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  • सीएम मोहन यादव के दो साल नेतृत्व में बदलाव विकास की नई दिशा और रोजगार के नए अवसर

    सीएम मोहन यादव के दो साल नेतृत्व में बदलाव विकास की नई दिशा और रोजगार के नए अवसर


    भोपाल । मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कार्यकाल के दो साल जल्द ही पूरे होने वाले हैं। दिसंबर 2023 में विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा विधायक दल की बैठक में शायद ही किसी ने यह सोचा था कि वह मुख्यमंत्री बनेंगे। उस समय बड़े नाम खासकर शिवराज सिंह चौहान जो 17 साल तक मुख्यमंत्री रहे चर्चा में थे। इस वजह से जब डॉ. यादव ने पद संभाला तो उनके नेतृत्व को लेकर कुछ हिचक और आशंकाएं थीं। लेकिन अब उनके दो साल के कार्यकाल ने उन सभी अफवाहों पर विराम लगा दिया है और उन्होंने मध्य प्रदेश में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं।

    डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में कई नए बदलाव हुए हैं। उन्होंने मध्य प्रदेश में विकास की नई दिशा दिखाने के लिए कई योजनाओं की शुरुआत की। केन-बेतवा लिंक परियोजना की शुरुआत भी प्रदेश से हुई है जो बुंदेलखंड के पिछड़े इलाकों में विकास की नई राह खोलेगी। उन्होंने प्रशासनिक सुधारों पर भी जोर दिया है जैसे प्रमोटी अधिकारियों को हटाकर युवा अधिकारियों को जिलों की जिम्मेदारी सौंपना जिससे प्रदेश में बेहतर प्रशासन का माहौल बना है।

    डॉ. यादव ने रोजगार सृजन के मामले में भी कई उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने सिर्फ एक साल में 75 हजार युवाओं को सरकारी नौकरी दी है। निजी क्षेत्र में भी रोजगार के नए अवसर बन रहे हैं जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है। इसके अलावा सात लाख करोड़ के निवेश से नए उद्योग शुरू किए गए हैं और निजी क्षेत्र में दो लाख से अधिक युवाओं को रोजगार मिला है। वहीं प्रदेश में सिंचाई क्षमता को बढ़ाने की दिशा में भी लगातार काम हो रहा है। जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट ने बताया कि 2028 तक एक करोड़ हेक्टेयर भूमि में सिंचाई की सुविधा मुहैया कराई जाएगी जिससे किसानों की आमदनी में भी वृद्धि होगी।

    बिजली क्षेत्र में नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भी मध्य प्रदेश अच्छा प्रदर्शन कर रहा है जो राज्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद कर रहा है। स्वास्थ्य सुविधाओं में भी सुधार हुआ है। प्रदेश में अब मेडिकल कॉलेजों की संख्या 25 से अधिक हो गई है और सरकारी अस्पतालों में सुपर स्पेशलिटी सुविधाओं का विस्तार हो रहा है। इसके अलावा सड़क और इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में मध्य प्रदेश ने अन्य राज्यों के लिए उदाहरण प्रस्तुत किया है। धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में भी डॉ. मोहन यादव ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।
    श्री महाकाल महालोक के उद्घाटन के बाद उज्जैन में पर्यटकों की संख्या में 20 गुना वृद्धि हुई है। 2023 में जहां 5 लाख पर्यटक उज्जैन आए थे वहीं 2024 में यह संख्या सात करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। प्रदेश में 12 लोक बन रहे हैं जिससे मध्य प्रदेश की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान मजबूत हो रही है। डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में समग्र विकास की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। हालांकि उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रदेश की अर्थव्यवस्था को और अधिक मजबूत करना है जिसे वह अपनी सरकार के अगले दो सालों में पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में राज्य का विकास निश्चित रूप से एक नए मुकाम पर पहुंचने की ओर अग्रसर है।

  • आईएएस संतोष वर्मा का विवादित बयान: 'हर घर से संतोष वर्मा निकलेगा'गिरफ्तारी की मांग तेज

    आईएएस संतोष वर्मा का विवादित बयान: 'हर घर से संतोष वर्मा निकलेगा'गिरफ्तारी की मांग तेज


    भोपाल। आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा एक बार फिर सुर्खियों में हैं। उनका एक नया वीडियो वायरल हुआ हैजिसमें वह भीम आर्मी के प्रमुख सांसद चंद्रशेखर रावण की तारीफ करते हुए विवादित बयान देते नजर आ रहे हैं। संतोष वर्मा ने चंद्रशेखर के बयान को मंच से दोहराते हुए कहाकितने संतोष वर्मा मारोगेहर घर से संतोष वर्मा निकलेगा।यह बयान तब आया है जब उनके खिलाफ पहले से ही सरकारी कार्रवाई की तलवार लटकी हुई है। संतोष वर्मा का यह बयान मध्य प्रदेश अनुसूचित जाति जनजाति अधिकारी कर्मचारी संघ अजाक्स के एक कार्यक्रम में दिया गयाजहां उन्होंने चंद्रशेखर रावण को समाजसेवी बताते हुए उनका समर्थन किया।
    संतोष वर्मा ने मंच से कहाभीम आर्मी के जो हमारे चंद्रशेखर रावण जी हैंबहुत अच्छे समाजसेवी हैंसमाज के लिए बहुत कुछ कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कितने संतोष वर्मा को तुम मारोगेकितने संतोष वर्मा को तुम जलाओगेकितने संतोष वर्मा को तुम निगल जाओगेअब हर घर से एक संतोष वर्मा निकलेगा।उनका यह बयान एक गंभीर संदेश देता है कि वह समाज में उठ रही आवाजों को दबाने के खिलाफ खड़े हैं और उनका मानना है कि इन आवाजों को दबाने की कोशिशें बेकार जाएंगी।

    हालांकिउनका यह बयान विवादों में घिर गया है। पहले से ही एक विवाद में घिरे संतोष वर्मा पर इस नए बयान के बाद कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। राज्य के सामान्य प्रशासन विभाग ने पहले ही उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया थाजब उन्होंने 23 नवंबर को अजाक्स के कार्यक्रम में आरक्षण पर विवादित बयान दिया था। वर्मा ने कहा थाएक परिवार में एक ही व्यक्ति को आरक्षण की शर्त को तब तक मंजूर नहीं किया जा सकता है जब तक कोई ब्राह्मण अपनी बेटी उनके बेटे को दान ना कर दे या उससे संबंध ना बनाए।इस बयान के बाद ब्राह्मण और सवर्ण समाज में आक्रोश फैल गया था।

    संतोष वर्मा के इस नए बयान ने उनके खिलाफ उठ रही आवाजों को और भी तेज कर दिया है। सपाक्ससामाजिक और जनकल्याण संगठन के राष्ट्रीय संयोजक हीरालाल त्रिवेदी ने मुख्यमंत्री से संतोष वर्मा के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। त्रिवेदी ने कहा हर घर से संतोष वर्मा निकलेगा तो क्या हर घर की बेटी खतरे में जाएगी इसके खिलाफ महिला उत्पीड़न का केस चल रहा हैऔर फिर भी उसके खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं हो रही हैत्रिवेदी ने मुख्यमंत्री से वर्मा को गिरफ्तार करने और निलंबित करने की मांग कीताकि समाज में वर्ग संघर्ष की स्थिति उत्पन्न न हो और महिलाओं के लिए कोई खतरा न बने।

    संतोष वर्मा पर उठ रहे सवाल उनके विवादित बयानों के कारण और बढ़ गए हैं। उनकी गिरफ्तारी की मांग और कार्रवाई की दबाव में सरकार के लिए यह एक मुश्किल स्थिति बनती जा रही है। वर्मा के बयान ने समाज में गहरे मतभेदों को और बढ़ा दिया हैऔर अब सरकार को यह निर्णय लेना होगा कि क्या उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी या यह विवाद शांत हो जाएगा।इन विवादों के बावजूदसंतोष वर्मा ने हमेशा अपने बयानों से समाज के विभिन्न वर्गों को प्रभावित किया है। अब यह देखना होगा कि राज्य सरकार इस मुद्दे पर क्या कदम उठाती है और संतोष वर्मा के खिलाफ क्या कार्रवाई करती है। यह विवाद निश्चित ही आगे बढ़ने की संभावना को छोड़ता है और भारतीय प्रशासनिक सेवा में एक नई बहस को जन्म देता है।

  • इंदौर से धार तक नई ब्राडगेज रेल सेवामार्च 2026 तक शुरू होने की उम्मीद

    इंदौर से धार तक नई ब्राडगेज रेल सेवामार्च 2026 तक शुरू होने की उम्मीद


    इंदौर।
    इंदौर और धार के बीच नई ब्राडगेज रेल लाइन परियोजना के तहत 17 साल के लंबे इंतजार के बाद 2026 में पहली बार ट्रेन चलने की संभावना जताई जा रही है। इस परियोजना का भूमिपूजन वर्ष 2008 में किया गया था और इसके बाद से ही इस पर काम जारी था। अब रेलवे विभाग का दावा है कि मार्च 2026 तक इंदौर से धार के बीच ट्रेन सेवा शुरू हो सकती है। हालांकिनिर्माण कार्य की गति और जमीनी हकीकत को देखते हुए इसे लेकर कुछ संशय भी बना हुआ हैऔर हो सकता है कि इस योजना में छह महीने की और देरी हो।
    इस परियोजना के तहत कुल 204.76 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन बनाई जा रही हैजो इंदौर से दाहोद तक फैली हुई है। इस परियोजना के हिस्से के तौर पर इंदौर से टीही 21 किमी और दाहोद से कटवारा 11.30 किमी खंड का निर्माण पहले ही शुरू हो चुका है। इस रूट पर ट्रेन सेवा की शुरुआत से न केवल इंदौर और धार के बीच यात्रा का समय घटेगाबल्कि आदिवासी बहुल क्षेत्र धार में पहली बार रेलवे सेवा का लाभ भी मिलेगा।

    रेलवे अधिकारियों का कहना है कि फरवरी 2026 तक इस परियोजना के तहत टनल का काम पूरा कर लिया जाएगा। टनल का निर्माण इस परियोजना का एक महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण हिस्सा हैजिसके कारण पहले ही निर्माण कार्य में देरी हुई है। रेलवे के कंस्ट्रक्शन विभाग के अधिकारियों ने इस काम को प्राथमिकता दी है और इसके लिए एक टाइमलाइन तय कर काम किया जा रहा हैजिसमें हर दिन की समय सीमा निर्धारित की गई है। इसके बावजूदपरियोजना की गति को देखकर ऐसा लगता है कि ट्रेन सेवा में और कुछ समय की देरी हो सकती है।

    इस रेलवे परियोजना का महत्व सिर्फ इस क्षेत्र के लिए नहींबल्कि पूरे मध्य प्रदेश के लिए बहुत बड़ा है। इंदौर और धार के बीच यात्रा के समय में बड़ी कमी आएगीजिससे व्यापारपरिवहन और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। साथ हीआदिवासी क्षेत्रों में रेलवे सेवा का विस्तार स्थानीय निवासियों के लिए रोजगार और विकास के नए अवसरों की संभावनाएं खोलेगा। इस रेलवे परियोजना से इंदौर के साथ ही धारझाबुआऔर आसपास के क्षेत्रों में भी विकास की गति तेज हो सकती है।

    हालांकिपरियोजना की सफलता इस पर निर्भर करेगी कि रेलवे निर्माण कार्य समय पर पूरा हो और किसी भी प्रकार की और देरी न हो। टनल निर्माण के अलावाट्रैकस्टेशन और अन्य आवश्यक सुविधाओं की भी समय पर व्यवस्था की जानी जरूरी हैताकि ट्रेन सेवा बिना किसी परेशानी के शुरू हो सके। इस परियोजना में देरी के कारण पहले ही लोगों को निराशा का सामना करना पड़ा हैलेकिन अगर यह समय पर पूरी होती है तो यह क्षेत्र के विकास और यात्रियों के लिए एक बड़ी उपलब्धि साबित होगी।

    कुल मिलाकरइंदौर से धार के बीच ट्रेन सेवा का आरंभ इस क्षेत्र की यात्रा व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है। 17 वर्षों के लंबे इंतजार के बादअगर यह परियोजना समय पर पूरी होती हैतो यह न केवल मध्य प्रदेश के लिएबल्कि देश के अन्य हिस्सों के लिए भी एक मॉडल बन सकती हैजहां लंबी देरी के बावजूद इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को पूरा किया जा सकता है।

  • मप्र के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में मादा चीता वीरा के शावक की मौत

    मप्र के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में मादा चीता वीरा के शावक की मौत


    – एक दिन पहले ही मुख्यमंत्री ने वीरा और उसके दो शावकों को बाड़े से खुले जंगल में किया था रिलीज

    श्योपुर। मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में स्थित कूनो राष्ट्रीय उद्यान में दक्षिण अफ्रीकी मादा चीता वीरा के 10 महीने के शावक की मौत हो गई। उसे मादा चीता वीरा और दूसरे शावक के साथ एक दिन पहले ही मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बाड़े से कूनो के पारोंद क्षेत्र में खुले जंगल में रिलीज किया था। शुक्रवार शाम पारोंद के जंगल में शावक का शव मिला है।

    चीता प्रोजेक्ट के फील्ड डायरेक्टर उत्तम कुमार शर्मा ने बताया कि शावक की मौत का वास्तविक कारण पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। प्रारंभिक जांच में किसी तरह की चोट या संघर्ष के निशान नहीं मिले हैं। उन्होंने बताया कि वीरा और उसका दूसरा शावक पूरी तरह सुरक्षित हैं। उनकी लगातार निगरानी की जा रही है। कूनो में चीतों की गतिविधियों और स्वास्थ्य पर चौबीसों घंटे नजर रखी जा रही है।

    गौरतलब है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को श्योपुर जिले के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में अंतरराष्ट्रीय चीता दिवस पर तीन चीतों को स्वछंद विचरण के लिये बाड़े से अभयारण्य में छोड़ा था। इनमें मादा चीता वीरा और उसके दो शावक शामिल हैं। बताया गया है कि गुरुवार देर रात ही ये शावक अपनी मां से अलग हो गया था। शुक्रवार को इसकी खोज की गई। शाम को पारोंद के जंगल में उसका शव मिला है।

    फील्ड डायरेक्टर उत्तम शर्मा ने बताया कि इस शावक की मौत के बाद कूनो नेशनल पार्क में चीतों की कुल संख्या अब 28 रह गई है। इनमें 8 वयस्क चीते (5 मादा और 3 नर) और भारत में जन्मे 20 शावक शामिल हैं। पार्क के अन्य सभी चीते स्वस्थ बताए गए हैं। चीता प्रोजेक्ट के अधिकारी इस घटना की बारीकी से जांच कर रहे हैं। इसमें शावकों के प्राकृतिक व्यवहार, क्षेत्र में मौजूद खतरों और निगरानी प्रणाली की समीक्षा भी शामिल है।

  • मप्र के छतरपुर में ट्रक और कार की जोरदार भिड़ंत, एक ही परिवार के 5 लोगों की मौत, दो घायल

    मप्र के छतरपुर में ट्रक और कार की जोरदार भिड़ंत, एक ही परिवार के 5 लोगों की मौत, दो घायल


    छतरपुर।
    मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में सागर-कानपुर हाईवे नंबर 34 पर शुक्रवार की रात एक भीषण सड़क हादसे में एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत हो गई। यहां बड़ामलहरा तहसील के मुंगवारी और चौपरिया सरकार गांव के पास एक तेज रफ्तार ट्रक और कार के बीच जोरदार भिड़ंत हो गई। इस हादसे में दो घायल हुए हैं, जिन्हें गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया है। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी है।

    गुलगंज थाना पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, सतना के नागौद निवासी प्रजापति परिवार के सात लोग शुक्रवार को सेंट्रो कार नंबर एमपी 19 सीए 0857 से सागर के शाहगढ़ के लिए जा रहे थे। रात करीब आठ बजे बड़ामलहरा तहसील के मुंगवारी और चौपरिया सरकार गांव के बीच तेज रफ्तार कार और ट्रक की टक्कर हो गई। कार की रफ्तार इतनी थी कि हादसे के बाद कार का अगला हिस्सा पूरी तरह नष्ट हो गया। हादसे में पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। सूचना मिलते ही सागर आईजी हिमानी खन्ना सहित गुलगंज पुलिस मौके पर पहुंची। कार के गेट तोड़कर शवों को बाहर निकाला जा सका। हादसे में दो लोग घायल हुए हैं, जिनकी हालत गंभीर है। दोनों घायलों को इलाज के लिए जिला अस्पताल रिफर किया गया है, जहां वह आईसीयू में भर्ती हैं।

    गुलगंज थाना प्रभारी गुरुदत्त शेषा ने बताया कि एक तेज रफ्तार कार सामने से आ रहे ट्रक से टकरा गई थी, जिसमें पांच लोगों की मौत हो गई है। कार में सात लोग सवार थे। दो घायलों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उन्होंने बताया कि मृतकों की पहचान महेंद्र प्रजापति (30), लक्ष्मण प्रजापति (40), दीपक प्रजापति (24), सुरेंद्र प्रजापति (26) और लालू प्रजापति (17) के रूप में हैं। दो लोग भूपेंद्र और जितेंद्र प्रजापति की हालत गंभीर है। हादसे के बाद ट्रक चालक वाहन को लेकर भाग निकला था। जिसे पुलिस ने पीछा कर बिजावर रोड पर पकड़ लिया। फिलहाल उससे पूछताछ की जा रही है।

    पुलिस के मुताबिक, सतना निवासी प्रजापति परिवार के लोग दो कारों में छतरपुर से शाहगढ़ जा रहे थे। सभी बहन को ससुराल से मायके लाने के लिए निकले थे। एक कार आगे निकल गई थी, जबकि पीछे चल रही सेंट्रो कार हादसे का शिकार हो गई।

  • मप्र में इंडिगो की 65 से ज्यादा फ्लाइट रद्द, यात्री बोले- कोई मदद नहीं मिल रही

    मप्र में इंडिगो की 65 से ज्यादा फ्लाइट रद्द, यात्री बोले- कोई मदद नहीं मिल रही


    इंदौर।
    देश की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनी इंडिगो पिछले चार दिन से क्रू मेंबर्स की कमी से जूझ रही है। इसके कारण देशभर के कई एयरपोर्ट पर 500 से ज्यादा फ्लाइट्स रद्द हो गईं। इनमें मध्य प्रदेश से संचालित होने वाली 65 से भी ज्यादा फ्लाइट्स शामिल हैं। शुक्रवार को इंदौर से जाने वाली 26 उड़ानों को निरस्त कर दिया गया, जबकि इंदौर आने वाली इंडिगो की 18 से ज्यादा फ्लाइट भी रद्द है। वहीं, भोपाल से कुल 18 और जबलपुर से इंडिगो की 6 में से 5 फ्लाइट को निरस्त कर दिया गया है। इससे यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। यात्रियों का कहना है कि विमानतल पर उन्हें कोई मदद नहीं मिल रही है।

    दरअसल, एविएशन सेक्टर के नए सुरक्षा नियमों की वजह से देश की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनी इंडिगो लगातार क्रू की कमी से जूझ रही है। इंडिगो की फ्लाइट्स का परिचालन शुक्रवार को भी लड़खड़ाता नजर आ रहा है। मुंबई और दिल्ली से ग्वालियर आने वाली फ्लाइट भी कैंसिल हैं। ऐसे में पैसेंजर ट्रेन का सहारा ले रहे हैं। शुक्रवार को इंदौर से जाने वाली 26 उड़ानों को निरस्त कर दिया गया। वहीं, इंदौर आने वाली इंडिगो की 18 से ज्यादा फ्लाइट भी कैंसिल है। इंदौर एयरपोर्ट पर पैसेंजर नागराज ने कहा कि मेरी शाम 6.45 बजे बेंगलुरु की फ्लाइट थी, वह कैंसिल हो गई है। एयरलाइंस के कर्मचारी से पूछा तो वह बोला कि इसके बाद वाली 7.45 की फ्लाइट में आपकी सीट बुक कर दूंगा लेकिन उसका जाना भी निश्चित नहीं है। नागराज ने कहा कि एयरलाइंस की तरफ से कहा गया है कि पैसे रिफंड किए जा रहे हैं। आगे की व्यवस्था खुद ही कर लें।

    भोपाल एयरपोर्ट पर पैसेंजर सस्मिता ने कहा कि मेरी भोपाल से बेंगलुरु की फ्लाइट थी। एयरलाइंस की तरफ से कोई भी जानकारी नहीं दी गई है। इनकी हेल्पलाइन में भी कोई मैसेज नहीं है। हम परेशान हो रहे हैं।

    हालांकि, इंडिगो ने कहा है कि जल्द ही नियमित संचालन बहाल किया जाएगा। एयरलाइन ने यात्रियों से अपील की है कि वे एयरपोर्ट आने से पहले अपनी उड़ान की ताजा जानकारी ले लें। यात्रियों की मदद के लिए भोपाल एयरपोर्ट प्रबंधन ने वाहन पार्किंग शुल्क पूरी तरह माफ कर दिया है। एयरपोर्ट प्रशासन ने कहा है कि इस चुनौतीपूर्ण समय में सभी यात्रियों की सहायता को प्राथमिकता दी जा रही है।

    इंडिगो की ग्वालियर से दिल्ली और मुंबई आने-जाने वाली फ्लाइट्स भी कैंसिल की गई हैं। ऐसे में यात्री ट्रेन के जरिए अपनी मंजिल की तरफ रवाना हो रहे हैं। भोपाल एयरपोर्ट पर आईं सोनल को 7 दिसंबर को बेंगलुरु जाना है। वे बोलीं- इंक्वारी में इंडिगो अथॉरिटीज ने बताया कि 7 तारीख को बेंगलुरु की फ्लाइट उड़ने के चांसेज बहुत कम हैं। जिस तरह से रोजाना उड़ानें कैंसिल हो रही हैं, उनकी फ्लाइट भी कैंसिल हो सकती है।

    ट्रैवल एजेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया के प्रदेश अध्यक्ष अमोल कटारिया ने बताया कि जिन उड़ानों का संचालन हो रहा है, वह पूरी तरह से पैक हैं। आखिरी की खाली सीटें सामान्य की अपेक्षा 4 से 5 गुना तक कीमत पर बेची जा रही हैं। शाम इंदौर से दिल्ली जाने वाली दूसरी उड़ानों में एक टिकट का किराया 36 हजार रुपये तक पहुंचा था। ऐसे में यात्रियों के लिए सफर कर पाना मुश्किल हो गया है।

    मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और पूर्व मंत्री पीसी शर्मा को शुक्रवार दोपहर 1:45 पर इंडिगो की फ्लाइट से भोपाल से दिल्ली जाना था। दिल्ली से वे इंडिगो की ही फ्लाइट से देहरादून जाने वाले थे। यहां उन्हें छतरपुर के पूर्व कांग्रेस विधायक आलोक चतुर्वेदी की बेटी के विवाह समारोह में शामिल होना था लेकिन इंडिगो की फ्लाइट कैंसिलेशन के चक्कर में दोनों नेता यात्रा नहीं कर पाए।

    इंडिगो के फ्लाइट ऑपरेशन कैंसिल होने के चलते पूर्व मंत्री पीसी शर्मा भी दिल्ली में आयोजित शादी में नहीं पहुंच पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि छतरपुर के पूर्व कांग्रेस विधायक आलोक चतुर्वेदी की बेटी के विवाह समारोह में शामिल होना था लेकिन इंडिगो की फ्लाइट कैंसिलेशन के चक्कर में यात्रा नहीं कर पाए। उन्होंने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से विमान परिचालन सामान्य कराने की मांग की है।


    भोपाल में इंडिगो की 18 उड़ानें रद्द, 3600 से ज्यादा यात्री प्रभावित

    इंडिगो एयरलाइंस के नेटवर्क में जारी तकनीकी और परिचालन दिक्कतों का असर भोपाल में भी दिख रहा है। यहां से आने और जाने वाली इंडिगो की कुल 9 उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। इससे 18 फ्लाइट मूवमेंट प्रभावित हुए हैं। रद्द उड़ानों में दिल्ली की 3, मुंबई की 2, बेंगलुरु की 2, पुणे और गोवा की 1-1 उड़ान शामिल हैं। इन उड़ानों के रद्द होने से भोपाल एयरपोर्ट पर लगभग 3600 यात्री परेशान हुए। भोपाल एयरपोर्ट से रोजाना 18 उड़ानें (36 मूवमेंट) संचालित होती हैं। इनमें से इंडिगो की 14 और एयर इंडिया की 4 उड़ानें शामिल हैं। प्रतिदिन औसतन करीब 5500 यात्री यहां से यात्रा करते हैं।

    वहीं, देश के अलग-अलग शहरों से जबलपुर के डुमना एयरपोर्ट आने वाली इंडिगो की 6 में से 5 फ्लाइट आज कैंसिल हो गई हैं। इंदौर से जबलपुर होते हुए हैदराबाद जाने वाली फ्लाइट सुबह साढ़े 8 बजे आती है और 9 बजे जाती है, वह कैंसिल हो गई। मुंबई से जबलपुर होते हुए 9 बजकर 40 मिनट पर आने वाली और 10 बजे दिल्ली जाने वाली फ्लाइट कैंसिल है। बेंगलुरु से दोपहर 12 बजकर 45 मिनट पर आने वाली और वापस 1 बजकर 15 मिनट पर बेंगलुरु जाने वाली फ्लाइट कैंसिल हो गई है। दिल्ली से दोपहर डेढ़ बजे आकर वापस 2 बजे दिल्ली जाने वाली फ्लाइट कैंसिल हो गई। दिल्ली से शाम 5 बजे जबलपुर आकर साढ़े 5 बजे मुंबई जाने वाली फ्लाइट कैंसिल हो गई। इसके अलावा हैदराबाद से शाम 7 बजकर 20 मिनट पर जबलपुर आकर 7 बजकर 50 पर इंदौर जाने वाली फ्लाइट के भी लेट होने की आशंका है।

  • MP में ठंड ने पकड़ा जोर, पचमढ़ी सबसे सर्द, 9 शहरों का तापमान 10 डिग्री से नीचे

    MP में ठंड ने पकड़ा जोर, पचमढ़ी सबसे सर्द, 9 शहरों का तापमान 10 डिग्री से नीचे


    भोपाल ।
    मध्य प्रदेश में सर्दी ने अब जोर पकड़ना शुरू कर दिया है। प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में न्यूनतम तापमान लगातार गिर रहा है। बीती रात 9 शहरों का पारा 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे पहुंच गया, जबकि पचमढ़ी सबसे ठंडा स्थान दर्ज हुआ। मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले दिनों में उत्तरी बर्फीली हवाओं के चलते ठंड और तेज होगी।

    मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि हिमालयी क्षेत्र में एक सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ प्रभावी है, जिसके पीछे एक और विक्षोभ तेजी से बढ़ रहा है। इसके कारण हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के ऊंचाई वाले इलाकों में 5 और 7 दिसंबर को बर्फबारी और बारिश की संभावना है। इसके बाद उत्तरी हवाएं मैदानी इलाकों में दाखिल होंगी, जिससे 7-8 दिसंबर को उज्जैन, ग्वालियर, चंबल और सागर संभाग में कड़ाके की सर्दी बढ़ने की पूरी आशंका है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और नर्मदापुरम में भी शीतलहर का असर तेज रहने की संभावना जताई गई है।

    इस सीजन में सर्दी का प्रभाव औसत से अधिक दिख रहा है। भोपाल में नवंबर में 84 साल का ठंड का रिकॉर्ड टूटा है, जबकि इंदौर ने 25 साल की सबसे तीखी सर्दी दर्ज की है। विभाग के अनुसार, ऐसी ही कड़ाके की ठंड दिसंबर में भी बनी रहेगी।

    नर्मदापुरम जिले का पचमढ़ी, जो प्रदेश का एकमात्र हिल स्टेशन है, इस समय सबसे ज्यादा ठंड का सामना कर रहा है। घने जंगलों से घिरा होने के कारण यहां दिन और रात, दोनों समय तापमान न्यूनतम स्तर पर बना हुआ है। बुधवार-गुरुवार की रात यहां तापमान 6.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके अलावा शहडोल के कल्याणपुर में 7.4 डिग्री, शाजापुर में 7.9 डिग्री, मुरैना में 8.5 डिग्री, उमरिया में 9.1 डिग्री, दतिया में 9.3 डिग्री, राजगढ़ में 9.4 डिग्री और रीवा में 9.8 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया।

    बड़े शहरों में ग्वालियर सबसे ठंडा रहा, जहां पारा 8.6 डिग्री तक गिरा। इंदौर में तापमान 10.2 डिग्री, जबलपुर में 11.4 डिग्री, भोपाल में 11.6 डिग्री और उज्जैन में 13 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

  • मध्य प्रदेश के नगरीय निकायों की आर्थिक हालत गंभीर: आय कम, खर्च ज्यादा, बजट प्रबंधन में खामियां

    मध्य प्रदेश के नगरीय निकायों की आर्थिक हालत गंभीर: आय कम, खर्च ज्यादा, बजट प्रबंधन में खामियां



    भोपाल।
    मध्य प्रदेश में नगर निगम और नगर पालिकाओं की आर्थिक स्थिति बेहद चिंताजनक हो गई है। इन निकायों की हालत आमदनी अठन्न खर्चा रुपैया जैसी हो गई है जहां आय कम और खर्च अत्यधिक हो रहा है। इस संकट का मुख्य कारण बजट प्रबंधन की कमी और आय का सही आकलन न होना बताया जा रहा है। इससे न केवल नगर निगमों और पालिकाओं के विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं बल्कि कर्मचारियों की वेतन राशि भी समय पर नहीं मिल पा रही है।

    मध्य प्रदेश के नगरीय निकायों के इस संकट की तस्वीर मध्य प्रदेश स्थानीय निधि संपरीक्षा के 2021-22 के वार्षिक प्रतिवेदन में सामने आई है जिसे हाल ही में विधानसभा के पटल पर रखा गया। इस रिपोर्ट के मुताबिक नगरीय निकायों का वित्तीय प्रबंधन पूरी तरह से गड़बड़ाया हुआ है जिससे इन निकायों का खर्च उनकी वास्तविक आय से कहीं अधिक हो गया है।

    आय से अधिक खर्च की स्थिति

    रिपोर्ट के अनुसार, छह प्रमुख नगर निगमों सागर सतना, उज्जैन, देवास, इंदौर और रीवा की कुल वास्तविक आय 26,89,19,02,372 रुपये रही जबकि इन नगर निगमों का कुल व्यय 29,47,52,84,875 रुपये था। इसका मतलब है कि इन नगर निगमों ने 2,58,34,82,503 रुपये अपनी आय से अधिक खर्च किया। इसी तरह, 11 नगर पालिकाओं की वास्तविक आय 4,92,62,72,896 रुपये रही और वास्तविक व्यय 5,73,86,70,532 रुपये हुआ, जो इस बात को दर्शाता है कि इन पालिकाओं ने भी अपनी आय से कहीं अधिक खर्च किया।

    यह स्थिति इस तथ्य को साबित करती है कि नगर निगमों और नगर पालिकाओं के बजट का प्रबंधन पूरी तरह से ढह चुका है। वे न केवल अपनी वास्तविक आय का ठीक से आकलन नहीं कर पा रहे, बल्कि राजस्व वसूली में भी पिछड़े हुए हैं। इसके कारण विकास कार्यों के लिए जरूरी धन जुटाना मुश्किल हो रहा है और कर्मचारियों को वेतन देने में भी दिक्कतें आ रही हैं।

    राजस्व वसूली की कमजोरी

    राजस्व वसूली की प्रक्रिया भी नगरीय निकायों के लिए एक बड़ा संकट बन चुकी है। कई नगर निगमों और नगर पालिकाओं ने तय किया था कि वे अपने राजस्व का एक निश्चित हिस्सा वसूल करेंगे, लेकिन यह लक्ष्य पूरा नहीं हो पाया। वसूली में कमी होने के कारण नगरीय निकायों को बाहरी मदद की आवश्यकता महसूस हो रही है। इसके साथ ही वित्तीय घाटे को कम करने के लिए सरकार से अतिरिक्त अनुदान की उम्मीद जताई जा रही है।

    नगरीय निकायों के लिए आगे की राह

    इस स्थिति को सुधारने के लिए तत्काल उपायों की आवश्यकता है। नगरीय निकायों को अपनी आय वसूली को दुरुस्त करना होगा और बजट प्रबंधन में सुधार करना होगा। इसके साथ ही, विकास कार्यों के लिए धन जुटाने की प्रक्रिया को भी बेहतर बनाने की जरूरत है। अगर ये समस्याएं समय रहते हल नहीं की गईं तो नगरीय विकास कार्यों में और अधिक रुकावटें आ सकती हैं और नागरिकों को इससे नुकसान उठाना पड़ सकता है।

    मध्य प्रदेश के नगरीय निकायों का आर्थिक संकट गंभीर है। आय और व्यय का असंतुलन उनकी कार्यकुशलता को प्रभावित कर रहा है और राज्य सरकार को इस पर ध्यान देने की आवश्यकता है। अगर निकायों को वित्तीय रूप से सक्षम नहीं बनाया गया तो वे अपने मौजूदा कार्यों को भी सही से पूरा नहीं कर पाएंगे। यह स्थिति मध्य प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में विकास की गति को मंद कर सकती है जो राज्य के समग्र विकास के लिए एक चिंता का विषय है।

  • मप्र की समृद्ध वन संपदा में चीता मुकुटमणि और कोहिनूर के समान : मोहन यादव

    मप्र की समृद्ध वन संपदा में चीता मुकुटमणि और कोहिनूर के समान : मोहन यादव


    – मुख्यमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय चीता दिवस पर कूनो के जंगल में छोड़े 3 चीते

    भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संकल्पों के अनुरूप श्योपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क में चीतों के पुनर्स्थापन को नई दिशा मिली है। आज अंतरराष्ट्रीय चीता दिवस के अवसर पर मादा चीता ‘वीरा’ के साथ उसके दो शावक खुले वन में विचरण के लिए छोड़े गए हैं।

    राज्य में चीतों की संख्या अब 32 हो गई है। इसमें गांधीसागर अभयारण्य के तीन चीते भी शामिल हैं। कूनो नेशनल पार्क चीतों के पुनर्वास से अब अंतरराष्ट्रीय स्तर का केंद्र बन चुका है। कूनो में हमारी धरती पर ही जन्मे तीसरे पीढ़ी के चीते विचरण कर रहे हैं। कूनो में जन्मी मादा चीता ‘मुखी’ के पांच शावक स्वस्थ हैं, यह सुखद समाचार है। कूनो के चीते अब श्योपुर से मुरैना और राजस्थान की धरती तक दौड़ लगा रहे हैं। राज्य की समृद्ध वन संपदा में चीता मुकुटमणि और कोहिनूर के समान है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव गुरुवार को श्योपुर जिले के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय चीता दिवस पर तीन चीतों को स्वछंद विचरण के लिए बाड़े से अभयारण्य (खुले जंगल) में छोड़ा। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश की भूमि पर सभी जीव सुरक्षित होंगे, राज्य सरकार इसके लिये प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि उन्नत रेडियो ट्रेकिंग प्रणाली और समर्पित टीमों के माध्यम से सतत् निगरानी की जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने चीता दिवस के अवसर पर कूनो राष्ट्रीय उद्यान के वर्ष-2026 के कैलेण्डर और ‘फील्ड मैन्युअल फॉर क्लिनिकल मैनेजमेंट ऑफ फ्री-रेंजिंग चीताज़ इन कूनो नेशनल पार्क’ बुक का विमोचन किया। साथ ही कूनो राष्ट्रीय उद्यान में ‘नव-निर्मित सोवेनियर शॉप’ का लोकार्पण भी किया। मुख्यमंत्री ने कूनो राष्ट्रीय उद्यान के पारोंद में आयोजित कार्यक्रम में चीता दिवस पर सभी प्रदेशवासियों को बधाई दी। चीता प्रोजेक्ट की सफलता के लिए उन्होंने वन विभाग के अमले को धन्यवाद भी दिया।

    चीतों का तेजी से परिवार बढ़ रहा है

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्य प्रदेश टाइगर, लेपर्ड और चीता स्टेट है। हमारे जंगल बहुत से वन्यजीवों के आश्रय स्थल हैं। ऐसे में विश्व में पहली बार चीतों का पुनर्स्थापन मध्य प्रदेश में हुआ, इसके लिए वन विभाग के मंत्री और अधिकारी बधाई के पात्र हैं। श्योपुर, कूनो में चीतों के पुनर्स्थापन से पर्यटन में पांच गुना वृद्धि हो चुकी है। चीतों का परिवार जिस तेज गति से बढ़ रहा है, उसी हिसाब से भविष्य में कूनो नेशनल पार्क से विस्थापित लोगों को रोजगार के अवसर भी मिल रहे हैं।

    मनुष्य और चीते का संबंध वसुधैब कुटुम्बकम का सबसे सुंदर उदाहरण

    मुख्यमंत्री ने कहा कि यह प्रसन्नता का विषय है कि चंबल अंचल के स्वच्छ वातावरण में हमारे नागरिक भी चीतों के साथ जीना सीख गए हैं और चीतों से प्रेम भी कर रहे हैं। प्रदेशवासियों में वन्यजीवों एवं प्रकृति के साथ भाईचारे से जुड़ने का स्वभाव है। यह वसुधैब कुटुम्बकम का सबसे सुंदर उदाहरण है। उन्होंने मध्य प्रदेश की धरती पर चीता परियोजना के क्रियान्वयन के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि चीता पर्यटन से कूनो राष्ट्रीय उद्यान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहा है। मुख्यमंत्री ने ग्राम अहेरा में ग्रामीण महिलायों से संवाद भी किया। उन्होंने कहा कि हम अपनी बहनों का पूरा ध्यान रखेंगे। मुख्यमंत्री का स्नेह पाकर बहनों ने उन्हें आशीर्वाद दिया।

    अंतरराष्ट्रीय चीता दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में श्योपुर जिले प्रभारी और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला, वन राज्यमंत्री दिलीप सिंह अहिरवार, पूर्व वन मंत्री रामनिवास रावत, सहरिया विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष तुरसनपाल बरिया, उपाध्यक्ष सीताराम आदिवासी, मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव अशोक बर्णवाल, चंबल कमिश्नर सुरेश कुमार, श्योपुर कलेक्टर अर्पित वर्मा, शिवपुरी कलेक्टर रवीन्द्र चौधरी, जनप्रतिनिधि सहित वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी एवं स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।

  • मध्य प्रदेश में दो वर्ष में 7.31 लाख हैक्टेयर सिंचाई क्षेत्र का हुआ विस्तार

    मध्य प्रदेश में दो वर्ष में 7.31 लाख हैक्टेयर सिंचाई क्षेत्र का हुआ विस्तार


    – मुख्यमंत्री ने की जल संसाधन विभाग की समीक्षा, कहा- प्रदेश की सिंचाई क्षमता 100 लाख हैक्टयर तक बढ़ाएंगे

    भोपाल। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में गत दो वर्ष में 7.31 लाख हैक्टयर क्षेत्र में नई सिंचाई क्षमता विकसित हुई है। प्रदेश की सिंचाई क्षमता में वर्ष 2026 तक 8.44 लाख हैक्टयर की वृद्धि होगी। प्रदेश में सिंचाई क्षेत्र 100 लाख हैक्टेयर तक ले जाने का लक्ष्य लेकर कार्य किया जा रहा है। प्रदेश की सिंचाई परियोजनाओं की समीक्षा प्रधानमंत्री गतिशक्ति पोर्टल का प्रयोग कर की जाएगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव मंगलवार को विधानसभा समिति कक्ष में जल संसाधन विभाग और नर्मदा घाटी विकास विभाग की गतिविधियों की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने पार्वती-काली-सिंध और चम्बल अंतर्राज्यीय लिंक परियोजना, केन-बेतवा अंतर्राज्यीय लिंक परियोजना की स्वीकृति और केंद्र सरकार के सहयोग को राज्य की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए राज्य में भी विभिन्न नदियों को जोड़ने के लिए नदी जोड़ो परियोजना के क्रियान्वयन के निर्देश दिए।

    बैठक में जल संसाधन विभाग द्वारा जानकारी दी गई कि इस दिशा में राज्य में अध्ययन और सर्वेक्षण का कार्य किया गया है। राज्य में नदी जोड़ो परियोजना अंतर्गत उज्जैन जिले में कान्ह-गंभीर, मंदसौर, नीमच और उज्जैन में कालीसिंध-चंबल, सतना जिले में केन और मंदाकिनी, सिवनी एवं छिंदवाड़ा जिले में शक्कर पेंच और दूधी तामिया, रायसेन जिले में जामनेर नेवन और नेवन-बीना नदियों का सर्वेक्षण किया गया है। इस सभी के क्रियान्वयन से कुल 5 लाख 97 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की जा सकेगी। इनकी अनुमानित लागत 9870 करोड़ रुपए होगी। सात जिलों के हजारों किसान इन योजनाओं से लाभान्वित होंगे।

    राज्य की नदियों में बाढ़, जल प्रबंधन, जल के समुचित उपयोग नदी कछारों में पर्याप्त जल की उपलब्धता सुनिश्चित किए जाने के उद्देश्य से राज्य की नदियों को आपस में जोड़ने के लिए तकनीकी दल का गठन 13 नवम्बर 2024 को किया गया था।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भोपाल की झील की प्राचीन तकनीक का अध्ययन कर इस तर्ज पर कम लागत में सुरक्षित जलाशय एवं बांध निर्माण की अवधारणा पर कार्य करने के निर्देश दिए। उन्होंने भोपाल के इस मॉडल का प्रदर्शन करने के निर्देश भी विभाग को दिए। मुख्यमंत्री को जानकारी दी गई कि राज्य में जल संसाधन और नर्मदा घाटी विकास विभाग द्वारा सिंचाई सुविधाओं के विस्तार का कार्य निरंतर किया जा रहा है।

    बैठक में बताया गया कि सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी परियोजना उज्जैन जिसकी लागत 614.53 करोड़ रुपए है। इसकी भौतिक प्रगति 48 प्रतिशत है। इसी तरह कान्ह डायवर्सन क्लोज डक्ट परियोजना उज्जैन की लागत 919.94 करोड़ है। इस परियोजना की भौतिक प्रगति 42 प्रतिशत है। सिंहस्थ: 2028 में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए घाट निर्माण एवं संबद्ध कार्य किए जा रहे हैं, जिनकी लागत 778.91 करोड़ है। बैठक में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, मुख्य सचिव अनुराग जैन और संबंधित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

    प्रमुख बिन्दु

    – प्रदेश में गत दो वर्ष में 7.31 लाख हैक्टयर क्षेत्र में नई सिंचाई क्षमता विकसित।
    – प्रदेश की सिंचाई क्षमता में वर्ष 2026 तक 8.44 लाख हैक्टयर की वृद्धि होगी।
    – प्रदेश में सिंचाई क्षेत्र 100 लाख हैक्टेयर तक ले जाने का लक्ष्य।
    – प्रदेश की सिंचाई परियोजनाओं की समीक्षा प्रधानमंत्री गतिशक्ति पोर्टल का प्रयोग कर की जाएगी।
    – राज्य में भी विभिन्न नदियों को जोड़ने के लिए नदी जोड़ो परियोजना के क्रियान्वयन के निर्देश।
    – राज्य में नदी जोड़ो परियोजना अंतर्गत उज्जैन जिले में कान्ह-गंभीर, मंदसौर, नीमच और उज्जैन में कालीसिंध-चंबल, सतना जिले में केन और मंदाकिनी, सिवनी एवं छिंदवाड़ा जिले में शक्कर पेंच और दूधी तामिया, रायसेन जिले में जामनेर नेवन और नेवन-बीना नदियों का सर्वेक्षण किया गया।
    – सभी के क्रियान्वयन से कुल 5 लाख 97 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की जा सकेगी।
    – इनकी अनुमानित लागत 9870 करोड़ रुपये होगी।
    – सात जिलों के हजारों किसान इन योजनाओं से लाभान्वित होंगे।
    – सिंहस्थ: 2028 में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए घाट निर्माण एवं संबद्ध कार्य किए जा रहे हैं, जिनकी लागत 778.91 करोड़ है।