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  • पक्की नौकरी और पगार बढ़ाने का झासा…; एएसआई पर महिला ने लगाए दुष्कर्म के आरोप

    पक्की नौकरी और पगार बढ़ाने का झासा…; एएसआई पर महिला ने लगाए दुष्कर्म के आरोप


    हरदा । मध्य प्रदेश के हरदा जिले में एक बेहद शर्मनाक मामला सामने आया है जिसमें एक यातायात थाने में पदस्थ एएसआई पर अपनी ही घर में काम करने वाली महिला के साथ दुष्कर्म करने और उसे धमकाने का आरोप लगा है। यह मामला उस समय सामने आया जब पीड़िता ने स्थानीय सिविल लाइन थाने में एएसआई के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। पीड़िता का आरोप है कि वह पिछले दो सालों से एएसआई के घर पर घरेलू कामकाजी झाड़ू-पोछा का काम कर रही थी और इस दौरान आरोपी ने उसे नौकरी और पगार बढ़ाने का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाए।

    शोषण का आरोप

    पीड़िता के अनुसार एएसआई सुरेंद्र मालवीय ने उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए और जब उसने इसका विरोध किया तो आरोपी ने उसे जातिसूचक शब्दों से अपमानित किया और जान से मारने की धमकी दी। इस मामले ने पूरे हरदा जिले में गहरी चिंता और आक्रोश की लहर पैदा कर दी है। यह घटना दिखाती है कि जब कानून के रखवाले खुद मर्यादा लांघने लगें तो आम जनता से न्याय की उम्मीद कैसे की जा सकती है।

    पुलिस कार्रवाई

    पुलिस ने पीड़िता की शिकायतa पर तत्काल कार्रवाई करते हुए आरोपी एएसआई के खिलाफ भारतीय दंड संहिता IPC और अनुसूचित जाति-जनजाति एक्ट की विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया है। हरदा के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ASP अमित कुमार मिश्रा ने इस घटना की गंभीरता को स्वीकार करते हुए कहा कि अपराध क्रमांक 410/25 के तहत धारा 69 गलत तरीके से संबंध बनाना 351 धमकाना बीएनएस और SC-ST एक्ट की धारा 3(2)(v) 3(2)(V-A) के तहत मामला दर्ज किया गया है।

    आरोपी एएसआई का बयान

    इस मामले में पुलिस के द्वारा कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है लेकिन आरोपों को लेकर एएसआई सुरेंद्र मालवीय की स्थिति पर अब तक कोई सफाई सामने नहीं आई है। ऐसे मामलों में आमतौर पर आरोपों की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन आरोपियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की दिशा में आगे बढ़ता है। इस मामले में भी पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए पुलिस पूरी तरह से तत्पर दिखाई दे रही है।

    शोषण और असुरक्षा का माहौल

    यह मामला सिर्फ एक महिला के साथ हुए शारीरिक शोषण का नहीं है बल्कि इसने समाज में महिलाओं की असुरक्षा और उनके शोषण की समस्याओं को उजागर किया है। जब एक सरकारी कर्मचारी जो लोगों की सुरक्षा और कानून व्यवस्था को बनाए रखने का जिम्मेदार होता है खुद ऐसी घटनाओं का हिस्सा बने तो यह समाज में भय और असुरक्षा की भावना को और बढ़ावा देता है।

    समाज और प्रशासन की जिम्मेदारी

    इस मामले ने प्रशासन और समाज के लिए गंभीर सवाल उठाए हैं। क्या ऐसे मामलों में सख्त और प्रभावी कार्रवाई हो रही है? क्या महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों पर समाज और प्रशासन का दायित्व पूरा हो रहा है? इस घटना के बाद महिलाओं के प्रति होने वाली हिंसा और शोषण के खिलाफ आवाज़ उठाने की आवश्यकता और बढ़ गई है। मध्य प्रदेश के हरदा जिले का यह मामला एक गंभीर सामाजिक और कानूनी मुद्दे की ओर इशारा करता है। पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है लेकिन यह सिर्फ एक शुरूआत है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी तेजी से कार्रवाई करता है और पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए क्या कदम उठाता है।

  • महाकाल मंदिर विस्तार के लिए भूमि अधिग्रहण पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला तकिया मस्जिद की याचिका खारिज

    उज्जैन । सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को उज्जैन के महाकाल मंदिर परिसर के विस्तार महाकाल लोक फेज-2के लिए तकिया मस्जिद की भूमि अधिग्रहण को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता मोहम्मद तैय्यब भूमि का मालिक नहीं है बल्कि केवल उपासक भक्तहै इसलिए उसे भूमि अधिग्रहण पर सवाल उठाने का कानूनी अधिकार नहीं है। यह फैसला न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने सुनाया।

    याचिका में यह दावा किया गया था कि 1985 से यह भूमि मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड की संपत्ति है और अधिग्रहण के समय उचित मुआवजा पुनर्वास और सामाजिक प्रभाव आकलन की प्रक्रिया पूरी नहीं की गई। याचिकाकर्ता ने कहा कि महाकाल मंदिर के विस्तार के लिए भूमि का अधिग्रहण सार्वजनिक उद्देश्य के अंतर्गत नहीं आता और इससे संविधान के अनुच्छेद 14 25 26 और 300-A का उल्लंघन होता है।

    हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता के इन तर्कों को खारिज करते हुए कहा कि इस मामले में पहले से वैकल्पिक कानूनी उपाय उपलब्ध थे और याचिकाकर्ता केवल मुआवजे की आपत्ति ही उठा सकता था। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि वह भूमि अधिग्रहण की वैधता पर विचार नहीं करेगा क्योंकि याचिकाकर्ता भूमि का मालिक नहीं है।

    इससे पहले मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने भी महाकाल लोक फेज-2 परियोजना से जुड़ी मुआवजे को चुनौती देने वाली याचिकाएं खारिज कर दी थीं। हाई कोर्ट ने कहा था कि याचिकाकर्ता न तो भू-स्वामी हैं और न ही टाइटल होल्डर इसलिए वे केवल मुआवजे के संदर्भ में सवाल उठा सकते हैं। इस फैसले से महाकाल लोक फेज-2 परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण को कानूनी मंजूरी मिल गई है। यह परियोजना महाकाल मंदिर परिसर के विस्तार और सार्वजनिक स्थलों के पुनर्विकास का हिस्सा है जिसे बड़ी धार्मिक और सांस्कृतिक महत्वता प्राप्त है।

  • ग्वालियर में अपात्र लोगों को पुलिस सुरक्षा पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से मांगा जवाब..

    ग्वालियर में अपात्र लोगों को पुलिस सुरक्षा पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से मांगा जवाब..


    ग्वालियर/मध्यप्रदेश के ग्वालियर में अपात्र और निजी व्यक्तियों को दी जा रही पुलिस सुरक्षा का मामला एक बार फिर हाईकोर्ट के संज्ञान में आया है। इस मुद्दे को गंभीर जनहित से जुड़ा मानते हुए मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है और चार सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने साफ संकेत दिए हैं कि पुलिस बल का इस तरह दुरुपयोग स्वीकार्य नहीं है।यह मामला याचिकाकर्ता नवल किशोर शर्मा द्वारा दायर जनहित याचिका के माध्यम से उठाया गया है। याचिका में कहा गया है कि हाईकोर्ट के पूर्व आदेशों के बावजूद निजी व्यक्तियों को दी जा रही पुलिस सुरक्षा की कोई प्रभावी समीक्षा नहीं की गई। इसके कारण आज भी कई ऐसे लोग पुलिस सुरक्षा का लाभ उठा रहे हैं, जो इसके पात्र नहीं हैं।

    याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता डीपी सिंह ने अदालत को बताया कि ग्वालियर में पुलिस बल की पहले से ही भारी कमी है। इसके बावजूद बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी निजी व्यक्तियों की सुरक्षा में तैनात किए गए हैं। इससे न केवल आम जनता की सुरक्षा प्रभावित हो रही है, बल्कि सरकारी खजाने पर भी लाखों रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।वकील ने अदालत के सामने उदाहरण पेश करते हुए बताया कि विनय सिंह नामक व्यक्ति को दी गई पुलिस सुरक्षा के दौरान ही उनके खिलाफ वसूली सहित पांच आपराधिक मामले दर्ज हुए। यह साफ तौर पर पुलिस सुरक्षा के दुरुपयोग और सिस्टम की विफलता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि जब सुरक्षा पाने वाले ही अपराधों में लिप्त हों, तो यह व्यवस्था की गंभीर खामी को उजागर करता है।

    हाईकोर्ट को यह भी बताया गया कि पूर्व आदेश के बाद सूचना के अधिकार RTI के तहत जो जानकारी सामने आई, वह और भी चिंताजनक है। RTI से खुलासा हुआ कि 19 व्यक्तियों की सुरक्षा में 33 पुलिसकर्मी तैनात थे, जबकि इनमें से अधिकांश व्यक्ति सुरक्षा के पात्र ही नहीं थे। यह स्थिति तब है जब शहर में आम नागरिकों को पर्याप्त पुलिस सहायता नहीं मिल पा रही है।इससे पहले भी हाईकोर्ट इस तरह के मामलों में सख्त रुख अपना चुका है। दिलीप शर्मा और संजय शर्मा को दी गई पुलिस सुरक्षा के मामले में कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए दोनों भाइयों से सुरक्षा पर हुए खर्च की वसूली के आदेश दिए थे। उस समय कोर्ट ने स्पष्ट कहा था कि किसी भी तुच्छ या अपात्र व्यक्ति को सरकारी खर्च पर पुलिस सुरक्षा नहीं दी जा सकती।

    न्यायालय ने अपने पुराने आदेशों में यह भी कहा था कि पुलिस सुरक्षा देने के लिए स्पष्ट, पारदर्शी और ठोस नियम बनाए जाने चाहिए। कोर्ट का मानना है कि सुरक्षा जैसी संवेदनशील व्यवस्था का इस्तेमाल केवल वास्तविक और प्रमाणित खतरे वाले मामलों में ही होना चाहिए, न कि प्रभाव या रसूख के आधार पर।हाईकोर्ट ने यह सुझाव भी दिया था कि जिन मामलों में व्यापारिक प्रतिस्पर्धा या निजी कारणों से खतरे की आशंका हो, और संबंधित परिवार के पास लाइसेंसी हथियार उपलब्ध हों, वहां निजी सुरक्षाकर्मियों की व्यवस्था एक बेहतर विकल्प हो सकती है। कोर्ट के अनुसार, निजी सुरक्षा गार्ड कई बार पुलिसकर्मियों की तुलना में ज्यादा सजग और प्रभावी साबित हो सकते हैं, जबकि पुलिस बल को कानून-व्यवस्था के मूल कामों में लगाया जाना चाहिए।

    ताजा सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि अब तक पूर्व आदेशों का पालन क्यों नहीं किया गया और अपात्र लोगों को दी जा रही सुरक्षा पर क्या कार्रवाई की गई है। नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा गया है।यह मामला न केवल ग्वालियर बल्कि पूरे प्रदेश में पुलिस सुरक्षा के दुरुपयोग और जवाबदेही से जुड़ा एक अहम उदाहरण बनता जा रहा है। आने वाले समय में राज्य सरकार की प्रतिक्रिया और कोर्ट का अगला रुख इस व्यवस्था की दिशा तय करेगा।

  • MP में अस्थायी पद होंगे स्थायी, मोहन कैबिनेट ने सेवा भर्ती नियमों में बदलाव को दी मंजूरी

    MP में अस्थायी पद होंगे स्थायी, मोहन कैबिनेट ने सेवा भर्ती नियमों में बदलाव को दी मंजूरी


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश सरकार (Madhya Pradesh Government) ने विभिन्न परियोजनाओं के डूब प्रभावितों के लिए राहतों का ऐलान करते हुए राज्य की कर्मचारी व्यवस्था में बड़ा सुधार करने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक (Cabinet meeting) में राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में स्वीकृत स्थाई और अस्थाई पदों में भेदभाव को समाप्त करने से जुड़े प्रस्ताव को मंजूरी दी है। कैबिनेट ने अस्थाई पदों को स्थाई में बदलने के लिए सेवा भर्ती नियम में जरूरी प्रावधान करने पर भी मुहर लगाई है।

    कैबिनेट ने अपर नर्मदा परियोजना, राघवपुर बहुउद्देशीय परियोजना और बसानिया बहुउद्देशीय परियोजना के डूब प्रभावितों के लिए 1,782 करोड़ रुपये के विशेष पैकेज को मंजूरी दी। डूब प्रभावितों के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) में प्रावधान किए गए 1656 करोड़ रुपये के अतिरिक्त 1,782 करोड़ रुपये का विशेष पैकेज स्वीकृत किया गया। सिंचाई और जलविद्युत की परियोजनाएं अनूपपुर, मंडला और डिंडोरी जिलों में चल रही हैं।

    अपर नर्मदा परियोजना, राघवपुर बहुउद्देशीय परियोजना और बसानिया बहुउद्देशीय परियोजना 5,512 करोड़ रुपये की है। इससे 71 हजार हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में सिंचाई सुविधा मिलेगी और 125 मेगावाट बिजली पैदा होगी। इन तीनों परियोजनाओं से कुल 13,873 परिवार प्रभावित होंगे, जिन्हें विशेष पैकेज के तहत प्रति परिवार 12.50 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा। एससी और एसटी के 50 हजार परिवारों को अतिरिक्त राशि दी जाएगी।

    कैबिनेट ने 2025-26 के लिए मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना में विभाग स्तर पर 10 लाख या उससे अधिक के कार्यों पर मुहर लगाई है। इसके तहत 693 करोड़ 76 लाख रुपये के लगभग 3810 काम होंगे। भोपाल और इंदौर मेट्रो रेल परियोजना के मेंटिनेंस के लिए भी 2025-26 के दौरान 90 करोड़ 67 लाख रुपये के बजट को मंजूरी दी गई है।

    कैबिनेट की बैठक में मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना को साल 2026-27 से वर्ष 2030-31 तक जारी रखने के लिए 905 करोड़ 25 लाख रुपये को मंजूरी दी गई। कैबिनेट ने राज्य सरकार के विभिन्न विभागों में स्वीकृत स्थायी और अस्थायी पदों के विभेदीकरण को खत्म करने की मंजूरी दी। इस दिशा में स्वीकृत अस्थायी पदों को स्थायी पदों में बदलने के लिए सेवा भर्ती नियम में जरूरी प्रावधान करने को मंजूरी दी है। कैबिनेट ने वन विज्ञान केंद्र की स्थापना के लिए 48 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं।

  • मुरैना का रहस्यमयी ककनमठ मंदिर भूतों द्वारा बना 1000 साल पुराना शिव मंदिर

    मुरैना का रहस्यमयी ककनमठ मंदिर भूतों द्वारा बना 1000 साल पुराना शिव मंदिर


    मुरैना । मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में स्थित ककनमठ मंदिर जो कि भगवान शिव को समर्पित है अपनी रहस्यमयी और ऐतिहासिक स्थिति के कारण एक विशेष स्थान रखता है। यह मंदिर ना सिर्फ धार्मिक महत्व रखता है बल्कि एक दिलचस्प किंवदंती के कारण भी चर्चा का विषय बना हुआ है। यह मंदिर 1000 साल पुराना माना जाता है और इसके निर्माण से जुड़ी रहस्यमयी कहानी इसे और भी दिलचस्प बना देती है।
    भूतों द्वारा मंदिर का निर्माण
    ककनमठ मंदिर को ‘भूतों का मंदिर’ भी कहा जाता है। स्थानीय लोग मानते हैं कि इस मंदिर का निर्माण एक रात में भूतों ने किया था। किंवदंती के अनुसार जब भूत इस मंदिर का निर्माण करने के अंतिम चरण में थे तभी एक गांव की महिला ने हाथ से चलने वाली चक्की चला दी जिससे भूतों का काम अधूरा रह गया। इस घटना के बाद भूत मंदिर छोड़कर भाग गए और मंदिर का निर्माण कभी पूरा नहीं हो सका। यही कारण है कि आज भी यह मंदिर अधूरा और खंडहर में बदला हुआ दिखाई देता है।
    अद्भुत वास्तुकला
    ककनमठ मंदिर की वास्तुकला अत्यंत अद्भुत है। मंदिर के निर्माण में न तो सीमेंट का उपयोग किया गया है और न ही चूने का बल्कि एक के ऊपर एक विशाल पत्थर रखे गए हैं जो बिना किसी जोड़ के एक साथ जुड़े हुए हैं। इसके बावजूद यह मंदिर पिछले एक हजार सालों से प्राकृतिक आपदाओं आंधी-तूफान और भूकंप जैसी घटनाओं का सामना करने के बावजूद अपनी जगह पर खड़ा है। यह मंदिर 115 फीट ऊंचा है और इसकी संरचना देखते ही बनती है।
    खंडित मूर्तियां और इतिहास
    ककनमठ मंदिर में कई हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां पाई जाती हैं लेकिन इनमें से अधिकांश खंडित अवस्था में हैं। इतिहासकारों का मानना है कि ये मूर्तियां विदेशी आक्रमणकारियों द्वारा तोड़ी गईं थीं। इसके अलावा आसपास के क्षेत्रों में इस मंदिर से संबंधित कई अवशेष भी पाए गए हैं। आज भी पुरातत्वविदों द्वारा किए गए उत्खनन में नई-नई जानकारी और अवशेष मिलते रहते हैं।
    मौसम की मार और मंदिर की अवस्था
    मंदिर की खंडहर स्थिति का मुख्य कारण इसका समय के साथ खराब होना है। पुरातत्व विशेषज्ञ डॉ. अशोक शर्मा के अनुसार मंदिर की खंडित अवस्था का कारण यहां की कठोर जलवायु और मौसम की मार है। हालांकि इस मंदिर का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व आज भी बरकरार है।
    किवदंतियां और भविष्यवाणी
    किवदंतियों के अनुसार जब नाई जाति के नौ काने दूल्हे जिनकी एक आंख फूटी हो एक साथ इस मंदिर में पहुंचेंगे तो यह मंदिर पूरी तरह से ढह जाएगा। यह एक दिलचस्प और रहस्यमयी मान्यता है जो इस मंदिर के आसपास की लोककथाओं को और भी आकर्षक बनाती है। कैसे पहुंचे ककनमठ मंदिर मुरैना शहर से लगभग 35 किलोमीटर दूर सिहोनिया गांव में स्थित है। यहां तक पहुंचने के लिए आपको निजी वाहन या किराए पर वाहन लेना होगा क्योंकि इस मार्ग पर कोई सार्वजनिक परिवहन नहीं चलता है। जब आप इस मंदिर के पास पहुंचेंगे तो आपको 3 किलोमीटर दूर से ही इसका गुंबद दिखाई देगा।

    ककनमठ मंदिर न सिर्फ धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है बल्कि यह भारतीय इतिहास और संस्कृति का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। भूतों से जुड़ी कहानियां मंदिर की अद्भुत वास्तुकला और इसके रहस्यमयी इतिहास ने इसे एक दिलचस्प स्थल बना दिया है जो पर्यटकों को आकर्षित करता है।

  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दी राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को जन्मदिन की शुभकामनाएं

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दी राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को जन्मदिन की शुभकामनाएं




    मध्यप्रदेश / भोपाल के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा को उनके जन्मदिन के अवसर पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित कीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अपने शुभकामना संदेश में श्री शर्मा के उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु जीवन और जनसेवा के प्रति उनकी निरंतर सक्रियता की कामना की। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का नेतृत्व न केवल राजस्थान के विकास को नई दिशा दे रहा है, बल्कि सुशासन और जनकल्याण के क्षेत्र में भी राज्य को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में सहायक सिद्ध हो रहा है।

    डॉ. मोहन यादव ने अपने संदेश में कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जनहित के मुद्दों को प्राथमिकता देते हुए संवेदनशीलता और दृढ़ संकल्प के साथ कार्य कर रहे हैं। उनके नेतृत्व में राजस्थान में विकास की गति तेज हुई है और आमजन के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के लिए अनेक प्रभावी योजनाएं लागू की जा रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विश्वास जताया कि श्री शर्मा के दूरदर्शी नेतृत्व में राजस्थान आने वाले समय में आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से और अधिक सशक्त राज्य के रूप में उभरेगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यह भी कहा कि श्री भजनलाल शर्मा की कार्यशैली ऊर्जा, पारदर्शिता और समर्पण का प्रतीक है। वे जनसेवा को अपना प्रमुख उद्देश्य मानते हुए निरंतर जनता से संवाद बनाए रखते हैं, जिससे शासन और प्रशासन के बीच विश्वास की मजबूत कड़ी स्थापित हो रही है। यह जनभागीदारी ही किसी भी राज्य के समग्र विकास की नींव होती है।

    अपने संदेश के अंत में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बाबा खाटू श्याम जी से प्रार्थना करते हुए कहा कि राजस्थान निरंतर विकास, सुशासन और जनकल्याण के पथ पर अग्रसर रहे। उन्होंने कामना की कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को सदैव असीम ऊर्जा और सामर्थ्य प्राप्त हो, जिससे वे जनसेवा के अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा और प्रतिबद्धता के साथ करते रहें।मुख्यमंत्री डॉ. यादव की यह शुभकामनाएं दोनों राज्यों के बीच सौहार्द, सहयोग और सकारात्मक राजनीतिक संवाद को भी दर्शाती हैं, जो संघीय व्यवस्था को मजबूत बनाने की दिशा में एक सराहनीय पहल है।

  • खजुराहो के गौतम रिसॉर्ट में चार कर्मचारियों की मौत खाद्य लाइसेंस निलंबित जांच जारी

    खजुराहो के गौतम रिसॉर्ट में चार कर्मचारियों की मौत खाद्य लाइसेंस निलंबित जांच जारी


    छतरपुर । मध्य प्रदेश के खजुराहो में स्थित गौतम रिसॉर्ट में चार कर्मचारियों की मौत के मामले में प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए होटल का खाद्य लाइसेंस निलंबित कर दिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दौरे के दौरान 8 दिसंबर को यह घटना हुई जब रिसॉर्ट के 11 कर्मचारी भोजन करने के बाद बीमार पड़ गए थे। इनमें से चार की मौत हो गई जबकि सात अन्य का इलाज ग्वालियर के जयारोग्य अस्पताल में चल रहा है। घटना के बाद कलेक्टर के निर्देश पर सीएमएचओ डॉ. आरपी गुप्ता ने होटल का खाद्य लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। इस कदम को प्रशासन की ओर से सख्त कार्रवाई के रूप में देखा जा रहा है ताकि मामले की गंभीरता को समझा जा सके और भविष्य में इस प्रकार की घटनाएं न हों।

    मृतकों के बारे में जानकारी

    यह कर्मचारी लंबे समय से गौतम रिसॉर्ट के पिछले हिस्से में रहते थे और होटल में हाउसकीपिंग व गार्डनिंग का काम करते थे। अस्पताल में भर्ती सात अन्य कर्मचारियों में से 20 वर्षीय हार्दिक ने इलाज के दौरान शनिवार को दम तोड़ दिया। इससे पहले अन्य मृतकों में रामस्वरूप कुशवाह प्रागीलाल कुशवाह और गिरिजा रजक की मौत हो चुकी थी। कर्मचारियों ने रिसॉर्ट के भोजनालय में भोजन किया था जिसके बाद सभी की तबीयत बिगड़ गई थी।

    खाद्य जांच और रिपोर्ट का इंतजार

    घटना के बाद प्रशासन ने मृतकों के विसरा और केमिकल सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के असल कारणों का पता चल सकेगा। प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर यह संभावना जताई जा रही है कि भोजन में कोई विषाक्त पदार्थ हो सकता है जिससे फूड पॉइजनिंग का मामला सामने आया। हालांकि अधिकारियों ने इस संबंध में अभी कोई पुष्टि नहीं की है और पूरी तरह से रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री और प्रशासन की प्रतिक्रिया

    घटना के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दुख जताया और अधिकारियों से सख्त कार्रवाई करने की बात कही। साथ ही उन्होंने निर्देश दिए कि होटल के खाद्य सुरक्षा मानकों की जांच की जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए होटल का लाइसेंस निलंबित कर दिया और कर्मचारियों की मौत के कारणों का पता लगाने के लिए जांच तेज कर दी है। इस घटना के बाद क्षेत्रीय लोगों और राजनीतिक दलों ने इसे गंभीर मामला बताते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। साथ ही खजुराहो में पर्यटन उद्योग पर भी इस घटना का नकारात्मक असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। इस घटना ने प्रशासन की तत्परता को भी उजागर किया क्योंकि पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जल्दी कार्रवाई की और सभी बीमार कर्मचारियों को समय रहते अस्पताल में भर्ती करवा दिया। हालांकि यह घटना पर्यटन स्थल के लिए एक बड़ा झटका है जो खजुराहो में आने वाले पर्यटकों के लिए चिंता का विषय बन सकती है।

  • डेयरी क्रांति की ओर मध्यप्रदेश का बड़ा कदम: मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने डॉ. भीमराव अम्बेडकर कामधेनु योजना को बताया ऐतिहासिक

    डेयरी क्रांति की ओर मध्यप्रदेश का बड़ा कदम: मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने डॉ. भीमराव अम्बेडकर कामधेनु योजना को बताया ऐतिहासिक

    भोपाल।मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि पशुपालकों एवं दुग्ध उत्पादकों को हर संभव तरीके से आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रदेश में दुग्ध उत्पादन बढ़ाया जाएगा। आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के निर्माण की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, पशुपालकों को आत्मनिर्भर बनाने सहित वर्तमान डेयरी उद्योग को सुनियोजित, सुव्यवस्थित, व्यावसायिक और लाभकारी बनाने की दिशा में ‘डॉ. भीमराव अम्बेडकर कामधेनु योजना’ आरंभ की है। यह योजना खासतौर पर उन जरूरतमंद युवाओं, किसानों और पशुपालकों के लिए आशा की किरण बनकर उभरी है, जो आधुनिक डेयरी इकाई स्थापित कर अपनी आय का स्थायी साधन विकसित करना चाहते हैं। योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य में दुग्ध उत्पादन को बढ़ावा देना, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नये-नये अवसर सृजित करना और पशुपालकों की आय में वृद्धि करना है।

    डॉ. भीमराव अम्बेडकर कामधेनु योजना में लाभार्थियों को 25 दूधारू पशुओं की एक इकाई स्थापित करने का अवसर दिया जाता है। इच्छुक और सक्षम हितग्राही अधिकतम 8 इकाइयां अर्थात 200 पशुओं तक की डेयरी परियोजना भी स्थापित कर सकते हैं। यह योजना छोटे से लेकर मध्यम स्तर के डेयरी उद्यमियों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। योजना की एक प्रमुख शर्त यह है कि प्रति इकाई के लिए इच्छुक हितग्राही के पास कम से कम 3.50 एकड़ कृषि भूमि उपलब्ध हो। भूमि की यह व्यवस्था पशुओं के आवास, चारे की व्यवस्था और डेयरी के समुचित तरीके से संचालन के लिए जरूरी है। इसके साथ ही सरकार पशुपालकों/दूध उत्पादकों की प्रोफेशनल ट्रेनिंग को भी महत्व दे रही है, जिससे पशुपालक वैज्ञानिक और आधुनिक पद्धति से अपना डेयरी बिजनेस चला सकें। पशुपालकों को आर्थिक सहायता देना इस योजना का सबसे आकर्षक पहलू है। परियोजना की कुल लागत पर सरकार द्वारा अनुदान सब्सिडी भी दिया जा रहा है।

    अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के लाभार्थियों को कुल परियोजना लागत का 33 प्रतिशत तथा अन्य सभी वर्गों को 25 प्रतिशत तक का अनुदान दिया जा रहा है। शेष राशि बैंक ऋण के जरिए उपलब्ध कराई जा रही है। इस प्रावधान से बड़े निवेश की बाधा काफी हद तक कम हो जाती है और डेयरी बिजनेस शुरू करना भी आसान हो जाता है। योजना में लाभार्थियों के चयन में पारदर्शिता पर विशेष जोर दिया गया है। आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन रखी गई है और चयन सामान्यत: “पहले आओ-पहले पाओ” के आधार पर ही किया जा रहा है। साथ ही उन पशुपालकों को भी प्राथमिकता दी जा रही है, जो पहले से ही किन्हीं दुग्ध संघों या सहकारी संस्थाओं को निरंतर दुग्ध आपूर्ति कर रहे हैं। आवेदन के लिए आधार कार्ड, निवास प्रमाण पत्र, भूमि के दस्तावेज, बैंक खाता विवरण, जाति प्रमाण पत्र यदि लागू हो  और प्रशिक्षण प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज जरूरी हैं। इच्छुक आवेदक पशुपालन एवं डेयरी विभाग के आधिकारिक पोर्टल या अपने जिले के पशु चिकित्सा सेवाएं कार्यालय से विस्तृत जानकारी और मार्गदर्शन भी ले सकते हैं।

    योजना के बारे में कुछ तथ्य

    1. मुख्यमंत्री पशुपालन विकास योजना में नवीन घटक के रूप में राज्य सरकार ने 25 अप्रैल 2025 को डॉ. भीमराव अम्बेडकर कामधेनु योजना को मंजूरी दी।

    2. योजना के अंतर्गत 25 दुधारु पशु की प्रति इकाई राशि 36 लाख से 42 लाख रुपये तक की इकाई लागत है।

    3. योजना में अधिकतम 8 इकाइयों की स्थापना एक हितग्राही द्वारा की जा सकती है। एक इकाई में एक ही नस्ल के गौ-वंश एवं भैसवंशीय पशु रहेंगे।

    4. हितग्राही के पास प्रत्येक इकाई के लिये न्यूनतम 3.50 एकड़ कृषि भूमि होना जरूरी है।

    5. भूमि के लिये परिवार के सामूहिक खाते भी सम्मिलित हैं। इनके लिये अन्य सदस्यों की सहमति भी जरूरी होगी।

    6. इकाइयों की संख्या में गुणात्मक वृद्धि होने पर आनुपातिक रूप से न्यूनतम कृषि भूमि की अर्हता में भी आनुपातिक वृद्धि जरूरी होगी।

    7. पात्र हितग्राही को ऋण राशि का भुगतान चार चरणों में किया जायेगा।

  • भोपाल में कुटुंब न्यायालय की नेशनल लोक अदालत में 100 से अधिक रिश्तों को बचाया, पति ने बेटी को गोद में उठाते ही मांगी माफी

    भोपाल में कुटुंब न्यायालय की नेशनल लोक अदालत में 100 से अधिक रिश्तों को बचाया, पति ने बेटी को गोद में उठाते ही मांगी माफी


    भोपाल । भोपाल के कुटुंब न्यायालय में आयोजित नेशनल लोक अदालत में 100 से अधिक रिश्तों को टूटने से बचाया गया। इस दौरान पति-पत्नी ने अपने बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए गिले-शिकवे भूलकर फिर से एक-दूसरे के साथ रहने का निर्णय लिया। यह अदालत उन दंपत्तियों के लिए वरदान साबित हुई जिनके रिश्ते झगड़ों और विवादों की वजह से खटाई में थे।

    एक विशेष मामले में जहां एक व्यवसायी पति और उसकी पत्नी के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था दोनों के बीच काउंसलिंग सत्र में एक भावुक पल आया। पत्नी ने डेढ़ साल की अपनी बेटी को पति से दूर रखकर मायके भेज दिया था और वह अपने पति से मिलने भी नहीं देती थी। पत्नी ने पति के खिलाफ भरण-पोषण का केस भी दायर कर रखा था और पति का कहना था कि यदि पत्नी मायके में रहेगी तो वह भरण-पोषण नहीं देगा।

    इस बीच कुटुंब न्यायालय में काउंसलिंग के दौरान जज ने पति से कहा कि वह अपनी बेटी को गोद में लेकर पत्नी से मिलें। जब पति ने बेटी को गोद में उठाया तो उसकी आँखों में पछतावा और अफसोस था। कई महीनों से अपनी बेटी से अलग रह रहे पति को अपनी गलती का एहसास हुआ। इसके बाद उसने पत्नी से माफी मांगी और समझौते की इच्छा जताई।
    पत्नी ने भी बच्चों के भविष्य को देखते हुए पति की माफी स्वीकार की और दोनों ने एक-दूसरे को समझते हुए एक नया अध्याय शुरू करने का निर्णय लिया। इसके बाद वे दोनों घर लौट गए और अपने रिश्ते को फिर से संजीवनी दी।

    कुटुंब न्यायालय की नेशनल लोक अदालत में इस तरह के कई अन्य मामले भी आए जिनमें रिश्तों में दरार आ चुकी थी लेकिन अदालत की मध्यस्थता से और समझाइश से वे सब वापस एकजुट हो गए। इस प्रक्रिया ने यह साबित किया कि सही मार्गदर्शन और समझ के साथ पारिवारिक रिश्तों को पुनर्निर्मित किया जा सकता है। भोपाल के कुटुंब न्यायालय में आयोजित नेशनल लोक अदालत में कई रिश्तों को टूटने से बचाया गया। एक दिल छूने वाले मामले में पति ने अपनी बेटी को गोद में उठाते हुए पत्नी से माफी मांगी और दोनों ने मिलकर अपने रिश्ते को फिर से संजीवित किया। यह अदालत परिवारों के लिए एक नई उम्मीद बनकर उभरी है।

  • भोपाल में पांच राज्यों के शहरी विकास की नई योजनाओं पर होगी बैठककेंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर होंगे शामिल

    भोपाल में पांच राज्यों के शहरी विकास की नई योजनाओं पर होगी बैठककेंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर होंगे शामिल


    भोपाल । भोपाल में 20 दिसंबर को पांच राज्यों के शहरी विकास की नई योजनाओं पर एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय बैठक आयोजित की जाएगी। इस बैठक में केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्रीमनोहर लाल खट्टरसहित मध्य प्रदेशदिल्लीउत्तर प्रदेशमहाराष्ट्रऔर छत्तीसगढ़ के शहरी विकास मंत्री और अधिकारी शामिल होंगे। बैठक का उद्देश्य इन राज्यों में शहरी विकास के रोडमैप को तैयार करना है और इसके साथ ही विभिन्न शहरी चुनौतियों और उनके समाधान पर चर्चा करना है।

    बैठक का आयोजन भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में किया जाएगा। इसमें पांचों राज्य अपने नवाचारोंशहरी विकास योजनाओंऔर केंद्र सरकार की योजनाओं के कार्यान्वयन पर भी चर्चा करेंगे। मध्य प्रदेश की ओर से पीएम आवासलीगेसी वेस्टऔर शहरी विकास योजनाओं पर किए गए कार्यों का ब्योरा प्रस्तुत किया जाएगा।

    इसके अलावाइस बैठक में भूमि विकास नियमों में संशोधनग्रीन बिल्डिंग कॉन्सेप्ट और मेट्रोपॉलिटन सिटी के विकास पर भी विस्तृत जानकारी दी जाएगी। खासकर20 दिसंबर से भोपाल में मेट्रो का संचालन आम लोगों के लिए शुरू हो जाएगाजिसका लोकार्पण कार्यक्रम मिंटो हॉल में आयोजित किया जाएगा। इस मौके पर केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादवसुभाष नगर मेट्रो डिपो या एम्स मेट्रो स्टेशन जाकर मेट्रो ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे।

    भोपाल मेट्रो की शुरुआत

    भोपाल मेट्रो के पहले चरण में 7.5 किलोमीटर लंबा ऑरेंज लाइन का प्रायोरिटी कॉरिडोर शुरू किया जाएगा। यह रूट एम्स मेट्रो स्टेशन से लेकर सुभाष नगर मेट्रो स्टेशन तक होगा। इस मेट्रो रूट के शुरू होने से यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी और दोनों प्रमुख स्टेशनों के बीच यात्रा समय भी काफी घट जाएगा।सूत्रों के अनुसारप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस कार्यक्रम में वर्चुअली शामिल हो सकते हैं।
    कार्यक्रम का आयोजन मध्य प्रदेश मेट्रो कार्पोरेशन द्वारा किया जा रहा हैऔर इस कार्यक्रम में शहरी विकास के क्षेत्र में नई दिशा निर्धारित की जाएगी।भोपाल में 20 दिसंबर को पांच राज्यों के शहरी विकास पर महत्वपूर्ण बैठक आयोजित होगीजिसमें केंद्र सरकार की योजनाओं पर चर्चा होगी। साथ हीभोपाल मेट्रो का लोकार्पण भी इसी दिन होगाजो शहर में यात्रा के नए दौर की शुरुआत करेगा।