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  • मोहन सरकार का बड़ा फैसला तहसीलदार और नायब तहसीलदार को मिले सब रजिस्ट्रार के अधिकार 48 लाख परिवारों को मिलेगा फायदा

    मोहन सरकार का बड़ा फैसला तहसीलदार और नायब तहसीलदार को मिले सब रजिस्ट्रार के अधिकार 48 लाख परिवारों को मिलेगा फायदा


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश सरकार ने ग्रामीण आबादी की भूमि पर वर्षों से काबिज लाखों परिवारों को मालिकाना हक दिलाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। राज्य सरकार ने स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन योजना 2026 के तहत तहसीलदार प्रभारी तहसीलदार और नायब तहसीलदार को सब रजिस्ट्रार के अधिकार प्रदान कर दिए हैं। इस फैसले से प्रदेश के 48 लाख से अधिक ग्रामीण परिवारों को मुफ्त रजिस्ट्री कराने में सुविधा मिलेगी और उन्हें सरकारी कार्यालयों के बार बार चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

    सरकार का उद्देश्य ग्रामीणों को उनकी आबादी भूमि का वैधानिक स्वामित्व दिलाना है ताकि भविष्य में वे अपनी संपत्ति का कानूनी उपयोग कर सकें। इसके साथ ही राज्य सरकार ने स्टाम्प शुल्क पंजीयन शुल्क और पंचायत उपकर पूरी तरह माफ करने का फैसला भी लागू कर दिया है। इन सभी रियायतों का वित्तीय भार सरकार स्वयं उठाएगी। अनुमान है कि इस योजना पर सरकार को लगभग 3800 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ वहन करना पड़ेगा।

    पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग और पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने इस संबंध में आवश्यक अधिसूचनाएं जारी कर दी हैं। नई व्यवस्था के अनुसार अब केवल उप पंजीयक कार्यालय ही नहीं बल्कि तहसीलदार प्रभारी तहसीलदार और नायब तहसीलदार भी स्वामित्व योजना के अंतर्गत आने वाली भूमि की रजिस्ट्री कर सकेंगे। इससे प्रदेश में मौजूद सीमित संख्या वाले उप पंजीयक कार्यालयों पर दबाव कम होगा और ग्रामीणों को अपने क्षेत्र में ही रजिस्ट्री की सुविधा मिल जाएगी।

    सरकार का मानना है कि जब ग्रामीणों के नाम पर भूमि का विधिवत पंजीयन हो जाएगा तो उन्हें बैंक और अन्य वित्तीय संस्थानों से आसानी से ऋण मिल सकेगा। इसका उपयोग वे मकान निर्माण छोटे व्यवसाय कृषि कार्य और अन्य आर्थिक गतिविधियों में कर सकेंगे। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ लोगों की आर्थिक स्थिति में भी सुधार आने की उम्मीद है।

    योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए आयुक्त भू संसाधन प्रबंधन की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित की जाएगी। इस समिति में महानिरीक्षक पंजीयन एवं अधीक्षक मुद्रांक आयुक्त कोष एवं लेखा पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारी और एमपीएसईडीसी के प्रबंध संचालक सहित अन्य विशेषज्ञ शामिल होंगे। समिति समय समय पर योजना की समीक्षा करेगी दिशा निर्देश जारी करेगी और प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए आवश्यक निर्णय लेगी।

    सरकार ने योजना के प्रचार प्रसार जनजागरूकता और आवश्यक मुद्रण कार्यों के लिए 10 करोड़ रुपये भी स्वीकृत किए हैं। राजस्व विभाग को योजना से जुड़े परिपत्र जारी करने और आवश्यक स्पष्टीकरण देने का अधिकार दिया गया है ताकि पूरे प्रदेश में प्रक्रिया एक समान और पारदर्शी तरीके से लागू हो सके।

    इस फैसले को ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति के अधिकार मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि मुफ्त रजिस्ट्री और स्थानीय स्तर पर पंजीयन की सुविधा मिलने से लाखों परिवारों को कानूनी सुरक्षा मिलेगी और ग्रामीण विकास को नई गति मिलेगी।

    English Tags:
    MadhyaPradesh, SwamitvaYojana, PropertyRights, LandRegistration, RuralDevelopment

  • वक्फ बोर्ड में गैर मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति पर बढ़ा विरोध ताजुल मसाजिद से सरकार तक पहुंचेगा मुस्लिम समाज का संदेश

    वक्फ बोर्ड में गैर मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति पर बढ़ा विरोध ताजुल मसाजिद से सरकार तक पहुंचेगा मुस्लिम समाज का संदेश


    भोपाल । मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड में दो गैर मुस्लिम सदस्यों की नियुक्ति को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजधानी भोपाल में एक बड़े प्रतीकात्मक विरोध के रूप में सामने आने जा रहा है। शुक्रवार को ऐतिहासिक ताजुल मसाजिद में शहरभर से आने वाले नमाजी हाथों पर काली पट्टी बांधकर जुमे की नमाज अदा करेंगे और सरकार के फैसले के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराएंगे। मुस्लिम संगठनों का कहना है कि यह प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहेगा और इसका उद्देश्य लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आपत्ति सरकार तक पहुंचाना है।

    जानकारी के अनुसार भोपाल के अलग अलग इलाकों से बड़ी संख्या में लोग जुमे की नमाज के लिए ताजुल मसाजिद पहुंचेंगे। नमाज के दौरान सभी लोग काली पट्टी बांधकर वक्फ बोर्ड में दो गैर मुस्लिम सदस्यों को शामिल किए जाने के फैसले के खिलाफ अपनी असहमति व्यक्त करेंगे। आयोजकों का कहना है कि उनका विरोध किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं बल्कि सरकार के निर्णय के विरोध में है।

    वक्फ बोर्ड के गठन के बाद से राजधानी में विरोध लगातार तेज होता गया है। सबसे पहले ऑल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी ने इस नियुक्ति का विरोध करते हुए प्रदर्शन किया था। इसके बाद राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजकर वर्तमान वक्फ बोर्ड को भंग करने और नियुक्ति संबंधी आदेश वापस लेने की मांग भी की गई। इस घटनाक्रम के बाद विरोध का दायरा लगातार बढ़ता गया।

    इसी बीच निकाह काजी मोहम्मद मआज़ खान नोमानी नदवी ने दीनी तालीमी बोर्ड के महासचिव पद से इस्तीफा देकर अपने वैचारिक मतभेद सार्वजनिक किए। उन्होंने वक्फ बोर्ड के कुछ सदस्यों के समर्थन पर असहमति जताते हुए अपने पद से अलग होने का फैसला लिया। उनके इस्तीफे के बाद यह मुद्दा और अधिक चर्चा में आ गया।

    पिछले दो दिनों के दौरान कई उलेमा और मुस्लिम संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी सरकार के फैसले पर सवाल उठाए हैं। जमीयत उलेमा मध्य प्रदेश के सदर मुफ्ती मोहम्मद अहमद ने कहा कि यदि सरकार पारदर्शिता के नाम पर वक्फ बोर्ड में गैर मुस्लिम प्रतिनिधियों को शामिल कर रही है तो यही व्यवस्था अन्य धार्मिक संस्थाओं में भी समान रूप से लागू की जानी चाहिए। नायब सदर मुफ्ती जिया कासमी ने भी इसी तरह की मांग उठाते हुए सभी धार्मिक संस्थाओं के लिए समान नीति अपनाने की बात कही।

    विवाद उस समय और गहरा गया जब मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड के नव नियुक्त अध्यक्ष सनव्वर पटेल के स्वागत समारोह का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम के बाद कई धार्मिक पदाधिकारियों और संगठनों ने सार्वजनिक रूप से नाराजगी जताई। कुछ ने वीडियो संदेश जारी किए तो कई लोगों ने बयान देकर अपने विरोध को दर्ज कराया।

    आज ताजुल मसाजिद में होने वाला काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह अब तक हुए ज्ञापनों प्रदर्शन इस्तीफों और प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद पहला बड़ा सामूहिक और प्रतीकात्मक आयोजन होगा। प्रशासन भी पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है जबकि आयोजकों ने सभी लोगों से शांति और अनुशासन बनाए रखने की अपील की है।

  • भोपाल में दर्दनाक घटना लंबे समय से बीमारी और मानसिक तनाव से जूझ रहे बुजुर्ग ने किया सुसाइड

    भोपाल में दर्दनाक घटना लंबे समय से बीमारी और मानसिक तनाव से जूझ रहे बुजुर्ग ने किया सुसाइड


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के बैरागढ़ थाना क्षेत्र से एक बेहद दुखद घटना सामने आई है जहां लंबे समय से गंभीर बीमारी और मानसिक तनाव से जूझ रहे 60 वर्षीय बुजुर्ग ने घर के भीतर फांसी लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। घटना के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है जबकि पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि मृतक पिछले कई महीनों से पैरालिसिस की बीमारी से पीड़ित थे और इसी कारण गहरे अवसाद में चले गए थे।

    पुलिस के अनुसार मृतक की पहचान मनोहर लाल रैकवार पिता मोहनलाल रैकवार निवासी बेटा गांव बैरागढ़ के रूप में हुई है। वह पेशे से प्लंबर थे और अपने परिवार के साथ रहते थे। करीब आठ महीने पहले उन्हें पैरालिसिस का अटैक आया था जिसके बाद उनके शरीर का एक हिस्सा ठीक से काम नहीं कर रहा था। बीमारी के चलते उनकी दिनचर्या पूरी तरह बदल गई थी और सामान्य काम भी दूसरों की मदद के बिना कर पाना मुश्किल हो गया था।

    परिजनों के अनुसार लगातार बिगड़ती सेहत और शारीरिक असहायता ने उन्हें मानसिक रूप से भी काफी परेशान कर दिया था। धीरे धीरे वह अवसाद की स्थिति में पहुंच गए थे और अधिकतर समय घर में ही रहते थे। बीमारी के कारण उनका सामाजिक और पेशेवर जीवन भी प्रभावित हो गया था जिससे उनकी चिंता और बढ़ती चली गई।

    शुक्रवार सुबह जब उनकी पत्नी नींद से उठकर घर की पहली मंजिल पर पहुंचीं तो उन्होंने मनोहर लाल को पाइप के सहारे बनाए गए फंदे पर लटका देखा। यह दृश्य देखकर उन्होंने तुरंत शोर मचाया जिसके बाद आसपास रहने वाले रिश्तेदार और पड़ोसी मौके पर पहुंचे। सभी ने मिलकर उन्हें नीचे उतारा लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। घटना की सूचना तत्काल बैरागढ़ थाना पुलिस को दी गई।

    सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। इसके बाद शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। पुलिस ने मर्ग कायम कर पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक जांच में बीमारी और उससे उपजे मानसिक तनाव के कारण आत्महत्या की आशंका सामने आई है। हालांकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    यह घटना एक बार फिर इस बात की याद दिलाती है कि गंभीर बीमारी केवल शरीर को ही नहीं बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को भी गहराई से प्रभावित कर सकती है। लंबे समय तक चलने वाली शारीरिक समस्याएं कई बार व्यक्ति को अवसाद और निराशा की ओर धकेल देती हैं। ऐसे समय में परिवार और समाज का भावनात्मक सहयोग तथा समय पर मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

    यदि कोई व्यक्ति लंबे समय से मानसिक तनाव अवसाद या निराशा से जूझ रहा हो तो उसकी भावनाओं को गंभीरता से लेना चाहिए और उसे अकेला नहीं छोड़ना चाहिए। समय पर संवाद और चिकित्सकीय सहायता कई बार किसी की जिंदगी बचा सकती है।

  • हाईकोर्ट सख्त, आदेश नहीं मानने पर ACS मनीष रस्तोगी समेत तीन अधिकारियों के खिलाफ वारंट

    हाईकोर्ट सख्त, आदेश नहीं मानने पर ACS मनीष रस्तोगी समेत तीन अधिकारियों के खिलाफ वारंट


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर पीठ ने न्यायालय के आदेशों की अवहेलना और लगातार गैरहाजिर रहने वाले वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए बड़ा संदेश दिया है। जस्टिस विशाल मिश्रा की एकल पीठ ने अवमानना मामले में एडिशनल चीफ सेक्रेटरी मनीष रस्तोगी, वित्त विभाग के प्रमुख सचिव एम. सेलवेन्द्रम और किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग के संचालक अजय गुप्ता के खिलाफ 25-25 हजार रुपए के जमानती वारंट जारी करने के आदेश दिए हैं। अदालत ने तीनों अधिकारियों को 15 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से हाईकोर्ट में उपस्थित होकर जवाब देने के निर्देश दिए हैं।

    यह मामला कृषि विभाग, जबलपुर के सेवानिवृत्त उप संचालक देवदत्त विश्वकर्मा की ओर से दायर अवमानना याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ता के अनुसार 30 जून 2023 को सेवानिवृत्ति के समय उनसे 2.10 लाख रुपए की वसूली की गई थी। इसके बाद हाईकोर्ट ने 8 मई 2024 को आदेश दिया था कि वसूली गई पूरी राशि 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ वापस की जाए। आरोप है कि स्पष्ट न्यायिक आदेश के बावजूद संबंधित विभाग ने राशि वापस नहीं की, जिसके चलते अवमानना याचिका दायर करनी पड़ी।

    सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि पहले दिए गए निर्देशों के बावजूद तीनों वरिष्ठ अधिकारी व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हुए। एसीएस मनीष रस्तोगी की ओर से न तो कोई अधिवक्ता अदालत में उपस्थित हुआ और न ही व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट के लिए कोई आवेदन दिया गया। वहीं अन्य दो अधिकारियों की ओर से अधिवक्ता तो मौजूद रहे, लेकिन अधिकारी स्वयं कोर्ट नहीं पहुंचे। अदालत ने इसे न्यायालय के आदेशों की गंभीर अवहेलना माना।

    हाईकोर्ट ने आदेश दिया कि तीनों अधिकारियों के खिलाफ 25-25 हजार रुपए के जमानती वारंट जारी किए जाएं। साथ ही संबंधित जिलों के पुलिस अधीक्षकों के माध्यम से इन वारंटों की तामील सुनिश्चित की जाए, ताकि अगली सुनवाई पर सभी अधिकारी अदालत में उपस्थित हों।

    सुनवाई के दौरान कृषि विस्तार अधिकारी एस.के. निगम और संभागीय पेंशन अधिकारी नमिता भी प्रारंभिक रूप से कोर्ट में उपस्थित नहीं थे। इस पर न्यायालय ने राज्य शासन के अधिवक्ता को तत्काल दोनों अधिकारियों से फोन पर संपर्क कर अदालत में बुलाने के निर्देश दिए। बाद में उनके उपस्थित होने पर अदालत ने उनसे भी यह स्पष्ट करने को कहा कि पहले से आदेश होने के बावजूद वे समय पर कोर्ट में क्यों नहीं पहुंचे।

    हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 15 जुलाई 2026 तय करते हुए निर्देश दिए हैं कि 8 मई 2024 के मूल आदेश का पूर्ण अनुपालन करते हुए विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। साथ ही सभी संबंधित अधिकारियों की व्यक्तिगत उपस्थिति भी अनिवार्य रहेगी। अदालत ने स्पष्ट संकेत दिया कि न्यायालय के आदेशों की अवहेलना को किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और भविष्य में ऐसे मामलों में और कठोर रुख अपनाया जा सकता है।

  • उमरिया में दर्दनाक सड़क हादसा, ट्रक में घुसी कार; सरपंच, हेड कॉन्स्टेबल समेत 4 की मौत, युवती की CPR से बची जान

    उमरिया में दर्दनाक सड़क हादसा, ट्रक में घुसी कार; सरपंच, हेड कॉन्स्टेबल समेत 4 की मौत, युवती की CPR से बची जान


    उमरिया मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश के उमरिया जिले में गुरुवार तड़के हुए भीषण सड़क हादसे ने एक पूरे परिवार की खुशियां छीन लीं। नेशनल हाईवे-43 पर तेज रफ्तार अर्टिगा कार सड़क किनारे खड़े ट्रक में पीछे से जा घुसी। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार के परखच्चे उड़ गए और उसमें सवार चार लोगों की मौके पर या इलाज के दौरान मौत हो गई। वहीं गंभीर रूप से घायल एक युवती की अस्पताल में समय रहते सीपीआर देने से सांसें लौट आईं। उसकी हालत गंभीर होने पर उसे जबलपुर रेफर किया गया है।

    यह हादसा कोतवाली थाना क्षेत्र की सिविल लाइन चौकी के पास भरौला स्थित सिद्ध बाबा क्षेत्र में तड़के करीब तीन से चार बजे के बीच हुआ। पुलिस के अनुसार कार में सवार सभी लोग अनूपपुर जिले के लीला गांव के निवासी थे और परिवार की युवती खुशबू मार्को को परीक्षा दिलाने के लिए चित्रकूट जा रहे थे।

    हादसे में लीला गांव के सरपंच कुलपत सिंह, उनकी पत्नी और हेड कॉन्स्टेबल सविता सिंह मार्को, तीन वर्षीय पुत्र रुद्र प्रताप तथा कुलपत सिंह के भाई की बेटी प्रियंका सिंह की मौत हो गई। वहीं खुशबू मार्को गंभीर रूप से घायल हो गई। डॉक्टरों के अनुसार अस्पताल पहुंचने तक उसकी सांसें थम चुकी थीं, लेकिन तत्काल सीपीआर देने के बाद उसकी धड़कनें फिर से चलने लगीं। प्राथमिक उपचार के बाद उसे बेहतर इलाज के लिए जबलपुर रेफर किया गया।

    हादसे के बाद कार पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई थी। वाहन में फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए पुलिस और 108 एंबुलेंस की टीम को काफी मशक्कत करनी पड़ी। एक व्यक्ति कार के अंदर बुरी तरह फंसा हुआ था, जिसे रेस्क्यू कर जिला अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। बाद में इलाज के दौरान एक अन्य घायल ने भी दम तोड़ दिया।

    अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आलोक शर्मा ने बताया कि प्रारंभिक जांच में तेज रफ्तार के कारण चालक का वाहन पर नियंत्रण खोना हादसे की वजह माना जा रहा है। पुलिस दुर्घटना के सभी पहलुओं की जांच कर रही है।

    कार चालक ददन सिंह से जब पुलिस और मीडिया ने घटना के बारे में पूछा तो उसने बताया कि उसे हादसे की कोई जानकारी याद नहीं है। उसके कपड़ों पर खून के निशान थे और वह बार-बार यही पूछता रहा कि आखिर क्या हुआ और वह अस्पताल कैसे पहुंचा।

    इस दर्दनाक हादसे ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। एक ही परिवार के चार सदस्यों की मौत से गांव में शोक का माहौल है, जबकि घायल युवती के जल्द स्वस्थ होने की सभी कामना कर रहे हैं।

  • 'दरवाजा खोला तो सामने तेंदुआ बैठा था', इंदौर में दहशत की रात, रिहायशी इलाके में घुसा वन्यजीव

    'दरवाजा खोला तो सामने तेंदुआ बैठा था', इंदौर में दहशत की रात, रिहायशी इलाके में घुसा वन्यजीव


    इंदौर । इंदौर के कनाड़िया क्षेत्र में मंगलवार रात उस समय दहशत फैल गई, जब देवगुराड़िया की पहाड़ियों से भटककर एक तेंदुआ रिहायशी इलाके में पहुंच गया। तेंदुए ने पहले सड़क से गुजर रहे दो बाइक सवारों पर झपट्टा मारा और इसके बाद एक मकान के बाथरूम में जा घुसा। इस दौरान घर में मौजूद बुजुर्ग महिला मुन्नीबाई और उनका मानसिक रूप से बीमार पोता करीब एक घंटे तक घर के भीतर कैद रहने को मजबूर हो गए। घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और लोग देर रात तक दहशत में रहे।

    मुन्नीबाई ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि वह घर में खाना बना रही थीं। तभी बाहर अचानक शोर सुनाई दिया। जब उन्होंने दरवाजे से झांककर देखा तो सामने तेंदुआ बैठा था। यह नजारा देखते ही उन्होंने तुरंत घर के दोनों दरवाजे बंद कर दिए। उस समय उनका मानसिक रूप से बीमार पोता भी घर में मौजूद था। दोनों करीब एक घंटे तक घर से बाहर नहीं निकल सके। बाहर लोगों की आवाजें और चीख-पुकार सुनाई देती रही, लेकिन डर के कारण बाहर जाने की हिम्मत नहीं हुई।

    जानकारी के अनुसार यह घटना बिचौली मर्दाना इलाके में रात करीब साढ़े आठ बजे हुई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक तेंदुए ने पहले सड़क से गुजर रहे एक बाइक सवार पर हमला किया। युवक किसी तरह अपनी जान बचाकर वहां से भाग निकला। इसके बाद तेंदुआ भागते हुए पास के एक मकान में घुस गया और बाथरूम के पास जाकर बैठ गया। इससे पूरे परिवार में दहशत फैल गई।

    घटना की सूचना मिलते ही आसपास बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए, लेकिन तेंदुए के डर से कोई भी घर के करीब जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाया। लोगों ने तुरंत पुलिस और वन विभाग को सूचना दी। हालांकि वन विभाग की टीम के पहुंचने से पहले ही तेंदुआ बाथरूम के पास बनी दीवार फांदकर बाहर निकल गया और श्रीजी वैली की दिशा में चला गया।

    वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और पूरे घर की तलाशी ली। जब अधिकारियों को पूरी तरह भरोसा हो गया कि तेंदुआ वहां से जा चुका है, तब परिवार को सुरक्षित बाहर निकाला गया। इसके बाद क्षेत्रवासियों ने राहत की सांस ली।

    स्थानीय निवासी अभिषेक जाधव ने बताया कि शुरुआत में उन्हें लगा कि कोई बड़ी बिल्ली होगी, लेकिन ध्यान से देखने पर पता चला कि वह तेंदुआ है। इसके बाद लोगों ने शोर मचाकर आसपास के लोगों को सतर्क किया और पुलिस तथा वन विभाग को सूचना दी।

    घटना के बाद स्थानीय लोगों ने जंगल से सटे रिहायशी इलाकों में वन विभाग की नियमित गश्त बढ़ाने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते निगरानी नहीं बढ़ाई गई तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा हो सकता है।

    वन विभाग के रेंजर योगेश के अनुसार तेंदुआ संभवतः देवगुराड़िया की पहाड़ियों से भटककर आबादी वाले इलाके में आ गया था। घटनास्थल जंगल से करीब आधा किलोमीटर दूर है और इस क्षेत्र में पहले भी तेंदुओं की आवाजाही होती रही है। विभाग का मानना है कि तेंदुआ रात में ही वापस जंगल की ओर लौट गया और बुधवार सुबह तक उसके दोबारा दिखाई देने की कोई सूचना नहीं मिली।

  • इंदौर में दौड़ती बस बनी आग का गोला, टायर फटने के बाद भड़की लपटें, समय रहते खाली कराई गई बस

    इंदौर में दौड़ती बस बनी आग का गोला, टायर फटने के बाद भड़की लपटें, समय रहते खाली कराई गई बस


    इंदौर । इंदौर के शिप्रा थाना क्षेत्र में गुरुवार सुबह एक बड़ा सड़क हादसा होते-होते टल गया, जब रीवा से इंदौर आ रही जय अंबे ट्रेवल्स की यात्री बस में अचानक आग लग गई। घटना सुबह करीब 11 बजे शिप्रा थाने के सामने हुई। बस में सवार यात्रियों में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी मच गई, लेकिन चालक की सूझबूझ और प्रशासन की त्वरित कार्रवाई के चलते सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार बस इंदौर की ओर बढ़ रही थी, तभी उसका एक टायर अचानक फट गया। टायर फटने के बाद चालक ने बस पर नियंत्रण बनाए रखने की कोशिश की। इसी दौरान टायर और सड़क के बीच हुए तेज घर्षण के कारण बस के अगले हिस्से से धुआं उठने लगा और देखते ही देखते आग की लपटें दिखाई देने लगीं।

    चालक ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए तुरंत बस रोक दी और यात्रियों को तेजी से नीचे उतरने के निर्देश दिए। यात्रियों ने भी बिना घबराहट के बस खाली कर दी, जिससे किसी तरह की जनहानि नहीं हुई। कुछ ही मिनटों में बस पूरी तरह खाली करा ली गई और संभावित बड़ा हादसा टल गया।

    घटना की सूचना मिलते ही शिप्रा थाना पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंच गई। दमकल कर्मियों ने तत्काल आग बुझाने का अभियान शुरू किया और कुछ ही समय में आग पर पूरी तरह काबू पा लिया। इससे आग बस के अन्य हिस्सों में फैलने से रोक दी गई।

    हादसे के बाद पुलिस ने सभी यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए उन्हें दूसरी बस की व्यवस्था कर इंदौर के लिए रवाना किया। घटना के कारण कुछ समय तक क्षेत्र में यातायात भी प्रभावित रहा, जिसे बाद में सामान्य कर दिया गया।

    पुलिस के अनुसार शुरुआती जांच में टायर फटने के बाद हुए घर्षण को आग लगने का संभावित कारण माना जा रहा है। हालांकि, आग लगने की वास्तविक वजह का पता लगाने के लिए तकनीकी जांच कराई जाएगी। बस की यांत्रिक स्थिति और अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है।

    समय रहते चालक की सतर्कता, यात्रियों के सहयोग और फायर ब्रिगेड की त्वरित कार्रवाई से एक बड़ा हादसा टल गया। इस घटना में किसी यात्री के घायल होने या हताहत होने की सूचना नहीं है।

  • इंदौर में पुलिस महकमे पर दाग, हेड कॉन्स्टेबल पर महिला साथी से छेड़छाड़ और धमकी देने का मामला दर्ज

    इंदौर में पुलिस महकमे पर दाग, हेड कॉन्स्टेबल पर महिला साथी से छेड़छाड़ और धमकी देने का मामला दर्ज


    इंदौर  इंदौर में पुलिस विभाग से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। महिला कॉन्स्टेबल की शिकायत पर देवास पुलिस लाइन में पदस्थ हेड कॉन्स्टेबल राहुल शर्मा के खिलाफ छेड़छाड़, पीछा करने, धमकी देने, मारपीट करने और कार में बंधक बनाने के आरोप में बाणगंगा थाने में मामला दर्ज किया गया है। पीड़िता का आरोप है कि आरोपी लंबे समय से उस पर शादी का दबाव बना रहा था और मना करने के बावजूद लगातार उसका पीछा कर मानसिक रूप से परेशान करता रहा।

    पुलिस के अनुसार महिला कॉन्स्टेबल ने अपनी शिकायत में बताया कि करीब एक वर्ष पहले देवास में पदस्थापना के दौरान उसकी पहचान राहुल शर्मा से हुई थी। शुरुआती दिनों में दोनों के बीच सामान्य बातचीत होती थी, लेकिन कुछ समय बाद आरोपी ने लगातार फोन करना शुरू कर दिया। महिला के बार बार मना करने के बावजूद वह बातचीत के लिए दबाव बनाता रहा और निजी संबंध बनाने की कोशिश करता रहा।

    पीड़िता का कहना है कि राहुल की हरकतों से परेशान होकर उसने अपना तबादला देवास से इंदौर करा लिया ताकि उससे दूरी बनाई जा सके। हालांकि स्थानांतरण के बाद भी आरोपी का व्यवहार नहीं बदला। महिला ने उसका मोबाइल नंबर ब्लॉक कर दिया, लेकिन वह अलग अलग नंबरों से कॉल करता रहा और लगातार संपर्क करने की कोशिश करता रहा। आरोप है कि कई बार उसने महिला का पीछा भी किया और उसे मानसिक दबाव में रखने का प्रयास किया।

    शिकायत में यह भी कहा गया है कि आरोपी कई बार आत्महत्या करने की धमकी देकर महिला पर बात करने और शादी के लिए सहमत होने का दबाव बनाता था। एक बार वह उस समय भी सरकारी अस्पताल पहुंच गया जब महिला एक मामले में पीड़ित का मेडिकल कराने गई थी। वहां भी उसने बातचीत करने की कोशिश की और विवाद खड़ा कर दिया।

    महिला ने आरोप लगाया कि एक दिन राहुल शर्मा ने जबरन उसे अपनी कार में बैठा लिया। बाणगंगा क्षेत्र में उसने कार के दरवाजे लॉक कर दिए, उसका मोबाइल फोन छीन लिया और शादी के लिए दबाव बनाने लगा। विरोध करने पर आरोपी ने कथित तौर पर उसके साथ मारपीट भी की और उसे बाहर निकलने नहीं दिया।

    इसी दौरान महिला की मां का फोन आया। महिला ने किसी तरह उन्हें पूरी घटना की जानकारी दी और बताया कि उसे कार में बंधक बनाकर रखा गया है। सूचना मिलते ही महिला के पिता और भाई मौके पर पहुंच गए। उन्हें आता देख आरोपी कार लेकर वहां से फरार हो गया।

    घटना के बाद महिला कॉन्स्टेबल ने थाना प्रभारी और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को पूरे मामले से अवगत कराया। शिकायत की जांच के बाद बाणगंगा पुलिस ने हेड कॉन्स्टेबल राहुल शर्मा के खिलाफ छेड़छाड़, धमकी, मारपीट, अवैध रूप से बंधक बनाने और अन्य संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली है।

    पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और आरोपी की तलाश की जा रही है। साथ ही शिकायत में लगाए गए सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच की जाएगी। फिलहाल इस मामले ने पुलिस महकमे में भी हलचल पैदा कर दी है।

  • बगलामुखी मंदिर में चढ़ावा घोटाले की जांच शुरू, सरकारी समिति के रहते बनी निजी कमेटी, अफसरों की भूमिका पर सवाल

    बगलामुखी मंदिर में चढ़ावा घोटाले की जांच शुरू, सरकारी समिति के रहते बनी निजी कमेटी, अफसरों की भूमिका पर सवाल


    मध्यप्रदेश अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले के बाद अब मध्यप्रदेश के आगर मालवा जिले स्थित प्रसिद्ध मां बगलामुखी मंदिर भी विवादों के केंद्र में आ गया है। मंदिर में श्रद्धालुओं से चढ़ावा लेने और उसे निजी बैंक खातों में जमा करने के आरोपों ने प्रशासन और मंदिर प्रबंधन दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिकायत मिलने के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया है और कलेक्टर प्रीति यादव ने पूरे मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति का गठन किया है। समिति को सात दिन के भीतर यह बताने के निर्देश दिए गए हैं कि गड़बड़ी कहां हुई कितनी राशि का मामला है और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार मंदिर के संचालन के लिए पहले से शासकीय प्रबंध समिति मौजूद है जिसके पदेन अध्यक्ष संबंधित एसडीएम होते हैं। इसके बावजूद वर्ष 2024 में नलखेड़ा सुदर्शन सेवा समिति नाम से एक निजी समिति बनाई गई। आरोप है कि इस समिति के सदस्य मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं से नकद राशि और चांदी के रूप में दान लेने लगे तथा अपनी अलग रसीदें जारी करते रहे। बताया जा रहा है कि चांदी के अलावा मिलने वाली नकद राशि सरकारी खाते में जमा करने के बजाय निजी बैंक खातों में जमा की जाती रही।

    सबसे बड़ा सवाल यह है कि सरकारी समिति के रहते निजी समिति आखिर कैसे बनाई गई और तीन वर्षों तक प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में उसका संचालन कैसे चलता रहा। शिकायतों के अनुसार तत्कालीन एसडीएम और बाद में पदस्थ अन्य अधिकारियों के कार्यकाल में भी इस व्यवस्था पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। यही वजह है कि अब जांच की आंच केवल समिति तक सीमित नहीं है बल्कि संबंधित अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है।

    मंदिर परिसर में लगे शिलालेखों में लगभग 170 श्रद्धालुओं द्वारा चांदी दान किए जाने का उल्लेख मिलता है लेकिन उसके बाद कितने लोगों ने दान दिया कितना चढ़ावा आया और उसका उपयोग किस प्रकार किया गया इसका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। आरोप है कि समिति का नियमित ऑडिट भी नहीं कराया गया जिससे वित्तीय पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं। हालांकि समिति के सदस्यों का कहना है कि तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारियों की जानकारी और सहमति से ही समिति का गठन किया गया था तथा उसका विधिवत पंजीयन भी कराया गया था।

    शिकायत के आधार पर गठित जांच समिति कई महत्वपूर्ण बिंदुओं की पड़ताल कर रही है। इसमें गर्भगृह में लगाए गए चांदी के वास्तविक उपयोग की जांच के साथ यह भी देखा जाएगा कि कुल कितना चढ़ावा प्राप्त हुआ और उसे सरकारी खाते में जमा क्यों नहीं कराया गया। इसके अलावा यह भी जांच का विषय है कि सरकारी मंदिर में निजी समिति का गठन नियमों के अनुरूप था या नहीं।

    मां बगलामुखी मंदिर प्रदेश ही नहीं बल्कि देश के प्रमुख शक्तिपीठों में शामिल है जहां हर वर्ष लाखों श्रद्धालु दर्शन और विशेष अनुष्ठानों के लिए पहुंचते हैं। मंदिर में पहले से 27 सरकारी दान पेटियां और ऑनलाइन दान की व्यवस्था उपलब्ध है। ऐसे में समानांतर निजी व्यवस्था चलने से मंदिर प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल और गहरे हो गए हैं।

    मंदिर के पुजारियों और श्रद्धालुओं ने भी निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए ताकि मंदिर की प्रतिष्ठा और श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे। प्रशासन का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। अब सभी की नजर जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी है जिससे यह स्पष्ट होगा कि यह मामला प्रशासनिक लापरवाही का है या फिर चढ़ावे के नाम पर बड़े वित्तीय घोटाले का।

  • आयशर कॉलेज के पास जल उठा एथेनॉल टैंकर का केबिन, दमकल की तत्परता से बची बड़ी तबाही

    आयशर कॉलेज के पास जल उठा एथेनॉल टैंकर का केबिन, दमकल की तत्परता से बची बड़ी तबाही


    भोपाल  राजधानी भोपाल में गुरुवार सुबह उस समय अफरा तफरी मच गई जब आयशर कॉलेज के पास एथेनॉल से भरे एक टैंकर के केबिन में अचानक आग भड़क उठी। घटना सुबह करीब सवा ग्यारह बजे की बताई जा रही है। आग की लपटें उठती देख आसपास मौजूद लोगों में दहशत फैल गई और तत्काल इसकी सूचना दमकल विभाग को दी गई। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम तेजी से मौके पर पहुंची और तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। दमकल कर्मियों की मुस्तैदी के चलते आग पर कुछ ही देर में काबू पा लिया गया जिससे एक संभावित बड़ा हादसा टल गया।

    प्राथमिक जानकारी के अनुसार टैंकर पूरी तरह एथेनॉल से भरा हुआ था जिसकी पुष्टि संबंधित डिपो के अधिकारियों ने भी की है। एथेनॉल अत्यधिक ज्वलनशील पदार्थ माना जाता है और यदि आग टैंकर के मुख्य हिस्से तक पहुंच जाती तो स्थिति बेहद गंभीर हो सकती थी। राहत की बात यह रही कि आग केवल चालक के केबिन तक सीमित रही और टैंकर में भरे एथेनॉल तक नहीं पहुंच सकी। इससे किसी बड़े विस्फोट और जनहानि की आशंका पूरी तरह टल गई।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार केबिन से अचानक धुआं और आग की लपटें निकलने लगीं जिसके बाद आसपास मौजूद लोगों ने सुरक्षित दूरी बना ली। कुछ ही देर में घटनास्थल पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। मौके पर पहुंचे दमकल कर्मियों ने बिना समय गंवाए आग बुझाने का अभियान शुरू किया और एक फायर ब्रिगेड वाहन की मदद से आग को पूरी तरह नियंत्रित कर लिया। अधिकारियों का कहना है कि यदि कुछ मिनट और देरी होती तो आग टैंकर तक पहुंच सकती थी जिससे बड़ा नुकसान हो सकता था।

    दमकल विभाग के अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल आग लगने के वास्तविक कारणों का पता नहीं चल पाया है। शुरुआती जांच में इसे अज्ञात कारणों से लगी आग माना जा रहा है। तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से यह जांच की जाएगी कि आग शॉर्ट सर्किट किसी तकनीकी खराबी या अन्य वजह से लगी थी। इसके साथ ही टैंकर की तकनीकी स्थिति और सुरक्षा मानकों की भी जांच की जाएगी।

    घटना के समय टैंकर चालक मौके पर मौजूद नहीं मिला। ऐसे में यह भी जांच का विषय बन गया है कि हादसे के दौरान चालक कहां था और आग लगने के समय परिस्थितियां क्या थीं। पुलिस चालक की तलाश करने के साथ उससे पूछताछ की तैयारी कर रही है ताकि पूरे घटनाक्रम की सटीक जानकारी सामने आ सके।

    अधिकारियों के अनुसार आग में टैंकर का केबिन पूरी तरह जलकर खाक हो गया है लेकिन टैंकर में भरा एथेनॉल सुरक्षित बचा हुआ है। यही वजह रही कि एक बड़ा औद्योगिक हादसा टल गया। घटना के दौरान किसी व्यक्ति के घायल होने या जनहानि की सूचना नहीं मिली है। फिलहाल पुलिस और संबंधित विभाग पूरे मामले की जांच कर रहे हैं तथा आग लगने के कारणों का पता लगाने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने एक बार फिर ज्वलनशील पदार्थों के परिवहन के दौरान सुरक्षा मानकों के कड़ाई से पालन की आवश्यकता को उजागर कर दिया है।