों पक्षों के बयान और साक्ष्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

  • जमीन विवाद में रिश्तों का कत्ल, ससुर पर दामाद की हत्या का आरोप, सास-ससुर हिरासत में

    जमीन विवाद में रिश्तों का कत्ल, ससुर पर दामाद की हत्या का आरोप, सास-ससुर हिरासत में


    रायबरेली । उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले में जमीन विवाद ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। नसीराबाद थाना क्षेत्र के कुंवरमऊ ग्राम सभा के पूरे दुर्गा सिंह मजरे में हुए खूनी संघर्ष में गंभीर रूप से घायल एक व्यक्ति की इलाज के दौरान मौत हो गई। मृतक की पहचान वीरेंद्र सिंह के रूप में हुई है। घटना के बाद पूरे गांव में सनसनी फैल गई, जबकि मृतक के परिवार में मातम पसरा हुआ है।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार जमीन को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। इसी विवाद के दौरान दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए और कहासुनी ने हिंसक रूप ले लिया। आरोप है कि इस दौरान वीरेंद्र सिंह पर चाकू से हमला किया गया, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गए। परिजन उन्हें तत्काल अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन उपचार के दौरान उनकी जान नहीं बचाई जा सकी।

    मृतक के परिजनों ने इस घटना के लिए उसके ससुर को जिम्मेदार ठहराया है। उनका आरोप है कि जमीन विवाद के दौरान ससुर ने चाकू से हमला किया, जिसके कारण वीरेंद्र सिंह की मौत हुई। हालांकि पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है और सभी तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    घटना की सूचना मिलते ही नसीराबाद थाना पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण करने के साथ साक्ष्य भी जुटाए हैं। मामले में कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

    पुलिस ने मृतक के सास और ससुर को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि पूछताछ और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही घटना से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है।

    इस दर्दनाक घटना के बाद गांव में तनाव का माहौल है। एहतियात के तौर पर पुलिस क्षेत्र में निगरानी बनाए हुए है ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति पैदा न हो। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है।

  • 500 करोड़ की जमीन विवाद में नया मोड़: पुलिस गाड़ी से आरोपी को छोड़ने और सबूत मिटाने के आरोप

    500 करोड़ की जमीन विवाद में नया मोड़: पुलिस गाड़ी से आरोपी को छोड़ने और सबूत मिटाने के आरोप

    इंदौर। इंदौर के कनाड़िया थाना क्षेत्र में 500 करोड़ रुपये की बहुमूल्य जमीन को लेकर शुरू हुआ विवाद अब पुलिस प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। मामला केवल जमीन पर कब्जे या पुलिसकर्मियों पर हमले तक सीमित नहीं रहा बल्कि अब इसमें सबूत गायब होने, कथित आर्थिक लेनदेन और आरोपियों को संरक्षण देने जैसे गंभीर आरोप भी जुड़ गए हैं। पूरे घटनाक्रम ने पुलिस की कार्यप्रणाली और निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    जानकारी के अनुसार विवादित जमीन को लेकर हुए संघर्ष के दौरान बीट पर तैनात पुलिस जवानों पर हमला किया गया था। घटना स्थल के पास स्थित एक दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरों में पूरी वारदात रिकॉर्ड होने की बात सामने आई थी। बताया जा रहा है कि पुलिस ने जांच के लिए सीसीटीवी का डीवीआर अपने कब्जे में लिया था, लेकिन बाद में वही डीवीआर गायब हो गया। इस घटनाक्रम ने मामले को और अधिक संदिग्ध बना दिया है। सवाल उठ रहा है कि क्या आरोपियों को बचाने के लिए महत्वपूर्ण सबूतों के साथ छेड़छाड़ की गई।

    मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब इसकी जानकारी सार्वजनिक हुई। खबर सामने आने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। पुलिस कमिश्नर ने कनाड़िया थाना प्रभारी सहर्ष यादव को तलब कर पूरे मामले की जानकारी ली और उनकी भूमिका की विभागीय जांच के आदेश जारी कर दिए। जांच के आदेश के बाद अब पूरे घटनाक्रम की परतें खुलने की उम्मीद जताई जा रही है।

    सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब घटना के वीडियो उपलब्ध थे और आरोपियों की पहचान भी कथित रूप से हो चुकी थी, तब एफआईआर अज्ञात लोगों के खिलाफ क्यों दर्ज की गई। इस निर्णय ने पुलिस की मंशा को लेकर कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे दिया है। लोगों का कहना है कि यदि पहचान स्पष्ट थी तो नामजद मामला दर्ज किया जाना चाहिए था।

    सूत्रों के हवाले से यह भी दावा किया जा रहा है कि विवाद से एक दिन पहले मोहसिन नामक व्यक्ति द्वारा थाने में 10 लाख रुपये पहुंचाए गए थे। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यह चर्चा पूरे मामले को और गंभीर बना रही है। यह भी आरोप है कि इसी प्रभाव के चलते संबंधित व्यक्ति ने थाना प्रभारी से अभद्र व्यवहार किया और उसका वीडियो भी मौजूद है। बताया जा रहा है कि यह फुटेज वरिष्ठ अधिकारियों तक नहीं पहुंचाया गया।

    मामले में एक और चौंकाने वाला आरोप सामने आया है कि उज्जैन का एक व्यक्ति जो इस विवाद से जुड़ा हुआ था, उसे पुलिस वाहन के माध्यम से वहां से रवाना किया गया। यदि जांच में यह तथ्य सही पाया जाता है तो यह पुलिस की निष्पक्षता पर बड़ा प्रश्नचिन्ह होगा।

    घटना में घायल हुए पुलिस जवानों पर मीडिया से दूरी बनाए रखने का दबाव बनाए जाने की भी चर्चा है। यदि ऐसा हुआ है तो यह केवल हमले का मामला नहीं बल्कि पूरे घटनाक्रम को दबाने के प्रयास के रूप में देखा जाएगा।

    फिलहाल विभागीय जांच शुरू हो चुकी है और सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं। यह मामला सिर्फ जमीन विवाद नहीं बल्कि कानून व्यवस्था और पुलिस की जवाबदेही की भी बड़ी परीक्षा बन गया है।