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  • MP: IAS संतोष वर्मा पर एक्शन…. सीएम के निर्देश पर पदों से हटाया, बर्खास्तगी की तैयारी

    MP: IAS संतोष वर्मा पर एक्शन…. सीएम के निर्देश पर पदों से हटाया, बर्खास्तगी की तैयारी


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश सरकार (Madhya Pradesh Government) ने ‘मर्यादाविहीन’ टिप्पणियों (‘Indecent’ comments.) से चर्चा में आए भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी संतोष वर्मा (IAS Santosh Verma) पर ‘डबल ऐक्शन’ लिया है। राज्य सरकार ने एक ओर जहां संतोष वर्मा को कृषि विभाग के डिप्टी सेक्रेटरी पद से हटा (Removed post Deputy Secretary Agriculture Department) दिया है। वहीं, केंद्र सरकार को एक प्रस्ताव भेजकर संतोष वर्मा को आईएएस सेवा से बर्खास्त करने की भी सिफारिश की है। उन पर फर्जी तरीके से आईएएस में प्रमोशन पाने का आरोप है।

    एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, इसके साथ ही मध्य प्रदेश के सामान्य प्रशासन विभाग (जीडीए) ने संतोष वर्मा को कृषि विभाग के डिप्टी सेक्रेटरी पद से हटाकर बिना विभाग और बिना कार्य के जीडीए से ‘अटैच’ कर दिया है।


    क्या है विवाद

    दरअसल, संतोष वर्मा ने 23 नवंबर को भोपाल में एक कार्यक्रम में एक विवादित बयान देते हुए कहा था, ‘‘जब तक मेरे बेटे को कोई ब्राह्मण अपनी बेटी दान न कर दे तब तक आरक्षण मिलना चाहिए।’’ उनके इस बयान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित हुआ और फिर ब्राह्मण समाज में आक्रोश फैल गया। वर्मा की इस टिप्पणी के बाद से प्रदेश ही नहीं देशभर में उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग उठ रही थी।

    यही नहीं, संतोष वर्मा की टिप्पणी से आक्रोशित 65 ब्राह्मण संगठन एकजुट हो गए और उन्होंने शुक्रवार को मंत्रालय के बाहर प्रदर्शन करने और 14 दिसंबर को मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने का ऐलान कर दिया और साथ ही कहा कि इसके बावजूद कार्रवाई नहीं हुई तो प्रदेश बंद की तैयारी की जाएगी।


    हाईकोर्ट पर भी थी टिप्पणी

    इस बीच, संतोष वर्मा की एक और टिप्पणी ने उस वक्त आग में घी डालने का काम किया जब उन्होंने एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए यह कहा कि ‘‘एसटी वर्ग के बच्चों को सिविल जज कोई और नहीं, बल्कि हाईकोर्ट नहीं बनने दे रहा है… यही हाईकोर्ट है, जिससे हम संविधान के पालन की गारंटी मांगते हैं।’’

    उनकी इस टिप्पणी से जुड़ा वीडियो सामने आते ही विवाद और भड़क गया और सरकार पर दबाव बढ़ा। इसके बाद एक बयान में कहा गया कि मुख्यमंत्री मोहन यादव ने संतोष वर्मा प्रकरण का संज्ञान लेते हुए जीएडी को सख्त कारवाई के निर्देश दिए। बयान में कहा गया कि संतोष वर्मा ने राज्य प्रशासनिक सेवा से भारतीय प्रशासनिक सेवा के लिए प्रमोशन फर्जी और जाली आदेश तैयार कर लिया और उनके खिलाफ विभिन्न अदालतों में आपराधिक प्रकरण लंबित है।

    बयान में कहा गया, “फर्जी दस्तावेजों और धोखाधड़ी के आधार पर ली गई आईएएस की पदोन्नति गलत है। अतः आईएएस से बर्खास्त करने का प्रस्ताव केन्द्र शासन को प्रेषित किया जा रहा है।” इसके कुछ देर बाद ही सरकार ने गुरुवार को केंद्र को यह प्रस्ताव भेज दिया। सरकार ने कहा कि वर्मा के विरुद्ध जाली और फर्जी दस्तावेज के आधार पर संनिष्ठा प्रमाण पत्र प्राप्त करने के आरोप के लिए विभागीय जांच अंतिम स्तर पर है और वर्तमान प्रकरण में उनके द्वारा कारण बताओ सूचना पत्र का प्रस्तुत जबाव संतोषजनक नहीं है।

    सरकार ने कहा कि उनके द्वारा सतत मर्यादा विहीन बयान जारी किए जा रहे हैं, अतः उन्हें ‘चार्जशीट’ जारी करने का निर्णय लिया गया। एक अधिकारी ने बताया कि राज्य सरकार आईएएस अधिकारियों को सस्पेंड तो कर सकती हैं, लेकिन उन्हें बर्खास्त नहीं कर सकती क्योंकि यह शक्ति केन्द्र सरकार के पास होती है, जो राष्ट्रपति के द्वारा हस्ताक्षर किए जाने के बाद लागू होती है।

    अधिकारियों का कहना है, “MP सरकार ने MP कैडर के IAS अधिकारी संतोष वर्मा को एग्रीकल्चर डिपार्टमेंट के डिप्टी सेक्रेटरी के पद से हटा दिया है, क्योंकि यह पाया गया कि वह धोखाधड़ी से IAS अधिकारी बने थे।” “संतोष वर्मा के खिलाफ जाली और मनगढ़ंत दस्तावेजों के आधार पर कथित तौर पर इंटीग्रिटी सर्टिफिकेट हासिल करने के लिए डिपार्टमेंटल जांच अपने आखिरी स्टेज में है।”

    “मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी मध्य प्रदेश के IAS अधिकारी संतोष वर्मा के ब्राह्मण समुदाय की बेटियों के बारे में दिए गए विवादित बयान पर संज्ञान लिया। उन्होंने GAD को सख्त कार्रवाई करने का निर्देश दिया।”

  • आईएएस संतोष वर्मा के बयान पर बवाल तेज 65 ब्राह्मण संगठन 14 दिसंबर को मुख्यमंत्री आवास घेराव करेंगे

    आईएएस संतोष वर्मा के बयान पर बवाल तेज 65 ब्राह्मण संगठन 14 दिसंबर को मुख्यमंत्री आवास घेराव करेंगे


    नई दिल्ली ।मध्यप्रदेश में आईएएस संतोष वर्मा द्वारा आरक्षण और ब्राह्मण समाज को लेकर की गई विवादास्पद टिप्पणी के बाद प्रदेशभर में बवाल मच गया है। 23 नवंबर को भोपाल के अंबेडकर मैदान में अजाक्स के प्रांतीय अधिवेशन के दौरान संतोष वर्मा ने कहा था कि एक परिवार में एक व्यक्ति को आरक्षण तब तक देना चाहिए जब तक मेरे बेटे को कोई ब्राह्मण अपनी बेटी दान नहीं देता या उससे संबंध नहीं बनता।
    यह बयान फैलते ही प्रदेश में राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं शुरू हो गईं। अब यह विवाद इतना बढ़ चुका है कि राज्य के 65 से अधिक ब्राह्मण संगठन एकजुट हो गए हैं और उन्होंने संतोष वर्मा के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए 14 दिसंबर को मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने का ऐलान किया है।

    क्या था संतोष वर्मा का विवादास्पद बयान

    संतोष वर्मा ने अपने बयान में यह दावा किया था कि एक परिवार के एक सदस्य को आरक्षण तब तक मिलना चाहिए जब तक किसी ब्राह्मण परिवार का बेटा किसी ब्राह्मण परिवार की बेटी से शादी नहीं करता। यह बयान तुरंत ही विवाद का कारण बन गया और प्रदेश भर में विरोध की लहर उठने लगी। सोशल मीडिया पर उनके इस बयान को लेकर जमकर आलोचना की गई और कई राजनीतिक नेताओं और सामाजिक संगठनों ने इस पर नाराजगी जताई।

    ब्राह्मण समाज का आक्रोश

    संतोष वर्मा के बयान ने मध्यप्रदेश के ब्राह्मण समाज में गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है। प्रदेशभर के 65 से अधिक ब्राह्मण संगठनों ने उनका विरोध करना शुरू कर दिया है। इन संगठनों का कहना है कि संतोष वर्मा का बयान सामाजिक समरसता को नुकसान पहुँचाने वाला है और इससे ब्राह्मण समाज की प्रतिष्ठा पर बुरा असर पड़ा है। संगठनों ने इस बयान को जातिवाद और समाज में विभाजन की भावना को बढ़ावा देने वाला करार दिया है।

    ब्राह्मण संगठनों का कहना है कि जब तक संतोष वर्मा के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होती तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। सोमवार के बाद इन संगठनों ने आंदोलन की नई रणनीति तय करने की बात कही है। वहीं संतोष वर्मा का एक और बयान सामने आया है जिसमें उन्होंने कहा कितने संतोष वर्मा को मारोगे कितने को जलाओगे अब हर घर से एक संतोष वर्मा निकलेगा। इस बयान ने और भी आग में घी डालने का काम किया और ब्राह्मण संगठनों के विरोध को और तेज कर दिया।

    सरकार का रुख

    संतोष वर्मा के बयान को लेकर सरकार भी हरकत में आ गई है। 26 नवंबर को उन्हें नोटिस जारी किया गया जिसमें कहा गया कि उनका बयान सामाजिक समरसता को ठेस पहुँचाने वाला है और यह अखिल भारतीय सेवा नियम 1969 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई के दायरे में आता है। नोटिस में वर्मा से 7 दिनों के भीतर जवाब माँगा गया था। हालांकि इसके बावजूद संतोष वर्मा के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है जिससे आंदोलन और बढ़ गया है।

    14 दिसंबर को मुख्यमंत्री आवास घेराव

    अब तक के घटनाक्रम को देखते हुए प्रदेश के 65 ब्राह्मण संगठनों ने संयुक्त रूप से 14 दिसंबर को मुख्यमंत्री आवास घेराव करने का ऐलान किया है। इन संगठनों का कहना है कि इस घेराव के जरिए वे संतोष वर्मा के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करेंगे और प्रदेश सरकार को यह संदेश देंगे कि ब्राह्मण समाज को अपमानित करने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। राजधानी भोपाल में होने वाला यह प्रदर्शन बड़े पैमाने पर होने की संभावना है और प्रशासन ने इस पर नजर रखना शुरू कर दिया है। पुलिस और प्रशासन सुरक्षा के मद्देनज़र अलर्ट मोड पर हैं।

    आईएएस संतोष वर्मा के बयान ने मध्यप्रदेश में विवाद को जन्म दिया है और अब यह केवल एक बयान का मुद्दा नहीं बल्कि समाज में जातिवाद और सामाजिक समरसता पर गहरा सवाल उठाने वाला बन चुका है। ब्राह्मण संगठनों का आक्रोश और मुख्यमंत्री आवास के घेराव की योजना से यह साफ है कि इस मुद्दे पर प्रदेश में राजनीतिक और सामाजिक हलकों में एक बड़ा संघर्ष खड़ा हो सकता है। सरकार के लिए यह एक बड़ी चुनौती बन गई है क्योंकि उन्हें इस विवाद को शांत करने के लिए संतोष वर्मा पर सख्त कार्रवाई करनी होगी।

  • सुल्तानपुर में बोलेरो-ट्रॉला टक्कर में 3 श्रद्धालुओं की मौत8 घायल ड्राइवर की नींद बनी हादसे का कारण

    सुल्तानपुर में बोलेरो-ट्रॉला टक्कर में 3 श्रद्धालुओं की मौत8 घायल ड्राइवर की नींद बनी हादसे का कारण


    रीवा । मध्य प्रदेश से अयोध्या रामलला के दर्शन के लिए जा रहे श्रद्धालुओं की यात्रा शुक्रवार तड़के एक दर्दनाक हादसे में तब्दील हो गई। यह हादसा उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में हुआजब श्रद्धालुओं से भरी बोलेरो वाहन की ट्रॉले से टक्कर हो गई। हादसे में तीन लोगों की मौत हो गईजबकि आठ अन्य घायल हो गए। घायलों को उपचार के लिए नजदीकी अस्पताल भेजा गया हैऔर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस घटना का संज्ञान लिया हैघायलों को बेहतर इलाज और त्वरित सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए हैं।

    हादसा कैसे हुआ

    घटना शुक्रवार सुबह करीब पांच बजे पूराकलंदर थाना क्षेत्र के कल्याण भदरसा के पास हुई। मध्य प्रदेश के श्रद्धालु अयोध्या जा रहे थेऔर जैसे ही उनकी बोलेरो वाहन कल्याण भदरसा के समीप पहुंचीड्राइवर को नींद आ गई। ड्राइवर ने सोचा था कि चाय पिलाकर थोड़ा आराम किया जा सकता हैलेकिन उसने सलाह को नजरअंदाज कर दिया। ड्राइवर की नींद के कारण उसने वाहन को विपरीत दिशा में चला दिया और सामने से आ रहे ट्रॉले में जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि बोलेरो का अगला हिस्सा पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गयाजिससे तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई और बाकी आठ लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।

    मृतकों की पहचान और घायल श्रद्धालु

    मृतकों की पहचान मध्य प्रदेश के रीवा जिले के बेलाही रामपुर हाउस झरिया थाना सिविल लाइन क्षेत्र के रहने वाले तीन श्रद्धालुओं के रूप में हुई है। घायल श्रद्धालुओं का इलाज अस्पताल में चल रहा हैजहां उन्हें चिकित्सकों की निगरानी में रखा गया है। घायलों में से कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही हैऔर उन्हें बेहतर इलाज के लिए भर्ती किया गया है। पुलिस और चिकित्सा टीमों ने मौके पर पहुंचकर राहत कार्य शुरू किया और घायलों को अस्पताल पहुंचाया।

    मुख्यमंत्री योगी का संज्ञान

    इस दर्दनाक घटना के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना का संज्ञान लिया और घायलों को बेहतर उपचार प्रदान करने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि घायलों को किसी भी तरह की चिकित्सा सुविधा में कमी नहीं आनी चाहिए और उनके उपचार में पूरी तत्परता से काम किया जाए। साथ हीउन्होंने दुर्घटना के कारणों की जांच के आदेश भी दिए और इस तरह के हादसों को रोकने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने की बात की।

    दुर्घटना के कारण और प्रतिक्रिया

    यह हादसा ड्राइवर की लापरवाही और नींद के कारण हुआजो एक बहुत ही सामान्य लेकिन खतरनाक कारण बन सकता है। सड़क दुर्घटनाओं का एक प्रमुख कारण ड्राइवर की थकान या नींद होती हैजिसे अक्सर हल्के में लिया जाता है। यह हादसा एक बार फिर से यह दर्शाता है कि सड़क सुरक्षा के उपायों के अलावायात्रियों और चालक दोनों को सड़क पर सतर्कता और जिम्मेदारी के साथ चलना चाहिए।

    चाय पिलाकर आराम करने की सलाह भी एक अहम पहलू हैजो इस हादसे से पहले दिए गए थेलेकिन ड्राइवर ने इसे नजरअंदाज किया। अगर उस समय ड्राइवर ने थोड़ी देर के लिए आराम किया होता तो शायद यह दुर्घटना न होती।

    सुल्तानपुर में सड़क सुरक्षा पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता

    सुल्तानपुर जैसे प्रमुख मार्गों पर जहां यात्री वाहन और भारी वाहन दोनों का आवागमन होता हैसड़क सुरक्षा और यात्री जागरूकता को बढ़ावा देने की जरूरत है। यात्री वाहनों में ड्राइवरों को सही समय पर आराम करने और जागरूक रहने के लिए ट्रेनिंग दी जानी चाहिए। साथ हीयात्री वाहन में यात्रा करने वाले सभी लोगों को सुरक्षित यात्रा की अहमियत समझानी चाहिएताकि इस प्रकार के हादसों को रोका जा सके।

    यह हादसा सड़क सुरक्षा के प्रति हमारी सतर्कता और जिम्मेदारी की अहमियत को उजागर करता है। ड्राइवर की नींद और लापरवाही के कारण तीन अनमोल जीवन चले गए और आठ लोग घायल हो गए। यह घटना हमें यह याद दिलाती है कि लंबी यात्रा पर जाने से पहले ड्राइवरों को अपनी थकान को गंभीरता से लेना चाहिए और समय-समय पर आराम करना चाहिए।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा त्वरित सहायता के निर्देश और घायलों के उपचार की दिशा में उठाए गए कदम सराहनीय हैंलेकिन हमें इस प्रकार के हादसों को रोकने के लिए और अधिक जागरूकता और कठोर कदम उठाने की आवश्यकता है।

  • जगदीशपुर किला गोंड काल से मुगल दौर तक की ऐतिहासिक यात्रा और जीर्णोद्धार की नई शुरुआत

    जगदीशपुर किला गोंड काल से मुगल दौर तक की ऐतिहासिक यात्रा और जीर्णोद्धार की नई शुरुआत


    भोपाल ।
    मध्य प्रदेश का जगदीशपुर किला एक ऐतिहासिक धरोहर है जिसकी कहानी कई सदियों पुरानी है। 15वीं शताब्दी में गोंड साम्राज्य के 52 किलों में से एक महत्वपूर्ण किला आज भी अपने ऐतिहासिक महत्व को संजोए हुए है। गोंड साम्राज्य के दौरान यह किला विशेष स्थान रखता था और उसकी स्थापत्य कला की अनूठी शैली को यहां देखा जा सकता है। समय के साथ किले का रूप और नाम बदलते रहे लेकिन इसके ऐतिहासिक महत्व में कोई कमी नहीं आई।

    किले की कहानी गोंड साम्राज्य से शुरू होती है जब यहां के वन क्षेत्रों में गोंड शासकों ने स्थानीय सत्ता संभाली थी। संग्रामशाह ने कई किलों का निर्माण कराया था जिनमें से यह किला भी शामिल था। रानी दुर्गावती की पराजय के बाद किला अकबर के अधीन आ गया था। मुगल काल में यह किला देवड़ा राजपूतों का ठिकाना बना और इसे ‘जगदीशपुर’ नाम मिला। बाद में 18वीं शताब्दी में दोस्त मोहम्मद खान ने इसका नाम बदलकर ‘इस्लामनगर’ कर दिया लेकिन आज यह किला जगदीशपुर के नाम से ही प्रसिद्ध है।

    किले की संरचना और स्थापत्य की खासियत

    जगदीशपुर किले की संरचना और सुरक्षा प्राचीर आज भी अपनी भव्यता बनाए हुए हैं। किले के चारों ओर मजबूत बुर्ज बनाए गए हैं जिनका अलंकरण गोंड स्थापत्य कला को दर्शाता है। बुर्जों से दुश्मनों पर सटीक निशाना साधने की व्यवस्था थी। किले के परिसर में तीन मुख्य प्रवेश द्वार हैं जबकि चौथा द्वार शाही परिसर का हिस्सा बन चुका है। किले में गोंड महल और शाही परिसर दो महत्वपूर्ण निर्माण हैं जिन्हें आंतरिक प्राचीर से सुरक्षित किया गया था।

    गोंड महल – 15वीं शताब्दी का प्रतीक

    गोंड महल किले का सबसे पुराना महल है जो 15वीं से 16वीं शताब्दी के बीच बना था। यह महल उस समय की शाही भव्यता का प्रतीक था। महल में तीन मंजिलें हैं जिनमें विशाल आंगन मेहराबदार दालान आवासीय कक्ष दीवाने-आम फव्वारा स्नानगृह अश्वशाला और बाग हैं। लताबल्लरी युक्त मेहराबें और नक्काशीदार झरोखे महल की भव्यता को आज भी जीवंत रखते हैं।

    रानी महल – गोंड और मुगल स्थापत्य का संगम

    रानी महल किले की एक और प्रमुख संरचना है। इसकी मूल संरचना 16वीं शताब्दी की गोंड शैली में बनी है जबकि 17वीं शताब्दी में इसमें मुगल शैली की बहुकोणीय मेहराबें जोड़ी गईं। यह महल कभी देवड़ा राजपूत जमींदारों और बाद में दोस्त मोहम्मद खान का निवास भी रहा। रानी महल की मरम्मत तो हुई है लेकिन इसकी मूल संरचना को पूरी तरह से बरकरार रखा गया है।

    चमन महल – शाही परिसर का एक अनमोल रत्न

    रानी महल के उत्तर में स्थित चमन महल शाही परिसर की शोभा है। यह महल राजपूत-मुगल शैली का बेहतरीन उदाहरण है जिसमें सुंदर उद्यान गुंबद नुकीली आमेर शैली की अर्ध-मेहराबें और मुगल शैली का हमाम विशेष आकर्षण हैं। यहां स्थित चारबाग शैली का उद्यान और फव्वारे कश्मीर के मुगल बागों की याद दिलाते हैं।

    जीर्णोद्धार की प्रक्रिया

    1977 में मध्य प्रदेश सरकार द्वारा किले को अधिगृहीत किया गया था और तब से इसे संरक्षित करने के प्रयास जारी हैं। हाल ही में पुरातत्व विभाग ने रानी महल और चमन महल का जीर्णोद्धार और सुंदरीकरण पूरा किया है। डॉ. मनीषा शर्मा के अनुसार इस वर्ष जून में रानी महल और चमन महल का पुनरुद्धार पूरा हुआ है। अगले चरण में किले के मुख्य प्रवेश द्वार परकोटा दीवार और बुर्जों को उनके मूल स्वरूप में लाने का कार्य शुरू होगा।

    हृदय दृश्यम संगीत समारोह

    किले के जीर्णोद्धार के बाद 6 दिसंबर को किले में पहली बार भव्य हृदय दृश्यम संगीत समारोह का आयोजन किया जाएगा। यह समारोह किले की ऐतिहासिक धरोहर को और भी खास बनाएगा। इसके साथ ही हस्तशिल्प और व्यंजन मेले का आयोजन भी किया जाएगा जो पर्यटकों के लिए एक नया आकर्षण होगा। जगदीशपुर किला न केवल गोंड साम्राज्य की शान है बल्कि मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक सांस्कृतिक और स्थापत्य धरोहर का अहम हिस्सा भी है। इसके संरक्षण और जीर्णोद्धार के प्रयास किले की भव्यता को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने में मदद करेंगे।

  • सीएम मोहन यादव के दो साल नेतृत्व में बदलाव विकास की नई दिशा और रोजगार के नए अवसर

    सीएम मोहन यादव के दो साल नेतृत्व में बदलाव विकास की नई दिशा और रोजगार के नए अवसर


    भोपाल । मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के कार्यकाल के दो साल जल्द ही पूरे होने वाले हैं। दिसंबर 2023 में विधानसभा चुनाव के बाद भाजपा विधायक दल की बैठक में शायद ही किसी ने यह सोचा था कि वह मुख्यमंत्री बनेंगे। उस समय बड़े नाम खासकर शिवराज सिंह चौहान जो 17 साल तक मुख्यमंत्री रहे चर्चा में थे। इस वजह से जब डॉ. यादव ने पद संभाला तो उनके नेतृत्व को लेकर कुछ हिचक और आशंकाएं थीं। लेकिन अब उनके दो साल के कार्यकाल ने उन सभी अफवाहों पर विराम लगा दिया है और उन्होंने मध्य प्रदेश में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं।

    डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में कई नए बदलाव हुए हैं। उन्होंने मध्य प्रदेश में विकास की नई दिशा दिखाने के लिए कई योजनाओं की शुरुआत की। केन-बेतवा लिंक परियोजना की शुरुआत भी प्रदेश से हुई है जो बुंदेलखंड के पिछड़े इलाकों में विकास की नई राह खोलेगी। उन्होंने प्रशासनिक सुधारों पर भी जोर दिया है जैसे प्रमोटी अधिकारियों को हटाकर युवा अधिकारियों को जिलों की जिम्मेदारी सौंपना जिससे प्रदेश में बेहतर प्रशासन का माहौल बना है।

    डॉ. यादव ने रोजगार सृजन के मामले में भी कई उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने सिर्फ एक साल में 75 हजार युवाओं को सरकारी नौकरी दी है। निजी क्षेत्र में भी रोजगार के नए अवसर बन रहे हैं जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है। इसके अलावा सात लाख करोड़ के निवेश से नए उद्योग शुरू किए गए हैं और निजी क्षेत्र में दो लाख से अधिक युवाओं को रोजगार मिला है। वहीं प्रदेश में सिंचाई क्षमता को बढ़ाने की दिशा में भी लगातार काम हो रहा है। जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट ने बताया कि 2028 तक एक करोड़ हेक्टेयर भूमि में सिंचाई की सुविधा मुहैया कराई जाएगी जिससे किसानों की आमदनी में भी वृद्धि होगी।

    बिजली क्षेत्र में नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भी मध्य प्रदेश अच्छा प्रदर्शन कर रहा है जो राज्य की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद कर रहा है। स्वास्थ्य सुविधाओं में भी सुधार हुआ है। प्रदेश में अब मेडिकल कॉलेजों की संख्या 25 से अधिक हो गई है और सरकारी अस्पतालों में सुपर स्पेशलिटी सुविधाओं का विस्तार हो रहा है। इसके अलावा सड़क और इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में मध्य प्रदेश ने अन्य राज्यों के लिए उदाहरण प्रस्तुत किया है। धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में भी डॉ. मोहन यादव ने महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।
    श्री महाकाल महालोक के उद्घाटन के बाद उज्जैन में पर्यटकों की संख्या में 20 गुना वृद्धि हुई है। 2023 में जहां 5 लाख पर्यटक उज्जैन आए थे वहीं 2024 में यह संख्या सात करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। प्रदेश में 12 लोक बन रहे हैं जिससे मध्य प्रदेश की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान मजबूत हो रही है। डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश में समग्र विकास की दिशा में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। हालांकि उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रदेश की अर्थव्यवस्था को और अधिक मजबूत करना है जिसे वह अपनी सरकार के अगले दो सालों में पूरा करने की कोशिश कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में राज्य का विकास निश्चित रूप से एक नए मुकाम पर पहुंचने की ओर अग्रसर है।

  • आईएएस संतोष वर्मा का विवादित बयान: 'हर घर से संतोष वर्मा निकलेगा'गिरफ्तारी की मांग तेज

    आईएएस संतोष वर्मा का विवादित बयान: 'हर घर से संतोष वर्मा निकलेगा'गिरफ्तारी की मांग तेज


    भोपाल। आईएएस अधिकारी संतोष वर्मा एक बार फिर सुर्खियों में हैं। उनका एक नया वीडियो वायरल हुआ हैजिसमें वह भीम आर्मी के प्रमुख सांसद चंद्रशेखर रावण की तारीफ करते हुए विवादित बयान देते नजर आ रहे हैं। संतोष वर्मा ने चंद्रशेखर के बयान को मंच से दोहराते हुए कहाकितने संतोष वर्मा मारोगेहर घर से संतोष वर्मा निकलेगा।यह बयान तब आया है जब उनके खिलाफ पहले से ही सरकारी कार्रवाई की तलवार लटकी हुई है। संतोष वर्मा का यह बयान मध्य प्रदेश अनुसूचित जाति जनजाति अधिकारी कर्मचारी संघ अजाक्स के एक कार्यक्रम में दिया गयाजहां उन्होंने चंद्रशेखर रावण को समाजसेवी बताते हुए उनका समर्थन किया।
    संतोष वर्मा ने मंच से कहाभीम आर्मी के जो हमारे चंद्रशेखर रावण जी हैंबहुत अच्छे समाजसेवी हैंसमाज के लिए बहुत कुछ कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कितने संतोष वर्मा को तुम मारोगेकितने संतोष वर्मा को तुम जलाओगेकितने संतोष वर्मा को तुम निगल जाओगेअब हर घर से एक संतोष वर्मा निकलेगा।उनका यह बयान एक गंभीर संदेश देता है कि वह समाज में उठ रही आवाजों को दबाने के खिलाफ खड़े हैं और उनका मानना है कि इन आवाजों को दबाने की कोशिशें बेकार जाएंगी।

    हालांकिउनका यह बयान विवादों में घिर गया है। पहले से ही एक विवाद में घिरे संतोष वर्मा पर इस नए बयान के बाद कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। राज्य के सामान्य प्रशासन विभाग ने पहले ही उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया थाजब उन्होंने 23 नवंबर को अजाक्स के कार्यक्रम में आरक्षण पर विवादित बयान दिया था। वर्मा ने कहा थाएक परिवार में एक ही व्यक्ति को आरक्षण की शर्त को तब तक मंजूर नहीं किया जा सकता है जब तक कोई ब्राह्मण अपनी बेटी उनके बेटे को दान ना कर दे या उससे संबंध ना बनाए।इस बयान के बाद ब्राह्मण और सवर्ण समाज में आक्रोश फैल गया था।

    संतोष वर्मा के इस नए बयान ने उनके खिलाफ उठ रही आवाजों को और भी तेज कर दिया है। सपाक्ससामाजिक और जनकल्याण संगठन के राष्ट्रीय संयोजक हीरालाल त्रिवेदी ने मुख्यमंत्री से संतोष वर्मा के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। त्रिवेदी ने कहा हर घर से संतोष वर्मा निकलेगा तो क्या हर घर की बेटी खतरे में जाएगी इसके खिलाफ महिला उत्पीड़न का केस चल रहा हैऔर फिर भी उसके खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं हो रही हैत्रिवेदी ने मुख्यमंत्री से वर्मा को गिरफ्तार करने और निलंबित करने की मांग कीताकि समाज में वर्ग संघर्ष की स्थिति उत्पन्न न हो और महिलाओं के लिए कोई खतरा न बने।

    संतोष वर्मा पर उठ रहे सवाल उनके विवादित बयानों के कारण और बढ़ गए हैं। उनकी गिरफ्तारी की मांग और कार्रवाई की दबाव में सरकार के लिए यह एक मुश्किल स्थिति बनती जा रही है। वर्मा के बयान ने समाज में गहरे मतभेदों को और बढ़ा दिया हैऔर अब सरकार को यह निर्णय लेना होगा कि क्या उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी या यह विवाद शांत हो जाएगा।इन विवादों के बावजूदसंतोष वर्मा ने हमेशा अपने बयानों से समाज के विभिन्न वर्गों को प्रभावित किया है। अब यह देखना होगा कि राज्य सरकार इस मुद्दे पर क्या कदम उठाती है और संतोष वर्मा के खिलाफ क्या कार्रवाई करती है। यह विवाद निश्चित ही आगे बढ़ने की संभावना को छोड़ता है और भारतीय प्रशासनिक सेवा में एक नई बहस को जन्म देता है।

  • इंदौर से धार तक नई ब्राडगेज रेल सेवामार्च 2026 तक शुरू होने की उम्मीद

    इंदौर से धार तक नई ब्राडगेज रेल सेवामार्च 2026 तक शुरू होने की उम्मीद


    इंदौर।
    इंदौर और धार के बीच नई ब्राडगेज रेल लाइन परियोजना के तहत 17 साल के लंबे इंतजार के बाद 2026 में पहली बार ट्रेन चलने की संभावना जताई जा रही है। इस परियोजना का भूमिपूजन वर्ष 2008 में किया गया था और इसके बाद से ही इस पर काम जारी था। अब रेलवे विभाग का दावा है कि मार्च 2026 तक इंदौर से धार के बीच ट्रेन सेवा शुरू हो सकती है। हालांकिनिर्माण कार्य की गति और जमीनी हकीकत को देखते हुए इसे लेकर कुछ संशय भी बना हुआ हैऔर हो सकता है कि इस योजना में छह महीने की और देरी हो।
    इस परियोजना के तहत कुल 204.76 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन बनाई जा रही हैजो इंदौर से दाहोद तक फैली हुई है। इस परियोजना के हिस्से के तौर पर इंदौर से टीही 21 किमी और दाहोद से कटवारा 11.30 किमी खंड का निर्माण पहले ही शुरू हो चुका है। इस रूट पर ट्रेन सेवा की शुरुआत से न केवल इंदौर और धार के बीच यात्रा का समय घटेगाबल्कि आदिवासी बहुल क्षेत्र धार में पहली बार रेलवे सेवा का लाभ भी मिलेगा।

    रेलवे अधिकारियों का कहना है कि फरवरी 2026 तक इस परियोजना के तहत टनल का काम पूरा कर लिया जाएगा। टनल का निर्माण इस परियोजना का एक महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण हिस्सा हैजिसके कारण पहले ही निर्माण कार्य में देरी हुई है। रेलवे के कंस्ट्रक्शन विभाग के अधिकारियों ने इस काम को प्राथमिकता दी है और इसके लिए एक टाइमलाइन तय कर काम किया जा रहा हैजिसमें हर दिन की समय सीमा निर्धारित की गई है। इसके बावजूदपरियोजना की गति को देखकर ऐसा लगता है कि ट्रेन सेवा में और कुछ समय की देरी हो सकती है।

    इस रेलवे परियोजना का महत्व सिर्फ इस क्षेत्र के लिए नहींबल्कि पूरे मध्य प्रदेश के लिए बहुत बड़ा है। इंदौर और धार के बीच यात्रा के समय में बड़ी कमी आएगीजिससे व्यापारपरिवहन और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा। साथ हीआदिवासी क्षेत्रों में रेलवे सेवा का विस्तार स्थानीय निवासियों के लिए रोजगार और विकास के नए अवसरों की संभावनाएं खोलेगा। इस रेलवे परियोजना से इंदौर के साथ ही धारझाबुआऔर आसपास के क्षेत्रों में भी विकास की गति तेज हो सकती है।

    हालांकिपरियोजना की सफलता इस पर निर्भर करेगी कि रेलवे निर्माण कार्य समय पर पूरा हो और किसी भी प्रकार की और देरी न हो। टनल निर्माण के अलावाट्रैकस्टेशन और अन्य आवश्यक सुविधाओं की भी समय पर व्यवस्था की जानी जरूरी हैताकि ट्रेन सेवा बिना किसी परेशानी के शुरू हो सके। इस परियोजना में देरी के कारण पहले ही लोगों को निराशा का सामना करना पड़ा हैलेकिन अगर यह समय पर पूरी होती है तो यह क्षेत्र के विकास और यात्रियों के लिए एक बड़ी उपलब्धि साबित होगी।

    कुल मिलाकरइंदौर से धार के बीच ट्रेन सेवा का आरंभ इस क्षेत्र की यात्रा व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है। 17 वर्षों के लंबे इंतजार के बादअगर यह परियोजना समय पर पूरी होती हैतो यह न केवल मध्य प्रदेश के लिएबल्कि देश के अन्य हिस्सों के लिए भी एक मॉडल बन सकती हैजहां लंबी देरी के बावजूद इन्फ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को पूरा किया जा सकता है।

  • मप्र के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में मादा चीता वीरा के शावक की मौत

    मप्र के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में मादा चीता वीरा के शावक की मौत


    – एक दिन पहले ही मुख्यमंत्री ने वीरा और उसके दो शावकों को बाड़े से खुले जंगल में किया था रिलीज

    श्योपुर। मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में स्थित कूनो राष्ट्रीय उद्यान में दक्षिण अफ्रीकी मादा चीता वीरा के 10 महीने के शावक की मौत हो गई। उसे मादा चीता वीरा और दूसरे शावक के साथ एक दिन पहले ही मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बाड़े से कूनो के पारोंद क्षेत्र में खुले जंगल में रिलीज किया था। शुक्रवार शाम पारोंद के जंगल में शावक का शव मिला है।

    चीता प्रोजेक्ट के फील्ड डायरेक्टर उत्तम कुमार शर्मा ने बताया कि शावक की मौत का वास्तविक कारण पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। प्रारंभिक जांच में किसी तरह की चोट या संघर्ष के निशान नहीं मिले हैं। उन्होंने बताया कि वीरा और उसका दूसरा शावक पूरी तरह सुरक्षित हैं। उनकी लगातार निगरानी की जा रही है। कूनो में चीतों की गतिविधियों और स्वास्थ्य पर चौबीसों घंटे नजर रखी जा रही है।

    गौरतलब है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को श्योपुर जिले के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में अंतरराष्ट्रीय चीता दिवस पर तीन चीतों को स्वछंद विचरण के लिये बाड़े से अभयारण्य में छोड़ा था। इनमें मादा चीता वीरा और उसके दो शावक शामिल हैं। बताया गया है कि गुरुवार देर रात ही ये शावक अपनी मां से अलग हो गया था। शुक्रवार को इसकी खोज की गई। शाम को पारोंद के जंगल में उसका शव मिला है।

    फील्ड डायरेक्टर उत्तम शर्मा ने बताया कि इस शावक की मौत के बाद कूनो नेशनल पार्क में चीतों की कुल संख्या अब 28 रह गई है। इनमें 8 वयस्क चीते (5 मादा और 3 नर) और भारत में जन्मे 20 शावक शामिल हैं। पार्क के अन्य सभी चीते स्वस्थ बताए गए हैं। चीता प्रोजेक्ट के अधिकारी इस घटना की बारीकी से जांच कर रहे हैं। इसमें शावकों के प्राकृतिक व्यवहार, क्षेत्र में मौजूद खतरों और निगरानी प्रणाली की समीक्षा भी शामिल है।

  • मप्र के छतरपुर में ट्रक और कार की जोरदार भिड़ंत, एक ही परिवार के 5 लोगों की मौत, दो घायल

    मप्र के छतरपुर में ट्रक और कार की जोरदार भिड़ंत, एक ही परिवार के 5 लोगों की मौत, दो घायल


    छतरपुर।
    मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में सागर-कानपुर हाईवे नंबर 34 पर शुक्रवार की रात एक भीषण सड़क हादसे में एक ही परिवार के पांच लोगों की मौत हो गई। यहां बड़ामलहरा तहसील के मुंगवारी और चौपरिया सरकार गांव के पास एक तेज रफ्तार ट्रक और कार के बीच जोरदार भिड़ंत हो गई। इस हादसे में दो घायल हुए हैं, जिन्हें गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया है। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी है।

    गुलगंज थाना पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, सतना के नागौद निवासी प्रजापति परिवार के सात लोग शुक्रवार को सेंट्रो कार नंबर एमपी 19 सीए 0857 से सागर के शाहगढ़ के लिए जा रहे थे। रात करीब आठ बजे बड़ामलहरा तहसील के मुंगवारी और चौपरिया सरकार गांव के बीच तेज रफ्तार कार और ट्रक की टक्कर हो गई। कार की रफ्तार इतनी थी कि हादसे के बाद कार का अगला हिस्सा पूरी तरह नष्ट हो गया। हादसे में पांच लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। सूचना मिलते ही सागर आईजी हिमानी खन्ना सहित गुलगंज पुलिस मौके पर पहुंची। कार के गेट तोड़कर शवों को बाहर निकाला जा सका। हादसे में दो लोग घायल हुए हैं, जिनकी हालत गंभीर है। दोनों घायलों को इलाज के लिए जिला अस्पताल रिफर किया गया है, जहां वह आईसीयू में भर्ती हैं।

    गुलगंज थाना प्रभारी गुरुदत्त शेषा ने बताया कि एक तेज रफ्तार कार सामने से आ रहे ट्रक से टकरा गई थी, जिसमें पांच लोगों की मौत हो गई है। कार में सात लोग सवार थे। दो घायलों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उन्होंने बताया कि मृतकों की पहचान महेंद्र प्रजापति (30), लक्ष्मण प्रजापति (40), दीपक प्रजापति (24), सुरेंद्र प्रजापति (26) और लालू प्रजापति (17) के रूप में हैं। दो लोग भूपेंद्र और जितेंद्र प्रजापति की हालत गंभीर है। हादसे के बाद ट्रक चालक वाहन को लेकर भाग निकला था। जिसे पुलिस ने पीछा कर बिजावर रोड पर पकड़ लिया। फिलहाल उससे पूछताछ की जा रही है।

    पुलिस के मुताबिक, सतना निवासी प्रजापति परिवार के लोग दो कारों में छतरपुर से शाहगढ़ जा रहे थे। सभी बहन को ससुराल से मायके लाने के लिए निकले थे। एक कार आगे निकल गई थी, जबकि पीछे चल रही सेंट्रो कार हादसे का शिकार हो गई।

  • मप्र में इंडिगो की 65 से ज्यादा फ्लाइट रद्द, यात्री बोले- कोई मदद नहीं मिल रही

    मप्र में इंडिगो की 65 से ज्यादा फ्लाइट रद्द, यात्री बोले- कोई मदद नहीं मिल रही


    इंदौर।
    देश की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनी इंडिगो पिछले चार दिन से क्रू मेंबर्स की कमी से जूझ रही है। इसके कारण देशभर के कई एयरपोर्ट पर 500 से ज्यादा फ्लाइट्स रद्द हो गईं। इनमें मध्य प्रदेश से संचालित होने वाली 65 से भी ज्यादा फ्लाइट्स शामिल हैं। शुक्रवार को इंदौर से जाने वाली 26 उड़ानों को निरस्त कर दिया गया, जबकि इंदौर आने वाली इंडिगो की 18 से ज्यादा फ्लाइट भी रद्द है। वहीं, भोपाल से कुल 18 और जबलपुर से इंडिगो की 6 में से 5 फ्लाइट को निरस्त कर दिया गया है। इससे यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। यात्रियों का कहना है कि विमानतल पर उन्हें कोई मदद नहीं मिल रही है।

    दरअसल, एविएशन सेक्टर के नए सुरक्षा नियमों की वजह से देश की सबसे बड़ी एयरलाइन कंपनी इंडिगो लगातार क्रू की कमी से जूझ रही है। इंडिगो की फ्लाइट्स का परिचालन शुक्रवार को भी लड़खड़ाता नजर आ रहा है। मुंबई और दिल्ली से ग्वालियर आने वाली फ्लाइट भी कैंसिल हैं। ऐसे में पैसेंजर ट्रेन का सहारा ले रहे हैं। शुक्रवार को इंदौर से जाने वाली 26 उड़ानों को निरस्त कर दिया गया। वहीं, इंदौर आने वाली इंडिगो की 18 से ज्यादा फ्लाइट भी कैंसिल है। इंदौर एयरपोर्ट पर पैसेंजर नागराज ने कहा कि मेरी शाम 6.45 बजे बेंगलुरु की फ्लाइट थी, वह कैंसिल हो गई है। एयरलाइंस के कर्मचारी से पूछा तो वह बोला कि इसके बाद वाली 7.45 की फ्लाइट में आपकी सीट बुक कर दूंगा लेकिन उसका जाना भी निश्चित नहीं है। नागराज ने कहा कि एयरलाइंस की तरफ से कहा गया है कि पैसे रिफंड किए जा रहे हैं। आगे की व्यवस्था खुद ही कर लें।

    भोपाल एयरपोर्ट पर पैसेंजर सस्मिता ने कहा कि मेरी भोपाल से बेंगलुरु की फ्लाइट थी। एयरलाइंस की तरफ से कोई भी जानकारी नहीं दी गई है। इनकी हेल्पलाइन में भी कोई मैसेज नहीं है। हम परेशान हो रहे हैं।

    हालांकि, इंडिगो ने कहा है कि जल्द ही नियमित संचालन बहाल किया जाएगा। एयरलाइन ने यात्रियों से अपील की है कि वे एयरपोर्ट आने से पहले अपनी उड़ान की ताजा जानकारी ले लें। यात्रियों की मदद के लिए भोपाल एयरपोर्ट प्रबंधन ने वाहन पार्किंग शुल्क पूरी तरह माफ कर दिया है। एयरपोर्ट प्रशासन ने कहा है कि इस चुनौतीपूर्ण समय में सभी यात्रियों की सहायता को प्राथमिकता दी जा रही है।

    इंडिगो की ग्वालियर से दिल्ली और मुंबई आने-जाने वाली फ्लाइट्स भी कैंसिल की गई हैं। ऐसे में यात्री ट्रेन के जरिए अपनी मंजिल की तरफ रवाना हो रहे हैं। भोपाल एयरपोर्ट पर आईं सोनल को 7 दिसंबर को बेंगलुरु जाना है। वे बोलीं- इंक्वारी में इंडिगो अथॉरिटीज ने बताया कि 7 तारीख को बेंगलुरु की फ्लाइट उड़ने के चांसेज बहुत कम हैं। जिस तरह से रोजाना उड़ानें कैंसिल हो रही हैं, उनकी फ्लाइट भी कैंसिल हो सकती है।

    ट्रैवल एजेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया के प्रदेश अध्यक्ष अमोल कटारिया ने बताया कि जिन उड़ानों का संचालन हो रहा है, वह पूरी तरह से पैक हैं। आखिरी की खाली सीटें सामान्य की अपेक्षा 4 से 5 गुना तक कीमत पर बेची जा रही हैं। शाम इंदौर से दिल्ली जाने वाली दूसरी उड़ानों में एक टिकट का किराया 36 हजार रुपये तक पहुंचा था। ऐसे में यात्रियों के लिए सफर कर पाना मुश्किल हो गया है।

    मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी और पूर्व मंत्री पीसी शर्मा को शुक्रवार दोपहर 1:45 पर इंडिगो की फ्लाइट से भोपाल से दिल्ली जाना था। दिल्ली से वे इंडिगो की ही फ्लाइट से देहरादून जाने वाले थे। यहां उन्हें छतरपुर के पूर्व कांग्रेस विधायक आलोक चतुर्वेदी की बेटी के विवाह समारोह में शामिल होना था लेकिन इंडिगो की फ्लाइट कैंसिलेशन के चक्कर में दोनों नेता यात्रा नहीं कर पाए।

    इंडिगो के फ्लाइट ऑपरेशन कैंसिल होने के चलते पूर्व मंत्री पीसी शर्मा भी दिल्ली में आयोजित शादी में नहीं पहुंच पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि छतरपुर के पूर्व कांग्रेस विधायक आलोक चतुर्वेदी की बेटी के विवाह समारोह में शामिल होना था लेकिन इंडिगो की फ्लाइट कैंसिलेशन के चक्कर में यात्रा नहीं कर पाए। उन्होंने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से विमान परिचालन सामान्य कराने की मांग की है।


    भोपाल में इंडिगो की 18 उड़ानें रद्द, 3600 से ज्यादा यात्री प्रभावित

    इंडिगो एयरलाइंस के नेटवर्क में जारी तकनीकी और परिचालन दिक्कतों का असर भोपाल में भी दिख रहा है। यहां से आने और जाने वाली इंडिगो की कुल 9 उड़ानें रद्द करनी पड़ीं। इससे 18 फ्लाइट मूवमेंट प्रभावित हुए हैं। रद्द उड़ानों में दिल्ली की 3, मुंबई की 2, बेंगलुरु की 2, पुणे और गोवा की 1-1 उड़ान शामिल हैं। इन उड़ानों के रद्द होने से भोपाल एयरपोर्ट पर लगभग 3600 यात्री परेशान हुए। भोपाल एयरपोर्ट से रोजाना 18 उड़ानें (36 मूवमेंट) संचालित होती हैं। इनमें से इंडिगो की 14 और एयर इंडिया की 4 उड़ानें शामिल हैं। प्रतिदिन औसतन करीब 5500 यात्री यहां से यात्रा करते हैं।

    वहीं, देश के अलग-अलग शहरों से जबलपुर के डुमना एयरपोर्ट आने वाली इंडिगो की 6 में से 5 फ्लाइट आज कैंसिल हो गई हैं। इंदौर से जबलपुर होते हुए हैदराबाद जाने वाली फ्लाइट सुबह साढ़े 8 बजे आती है और 9 बजे जाती है, वह कैंसिल हो गई। मुंबई से जबलपुर होते हुए 9 बजकर 40 मिनट पर आने वाली और 10 बजे दिल्ली जाने वाली फ्लाइट कैंसिल है। बेंगलुरु से दोपहर 12 बजकर 45 मिनट पर आने वाली और वापस 1 बजकर 15 मिनट पर बेंगलुरु जाने वाली फ्लाइट कैंसिल हो गई है। दिल्ली से दोपहर डेढ़ बजे आकर वापस 2 बजे दिल्ली जाने वाली फ्लाइट कैंसिल हो गई। दिल्ली से शाम 5 बजे जबलपुर आकर साढ़े 5 बजे मुंबई जाने वाली फ्लाइट कैंसिल हो गई। इसके अलावा हैदराबाद से शाम 7 बजकर 20 मिनट पर जबलपुर आकर 7 बजकर 50 पर इंदौर जाने वाली फ्लाइट के भी लेट होने की आशंका है।