Tag: MadhyaPradesh

  • देशभर में चीनी के दाम में तेज उछाल, उत्तर प्रदेश से महानगरों तक महंगी हुई रोजमर्रा की जरूरत

    देशभर में चीनी के दाम में तेज उछाल, उत्तर प्रदेश से महानगरों तक महंगी हुई रोजमर्रा की जरूरत

    नई दिल्ली ।देशभर में चीनी की कीमतों में लगातार तेजी देखने को मिल रही है। त्योहारों और शादियों के सीजन से पहले रोजमर्रा की इस जरूरी वस्तु के महंगे होने से घरेलू बजट पर दबाव बढ़ने की आशंका है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक साल में करीब 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चीनी के दाम में 10 से 18 रुपये प्रति किलो तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

    चीनी की कीमतों में सबसे अधिक वृद्धि ओडिशा में दर्ज की गई है। 21 अगस्त को यहां चीनी का भाव 64.72 रुपये प्रति किलोग्राम रहा, जो पिछले साल की समान अवधि की तुलना में करीब 17.80 रुपये अधिक है। इसके बाद मध्य प्रदेश और पंजाब जैसे राज्यों में भी कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

    देश में चीनी की औसत कीमत फिलहाल करीब 58.23 रुपये प्रति किलोग्राम बताई जा रही है। हालांकि कई राज्यों में खुदरा बाजार का भाव राष्ट्रीय औसत से काफी ऊपर है। असम, दिल्ली, गोवा, केरल, मध्य प्रदेश, मेघालय, पंजाब, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल समेत कई इलाकों में चीनी की कीमत 65 रुपये प्रति किलो या उससे अधिक के स्तर तक पहुंच गई है।

    मध्य प्रदेश में भी चीनी के दाम में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है। पिछले महीने की समान तारीख की तुलना में राज्य में कीमत करीब 15.70 रुपये प्रति किलोग्राम बढ़ी है। पंजाब में भी लगभग 14.67 रुपये प्रति किलो की वृद्धि दर्ज की गई है। इन बढ़ती कीमतों का असर घरों के साथ-साथ मिठाई, बेकरी और अन्य खाद्य कारोबारों पर भी पड़ सकता है।

    उत्तर प्रदेश में स्थिति विशेष रूप से चर्चा में है। यहां चीनी मिलों से निकलने वाली चीनी का थोक भाव 5,400 से 5,800 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है। थोक बाजार में तेजी का सीधा असर खुदरा कीमतों पर दिखाई दे रहा है और कई स्थानों पर उपभोक्ताओं को चीनी के लिए 65 से 68 रुपये प्रति किलो तक खर्च करना पड़ रहा है।

    दिल्ली, मुंबई और कोलकाता जैसे बड़े शहरों में भी अच्छी गुणवत्ता वाली चीनी की खुदरा कीमत 65 से 70 रुपये प्रति किलो के आसपास पहुंच गई है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, कुछ महानगरों में एक महीने के भीतर ही चीनी के दाम में 15 से 20 रुपये प्रति किलो तक की बढ़ोतरी हुई है।

    बढ़ती कीमतों के पीछे बाजार में आपूर्ति और मांग से जुड़े कई कारक अहम माने जा रहे हैं। त्योहारों के दौरान मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों में चीनी की मांग बढ़ती है। ऐसे में यदि बाजार में उपलब्धता अपेक्षाकृत सीमित रहती है तो कीमतों पर दबाव और बढ़ सकता है।

    सरकार भी चीनी बाजार की स्थिति पर नजर बनाए हुए है और कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। हालांकि खुदरा बाजार में अलग-अलग शहरों और गुणवत्ता के आधार पर वास्तविक कीमत में अंतर हो सकता है।

    वर्तमान स्थिति में दिल्ली में चीनी का खुदरा भाव करीब 60 से 63 रुपये किलो, मुंबई में 65 से 70 रुपये, कोलकाता में 64 से 70 रुपये, पंजाब और ओडिशा में 64 से 65 रुपये, लखनऊ में 65 से 68 रुपये तथा पटना में 65 से 68 रुपये किलो के आसपास बताया गया है। आने वाले दिनों में त्योहारों की मांग और बाजार की आपूर्ति के आधार पर कीमतों में आगे बदलाव देखने को मिल सकता है।

  • आंगनवाड़ी केंद्रों पर बच्चों और माताओं को पोषण आहार उपलब्ध कराने बदली व्यवस्था, स्व-सहायता समूहों से तैयार हो रहा टेक होम राशन

    आंगनवाड़ी केंद्रों पर बच्चों और माताओं को पोषण आहार उपलब्ध कराने बदली व्यवस्था, स्व-सहायता समूहों से तैयार हो रहा टेक होम राशन

    मध्यप्रदेश: में बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं तक पूरक पोषण आहार की पहुंच को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने टेक होम राशन व्यवस्था में बदलाव किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में महिला एवं बाल विकास विभाग ने अगस्त के पहले सप्ताह से नई व्यवस्था लागू की है। इसके तहत स्थानीय स्व-सहायता समूहों के माध्यम से तैयार किया गया टेक होम राशन पात्र हितग्राहियों तक पहुंचाया जा रहा है। सरकार का जोर पोषण व्यवस्था को स्थानीय स्तर पर अधिक प्रभावी बनाने के साथ महिलाओं और बच्चों को नियमित पोषण सहायता उपलब्ध कराने पर है।

    पूरक पोषण कार्यक्रम के तहत पात्र हितग्राहियों को वर्ष में कम से कम 300 दिन पूरक पोषण सेवाएं उपलब्ध कराने का प्रावधान है। तीन से छह वर्ष तक के बच्चों को आंगनवाड़ी केंद्रों पर प्रतिदिन नाश्ता और गर्म पका भोजन दिया जा रहा है। वहीं छह माह से तीन वर्ष तक के बच्चों और गर्भवती तथा धात्री माताओं के लिए मंगलवार को गर्म पका भोजन और शेष दिनों में टेक होम राशन उपलब्ध कराया जाता है। नई व्यवस्था के तहत प्रदेश के आंगनवाड़ी केंद्रों पर स्थानीय स्व-सहायता समूहों द्वारा तैयार टेक होम राशन का वितरण शुरू किया गया है।

    इस बदलाव से पोषण आहार की उपलब्धता को स्थानीय स्तर पर मजबूत करने के साथ स्व-सहायता समूहों की भागीदारी भी बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। स्थानीय समूहों के माध्यम से तैयार होने वाले राशन से आंगनवाड़ी सेवाओं से जुड़े हितग्राहियों को निर्धारित पोषण सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित बनाया जा रहा है। छह से 60 माह के अति गंभीर कुपोषित बच्चों और छह से 72 माह के अति कम वजन वाले बच्चों के लिए अतिरिक्त पोषण आहार के रूप में भी स्थानीय स्तर पर तैयार टेक होम राशन उपलब्ध कराया जा रहा है।

    बच्चों की पोषण स्थिति की नियमित निगरानी के लिए आंगनवाड़ी केंद्रों पर उनका वजन और लंबाई या ऊंचाई मापी जाती है। इन आंकड़ों को पोषण ट्रैकर पर दर्ज किया जाता है, जिससे बच्चों की पोषण स्थिति पर नजर रखी जा सके। चिन्हित बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण, पोषण परामर्श और आवश्यक देखभाल के साथ जरूरत पड़ने पर स्वास्थ्य विभाग तथा पोषण पुनर्वास केंद्रों से समन्वय कर रेफरल की कार्रवाई की जाती है।

    हर महीने आयोजित दस दिवसीय शारीरिक माप दिवसों में जन्म से छह वर्ष तक के बच्चों की स्क्रीनिंग और स्वास्थ्य जांच की जाती है। कुपोषण की स्थिति वाले चिन्हित बच्चों का आवश्यक कार्यक्रमों के तहत पंजीयन कर स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ा जाता है। मैदानी अमले द्वारा गृहभेंट के माध्यम से बच्चों की स्थिति का फॉलोअप करने के साथ परिवारों को पोषण और स्वास्थ्य संबंधी परामर्श भी दिया जाता है।

    विशेष जनजातीय क्षेत्रों में भी बच्चों और माताओं तक पोषण सेवाओं की पहुंच बढ़ाने पर ध्यान दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री जनजातीय न्याय महाअभियान के अंतर्गत जनजातीय कार्य मंत्रालय के सहयोग से 681 नवीन आंगनवाड़ी केंद्रों का संचालन शुरू किया गया है। सहरिया, बैगा और भारिया जैसे विशेष जनजातीय समूहों के क्षेत्रों में आंगनवाड़ी सेवाओं, पूरक पोषण आहार और बच्चों की वृद्धि तथा पोषण स्थिति की निगरानी को प्राथमिकता दी जा रही है।

    स्वास्थ्य विभाग के साथ समन्वय से नियमित स्क्रीनिंग, स्वास्थ्य जांच, रेफरल और फॉलोअप की व्यवस्था को भी मजबूत किया जा रहा है। नई टेक होम राशन व्यवस्था के जरिए पोषण सेवाओं को अधिक स्थानीय और सतत बनाने की कोशिश की गई है। अगस्त के पहले सप्ताह से शुरू हुई यह व्यवस्था बच्चों और माताओं तक पूरक पोषण आहार की पहुंच मजबूत करने के साथ स्व-सहायता समूहों की भूमिका बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

  • पत्नी की हत्या के बाद बच्चों को तालाब में फेंकने का आरोप, बेटे ने बचकर पुलिस को दी सूचना; बेटी की मौत

    पत्नी की हत्या के बाद बच्चों को तालाब में फेंकने का आरोप, बेटे ने बचकर पुलिस को दी सूचना; बेटी की मौत


    इंदौर इंदौर के कनाड़िया इलाके में सोमवार देर रात एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। झलारिया गांव में रहने वाले 37 वर्षीय ड्राइवर सुनील चौहान पर अपनी पत्नी की हत्या करने और इसके बाद दोनों बच्चों को तालाब में फेंकने का आरोप है। घटना के बाद 10 वर्षीय बेटी माही की मौत हो गई जबकि 8 वर्षीय बेटा अजय किसी तरह तालाब से बाहर निकलने में सफल रहा। बाहर आने के बाद बच्चे ने वहां से गुजर रही पुलिस की एफआरवी टीम को पूरी घटना की जानकारी दी। सूचना मिलते ही पुलिस ने आरोपी की तलाश शुरू कर उसे हिरासत में ले लिया।

    पुलिस के अनुसार सुनील अपनी पत्नी अनीता बाई के साथ झलारिया गांव में किराए के मकान में रहता था। सोमवार रात किसी बात को लेकर दोनों के बीच विवाद हुआ। शुरुआती जांच में पुलिस को दंपती के बीच लंबे समय से चल रहे पारिवारिक विवाद की जानकारी मिली है। पुलिस के मुताबिक पत्नी के अन्य लोगों से बातचीत करने को लेकर दोनों के बीच अक्सर विवाद होता था। हालांकि घटना के पीछे वास्तविक कारण क्या था इसकी पुष्टि विस्तृत जांच और अन्य साक्ष्यों के आधार पर की जाएगी।

    पुलिस का कहना है कि विवाद के बाद आरोपी ने कथित तौर पर पत्नी पर चाकू से हमला किया और गला दबाकर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद वह दोनों बच्चों को लेकर हिंगोनिया गांव के पास स्थित एक तालाब पर पहुंचा। आरोप है कि उसने दोनों बच्चों को तालाब में फेंक दिया। इस दौरान 8 वर्षीय अजय किसी तरह पानी से बाहर निकल आया और अपनी जान बचाई। इसके बाद उसने आसपास मौजूद लोगों और पुलिस टीम को घटना की जानकारी दी। बच्चे से मिली सूचना के आधार पर पुलिस ने तुरंत कार्रवाई शुरू की।

    जानकारी मिलने के बाद पुलिस टीम झलारिया गांव पहुंची लेकिन आरोपी वहां मौजूद नहीं था। पुलिस के मुताबिक वह रात में इलाके से निकलने की तैयारी में था। उसकी तलाश के लिए पुलिस टीम बनाई गई। इसी दौरान पुलिस को वह आसपास घूमता हुआ मिला और उसे हिरासत में ले लिया गया। पूछताछ के दौरान आरोपी ने पत्नी पर हमला करने और बच्चों को तालाब में ले जाने से जुड़ी जानकारी पुलिस को दी। उसकी निशानदेही पर पुलिस ने महिला का शव बरामद किया।

    दूसरी ओर तालाब में बच्ची की तलाश के लिए एसडीआरएफ की टीम को बुलाया गया। रात करीब ढाई बजे टीम ने मौके पर पहुंचकर सर्च ऑपरेशन शुरू किया। कई घंटे तक चले तलाशी अभियान के बाद 10 वर्षीय माही का शव तालाब से बरामद किया गया। शुरुआती तौर पर बच्ची की मौत पानी में डूबने से होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि मौत के वास्तविक कारण की पुष्टि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही होगी।

    महिला के शरीर पर भी चाकू के निशान मिलने की बात सामने आई है। पुलिस गला दबाने के आरोप की भी जांच कर रही है। घटनास्थल से मिले साक्ष्यों को सुरक्षित कर एफएसएल टीम की मदद से जांच की जा रही है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि वारदात किस क्रम में हुई और घटना के पीछे आरोपी की वास्तविक मंशा क्या थी।

    पूरे घटनाक्रम के दौरान एसीपी खजराना थाना प्रभारी कनाड़िया सहित पुलिस टीम एफएसएल और एसडीआरएफ के अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। मृतका और बच्ची के परिजनों को घटना की सूचना दे दी गई है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और आरोपी से पूछताछ के साथ घटनास्थल से जुड़े सभी साक्ष्यों को जुटाया जा रहा है।

    बताया गया है कि सुनील पेशे से ड्राइवर था और कुछ समय पहले ही परिवार के साथ बापू गांधी नगर इलाके से झलारिया में किराए के मकान में रहने आया था। उसके माता पिता और परिवार के अन्य सदस्य लसूड़िया क्षेत्र के बापू गांधी नगर में रहते हैं। अनीता मूल रूप से देवास जिले के कांटाफोड़ की रहने वाली थी। सुनील का परिवार भी कांटाफोड़ से जुड़ा बताया गया है और करीब 17 से 18 वर्षों से इंदौर में रह रहा है। फिलहाल पुलिस मामले के हर पहलू की जांच कर रही है और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट तथा अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • शिक्षकों के लिए बड़ा अपडेट! MP में 12 अक्टूबर से TET, 150 सवालों का होगा पेपर; 21 अगस्त से भरें फॉर्म

    शिक्षकों के लिए बड़ा अपडेट! MP में 12 अक्टूबर से TET, 150 सवालों का होगा पेपर; 21 अगस्त से भरें फॉर्म


    भोपाल । मध्य प्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा TET 2026 को लेकर लंबे समय से चल रही तैयारी अब अगले चरण में पहुंच गई है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कर्मचारी चयन मंडल ESB ने प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर पढ़ा रहे संबंधित शिक्षकों के लिए परीक्षा की नियम पुस्तिका जारी कर दी है। इसके साथ ही परीक्षा की तारीख और आवेदन प्रक्रिया भी तय कर दी गई है। प्रदेश में करीब डेढ़ लाख शिक्षकों के इस परीक्षा में शामिल होने की संभावना है। परीक्षा का आयोजन 12 अक्टूबर 2026 से शुरू होगा जबकि ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 21 अगस्त से शुरू की जाएगी।

    अभ्यर्थी 4 सितंबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। आवेदन में किसी तरह की गलती होने पर संशोधन का अवसर भी दिया गया है। इसके लिए 21 अगस्त से 9 सितंबर तक का समय निर्धारित किया गया है। परीक्षा में शामिल होने वाले उम्मीदवारों को प्रत्येक प्रश्नपत्र के लिए 1000 रुपये परीक्षा शुल्क देना होगा। इसके अलावा आवेदन के माध्यम के हिसाब से पोर्टल या कियोस्क शुल्क भी देना होगा। MP Online पोर्टल के जरिए आवेदन करने पर 60 रुपये और रजिस्टर्ड सिटीजन यूजर के माध्यम से आवेदन करने पर 20 रुपये शुल्क निर्धारित किया गया है। आवेदन में संशोधन के लिए भी अलग शुल्क लगेगा। पहली बार संशोधन करने पर 20 रुपये और अंतिम चरण में संशोधन के लिए 40 रुपये शुल्क तय किया गया है।

    TET की फीस को लेकर शिक्षक संगठनों ने आपत्ति जताई है। शासकीय शिक्षक संगठन मध्यप्रदेश ने वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों से परीक्षा शुल्क लिए जाने का विरोध किया है। संगठन की ओर से आवेदन और परीक्षा शुल्क माफ करने के साथ ऑनलाइन परीक्षा की जगह ऑफलाइन परीक्षा कराने की मांग की गई है। इसके अलावा शिक्षकों को परीक्षा की तैयारी के लिए विशेष अध्ययन अवकाश देने और ग्रामीण क्षेत्रों में सुविधाजनक परीक्षा केंद्र बनाए जाने की मांग भी उठाई गई है।

    प्राथमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा में कुल 150 प्रश्न पूछे जाएंगे और प्रत्येक प्रश्न एक अंक का होगा। इस तरह परीक्षा कुल 150 अंकों की होगी। उम्मीदवारों को प्रश्नपत्र हल करने के लिए 2 घंटे 30 मिनट का समय मिलेगा। खास बात यह है कि परीक्षा में नकारात्मक अंक यानी नेगेटिव मार्किंग नहीं होगी। गलत उत्तर देने पर उम्मीदवार के प्राप्त अंकों में कटौती नहीं की जाएगी।

    परीक्षा में सफलता के लिए भी वर्ग के अनुसार न्यूनतम अंक निर्धारित किए गए हैं। अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति अन्य पिछड़ा वर्ग दिव्यांग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के अभ्यर्थियों को न्यूनतम 50 प्रतिशत अंक हासिल करने होंगे। वहीं अन्य वर्ग के उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम 60 प्रतिशत अंक जरूरी होंगे। माध्यमिक शिक्षक पात्रता परीक्षा में भी प्रत्येक प्रश्न एक अंक का रहेगा और नेगेटिव मार्किंग नहीं होगी। परीक्षा की अवधि 2 घंटे 30 मिनट निर्धारित है।

    सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पालन में प्राथमिक और माध्यमिक स्तर पर कार्यरत संबंधित शिक्षकों के लिए पात्रता परीक्षा पास करना जरूरी किया गया है। नियमों के तहत पात्र शिक्षकों को 31 अगस्त 2028 तक परीक्षा उत्तीर्ण करनी होगी। प्राथमिक स्तर के सरकारी स्कूलों में कार्यरत सहायक शिक्षक प्राथमिक शिक्षक सहायक अध्यापक संविदा शाला शिक्षक वर्ग 3 प्रयोगशाला सहायक प्राथमिक शिक्षक विज्ञान सहित संबंधित श्रेणियों के शिक्षक परीक्षा में शामिल हो सकेंगे।

    परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा और अनुशासन को लेकर भी सख्त नियम लागू रहेंगे। मोबाइल फोन कैलकुलेटर स्मार्ट वॉच ब्लूटूथ डिवाइस ईयरफोन डिजिटल वॉच रिकॉर्डिंग उपकरण पेजर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान परीक्षा केंद्र में ले जाना प्रतिबंधित रहेगा। नकल अनुचित साधनों का इस्तेमाल फर्जी पहचान या किसी दूसरे अभ्यर्थी की जगह परीक्षा देने जैसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जा सकती है।

    दिव्यांग अभ्यर्थियों को नियमों के अनुसार अतिरिक्त समय और Scribe यानी लेखन सहायक की सुविधा दी जाएगी। इसके लिए निर्धारित पात्रता और जरूरी शर्तों का पालन करना होगा। परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड कर्मचारी चयन मंडल की वेबसाइट से डाउनलोड किया जा सकेगा। इसमें परीक्षा केंद्र तारीख और समय समेत जरूरी जानकारी उपलब्ध होगी। परीक्षा के बाद रिजल्ट और विषयवार मॉडल आंसर भी ऑनलाइन जारी किए जाएंगे।

    अभ्यर्थियों को प्रश्नों और उत्तरों को लेकर आपत्ति दर्ज कराने का अवसर भी मिलेगा। प्राप्त आपत्तियों पर विषय विशेषज्ञों की समिति विचार करेगी। यदि किसी प्रश्न को निरस्त किया जाता है तो उसके अंकों की गणना नियम पुस्तिका में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार की जाएगी। ऐसे में परीक्षा में शामिल होने वाले शिक्षकों के लिए आवेदन की तारीख से लेकर परीक्षा केंद्र के नियम और न्यूनतम उत्तीर्ण अंक तक सभी जानकारियों को ध्यान से समझना जरूरी होगा।

  • निवेश और रोजगार को मिलेगी नई रफ्तार, मध्य प्रदेश में 11 नए इंडस्ट्रियल पार्क का प्रस्ताव; ₹8,144 करोड़ होंगे खर्च

    निवेश और रोजगार को मिलेगी नई रफ्तार, मध्य प्रदेश में 11 नए इंडस्ट्रियल पार्क का प्रस्ताव; ₹8,144 करोड़ होंगे खर्च


    भोपाल । मध्य प्रदेश को देश के प्रमुख औद्योगिक और निवेश केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में मोहन सरकार ने एक बड़ा कदम आगे बढ़ाया है। नई दिल्ली में राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास एवं कार्यान्वयन ट्रस्ट NICDIT की तीसरी एपेक्स मॉनिटरिंग अथॉरिटी की बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य में औद्योगिक विस्तार का रोडमैप सामने रखा। केंद्र सरकार की भव्य यानी BHAVYA योजना के तहत मध्य प्रदेश में 11 नए आधुनिक औद्योगिक पार्क विकसित करने का प्रस्ताव रखा गया है। इन परियोजनाओं पर करीब 8144.35 करोड़ रुपये का निवेश प्रस्तावित है और इसके जरिए 9 हजार एकड़ से अधिक क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार किया जाएगा।

    सरकार का जोर केवल नए उद्योग लगाने तक सीमित नहीं है बल्कि मध्य प्रदेश के अलग अलग हिस्सों में संतुलित औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने पर भी है। प्रस्तावित औद्योगिक पार्कों को रणनीतिक रूप से अलग अलग शहरों और क्षेत्रों में विकसित किया जाएगा ताकि रोजगार और निवेश के अवसर कुछ चुनिंदा शहरों तक सीमित न रहें। इन पार्कों में प्लग एंड प्ले मॉडल के तहत कंपनियों को पहले से तैयार बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। इसका फायदा यह होगा कि निवेश करने वाली कंपनियों को जमीन और आधारभूत ढांचे से जुड़ी शुरुआती अड़चनों को कम करने में मदद मिलेगी और वे अपेक्षाकृत तेजी से उत्पादन या अपनी व्यावसायिक गतिविधियां शुरू कर सकेंगी।

    प्रस्तावित 11 औद्योगिक पार्क उज्जैन के अवंतिका इंडस्ट्रियल सेंटर धार के भेंसोला देवास और शाजापुर के पिपलरावांन पालीकालन रतलाम के पलसोड़ी सीहोर के आष्टा इंडस्ट्रियल क्लस्टर सागर के मसवासी ग्रांट गुना के चैनपुरा ग्वालियर के मोहना जबलपुर के धरमपुरा कटनी के सिमरा और रीवा के शिवसागर में विकसित किए जाने का प्रस्ताव है। इन औद्योगिक क्षेत्रों के जरिए अलग अलग सेक्टर में निवेश को बढ़ावा देने की तैयारी है।

    धार के भेंसोला में प्रस्तावित पार्क को खास तौर पर टेक्सटाइल सेक्टर से जोड़कर विकसित किया जाएगा। यह क्षेत्र पहले से मौजूद पीएम मित्रा पार्क के विस्तार के रूप में काम करेगा। इसके अलावा दूसरे औद्योगिक पार्कों में फार्मा ऑटोमोबाइल रिन्यूएबल एनर्जी सेमीकंडक्टर और आईटी एवं आईटीईएस जैसे तेजी से बढ़ते क्षेत्रों को प्रोत्साहन देने की योजना है। इससे प्रदेश में पारंपरिक उद्योगों के साथ नए दौर की तकनीक आधारित इंडस्ट्री को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

    औद्योगिक विकास के साथ सरकार ने महिला कर्मचारियों की सुरक्षा और सुविधाओं को भी योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया है। प्रस्तावित औद्योगिक क्षेत्रों में सीसीटीवी निगरानी डे केयर सेंटर स्वास्थ्य सुविधाएं आधुनिक कैंटीन और विशेष हॉस्टल जैसी व्यवस्थाएं विकसित करने पर जोर दिया गया है। इसका उद्देश्य कामकाजी महिलाओं के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक माहौल तैयार करना है ताकि उद्योगों में उनकी भागीदारी बढ़ाई जा सके।

    नई दिल्ली में हुई उच्च स्तरीय बैठक में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल केंद्रीय जहाजरानी मंत्री सर्बानंद सोनोवाल नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी सहित कई राज्यों के मुख्यमंत्री और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। बैठक में मध्य प्रदेश के औद्योगिक विस्तार और निवेश को लेकर प्रस्तुत किए गए विजन पर चर्चा हुई। सरकार का मानना है कि केंद्र और राज्य के बेहतर समन्वय से इन परियोजनाओं को गति मिलेगी और आने वाले समय में मध्य प्रदेश में नए उद्योग निवेश और रोजगार के बड़े अवसर तैयार हो सकते हैं।

  • भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने फहराया तिरंगा, परेड की सलामी के साथ दोहराया विकास का संकल्प

    भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने फहराया तिरंगा, परेड की सलामी के साथ दोहराया विकास का संकल्प


    मध्य प्रदेश
    : में स्वतंत्रता दिवस का राज्य स्तरीय मुख्य समारोह भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में आयोजित किया गया। समारोह में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने तिरंगा फहराया और इसके बाद परेड की सलामी ली। इस दौरान बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद रहे और पूरे आयोजन के लिए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ध्वजारोहण के बाद देश की आजादी के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले अमर शहीदों को नमन किया। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर उन्होंने विकसित और आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के निर्माण का संकल्प दोहराया।

    लाल परेड ग्राउंड में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में स्वतंत्रता दिवस से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम हुए। मुख्यमंत्री की मौजूदगी में ध्वजारोहण और परेड की सलामी समारोह के प्रमुख कार्यक्रम रहे। आयोजन स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए विशेष इंतजाम किए गए थे।

    मुख्यमंत्री ने परेड की सलामी लेकर समारोह में शामिल दलों का अभिवादन स्वीकार किया। स्वतंत्रता दिवस के राज्य स्तरीय आयोजन में परेड को विशेष महत्व दिया गया। अनुशासन और राष्ट्रीय भावना से जुड़े इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।

    भोपाल में आयोजित इस समारोह के दौरान नागरिकों की मौजूदगी भी देखने को मिली। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राज्य के मुख्य समारोह में शामिल होने के लिए लोग लाल परेड ग्राउंड पहुंचे। कार्यक्रम को व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रखी गई।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस अवसर पर शहीदों के योगदान को याद किया और उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया। देश की स्वतंत्रता के लिए बलिदान देने वाले वीरों को नमन करते हुए उन्होंने प्रदेश के विकास की दिशा में आगे बढ़ने का संकल्प दोहराया।

    विकसित और आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के निर्माण का संकल्प मुख्यमंत्री के संबोधन और कार्यक्रम का प्रमुख हिस्सा रहा। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राज्य के विकास को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की गई।

    लाल परेड ग्राउंड में आयोजित समारोह में तिरंगा फहराए जाने के बाद परेड की सलामी का कार्यक्रम हुआ। राज्य स्तरीय मुख्य समारोह होने के कारण यहां सुरक्षा और व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया गया।

    स्वतंत्रता दिवस के मौके पर भोपाल में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान और देश के लिए बलिदान देने वाले शहीदों को याद किया गया। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों के साथ स्वतंत्रता दिवस का यह महत्वपूर्ण अवसर साझा किया।

    समारोह में बड़ी संख्या में नागरिकों की मौजूदगी रही। आयोजन स्थल और आसपास सुरक्षा के इंतजाम किए गए थे। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने तिरंगा फहराने के बाद परेड की सलामी ली और अमर शहीदों को नमन करते हुए विकसित एवं आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के निर्माण का संकल्प दोहराया।

  • मध्य प्रदेश में OBC आरक्षण मामले की हाई कोर्ट में सुनवाई पूरी, अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा, हजारों अभ्यर्थियों की नजर

    मध्य प्रदेश में OBC आरक्षण मामले की हाई कोर्ट में सुनवाई पूरी, अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा, हजारों अभ्यर्थियों की नजर

    मध्य प्रदेश: में अन्य पिछड़ा वर्ग यानी OBC आरक्षण से जुड़े लंबे समय से लंबित मामले में हाई कोर्ट में सुनवाई पूरी हो गई है। अदालत ने मामले पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। अब इस प्रकरण में न्यायालय के अंतिम निर्णय का इंतजार किया जा रहा है। फैसले का असर OBC वर्ग के अभ्यर्थियों और आरक्षण से जुड़े विभिन्न मामलों पर पड़ने की संभावना है।

    यह मामला वर्ष 2019 से न्यायिक प्रक्रिया में लंबित बताया जा रहा है। करीब सात साल से चल रहे इस प्रकरण के कारण OBC वर्ग के अभ्यर्थियों के बीच लगातार असमंजस की स्थिति बनी हुई है। सुनवाई पूरी होने के बाद अब सभी पक्षों की निगाहें अदालत के निर्णय पर टिकी हैं।

    मामले की सुनवाई के दौरान OBC आरक्षण से संबंधित पक्षों ने अपनी दलीलें और तर्क न्यायालय के सामने रखे। OBC महासभा की ओर से भी इस प्रकरण को सामाजिक न्याय और पिछड़े वर्ग के हितों से जुड़ा महत्वपूर्ण मामला बताया गया है। संगठन का कहना है कि लंबे समय से लंबित रहने के कारण बड़ी संख्या में अभ्यर्थी प्रभावित हो रहे हैं।

    OBC महासभा के संस्थापक अध्यक्ष विजय कुमार ने कहा कि जबलपुर हाई कोर्ट में लंबित प्रकरण पर सुनवाई पूरी हो चुकी है और न्यायालय ने फैसला सुरक्षित रखा है। उनके अनुसार, OBC वर्ग से जुड़े पक्षकारों और अधिवक्ताओं ने मामले में अपनी बात रखी है। अब न्यायालय के निर्णय का इंतजार है।

    मामले से जुड़े पक्ष की ओर से दावा किया गया है कि लगभग 80 से 90 हजार OBC वर्ग के बच्चे और अभ्यर्थी इस प्रकरण से प्रभावित हैं। लंबे समय से आरक्षण व्यवस्था को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने के कारण उनकी शैक्षणिक और रोजगार संबंधी संभावनाओं पर भी अनिश्चितता बनी हुई है।

    आरक्षण का मुद्दा मध्य प्रदेश में लंबे समय से राजनीतिक, सामाजिक और न्यायिक चर्चा का विषय रहा है। OBC वर्ग के लिए आरक्षण से संबंधित विभिन्न नियुक्तियों और शैक्षणिक अवसरों में स्थिति स्पष्ट होने को लेकर अभ्यर्थियों की नजर न्यायालय के निर्णय पर रहती है। ऐसे में फैसला सुरक्षित होने के बाद उम्मीद की जा रही है कि आगे की स्थिति न्यायिक निर्णय से स्पष्ट होगी।

    OBC महासभा ने न्यायालय से जल्द फैसला सुनाए जाने की अपील की है। संगठन का कहना है कि मामले के लंबे समय से लंबित रहने के कारण अभ्यर्थियों को अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है। फैसला आने के बाद आरक्षण से संबंधित कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर स्थिति साफ हो सकेगी।

    फिलहाल हाई कोर्ट ने सुनवाई पूरी करने के बाद निर्णय सुरक्षित रखा है। अदालत कब तक फैसला सुनाएगी, इसकी निश्चित तारीख की जानकारी सामने नहीं आई है। अंतिम निर्णय आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि OBC आरक्षण से जुड़े लंबित विवाद पर न्यायालय का रुख क्या रहता है और उसका अभ्यर्थियों पर किस प्रकार प्रभाव पड़ेगा।

    करीब सात वर्षों से चल रहे इस मामले में सुनवाई पूरी होना अपने आप में महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। अब OBC वर्ग के अभ्यर्थियों, संगठनों और संबंधित पक्षों की निगाहें हाई कोर्ट के फैसले पर केंद्रित हैं। निर्णय आने के बाद ही आरक्षण व्यवस्था से जुड़े आगे के कदम और प्रभावित अभ्यर्थियों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

  • स्थानीय निकायों को आत्मनिर्भर बनाने की तैयारी, जनता से सुझाव लेने के लिए जल्द शुरू होगा पोर्टल

    स्थानीय निकायों को आत्मनिर्भर बनाने की तैयारी, जनता से सुझाव लेने के लिए जल्द शुरू होगा पोर्टल

    उज्जैन। मध्यप्रदेश के पंचायत और नगरीय निकायों को आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में राज्य सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। छठे मध्यप्रदेश वित्त आयोग के अध्यक्ष जयभान सिंह पवैया ने बताया कि जल्द ही एक ऑनलाइन पोर्टल शुरू किया जाएगा, जिसके माध्यम से आम नागरिक भी स्थानीय निकायों के विकास और वित्तीय मजबूती के लिए अपने सुझाव दे सकेंगे। फिलहाल आयोग संभाग स्तर पर जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से सुझाव जुटा रहा है।

    उज्जैन प्रवास के दौरान सर्किट हाउस में मीडिया से बातचीत करते हुए पवैया ने बताया कि आयोग अब तक छह संभागों का दौरा कर चुका है। पहले चरण में सांसदों, विधायकों, नगरीय निकायों और पंचायतों के प्रतिनिधियों तथा प्रशासनिक अधिकारियों से सुझाव लिए जा रहे हैं। सभी नौ संभागों से प्राप्त सुझावों के आधार पर आयोग अपनी रिपोर्ट तैयार करेगा, जिसे राज्यपाल को सौंपा जाएगा। इसी रिपोर्ट के आधार पर राज्य सरकार स्थानीय निकायों को वित्तीय आवंटन करेगी।

    उन्होंने बताया कि अब तक कई उपयोगी सुझाव मिले हैं। इनमें प्रत्येक पंचायत और नगरीय निकाय में सोलर एनर्जी प्लांट स्थापित करने का सुझाव विशेष रूप से प्रभावी माना गया है। उनका कहना है कि वर्तमान में स्थानीय निकायों की बड़ी राशि स्ट्रीट लाइट और नल-जल योजनाओं के बिजली बिल पर खर्च होती है। यदि निकाय स्वयं बिजली उत्पादन करें तो न केवल उनका खर्च कम होगा, बल्कि अतिरिक्त बिजली बेचकर आय भी अर्जित कर सकेंगे। उन्होंने इंदौर नगर निगम का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां सोलर ऊर्जा और कचरे से बायोगैस बनाकर आय बढ़ाने की दिशा में सफल प्रयास किए जा रहे हैं।

    केंद्रीय वित्त आयोग की अनुदान राशि में कटौती के सवाल पर पवैया ने स्पष्ट किया कि फंड में कमी नहीं की गई है। बल्कि पहले की तुलना में अधिक राशि उपलब्ध कराई जा रही है। हालांकि अब अनुदान प्राप्त करने के लिए निकायों के कार्यों की वार्षिक ऑडिट रिपोर्ट अनिवार्य कर दी गई है, जिससे पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी।

    उन्होंने बताया कि जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से सुझाव लेने के बाद पंचायत और जनपद स्तर पर भी संवाद किया जाएगा। इसके बाद आम नागरिकों के सुझाव प्राप्त करने के लिए पोर्टल शुरू किया जाएगा। साथ ही आर्थिक विशेषज्ञों से भी परामर्श लिया जाएगा, ताकि स्थानीय निकायों को आत्मनिर्भर बनाने और विकास कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने वाली प्रभावी सिफारिशें तैयार की जा सकें।

    बैठक के दौरान कई अन्य सुझाव भी सामने आए। नागदा-खाचरौद विधायक डॉ. तेजबहादुर सिंह चौहान ने ग्रामीण क्षेत्रों में बारिश के दौरान आवश्यक कच्चे कार्यों, जैसे मुरम और चूरी डालने की अनुमति देने का प्रस्ताव रखा। वहीं कांग्रेस विधायक दिनेश जैन बोस और महेश परमार ने भी आयोग के समक्ष अपने सुझाव प्रस्तुत किए।

  • प्रमोशन में आरक्षण पर नई बहस, सरकार के डेटा को कोर्ट में चुनौती दे सकता है सामान्‍य वर्ग

    प्रमोशन में आरक्षण पर नई बहस, सरकार के डेटा को कोर्ट में चुनौती दे सकता है सामान्‍य वर्ग

    जबलपुर। मध्य प्रदेश में प्रमोशन में आरक्षण का मामला एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। फिलहाल हाईकोर्ट की विशेष खंडपीठ ने स्पष्ट किया है कि इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले की स्थिति साफ होने के बाद ही आगे सुनवाई होगी। अदालत ने सरकार और सभी पक्षों को शीर्ष अदालत में शीघ्र सुनवाई का आग्रह करने की सलाह दी है।

    हालांकि न्यायिक प्रक्रिया फिलहाल रुकी हुई है, लेकिन दोनों पक्ष अपनी कानूनी तैयारियों में जुटे हैं। जानकारी के अनुसार, अगली सुनवाई में सरकार द्वारा प्रस्तुत क्वांटिफिएबल डेटा सबसे बड़ा विवाद का विषय बन सकता है।

    सरकार के आंकड़ों पर उठेंगे सवाल
    सामान्य वर्ग की ओर से अदालत में यह तर्क रखा जाएगा कि कई सरकारी विभागों में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) का प्रतिनिधित्व पहले से पर्याप्त है। ऐसे में पदोन्नति में आरक्षण जारी रखने का आधार क्या है, इस पर सरकार से जवाब मांगा जाएगा। सूत्रों के मुताबिक, सामान्य वर्ग विभिन्न विभागों के आंकड़ों के जरिए यह साबित करने की तैयारी में है कि जहां पर्याप्त प्रतिनिधित्व मौजूद है, वहां भी आरक्षण का लाभ जारी रखा गया।

    X और Y फैक्टर पर रहेगा फोकस
    मामले में सबसे अहम मुद्दा सरकार द्वारा तय किए गए X और Y फैक्टर हैं, जिनके आधार पर प्रमोशन में आरक्षण का प्रतिशत निर्धारित किया गया है।

    SC वर्ग के लिए: कुल पद × (16 × X) ÷ 100
    ST वर्ग के लिए: कुल पद × (20 × Y) ÷ 100

    यदि X या Y का मान 1 रखा जाता है तो पूरा आरक्षण लागू होता है, जबकि कम मान होने पर आरक्षण का प्रतिशत भी घट जाता है। सामान्य वर्ग का आरोप है कि कई विभागों में पर्याप्त प्रतिनिधित्व होने के बावजूद X और Y का मान कम नहीं किया गया, जिससे आरक्षण का प्रतिशत अधिक बना रहा।

    प्रक्रिया पर भी उठेंगे सवाल
    याचिकाकर्ताओं का कहना है कि X और Y तय करने के लिए कोई स्पष्ट और समान मानक नहीं अपनाया गया। समान परिस्थितियों वाले विभागों में अलग-अलग मान निर्धारित किए गए, जिससे पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं।

    प्रशासनिक दक्षता भी बनेगी मुद्दा

    अगली सुनवाई में प्रशासनिक दक्षता का मुद्दा भी प्रमुख रहेगा। सामान्य वर्ग का पक्ष है कि केवल एसीआर (वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट) के आधार पर दक्षता का आकलन पर्याप्त नहीं माना जा सकता। उनका तर्क है कि संविधान के अनुच्छेद-335 के अनुरूप कार्यक्षमता का व्यापक मूल्यांकन होना चाहिए।

    पांच साल तक एक ही फॉर्मूले पर आपत्ति

    सरकार द्वारा X और Y फैक्टर को पांच वर्ष तक लागू रखने के प्रावधान पर भी सवाल उठाए जाएंगे। सामान्य वर्ग का कहना है कि प्रतिनिधित्व की स्थिति समय के साथ बदलती रहती है, इसलिए पुराने आंकड़ों के आधार पर लंबे समय तक एक ही व्यवस्था लागू रखना उचित नहीं है।

    सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी नजर
    फिलहाल पूरे मामले की दिशा सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर निर्भर है। हाईकोर्ट ने भी संकेत दिया है कि शीर्ष अदालत की स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही आगे की कार्रवाई होगी। हालांकि, माना जा रहा है कि अगली सुनवाई में सरकार के डेटा, X-Y फैक्टर और प्रशासनिक दक्षता जैसे मुद्दों पर विस्तृत और अहम बहस देखने को मिल सकती है, जिसका असर हजारों सरकारी कर्मचारियों पर पड़ सकता है।

  • एमपी में बस यात्रा हुई महंगी, परिवहन विभाग ने नई किराया दरें लागू कीं, जानिए किस श्रेणी की बस में कितना लगेगा किराया

    एमपी में बस यात्रा हुई महंगी, परिवहन विभाग ने नई किराया दरें लागू कीं, जानिए किस श्रेणी की बस में कितना लगेगा किराया


    मध्य प्रदेश।  में बस यात्रियों को अब सफर के लिए पहले की तुलना में अधिक किराया चुकाना होगा। राज्य के परिवहन विभाग ने मंजिली बसों के लिए नया अधिकतम यात्री किराया निर्धारित करते हुए संशोधित दरों की अधिसूचना जारी कर दी है। नए नियमों के अनुसार सामान्य बसों में अब अधिकतम मूल किराया 2 रुपये प्रति यात्री प्रति किलोमीटर होगा, जबकि न्यूनतम टिकट मूल्य 10 रुपये तय किया गया है। इस निर्णय के बाद प्रदेशभर में बस यात्रा की लागत बढ़ जाएगी और इसका सीधा असर रोजाना सफर करने वाले यात्रियों पर पड़ेगा।

    परिवहन विभाग के अनुसार किराया संशोधन विभिन्न श्रेणियों की बस सेवाओं को ध्यान में रखकर किया गया है। सामान्य बसों के अलावा डीलक्स, स्लीपर, वातानुकूलित और सुपर लग्जरी बसों के लिए भी अलग-अलग अधिकतम किराया निर्धारित किया गया है। सरकार का कहना है कि संशोधित दरों का उद्देश्य परिवहन व्यवस्था को संतुलित बनाए रखना और बढ़ती परिचालन लागत के अनुरूप किराया संरचना तैयार करना है।

    नई व्यवस्था के तहत रात्रिकालीन सामान्य बस सेवा के लिए सामान्य किराए की तुलना में 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लिया जा सकेगा। वहीं नॉन-एसी डीलक्स बसों में अधिकतम 25 प्रतिशत, स्लीपर बसों में 40 प्रतिशत, एसी डीलक्स बसों में 50 प्रतिशत तथा सुपर लग्जरी एसी कोच में 75 प्रतिशत तक अधिक किराया लिया जा सकेगा। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि डीलक्स, स्लीपर और लग्जरी बसों पर अलग से नाइट चार्ज लागू नहीं होगा। इसी प्रकार एक्सप्रेस बस सेवाओं के लिए भी अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा।

    राज्य में बस किराया बढ़ाने का निर्णय ऐसे समय लिया गया है जब निजी बस संचालकों ने बढ़ती लागत और परिचालन संबंधी चुनौतियों का हवाला देते हुए किराया संशोधन की मांग की थी। बस ऑपरेटरों की ओर से हड़ताल की चेतावनी दिए जाने के बाद सरकार ने किराया ढांचे की समीक्षा की और संशोधित दरों को मंजूरी दी। इसके बाद परिवहन विभाग ने नई दरों का आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर दिया।

    विशेषज्ञों का मानना है कि डीजल, रखरखाव, स्पेयर पार्ट्स और अन्य परिचालन खर्चों में लगातार वृद्धि के कारण परिवहन क्षेत्र पर आर्थिक दबाव बढ़ा है। ऐसे में किराया संशोधन को परिवहन सेवाओं के संचालन से जोड़कर देखा जा रहा है। दूसरी ओर यात्रियों का मानना है कि बढ़े हुए किराए से दैनिक यात्रा का खर्च और बढ़ेगा, विशेषकर उन लोगों पर इसका अधिक प्रभाव पड़ेगा जो नियमित रूप से बसों से आवागमन करते हैं।

    परिवहन विभाग ने कहा है कि नई किराया दरें निर्धारित नियमों के अनुसार लागू होंगी और बस संचालकों को इन्हीं अधिकतम दरों का पालन करना होगा। विभाग समय-समय पर किराया व्यवस्था की समीक्षा भी करता रहेगा ताकि यात्रियों और परिवहन संचालकों दोनों के हितों के बीच संतुलन बनाए रखा जा सके। आने वाले दिनों में नई दरों का प्रभाव प्रदेश के सार्वजनिक परिवहन और यात्रियों के खर्च पर साफ दिखाई देने की संभावना है।