Tag: Madhya Pradesh News

  • जिसे पुलिस ने बताया MD ड्रग्स वह निकला यूरिया बर्खास्त पुलिसकर्मी बरी अब अधिकारियों पर लगाए गंभीर आरोप

    जिसे पुलिस ने बताया MD ड्रग्स वह निकला यूरिया बर्खास्त पुलिसकर्मी बरी अब अधिकारियों पर लगाए गंभीर आरोप


    इंदौर । इंदौर में कथित एमडी ड्रग्स बरामदगी के चर्चित मामले ने नया मोड़ ले लिया है। जिस पदार्थ को पुलिस ने करोड़ों रुपए की एमडी ड्रग्स बताकर बड़ी कार्रवाई का दावा किया था वह दोनों सरकारी फॉरेंसिक जांच में साधारण यूरिया निकला। इसके बाद अदालत ने इस मामले में गिरफ्तार किए गए पुलिसकर्मी समेत तीनों आरोपियों को बरी कर दिया। अब बर्खास्त पुलिसकर्मी ने दो आईपीएस अधिकारियों सहित 19 पुलिसकर्मियों पर झूठे मामले में फंसाने का गंभीर आरोप लगाया है।

    करीब 16 महीने पहले इंदौर पुलिस ने विजय पाटीदार और शाहनवाज शेख को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 198 ग्राम एमडी ड्रग्स बरामद होने का दावा किया था। पूछताछ के दौरान दोनों आरोपियों ने पुलिसकर्मी लखन गुप्ता का नाम लिया जिसके बाद उन्हें भी गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। बाद में विभागीय कार्रवाई करते हुए लखन गुप्ता को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया।

    मामले की जांच के दौरान जब्त किए गए पदार्थ के नमूने भोपाल स्थित फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी भेजे गए। जांच रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि जब्त पदार्थ किसी भी प्रकार का मादक पदार्थ नहीं बल्कि सामान्य यूरिया है। इसके बाद पुलिस ने दोबारा हैदराबाद की केंद्रीय प्रयोगशाला से भी परीक्षण कराया लेकिन वहां भी रिपोर्ट में पदार्थ यूरिया ही पाया गया।

    दोनों प्रयोगशालाओं की रिपोर्ट अदालत के सामने पेश की गई जिसके आधार पर विशेष अदालत ने लखन गुप्ता सहित तीनों आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। अदालत के फैसले के बाद लखन गुप्ता ने इंदौर जिला कोर्ट की विशेष अदालत में परिवाद दायर कर दो आईपीएस अधिकारियों सहित 19 पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

    लखन गुप्ता का आरोप है कि उन्हें सुनियोजित साजिश के तहत इस मामले में फंसाया गया। उनका कहना है कि कुछ पुलिस अधिकारियों ने मुखबिर के जरिए पहले से गिरफ्तार आरोपियों से उनका नाम कहलवाया और फिर उन्हें आजाद नगर क्षेत्र से उठाकर तेजाजी नगर थाने ले जाया गया। वहां पूछताछ के बाद उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया और बाद में नौकरी से भी बर्खास्त कर दिया गया।

    लखन गुप्ता के अधिवक्ता नितिन पाराशर के अनुसार अदालत में दायर परिवाद में संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभिन्न कानूनी धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग की गई है। विशेष अदालत ने मामले की सुनवाई के लिए 27 जून की तारीख तय की है। सुनवाई के दौरान अदालत जांच के आदेश एफआईआर दर्ज कराने या अन्य कानूनी कार्रवाई को लेकर निर्णय ले सकती है।

    यह मामला अब इंदौर पुलिस की जांच प्रक्रिया और कार्रवाई की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। मामले में आगे अदालत के आदेश और जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे।

  • शिवपुरी में अवैध खनन कार्रवाई के दौरान बवाल युवक को थप्पड़ मारते खनिज निरीक्षक का VIDEO वायरल

    शिवपुरी में अवैध खनन कार्रवाई के दौरान बवाल युवक को थप्पड़ मारते खनिज निरीक्षक का VIDEO वायरल


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले के पिछोर क्षेत्र में अवैध खनिज परिवहन के खिलाफ कार्रवाई के दौरान हुए विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो में खनिज निरीक्षक ऋषभ दीक्षित एक युवक को थप्पड़ मारते हुए दिखाई दे रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद पूरे घटनाक्रम को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं। पुलिस का कहना है कि वीडियो समेत सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और जांच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।

    जानकारी के अनुसार कुछ दिन पहले खनिज निरीक्षक ऋषभ दीक्षित अपनी टीम के साथ पिछोर क्षेत्र में अवैध खनिज परिवहन के खिलाफ कार्रवाई करने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने पत्थरों से भरी एक ट्रैक्टर ट्रॉली को रोककर जांच की। चालक के पास वैध रॉयल्टी और परिवहन से जुड़े आवश्यक दस्तावेज नहीं मिलने पर ट्रैक्टर ट्रॉली को जब्त कर लिया गया।

    जब जब्त वाहन को पुलिस बल की मौजूदगी में थाने ले जाया जा रहा था तभी मौके पर मौजूद कुछ लोगों और अधिकारियों के बीच विवाद हो गया। इसी दौरान धक्का मुक्की और तीखी बहस की स्थिति बन गई। घटना के बाद खनिज निरीक्षक ने पिछोर थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि मंगल लोधी और उसके साथियों ने शासकीय कार्य में बाधा डाली पुलिसकर्मियों के साथ अभद्र व्यवहार किया और जब्त वाहन छुड़ाने का प्रयास किया। शिकायत के आधार पर पुलिस ने संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया।

    अब सामने आए वायरल वीडियो में खनिज निरीक्षक पहले युवक मंगल लोधी से मोबाइल मांगते दिखाई देते हैं। कुछ ही क्षण बाद वे युवक को थप्पड़ मार देते हैं जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच धक्का मुक्की और कहासुनी शुरू हो जाती है। वीडियो के वायरल होने के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है और कार्रवाई की निष्पक्षता को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वीडियो में दिखाई दे रही घटना की पूरी परिस्थितियों की जांच की जा रही है। यह पता लगाया जाएगा कि थप्पड़ मारने से पहले क्या हुआ था और विवाद किस वजह से बढ़ा। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि दोनों पक्षों की भूमिका क्या रही। पुलिस का कहना है कि वायरल वीडियो को जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है और सभी साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    फिलहाल मामले की जांच जारी है और पुलिस का कहना है कि तथ्यों के आधार पर ही आगे की कानूनी कार्रवाई तय की जाएगी।

  • सागर मेडिकल कॉलेज की बड़ी लापरवाही ऑपरेशन से एक दिन पहले लगा हाई रिस्क इंजेक्शन मरीज की गई जान

    सागर मेडिकल कॉलेज की बड़ी लापरवाही ऑपरेशन से एक दिन पहले लगा हाई रिस्क इंजेक्शन मरीज की गई जान


    सागर  सागर के बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान हुई एक मरीज की मौत ने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि जिस एनेस्थीसिया इंजेक्शन का उपयोग ऑपरेशन के दौरान मरीज को बेहोश करने के लिए किया जाना था उसे निर्धारित समय से एक दिन पहले ही नस के जरिए लगा दिया गया। घटना के बाद मरीज की हालत तेजी से बिगड़ी और कई दिनों तक जिंदगी और मौत से संघर्ष करने के बाद उसकी मौत हो गई। मामले में ड्यूटी पर तैनात नर्स को जांच पूरी होने तक निलंबित कर दिया गया है।

    जानकारी के अनुसार देवेंद्र पाठक को गले में गांठ की समस्या के चलते बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज के ईएनटी विभाग में भर्ती कराया गया था। अगले दिन उनकी बायोप्सी होनी थी। परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन में उपयोग होने वाला हाई रिस्क एनेस्थीसिया इंजेक्शन नर्स ने पहले ही मरीज को लगा दिया। इंजेक्शन लगने के कुछ ही मिनट बाद मरीज की सांसें उखड़ने लगीं और उसकी हार्टबीट रुक गई। डॉक्टरों ने करीब 45 मिनट तक सीपीआर देकर उसे बचाने की कोशिश की और बाद में वेंटिलेटर पर शिफ्ट किया। इलाज के दौरान कुछ समय के लिए हालत में सुधार जरूर हुआ लेकिन 23 जून की सुबह मरीज ने दम तोड़ दिया।

    मृतक की पत्नी रीता पाठक ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि इंजेक्शन लगाते समय संबंधित नर्स मोबाइल फोन और ब्लूटूथ इयरफोन पर बातचीत में व्यस्त थी। इसी लापरवाही के कारण गलत समय पर दवा दे दी गई जिससे मरीज की जान चली गई। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

    कॉलेज प्रशासन ने परिजनों की शिकायत और प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर नर्स शिखा पटले को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। कॉलेज प्रबंधन का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और विस्तृत जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस भी पूरे मामले की अलग से जांच कर रही है।

    घटना पर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला ने भी संज्ञान लिया है। उन्होंने पूरे मामले की विस्तृत जांच कराने और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों तथा कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

    स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि एनेस्थीसिया जैसी हाई अलर्ट दवाएं केवल निर्धारित प्रक्रिया और विशेषज्ञ डॉक्टर की निगरानी में ही दी जानी चाहिए। यदि किसी स्वास्थ्यकर्मी को दवा को लेकर जरा भी संदेह हो तो पहले वरिष्ठ डॉक्टर या नर्सिंग अधिकारी से पुष्टि करना अनिवार्य होता है। विशेषज्ञों के अनुसार यह मामला केवल व्यक्तिगत लापरवाही तक सीमित नहीं हो सकता बल्कि दवा वितरण प्रणाली डबल वेरिफिकेशन सुपरविजन प्रशिक्षण और अस्पताल की मानक संचालन प्रक्रिया में संभावित खामियों की भी गंभीर जांच की जानी चाहिए।

  • भोपाल में बंद मकान से रिटायर्ड दंपती के शव मिलने से सनसनी शरीर पर चोट के निशान हत्या के एंगल से जांच शुरू

    भोपाल में बंद मकान से रिटायर्ड दंपती के शव मिलने से सनसनी शरीर पर चोट के निशान हत्या के एंगल से जांच शुरू


    भोपाल भोपाल के ऐशबाग थाना क्षेत्र में एक बंद मकान से रिटायर्ड दंपती के शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। दो दिन तक घर से बाहर नहीं निकलने और मकान से तेज दुर्गंध आने पर किराए पर रहने वाले छात्रों ने पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने दरवाजा तोड़कर अंदर प्रवेश किया तो पति पत्नी मृत अवस्था में मिले। शवों पर चोट के निशान मिलने के बाद पुलिस ने हत्या की आशंका सहित सभी पहलुओं से जांच शुरू कर दी है।

    मृतकों की पहचान 64 वर्षीय हेमंत बारीक और उनकी 62 वर्षीय पत्नी शकुंतला बारीक के रूप में हुई है। हेमंत बारीक भारतीय रेलवे से सेवानिवृत्त कर्मचारी थे जबकि उनकी पत्नी शकुंतला बारीक कस्तूरबा अस्पताल में नर्स के पद से रिटायर हुई थीं। दंपती ऐशबाग के सुदामा नगर स्थित अपने मकान में रहते थे। मकान के एक हिस्से में कुछ छात्र किराए पर रहते हैं। दंपती की कोई संतान नहीं थी।

    छात्रों के अनुसार पिछले दो दिनों से दोनों घर से बाहर नहीं निकले थे। शुक्रवार को मकान से तेज दुर्गंध आने लगी तो उन्होंने पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और बंद मकान का दरवाजा तोड़कर अंदर दाखिल हुई। अंदर दोनों के शव पड़े मिले जिनकी स्थिति काफी खराब हो चुकी थी।

    एडिशनल पुलिस कमिश्नर शैलेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि शव पूरी तरह से डीकंपोज हो चुके हैं और उनके शरीर पर चोट के निशान भी मिले हैं। फिलहाल मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस हत्या की संभावना से भी इनकार नहीं कर रही है और सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है।

    पुलिस ने घटनास्थल को सील कर फॉरेंसिक टीम को जांच के लिए बुलाया है। दोनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। साथ ही एक्सरे और अन्य वैज्ञानिक परीक्षण भी कराए जा रहे हैं ताकि मौत के कारणों का स्पष्ट पता लगाया जा सके। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम और फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की असली वजह सामने आएगी।

    परिजनों से पूछताछ में पता चला कि शकुंतला बारीक ने बुधवार को आखिरी बार अपनी भाभी से फोन पर बातचीत की थी। उस दौरान उन्होंने बताया था कि उनके पति की आंख में परेशानी है और वह उन्हें कस्तूरबा अस्पताल लेकर जा रही हैं। बातचीत में उन्होंने किसी तरह के खतरे या विवाद का जिक्र नहीं किया था। हालांकि परिजनों के अनुसार पति पत्नी के बीच अक्सर घरेलू विवाद होते रहते थे लेकिन उनकी किसी से पुरानी रंजिश की जानकारी सामने नहीं आई है।

    फिलहाल पुलिस आसपास के लोगों और परिजनों से पूछताछ कर रही है। साथ ही घटनास्थल से मिले साक्ष्यों और सीसीटीवी फुटेज की भी जांच की जा रही है ताकि मामले की सच्चाई जल्द सामने आ सके।

  • जबलपुर में स्क्रिप्टेड पुलिस कार्रवाई का आरोप: वायरल वीडियो ने खड़े किए बड़े सवाल

    जबलपुर में स्क्रिप्टेड पुलिस कार्रवाई का आरोप: वायरल वीडियो ने खड़े किए बड़े सवाल


    जबलपुर। जबलपुर में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। अधारताल थाना क्षेत्र में अवैध शराब के खिलाफ की गई कार्रवाई से पहले का एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पूरे पुलिस महकमे में हलचल मच गई है। वीडियो में एक पुलिसकर्मी कथित तौर पर आरोपी महिला को कार्रवाई के दौरान क्या कहना है और कैसे व्यवहार करना है इसकी जानकारी देता दिखाई दे रहा है। वीडियो सामने आने के बाद निष्पक्ष पुलिस कार्रवाई को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।

    जानकारी के अनुसार अधारताल थाना क्षेत्र में अवैध शराब के कारोबार की सूचना मिलने पर पुलिस टीम ने एक स्थान पर दबिश दी थी। कार्रवाई में हवलदार सुग्रीव तिवारी, एफआरवी दल, महिला आरक्षक और अन्य पुलिसकर्मी शामिल थे। पुलिस ने मौके से एक महिला को अवैध शराब के साथ पकड़ा था। हालांकि विवाद का केंद्र कार्रवाई नहीं बल्कि उससे पहले का कथित घटनाक्रम बन गया है।

    वायरल वीडियो में दावा किया जा रहा है कि एक आरक्षक कार्रवाई से पहले आरोपी महिला को पूरी स्थिति समझा रहा है। वीडियो में महिला को यह बताया जाता दिखाई दे रहा है कि कार्रवाई के दौरान उसे क्या कहना है और किस तरह प्रतिक्रिया देनी है। आरोप है कि महिला को सहानुभूति प्राप्त करने और खुद को मजबूर दिखाने के लिए भी निर्देश दिए गए। हालांकि वीडियो की सत्यता और उसमें दिख रही बातचीत की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

    वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कई लोगों का कहना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह पुलिस की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न होगा। वहीं कुछ लोग यह भी मांग कर रहे हैं कि पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए ताकि वास्तविकता सामने आ सके।

    मामले के तूल पकड़ने के बाद पुलिस अधिकारियों ने भी संज्ञान लिया है। वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि वायरल वीडियो की जांच की जा रही है। वीडियो की प्रामाणिकता, उसमें शामिल पुलिसकर्मियों की भूमिका और पूरे घटनाक्रम की परिस्थितियों की विस्तार से पड़ताल की जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

    पुलिस प्रशासन के लिए यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि कानून व्यवस्था बनाए रखने वाली संस्था की विश्वसनीयता सीधे तौर पर जनता के भरोसे से जुड़ी होती है। यदि जांच में आरोप सही साबित होते हैं तो संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

    फिलहाल पूरे मामले पर सभी की नजरें जांच के परिणाम पर टिकी हुई हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि वायरल वीडियो में किए जा रहे दावों में कितनी सच्चाई है और पुलिस विभाग इस मामले में क्या कदम उठाता है। तब तक यह मामला शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है और पुलिस की कार्यशैली को लेकर नई बहस छेड़ चुका है।

  • पानी भरने की बात पर भड़की पुरानी रंजिश: मैहर में खूनी संघर्ष, 7 महिलाओं समेत 14 लोग गंभीर घायल

    पानी भरने की बात पर भड़की पुरानी रंजिश: मैहर में खूनी संघर्ष, 7 महिलाओं समेत 14 लोग गंभीर घायल

    मैहर। मध्य प्रदेश के मैहर जिले में जमीनी विवाद ने बुधवार रात हिंसक और खूनी रूप ले लिया। अमरपाटन थाना क्षेत्र के कहरी गांव में दो पड़ोसी परिवारों के बीच लंबे समय से चल रही रंजिश एक बार फिर भड़क उठी और देखते ही देखते दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। मामूली कहासुनी से शुरू हुआ विवाद कुछ ही मिनटों में इतना बढ़ गया कि लाठी-डंडे और धारदार हथियार निकल आए। दोनों ओर से हुए हमले में 7 महिलाओं सहित कुल 14 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद गांव में तनाव का माहौल बना हुआ है और पुलिस लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए है।

    पुलिस के अनुसार कहरी गांव में रहने वाले बंसल समाज के दो परिवारों के बीच जमीन को लेकर काफी समय से विवाद चल रहा था। बुधवार रात विवादित जमीन पर पानी भरने को लेकर दोनों पक्षों के बीच बहस शुरू हुई। पहले तीखी नोकझोंक हुई और फिर देखते ही देखते मामला हिंसक संघर्ष में बदल गया। दोनों पक्षों के लोग लाठी-डंडे और धारदार हथियार लेकर एक-दूसरे पर टूट पड़े। गांव में अचानक मची चीख-पुकार और हंगामे से अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थानीय ग्रामीणों ने बीच-बचाव का प्रयास किया लेकिन तब तक कई लोग गंभीर रूप से घायल होकर लहूलुहान हो चुके थे।

    घटना के बाद घायल किसी तरह अमरपाटन थाने पहुंचे। थाना प्रभारी विजय सिंह परस्ते ने घायलों की हालत गंभीर देखते हुए तत्काल एंबुलेंस और शासकीय वाहन की व्यवस्था कर सभी को अमरपाटन सिविल अस्पताल भिजवाया। हालांकि अस्पताल पहुंचने पर स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर खामियां भी उजागर हो गईं। एक साथ 14 गंभीर घायलों के पहुंचने पर अस्पताल में पर्याप्त बेड उपलब्ध नहीं थे। मजबूरन डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों को कई घायलों का उपचार अस्पताल के बरामदे और फर्श पर करना पड़ा। घायल महिलाओं और पुरुषों को जमीन पर लिटाकर प्राथमिक उपचार दिया गया। उन्हें वहीं पट्टियां बांधी गईं और ड्रिप तथा इंजेक्शन लगाए गए।

    मारपीट में दोनों पक्षों के लोगों को गंभीर चोटें आई हैं। प्रथम पक्ष से सरिता बंसल, जितेंद्र, फूलचंद, साक्षी, आरती और प्रिया बंसल घायल हुए हैं। वहीं दूसरे पक्ष से समीर, बड्डी, सोमबाई, सुरेश, पार्वती, रमेश, मुकेश और तिजियाबाई बंसल को चोटें आई हैं। डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद सभी घायलों की हालत को देखते हुए उन्हें बेहतर इलाज के लिए जिला अस्पताल सतना रेफर कर दिया है।

    थाना प्रभारी विजय सिंह परस्ते ने बताया कि दोनों पक्षों के बीच पुराना जमीनी विवाद ही इस हिंसक घटना की मुख्य वजह है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अस्पताल में घायलों के बयान लिए जा रहे हैं और घटनास्थल से भी जरूरी साक्ष्य जुटाए गए हैं। पुलिस का कहना है कि जांच के आधार पर सभी आरोपियों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल गांव में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति को रोका जा सके।

  • हाईकोर्ट पहुंचे आरक्षक सौरभ शर्मा बोले, सुनवाई का मौका दिए बिना हुई कार्रवाई

    हाईकोर्ट पहुंचे आरक्षक सौरभ शर्मा बोले, सुनवाई का मौका दिए बिना हुई कार्रवाई


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश के चर्चित सौरभ शर्मा मामले में एक नया कानूनी मोड़ सामने आया है। आय से अधिक संपत्ति और कथित मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े आरोपों के बीच आरटीओ आरक्षक सौरभ शर्मा ने अब प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में चुनौती दी है। इस कदम के बाद प्रदेश के सबसे चर्चित मामलों में शामिल इस प्रकरण की कानूनी लड़ाई और दिलचस्प हो गई है।

    हाईकोर्ट में दायर याचिका में सौरभ शर्मा ने प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई की वैधानिकता पर सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि जांच और कानूनी प्रक्रिया के दौरान उन्हें अपना पक्ष रखने का समुचित अवसर नहीं दिया गया। याचिका में कहा गया है कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 233(1) के तहत किसी भी शिकायत पर संज्ञान लेने से पहले संबंधित व्यक्ति को सुनवाई का अवसर दिया जाना आवश्यक है।

    याचिकाकर्ता की ओर से यह भी तर्क दिया गया है कि जांच एजेंसी ने इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया और बिना पक्ष सुने ही आगे की कार्रवाई शुरू कर दी। उनका कहना है कि यह निष्पक्ष सुनवाई के सिद्धांत और संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों के विपरीत है। इसी आधार पर उन्होंने अदालत से राहत की मांग की है।

    सौरभ शर्मा ने अपनी याचिका में सुप्रीम कोर्ट के एक हालिया फैसले का भी उल्लेख किया है। मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों में शीर्ष अदालत द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए कहा गया है कि किसी भी आरोपी को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलना चाहिए। याचिका के अनुसार इस मामले में उन्हें ऐसा अवसर नहीं दिया गया, जिससे उनके अधिकार प्रभावित हुए हैं।

    गौरतलब है कि सौरभ शर्मा का नाम उस समय सुर्खियों में आया था जब उनके और उनसे जुड़े ठिकानों पर हुई कार्रवाई के दौरान कथित तौर पर करोड़ों रुपये की संपत्ति और नकदी से जुड़े दस्तावेज सामने आए थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रवर्तन निदेशालय ने भी जांच शुरू की थी और कथित मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।

    यह मामला लंबे समय से प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। जांच एजेंसियों की कार्रवाई और उससे जुड़े खुलासों ने इसे हाई प्रोफाइल बना दिया है। अब सौरभ शर्मा द्वारा हाईकोर्ट का रुख किए जाने के बाद इस मामले की कानूनी दिशा पर सबकी नजरें टिक गई हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत में होने वाली सुनवाई से यह स्पष्ट हो सकेगा कि जांच एजेंसियों द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया कानूनी मानकों के अनुरूप थी या नहीं। फिलहाल हाईकोर्ट में दायर याचिका के बाद इस बहुचर्चित मामले में नए कानूनी तर्क और बहसें सामने आने की संभावना बढ़ गई है।

    आने वाले दिनों में अदालत का रुख और सुनवाई के दौरान पेश किए जाने वाले पक्ष इस पूरे मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। तब तक यह प्रकरण प्रदेश के सबसे चर्चित कानूनी और प्रशासनिक मामलों में बना रहेगा।

  • हर जिले में बनेगी हैचरी CM मोहन यादव ने मत्स्य क्षेत्र के लिए बनाया बड़ा रोडमैप

    हर जिले में बनेगी हैचरी CM मोहन यादव ने मत्स्य क्षेत्र के लिए बनाया बड़ा रोडमैप


    नई दिल्ली ।मध्य प्रदेश में मत्स्य क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाने का संकेत दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मंत्रालय में आयोजित मछुआ कल्याण और मत्स्य विकास विभाग की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रदेश के प्रत्येक जिले में एक हैचरी विकसित की जाए। सरकार का उद्देश्य मछली उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ-साथ प्रदेश को मछली बीज उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना है।

    बैठक में मुख्यमंत्री ने विभागीय योजनाओं और कार्यक्रमों की विस्तार से समीक्षा करते हुए कहा कि एकीकृत मत्स्योद्योग नीति 2026 के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। इस नीति के चलते प्रदेश में 9 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश में प्राप्त 2 लाख 91 हजार 938 केज प्रस्तावों के लिए कार्यादेश भी जारी किए जा चुके हैं, जिससे मत्स्य क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रोजगार और उत्पादन बढ़ने की संभावना है।

    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि अगले ढाई वर्षों में मध्य प्रदेश को ऐसी स्थिति में पहुंचाना है जहां मछली बीज के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भरता समाप्त हो जाए। इसके लिए हर जिले में आधुनिक हैचरी विकसित करने और उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता ही इस क्षेत्र के सतत विकास की कुंजी होगी।

    बैठक में मोती उत्पादन को लेकर भी विशेष चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में मोती उत्पादन की अपार संभावनाएं हैं और इसे बढ़ावा देने के लिए अन्य राज्यों की सफल योजनाओं तथा बेहतर कार्यप्रणालियों का अध्ययन किया जाना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बेस्ट प्रैक्टिसेस को अपनाकर प्रदेश में मोती उत्पादन को प्रोत्साहित किया जाए।

    मछली उत्पादन में लगातार वृद्धि को देखते हुए मुख्यमंत्री ने कोल्ड चेन और अन्य आवश्यक बुनियादी सुविधाओं के विकास पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि उत्पादन बढ़ने के साथ भंडारण और परिवहन की मजबूत व्यवस्था जरूरी है ताकि उत्पादकों को बेहतर बाजार और उचित मूल्य मिल सके। इसके साथ ही मछली उत्पादों की ब्रांडिंग और निर्यात को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक नेटवर्किंग विकसित करने के निर्देश भी दिए गए।

    मुख्यमंत्री ने नदियों के पुनर्जीवन और जलीय जीवों के संरक्षण को भी प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने कहा कि जल संसाधनों के संरक्षण और जलीय पारिस्थितिकी तंत्र के विकास के लिए विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। साथ ही जल संपदा आधारित पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए भी ठोस कार्ययोजना तैयार की जानी चाहिए।

    बैठक में यह जानकारी भी सामने आई कि मछुआ क्रेडिट कार्ड योजना के क्रियान्वयन में मध्य प्रदेश देश में दूसरे स्थान पर है। मुख्यमंत्री ने इसे संतोषजनक उपलब्धि बताते हुए कहा कि मछुआरों के आर्थिक सशक्तिकरण और कल्याण के लिए योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन जारी रखा जाए। राज्य सरकार की नई पहलें संकेत देती हैं कि आने वाले वर्षों में मध्य प्रदेश मत्स्य उत्पादन, मछली बीज निर्माण और जलीय संसाधनों के प्रबंधन के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो सकता है।

  • राज्यपाल के निर्देशों पर विभाग की चुप्पी आदिवासी विकास रिपोर्ट 2 महीने से लंबित

    राज्यपाल के निर्देशों पर विभाग की चुप्पी आदिवासी विकास रिपोर्ट 2 महीने से लंबित


    नई दिल्ली ।मध्य प्रदेश में आदिवासी क्षेत्रों के विकास कार्यों को लेकर एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक मामला चर्चा में आ गया है। राज्यपाल मंगू भाई पटेल द्वारा मांगी गई रिपोर्ट दो महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी राजभवन तक नहीं पहुंची है। मामला आदिवासी और अनुसूचित क्षेत्रों में जल संसाधन विभाग द्वारा कराए गए विकास कार्यों और उन पर खर्च किए गए बजट से जुड़ा हुआ है। रिपोर्ट में देरी को लेकर अब विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

    जानकारी के अनुसार राज्यपाल मंगू भाई पटेल ने आदिवासी क्षेत्रों में चल रही विकास योजनाओं की समीक्षा के उद्देश्य से अप्रैल महीने में जल संसाधन विभाग की प्रमुख अभियंता को पत्र भेजा था। इस पत्र में विशेष रूप से आदिवासी अंचलों में जल आपूर्ति और जल जीवन मिशन से संबंधित परियोजनाओं की विस्तृत जानकारी मांगी गई थी। साथ ही यह भी पूछा गया था कि इन योजनाओं का लाभ कितने लोगों तक पहुंचा और उनका वास्तविक प्रभाव क्या रहा।

    राजभवन की ओर से भेजे गए इस पत्र को दो महीने से अधिक समय बीत चुका है लेकिन विभाग की ओर से अब तक कोई विस्तृत रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई गई है। बताया जा रहा है कि विभाग के 116 मुख्य अभियंताओं को इस संबंध में जानकारी एकत्र कर रिपोर्ट भेजने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी लेकिन अपेक्षित कार्रवाई समय पर नहीं हो सकी।

    स्थिति तब और गंभीर हो गई जब जून महीने में जनजाति क्षेत्रीय विकास योजना के संचनालय और मध्य प्रदेश शासन ने भी विभाग को अलग से पत्र लिखकर जल्द रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। इसके बावजूद विभागीय स्तर पर अपेक्षित तत्परता नहीं दिखाई गई और मामला लंबित बना हुआ है।

    इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल बजट खर्च को लेकर उठ रहा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार जल संसाधन विभाग ने पिछले एक वर्ष के दौरान आदिवासी क्षेत्रों में 38 विभिन्न परियोजनाओं पर लगभग 1085 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। विभाग आवंटित बजट का करीब 95 प्रतिशत हिस्सा उपयोग भी कर चुका है। इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद योजनाओं से लाभान्वित हुए लोगों का स्पष्ट ब्यौरा अब तक राजभवन को उपलब्ध नहीं कराया गया है।

    राज्यपाल ने अपने पत्र में विशेष रूप से यह जानकारी मांगी थी कि इन परियोजनाओं से कितने आदिवासी परिवारों को वास्तविक लाभ मिला और योजनाओं का जमीनी प्रभाव क्या रहा। लेकिन करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी लाभार्थियों की संख्या और परियोजनाओं के परिणामों को लेकर रिपोर्ट लंबित रहना कई सवाल खड़े कर रहा है।

    प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि यदि किसी योजना पर बड़ी राशि खर्च की जाती है तो उसकी पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना भी उतना ही आवश्यक होता है। ऐसे में राजभवन द्वारा मांगी गई जानकारी समय पर उपलब्ध नहीं कराना विभागीय समन्वय और जवाबदेही दोनों पर प्रश्नचिह्न लगाता है।

    अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि विभाग कब तक रिपोर्ट प्रस्तुत करता है और आदिवासी क्षेत्रों में खर्च किए गए करोड़ों रुपये के वास्तविक परिणामों का विवरण राजभवन के सामने कब आता है। यह मामला आने वाले दिनों में प्रशासनिक और राजनीतिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना रह सकता है।

  • कहीं ट्रक भिड़े कहीं पलटी गाड़ी ,MP में सड़क दुर्घटनाओं ने छीन ली कई जिंदगियां

    कहीं ट्रक भिड़े कहीं पलटी गाड़ी ,MP में सड़क दुर्घटनाओं ने छीन ली कई जिंदगियां


    नई दिल्ली । मध्य प्रदेश में मंगलवार का दिन सड़क हादसों के लिहाज से बेहद दर्दनाक साबित हुआ। प्रदेश के अलग-अलग जिलों में हुए पांच बड़े सड़क हादसों ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। कहीं तेज रफ्तार ट्रकों की टक्कर ने जान ले ली तो कहीं अनियंत्रित वाहन पलटने से लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। इन हादसों में तीन लोगों की मौत हो गई जबकि दर्जनों लोग घायल हुए हैं। हादसों के बाद कई स्थानों पर अफरा-तफरी और चीख पुकार का माहौल देखने को मिला।

    अनूपपुर जिले में नेशनल हाईवे 43 पर टोल प्लाजा के पास एक दर्दनाक हादसा हुआ। सड़क पार कर रहे एक व्यक्ति को तेज रफ्तार बाइक ने टक्कर मार दी। गंभीर रूप से घायल व्यक्ति को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया लेकिन उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है।

    वहीं शाजापुर जिले में नेशनल हाईवे 52 पर उकावता चौकी के पास दो ट्रकों की जोरदार भिड़ंत हो गई। बताया जा रहा है कि पीछे से आ रहे ट्रक चालक को नींद की झपकी आ गई जिसके कारण ट्रक आगे चल रहे वाहन से टकरा गया। हादसा इतना भीषण था कि ट्रक चालक की मौके पर ही मौत हो गई जबकि क्लीनर गंभीर रूप से घायल हो गया। पुलिस ने कड़ी मशक्कत के बाद दोनों को वाहन से बाहर निकाला और घायल को अस्पताल पहुंचाया।

    नरसिंहपुर जिले में तेंदूखेड़ा के पास एक स्कॉर्पियो वाहन गाय को बचाने के प्रयास में अनियंत्रित होकर पलट गया। वाहन में सवार छह लोग घायल हो गए जिनमें चार की हालत गंभीर बताई जा रही है। सभी घायल रीवा जिले के निवासी हैं जो इंदौर से अपनी बहन का इलाज कराकर लौट रहे थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार वाहन तीन बार पलटा जिसके कारण उसका अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।

    पन्ना जिले के शाहनगर थाना क्षेत्र में कचौरी मोड़ के पास एक और भीषण हादसा सामने आया। कटनी से पन्ना जा रहा तेज रफ्तार ट्रक नियंत्रण खो बैठा और सड़क से उतरकर खेतों में घुस गया। लगभग सौ मीटर तक घिसटने के बाद ट्रक एक जामुन के पेड़ से जा टकराया। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि ट्रक का केबिन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। हादसे में ट्रक के परिचालक की मौके पर ही मौत हो गई जबकि चालक गंभीर रूप से घायल हो गया। पुलिस ने क्रेन की मदद से दोनों को वाहन से बाहर निकाला।

    इधर सीहोर जिले में जताखेड़ा के पास चावल से भरा एक ट्रक पलट गया। ट्रक पलटने के बाद उसमें आग लग गई और देखते ही देखते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। सूचना मिलने पर पुलिस और अन्य राहत दल मौके पर पहुंचे तथा स्थिति को नियंत्रित करने के प्रयास शुरू किए गए। हादसे के कारणों की जांच की जा रही है।

    लगातार हो रहे सड़क हादसे एक बार फिर सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। तेज रफ्तार, चालक की लापरवाही और थकान जैसी वजहें अक्सर ऐसे हादसों का कारण बनती हैं। पुलिस ने सभी मामलों में जांच शुरू कर दी है और दुर्घटनाओं के कारणों का पता लगाया जा रहा है।