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  • माइक न मिलने पर जनपद अध्यक्ष का छलका दर्द, सिंधिया के कार्यक्रम में सियासी तकरार ने पकड़ा जोर

    माइक न मिलने पर जनपद अध्यक्ष का छलका दर्द, सिंधिया के कार्यक्रम में सियासी तकरार ने पकड़ा जोर


    शिवपुरी  शिवपुरी के बदरवास में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के कार्यक्रम के दौरान माइक को लेकर नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। सोमवार शाम बिजरौनी बायपास और दौलतपुर से खाइखेड़ा मार्ग निर्माण के भूमि पूजन कार्यक्रम में बदरवास जनपद अध्यक्ष मीरा बाई परिहार को मंच से बोलने का अवसर नहीं मिला। कार्यक्रम के बाद जनपद अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि वह अपनी बात रखने वाली थीं लेकिन उनका माइक हटा दिया गया। इसके बाद स्थानीय राजनीति में इस मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

    कार्यक्रम के दौरान जनपद अध्यक्ष मीरा बाई परिहार केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के सामने क्षेत्र से जुड़ी अपनी बात रखना चाहती थीं। उनका कहना है कि उन्होंने कोलारस विधायक महेंद्र यादव से भी उन्हें बोलने का अवसर देने की बात कही थी। जनपद अध्यक्ष के मुताबिक विधायक ने उन्हें अपनी बात वहीं से कहने के लिए कहा था लेकिन वह माइक के जरिए मंच से अपनी बात रखना चाहती थीं। उनका आरोप है कि उन्हें ऐसा करने का मौका नहीं दिया गया।

    कार्यक्रम समाप्त होने के बाद मीरा बाई परिहार ने विधायक महेंद्र यादव पर नाराजगी जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले करीब एक साल से जनपद क्षेत्र के विकास कार्यों में अड़चनें आ रही हैं। जनपद अध्यक्ष ने दावा किया कि विकास कार्यों से जुड़े मामलों को लेकर वह चार बार दिल्ली तक जा चुकी हैं लेकिन अब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है।

    मीरा बाई ने कहा कि जनपद अध्यक्ष के तौर पर जनता के लिए विकास कार्य कराना उनकी जिम्मेदारी है। लेकिन यदि विकास कार्यों के लिए जरूरी प्रक्रिया और फंड से जुड़े काम ही आगे नहीं बढ़ेंगे तो सरपंचों की मांगों को पूरा करना मुश्किल होगा। उन्होंने अधिकारियों और बिचौलियों पर भी काम में बाधा डालने के आरोप लगाए। उनका कहना है कि कई मामलों में ऑनलाइन एंट्री तक नहीं होने दी जा रही है। उन्होंने मीडिया के माध्यम से विकास फंड जल्द जारी करने की मांग की और संकेत दिया कि सुनवाई नहीं होने पर वह इस मुद्दे को बड़े स्तर पर उठा सकती हैं।

    वहीं कोलारस विधायक महेंद्र यादव ने पूरे मामले पर अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि मीरा बाई परिहार ने उनसे केंद्रीय मंत्री से कुछ कहने की इच्छा जताई थी। विधायक के मुताबिक उन्होंने जनपद अध्यक्ष से अपनी बात कागज पर लिखकर देने के लिए कहा था ताकि उनकी बात केंद्रीय मंत्री तक स्पष्ट रूप से पहुंचाई जा सके।

    विधायक ने कहा कि यदि जनपद अध्यक्ष ने माइक के जरिए केंद्रीय मंत्री और जनता के सामने अपनी बात रखने की इच्छा जताई होती तो उन्हें बोलने का अवसर जरूर दिया जाता। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री कोलारस रेलवे स्टेशन पर उज्जैनी एक्सप्रेस के नियमित ठहराव को हरी झंडी दिखाने वाले थे। इसी कारण मंच से बोलने का समय सीमित था और मंडल अध्यक्ष विधायक तथा सांसद को ही वक्तव्य का अवसर दिया गया।

    महेंद्र यादव ने मीरा बाई परिहार को पार्टी की वरिष्ठ नेता बताते हुए कहा कि केंद्रीय मंत्री अभी शिवपुरी में ही हैं और जनपद अध्यक्ष उनसे मुलाकात कर अपनी बात सीधे रख सकती हैं। विधायक ने यह भी कहा कि वह स्वयं मीरा बाई से इस मामले में चर्चा करेंगे।

    इस कार्यक्रम में क्षेत्र को रेल सुविधा की सौगात भी मिली। ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रयासों से कोलारस रेलवे स्टेशन पर उज्जैनी एक्सप्रेस के नियमित ठहराव को मंजूरी मिली है। इसके अलावा अशोकनगर रेलवे स्टेशन पर सोगरिया दानापुर एक्सप्रेस के ठहराव को भी स्वीकृति दी गई है। विकास कार्यों और रेल सुविधाओं के बीच मंच पर बोलने को लेकर उठा यह विवाद अब स्थानीय सियासत में चर्चा का विषय बन गया है।

  • विजय शाह मामले में राजभवन पहुंची कांग्रेस, राज्यपाल से मंत्री पर केस चलाने की मंजूरी देने की मांग

    विजय शाह मामले में राजभवन पहुंची कांग्रेस, राज्यपाल से मंत्री पर केस चलाने की मंजूरी देने की मांग

    भोपाल। जनजातीय कार्य विभाग मंत्री विजय शाह के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी न देने के सरकार के फैसले को लेकर कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार को नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में कांग्रेस विधायकों ने राजभवन पहुंचकर राज्यपाल मंगुभाई पटेल को ज्ञापन सौंपा। कांग्रेस ने कैबिनेट के फैसले पर पुनर्विचार कर मंत्री के खिलाफ केस चलाने की मंजूरी देने की मांग की। राज्यपाल ने मामले पर पुनर्विचार करने और सरकार से चर्चा के बाद उचित कदम उठाने का आश्वासन दिया है।

    मंत्री के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने पर कांग्रेस का विरोध
    कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित बयान को लेकर विजय शाह पहले से ही राजनीतिक विवादों में घिरे हैं। इसी मामले में राज्य कैबिनेट द्वारा उनके खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति नहीं देने के फैसले का कांग्रेस ने विरोध किया है। उमंग सिंघार के साथ विधायक आरिफ मसूद और सुरेश राजे भी राजभवन पहुंचे।

    राज्यपाल से मुलाकात के बाद सिंघार ने कहा कि सरकार अपनी बदनामी से बचने के लिए राज्यपाल को बीच में ला रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मुख्यमंत्री और सरकार के पास मंत्री को हटाने और केस चलाने की मंजूरी देने का अधिकार है, तो कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

    ‘देश की बेटी के अपमान पर सरकार चुप’
    उमंग सिंघार ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ और ‘लाड़ली बहना’ जैसे अभियानों की बात करने वाली सरकार सेना की महिला अधिकारी के अपमान के मामले में चुप है। उन्होंने उच्चतम न्यायालय के आदेशों का हवाला देते हुए सरकार की नीयत पर भी सवाल उठाए।

    सिंघार के मुताबिक, राज्यपाल ने कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल को भरोसा दिलाया है कि वे मामले पर पुनर्विचार करेंगे और सरकार से चर्चा कर उचित कदम उठाएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने मंत्री पर कार्रवाई करने के बजाय जिम्मेदारी राज्यपाल के पाले में डाल दी है।

    केके मिश्रा ने भी सरकार पर साधा निशाना
    पीसीसी चीफ जीतू पटवारी के मीडिया सलाहकार केके मिश्रा ने भी मामले में सरकार के फैसले पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि गैर-जमानती धाराओं में दर्ज संज्ञेय अपराध में सरकार का यह फैसला उचित नहीं है। उनका कहना था कि यह मामला देश की संप्रभुता और भारतीय सेना के सम्मान से जुड़ा है।

    मिश्रा ने 2015 के व्यापमं मामले का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय तत्कालीन राज्यपाल के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज हुई थी। उन्होंने कहा कि राजभवन को संविधान और न्यायपालिका के सामने चुनौती खड़ा करने वाला संस्थान नहीं बनना चाहिए।

    यूसीसी को लेकर भी सरकार पर हमला
    राज्यपाल से मुलाकात के बाद उमंग सिंघार ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने इसे ‘काला कानून’ बताते हुए कहा कि कांग्रेस की सरकार बनने पर इसे खत्म किया जाएगा। सिंघार ने आरोप लगाया कि बहुमत के आधार पर विधानसभा में यह कानून पारित कराया गया है।

    विधायक आरिफ मसूद ने भी यूसीसी पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि इसके लागू होने से मुस्लिम समुदाय की धार्मिक स्वतंत्रता प्रभावित होगी और इसे संविधान के अनुच्छेद 29 से जोड़ते हुए सरकार की मंशा पर सवाल उठाए।

  • कर्नल सोफिया कुरैशी विवाद में सियासत तेज, पटवारी ने राष्ट्रपति को लिखा पत्र; CM समेत पूरे मंत्रिमंडल की बर्खास्तगी की मांग

    कर्नल सोफिया कुरैशी विवाद में सियासत तेज, पटवारी ने राष्ट्रपति को लिखा पत्र; CM समेत पूरे मंत्रिमंडल की बर्खास्तगी की मांग


    मध्य प्रदेशमध्य प्रदेश में मंत्री विजय शाह से जुड़ा कर्नल सोफिया कुरैशी विवाद एक बार फिर राजनीतिक रूप से गरमा गया है। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस मामले को लेकर राष्ट्रपति को पत्र लिखकर विजय शाह को मंत्री पद से बर्खास्त करने की मांग की है। पटवारी ने अपने पत्र में मध्य प्रदेश सरकार के उस फैसले पर भी सवाल उठाए हैं जिसमें सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित विशेष जांच दल द्वारा मांगी गई अभियोजन की मंजूरी को राज्य सरकार ने कथित तौर पर स्वीकार नहीं किया। कांग्रेस ने इसे न्यायिक प्रक्रिया और संवैधानिक जवाबदेही से जुड़ा गंभीर विषय बताया है।

    जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि मंत्री विजय शाह को राजनीतिक संरक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी केवल एक व्यक्ति का अपमान नहीं बल्कि सेना की गरिमा से जुड़ा मामला है। पटवारी ने कहा कि सेना का सम्मान किसी राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं बल्कि पूरे देश के नागरिकों का राष्ट्रीय स्वाभिमान है। इसी आधार पर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर भी सवाल उठाते हुए उनसे इस मामले में स्पष्ट रुख सामने रखने की मांग की।

    पटवारी ने राष्ट्रपति को लिखे पत्र में मुख्यमंत्री मोहन यादव समेत पूरे मंत्रिमंडल की बर्खास्तगी की मांग भी की है। उनका आरोप है कि यदि सरकार किसी मंत्री के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया में अभियोजन की मंजूरी रोकती है तो इससे यह सवाल खड़ा होता है कि क्या सत्ता में बैठे लोगों को कानून से अलग कोई संरक्षण हासिल है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने इस पूरे घटनाक्रम को मध्य प्रदेश के राजनीतिक इतिहास का शर्मनाक अध्याय बताते हुए संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और न्यायिक प्रक्रिया की गरिमा बनाए रखने की अपील की है।

    इस विवाद की शुरुआत 11 मई 2025 को इंदौर के महू के रायकुंडा गांव में हुए हलमा कार्यक्रम के दौरान हुई थी। यहां जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह ने ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में भारतीय सेना की कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर विवादित टिप्पणी की थी। उनके बयान को लेकर व्यापक राजनीतिक और सामाजिक विरोध हुआ था। मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने विशेष जांच दल यानी SIT के जरिए जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ाई। जांच के बाद मंत्री के खिलाफ अभियोजन की अनुमति को लेकर राज्य सरकार के सामने मामला पहुंचा।

    अब राज्य सरकार की ओर से अभियोजन की मंजूरी नहीं दिए जाने के आरोप ने विवाद को फिर हवा दे दी है। कांग्रेस का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित SIT की कार्रवाई के बावजूद सरकार का रुख कई सवाल खड़े करता है। वहीं मामले में अगली सुनवाई 31 अगस्त को होनी है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट की ओर से अभियोजन की मंजूरी में देरी को लेकर सख्त रुख अपनाए जाने की बात भी सामने आई है।

    मामले में अब सरकार के सामने कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तर पर चुनौती है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक यदि अभियोजन की मंजूरी दी जाती है तो सरकार को इसकी जानकारी सुप्रीम कोर्ट के समक्ष देनी होगी और इसके बाद नियमानुसार आगे की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। वहीं अभियोजन की मंजूरी नहीं मिलने की स्थिति में भी मामला पूरी तरह खत्म नहीं होता। मंत्री पद से हटने के बाद विजय शाह के खिलाफ कार्रवाई के लिए पूर्व सरकारी अनुमति की आवश्यकता नहीं रहने की स्थिति बन सकती है।

    ऐसे में 31 अगस्त की सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से पहले जीतू पटवारी की राष्ट्रपति को चिट्ठी ने इस मामले को एक बार फिर प्रदेश की राजनीति के केंद्र में ला दिया है। कांग्रेस जहां इसे सेना के सम्मान और संवैधानिक जवाबदेही से जोड़ रही है वहीं अब सबकी नजर राज्य सरकार के अगले कदम और सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई पर टिकी है।

  • विजय शाह की मुश्किलें बढ़ेंगी या मिलेगी राहत? आज कैबिनेट में अभियोजन मंजूरी पर फैसला, 31 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई

    विजय शाह की मुश्किलें बढ़ेंगी या मिलेगी राहत? आज कैबिनेट में अभियोजन मंजूरी पर फैसला, 31 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजनीति में मंत्री विजय शाह से जुड़े विवादित बयान के मामले में मंगलवार का दिन बेहद अहम माना जा रहा है। कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर दिए गए आपत्तिजनक बयान के मामले में विजय शाह के खिलाफ अभियोजन चलाने की मंजूरी पर आज सरकार कैबिनेट बैठक में फैसला कर सकती है। अभियोजन स्वीकृति का प्रस्ताव कैबिनेट के सामने रखा जाएगा। यदि सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है तो इसे राज्यपाल के पास भेजा जाएगा। राज्यपाल की स्वीकृति मिलने के बाद गृह विभाग की ओर से सुप्रीम कोर्ट में इस संबंध में शपथपत्र पेश किया जा सकता है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 31 अगस्त को निर्धारित है और उससे पहले सरकार के फैसले पर सभी की नजरें टिकी हैं।

    विजय शाह के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति का मामला लंबे समय से लंबित है। मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल यानी एसआईटी ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 196(1)(a) के तहत अभियोजन चलाने की अनुमति मांगी है। सरकारी सेवक के खिलाफ अभियोजन की अनुमति से जुड़े प्रावधानों के तहत सरकार की मंजूरी जरूरी मानी जा रही है। इसी वजह से एसआईटी की मांग के बाद भी कार्रवाई आगे बढ़ाने के लिए सरकार के निर्णय का इंतजार किया जा रहा है।

    इस मामले में सुप्रीम कोर्ट पहले भी राज्य सरकार को समय सीमा में निर्णय लेने का निर्देश दे चुका है। 19 जनवरी 2026 को हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने सरकार को मामले में फैसला लेने के लिए दो सप्ताह का समय दिया था। हालांकि तय अवधि में निर्णय नहीं हो सका और अभियोजन स्वीकृति का मामला लंबित रहा। अब सरकार कैबिनेट के जरिए इस पर निर्णय लेने की तैयारी में है। ऐसे में आज होने वाली बैठक का फैसला राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    यदि कैबिनेट अभियोजन स्वीकृति को मंजूरी दे देती है तो प्रस्ताव राज्यपाल के पास जाएगा। राज्यपाल की मंजूरी के बाद गृह विभाग सुप्रीम कोर्ट में सरकार की ओर से शपथपत्र दाखिल करेगा। इसके बाद मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया तेज हो सकती है। हालांकि यदि सरकार अभियोजन की अनुमति नहीं देती है तो इसका अर्थ यह नहीं होगा कि पूरा मामला खत्म हो जाएगा। ऐसी स्थिति में कानूनी प्रक्रिया लंबित रह सकती है और आगे परिस्थितियों के अनुसार कार्रवाई का रास्ता खुला रहेगा।

    मामले की जांच कर रही एसआईटी ने BNS की धारा 196(1)(a) के तहत कार्रवाई की सिफारिश की है। इस प्रावधान के तहत विभिन्न नस्लीय धार्मिक क्षेत्रीय और जातीय समूहों के बीच वैमनस्य या नफरत बढ़ाने वाले कृत्यों से जुड़े मामलों में दंड का प्रावधान है। खबर के अनुसार इस धारा में तीन साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान बताया गया है।

    पूरा विवाद 11 मई 2025 को महू के रायकुंडा गांव में आयोजित हलमा कार्यक्रम के दौरान दिए गए विजय शाह के बयान से शुरू हुआ था। उन्होंने भारतीय सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। बयान सामने आने के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर तीखी प्रतिक्रिया हुई थी। विवाद बढ़ने के बाद विजय शाह ने कई बार माफी भी मांगी थी लेकिन मामला कानूनी प्रक्रिया में आगे बढ़ता रहा।

    अब करीब एक साल से लंबित अभियोजन स्वीकृति पर सरकार के फैसले का इंतजार खत्म होने की उम्मीद है। 31 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई से पहले कैबिनेट का निर्णय इस मामले की आगे की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकता है। यही वजह है कि आज होने वाली कैबिनेट बैठक पर राजनीतिक गलियारों के साथ कानूनी जानकारों की भी नजर बनी हुई है।

  • भगवा रोबोट का VIP स्वागत और मंत्री की सुरीली तान, CM मोहन यादव बोले- मोदी ने देश को उसकी ताकत का एहसास कराया

    भगवा रोबोट का VIP स्वागत और मंत्री की सुरीली तान, CM मोहन यादव बोले- मोदी ने देश को उसकी ताकत का एहसास कराया

    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजनीति में मंगलवार को ऐसे कई रंग देखने को मिले जो आम सियासी गतिविधियों से बिल्कुल अलग रहे। कहीं भगवा गमछा पहने रोबोट ने नेता की तरह एंट्री लेकर लोगों का मनोरंजन किया तो कहीं मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने मशहूर गायिका अनुराधा पौडवाल के मंच पर अपनी गायकी का हुनर दिखाया। इसी बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना रामायण के जामवंत से कर दी। इन घटनाओं ने प्रदेश की सियासत और सार्वजनिक कार्यक्रमों में एक अलग ही रंग भर दिया।

    उज्जैन में एक रेस्टोरेंट के उद्घाटन के दौरान रोबोट को मुख्य अतिथि की तरह पेश किया गया। रोबोट की एंट्री भी बेहद खास अंदाज में हुई। उसके आसपास हथियार लिए कमांडो नजर आए और कार्यक्रम स्थल पर पहुंचते ही उसे भगवा दुपट्टा पहनाया गया। तिलक लगाकर उसका स्वागत किया गया। इसके बाद रोबोट को नाश्ता और पानी भी ऑफर किया गया। उद्घाटन के इस पूरे कार्यक्रम में रोबोट आकर्षण का केंद्र बना रहा। कार्यक्रम में मौजूद लोगों के लिए सबसे दिलचस्प पल तब आया जब भगवा दुपट्टा पहने रोबोट ने डांस करना शुरू कर दिया। उसे देखने के लिए लोगों की भीड़ जुट गई और वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया।

    रोबोट की इस अंदाज में मेहमाननवाजी को लेकर लोग तरह-तरह के मजाकिया कमेंट भी कर रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि मशीन बनाने वालों ने शायद कल्पना भी नहीं की होगी कि उनका रोबोट एक दिन किसी नेता की तरह VIP स्वागत पाएगा और उद्घाटन के साथ डांस भी करेगा। अब तो मजाक में यह तक कहा जा रहा है कि अगर यही सिलसिला चलता रहा तो आने वाले समय में फीता काटने से लेकर भाषण देने तक की जिम्मेदारी भी रोबोट को मिल सकती है।

    इधर भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना जामवंत से करते हुए कहा कि जिस तरह रामायण में जामवंत ने हनुमान जी को उनकी शक्ति का अहसास कराया था उसी तरह प्रधानमंत्री मोदी ने भारत को उसकी क्षमता और सामर्थ्य का एहसास कराया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश लगातार मजबूत हो रहा है और भारत अपने सामर्थ्य के दम पर हर तरह की चुनौती का सामना करने में सक्षम है। मुख्यमंत्री की इस तुलना के बाद राजनीतिक हलकों में इसकी चर्चा शुरू हो गई है।

    उधर बड़वानी जिले के खेतिया में आयोजित कानबाई उत्सव में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी अपनी अलग छाप छोड़ी। मशहूर गायिका अनुराधा पौडवाल के मंच पर पहुंचकर उन्होंने गाना गाया। उन्होंने हमें तुमसे प्यार कितना गीत की पंक्तियां गाकर अपनी आवाज का हुनर दिखाया। इतना ही नहीं उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद लोगों से भी अपने साथ गाने की अपील की। अनुराधा पौडवाल के सामने उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि उन्हें बताना है कि वे भी सुरीले हैं। मंत्री का यह अंदाज देखकर कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने जमकर तालियां बजाईं।

    इन घटनाओं के बीच एक और मामला चर्चा में है जिसमें एक फूड प्रोडक्ट को लेकर सोशल मीडिया पर विवाद खड़ा हुआ था। जांच के बाद कंपनी के उत्पाद सही पाए गए और सोशल मीडिया पर पोस्ट करने वाले व्यक्ति को कानूनी नोटिस दिए जाने की बात सामने आई। हालांकि अब वह अपनी बात से पीछे हटता नजर आ रहा है। इस पूरे मामले में कंपनी के भोपाल स्थित मुख्यालय के बाहर लगी नेमप्लेट हटाए जाने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

    कुल मिलाकर मंगलवार को मध्य प्रदेश की सियासत में बयानबाजी के साथ मनोरंजन और दिलचस्प घटनाओं का भी तड़का देखने को मिला। भगवा रोबोट की नेता जैसी एंट्री से लेकर मंत्री की गायकी और मुख्यमंत्री की जामवंत वाली तुलना तक कई घटनाएं दिनभर चर्चा में बनी रहीं।

  • मुरैना में ट्रेन से तोमर का भाषण और भोपाल में पटवारी का हमला, MP की राजनीति में छाया इंजन-डिब्बे वाला तंज

    मुरैना में ट्रेन से तोमर का भाषण और भोपाल में पटवारी का हमला, MP की राजनीति में छाया इंजन-डिब्बे वाला तंज


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों नेताओं के बयानों और अंदाज को लेकर खूब चर्चा हो रही है। मुरैना में विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने संत रविदास की 650वीं जयंती के कार्यक्रम में जाति व्यवस्था को लेकर नेताओं पर सीधा निशाना साधा। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बीजेपी की सरकार और संगठन के भीतर कथित खींचतान को ट्रेन के इंजन और डिब्बों की लड़ाई बताकर सियासी तंज कसा। पटवारी का यह बयान 20 अगस्त को प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में दिए गए उनके हमले के दौरान सामने आया था।

    मुरैना में संत रविदास जयंती के अवसर पर आयोजित समरसता संकल्प अभियान और यात्रा कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि जाति का बंधन भगवान ने नहीं बनाया। उन्होंने कहा कि समाज में अपनी व्यवस्था के लिए लोगों ने जाति व्यवस्था बनाई थी लेकिन बाद में इसके स्वरूप को बिगाड़ने और तुष्टिकरण की राजनीति को बढ़ावा देने का काम नेताओं ने अपने स्वार्थ के लिए किया। तोमर के इस बयान को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई है। संत रविदास के विचारों में सामाजिक समरसता और समानता का संदेश प्रमुख रहा है और इसी विचार को लेकर समरसता से जुड़े कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं।

    तोमर का दूसरा अंदाज तब देखने को मिला जब उन्होंने मुरैना के कैलारस से वीरपुर के बीच हाल ही में शुरू हुई मेमू ट्रेन में आम यात्रियों के साथ सफर किया। ट्रेन के अलग अलग स्टेशनों पर रुकने के दौरान उन्होंने लोगों को संबोधित भी किया। ट्रेन के अंदर खड़े होकर माइक से संबोधन के वीडियो सामने आने के बाद इसे लेकर सोशल मीडिया पर तरह तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। राजनीतिक कार्यक्रमों में नेताओं के भाषण और जनसंपर्क के इस अंदाज को लेकर लोग अपने अपने तरीके से टिप्पणी कर रहे हैं।

    इधर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बीजेपी की सरकार पर हमला बोलते हुए ट्रेन का ही उदाहरण इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि बीजेपी एक ऐसी ट्रेन बन गई है जिसमें डिब्बे कहते हैं कि इंजन हटा दो और इंजन कहता है कि डिब्बों को बदल दूंगा। पटवारी ने आरोप लगाया कि इस कथित खींचतान के बीच सबसे ज्यादा परेशानी आम जनता को हो रही है। उनके बयान की पुष्टि हालिया मीडिया रिपोर्टों में भी हुई है।

    पटवारी ने आरोप लगाया कि बीजेपी के बड़े नेता मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के खिलाफ दिल्ली तक जा रहे हैं जबकि दूसरी तरफ मुख्यमंत्री मंत्रिमंडल में बदलाव की बात कर रहे हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने इसी राजनीतिक स्थिति को इंजन और डिब्बों के बीच चल रही लड़ाई बताया। यह बयान विपक्ष की ओर से बीजेपी सरकार पर किया गया राजनीतिक हमला है और इसे इसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

    पटवारी ने सरकार को घेरते हुए शिक्षा व्यवस्था और महंगाई जैसे मुद्दे भी उठाए। उन्होंने स्कूलों की स्थिति को लेकर कांग्रेस के जरिए जमीनी अभियान चलाने की बात कही और सरकार से शिक्षा व्यवस्था पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की। इसके साथ ही उन्होंने खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों और सांची दूध के दामों को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा।

    इस पूरे घटनाक्रम में दिलचस्प बात यह है कि एक तरफ विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर सामाजिक समरसता और जातिगत भेदभाव के मुद्दे पर नेताओं की भूमिका पर सवाल उठा रहे हैं तो दूसरी तरफ कांग्रेस बीजेपी की अंदरूनी राजनीति पर ट्रेन के इंजन और डिब्बों का रूपक इस्तेमाल कर रही है। दोनों बयानों ने मध्य प्रदेश की सियासत में एक बार फिर राजनीतिक बयानबाजी को तेज कर दिया है। अब इन मुद्दों पर आने वाली प्रतिक्रियाएं प्रदेश की राजनीतिक बहस को और गर्म कर सकती हैं।

  • MP की राजनीति में एक दिन के कई रंग: शिवलिंग लेकर दिखे सीएम तो जीप में ज्यादा भीड़ पड़ी भारी बच्चों ने पूछे विकास के सवाल

    MP की राजनीति में एक दिन के कई रंग: शिवलिंग लेकर दिखे सीएम तो जीप में ज्यादा भीड़ पड़ी भारी बच्चों ने पूछे विकास के सवाल


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजनीति में मंगलवार का दिन कई दिलचस्प घटनाओं का गवाह बना। कहीं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मंच पर शिवलिंग को कंधे पर उठाते नजर आए तो कहीं इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने मुख्यमंत्री की तुलना भगवान द्वारिकाधीश से कर दी। देवास में कांग्रेस की तिरंगा यात्रा के दौरान नेताओं की भीड़ एक खुली जीप पर भारी पड़ गई और कुछ नेता नीचे जा गिरे। वहीं छतरपुर में बच्चों ने मंत्री दिलीप अहिरवार का काफिला रोककर अपने स्कूल और सड़क से जुड़ी समस्याएं सामने रख दीं। इन घटनाओं के वीडियो और तस्वीरें सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में भी इनकी खूब चर्चा हो रही है।

    इंदौर में एक कार्यक्रम के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को शिवलिंग भेंट किया। शिवलिंग हाथ में लेते ही मुख्यमंत्री ने उसे अपने कंधे पर उठा लिया। उनका यह अंदाज फिल्म बाहुबली के चर्चित दृश्य की याद दिलाता नजर आया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने इस पल का वीडियो बनाया जो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगा। इसके बाद इस दृश्य को लेकर राजनीतिक चर्चाओं का दौर भी शुरू हो गया।

    इसी कार्यक्रम में इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने मुख्यमंत्री को लेकर अपने संबोधन में भगवान द्वारिकाधीश का संदर्भ दिया। उन्होंने चंदन नगर में सड़क निर्माण से जुड़ी मांग रखते हुए मुख्यमंत्री से समस्या के समाधान की अपील की। संबोधन के दौरान महापौर से एक और दिलचस्प गलती हो गई। वे मंत्री तुलसी सिलावट का नाम लेना चाह रहे थे लेकिन जुबान फिसलने के कारण उन्होंने कैलाश विजयवर्गीय को जल संसाधन मंत्री बता दिया। मुख्यमंत्री के इशारे के बाद महापौर ने तुरंत अपनी गलती सुधार ली।

    उधर देवास के कांटाफोड़ में कांग्रेस की तिरंगा यात्रा के दौरान एक अलग ही तस्वीर सामने आई। यात्रा में शामिल होने के लिए एक खुली जीप में कई कांग्रेस नेता सवार हो गए। बताया गया कि जीप में 10 से ज्यादा लोग मौजूद थे। पीछे अधिक वजन होने के कारण जीप का अगला हिस्सा ऊपर उठ गया और पीछे बैठे कुछ नेता नीचे जा गिरे। इस दौरान पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा कांग्रेस जिला अध्यक्ष मनीष चौधरी और पूर्व विधायक विपिन वानखेड़े समेत कई नेता जीप में मौजूद थे। हादसे में एक महिला कांग्रेस नेता के घायल होने की बात सामने आई है जिन्हें उपचार के दौरान टांके लगाए गए।

    इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर कांग्रेस के सबका साथ जैसे राजनीतिक नारों को लेकर भी चुटकी ली गई। हालांकि रैली के दौरान वाहन पर क्षमता से अधिक लोगों के सवार होने की स्थिति सुरक्षा को लेकर सवाल जरूर खड़े करती है।

    छतरपुर के बसराही गांव में मंत्री दिलीप अहिरवार का काफिला बच्चों ने रोक लिया। मंत्री चंदला विधानसभा क्षेत्र से गुजर रहे थे तभी बच्चों ने रास्ते में आकर उनसे अपने स्कूल और गांव की समस्याओं के बारे में बात की। बच्चों ने स्कूल तक खराब सड़क स्कूल की बाउंड्री वॉल और बिजली से जुड़ी परेशानियां बताईं। मंत्री ने वाहन से उतरकर बच्चों की बातें सुनीं और समस्याओं के समाधान का भरोसा दिया।

    यह घटना इस मायने में भी खास रही कि बच्चों ने बिना किसी झिझक के सीधे मंत्री के सामने अपनी समस्याएं रखीं। गांव की बुनियादी सुविधाओं से जुड़े सवालों को लेकर बच्चों की सक्रियता ने लोगों का ध्यान खींचा है। अब देखना होगा कि बच्चों की ओर से बताई गई समस्याओं के समाधान के लिए प्रशासन कितनी तेजी से कदम उठाता है।

    इन घटनाओं के बीच प्रशासनिक गलियारों से जुड़ी एक चर्चा भी सामने आई है। राजधानी में हाल ही में पदस्थ हुए एक आईएएस अधिकारी को सरकारी बंगला आवंटित होने और उसमें उनकी पसंद के अनुसार रेनोवेशन शुरू होने की बात कही जा रही है। इसी बीच अधिकारी की कटारा हिल्स इलाके में एक निजी बंगले में रुचि की चर्चा भी प्रशासनिक हलकों में है। हालांकि इस मामले से जुड़े दावों की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।

    कुल मिलाकर मध्य प्रदेश की सियासत और प्रशासन से जुड़ी इन घटनाओं ने एक ही दिन में कई रंग दिखा दिए। मुख्यमंत्री का शिवलिंग उठाने वाला अंदाज हो या महापौर की जुबान फिसलने का मामला कांग्रेस नेताओं का जीप से गिरना हो या बच्चों का मंत्री का काफिला रोककर अपनी बात कहना इन सभी घटनाओं ने लोगों का ध्यान खींचा है।

  • कहीं कीचड़ में बच्चों की प्रस्तुति तो कहीं भाजपा नेता की पार्टी में SI का गाना, MP में आजादी के जश्न पर उठे सवाल

    कहीं कीचड़ में बच्चों की प्रस्तुति तो कहीं भाजपा नेता की पार्टी में SI का गाना, MP में आजादी के जश्न पर उठे सवाल


    भोपाल । मध्य प्रदेश में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर जहां देशभक्ति और तिरंगे के रंग में पूरा प्रदेश रंगा नजर आया वहीं अलग अलग जिलों से कुछ ऐसी तस्वीरें भी सामने आईं जिन्होंने व्यवस्थाओं और प्रशासनिक तौर तरीकों पर सवाल खड़े कर दिए। रतलाम में कलेक्टर के भाषण के दौरान स्वतंत्रता दिवस समारोह के मैदान में कुत्तों के पहुंचने का मामला चर्चा में रहा तो नर्मदापुरम में बारिश के बाद कीचड़ से भरे मैदान में स्कूली बच्चों को प्रस्तुति देनी पड़ी। मंदसौर के गरोठ में महिला सरपंच का घूंघट में तिरंगा फहराने का वीडियो भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बना। वहीं मंदसौर में भाजपा नेता की बर्थडे पार्टी में एक सब इंस्पेक्टर के गाना गाने का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस विभाग में भी मामला सुर्खियों में रहा।

    रतलाम में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान उस समय अजीब स्थिति बन गई जब आयोजन स्थल पर कुत्ते खुलेआम घूमते दिखाई दिए। बताया गया कि यह घटना उस समय हुई जब कलेक्टर का भाषण चल रहा था। कुत्ते काफी देर तक मैदान में घूमते रहे और बाद में एक पुलिसकर्मी ने उन्हें बाहर निकाला। पूरे घटनाक्रम का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोग व्यवस्थाओं को लेकर तरह तरह की प्रतिक्रियाएं देते नजर आए। लोगों ने तंज कसते हुए कहा कि जब पूरा देश आजादी का जश्न मना रहा है तो कुत्ते भी आजादी के जश्न में शामिल होने पहुंच गए। हालांकि इस घटना ने नगर निगम और आयोजन स्थल की सुरक्षा तथा साफ सफाई व्यवस्था पर सवाल जरूर खड़े कर दिए।

    नर्मदापुरम से आई तस्वीर भी कम चौंकाने वाली नहीं रही। बारिश के कारण स्वतंत्रता दिवस समारोह का मैदान कीचड़ से भर गया था। इसके बावजूद स्कूली बच्चों को उसी मैदान में अपनी प्रस्तुति देनी पड़ी। दूसरी ओर मैदान के एक हिस्से में गिट्टी की चूरी डालकर उसे पुलिस परेड के लिए तैयार किया गया था। इसी अंतर को लेकर लोगों ने सवाल उठाया कि जब पुलिसकर्मियों की परेड के लिए मैदान को व्यवस्थित किया जा सकता था तो बच्चों के कार्यक्रम के लिए ऐसी व्यवस्था क्यों नहीं की गई। बच्चों को कीचड़ में खड़े होकर प्रस्तुति देने की स्थिति को लेकर व्यवस्थापकों पर सवाल उठे।

    मंदसौर के गरोठ क्षेत्र से सामने आया घूंघट वाला मामला भी चर्चा में रहा। मेलखेड़ा पंचायत में महिला सरपंच ने घूंघट में तिरंगा फहराया। वीडियो में उनका चेहरा पूरी तरह घूंघट से ढका दिखाई दिया। समारोह में स्कूली बच्चों और ग्रामीणों के साथ पंचायत के अन्य प्रतिनिधि भी मौजूद थे। इस तस्वीर को लेकर महिला सशक्तिकरण और स्थानीय स्तर पर महिलाओं की वास्तविक भागीदारी को लेकर सवाल उठाए गए। हालांकि किसी महिला का घूंघट करना अपने आप में किसी नियम का उल्लंघन नहीं है लेकिन सार्वजनिक पद पर निर्वाचित महिला प्रतिनिधि की सार्वजनिक भूमिका और सामाजिक परंपराओं के बीच संतुलन को लेकर बहस जरूर छिड़ गई।

    मंदसौर में ही भाजपा नेता की बर्थडे पार्टी में कचनारा पुलिस चौकी प्रभारी सब इंस्पेक्टर भीम सिंह के पहुंचने और उनके लिए गाना गाने का वीडियो चर्चा में आया। वीडियो में एसआई भाजपा नेता की बर्थडे पार्टी में गाना गाते नजर आए। गाने के बोल भी दोस्ती को लेकर थे जिसके बाद सोशल मीडिया पर पुलिस और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच नजदीकी को लेकर सवाल उठने लगे। मामले की जानकारी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों तक पहुंचने के बाद एसआई को कारण बताओ नोटिस दिए जाने की बात सामने आई है। यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि केवल किसी कार्यक्रम में शामिल होने या गाना गाने से किसी राजनीतिक पक्षधरता का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। लेकिन पुलिसकर्मी और राजनीतिक दलों के नेताओं के सार्वजनिक मेलजोल को लेकर उठने वाले सवालों के कारण यह मामला चर्चा में जरूर आ गया।

    अंदर की बात पर भी सियासी नजर

    दतिया विधानसभा उपचुनाव के नतीजे के बाद भाजपा संगठन में समीक्षा और संभावित कार्रवाई को लेकर भी चर्चा तेज रही। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने परिणामों की समीक्षा की बात कही थी। बाद में मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में वरिष्ठ नेताओं की बैठक हुई और हार के कारणों की समीक्षा के लिए दो सदस्यीय समिति गठित की गई। समिति को चुनाव से जुड़े पदाधिकारियों और वरिष्ठ नेताओं से चर्चा कर रिपोर्ट प्रदेश अध्यक्ष को सौंपने की जिम्मेदारी दी गई। इससे साफ है कि दतिया के नतीजे को पार्टी ने गंभीरता से लिया है।

    कुल मिलाकर स्वतंत्रता दिवस के उत्सव के बीच सामने आई ये तस्वीरें मध्य प्रदेश में व्यवस्था प्रशासन राजनीति और सामाजिक परंपराओं से जुड़े अलग अलग सवालों को सामने लाती हैं। कहीं लापरवाही पर सवाल है तो कहीं समान व्यवस्था की मांग उठ रही है और कहीं सार्वजनिक पदों पर बैठे लोगों के आचरण को लेकर बहस छिड़ी है। यही वजह है कि आजादी के जश्न के साथ इन घटनाओं ने भी लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा।

  • देशभक्ति या लापरवाही? नर्मदा की तेज धार में बिना लाइफ जैकेट नाव पर निकले विधायक, वीडियो चर्चा में

    देशभक्ति या लापरवाही? नर्मदा की तेज धार में बिना लाइफ जैकेट नाव पर निकले विधायक, वीडियो चर्चा में


    इंदौर। मध्य प्रदेश में स्वतंत्रता दिवस से पहले तिरंगा यात्राओं और राजनीतिक गतिविधियों के बीच कई ऐसे मामले सामने आए हैं जिन्होंने नेताओं और अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। रतलाम में तिरंगा यात्रा के दौरान महापौर कलेक्टर और दूसरे जनप्रतिनिधि तथा अधिकारी हाथों में तिरंगा लेकर करीब डेढ़ किलोमीटर तक पैदल चले। देशभक्ति के इस आयोजन में लोगों की मौजूदगी भी रही लेकिन चर्चा उस समय शुरू हुई जब पैदल चल रहे नेताओं और अधिकारियों के पीछे उनके खाली सरकारी वाहन भी चलते नजर आए। इन वाहनों में ड्राइवर के अलावा कोई सवार नहीं था। ऐसे में सवाल उठने लगा कि जब संबंधित अधिकारी और जनप्रतिनिधि पैदल यात्रा में शामिल थे तो उनके खाली वाहनों को साथ चलाने की क्या जरूरत थी। इससे पेट्रोल और डीजल की खपत को लेकर भी सवाल उठे। यह मामला इसलिए भी चर्चा में आया क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से समय समय पर ईंधन बचाने और ऊर्जा की खपत कम करने की अपील की जाती रही है।

    दूसरी तस्वीर महेश्वर से सामने आई जहां तिरंगा यात्रा के दौरान भाजपा विधायक राजकुमार मेव और टीआई समेत कई नेता तथा अधिकारी नाव में सवार दिखाई दिए। मामला इसलिए ज्यादा गंभीर माना गया क्योंकि इस दौरान नर्मदा नदी उफान पर थी और बारिश के मौसम में नदी का बहाव सामान्य दिनों की तुलना में काफी तेज रहता है। इसके बावजूद नाव में बैठे लोगों ने कथित तौर पर लाइफ जैकेट नहीं पहनी थी। इस दृश्य के सामने आने के बाद सुरक्षा व्यवस्था और नियमों के पालन को लेकर सवाल खड़े हुए। आम लोगों को नदी और जलाशयों के आसपास सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है लेकिन जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की ओर से ही सुरक्षा उपकरणों की अनदेखी का आरोप लगे तो सवाल उठना स्वाभाविक है। हालांकि पूरे घटनाक्रम में संबंधित प्रशासन की ओर से सुरक्षा व्यवस्था को लेकर क्या निर्देश थे यह अलग जांच का विषय हो सकता है।

    इधर मध्य प्रदेश की राजनीति में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के संभावित उज्जैन दौरे को लेकर भी बयानबाजी शुरू हो गई है। राहुल गांधी सितंबर में मध्य प्रदेश के उज्जैन आने वाले हैं ऐसी चर्चा के बीच प्रदेश सरकार के मंत्री विश्वास सारंग ने उन्हें पहले झारखंड के रांची जाने की सलाह दी है। सारंग ने दिल्ली में हुए प्रदर्शन में राहुल गांधी की मौजूदगी का जिक्र करते हुए सवाल उठाया कि रांची में प्रदर्शन कर रहे छात्र छात्राओं के खिलाफ कार्रवाई के दौरान वे वहां क्यों नहीं पहुंचे। इसी बयान के दौरान मंत्री ने राहुल गांधी को रांची जाने का ऑफर दिया और यहां तक कहा कि वे उनकी दिल्ली से रांची की टिकट भी करा देंगे। हालांकि राहुल गांधी के मध्य प्रदेश दौरे की अंतिम तारीख अभी तय नहीं हुई है। ऐसे में मंत्री का टिकट वाला बयान फिलहाल राजनीतिक तंज के तौर पर ही देखा जा रहा है।

    राजनीतिक बयानबाजी के बीच मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की ई-अटेंडेंस भी परेशानी का कारण बनी। स्वतंत्रता दिवस से दो दिन पहले बड़ी संख्या में शिक्षक स्कूलों में ड्यूटी पूरी करने के बाद आउट-पंच लगाने के लिए परेशान होते रहे। ई-अटेंडेंस पोर्टल में तकनीकी समस्या के कारण शिक्षक समय पर अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं कर पा रहे थे। शिक्षकों की चिंता इस बात को लेकर थी कि अगर आउट-पंच नहीं हुआ तो उनकी उपस्थिति प्रभावित हो सकती है और वेतन कटौती का खतरा पैदा हो सकता है। नियमों के अनुसार शिक्षकों को स्कूल के निर्धारित दायरे में रहकर ही ई-अटेंडेंस प्रक्रिया पूरी करनी होती है।

    देर शाम तकनीकी समस्या दूर होने के बाद विभाग की ओर से शिक्षकों को राहत दी गई और उन्हें जहां वे मौजूद थे वहीं से अटेंडेंस लगाने की अनुमति दी गई। हालांकि शिक्षकों के लिए ई-अटेंडेंस की तकनीकी दिक्कत कोई नई समस्या नहीं है। प्रदेश के कई ग्रामीण और दूरदराज इलाकों में नेटवर्क की परेशानी के कारण भी शिक्षकों को बार बार मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में सवाल केवल तकनीकी व्यवस्था का नहीं बल्कि ऐसी प्रणाली तैयार करने का है जो कर्मचारियों के लिए सुविधा बने परेशानी नहीं।

    कुल मिलाकर स्वतंत्रता दिवस से पहले मध्य प्रदेश में सामने आए इन घटनाक्रमों ने राजनीति प्रशासन और सरकारी व्यवस्था से जुड़े कई सवालों को एक साथ चर्चा में ला दिया है। कहीं ईंधन बचाने की जरूरत पर सवाल है तो कहीं नदी में सुरक्षा नियमों के पालन को लेकर चिंता है। वहीं राजनीतिक बयानबाजी और ई-अटेंडेंस की तकनीकी समस्या ने भी अलग बहस छेड़ दी है।

  • MP में सियासत से सिस्टम तक सवाल ही सवाल! मंत्री ने राहुल गांधी को दिया रांची का टिकट ऑफर, उफनती नर्मदा में विधायक का स्टंट

    MP में सियासत से सिस्टम तक सवाल ही सवाल! मंत्री ने राहुल गांधी को दिया रांची का टिकट ऑफर, उफनती नर्मदा में विधायक का स्टंट


    भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति और प्रशासन से जुड़ी घटनाएं इन दिनों कई सवाल खड़े कर रही हैं। कहीं देशभक्ति के नाम पर निकाली गई तिरंगा यात्रा में नेता और अधिकारी पैदल चलते नजर आए तो उनके पीछे खाली सरकारी और निजी वाहनों का काफिला चलता रहा। कहीं उफनती नर्मदा की लहरों के बीच भाजपा विधायक और अधिकारी बिना लाइफ जैकेट नाव में सवार दिखाई दिए। वहीं राहुल गांधी के मध्य प्रदेश दौरे से पहले मंत्री विश्वास सारंग ने उन्हें झारखंड के रांची जाने की सलाह देते हुए टिकट तक कराने का ऑफर दे दिया। इन घटनाओं ने राजनीतिक बयानबाजी से लेकर प्रशासनिक व्यवस्था और सुरक्षा इंतजामों तक कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

    रतलाम में तिरंगा यात्रा के दौरान महापौर कलेक्टर और अन्य नेता अधिकारी करीब डेढ़ किलोमीटर तक हाथों में तिरंगा लेकर पैदल चले। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से पेट्रोल और डीजल बचाने की अपील के बीच इस यात्रा की एक तस्वीर चर्चा का विषय बन गई। वजह थी पैदल चल रहे नेताओं और अधिकारियों के पीछे चलता खाली वाहनों का काफिला। इन गाड़ियों में ड्राइवरों के अलावा कोई सवार नहीं था। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब अधिकारी और जनप्रतिनिधि खुद पैदल यात्रा कर रहे थे तो उनके खाली वाहनों को साथ चलाने की जरूरत क्यों पड़ी। लोगों का सवाल है कि क्या इस तरह ईंधन की खपत को कम किया जा सकता था।

    महेश्वर में तिरंगा यात्रा के दौरान सुरक्षा से जुड़ा मामला और ज्यादा गंभीर नजर आया। बारिश के मौसम में नर्मदा नदी उफान पर है और नदी की धार तेज होने के बावजूद भाजपा विधायक राजकुमार मेव टीआई समेत अन्य नेता और अधिकारी नाव में सवार हो गए। तस्वीरों के मुताबिक नाव पर सवार लोगों ने लाइफ जैकेट नहीं पहनी थी। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब आम लोगों को नदी और जलाशयों में सुरक्षा नियमों का पालन करने की सलाह दी जाती है तो जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के लिए इन नियमों का पालन कितना जरूरी है। देशभक्ति का उत्साह अपनी जगह है लेकिन उफनती नदी में सुरक्षा से समझौता किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है।

    इधर कांग्रेस नेता राहुल गांधी के सितंबर में उज्जैन आने की संभावित चर्चा के बीच मध्य प्रदेश के मंत्री विश्वास सारंग ने उन पर राजनीतिक तंज कसा है। सारंग ने राहुल गांधी को मध्य प्रदेश आने से पहले रांची जाने की सलाह दी। उनका कहना है कि राहुल गांधी दिल्ली में जेन-जी के विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए लेकिन झारखंड की राजधानी रांची में प्रदर्शन कर रहे छात्र-छात्राओं के खिलाफ कार्रवाई के दौरान वहां नहीं पहुंचे। इसी मुद्दे को लेकर मंत्री ने राहुल गांधी से पहले रांची जाने को कहा और यहां तक कहा कि वह उनकी दिल्ली से रांची की टिकट करा देंगे। हालांकि राहुल गांधी के मध्य प्रदेश दौरे की तारीख अभी तय नहीं हुई है। ऐसे में टिकट वाला बयान फिलहाल सियासी तंज के तौर पर ही देखा जा रहा है।

    अब बात प्रशासनिक व्यवस्था की। स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले मध्य प्रदेश के लाखों शिक्षक ई-अटेंडेंस की तकनीकी परेशानी से जूझते रहे। दिनभर स्कूल में ड्यूटी करने के बाद शिक्षकों को आउट-पंच करना था लेकिन ई-अटेंडेंस पोर्टल में तकनीकी समस्या के कारण पंच नहीं हो पा रहा था। शिक्षकों की चिंता इसलिए बढ़ गई क्योंकि अटेंडेंस दर्ज नहीं होने पर वेतन कटने का डर था। नियम के मुताबिक शिक्षकों को स्कूल के 200 मीटर के दायरे में रहकर अटेंडेंस लगानी होती है। लिहाजा कई शिक्षक घंटों तक स्कूल में बैठकर पोर्टल ठीक होने का इंतजार करते रहे।

    देर शाम जब पोर्टल की समस्या दूर हुई तो विभाग की ओर से शिक्षकों को संदेश भेजकर राहत दी गई कि वे जहां हैं वहीं से अटेंडेंस लगा सकते हैं। हालांकि शिक्षकों के लिए यह समस्या नई नहीं है। प्रदेश के कई हिस्सों में नेटवर्क और तकनीकी दिक्कतों के कारण ई-अटेंडेंस व्यवस्था को लेकर लगातार परेशानी सामने आती रही है। ऐसे में सवाल सिर्फ पोर्टल के कुछ घंटों तक ठप रहने का नहीं बल्कि ऐसी व्यवस्था का है जिसमें तकनीकी खामी का खामियाजा कर्मचारियों को भुगतने का डर बना रहता है।

    कुल मिलाकर तिरंगा यात्रा से लेकर नर्मदा की लहरों और ई-अटेंडेंस की तकनीकी दिक्कत तक मध्य प्रदेश की इन घटनाओं ने अलग-अलग मुद्दों पर बहस छेड़ दी है। कहीं ईंधन बचाने की जरूरत पर सवाल है तो कहीं सुरक्षा नियमों के पालन पर। वहीं राजनीतिक बयानबाजी ने राहुल गांधी के संभावित मध्य प्रदेश दौरे को भी सियासी रंग दे दिया है।