Tag: Madhya Pradesh politics

  • नई दिल्ली दौरे पर CM मोहन यादव, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से की अहम मुलाकात

    नई दिल्ली दौरे पर CM मोहन यादव, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से की अहम मुलाकात


    नई दिल्ली। मध्‍य प्रदेश के मुख्‍यमंत्री डॉ. मोहन यादव शनिवार को राजधानी दिल्ली के दौरे पर हैं। इस यात्रा को प्रशासनिक और संगठनात्मक लिहाज़ से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। शाम तक उनके भोपाल लौटने की संभावना है।

    दौरे के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह से उनके आवास पर शिष्टाचार भेंट की। मुलाकात के दौरान प्रदेश के विकास कार्यों चल रही योजनाओं और केंद्र सरकार के सहयोग से संचालित परियोजनाओं की प्रगति पर विस्तार से चर्चा हुई।

    बताया जा रहा है कि बैठक सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुई और इसमें समसामयिक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया गया। राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से इस भेंट को अहम माना जा रहा है।
    मुख्‍यमंत्री डॉ. यादव ने नई दिल्ली में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन से भी सौजन्य भेंट की।

  • वंदे मातरम् के स्वर से गूंजा सदन, MP विधानसभा बजट सत्र 2026 की औपचारिक शुरुआत

    वंदे मातरम् के स्वर से गूंजा सदन, MP विधानसभा बजट सत्र 2026 की औपचारिक शुरुआत


    भोपाल । राजधानी भोपाल में सोमवार 16 फरवरी 2026 से मध्य प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र औपचारिक रूप से शुरू हो गया। सत्र की शुरुआत राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के सामूहिक गायन से हुई, जिससे सदन में देशभक्ति और गरिमा का वातावरण बना। यह बजट सत्र 6 मार्च 2026 तक चलेगा और इस दौरान कुल 12 बैठकें प्रस्तावित हैं।

    सत्र के पहले दिन मंगू भाई पटेल ने सदन को संबोधित किया। अपने अभिभाषण में उन्होंने मोहन यादव सरकार की उपलब्धियों, विकास योजनाओं और राज्य की प्रगति का विस्तृत उल्लेख किया। राज्यपाल ने कहा कि प्रदेश निरंतर विकास की दिशा में अग्रसर है और विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से समाज के हर वर्ग तक लाभ पहुंचाया जा रहा है। अभिभाषण के बाद कृतज्ञता प्रस्ताव पेश किया गया, जिस पर आगामी दिनों में चर्चा होगी।

    इस बजट सत्र को कई मायनों में अहम माना जा रहा है। विधानसभा सचिवालय के अनुसार, विधायकों की ओर से कुल 3478 प्रश्न प्राप्त हुए हैं। इसके अलावा 236 ध्यानाकर्षण प्रस्ताव, 10 स्थगन प्रस्ताव और 41 अशासकीय संकल्प सदन में प्रस्तुत किए जाने की संभावना है। इन आंकड़ों से साफ है कि सत्र के दौरान सरकार को विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से जवाब देना होगा।

    सत्र का सबसे महत्वपूर्ण दिन 18 फरवरी होगा, जब उप मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा वर्ष 2026-27 का बजट पेश करेंगे। अनुमान है कि इस बार का बजट 4.63 से 4.70 लाख करोड़ रुपये के बीच हो सकता है। खास बात यह है कि बजट पूरी तरह पेपरलेस डिजिटल प्रारूप में प्रस्तुत किया जाएगा, जो पारदर्शिता और तकनीकी दक्षता की दिशा में एक और कदम माना जा रहा है।

    राजनीतिक दृष्टि से भी यह सत्र काफी महत्वपूर्ण रहने वाला है। विपक्ष, विशेष रूप से कांग्रेस, बेरोजगारी, महंगाई, अवैध खनन, बढ़ते कर्ज और हालिया विवादित मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है। वहीं सत्तापक्ष रोजगार सृजन, नारी सशक्तीकरण, किसान कल्याण, बुनियादी ढांचे के विकास और निवेश आकर्षित करने जैसे मुद्दों को प्रमुखता से रखने की रणनीति पर काम कर रहा है।

    वंदे मातरम् के साथ कार्यवाही की शुरुआत को राज्य और केंद्र स्तर पर राष्ट्रगीत को बढ़ावा देने की पहल से जोड़कर देखा जा रहा है। इससे सदन में एक ऊर्जावान और सकारात्मक माहौल देखने को मिला। हालांकि राजनीतिक गर्माहट के संकेत भी साफ हैं, जिससे आगामी दिनों में तीखी बहस और हंगामे की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। कुल मिलाकर, बजट सत्र 2026 प्रदेश की आर्थिक दिशा, विकास प्राथमिकताओं और राजनीतिक रणनीतियों को तय करने वाला महत्वपूर्ण मंच साबित होगा, जहां सत्ता और विपक्ष के बीच व्यापक चर्चा और टकराव दोनों देखने को मिल सकते हैं।

  • MP विधानसभा बजट सत्र 2026 की शुरुआत हंगामे से, राज्यपाल के अभिभाषण के बीच विपक्ष का जोरदार विरोध

    MP विधानसभा बजट सत्र 2026 की शुरुआत हंगामे से, राज्यपाल के अभिभाषण के बीच विपक्ष का जोरदार विरोध


    भोपाल । राजधानी भोपाल में सोमवार को मध्यप्रदेश विधानसभा के बजट सत्र 2026 की शुरुआत तीखे राजनीतिक माहौल के बीच हुई। सदन की कार्यवाही प्रारंभ होते ही परंपरा के अनुसार संपूर्ण छह छंदों में वंदे मातरम् का गायन हुआ। इसके बाद मंगुभाई पटेल ने अभिभाषण पढ़ना शुरू किया लेकिन विपक्ष के हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से नहीं चल सकी और अंततः इसे अगले दिन सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा।

    राज्यपाल ने अपने अभिभाषण में राज्य सरकार की उपलब्धियों विकास योजनाओं और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों का विस्तृत उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश आज उस ऐतिहासिक दहलीज पर खड़ा है जिसे केंद्र सरकार ने अमृत काल की संज्ञा दी है। उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार किया गया है और निवेश को बढ़ावा देने के लिए ठोस कदम उठाए गए हैं। हाल ही में भोपाल में आयोजित ग्लोबल इन्वेस्टर समिट का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक मध्यप्रदेश को 2 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

    राज्यपाल ने वर्ष 2026 को कृषि वर्ष के रूप में मनाने की घोषणा का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि पीएम जनमन योजना के तहत 1 लाख 35 हजार से अधिक आवास निर्मित किए गए हैं। साथ ही उज्जैन में मां शिप्रा को प्रदूषण मुक्त बनाने के प्रयासों नई शिक्षा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन और ग्रामीण विकास से जुड़े कार्यक्रमों की जानकारी भी सदन के समक्ष रखी।

    हालांकि अभिभाषण के दौरान विपक्ष ने कई मुद्दों को लेकर आपत्ति जताई। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने राज्यपाल को बीच में टोकते हुए आरोप लगाया कि नलजल योजना और इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों जैसे गंभीर विषयों का अभिभाषण में उल्लेख नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता से जुड़े संवेदनशील मुद्दों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। विपक्षी सदस्यों ने नारेबाजी शुरू कर दी जिससे सदन का माहौल गरमा गया।

    विपक्ष का आरोप था कि सरकार जमीनी समस्याओं से ध्यान हटाकर केवल उपलब्धियों का बखान कर रही है। वहीं सत्तापक्ष ने इसे राजनीतिक रणनीति बताते हुए कहा कि बजट सत्र के दौरान हर मुद्दे पर विस्तार से चर्चा का अवसर मिलेगा। लगातार हो रहे शोर-शराबे के बीच राज्यपाल ने अपना अभिभाषण पूरा किया लेकिन स्थिति सामान्य न होने पर विधानसभा अध्यक्ष ने कार्यवाही को अगले दिन तक के लिए स्थगित कर दिया।

    अब राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा मंगलवार से शुरू होगी जहां सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने के आसार हैं। बजट सत्र की शुरुआत जिस तरह हंगामे के साथ हुई है उससे संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले दिनों में सदन के भीतर राजनीतिक तापमान और बढ़ सकता है।

  • भोपाल में विधायक के रिश्तेदारों पर मारपीट का आरोप: मौलाना से थाने के सामने की गई कथित पिटाई, गिरफ्तारी की मांग तेज

    भोपाल में विधायक के रिश्तेदारों पर मारपीट का आरोप: मौलाना से थाने के सामने की गई कथित पिटाई, गिरफ्तारी की मांग तेज


    भोपाल। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद से जुड़े विवाद ने तूल पकड़ लिया है। विधायक के रिश्तेदारों पर एक मौलाना से मारपीट करने का गंभीर आरोप लगा है। घटना जहांगीराबाद थाने के सामने हुई बताई जा रही है जिसके बाद राजनीतिक और सामाजिक हलकों में हलचल मच गई है। मामले की शिकायत पुलिस में दर्ज कराई गई है और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जा रही है।

    जानकारी के अनुसार विधायक आरिफ मसूद के साले रिजवान और भांजे एहतिशाम पर आरोप है कि उन्होंने अपने समर्थकों के साथ मिलकर मौलाना के साथ कथित रूप से मारपीट की। बताया जा रहा है कि यह विवाद एक सार्वजनिक बयान को लेकर शुरू हुआ। पीड़ित मौलाना ने बुरहानपुर में दिए गए एक बयान पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी जिससे विधायक पक्ष नाराज बताया जा रहा है। इसी नाराजगी के चलते विवाद बढ़ा और मामला हाथापाई तक पहुंच गया।

    आरोप है कि जहांगीराबाद थाने के सामने अचानक करीब एक दर्जन लोग पहुंचे और मौलाना के साथ मारपीट की। घटना के समय आसपास मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार विवाद कुछ ही देर में उग्र हो गया। हालांकि पुलिस ने मामले में शिकायत मिलने की पुष्टि की है और जांच शुरू कर दी है।

    इस घटना के बाद सामाजिक संगठनों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। आल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी ने विधायक आरिफ मसूद के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। कमेटी के अध्यक्ष शमशुल हसन ने विधायक की गिरफ्तारी की मांग करते हुए कहा कि कानून सभी के लिए समान होना चाहिए और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि विधायक समुदाय के हितैषी होने का दावा करते हैं लेकिन उनके करीबी ही समुदाय के लोगों के साथ दुर्व्यवहार कर रहे हैं।

    कमेटी की ओर से पुलिस प्रशासन से निष्पक्ष जांच और त्वरित कार्रवाई की मांग की गई है। संगठन का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन किया जाएगा। वहीं विधायक पक्ष की ओर से इस मामले में अभी तक कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

    पुलिस अधिकारियों का कहना है कि शिकायत के आधार पर मामले की जांच की जा रही है और सीसीटीवी फुटेज सहित अन्य साक्ष्यों को खंगाला जा रहा है। दोषी पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। घटना ने राजधानी की सियासत को गरमा दिया है। एक ओर जहां विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर हमलावर हो सकते हैं वहीं कांग्रेस के लिए भी यह मामला असहज स्थिति पैदा कर सकता है। फिलहाल सभी की निगाहें पुलिस जांच और आगे की कार्रवाई पर टिकी हैं।

  • पंधाना से लाड़ली बहना की 33वीं किश्त जारी, सीएम डॉ मोहन यादव करेंगे सिंगल क्लिक ट्रांसफर, उद्योगों की मांग भी उठेगी

    पंधाना से लाड़ली बहना की 33वीं किश्त जारी, सीएम डॉ मोहन यादव करेंगे सिंगल क्लिक ट्रांसफर, उद्योगों की मांग भी उठेगी


    मध्यप्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी लाड़ली बहना योजना की 33वीं किश्त 14 फरवरी को पंधाना से जारी की जाएगी। राज्य स्तरीय इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सिंगल क्लिक के माध्यम से प्रदेश की लाखों हितग्राही महिलाओं के खातों में राशि अंतरित करेंगे। कार्यक्रम को लेकर खंडवा जिले में प्रशासनिक तैयारियां युद्धस्तर पर जारी हैं और आयोजन को भव्य बनाने के लिए पंचायत स्तर तक जिम्मेदारियां तय कर दी गई हैं।

    पंधाना में अनाज मंडी के सामने विशाल मंच और पंडाल तैयार किया जा रहा है। कार्यक्रम स्थल पर टेंट, बैठक व्यवस्था, पेयजल, सुरक्षा और यातायात नियंत्रण सहित सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं। जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक स्वयं तैयारियों की मॉनिटरिंग कर चुके हैं। गुरुवार को क्षेत्रीय विधायक छाया मोरे और दीक्षा भगोरे ने भी स्थल का निरीक्षण किया और अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। इसके बाद पंधाना और छैगांवमाखन जनपद कार्यालय में सरपंचों और सचिवों की बैठक लेकर भीड़ प्रबंधन और परिवहन व्यवस्था पर चर्चा की गई।

    ब्लॉक स्तर पर प्रत्येक ग्राम पंचायत को लगभग 50 लोगों को कार्यक्रम स्थल तक लाने का लक्ष्य दिया गया है। अनुमान है कि इसके लिए हर पंचायत को करीब पांच वाहनों की व्यवस्था करनी होगी। बोर्ड परीक्षाओं के कारण इस बार स्कूल बसों की सुविधा उपलब्ध नहीं हो पाएगी, इसलिए पंचायतों को निजी वाहनों या ट्रेवल्स के माध्यम से लोगों को लाने और वापस भेजने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

    पंचायतों को निर्देश दिए गए हैं कि परिवहन पर होने वाला खर्च पांचवें या पंद्रहवें वित्त आयोग की राशि से वहन किया जा सकता है। इसके लिए स्थानीय स्तर पर एजेंसियों से समन्वय स्थापित किया जा रहा है ताकि समय पर वाहन उपलब्ध हो सकें। बताया जा रहा है कि कार्यक्रम की व्यवस्थाओं पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं और टेंट व अन्य व्यवस्थाएं मध्यप्रदेश जनसंपर्क विभाग के माध्यम से की जा रही हैं।

    विधायक छाया मोरे ने कहा कि यह कार्यक्रम क्षेत्र के लिए गौरव का अवसर है। उन्होंने संकेत दिया कि मुख्यमंत्री की मौजूदगी में क्षेत्र में नए उद्योग स्थापित करने की मांग भी रखी जाएगी ताकि युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिल सके। उनके अनुसार लाड़ली बहना योजना ने महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त किया है और अब क्षेत्रीय विकास को नई दिशा देने की आवश्यकता है।

    लाड़ली बहना योजना राज्य सरकार की प्रमुख जनकल्याणकारी योजनाओं में से एक है, जिसके माध्यम से हर महीने महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है। 33वीं किश्त का पंधाना से जारी होना न केवल प्रशासनिक बल्कि राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है और कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सुरक्षा, यातायात और भीड़ नियंत्रण के विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि आयोजन सुव्यवस्थित और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराया जाएगा।

  • भिंड-ग्वालियर नेशनल हाईवे पर बढ़ते हादसों से नाराज़ संत समाज, बड़े आंदोलन की चेतावनी

    भिंड-ग्वालियर नेशनल हाईवे पर बढ़ते हादसों से नाराज़ संत समाज, बड़े आंदोलन की चेतावनी


    भिंड । मध्यप्रदेश के भिंड जिले में ग्वालियर भिंड नेशनल हाईवे 719 को लेकर संत समाज ने मोर्चा खोल दिया है। हाईवे पर लगातार हो रहे सड़क हादसों और केंद्र सरकार के हालिया बजट में इसके निर्माण या उन्नयन के लिए कोई प्रावधान न किए जाने से नाराज़ संत समाज ने बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है।

    दरअसल, इस मुद्दे पर हाल ही में कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंसाना से एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सवाल पूछा गया था। सवाल सुनते ही मंत्री नाराज़ हो गए और बिना जवाब दिए प्रेस कॉन्फ्रेंस बीच में ही छोड़कर चले गए। इस घटनाक्रम के बाद मामला और गरमा गया है। संत समाज और स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों से इस हाईवे की बदहाल स्थिति के कारण लगातार हादसे हो रहे हैं, लेकिन सरकार की ओर से ठोस पहल नहीं की जा रही है।

    अखिल भारतीय संत समिति के जिला अध्यक्ष संत कालीदास महाराज ने ऐलान किया है कि अब यह आंदोलन निर्णायक होगा। उन्होंने कहा कि देश के शंकराचार्य, मठ मंदिरों के महंत और साधु संत सड़कों पर उतरेंगे। अगले 20 से 25 दिनों में व्यापक आंदोलन की रणनीति तैयार की जाएगी।

    संत समाज का आरोप है कि ग्वालियर भिंड हाईवे पर हर साल होने वाली मौतें सरकारी फाइलों में केवल आंकड़े बनकर रह जाती हैं। जब तक इस मार्ग के निर्माण या चौड़ीकरण का कार्य शुरू नहीं किया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।

    स्थानीय नागरिकों का भी कहना है कि यह मार्ग लंबे समय से जर्जर स्थिति में है और यातायात के लिहाज से बेहद संवेदनशील है। बढ़ते हादसों ने लोगों में भय और आक्रोश दोनों पैदा कर दिया है। अब देखना होगा कि सरकार इस चेतावनी के बाद क्या कदम उठाती है।

  • स्वच्छता के दावे पर संसद की चोट इंदौर का दूषित पानी बना राष्ट्रीय मुद्दा

    स्वच्छता के दावे पर संसद की चोट इंदौर का दूषित पानी बना राष्ट्रीय मुद्दा


    नई दिल्ली। देश के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में पहचाने जाने वाले इंदौर की छवि पर अब गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल पीने से हुई मौतों का मामला अब केवल स्थानीय प्रशासन तक सीमित नहीं रहा बल्कि राष्ट्रीय राजनीति का विषय बन चुका है। कांग्रेस के राज्यसभा सांसद डॉ सैयद नासिर हुसैन ने इस मुद्दे को राज्यसभा में उठाकर केंद्र सरकार से सीधे जवाब मांगे हैं। इससे इंदौर की जल आपूर्ति व्यवस्था और स्वच्छता मॉडल पर नई बहस शुरू हो गई है।

    राज्यसभा में पूछे गए प्रश्नों में यह स्पष्ट रूप से जानना चाहा गया है कि किन परिस्थितियों में शहर की सीवरेज और जल वितरण प्रणाली विफल हुई और कैसे दूषित सीवरेज का पानी पीने योग्य जल लाइनों में मिल गया। साथ ही यह भी पूछा गया है कि क्या केंद्र सरकार को जनवरी 2026 में भागीरथपुरा में हुई मौतों और सैकड़ों लोगों के बीमार होने की जानकारी है। इन सवालों के जवाब जल शक्ति मंत्री द्वारा 2 फरवरी 2026 को राज्यसभा में दिए जाएंगे।

    इससे पहले लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इंदौर दौरे के दौरान इस पूरे प्रकरण को संसद में उठाने की घोषणा की थी। वहीं मध्यप्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी साफ कर दिया है कि 16 फरवरी से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र में इस मुद्दे को पूरी ताकत के साथ उठाया जाएगा। कांग्रेस की रणनीति स्पष्ट है कि सरकार को संसद और विधानसभा दोनों मंचों पर घेरकर जवाबदेह बनाया जाए।राज्यसभा में सवाल सूचीबद्ध होते ही इंदौर नगर निगम और प्रशासनिक अमले में हलचल तेज हो गई है। जल शक्ति मंत्रालय ने बिंदुवार जानकारी मांगी है जिसके चलते नगर निगम को सभी रिपोर्ट और तथ्य सरकार को भेजने पड़े हैं। यह प्रश्न राज्यसभा प्रश्न संख्या एस 1137 के तहत दर्ज किए गए हैं। अधिकारियों का मानना है कि जवाबों में किसी भी तरह की चूक इंदौर की स्वच्छ शहर की छवि को गहरा नुकसान पहुंचा सकती है।

    यह मामला पहले से ही मध्यप्रदेश हाई कोर्ट में विचाराधीन है जहां नगर निगम और प्रशासन को कड़ी टिप्पणियों का सामना करना पड़ा है। अब संसद में मामला पहुंचने के बाद प्रशासन अतिरिक्त सतर्कता बरत रहा है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह प्रकरण केवल एक वार्ड तक सीमित नहीं है बल्कि पूरे प्रदेश की जल आपूर्ति व्यवस्था की पोल खोलता है।

    कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च करने के बावजूद लोगों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध नहीं कराया जा सका। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा है कि विधानसभा में यह पूछा जाएगा कि दूषित पानी से हुई मौतों की जिम्मेदारी किसकी है और अब तक दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई। कांग्रेस का दावा है कि यह मुद्दा सरकार की कार्यशैली और जवाबदेही की असल तस्वीर जनता के सामने लाएगा।

  • जहाँ देवी का मंदिर है, वहाँ इबादत कैसे स्वीकार होगी? भोजशाला विवाद पर विधायक रामेश्वर शर्मा का बड़ा बयान

    जहाँ देवी का मंदिर है, वहाँ इबादत कैसे स्वीकार होगी? भोजशाला विवाद पर विधायक रामेश्वर शर्मा का बड़ा बयान


    भोपाल । मध्य प्रदेश के धार जिले की ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर चल रहे विवाद में अब सियासी बयानबाजी ने तूल पकड़ लिया है। बसंत पंचमी के अवसर पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा पूजा और नमाज दोनों की अनुमति दिए जाने के बाद, भाजपा के प्रखर विधायक रामेश्वर शर्मा ने एक बड़ा और तीखा बयान जारी किया है। उन्होंने सीधे तौर पर मुस्लिम समुदाय से सद्भावना की अपील करते हुए सवाल उठाया है कि जिस स्थान पर देवी का अधिष्ठान है, वहाँ की गई इबादत का क्या अर्थ है।

    विधायक रामेश्वर शर्मा ने अपने संबोधन में तर्क दिया कि इबादत और आस्था के बीच एक स्पष्ट समझ होनी चाहिए। उन्होंने कहा, ‘मुसलमानों को स्वयं यह समझना चाहिए कि जहाँ मां वाग्देवी सरस्वती का प्राचीन मंदिर है, वहाँ आपकी इबादत कैसे स्वीकार हो सकती है? हमारे सनातनी समाज की यह मांग सदियों से रही है कि जहाँ विद्या की देवी माँ सरस्वती विराजमान हैं, उस पवित्र स्थल पर केवल पूजन और अर्चना ही होनी चाहिए।’ शर्मा ने आगे जोड़ा कि स्वयं मुस्लिम समाज के मान्यताओं में भी यह उल्लेख मिलता है कि मंदिर परिसर के भीतर की गई इबादत जायज नहीं होती, ऐसे में इस मुद्दे को राजनीति से प्रेरित करने के बजाय समझदारी से सुलझाना चाहिए।

    ऐतिहासिक संदर्भों का हवाला देते हुए विधायक ने याद दिलाया कि भोजशाला का निर्माण महान राजा भोज ने माँ सरस्वती की आराधना और ज्ञान के केंद्र के रूप में किया था। उन्होंने कहा कि यह विद्या की देवी का मंदिर है और इसे अनावश्यक विवादों में नहीं घसीटना चाहिए। ‘माँ जगत जननी की निरंतर पूजा-अर्चना हमारा अधिकार है। हम इसके लिए लोकतंत्र की चौखट पर भी जाएंगे और सर्वोच्च न्यायालय से भी बार-बार प्रार्थना करेंगे कि यहाँ केवल सनातन परंपरा का निर्वहन हो,’ उन्होंने स्पष्ट किया।

    रामेश्वर शर्मा का यह बयान ऐसे संवेदनशील समय में आया है जब धार प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार बसंत पंचमी पर हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों के लिए अलग-अलग समय और स्थान नियत किए हैं। जहाँ एक ओर भारी पुलिस बल की मौजूदगी में पूजा की जा रही है, वहीं दूसरी ओर विधायक की इस अपील ने सामाजिक और राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सबको मिलकर माँ सरस्वती की आरती-पूजा होने देनी चाहिए ताकि धार्मिक सौहार्द बना रहे और इतिहास के साथ न्याय हो सके।

  • हिंदुत्व मामले पर कांग्रेस का उपवास पूर्व मंत्री पीसी शर्मा का बीजेपी पर हमला रोशनपुरा में शंकराचार्य की पूजा करेंगे

    हिंदुत्व मामले पर कांग्रेस का उपवास पूर्व मंत्री पीसी शर्मा का बीजेपी पर हमला रोशनपुरा में शंकराचार्य की पूजा करेंगे

    भोपाल से शिखिल ब्यौहार की रिपोर्ट मध्यप्रदेश कांग्रेस के पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस के रोशनपुरा उपवास और शंकराचार्य पूजा कार्यक्रम का ऐलान किया उन्होंने कहा कि 24 जनवरी को कांग्रेस एक दिन उपवास रखेगी और शंकराचार्य की पूजा करेगी इस अवसर पर कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता साधु संत सामाजिक कार्यकर्ता और बुद्धिजीवी मौजूद रहेंगे पीसी शर्मा ने कहा कि अंग्रेजों ने कभी यह नहीं पूछा कि शंकराचार्य कौन हैं लेकिन बीजेपी की सरकार ने ऐसा अपमान किया शिष्यों के साथ मारपीट की गई और हिंदुओं की भावनाओं का ठेस पहुंचाई गई उन्होंने आरोप लगाया कि वाराणसी के मणिकर्णिका घाट को भी तहस नहस किया गया और मोक्ष की जगह को भी उजाड़ दिया गया उन्होंने कहा कि भोपाल में गौ माता का अपमान हुआ और गौमाता काटी जा रही है

    पूर्व मंत्री ने कहा कि बीजेपी सरकार रावणी तत्वों की तरह कार्य कर रही है और यह लोग कभी राम के पदचिन्हों पर नहीं चल सकते उन्होंने अयोध्या की प्राण प्रतिष्ठा के दो साल पूरे होने पर कहा कि मुझे वहां जाना पड़ा और सरकार को सद्बुद्धि की जरूरत है उन्होंने कहा कि प्रदेश में भ्रष्टाचार व्याप्त है सड़क धसने के मामलों में ठेकेदारों पर कार्रवाई होती है लेकिन अधिकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं होती और सीएम हेल्पलाइन भी पूरी तरह असहाय हो गई है उन्होंने यह भी कहा कि प्रदेश में हर जगह भ्रष्टाचार और मनमानी फैली हुई है

    पीसी शर्मा ने SIR में कांग्रेस प्रतिनिधि मंडल की कार्रवाई का जिक्र किया उन्होंने कहा कि 7 नंबर फॉर्म हटा रहे हैं और बीजेपी कार्यालय से फर्म के जरिए अल्पसंख्यकों को जबरन फॉर्म दिए जा रहे हैं आदिवासी के नाम काटे जा रहे हैं उन्होंने आरोप लगाया कि पहले फर्जीवाड़े से चुनाव जीते गए अब नाम जबरन काटने का काम किया जा रहा है कांग्रेस इस मामले में कड़ा एक्शन लेगीइसके अलावा उन्होंने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के खिलाफ जारी जमानती वारंट का भी जिक्र किया और कहा कि पुलिस को उनका पता नहीं मिल रहा है उन्होंने यह संकेत दिया कि बीजेपी की सरकार राजनीतिक एजेंडा को आगे बढ़ाने के लिए सभी तरह के हथकंडे अपना रही है पीसी शर्मा ने कहा कि हार जीत राजनीति में होती है लेकिन हिंदुओं की भावनाओं का अपमान किसी भी तरह स्वीकार्य नहीं है

    पूर्व मंत्री ने प्रेस वार्ता में प्रदेश में बढ़ते भ्रष्टाचार और सरकारी लापरवाही की ओर भी ध्यान आकर्षित किया उन्होंने कहा कि प्रशासनिक ढांचा और कानून व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो रही है और आम जनता को सरकारी मदद नहीं मिल रहीकांग्रेस के उपवास और शंकराचार्य पूजा कार्यक्रम को लेकर शहर भर में राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है और नेताओं और साधु संतों के शामिल होने से इसे और अधिक जोर मिलने की संभावना है

  • मंत्री विजय शाह पर कार्रवाई की मांग को लेकर कांग्रेस का प्रदर्शन, सुप्रीम कोर्ट की अवहेलना का लगाया आरोप

    मंत्री विजय शाह पर कार्रवाई की मांग को लेकर कांग्रेस का प्रदर्शन, सुप्रीम कोर्ट की अवहेलना का लगाया आरोप


    भोपाल । मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार के मंत्री विजय शाह के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं होने को लेकर कांग्रेस ने प्रदेशव्यापी नाराजगी जाहिर की है। इसी कड़ी में सोमवार को मध्यप्रदेश कांग्रेस महासचिव अमित शर्मा के नेतृत्व में प्रदेश कांग्रेस कार्यालय के सामने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया गया।

    प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए मंत्री विजय शाह पर तत्काल केस दर्ज करने और उन्हें मंत्रिमंडल से हटाने की मांग की। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्पष्ट रूप से केस दर्ज करने के आदेश दिए जाने के बाद भी राज्य सरकार की ओर से कोई कदम न उठाया जाना न्यायपालिका की अवहेलना है प्रदर्शन को संबोधित करते हुए कांग्रेस महासचिव अमित शर्मा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बावजूद मंत्री विजय शाह के खिलाफ कार्रवाई न होना बेहद गंभीर और चिंताजनक विषय है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार जानबूझकर मंत्री को बचाने का प्रयास कर रही है। शर्मा ने कहा कि यह न केवल संविधान का खुला अपमान है, बल्कि देश की जनता और लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ भी विश्वासघात है।

    अमित शर्मा ने आगे कहा कि यदि आम नागरिक के खिलाफ ऐसा कोई आदेश होता, तो तुरंत कार्रवाई कर दी जाती, लेकिन मंत्री होने के कारण विजय शाह को विशेष संरक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या भाजपा सरकार के लिए कानून और संविधान से ऊपर उसके मंत्री हैं। कांग्रेस महासचिव ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द कार्रवाई नहीं की, तो कांग्रेस आंदोलन को और तेज करेगी। प्रदर्शन में शामिल अन्य कांग्रेस नेताओं ने भी सरकार पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार “कानून का राज” होने का दावा करती है, लेकिन जब बात अपने नेताओं की आती है, तो सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को भी नजरअंदाज कर दिया जाता है।

    कांग्रेस नेताओं ने यह भी कहा कि लोकतंत्र में न्यायपालिका के आदेश सर्वोपरि होते हैं और उनकी अवहेलना किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने राज्यपाल से भी इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है। इस प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे और सभी ने एक स्वर में मंत्री विजय शाह के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। कांग्रेस का कहना है कि जब तक न्याय नहीं मिलेगा, तब तक पार्टी सड़क से सदन तक संघर्ष जारी रखेगी।