Tag: Madhya Pradesh politics

  • दतिया उपचुनाव में बदली चुनावी तस्वीर किन्नर प्रत्याशी संजना के समर्थन में पहुंचीं साध्वी सौम्या दीदी वोटरों से की खास अपील

    दतिया उपचुनाव में बदली चुनावी तस्वीर किन्नर प्रत्याशी संजना के समर्थन में पहुंचीं साध्वी सौम्या दीदी वोटरों से की खास अपील


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव में इस बार चुनावी मुकाबला कई वजहों से चर्चा का विषय बना हुआ है। भारतीय गण वार्ता पार्टी की प्रत्याशी संजना सिंह अपनी अलग शैली के चुनाव प्रचार और सामाजिक संदेश के कारण लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही हैं। उनके चुनाव अभियान में छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों से किन्नर समुदाय के सदस्य शामिल हो रहे हैं। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ की साध्वी सौम्या दीदी भी दतिया पहुंची हैं जिन्हें अयोध्या में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा से पहले नजर उतारने की परंपरा निभाने के कारण पहचान मिली थी। उन्होंने कहा कि वह अपनी सखी संजना सिंह के समर्थन में दतिया की नजर उतारने आई हैं।

    संजना सिंह का चुनाव प्रचार पारंपरिक राजनीतिक रैलियों से बिल्कुल अलग दिखाई देता है। उनके साथ न तो बड़ी गाड़ियों का काफिला चलता है और न ही भारी भीड़ नजर आती है। उनकी पार्टी का प्रचार वाहन पहले गांव और मोहल्लों में पहुंचकर लोगों को उनके आने की जानकारी देता है। इसके बाद संजना हाथ जोड़कर लोगों के बीच पहुंचती हैं और आत्मीयता के साथ समर्थन मांगती हैं। कई स्थानों पर वह बच्चों को दुलारते हुए उनकी नजर उतारती हैं और महिलाओं के साथ बैठकर मंगल गीत भी गाती हैं। इसके बाद वह लोगों से अपील करती हैं कि जिस तरह उन्होंने वर्षों तक बड़े राजनीतिक दलों को मौका दिया है उसी तरह इस बार एक किन्नर प्रत्याशी को भी अवसर देकर देखें।

    संजना सिंह का कहना है कि यह चुनाव केवल विधायक बनने का प्रयास नहीं बल्कि समाज में किन्नर समुदाय को सम्मानजनक पहचान दिलाने की लड़ाई भी है। उनका दावा है कि नामांकन के दौरान उन्हें कुछ लोगों की अपमानजनक टिप्पणियों का सामना करना पड़ा। उनके अनुसार ऐसे अनुभव बताते हैं कि समाज की सोच में बदलाव की अभी भी जरूरत है। वह चाहती हैं कि किन्नर समुदाय को भी समाज का सम्मानित और बराबरी का हिस्सा माना जाए तथा राजनीति में उनकी भागीदारी को सामान्य रूप से स्वीकार किया जाए।

    अपने चुनाव अभियान के दौरान संजना सिंह स्थानीय लोगों से विकास और जनसमस्याओं पर भी चर्चा कर रही हैं। उनका कहना है कि जनता की समस्याओं को संवेदनशीलता के साथ समझना और उनका समाधान करना उनकी प्राथमिकता होगी। वह मानती हैं कि समाज के हाशिए पर रहने वाले वर्गों की आवाज को विधानसभा तक पहुंचाना भी लोकतंत्र की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

    दतिया को अपनी राजनीतिक यात्रा की शुरुआत के लिए चुनने पर संजना कहती हैं कि मां पीतांबरा की पावन नगरी आध्यात्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखती है और किन्नर समुदाय का भी अध्यात्म से गहरा जुड़ाव रहा है। उनका कहना है कि किन्नर समाज किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है बल्कि देशभर में उनकी मौजूदगी है और इसी भावना के साथ उन्होंने दतिया से चुनाव लड़ने का निर्णय लिया।

    साध्वी सौम्या दीदी भी चुनाव प्रचार के दौरान मतदाताओं से अपील कर रही हैं कि वे पारंपरिक राजनीति से हटकर एक नया विकल्प चुनें। उनका कहना है कि पुरुष और महिलाओं की तरह किन्नर समुदाय भी समाज और राजनीति की जिम्मेदारियों को पूरी निष्ठा से निभाने में सक्षम है। उनके अनुसार यह चुनाव केवल एक उम्मीदवार का नहीं बल्कि सामाजिक स्वीकार्यता और समान अवसर की भावना को मजबूत करने का भी अवसर है।

    दतिया उपचुनाव में संजना सिंह की उम्मीदवारी ने राजनीतिक मुकाबले को एक नया सामाजिक आयाम दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि मतदाता इस अनोखी चुनावी मुहिम और सामाजिक संदेश को किस रूप में स्वीकार करते हैं।

  • MP की सियासत में हलचल: भुट्टा बेचने वाले युवक ने सीएम को सुनाई बेरोजगारी की हकीकत, कांग्रेस नेता को मंच से लौटते वक्त थप्पड़

    MP की सियासत में हलचल: भुट्टा बेचने वाले युवक ने सीएम को सुनाई बेरोजगारी की हकीकत, कांग्रेस नेता को मंच से लौटते वक्त थप्पड़


    मध्यप्रदेश। मध्य प्रदेश की राजनीति में शनिवार का दिन कई ऐसे घटनाक्रमों का गवाह बना, जिन्होंने राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक चर्चा बटोरी। एक ओर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने एक दिव्यांग युवक ने अपनी बेरोजगारी की कहानी सुनाकर व्यवस्था पर सवाल खड़े किए, वहीं राजगढ़ में एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस नेता और जिला पंचायत अध्यक्ष चंदर सिंह सोंधिया के साथ हुई बदसलूकी ने सियासी माहौल गरमा दिया। इसके अलावा दतिया उपचुनाव में टिकट नहीं मिलने के बाद भावुक हुए पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा के आंसुओं पर भाजपा नेताओं के अलग-अलग बयान भी चर्चा का विषय बने रहे।

    धार जिले के राजगढ़ में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का काफिला गुजर रहा था, तभी सड़क किनारे भुट्टा बेच रहे एक दिव्यांग युवक ने उन्हें आवाज लगाई। मुख्यमंत्री ने काफिला रुकवाया, युवक से भुट्टा खरीदा, बातचीत की और उसे 500 रुपए भी दिए। बातचीत के दौरान युवक ने बताया कि उसने मास्टर ऑफ सोशल वर्क की पढ़ाई की है, लेकिन नौकरी नहीं मिलने के कारण उसे भुट्टा बेचने और चाय-पकौड़े की दुकान चलाकर परिवार का पालन-पोषण करना पड़ रहा है। युवक की यह बात सामने आने के बाद बेरोजगारी को लेकर नई बहस शुरू हो गई। कई लोगों ने इसे पढ़े-लिखे युवाओं की मौजूदा स्थिति का उदाहरण बताया, जबकि राजनीतिक हलकों में भी इस घटना की चर्चा होती रही।

    उधर राजगढ़ जिले के नरसिंहगढ़ में एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान बड़ा विवाद हो गया। प्रभारी मंत्री चैतन्य काश्यप की मौजूदगी में जिला पंचायत अध्यक्ष और कांग्रेस नेता चंदर सिंह सोंधिया को पहले कार्यक्रम में प्रवेश से रोका गया। बाद में अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद उन्हें अंदर जाने दिया गया, लेकिन इस घटनाक्रम से नाराज होकर उन्होंने मंच के सामने बैठकर विरोध जताया। बाद में जब वह कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे, तभी एक व्यक्ति ने उन्हें थप्पड़ मार दिया। घटना के बाद पुलिस उन्हें थाने ले गई, जबकि कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने थाने का घेराव कर विरोध प्रदर्शन किया। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ।

    इसी बीच दतिया उपचुनाव में टिकट नहीं मिलने के बाद सार्वजनिक मंच पर भावुक हुए पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को लेकर भाजपा के भीतर भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं। भाजपा विधायक पन्नालाल शाक्य ने कहा कि वर्ष 2018 में उनका भी टिकट कटा था और तब उनकी आंखों में भी आंसू आए थे, लेकिन किसी ने उनकी चिंता नहीं की। उन्होंने पार्टी के फैसले को उचित बताते हुए कहा कि नए लोगों को अवसर देने के लिए कभी-कभी पुराने नेताओं को पीछे हटना पड़ता है।

    वहीं भाजपा के वरिष्ठ विधायक गोपाल भार्गव ने अलग राय रखते हुए कहा कि राजनीति में सक्रिय व्यक्ति का भविष्य कभी समाप्त नहीं होता। उन्होंने संकेत दिया कि नरोत्तम मिश्रा की राजनीतिक भूमिका आगे भी महत्वपूर्ण रह सकती है। इन बयानों के बाद यह चर्चा तेज हो गई कि भाजपा में नेतृत्व परिवर्तन और भविष्य की रणनीति को लेकर अलग-अलग सोच मौजूद है।

    इधर प्रशासनिक गलियारों में भी नई चर्चाओं ने जोर पकड़ा। नए मुख्य सचिव की नियुक्ति के बाद वरिष्ठ अधिकारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव को लेकर मंत्रालय में हलचल बनी रही। आदेश जारी होने से पहले ही एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा मंत्रालय छोड़ने की तैयारी और बाद में उनकी नई पदस्थापना को लेकर भी चर्चाओं का बाजार गर्म रहा।

    इन तीनों घटनाओं ने एक बार फिर यह दिखाया कि मध्य प्रदेश की राजनीति में जमीनी मुद्दों, राजनीतिक टकराव और सत्ता के भीतर की हलचल लगातार सुर्खियां बटोर रही हैं।

  • मंत्री की दौड़ सिंधिया का मजाकिया अंदाज और प्रतिमा बागरी का प्रयोग मध्य प्रदेश की राजनीति के दिलचस्प पल

    मंत्री की दौड़ सिंधिया का मजाकिया अंदाज और प्रतिमा बागरी का प्रयोग मध्य प्रदेश की राजनीति के दिलचस्प पल


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश की राजनीति में रविवार का दिन कई दिलचस्प घटनाओं और हल्के फुल्के राजनीतिक प्रसंगों के कारण चर्चा में रहा। कहीं मुख्यमंत्री के हेलिकॉप्टर तक पहुंचने के लिए मंत्री दौड़ लगाते नजर आए तो कहीं केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपनी पत्नी को मुस्कुराते हुए हाईकमान बताया। वहीं एक महिला मंत्री ने अपने ऊपर लगे आरोपों का जवाब देने के लिए मंच पर अनोखा प्रयोग कर सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

    टीकमगढ़ में आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को हेलिकॉप्टर से खजुराहो रवाना होना था। मुख्यमंत्री हेलिकॉप्टर में बैठ चुके थे और उड़ान की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी थीं। इसी दौरान मंत्री दिलीप अहिरवार तेज कदमों से दौड़ते हुए हेलिकॉप्टर तक पहुंचे और समय रहते उसमें सवार हो गए। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इसे अपने अपने अंदाज में साझा कर रहे हैं।

    दूसरी ओर अशोकनगर में आयोजित आजीविका मिशन के कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का एक अलग ही अंदाज देखने को मिला। विभिन्न स्वयं सहायता समूहों के स्टॉलों का निरीक्षण करते हुए उनकी नजर चूड़ियों के स्टॉल पर पड़ी। उन्होंने अपनी पत्नी के लिए पीले रंग की चूड़ियां खरीदीं और मुस्कुराते हुए कहा कि यह मेरी हाईकमान के लिए हैं। उनकी इस टिप्पणी पर वहां मौजूद लोग भी मुस्कुरा उठे और यह वीडियो भी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया।

    इंदौर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने अपने चिरपरिचित अंदाज में कहा कि वह सत्तर वर्ष के हो चुके हैं और अब सठिया गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वह जो भी कहते हैं सामने कहते हैं और सही को सही तथा गलत को गलत कहने में विश्वास रखते हैं। उनके इस बयान के बाद कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने ठहाके लगाए जबकि राजनीतिक गलियारों में भी इसके अलग अलग अर्थ निकाले जाने लगे।

    उधर मंत्री प्रतिमा बागरी ने अपने जाति प्रमाण पत्र को लेकर उठे विवाद पर सफाई देने का अनोखा तरीका अपनाया। उन्होंने मंच पर तीन अलग अलग पेय पदार्थ रखे और उन्हें अलग प्रकार के ग्लासों में डालकर यह समझाने का प्रयास किया कि पात्र बदल जाने से किसी वस्तु की वास्तविक पहचान नहीं बदलती। इसी उदाहरण के माध्यम से उन्होंने कहा कि किसी पर आरोप लगा देने भर से उसकी वास्तविक पहचान या कानूनी स्थिति नहीं बदल जाती। उनका यह प्रयोग भी सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

    इन घटनाओं ने एक बार फिर यह दिखाया कि राजनीति केवल गंभीर फैसलों और बहसों तक सीमित नहीं रहती बल्कि नेताओं के व्यवहार उनके अंदाज और छोटे छोटे प्रसंग भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बन जाते हैं। सोशल मीडिया के दौर में ऐसे दृश्य तेजी से वायरल होते हैं और आम लोगों के बीच राजनीतिक चर्चाओं को नया रंग दे देते हैं।

  • पेपर लीक और बेरोजगारी के खिलाफ कांग्रेस की 200 किलोमीटर साइक्लोथॉन जीतू पटवारी का बीजेपी पर बड़ा हमला

    पेपर लीक और बेरोजगारी के खिलाफ कांग्रेस की 200 किलोमीटर साइक्लोथॉन जीतू पटवारी का बीजेपी पर बड़ा हमला


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में परीक्षा प्रणाली में कथित गड़बड़ियों पेपर लीक और बढ़ती बेरोजगारी के मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने सोमवार से इंदौर से भोपाल तक 200 किलोमीटर लंबी साइक्लोथॉन यात्रा शुरू कर दी। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के नेतृत्व में निकाली जा रही यह यात्रा राहुल गांधी के छात्रों की गूंज अभियान का हिस्सा बताई जा रही है। दो दिन तक चलने वाली इस यात्रा में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता छात्र और युवा शामिल हो रहे हैं। रास्ते में देवास सीहोर और भोपाल सहित कई जिलों से भी सैकड़ों लोग इस अभियान से जुड़ेंगे।

    यात्रा के दौरान देवास पहुंचे जीतू पटवारी ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि प्रदेश और देश में सामने आए हर पेपर लीक मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर हर पेपर लीक मामले के पीछे भाजपा से जुड़े माफिया का नाम ही क्यों सामने आता है। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की भी मांग की।

    पटवारी ने कहा कि कांग्रेस छात्रों और युवाओं की आवाज को बुलंद करने के लिए सड़क पर उतरी है। उनके अनुसार राहुल गांधी लगातार देश के भविष्य और शिक्षा व्यवस्था को बचाने का मुद्दा उठा रहे हैं और यह यात्रा उसी अभियान को आगे बढ़ाने का प्रयास है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं के भविष्य से जुड़े गंभीर मुद्दों पर संवेदनशील नहीं है।

    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने राज्य सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि यह मगरमच्छ की मोटी चमड़ी वाली सरकार है जिस पर जनता की समस्याओं का शायद कोई असर नहीं पड़ता। हालांकि उन्होंने विश्वास जताया कि इस यात्रा का प्रभाव आम जनता पर जरूर पड़ेगा और आने वाले समय में जनता बदलाव का फैसला करेगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस छात्रों और बेरोजगार युवाओं के अधिकारों की लड़ाई लगातार लड़ती रहेगी।

    यात्रा के दौरान कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं का विभिन्न स्थानों पर स्वागत किया गया। जगह जगह स्वागत पंडाल लगाए गए और साइकिल यात्रा में स्थानीय लोगों ने भी भागीदारी निभाई। पूर्व कृषि मंत्री और विधायक सचिन यादव ने भी यात्रा में हिस्सा लिया और करीब 36 किलोमीटर साइकिल चलाकर देवास पहुंचे। उन्होंने भी परीक्षा गड़बड़ियों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि केंद्रीय शिक्षा मंत्री में नैतिकता है तो उन्हें तत्काल इस्तीफा देना चाहिए।

    इस बीच इंदौर में यात्रा के दौरान गांधी प्रतिमा के सामने कचरा फैलने का मामला भी सामने आया। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद नगर निगम ने मौके पर पहुंचकर जांच की और एनएसयूआई के प्रदेश प्रभारी रवि दांगी के नाम दो हजार रुपये का स्पॉट फाइन लगाया। भाजपा ने इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस की आलोचना की जबकि कांग्रेस ने यात्रा को छात्रों और युवाओं की आवाज से जोड़ते हुए इसे जनआंदोलन का स्वरूप देने की बात कही।

    कांग्रेस की यह साइक्लोथॉन अब भोपाल की ओर बढ़ रही है जहां यात्रा के समापन पर छात्रों बेरोजगारी और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता को लेकर सरकार के खिलाफ बड़ा संदेश देने की तैयारी की जा रही है।

  • दतिया उपचुनाव में भावुक हुए नरोत्तम मिश्रा सीएम मोहन यादव ने संभाला कहा घर घर जाकर आशुतोष तिवारी को जिताऊंगा

    दतिया उपचुनाव में भावुक हुए नरोत्तम मिश्रा सीएम मोहन यादव ने संभाला कहा घर घर जाकर आशुतोष तिवारी को जिताऊंगा


    मध्य प्रदेश। दतिया विधानसभा उपचुनाव की सियासी सरगर्मियों के बीच भाजपा की नामांकन रैली उस समय भावनात्मक मोड़ पर पहुंच गई जब पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा मंच से संबोधन करते हुए भावुक हो गए। भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के समर्थन में आयोजित जनसभा में अपने भाषण के अंतिम चरण में उनकी आंखें नम हो गईं और वे हाथ जोड़कर कार्यकर्ताओं के सामने खड़े रहे। मंच पर मौजूद मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने उनके कंधे पर हाथ रखकर उनका हौसला बढ़ाया जबकि प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने भी उन्हें संभाला। इस घटनाक्रम ने रैली में मौजूद कार्यकर्ताओं को भी भावुक कर दिया।

    अपने संबोधन में नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि वह 16 जुलाई से दतिया में ही डेरा डालेंगे और कार्यकर्ताओं के साथ गांव गांव तथा घर घर जाकर भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के पक्ष में जनसंपर्क करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रत्येक मतदाता के दरवाजे पर जाकर आशीर्वाद मांगेंगे और पूरी ताकत के साथ चुनाव अभियान को आगे बढ़ाएंगे। उनके इस संकल्प पर सभा में मौजूद कार्यकर्ताओं ने जोरदार समर्थन जताया।

    रैली के दौरान नरोत्तम मिश्रा ने कांग्रेस और उसके नेताओं पर भी तीखे राजनीतिक हमले किए। उन्होंने कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह के उस बयान का जवाब दिया जिसमें भाजपा की हार को अहंकार से जोड़ा गया था। मिश्रा ने कहा कि यदि कुछ हजार वोटों से हारने वाले अहंकारी कहलाते हैं तो बड़े अंतर से हारने वालों के लिए क्या कहा जाएगा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जनता ही लोकतंत्र में अंतिम फैसला करती है और वही सही मूल्यांकन करती है।

    उन्होंने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी को भी खुली चुनौती देते हुए कहा कि यदि उनमें दम है तो दतिया उपचुनाव मैदान में उतरकर भाजपा प्रत्याशी का सामना करें। उनका कहना था कि चुनावी मैदान ही तय करेगा कि जनता किसे स्वीकार करती है और किसे नकारती है। इस बयान के बाद रैली में मौजूद कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए भाजपा के पक्ष में माहौल बनाया।

    नरोत्तम मिश्रा ने अपने भाषण में भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी की पृष्ठभूमि का उल्लेख करते हुए उन्हें समर्पित कार्यकर्ता बताया। उन्होंने कहा कि आशुतोष तिवारी ने संगठन के लिए लंबे समय तक जमीन पर काम किया है और पार्टी के सिद्धांतों को अपने जीवन में उतारा है। उन्होंने कहा कि भाजपा का कार्यकर्ता पद और प्रतिष्ठा से नहीं बल्कि सेवा और समर्पण से पहचान बनाता है। यही कारण है कि संगठन ने एक कर्मठ कार्यकर्ता को उम्मीदवार बनाया है।

    सभा के दौरान उन्होंने दतिया उपचुनाव को केवल राजनीतिक मुकाबला नहीं बल्कि विचारधारा और कार्यकर्ता संस्कृति की लड़ाई बताया। उन्होंने कहा कि एक ओर राजनीतिक विरासत का दावा करने वाले लोग हैं तो दूसरी ओर संगठन और समाज सेवा के बल पर आगे बढ़ने वाले कार्यकर्ता हैं। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे पूरी ऊर्जा और एकजुटता के साथ चुनाव मैदान में उतरें और भाजपा प्रत्याशी को रिकॉर्ड मतों से विजयी बनाएं।

    दतिया उपचुनाव को लेकर भाजपा ने पूरी ताकत झोंक दी है और शीर्ष नेतृत्व लगातार चुनाव प्रचार में सक्रिय दिखाई दे रहा है। नामांकन रैली में उमड़ी भीड़ और मंच पर दिखाई दिया भावनात्मक दृश्य इस चुनाव को और अधिक चर्चा का विषय बना गया है।

  • रीलबाजी से लेकर सड़क पर विरोध तक, मध्यप्रदेश की राजनीति के तीन वीडियो बने चर्चा का विषय

    रीलबाजी से लेकर सड़क पर विरोध तक, मध्यप्रदेश की राजनीति के तीन वीडियो बने चर्चा का विषय


    मध्यप्रदेश। । मध्यप्रदेश की राजनीति में मंगलवार का दिन कई ऐसे घटनाक्रमों का गवाह बना जिन्होंने सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक बहस छेड़ दी। कहीं मंत्री खेत में हल चलाते नजर आए तो कहीं विधायक कार्यकर्ताओं के दिए गुलदस्ते फेंकते दिखाई दिए। दूसरी ओर मुख्यमंत्री के काफिले के लिए ट्रैफिक रोके जाने से नाराज लोगों ने वीआईपी संस्कृति पर सवाल उठाए। इन तीनों घटनाओं ने आम लोगों के बीच शासन व्यवस्था नेताओं की कार्यशैली और जनता की अपेक्षाओं को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी।

    बड़वानी दौरे के दौरान प्रदेश के मंत्री गौतम टेटवाल अचानक सड़क किनारे एक खेत में पहुंच गए और किसानों की तरह बैलों के साथ हल चलाने लगे। इस दौरान कैमरे भी चालू रहे और पूरा घटनाक्रम सोशल मीडिया पर लाइव प्रसारित किया गया। हालांकि यह प्रयास उस समय चर्चा का विषय बन गया जब बैलों की रफ्तार तेज होने पर मंत्री उनके पीछे खिंचते चले गए और उनका संतुलन बिगड़ गया। यह वीडियो कुछ ही देर में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

    वीडियो सामने आने के बाद लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने इसे किसानों से जुड़ने का प्रयास बताया तो कई लोगों ने इसे केवल प्रचार और रीलबाजी करार दिया। कई यूजर्स का कहना था कि किसानों की वास्तविक समस्याओं जैसे खाद बीज सिंचाई और फसल की कीमतों पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है। वहीं कुछ लोगों ने मंत्री के प्रयास को सकारात्मक बताते हुए इसे खेतों से जुड़ाव का प्रतीक भी माना।

    इसी दिन भोपाल से भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा का भी एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। जन्मदिन के अवसर पर समर्थक उन्हें लगातार गुलदस्ते भेंट कर रहे थे लेकिन विधायक उन्हें लेते ही एक ओर रख या फेंकते नजर आए। वीडियो सामने आने के बाद कई लोगों ने इसे कार्यकर्ताओं की भावनाओं के प्रति असम्मान बताया जबकि कुछ लोगों का कहना था कि बड़ी संख्या में आए समर्थकों के कारण गुलदस्ते संभालना संभव नहीं था इसलिए ऐसा दृश्य दिखाई दिया।

    उधर ग्वालियर में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के काफिले के गुजरने के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के तहत कुछ समय के लिए ट्रैफिक रोक दिया गया। इससे सड़क पर वाहनों की लंबी कतार लग गई और लोगों को इंतजार करना पड़ा। कई वाहन चालकों ने नाराजगी जताई और हॉर्न बजाकर विरोध दर्ज कराया। मौके पर मौजूद कुछ लोगों ने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किया जिसमें वीआईपी मूवमेंट के कारण आम नागरिकों को होने वाली असुविधा पर सवाल उठाए गए। कुछ स्थानों पर लोगों और पुलिस के बीच बहस भी देखने को मिली।

    इन घटनाओं ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया कि जनप्रतिनिधियों की सार्वजनिक गतिविधियों और आम जनता की अपेक्षाओं के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। सोशल मीडिया के दौर में नेताओं का हर कदम कुछ ही मिनटों में लाखों लोगों तक पहुंच जाता है और उस पर तुरंत प्रतिक्रिया भी सामने आने लगती है। ऐसे में राजनीतिक व्यक्तित्वों के व्यवहार और सार्वजनिक कार्यक्रमों को लेकर लोगों की संवेदनशीलता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनप्रतिनिधियों का जनता से संवाद और जुड़ाव महत्वपूर्ण है लेकिन साथ ही सार्वजनिक आचरण और प्रशासनिक व्यवस्थाओं में जनता की सुविधा को भी सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए। यही कारण है कि दिनभर की इन घटनाओं ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस को जन्म दिया और सोशल मीडिया पर भी लंबे समय तक चर्चा का विषय बनी रहीं।

  • एमपी कांग्रेस का बड़ा एक्शन प्लान, पार्टी लाइन से भटके नेताओं पर चलेगा अनुशासन का डंडा

    एमपी कांग्रेस का बड़ा एक्शन प्लान, पार्टी लाइन से भटके नेताओं पर चलेगा अनुशासन का डंडा


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश कांग्रेस ने संगठन में बढ़ती अनुशासनहीनता पर सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा फैसला लिया है। पार्टी ने ऐसे नेताओं और पदाधिकारियों की पहचान करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है जो लगातार पार्टी लाइन से हटकर बयान देते हैं या सोशल मीडिया के जरिए संगठन और शीर्ष नेतृत्व पर सवाल उठाते हैं। कांग्रेस का मानना है कि ऐसे नेताओं की बयानबाजी से पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचता है और राजनीतिक विरोधियों को हमला करने का मौका मिलता है। अब ऐसे मामलों में चेतावनी से लेकर अनुशासनात्मक कार्रवाई और जरूरत पड़ने पर पार्टी से बाहर का रास्ता भी दिखाया जा सकता है।

    पार्टी सूत्रों के अनुसार जिला कांग्रेस अध्यक्षों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने जिलों में ऐसे नेताओं और कार्यकर्ताओं की सूची तैयार करें जो सार्वजनिक मंचों या सोशल मीडिया पर पार्टी की आधिकारिक लाइन के विपरीत बयान देते हैं। इस सूची के आधार पर पहले संबंधित नेताओं को नोटिस जारी किया जाएगा और उनसे स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। यदि चेतावनी के बाद भी उनके व्यवहार में सुधार नहीं आता है तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

    मध्य प्रदेश कांग्रेस के संगठन प्रभारी डॉ संजय कामले ने बताया कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने कई बैठकों में इस मुद्दे पर चिंता जताई थी। उनका कहना है कि कुछ नेता लगातार ऐसे बयान देते हैं जिनसे संगठन की छवि प्रभावित होती है और पार्टी को अनावश्यक विवादों का सामना करना पड़ता है। इसी वजह से अब संगठन स्तर पर सख्ती करने का निर्णय लिया गया है ताकि अनुशासन कायम रखा जा सके।

    कांग्रेस ने केवल सार्वजनिक बयानबाजी ही नहीं बल्कि सोशल मीडिया गतिविधियों को भी गंभीरता से लेने का फैसला किया है। जिला अध्यक्षों को भेजे गए निर्देशों में कहा गया है कि यदि कोई पदाधिकारी या कार्यकर्ता फेसबुक एक्स इंस्टाग्राम या अन्य सोशल मीडिया मंचों पर पार्टी की नीतियों नेतृत्व या फैसलों के खिलाफ टिप्पणी करता है तो उसे भी अनुशासनहीनता माना जाएगा। ऐसे मामलों की पहचान कर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

    पार्टी ने जिला इकाइयों को यह भी स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जिन मामलों में जिला स्तर पर कार्रवाई संभव नहीं हो वहां पूरे साक्ष्य और संबंधित दस्तावेजों के साथ रिपोर्ट प्रदेश कांग्रेस कमेटी को भेजी जाए। प्रदेश स्तर पर जांच के बाद आवश्यक अनुशासनात्मक कदम उठाए जाएंगे। संगठन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी नेता या कार्यकर्ता पार्टी के भीतर रहकर सार्वजनिक रूप से संगठन की छवि को नुकसान न पहुंचाए।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हाल के वर्षों में कांग्रेस के कई नेताओं द्वारा सार्वजनिक मंचों और सोशल मीडिया पर अपने ही नेतृत्व के खिलाफ दिए गए बयानों से पार्टी को असहज स्थिति का सामना करना पड़ा है। ऐसे मामलों ने कई बार संगठन के भीतर मतभेदों को भी सार्वजनिक किया। इसी पृष्ठभूमि में कांग्रेस नेतृत्व ने अनुशासन को सर्वोच्च प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है।

    कांग्रेस का कहना है कि संगठन में विचार रखने की पूरी स्वतंत्रता है लेकिन इसके लिए पार्टी के आंतरिक मंच उपलब्ध हैं। सार्वजनिक रूप से पार्टी विरोधी बयान देना या सोशल मीडिया के जरिए संगठन की आलोचना करना स्वीकार नहीं किया जाएगा। आने वाले समय में यह अभियान पूरे प्रदेश में चलाया जाएगा और सभी जिला इकाइयों से प्राथमिकता के आधार पर रिपोर्ट मांगी गई है। इससे स्पष्ट है कि कांग्रेस अब संगठनात्मक अनुशासन को लेकर पहले से कहीं अधिक सख्त नजर आने वाली है।

  • पोस्टर राजनीति से लेकर शराबी टीचर तक, मध्य प्रदेश में सियासी तंज और प्रशासनिक चर्चाओं का बड़ा दिन

    पोस्टर राजनीति से लेकर शराबी टीचर तक, मध्य प्रदेश में सियासी तंज और प्रशासनिक चर्चाओं का बड़ा दिन


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश में शुक्रवार का दिन राजनीति प्रशासन और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी कई चर्चित घटनाओं के नाम रहा। कहीं उपचुनाव की तैयारियों के बीच पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा की वापसी की अटकलों ने जोर पकड़ा तो कहीं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर चंदे को लेकर अपने ही अंदाज में सियासी संदेश दे दिया। दूसरी ओर नर्मदापुरम जिले में एक सरकारी स्कूल के शिक्षक का शराब के नशे में क्लासरूम में सोते हुए वीडियो सामने आने से शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए। इन सबके बीच मंत्रालय के गलियारों में एक महिला मंत्री और उनके विभाग से जुड़ी चर्चाएं भी खूब सुर्खियां बटोरती रहीं।

    दतिया विधानसभा उपचुनाव की घोषणा के बाद पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा एक बार फिर राजनीतिक केंद्र में आ गए हैं। उनका पुराना शायराना बयान कि समुद्र का पानी उतरता देख किनारे पर घर मत बना लेना मैं लौटकर आऊंगा एक बार फिर चर्चाओं में है। उपचुनाव को लेकर उनकी सक्रियता लगातार बढ़ रही है। हाल ही में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने जनता के बीच विनम्रता के साथ स्वीकार किया कि यदि उनसे कोई गलती हुई है तो उसे सुधारेंगे और अपने व्यवहार तथा कार्यशैली में बदलाव लाकर लोगों का विश्वास दोबारा जीतने का प्रयास करेंगे। हालांकि भारतीय जनता पार्टी ने अब तक उम्मीदवार के नाम की घोषणा नहीं की है लेकिन राजनीतिक हलकों में नरोत्तम मिश्रा का नाम सबसे आगे माना जा रहा है।

    उधर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे में कथित अनियमितताओं को लेकर अपने भोपाल स्थित निवास के बाहर एक बड़ा पोस्टर लगा दिया। पोस्टर में साफ लिखा गया है कि भगवान श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए दिए गए चंदे के चोरों और चढ़ावा चोरों का उनके घर में प्रवेश निषिद्ध है। इसके साथ ही उन्होंने उज्जैन से अयोध्या तक पदयात्रा निकालने का ऐलान भी किया है। उनका कहना है कि यह यात्रा पूरी तरह गैर राजनीतिक होगी और इसका उद्देश्य केवल चंदे में पारदर्शिता की मांग करना है। राजनीतिक विश्लेषक इसे आगामी राजनीतिक रणनीति के रूप में भी देख रहे हैं।

    राजनीतिक हलचल के बीच नर्मदापुरम जिले के केसला क्षेत्र से आई एक घटना ने शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। यहां एक सरकारी स्कूल का शिक्षक शराब के नशे में धुत होकर कक्षा में ही सोता मिला। ग्रामीणों ने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। सूचना मिलते ही पुलिस ने शिक्षक के खिलाफ मामला दर्ज किया जबकि शिक्षा विभाग ने तत्काल प्रभाव से उसे निलंबित कर दिया। बाद में शिक्षक ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए भविष्य में शराब नहीं पीने का वादा किया लेकिन घटना ने सरकारी स्कूलों की निगरानी व्यवस्था पर बहस छेड़ दी।

    इधर मंत्रालय के गलियारों में भी एक महिला मंत्री को लेकर चर्चाएं तेज हैं। बताया जा रहा है कि वे अपने विभाग में प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारी की नियुक्ति चाहती हैं ताकि विभागीय कामकाज पर बेहतर नियंत्रण स्थापित हो सके। चर्चा यह भी है कि विभाग में बड़े टेंडर और तबादलों को लेकर मंत्री और विभाग की वरिष्ठ अधिकारी के बीच मतभेद सामने आए हैं। हालांकि इस संबंध में किसी भी स्तर पर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है लेकिन प्रशासनिक हलकों में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।

    प्रदेश में एक ही दिन सामने आई इन घटनाओं ने साफ कर दिया कि मध्य प्रदेश में राजनीति प्रशासन और व्यवस्था से जुड़े मुद्दे लगातार नए रंग दिखा रहे हैं। आने वाले दिनों में उपचुनाव पदयात्रा और प्रशासनिक फैसलों के साथ इन घटनाओं का असर प्रदेश की सियासत में और अधिक दिखाई दे सकता है।

  • राम मंदिर चंदे पर दिग्विजय का बड़ा अभियान! महाकाल से रामलला तक 1000 किलोमीटर पैदल यात्रा का ऐलान

    राम मंदिर चंदे पर दिग्विजय का बड़ा अभियान! महाकाल से रामलला तक 1000 किलोमीटर पैदल यात्रा का ऐलान


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे की पारदर्शिता को लेकर बड़ा राजनीतिक और सामाजिक अभियान शुरू करने की घोषणा की है। भोपाल में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि 2 अक्टूबर से उज्जैन स्थित महाकाल मंदिर से अयोध्या के राम जन्मभूमि परिसर तक लगभग 1000 किलोमीटर लंबी पदयात्रा निकाली जाएगी। उनका कहना है कि इस यात्रा का उद्देश्य किसी राजनीतिक दल का प्रचार नहीं बल्कि राम मंदिर निर्माण के लिए देशभर के श्रद्धालुओं से जुटाए गए चंदे का सार्वजनिक हिसाब मांगना होगा।

    दिग्विजय सिंह ने स्पष्ट किया कि यह पदयात्रा पूरी तरह गैर-राजनीतिक होगी। उन्होंने कहा कि यात्रा के दौरान कांग्रेस का प्रचार नहीं किया जाएगा और वे स्वयं फेसबुक एक्स सहित किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग नहीं करेंगे। उनका कहना है कि यह अभियान केवल पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग के लिए होगा ताकि श्रद्धालुओं के विश्वास को बनाए रखा जा सके।

    पूर्व मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने भी राम मंदिर निर्माण के लिए 1 लाख 11 हजार रुपए का योगदान दिया था। उनके पास आज भी चंदे की रसीद और चेक की प्रति सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि देशभर के करोड़ों लोगों ने भगवान राम के प्रति आस्था के साथ दान दिया था इसलिए यह जानना उनका अधिकार है कि उस धन का उपयोग किस प्रकार किया गया।

    उन्होंने घोषणा की कि 5 या 6 जुलाई को वरिष्ठ अधिवक्ताओं से चर्चा करने के बाद अयोध्या जाकर अदालत में याचिका दायर करेंगे। उनके अनुसार अदालत से अनुरोध किया जाएगा कि राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे का पूरा वित्तीय विवरण सार्वजनिक कराया जाए। यदि जांच में किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।

    दिग्विजय सिंह ने यह भी कहा कि उनकी पदयात्रा में उन सभी लोगों का स्वागत होगा जिन्होंने राम मंदिर निर्माण के लिए आर्थिक सहयोग दिया है। उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल या विचारधारा से जुड़े लोग यदि चंदे की पारदर्शिता चाहते हैं तो वे इस यात्रा में शामिल हो सकते हैं। यात्रा के दौरान वे अपनी दान रसीद और चेक की प्रतियां भी साथ लेकर चलेंगे ताकि यह संदेश दिया जा सके कि दानदाताओं को अपने योगदान का हिसाब मांगने का पूरा अधिकार है।

    पूर्व मुख्यमंत्री ने इस दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद से जुड़े कुछ ट्रस्टों की आर्थिक पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि उज्जैन के महाकाल मंदिर क्षेत्र में ट्रस्ट द्वारा विकसित गेस्ट हाउस और होटल परियोजना की भी जांच होनी चाहिए। उनका कहना है कि यदि किसी भी धार्मिक ट्रस्ट को जनता से चंदा मिलता है तो उसकी आय और खर्च का विवरण सार्वजनिक होना चाहिए।

    उन्होंने कहा कि यदि अदालत में वित्तीय अनियमितता साबित होती है तो वे अपना दान वापस लेकर किसी मान्यता प्राप्त धार्मिक पीठ या शंकराचार्य के न्यास को दान कर देंगे। साथ ही उन्होंने घोषणा की कि अपने घर के बाहर एक तख्ती लगाएंगे जिस पर लिखा होगा कि चंदा चोरों का प्रवेश निषिद्ध है। दिग्विजय सिंह के इस ऐलान के बाद राज्य की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है और आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज होने की संभावना है।

  • मध्य प्रदेश की सियासत में नए संकेत सीएम के मंच पर कांग्रेस विधायक कैलाश के बदले तेवर और साउथ में छाए शिवराज

    मध्य प्रदेश की सियासत में नए संकेत सीएम के मंच पर कांग्रेस विधायक कैलाश के बदले तेवर और साउथ में छाए शिवराज


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर ऐसे घटनाक्रम देखने को मिले जिन्होंने सियासी गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया। कहीं मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में कांग्रेस विधायक की सक्रिय मौजूदगी चर्चा का विषय बनी तो कहीं मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का बदला हुआ अंदाज लोगों की नजरों में रहा। वहीं केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का लोकप्रिय मामा वाला अंदाज अब दक्षिण भारत तक पहुंचता दिखाई दिया। इन घटनाओं ने प्रदेश की राजनीति में नए राजनीतिक संकेतों को लेकर अटकलों का दौर तेज कर दिया है।

    सिवनी में आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस विधायक ठाकुर रजनीश सिंह पूरे समय मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के आसपास सक्रिय दिखाई दिए। कार्यक्रम में विधायक कभी मुख्यमंत्री के पीछे तो कभी उनके आगे चलते नजर आए। मंच पर भी उन्होंने मुख्यमंत्री से बातचीत करने की कोशिश की लेकिन मुख्यमंत्री अपना संबोधन समाप्त कर आगे बढ़ गए। यह दृश्य इसलिए भी खास माना गया क्योंकि कार्यक्रम शुरू होने से पहले यही विधायक मुख्यमंत्री की नीतियों के विरोध में सड़क पर प्रदर्शन करते नजर आए थे। विरोध के बाद उसी कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के साथ उनकी सहज मौजूदगी ने राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे दिया। राजनीतिक जानकार इसे बदलते राजनीतिक समीकरणों और व्यावहारिक राजनीति का उदाहरण मान रहे हैं।

    दूसरी ओर मुख्यमंत्री को पत्र लिखने के विवाद के बाद नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का बदला हुआ अंदाज भी चर्चा में रहा। भाजपा प्रदेश कार्यालय में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने लगभग हर सवाल का जवाब मुस्कुराते हुए दिया। मुख्यमंत्री को लिखी चिट्ठी पर उन्होंने कहा कि अब यह अध्याय समाप्त हो चुका है। इंदौर में मुख्यमंत्री की बैठक रद्द होने के सवाल पर उन्होंने जिम्मेदारी बैठक तय करने वालों पर डाल दी। मंत्रिमंडल विस्तार और अन्य राजनीतिक मुद्दों पर भी उन्होंने हल्के अंदाज में जवाब दिए लेकिन पूरे समय उनके चेहरे पर मुस्कान बनी रही। राजनीतिक विश्लेषक इसे संयमित रणनीति और विवादों से दूरी बनाने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं।

    उधर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का लोकप्रिय मामा वाला अंदाज अब मध्य प्रदेश की सीमाओं से बाहर भी लोगों के बीच पहचान बना रहा है। आंध्र प्रदेश के तिरुपति में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान जैसे ही लोग उन्हें देखने पहुंचे भीड़ से मामा मामा के नारे गूंजने लगे। लोगों के उत्साह को देखते हुए शिवराज सिंह चौहान भी सीधे उनके बीच पहुंचे और सभी का अभिवादन स्वीकार किया। उनका सहज और आत्मीय व्यवहार एक बार फिर लोगों का ध्यान खींचने में सफल रहा। भाजपा नेताओं का मानना है कि शिवराज की यही जनसंपर्क शैली उन्हें देशभर में अलग पहचान दिला रही है।

    इसी बीच प्रदेश की नौकरशाही में भी एक रोचक चर्चा सामने आई। राज्य पुलिस सेवा के एक अधिकारी को कुछ दिनों तक आईपीएस बनने की बधाइयां मिलती रहीं लेकिन बाद में स्पष्ट हुआ कि उनका नाम अंतिम सूची में शामिल ही नहीं था। इसके बाद यह मामला भी प्रशासनिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया।

    प्रदेश की राजनीति में लगातार सामने आ रहे ऐसे घटनाक्रम यह संकेत दे रहे हैं कि आने वाले समय में राजनीतिक गतिविधियां और भी तेज होने वाली हैं। नेताओं की सक्रियता बदलते व्यवहार और नए राजनीतिक संदेश अब सत्ता और विपक्ष दोनों के लिए अहम मायने रखने लगे हैं।