Tag: Madhya Pradesh politics

  • भाजपा युवा मोर्चा की नियुक्तियों से संगठन में मचा घमासान, परिवारिक विवाद से लेकर निष्कासन तक के मामले आए सामने

    भाजपा युवा मोर्चा की नियुक्तियों से संगठन में मचा घमासान, परिवारिक विवाद से लेकर निष्कासन तक के मामले आए सामने


    भोपाल । मध्यप्रदेश में भारतीय जनता युवा मोर्चा के 19 जिलों के अध्यक्षों और महामंत्रियों की नियुक्तियों के बाद संगठन के भीतर विवाद गहराने लगे हैं। 29 अक्टूबर को घोषित की गई नियुक्तियों के एक-दो दिन के भीतर ही कई नवनियुक्त पदाधिकारी सवालों के घेरे में आ गए। बालाघाट में नए जिलाध्यक्ष की भाभी ने मारपीट और जान से मारने की धमकी देने के आरोप लगाते हुए पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई है। मंडला में जिलाध्यक्ष बनाए गए उत्कर्ष यादव की पत्नी ने दहेज में थार गाड़ी मांगने के लिए प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है। वहीं नर्मदापुरम में छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित किए गए नेता को जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपे जाने पर सवाल उठ रहे हैं। सिवनी और इंदौर ग्रामीण में भी नियुक्तियों को लेकर असंतोष सामने आया है।

    बालाघाट में अमन गांधी को भाजयुमो जिलाध्यक्ष बनाए जाने के बाद पारिवारिक विवाद चर्चा में आ गया। नियुक्ति की घोषणा वाली रात ही विवाद सामने आया था। इसके बाद 30 अक्टूबर को उनकी भाभी पूजा गांधी ने कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि शराब के नशे में अमन गांधी उनके ससुर और परिवार के अन्य सदस्यों ने उनके और उनके पति के साथ मारपीट की। साथ ही जान से मारने की धमकी भी दी गई। पूजा गांधी ने पुलिस से खुद अपने पति और छह वर्षीय बच्चे की सुरक्षा की मांग की है। बताया गया है कि इसी परिवार के खिलाफ अगस्त में भी शिकायत दर्ज कराई गई थी। हालांकि शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच पुलिस स्तर पर की जानी है।

    मंडला में उत्कर्ष यादव की नियुक्ति भी विवादों में है। उनकी पत्नी ने आरोप लगाया है कि शादी के बाद ससुराल पक्ष की ओर से थार गाड़ी की मांग की जाने लगी और इसके लिए उन्हें प्रताड़ित किया गया। इस मामले में जून 2026 में लखनादौन थाने में उत्कर्ष यादव और उनके परिवार के तीन सदस्यों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 85 और दहेज प्रतिषेध अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था। ऐसे मामले के बीच जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी मिलने से नियुक्ति पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

    नर्मदापुरम में कुलदीप रघुवंशी को जिलाध्यक्ष बनाए जाने पर पार्टी के पुराने फैसले की चर्चा फिर शुरू हो गई है। वर्ष 2023 में इटारसी नगर मंडल अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर हुए विवाद के दौरान कुलदीप और उनके साथियों पर मारपीट का आरोप लगा था। पुलिस में मामला दर्ज होने के बाद तत्कालीन जिला अध्यक्ष माधवदास अग्रवाल ने उन्हें छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया था। यह निष्कासन वर्ष 2029 तक बताया गया था। अब करीब साढ़े तीन साल में ही उनकी वापसी और सीधे जिलाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी मिलने पर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि कुलदीप रघुवंशी का कहना है कि एक घटना में उनका नाम जुड़वा दिया गया था और डेढ़ महीने में ही वे उस मामले में दोषमुक्त हो गए थे। इसके बाद पार्टी में उनकी वापसी हुई थी।

    सिवनी में योगेश शिवहरे को जिलाध्यक्ष बनाए जाने पर संगठन के भीतर नाराजगी की बात सामने आई है। आरोप है कि जिला स्तर पर कोर ग्रुप की सहमति से तैयार पैनल को नजरअंदाज कर नियुक्ति की गई। पैनल में नाम नहीं होने के बावजूद जिम्मेदारी मिलने से कुछ युवा नेताओं में असंतोष है। वहीं इंदौर ग्रामीण में अजय सिंह पंवार की नियुक्ति को लेकर सामाजिक प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठाया गया है। लगातार तीसरी बार राजपूत समाज से अध्यक्ष बनाए जाने की चर्चा के बीच कुछ नेताओं ने आपत्ति जताई। उम्र सीमा और अलग-अलग क्षेत्रों के दावेदारों को पर्याप्त अवसर नहीं मिलने की शिकायतें भी सामने आई हैं।

    सागर में नवनियुक्त जिलाध्यक्ष जसवंत राठौर की नियुक्ति के बाद उनके परिवार से जुड़ी पुरानी आयकर विभाग की कार्रवाई भी चर्चा में है। 5 जनवरी 2025 को आयकर विभाग ने पूर्व भाजपा विधायक हरवंश सिंह राठौर के आवास सहित तीन ठिकानों पर छापेमारी की थी। यह कार्रवाई बीड़ी कारोबार संपत्तियों और वित्तीय लेन-देन की जांच से जुड़ी थी। हालांकि उपलब्ध जानकारी के मुताबिक जसवंत राठौर के खिलाफ इस कार्रवाई में सीधे तौर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई थी।

    इन घटनाओं के बाद भाजयुमो की नियुक्ति प्रक्रिया और संगठन के फैसलों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। अलग-अलग जिलों में सामने आए विवादों ने नए पदाधिकारियों के चयन और संगठन के भीतर सामाजिक तथा राजनीतिक संतुलन पर बहस तेज कर दी है। अब इन मामलों में संबंधित शिकायतों और संगठन की ओर से आने वाली प्रतिक्रिया पर सबकी नजर रहेगी।

  • हरदीप पुरी ने भरा राज्यसभा का पर्चा, नामांकन से पहले कांग्रेस नेताओं को हिरासत में लेने से गरमाई सियासत

    हरदीप पुरी ने भरा राज्यसभा का पर्चा, नामांकन से पहले कांग्रेस नेताओं को हिरासत में लेने से गरमाई सियासत


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजनीति में शनिवार को राज्यसभा उपचुनाव को लेकर हलचल तेज रही। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भोपाल में राज्यसभा के लिए अपना नामांकन दाखिल कर दिया। वह सुबह करीब 11:30 बजे विधानसभा भवन पहुंचे। इस दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। नामांकन से पहले हरदीप सिंह पुरी ने गुरुद्वारे में मत्था टेका और करुणा धाम आश्रम पहुंचकर संत सुदेश शांडिल्य महाराज से आशीर्वाद लिया। वहीं दूसरी ओर नामांकन के दौरान विरोध की आशंका को देखते हुए पुलिस ने युवा कांग्रेस के कई नेताओं को हिरासत में ले लिया।

    भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति ने 28 अक्टूबर को हरदीप सिंह पुरी को मध्य प्रदेश से राज्यसभा उपचुनाव का उम्मीदवार घोषित किया था। यह सीट केंद्रीय मंत्री डॉ. एल. मुरुगन के राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद खाली हुई थी। उन्होंने 13 अक्टूबर को अपना इस्तीफा दिया था। उनका कार्यकाल अप्रैल 2030 तक था। अब इस रिक्त सीट पर उपचुनाव कराया जा रहा है। भाजपा ने इस चुनाव के लिए पुरी को अपना प्रत्याशी बनाया और उन्होंने शनिवार को औपचारिक रूप से नामांकन दाखिल कर दिया।

    नामांकन की तैयारियां पहले से शुरू हो गई थीं। शुक्रवार को ही मध्य प्रदेश सरकार की मंत्री कृष्णा गौर ने हरदीप सिंह पुरी के नामांकन के लिए प्रस्तावक बनने पर सहमति दी थी। उन्होंने भाजपा प्रदेश कार्यालय में इससे संबंधित सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए थे। इसके बाद शनिवार को निर्धारित प्रक्रिया के तहत पुरी ने विधानसभा भवन पहुंचकर अपना नामांकन जमा किया।

    इस मौके पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के अलावा भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और दोनों उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा तथा राजेंद्र शुक्ल मौजूद रहे। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय प्रहलाद पटेल और नरेंद्र शिवाजी पटेल सहित कई विधायक और पार्टी पदाधिकारी भी कार्यक्रम में शामिल हुए। विधायक सुरेंद्र पटवा समेत अन्य नेताओं की मौजूदगी में नामांकन की प्रक्रिया पूरी हुई।

    नामांकन के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि केंद्रीय चुनाव समिति के फैसले के बाद हरदीप सिंह पुरी ने राज्यसभा के लिए अपना नामांकन दाखिल किया है। उन्होंने इसे मध्य प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण अवसर बताते हुए कहा कि दिवाली से पहले प्रदेश को पुरी के रूप में एक सांसद का उपहार मिलने जा रहा है। मुख्यमंत्री ने पुरी के संसदीय अनुभव और केंद्रीय मंत्री के रूप में उनके योगदान का भी उल्लेख किया।

    सीएम ने कहा कि हरदीप सिंह पुरी ने मध्य प्रदेश को बीना रिफाइनरी नागरिक उड्डयन स्मार्ट सिटी मेट्रो रेल मेट्रोपॉलिटन सिटी और स्वच्छता अभियान जैसे क्षेत्रों में कई सौगातें दी हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में भी पुरी प्रदेश के विकास के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

    दूसरी ओर नामांकन के दौरान राजनीतिक विरोध की आशंका भी बनी रही। पुलिस ने युवा कांग्रेस के कई नेताओं को हिरासत में लिया। हालांकि उपलब्ध जानकारी में हिरासत में लिए गए नेताओं की संख्या और कार्रवाई के विस्तृत कारण स्पष्ट नहीं किए गए हैं। इस घटनाक्रम ने नामांकन के राजनीतिक माहौल को और चर्चा में ला दिया।

    खास बात यह रही कि नामांकन दाखिल करने से पहले और बाद में केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मीडिया से बातचीत नहीं की। मीडिया के सामने मुख्यमंत्री मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने पार्टी का पक्ष रखा। अब राज्यसभा उपचुनाव की आगे की प्रक्रिया और चुनावी नतीजे पर राजनीतिक दलों की नजर बनी हुई है।

  • लाड़ली बहना की फरियाद पर मंत्री का जवाब, रिश्वत पर इंजीनियर का बेबाक कबूलनामा, बाइक पर लिफ्ट लेते गिरते-गिरते बचे भाजपा नेता

    लाड़ली बहना की फरियाद पर मंत्री का जवाब, रिश्वत पर इंजीनियर का बेबाक कबूलनामा, बाइक पर लिफ्ट लेते गिरते-गिरते बचे भाजपा नेता


    सीहोर । मध्य प्रदेश में इन दिनों नेताओं और अधिकारियों के बयान तथा उनके काम करने के तरीके चर्चा का विषय बने हुए हैं। कहीं रिश्वत लेने के मामले में एक अधिकारी का बेबाक बयान सामने आया है तो कहीं अपनी घरेलू परेशानी लेकर मंत्री के पास पहुंची लाड़ली बहना को ऐसा जवाब मिला जिसने नई बहस छेड़ दी। दूसरी ओर इंदौर में एक कार्यक्रम में समय पर पहुंचने की जल्दबाजी में भाजपा के शहर अध्यक्ष बाइक से लिफ्ट लेते समय संतुलन खोते नजर आए। इन घटनाओं के अलावा भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक नारों की जंग भी दिलचस्प मोड़ लेती दिखाई दे रही है।

    सबसे पहले बात पन्ना की जहां जल संसाधन विभाग के एक कार्यपालन यंत्री का रिश्वत को लेकर दिया गया बयान चर्चा में है। दरअसल विभाग के दो कर्मचारी रिश्वत लेते पकड़े गए थे। इसी मामले को लेकर जब मीडियाकर्मियों ने कार्यपालन यंत्री से सवाल किया और पूछा कि क्या उनका भी कोई प्रतिशत तय है तो उन्होंने ऐसा जवाब दिया जिसने सभी को हैरान कर दिया। अधिकारी ने कहा कि उनका कोई प्रतिशत तय नहीं है लेकिन अगर कोई व्यक्ति अपनी खुशी से पैसा दे जाता है तो वे उसे रख लेते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि नौकरी में आने के बाद से उनका यही तरीका रहा है। अधिकारी ने एक तरफ पैसे लेना गलत बताया लेकिन दूसरी तरफ खुशी से मिलने वाले पैसे स्वीकार करने की बात भी कबूल कर ली। उनका यह बयान सामने आने के बाद विभाग ने उन्हें निलंबित कर दिया।

    दूसरी घटना सीहोर की है जहां एक लाड़ली बहना अपनी घरेलू परेशानी लेकर मंत्री करण सिंह वर्मा के पास पहुंची थी। महिला ने शिकायत की कि उसका पति शराब पीकर उसके साथ मारपीट करता है। उसने इलाके में शराब का ठेका बंद कराने की मांग की ताकि उसके परिवार में होने वाली परेशानी कम हो सके। हालांकि मंत्री ने शराब का ठेका बंद कराने के बजाय महिला को पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी। उन्होंने मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारी से कहा कि महिला के पति के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर उसे जेल भेजने की कार्रवाई की जाए। शराब की बिक्री को लेकर मंत्री ने कहा कि लोग तो शराब पीते ही हैं। इस जवाब के बाद महिला की मांग और प्रशासनिक समाधान को लेकर चर्चा शुरू हो गई।

    इंदौर में भाजपा के शहर अध्यक्ष सुमित मिश्रा भी एक अलग वजह से सुर्खियों में आ गए। उन्हें लोकतंत्र बचाओ अराजकता हटाओ कार्यक्रम में शामिल होने के लिए पहुंचना था लेकिन देरी होने के कारण उन्होंने रास्ते में एक बाइक सवार से लिफ्ट ले ली। जल्दबाजी में बाइक पर बैठते समय उनका संतुलन बिगड़ गया और वे गिरते-गिरते बच गए। हालांकि उन्होंने खुद को संभाल लिया और कार्यक्रम में पहुंच गए। इस घटना ने राजनीतिक गलियारों में हल्की-फुल्की चर्चा को जन्म दे दिया।

    इसी कार्यक्रम के दौरान भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक नारों की जंग भी देखने को मिली। कांग्रेस के वोट चोर गद्दी छोड़ और मोदी तो जाएगा जैसे नारों के जवाब में भाजपा ने लोकतंत्र बचाओ अराजकता हटाओ अभियान शुरू किया है। शाजापुर जिले के कालापीपल से भाजपा विधायक घनश्याम चंद्रवंशी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थन में कविता के जरिए विरोधियों पर निशाना साधा। उन्होंने अपने वीडियो में कहा कि विरोधियों के विरोध के बावजूद मोदी कहीं नहीं जाएंगे। वहीं इंदौर में केंद्रीय मंत्री मनसुख मंडाविया ने भी कार्यक्रम के दौरान मोदी के समर्थन में नारा लगवाने की कोशिश की। उन्होंने मोदी तो कहकर जनता से नारा पूरा करने की अपेक्षा की लेकिन जब कोई आवाज नहीं आई तो उन्होंने खुद ही मोदी तो नहीं हटेगा कहकर बात पूरी कर दी।

    राजनीतिक घटनाक्रम के बीच प्राधिकरण के एक बड़े नेता और उनके मातहत नेता के बीच चल रही खींचतान भी चर्चा में है। बताया जा रहा है कि प्राधिकरण में एक नेता के करीबी बाबू को महत्वपूर्ण पद पर बैठाया गया था और दोनों मिलकर फैसले ले रहे थे। इससे नाराज दूसरे नेता ने शिकायत की और मामला सरकार तक पहुंच गया। इसके बाद संबंधित बाबू को पद से हटा दिया गया लेकिन उनकी जगह नियुक्त अधिकारी भी उसी नेता का करीबी बताया जा रहा है। अब शिकायत करने वाले नेता दोबारा राजधानी के चक्कर लगा रहे हैं। इन घटनाओं ने प्रदेश की राजनीति और नौकरशाही के भीतर चल रही खींचतान को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है।

  • भोपाल पहुंचे केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, आज राज्यसभा के लिए भरेंगे पर्चा, CM मोहन यादव समेत भाजपा के दिग्गज नेता रहेंगे मौजूद

    भोपाल पहुंचे केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, आज राज्यसभा के लिए भरेंगे पर्चा, CM मोहन यादव समेत भाजपा के दिग्गज नेता रहेंगे मौजूद


    भोपाल । मध्य प्रदेश में राज्यसभा की खाली हुई सीट को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी शनिवार को भोपाल में राज्यसभा उपचुनाव के लिए अपना नामांकन दाखिल करेंगे। भारतीय जनता पार्टी ने उन्हें मध्य प्रदेश से अपना प्रत्याशी घोषित किया है। नामांकन के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और जनप्रतिनिधि मौजूद रहेंगे। पुरी शुक्रवार देर रात भोपाल पहुंच गए थे। उनके नामांकन को लेकर भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं में उत्साह देखा जा रहा है।

    भाजपा की केंद्रीय चुनाव समिति ने 28 अक्टूबर को हरदीप सिंह पुरी के नाम पर मुहर लगाई थी। इसके बाद से ही उनके नामांकन की तैयारियां शुरू हो गई थीं। शनिवार सुबह वे विधानसभा पहुंचकर निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना नामांकन पत्र दाखिल करेंगे। पार्टी की ओर से इस दौरान वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी के जरिए अपनी राजनीतिक ताकत और एकजुटता प्रदर्शित करने की भी तैयारी है। केंद्रीय मंत्री के नामांकन को राज्यसभा उपचुनाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    दरअसल मध्य प्रदेश से राज्यसभा सदस्य डॉ. एल. मुरुगन ने 13 अक्टूबर को अपनी सदस्यता से इस्तीफा दे दिया था। उनका कार्यकाल अप्रैल 2030 तक था। उनके इस्तीफे के बाद राज्यसभा की यह सीट खाली हो गई और अब इसी सीट पर उपचुनाव कराया जा रहा है। भाजपा ने इस चुनाव के लिए हरदीप सिंह पुरी को उम्मीदवार बनाया है। पुरी केंद्र सरकार में मंत्री हैं और उन्हें मध्य प्रदेश से राज्यसभा भेजने के फैसले को पार्टी की रणनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

    नामांकन की प्रक्रिया में भाजपा ने अपने स्तर पर तैयारियां पूरी कर ली हैं। प्रदेश सरकार में मंत्री कृष्णा गौर हरदीप सिंह पुरी के नामांकन में प्रस्तावक बनेंगी। उन्होंने शुक्रवार को भाजपा कार्यालय में प्रस्तावक के रूप में सहमति पत्र पर हस्ताक्षर किए। इससे नामांकन की औपचारिक तैयारियों को आगे बढ़ाया गया। शनिवार को विधानसभा में नामांकन दाखिल होने के साथ ही चुनावी प्रक्रिया का अगला चरण शुरू होगा।

    इस उपचुनाव में विधानसभा का संख्या बल भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। मध्य प्रदेश विधानसभा में कुल 230 सदस्य हैं। हालांकि कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा मतदान में हिस्सा नहीं ले सकेंगे। ऐसे में प्रभावी संख्या बल के आधार पर चुनावी गणित का आकलन किया जा रहा है। राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए आवश्यक मतों का कोटा निर्धारित नियमों के अनुसार तय होगा। विधायकों की वास्तविक संख्या और मतदान की स्थिति चुनाव के परिणाम को प्रभावित कर सकती है।

    बीना से विधायक निर्मला सप्रे की स्थिति भी इस चुनाव में चर्चा का विषय बनी हुई है। वे खुद को कांग्रेस में बताती हैं लेकिन भाजपा के कार्यक्रमों में भी उनकी मौजूदगी देखी गई है। दलबदल से जुड़े मामले के कारण उनकी स्थिति को लेकर राजनीतिक तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। ऐसे में दोनों दलों के लिए विधायकों के समर्थन का सही आकलन करना अहम होगा।

    नामांकन से पहले हरदीप सिंह पुरी ने शनिवार को भोपाल स्थित करुणा धाम आश्रम पहुंचकर पीठाधीश्वर गुरुदेव सुदेश शांडिल्य महाराज से मुलाकात की और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान भाजपा के प्रदेश महामंत्री राहुल कोठारी और विधायक भगवानदास सबनानी सहित पार्टी के पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। अब सभी की निगाहें नामांकन प्रक्रिया और आगे होने वाले राज्यसभा उपचुनाव पर टिकी हैं।

  • भाजपा की गुटबाजी पर पटवारी का हमला, अजय सिंह बोले- समस्याओं के बावजूद भाजपा को ही वोट क्यों?

    भाजपा की गुटबाजी पर पटवारी का हमला, अजय सिंह बोले- समस्याओं के बावजूद भाजपा को ही वोट क्यों?


    इंदौर ।  मध्य प्रदेश की सियासत में इन दिनों नेताओं के बयानों और आपसी खींचतान को लेकर चर्चाएं तेज हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भाजपा सरकार में मंत्रियों के बीच कथित खटपट को लेकर तंज कसा है। वहीं अपनी चुनावी हार को याद करते हुए उन्होंने ऐसा बयान दिया जिस पर राजनीतिक गलियारों में चर्चा होने लगी। दूसरी ओर पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने भाजपा की लगातार चुनावी जीत पर हैरानी जताते हुए कांग्रेस नेताओं को एकजुट होने की जरूरत बताई है।

    इंदौर में भाजपा की कथित गुटबाजी पर निशाना साधते हुए जीतू पटवारी ने किसी का नाम लिए बिना कहा कि सरकार में प्रभारी मंत्री जो मुख्यमंत्री हैं और नगरीय प्रशासन मंत्री के बीच लात-घूंसे चल रहे हैं लेकिन दिखाई नहीं दे रहे। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि दोनों के बीच गाली-गलौज भी हो रही है लेकिन सिर्फ सुनाई नहीं दे रही है। पटवारी ने मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि इंदौर के भाजपा विधायक उन्हें मंत्री मानने को ही तैयार नहीं हैं। पटवारी के मुताबिक आपसी अंतर्कलह में उलझी भाजपा प्रदेश का भला नहीं कर सकती क्योंकि अहंकार में डूबे नेता एक-दूसरे की टांग खींचने में लगे हैं। यह पटवारी का राजनीतिक आरोप और कटाक्ष था।

    हालांकि भाजपा पर हमला करते हुए पटवारी को अपनी चुनावी हार भी याद आ गई। वे इंदौर में संगीत के एक कार्यक्रम में पहुंचे थे। यहां बातचीत के दौरान उन्होंने अपने चुनाव प्रचार के पुराने अंदाज का जिक्र किया। पटवारी ने कहा कि साइकिल वाला भी कैसे हारता है यह उन्होंने देखा है। उन्होंने कहा कि जब कोई उन्हें याद दिलाता है कि वे साइकिल से आते थे और भाभी-भाभी कहकर लोगों से मिलते थे फिर भी चुनाव हार गए तो उन्हें अपनी हार याद आ जाती है। इस बात को कहते हुए उन्होंने फिल्मी गाने की पंक्ति भी सुनाई कि जिंदगी की यही रीत है हार के बाद ही जीत है। उनके इस बयान में चुनावी हार की टीस के साथ खुद पर किया गया हल्का व्यंग्य भी नजर आया।

    इसी बीच पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने कांग्रेस की चुनावी स्थिति और भाजपा की लगातार जीत को लेकर चिंता जाहिर की। सिंगरौली में एक पत्रकार ने उनसे सड़क बिजली बेरोजगारी और भ्रष्टाचार जैसी समस्याओं को लेकर सवाल किया था। इस पर अजय सिंह ने कहा कि प्रदेश में कई समस्याएं होने के बावजूद जब मतदान का समय आता है तो भाजपा के अलावा किसी दूसरी पार्टी को वोट क्यों नहीं मिलते यह समझ से परे है। उन्होंने इस स्थिति को कांग्रेस के लिए चिंता का विषय बताया।

    अजय सिंह इससे पहले भी पार्टी की स्थिति को लेकर चिंता जता चुके हैं। एक पत्रकार वार्ता में उन्होंने कहा था कि वर्ष 2028 में कांग्रेस को मध्य प्रदेश की सत्ता से बाहर रहते हुए 25 साल हो जाएंगे। अगर इस बार भी पार्टी सत्ता में नहीं पहुंची तो राजनीतिक रूप से उसकी स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है। उन्होंने कांग्रेस नेताओं से आपसी मतभेद भुलाकर एकजुट होने की अपील भी की।

    इस पूरे घटनाक्रम में एक ओर जीतू पटवारी भाजपा के भीतर कथित खींचतान को लेकर हमलावर नजर आए तो दूसरी ओर अजय सिंह ने कांग्रेस के सामने मौजूद राजनीतिक चुनौतियों की ओर ध्यान दिलाया। दोनों नेताओं के बयान प्रदेश में भाजपा और कांग्रेस के बीच जारी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के साथ कांग्रेस के संगठनात्मक हालात पर भी चर्चा को सामने लाते हैं।

    रिपोर्ट के अंदरूनी हिस्से में एक आईएएस अधिकारी की पोस्टिंग को लेकर भी चर्चा की गई है। खबर के मुताबिक अधिकारी बड़े महानगरीय जिले में कलेक्टर बनने की उम्मीद लगाए हुए थे लेकिन हालिया तबादला सूची में उन्हें एक छोटे जिले की जिम्मेदारी मिली। हालांकि अधिकारी का नाम और जिले का उल्लेख नहीं किया गया है।

  • इंदौर में भाजपा की पदयात्रा में साधु-संतों से लेकर किन्नर समाज तक शामिल, मांडविया ने कांग्रेस पर कसा तंज

    इंदौर में भाजपा की पदयात्रा में साधु-संतों से लेकर किन्नर समाज तक शामिल, मांडविया ने कांग्रेस पर कसा तंज


    इंदौर । इंदौर में शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी की लोकतंत्र बचाओ और अराजकता हटाओ पदयात्रा के दौरान राजनीतिक गतिविधियां देखने को मिलीं। सुभाष नगर चौराहे से शुरू हुई यह पदयात्रा पाटनीपुरा चौराहे तक निकाली जा रही है। इसमें डॉक्टरों और वकीलों से लेकर व्यापारियों तथा साधु-संतों सहित विभिन्न समाजों और संगठनों के पदाधिकारी शामिल हुए। यात्रा में किन्नर समाज के लोगों के साथ बुर्का पहने महिलाएं भी नजर आईं। भाजपा नेताओं ने इस आयोजन को लोकतंत्र और व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर जनभागीदारी का कार्यक्रम बताया।

    मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने पदयात्रा को राष्ट्रभक्तों की रैली बताया। उनके अनुसार इसमें अलग-अलग वर्गों के लोग शामिल होकर अपनी भागीदारी निभा रहे हैं। पदयात्रा के दौरान उस समय स्थिति चर्चा में आ गई जब समाजसेवी प्रहलाद पांडे को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। पांडे अपने साथ एक पोस्टर लेकर पहुंचे थे। इस पोस्टर पर 30 हजार का बल्ब और 33 हजार लीटर फिनाइल लिखा हुआ था। बताया जा रहा है कि मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने मंच से पुलिस को पांडे को वहां से हटाने के निर्देश दिए थे। इसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।

    प्रहलाद पांडे इससे पहले भी कैलाश विजयवर्गीय के घर के बाहर प्रदर्शन कर चुके हैं। उस समय भी पुलिस उन्हें हिरासत में लेकर गई थी। खबर के मुताबिक बाद में विजयवर्गीय ने उन्हें छुड़वाने के लिए पत्र लिखा था। इस बार पदयात्रा के दौरान उनके पोस्टर के साथ पहुंचने और पुलिस कार्रवाई को लेकर मामला चर्चा में रहा। पोस्टर पर लिखे संदेश का संबंध किस मुद्दे से था और इसके पीछे पांडे की क्या मांग थी इसकी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

    पदयात्रा में केंद्रीय मंत्री मांडविया भी शामिल हुए। उन्होंने कांग्रेस और उसके नेताओं पर निशाना साधते हुए राहुल गांधी का नाम लिए बिना रॉकेट लॉन्चिंग का उदाहरण दिया। मांडविया ने कहा कि जैसे रॉकेट को ऊपर भेजने के लिए दीया सलाई लगाई जाती है वैसे ही कांग्रेस भी अपने नेताओं को बार-बार लॉन्च करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने जनता से सवाल करते हुए कहा कि कई वर्षों से ऐसी कोशिशें की जा रही हैं लेकिन सफलता नहीं मिल रही। उनके इस बयान को कांग्रेस नेतृत्व पर राजनीतिक तंज के तौर पर देखा गया।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री भी पदयात्रा में शामिल होने पहुंचे और बाद में पाटनीपुरा चौराहे पर बनाए गए मंच पर पहुंचे। यात्रा में राहुल गांधी का बैनर ओढ़कर आया एक युवक भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहा। आयोजन में अलग-अलग समुदायों और संगठनों की मौजूदगी के कारण पदयात्रा को व्यापक रूप देने की कोशिश दिखाई दी।

    भाजपा की इस पदयात्रा में एक ओर पार्टी नेताओं के भाषण और कांग्रेस पर राजनीतिक हमले चर्चा में रहे तो दूसरी ओर समाजसेवी प्रहलाद पांडे को हिरासत में लिए जाने का मामला भी सामने आया। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के मुताबिक पुलिस ने उन्हें पोस्टर लेकर पहुंचने के बाद हिरासत में लिया। इस कार्रवाई को लेकर मंत्री के निर्देश की बात भी सामने आई है। हालांकि पुलिस की ओर से हिरासत के कारण और आगे की कार्रवाई को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।

  • खरगोन के नर्मदा घाट पर मिले सैकड़ों वोटर कार्ड, कांग्रेस का बड़ा आरोप, FIR नहीं हुई तो थाने के घेराव की चेतावनी

    खरगोन के नर्मदा घाट पर मिले सैकड़ों वोटर कार्ड, कांग्रेस का बड़ा आरोप, FIR नहीं हुई तो थाने के घेराव की चेतावनी


    खरगोन । मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के मंडलेश्वर में नर्मदा नदी के किनारे 343 मतदाता पहचान पत्र मिलने के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गईNarmada Voter ID Cards, Khargone News, Madhya Pradesh Politics, Congress Protest, Election Investigation है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक ये पहचान पत्र इंदौर जिले की राऊ विधानसभा क्षेत्र के मतदाताओं से जुड़े बताए जा रहे हैं। एक ही स्थान पर इतनी बड़ी संख्या में वोटर कार्ड मिलने से निर्वाचन व्यवस्था और दस्तावेजों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठने लगे हैं। मामले को लेकर कांग्रेस ने पुलिस से शिकायत कर जांच कराने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि ये पहचान पत्र नर्मदा घाट तक कैसे पहुंचे और इन्हें वहां किसने छोड़ा।

    जानकारी के अनुसार रविवार को मंडलेश्वर के नर्मदा घाट पर सफाई अभियान चलाया जा रहा था। इसी दौरान सफाई कार्य में जुटे स्वयंसेवकों की नजर पानी में तैरते और नदी किनारे पड़े मतदाता पहचान पत्रों पर पड़ी। जब बड़ी संख्या में कार्ड मिलने की जानकारी सामने आई तो मामले ने गंभीर रूप ले लिया। बताया जा रहा है कि इन पहचान पत्रों पर इंदौर के तिलक नगर आस्था पैलेस और आसपास के क्षेत्रों के पते दर्ज हैं। इसके बाद संबंधित अधिकारियों को सूचना दी गई और दस्तावेजों की जांच की प्रक्रिया शुरू की गई।

    घटना की जानकारी मिलने पर राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने वहां मिले मतदाता पहचान पत्रों को अपने कब्जे में लिया और पंचनामा तैयार किया। अब इन दस्तावेजों की प्रामाणिकता उनकी संख्या और उनके नर्मदा घाट तक पहुंचने के कारणों की जांच की जा रही है। जांच में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि कार्ड वास्तविक हैं या नहीं और यदि वे वास्तविक हैं तो एक साथ इतनी बड़ी संख्या में एक स्थान पर कैसे पहुंचे। फिलहाल इस मामले में किसी व्यक्ति की जिम्मेदारी तय होने की जानकारी सामने नहीं आई है।

    वोटर कार्ड मिलने के बाद जिला कांग्रेस अध्यक्ष रवि नाईक पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ मंडलेश्वर थाने पहुंचे। कांग्रेस नेताओं ने इस मामले को गंभीर बताते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। पार्टी ने सवाल उठाया कि इंदौर के मतदाताओं से जुड़े इतने सारे पहचान पत्र खरगोन जिले के नर्मदा घाट पर कैसे मिले। कांग्रेस का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि दस्तावेजों के स्रोत और उनके यहां पहुंचने की पूरी जानकारी सामने आ सके।

    कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांग पर कार्रवाई नहीं की गई तो पार्टी कार्यकर्ता थाने का घेराव करेंगे। इसके साथ ही नदी में और भी मतदाता पहचान पत्र होने की आशंका जताते हुए व्यापक तलाशी कराने की मांग की गई है। पार्टी ने इस घटना को कथित वोट चोरी से जोड़कर सवाल उठाए हैं। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

    वहीं पुलिस के अनुसार कांग्रेस की शिकायत प्राप्त हुई है और थाना प्रभारी को मामले की जांच के निर्देश दिए गए हैं। फिलहाल पूरे घटनाक्रम को लेकर कई सवाल बने हुए हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि मतदाता पहचान पत्र नदी किनारे कैसे पहुंचे और इन्हें वहां छोड़ने के पीछे क्या कारण था। जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। तब तक इस घटना को लेकर लगाए जा रहे आरोपों को जांच के आधार पर ही परखा जाना जरूरी है।

  • जब सीएम को याद आया पूर्व जन्म, जीतू पटवारी ने बताया भ्रष्टाचार का रेट, नरोत्तम मिश्रा ने कार्यकर्ता को पहनाए जूते

    जब सीएम को याद आया पूर्व जन्म, जीतू पटवारी ने बताया भ्रष्टाचार का रेट, नरोत्तम मिश्रा ने कार्यकर्ता को पहनाए जूते


    कटनी । मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों नेताओं के अलग अलग अंदाज चर्चा का विषय बने हुए हैं। कहीं कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी सरकार पर भ्रष्टाचार को लेकर निशाना साधते नजर आए तो कहीं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पूर्व जन्म का जिक्र कर लोगों का ध्यान खींचा। पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने अपने कार्यकर्ता को खुद जूते पहनाए जबकि केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान आदिवासी ग्रामीणों के साथ थिरकते दिखाई दिए। इन घटनाओं ने प्रदेश की राजनीति में जनसंपर्क और नेताओं की सार्वजनिक छवि को लेकर नई चर्चा छेड़ दी है।

    जीतू पटवारी ने मंच से दिखाया भ्रष्टाचार का कथित रेट कार्ड

    कटनी जिले के बरही में पहुंचे प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने एक कार्यक्रम के दौरान सरकार पर भ्रष्टाचार को लेकर हमला बोला। हाल ही में एक अधिकारी का वीडियो सामने आया था जिसमें नगरीय निकायों में भ्रष्टाचार को लेकर बातें कही गई थीं। इसी मुद्दे को उठाते हुए पटवारी मंच पर डस्टबिन फिनाइल की कैन और बल्ब लेकर पहुंचे। उन्होंने इन वस्तुओं की कीमतों का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि एक बाल्टी की कीमत एक लाख रुपये फिनाइल की बोतल की कीमत 36 हजार रुपये और बल्ब की कीमत 11 हजार रुपये बताई जा रही है। इन उदाहरणों के जरिए उन्होंने सरकारी व्यवस्था पर सवाल उठाए। हालांकि इन कीमतों और आरोपों की पुष्टि संबंधित दस्तावेजों के आधार पर ही की जा सकती है।

    पटवारी ने उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा के कार्यालय से जुड़े एक अधिकारी पर रिश्वत लेने के मामले को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने तीखी टिप्पणी करते हुए सरकार को घेरने की कोशिश की। इसी दौरान बरही में उनकी बाइक रैली भी चर्चा में रही। पटवारी खुद बुलेट चलाते नजर आए लेकिन उनके सिर पर हेलमेट नहीं था। रैली में दूसरे कार्यकर्ताओं के भी बिना हेलमेट होने की बात सामने आई। इस घटना को लेकर यातायात नियमों के पालन पर सवाल उठे।

    दिग्विजय सिंह की यात्रा में राम भजन के साथ सियासी नारे

    पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह दशहरे पर उज्जैन से राम नाम के साथ सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा लेकर निकले थे। यह यात्रा अयोध्या तक जाने वाली है। शाजापुर पहुंचने पर दिग्विजय सिंह एक राम भजन पर थिरकते नजर आए। लेकिन यात्रा के दौरान राजनीतिक नारे भी सुनाई दिए। रिपोर्ट के मुताबिक वहां भाजपा के खिलाफ चंदा चोरी और वोट चोरी से जुड़े नारे लगाए गए। दिग्विजय सिंह ने एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली इंडिया गठबंधन की रैली के लिए लोगों को आमंत्रित भी किया। इससे यात्रा के गैरराजनीतिक होने के दावे और उसके दौरान दिखे राजनीतिक संदेशों को लेकर चर्चा शुरू हो गई।

    नरोत्तम मिश्रा ने कार्यकर्ता को पहनाए जूते

    दतिया के पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा अपने एक कार्यकर्ता को जूते पहनाने के कारण चर्चा में आए। बताया गया कि 2023 के विधानसभा चुनाव में कार्यकर्ता के बूथ पर भाजपा को हार मिली थी। इसके बाद उसने प्रण लिया था कि जब तक वह अपने बूथ पर पार्टी को जीत नहीं दिलाएगा तब तक जूते चप्पल नहीं पहनेगा। हालिया उपचुनाव में उसके बूथ पर भाजपा को अधिक वोट मिलने के बाद जूते पहनने का कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान नरोत्तम मिश्रा ने खुद कार्यकर्ता को जूते पहनाए और उसके लेस बांधे। यह दृश्य पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ नेताओं के जुड़ाव के उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।

    सीएम मोहन यादव और शिवराज सिंह चौहान के अलग अंदाज

    बड़वानी जिले के सेंधवा दौरे के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मलखंब का प्रदर्शन देखा और प्रभावित होकर एक बच्चे को अपने कंधे पर बैठा लिया। एक कार्यक्रम में बारेली बोली का जिक्र होने पर उन्होंने इसे सीखने की बात कही और अपने पूर्व जन्म में बारेला होने का उल्लेख किया। उनके इस बयान की चर्चा जनसंपर्क के संदर्भ में हुई।

    वहीं केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान अपने संसदीय क्षेत्र के नीलगढ़ गांव पहुंचे जहां विस्थापन से जुड़े मुद्दों के बीच वे आदिवासी ग्रामीणों के साथ बैठे और भोजन किया। वे ग्रामीणों के साथ नाचते थिरकते भी दिखाई दिए। उन्होंने वनों और वन्य प्राणियों की रक्षा के लिए गांव छोड़ने के फैसले को त्याग और प्रकृति के प्रति प्रेम का उदाहरण बताया।

    प्रदेश की इन घटनाओं से साफ है कि राजनीतिक गतिविधियों में भाषणों के साथ नेताओं के व्यवहार और सार्वजनिक कार्यक्रमों की तस्वीरें भी चर्चा का हिस्सा बन रही हैं। कहीं आरोपों के जरिए सरकार को घेरा जा रहा है तो कहीं भावनात्मक और सांस्कृतिक जुड़ाव के जरिए जनता तक पहुंचने की कोशिश दिखाई दे रही है।

  • पटना में खरगे के बयान से MP की राजनीति गरमाई, शिवराज से मोहन यादव तक ने उठाए सवाल

    पटना में खरगे के बयान से MP की राजनीति गरमाई, शिवराज से मोहन यादव तक ने उठाए सवाल


    भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बयान को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिवंगत पिता को लेकर पटना में की गई टिप्पणी के विरोध में भारतीय जनता पार्टी के नेता और कार्यकर्ता सोमवार को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय का घेराव करेंगे। भाजपा कार्यकर्ता रेडक्रॉस हॉस्पिटल के सामने स्थित शिवाजी नगर चौराहे पर एकत्रित होंगे और वहां से पैदल मार्च करते हुए कांग्रेस कार्यालय पहुंचेंगे। इस प्रदर्शन के जरिए भाजपा कांग्रेस नेतृत्व से बयान पर जवाब मांगने की तैयारी में है।
    विवाद की शुरुआत रविवार को बिहार की राजधानी पटना में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान हुई। बिहार के पहले मुख्यमंत्री डॉ. श्रीकृष्ण सिंह की 139वीं जयंती पर बापू सभागार में कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इसी दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे भाषण दे रहे थे और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा उनकी नीतियों पर टिप्पणी कर रहे थे। तभी सभा में मौजूद एक व्यक्ति ने कहा कि मोदी नहीं जाने वाले हैं। इसके जवाब में खरगे ने कहा कि मोदी का बाप भी जाएगा। इस टिप्पणी के बाद कार्यक्रम में हंगामा हो गया और मामला राजनीतिक विवाद में बदल गया।

    मध्यप्रदेश में भाजपा नेताओं ने इस बयान को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सवाल उठाया कि क्या खरगे ने सोनिया गांधी या राहुल गांधी के इशारे पर यह बयान दिया है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा नहीं है तो क्या कांग्रेस अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष से इस्तीफा मांगेगी। शिवराज ने टिप्पणी को भारतीय संस्कृति और राजनीतिक मर्यादा के खिलाफ बताते हुए कांग्रेस नेतृत्व से जवाब देने की मांग की।

    भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने भी खरगे के बयान की निंदा की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के दिवंगत पिता को लेकर इस तरह की टिप्पणी करना राजनीति की मर्यादा के अनुरूप नहीं है। खंडेलवाल ने सवाल किया कि खरगे इस तरह के बयान खुद देते हैं या इसके पीछे गांधी परिवार का कोई निर्देश होता है। उनके मुताबिक वरिष्ठ नेताओं को सार्वजनिक मंचों पर अपनी भाषा और व्यवहार का विशेष ध्यान रखना चाहिए।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए राजनीति में मर्यादा बनाए रखने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों के बीच विचारों का मतभेद स्वाभाविक है लेकिन विरोध करते समय भाषा और व्यवहार में गरिमा बनी रहनी चाहिए। लोकतंत्र में असहमति व्यक्त करने का अधिकार सभी को है लेकिन व्यक्तिगत टिप्पणियों से बचना भी जरूरी है।

    भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा और मंत्री विश्वास सारंग ने भी खरगे की टिप्पणी को लेकर कांग्रेस पर सवाल उठाए। रामेश्वर शर्मा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भी प्रधानमंत्री के खिलाफ अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं। वहीं विश्वास सारंग ने कहा कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता के दौरान ऐसी शब्दावली का इस्तेमाल उचित नहीं है। भाजपा नेताओं ने कांग्रेस से इस मामले में स्पष्टीकरण देने की मांग की है।

    पटना के कार्यक्रम में टिप्पणी के बाद हंगामे की खबर भी सामने आई। रिपोर्ट के मुताबिक जिस व्यक्ति ने बीच में अपनी बात कही थी उसके साथ वहां मौजूद कुछ लोगों ने मारपीट की। बाद में उस व्यक्ति ने दावा किया कि उसकी पूरी बात नहीं सुनी गई थी और वह कह रहा था कि विद्रोह के बिना मोदी नहीं जाएंगे। इस घटनाक्रम ने विवाद को और बढ़ा दिया है।

    अब भोपाल में होने वाला भाजपा का प्रदर्शन इस राजनीतिक विवाद का अगला अहम घटनाक्रम माना जा रहा है। कांग्रेस कार्यालय के घेराव के दौरान भाजपा नेता खरगे के बयान को लेकर विरोध दर्ज कराएंगे। दूसरी ओर इस मामले पर राजनीतिक बयानबाजी जारी रहने की संभावना है। फिलहाल विवाद का केंद्र बयान की भाषा और राजनीतिक नेताओं से सार्वजनिक जीवन में मर्यादा बनाए रखने की अपेक्षा बना हुआ है।

  • इंदौर में कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन, जीतू पटवारी के निर्देश पर जुटेंगे नेता और कार्यकर्ता, केंद्र-प्रदेश सरकार के खिलाफ महारैली

    इंदौर में कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन, जीतू पटवारी के निर्देश पर जुटेंगे नेता और कार्यकर्ता, केंद्र-प्रदेश सरकार के खिलाफ महारैली


    इंदौर । मध्यप्रदेश में भाजपा की केंद्र और प्रदेश सरकार के खिलाफ कांग्रेस ने विरोध तेज करने की तैयारी कर ली है। इंदौर में 27 अक्टूबर को कांग्रेस की ओर से जनसंघर्ष महारैली निकाली जाएगी। इस प्रदर्शन के जरिए पार्टी सरकार की नीतियों आम जनता से जुड़े मुद्दों और निर्वाचन प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराएगी। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि महारैली के माध्यम से जनता की समस्याओं को उठाने के साथ मतदाता सूची में हुए बदलावों और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर भी सरकार का ध्यान आकर्षित किया जाएगा।

    इंदौर शहर कांग्रेस और जिला कांग्रेस कमेटी की ओर से आयोजित इस महारैली की शुरुआत सुबह 11 बजे गांधी भवन स्थित कांग्रेस कार्यालय से होगी। यहां से कार्यकर्ता और पार्टी नेता रैली के रूप में रवाना होंगे। प्रस्तावित मार्ग में पढ़ीनाथ चौराहा हरसिद्धि मंदिर और मोती तबेला शामिल हैं। रैली कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर समाप्त होगी। वहां कांग्रेस नेता राष्ट्रपति और राज्यपाल के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपेंगे। ज्ञापन में केंद्र और प्रदेश सरकार की नीतियों के विरोध के साथ निर्वाचन प्रक्रिया और मतदाता सूची से संबंधित मुद्दे उठाए जाएंगे।

    कांग्रेस इस प्रदर्शन के जरिए मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग भी उठाने वाली है। पार्टी उनके कार्यकाल में लिए गए निर्णयों और मतदाता सूची में किए गए बदलावों की स्वतंत्र समीक्षा कराने की मांग करेगी। कांग्रेस का आरोप है कि निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना जरूरी है। पार्टी इन मुद्दों को लेकर अपना विरोध दर्ज कराने के लिए महारैली को महत्वपूर्ण कार्यक्रम मान रही है। हालांकि निर्वाचन प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर संबंधित संस्थाओं का पक्ष और आधिकारिक तथ्य भी महत्वपूर्ण होंगे।

    कांग्रेस नेता देवेंद्र सिंह यादव के मुताबिक मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे जिला कांग्रेस अध्यक्ष विपिन वानखेड़े और वरिष्ठ नेताओं के निर्देश पर इस कार्यक्रम की तैयारी की जा रही है। पार्टी का कहना है कि केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों से जुड़ी समस्याओं को जनता के बीच उठाने और प्रशासन तक पहुंचाने के उद्देश्य से यह आयोजन किया जा रहा है।

    महारैली में अधिक से अधिक कार्यकर्ताओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए कांग्रेस ने संगठन के विभिन्न स्तरों पर संपर्क शुरू किया है। सभी विधानसभा क्षेत्रों के प्रत्याशियों और प्रभारियों के साथ वरिष्ठ नेताओं को भी शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है। मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी इंदौर शहर और जिला कांग्रेस के वर्तमान तथा पूर्व पदाधिकारियों से भी कार्यक्रम में पहुंचने की अपील की गई है। इसके साथ ही ब्लॉक और मंडल अध्यक्षों को कार्यकर्ताओं को जुटाने की जिम्मेदारी दी जा रही है।

    युवा कांग्रेस सेवादल एनएसयूआई महिला कांग्रेस और अन्य मोर्चा संगठनों के पदाधिकारियों को भी महारैली में शामिल होने का आह्वान किया गया है। वर्तमान और पूर्व पार्षदों पार्षद प्रत्याशियों तथा पंचायतों के पंच सरपंच और अन्य पदाधिकारियों से भी समर्थकों के साथ पहुंचने की अपील की गई है। पार्टी की कोशिश है कि रैली में संगठन के सभी वर्गों की भागीदारी हो और विरोध प्रदर्शन को व्यापक रूप दिया जा सके।

    अब सभी की नजर 27 अक्टूबर को होने वाली इस महारैली पर रहेगी। कांग्रेस इसे केंद्र और प्रदेश सरकार के खिलाफ जनहित के मुद्दों को उठाने का माध्यम बता रही है। रैली के बाद सौंपे जाने वाले ज्ञापन में उठाई गई मांगों और प्रशासन की प्रतिक्रिया से आगे की राजनीतिक गतिविधियों की दिशा तय हो सकती है।