'बेटों ने घर से निकाला, अब वृद्धाश्रम ही सहारा', बुजुर्ग दंपती ने एक करोड़ की जमीन दान करने की जताई इच्छा


देवास देवास में पारिवारिक रिश्तों को झकझोर देने वाला एक मामला सामने आया है, जहां एक बुजुर्ग दंपती ने अपने ही बेटों और बहुओं पर संपत्ति के लालच में प्रताड़ित करने तथा घर से निकाल देने के आरोप लगाए हैं। न्याय और सुरक्षा की उम्मीद लेकर मंगलवार को बुजुर्ग दंपती कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और प्रशासन से मदद की गुहार लगाई। इस दौरान उन्होंने अपनी करोड़ों की संपत्ति बेटों के बजाय किसी वृद्धाश्रम को दान करने की इच्छा भी जाहिर की।

76 वर्षीय जीवनसिंह और उनकी 72 वर्षीय पत्नी लीलाबाई ने प्रशासन को दिए आवेदन में बताया कि उनके बेटे उनकी जमीन अपने नाम करवाने के लिए लगातार दबाव बना रहे हैं। दंपती का आरोप है कि जब उन्होंने जमीन हस्तांतरित करने से इनकार किया तो उनके साथ दुर्व्यवहार शुरू कर दिया गया। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि उन्हें अपने ही घर में अपमान और प्रताड़ना का सामना करना पड़ा।

बुजुर्ग महिला लीलाबाई ने भावुक होकर अपनी आपबीती सुनाई। उन्होंने कहा कि जिन बच्चों को उन्होंने बड़े प्यार से पाला-पोसा, पढ़ाया-लिखाया और जीवनभर उनकी खुशियों के लिए संघर्ष किया, आज वही बच्चे उन्हें बोझ समझने लगे हैं। उनका आरोप है कि बेटे और बहुएं उनके साथ मारपीट करते हैं और घर में रहने तक नहीं देते। उन्होंने कहा कि अब उन्हें अपने घर से ज्यादा भरोसा वृद्धाश्रम पर है।

जीवनसिंह ने बताया कि उनकी पत्नी लीलाबाई के नाम करीब चार बीघा जमीन दर्ज है, जिसकी वर्तमान बाजार कीमत लगभग एक करोड़ रुपए बताई जा रही है। यही जमीन पूरे विवाद की मुख्य वजह बनी हुई है। उनका कहना है कि बेटे इस जमीन को अपने नाम करवाने के लिए दबाव बना रहे हैं और विरोध करने पर उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से परेशान किया जाता है।

दंपती ने प्रशासन को बताया कि वे अब अपनी संपत्ति बेटों को देने के इच्छुक नहीं हैं। उनका मानना है कि जिस परिवार ने उन्हें सम्मान और सुरक्षा नहीं दी, उसे उनकी मेहनत की कमाई पर अधिकार नहीं होना चाहिए। इसी कारण उन्होंने अपनी जमीन किसी ऐसे वृद्धाश्रम या सामाजिक संस्था को दान करने की इच्छा व्यक्त की है, जहां जरूरतमंद बुजुर्गों की सेवा और देखभाल की जाती हो।

कलेक्टर कार्यालय में आवेदन मिलने के बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया है। अधिकारियों ने बुजुर्ग दंपती की सुरक्षा और रहने की व्यवस्था को लेकर आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। अपर कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को मामले की जांच करने और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है। साथ ही दंपती को अस्थायी रूप से वृद्धाश्रम में रखने के निर्देश भी दिए गए हैं।

यह मामला केवल एक परिवार का विवाद नहीं, बल्कि समाज में बुजुर्गों की स्थिति और उनके सम्मान से जुड़े बड़े सवाल भी खड़े करता है। जीवन के अंतिम पड़ाव में माता-पिता को सहारे और सम्मान की आवश्यकता होती है, लेकिन जब अपने ही उन्हें ठुकरा दें तो यह स्थिति बेहद पीड़ादायक बन जाती है। फिलहाल बुजुर्ग दंपती प्रशासन से न्याय और सुरक्षित जीवन की उम्मीद लगाए बैठे हैं।