Tag: Madhya Pradesh Police

  • ग्वालियर में 35 वर्षीय किसान की कुल्हाड़ी से हत्या, शव के पास मिला डॉट पेन, 3.32 लाख के हिसाब वाली पर्ची की जांच में जुटी पुलिस

    ग्वालियर में 35 वर्षीय किसान की कुल्हाड़ी से हत्या, शव के पास मिला डॉट पेन, 3.32 लाख के हिसाब वाली पर्ची की जांच में जुटी पुलिस


    ग्वालियर । मध्य प्रदेश के ग्वालियर में एक किसान की कुल्हाड़ी से हमला कर हत्या किए जाने का मामला सामने आया है। झांसी रोड थाना क्षेत्र के केदारपुर छोटी मढ़ैया में 35 वर्षीय किसान पुरुषोत्तम गुर्जर का शव बुधवार सुबह एक पड़ोसी के खेत में मिला। किसान के गले और सिर पर धारदार हथियार से गंभीर चोटों के निशान पाए गए हैं। घटनास्थल के पास एक डॉट पेन मिला है जबकि मृतक की जेब से 3.32 लाख रुपये के लेनदेन का हिसाब लिखी पर्ची बरामद हुई है। किसान का मोबाइल फोन भी मौके से गायब बताया जा रहा है। पुलिस इन सभी बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए हत्या की जांच कर रही है।

    परिजनों के मुताबिक मंगलवार को पुरुषोत्तम की पत्नी एक रिश्तेदार के यहां शोक कार्यक्रम में शामिल होने गई थी। घर पर पुरुषोत्तम अपने दो बेटों और दो बेटियों के साथ था। मंगलवार देर रात उसके मोबाइल पर किसी का फोन आया। फोन पर बातचीत करने के बाद वह घर से बाहर निकल गया। इसके बाद वह वापस नहीं लौटा। परिवार के लोगों को उस समय अंदाजा नहीं था कि पुरुषोत्तम के साथ कोई अनहोनी हो सकती है। बुधवार सुबह जब उसका शव घर से करीब 300 मीटर दूर पड़ोसी के खेत में मिला तो इलाके में हड़कंप मच गया।

    घटना की सूचना मिलने पर झांसी रोड थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस के साथ फोरेंसिक टीम ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया और जरूरी साक्ष्य जुटाए। शुरुआती जांच में सामने आया कि पुरुषोत्तम के गले पर कुल्हाड़ी के पांच और सिर पर एक गहरा घाव था। इन चोटों से आशंका जताई जा रही है कि उस पर धारदार हथियार से हमला किया गया। हालांकि हमले में कितने लोग शामिल थे और वारदात किस परिस्थिति में हुई इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

    पुलिस को मृतक की जेब से एक पर्ची मिली है जिस पर 1.32 लाख रुपये और 2 लाख रुपये के लेनदेन का हिसाब लिखा होने की जानकारी सामने आई है। दोनों रकम का कुल योग 3.32 लाख रुपये है। जांच अधिकारी यह पता लगाने में जुटे हैं कि यह हिसाब किस व्यक्ति या कारोबार से जुड़ा था। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इस लेनदेन का हत्या से कोई संबंध है या यह किसी अन्य मामले से जुड़ा दस्तावेज है। फिलहाल केवल पर्ची मिलने के आधार पर हत्या की वजह तय नहीं की गई है।

    घटनास्थल के पास डॉट पेन मिलने और पुरुषोत्तम का मोबाइल गायब होने से भी जांच के कई पहलू सामने आए हैं। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि पेन मृतक का था या किसी अन्य व्यक्ति का। वहीं मंगलवार देर रात आए फोन की जानकारी जुटाना भी अहम माना जा रहा है। मृतक के मोबाइल की उपलब्ध जानकारी और आखिरी बातचीत से घटना से पहले की परिस्थितियों को समझने में मदद मिल सकती है।

    मृतक के ससुर पूरन सिंह गुर्जर ने बताया कि पुरुषोत्तम का गांव या बाहर किसी से विवाद होने की जानकारी परिवार को नहीं थी। उन्होंने जमीन या संपत्ति को लेकर किसी झगड़े से भी इनकार किया। परिजनों का कहना है कि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि हत्या किसने और क्यों की। उन्होंने पुलिस से आरोपियों की जल्द पहचान कर कार्रवाई करने की मांग की है।

    झांसी रोड थाने के सब इंस्पेक्टर आशीष शर्मा के मुताबिक पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। लेनदेन की पर्ची गायब मोबाइल फोन देर रात आया कॉल और घटनास्थल से मिले साक्ष्य जांच के अहम बिंदु हैं। पुलिस सभी संभावित पहलुओं की पड़ताल कर रही है। फिलहाल हत्या के पीछे की वजह और आरोपियों की पहचान स्पष्ट नहीं हुई है।

  • हेड कॉन्स्टेबल के ठिकानों पर सुबह 6 बजे लोकायुक्त का छापा, बंगले से लेकर जमीन और फर्मों तक जांच, करोड़ों के लेन-देन का पता चला

    हेड कॉन्स्टेबल के ठिकानों पर सुबह 6 बजे लोकायुक्त का छापा, बंगले से लेकर जमीन और फर्मों तक जांच, करोड़ों के लेन-देन का पता चला


    इंदौर । मध्य प्रदेश में आय से अधिक संपत्ति के मामले में लोकायुक्त पुलिस ने इंदौर के पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय में पदस्थ हेड कॉन्स्टेबल फिरोज खान के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। लोकायुक्त इंदौर और उज्जैन की संयुक्त टीम ने बुधवार सुबह करीब 6 बजे इंदौर और देवास में एक साथ 15 ठिकानों पर सर्चिंग शुरू की। शुरुआती जांच में हेड कॉन्स्टेबल के पास करीब 6.26 करोड़ रुपये की अनुपातहीन संपत्ति होने का अनुमान सामने आया है। लोकायुक्त के अनुसार यह संपत्ति उनकी आंकी गई आय से करीब 223 प्रतिशत अधिक है। फिलहाल टीम बैंक खातों निवेश संपत्तियों और कारोबार से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर रही है।

    फिरोज खान वर्तमान में पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय में ड्राइवर के पद पर पदस्थ हैं। इससे पहले वह देवास के औद्योगिक थाने और बागली में भी सेवाएं दे चुके हैं। उनकी करीब 20 साल की सरकारी सेवा बताई जा रही है। लोकायुक्त के मुताबिक वेतन के रूप में उनकी आय करीब 75 लाख रुपये आंकी गई है। अन्य स्रोतों से होने वाली आय को जोड़कर कुल आय लगभग 1.93 करोड़ रुपये मानी गई है। इसके मुकाबले शुरुआती जांच में 6.26 करोड़ रुपये की संपत्ति का अनुमान सामने आने के बाद मामले की विस्तृत पड़ताल की जा रही है।

    शिकायत में आरोप लगाया गया था कि फिरोज खान पुलिस विभाग में अपनी पदस्थापना का प्रभाव दिखाकर देवास क्षेत्र में विवादित जमीनों और प्लॉटों के मामलों में हस्तक्षेप करते थे। उन पर दूसरे लोगों के माध्यम से जमीनों का लेन-देन करने संपत्तियों में निवेश करने और परिवार के सदस्यों के अलावा एक परिचित महिला के नाम पर भी संपत्तियां खरीदने के आरोप हैं। शिकायत में कई वाहन रखने और लकड़ी के कारोबार से जुड़े होने की बात भी कही गई थी। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने और संबंधित साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही स्पष्ट होगी।
    शिकायत में आरोप लगाया गया था कि फिरोज खान पुलिस विभाग में अपनी पदस्थापना का प्रभाव दिखाकर देवास क्षेत्र में विवादित जमीनों और प्लॉटों के मामलों में हस्तक्षेप करते थे। उन पर दूसरे लोगों के माध्यम से जमीनों का लेन-देन करने संपत्तियों में निवेश करने और परिवार के सदस्यों के अलावा एक परिचित महिला के नाम पर भी संपत्तियां खरीदने के आरोप हैं। शिकायत में कई वाहन रखने और लकड़ी के कारोबार से जुड़े होने की बात भी कही गई थी। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने और संबंधित साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही स्पष्ट होगी।

    प्रारंभिक जांच में फिरोज खान की मां और पत्नी के नाम पर साहिल ट्रेडिंग नाम की फर्म होने की जानकारी सामने आई है। लोकायुक्त के अनुसार इस फर्म के खाते में करोड़ों रुपये का लेन-देन हुआ है। वहीं उनकी परिचित रोशनी वर्मा द्वारा रोशनी सेल्स एंड सर्विस नाम से फर्म संचालित किए जाने की जानकारी भी मिली है। जमीनों की खरीद में कथित भूमिका सामने आने के बाद रोशनी वर्मा को भी मामले में आरोपी बनाया गया है। इसके अलावा रॉयल ग्रीन रियल एस्टेट नाम की फर्म के माध्यम से रियल एस्टेट में निवेश किए जाने की जानकारी की भी जांच की जा रही है।

    जांच में इंदौर जिले की सांवेर तहसील के ग्राम गुरान में करीब 21.75 बीघा कृषि भूमि से जुड़े सौदे का मामला भी सामने आया है। इस जमीन को लेकर शिकायतकर्ता के बेटे और उसके पिता के बीच विवाद बताया गया है। आरोप है कि इस विवाद का फायदा उठाकर फिरोज खान ने अपनी परिचित रोशनी वर्मा के नाम पर शिकायतकर्ता के पिता से कृषि भूमि का रजिस्टर्ड एग्रीमेंट करवाया। लोकायुक्त की टीम इस सौदे से संबंधित दस्तावेजों और भूमिका की पड़ताल कर रही है।

    कार्रवाई के दौरान देवास में 11 और इंदौर में चार ठिकानों की तलाशी ली जा रही है। इनमें मकान फ्लैट कृषि भूमि प्लॉट और व्यावसायिक संपत्तियां शामिल हैं। देवास के आदर्श नगर सहित कई कॉलोनियों में संपत्तियों की जांच की जा रही है। इंदौर के बाणगंगा क्षेत्र में रोशनी वर्मा के निवास के अलावा स्कीम नंबर 94 के मनोरमा अपार्टमेंट और श्रीनगर कॉलोनी के श्रीदेवी अपार्टमेंट स्थित फ्लैट भी जांच के दायरे में हैं। स्कीम नंबर 94 स्थित बड़े बंगले के निचले हिस्से को किराए पर दिए जाने और उससे आय मिलने की जानकारी भी जांच में शामिल है। वीआईपी नंबर 9000 वाली स्कॉर्पियो की भी पड़ताल की जा रही है।

    लोकायुक्त की टीम बैंक खातों फर्मों के वित्तीय लेन-देन निवेश और संपत्तियों के दस्तावेजों की जांच कर रही है। अधिकारियों के अनुसार तलाशी पूरी होने के बाद बरामद दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल मामला जांच के अधीन है और शुरुआती आंकड़ों के आधार पर संपत्ति तथा आय के स्रोतों का मिलान किया जा रहा है।

  • 6 दिन से लापता 18 वर्षीय सुहाना की तलाश में जुटी पुलिस, बाइक पर नंबर प्लेट नहीं और दोनों के मोबाइल बंद, 5 किलोमीटर के CCTV फुटेज खंगाले

    6 दिन से लापता 18 वर्षीय सुहाना की तलाश में जुटी पुलिस, बाइक पर नंबर प्लेट नहीं और दोनों के मोबाइल बंद, 5 किलोमीटर के CCTV फुटेज खंगाले


    ग्वालियर । ग्वालियर में चिड़ियाघर घूमने पहुंची 18 वर्षीय नवविवाहिता सुहाना जाटव के लापता होने का मामला छह दिन बाद भी सुलझ नहीं पाया है। पुलिस लगातार उसकी तलाश में जुटी है लेकिन अब तक सुहाना और उसके साथ जाने की बात सामने आए युवक अरमान खान का कोई ठोस सुराग नहीं मिला है। पुलिस ने चिड़ियाघर के आसपास पांच किलोमीटर के दायरे में लगे 100 से ज्यादा सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले हैं। इसके बावजूद दोनों किस रास्ते से गए और इसके बाद कहां पहुंचे इसकी जानकारी नहीं मिल सकी है। मामले में सबसे बड़ी परेशानी उस बाइक पर नंबर प्लेट नहीं होना है जिस पर सुहाना के बैठकर जाने की बात सामने आई है। दोनों के मोबाइल फोन भी बंद बताए जा रहे हैं।
    जानकारी के मुताबिक शिवपुरी निवासी सुहाना जाटव की शादी कुछ महीने पहले करण जाटव से हुई थी। घटना वाले दिन पति-पत्नी किसी रिश्तेदार से मिलने के लिए ग्वालियर आए थे। इसके बाद सुहाना ने चिड़ियाघर घूमने की इच्छा जताई। दोनों दोपहर करीब 1:25 से 1:35 बजे के बीच चिड़ियाघर पहुंचे। पुलिस के अनुसार जब करण अपनी बाइक पार्क करने के लिए आगे गया तो सुहाना वहीं रुक गई। इसी दौरान कथित तौर पर अरमान खान वहां बाइक लेकर पहुंचा और सुहाना उसकी बाइक पर बैठकर चली गई। करण जब बाइक खड़ी करके वापस लौटा तो सुहाना वहां नहीं थी। उसने आसपास तलाश की और कुछ दूरी तक उनका पीछा करने की कोशिश भी की लेकिन दोनों का पता नहीं चल पाया।
    घटना के बाद पुलिस ने आसपास के इलाकों में लगे सीसीटीवी कैमरों की मदद से घटनाक्रम और संभावित रास्तों की जांच शुरू की। पांच किलोमीटर के दायरे में 100 से अधिक कैमरों के फुटेज देखे गए। फुटेज में सुहाना के दूसरी बाइक पर बैठकर जाने से जुड़े दृश्य सामने आने की बात कही गई है। हालांकि इसके बाद दोनों किस दिशा में गए और उन्होंने आगे कौन सा रास्ता चुना इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है। महल गेट के आगे कुछ रास्तों पर सीसीटीवी कैमरे नहीं होने से पुलिस की जांच प्रभावित हो रही है। बाइक पर नंबर प्लेट नहीं होने के कारण वाहन की पहचान करना भी चुनौती बना हुआ है।
    पड़ाव थाना प्रभारी शैलेंद्र भार्गव के मुताबिक सुहाना और अरमान के मोबाइल नंबर सर्विलांस पर रखे गए हैं। लेकिन दोनों के फोन लगातार बंद आ रहे हैं। पुलिस को उम्मीद है कि मोबाइल दोबारा चालू होने पर उनकी लोकेशन से जुड़ा कोई सुराग मिल सकता है। जांच टीम ने मुरैना जिले के जरैना गांव में भी उनके रिश्तेदारों के यहां तलाश की लेकिन वहां भी दोनों नहीं मिले। पुलिस अब उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज और अन्य जानकारियों को जोड़कर उनके आने-जाने के संभावित रास्तों का पता लगाने की कोशिश कर रही है।
    इस बीच करण जाटव अपनी पत्नी की तलाश में रिश्तेदारों और परिचितों से संपर्क कर रहा है। घटना के छह दिन बीत जाने के बाद भी परिवार को सुहाना के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिली है। पुलिस का कहना है कि तलाश जारी है और दोनों की गतिविधियों से जुड़े संभावित सुरागों की जांच की जा रही है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि सुहाना और अरमान कहां हैं और वे चिड़ियाघर से निकलने के बाद किस स्थान पर पहुंचे। मामले की जांच पूरी होने और संबंधित लोगों के मिलने के बाद ही घटनाक्रम की आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

  • एमपी में शराब तस्करी के आरोपियों का वाहन चोरी से कनेक्शन, पूछताछ में 16 बाइक और एक छोटा हाथी चुराने की बात आई सामने

    एमपी में शराब तस्करी के आरोपियों का वाहन चोरी से कनेक्शन, पूछताछ में 16 बाइक और एक छोटा हाथी चुराने की बात आई सामने


    रतलाम । मध्य प्रदेश के रतलाम जिले में अवैध कच्ची शराब की तस्करी के मामले में गिरफ्तार तीन आरोपियों से वाहन चोरी की 17 वारदातों का खुलासा हुआ है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से करीब 5 लाख रुपये कीमत की छह चोरी की बाइक बरामद की हैं। पुलिस के अनुसार आरोपियों ने पूछताछ के दौरान 16 बाइक और एक महिंद्रा लोडिंग वाहन चोरी करने की बात स्वीकार की है। मामले में आलोट और जावरा ग्रामीण अनुभाग की संयुक्त पुलिस टीम ने कार्रवाई की। रविवार रात ताल थाने में पुलिस ने पूरे मामले की जानकारी दी।
    पुलिस के मुताबिक 11 अक्टूबर को अवैध कच्ची शराब की तस्करी के खिलाफ कार्रवाई के दौरान हरपाल कंजर और अर्जुन कंजर को गिरफ्तार किया गया था। दोनों के पास से 10 लीटर अवैध कच्ची शराब और एक हीरो एचएफ डीलक्स बाइक जब्त की गई। इस मामले में ताल थाने में प्रकरण दर्ज किया गया। कार्रवाई के दौरान बरामद बाइक के बारे में पूछताछ की गई तो आरोपियों ने उसे ग्राम भाटखेड़ा से चोरी करना स्वीकार किया। इस चोरी के संबंध में कालूखेड़ा थाने में पहले से मामला दर्ज था।
    इसके बाद पुलिस ने आरोपियों से विस्तार से पूछताछ की। पुलिस के अनुसार हरपाल और अर्जुन ने अपने साथी लखन कंजर के साथ मिलकर अलग-अलग स्थानों से बाइक और एक महिंद्रा लोडिंग वाहन चोरी करने की बात बताई। इसके आधार पर पुलिस ने तीसरे आरोपी लखन कंजर को भी गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस ने वाहन चोरी से जुड़े मामलों की जानकारी जुटाई और छह बाइक बरामद कीं।
    गिरफ्तार आरोपियों की पहचान हरपाल कंजर उम्र 20 वर्ष पिता धारिया कंजर अर्जुन कंजर उम्र 19 वर्ष पिता लखन कंजर और लखन कंजर उम्र 22 वर्ष पिता हरीलाल कंजर के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार तीनों राजस्थान के झालावाड़ जिले में उन्हेल नागेश्वर थाना क्षेत्र के टोकड़ा गांव के निवासी हैं। फिलहाल वाहन चोरी की वारदातों में उनकी कथित भूमिका और बरामद वाहनों से जुड़े मामलों की जांच की जा रही है।
    पुलिस ने जिन छह बाइक को जब्त किया है उनमें दो हीरो एचएफ डीलक्स बाइक एक हीरो स्प्लेंडर एक होंडा शाइन और दो स्प्लेंडर प्लस शामिल हैं। इनमें से एक एचएफ डीलक्स बाइक का संबंध कालूखेड़ा थाने में दर्ज चोरी के मामले से बताया गया है। कुछ बाइक बिना नंबर प्लेट के मिलीं जबकि दो स्प्लेंडर प्लस के इंजन और चेसिस नंबर घिसे हुए पाए गए। पुलिस इन वाहनों की पहचान और उनके वास्तविक मालिकों से संबंधित जानकारी की जांच कर रही है।
    पूछताछ में आरोपियों ने ताल थाना क्षेत्र से होंडा शाइन और आलोट क्षेत्र से एचएफ डीलक्स बाइक चोरी करने की बात कही है। इसके अलावा नामली थाना क्षेत्र से होंडा शाइन महिंद्रा लोडिंग वाहन और बजाज प्लेटिना चोरी करने की जानकारी भी सामने आई है। पुलिस के अनुसार जावरा औद्योगिक क्षेत्र से सुपर स्प्लेंडर स्प्लेंडर प्लस और दो होंडा शाइन चोरी करने की बात भी आरोपियों ने स्वीकार की है। सैलाना थाना क्षेत्र से दो सुपर स्प्लेंडर चोरी करने का मामला भी पूछताछ में सामने आया है।
    पुलिस की इस कार्रवाई से जिले और आसपास के क्षेत्रों में हुई वाहन चोरी की कई घटनाओं की जांच को आगे बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है। बरामद वाहनों और आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस अन्य मामलों के संबंध में भी पड़ताल कर रही है।

  • राकेश अग्रवाल हत्याकांड में नए सुराग की तलाश, रेलवे स्टेशन के CCTV में कैद हुआ वरुण, रिश्तेदारों और दोस्तों से पूछताछ के बाद भी पुलिस के हाथ खाली

    राकेश अग्रवाल हत्याकांड में नए सुराग की तलाश, रेलवे स्टेशन के CCTV में कैद हुआ वरुण, रिश्तेदारों और दोस्तों से पूछताछ के बाद भी पुलिस के हाथ खाली


    भोपाल । भोपाल में रिटायर्ड IAS अधिकारी राकेश अग्रवाल की हत्या का मामला लगातार उलझता जा रहा है। 30 सितंबर को हुई इस वारदात के बाद से मेडिसिनल केयरटेकर वरुण कुमार फरार है और पुलिस अब तक उसका पता नहीं लगा सकी है। आरोपी की तलाश में मध्य प्रदेश समेत पंजाब उत्तर प्रदेश और हरियाणा में संभावित ठिकानों पर जांच की जा रही है। इस बीच भोपाल रेलवे स्टेशन के CCTV कैमरों में वरुण की गतिविधियां सामने आई हैं। फुटेज के मुताबिक वह 30 सितंबर की सुबह करीब 3 बजकर 51 मिनट पर रेलवे स्टेशन पर दिखाई दिया था। पुलिस अब इन तस्वीरों के आधार पर उसकी फरारी के रास्ते और संभावित यात्रा से जुड़ी कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।
    वरुण की तलाश को तेज करने के लिए पुलिस उसके रिश्तेदारों दोस्तों और परिचितों से लगातार पूछताछ कर रही है। अब तक 100 से अधिक लोगों से जानकारी जुटाई जा चुकी है। आरोपी के पिता ग्वालियर में बहन पटियाला में और कुछ दोस्त आगरा तथा मथुरा में रहते हैं। पुलिस इन लोगों से तीन से चार बार पूछताछ कर चुकी है। जांचकर्ताओं का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि वारदात के बाद वरुण किन लोगों के संपर्क में रहा और क्या उसे फरार होने के दौरान किसी ने मदद पहुंचाई। हालांकि उपलब्ध जानकारी के मुताबिक अब तक किसी रिश्तेदार या दोस्त की संलिप्तता सामने नहीं आई है। पुलिस आगरा से वृंदावन जाने वाले मार्ग पर 80 से अधिक स्थानों पर आरोपी के पोस्टर भी चिपका चुकी है ताकि उसके बारे में सूचना मिलने की संभावना बढ़ सके।
    इस हत्याकांड की जांच में एक करोड़ रुपये से अधिक की कथित धोखाधड़ी का पुराना मामला भी सामने आया है। जानकारी के अनुसार राकेश अग्रवाल ने करीब 11 महीने पहले अपने पूर्व परिचित अजीत पाटनी के खिलाफ क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि कंपनी में निवेश और अधिक रिटर्न का लालच देकर किस्तों में एक करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम ली गई लेकिन बाद में पैसे वापस नहीं किए गए। जांच के बाद अक्टूबर 2025 में अजीत के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी और उसे गिरफ्तार भी किया गया था। अब पुलिस इस पुराने मामले से जुड़े लोगों दस्तावेजों अदालत की कार्यवाही और अग्रवाल की गवाही सहित सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही है। हालांकि धोखाधड़ी के मामले और हत्या के बीच किसी संबंध की पुष्टि अभी नहीं हुई है।
    पुलिस जांच में यह भी पता चला है कि वरुण कुमार को 27 सितंबर को वर्मा होम हेल्थ केयर एजेंसी के माध्यम से राकेश अग्रवाल के घर काम पर रखा गया था। एजेंसी से उसके दस्तावेज पुराने रोजगार और सत्यापन से जुड़ी जानकारी मांगी गई है। वरुण का पंजाब के पटियाला एसपी कार्यालय से 1 मई 2025 को जारी चरित्र प्रमाण पत्र भी मिला है। यह प्रमाण पत्र उसने नौकरी के उद्देश्य से बनवाया था और इसमें उसे अच्छे चरित्र वाला तथा अपराधमुक्त बताया गया था। पुलिस अब इस दस्तावेज की पृष्ठभूमि और नौकरी पर रखे जाने से संबंधित प्रक्रिया की भी जांच कर रही है।
    फिलहाल भोपाल रेलवे स्टेशन के CCTV फुटेज आरोपी की तलाश में महत्वपूर्ण कड़ी बने हुए हैं। पुलिस फुटेज और संभावित यात्रा रिकॉर्ड का मिलान कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि स्टेशन पर दिखाई देने के बाद वरुण किस दिशा में गया। चार राज्यों में तलाश और परिचितों से पूछताछ के बावजूद आरोपी का पता नहीं चल पाया है। ऐसे में जांच की दिशा अब उसके संभावित ठिकानों संपर्कों और पुराने मामलों से जुड़े तथ्यों पर केंद्रित है। पुलिस को उम्मीद है कि CCTV फुटेज और अन्य जानकारियों के मिलान से फरारी के रास्ते का पता लगाने में मदद मिल सकती है।

  • IAS मर्डर केस में वरुण पर शिकंजा कसने की तैयारी, 5 राज्यों में छापेमारी, रेलवे स्टेशन से दिल्ली जाने का सुराग तलाश रही पुलिस

    IAS मर्डर केस में वरुण पर शिकंजा कसने की तैयारी, 5 राज्यों में छापेमारी, रेलवे स्टेशन से दिल्ली जाने का सुराग तलाश रही पुलिस


    भोपाल। भोपाल में रिटायर्ड IAS अधिकारी राकेश अग्रवाल की हत्या का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। वारदात के बाद फरार चल रहे उनके केयरटेकर वरुण कुमार की तलाश में पुलिस ने अब बड़ा कदम उठाते हुए उस पर 50 हजार रुपए का इनाम घोषित किया है। आरोपी घटना के बाद से पुलिस की पकड़ से बाहर है और उसे गिरफ्तार करने के लिए मध्यप्रदेश समेत पांच राज्यों में पुलिस की करीब 12 टीमें लगातार काम कर रही हैं। जांच जैसे जैसे आगे बढ़ रही है वैसे वैसे आरोपी के भागने और संभावित ठिकानों से जुड़े नए सुराग सामने आ रहे हैं।

    पुलिस के अनुसार वरुण कुमार की तलाश मध्यप्रदेश के अलावा पंजाब हरियाणा उत्तरप्रदेश और दिल्ली में की जा रही है। पुलिस की अलग अलग टीमें उसके रिश्तेदारों परिचितों और संभावित संपर्कों से जुड़े ठिकानों पर पहुंचकर जानकारी जुटा रही हैं। कुछ स्थानों पर परिजनों से पूछताछ भी की जा चुकी है। पुलिस को आशंका है कि आरोपी लगातार अपना ठिकाना बदल रहा है और गिरफ्तारी से बचने के लिए अपने परिचितों के संपर्क का सहारा ले सकता है।

    आरोपी तक पहुंचने के लिए पुलिस ने अब तकनीकी जांच को भी तेज कर दिया है। उसकी मोबाइल गतिविधियों और डिजिटल फुटप्रिंट की पड़ताल की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि वारदात के बाद उसने किन लोगों से संपर्क किया और किन स्थानों पर उसकी मौजूदगी रही। इसके साथ ही घटना के बाद उसके आने जाने के रास्तों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी खंगाली जा रही है। पुलिस को उम्मीद है कि तकनीकी साक्ष्यों और सीसीटीवी फुटेज को जोड़कर आरोपी की गतिविधियों की पूरी कड़ी तैयार की जा सकेगी।

    जांच में एक महत्वपूर्ण जानकारी यह सामने आई है कि वारदात के बाद वरुण भोपाल रेलवे स्टेशन पहुंचा था। इसके बाद उसके ट्रेन से दिल्ली की ओर जाने की जानकारी पुलिस को मिली है। इसी सुराग के आधार पर पुलिस की टीमें दिल्ली और आसपास के इलाकों के साथ दूसरे राज्यों में भी संभावित ठिकानों पर नजर रख रही हैं। पुलिस उसके संपर्कों की भी जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि भोपाल से निकलने के बाद उसे किसने मदद दी या किन लोगों के संपर्क में वह रहा।

    राकेश अग्रवाल की हत्या ने भोपाल में सनसनी फैला दी थी। बुधवार सुबह सूरजनगर स्थित उनके घर में उनका शव कमरे के अंदर जमीन पर मिला था। शुरुआती जांच में उनके गले पर धारदार हथियार से हमला किए जाने के निशान मिले थे। घर के अंदर अलमारी के लॉक टूटे हुए पाए गए थे जिससे पुलिस ने लूट की आशंका को भी जांच के दायरे में रखा। इसके अलावा किचन में LPG सिलेंडर का पाइप निकला हुआ मिला था। इससे पूरे घर में गैस भर गई थी और पुलिस को आशंका है कि वारदात के बाद आग लगाने की साजिश भी की गई हो सकती है।

    अब पुलिस इस पूरे मामले में हत्या के पीछे की वजह और आरोपी की भूमिका को लेकर अलग अलग पहलुओं की जांच कर रही है। फरार केयरटेकर पर इनाम घोषित होने के बाद उसकी तलाश और तेज होने की उम्मीद है। पांच राज्यों में फैली पुलिस टीमों के साथ तकनीकी विशेषज्ञ भी आरोपी के मोबाइल और डिजिटल गतिविधियों से जुड़े सुराग तलाश रहे हैं। पुलिस का फोकस अब वरुण को जल्द गिरफ्तार करने के साथ वारदात की पूरी कड़ी सामने लाने पर है। आरोपी की गिरफ्तारी के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि हत्या के पीछे वास्तविक वजह क्या थी और घटना को अंजाम देने के बाद फरार होने में उसे किस स्तर पर मदद मिली।

  • भोपाल IAS मर्डर केस में बड़ा खुलासा, बैग और झोला लेकर निकला आरोपी, दिल्ली रूट की ट्रेन में सवार होकर हुआ गायब

    भोपाल IAS मर्डर केस में बड़ा खुलासा, बैग और झोला लेकर निकला आरोपी, दिल्ली रूट की ट्रेन में सवार होकर हुआ गायब


    भोपाल । भोपाल में रिटायर्ड आईएएस अधिकारी राकेश अग्रवाल की हत्या के मामले में पुलिस की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। रातीबड़ थाना क्षेत्र के सूरज नगर स्थित उनके घर में हुई इस वारदात के बाद से केयरटेकर वरुण कुमार फरार है। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों की मदद से उसके भागने का संभावित रास्ता पता लगाया है। आरोपी की तलाश में मध्य प्रदेश उत्तर प्रदेश दिल्ली और पंजाब में पुलिस की कई टीमें जुटी हुई हैं। खबर के मुताबिक इस अभियान में 100 से अधिक पुलिसकर्मियों को लगाया गया है।

    पुलिस की शुरुआती जांच के अनुसार 30 सितंबर की रात करीब 12:30 बजे से सुबह 2 बजे के बीच राकेश अग्रवाल की धारदार हथियार से गला रेतकर हत्या की गई। वारदात के समय वह अपने कमरे में सो रहे थे। जांच में यह भी सामने आया है कि हत्या के बाद घर की रसोई में गैस सिलेंडर का पाइप निकाल दिया गया था और आग लगाने की कोशिश की गई थी। पुलिस इस पहलू की जांच कर रही है कि ऐसा किस उद्देश्य से किया गया।

    घटना का पता सुबह करीब 4:40 बजे चला जब राकेश अग्रवाल की पत्नी निशी अग्रवाल की नींद खुली। उनका कमरा बाहर से बंद था। घर के कर्मचारी अमर की मदद से दरवाजा खुलवाया गया। इसके बाद राकेश अग्रवाल की हत्या की जानकारी सामने आई और पुलिस को सूचना दी गई।

    जांच में आरोपी के भागने का घटनाक्रम भी सामने आया है। पुलिस के अनुसार वरुण रात करीब 2:40 बजे घर से निकला था। घटनास्थल से लगभग 200 मीटर दूर लगे सीसीटीवी कैमरों में वह पीठ पर बैग और हाथ में झोला लेकर जाता दिखाई दिया। इसके बाद वह करीब दो किलोमीटर पैदल चलकर भदभदा चौराहे पहुंचा जहां से उसने ऑटोरिक्शा लिया।

    बताया जा रहा है कि ऑटो पॉलीटेक्निक चौराहे और कमला पार्क की ओर से भोपाल रेलवे स्टेशन पहुंचा। स्टेशन से कुछ दूरी पहले उतरने के बाद आरोपी पैदल ही भोपाल जंक्शन के प्लेटफॉर्म नंबर 6 से होते हुए प्लेटफॉर्म नंबर 2 तक पहुंचा। पुलिस के अनुसार वह रात करीब 3:30 बजे दिल्ली रूट की ट्रेन में सवार होकर रवाना हुआ। अब झांसी ग्वालियर और आगरा रूट के विभिन्न स्टेशनों के सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रही है ताकि उसकी लोकेशन का पता लगाया जा सके।

    इस मामले में केयरटेकर की नियुक्ति करने वाली एजेंसी भी जांच के दायरे में है। जानकारी के मुताबिक वरुण को बाग सेवनिया के विश्वकर्मा नगर स्थित वर्मा होम हेल्थ केयर के माध्यम से नौकरी पर रखा गया था। पुलिस यह पता लगा रही है कि नियुक्ति से पहले उसका अनिवार्य पुलिस वेरिफिकेशन कराया गया था या नहीं। नियमों की अनदेखी मिलने पर एजेंसी संचालकों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है। आरोपी का पटियाला एसपी कार्यालय से 1 मई 2025 को जारी चरित्र प्रमाण पत्र भी सामने आया है। इस संबंध में पंजाब पुलिस से उसके पुराने रिकॉर्ड की जानकारी मांगी गई है।

    पुलिस हत्या के पीछे की वजह जानने के लिए लूट और आर्थिक लेन-देन समेत कई पहलुओं पर जांच कर रही है। आशंका जताई जा रही है कि आरोपी घर से नकदी या कीमती सामान लेकर फरार हुआ हो सकता है। इसके अलावा राकेश अग्रवाल के कुछ लोगों के साथ हुए आर्थिक लेन-देन की जानकारी भी जांच का हिस्सा है। रिपोर्ट के मुताबिक करीब 11 महीने पहले एक पूर्व परिचित के खिलाफ एक करोड़ रुपये से अधिक की कथित धोखाधड़ी को लेकर शिकायत किए जाने का पहलू भी सामने आया है। पुलिस इन घटनाओं के बीच किसी संभावित संबंध की जांच कर रही है। फिलहाल हत्या का वास्तविक कारण स्पष्ट नहीं हुआ है। आरोपी की गिरफ्तारी और आगे की जांच के बाद ही वारदात की पूरी तस्वीर सामने आ सकेगी।

  • MP में IPS अफसरों की नई जमावट की तैयारी, प्रमोशन के बाद होंगे बदलाव, भोपाल-इंदौर DCP पर नजर

    MP में IPS अफसरों की नई जमावट की तैयारी, प्रमोशन के बाद होंगे बदलाव, भोपाल-इंदौर DCP पर नजर


    भोपाल। मध्य प्रदेश पुलिस में सितंबर के बड़े फेरबदल के बाद एक बार फिर नई पोस्टिंग को लेकर हलचल तेज होने की चर्चा है। पुलिस मुख्यालय से लेकर जिलों तक संभावित बदलाव को लेकर अलग अलग स्तर पर कयास लगाए जा रहे हैं। 13 सितंबर को गृह विभाग ने 137 पुलिस अधिकारियों की पदस्थापना में बदलाव किया था। इसमें 10 IPS और 127 राज्य पुलिस सेवा के अधिकारी शामिल थे। अब एक बार फिर करीब 15 जिलों में SP स्तर पर बदलाव की संभावना की चर्चा सामने आ रही है। इसके साथ ही भोपाल और इंदौर पुलिस कमिश्नरेट में DCP स्तर की जिम्मेदारियों पर भी नजर बनी हुई है। हालांकि इन सभी संभावित बदलावों की अंतिम तस्वीर गृह विभाग के आधिकारिक आदेश के बाद ही स्पष्ट होगी।

    नई पोस्टिंग की चर्चा के पीछे कई प्रशासनिक कारण बताए जा रहे हैं। IPS अधिकारियों के प्रमोशन के बाद कुछ मौजूदा पद खाली हो सकते हैं। ऐसे में उन रिक्तियों को भरने के लिए नई पदस्थापनाओं की जरूरत पड़ सकती है। इसी वजह से इस संभावित सूची को केवल सामान्य तबादला प्रक्रिया के तौर पर नहीं देखा जा रहा है बल्कि प्रमोशन के बाद बनने वाले नए प्रशासनिक समीकरण से भी जोड़कर देखा जा रहा है।

    जिला पुलिस अधीक्षक स्तर पर जबलपुर निवाड़ी सीधी ग्वालियर रतलाम छिंदवाड़ा और सागर जैसे जिलों को लेकर बदलाव की चर्चा है। हालांकि अभी किसी अधिकारी का नाम या पदस्थापना तय नहीं मानी जा सकती। सरकारी आदेश जारी होने तक संभावित नाम और जिलों को लेकर सामने आ रही जानकारी को सिर्फ चर्चा के स्तर पर ही देखा जाना चाहिए।

    संभावित फेरबदल का असर केवल जिलों तक सीमित रहने की बात नहीं है। ग्वालियर और जबलपुर रेंज की वरिष्ठ कमान में भी बदलाव की संभावना को लेकर चर्चा है। इसके अलावा पुलिस मुख्यालय बटालियन और रेडियो जैसे महत्वपूर्ण विभागों में तैनात अधिकारियों को लेकर भी नई जिम्मेदारियों के विकल्प सामने आ सकते हैं। यदि फील्ड और मुख्यालय स्तर पर एक साथ बदलाव होता है तो पुलिस महकमे में कई स्तरों पर नई प्रशासनिक जमावट देखने को मिल सकती है।

    भोपाल और इंदौर पर इसलिए भी विशेष नजर है क्योंकि दोनों शहरों में पुलिस कमिश्नरेट व्यवस्था लागू है और DCP स्तर के पद फील्ड पुलिसिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। रिक्त पदों या प्रमोशन के कारण बनने वाली नई जगहों पर किन अधिकारियों को जिम्मेदारी दी जाती है यह आने वाले आदेशों से साफ हो सकता है। फिलहाल इन पदों को लेकर भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।


    इस संभावित फेरबदल में कुछ अपेक्षाकृत जूनियर IPS अधिकारियों को फील्ड में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलने की संभावना की चर्चा भी है। यदि ऐसा होता है तो जिलों और कमिश्नरेट में नई पीढ़ी के अधिकारियों को कमांड की जिम्मेदारी मिल सकती है। दूसरी ओर प्रमोशन के बाद वरिष्ठ अधिकारियों की नई भूमिका तय होने से कई मौजूदा पदों पर बदलाव की जरूरत भी बन सकती है।

    इस बीच पुलिस महकाने में DGP पद से जुड़ा भविष्य का समीकरण भी महत्वपूर्ण रहेगा। मौजूदा DGP कैलाश मकवाना का कार्यकाल दिसंबर 2026 तक बताया गया है। इसलिए आने वाले महीनों में होने वाली वरिष्ठ IPS अधिकारियों की पदस्थापनाओं को केवल तत्काल जिला स्तर के बदलाव के रूप में देखना पूरी तस्वीर नहीं होगी। शीर्ष पुलिस नेतृत्व से जुड़ी आगामी प्रक्रिया का असर भी प्रशासनिक समीकरणों पर पड़ सकता है।

    सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सितंबर में 137 अधिकारियों की पोस्टिंग के कुछ ही समय बाद नई सूची की चर्चा क्यों शुरू हुई है। इसके पीछे प्रमोशन रिक्त पद और प्रशासनिक जरूरत जैसे सामान्य कारण हो सकते हैं। बार बार तबादला होना अपने आप में किसी प्रशासनिक निष्कर्ष का प्रमाण नहीं माना जा सकता। अब निगाह गृह विभाग के अगले आदेश पर है। आदेश सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि बदलाव कितने जिलों तक सीमित रहता है और क्या इसका असर SP से लेकर IG और DCP स्तर तक दिखाई देता है।

  • कटनी की पूर्व सीएसपी नेहा की याचिका पर आज डिवीजन बेंच में सुनवाई सरकार ने जांच में सहयोग नहीं करने का लगाया आरोप

    कटनी की पूर्व सीएसपी नेहा की याचिका पर आज डिवीजन बेंच में सुनवाई सरकार ने जांच में सहयोग नहीं करने का लगाया आरोप


    कटनी । कटनी की पूर्व सीएसपी नेहा पच्चीसिया की जमानत याचिका पर मंगलवार को जबलपुर हाईकोर्ट में सुनवाई होगी। हत्या के आरोपी की करीब 1 करोड़ रुपए की जमीन हड़पने के मामले में दर्ज एफआईआर को उन्होंने चुनौती दी है। मामले की सुनवाई अब सिंगल बेंच के बजाय डिवीजन बेंच के समक्ष होगी। सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से मामले को दूसरी उपयुक्त बेंच में भेजने की मांग की गई थी। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद कोर्ट ने केस डायरी देखी और मामले को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम से जुड़े मामलों की सुनवाई करने वाली बेंच के समक्ष भेजने का निर्णय लिया।

    नेहा पच्चीसिया की ओर से दाखिल याचिका में उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर के आरोपों को बेबुनियाद बताया गया है। उनकी ओर से अदालत से अंतरिम राहत की मांग भी की गई है। याचिका में कहा गया है कि मामले में उनके खिलाफ कोई सीधा सबूत मौजूद नहीं है और एफआईआर में उनकी भूमिका स्पष्ट नहीं होती है। अब डिवीजन बेंच के समक्ष होने वाली सुनवाई में उनकी ओर से रखी गई इन दलीलों पर विचार किया जाएगा।

    इससे पहले 21 सितंबर को मामले की सुनवाई जस्टिस हिमांशु जोशी की बेंच में प्रस्तावित थी। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने मामले को दूसरी उपयुक्त बेंच के सामने भेजने का अनुरोध किया। सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि एफआईआर में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं भी शामिल हैं। इसी आधार पर सरकार का कहना था कि मामले की सुनवाई ऐसी बेंच में होनी चाहिए जिसे इस तरह के मामलों की सुनवाई का अधिकार है।

    नेहा की ओर से पेश अधिवक्ताओं ने सरकार की इस मांग का विरोध किया। उनकी ओर से दलील दी गई कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराएं पिछली सुनवाई के बाद एफआईआर में जोड़ी गई हैं। इसलिए मामले की सुनवाई पहले से निर्धारित बेंच में ही की जानी चाहिए। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद अदालत ने केस डायरी का अवलोकन किया और मामले को संबंधित उपयुक्त बेंच के समक्ष भेजने का निर्णय लिया।

    राज्य सरकार ने नेहा की जमानत याचिका का विरोध करते हुए जांच में सहयोग नहीं करने का आरोप भी लगाया है। पिछली सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से अदालत को बताया गया था कि नेहा के विदेश जाने की आशंका को देखते हुए उनके खिलाफ लुक आउट सर्कुलर की कार्रवाई की गई है। सरकार ने मामले में सह आरोपियों के साथ मिलीभगत का आरोप भी लगाया है।

    सरकार के मुताबिक जिला अदालत से नेहा की अग्रिम जमानत याचिका पहले ही खारिज हो चुकी है। इसके अलावा मामले में नेहा सहित अन्य आरोपियों पर इनाम घोषित किए जाने की जानकारी भी अदालत के सामने रखी गई है। अब 22 सितंबर को नई बेंच के समक्ष होने वाली सुनवाई में उनकी याचिका पर आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

    यह मामला करीब 1 करोड़ रुपए की जमीन से जुड़े आरोपों के कारण पहले से चर्चा में है। पूर्व सीएसपी की ओर से एफआईआर को चुनौती दिए जाने के बाद अब हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई पर दोनों पक्षों की नजर है। अदालत के समक्ष याचिकाकर्ता की ओर से एफआईआर और आरोपों को लेकर दलीलें रखी जाएंगी जबकि राज्य सरकार अपनी ओर से जांच और अब तक सामने आए तथ्यों के आधार पर याचिका का विरोध करेगी।

  • पुलिस भर्ती की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ी खबर MP में 7500 आरक्षकों की भर्ती 22 सितंबर से आवेदन शुरू वेतन 62 हजार तक

    पुलिस भर्ती की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ी खबर MP में 7500 आरक्षकों की भर्ती 22 सितंबर से आवेदन शुरू वेतन 62 हजार तक


    भोपाल। मध्य प्रदेश में पुलिस विभाग में नौकरी का इंतजार कर रहे युवाओं के लिए बड़ी खबर सामने आई है। कर्मचारी चयन मंडल ने पुलिस आरक्षक के 7500 पदों पर भर्ती के लिए शेड्यूल जारी कर दिया है। भर्ती के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 22 सितंबर से शुरू होगी और अभ्यर्थी 6 अक्टूबर की रात 12 बजे तक अपना आवेदन जमा कर सकेंगे। इस भर्ती में सबसे महत्वपूर्ण नियम यह है कि चयनित अभ्यर्थियों को उनके गृह जिले में पदस्थापना नहीं दी जाएगी। आवेदन के दौरान अभ्यर्थियों को प्रदेश के 55 जिलों में अपनी पसंद की यूनिट चुननी होगी और नियुक्ति मिलने के बाद उसी यूनिट में कम से कम पांच साल की सेवा पूरी करनी होगी।

    कर्मचारी चयन मंडल के मुताबिक अभ्यर्थी को आवेदन करते समय यह स्पष्ट करना होगा कि वह सामान्य ड्यूटी के आरक्षक पद के लिए आवेदन कर रहा है या विशेष सशस्त्र बल यानी एसएएफ के आरक्षक पद के लिए। भर्ती के तहत चयनित उम्मीदवारों को शासकीय रेल पुलिस की भोपाल इंदौर और जबलपुर इकाइयों में भी नियुक्ति दी जा सकती है। इस तरह भर्ती में प्रदेश के अलग अलग क्षेत्रों में पुलिस बल को मजबूत करने पर जोर दिया गया है।

    परीक्षा प्रक्रिया को लेकर भी कुछ महत्वपूर्ण नियम तय किए गए हैं। परीक्षा केंद्र पर अभ्यर्थियों का आधार इनेबल्ड बायोमेट्रिक सत्यापन किया जाएगा। यदि परीक्षा एक से अधिक शिफ्ट में आयोजित होती है तो अभ्यर्थियों के अंकों का नॉर्मलाइजेशन किया जाएगा। आवेदन करते समय उम्मीदवारों को अपना कलर फोटो हस्ताक्षर और हाथ से लिखा हुआ एक पैराग्राफ स्कैन करके अपलोड करना होगा। मंडल ने स्पष्ट किया है कि पोलेराइड फोटो स्वीकार नहीं किए जाएंगे।

    जन्मतिथि के प्रमाण के लिए अभ्यर्थी को आठवीं दसवीं या बारहवीं की अंकसूची प्रस्तुत करनी होगी। इसके अलावा आरक्षण का लाभ लेने वाले उम्मीदवारों को सक्षम अधिकारी द्वारा जारी जाति प्रमाणपत्र देना होगा। एनसीसी या अन्य प्रमाणपत्रों के आधार पर मिलने वाले बोनस अंकों का लाभ लेने के लिए संबंधित दस्तावेज भी आवेदन के दौरान प्रस्तुत करने होंगे।

    आरक्षक भर्ती में विशेष सशस्त्र बल के लिए कुल 700 पद रखे गए हैं। वहीं एसएएफ को छोड़कर सामान्य ड्यूटी के लिए 6800 पद निर्धारित किए गए हैं। दोनों श्रेणियों को मिलाकर कुल 7500 पदों पर नियुक्तियां होंगी। भर्ती में आरक्षण के नियम भी निर्धारित किए गए हैं जिसके अनुसार विभिन्न वर्गों के लिए तय प्रावधानों के आधार पर पदों का वितरण किया जाएगा।

    शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सामान्य अभ्यर्थियों के लिए किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड या संस्था से दसवीं हायर सेकेंडरी या समकक्ष परीक्षा पास होना जरूरी है। अनुसूचित जनजाति वर्ग के उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम योग्यता आठवीं कक्षा या उसके समकक्ष परीक्षा रखी गई है। चयन के बाद उम्मीदवारों को तीन वर्ष की परिवीक्षा अवधि से गुजरना होगा। इसके बाद उन्हें निर्धारित प्रशिक्षण के लिए भेजा जाएगा।

    चयनित अभ्यर्थियों को 19500 रुपये से लेकर 62000 रुपये तक का वेतनमान मिलेगा। भर्ती नियमों में दो से अधिक बच्चों को लेकर भी विशेष शर्त रखी गई है। यदि किसी उम्मीदवार के दो से अधिक बच्चे हैं और उनमें से किसी एक बच्चे का जन्म 26 जनवरी 2001 या उसके बाद हुआ है तो वह नियुक्ति के लिए पात्र नहीं होगा। हालांकि एक बच्चे के बाद एक ही प्रसव में दो या उससे अधिक बच्चे जन्म लेने की स्थिति में यह नियम लागू नहीं होगा।

    इस भर्ती में शामिल होने के इच्छुक उम्मीदवारों को आवेदन से पहले कर्मचारी चयन मंडल द्वारा जारी नियम और पात्रता शर्तों को ध्यान से पढ़ना होगा। आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद भर्ती परीक्षा की आगे की प्रक्रिया मंडल के निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आयोजित की जाएगी।