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  • एमपी टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 3.0 से तकनीकी निवेश को नई रफ्तार, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ग्लोबल कंपनियों के साथ बनाई रणनीति, डेटा सेंटर और सेमीकंडक्टर हब बनने की दिशा में मध्यप्रदेश का बड़ा कदम

    एमपी टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 3.0 से तकनीकी निवेश को नई रफ्तार, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ग्लोबल कंपनियों के साथ बनाई रणनीति, डेटा सेंटर और सेमीकंडक्टर हब बनने की दिशा में मध्यप्रदेश का बड़ा कदम

    मध्यप्रदेश सरकार ने राज्य को देश के प्रमुख प्रौद्योगिकी और डिजिटल निवेश केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए एमपी टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 3.0 के विशेष सत्र का आयोजन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने देश और विदेश की दस प्रतिष्ठित संस्थाओं तथा अग्रणी उद्योग समूहों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों के साथ अलग-अलग स्तर पर विस्तृत चर्चा की। इन बैठकों का उद्देश्य राज्य में उच्च तकनीकी क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा देना, नई परियोजनाओं के क्रियान्वयन को गति देना और भविष्य के लिए दीर्घकालिक औद्योगिक सहयोग का मजबूत आधार तैयार करना रहा।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकार ऐसी औद्योगिक और तकनीकी नीतियों पर कार्य कर रही है, जिनसे मध्यप्रदेश को ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर, डेटा सेंटर और सेमीकंडक्टर निर्माण जैसे उच्च-विकास वाले क्षेत्रों में राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी स्थान मिल सके। उन्होंने निवेशकों को भरोसा दिलाया कि सरकार उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण, आवश्यक आधारभूत सुविधाएं और तेज प्रशासनिक सहयोग उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

    कॉन्क्लेव के दौरान विभिन्न कंपनियों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन एंड मैन्युफैक्चरिंग, डेटा सेंटर, हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग और अनुसंधान एवं विकास से जुड़ी अपनी प्रस्तावित परियोजनाओं का विस्तृत खाका प्रस्तुत किया। निवेशकों ने प्रदेश में तकनीकी अवसंरचना के विस्तार, आधुनिक उद्योगों की स्थापना और नवाचार आधारित परियोजनाओं में संभावनाओं पर अपने विचार साझा किए।

    इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र से जुड़ी कई प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री के साथ निवेश योजनाओं पर चर्चा की। इस दौरान उन्नत विनिर्माण, तकनीकी समाधान, डिजिटल सेवाओं और ऊर्जा आधारित औद्योगिक परियोजनाओं को लेकर संभावित सहयोग पर विचार-विमर्श हुआ। राज्य सरकार ने इन क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक नीतिगत सहयोग और सुविधाएं उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता दोहराई।

    बैठक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल नवाचार को लेकर भी विशेष जोर दिया गया। आधुनिक कंप्यूटिंग, उन्नत तकनीकी समाधान और भविष्य की डिजिटल आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए राज्य में नई तकनीकों के विकास और उनके औद्योगिक उपयोग पर विस्तार से चर्चा हुई। इस दौरान वैश्विक तकनीकी कंपनियों के प्रतिनिधियों ने मध्यप्रदेश के साथ दीर्घकालिक सहयोग और निवेश की संभावनाओं को सकारात्मक बताया।

    सेमीकंडक्टर निर्माण और अनुसंधान के क्षेत्र में भी कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव सामने आए। संबंधित कंपनियों ने उत्पादन इकाइयों की स्थापना, अनुसंधान सुविधाओं के विकास और उच्च तकनीकी विनिर्माण को बढ़ावा देने की योजनाओं पर मुख्यमंत्री के साथ विस्तार से चर्चा की। इन प्रस्तावों से प्रदेश में अत्याधुनिक औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र विकसित होने और तकनीकी उत्पादन क्षमता बढ़ने की संभावना व्यक्त की गई।

    विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा आयोजित इस कॉन्क्लेव का उद्देश्य केवल निवेश आकर्षित करना ही नहीं, बल्कि प्रदेश में तकनीकी कौशल, नवाचार और उद्योगों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना भी है। सरकार का मानना है कि ऐसे प्रयासों से स्थानीय युवाओं के लिए उच्च गुणवत्ता वाले रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और आधुनिक तकनीकी क्षेत्रों में विशेषज्ञ मानव संसाधन तैयार होगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विश्वास व्यक्त किया कि सरकार की उद्योग समर्थक नीतियां, तेज निर्णय प्रक्रिया और निवेशकों के साथ निरंतर संवाद मध्यप्रदेश को तकनीकी विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा। उन्होंने कहा कि ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर, डेटा सेंटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में बढ़ते निवेश से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी और आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के लक्ष्य को मजबूत आधार प्राप्त होगा। इससे राज्य देश के उभरते प्रौद्योगिकी मानचित्र पर एक महत्वपूर्ण और भरोसेमंद निवेश गंतव्य के रूप में अपनी मजबूत पहचान स्थापित कर सकेगा।

  • इंग्लैंड को लॉर्ड्स में हराकर इतिहास रचने वाली भारतीय महिला टीम को सीएम मोहन यादव की बधाई, क्रांति गौड़ के शानदार प्रदर्शन को बताया जीत की सबसे बड़ी ताकत

    इंग्लैंड को लॉर्ड्स में हराकर इतिहास रचने वाली भारतीय महिला टीम को सीएम मोहन यादव की बधाई, क्रांति गौड़ के शानदार प्रदर्शन को बताया जीत की सबसे बड़ी ताकत


    मध्य प्रदेश।
    इंग्लैंड के प्रतिष्ठित लॉर्ड्स क्रिकेट मैदान पर भारतीय महिला क्रिकेट टीम की ऐतिहासिक टेस्ट जीत ने पूरे देश को गौरवान्वित कर दिया है। इस यादगार उपलब्धि पर मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने टीम की सभी खिलाड़ियों को हार्दिक बधाई देते हुए कहा कि भारत की बेटियों ने अपने शानदार प्रदर्शन से देश का मान पूरी दुनिया में बढ़ाया है। उन्होंने इस जीत को भारतीय महिला क्रिकेट के इतिहास में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया और कहा कि यह सफलता आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संदेश में कहा कि भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने जिस आत्मविश्वास, अनुशासन और जुझारूपन के साथ इंग्लैंड जैसी मजबूत टीम को उसके घरेलू मैदान पर हराया है, वह देश के खेल इतिहास में स्वर्णिम अध्याय के रूप में याद रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों ने यह साबित कर दिया है कि प्रतिभा, समर्पण और कड़ी मेहनत के दम पर किसी भी चुनौती को सफलता में बदला जा सकता है। इस जीत ने भारतीय महिला क्रिकेट की बढ़ती ताकत को भी दुनिया के सामने मजबूती से स्थापित किया है।

    मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से मध्यप्रदेश की बेटी क्रांति गौड़ के प्रदर्शन की सराहना की। उन्होंने कहा कि क्रांति गौड़ ने पहली पारी में पांच विकेट लेकर मैच की दिशा बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पूरे मुकाबले में सात विकेट हासिल कर उन्होंने भारतीय टीम की जीत को मजबूत आधार दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की इस प्रतिभाशाली खिलाड़ी ने अपने प्रदर्शन से न केवल मध्यप्रदेश बल्कि पूरे देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। उनका यह प्रदर्शन प्रदेश के युवाओं, विशेषकर बेटियों के लिए प्रेरणा का विषय है।

    डॉ. मोहन यादव ने कहा कि खेल के क्षेत्र में महिलाओं की लगातार बढ़ती उपलब्धियां इस बात का प्रमाण हैं कि यदि उन्हें अवसर और उचित मंच मिले तो वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन कर सकती हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि भारतीय महिला क्रिकेट टीम भविष्य में भी इसी तरह उत्कृष्ट प्रदर्शन करती रहेगी और विश्व क्रिकेट में नए कीर्तिमान स्थापित करेगी। उन्होंने खिलाड़ियों के समर्पण, टीम भावना और संघर्षशीलता की प्रशंसा करते हुए कहा कि यही गुण किसी भी टीम को बड़ी सफलता तक पहुंचाते हैं।

    मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि मध्यप्रदेश लगातार खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रयासरत है और राज्य सरकार खिलाड़ियों को बेहतर प्रशिक्षण, सुविधाएं और अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने उम्मीद जताई कि क्रांति गौड़ जैसी खिलाड़ियों की उपलब्धियां प्रदेश के युवाओं को खेलों में करियर बनाने के लिए प्रेरित करेंगी। राज्य की बेटियां आज हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का परिचय दे रही हैं और खेल जगत में भी उनका प्रदर्शन लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है।

    भारतीय महिला क्रिकेट टीम की यह जीत केवल एक मैच की सफलता नहीं, बल्कि महिला खेलों के बढ़ते आत्मविश्वास और भारत की मजबूत खेल संस्कृति का प्रतीक भी मानी जा रही है। लॉर्ड्स जैसे ऐतिहासिक मैदान पर मिली इस उपलब्धि ने देशभर के खेल प्रेमियों में उत्साह का नया संचार किया है। मुख्यमंत्री ने टीम के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि देश को अपनी बेटियों की इस उपलब्धि पर गर्व है और उनकी यह ऐतिहासिक जीत लंबे समय तक प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।

  • मध्य प्रदेश कैबिनेट की अहम बैठक में कई बड़े निर्णय, युवाओं, किसानों, कारोबारियों और पंचायतों के लिए नई योजनाओं का खुला रास्ता

    मध्य प्रदेश कैबिनेट की अहम बैठक में कई बड़े निर्णय, युवाओं, किसानों, कारोबारियों और पंचायतों के लिए नई योजनाओं का खुला रास्ता

    मध्य प्रदेश: सरकार ने राज्य के विकास को नई दिशा देने के उद्देश्य से मंगलवार को आयोजित कैबिनेट बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णयों को मंजूरी दी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में युवाओं, किसानों, कारोबारियों, पंचायतों और सामाजिक कल्याण से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। सरकार ने वर्ष 2027 को प्रदेश में ‘युवा वर्ष’ के रूप में मनाने का ऐलान करते हुए स्पष्ट किया कि आने वाले समय में युवाओं को रोजगार, कौशल विकास, नवाचार और उद्यमिता के अधिक अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके साथ ही प्रशासनिक सुधार, डिजिटल सेवाओं के विस्तार और जनकल्याण योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में भी कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए।

    सरकार ने बताया कि वर्ष 2025 को उद्योग एवं रोजगार वर्ष और वर्ष 2026 को कृषि वर्ष के रूप में आगे बढ़ाने के बाद अब वर्ष 2027 पूरी तरह युवाओं को समर्पित रहेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की विकास यात्रा में युवाओं की भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है। इसी उद्देश्य से सभी विभागों से सुझाव मांगे जाएंगे ताकि युवा वर्ष के दौरान रोजगार, शिक्षा, स्टार्टअप, खेल, कौशल प्रशिक्षण और नवाचार से जुड़े कार्यक्रम व्यापक स्तर पर संचालित किए जा सकें। सरकार आम नागरिकों और युवाओं से भी सुझाव लेकर अंतिम कार्ययोजना तैयार करेगी।

    कैबिनेट बैठक में डिजिटल माध्यम से रचनात्मक कार्य करने वाले युवाओं को प्रोत्साहित करने का भी निर्णय लिया गया। हाल ही में आयोजित ‘मेरा युवा मेरा गौरव’ कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए सरकार ने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सकारात्मक और रचनात्मक योगदान देने वाले युवाओं को सम्मानित करने के लिए विशेष डिजिटल पुरस्कार शुरू किए जाएंगे। इस पहल का उद्देश्य नई पीढ़ी को तकनीक के माध्यम से समाज और प्रदेश के विकास में योगदान देने के लिए प्रेरित करना है।

    बैठक में सार्वजनिक वितरण प्रणाली और आंगनबाड़ी सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने पर भी जोर दिया गया। सरकार ने घर-घर पोषण आहार वितरण व्यवस्था में आवश्यक सुधारों को मंजूरी दी है, ताकि पात्र हितग्राहियों तक पोषण सामग्री समय पर और बेहतर गुणवत्ता के साथ पहुंच सके। इसके साथ ही योजनाओं की निगरानी और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए नई व्यवस्थाओं को भी स्वीकृति दी गई। सरकार का मानना है कि इन सुधारों से महिलाओं और बच्चों को मिलने वाली पोषण सेवाएं अधिक प्रभावी होंगी।

    ग्रामीण विकास और स्थानीय प्रशासन को मजबूत बनाने के उद्देश्य से पंचायतों के लिए नए डिजिटल पोर्टल को भी मंजूरी दी गई। इस पोर्टल के माध्यम से पंचायतों के प्रशासनिक कार्यों, विकास योजनाओं और वित्तीय प्रबंधन को अधिक पारदर्शी तथा तकनीक आधारित बनाया जाएगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी आसान होगी और आम नागरिकों को भी विभिन्न सेवाओं का लाभ अधिक व्यवस्थित तरीके से मिल सकेगा।

    बैठक में कारोबार और कर व्यवस्था से जुड़े विषयों पर भी विचार किया गया। सरकार ने जीएसटी से संबंधित आवश्यक बदलावों और व्यापारिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने की दिशा में आगे बढ़ने का संकेत दिया। साथ ही किसानों के हितों, कृषि क्षेत्र के विकास और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर भी चर्चा हुई। सरकार का कहना है कि इन निर्णयों का उद्देश्य विकास की गति को तेज करना और सभी वर्गों को योजनाओं का बेहतर लाभ उपलब्ध कराना है।

    कैबिनेट बैठक के बाद सरकार ने स्पष्ट किया कि प्रदेश में विकास, सुशासन और जनभागीदारी को केंद्र में रखकर आगे की नीतियां तैयार की जाएंगी। युवा वर्ष की घोषणा को राज्य के दीर्घकालिक विकास एजेंडे का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। सरकार का विश्वास है कि युवाओं की सक्रिय भागीदारी, डिजिटल तकनीक के व्यापक उपयोग और प्रशासनिक सुधारों के माध्यम से मध्य प्रदेश को विकास के नए चरण में पहुंचाने का लक्ष्य अधिक प्रभावी ढंग से हासिल किया जा सकेगा।

  • मध्य प्रदेश में UCC की दिशा में बड़ा कदम, उच्च स्तरीय समिति ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को सौंपी अंतिम रिपोर्ट, अब विधेयक की तैयारी तेज

    मध्य प्रदेश में UCC की दिशा में बड़ा कदम, उच्च स्तरीय समिति ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को सौंपी अंतिम रिपोर्ट, अब विधेयक की तैयारी तेज

    मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राज्य सरकार द्वारा गठित उच्च स्तरीय समिति ने अपना अंतिम प्रतिवेदन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को सौंप दिया है। मुख्यमंत्री ने निर्धारित समय-सीमा के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने पर समिति के अध्यक्ष और सभी सदस्यों का आभार व्यक्त किया। इसके साथ ही राज्य में यूसीसी को लेकर आगे की विधायी प्रक्रिया शुरू होने का मार्ग भी प्रशस्त हो गया है। सरकार ने रिपोर्ट को विधि विभाग को भेज दिया है, जहां आवश्यक परीक्षण और संशोधन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

    समिति द्वारा प्रस्तुत अंतिम प्रतिवेदन तीन अलग-अलग खंडों में तैयार किया गया है। पहले खंड में समिति की सिफारिशें शामिल हैं, जिनमें अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर लागू विभिन्न कानूनों, परंपराओं और व्यवस्थाओं का अध्ययन कर सुझाव दिए गए हैं। इस भाग में कुल दस अध्याय शामिल किए गए हैं, जिनमें विभिन्न कानूनी और सामाजिक पहलुओं का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।

    रिपोर्ट का दूसरा खंड प्रस्तावित विधेयक के प्रारूप से संबंधित है। समिति ने मध्य प्रदेश में लागू कानूनों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को ध्यान में रखते हुए विधेयक का मसौदा तैयार किया है। प्रस्तावित प्रारूप में चार भाग, 404 धाराएं और सात अनुसूचियां शामिल हैं। इसका उद्देश्य राज्य की परिस्थितियों के अनुरूप समान नागरिक संहिता का व्यावहारिक और कानूनी ढांचा तैयार करना है।

    तीसरे खंड में व्यापक जन-परामर्श का विवरण दिया गया है। समिति ने जिला स्तर, राज्य स्तर और ऑनलाइन माध्यमों से सुझाव आमंत्रित किए थे। इस प्रक्रिया में 9.58 लाख से अधिक सुझाव प्राप्त हुए। रिपोर्ट में इन सुझावों का प्रश्नवार, लिंगवार और समुदायवार विश्लेषण भी शामिल किया गया है। समिति ने अपनी सिफारिशों में अनुसूचित जनजातियों को समान नागरिक संहिता के दायरे से बाहर रखने की अनुशंसा भी की है।

    राज्य सरकार ने समिति को विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण और लिव-इन संबंधों जैसे व्यक्तिगत एवं पारिवारिक कानूनों का अध्ययन कर मध्य प्रदेश की सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप सुझाव तैयार करने का दायित्व सौंपा था। समिति ने अपने प्रतिवेदन में लैंगिक समानता, संवैधानिक मूल्यों, प्रचलित परंपराओं और सामाजिक विविधता के बीच संतुलन बनाए रखने पर विशेष जोर दिया है। साथ ही यह भी सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है कि विभिन्न समुदायों की परंपरागत धार्मिक और सांस्कृतिक प्रथाएं अनावश्यक रूप से प्रभावित न हों।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस अवसर पर समिति के अध्यक्ष, सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई सहित अन्य सदस्यों के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि अब रिपोर्ट विधि विभाग के पास है, जहां आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसे वरिष्ठ सचिव समिति और मंत्रिपरिषद के समक्ष रखा जाएगा। इसके बाद सरकार इसे विधानसभा के आगामी मानसून सत्र में विधेयक के रूप में प्रस्तुत करने पर विचार कर सकती है।

    मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों से भी स्पष्ट रुख अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता जैसे विषय पर सभी पक्षों को अपने विचार स्पष्ट रूप से रखने चाहिए। सरकार का कहना है कि व्यापक जन-परामर्श और कानूनी अध्ययन के आधार पर तैयार यह प्रतिवेदन राज्य में समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार दस्तावेज के रूप में काम करेगा।

  • थार हटाने को कहा तो छीन ली लाइसेंसी रिवॉल्वर, भोपाल में किसान पर ताबड़तोड़ फायरिंग, तीन आरोपी गिरफ्तार

    थार हटाने को कहा तो छीन ली लाइसेंसी रिवॉल्वर, भोपाल में किसान पर ताबड़तोड़ फायरिंग, तीन आरोपी गिरफ्तार


    नई दिल्ली । भोपाल के मिसरोद इलाके में मामूली विवाद ने उस समय खूनी रूप ले लिया जब रास्ते में खड़ी थार हटाने के लिए हॉर्न बजाने पर तीन युवकों ने एक किसान पर हमला कर दिया। आरोपियों ने पहले किसान के साथ बेरहमी से मारपीट की और फिर उसकी लाइसेंसी रिवॉल्वर छीनकर उसी से दो गोलियां चला दीं। एक गोली किसान के पैर को चीरते हुए निकल गई जबकि दूसरी निशाने से चूक गई। पूरी घटना वहां लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई जिसके आधार पर पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।

    घटना शनिवार देर रात मिसरोद थाना क्षेत्र स्थित सागर रॉयल होम्स सोसाइटी की है। घायल किसान की पहचान 33 वर्षीय हरीश कुमार राय के रूप में हुई है। जानकारी के अनुसार हरीश देर रात अपने घर लौट रहे थे। जब वह सोसाइटी के मुख्य गेट पर पहुंचे तो वहां एक थार वाहन खड़ा मिला जिससे रास्ता पूरी तरह बंद हो गया था। उन्होंने वाहन हटाने के लिए कई बार हॉर्न बजाया लेकिन थार में बैठे युवकों ने रास्ता खाली नहीं किया। इसके बाद हरीश दूसरे गेट से अंदर जाकर अपनी गाड़ी पार्क करने लगे।

    कुछ ही देर बाद थार में सवार तीनों युवक भी पार्किंग में पहुंच गए और वाहन हटाने की बात को लेकर कहासुनी शुरू हो गई। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि आरोपियों ने किसान के साथ मारपीट शुरू कर दी। पुलिस के अनुसार युवकों ने डंडों से हमला किया और इसी दौरान हरीश की लाइसेंसी रिवॉल्वर छीन ली। इसके बाद आरोपियों ने उसी रिवॉल्वर से दो फायर किए। एक गोली हरीश के बाएं पैर में घुटने के नीचे लगी जिससे पैर में फ्रैक्चर हो गया जबकि दूसरी गोली किसी को नहीं लगी।

    घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची। जांच के दौरान घटनास्थल से दो खाली कारतूस बरामद किए गए। सीसीटीवी फुटेज में पूरी वारदात स्पष्ट रूप से दिखाई देने के बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए तीनों आरोपियों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

    पुलिस ने हर्षित पटेल 21 वर्ष अनुभव चौबे 19 वर्ष और लोकेश रघुवंशी 24 वर्ष के खिलाफ हत्या के प्रयास सहित अन्य गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है। आरोपियों को अदालत में पेश करने के बाद न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। वहीं घायल किसान का अस्पताल में उपचार जारी है और डॉक्टरों की निगरानी में उसकी हालत पर नजर रखी जा रही है।

    यह घटना एक बार फिर सड़क पर होने वाले छोटे विवादों के खतरनाक रूप लेने की गंभीर तस्वीर सामने लाती है। महज रास्ता खाली कराने के लिए हॉर्न बजाने जैसी सामान्य बात पर हिंसा और फायरिंग तक पहुंच जाना चिंता का विषय है। पुलिस का कहना है कि मामले की विस्तृत जांच जारी है और सीसीटीवी फुटेज सहित सभी साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • देवास में तेज रफ्तार का कहर, 14 वर्षीय छात्र की सड़क हादसे में मौत; दोस्तों के सोशल मीडिया पोस्ट ने नम कीं आंखें

    देवास में तेज रफ्तार का कहर, 14 वर्षीय छात्र की सड़क हादसे में मौत; दोस्तों के सोशल मीडिया पोस्ट ने नम कीं आंखें


    देवास । देवास के बालगढ़ रोड पर शुक्रवार रात हुआ एक दर्दनाक सड़क हादसा एक परिवार की खुशियां हमेशा के लिए छीन ले गया। महज 14 वर्षीय छात्र जैद खान अपने दो दोस्तों के साथ घूमने निकला था, लेकिन घर लौटने से पहले ही सड़क दुर्घटना ने उसकी जिंदगी खत्म कर दी। हादसे में उसके दोनों दोस्त मामूली रूप से घायल हुए, जबकि जैद को अस्पताल पहुंचने से पहले ही डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। इस घटना के बाद पूरे इलाके में शोक का माहौल है और जैद के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

    जानकारी के अनुसार दुर्घटना शुक्रवार रात करीब साढ़े नौ बजे अष्टविनायक कॉलोनी के पास बालगढ़ रोड पर हुई। शांतिपुरा निवासी जैद खान अपने दो दोस्तों के साथ बाइक से घूमने निकला था। लौटते समय उनकी बाइक सामने से आ रही एक कार से टकरा गई। टक्कर इतनी तेज थी कि तीनों युवक सड़क पर दूर जा गिरे और गंभीर रूप से घायल हो गए। आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत मदद के लिए दौड़ लगाई और एक परिचित की सहायता से तीनों को ऑटो में बैठाकर जिला अस्पताल पहुंचाया गया।

    अस्पताल में डॉक्टरों ने जांच के बाद जैद खान को मृत घोषित कर दिया। वहीं उसके दोनों दोस्तों को प्राथमिक उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई क्योंकि उन्हें केवल मामूली चोटें आई थीं। पुलिस ने अस्पताल पहुंचकर आवश्यक कार्रवाई शुरू की और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। शनिवार को पोस्टमार्टम के बाद जैद का शव परिजनों को सौंप दिया गया।

    परिजनों के अनुसार जैद आठवीं कक्षा में पढ़ाई कर रहा था और पढ़ाई के साथ-साथ बेहद मिलनसार स्वभाव का था। उसके पिता ऑटो चलाकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं और साथ ही एक छोटी किराना दुकान भी संचालित करते हैं। बेटे की असमय मौत से परिवार पूरी तरह टूट गया है। मोहल्ले में भी घटना के बाद मातम पसरा हुआ है। पड़ोसियों का कहना है कि जैद सभी का चहेता था और हमेशा हंसते-मुस्कुराते रहने वाला बच्चा था।

    हादसे के बाद जैद के दोस्तों और परिचितों ने सोशल मीडिया पर भावुक संदेश साझा किए। एक दोस्त ने लिखा कि आ जाना यार हमेशा की तरह एक आवाज पर जबकि अन्य दोस्तों ने उसे श्रद्धांजलि देते हुए लिखा कि जहां भी रहो दोस्त हमेशा खुश रहो। इन संदेशों ने हर किसी की आंखें नम कर दीं और यह एहसास कराया कि एक सड़क हादसा केवल एक परिवार ही नहीं बल्कि पूरे दोस्ती के रिश्ते को भी गहरा जख्म दे जाता है।

    पुलिस ने मामला दर्ज कर दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि कार और बाइक की टक्कर किन परिस्थितियों में हुई इसकी जांच की जा रही है। प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और घटनास्थल से मिले साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि हादसे के पीछे लापरवाही किसकी थी।

    यह हादसा एक बार फिर सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। खासकर रात के समय वाहन चलाते समय सावधानी और यातायात नियमों का पालन कितना जरूरी है, यह घटना उसकी दुखद याद दिलाती है। एक पल की चूक ने एक मासूम छात्र की जिंदगी छीन ली और उसके परिवार को ऐसा दर्द दे दिया जिसे शायद समय भी कभी पूरी तरह भर नहीं पाएगा।

  • पहली बारिश में बह गई करोड़ों के पुल की सुरक्षा दीवार निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल ग्रामीणों ने मांगी तकनीकी जांच

    पहली बारिश में बह गई करोड़ों के पुल की सुरक्षा दीवार निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल ग्रामीणों ने मांगी तकनीकी जांच


    देवास । देवास जिले के होशियारी और मकोडिया गांवों को जोड़ने वाला करोड़ों रुपए की लागत से बना स्टॉप डैम कम पुल पहली ही बारिश के बाद सवालों के घेरे में आ गया है। मानसून की शुरुआती बारिश में ही पुल के दोनों ओर बनाई गई प्रोटेक्शन वॉल बह गई जबकि उसके पीछे भरी गई मिट्टी भी कई स्थानों से कट गई। इस घटना ने निर्माण गुणवत्ता और सुरक्षा व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल पुल पर आवागमन जारी है लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि यदि आगामी दिनों में तेज बारिश या बाढ़ का दबाव बढ़ा तो स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है।

    मौके पर निरीक्षण के दौरान पुल के दोनों सिरों पर सुरक्षा दीवार के कई हिस्से क्षतिग्रस्त मिले। जहां मजबूत प्रोटेक्शन वॉल बनाई गई थी वहां अब केवल कंक्रीट के अवशेष और बह चुकी मिट्टी दिखाई दे रही है। पुल के एप्रोच मार्ग के पास भराव मिट्टी के बह जाने से कई स्थानों पर गड्ढेनुमा स्थिति बन गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अभी तक नदी में बड़ा उफान भी नहीं आया है। केवल सामान्य बारिश और शिप्रा नदी में छोड़े गए पानी के बहाव से ही यह नुकसान हुआ है। ऐसे में यदि मानसून के अगले दौर में जलस्तर बढ़ा तो पुल की नींव तक खतरा पहुंच सकता है।

    ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर आरोप लगाए हैं। इरफान पटेल धीरज बना गोलू वर्मा टेपू शेख रंजन सिंह चौहान लाखन सिंह राठौर नवाब शेख और शेर मोहम्मद पटेल सहित कई ग्रामीणों का कहना है कि निर्माण में मानकों के अनुरूप सामग्री का उपयोग नहीं किया गया। उनका आरोप है कि सरियों और अन्य निर्माण सामग्री की गुणवत्ता कमजोर रही जिसके कारण पहली ही बारिश में सुरक्षा दीवार टिक नहीं सकी। ग्रामीणों के अनुसार मार्च में भूमिपूजन के बाद जल्दबाजी में करीब 28 दिनों के भीतर निर्माण कार्य पूरा कर दिया गया था। उनका कहना है कि करोड़ों रुपए की इस परियोजना की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जानी चाहिए और यदि किसी प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार एजेंसी और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

    मामला सामने आने के बाद हाटपीपल्या विधायक मनोज चौधरी ने पुल का निरीक्षण किया और सिंचाई विभाग के अधिकारियों को मौके पर बुलाकर निर्माण गुणवत्ता की जांच के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य अभी पूर्ण नहीं हुआ है और यदि जांच में कोई गड़बड़ी सामने आती है तो संबंधित एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। साथ ही जहां कमी पाई गई है उसे तत्काल दूर कराया जाएगा ताकि भविष्य में किसी तरह की दुर्घटना की आशंका न रहे।

    सिंचाई विभाग की एसडीओ नेहा दुबे ने बताया कि पुल की मुख्य संरचना पूरी तरह सुरक्षित है और नुकसान केवल प्रोटेक्शन वॉल तथा उसके पीछे की भराव मिट्टी तक सीमित है। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य अभी जारी है और ग्वालियर की कटारे कंस्ट्रक्शन कंपनी इस परियोजना का निर्माण कर रही है। एजेंसी का अंतिम भुगतान भी अभी नहीं किया गया है। विभाग के अनुसार क्षतिग्रस्त हिस्से की दोबारा मरम्मत कराई जाएगी तथा पूरी प्रोटेक्शन वॉल नए सिरे से बनाई जाएगी। बारिश का दौर थमने के बाद शेष निर्माण कार्य भी पूरा कराया जाएगा।

    फिलहाल इस पूरे मामले में ग्रामीणों और विभाग के दावों के बीच अंतर दिखाई दे रहा है। एक ओर ग्रामीण निर्माण में लापरवाही का आरोप लगा रहे हैं तो दूसरी ओर विभाग मुख्य पुल को सुरक्षित बताते हुए केवल सुरक्षा दीवार की मरम्मत की बात कह रहा है। अब सभी की नजर प्रस्तावित तकनीकी जांच और मानसून के अगले दौर पर टिकी है क्योंकि तेज बारिश ही यह तय करेगी कि पुल का निर्माण वास्तव में कितना मजबूत और सुरक्षित है।

  • माता टेकरी में हादसे की आहट कुमार गंधर्व द्वार से टूटे पत्थर एक श्रद्धालु घायल प्रशासन पर लापरवाही के आरोप

    माता टेकरी में हादसे की आहट कुमार गंधर्व द्वार से टूटे पत्थर एक श्रद्धालु घायल प्रशासन पर लापरवाही के आरोप


    देवास  देवास की आस्था का प्रमुख केंद्र माता टेकरी शनिवार सुबह उस समय अचानक चर्चा का विषय बन गया जब रपट मार्ग पर स्थित कुमार गंधर्व प्रवेश द्वार से पत्थर टूटकर नीचे गिर पड़े। इस अप्रत्याशित घटना में एक व्यक्ति घायल हो गया जबकि संयोग से बड़ा हादसा टल गया। जिस समय यह घटना हुई उस दौरान द्वार के आसपास श्रद्धालुओं की आवाजाही जारी थी और कुछ लोग पास में खड़े होकर चाय पी रहे थे। यदि उस समय वहां अधिक भीड़ होती तो स्थिति कहीं अधिक गंभीर हो सकती थी।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सुबह अचानक प्रवेश द्वार के ऊपरी हिस्से से लाल पत्थरों के कई टुकड़े टूटकर नीचे आ गिरे। किसी को संभलने का मौका भी नहीं मिला और एक बड़ा पत्थर नीचे खड़े व्यक्ति के पैर पर गिर गया जिससे उसे चोट लग गई। आसपास मौजूद लोगों ने तत्काल घायल की मदद की और सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। घटना के बाद कुछ देर के लिए वहां अफरा तफरी का माहौल बन गया और श्रद्धालु भयभीत नजर आए।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि माता टेकरी देवास का प्रमुख धार्मिक स्थल है जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। विशेष अवसरों और त्योहारों पर यहां हजारों लोगों की भीड़ उमड़ती है। ऐसे में प्रवेश द्वार जैसी महत्वपूर्ण संरचना से पत्थर गिरना सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। लोगों का मानना है कि यदि समय रहते इस तरह की संरचनाओं की नियमित जांच और मरम्मत नहीं कराई गई तो भविष्य में बड़ा हादसा हो सकता है।

    घटना के बाद श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की कि पूरे प्रवेश द्वार और रपट मार्ग की तकनीकी जांच कराई जाए। साथ ही जिन स्थानों पर पत्थर ढीले हैं या संरचना कमजोर हो चुकी है वहां तत्काल मरम्मत कराई जाए ताकि किसी भी श्रद्धालु की जान जोखिम में न पड़े। लोगों ने यह भी कहा कि धार्मिक स्थलों पर आने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।

    माता टेकरी न केवल देवास बल्कि आसपास के जिलों के लोगों की गहरी आस्था का केंद्र है। यहां प्रतिदिन दूर दूर से श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में किसी भी प्रकार की लापरवाही गंभीर परिणाम दे सकती है। फिलहाल इस घटना में केवल एक व्यक्ति घायल हुआ है लेकिन इसे चेतावनी के रूप में देखते हुए प्रशासन को तत्काल आवश्यक कदम उठाने की जरूरत महसूस की जा रही है।

    स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि संबंधित विभाग इस घटना को गंभीरता से लेते हुए प्रवेश द्वार की मजबूती की जांच कराएगा और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करेगा ताकि श्रद्धालु बिना किसी भय के माता टेकरी के दर्शन कर सकें।

  • सरदार सरोवर वन टाइम सेटलमेंट बना सियासी मुद्दा क्या मध्य प्रदेश ने घाटे का सौदा किया या बचाए 1268 करोड़

    सरदार सरोवर वन टाइम सेटलमेंट बना सियासी मुद्दा क्या मध्य प्रदेश ने घाटे का सौदा किया या बचाए 1268 करोड़


    मध्य प्रदेश। करीब तीन दशक से लंबित सरदार सरोवर डैम विवाद पर आखिरकार वन टाइम सेटलमेंट हो गया लेकिन इस समझौते ने मध्य प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। जिस राज्य ने अपनी हजारों हेक्टेयर जमीन डूबने और सैकड़ों गांवों के विस्थापन के बदले गुजरात से 7669 करोड़ रुपए का मुआवजा मांगा था उसे अब यह दावा पूरी तरह छोड़ना पड़ा है। इतना ही नहीं राज्य सरकार को गुजरात को 231 करोड़ 80 लाख रुपए का भुगतान भी करना होगा। यही वजह है कि इस समझौते को लेकर सरकार और विपक्ष आमने सामने हैं।

    सरदार सरोवर परियोजना नर्मदा नदी पर गुजरात में बनाई गई थी लेकिन इसके बैकवाटर का सबसे बड़ा असर मध्य प्रदेश पर पड़ा। डैम की ऊंचाई बढ़ने के बाद प्रदेश के 192 गांव और करीब 21 हजार हेक्टेयर भूमि स्थायी रूप से डूब क्षेत्र में आ गई। इसके बाद नए भूमि अधिग्रहण कानून के आधार पर मध्य प्रदेश ने गुजरात से 7669 करोड़ रुपए के मुआवजे की मांग की थी। दूसरी ओर गुजरात पुराने दावों के आधार पर सीमित भुगतान की बात करता रहा और निर्माण लागत में मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी का मुद्दा उठाता रहा। इसी विवाद के कारण मामला वर्षों तक अटका रहा।

    दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की मौजूदगी में चार राज्यों के बीच हुए समझौते में पुरानी फाइल को हमेशा के लिए बंद करने पर सहमति बनी। इसके तहत मध्य प्रदेश ने अपना पूरा मुआवजा दावा वापस ले लिया जबकि गुजरात की ओर से निर्माण लागत में प्रदेश की करीब 1500 करोड़ रुपए की संभावित देनदारी घटाकर केवल 231.80 करोड़ रुपए तय कर दी गई।

    यही फैसला अब राजनीतिक विवाद का कारण बन गया है। कांग्रेस का आरोप है कि सरकार ने प्रदेश के किसानों आदिवासियों और विस्थापित परिवारों के हितों से समझौता किया है। विपक्ष का कहना है कि हजारों करोड़ रुपए के दावे को छोड़ना प्रदेश के अधिकारों का नुकसान है और सरकार को इस पूरे समझौते पर श्वेत पत्र जारी करना चाहिए।

    वहीं मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और सरकार इस समझौते को प्रदेश के हित में लिया गया व्यावहारिक फैसला बता रहे हैं। उनका कहना है कि गुजरात किसी भी स्थिति में 7669 करोड़ रुपए देने को तैयार नहीं था। ऐसे में लंबे कानूनी विवाद को समाप्त करते हुए राज्य ने 1500 करोड़ रुपए की संभावित देनदारी को घटाकर केवल 231.80 करोड़ रुपए में निपटा लिया जिससे सरकारी खजाने पर बड़ा वित्तीय बोझ टल गया।

    सरकार यह भी तर्क दे रही है कि सरदार सरोवर परियोजना से मध्य प्रदेश को दीर्घकालिक लाभ लगातार मिल रहे हैं। परियोजना से बनने वाली जल विद्युत का सबसे बड़ा हिस्सा प्रदेश को मिलता है। साथ ही लाखों हेक्टेयर कृषि भूमि की सिंचाई और कई बड़े शहरों की पेयजल आपूर्ति भी इसी परियोजना पर निर्भर है। इसलिए सरकार इस समझौते को भविष्य के हितों और व्यावहारिक समाधान के रूप में देख रही है।

    हालांकि सबसे बड़ा सवाल अब उन विस्थापित परिवारों को लेकर है जिनके पुनर्वास और मुआवजे की जिम्मेदारी अब पूरी तरह मध्य प्रदेश सरकार पर आ गई है। चूंकि गुजरात से कोई मुआवजा राशि नहीं मिलेगी इसलिए राज्य सरकार को ही अपने संसाधनों से प्रभावित लोगों के पुनर्वास और भुगतान की व्यवस्था करनी होगी। ऐसे में यह समझौता कानूनी विवाद का अंत जरूर है लेकिन इसके आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव आने वाले समय में भी चर्चा का विषय बने रहेंगे।

  • मध्य प्रदेश के युवाओं का महाकुंभ इंदौर में आज जुटेंगे 5 हजार युवा मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव देंगे विकास का मंत्र

    मध्य प्रदेश के युवाओं का महाकुंभ इंदौर में आज जुटेंगे 5 हजार युवा मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव देंगे विकास का मंत्र


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश के युवाओं की ऊर्जा, नवाचार और नेतृत्व क्षमता को नई दिशा देने के उद्देश्य से 11 जुलाई को इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में माय यूथ माय प्राइड कॉन्क्लेव-2026 का आयोजन किया जा रहा है। वन स्टेट वन जनरेशन वन संकल्प थीम पर आधारित इस कॉन्क्लेव में प्रदेश के विभिन्न जिलों से लगभग पांच हजार युवा शामिल होंगे। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव विशेष रूप से उपस्थित रहकर युवाओं को संबोधित करेंगे और विकसित, आत्मनिर्भर तथा समृद्ध मध्य प्रदेश के निर्माण में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करेंगे।

    सुबह 10 बजे से शुरू होने वाले इस कॉन्क्लेव में युवाओं को प्रदेश के विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर अपने विचार और सुझाव रखने का अवसर मिलेगा। मुख्यमंत्री दोपहर 12 बजे कार्यक्रम में पहुंचकर युवाओं से संवाद करेंगे और उन्हें प्रदेश की विकास यात्रा में सहभागी बनने का संदेश देंगे। आयोजन का उद्देश्य युवाओं को केवल प्रेरित करना नहीं, बल्कि उन्हें विकास के वास्तविक एजेंडा से जोड़ना है।

    कॉन्क्लेव में शिक्षा, कौशल विकास, खेल, स्टार्टअप, एमएसएमई, कृषि, स्वास्थ्य, पर्यावरण, संस्कृति, पर्यटन और जनभागीदारी जैसे प्रमुख क्षेत्रों से जुड़े युवा भाग लेंगे। विभिन्न संवाद सत्रों और कार्यशालाओं के माध्यम से प्रतिभागी अपने क्षेत्रों की चुनौतियों, संभावनाओं और समाधान पर चर्चा करेंगे। इससे युवाओं को नीति निर्माण और विकास योजनाओं में अपनी भूमिका समझने का अवसर मिलेगा।

    कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता पांच समानांतर विषयगत कार्यशालाएं होंगी। इन कार्यशालाओं में युवा समूहों में बैठकर व्यवहारिक और क्रियान्वयन योग्य सुझाव तैयार करेंगे। इन सुझावों को संकलित कर प्रदेश के युवाओं का सामूहिक युवा संकल्प तैयार किया जाएगा, जो मध्य प्रदेश के भविष्य के विकास का विजन प्रस्तुत करेगा। आयोजकों के अनुसार यह संकल्प केवल एक औपचारिक दस्तावेज नहीं होगा, बल्कि युवाओं की आकांक्षाओं और जिम्मेदारियों का साझा घोषणापत्र बनेगा।

    कॉन्क्लेव को युवाओं के लिए आकर्षक और प्रेरक बनाने के लिए कई विशेष गतिविधियां भी आयोजित की जाएंगी। इसमें मोटर साइकिल और साइकिल रैली, प्रेरणादायी उद्बोधन, युवा उपलब्धि सम्मान, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां, संवादात्मक सत्र, म्यूजिक स्टेज, इंदौरी फूड स्ट्रीट और सामूहिक युवा संकल्प कार्यक्रम शामिल हैं। इन गतिविधियों का उद्देश्य युवाओं में उत्साह, रचनात्मकता और सहभागिता की भावना को बढ़ाना है।

    कार्यक्रम के अंत में पांच हजार युवा एक साथ विकसित मध्य प्रदेश के निर्माण का संकल्प लेंगे। आयोजकों का मानना है कि यह कॉन्क्लेव प्रदेश के युवाओं को एक साझा मंच प्रदान करेगा जहां वे अपने विचार, ऊर्जा और सपनों को राज्य के विकास से जोड़ सकेंगे। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की उपस्थिति इस आयोजन को और अधिक महत्वपूर्ण बना रही है क्योंकि उनके मार्गदर्शन में युवाओं को प्रदेश की विकास यात्रा में सक्रिय भूमिका निभाने का संदेश मिलेगा।

    इंदौर में आयोजित होने वाला यह कॉन्क्लेव केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश के युवाओं की सामूहिक शक्ति, संकल्प और भविष्य की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण आयोजन माना जा रहा है।