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  • CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस का देशभर में प्रदर्शन, भोपाल से दिल्ली और पटना तक बढ़ा विरोध

    CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कांग्रेस का देशभर में प्रदर्शन, भोपाल से दिल्ली और पटना तक बढ़ा विरोध

    नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस और विपक्षी कार्यकर्ताओं का विरोध प्रदर्शन सोमवार को कई राज्यों में देखने को मिला। मध्य प्रदेश, दिल्ली, बिहार, राजस्थान, झारखंड और हिमाचल प्रदेश सहित विभिन्न स्थानों पर कार्यकर्ताओं ने सड़कों पर उतरकर उनके इस्तीफे की मांग की। प्रदर्शन के दौरान कई जगह पुलिस ने बैरिकेडिंग कर भीड़ को रोकने की कोशिश की, जबकि पटना में प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया गया।

    विरोध प्रदर्शन का केंद्र मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली को लेकर विपक्ष की ओर से लगाए जा रहे आरोप रहे। विपक्षी दलों का कहना है कि निर्वाचन आयोग में महत्वपूर्ण फैसलों को लेकर असहमति सामने आई है और मुख्य चुनाव आयुक्त अन्य चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों को पर्याप्त महत्व नहीं दे रहे हैं। इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने अलग-अलग राज्यों में विरोध दर्ज कराया।

    मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों को चुनाव आयोग के कार्यालय तक पहुंचने से रोकने के लिए पुलिस प्रशासन ने बड़ी संख्या में बल तैनात किया और कई स्थानों पर बैरिकेड लगाए। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने बैरिकेड पार करने की कोशिश की। कुछ प्रदर्शनकारी बैरिकेड के ऊपर से कूदकर आगे बढ़ने का प्रयास करते दिखाई दिए, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की।

    मध्य प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने प्रदर्शन के दौरान ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों को लेकर देश में चिंता है और लोकतांत्रिक व्यवस्था की रक्षा के लिए कांग्रेस सड़कों पर उतर रही है। उन्होंने युवाओं, किसानों और नागरिकों के अधिकारों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि कांग्रेस संविधान की रक्षा के लिए राहुल गांधी के साथ खड़ी है।

    बिहार की राजधानी पटना में भी मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुआ। यहां वामपंथी दलों के कार्यकर्ता प्रदर्शन कर रहे थे, जिन्हें नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया। प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर नारेबाजी की और निर्वाचन प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर अपना विरोध दर्ज कराया।

    पटना में बिहार यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज के मेडिकल छात्रों का प्रदर्शन भी जारी था। छात्र अपनी अलग मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। इस दौरान शहर में अलग-अलग स्थानों पर विरोध प्रदर्शन के कारण पुलिस और प्रशासन को सुरक्षा व्यवस्था संभालनी पड़ी।

    नई दिल्ली में भारतीय युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए अपना विरोध दर्ज कराया और इस्तीफे की मांग उठाई। प्रदर्शन को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई और पुलिस ने प्रदर्शनकारियों की गतिविधियों पर निगरानी रखी।

    हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में भी कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने निर्वाचन प्रक्रिया और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली से जुड़े मुद्दों को लेकर अपना विरोध जताया।

    इस तरह अलग-अलग राज्यों में हुए प्रदर्शनों के जरिए कांग्रेस और विपक्षी कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को प्रमुखता से उठाया। वहीं, पुलिस और प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को संवेदनशील स्थानों तक पहुंचने से रोकने के लिए बैरिकेडिंग और अन्य सुरक्षा इंतजाम किए।

  • छात्रों की गूंज कार्यक्रम पर सियासी वार कैलाश विजयवर्गीय ने राहुल गांधी को बताया बीजेपी का अप्रत्यक्ष स्टार प्रचारक

    छात्रों की गूंज कार्यक्रम पर सियासी वार कैलाश विजयवर्गीय ने राहुल गांधी को बताया बीजेपी का अप्रत्यक्ष स्टार प्रचारक


    नई दिल्ली । कांग्रेस नेता राहुल गांधी के इंदौर में आयोजित छात्रों की गूंज कार्यक्रम को लेकर मध्य प्रदेश में सियासी बयानबाजी जारी है। इसी क्रम में प्रदेश सरकार में मंत्री और भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय ने राहुल गांधी पर तंज कसते हुए उन्हें बीजेपी का अप्रत्यक्ष स्टार प्रचारक बताया। विजयवर्गीय ने दावा किया कि राहुल गांधी जहां भी जाते हैं वहां बीजेपी को फायदा होता है। उनकी यह टिप्पणी सुसनेर में एक राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान सामने आई।

    राहुल गांधी ने 19 सितंबर को इंदौर में छात्रों की गूंज कार्यक्रम में युवाओं से संवाद किया था। इस दौरान उन्होंने शिक्षा व्यवस्था परीक्षा प्रणाली रोजगार और छात्रों से जुड़े कई मुद्दे उठाए थे। राहुल गांधी ने सरकार पर भी सवाल खड़े किए थे। कार्यक्रम में छात्रों की समस्याओं और उनके भविष्य से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया था।

    कार्यक्रम के बाद बीजेपी और कांग्रेस के बीच बयानबाजी तेज हो गई। इससे पहले भी बीजेपी नेताओं ने कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मिमिक्री को लेकर सवाल उठाए थे जबकि कांग्रेस ने कार्यक्रम को छात्रों के मुद्दों से जोड़कर अपना पक्ष रखा था। इस पूरे विवाद के बीच कैलाश विजयवर्गीय ने राहुल गांधी के कार्यक्रम पर कटाक्ष किया।

    सुसनेर में नगर परिषद अध्यक्ष उपचुनाव के लिए बीजेपी प्रत्याशी के समर्थन में रोड शो और सभा के दौरान विजयवर्गीय ने कांग्रेस पर भी निशाना साधा। उन्होंने राहुल गांधी के कार्यक्रम में मनोरंजन और रैपर का जिक्र करते हुए कांग्रेस पर तंज कसा। इसके बाद उन्होंने राहुल गांधी को लेकर कहा कि बीजेपी के लिए वह अप्रत्यक्ष स्टार प्रचारक जैसे हैं और उनके कहीं जाने पर बीजेपी को फायदा होता है।

    विजयवर्गीय की इस टिप्पणी को कांग्रेस और बीजेपी के बीच जारी राजनीतिक वार-पलटवार की कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है। इंदौर का छात्रों की गूंज कार्यक्रम कांग्रेस के छात्र और युवा संवाद अभियान का हिस्सा था। कार्यक्रम से पहले कांग्रेस ने इसे छात्रों की समस्याओं को सामने रखने वाला मंच बताया था। वहीं बीजेपी की ओर से कार्यक्रम और उसमें उठाए गए राजनीतिक मुद्दों पर सवाल खड़े किए गए थे।

    सुसनेर की सभा में विजयवर्गीय ने स्थानीय कांग्रेस विधायक को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने विकास कार्यों और राजनीतिक समर्थन को लेकर एक उदाहरण देते हुए कांग्रेस प्रत्याशी के जीतने की स्थिति में कागजी कार्रवाई का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस प्रत्याशी जीतकर उनके पास काम से संबंधित कागज लेकर आएगा तो वह उन्हें स्वीकार कर लेंगे लेकिन अंत में एक बॉक्स देने की बात कही। विजयवर्गीय ने इसी प्रसंग में कहा कि बॉक्स खोलने पर उसमें घंटी मिलेगी और लोगों को तय करना है कि उन्हें विकास चाहिए या घंटी बजानी है।

    इंदौर में राहुल गांधी के कार्यक्रम के बाद कांग्रेस ने छात्रों से जुड़े इस अभियान को प्रदेश के अन्य हिस्सों तक ले जाने की घोषणा भी की है। रिपोर्टों के मुताबिक कांग्रेस ने इस अभियान के जरिए युवाओं से शिक्षा रोजगार और परीक्षा से जुड़े मुद्दों पर संवाद बढ़ाने की योजना बनाई है।

    इस तरह राहुल गांधी के इंदौर दौरे के बाद छात्रों से जुड़े मुद्दों के साथ राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। कैलाश विजयवर्गीय की अप्रत्यक्ष स्टार प्रचारक वाली टिप्पणी इसी सियासी टकराव का हिस्सा है और आने वाले दिनों में इस पर कांग्रेस की ओर से प्रतिक्रिया भी देखने को मिल सकती है।

  • 27% OBC आरक्षण को लेकर राहुल गांधी का CM मोहन यादव को पत्र, 2022 से नियुक्ति के इंतजार में बैठे युवाओं के लिए उठाई आवाज

    27% OBC आरक्षण को लेकर राहुल गांधी का CM मोहन यादव को पत्र, 2022 से नियुक्ति के इंतजार में बैठे युवाओं के लिए उठाई आवाज


    भोपाल। मध्य प्रदेश में 27 प्रतिशत OBC आरक्षण और इससे जुड़ी रुकी नियुक्तियों का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में आ गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर 27 प्रतिशत OBC आरक्षण लागू करने और चयन प्रक्रिया पूरी कर चुके अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने की मांग की है। 22 सितंबर को लिखे गए पत्र को राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर भी सार्वजनिक किया। उन्होंने यह मुद्दा इंदौर में आयोजित छात्रों की गूंज कार्यक्रम के दौरान सामने आने के बाद उठाया है।

    राहुल गांधी ने अपने पत्र में कहा कि इंदौर के कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के कई छात्रों ने शिक्षा रोजगार और भविष्य से जुड़े सवाल उनके सामने रखे थे। इनमें OBC आरक्षण के तहत रुकी नियुक्तियों का मामला भी प्रमुखता से सामने आया। राहुल गांधी के अनुसार छात्रों ने बताया कि उन्होंने परीक्षाएं पास करने के साथ चयन प्रक्रिया भी पूरी कर ली है लेकिन 87:13 व्यवस्था के तहत OBC आरक्षण से जुड़े 13 प्रतिशत पदों पर नियुक्तियां लंबित हैं। उनके मुताबिक इन पदों पर चयनित अभ्यर्थी वर्ष 2022 से नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं।

    राहुल गांधी ने पत्र में यह भी कहा कि 27 प्रतिशत OBC आरक्षण का सभी राजनीतिक दलों ने समर्थन किया था लेकिन इसके बावजूद मामला अभी तक पूरी तरह सुलझ नहीं पाया है। उन्होंने मुख्यमंत्री से छात्रों की बात सुनने और चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति को लेकर रास्ता निकालने की मांग की। उनका कहना है कि लंबे समय से इंतजार कर रहे युवाओं का समय और अधिक नहीं बीतना चाहिए।

    यह पूरा विवाद मध्य प्रदेश में 27 प्रतिशत OBC आरक्षण के प्रावधान और इसके खिलाफ चल रही न्यायिक प्रक्रिया से जुड़ा है। 2019 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने OBC आरक्षण को 14 प्रतिशत से बढ़ाकर 27 प्रतिशत किया था। इसके बाद इस बढ़ोतरी को अदालत में चुनौती दी गई। इसी कानूनी विवाद के बीच भर्ती प्रक्रिया में 87:13 व्यवस्था अपनाई गई जिसमें 87 प्रतिशत पदों पर नियुक्तियां की जाती रहीं जबकि विवादित 13 प्रतिशत पदों को लंबित रखा गया।

    इंदौर के छात्रों की गूंज कार्यक्रम में भी इसी मुद्दे को लेकर अभ्यर्थियों ने राहुल गांधी के सामने अपनी बात रखी थी। छात्रों ने बताया था कि चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी नियुक्तियां लंबित रहने से उनका भविष्य प्रभावित हो रहा है। इसी बातचीत के बाद राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर मामले के समाधान की मांग की।

    दूसरी ओर इस मुद्दे पर मध्य प्रदेश सरकार की ओर से अलग पक्ष सामने आया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा है कि OBC आरक्षण से जुड़े विवाद को तथ्यों के साथ समझना चाहिए और सरकार की ओर से 13 प्रतिशत पदों को मनमाने तरीके से रोकने की बात सही नहीं है। वहीं मंत्री विश्वास सारंग ने राहुल गांधी के पत्र पर सवाल उठाते हुए कहा कि OBC आरक्षण का विवाद पिछली कांग्रेस सरकार के फैसले से जुड़ा है और मौजूदा सरकार 27 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए प्रतिबद्ध है।

    इस बीच OBC आरक्षण से जुड़ा मामला मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में भी विचाराधीन है। भर्ती और आरक्षण से जुड़े अलग अलग मामलों में अदालत की कार्यवाही के कारण 27 प्रतिशत आरक्षण के विवादित हिस्से पर अंतिम स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार बना हुआ है। अदालत में 27 प्रतिशत आरक्षण को लेकर पक्ष और विपक्ष में दलीलें पेश की जा चुकी हैं।

    राहुल गांधी की चिट्ठी के बाद अब 27 प्रतिशत OBC आरक्षण और लंबित नियुक्तियों का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में है। एक ओर चयनित अभ्यर्थी नियुक्ति और आरक्षण से जुड़े मामले के समाधान की मांग कर रहे हैं तो दूसरी ओर सरकार इस विवाद की जिम्मेदारी को लेकर कांग्रेस पर सवाल उठा रही है। ऐसे में आगे की स्थिति न्यायिक प्रक्रिया और सरकार की ओर से लिए जाने वाले फैसलों पर निर्भर रहेगी।

  • कहीं विधायक को वादा याद दिलाया तो कहीं मंच से दूरी मोदी के जन्मदिन पर भजन से लेकर भाजपा की अंदरूनी हलचल तक

    कहीं विधायक को वादा याद दिलाया तो कहीं मंच से दूरी मोदी के जन्मदिन पर भजन से लेकर भाजपा की अंदरूनी हलचल तक

    भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों छोटे छोटे घटनाक्रम भी चर्चा का विषय बन रहे हैं। देवास के सोनकच्छ में ऐसा ही एक मामला सामने आया जहां मंदिर में पूजा करने पहुंचे भाजपा विधायक राजेश सोनकर को पुजारी ने उनका पुराना वादा याद दिला दिया। पूजा-अर्चना के बाद जब विधायक मंदिर से बाहर निकले तो पुजारी ने उनसे सड़क निर्माण को लेकर सवाल कर दिया। पुजारी ने कहा कि पिछली बार जब विधायक यहां आए थे तब उन्होंने अगली बार डामर रोड से आने की बात कही थी लेकिन अब तक सड़क का निर्माण नहीं हुआ है। इस दौरान विधायक पुजारी की बात सुनते रहे। घटना का वीडियो सामने आने के बाद यह मामला चर्चा में आ गया है।

    दूसरी ओर ग्वालियर जिले के डबरा में भाजपा सांसद भारत सिंह कुशवाह द्वारा पूर्व मंत्री इमरती देवी को मंच पर बुलाए जाने के बावजूद उनके मंच पर नहीं जाने का मामला सामने आया। कार्यक्रम के दौरान सांसद ने उन्हें मंच पर आने के लिए बुलाया लेकिन इमरती देवी कार्यकर्ताओं के बीच नीचे ही बैठी रहीं। इस घटनाक्रम का वीडियो भी सामने आया है। बाद में जब उनसे मंच पर नहीं जाने को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि वहां तो मर्डर करने वाले भी बैठे हैं और ऐसे लोगों के साथ जाने का क्या मतलब है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वे किसी से नाराज नहीं हैं। उन्होंने खुद को भाजपा और ज्योतिरादित्य सिंधिया की कार्यकर्ता बताते हुए कहा कि उन्हें कार्यकर्ताओं के बीच बैठना पसंद है।

    इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के मौके पर छतरपुर में भाजपा विधायक ललिता यादव का भजन भी चर्चा में रहा। 17 सितंबर को भाजपा कार्यकर्ताओं ने प्रधानमंत्री का जन्मदिन मनाया। इसी दौरान ललिता यादव ने मोदी के नाम पर भजन गाया। उन्होंने मोदी जन्मे आधी रात सुनो री सखियां भजन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में मौजूद अन्य महिला नेताओं ने भी उनका साथ दिया। विधायक के इस भजन का वीडियो सामने आने के बाद इसकी चर्चा होने लगी।

    मध्य प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों से जुड़ी एक खबर भी चर्चा में है। एक ही विभाग के अलग अलग विंग में पदस्थ एक ही बैच के दो आईएएस अधिकारियों के बीच टेंडर की शर्तों को लेकर मतभेद की बात सामने आई है। इनमें एक महिला अधिकारी हैं। जानकारी के मुताबिक महिला अधिकारी अपनी तय की गई टेंडर शर्तों के अनुसार काम कराने के पक्ष में हैं जबकि दूसरे विंग में पदस्थ अधिकारी ने एक टेंडर की शर्तों में बदलाव कर दिया। बताया गया है कि नए पदस्थ अधिकारी के सामने टेंडर की फाइल आने के बाद उन्होंने शर्तों में बदलाव किया।

    इसके बाद महिला अधिकारी ने पत्र लिखकर टेंडर की शर्तों में बदलाव नहीं करने की बात कही। अब दोनों अधिकारियों के बीच विवाद का मुख्य मुद्दा यही बताया जा रहा है कि टेंडर की शर्तों में बदलाव करने का अधिकार किसके पास है। मामला बढ़ने के बाद यह प्रकरण वल्लभ भवन तक पहुंचने की बात सामने आई है। हालांकि इस मामले में संबंधित अधिकारियों की ओर से सार्वजनिक रूप से विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आने की जानकारी इस सामग्री में नहीं है।

    इस तरह देवास में सड़क के वादे को लेकर पुजारी का सवाल हो या डबरा में मंच पर नहीं जाने का घटनाक्रम और छतरपुर में प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर भाजपा विधायक का भजन इन घटनाओं ने मध्य प्रदेश के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में अलग अलग वजहों से चर्चा पैदा की है।

  • राहुल गांधी के 19 सितंबर के दौरे पर देवड़ा का निशाना: कांग्रेस के लंबे शासनकाल को लेकर उठाए सवाल

    राहुल गांधी के 19 सितंबर के दौरे पर देवड़ा का निशाना: कांग्रेस के लंबे शासनकाल को लेकर उठाए सवाल


    देवास । मध्य प्रदेश की सियासत में राहुल गांधी के 19 सितंबर के इंदौर दौरे से पहले बयानबाजी तेज हो गई है। राहुल गांधी इंदौर में छात्रों की गूंज कार्यक्रम में शामिल होने वाले हैं जहां छात्रों से शिक्षा व्यवस्था और उनसे जुड़े मुद्दों पर संवाद प्रस्तावित है। इस बीच मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने राहुल गांधी के दौरे को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा है। देवड़ा ने कहा कि राहुल गांधी के कितने भी दौरे हो जाएं इसका जनता पर कोई असर नहीं होगा। उन्होंने दावा किया कि जनता भारतीय जनता पार्टी पर भरोसा करती है और कांग्रेस के लंबे शासनकाल को भी नहीं भूली है।

    देवास में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर आयोजित सेवा संकल्प अभियान में शामिल होने पहुंचे देवड़ा ने मीडिया से बातचीत में राहुल गांधी के इंदौर दौरे को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कांग्रेस के लंबे शासनकाल का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस को अपने शासन के दौरान किए गए कामों का हिसाब देना चाहिए। देवड़ा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस के शासनकाल में कई घोटाले हुए और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दे भी बने रहे।

    उपमुख्यमंत्री ने सड़क बिजली और सिंचाई जैसे विषयों का जिक्र करते हुए कांग्रेस के पुराने शासन पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने करीब 60 वर्षों तक देश में शासन किया और अब जनता यह जानना चाहती है कि उस दौरान आम लोगों के लिए क्या काम किए गए। देवड़ा ने गरीबों के इलाज आवास और साफ पानी जैसी सुविधाओं को लेकर भी कांग्रेस से सवाल किए।

    राहुल गांधी का इंदौर कार्यक्रम 19 सितंबर को आयोजित होना है। छात्रों की गूंज नाम के इस कार्यक्रम में राहुल गांधी छात्रों से संवाद करेंगे। कार्यक्रम का फोकस शिक्षा व्यवस्था और छात्रों से जुड़े अनुभवों और समस्याओं पर बताया गया है। राहुल गांधी ने छात्रों से कार्यक्रम में शामिल होने और अपनी समस्याएं साझा करने की अपील भी की है।

    इंदौर में होने वाले कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हैं। कार्यक्रम के आयोजन स्थल को लेकर बदलाव हुआ है। रिपोर्टों के मुताबिक मूल रूप से प्रस्तावित नेहरू स्टेडियम में अनुमति नहीं मिलने के बाद क्षेत्रीय पार्क के पास वैकल्पिक स्थान तय किया गया है। आयोजन के लिए इंदौर विकास प्राधिकरण की ओर से जमीन के इस्तेमाल से जुड़ी अनुमति और भुगतान की प्रक्रिया भी चर्चा में रही है।

    देवड़ा ने राहुल गांधी के दौरे को लेकर कहा कि कांग्रेस के नेता चाहे जितने दौरे करें भाजपा सरकार को लेकर जनता का भरोसा बना हुआ है। यह बयान ऐसे समय आया है जब राहुल गांधी का इंदौर दौरा शिक्षा और छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर चर्चा में है। दूसरी ओर कांग्रेस इस कार्यक्रम के जरिए छात्रों और युवाओं की समस्याओं को सामने लाने की बात कह रही है।

    इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि राहुल गांधी के इंदौर पहुंचने से पहले ही मध्य प्रदेश में राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। एक तरफ कांग्रेस का कार्यक्रम छात्रों की समस्याओं और शिक्षा व्यवस्था पर केंद्रित है तो दूसरी तरफ भाजपा नेता इसे लेकर कांग्रेस के पिछले शासन और मौजूदा राजनीतिक दावों पर सवाल उठा रहे हैं। अब 19 सितंबर को होने वाले कार्यक्रम में राहुल गांधी छात्रों के साथ किन मुद्दों पर संवाद करते हैं और उसके बाद प्रदेश की राजनीति में किस तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आती हैं इस पर नजर रहेगी।

  • MP में सियासी हलचल तेज: मोदी के जन्मदिन पर नारे में गलती और गुना में किसान की खरी बात ने खींचा ध्यान

    MP में सियासी हलचल तेज: मोदी के जन्मदिन पर नारे में गलती और गुना में किसान की खरी बात ने खींचा ध्यान


    भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति में कई बार बड़े राजनीतिक बयान से ज्यादा छोटे घटनाक्रम चर्चा में आ जाते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर सिंगरौली में भाजपा विधायक से नारेबाजी के दौरान हुई चूक हो या इंदौर में राहुल गांधी के कार्यक्रम के मैदान का बढ़ा किराया या फिर गुना में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के सामने किसान की खाद को लेकर नाराजगी इन घटनाओं ने राजनीतिक गलियारों में अलग तरह की चर्चा पैदा कर दी है।

    सिंगरौली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने कार्यक्रम आयोजित किया था। इस दौरान देवसर से भाजपा विधायक राजेंद्र मेश्राम कार्यकर्ताओं से नारे लगवा रहे थे। उत्साह में उन्होंने नरेंद्र मोदी अमर रहे का नारा लगा दिया। लेकिन कार्यकर्ताओं की ओर से अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं आई। इसके बाद किसी ने नरेंद्र मोदी जिंदाबाद का नारा लगाया तो विधायक को अपनी गलती का एहसास हुआ। उन्होंने भी तुरंत जिंदाबाद के नारे लगाए और अपनी चूक पर मुस्कुराते नजर आए। कार्यक्रम में हुआ यह छोटा सा वाकया बाद में चर्चा का विषय बन गया।

    दूसरी ओर इंदौर में राहुल गांधी के छात्रों से जुड़े कार्यक्रम को लेकर मैदान के किराए का मुद्दा राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है। कार्यक्रम के लिए इंदौर विकास प्राधिकरण की ओर से पहले 10 लाख रुपए किराया लिया गया था। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने उस समय कहा था कि कार्यक्रम के लिए 10 लाख क्या 10 करोड़ रुपए भी मांगे जाते तो कांग्रेस उसे जुटाकर देती। अब आईडीए की ओर से मैदान के किराए के तौर पर चार लाख रुपए अतिरिक्त लिए जाने की बात सामने आई है। कांग्रेस ने इसे सरकार की ओर से की जा रही वसूली और दबाव से जोड़कर सवाल उठाए हैं। वहीं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कांग्रेस के पुराने बयान का हवाला देते हुए इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी है। इस पूरे विवाद में मैदान का किराया राजनीतिक बयानबाजी का विषय बन गया है।

    गुना में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के जनसंपर्क के दौरान किसानों ने खाद की समस्या को लेकर अपनी परेशानी बताई। एक किसान ने सिंधिया से सीधे कहा कि माला पहनाते-पहनाते जिंदगी निकल गई लेकिन खाद नहीं मिल रहा है। किसान की शिकायत सुनने के बाद सिंधिया ने मौके पर मौजूद कलेक्टर किशोर कुमार कन्याल से किसानों के नाम और मोबाइल नंबर नोट करने को कहा। कलेक्टर ने जब ठीक है कहा तो सिंधिया ने दोबारा उन्हें निर्देश दिया कि सिर्फ ठीक है कहने के बजाय नाम और नंबर लिखे जाएं। उन्होंने पेन और पैड निकालकर जानकारी नोट करने को कहा। इसके बाद किसानों की जानकारी दर्ज की गई।

    इन घटनाओं के बीच मध्य प्रदेश के प्रशासनिक गलियारों में भी एक अधिकारी की चर्चा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के मौके पर चल रहे सेवा संकल्प अभियान में वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों की अलग-अलग जिलों में जिम्मेदारी लगाई गई है। बताया जा रहा है कि मंत्रालय में तैनात एक अधिकारी की ड्यूटी राजधानी के नजदीकी जिले में लगाई गई थी लेकिन वे अभियान से जुड़े काम के बजाय मंत्रालय में बैठक में व्यस्त रहे। हालांकि इस संबंध में अधिकारी की ओर से कोई सार्वजनिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।

    इस तरह एक ही दिन में सिंगरौली से इंदौर और गुना तक सामने आए अलग-अलग घटनाक्रम ने मध्य प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में चर्चाओं को बढ़ा दिया है। कहीं नारेबाजी में हुई चूक सुर्खियां बनी तो कहीं कार्यक्रम के खर्च और किसानों की खाद समस्या ने राजनीतिक बहस को हवा दी।

  • भोपाल से सिंगरौली तक सवालों के घेरे में भाजपा नेता अतिथि विद्वानों ने शिवराज को रोका मंत्रियों से मीडिया ने पूछे तीखे सवाल

    भोपाल से सिंगरौली तक सवालों के घेरे में भाजपा नेता अतिथि विद्वानों ने शिवराज को रोका मंत्रियों से मीडिया ने पूछे तीखे सवाल


    भोपाल । मध्यप्रदेश में सेवा संकल्प अभियान को लेकर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भाजपा नेताओं को अलग अलग मुद्दों पर तीखे सवालों का सामना करना पड़ा। सिंगरौली में भाजपा विधायक रीति पाठक से यूजीसी से जुड़े सवाल पर जवाब मांगा गया तो उन्होंने इस मुद्दे पर बात करने से इनकार कर दिया और कुछ देर बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस छोड़कर चली गईं। वहीं सागर में मंत्री प्रहलाद पटेल से शराबकांड को लेकर सवाल हुआ जबकि शाजापुर में मंत्री नारायण सिंह पंवार से वंदे मातरम् को लेकर सवाल पूछा गया। इसी बीच भोपाल में अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे अतिथि विद्वानों ने केंद्रीय कृषि मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का काफिला रोककर उन्हें 11 सितंबर 2023 के आश्वासन की याद दिलाई।

    सिंगरौली में सेवा संकल्प अभियान की जानकारी देने के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई थी। इसी दौरान विधायक रीति पाठक से यूजीसी को लेकर सवाल किया गया। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक सवाल सुनने के बाद उन्होंने कहा कि प्रेस वार्ता जिस विषय पर रखी गई है उसी विषय पर बात की जाए। इसके बाद उन्होंने पत्रकारों के सवालों का जवाब दिए बिना कार्यक्रम समाप्त कर दिया और वहां से चली गईं।

    उधर भोपाल में उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार के आवास के बाहर अतिथि विद्वानों का प्रदर्शन जारी रहा। प्रदर्शन कर रहे करीब 200 अतिथि विद्वानों ने वहां से गुजर रहे शिवराज सिंह चौहान का काफिला रोक लिया। अतिथि विद्वानों ने उन्हें 11 सितंबर 2023 को भोपाल में हुई महापंचायत में किए गए आश्वासनों की याद दिलाई। उनका कहना है कि उस समय लगातार अध्यापन कर रहे अतिथि विद्वानों को बाहर नहीं किए जाने और फॉलन आउट की स्थिति से बचाने की बात कही गई थी।

    2023 की उस महापंचायत में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अतिथि विद्वानों के लिए कई घोषणाएं की थीं। इनमें फॉलन आउट अतिथि विद्वानों को रिक्त पदों पर दोबारा अवसर देने और लगातार अध्यापन कर रहे अतिथि विद्वानों को बाहर नहीं किए जाने की बात शामिल थी। इसके अलावा मासिक मानदेय और पीएससी भर्ती में आरक्षण से संबंधित घोषणाएं भी की गई थीं।

    मौजूदा प्रदर्शन में अतिथि विद्वानों की मुख्य मांग नियमितीकरण और नौकरी की स्थिरता को लेकर नीति बनाने की है। उनका कहना है कि जब तक स्थायी नीति नहीं बनती तब तक फॉलन आउट प्रक्रिया रोकी जाए। प्रदर्शनकारियों के अनुसार उच्च शिक्षा मंत्री से बातचीत के बाद भी इस मुद्दे पर तत्काल सहमति नहीं बनी।

    शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात के दौरान अतिथि विद्वानों ने अपने पुराने आश्वासनों का मुद्दा उठाया। रिपोर्टों के अनुसार चौहान ने कहा कि एक मुख्यमंत्री की घोषणा दूसरे मुख्यमंत्री को पूरी करनी चाहिए और उनकी मांग सरकार तक पहुंचाने का भरोसा दिया।

    सागर में सेवा संकल्प अभियान की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मंत्री प्रहलाद पटेल से बंडा शराबकांड को लेकर सवाल किया गया। मीडिया ने पूछा कि ऐसे मामले के बीच सेवा कार्यक्रमों का आयोजन कितना जरूरी है और इस घटना पर सरकार की प्रतिक्रिया क्या है। मंत्री ने कार्यक्रमों को सेवा से जुड़ा बताया लेकिन शराबकांड से जुड़े सवाल पर कोई विस्तृत जवाब नहीं दिया।

    शाजापुर में मंत्री नारायण सिंह पंवार से वंदे मातरम् को लेकर सवाल हुआ। मंत्री से पूछा गया कि क्या उन्हें पूरा वंदे मातरम् आता है। जवाब में उन्होंने कहा कि वे भी सीख रहे हैं और सभी को सीखते रहना चाहिए। इस दौरान प्रेस कॉन्फ्रेंस का माहौल कुछ देर के लिए सवाल जवाब पर केंद्रित हो गया।

    इस तरह सेवा संकल्प अभियान की जानकारी देने के लिए आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस और कार्यक्रमों में अभियान के साथ साथ अलग अलग मुद्दे भी सामने आए। सिंगरौली में यूजीसी का सवाल हो या सागर में शराबकांड से जुड़ा मुद्दा और भोपाल में अतिथि विद्वानों का प्रदर्शन सभी घटनाओं ने राजनीतिक और प्रशासनिक विषयों को चर्चा के केंद्र में ला दिया।

  • राहुल गांधी के कार्यक्रम से पहले युवाओं के बीच पहुंची कांग्रेस गिटार से गाने और नुक्कड़ नाटक से न्योता

    राहुल गांधी के कार्यक्रम से पहले युवाओं के बीच पहुंची कांग्रेस गिटार से गाने और नुक्कड़ नाटक से न्योता


    इंदौर । इंदौर में 19 सितंबर को होने वाले छात्रों की गूंज कार्यक्रम को लेकर कांग्रेस ने प्रचार का तरीका बदला है। आमतौर पर राजनीतिक कार्यक्रमों के प्रचार में ढोल नगाड़े बड़े बैनर मंच और नेताओं के औपचारिक दौरे देखने को मिलते हैं लेकिन इस बार इंदौर में कांग्रेस कार्यकर्ता युवाओं के बीच अलग अंदाज में पहुंच रहे हैं। जींस और टीशर्ट पहनकर नेता कॉलेज और हॉस्टल सहित युवाओं से जुड़े स्थानों पर जा रहे हैं। यहां गिटार पर गाने डांस और नुक्कड़ नाटक के जरिए छात्रों से संवाद किया जा रहा है और इसके बाद उन्हें 19 सितंबर के कार्यक्रम में शामिल होने का न्योता दिया जा रहा है।

    नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी 19 सितंबर को इंदौर में छात्रों की गूंज कार्यक्रम में शामिल होंगे। कार्यक्रम से पहले कांग्रेस का जोर युवाओं तक पहुंचने और उनसे सीधे बातचीत करने पर है। पार्टी की ओर से संगीत कला खेल और नुक्कड़ नाटक को प्रचार अभियान का हिस्सा बनाया गया है। कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं का कहना है कि युवाओं के बीच जाकर उनसे सहज माहौल में बातचीत करना इस अभियान का प्रमुख उद्देश्य है।

    प्रचार अभियान के दौरान युवा कलाकार भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ अलग अलग स्थानों पर पहुंच रहे हैं। कहीं कलाकार गिटार लेकर गाने गाते नजर आ रहे हैं तो कहीं डांस और नुक्कड़ नाटक के माध्यम से छात्रों से जुड़े विषय सामने रखे जा रहे हैं। कार्यक्रम के बारे में जानकारी देने के बाद युवाओं को छात्रों की गूंज में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया जा रहा है। इस तरह अभियान में पारंपरिक सभा की जगह संवाद और सांस्कृतिक गतिविधियों को प्रमुखता दी गई है।

    इस अभियान में महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष रीना बौरासी भी सक्रिय हैं। वह अलग अलग स्थानों पर नुक्कड़ नाटक की टीम और कलाकारों के साथ युवाओं के बीच पहुंच रही हैं। खासतौर पर युवतियों से बातचीत कर उन्हें कार्यक्रम में आने का न्योता दिया जा रहा है। शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे और एनएसयूआई के प्रदेश प्रभारी रवि दांगी भी युवाओं से संपर्क कर रहे हैं। कुछ स्थानों पर खेल प्रतियोगिताओं और छोटे कार्यक्रमों के जरिए भी छात्रों से संवाद किया जा रहा है।

    अभियान के दौरान स्कूल विद्यार्थियों के बीच भी कार्यक्रम को लेकर गतिविधियां दिखाई दीं। विद्यार्थियों ने मैदान में छात्रों की गूंज लिखकर अपनी भागीदारी जताई। कांग्रेस इसे युवाओं और विद्यार्थियों के बीच कार्यक्रम को लेकर बन रहे माहौल के तौर पर देख रही है।

    इंदौर में लगाए गए कार्यक्रम से जुड़े पोस्टरों में भी अलग तरीका अपनाया गया है। पोस्टरों में कांग्रेस का नाम नहीं लिखा गया है। हालांकि कांग्रेस नेताओं के फोटो नजर आ रहे हैं लेकिन उनके राजनीतिक पदों का उल्लेख नहीं किया गया है। इससे प्रचार को सीधे राजनीतिक सभा के बजाय छात्रों और युवाओं से जुड़े आयोजन के रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश दिखाई देती है।

    कार्यक्रम की तैयारियों के बीच आयोजकों की ओर से राजवाड़ा स्थित प्राचीन वनखंडी हनुमान मंदिर परिसर में यज्ञ हवन और पूजन कराने की भी जानकारी दी गई है। विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 3 के प्रभारी दीपक जोशी पिंटू पूर्व प्रदेश महासचिव सन्नी पठारे और महिला कांग्रेस प्रदेश महासचिव अधिवक्ता साक्षी शुक्ला ने बताया कि कार्यक्रम की सफलता के लिए यह आयोजन किया जाएगा। आयोजकों ने कार्यक्रम की अनुमति में देरी और अधिक राशि लेकर अनुमति देने जैसी बाधाओं के आरोप भी लगाए हैं। हालांकि इन दावों पर संबंधित प्रशासनिक पक्ष का जवाब इस जानकारी में सामने नहीं आया है।

  • ओवैसी के बाद टी राजा की एंट्री की मांग: मई में कैंसिल सभा के लिए फिर अनुमति लेने की तैयारी

    ओवैसी के बाद टी राजा की एंट्री की मांग: मई में कैंसिल सभा के लिए फिर अनुमति लेने की तैयारी


    भोपाल। भोपाल में एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की सभा के बाद अब तेलंगाना के विधायक टी राजा की प्रस्तावित धर्मसभा को लेकर सियासत तेज होती दिखाई दे रही है। हिंदू उत्सव समिति ने प्रशासन से टी राजा की सभा के लिए अनुमति देने की मांग उठाने का फैसला किया है। समिति का कहना है कि जिस सेंट्रल लाइब्रेरी मैदान में ओवैसी की सभा आयोजित की गई है वहां टी राजा की सभा के लिए भी अनुमति पर विचार किया जाना चाहिए। समिति इस मुद्दे को लेकर पुलिस कमिश्नर संजय कुमार से मुलाकात करने की तैयारी में है।

    हिंदू उत्सव समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी के मुताबिक समिति इकबाल मैदान अग्रसेन चौक या सेंट्रल लाइब्रेरी मैदान में कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति मांगेगी। उनका कहना है कि मई में टी राजा की प्रस्तावित सभा को सुरक्षा कारणों का हवाला देकर रद्द किया गया था। अब ओवैसी की सभा आयोजित होने के बाद समिति ने प्रशासन के सामने समान नियमों के आधार पर अनुमति देने का सवाल उठाने की बात कही है।

    दरअसल मंगलवार रात भोपाल के सेंट्रल लाइब्रेरी मैदान में असदुद्दीन ओवैसी की सभा हुई थी। कार्यक्रम में ओवैसी ने समान नागरिक संहिता यानी यूसीसी को लेकर मध्य प्रदेश सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने मुस्लिम समुदाय को यूसीसी से बाहर रखने की मांग रखी और सरकार पर आरएसएस के एजेंडे को आगे बढ़ाने का आरोप लगाया। ओवैसी ने लव जिहाद कानून का मुद्दा उठाते हुए भी सरकार से सवाल किए। सभा के दौरान उन्होंने हुजूर विधायक रामेश्वर शर्मा के बयानों और सागर शराब मामले को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा।

    इसी घटनाक्रम के बाद टी राजा की सभा का मुद्दा फिर सामने आया है। टी राजा की भोपाल के गांधीनगर क्षेत्र में 31 मई को धर्मसभा प्रस्तावित थी लेकिन पुलिस प्रशासन से अनुमति नहीं मिलने के कारण कार्यक्रम रद्द कर दिया गया था। कार्यक्रम निरस्त होने के बाद टी राजा ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक बयानों के जरिए नाराजगी जाहिर की थी। उनके कुछ बयानों को लेकर विवाद भी हुआ था।

    धर्मसभा को लेकर सोशल मीडिया पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों के मामले में भोपाल के तलैया थाने में शिकायत दर्ज हुई थी। शिकायत में दो इंस्टाग्राम अकाउंट संचालकों पर धमकी अभद्र भाषा और भड़काऊ टिप्पणियां करने के आरोप लगाए गए थे। मामले में सामाजिक तनाव बढ़ने की आशंका का भी उल्लेख किया गया था।

    टी राजा तेलंगाना के गोशामहल विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं और अपने आक्रामक बयानों को लेकर अक्सर राजनीतिक चर्चा में रहते हैं। उनकी प्रस्तावित भोपाल सभा की अनुमति का मामला पहले न्यायालय तक भी पहुंचा था। अब ओवैसी की सभा के बाद हिंदू उत्सव समिति की ओर से टी राजा के कार्यक्रम की अनुमति मांगने की तैयारी ने इस पूरे मुद्दे को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। आने वाले दिनों में प्रशासन इस प्रस्ताव पर क्या फैसला करता है इस पर राजनीतिक और सामाजिक संगठनों की नजर रहेगी।

  • MP की सियासत में एक दिन में तीन बड़े सीन ट्रंप के ऐलान से शिवराज ट्रेंड में CM मोहन ने हेमंत को बीच में बैठाया दिग्विजय ने भाजपा पर साधा निशाना

    MP की सियासत में एक दिन में तीन बड़े सीन ट्रंप के ऐलान से शिवराज ट्रेंड में CM मोहन ने हेमंत को बीच में बैठाया दिग्विजय ने भाजपा पर साधा निशाना


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजनीति में शुक्रवार को अलग अलग घटनाओं ने सियासी माहौल को खासा दिलचस्प बना दिया। एक तरफ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक ऐलान के बाद मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगे तो दूसरी तरफ प्रदेश भाजपा में सत्ता और संगठन के बीच कथित मनमुटाव की चर्चाओं के बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल एक मंच पर साथ नजर आए। इसी बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भाजपा को लेकर पूछे गए सवाल पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भाजपा भाड़ में जाए।

    दरअसल ट्रंप ने कहा है कि अगर उनकी रिपब्लिकन पार्टी चुनाव जीतती है तो हर अमेरिकी वयस्क को 5000 डॉलर दिए जाएंगे। इस घोषणा के बाद सोशल मीडिया पर शिवराज सिंह चौहान की लाड़ली बहना योजना से जोड़कर कई पोस्ट और तस्वीरें वायरल होने लगीं। शिवराज समर्थकों ने इसे मामा के मॉडल की वैश्विक चर्चा से जोड़ दिया। इसके बाद शिवराज सिंह चौहान ट्रेंड में आ गए।

    जब उनसे पूछा गया कि सोशल मीडिया पर यह चर्चा है कि ट्रंप भी आपके मॉडल को अपना रहे हैं तो शिवराज ने कहा कि लाड़ली बहना योजना सस्ती लोकप्रियता के लिए नहीं लाई गई थी। उनका कहना था कि इस योजना का उद्देश्य महिलाओं को उनका अधिकार और न्याय दिलाना था। इसके बाद सोशल मीडिया पर तरह तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं और लोगों ने ट्रंप के ऐलान को लाड़ली बहना योजना से जोड़कर अपनी राय जाहिर की।

    इधर मध्य प्रदेश भाजपा में सत्ता और संगठन के बीच कथित खटपट की चर्चाओं के बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने साथ आकर अलग संदेश देने की कोशिश की। दोनों नेता भाजपा कार्यालय में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक साथ नजर आए। जब दोनों की दोस्ती को लेकर सवाल किया गया तो मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी दोस्ती तो पहले से ही प्रगाढ़ है। इस दौरान दोनों नेता मुस्कुराते दिखाई दिए।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले भी दोनों नेताओं की मुलाकात हुई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के घर पहुंचे। वहां दोनों के बीच बंद कमरे में बातचीत हुई। इसके बाद दोनों एक ही वाहन से भाजपा कार्यालय पहुंचे। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भी मुख्यमंत्री ने प्रदेश अध्यक्ष को बीच की कुर्सी पर बैठने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि आप प्रदेश अध्यक्ष हैं इसलिए यहां बैठिए। इस पूरे घटनाक्रम को भाजपा के भीतर एकजुटता का संदेश देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

    उधर दतिया में कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह अपनी सनातन स्वाभिमान यात्रा को लेकर जानकारी दे रहे थे। इसी दौरान भाजपा की ओर से यात्रा पर उठाए जा रहे सवालों को लेकर उनसे सवाल किया गया। पत्रकार के सवाल पर दिग्विजय सिंह ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भाजपा भाड़ में जाए और इसके बाद वहां से चले गए।

    इसी बीच सागर के जहरीली शराबकांड की न्यायिक जांच से जुड़ी फाइल को लेकर भी मंत्रालय के गलियारों में चर्चा है। सरकार ने मामले की जांच के लिए एक सदस्यीय आयोग बनाने का ऐलान किया है लेकिन दावा किया जा रहा है कि जांच से संबंधित फाइल वल्लभ भवन की चौथी मंजिल पर पिछले कुछ दिनों से आगे नहीं बढ़ी है। अब सवाल उठ रहे हैं कि जब सरकार जांच का ऐलान कर चुकी है तो प्रक्रिया में देरी क्यों हो रही है। इस पूरे घटनाक्रम ने मध्य प्रदेश की सियासत में एक बार फिर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।