Tag: Madhya Pradesh politics

  • रावण दहन में शिवराज की मशक्कत से लेकर पटवा की जुबान फिसलने तक, दशहरे पर MP में नेताओं के बयान और वीडियो चर्चा में

    रावण दहन में शिवराज की मशक्कत से लेकर पटवा की जुबान फिसलने तक, दशहरे पर MP में नेताओं के बयान और वीडियो चर्चा में


    भोपाल । मध्यप्रदेश में दशहरे के मौके पर रावण दहन के साथ राजनीति और दिलचस्प घटनाओं की भी खूब चर्चा रही। कहीं केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान को अपने बंगले पर रावण का पुतला जलाने के लिए मशक्कत करनी पड़ी तो कहीं भाजपा विधायक की जुबान फिसलने से जनता ही रावण बन गई। धार जिले में रावण के पुतले से निकले रॉकेटों ने लोगों को दौड़ने पर मजबूर कर दिया। वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह की सत्य सनातन यात्रा पर भाजपा विधायक पन्नालाल शाक्य ने तीखा राजनीतिक तंज कस दिया। इन घटनाओं के वीडियो और बयान अब चर्चा का विषय बने हुए हैं।

    शिवराज सिंह चौहान को रावण दहन में करनी पड़ी मशक्कत

    केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने दशहरे पर अपने बंगले में रावण के पुतले का दहन किया। लेकिन पुतले को जलाने की कोशिश उम्मीद के मुताबिक आसान नहीं रही। कई प्रयासों के बाद पुतले में आग लगी। इसके बावजूद धुआं छंटने पर रावण का पुतला दोबारा दिखाई देने लगा और वह पूरी तरह नहीं जल पाया था। हालांकि बाद में पुतला पूरी तरह जलकर खाक हो गया। इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद लोग सोशल मीडिया पर चुटकी लेने लगे। लोगों का कहना है कि रावण दहन का वीडियो तो बन गया लेकिन इसके लिए शिवराज सिंह को काफी मेहनत करनी पड़ी।

    भाजपा विधायक सुरेंद्र पटवा ने जनता को ही बता दिया रावण

    भोजपुर से भाजपा विधायक सुरेंद्र पटवा दशहरा कार्यक्रम में अपने संबोधन के दौरान ऐसी बात कह गए जिसने लोगों का ध्यान खींच लिया। मंच से बोलते हुए उन्होंने कहा कि आज यहां रावण रूपी जो हमारे सारे लोग यहां पर आए हुए हैं। उनके इस बयान को जुबान फिसलने के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि वह कुछ और कहना चाहते थे लेकिन शब्दों के चयन में चूक हो गई। इसके बाद उनके बयान पर लोगों ने चुटकी ली। कुछ लोगों ने इसे मंच पर बोलते समय हुई सामान्य गलती माना जबकि कुछ ने नाराजगी भी जताई। फिलहाल इस बयान की चर्चा राजनीतिक हलकों में भी हो रही है।

    धार में रावण के पुतले से निकले रॉकेट तो भागने लगे लोग

    धार जिले के टांडा में रावण दहन के दौरान एक अलग ही नजारा देखने को मिला। बताया गया कि राम की भूमिका निभा रहे युवक ने रावण दहन के लिए जलता हुआ तीर चलाया तो पुतले में रखे पटाखे और रॉकेट फूटने लगे। रॉकेट इधर-उधर जाने लगे और कुछ लोगों की ओर बढ़ते दिखाई दिए। इससे मौके पर मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई और कई लोग सुरक्षित जगह की ओर भागने लगे। घटना का वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने मजाकिया अंदाज में कहा कि इस बार रावण ने भी पलटवार कर दिया। हालांकि ऐसी घटनाएं सार्वजनिक कार्यक्रमों में पटाखों के इस्तेमाल के दौरान सुरक्षा व्यवस्था की अहमियत भी याद दिलाती हैं।

    दिग्विजय सिंह को धृतराष्ट्र और बेटे को बताया दुर्योधन

    कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की सत्य सनातन यात्रा को लेकर भी राजनीतिक बयानबाजी तेज है। गुना से भाजपा विधायक पन्नालाल शाक्य ने दिग्विजय सिंह पर निशाना साधते हुए उनकी तुलना धृतराष्ट्र से की और उनके बेटे को दुर्योधन बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि दिग्विजय सिंह अपने बेटे को राजनीतिक रूप से आगे बढ़ाने के उद्देश्य से पदयात्रा कर रहे हैं। यह भाजपा विधायक का राजनीतिक आरोप है। यात्रा के उद्देश्य और इसके पीछे की मंशा को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। लेकिन इस बयान ने मध्यप्रदेश की राजनीति में एक बार फिर परिवारवाद और राजनीतिक विरासत की बहस को हवा दे दी है।

    सत्ताधारी दल के नेताओं की खींचतान में अफसर परेशान

    राज्य में सत्ताधारी दल के जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच तालमेल को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। खबर के मुताबिक महाकौशल क्षेत्र के एक जिले में बच्चों की सेहत से जुड़े मुद्दे पर भाजपा विधायक प्रशासन से जवाब मांग रहे हैं। मामला कथित तौर पर सत्ताधारी दल के एक पूर्व सांसद के बेटे से जुड़ा होने के कारण कार्रवाई को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। विधायक ने सरकार से शिकायत की है और अब इस मुद्दे को सोशल मीडिया पर उठाने की तैयारी कर रहे हैं। हालांकि संबंधित जिले और मामले का विस्तृत विवरण सामने नहीं रखा गया है। ऐसे में पूरे प्रकरण पर निष्कर्ष निकालने से पहले प्रशासन की जांच और संबंधित पक्षों का जवाब महत्वपूर्ण होगा।

    कुल मिलाकर दशहरे के दौरान मध्यप्रदेश में धार्मिक उत्सव के साथ राजनीतिक बयान और कई घटनाएं सुर्खियों में रहीं। शिवराज सिंह के रावण दहन से लेकर सुरेंद्र पटवा की जुबान फिसलने और दिग्विजय सिंह पर किए गए तंज तक अलग-अलग मुद्दों ने लोगों का ध्यान खींचा। वहीं प्रशासन और सत्ताधारी दल के जनप्रतिनिधियों के बीच कथित खींचतान ने शासन व्यवस्था में तालमेल को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।

  • इंदौर में कांग्रेस को घेरने की तैयारी में BJP, 23 अक्टूबर से 5 नवंबर तक अभियान, कैलाश विजयवर्गीय ने विदेशी ताकतों पर साधा निशाना

    इंदौर में कांग्रेस को घेरने की तैयारी में BJP, 23 अक्टूबर से 5 नवंबर तक अभियान, कैलाश विजयवर्गीय ने विदेशी ताकतों पर साधा निशाना


    इंदौर । मध्य प्रदेश के इंदौर में चुनाव आयोग और संवैधानिक संस्थाओं को लेकर जारी सियासी बहस के बीच भाजपा ने कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन के आरोपों का जवाब देने की तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी 23 अक्टूबर से 5 नवंबर तक लोकतंत्र बचाओ भीड़तंत्र हटाओ अभियान चलाएगी। इसके तहत पदयात्रा से लेकर प्रबुद्धजन गोष्ठी और युवा संवाद तक कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। भाजपा का कहना है कि इन गतिविधियों के जरिए चुनाव आयोग और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस तथा इंडी गठबंधन की ओर से उठाए जा रहे सवालों का जवाब जनता तक पहुंचाया जाएगा।

    भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा के मुताबिक कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बयानों से संवैधानिक संस्थाओं के प्रति लोगों के विश्वास को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है। पार्टी इसी मुद्दे को लेकर जनता के बीच जाने की तैयारी कर रही है। भाजपा का आरोप है कि विपक्ष राजनीतिक लाभ के लिए चुनाव आयोग और चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाकर भ्रम फैलाने का काम कर रहा है। हालांकि चुनाव आयोग और एसआईआर को लेकर विपक्ष की आपत्तियों पर दोनों पक्षों के बीच राजनीतिक बहस जारी है। भाजपा इस अभियान के माध्यम से अपना पक्ष जनता के सामने रखने की कोशिश करेगी।

    अभियान की तैयारियों को लेकर बुधवार रात इंदौर में बैठक आयोजित की गई। इसमें मंत्री कैलाश विजयवर्गीय समेत पार्टी के कई जनप्रतिनिधि और पदाधिकारी शामिल हुए। बैठक में अभियान की रूपरेखा और अलग-अलग कार्यक्रमों की जिम्मेदारियों पर चर्चा की गई। भाजपा ने तय किया है कि अभियान को केवल राजनीतिक सभाओं तक सीमित नहीं रखा जाएगा बल्कि विभिन्न वर्गों के लोगों से संवाद कर पार्टी अपनी बात पहुंचाएगी।

    सुमित मिश्रा ने बताया कि अभियान के तहत 1 नवंबर को लोकतंत्र बचाओ भीड़तंत्र हटाओ पदयात्रा निकाली जाएगी। हालांकि पदयात्रा का शुरुआती स्थान और रूट अभी तय नहीं किया गया है। इसके अलावा प्रबुद्धजनों की गोष्ठी आयोजित होगी जिसमें समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों को शामिल करने की योजना है। युवाओं के साथ संवाद और छात्रों के लिए प्रतिस्पर्धाएं भी आयोजित की जाएंगी। सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के साथ बातचीत के जरिए भी अभियान का संदेश लोगों तक पहुंचाने की तैयारी है।

    बैठक में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा कि श्रीलंका फ्रांस बांग्लादेश और नेपाल सहित कई देशों में अशांति का माहौल देखने को मिल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ विदेशी ताकतें भारत को आगे बढ़ते हुए नहीं देखना चाहतीं और देश के विकास में बाधा डालने की कोशिश कर रही हैं। विजयवर्गीय ने कहा कि भाजपा की लड़ाई केवल किसी एक राजनीतिक दल या संस्था तक सीमित नहीं है बल्कि उन ताकतों के खिलाफ भी है जो उनके मुताबिक भारत की प्रगति को रोकना चाहती हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे अभियान के जरिए विपक्ष के कथित षड्यंत्र को जनता के सामने रखें।

    अभियान को व्यवस्थित तरीके से संचालित करने के लिए भाजपा ने अलग-अलग टोलियां भी बनाई हैं। नगर स्तरीय टोली के संयोजक सुधीर कोल्हे को बनाया गया है जबकि महेश कुकरेजा कैलाश पीपले हरप्रीत सिंह बक्शी मुकेश मंगल नेहा शर्मा और दीपक बागवान को जिम्मेदारी दी गई है। प्रेस कॉन्फ्रेंस की टोली में आलोक दुबे वरुण पाल रितेश शर्मा और नितीन शर्मा शामिल हैं। पदयात्रा की जिम्मेदारी विधायक रमेश मेंदोला मधु वर्मा गोलू शुक्ला पूर्व विधायक आकाश विजयवर्गीय स्वप्निल कोठारी और अक्षय कांति बम को सौंपी गई है। वहीं राष्ट्र चिंतन संवाद टोली में सांसद शंकर लालवानी सहित कई नेताओं को शामिल किया गया है।

    भाजपा का यह अभियान ऐसे समय में शुरू हो रहा है जब चुनाव आयोग की भूमिका और एसआईआर की प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। अब देखना होगा कि अभियान के दौरान भाजपा अपने तर्कों को जनता तक किस तरह पहुंचाती है और विपक्ष इन कार्यक्रमों पर क्या प्रतिक्रिया देता है।

  • सीएम के सामने बदले मंच के समीकरण, रावण के 9 सिर पर सवाल और अफसर को मकान नहीं, एमपी के ये किस्से चर्चा में

    सीएम के सामने बदले मंच के समीकरण, रावण के 9 सिर पर सवाल और अफसर को मकान नहीं, एमपी के ये किस्से चर्चा में


    नई दिल्ली। मध्य प्रदेश में दशहरे के आयोजनों के दौरान कुछ ऐसे दिलचस्प नजारे सामने आए जिन्होंने राजनीति से लेकर प्रशासनिक व्यवस्था तक को चर्चा में ला दिया। कहीं मुख्यमंत्री के सामने भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा के साथ हुई एक घटना ने सियासी गलियारों में तंज का मौका दिया तो कहीं रावण के पुतले में दस की जगह नौ सिर लगाए जाने पर सवाल उठे। वहीं हरदा में पूर्व मंत्री कमल पटेल का भाषण उस समय चर्चा में आ गया जब बीच कार्यक्रम में उनके पास फोन पहुंच गया। इन घटनाओं के बीच नए जिले में पदस्थ एक आईएएस अधिकारी को सरकारी आवास नहीं मिलने का मामला भी व्यवस्था पर सवाल खड़े करता नजर आया।

    भोपाल में दशहरे के एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मंच की ओर जा रहे थे। भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा मुख्यमंत्री की अगवानी कर रहे थे और उन्हें आगे लेकर बढ़ रहे थे। इसी दौरान मध्य प्रदेश भाजपा के पूर्व अध्यक्ष और सांसद वीडी शर्मा ने मुख्यमंत्री से हाथ मिलाया। लेकिन मुलाकात ज्यादा देर नहीं चल सकी। रामेश्वर शर्मा मुख्यमंत्री को आगे बढ़ने का इशारा करते दिखाई दिए और इसी दौरान वीडी शर्मा को धक्का लगने के बाद वह एक तरफ हो गए। इस घटनाक्रम का वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने इस पर राजनीतिक अंदाज में टिप्पणियां कीं। हालांकि इस दृश्य से किसी की राजनीतिक हैसियत या इरादे के बारे में निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा लेकिन घटना चर्चा का विषय जरूर बन गई।

    दूसरा दिलचस्प मामला ग्वालियर जिले के डबरा का है जहां दशहरे पर रावण के पुतले को लेकर चूक सामने आई। रावण को दशानन कहा जाता है और उसके दस सिरों की पहचान धार्मिक कथाओं में खास महत्व रखती है। लेकिन यहां पुतले में दस की जगह नौ सिर ही लगाए गए थे। जब इस गलती पर लोगों का ध्यान गया तो आयोजन से जुड़े लोगों ने दसवां सिर भी लगा दिया। इसके बावजूद मामला पूरी तरह नहीं संभला क्योंकि नए सिर का आकार भी चर्चा का कारण बन गया। इस छोटी सी चूक ने दशहरे के आयोजन को लोगों के बीच हास्य और सवालों का विषय बना दिया।

    हरदा में दशहरा उत्सव के दौरान पूर्व मंत्री कमल पटेल अपने भाषण को लेकर सुर्खियों में रहे। कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच उन्होंने जोशीले अंदाज में अपनी बात रखी। भाषण के दौरान उन्होंने भारत माता का अपमान करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भगवान राम का वंशज तथा अवतारी पुरुष बताया। इसी बीच एक युवक उनके पास फोन लेकर पहुंचा। कमल पटेल ने भाषण रोककर फोन पर बात करना शुरू कर दिया। इस घटनाक्रम पर भी लोगों ने चुटकी ली और सवाल उठाया कि आखिर भाषण के बीच फोन आने की वजह क्या थी। हालांकि फोन आने के कारण का स्पष्ट विवरण सामने नहीं आया।

    इसी बीच प्रदेश की प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़ा एक और मामला सामने आया। बताया गया कि नए जिले में पदस्थ एक आईएएस अधिकारी को रहने के लिए सरकारी आवास उपलब्ध नहीं हो सका। उन्हें बताया गया कि पहले पदस्थ अधिकारी ने भी करीब दो साल रेस्ट हाउस में रहकर समय बिताया था और परिवार को साथ नहीं रख पाए थे। यह स्थिति नए जिलों में सरकारी कार्यालयों और अधिकारियों की तैनाती के साथ जरूरी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की चुनौती को सामने लाती है। कुल मिलाकर दशहरे के इन किस्सों ने प्रदेश में राजनीतिक घटनाओं और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को लेकर नई चर्चा छेड़ दी।

  • मध्यप्रदेश में राज्यसभा उपचुनाव का ऐलान, 26 अक्टूबर से नामांकन और 12 नवंबर को वोटिंग, जानिए कब होगी मतगणना

    मध्यप्रदेश में राज्यसभा उपचुनाव का ऐलान, 26 अक्टूबर से नामांकन और 12 नवंबर को वोटिंग, जानिए कब होगी मतगणना


    भोपाल। मध्यप्रदेश में राज्यसभा की एक रिक्त सीट पर उपचुनाव की तारीख घोषित कर दी गई है। केंद्रीय मंत्री एल मुरुगन के इस्तीफे के बाद खाली हुई इस सीट पर 12 नवंबर 2026 को मतदान कराया जाएगा। भारत निर्वाचन आयोग ने गुरुवार 22 अक्टूबर को चुनाव कार्यक्रम जारी किया। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मतदान के दिन ही शाम 5 बजे मतगणना भी होगी। इस चुनाव को लेकर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ने की संभावना है। राज्यसभा की यह सीट मुरुगन के इस्तीफे के बाद खाली हुई है जबकि उनका कार्यकाल 2 अप्रैल 2030 तक निर्धारित था। ऐसे में अब उपचुनाव के जरिए इस सीट पर नए सदस्य का चयन किया जाएगा।

    निर्वाचन आयोग की ओर से जारी कार्यक्रम के मुताबिक चुनाव प्रक्रिया 26 अक्टूबर से शुरू होगी। इसी दिन उपचुनाव की अधिसूचना जारी की जाएगी और उम्मीदवार अपना नामांकन दाखिल कर सकेंगे। नामांकन जमा करने की अंतिम तारीख 2 नवंबर निर्धारित की गई है। इसके बाद 3 नवंबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी। उम्मीदवारों को नाम वापस लेने के लिए 5 नवंबर तक का समय दिया जाएगा। सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद 12 नवंबर को मतदान होगा और उसी दिन शाम 5 बजे मतगणना की जाएगी। आयोग के कार्यक्रम के अनुसार चुनाव प्रक्रिया 16 नवंबर तक पूरी की जानी है।

    एल मुरुगन मध्यप्रदेश से राज्यसभा सदस्य बनने से पहले तमिलनाडु का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। वे सितंबर 2021 में पहली बार तमिलनाडु से राज्यसभा पहुंचे थे। इसके बाद 3 अप्रैल 2024 को वे मध्यप्रदेश से राज्यसभा सदस्य निर्वाचित हुए। उनका कार्यकाल अप्रैल 2030 तक था लेकिन 14 अक्टूबर 2026 से उनकी राज्यसभा सदस्यता समाप्त हो गई। उनके इस्तीफे के बाद मध्यप्रदेश से राज्यसभा की एक सीट रिक्त हो गई। उपलब्ध जानकारी के अनुसार उन्होंने केंद्रीय मंत्री पद से भी इस्तीफा दिया था जिसे स्वीकार कर लिया गया।

    मध्यप्रदेश में राज्यसभा की कुल 11 सीटें हैं। मुरुगन के इस्तीफे से पहले इनमें से 8 सीटें भाजपा और 3 सीटें कांग्रेस के पास थीं। अब एक सीट खाली होने के कारण प्रदेश से राज्यसभा में भाजपा के 7 सदस्य और कांग्रेस के 3 सदस्य रह गए हैं। उपचुनाव के जरिए रिक्त सीट भरी जाएगी। इस चुनाव में विधानसभा की संख्या और राजनीतिक दलों के विधायकों का समर्थन महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। राज्यसभा के लिए होने वाले इस चुनाव में आम जनता सीधे मतदान नहीं करती बल्कि निर्वाचित विधायक मतदान करते हैं।

    मध्यप्रदेश विधानसभा में कुल 230 सदस्य हैं। यदि सभी विधायक मतदान करते हैं और कोई मत अवैध नहीं होता है तो एक राज्यसभा सीट के चुनाव में जीत के लिए आवश्यक मतों का कोटा 116 होगा। ऐसे में चुनाव के दौरान विधायकों का समर्थन निर्णायक माना जाएगा। राजनीतिक दलों को उम्मीदवार के चयन के साथ अपने विधायकों का समर्थन सुनिश्चित करने पर भी ध्यान देना होगा। हालांकि उम्मीदवार कौन होगा और चुनाव में किस तरह की रणनीति अपनाई जाएगी इसे लेकर अंतिम तस्वीर आगे स्पष्ट होगी।

    फिलहाल चुनाव आयोग की घोषणा के बाद राज्यसभा उपचुनाव की प्रक्रिया शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है। 26 अक्टूबर को अधिसूचना जारी होने के बाद नामांकन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। 2 नवंबर तक उम्मीदवार अपना पर्चा दाखिल कर सकेंगे और 5 नवंबर तक नाम वापस लेने का मौका रहेगा। इसके बाद 12 नवंबर को मतदान और मतगणना के साथ चुनाव परिणाम सामने आएगा। इस उपचुनाव से मध्यप्रदेश की राज्यसभा में रिक्त प्रतिनिधित्व पूरा होगा।

  • दिग्विजय सिंह की सनातन यात्रा पर सियासी संग्राम तेज, चंदा चोरी के आरोप और बैलेट पेपर की मांग से गरमाई राजनीति, भाजपा सांसद ने उठाए सवाल

    दिग्विजय सिंह की सनातन यात्रा पर सियासी संग्राम तेज, चंदा चोरी के आरोप और बैलेट पेपर की मांग से गरमाई राजनीति, भाजपा सांसद ने उठाए सवाल


    उज्जैन।  मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह की उज्जैन से अयोध्या तक निकाली जा रही सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा के दूसरे दिन राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई। बुधवार को तराना रोड स्थित श्री साईं कुंज कॉलोनी से शुरू हुई यात्रा में दिग्विजय सिंह समर्थकों के साथ पैदल चलते नजर आए। हाथ में डंडा लेकर चल रहे दिग्विजय सिंह ने चंदा चोरी और वोट चोरी के मुद्दे उठाते हुए दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि चंदा चोरी करने वालों को पकड़ा जाए और जेल भेजा जाए। उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी EVM के बजाय बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग भी दोहराई।

    दिग्विजय सिंह की यह यात्रा करीब 950 किलोमीटर लंबी है और लगभग 70 दिनों में अयोध्या स्थित राम मंदिर पहुंचने का कार्यक्रम है। यात्रा के दूसरे दिन पिंगलेश्वर जोड़ नहारिया जोड़ सायराखेड़ी और देवनखेड़ी होते हुए ताजपुर जोड़ तक पहुंचने की योजना थी। इसके बाद भोजन और विश्राम के लिए रुकने तथा शाम को देवास जिले के सिंदूरिया गांव में पड़ाव डालने का कार्यक्रम प्रस्तावित था। दिग्विजय सिंह ने इस यात्रा को शिव धाम से राम धाम तक की यात्रा बताया। इस दौरान उन्होंने समर्थकों के साथ बम-बम भोले का उद्घोष किया जबकि समर्थकों ने जय सियाराम के नारे लगाए। उन्होंने कहा कि सनातनी परंपरा में माता सीता का अपमान स्वीकार नहीं किया जा सकता।

    यात्रा को लेकर मॉडल से साध्वी बनीं हर्षा रिछारिया ने भी टिप्पणी की थी। उन्होंने सवाल उठाया था कि राम मंदिर के निर्माण के समय वैसा उत्साह दिखाई नहीं दिया जैसा अब मंदिर के चंदे पर सवाल उठाते हुए नजर आ रहा है। इस बयान पर प्रतिक्रिया पूछे जाने पर दिग्विजय सिंह ने कहा कि उन्हें छोड़ दीजिए मैं उन्हें जानता भी नहीं। उनके इस जवाब के बाद यात्रा को लेकर चल रही बयानबाजी एक बार फिर चर्चा में आ गई।

    दिग्विजय सिंह की पत्नी अमृता राय ने यात्रा को धार्मिक आस्था और स्वाभिमान से जुड़ा अभियान बताया। उनके मुताबिक चढ़ावे की कथित चोरी और धर्म के नाम पर धोखाधड़ी जैसी घटनाओं से सनातन धर्म को मानने वाले लोगों के स्वाभिमान को ठेस पहुंचती है। यात्रा के जरिए इन्हीं मुद्दों को उठाकर लोगों तक अपनी बात पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। यात्रा प्रभारी चंदर सिंह सोंधिया के अनुसार यात्रा में स्थायी रूप से शामिल होने के लिए अब तक करीब तीन हजार लोगों ने पंजीकरण कराया है जबकि अलग-अलग स्थानों पर हजारों लोग इससे जुड़ रहे हैं।

    दिग्विजय सिंह ने राम जन्मभूमि के लिए जुटाए गए चंदे में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए कहा है कि मामले में छोटे कर्मचारियों पर कार्रवाई हुई लेकिन बड़े अधिकारियों की जिम्मेदारी तय नहीं की गई। उन्होंने वोट चोरी और नोट चोरी के मुद्दे भी उठाए हैं। यात्रा के दौरान पर्चे बांटने और राष्ट्रपति के नाम रिपोर्ट पेश करने की बात भी कही गई है। दिग्विजय सिंह का कहना है कि उनका उद्देश्य अपनी बात जनता तक पहुंचाना और न्याय की मांग करना है। उन्होंने अपनी अनुपस्थिति में यात्रा से जुड़े संवाद की जिम्मेदारी अमृता राय को सौंपने की बात भी कही है।

    दूसरी ओर उज्जैन से भाजपा सांसद अनिल फिरोजिया ने इस यात्रा पर सवाल उठाते हुए इसे राजनीतिक नौटंकी बताया। उन्होंने कहा कि सनातन का ध्वज भगवा है लेकिन यात्रा में भगवा ध्वज दिखाई नहीं दे रहा। उन्होंने तिरंगे का उल्लेख करते हुए कहा कि यह देश का मान सम्मान और अभिमान है। सांसद ने दिग्विजय सिंह को संत के बजाय राजनेता बताते हुए कांग्रेस के पुराने रुख और भगवान राम से जुड़े विवादों का भी जिक्र किया। इस तरह यात्रा के धार्मिक उद्देश्य और उसके राजनीतिक मायनों को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच बयानबाजी तेज हो गई है।

  • राम मंदिर के चंदे पर दिग्विजय की पदयात्रा को लेकर हर्षा का बयान, पूछा- पहले मंदिर निर्माण पर उत्साह क्यों नहीं दिखाया

    राम मंदिर के चंदे पर दिग्विजय की पदयात्रा को लेकर हर्षा का बयान, पूछा- पहले मंदिर निर्माण पर उत्साह क्यों नहीं दिखाया


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मॉडल से साध्वी बनीं हर्षा रिछारिया ने पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की उज्जैन से अयोध्या तक प्रस्तावित सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा पर सवाल उठाए हैं। हर्षा ने दिग्विजय सिंह का सीधे नाम लिए बिना उन पर निशाना साधते हुए कहा कि जब अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण हुआ था तब वैसा उत्साह और खुशी दिखाई नहीं दी जैसी अब मंदिर के चंदे को लेकर सवाल उठाने में नजर आ रही है। उन्होंने यह भी सवाल किया कि चुनाव नजदीक आने पर ही भगवान राम की याद क्यों आ रही है और अब उन्हें इंसाफ दिलाने की बात क्यों की जा रही है।

    दशहरे से पहले दिए गए अपने बयान में हर्षा रिछारिया ने कहा कि एक ओर देशभर में विजयादशमी का पर्व बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की जीत के प्रतीक के रूप में मनाया जा रहा है वहीं दूसरी ओर मध्य प्रदेश के एक पूर्व मुख्यमंत्री उज्जैन से अयोध्या तक पदयात्रा निकालने की तैयारी कर रहे हैं। हर्षा के मुताबिक इस यात्रा का उद्देश्य राम मंदिर के निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाना है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अब संबंधित नेता भगवान राम को इंसाफ दिलाने का संकल्प लेकर यात्रा पर निकल रहे हैं।

    हर्षा ने राम मंदिर निर्माण से जुड़ी लंबी कानूनी लड़ाई का जिक्र करते हुए विपक्ष की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर निर्माण के फैसले के समय विरोध किया गया था और अतीत में भगवान राम के अस्तित्व तथा रामसेतु को लेकर भी सवाल उठाए गए थे। हर्षा का कहना है कि जब राम मंदिर का निर्माण हुआ तब वैसी खुशी और उत्साह दिखाई नहीं दिया जैसा अब मंदिर के चंदे से जुड़े आरोपों को लेकर दिखाया जा रहा है। हालांकि मंदिर निर्माण और उससे जुड़े राजनीतिक विवादों पर अलग-अलग दलों और नेताओं के अपने-अपने विचार रहे हैं।

    अपने बयान में हर्षा ने यात्रा के समय और उसके पीछे की मंशा को लेकर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने पूछा कि राम मंदिर बनने के बाद अब अचानक भगवान राम की शरण में जाने की जरूरत क्यों महसूस हो रही है। उन्होंने चुनाव नजदीक होने या किसी व्यक्ति को पद दिलाने जैसी संभावनाओं का उल्लेख करते हुए यात्रा के उद्देश्य पर सवाल उठाया। ये हर्षा के राजनीतिक आरोप और उनकी व्यक्तिगत व्याख्या हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यात्रा निकालने वाले की मंशा पूरी होगी या नहीं यह उन्हें नहीं पता लेकिन देश के लिए जो उचित होगा वही होना चाहिए।

    बयान के आखिर में हर्षा रिछारिया ने दिग्विजय सिंह को यात्रा के लिए शुभकामनाएं भी दीं। उन्होंने कहा कि प्रयास करना चाहिए और अंत में हर व्यक्ति राम की शरण में जाता है। उनके इस बयान के बाद दिग्विजय सिंह की प्रस्तावित पदयात्रा को लेकर राजनीतिक और धार्मिक मुद्दों पर चर्चा तेज हो गई है।

    दिग्विजय सिंह ने उज्जैन से अयोध्या तक करीब 950 से 1000 किलोमीटर की पदयात्रा का ऐलान किया है। यात्रा का उद्देश्य राम मंदिर के लिए जुटाए गए चंदे में कथित अनियमितताओं के मुद्दे को उठाना बताया गया है। प्रस्तावित यात्रा में विभिन्न स्थानों पर लोगों और सामाजिक संगठनों के जुड़ने की संभावना है। हर्षा रिछारिया के बयान ने इस यात्रा को लेकर राजनीतिक बहस को एक नया मोड़ दिया है। अब इस मुद्दे पर संबंधित नेताओं की प्रतिक्रियाओं और यात्रा के दौरान उठाए जाने वाले सवालों पर नजर रहेगी।

  • दिग्विजय सिंह की सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा पर रोजाना 30 से 50 हजार खर्च का अनुमान, बोले कौन भंडारा करा रहा मुझे नहीं पता

    दिग्विजय सिंह की सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा पर रोजाना 30 से 50 हजार खर्च का अनुमान, बोले कौन भंडारा करा रहा मुझे नहीं पता


    उज्जैन। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने 20 अक्टूबर को उज्जैन से अपनी सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा की शुरुआत की। उज्जैन से अयोध्या तक करीब 950 किलोमीटर की इस पदयात्रा को लगभग 70 दिनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यात्रा शुरू होने से पहले दिग्विजय सिंह ने अपनी पत्नी अमृता सिंह के साथ पार्थिव शिवलिंग का पूजन किया। इसके बाद उन्होंने भगवान महाकाल के दर्शन कर यात्रा की शुरुआत की। इस पदयात्रा में साधु संतों सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों कांग्रेस कार्यकर्ताओं विधायकों और महिला प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। आयोजकों के मुताबिक पहले दिन करीब तीन हजार लोगों के पहुंचने का अनुमान है जबकि आगे के पड़ावों पर रोजाना एक हजार से पंद्रह सौ लोग यात्रा से जुड़ सकते हैं।

    दिग्विजय सिंह ने यह यात्रा मंदिरों में चढ़ावे और धार्मिक स्थलों की व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग को लेकर शुरू की है। उनका कहना है कि यात्रा के दौरान भोजन नाश्ते चाय और ठहरने की व्यवस्था में अलग-अलग स्थानों पर लोग स्वेच्छा से सहयोग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें यह जानकारी नहीं है कि कौन व्यक्ति किस स्थान पर भंडारा करा रहा है। दिग्विजय सिंह ने अपनी नर्मदा परिक्रमा का उदाहरण देते हुए बताया कि उस दौरान भी कई लोग अपने भंडारे की व्यवस्था यात्रा में शामिल कराने के लिए आग्रह करते थे। उनके अनुसार इस बार भी लोग खुद आगे आकर यात्रियों के भोजन और अन्य जरूरतों का इंतजाम कर रहे हैं।

    यात्रा की व्यवस्थाओं पर प्रतिदिन करीब 30 से 50 हजार रुपये खर्च होने का अनुमान है। कांग्रेस विधायक महेश परमार के मुताबिक छोटे ग्रामीण पड़ावों पर खर्च लगभग 20 से 30 हजार रुपये तक रह सकता है जबकि बड़े पड़ावों पर यह राशि 50 से 60 हजार रुपये तक पहुंच सकती है। करीब 70 दिन की यात्रा के लिए कुल 30 से 40 लाख रुपये खर्च होने का अनुमान बताया गया है। शुरुआती पड़ावों पर यात्रियों के रुकने भोजन चाय और नाश्ते की व्यवस्था स्थानीय लोगों के सहयोग से की गई है। आयोजकों के मुताबिक रास्ते में लगभग हर तीन किलोमीटर पर चाय और सुबह के नाश्ते के साथ दोनों समय भोजन की व्यवस्था करने के लिए लोग आगे आए हैं।

    यात्रा के दौरान प्रतिदिन लगभग 15 किलोमीटर पैदल चलने की योजना है। इसकी तैयारी के लिए दिग्विजय सिंह रोज करीब आठ किलोमीटर पैदल चलने का अभ्यास कर रहे थे। उज्जैन से निकलने के बाद यात्रा तराना और कनासिया होते हुए शाजापुर जिले की ओर बढ़ेगी। इसके बाद यह सारंगपुर खुजनेर राजगढ़ चाचौड़ा आरोन अशोकनगर और चंदेरी सहित कई क्षेत्रों से गुजरेगी। मध्य प्रदेश के बाद यात्रा उत्तर प्रदेश में प्रवेश करेगी और तालबेहट जेरोन ओरछा चिरगांव उरई कालपी कानपुर देहात लखनऊ देहात और बाराबंकी के रास्ते अयोध्या पहुंचेगी। यात्रा का अंतिम पड़ाव राम मंदिर निर्धारित किया गया है।

    इस पदयात्रा के साथ एक विशेष रथ भी चल रहा है। इसमें भगवान राम लक्ष्मण माता सीता और हनुमान की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। रथ में गंगा यमुना शिप्रा कावेरी और नर्मदा नदियों के जल से भरे कलश भी रखे गए हैं। आयोजकों के अनुसार कई संतों ने यात्रा को समर्थन और आशीर्वाद दिया है। महामंडलेश्वर कंप्यूटर बाबा सहित अन्य धार्मिक हस्तियों के इसमें शामिल होने की बात कही गई है। ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और द्वारका शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती का भी समर्थन मिलने की जानकारी आयोजकों ने दी है।

    यात्रा में शामिल होने पहुंचीं फराह खान ने कहा कि वह अपनी इच्छा से इस पदयात्रा में शामिल हुई हैं। उन्होंने मंदिरों से सोने की चोरी और धार्मिक स्थलों की व्यवस्था में पारदर्शिता जैसे मुद्दों को महत्वपूर्ण बताया। फराह खान के मुताबिक वह शुरुआती पांच से छह दिन यात्रा में रहेंगी और पारिवारिक कार्यक्रम के बाद दोबारा इसमें शामिल होंगी। आयोजकों का कहना है कि रास्ते में अलग-अलग स्थानों पर लोग यात्रा से जुड़ेंगे। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि करीब 950 किलोमीटर लंबी यह पदयात्रा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार कब अयोध्या पहुंचती है और मंदिरों की व्यवस्था में पारदर्शिता का मुद्दा किस तरह आगे बढ़ता है।

  • जबलपुर नगर निगम आयुक्त के ट्रांसफर पर सियासी घमासान, भाजपा विधायक ने राम से की तुलना, कांग्रेस ने जताई आपत्ति

    जबलपुर नगर निगम आयुक्त के ट्रांसफर पर सियासी घमासान, भाजपा विधायक ने राम से की तुलना, कांग्रेस ने जताई आपत्ति


    जबलपुर । जबलपुर में नगर निगम आयुक्त रामप्रकाश अहिरवार के तबादले को लेकर सियासी विवाद खड़ा हो गया है। पाटन से भाजपा विधायक अजय विश्नोई की सोशल मीडिया पोस्ट चर्चा में आ गई जिसमें उन्होंने दशहरे के दिन जबलपुर से राम का हरण हो जाने की बात लिखी। पोस्ट सामने आने के बाद कांग्रेस नेताओं ने इस पर आपत्ति जताई। विवाद बढ़ने के बीच विधायक ने अपनी पोस्ट हटा दी लेकिन तबादले को लेकर राजनीतिक चर्चा जारी है।

    राज्य शासन की ओर से दो दिन पहले अधिकारियों के तबादले का आदेश जारी किया गया था। इसके तहत जबलपुर नगर निगम आयुक्त रामप्रकाश अहिरवार को भोपाल नगर निगम आयुक्त बनाया गया है। इस प्रशासनिक बदलाव के बाद विधायक अजय विश्नोई ने सोशल मीडिया पर टिप्पणी करते हुए लिखा कि दशहरे के दिन जबलपुर से राम का हरण हो गया। पोस्ट में रामप्रकाश अहिरवार के नाम में राम शब्द को लेकर भगवान श्रीराम से तुलना किए जाने का अर्थ निकाला गया। इसके बाद सोशल मीडिया पर इस टिप्पणी को लेकर प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं।

    पोस्ट वायरल होने के बाद कांग्रेस नेताओं ने भी सवाल उठाए। युवा कांग्रेस नेता दृगपाल सिंह लोदी ने आपत्ति जताते हुए पूछा कि रामप्रकाश अहिरवार की तुलना भगवान श्रीराम से क्यों की गई। इस टिप्पणी को लेकर राजनीतिक बहस शुरू हो गई। हालांकि उपलब्ध जानकारी के अनुसार विधायक विश्नोई ने बाद में अपनी पोस्ट हटा दी। इसके बावजूद यह मामला शहर के राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

    इस घटनाक्रम में नगर निगम आयुक्त का तबादला और उस पर की गई राजनीतिक टिप्पणी दोनों चर्चा के केंद्र में हैं। अहिरवार को भोपाल नगर निगम आयुक्त बनाए जाने के बाद जबलपुर में नए प्रशासनिक नेतृत्व को लेकर भी सवाल उठ सकते हैं। वहीं विधायक की पोस्ट ने धार्मिक प्रतीकों के राजनीतिक इस्तेमाल को लेकर बहस छेड़ दी है। कांग्रेस नेताओं ने टिप्पणी पर आपत्ति जताई जबकि पोस्ट हटाए जाने के बाद विवाद की चर्चा सोशल मीडिया पर जारी रही।

    इस मामले में एक तथ्यात्मक गलती भी सामने आई। युवा कांग्रेस नेता दृगपाल सिंह लोदी ने अपनी पोस्ट में अजय विश्नोई को कांग्रेस का विधायक बता दिया जबकि विश्नोई भाजपा के नेता हैं और पाटन विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे में विवाद के बीच राजनीतिक पहचान को लेकर भी गलत जानकारी साझा होने का मामला सामने आया।

    फिलहाल उपलब्ध जानकारी में विधायक अजय विश्नोई की पोस्ट हटाए जाने और कांग्रेस नेताओं की आपत्ति की बात सामने आई है। नगर निगम आयुक्त का तबादला शासन के आदेश के तहत हुआ है जबकि पोस्ट को लेकर उठे सवाल राजनीतिक प्रतिक्रिया का हिस्सा हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासनिक फेरबदल के साथ दशहरे के धार्मिक संदर्भ को जोड़कर नई बहस पैदा कर दी है।

  • सिंधिया के अपनी तो जैसे तैसे डांस की चर्चा, विजयवर्गीय के भजन पर सियासी तंज, गड्ढों के झटकों से हिल गए BJP प्रदेश अध्यक्ष

    सिंधिया के अपनी तो जैसे तैसे डांस की चर्चा, विजयवर्गीय के भजन पर सियासी तंज, गड्ढों के झटकों से हिल गए BJP प्रदेश अध्यक्ष


    भोपाल। मध्य प्रदेश की सियासत में इन दिनों नेताओं के भाषणों के साथ उनके डांस और भजन की प्रस्तुतियां भी चर्चा का विषय बन रही हैं। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से लेकर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और पूर्व मंत्री कमल पटेल तक के वीडियो सोशल मीडिया पर लोगों का ध्यान खींच रहे हैं। वहीं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की एक रील सड़क की बदहाली को लेकर चर्चा में आ गई है। इन वीडियो में कहीं मनोरंजन नजर आ रहा है तो कहीं लोग गाने और भजन के बोल के आधार पर सियासी मायने निकाल रहे हैं।

    केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया अशोक नगर में युवाओं के साथ संवाद कार्यक्रम के दौरान एक गाने पर थिरकते नजर आए। उन्होंने अपनी तो जैसे तैसे कोई ऐसे या वैसे कट जाएगी आपका क्या होगा जनाब ए आली गाने पर डांस किया। उनकी इस प्रस्तुति की चर्चा होने लगी। लोगों ने उनके अंदाज को पसंद किया लेकिन गाने के बोल ने भी सियासी गलियारों में चुटकी लेने का मौका दे दिया। अब इस बात पर कयास लगाए जा रहे हैं कि आखिर इस गाने को लेकर लोग क्या संदेश तलाश रहे हैं। हालांकि सिंधिया की ओर से किसी खास राजनीतिक संदेश की बात सामने नहीं आई है।

    दूसरी ओर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का भजन भी चर्चा में है। एक गरबा आयोजन के दौरान वे महाकाल डमरू वाले तू न संभाले तो हमें कौन संभाले भजन गाते नजर आए। विजयवर्गीय के भजन गाने का यह पहला मौका नहीं है लेकिन इस बार इसके बोल को लेकर राजनीतिक चर्चाएं शुरू हो गईं। प्रदेश की राजनीति में उनकी भूमिका और सत्ता संगठन में कथित उपेक्षा को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच लोग इसे अपने अपने अंदाज में देख रहे हैं। हालांकि इसे उनकी निजी आस्था और भक्ति की प्रस्तुति के रूप में भी देखा जा सकता है। इसी बीच उनके पुराने मित्र और पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने चुटकी लेते हुए उन्हें इंदौर के पितृ पर्वत स्थित हनुमान मंदिर में बैठने की सलाह दी। उनकी टिप्पणी ने इस पूरे मामले को और दिलचस्प बना दिया।

    पूर्व मंत्री कमल पटेल का एक वीडियो भी चर्चा में है। हरदा में आयोजित भजन संध्या के दौरान तुम अगर साथ देने का वादा करो मैं यूं ही मस्त नगमे लुटाता रहूं गाना बजा तो वे खुद को थिरकने से रोक नहीं पाए। कमल पटेल पिछला विधानसभा चुनाव हार चुके हैं और अब उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चाएं होती रहती हैं। ऐसे में उनके डांस को लेकर भी लोग मजाकिया अंदाज में राजनीतिक संकेत तलाश रहे हैं। कुछ लोग इसे जनता का साथ पाने की इच्छा से जोड़कर देख रहे हैं लेकिन यह लोगों की अपनी व्याख्या है।

    इधर मध्य प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की कार में भजन सुनते हुए बनाई गई रील भी चर्चा में आ गई। वे कार में बैठकर माता के भजन सुन रहे थे। इसी दौरान वाहन सड़क पर बने गड्ढों से गुजरा तो कार हिचकोले खाने लगी और अध्यक्ष भी झटकों से हिलते नजर आए। इस वीडियो को लेकर लोगों ने सड़क की हालत पर सवाल उठाए। भले ही वीडियो बनाने का उद्देश्य भक्ति का आनंद लेना रहा हो लेकिन उसमें दिखाई देने वाले गड्ढों ने सड़क की बदहाली को भी सामने ला दिया।

    इसी राजनीतिक हलचल के बीच सरकारी विभाग में अनुकंपा नियुक्तियों को लेकर एक मामला भी सामने आया है। खबर के मुताबिक एक विभाग के सचिव स्तर के अधिकारी ने 25 लोगों की सूची तैयार कर वरिष्ठ अधिकारी को भेजी थी। जांच में पता चला कि सूची में शामिल 15 लोगों को पहले ही अनुकंपा नियुक्ति मिल चुकी थी और वे नौकरी कर रहे थे। इसके बाद वरिष्ठ अधिकारी ने सूची तैयार करने वाले अधिकारी को फटकार लगाई। अब बाकी 10 लोगों की नियुक्ति को लेकर आगे क्या निर्णय होता है इस पर नजर रहेगी। इस तरह मध्य प्रदेश में नेताओं के वीडियो से लेकर प्रशासनिक कामकाज तक कई मुद्दे चर्चा में हैं।

  • नाबालिग से कथित अभद्रता पर भाजपा मंडल अध्यक्ष पर केस, कमल चौहान ने वीडियो जारी कर मांगी निष्पक्ष जांच

    नाबालिग से कथित अभद्रता पर भाजपा मंडल अध्यक्ष पर केस, कमल चौहान ने वीडियो जारी कर मांगी निष्पक्ष जांच


    इंदौर । इंदौर के कनकेश्वरी गरबा पंडाल में 15 वर्षीय नाबालिग बालिका के साथ कथित अभद्रता और धक्का-मुक्की का मामला लगातार चर्चा में है। इस मामले में भाजपा मंडल अध्यक्ष कमल चौहान के खिलाफ हीरा नगर पुलिस द्वारा प्रकरण दर्ज किए जाने के बाद उनका वीडियो सामने आया है। वीडियो में कमल चौहान अपनी सफाई देते हुए निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि वह दोषी साबित होते हैं तो उन्हें कड़ी सजा दी जाए। उनके इस बयान के बाद मामले को लेकर बहस और तेज हो गई है।
    जानकारी के मुताबिक कनकेश्वरी गरबा पंडाल में नाबालिग बालिका के साथ कथित अभद्रता और धक्का-मुक्की का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। वीडियो सामने आने के बाद विवाद बढ़ा और मामले में कार्रवाई की मांग उठने लगी। इसके बाद हीरा नगर पुलिस ने कमल चौहान के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया। मामले में पॉक्सो कानून के तहत कार्रवाई की बात सामने आने के बाद इसकी गंभीरता को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। हालांकि आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
    प्रकरण दर्ज होने के बाद कमल चौहान ने अपना पक्ष रखते हुए वीडियो जारी किया। उन्होंने दावा किया कि बालिका के पिता शराब के नशे में पंडाल पहुंचे थे और बालिका भी आयोजन स्थल के अंदर आने का प्रयास कर रही थी। कमल चौहान ने कहा कि वह कई वर्षों से गरबा आयोजन में सेवाएं देते आ रहे हैं। उन्होंने अपनी ओर से हुई गलती के लिए माफी मांगते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की अपील की।
    अपने बयान में कमल चौहान ने यह भी कहा कि यदि जांच में वह दोषी पाए जाते हैं तो उन्हें राजवाड़ा चौराहे पर फांसी पर लटका दिया जाए। उनके इस बयान को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। एक ओर कमल चौहान अपनी सफाई और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं तो दूसरी ओर लोग नाबालिग से जुड़े मामले में तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
    इस मामले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की आयोजन में मौजूदगी को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। खबर के अनुसार घटना के कुछ समय बाद मुख्यमंत्री इसी गरबा आयोजन में पहुंचे थे और उन्होंने कन्या पूजन किया था। इसके बाद यह सवाल उठ रहा है कि घटना की जानकारी मुख्यमंत्री तक समय पर पहुंची थी या नहीं और पुलिस कार्रवाई में देरी क्यों हुई। इन सवालों पर स्थिति जांच और संबंधित अधिकारियों के बयान के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
    मामले को लेकर सोशल मीडिया पर सरकार की कार्रवाई और कानून व्यवस्था को लेकर भी बहस हो रही है। कुछ लोग इस घटना की तुलना उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था से कर रहे हैं। हालांकि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले जांच के तथ्यों का सामने आना जरूरी है। नाबालिग से जुड़े इस संवेदनशील मामले में निष्पक्ष जांच और कानून के अनुसार कार्रवाई महत्वपूर्ण है। फिलहाल कमल चौहान के खिलाफ दर्ज प्रकरण में आरोपों की पुष्टि होना बाकी है और आगे की कार्रवाई पर सबकी नजर बनी हुई है।