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  • RDVV के कुलसचिव को निलंबित चौकीदार से खौफ, कुलगुरु को दो बार लिखा पत्र बोले कुछ भी हो सकता है मेरे साथ

    RDVV के कुलसचिव को निलंबित चौकीदार से खौफ, कुलगुरु को दो बार लिखा पत्र बोले कुछ भी हो सकता है मेरे साथ


    जबलपुर । जबलपुर के रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय यानी आरडीवीवी में कुलसचिव की सुरक्षा को लेकर मामला सामने आया है। विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. रविशंकर सोनवाल ने निलंबित चौकीदार रविंद्र तिवारी से खुद को खतरा बताते हुए कुलगुरु प्रोफेसर राजेश वर्मा को दो पत्र लिखे हैं। कुलसचिव ने 21 सितंबर और फिर 24 सितंबर को सुरक्षा उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। दोनों पत्रों की प्रतियां सिविल लाइन थाना प्रभारी अपर सचिव उच्च शिक्षा विभाग और कुलगुरु के निज सचिव को भी भेजी गई हैं।

    कुलसचिव ने अपने पत्र में बताया कि रविंद्र तिवारी को कार्य में कथित कदाचरण के मामले में उनके स्तर से निलंबित किया गया है। पत्र के अनुसार कुलसचिव को आशंका है कि निलंबन के बाद उनके खिलाफ किसी तरह का षड्यंत्र रचा जा सकता है। उन्होंने यह भी आशंका जताई है कि उनके खिलाफ झूठी शिकायत की जा सकती है या उन्हें किसी तरह नुकसान पहुंचाया जा सकता है।

    कुलसचिव ने अपने पत्र में चौकीदार के व्यवहार को लेकर भी आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि रविंद्र तिवारी स्वभाव से उग्र है और कई बार नशे की हालत में रहता है। पत्र के मुताबिक वह पहले भी कुलसचिव कार्यालय में नशे की हालत में आया था। उस समय कर्मचारियों ने उसे समझाइश देकर वापस भेज दिया था।

    21 सितंबर को लिखे पत्र में कुलसचिव ने विश्वविद्यालय के पूर्व सहायक कुलसचिव पवन साहू के साथ हुए कथित विवाद का भी उल्लेख किया है। उनके अनुसार रविंद्र तिवारी का पवन साहू के साथ झूमाझटकी गाली गलौज और अभद्र व्यवहार का विवाद हुआ था। पत्र में यह भी आरोप है कि पवन साहू के घर जाकर गाली गलौज करने और दरवाजा तोड़ने का प्रयास किया गया था।

    कुलसचिव के पत्र के मुताबिक रविंद्र तिवारी ने पवन साहू पर महिला उत्पीड़न से जुड़े आरोप भी लगाए थे। कुलसचिव ने कहा कि इस मामले की जांच चल रही है और पवन साहू ने विश्वविद्यालय प्रशासन के साथ सिविल लाइन थाना पुलिस को भी आवेदन दिया था। इन घटनाओं का हवाला देते हुए कुलसचिव ने अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जाहिर की है।

    कुलसचिव ने यह भी बताया कि वह वर्तमान में जबलपुर में अकेले रह रहे हैं। उनका कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में वह भयग्रस्त हैं और इस वजह से कार्यालयीन कामकाज भी प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कुलगुरु से कार्यालय और निवास दोनों जगह सुरक्षा उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है।

    24 सितंबर को लिखे दूसरे पत्र में कुलसचिव ने कहा कि 21 सितंबर को दिए गए आवेदन पर अब तक कोई कार्रवाई या आदेश नहीं हुआ है। इसके बाद उन्होंने दोबारा अपनी सुरक्षा की मांग दोहराई। उन्होंने कहा कि वह लगातार डर और तनाव की स्थिति में हैं।

    इसी बीच कुलसचिव ने कर्मचारी नेता और पूर्व महासचिव राजेंद्र शुक्ला को भी 25 सितंबर को नोटिस जारी किया है। नोटिस में आरोप लगाया गया है कि उन्होंने समाचारों की कटिंग एक वॉट्सऐप ग्रुप में पोस्ट की जिससे कुलसचिव की छवि प्रभावित हुई। नोटिस में उनसे इस संबंध में दो दिन के भीतर लिखित स्पष्टीकरण मांगा गया है।

    मामले में कुलगुरु प्रोफेसर राजेश वर्मा का पक्ष जानने के लिए संपर्क करने का प्रयास किया गया लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। फिलहाल कुलसचिव की ओर से सुरक्षा की मांग किए जाने के बाद विश्वविद्यालय का यह मामला चर्चा में है।

  • उज्जैन में अनोखा गणेश पंडाल बना आकर्षण का केंद्र, 20 किलो चांदी से सजे बप्पा, राजा-महाराजाओं की ऐतिहासिक चीजों ने खींचा ध्यान

    उज्जैन में अनोखा गणेश पंडाल बना आकर्षण का केंद्र, 20 किलो चांदी से सजे बप्पा, राजा-महाराजाओं की ऐतिहासिक चीजों ने खींचा ध्यान


    उज्जैन । उज्जैन के पटनी बाजार स्थित सराफा बाजार में गणेश उत्सव के अंतिम दिन भगवान गणेश का अनोखा रजत श्रृंगार आकर्षण का केंद्र बना रहा। सराफा यूथ फेडरेशन के गणेश पंडाल में करीब 45 लाख रुपए कीमत की चांदी से बप्पा का श्रृंगार किया गया। पंडाल की खास सजावट में करीब 20 किलो चांदी का इस्तेमाल किया गया है। चांदी के एंटीक बर्तनों और आभूषणों के साथ राजा-महाराजाओं के दौर की कई ऐतिहासिक वस्तुओं को भी यहां प्रदर्शित किया गया है। शाम को रजत श्रृंगार पूरा होने के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु बप्पा के दर्शन करने पहुंचे।

    सराफा यूथ फेडरेशन के पंडाल में इस बार भगवान गणेश की सजावट को बेहद खास रूप दिया गया है। संगठन से जुड़े 10 से अधिक प्रमुख व्यापारियों ने मिलकर इस विशेष श्रृंगार को तैयार किया है। पंडाल में करीब 20 किलो चांदी से तैयार किए गए एंटीक आभूषण और बर्तनों को सजाया गया है। इन वस्तुओं को देखने के लिए भक्तों और स्थानीय लोगों में भी उत्सुकता रही। गणेश प्रतिमा के साथ चांदी से जुड़ी प्राचीन वस्तुओं की सजावट ने पूरे पंडाल को अलग रूप दे दिया।

    पंडाल में रखी गई ऐतिहासिक वस्तुओं में राजा-महाराजाओं के समय के पुराने आभूषण भी शामिल हैं। इसके अलावा एक प्राचीन एंटीक छड़ी और चांदी से बना श्रीफल यानी रजत नारियल भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। पंडाल में आने वाले श्रद्धालु भगवान गणेश के दर्शन के साथ इन पुरानी और कलात्मक वस्तुओं को भी करीब से देख रहे हैं। चांदी की चमक और एंटीक वस्तुओं की नक्काशी ने पंडाल की सजावट को खास बना दिया है।

    सराफा यूथ फेडरेशन के अध्यक्ष प्रशांत सोनी के अनुसार संगठन पिछले 14 वर्षों से भगवान गणेश की स्थापना करता आ रहा है। हर साल समिति की कोशिश रहती है कि गणेश पंडाल में कुछ नया और अलग देखने को मिले। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इस बार चांदी के बर्तनों और एंटीक ज्वेलरी को सजावट की थीम बनाया गया।

    फेडरेशन की ओर से हर वर्ष पंडाल की थीम में बदलाव किया जाता है। दो साल पहले गणेश पंडाल को भारतीय मुद्रा के नोटों से सजाया गया था। इसके बाद सोने की ज्वेलरी के जरिए भगवान गणेश का विशेष श्रृंगार किया गया। इस बार चांदी के बर्तनों और एंटीक आभूषणों को थीम का हिस्सा बनाया गया है। इससे गणेश पंडाल को पारंपरिक और ऐतिहासिक स्वरूप देने की कोशिश की गई है।

    गणेश उत्सव के अंतिम दिन पंडाल में श्रद्धालुओं की भीड़ भी देखने को मिली। भक्तों ने भगवान गणेश के रजत श्रृंगार के दर्शन किए और एंटीक वस्तुओं को भी देखा। करीब 45 लाख रुपए की चांदी से तैयार यह सजावट गणेश उत्सव के दौरान उज्जैन में चर्चा का विषय बनी रही। आयोजकों के मुताबिक हर साल कुछ नया करने की कोशिश का उद्देश्य श्रद्धालुओं को धार्मिक आस्था के साथ कला और विरासत से जोड़ना भी है। इस बार चांदी और ऐतिहासिक वस्तुओं की थीम ने इसी प्रयास को एक अलग पहचान दी।

  • इंदौर में गोदाम पर छापा और बड़ा खुलासा, 10 हजार से ज्यादा गर्भपात किट मिलीं, 9 हजार किट की बिक्री भी जांच के घेरे में

    इंदौर में गोदाम पर छापा और बड़ा खुलासा, 10 हजार से ज्यादा गर्भपात किट मिलीं, 9 हजार किट की बिक्री भी जांच के घेरे में


    इंदौर । इंदौर में ड्रग विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने धार कोठी क्षेत्र में बड़ी कार्रवाई करते हुए एक दवा गोदाम से 10 हजार से ज्यादा गर्भपात किट जब्त की हैं। इसके अलावा सिडेनफिल साइट्रेट और सेफ्टी पिल ब्रांड की दवाएं भी टीम को मिली हैं। जब्त दवाओं की कुल कीमत 52 लाख रुपए से अधिक बताई जा रही है। कार्रवाई के बाद अब विभाग की जांच इस बात पर केंद्रित है कि इतनी बड़ी मात्रा में दवाओं का भंडारण किस उद्देश्य से किया गया था और इनकी बिक्री किन लोगों या संस्थानों को की गई।

    यह कार्रवाई गुरुवार रात सेंट रेफियल स्कूल के पास धार कोठी क्षेत्र में क्वालिटी फार्मा से जुड़े एक गोदाम पर की गई। अधिकारियों के मुताबिक संबंधित फर्म लाइसेंसी है लेकिन जांच के दौरान गोदाम में रखी दवाओं के भंडारण और बिक्री से जुड़े जरूरी रिकॉर्ड और दस्तावेज मौके पर उपलब्ध नहीं कराए जा सके। इसके बाद टीम ने दवाओं को अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी।

    जांच के दौरान विभाग को यह जानकारी भी मिली कि संबंधित फर्म से करीब 9 हजार गर्भपात किट पहले ही बेचे जा चुके हैं। हालांकि इन दवाओं की बिक्री का पूरा रिकॉर्ड अभी जांच के दायरे में है। अधिकारियों ने संबंधित पक्ष से दवाओं की खरीद और बिक्री से जुड़े दस्तावेज तथा पूरा हिसाब उपलब्ध कराने को कहा है। रिकॉर्ड की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कितनी दवाएं किसे और किन परिस्थितियों में बेची गईं।

    अब जांच का एक अहम हिस्सा यह भी है कि इतनी बड़ी संख्या में गर्भपात किट और अन्य दवाएं गोदाम तक कैसे पहुंचीं। अधिकारियों की टीम दवाओं के स्रोत से लेकर उनकी सप्लाई और बिक्री तक की कड़ी को खंगाल रही है। विभाग यह भी पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि दवाओं की बिक्री निर्धारित नियमों के तहत की गई थी या नहीं।

    कार्रवाई के दौरान जावेद खान और अजय सवडतकर से संबंधित दवाएं भी जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई है। अधिकारियों के अनुसार फिलहाल मामले से जुड़े तथ्यों और संबंधित लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि नियमों का उल्लंघन किस स्तर पर हुआ और इसमें कौन कौन लोग शामिल थे।

    औषधि विभाग के अधिकारियों के अनुसार गर्भपात से संबंधित दवाओं की बिक्री निर्धारित चिकित्सकीय प्रक्रिया और वैध प्रिस्क्रिप्शन के आधार पर ही की जानी चाहिए। विभाग को आशंका है कि इन दवाओं की बिक्री में नियमों का उल्लंघन हुआ हो सकता है। हालांकि इस संबंध में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और बिक्री रिकॉर्ड तथा अन्य दस्तावेजों की विस्तृत पड़ताल के बाद ही सामने आएगा।

    मामले में ड्रग एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। जब्त दवाओं और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच जारी है। ड्रग इंस्पेक्टर सारिका अग्रवाल योगेश गुप्ता और लोकेश गुप्ता की टीम ने यह कार्रवाई की। अब आगे की कानूनी कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर की जाएगी। इस कार्रवाई के बाद दवा कारोबार से जुड़े रिकॉर्ड और गर्भपात संबंधी दवाओं की बिक्री व्यवस्था पर विभाग की निगरानी और सख्त होने की संभावना है।

  • गणपति विसर्जन को लेकर MP में हाई अलर्ट, इंदौर में रात तक चलेंगी झांकियां, घाटों पर तैनात रहेगा भारी फोर्स

    गणपति विसर्जन को लेकर MP में हाई अलर्ट, इंदौर में रात तक चलेंगी झांकियां, घाटों पर तैनात रहेगा भारी फोर्स


    इंदौर । अनंत चतुर्दशी के मौके पर शुक्रवार को मध्यप्रदेश के प्रमुख शहरों में गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के साथ भव्य झांकियों और चल समारोह की रौनक देखने को मिलेगी। इंदौर में 103 साल पुरानी झांकी परंपरा के तहत शाम 6 बजे से 9 किलोमीटर से ज्यादा लंबे मार्ग पर झांकियां निकलेंगी। इसके साथ ही अखाड़ों के उस्ताद और खलीफा पारंपरिक खेलों तथा युद्ध कलाओं के करतब दिखाएंगे। प्रदेश के अन्य बड़े शहरों में भी विसर्जन को लेकर घाटों और कृत्रिम कुंडों पर विशेष इंतजाम किए गए हैं।

    इंदौर में चल समारोह मिल क्षेत्र से शुरू होकर मजदूर मैदान एमजी रोड कृष्णपुरा नंदलालपुरा जवाहर मार्ग नृसिंह बाजार गोराकुंड खजूरी बाजार होते हुए राजवाड़ा तक पहुंचेगा। शाम 6 बजे खजराना गणेश की झांकी के साथ समारोह की शुरुआत होगी और देर रात तक झांकियां तथा अखाड़े निकलते रहेंगे। सुरक्षा को देखते हुए झांकियों में धारदार हथियार और नशे पर रोक रहेगी। डीजे के इस्तेमाल को भी नियंत्रित किया गया है। झांकी पर अधिकतम दो स्पीकर लगाने की अनुमति होगी। हाथी और ऊंट को भी समारोह में शामिल करने पर रोक रहेगी। दोपहर 3 बजे से झांकी मार्ग और आसपास के इलाकों में यातायात डायवर्ट किया जाएगा।

    इंदौर में इस बार कई धार्मिक और सामाजिक संदेश देने वाली झांकियां आकर्षण का केंद्र रहेंगी। देशी मिल की झांकियों में दुर्गा माता और महिषासुर वध के साथ भगवान शंकर और माता सती से जुड़ा प्रसंग दिखाया जाएगा। एक झांकी में नशामुक्ति का संदेश भी दिया जाएगा। कल्याण मिल की झांकी में भगवान जगन्नाथ की पहली रथ यात्रा का प्रसंग और दूसरी झांकी में नारी शक्ति को प्रमुखता दी जाएगी। होप टेक्सटाइल मिल की झांकियों में गणेशजी की आराधना और भगवान शिव की बारात को धार्मिक प्रसंगों के आधार पर प्रस्तुत किया जाएगा।

    भोपाल में भी गणेश विसर्जन को लेकर व्यापक तैयारी की गई है। प्रेमपुरा रानी कमलापति बैरागढ़ खटलापुरा हथाईखेड़ा और शाहपुरा प्रमुख विसर्जन स्थलों में शामिल हैं। छोटी प्रतिमाओं के लिए वार्ड और जोन स्तर पर कृत्रिम कुंड बनाए गए हैं जबकि बड़ी प्रतिमाओं के लिए क्रेन की व्यवस्था की गई है। घाटों पर पुलिस गोताखोर फायर ब्रिगेड और सीसीटीवी के जरिए निगरानी की जाएगी। प्रमुख मार्गों पर यातायात डायवर्जन लागू रहेगा।

    उज्जैन में चल समारोह रात 10 बजे से शुरू होगा। इसके बाद प्रतिमाओं को रामघाट और सुनहरी घाट समेत निर्धारित स्थानों तक ले जाया जाएगा। शाम से ही कई मार्गों पर यातायात प्रतिबंध और डायवर्जन लागू रहेगा। ग्वालियर में सागरताल पर बनाए गए अस्थायी कुंड में गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन कराया जाएगा। पुलिस प्रशासन के साथ नगर निगम की टीम मौजूद रहेगी और ड्रोन से निगरानी की जाएगी।

    जबलपुर में भी विसर्जन के लिए विशेष व्यवस्था की गई है। बड़ी प्रतिमाओं के लिए नर्मदा जल से भरा कृत्रिम कुंड बनाया गया है जहां क्रेन की मदद से विसर्जन कराया जाएगा। गौरीघाट तिलवारा घाट अधारताल खमरिया रांझी और गोकलपुर समेत कई स्थानों पर व्यवस्थाएं की गई हैं। तीन पत्ती चौक से गौरीघाट जाने वाले मार्ग पर पुलिस बल तैनात रहेगा और जरूरत के अनुसार यातायात डायवर्ट किया जाएगा।

    अनंत चतुर्दशी पर प्रदेशभर में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया है। प्रमुख घाटों और चल समारोह वाले मार्गों पर पुलिस बल के साथ फायर ब्रिगेड गोताखोर और अन्य आपात सेवाओं की तैनाती रहेगी। कई स्थानों पर ड्रोन और सीसीटीवी से निगरानी की जाएगी। प्रशासन का फोकस भीड़ नियंत्रण सुरक्षित विसर्जन और यातायात व्यवस्था बनाए रखने पर रहेगा।

  • करोड़ों खर्च के बाद भी सीवर की समस्या बरकरार, हाईकोर्ट की सख्ती के बीच ईएनसी बोले- कई लोग जाएंगे जेल

    करोड़ों खर्च के बाद भी सीवर की समस्या बरकरार, हाईकोर्ट की सख्ती के बीच ईएनसी बोले- कई लोग जाएंगे जेल


    शिवपुरी । शिवपुरी के लंबे समय से अधूरे पड़े सीवर प्रोजेक्ट को लेकर अब मामला गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। हाईकोर्ट ग्वालियर ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रोजेक्ट के तकनीकी पहलुओं और अधिकारियों की जवाबदेही से जुड़ी विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। इसी बीच अगली सुनवाई से कुछ दिन पहले नगरीय विकास एवं आवास विभाग के इंजीनियर इन चीफ प्रदीप एस मिश्रा शिवपुरी पहुंचे और सीवर प्रोजेक्ट का मौका निरीक्षण किया। निरीक्षण के बाद उन्होंने संकेत दिए कि जिन लोगों की गलती सामने आएगी उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी और सरकारी राशि की रिकवरी भी हो सकती है।

    जानकारी के मुताबिक शिवपुरी में झील संरक्षण परियोजना के तहत सीवर प्रोजेक्ट के लिए करीब 67 करोड़ रुपए मंजूर किए गए थे। लेकिन करीब 13 साल के दौरान इस प्रोजेक्ट पर 111 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं। यानी स्वीकृत राशि से लगभग 44 करोड़ रुपए अधिक खर्च होने के बाद भी सीवर लाइन और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट पूरी तरह चालू नहीं हो पाए हैं। इसका सीधा असर शहर की व्यवस्था पर पड़ रहा है और सीवेज के नालों के जरिए सख्य सागर यानी चांदपाठा झील तक पहुंचने की समस्या बनी हुई है।

    हाईकोर्ट ग्वालियर ने 27 जुलाई 2026 की सुनवाई के दौरान मामले को गंभीरता से लेते हुए तकनीकी स्थिति और अधिकारियों की जवाबदेही से संबंधित रिपोर्ट मांगी थी। नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे को रिपोर्ट तैयार करने के लिए दो महीने का समय दिया गया था। अगली सुनवाई 28 सितंबर को होनी है। इससे पहले 24 सितंबर को एसीएस की जगह ईएनसी प्रदीप एस मिश्रा शिवपुरी पहुंचे और पूर्वी हिस्से में सीवर लाइन तथा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का जायजा लिया।

    निरीक्षण के दौरान सीवर लाइन की स्थिति और प्लांट से जुड़ी व्यवस्थाओं को देखा गया। झांसी तिराहे के पास सीवर चैंबर खोलकर लाइन में फंसा मलबा निकालने का काम भी किया जा रहा था। ईएनसी ने कहा कि सीवर लाइन चोक होने के कारण प्रोजेक्ट चालू नहीं हो पाया है। उन्होंने साफ किया कि इसे पूरा कराकर चालू करना जरूरी है क्योंकि सरकार की बड़ी राशि इस प्रोजेक्ट पर खर्च हो चुकी है।

    ईएनसी प्रदीप एस मिश्रा ने कहा कि जिस तरह हाईकोर्ट ने मामले को संज्ञान में लिया है उसमें जिसकी गलती होगी उस पर रिकवरी निकलेगी और कार्रवाई होगी। उन्होंने यह भी कहा कि कई लोगों पर गंभीर कार्रवाई हो सकती है। हालांकि अंतिम जिम्मेदारी और निर्णय हाईकोर्ट के स्तर पर तय होगा। ईएनसी ने बताया कि वह अपनी निरीक्षण रिपोर्ट एसीएस को सौंपेंगे जिसके आधार पर विभाग की ओर से रिपोर्ट तैयार कर हाईकोर्ट में प्रस्तुत की जाएगी।

    उन्होंने यह भी कहा कि सीवर प्रोजेक्ट को पूरी तरह फंक्शनल करना होगा। सीवर लाइन की सफाई के साथ जरूरी चैंबर भी व्यवस्थित तरीके से बनाने होंगे। एसटीपी का संचालन ठीक तरीके से होना जरूरी है क्योंकि सीवेज के कारण पर्यावरण पर भी असर पड़ रहा है। अब इस मामले में हाईकोर्ट की अगली सुनवाई पर सबकी नजर है। रिपोर्ट सामने आने के बाद सीवर प्रोजेक्ट में हुई देरी और खर्च की जिम्मेदारी को लेकर तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

  • मजदूरी से लौटे परिजन तो घर में दिखा खौफनाक मंजर, अकेले थे भूरा जाटव, टीबी का चल रहा था इलाज

    मजदूरी से लौटे परिजन तो घर में दिखा खौफनाक मंजर, अकेले थे भूरा जाटव, टीबी का चल रहा था इलाज


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले के कोलारस थाना क्षेत्र के लुकवासा में बुधवार शाम एक अधेड़ व्यक्ति का शव घर के अंदर फंदे पर लटका मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। मृतक की पहचान गांधीनगर वार्ड क्रमांक 13 निवासी 50 वर्षीय भूरा पुत्र ओमकार जाटव के रूप में हुई है। घटना के समय परिवार के सभी सदस्य मजदूरी करने के लिए घर से बाहर गए हुए थे जबकि भूरा जाटव घर पर अकेले थे। शाम को जब उनकी पत्नी मजदूरी से वापस लौटीं तो कमरे के अंदर का दृश्य देखकर उनके होश उड़ गए। उन्होंने भूरा को फंदे पर लटका देखा जिसके बाद परिजनों और आसपास के लोगों को घटना की जानकारी दी गई। लोगों ने आनन फानन में उन्हें नीचे उतारा लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी।

    जानकारी के मुताबिक भूरा जाटव के बेटे रंजीत उनकी पत्नी गुड्डी बाई और दूसरे बेटे राजा बुधवार सुबह करीब 8:30 बजे मजदूरी करने के लिए घर से निकले थे। रोज की तरह परिवार के लोग काम पर चले गए थे। भूरा उस समय घर पर ही थे। परिवार के सदस्य दिनभर मजदूरी करने के बाद शाम करीब 4:30 बजे वापस लौटे। इसी दौरान गुड्डी बाई की नजर कमरे में गई तो उन्होंने भूरा को फंदे पर लटका देखा। यह देखकर वह घबरा गईं और उन्होंने तुरंत परिवार के अन्य सदस्यों तथा पड़ोसियों को सूचना दी।

    घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के लोग मौके पर जमा हो गए। परिजनों ने भूरा को फंदे से नीचे उतारा लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। लुकवासा चौकी पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का जायजा लेने के बाद आवश्यक कार्रवाई शुरू की। पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है।

    परिजनों के मुताबिक भूरा जाटव लंबे समय से टीबी की बीमारी से परेशान थे और उनका इलाज भी चल रहा था। बीमारी को लेकर वह काफी समय से परेशान बताए जा रहे थे। हालांकि घटना के पीछे बीमारी के अलावा कोई अन्य वजह थी या नहीं इसे लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। पुलिस फिलहाल पूरे मामले की जांच कर रही है और घटना से जुड़े सभी पहलुओं को देखा जा रहा है।

    पुलिस की कार्रवाई के बाद गुरुवार को भूरा जाटव के शव का पोस्टमॉर्टम कराया गया। पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंपे जाने की प्रक्रिया पूरी की गई। पुलिस ने परिवार के सदस्यों से भी घटना के संबंध में जानकारी ली है। फिलहाल पुलिस की जांच और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    इस घटना के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है। जिस घर में परिवार के लोग रोजी रोटी के लिए सुबह मजदूरी करने निकले थे उसी घर में शाम को उन्हें अपने परिजन का शव मिला। घटना ने पूरे इलाके के लोगों को भी झकझोर कर रख दिया है। पुलिस मामले की जांच में जुटी है और आत्महत्या के पीछे की वास्तविक वजह सामने आने का इंतजार किया जा रहा है।

  • गोबर फेंकने गई महिला के साथ अचानक हुआ दर्दनाक हादसा, बाड़े में पड़े कटे तार को हटाते ही लगा करंट

    गोबर फेंकने गई महिला के साथ अचानक हुआ दर्दनाक हादसा, बाड़े में पड़े कटे तार को हटाते ही लगा करंट


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले के तेंदुआ थाना क्षेत्र के कार्या गांव में गुरुवार सुबह एक दर्दनाक हादसे में 53 वर्षीय महिला की मौत हो गई। महिला अपने घर के बाड़े में गोबर फेंकने गई थी। इसी दौरान वहां घरेलू बिजली सप्लाई की लाइन के कटे हुए तार की चपेट में आ गई। करंट लगते ही महिला बेसुध होकर जमीन पर गिर पड़ी। परिजन उन्हें तुरंत जिला अस्पताल लेकर पहुंचे लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया।

    मृतका की पहचान कार्या गांव निवासी ईश्वरदेवी जाटव उम्र 53 वर्ष के रूप में हुई है। परिजनों के मुताबिक गुरुवार सुबह ईश्वरदेवी भैंसों का गोबर इकट्ठा कर उसे बाड़े में फेंकने के लिए गई थीं। इसी दौरान उनकी नजर बाड़े से होकर निकली बिजली की लाइन पर पड़ी। बताया गया कि बिजली के तार में कट लगा हुआ था और वह खुला हुआ था।

    ईश्वरदेवी ने तार को हटाने की कोशिश की। जैसे ही उन्होंने हाथ से तार को छुआ उन्हें तेज करंट लग गया। बिजली का झटका इतना जोरदार था कि वह मौके पर ही बेसुध होकर जमीन पर गिर गईं। हादसे के बाद आसपास मौजूद लोगों और परिजनों को इसकी जानकारी हुई तो तुरंत उन्हें संभाला गया।

    महिला की हालत गंभीर देखकर परिजन बिना देर किए उन्हें जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां डॉक्टरों ने उनकी जांच की लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। चिकित्सकों ने महिला को मृत घोषित कर दिया। हादसे की खबर मिलते ही परिवार में मातम छा गया।

    घटना की सूचना मिलने के बाद पुलिस भी अस्पताल पहुंची। पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर लिया है। आवश्यक कार्रवाई के बाद महिला के शव का पोस्टमार्टम कराया गया और फिर शव परिजनों को सौंप दिया गया। पुलिस अब हादसे से जुड़े पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है।

    इस घटना के बाद बाड़े में बिजली के तार की स्थिति को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। बताया गया है कि जिस तार में कट लगा हुआ था उसे हटाने की कोशिश के दौरान महिला करंट की चपेट में आ गई। ग्रामीण इलाकों में खुले और क्षतिग्रस्त बिजली तारों को लेकर अक्सर सुरक्षा का सवाल सामने आता है। ऐसे में इस तरह की घटनाएं लोगों के लिए गंभीर खतरे का कारण बन सकती हैं।

    गुरुवार सुबह हुए इस हादसे ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया। ईश्वरदेवी रोजमर्रा के घरेलू काम के लिए बाड़े में गई थीं लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि वहां मौजूद बिजली का एक खुला तार उनकी जान ले लेगा। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और हादसे के कारणों की जानकारी जुटाई जा रही है।

  • गणपति विसर्जन के बाद पसरा मातम, तालाब में गिरा युवक रातभर रहा लापता, सुबह बेलों में फंसा मिला शव

    गणपति विसर्जन के बाद पसरा मातम, तालाब में गिरा युवक रातभर रहा लापता, सुबह बेलों में फंसा मिला शव


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले के पोहरी नगर परिषद क्षेत्र के नानोरा गांव में गणेश विसर्जन के दौरान एक दर्दनाक हादसा सामने आया। बुधवार रात तालाब में गिरे 25 वर्षीय मूकबधिर युवक का शव गुरुवार सुबह बरामद किया गया। रात में अंधेरा अधिक होने के कारण पुलिस और स्थानीय लोगों ने काफी तलाश की लेकिन युवक का कोई सुराग नहीं मिल सका। सुबह दोबारा सर्चिंग अभियान शुरू किया गया तो कुछ दूरी पर पानी में फैली बेलों के बीच युवक का शव फंसा मिला। घटना की जानकारी मिलते ही परिवार में मातम पसर गया।

    मृतक की पहचान हरगोविंद जाटव उम्र 25 वर्ष पुत्र अंतु जाटव के रूप में हुई है। परिजनों के मुताबिक हरगोविंद मूकबधिर था। बताया गया कि बुधवार रात वह शौच के लिए तालाब के दूसरे हिस्से की ओर गया था। इसी दौरान उसका पैर फिसल गया और वह पानी में जा गिरा। तालाब में गिरने के बाद आसपास मौजूद लोगों को घटना की जानकारी हुई।

    हादसे के वक्त तालाब के दूसरे छोर पर गणेश प्रतिमा का विसर्जन चल रहा था। वहां मौजूद लोगों ने युवक को तालाब में गिरते हुए देखा। इसके बाद तत्काल पुलिस को सूचना दी गई। सूचना मिलने पर पोहरी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थानीय लोगों की मदद से युवक की तलाश शुरू की गई।

    रात में तालाब में काफी देर तक सर्चिंग अभियान चलाया गया। पुलिस और स्थानीय लोग पानी में युवक को तलाशते रहे लेकिन अंधेरा होने के कारण अभियान में परेशानी आई। काफी कोशिश के बाद भी युवक का पता नहीं चल सका। इसके बाद रात में तलाश रोकनी पड़ी और सुबह दोबारा सर्चिंग शुरू करने का फैसला किया गया।

    गुरुवार सुबह पुलिस ने एक बार फिर तालाब में तलाश शुरू की। इस दौरान पानी के भीतर कुछ दूरी पर फैली बेलों के बीच हरगोविंद का शव फंसा हुआ दिखाई दिया। पुलिस ने शव को बाहर निकलवाया और आवश्यक कार्रवाई शुरू की। हादसे की खबर मिलते ही परिजन भी मौके पर पहुंच गए।

    पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। पोहरी थाना पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस हादसे से जुड़े घटनाक्रम की जानकारी जुटा रही है।

    गणेश विसर्जन के दौरान हुई इस घटना से नानोरा गांव में शोक का माहौल है। जिस समय गांव में गणेश प्रतिमा के विसर्जन को लेकर लोग जुटे थे उसी दौरान एक परिवार ने अपना सदस्य खो दिया। रात के अंधेरे में शुरू हुई तलाश सुबह तालाब में पानी की बेलों के बीच शव मिलने के साथ खत्म हुई। घटना ने गांव के लोगों को भी गमगीन कर दिया है।

  • विसर्जन जुलूस में DJ बना विवाद की वजह दतिया में पहले चाचा-भतीजे को पीटा फिर पैरों में मारी गोली

    विसर्जन जुलूस में DJ बना विवाद की वजह दतिया में पहले चाचा-भतीजे को पीटा फिर पैरों में मारी गोली


    दतिया । दतिया के इंदरगढ़ थाना क्षेत्र के मैथाना पाली गांव में गणेश विसर्जन के दौरान दो पक्षों के बीच विवाद के बाद फायरिंग की घटना सामने आई है। बुधवार शाम गणेश प्रतिमा विसर्जन के लिए जा रहे लोगों और गांव के दो लोगों के बीच DJ बजाने को लेकर कहासुनी हुई। देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और दोनों पक्षों के बीच लाठी डंडों से मारपीट शुरू हो गई। इसके बाद फायरिंग होने की बात सामने आई जिसमें चाचा और भतीजे के पैर में गोली लगी।

    घटना में घायल चाचा भतीजे की पहचान अजय यादव उम्र 28 वर्ष और उनके चाचा वकील यादव उम्र 43 वर्ष के रूप में हुई है। दोनों को पहले इंदरगढ़ अस्पताल ले जाया गया। यहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें दतिया जिला अस्पताल रेफर किया गया। हालत और बेहतर इलाज की जरूरत को देखते हुए दोनों को ग्वालियर रेफर कर दिया गया। फिलहाल दोनों का इलाज जारी है।

    परिजनों के मुताबिक अजय यादव और वकील यादव गांव से नदी की ओर भैंस चराने गए थे। इसी दौरान चौकपुरा गांव के लोग गणेश प्रतिमा लेकर विसर्जन के लिए नदी की ओर जा रहे थे। जुलूस में DJ बजाया जा रहा था। बताया गया है कि भैंस लेकर वापस घर की ओर लौट रहे चाचा भतीजे ने DJ बजाने से मना किया। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों में कहासुनी शुरू हो गई।

    कहासुनी के बाद विवाद ने तेजी से गंभीर रूप ले लिया। घायल पक्ष के परिजनों का आरोप है कि पहले चाचा भतीजे के साथ लाठी डंडों से मारपीट की गई और इसके बाद फायरिंग कर दी गई। परिजनों ने मानवेंद्र उर्फ छुट्टी रोहित गजराज यादव श्रीकांत यादव हाकिम यादव ऋषभ यादव और रघुराज यादव समेत अन्य लोगों पर फायरिंग करने का आरोप लगाया है। परिवार का कहना है कि इन्हीं लोगों की ओर से गोली चलाई गई।

    ग्रामीणों के अनुसार चौकपुरा के लोगों ने गांव के खेरा पति मंदिर के पास गणेश प्रतिमा स्थापित की थी। बुधवार को प्रतिमा को विसर्जन के लिए नदी की ओर ले जाया जा रहा था। इसी दौरान मैथाना पाली गांव के पास विवाद हो गया। घटना के बाद इलाके में तनाव की स्थिति बन गई।

    इस विवाद में दूसरे पक्ष के लोगों के घायल होने की जानकारी भी सामने आई है। हाकिम सिंह उम्र 50 वर्ष गजराज सिंह यादव उम्र 52 वर्ष और पंजाब सिंह यादव के घायल होने की सूचना है। इसके अलावा तीन से चार अन्य लोगों के घायल होने की भी जानकारी है। सभी घायलों का इलाज इंदरगढ़ अस्पताल में कराया जा रहा है।

    घटना की सूचना मिलते ही इंदरगढ़ थाना पुलिस मौके पर पहुंची। थाना प्रभारी गौरव शर्मा के मुताबिक पुलिस ने घटनास्थल की जानकारी जुटाई है और दोनों पक्षों से जुड़े लोगों तथा घायलों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस फायरिंग की परिस्थितियों और विवाद की वास्तविक वजह का पता लगाने में जुटी है।

    फिलहाल पुलिस की जांच जारी है। दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि विवाद किस तरह बढ़ा और फायरिंग की घटना किन परिस्थितियों में हुई। पुलिस घायलों के उपचार के साथ मामले से जुड़े लोगों की जानकारी भी जुटा रही है।

  • साफ पानी की योजना में सेंसरों का खेल, ब्रांडेड स्टीकर के नीचे निकला लोकल माल जांच में सामने आई चौंकाने वाली गड़बड़ी

    साफ पानी की योजना में सेंसरों का खेल, ब्रांडेड स्टीकर के नीचे निकला लोकल माल जांच में सामने आई चौंकाने वाली गड़बड़ी


    भोपाल। मध्य प्रदेश में लोगों तक साफ और सुरक्षित पेयजल पहुंचाने के लिए चलाई जा रही अमृत 2.0 योजना के तहत बन रहे वाटर ट्रीटमेंट प्लांट्स में उपकरणों की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल सामने आए हैं। दैनिक भास्कर की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश के कई जलप्रदाय प्रोजेक्ट्स में SCADA सिस्टम के लिए अप्रूव्ड ब्रांड के उपकरणों की जगह दूसरे और कथित तौर पर लोकल उपकरण लगाए गए। कुछ उपकरणों पर नामी कंपनियों के स्टीकर भी चिपके मिले। एक मामले में सेंसर से स्टीकर हटाने पर उसके नीचे दूसरी कंपनी का नाम दिखाई दिया।

    अमृत 2.0 के तहत प्रदेश में 622 जलप्रदाय प्रोजेक्ट मंजूर किए गए हैं। इनमें 416 प्रोजेक्ट के टेंडर वर्ष 2025 में जारी हुए थे। किसी वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की कुल लागत का करीब 5 प्रतिशत हिस्सा SCADA सिस्टम पर खर्च किया जाता है। प्लांट की क्षमता के हिसाब से इसकी लागत लगभग 50 से 80 लाख रुपए तक हो सकती है। SCADA सिस्टम पानी की गुणवत्ता और सप्लाई से जुड़े कई मानकों की निगरानी करता है इसलिए इसमें इस्तेमाल होने वाले सेंसर और नियंत्रण उपकरणों की गुणवत्ता महत्वपूर्ण मानी जाती है।

    रिपोर्ट के मुताबिक सात जिलों के दस वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की मौके पर जांच की गई। इनमें तीन जगह उपकरणों और उनकी ब्रांडिंग को लेकर गड़बड़ी सामने आई। एक प्लांट में Siemens के स्थान पर Holisys का PLC लगा मिला जबकि फ्लो मीटर वॉल्व पर अपेक्षित SBEM ब्रांड नहीं था। दूसरे प्लांट में भी Siemens की जगह Holisys का PLC और SBEM की जगह दूसरी कंपनी का प्रेशर ट्रांसमीटर मिला।

    सबसे ज्यादा सवाल उस प्लांट में उठे जहां प्रेशर ट्रांसमीटर पर SBEM का स्टीकर लगा था। रिपोर्टर ने जब स्टीकर हटाया तो उसके नीचे ATC कंपनी का नाम दिखाई दिया। इसी प्लांट में PLC और pH तथा क्लोरीन सेंसर भी निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं मिलने का दावा किया गया है। इससे उपकरणों की वास्तविक कंपनी और उनकी स्वीकृति को लेकर सवाल खड़े हुए हैं।

    मामले को लेकर SBEM से भी संपर्क किया गया। शहडोल की वीरानी इंजीनियरिंग ने प्लांट में लगे सेंसरों की तस्वीर और जानकारी QAP में अप्रूव्ड कंपनी SBEM को भेजी थी। जवाब में कंपनी ने लिखित रूप से कहा कि उसने इस प्रोजेक्ट के लिए कोई उपकरण या तकनीक सप्लाई नहीं की है। इसके बाद प्लांट में SBEM के नाम से लगाए गए स्टीकर की प्रामाणिकता पर भी सवाल उठने लगे।

    वहीं संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों ने कहा कि प्रोजेक्ट अभी पूरा नहीं हुआ है और PDMC की निगरानी में काम चल रहा है। उनका कहना है कि किसी अमानक उपकरण को अंतिम रूप से स्वीकार नहीं किया गया है। एक ठेकेदार ने बताया कि SCADA का काम Orbit Engineering Solutions को दिया गया था।

    Orbit Engineering Solutions के मालिक विजय कुमार तिवारी ने कहा कि अप्रूव्ड कंपनियों से उपकरणों की सप्लाई में देरी हो रही थी इसलिए समय पर काम पूरा करने के लिए दूसरी कंपनियों के उपकरण लगाए गए। उन्होंने इन उपकरणों की गुणवत्ता को अच्छा बताया। हालांकि अप्रूव्ड ब्रांड की जगह दूसरे उपकरण लगाने के लिए अनुमति ली गई थी या नहीं इस सवाल का स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया।

    इस पूरे मामले ने अमृत 2.0 योजना के तहत बन रहे वाटर ट्रीटमेंट प्लांट्स में निगरानी और गुणवत्ता जांच की प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि जांच में मानकों के विपरीत उपकरण लगाने की पुष्टि होती है तो यह न केवल सरकारी धन के इस्तेमाल से जुड़ा मामला होगा बल्कि पानी की गुणवत्ता और लोगों की सुरक्षा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जाएगा।