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  • UP में भी ट्विशा जैसा मामला…. लखनऊ में फांसी पर फंदे पर लटकी मिली नवविवाहिता …

    UP में भी ट्विशा जैसा मामला…. लखनऊ में फांसी पर फंदे पर लटकी मिली नवविवाहिता …


    लखनऊ।
    उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh) की राजधानी लखनऊ (Lucknow) से दिल दहला देने वाली सनसनीखेज वारदात सामने आई है. यहां ठाकुरगंज इलाके (Thakurganj area) में एक 29 साल की नवविवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई. सोमवार सुबह ससुराल में श्वेता सिंह नाम की महिला का शव फंदे से लटका मिला. घटना के बाद से ही इलाके में हड़कंप मचा हुआ है. मृतका के परिजनों ने ससुराल पक्ष पर दहेज के लिए प्रताड़ित करने और हत्या का गंभीर आरोप लगाया है. पुलिस ने मामले में पति, सास-ससुर समेत 5 लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।


    बीमार मां के देखकर गई थी श्वेता

    ठाकुरगंज के विश्वनगर मल्हाई टोला की रहने वाली श्वेता सिंह की शादी 22 नवंबर 2025 को काशी विहार निवासी शिवम सिंह उर्फ भूपेंद्र सिंह से हुई थी. भूपेंद्र एक लैब में काम करता है. श्वेता की मां सविता सिंह एक निजी अस्पताल में भर्ती हैं, जिन्हें देखने शनिवार रात श्वेता मायके आई थी और फिर ससुराल लौट गई. रविवार सुबह करीब 11 बजे अचानक मायके वालों को फोन आया कि श्वेता ने खुदकुशी कर ली है. भाई का कहना है कि जब तक वे मौके पर पहुंचे, ससुराल वाले शव को फंदे से उतारकर किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के ट्रॉमा सेंटर ले जा चुके थे।


    विदाई में दामाद ने ससुर से पकड़वाए थे पैर

    श्वेता तीन बहनों में सबसे छोटी और सबकी लाडली थी. बहनों ने रोते हुए बताया कि अपनी हैसियत से बढ़कर धूमधाम से शादी की थी, लेकिन उन्हें नहीं पता था कि 6 महीने में ही यह हश्र होगा. बड़ी बहन ने आरोप लगाया कि शादी के दिन ही दूल्हे भूपेंद्र ने दहेज की बड़ी मांग रख दी थी. जब मांग पूरी नहीं हो सकी, तो वह इतना नाराज हुआ कि विदाई के दौरान श्वेता को किसी से मिलने तक नहीं दिया. उस वक्त दामाद को समझाने के लिए श्वेता के बुजुर्ग पिता ने उसके पैर तक पकड़ लिए थे, लेकिन उसकी बेरहमी कम नहीं हुई।


    स्कॉर्पियो गाड़ी की मांग कर रहे थे ससुराल वाले

    परिजनों का आरोप है कि शादी के बाद से ही ससुराल वाले लगातार श्वेता को कम दहेज के लिए मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित कर रहे थे. पति भूपेंद्र लगातार मायके से मिले सोफे और बेड की निंदा करता था और दहेज में स्कॉर्पियो गाड़ी की मांग कर रहा था।

    बहन ने बताया, 24 मई को जब श्वेता से मुलाकात हुई थी, तो उसके शरीर पर कोई चोट नहीं थी. लेकिन ट्रॉमा सेंटर में जब हमने उसकी लाश देखी, तो उसके पैरों पर गंभीर चोट और खून के निशान थे.” श्वेता की बहनों ने बताया कि सास और ननद भी उसे लगातार ताने देती थीं. जब श्वेता यह बातें बताती, तो परिजनों ने इसे आम घरेलू अनबन समझकर एडजस्ट करने को कहा, जिसका उन्हें अब बेहद अफसोस है।


    ननद लगाती थी ताने वाले स्टेटस

    श्वेता की बहनों ने ससुराल वालों की क्रूरता की कई और परतें खोलीं. उन्होंने बताया कि भूपेंद्र को श्वेता का जॉब करना पसंद नहीं था और शादी के दौरान उसने श्वेता की नौकरी छुड़वा दी थी. हालांकि, श्वेता दोबारा नौकरी करना चाहती थी ताकि अपने पैरों पर खड़ी हो सके. इसके अलावा, घर में जब भी विवाद होता, तो श्वेता की ननद व्हाट्सएप स्टेटस लगाकर उसे और उसके परिवार को नीचा दिखाती थी. छोटी बहन ने ननद के उन विवादित व्हाट्सएप स्टेटस के स्क्रीनशॉट भी शेयर किए हैं, जिसमें लिखा था- ‘जो खुद सूअर और सूअर जैसे खानदान में रही हो, उसे सब वैसे ही नजर आते हैं.’ एक अन्य स्टेटस में ननद ने लिखा था कि ‘जिन लड़कियों को सास-ससुर या ननद पसंद नहीं, वे अनाथालय में शादी करें।

    पति, सास-ससुर और देवर ननद पर मामला दर्ज
    इस पूरे मामले पर पुलिस एक्शन में आ गई है. डीसीपी पश्चिम कमलेश कुमार ने बताया कि पीड़ित परिवार की तहरीर और गंभीर आरोपों के आधार पर पुलिस ने तत्काल कार्रवाई की है. डीसीपी कमलेश कुमार ने बताया कि मृतका के परिवार के आरोपों पर पति भूपेंद्र सिंह, ससुर कौशलेंद्र सिंह, सास रचना सिंह, देवर बंटी सिंह और ननद प्रिया सिंह के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है. शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने और जांच के बाद आगे की सख्त विधिक कार्रवाई की जाएगी।

  • लखनऊ के मलिहाबाद क्षेत्र के कसमंडी कला इलाके में स्थित एक पुराने ढांचे को लेकर जारी विवाद

    लखनऊ के मलिहाबाद क्षेत्र के कसमंडी कला इलाके में स्थित एक पुराने ढांचे को लेकर जारी विवाद



    नई दिल्ली। एक बार फिर तनाव का कारण बन गया है। स्थानीय स्तर पर इस स्थल को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं, जिनकी वजह से इलाके में सामाजिक और धार्मिक संवेदनशीलता बढ़ गई है। हालात को देखते हुए जिला प्रशासन ने एहतियातन सख्त कदम उठाते हुए किसी भी प्रकार के धार्मिक आयोजन पर रोक लगा दी है और पूरे क्षेत्र में पुलिस बल की तैनाती बढ़ा दी गई है।

    जानकारी के अनुसार, मंगलवार को कुछ संगठनों ने इस विवादित स्थल पर सुंदरकांड पाठ और हनुमान चालीसा के आयोजन का ऐलान किया था। वहीं दूसरी ओर, इसी क्षेत्र में बकरीद की नमाज को लेकर भी स्थिति संवेदनशील बन गई थी। दोनों ही पक्षों की गतिविधियों को देखते हुए प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका जताई और तत्काल प्रभाव से दोनों धार्मिक कार्यक्रमों को अनुमति देने से इनकार कर दिया। इसके साथ ही प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है।

    स्थानीय स्तर पर यह विवाद काफी पुराना बताया जा रहा है। कुछ लोगों का कहना है कि यह स्थान ऐतिहासिक रूप से एक प्राचीन किले का हिस्सा रहा है, जिसे बाद में धार्मिक स्थल के रूप में उपयोग किया गया। वहीं दूसरी ओर कुछ समुदायों का दावा है कि यह स्थल लंबे समय से धार्मिक आस्था से जुड़ा हुआ है। इन्हीं विरोधाभासी दावों के कारण यहां समय-समय पर तनाव की स्थिति उत्पन्न होती रही है।

    पिछले दिनों इस मामले ने तब और तूल पकड़ लिया जब पासी समुदाय से जुड़े कुछ लोगों ने इसे महाराजा कंस पासी का प्राचीन किला बताते हुए ऐतिहासिक पहचान से जोड़ने की बात कही। उन्होंने अपने दावे के समर्थन में पुराने गजेटियर और स्थानीय परंपराओं का भी हवाला दिया। इसके बाद क्षेत्र में धार्मिक गतिविधियों और प्रतीकात्मक आयोजनों को लेकर माहौल और अधिक संवेदनशील हो गया।

    इसी विवाद के चलते पुलिस ने ‘लाखन आर्मी’ नामक संगठन के कुछ सदस्यों पर मामला दर्ज किया था, जिसके बाद संगठन ने विरोध प्रदर्शन और आंदोलन की चेतावनी दी थी। संगठन के प्रमुख ने आरोप लगाया है कि उनके समुदाय की ऐतिहासिक पहचान को नजरअंदाज किया जा रहा है और उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। हालांकि प्रशासन का कहना है कि सभी कदम कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाए जा रहे हैं।

    स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने पूरे क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल, स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों और खुफिया इकाइयों को सक्रिय कर दिया है। संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़ा दी गई है और किसी भी तरह की भीड़ जुटने पर तत्काल रोक लगाने के निर्देश दिए गए हैं।

    प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल प्राथमिकता क्षेत्र में शांति बनाए रखना है और किसी भी तरह की भड़काऊ गतिविधि को रोकना है। साथ ही दोनों पक्षों से बातचीत कर समाधान निकालने की कोशिश भी की जा रही है। स्थानीय लोगों से अपील की गई है कि वे किसी भी अफवाह या भ्रामक जानकारी पर ध्यान न दें और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें।

    कसमंडी कला का यह मामला अब केवल एक स्थानीय विवाद न रहकर संवेदनशील सामाजिक मुद्दा बनता जा रहा है, जिस पर प्रशासन की नजर लगातार बनी हुई है। अधिकारियों का मानना है कि यदि समय रहते स्थिति को नियंत्रित नहीं किया गया तो यह तनाव और बढ़ सकता है, इसलिए एहतियाती कदम उठाना जरूरी था।

  • मलिहाबाद आंधी-बारिश से दशहरी आम की पैदावार 60% घटी, इस साल ₹100-120 किलो तक पहुंचेंगे दाम

    मलिहाबाद आंधी-बारिश से दशहरी आम की पैदावार 60% घटी, इस साल ₹100-120 किलो तक पहुंचेंगे दाम




    लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मलिहाबाद क्षेत्र में इस साल मशहूर दशहरी आम की पैदावार पर मौसम की मार पड़ी है। आंधी और बेमौसम बारिश के कारण आम की फसल लगभग 60% तक कम हो गई है, जिससे बाजार में इस बार आम के दाम बढ़ने की संभावना है।

    किसानों के अनुसार इस बार केवल 40% पेड़ों पर ही फल आए हैं। पिछले साल जहां दशहरी आम 50-60 रुपए प्रति किलो तक बिकता था, वहीं इस साल इसके 100 से 120 रुपए प्रति किलो तक पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है। साथ ही आम का साइज भी सामान्य से छोटा रहने की संभावना है।

    किसानों को बड़ा नुकसान, एक्सपोर्ट पर भी असर
    मलिहाबाद के किसानों का कहना है कि इस बार उत्पादन कम होने के कारण वे विदेशों में आम निर्यात नहीं कर पाएंगे और केवल स्थानीय मंडियों में ही बिक्री करनी पड़ेगी। आमतौर पर यहां से 500 टन से अधिक आम दुबई, अमेरिका, जापान और अन्य देशों में भेजा जाता है, लेकिन इस बार निर्यात लगभग रुक गया है।

    किसानों का कहना है कि बागों में कई पेड़ों पर आम नहीं आए हैं। कुछ किसानों के अनुसार यह स्थिति हर साल रोटेशन के कारण भी होती है, जबकि कई बागों में रोग और मौसम की वजह से भी नुकसान हुआ है।

    ‘गोल्डन मैंगो’ बनाने के लिए विशेष पैकिंग
    कई बागों में आमों को विशेष लिफाफों से ढका जा रहा है, जिससे फल का रंग बेहतर आता है और बाजार में इसे ‘गोल्डन मैंगो’ के नाम से बेचा जाता है। हालांकि इससे लागत भी बढ़ गई है।

    वैज्ञानिकों ने बताई मौसम की वजह
    सेंट्रल इंस्टीट्यूट फॉर सबट्रॉपिकल हॉर्टिकल्चर (CISH) के वैज्ञानिकों के अनुसार, इस बार बौर आने के समय कोहरा और उसके बाद हुई बेमौसम बारिश ने फसल को गंभीर नुकसान पहुंचाया। फूलों में नमी बैठने और सड़न की वजह से उत्पादन में भारी गिरावट आई है।

    कुछ क्षेत्रों में बेहतर फसल
    हालांकि मलिहाबाद में नुकसान के बावजूद पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों जैसे मेरठ और अमरोहा में चौसा और लंगड़ा आम की अच्छी पैदावार दर्ज की गई है।

    कुल मिलाकर इस साल दशहरी आम की कम आपूर्ति के कारण बाजार में दाम बढ़ना तय माना जा रहा है, जिससे उपभोक्ताओं को महंगा आम खरीदना पड़ सकता है और किसानों को मिश्रित नुकसान-लाभ की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।

  • कोर्ट की सख्ती के बाद लखनऊ में सपा पार्षद को मिली शपथ, मेयर के अधिकार सीमित होने से प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज


    नई दिल्ली। लखनऊ नगर निगम में लंबे समय से चल रहे पार्षद शपथ विवाद का अंत आखिरकार न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद हो गया। हाई कोर्ट के सख्त निर्देशों के अनुपालन में नगर निगम प्रशासन ने सपा पार्षद ललित किशोर तिवारी को औपचारिक रूप से शपथ दिलाई। यह मामला केवल प्रशासनिक प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक और कानूनी बहस का भी बड़ा विषय बन गया था, जिसने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।

    पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब निकाय चुनाव के परिणामों के बाद विजयी घोषित सपा पार्षद को शपथ दिलाने में देरी की गई। लगभग पांच महीने तक शपथ ग्रहण की प्रक्रिया लंबित रहने के कारण मामला धीरे-धीरे अदालत तक पहुंच गया। याचिकाकर्ता पक्ष ने आरोप लगाया कि जानबूझकर शपथ ग्रहण में देरी की जा रही है, जिससे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन हो रहा है। मामला पहले हाई कोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां से प्रशासन को स्पष्ट निर्देश दिए गए।

    हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान इस मामले को गंभीरता से लेते हुए न केवल शपथ दिलाने का आदेश दिया, बल्कि लखनऊ नगर निगम के प्रमुख प्रशासनिक अधिकारों पर भी सख्ती दिखाई। अदालत ने यह स्पष्ट किया कि निर्धारित समय सीमा के भीतर आदेश का पालन किया जाए, अन्यथा संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से जवाबदेह माना जाएगा। इसी आदेश के बाद नगर निगम प्रशासन हरकत में आया और शपथ ग्रहण की प्रक्रिया को पूरा किया गया।

    शपथ ग्रहण समारोह के दौरान मेयर सुषमा खर्कवाल ने सपा पार्षद को पद की शपथ दिलाई। यह कदम न्यायालय के आदेश के अनुपालन के रूप में देखा गया, जिससे यह संदेश भी गया कि संवैधानिक प्रक्रिया और न्यायालय के निर्देशों की अवहेलना संभव नहीं है। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम ने नगर निगम के भीतर चल रहे प्रशासनिक तनाव और राजनीतिक खींचतान को भी उजागर कर दिया है।

    इस विवाद की पृष्ठभूमि 2023 के निकाय चुनावों से जुड़ी हुई है, जहां एक सीट पर चुनाव परिणाम को लेकर कानूनी चुनौती दी गई थी। आरोप-प्रत्यारोप के बीच अदालत ने अंतिम रूप से सपा प्रत्याशी को विजयी घोषित किया, लेकिन शपथ ग्रहण में देरी के कारण मामला फिर से विवादों में आ गया। इस पूरे घटनाक्रम ने स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था और राजनीतिक संतुलन दोनों पर प्रभाव डाला है।

    अब शपथ ग्रहण के बाद यह मामला औपचारिक रूप से समाप्त माना जा रहा है, लेकिन इसने यह स्पष्ट कर दिया है कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की देरी या हस्तक्षेप न्यायिक समीक्षा के दायरे में आता है। प्रशासनिक स्तर पर इस घटना को एक चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है कि भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बचने के लिए पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित करना अनिवार्य होगा।

  • लखनऊ में 60 दिन का अलर्ट: लागू हुई सख्त निषेधाज्ञा,प्रशासन ने कहा-शांति और सुरक्षा सर्वोपरि

    लखनऊ में 60 दिन का अलर्ट: लागू हुई सख्त निषेधाज्ञा,प्रशासन ने कहा-शांति और सुरक्षा सर्वोपरि



    लखनऊ । लखनऊ में प्रशासन ने कानून-व्यवस्था को मजबूत करने और आगामी धार्मिक व प्रशासनिक गतिविधियों को ध्यान में रखते हुए बड़ा कदम उठाया है। शहर में 60 दिनों के लिए निषेधाज्ञा लागू कर दी गई है, जो 19 जुलाई तक प्रभावी रहेगी। इस दौरान कई तरह की गतिविधियों पर सख्त प्रतिबंध रहेंगे और बिना अनुमति किसी भी प्रकार का सार्वजनिक आयोजन करना पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। प्रशासन का कहना है कि यह निर्णय बकरीद, बड़ा मंगल, मोहर्रम जैसे धार्मिक आयोजनों के साथ-साथ आने वाली प्रवेश परीक्षाओं को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के उद्देश्य से लिया गया है।

    लखनऊ में 60 दिन का अलर्ट: प्रशासन का बड़ा फैसला
    लखनऊ पुलिस कमिश्नरेट क्षेत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 163 के तहत यह निषेधाज्ञा लागू की गई है। संयुक्त पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था) बबलू कुमार द्वारा जारी आदेश में साफ कहा गया है कि किसी भी तरह की भीड़, जुलूस या धरना-प्रदर्शन अब बिना अनुमति संभव नहीं होगा। शहर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस को सख्त निगरानी के निर्देश दिए गए हैं।

    5 से अधिक लोगों की सभा पर रोक, अनुमति जरूरी
    आदेश के अनुसार, बिना अनुमति पांच या उससे अधिक लोगों का एकत्र होना, समूह बनाना, जुलूस निकालना या किसी प्रकार का सार्वजनिक आयोजन करना प्रतिबंधित रहेगा। धार्मिक कार्यक्रमों जैसे भंडारा, मजलिस, जुलूस, चल समारोह या सांस्कृतिक आयोजन के लिए पहले से प्रशासनिक अनुमति लेना अनिवार्य होगा। रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर के उपयोग पर भी पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है।

    संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष प्रतिबंध
    निषेधाज्ञा के तहत विधानसभा भवन और उसके आसपास के क्षेत्रों में ट्रैक्टर-ट्रॉली, घोड़ा गाड़ी, ज्वलनशील पदार्थ और हथियार लेकर प्रवेश पर रोक रहेगी। इसके अलावा लालबत्ती चौराहा, पार्क रोड, सिविल अस्पताल, अटल चौक, बंदरिया बाग, गोल्फ क्लब और कैसरबाग जैसे इलाकों में धरना या विरोध प्रदर्शन पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। प्रशासन ने साफ किया है कि इन क्षेत्रों में किसी भी प्रकार की अव्यवस्था बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    ड्रोन, शूटिंग और सोशल मीडिया पर भी नजर
    लखनऊ में सरकारी भवनों जैसे लोकभवन, मुख्यमंत्री आवास और विधान भवन के आसपास ड्रोन उड़ाने या शूटिंग करने पर भी रोक लगा दी गई है। साथ ही सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट, अफवाह या सांप्रदायिक तनाव फैलाने वाले कंटेंट पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। साइबर सेल को ऐसे मामलों पर लगातार निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।

    डिलीवरी स्टाफ और किरायेदारों की जांच अनिवार्य
    ऑनलाइन डिलीवरी सेवाओं जैसे जोमैटो, स्विगी और ब्लिंकिट के कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन अनिवार्य कर दिया गया है। साइबर कैफे संचालकों को ग्राहकों का पूरा रिकॉर्ड रखने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं मकान मालिकों को भी बिना किरायेदार सत्यापन के मकान न देने की सख्त हिदायत दी गई है।

    सख्त संदेश: नियम तोड़ा तो होगी कार्रवाई
    प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि आदेश का उल्लंघन करने वालों पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के तहत कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का कहना है कि यह कदम शहर में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए जरूरी है।

  • लखनऊ सैलून मैनेजर सुसाइड केस: रत्ना सिंह मामले में बड़ा एक्शन, मालिक की पत्नी मुंबई से गिरफ्तार

    लखनऊ सैलून मैनेजर सुसाइड केस: रत्ना सिंह मामले में बड़ा एक्शन, मालिक की पत्नी मुंबई से गिरफ्तार


    नई दिल्ली। लखनऊ में सैलून मैनेजर रत्ना सिंह आत्महत्या मामले ने बड़ा तूल पकड़ लिया है। इस मामले में लगातार नए खुलासे और पुलिस कार्रवाई सामने आ रही है। गोरखपुर की रहने वाली 32 वर्षीय रत्ना सिंह लखनऊ के गोमती नगर विस्तार स्थित मानसून सैलून में मैनेजर के पद पर कार्यरत थीं। कुछ दिन पहले उन्होंने अपने कमरे में फांसी लगाकर जान दे दी थी।

    आत्महत्या से पहले रत्ना सिंह ने 26 सेकंड का एक वीडियो भी रिकॉर्ड किया था, जिसमें उन्होंने सैलून मालिक शरद सिंह, उनकी पत्नी पल्लवी जोशी समेत कुछ अन्य लोगों पर मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए थे। यह वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद मामला और भी गंभीर हो गया।

    परिजनों ने आरोप लगाया कि रत्ना सिंह को लगातार प्रताड़ित किया जा रहा था, जिससे वह मानसिक रूप से टूट गईं और उन्होंने यह कदम उठाया। घटना के बाद परिजनों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात कर न्याय की मांग की, जिसके बाद पुलिस और प्रशासन हरकत में आया।

    मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी शरद सिंह सहित कई लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं उनकी पत्नी पल्लवी जोशी को मुंबई से हिरासत में लिया गया है। पुलिस ने अन्य आरोपियों की भी गिरफ्तारी की पुष्टि की है और जांच जारी है।

    कार्रवाई के तहत संबंधित सैलून और उससे जुड़े प्रतिष्ठानों पर प्रशासन ने सीलिंग की कार्रवाई की है। साथ ही आरोपियों की संपत्तियों पर भी बुलडोजर एक्शन लिया गया है, जिससे पूरे इलाके में हलचल मच गई है।

    पुलिस के अनुसार, प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि रत्ना सिंह पर लंबे समय से दबाव बनाया जा रहा था। वहीं अन्य आरोपियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। इस मामले में एक होटल मैनेजर को पहले ही देवरिया से गिरफ्तार किया जा चुका था।

    रत्ना सिंह के पिता रेलवे कर्मचारी हैं और परिवार का राजनीतिक व सामाजिक जुड़ाव भी बताया जा रहा है। परिजनों ने सभी दोषियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग की है और कहा है कि उनकी बेटी को न्याय मिलना चाहिए।

    फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहन जांच में जुटी है और सभी डिजिटल साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है। यह मामला न केवल लखनऊ बल्कि पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है।

  • लखनऊ में आजम परिवार की अखिलेश यादव से मुलाकात, प्रतीक यादव के निधन पर जताया शोक

    लखनऊ में आजम परिवार की अखिलेश यादव से मुलाकात, प्रतीक यादव के निधन पर जताया शोक



    नई दिल्ली। लखनऊ में समाजवादी राजनीति के बीच शुक्रवार को भावनात्मक माहौल देखने को मिला, जब वरिष्ठ सपा नेता आजम खान की पत्नी तंजीन फातिमा और उनके बेटे अदीब आजम खान ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से मुलाकात की। यह मुलाकात हाल ही में दिवंगत हुए मुलायम सिंह यादव के छोटे पुत्र प्रतीक यादव के निधन पर शोक व्यक्त करने के लिए की गई।

    मुलाकात के बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि “दुख की घड़ी में सब साथ हैं।” इस मुलाकात को राजनीतिक औपचारिकता से ज्यादा मानवीय संवेदना और आपसी समर्थन के तौर पर देखा जा रहा है।

    बता दें कि प्रतीक यादव का 38 वर्ष की उम्र में बुधवार को हृदय और फेफड़ों से जुड़ी गंभीर बीमारियों के चलते निधन हो गया था। तबीयत बिगड़ने पर उन्हें लखनऊ के सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके बाद उनके पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार बृहस्पतिवार को लखनऊ के बैकुंठ धाम में किया गया, जहां उनके ससुर अरविंद सिंह बिष्ट ने उन्हें मुखाग्नि दी।

    परिवार के करीबी सूत्रों के अनुसार, अंतिम यात्रा विक्रमादित्य मार्ग स्थित आवास से शुरू हुई, जिसमें बड़ी संख्या में परिजन और समर्थक शामिल हुए।

    आजम परिवार की यह मुलाकात ऐसे समय पर हुई है जब समाजवादी पार्टी पहले से ही शोक की स्थिति से गुजर रही है। राजनीतिक गलियारों में इसे एकजुटता और संवेदना के संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

  • ‘कांग्रेस गरीबों की पार्टी, नेता अमीर’ -लखनऊ में राहुल गांधी का बड़ा बयान, BJP पर भी साधा निशाना

    ‘कांग्रेस गरीबों की पार्टी, नेता अमीर’ -लखनऊ में राहुल गांधी का बड़ा बयान, BJP पर भी साधा निशाना


    लखनऊ। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने लखनऊ में आयोजित संविधान सम्मेलन में अपनी ही पार्टी को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस एक गरीबों की पार्टी है, लेकिन उसके कई बड़े नेता अमीर हैं।

    राहुल गांधी ने कहा, “कांग्रेस गरीब पार्टी है, लेकिन उसके जो बड़े-बड़े नेता हैं वे बहुत अमीर हैं। हम अमीर पार्टी बनना भी नहीं चाहते, क्योंकि जिस दिन कांग्रेस अमीर पार्टी बन जाएगी, वह Bharatiya Janata Party बन जाएगी।”

    उन्होंने कहा कि कांग्रेस का यह ढांचा Mahatma Gandhi के समय से ही तय किया गया था और पार्टी का उद्देश्य हमेशा गरीबों और वंचितों की आवाज बनना रहा है।

    कांशीराम की जयंती पर सम्मेलन

    लखनऊ में Kanshi Ram की जयंती के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में राहुल गांधी ने कांग्रेस की कमियों पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि पार्टी की कुछ कमजोरियों के कारण ही बहुजन आंदोलन को ताकत मिली और कांशीराम राजनीति में बड़ी सफलता हासिल कर पाए।

    उनका कहना था कि अगर कांग्रेस ने सामाजिक बदलाव की दिशा में तेज़ी से काम किया होता, तो शायद कांशीराम को इतनी बड़ी राजनीतिक सफलता नहीं मिलती।

    केवल इच्छा से नहीं होता बदलाव

    कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि राजनीति में केवल चाहने से कुछ नहीं होता। बदलाव के लिए विचारों के लिए संघर्ष करना पड़ता है।
    उन्होंने कहा कि जब तक लोग यह तय नहीं करेंगे कि अन्याय को स्वीकार नहीं करना है और उसके खिलाफ खड़ा होना है, तब तक समाज में बदलाव संभव नहीं है।

    संविधान और मौजूदा सरकार पर टिप्पणी

    संविधान पर बोलते हुए राहुल गांधी ने कहा कि भारत के संविधान में हजारों साल पुरानी सभ्यता की आवाज़ है और इसकी मूल भावना सामाजिक न्याय और बराबरी की है।

    उन्होंने मौजूदा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि आज की सत्ता इस मूल भावना को स्वीकार नहीं करती।

    अंबेडकर और कांशीराम के संघर्ष का जिक्र

    अपने संबोधन में राहुल गांधी ने B. R. Ambedkar और कांशीराम के संघर्ष का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अंबेडकर ने शिक्षा और संगठन के जरिए समाज को नई दिशा दी, जबकि कांशीराम ने बिना समझौता किए अपने सिद्धांतों पर संघर्ष किया।

    ऊर्जा नीति और सरकार पर आरोप

    राहुल गांधी ने देश की ऊर्जा नीति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री Hardeep Singh Puri का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण भारत की ऊर्जा नीतियों पर असर पड़ रहा है।

    समाज में असमानता का मुद्दा

    राहुल गांधी ने कहा कि देश का समाज आज 15 प्रतिशत और 85 प्रतिशत में बंट गया है, जहां संसाधनों और अवसरों का लाभ सीमित वर्ग तक ही पहुंच रहा है।

    2027 चुनाव की तैयारी

    कार्यक्रम के अंत में उन्होंने कहा कि राजनीति को बदलने का समय आ गया है और सबकी हिस्सेदारी वाली राजनीति ही देश को आगे ले जा सकती है।
    गौरतलब है कि हालिया लोकसभा चुनाव में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के गठबंधन ने उत्तर प्रदेश में बेहतर प्रदर्शन किया था। अब यही गठबंधन 2027 के विधानसभा चुनाव में भी उसी सफलता को दोहराने की रणनीति पर काम कर रहा है।

  • PM मोदी आज लखनऊ में करेंगे राष्ट्र प्रेरणा स्थल का लोकार्पण… म्यूजियम का उद्घाटन भी होगा

    PM मोदी आज लखनऊ में करेंगे राष्ट्र प्रेरणा स्थल का लोकार्पण… म्यूजियम का उद्घाटन भी होगा

    लखनऊ। उत्तर प्रदेश के लखनऊ (Lucknow) में बसंतकुंज योजना (Basant Kunj Scheme) में बने राष्ट्र प्रेरणा स्थल (National Inspiration Site) का लोकार्पण आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) करेंगे। कार्यक्रम की तैयारियां पूरी हो गई हैं। पीएम यहां पर लगी तीन विभूतियों अटल बिहारी वापजेयी, श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पं. दीन दयाल उपाध्याय की भव्य प्रतिमाओं का अनावरण भी करेंगे। इन विभूतियों के संस्मरणों को संजोने के लिए बने म्यूजियम का लोकार्पण भी होगा।

    इस आयोजन में डेढ़ लाख से अधिक लोगों के शामिल होने का अनुमान है। समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और रक्षामंत्री राजनाथ सिंह भी प्रमुख रूप से मौजूद रहेंगे। प्रधानमंत्री करीब दो बजे आयोजन स्थल पर हेलीकाॅप्टर से पहुंचेंगे। लोकार्पण के लिए आयोजन स्थल के साथ पूरे शहर को सजाया व संवारा गया है। आयोजन स्थल को भव्य बनाने के लिए कई प्रदेशों से बेहतरीन फूल वाले पौधे मंगाए गए हैं।

    पूरे शहर में डिवाइडरों को साफ कर रंगा गया है। प्रमुख चौराहों और मार्गों पर स्ट्रीट लाइट के पोल पर रंगीन लाइट वाली झालरें लगाई गई हैं। दीवारों पर आकर्षक चित्रकारी कराई गई है। सुरक्षा को लेकर भी पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। आयोजन में आसपास के कई जिलों से करीब 2000 बसें आ रही हैं। इनकी पार्किंग के खास इंतजाम किए गए हैं। कुल 13 पार्किंग बनाई गई हैं। इनमें 2600 बसें और 2000 कारें खड़ी हो सकेंगी। व्यवस्था बनी रहे इसके लिए अफसरों और कर्मचारियों की ड्यूटी भी लगाई गई है।


    आकर्षित करती हैं भव्य प्रतिमाएं

    – प्रेरणा स्थल में श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पंडित दीन दयाल उपाध्याय और अटल बिहारी वाजपेयी की 65 फीट ऊंची भव्य कांस्य प्रतिमाएं लगी हैं।
    – राष्ट्र प्रेरणा स्थल 65 एकड़ में फैला है और इसके निर्माण पर 232 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। इसका निर्माण दिसंबर 2022 में शुरू हुआ था।
    – पंडित दीन दयाल उपाध्याय की प्रतिमा का निर्माण प्रसिद्ध मूर्तिकार राम सुतार ने किया है जिन्होंने स्टैच्यू ऑफ यूनिटी का निर्माण किया था।
    – डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा का निर्माण मूर्तिकार माटू राम ने पूरा किया है।
    – तीनों विभूतियों की प्रतिमाओं के निर्माण पर 21 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं।


    पहले प्रतिमाओं को होगा अनावरण

    बृहस्पतिवार को प्रधानमंत्री सबसे पहले राष्ट्र नायकों की प्रतिमाओं का अनावरण कर श्रद्धा सुमन अर्पित करेंगे। इस अवसर पर राष्ट्रीयता की भावना के संचार के लिए तिरंगा गुब्बारे छोड़े जाएंगे। इसके बाद प्रधानमंत्री राष्ट्र नायकों को समर्पित म्यूजियम को लोकार्पण करेंगे। वह श्यामा प्रसाद मुखर्जी, दीन दयाल उपाध्याय और अटल बिहारी वाजपेयी को समर्पित गैलरियों को देखेंगे। पहली गैलरी में डिजिटल सिस्टम के जरिये राष्ट्र नायकों का संक्षिप्त जीवन परिचय दिखाया जाएगा। इसके बाद प्रधानमंत्री म्यूजियम परिसर में ही बनाए गए भारत माता, जनसंघ के प्रतीक चिह्न दीपक और सुदर्शन चक्र गैलरी में जाएंगे। राष्ट्र नायकों जुड़ी हुई वस्तुओं को देखने के लिए प्रथम तल पर बनी गैलरी में भी जाएंगे। म्यूजियम से बाहर निकल कर प्रधानमंत्री प्रेरणा स्थल पर बने मंच से कार्यक्रम में आए लोगों को संबोधित करेंगे।


    बदला रहेगा शहर का यातायात

    25 दिसंबर को प्रधानमंत्री राष्ट्र प्रेरणा स्थल का लोकार्पण करने राजधानी आ रहे हैं। कार्यक्रम के मद्देनजर ट्रैफिक पुलिस ने डायवर्जन जारी किया है। 24 दिसंबर की रात 12 बजे से बृहस्पतिवार को कार्यक्रम की समाप्ति तक यातायात बदला रहेगा। इमरजेंसी की स्थिति में प्रतिबंधित मार्ग पर एंबुलेंस, फायर सर्विस, स्कूली वाहन, शव वाहन को रास्ता दिया जाएगा। इसके लिए ट्रैफिक कंट्रोल नंबर 9454405155 पर संपर्क किया जा सकता है।


    आंतरिक डायवर्जन

    – मलीहाबाद चौराहे से बाजनगर किसान पथ, छंदोईया की ओर भारी या अन्य वाहन नहीं जा सकेंगे। इन्हें जीरो पॉइंट मोहान रोड होकर जाना होगा।
    – मुंजासा तिराहे से बाजनगर किसान पथ, छंदोईया की ओर वाहन नहीं जाएंगे। ये वाहन जीरो पॉइंट मोहान रोड होकर जा सकेंगे।
    – बाजनगर किसान पथ अंडरपास से छंदोईया बाईपास तिराहे की ओर वाहन नहीं जा सकेंगे। ये वाहन बाजनगर किसान पथ अंडरपास से किसान पथ होकर जाएंगे।
    – कसमंडी (हमसफर लॉन) अंडरपास से अंधे की चौकी तिराहे की ओर वाहन नहीं जाएंगे। इन्हें किसानपथ होकर जाना होगा।
    – छंदोईया बाईपास तिराहे से कार्यक्रम स्थल, भिठौली तिराहे की तरफ वाहन नहीं जा सकेंगे। ये वाहन अंधे की चौकी तिराहे, बाजनगर किसान पथ अंडरपास से किसान पथ या दुबग्गा तिराहे होकर जाएंगे।
    – तिकोनिया तिराहे से दुबग्गा तिराहे, छंदोईया बाईपास तिराहे की तरफ भारी वाहन नहीं जाएंगे। ये वाहन नहर तिराहे मोहान रोड, खुशहालगंज बाजार होते हुए खुशहालगंज किसान पथ अंडरपास से किसानपथ होकर जाएंगे।
    – भिठौली तिराहे से कार्यक्रम स्थल, छंदोईया बाईपास तिराहे की तरफ वाहन नहीं जाएंगे। इन्हें सैरपुर तिराहे, अस्ति क्राॅसिंग, बख्शी का तालाब होकर इंदौराबाग अंडरपास से किसान पथ या इंजीनियरिंग कॉलेज चौराहे से होकर जाना होगा।
    – नया पक्कापुल तिराहे, कुड़ियाघाट तिराहे से कार्यक्रम स्थल, घैला तिराहे की ओर वाहन नहीं जाएंगे। इन्हें रूमी गेट, कोनेश्वर चौराहे, बालागंज चौराहे, दुबग्गा तिराहे से होकर जाना होगा।
    – दुबग्गा तिराहे से वाहन छंदोईया या सीतापुर बाईपास की तरफ नहीं जाएंगे। इन्हें तिकोनिया तिराहे से होकर जाना होगा।
    – नहरपुल तिराहे से वाहन बुद्धेश्वर की तरफ नहीं जाएंगे। इन्हें जीरो पॉइंट या किसान पथ के ऊपर से होकर जाना होगा।


    कुछ ऐसा रहेगा बाहर से आने वाले वाहनों का डायवर्जन

    – कानपुर की तरफ से आने वाले भारी वाहन अंबेडकरनगर, बस्ती, संत कबीरनगर, गोरखपुर, देवरिया, महराजगंज, कुशीनगर, बलिया, गाजीपुर, आजमगढ़ समेत अन्य जिलों की ओर जाने के लिए कानपुर, फतेहपुर, लालगंज, बछरांवा, हैदरगढ़, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे होकर जाएंगे।
    – उन्नाव की तरफ से आने वाले भारी वाहन उन्नाव के दही चौकी से पुरवा, मौरावां, बछरावां, हैदरगढ़, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे होकर जा सकेंगे। इसके अलावा उन्नाव (ललऊखेड़ा) से बीघापुर लालगंज, गुरुबक्शगंज, बछरावां से पूर्वांचल एक्सप्रेसवे होकर भी जा सकेंगे।
    – सीतापुर की तरफ से आने वाले भारी वाहन चाहलारी होते हुए बहराईच से गोंडा व बलरामपुर होकर जा सकेंगे।
    – हरदोई की तरफ से आने वाले भारी वाहन बघौली, बांगरमऊ, उन्नाव (ललऊखेड़ा), बीघापुर लालगंज, गुरुबक्शगंज, बछरांवा से पूर्वांचल एक्सप्रेसवे होकर जा सकेंगे।
    – सुल्तानुपर रोड / हैदरगढ़ (जनपद बाराबंकी) की तरफ से आने वाले भारी वाहन हैदरगढ़ से पूर्वांचल एक्सप्रेसवे होकर जाएंगे।
    – रायबरेली रोड की तरफ से आने वाले भारी वाहन बछरावां से हैदरगढ़ होकर पूर्वांचल एक्सप्रेसवे से जाएंगे।
    – बाराबंकी रोड की तरफ से आने वाले भारी वाहन हैदरगढ, बछरावां, लालगंज, फतेहपुर, चौडगरा होकर जा सकेंगे। इसके अलावा बाराबंकी रोड से बहराईच के चहलारी घाट से सीतापुर होकर भी जा सकते हैं।


    चप्पे-चप्पे पर रहेगी की पुलिस की नजर

    प्रधानमंत्री के कार्यक्रम को लेकर पुलिस ने सुरक्षा के कड़े बंदोबस्त किए हैं। जेसीपी एलओ बबलू कुमार ने बताया कि कार्यक्रम स्थल व उसके आसपास के पूरे इलाके पर पुलिस की पैनी नजर बनी हुई है। हर जगह चेकिंग की जा रही है। सुरक्षा के लिए 18 पुलिस उपायुक्त, 26 अपर पुलिस उपायुक्त, 80 सहायक पुलिस आयुक्त, 189 इंस्पेक्टर, 1367 दरोगा, 214 महिला दरोगा, 4312 सिपाही, 997 महिला सिपाही, 18 कंपनी पीएसी, 4 कंपनी आरएएफ, 8 बम निरोधक दस्ता, एनएसजी की दो टीमें, एटीएस की एक टीम, एंटी ड्रोन की दो टीमें, एक एंटी माइन टीम, 14 एंटी सबोटाज टीम तैनात की गई है। 24 घंटे सीसीटीवी कैमरों की निगरानी भी की जा रही है। क्विक रिस्पांस टीम का भी गठन किया गया है। पुलिस की चार टीमों को रिजर्व में रखा गया है।


    अलर्ट पर लखनऊ के सरकारी अस्पताल

    शहर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगमन को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने तैयारी पूरी कर ली है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से केजीएमयू, पीजीआई और लोकबंधु अस्पताल को सेफ हाउस बनाया गया है। लोकबंधु की टीम एयरपोर्ट पर मुस्तैद रहेगी। इसके अलावा एंबुलेंस, प्रधानमंत्री के ब्लड ग्रुप के लाइव डोनर की भी पुख्ता व्यवस्था कर रखी गई है।

    सीएमओ डॉ. एनबी सिंह ने बताया कि प्रधानमंत्री के आगमन को देखते हुए पीजीआई, केजीएमयू को सेफ हाउस बनाया गया है। वहां अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस बेड आरक्षित किए गए हैं। डॉक्टर और स्टाफ की ड्यूटी लगाई है। ऐसे ही लोकबंधु अस्पताल के डॉक्टर, स्टाफ की ड्यूटी तीसरे सेफ हाउस के तौर पर एयरपोर्ट पर रहेगी।

    प्रधानमंत्री के शहर में आगमन से लेकर जाने तक 20 बीएलएस (बेसिक लाइफ सपोर्ट) और चार एएलएस (एडवांस लाइफ सपोर्ट) एंबुलेंस अलर्ट रहेंगी। प्रधानमंत्री के ब्लड ग्रुप के दो लाइव डोनर उनकी फ्लीट में रहेंगे। सभी ब्लड बैंकों में प्रधानमंत्री के ब्लड ग्रुप वाले रक्त को सुरक्षित रखने के निर्देश भी दिए गए हैं। इसके अलावा कार्यक्रम स्थल की पार्किंग में डॉक्टर व स्टॉफ की 20 टीमें रहेंगी। पीएम की फ्लीट के साथ चार टीमें रहेंगी।

  • भोपाल से प्रमुख शहरों के लिए रेल किराए में वृद्धि, यात्रियों की जेब होगी हल्की

    भोपाल से प्रमुख शहरों के लिए रेल किराए में वृद्धि, यात्रियों की जेब होगी हल्की


    भोपाल । भारतीय रेलवे ने यात्रियों के लिए रेल किराए में वृद्धि का ऐलान किया है जिसका असर भोपाल से देश के प्रमुख शहरों की यात्रा पर पड़ेगा। यह वृद्धि 2 पैसे प्रति किलोमीटर के हिसाब से की गई है और इसमें 5 प्रतिशत जीएसटी और राउंड-ऑफ का असर भी देखा जाएगा। इस बदलाव के चलते यात्रियों को अब पहले से अधिक किराया चुकाना पड़ेगा।
    यदि आप भोपाल से नई दिल्ली की यात्रा करते हैं तो आपको लगभग 15 रुपये अतिरिक्त खर्च करने होंगे। मुंबई जाने पर किराए में करीब 18 रुपये की वृद्धि होगी। पुणे के लिए यह वृद्धि लगभग 19 रुपये नागपुर के लिए 8 रुपये और इंदौर तथा जबलपुर के लिए यह वृद्धि लगभग 6-6 रुपये होगी। लखनऊ जाने वाले यात्रियों को करीब 12 रुपये अतिरिक्त देना होगा।

    इस बदलाव से रेल यात्रा के खर्च में थोड़ा सा इजाफा होगा लेकिन यह वृद्धि यात्रा की सुविधाओं और रेलवे के रख-रखाव में हो रहे सुधारों को ध्यान में रखते हुए की गई है। यात्री अब इन बदलावों के साथ यात्रा की योजना बनाते हुए अतिरिक्त खर्च के बारे में सोच सकते हैं।इस नई वृद्धि से जहां एक ओर यात्रियों की जेब पर असर पड़ेगा वहीं दूसरी ओर रेलवे की विभिन्न परियोजनाओं और सुविधाओं के विकास के लिए यह कदम उठाया गया है।