Tag: Madhya Pradesh politics

  • MP की सियासत में एक दिन में तीन बड़े सीन ट्रंप के ऐलान से शिवराज ट्रेंड में CM मोहन ने हेमंत को बीच में बैठाया दिग्विजय ने भाजपा पर साधा निशाना

    MP की सियासत में एक दिन में तीन बड़े सीन ट्रंप के ऐलान से शिवराज ट्रेंड में CM मोहन ने हेमंत को बीच में बैठाया दिग्विजय ने भाजपा पर साधा निशाना


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजनीति में शुक्रवार को अलग अलग घटनाओं ने सियासी माहौल को खासा दिलचस्प बना दिया। एक तरफ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक ऐलान के बाद मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगे तो दूसरी तरफ प्रदेश भाजपा में सत्ता और संगठन के बीच कथित मनमुटाव की चर्चाओं के बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल एक मंच पर साथ नजर आए। इसी बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भाजपा को लेकर पूछे गए सवाल पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भाजपा भाड़ में जाए।

    दरअसल ट्रंप ने कहा है कि अगर उनकी रिपब्लिकन पार्टी चुनाव जीतती है तो हर अमेरिकी वयस्क को 5000 डॉलर दिए जाएंगे। इस घोषणा के बाद सोशल मीडिया पर शिवराज सिंह चौहान की लाड़ली बहना योजना से जोड़कर कई पोस्ट और तस्वीरें वायरल होने लगीं। शिवराज समर्थकों ने इसे मामा के मॉडल की वैश्विक चर्चा से जोड़ दिया। इसके बाद शिवराज सिंह चौहान ट्रेंड में आ गए।

    जब उनसे पूछा गया कि सोशल मीडिया पर यह चर्चा है कि ट्रंप भी आपके मॉडल को अपना रहे हैं तो शिवराज ने कहा कि लाड़ली बहना योजना सस्ती लोकप्रियता के लिए नहीं लाई गई थी। उनका कहना था कि इस योजना का उद्देश्य महिलाओं को उनका अधिकार और न्याय दिलाना था। इसके बाद सोशल मीडिया पर तरह तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं और लोगों ने ट्रंप के ऐलान को लाड़ली बहना योजना से जोड़कर अपनी राय जाहिर की।

    इधर मध्य प्रदेश भाजपा में सत्ता और संगठन के बीच कथित खटपट की चर्चाओं के बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने साथ आकर अलग संदेश देने की कोशिश की। दोनों नेता भाजपा कार्यालय में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक साथ नजर आए। जब दोनों की दोस्ती को लेकर सवाल किया गया तो मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी दोस्ती तो पहले से ही प्रगाढ़ है। इस दौरान दोनों नेता मुस्कुराते दिखाई दिए।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले भी दोनों नेताओं की मुलाकात हुई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के घर पहुंचे। वहां दोनों के बीच बंद कमरे में बातचीत हुई। इसके बाद दोनों एक ही वाहन से भाजपा कार्यालय पहुंचे। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भी मुख्यमंत्री ने प्रदेश अध्यक्ष को बीच की कुर्सी पर बैठने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि आप प्रदेश अध्यक्ष हैं इसलिए यहां बैठिए। इस पूरे घटनाक्रम को भाजपा के भीतर एकजुटता का संदेश देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

    उधर दतिया में कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह अपनी सनातन स्वाभिमान यात्रा को लेकर जानकारी दे रहे थे। इसी दौरान भाजपा की ओर से यात्रा पर उठाए जा रहे सवालों को लेकर उनसे सवाल किया गया। पत्रकार के सवाल पर दिग्विजय सिंह ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भाजपा भाड़ में जाए और इसके बाद वहां से चले गए।

    इसी बीच सागर के जहरीली शराबकांड की न्यायिक जांच से जुड़ी फाइल को लेकर भी मंत्रालय के गलियारों में चर्चा है। सरकार ने मामले की जांच के लिए एक सदस्यीय आयोग बनाने का ऐलान किया है लेकिन दावा किया जा रहा है कि जांच से संबंधित फाइल वल्लभ भवन की चौथी मंजिल पर पिछले कुछ दिनों से आगे नहीं बढ़ी है। अब सवाल उठ रहे हैं कि जब सरकार जांच का ऐलान कर चुकी है तो प्रक्रिया में देरी क्यों हो रही है। इस पूरे घटनाक्रम ने मध्य प्रदेश की सियासत में एक बार फिर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • MP की सियासत में अजब गजब किस्से कहीं 80s के अंदाज में नेता तो कहीं अधिकारी का पुतला बचाने आग में कूदा कर्मचारी

    MP की सियासत में अजब गजब किस्से कहीं 80s के अंदाज में नेता तो कहीं अधिकारी का पुतला बचाने आग में कूदा कर्मचारी


    भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति और नौकरशाही में इन दिनों एक से बढ़कर एक दिलचस्प किस्से सामने आ रहे हैं। कहीं नेता सोशल मीडिया पर 80 के दशक के रेट्रो अंदाज में नजर आ रहे हैं तो कहीं अपने अधिकारी के सम्मान में कर्मचारी आग की लपटों तक पहुंच गया। दूसरी तरफ श्योपुर में विकास कार्यों का हिसाब बताने पहुंचे सांसद को पंच और सरपंचों के विरोध के बाद कार्यक्रम बीच में ही छोड़कर जाना पड़ा। यानी प्रदेश की सियासत में इन दिनों खबरों के साथ किस्से भी खूब बन रहे हैं।

    सबसे पहले बात नेताओं के रेट्रो अंदाज की। सोशल मीडिया पर इन दिनों 80 के दशक का रंग छाया हुआ है। पुराने दौर के कपड़े पुराने गाने और उस जमाने की तस्वीरों जैसा अंदाज लोगों को खूब पसंद आ रहा है। अब इस ट्रेंड से मध्य प्रदेश की राजनीति भी अछूती नहीं रही। मुख्यमंत्री मोहन यादव से लेकर शिवराज सिंह चौहान तक और दिग्विजय सिंह से लेकर कमलनाथ तक कई नेताओं की रेट्रो स्टाइल वाली तस्वीरें सोशल मीडिया पर दिखाई दे रही हैं। ज्योतिरादित्य सिंधिया कैलाश विजयवर्गीय नरोत्तम मिश्रा और जीतू पटवारी जैसे नेताओं के फोटो भी पुराने दौर की झलक दिखा रहे हैं। किसी का अंदाज पुराने फिल्मी सितारे जैसा नजर आ रहा है तो किसी की तस्वीर देखकर 80 के दशक की यादें ताजा हो रही हैं।

    अब बात नर्मदापुरम की जहां अधिकारी के प्रति कर्मचारी की वफादारी चर्चा का विषय बन गई। यहां आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता गंदगी और खराब सड़कों के विरोध में नगर पालिका के सीएमओ का पुतला जला रहे थे। इसी दौरान वहां मौजूद एक कर्मचारी पुतले को बचाने के लिए प्रदर्शनकारियों से भिड़ गया। पहले उसने हाथों से आग बुझाने की कोशिश की। जब आग नहीं बुझी तो पैरों से उसे हटाने लगा। इसके बाद कर्मचारी ने अपनी शर्ट उतारकर उससे आग बुझाने की कोशिश की। आखिरकार पानी डालकर पुतले को जलने से बचा लिया गया। इस दौरान कर्मचारी खुद भी झुलस गया। उसका कहना था कि जब उसके अधिकारी का पुतला जलाया जा रहा था तो वह चुप कैसे रह सकता था। अधिकारी के पुतले को बचाने के लिए कर्मचारी का इस तरह आग में उतरना अब चर्चा का विषय बना हुआ है।

    उधर श्योपुर में भाजपा सांसद शिवमंगल सिंह तोमर को पंच और सरपंचों के विरोध का सामना करना पड़ा। सांसद विकास कार्यों का जिक्र कर रहे थे तभी कार्यक्रम में मौजूद पंच और सरपंचों ने इलाके में काम नहीं होने को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए। विरोध बढ़ा तो एक उप सरपंच सांसद के सामने पहुंच गया। स्थिति ऐसी बनी कि सांसद को कार्यक्रम बीच में ही छोड़कर जाना पड़ा। विकास कार्यों का बखान करने पहुंचे सांसद के सामने जब स्थानीय प्रतिनिधियों ने ही सवाल खड़े किए तो कार्यक्रम का माहौल बदल गया।

    इसके बाद सागर से जुड़ी एक और चर्चा सामने आई है। जहरीली शराब कांड की जांच के लिए पहुंचे आबकारी विभाग के वरिष्ठ अधिकारी को कथित तौर पर कई घंटे तक सर्किट हाउस में ही इंतजार करना पड़ा। बताया गया कि पुलिस विभाग के एक अधिकारी से घटना से जुड़े तथ्यों और सबूतों को लेकर जानकारी मांगी गई थी लेकिन प्रक्रिया में काफी समय लग गया। बाद में मौके पर पहुंचने पर जांच अधिकारी को महत्वपूर्ण सबूत नहीं मिले। अब इस मामले में शिकायत किए जाने की चर्चा है और आगे प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।

    कुल मिलाकर मध्य प्रदेश में इन दिनों राजनीति और प्रशासन से जुड़े ये किस्से खूब चर्चा बटोर रहे हैं। कहीं सोशल मीडिया का रेट्रो ट्रेंड नेताओं पर चढ़ा है तो कहीं अधिकारी के प्रति कर्मचारी की वफादारी सुर्खियों में है और कहीं जनता के प्रतिनिधियों के सवालों ने नेताओं के दावों की परीक्षा ले ली है।

  • राहुल के कार्यक्रम से लेकर बुजुर्ग की पीठ पर पटवारी तक मध्य प्रदेश में दिनभर चर्चा में रहे सियासत और सिस्टम के ये किस्से

    राहुल के कार्यक्रम से लेकर बुजुर्ग की पीठ पर पटवारी तक मध्य प्रदेश में दिनभर चर्चा में रहे सियासत और सिस्टम के ये किस्से


    भोपाल।  मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों सियासी बयानबाजी के साथ नेताओं और सरकारी अमले से जुड़े कई दिलचस्प मामले भी चर्चा में हैं। इंदौर में राहुल गांधी के प्रस्तावित छात्रों की गूंज कार्यक्रम को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं का उत्साह देखने लायक रहा। कार्यक्रम के लिए रजिस्ट्रेशन का आंकड़ा डेढ़ लाख के पार पहुंचने के बाद कांग्रेस ने जमकर जश्न मनाया। शहर में राहुल गांधी का बड़ा कटआउट लगाया गया और आतिशबाजी के साथ ढोल नगाड़े बजाए गए। कार्यकर्ताओं ने एक दूसरे को मिठाई खिलाकर अपनी खुशी का इजहार किया।

    कांग्रेस इस कार्यक्रम को युवाओं से जोड़ने की कोशिश में जुटी है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी से लेकर पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह तक युवाओं के बीच पहुंचकर संवाद कर रहे हैं। पार्टी की कोशिश है कि राहुल गांधी के कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवाओं की भागीदारी हो। हालांकि कार्यक्रम को लेकर अभी अनुमति का पेंच बना हुआ है। यही वजह है कि कार्यक्रम आखिर किस स्थान पर होगा इसे लेकर भी स्थिति पूरी तरह साफ नहीं है।

    इस बीच भाजपा की ओर से राहुल गांधी के कार्यक्रम को लेकर तंज भी सामने आया है। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने राहुल गांधी को भाजपा का स्टार प्रचारक बताया। उनका कहना है कि राहुल गांधी जहां भी जाते हैं वहां अप्रत्यक्ष रूप से भाजपा को राजनीतिक फायदा मिलता है। इस बयान के बाद कार्यक्रम को लेकर सियासी चर्चाएं और तेज हो गई हैं।

    उधर आलीराजपुर में मंत्री नागर सिंह चौहान का अलग अंदाज देखने को मिला। स्कूली बच्चों की रैली देखकर उन्होंने अपना काफिला रुकवा दिया। बच्चों से बातचीत की और उनके साथ तस्वीरें भी खिंचवाईं। मंत्री ने बच्चों से यह भी पूछा कि वे उन्हें पहचानते हैं या नहीं। हालांकि बताया गया कि बच्चों में कुछ ही मंत्री को पहचान सके। इस पूरे घटनाक्रम को मंत्री की लोकप्रियता के अनौपचारिक टेस्ट के तौर पर देखा गया।

    सीधी से सामने आया एक वीडियो सरकारी कर्मचारियों की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े कर रहा है। वायरल वीडियो में पटवारी नीलेश नामदेव एक बुजुर्ग की पीठ पर बैठकर पानी से भरा नाला पार करते नजर आ रहे हैं। बताया गया कि पटवारी गांव में सर्वे के काम से पहुंचे थे। वीडियो करीब एक साल पुराना बताया जा रहा है लेकिन अब सामने आने के बाद प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए पटवारी को निलंबित कर दिया है। घटना ने सरकारी अमले के आम लोगों के प्रति व्यवहार को लेकर बहस छेड़ दी है।

    इसी बीच सत्ता के गलियारों से जुड़ी एक चर्चा भी सामने आई है। बताया जा रहा है कि एक आईएएस अधिकारी मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान प्रोटोकॉल का हवाला देकर बार बार स्टेट हैंगर पहुंच रहे थे। चर्चा है कि मुख्यमंत्री ने अपने ओएसडी से इस पर सवाल किया और कहा कि जरूरत होने पर अधिकारी को खुद बुलाया जाएगा। यह संदेश संबंधित अधिकारी तक पहुंचने की बात कही जा रही है। हालांकि इस तरह की अंदरूनी चर्चाओं की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

    कुल मिलाकर राहुल गांधी के कार्यक्रम को लेकर कांग्रेस का उत्साह भाजपा का तंज मंत्रियों के बदले अंदाज और सरकारी अमले से जुड़े विवादों ने मध्य प्रदेश की सियासत और प्रशासनिक हलकों में चर्चाओं का माहौल गर्म कर दिया है।

  • कल्पना और नवजात की मौत से गरमाई सियासत, मंत्रालय के सामने धरना दे रहे कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा पुलिस हिरासत में

    कल्पना और नवजात की मौत से गरमाई सियासत, मंत्रालय के सामने धरना दे रहे कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा पुलिस हिरासत में


    रीवा। मध्यप्रदेश की राजनीति में रीवा के संजय गांधी अस्पताल से जुड़ा कल्पना मिश्रा मौत मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। इस मामले में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग को लेकर भोपाल स्थित मंत्रालय के सामने धरना दे रहे कांग्रेस विधायक अभय मिश्रा को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। पुलिस कार्रवाई के दौरान धरना स्थल पर लगे पोस्टर और बैनर भी हटाए जाने की जानकारी सामने आई है। कांग्रेस विधायक की हिरासत के बाद इस मामले को लेकर सियासी बयानबाजी और तेज हो गई है। अभय मिश्रा सेमरिया विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक हैं और वे लंबे समय से रीवा के संजय गांधी अस्पताल में प्रसूता कल्पना मिश्रा और उसके नवजात बच्चे की मौत के मामले को उठा रहे हैं।

    जानकारी के अनुसार कल्पना मिश्रा को प्रसव के लिए संजय गांधी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। सी सेक्शन के बाद कल्पना और उसके नवजात बच्चे दोनों की मौत हो गई थी। इसके बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और इलाज में लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए। मामले ने तूल पकड़ा तो प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई की गई और दो डॉक्टरों तथा दो नर्सिंग स्टाफ को निलंबित किया गया। इसके बाद अस्पताल अधीक्षक को भी पद से हटाया गया और पूरे घटनाक्रम की जांच के आदेश दिए गए। हालांकि कल्पना मिश्रा के परिजन जिम्मेदार लोगों के खिलाफ FIR और सख्त कार्रवाई की मांग पर लगातार अड़े हुए हैं।

    इसी मामले को लेकर कांग्रेस ने आंदोलन तेज कर दिया है। अभय मिश्रा मंत्रालय के सामने धरना देकर सरकार से मामले में ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे थे। पुलिस ने धरना स्थल से उन्हें हिरासत में ले लिया जिसके बाद कांग्रेस ने सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाए। मामला केवल कल्पना मिश्रा और उसके नवजात की मौत तक सीमित नहीं रहा है बल्कि संजय गांधी अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर लगातार सामने आ रहे अलग अलग आरोपों को भी राजनीतिक मुद्दा बनाया जा रहा है।

    अभय मिश्रा ने इससे पहले अस्पताल की पोस्टमॉर्टम व्यवस्था को लेकर भी बेहद गंभीर आरोप लगाए थे और अस्पताल में निगरानी तथा व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े किए थे। हालांकि इन आरोपों की किसी स्वतंत्र जांच या आधिकारिक रिपोर्ट से पुष्टि सामने नहीं आई है। दूसरी ओर अस्पताल से जुड़े अन्य मामलों को लेकर भी कांग्रेस सरकार पर हमलावर है। एक मामले में मरीज को मृत घोषित किए जाने और बाद में उसके जीवित होने की बात सामने आने के बाद जांच की मांग उठी। इसके अलावा एक युवक को गलत इंजेक्शन लगाए जाने के आरोप तथा एक महिला मरीज के इलाज और देखरेख में लापरवाही के आरोपों ने भी अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। अस्पताल प्रबंधन ने इनमें से कुछ आरोपों को निराधार बताया है और कई मामलों में जांच की बात कही गई है।

    मामले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह भी सक्रिय हैं। उन्होंने रीवा में धरने के दौरान कल्पना मिश्रा और उसके नवजात की मौत का मुद्दा उठाते हुए प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े किए। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल को भी निशाने पर लिया और जवाबदेही तय करने की मांग की। कांग्रेस का कहना है कि जब तक जिम्मेदार लोगों के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं होती तब तक पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिल सकता।

    फिलहाल अभय मिश्रा को पुलिस हिरासत में लिए जाने के बाद यह मामला और अधिक राजनीतिक रूप लेता दिखाई दे रहा है। एक तरफ पीड़ित परिवार FIR और कठोर कार्रवाई की मांग कर रहा है जबकि दूसरी ओर सरकार और अस्पताल प्रशासन जांच तथा पहले से की गई कार्रवाई का हवाला दे रहे हैं। अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट और आगे होने वाली प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी है क्योंकि इसी से तय होगा कि कल्पना मिश्रा और उसके नवजात की मौत के मामले में जिम्मेदारी किसकी तय होती है और पीड़ित परिवार को आखिर कब तक न्याय मिल पाता है।

  • 17 सितंबर से BJP की 20 यात्राओं का आगाज: वड़नगर से काशी तक बनेगा सियासी सफर MP के 55 जिलों में पहुंचेगा अभियान

    17 सितंबर से BJP की 20 यात्राओं का आगाज: वड़नगर से काशी तक बनेगा सियासी सफर MP के 55 जिलों में पहुंचेगा अभियान


    भोपाल । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के मौके पर भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर भारत में बड़े जनसंपर्क अभियान की तैयारी शुरू कर दी है। 17 सितंबर से प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन के अवसर पर वड़नगर से वाराणसी और वाराणसी से वड़नगर के बीच कुल 20 यात्राएं निकाली जाएंगी। दोनों दिशाओं में 10-10 यात्राओं के लिए अलग अलग रूट तैयार किए जा रहे हैं ताकि इनके मार्ग आपस में न टकराएं। इस पूरे अभियान में मध्यप्रदेश को भी अहम केंद्र बनाया गया है। पार्टी ने प्रदेश के सभी 55 जिलों को इन यात्राओं से जोड़ने का लक्ष्य रखा है।

    बीजेपी की योजना के मुताबिक यह अभियान केवल यात्राओं और राजनीतिक संपर्क तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि जनभागीदारी सेवा गतिविधियों सरकारी योजनाओं के प्रचार और विकसित भारत 2047 के संकल्प को भी इससे जोड़ा जाएगा। गुजरात राजस्थान मध्यप्रदेश उत्तर प्रदेश छत्तीसगढ़ हरियाणा और दिल्ली से होकर गुजरने वाली इन यात्राओं में स्थानीय नागरिकों युवाओं महिलाओं विद्यार्थियों किसानों व्यापारियों और सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को अलग अलग गतिविधियों में शामिल करने की तैयारी है। अब तक 13 रूट तय किए जा चुके हैं जबकि अन्य मार्गों को अंतिम रूप देने पर मंथन जारी है।

    मध्यप्रदेश में यात्राओं के संचालन और व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी अलग अलग नेताओं को सौंपी जा रही है। पार्टी की कोशिश है कि यात्रा के हर प्रमुख पड़ाव को स्थानीय स्तर पर जनभागीदारी का केंद्र बनाया जाए। यहां लोगों से उनके क्षेत्र के विकास को लेकर सुझाव लिए जाएंगे और सरकारी योजनाओं से जुड़े लोगों की वास्तविक कहानियों को सामने लाया जाएगा। 25 आइकॉन अभियान के तहत प्रत्येक पड़ाव से किसान शिक्षक महिला उद्यमी खिलाड़ी या किसी अन्य क्षेत्र में प्रेरणादायक काम करने वाले व्यक्ति का चयन किया जाएगा। इनमें से 25 श्रेष्ठ लोगों की वीडियो कहानियां तैयार कर नमो ऐप के जरिए लोगों तक पहुंचाने की योजना है।

    अभियान में चिट्ठी 2047 के नाम के जरिए नागरिकों से यह पूछा जाएगा कि वे वर्ष 2047 तक अपने क्षेत्र और देश को किस रूप में देखना चाहते हैं। इसी तरह मेरे लिए भारत की प्रगति नाम से लोगों की राय रिकॉर्ड की जाएगी। अलग अलग स्थानों से जुटाई गई इन आवाजों को वाराणसी में जोड़कर एक विशेष फिल्म तैयार करने का प्रस्ताव है। यात्रा से स्थानीय प्रभावशाली लोगों और डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स को भी जोड़ा जाएगा।

    यात्रा के दौरान स्वतंत्रता सेनानियों और देश के लिए बलिदान देने वाले स्थानीय वीरों से जुड़े गांवों और स्मारकों से मिट्टी एकत्र करने की भी योजना है। यह मिट्टी वाराणसी के मुख्य कार्यक्रम में अर्पित की जाएगी। कई प्रमुख पड़ावों पर स्वास्थ्य शिविर लगाए जाएंगे जहां सामान्य जांच ब्लड प्रेशर और शुगर जांच के साथ चिकित्सा परामर्श उपलब्ध कराने की तैयारी है। सरकारी योजनाओं की जानकारी और आवेदन में मदद के लिए योजना पंजीकरण सहायता डेस्क भी लगाए जाएंगे।

    बीजेपी इस अभियान के जरिए वर्ष 2001 से 2026 तक हुए बदलावों को भी लोगों के सामने रखने की तैयारी कर रही है। पहले और अब प्रदर्शनी के जरिए सड़क स्कूल घर बिजली और दूसरी सुविधाओं में आए बदलावों को तस्वीरों और दस्तावेजों के माध्यम से दिखाया जाएगा। विकास की यात्रा नाम से नुक्कड़ नाटक भी आयोजित होंगे जिनमें एक परिवार की कहानी के जरिए विकास और सरकारी योजनाओं के असर को स्थानीय भाषा में समझाने की कोशिश की जाएगी।

    मोदी के जन्मदिन से डिजिटल अभियान पर भी खास जोर रहेगा। भाजपा इन्फ्लुएंसर्स और रील्स के जरिए खासकर युवा पीढ़ी तक पहुंचने की रणनीति बना रही है। प्रत्येक शक्ति केंद्र को कम से कम 10 रील तैयार करने का लक्ष्य दिया गया है। इन वीडियो में सरकारी योजनाओं से लाभ पाने वाले वास्तविक लोगों की कहानियां दिखाई जाएंगी। वीडियो में लाभार्थी का नाम स्थान जिला और संबंधित योजना के साथ उसके जीवन में आए बदलाव को सामने लाने की योजना है।

    कहानी बदलाव की अभियान के तहत करीब 25 लाख नागरिकों की वास्तविक कहानियां जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। इनमें से लगभग 25 हजार कहानियों को शॉर्टलिस्ट कर करीब 250 प्रभावशाली कहानियों को प्रोफेशनल तरीके से तैयार किया जाएगा। इंस्टाग्राम और यूट्यूब जैसे प्लेटफॉर्म पर इनका व्यापक प्रचार किया जाएगा।

    17 सितंबर की शाम आशीर्वाद का दीया अभियान के तहत बूथ स्तर पर लोगों के घरों में दीप जलाने की अपील की जाएगी। वहीं सेवा मेरा योगदान अभियान के तहत प्रत्येक नागरिक को कम से कम 25 मिनट समाज सेवा के लिए देने के लिए प्रेरित किया जाएगा। सेवा कार्य का फोटो या वीडियो बनाकर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर साझा करने की व्यवस्था भी प्रस्तावित है।

    गांवों में नमो सेवा गाथा के जरिए नुक्कड़ नाटक होंगे। आंगनवाड़ी केंद्रों पर आंगन का उत्सव आयोजित कर माताओं और कार्यकर्ताओं का सम्मान किया जाएगा। सेवा ज्योति यात्रा भी अलग अलग जिलों और गांवों से निकलेगी। इसके अलावा वड़नगर से काशी तक जल जन और सेवा संकल्प यात्रा में पवित्र नदियों का जल लेकर यात्रियों के पहुंचने की योजना है।

    अभियान में सेवा सेतु के जरिए विधानसभा स्तर पर कैंप लगाने की भी तैयारी है जहां केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ एक ही स्थान पर दिलाने की कोशिश होगी। नदी घाटों की सफाई और सौंदर्यीकरण से लेकर ह्यूमन रंगोली और भारत मंडला जैसे कार्यक्रम भी प्रस्तावित हैं। युवाओं के लिए राष्ट्रीय इनोवेशन चैलेंज आयोजित किया जाएगा जिसमें विद्यार्थी स्टार्टअप और इनोवेटर्स अपने विचार और तकनीकी समाधान प्रस्तुत करेंगे।

    इस पूरे अभियान का बड़ा समापन 17 अक्टूबर 2026 को प्रस्तावित जनसेवक महाकुंभ पंचायत से पार्लियामेंट के रूप में होगा। इसमें करीब 1.25 लाख जनप्रतिनिधियों के शामिल होने का अनुमान है। इस तरह बीजेपी का यह अभियान एक साथ जनसंपर्क सेवा सरकारी योजनाओं की पहुंच सांस्कृतिक जुड़ाव और डिजिटल प्रचार को जोड़ने की कोशिश करता दिखाई दे रहा है। पार्टी की रणनीति साफ है कि मोदी के जन्मदिन से शुरू होने वाला यह अभियान केवल जमीन पर होने वाले कार्यक्रमों तक सीमित न रहे बल्कि मोबाइल स्क्रीन और सोशल मीडिया के जरिए भी व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंचे।

  • MP में सियासत से लेकर नदी तक ‘आपदा में अवसर’! नरोत्तम का शक्ति प्रदर्शन, नेता जी की पिटाई की चर्चा

    MP में सियासत से लेकर नदी तक ‘आपदा में अवसर’! नरोत्तम का शक्ति प्रदर्शन, नेता जी की पिटाई की चर्चा


    भोपाल । मध्य प्रदेश की सियासत में इन दिनों तस्वीरों और चर्चाओं का दौर फिर तेज होता दिखाई दे रहा है। दतिया में पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा के निवास पर उमड़ी समर्थकों की भीड़ ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। जन्माष्टमी के मौके पर दिल्ली से लौटे नरोत्तम मिश्रा का समर्थकों ने जोरदार स्वागत किया। नरोत्तम मिश्रा ने भी कार्यकर्ताओं के बीच पहुंचकर उनका उत्साह बढ़ाया और अपने हाथों से मिठाई खिलाकर जन्माष्टमी की शुभकामनाएं दीं। इस दौरान कृष्ण जन्म से जुड़े भजनों और नारों से माहौल भक्तिमय नजर आया। हालांकि राजनीतिक नजरिए से देखें तो इस पूरी तस्वीर को उनके समर्थक शक्ति प्रदर्शन के तौर पर भी देख रहे हैं।

    दरअसल दतिया उपचुनाव में भाजपा की हार के बाद नरोत्तम मिश्रा की सक्रियता और राजनीतिक भविष्य को लेकर कई तरह की चर्चाएं सामने आई थीं। लेकिन पिछले कुछ समय में उनकी कई राजनीतिक मुलाकातों और सार्वजनिक मौजूदगी ने इन चर्चाओं को फिर हवा दे दी है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन से मुलाकात हो या ओरछा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ उनकी मौजूदगी या फिर भोपाल में सत्ता और संगठन से जुड़े नेताओं के साथ मेल-मुलाकात इन तस्वीरों को उनके समर्थक अलग संकेत के तौर पर देख रहे हैं। अब दतिया में समर्थकों का जुटना और उनका उत्साह यह संदेश देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है कि दादा की राजनीतिक पकड़ अभी भी कमजोर नहीं हुई है।

    उधर छतरपुर से सामने आई एक तस्वीर प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती है। देरी रोड पर उर्मिल नदी उफान पर है और तेज बहाव के कारण पानी पुल के ऊपर से गुजर रहा है। इसके बावजूद लोगों को नदी पार करने की मजबूरी बनी हुई है। इसी मजबूरी के बीच कुछ लोगों के लिए यह स्थिति कमाई का जरिया बन गई है। दावा है कि राहगीरों से 50-50 रुपए लेकर उन्हें उफनती नदी पार कराई जा रही है। जान जोखिम में डालकर लोग तेज बहाव के बीच रास्ता पार करने को मजबूर हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि ऐसी खतरनाक स्थिति में प्रशासन की ओर से पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम क्यों नजर नहीं आए। लोगों की मजबूरी और खतरे के बीच चल रहा यह कथित कारोबार व्यवस्था की गंभीर तस्वीर सामने रखता है।

    वहीं मध्य प्रदेश की राजनीति से जुड़ी एक और दिलचस्प चर्चा पूर्व सांसद लक्ष्मण सिंह को लेकर है। कांग्रेस से निष्कासित चल रहे लक्ष्मण सिंह इन दिनों राजनीति से इतर संगीत की ओर बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। जन्माष्टमी के मौके पर उन्होंने खुद वीडियो जारी कर बताया कि वे गाना सीख रहे हैं और इस दौरान भजन भी सुनाए। राहुल गांधी पर टिप्पणी के बाद कांग्रेस से निष्कासन और उसके बाद नई पार्टी बनाने के संकेतों के बीच उनकी राजनीतिक राह को लेकर काफी चर्चा हुई थी। लेकिन फिलहाल उनके सुर राजनीति से ज्यादा संगीत में साधे जा रहे हैं। अब देखना यह होगा कि छोटे राजा साहब के सुर आगे किस दिशा में जाते हैं।

    इसी बीच राजधानी भोपाल और आसपास के राजनीतिक गलियारों में एक नेता जी की कथित पिटाई की चर्चा भी गर्म है। सूत्रों के हवाले से चर्चा है कि नेता जी के साथ दो अलग-अलग मौकों पर मारपीट हुई। दावा किया जा रहा है कि पहली घटना एक बिल्डिंग में हुई जबकि दूसरी बार उन्हें रास्ते में रोककर पीटा गया। यहां तक चर्चा है कि इस कथित मारपीट में उनके कुछ दांत भी टूट गए। हालांकि नेता जी और उनके करीबियों ने ऐसी किसी घटना से इनकार किया है और मामला पुलिस थाने तक पहुंचने की भी जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में इस चर्चा की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। बावजूद इसके सियासी और स्थानीय गलियारों में यह मामला फिलहाल खूब चर्चा में है।

    कुल मिलाकर दतिया में नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों की भीड़ से लेकर छतरपुर की उफनती नदी और भोपाल के सियासी गलियारों में चल रही चर्चाओं तक मध्य प्रदेश में इन दिनों घटनाएं अलग-अलग रंग दिखा रही हैं। कहीं शक्ति प्रदर्शन के मायने निकाले जा रहे हैं तो कहीं व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं और कहीं राजनीति से दूर संगीत के सुर सुनाई दे रहे हैं। मध्य प्रदेश की सियासत में इन तस्वीरों और चर्चाओं का असर आने वाले दिनों में किस रूप में दिखाई देता है यह देखना दिलचस्प होगा।

  • मध्य प्रदेश की राजनीति में अजब रंग फायरिंग वाला स्वागत मंत्री का अनोखा इशारा और गड्ढों में विकास देखने वाला बयान हुआ वायरल

    मध्य प्रदेश की राजनीति में अजब रंग फायरिंग वाला स्वागत मंत्री का अनोखा इशारा और गड्ढों में विकास देखने वाला बयान हुआ वायरल


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजनीति इन दिनों सिर्फ बड़े फैसलों और चुनावी रणनीतियों को लेकर ही नहीं बल्कि नेताओं के बयानों और उनके आसपास घटने वाले रोचक घटनाक्रमों को लेकर भी चर्चा में है। कहीं एक वरिष्ठ नेता के स्वागत में हवाई फायरिंग कर दी गई तो कहीं मंत्री के हाथ के इशारे ने लोगों को चुटकी लेने का मौका दे दिया। दूसरी ओर गड्ढों से भरी सड़कों को लेकर मंत्री का ऐसा बयान सामने आया जिसने सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी। इन सब घटनाओं ने यह साबित कर दिया कि राजनीति में कभी कभी एक छोटा सा दृश्य भी बड़ी चर्चा का विषय बन जाता है।

    बुरहानपुर में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह के साथ कुछ ऐसा हुआ जिसने वहां मौजूद लोगों को भी चौंका दिया। अजय सिंह कांग्रेस नेता अजय रघुवंशी के घर पहुंचे थे और उनके स्वागत की तैयारियां चल रही थीं। इसी दौरान अचानक हवाई फायरिंग की गई। माला पहनाने के समय हुई गोली की आवाज से अजय सिंह कुछ देर के लिए सहम गए। बताया गया कि उन्होंने फायरिंग करने वाले व्यक्ति से ऐसा न करने की बात भी कही। इसके बाद जब दोबारा फायरिंग हुई तो वह फिर चौंक गए। अब इस घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तरह तरह की चर्चाएं हो रही हैं। लोग सवाल उठा रहे हैं कि स्वागत के नाम पर इस तरह की गतिविधियां कितनी उचित हैं।

    उधर जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट का एक वीडियो भी चर्चा का विषय बन गया। केन बेतवा लिंक परियोजना के विस्थापितों से बातचीत के दौरान मंत्री ने एक ग्रामीण से मुख्यमंत्री का नाम पूछा। जब ग्रामीण स्पष्ट जवाब नहीं दे सका तो मंत्री ने मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव का नाम बताया और फिर अपना परिचय भी दिया। उन्होंने खुद को इंदौर से आया बताते हुए अपने विभाग के बारे में जानकारी दी और कहा कि वह जल से जुड़ा विभाग संभालते हैं। लेकिन इस दौरान उनके हाथ के हाव भाव और इशारे को लेकर लोगों ने सोशल मीडिया पर टिप्पणियां शुरू कर दीं। वीडियो के सामने आने के बाद मंत्री का यह अंदाज चर्चा में आ गया।

    दमोह जिले के पथरिया में आनंद विभाग के मंत्री लखन पटेल ने सड़कों के गड्ढों को लेकर ऐसा बयान दिया जिसने लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने कहा कि आज के लोगों को सड़कों के गड्ढे दिखाई देते हैं लेकिन पुराने समय में कई जगह सड़कें ही नहीं थीं। मंत्री ने लोगों को अपने बुजुर्गों से पूछने की सलाह देते हुए कहा कि पहले सड़कें देखना भी बड़ी बात थी। उनके इस बयान पर लोग अलग अलग प्रतिक्रिया दे रहे हैं। कुछ इसे पुराने और नए दौर के विकास की तुलना बता रहे हैं तो कुछ लोग इसे खराब सड़कों की समस्या से ध्यान हटाने वाला बयान मान रहे हैं।

    इसी बीच खंडवा में एक प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान भाजपा सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल का फोन कॉल भी चर्चा में रहा। प्रशासन की टीम एक शराब दुकान के अहाते पर कार्रवाई कर रही थी तभी अधिकारी के पास सांसद का फोन आया। बताया गया कि कार्रवाई रुकवाने को लेकर बातचीत हुई लेकिन अधिकारी ने आदेश का हवाला देते हुए कार्रवाई जारी रखने की बात कही और सांसद को कलेक्टर से संपर्क करने का सुझाव दिया।

    इन घटनाओं ने मध्य प्रदेश की राजनीति को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है। नेताओं के बयान हों या सार्वजनिक कार्यक्रमों में होने वाली घटनाएं हर मामला अब तेजी से सोशल मीडिया तक पहुंच रहा है और जनता भी उस पर अपनी प्रतिक्रिया दे रही है।

  • माइक न मिलने पर जनपद अध्यक्ष का छलका दर्द, सिंधिया के कार्यक्रम में सियासी तकरार ने पकड़ा जोर

    माइक न मिलने पर जनपद अध्यक्ष का छलका दर्द, सिंधिया के कार्यक्रम में सियासी तकरार ने पकड़ा जोर


    शिवपुरी । शिवपुरी के बदरवास में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के कार्यक्रम के दौरान माइक को लेकर नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। सोमवार शाम बिजरौनी बायपास और दौलतपुर से खाइखेड़ा मार्ग निर्माण के भूमि पूजन कार्यक्रम में बदरवास जनपद अध्यक्ष मीरा बाई परिहार को मंच से बोलने का अवसर नहीं मिला। कार्यक्रम के बाद जनपद अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि वह अपनी बात रखने वाली थीं लेकिन उनका माइक हटा दिया गया। इसके बाद स्थानीय राजनीति में इस मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

    कार्यक्रम के दौरान जनपद अध्यक्ष मीरा बाई परिहार केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के सामने क्षेत्र से जुड़ी अपनी बात रखना चाहती थीं। उनका कहना है कि उन्होंने कोलारस विधायक महेंद्र यादव से भी उन्हें बोलने का अवसर देने की बात कही थी। जनपद अध्यक्ष के मुताबिक विधायक ने उन्हें अपनी बात वहीं से कहने के लिए कहा था लेकिन वह माइक के जरिए मंच से अपनी बात रखना चाहती थीं। उनका आरोप है कि उन्हें ऐसा करने का मौका नहीं दिया गया।

    कार्यक्रम समाप्त होने के बाद मीरा बाई परिहार ने विधायक महेंद्र यादव पर नाराजगी जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले करीब एक साल से जनपद क्षेत्र के विकास कार्यों में अड़चनें आ रही हैं। जनपद अध्यक्ष ने दावा किया कि विकास कार्यों से जुड़े मामलों को लेकर वह चार बार दिल्ली तक जा चुकी हैं लेकिन अब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है।

    मीरा बाई ने कहा कि जनपद अध्यक्ष के तौर पर जनता के लिए विकास कार्य कराना उनकी जिम्मेदारी है। लेकिन यदि विकास कार्यों के लिए जरूरी प्रक्रिया और फंड से जुड़े काम ही आगे नहीं बढ़ेंगे तो सरपंचों की मांगों को पूरा करना मुश्किल होगा। उन्होंने अधिकारियों और बिचौलियों पर भी काम में बाधा डालने के आरोप लगाए। उनका कहना है कि कई मामलों में ऑनलाइन एंट्री तक नहीं होने दी जा रही है। उन्होंने मीडिया के माध्यम से विकास फंड जल्द जारी करने की मांग की और संकेत दिया कि सुनवाई नहीं होने पर वह इस मुद्दे को बड़े स्तर पर उठा सकती हैं।

    वहीं कोलारस विधायक महेंद्र यादव ने पूरे मामले पर अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि मीरा बाई परिहार ने उनसे केंद्रीय मंत्री से कुछ कहने की इच्छा जताई थी। विधायक के मुताबिक उन्होंने जनपद अध्यक्ष से अपनी बात कागज पर लिखकर देने के लिए कहा था ताकि उनकी बात केंद्रीय मंत्री तक स्पष्ट रूप से पहुंचाई जा सके।

    विधायक ने कहा कि यदि जनपद अध्यक्ष ने माइक के जरिए केंद्रीय मंत्री और जनता के सामने अपनी बात रखने की इच्छा जताई होती तो उन्हें बोलने का अवसर जरूर दिया जाता। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री कोलारस रेलवे स्टेशन पर उज्जैनी एक्सप्रेस के नियमित ठहराव को हरी झंडी दिखाने वाले थे। इसी कारण मंच से बोलने का समय सीमित था और मंडल अध्यक्ष विधायक तथा सांसद को ही वक्तव्य का अवसर दिया गया।

    महेंद्र यादव ने मीरा बाई परिहार को पार्टी की वरिष्ठ नेता बताते हुए कहा कि केंद्रीय मंत्री अभी शिवपुरी में ही हैं और जनपद अध्यक्ष उनसे मुलाकात कर अपनी बात सीधे रख सकती हैं। विधायक ने यह भी कहा कि वह स्वयं मीरा बाई से इस मामले में चर्चा करेंगे।

    इस कार्यक्रम में क्षेत्र को रेल सुविधा की सौगात भी मिली। ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रयासों से कोलारस रेलवे स्टेशन पर उज्जैनी एक्सप्रेस के नियमित ठहराव को मंजूरी मिली है। इसके अलावा अशोकनगर रेलवे स्टेशन पर सोगरिया दानापुर एक्सप्रेस के ठहराव को भी स्वीकृति दी गई है। विकास कार्यों और रेल सुविधाओं के बीच मंच पर बोलने को लेकर उठा यह विवाद अब स्थानीय सियासत में चर्चा का विषय बन गया है।

  • विजय शाह मामले में राजभवन पहुंची कांग्रेस, राज्यपाल से मंत्री पर केस चलाने की मंजूरी देने की मांग

    विजय शाह मामले में राजभवन पहुंची कांग्रेस, राज्यपाल से मंत्री पर केस चलाने की मंजूरी देने की मांग

    भोपाल। जनजातीय कार्य विभाग मंत्री विजय शाह के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी न देने के सरकार के फैसले को लेकर कांग्रेस ने मोर्चा खोल दिया है। मंगलवार को नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में कांग्रेस विधायकों ने राजभवन पहुंचकर राज्यपाल मंगुभाई पटेल को ज्ञापन सौंपा। कांग्रेस ने कैबिनेट के फैसले पर पुनर्विचार कर मंत्री के खिलाफ केस चलाने की मंजूरी देने की मांग की। राज्यपाल ने मामले पर पुनर्विचार करने और सरकार से चर्चा के बाद उचित कदम उठाने का आश्वासन दिया है।

    मंत्री के खिलाफ कार्रवाई नहीं होने पर कांग्रेस का विरोध
    कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित बयान को लेकर विजय शाह पहले से ही राजनीतिक विवादों में घिरे हैं। इसी मामले में राज्य कैबिनेट द्वारा उनके खिलाफ अभियोजन की स्वीकृति नहीं देने के फैसले का कांग्रेस ने विरोध किया है। उमंग सिंघार के साथ विधायक आरिफ मसूद और सुरेश राजे भी राजभवन पहुंचे।

    राज्यपाल से मुलाकात के बाद सिंघार ने कहा कि सरकार अपनी बदनामी से बचने के लिए राज्यपाल को बीच में ला रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मुख्यमंत्री और सरकार के पास मंत्री को हटाने और केस चलाने की मंजूरी देने का अधिकार है, तो कार्रवाई क्यों नहीं की गई।

    ‘देश की बेटी के अपमान पर सरकार चुप’
    उमंग सिंघार ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ और ‘लाड़ली बहना’ जैसे अभियानों की बात करने वाली सरकार सेना की महिला अधिकारी के अपमान के मामले में चुप है। उन्होंने उच्चतम न्यायालय के आदेशों का हवाला देते हुए सरकार की नीयत पर भी सवाल उठाए।

    सिंघार के मुताबिक, राज्यपाल ने कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल को भरोसा दिलाया है कि वे मामले पर पुनर्विचार करेंगे और सरकार से चर्चा कर उचित कदम उठाएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने मंत्री पर कार्रवाई करने के बजाय जिम्मेदारी राज्यपाल के पाले में डाल दी है।

    केके मिश्रा ने भी सरकार पर साधा निशाना
    पीसीसी चीफ जीतू पटवारी के मीडिया सलाहकार केके मिश्रा ने भी मामले में सरकार के फैसले पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि गैर-जमानती धाराओं में दर्ज संज्ञेय अपराध में सरकार का यह फैसला उचित नहीं है। उनका कहना था कि यह मामला देश की संप्रभुता और भारतीय सेना के सम्मान से जुड़ा है।

    मिश्रा ने 2015 के व्यापमं मामले का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय तत्कालीन राज्यपाल के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज हुई थी। उन्होंने कहा कि राजभवन को संविधान और न्यायपालिका के सामने चुनौती खड़ा करने वाला संस्थान नहीं बनना चाहिए।

    यूसीसी को लेकर भी सरकार पर हमला
    राज्यपाल से मुलाकात के बाद उमंग सिंघार ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने इसे ‘काला कानून’ बताते हुए कहा कि कांग्रेस की सरकार बनने पर इसे खत्म किया जाएगा। सिंघार ने आरोप लगाया कि बहुमत के आधार पर विधानसभा में यह कानून पारित कराया गया है।

    विधायक आरिफ मसूद ने भी यूसीसी पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि इसके लागू होने से मुस्लिम समुदाय की धार्मिक स्वतंत्रता प्रभावित होगी और इसे संविधान के अनुच्छेद 29 से जोड़ते हुए सरकार की मंशा पर सवाल उठाए।

  • कर्नल सोफिया कुरैशी विवाद में सियासत तेज, पटवारी ने राष्ट्रपति को लिखा पत्र; CM समेत पूरे मंत्रिमंडल की बर्खास्तगी की मांग

    कर्नल सोफिया कुरैशी विवाद में सियासत तेज, पटवारी ने राष्ट्रपति को लिखा पत्र; CM समेत पूरे मंत्रिमंडल की बर्खास्तगी की मांग


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश में मंत्री विजय शाह से जुड़ा कर्नल सोफिया कुरैशी विवाद एक बार फिर राजनीतिक रूप से गरमा गया है। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस मामले को लेकर राष्ट्रपति को पत्र लिखकर विजय शाह को मंत्री पद से बर्खास्त करने की मांग की है। पटवारी ने अपने पत्र में मध्य प्रदेश सरकार के उस फैसले पर भी सवाल उठाए हैं जिसमें सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित विशेष जांच दल द्वारा मांगी गई अभियोजन की मंजूरी को राज्य सरकार ने कथित तौर पर स्वीकार नहीं किया। कांग्रेस ने इसे न्यायिक प्रक्रिया और संवैधानिक जवाबदेही से जुड़ा गंभीर विषय बताया है।

    जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि मंत्री विजय शाह को राजनीतिक संरक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी केवल एक व्यक्ति का अपमान नहीं बल्कि सेना की गरिमा से जुड़ा मामला है। पटवारी ने कहा कि सेना का सम्मान किसी राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं बल्कि पूरे देश के नागरिकों का राष्ट्रीय स्वाभिमान है। इसी आधार पर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर भी सवाल उठाते हुए उनसे इस मामले में स्पष्ट रुख सामने रखने की मांग की।

    पटवारी ने राष्ट्रपति को लिखे पत्र में मुख्यमंत्री मोहन यादव समेत पूरे मंत्रिमंडल की बर्खास्तगी की मांग भी की है। उनका आरोप है कि यदि सरकार किसी मंत्री के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया में अभियोजन की मंजूरी रोकती है तो इससे यह सवाल खड़ा होता है कि क्या सत्ता में बैठे लोगों को कानून से अलग कोई संरक्षण हासिल है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने इस पूरे घटनाक्रम को मध्य प्रदेश के राजनीतिक इतिहास का शर्मनाक अध्याय बताते हुए संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और न्यायिक प्रक्रिया की गरिमा बनाए रखने की अपील की है।

    इस विवाद की शुरुआत 11 मई 2025 को इंदौर के महू के रायकुंडा गांव में हुए हलमा कार्यक्रम के दौरान हुई थी। यहां जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह ने ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में भारतीय सेना की कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर विवादित टिप्पणी की थी। उनके बयान को लेकर व्यापक राजनीतिक और सामाजिक विरोध हुआ था। मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने विशेष जांच दल यानी SIT के जरिए जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ाई। जांच के बाद मंत्री के खिलाफ अभियोजन की अनुमति को लेकर राज्य सरकार के सामने मामला पहुंचा।

    अब राज्य सरकार की ओर से अभियोजन की मंजूरी नहीं दिए जाने के आरोप ने विवाद को फिर हवा दे दी है। कांग्रेस का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित SIT की कार्रवाई के बावजूद सरकार का रुख कई सवाल खड़े करता है। वहीं मामले में अगली सुनवाई 31 अगस्त को होनी है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट की ओर से अभियोजन की मंजूरी में देरी को लेकर सख्त रुख अपनाए जाने की बात भी सामने आई है।

    मामले में अब सरकार के सामने कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तर पर चुनौती है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक यदि अभियोजन की मंजूरी दी जाती है तो सरकार को इसकी जानकारी सुप्रीम कोर्ट के समक्ष देनी होगी और इसके बाद नियमानुसार आगे की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। वहीं अभियोजन की मंजूरी नहीं मिलने की स्थिति में भी मामला पूरी तरह खत्म नहीं होता। मंत्री पद से हटने के बाद विजय शाह के खिलाफ कार्रवाई के लिए पूर्व सरकारी अनुमति की आवश्यकता नहीं रहने की स्थिति बन सकती है।

    ऐसे में 31 अगस्त की सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से पहले जीतू पटवारी की राष्ट्रपति को चिट्ठी ने इस मामले को एक बार फिर प्रदेश की राजनीति के केंद्र में ला दिया है। कांग्रेस जहां इसे सेना के सम्मान और संवैधानिक जवाबदेही से जोड़ रही है वहीं अब सबकी नजर राज्य सरकार के अगले कदम और सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई पर टिकी है।