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  • मध्य प्रदेश स्थापना दिवस पर किस जिले में पहुंचेंगे कौन मंत्री, शासन ने जारी की सूची….

    मध्य प्रदेश स्थापना दिवस पर किस जिले में पहुंचेंगे कौन मंत्री, शासन ने जारी की सूची….

    मध्य प्रदेश: के स्थापना दिवस के अवसर पर 1 नवंबर 2026 को प्रदेशभर में जिला स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए राज्य शासन ने मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों के जिलों का निर्धारण कर दिया है। जारी व्यवस्था के अनुसार मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भोपाल में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होंगे, जबकि विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर को ग्वालियर की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके साथ ही प्रदेश के अन्य मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों को भी अलग-अलग जिलों में आयोजित कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए नामांकित किया गया है।

    राज्य शासन की ओर से जारी नामांकन के तहत उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा जबलपुर में स्थापना दिवस कार्यक्रम में शामिल होंगे। उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला रीवा में आयोजित कार्यक्रम में भाग लेंगे। वहीं हेमंत खंडेलवाल को बैतूल में कार्यक्रम की जिम्मेदारी दी गई है। इन नामांकनों के माध्यम से जिला स्तर पर होने वाले समारोहों में प्रदेश सरकार का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाएगा।

    मंत्री कुमार विजय शाह खंडवा में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होंगे, जबकि कैलाश विजयवर्गीय इंदौर में स्थापना दिवस समारोह में भाग लेंगे। प्रहलाद सिंह पटेल को नरसिंहपुर और तुलसीराम सिलावट को देवास में होने वाले कार्यक्रम के लिए नामांकित किया गया है। इस तरह प्रमुख जिलों में कार्यक्रमों के लिए अलग-अलग जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति तय की गई है।

    मध्य प्रदेश का स्थापना दिवस हर वर्ष 1 नवंबर को मनाया जाता है। इसी दिन वर्ष 1956 में राज्य का गठन हुआ था। स्थापना दिवस के मौके पर प्रदेश के सभी जिलों में स्थानीय स्तर पर कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इन आयोजनों के जरिए राज्य के गठन, विकास यात्रा और सांस्कृतिक पहचान से जुड़े पहलुओं को सामने रखा जाता है।

    इस वर्ष भी जिला स्तरीय आयोजनों में मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों की भागीदारी के लिए शासन ने पहले से जिम्मेदारियां निर्धारित की हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की भोपाल में उपस्थिति के साथ राजधानी में मुख्य आयोजन होगा, जबकि अन्य जिलों में नामांकित प्रतिनिधि कार्यक्रमों में शामिल होंगे। इससे विभिन्न जिलों में आयोजित समारोहों में शासन की ओर से प्रतिनिधित्व रहेगा।

    जारी जानकारी में कुछ प्रमुख जिलों के लिए नामांकन का उल्लेख किया गया है। हालांकि उपलब्ध विवरण में सभी जिलों और मंत्रियों की पूरी सूची शामिल नहीं है। इसलिए शेष जिलों में किस मंत्री को भेजा गया है, इसकी जानकारी इस सूची से स्पष्ट नहीं होती। फिलहाल भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, रीवा, बैतूल, खंडवा, इंदौर, नरसिंहपुर और देवास के लिए नामांकित प्रतिनिधियों के नाम सामने आए हैं।

    स्थापना दिवस कार्यक्रमों को लेकर जिला स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं। एक नवंबर को होने वाले समारोहों में संबंधित जिलों के नामांकित मंत्री और जनप्रतिनिधि भाग लेंगे। शासन के इस निर्णय के बाद अब इन जिलों में कार्यक्रमों के दौरान संबंधित प्रतिनिधियों की मौजूदगी रहेगी।
  • नरवर किले को ASI के अधीन करने की पहल, रणथंभौर-कूनो से खजुराहो तक पर्यटन सर्किट बनाने का प्रस्ताव

    नरवर किले को ASI के अधीन करने की पहल, रणथंभौर-कूनो से खजुराहो तक पर्यटन सर्किट बनाने का प्रस्ताव

    मध्य प्रदेश: के शिवपुरी जिले में स्थित ऐतिहासिक नरवर किले के संरक्षण और पर्यटन विकास की दिशा में पहल की गई है। शिवपुरी-गुना क्षेत्र के सांसद और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने किले को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के अधीन करने, यहां तक पहुंचने के लिए बेहतर सड़क बनाने और इसे प्रमुख पर्यटन स्थलों से जोड़ने के प्रस्ताव पर कार्रवाई की अनुशंसा की है। इस संबंध में उन्होंने केंद्रीय संस्कृति मंत्री जी. किशन रेड्डी और मध्य प्रदेश की पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री उषा ठाकुर को अर्धशासकीय पत्र भेजे हैं। यह पहल भाजपा प्रदेश कार्यसमिति सदस्य संदीप माहेश्वरी और नगर परिषद अध्यक्ष पद्मा संदीप माहेश्वरी की ओर से उठाई गई मांगों के बाद सामने आई है।

    नरवर का किला अपनी ऐतिहासिक और धार्मिक मान्यताओं के कारण क्षेत्र की महत्वपूर्ण धरोहर माना जाता है। इससे राजा नल और रानी दमयंती की कथाएं, प्राचीन राजवंशों का इतिहास और ढोला-मारू की प्रेमकथा जैसी लोकपरंपराएं जुड़ी हुई हैं। किले को लेकर प्रचलित मान्यताओं में इसे राजा नल की राजधानी नलपुर से भी जोड़ा जाता है। यहां पसरा देवी और लोढ़ी माता से संबंधित धार्मिक आस्थाएं भी स्थानीय परंपरा का हिस्सा हैं। इन ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक पहलुओं के चलते किले के संरक्षण और व्यवस्थित पर्यटन विकास की मांग लंबे समय से उठती रही है।

    नरवर किले का इतिहास अलग-अलग राजवंशों और शासकों से जुड़ा रहा है। प्राचीन काल में इस क्षेत्र पर नाग राजाओं का शासन होने के उल्लेख मिलते हैं। बाद के दौर में कछवाह राजपूतों ने किले का पुनर्निर्माण कराया। इसके बाद यहां परिहार और तोमर राजपूतों का अधिकार रहा। 16वीं शताब्दी की शुरुआत में सिकंदर लोदी ने किले पर कब्जा किया। आगे चलकर मुगल सम्राट अकबर के शासनकाल में यह मालवा सूबे के प्रशासनिक ढांचे का हिस्सा बना। 19वीं शताब्दी की शुरुआत में मराठा सिंधिया राजवंश ने इस पर अधिकार कर लिया। किले के ऐतिहासिक भवनों में कचहरी महल भी शामिल है, जिसके जीर्णोद्धार का उल्लेख वर्ष 1925 में महाराजा माधवराव सिंधिया के समय से जुड़ा है।

    किला विंध्याचल पर्वत श्रृंखला की एक ऊंची पहाड़ी पर स्थित है। कस्बे से इसकी खड़ी ऊंचाई लगभग 500 फीट बताई जाती है, जबकि समुद्र तल से इसकी ऊंचाई करीब 1,600 फीट है। इसकी भौगोलिक स्थिति और प्राचीन संरचना इसे विशेष पहचान देती है, लेकिन ऊंचाई पर स्थित होने के कारण पर्यटकों के लिए पहुंच आसान बनाना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बेहतर पहुंच मार्ग, नियमित रखरखाव और आवश्यक पर्यटक सुविधाओं की कमी लंबे समय से स्थानीय स्तर पर चिंता का विषय रही है। किले तक सड़क बनाने के लिए वन विभाग और लोक निर्माण विभाग के समन्वय की जरूरत भी उठाई जाती रही है।

    किले को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीन करने का प्रस्ताव संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसका उद्देश्य ऐतिहासिक संरचनाओं का व्यवस्थित रखरखाव करना और पुरातात्विक महत्व के अनुरूप उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना है। हालांकि, प्रस्ताव पर संबंधित विभागों की नियमानुसार कार्रवाई और निर्णय के बाद ही इसके क्रियान्वयन की स्थिति स्पष्ट होगी।

    पर्यटन विकास के लिए रणथंभौर, कूनो, शिवपुरी, नरवर, ओरछा और खजुराहो को जोड़कर एक सर्किट विकसित करने का सुझाव दिया गया है। इन स्थलों को एक मार्ग से जोड़ने पर पर्यटकों को वन्यजीव पर्यटन, ऐतिहासिक धरोहरों और सांस्कृतिक स्थलों को एक ही यात्रा में देखने का अवसर मिल सकता है। इससे नरवर को भी व्यापक पर्यटन मानचित्र पर पहचान मिलने की संभावना है।

    पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को लाभ पहुंच सकता है। गाइड सेवा, होटल, होम-स्टे, परिवहन, खानपान और अन्य पर्यटन सुविधाओं से जुड़े रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं। स्थानीय दुकानदारों और छोटे कारोबारियों को भी इसका फायदा मिल सकता है। फिलहाल, किले के संरक्षण, पहुंच मार्ग और पर्यटन सर्किट से जोड़ने के प्रस्तावों पर संबंधित स्तरों पर आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।

  • मध्य प्रदेश के सरकारी पोर्टल्स पर साइबर हमले का खतरा, NIC का अलर्ट जारी, विशेषज्ञों की टीमें 24 घंटे निगरानी में जुटीं

    मध्य प्रदेश के सरकारी पोर्टल्स पर साइबर हमले का खतरा, NIC का अलर्ट जारी, विशेषज्ञों की टीमें 24 घंटे निगरानी में जुटीं

    मध्य प्रदेश: में सरकारी वेबसाइटों और ऑनलाइन पोर्टल्स की साइबर सुरक्षा को लेकर सतर्कता बढ़ा दी गई है। PHP सॉफ्टवेयर में गंभीर सुरक्षा खामी सामने आने के बाद राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) ने राज्य के आईटी तंत्र को अलर्ट किया है। इस खतरे को देखते हुए प्रदेश में सरकारी वेबसाइटों और सर्वरों की निगरानी तेज कर दी गई है। कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस सिस्टम (CERT) की तकनीकी टीम लगातार 24 घंटे निगरानी कर रही है, ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की समय रहते पहचान की जा सके।

    प्रदेश में बिजली, राजस्व, नागरिक आपूर्ति और विभिन्न सरकारी कल्याणकारी योजनाओं से जुड़ी कई वेबसाइटें PHP तकनीक पर संचालित होती हैं। ऐसे में सॉफ्टवेयर की सुरक्षा में सामने आई कमी को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, इस खामी का फायदा उठाकर हमलावर दूर से ही सरकारी सर्वर तक अनधिकृत पहुंच बनाने की कोशिश कर सकते हैं। कुछ परिस्थितियों में इसके लिए सामान्य लॉगिन या पासवर्ड की आवश्यकता नहीं पड़ने का जोखिम भी बताया गया है।

    साइबर सुरक्षा से जुड़ी इस कमजोरी को गंभीर श्रेणी में रखा गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इसकी गंभीरता का आकलन 10 में से 9.2 अंक के रूप में किया गया है। यह रेटिंग संभावित खतरे की गंभीरता को दर्शाती है। इंटरनेट पर उपलब्ध कुछ सर्वरों को निशाना बनाने की शुरुआती कोशिशें भी दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, इन प्रयासों के मध्य प्रदेश में होने की पुष्टि नहीं हुई है।

    विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि सुरक्षा खामी को समय रहते दूर नहीं किया गया, तो सरकारी विभागों के महत्वपूर्ण डेटा की चोरी होने और ऑनलाइन सेवाओं के बाधित होने का खतरा पैदा हो सकता है। सरकारी पोर्टल्स के माध्यम से नागरिकों को विभिन्न सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। ऐसे में सर्वर की सुरक्षा में सेंध लगने से विभागीय कामकाज के साथ-साथ आम लोगों को मिलने वाली डिजिटल सेवाएं भी प्रभावित हो सकती हैं।

    अलर्ट में पुराने सॉफ्टवेयर संस्करणों का इस्तेमाल करने वाले विभागों को विशेष रूप से सतर्क रहने की जरूरत बताई गई है। जिन वेबसाइटों पर PHP के पुराने या अपडेट नहीं किए गए संस्करण चल रहे हैं, उनके अधिक जोखिम में होने की आशंका है। तकनीकी सलाह के मुताबिक, पुराने संस्करणों में मौजूद सुरक्षा कमजोरियों को दूर करना जरूरी है, ताकि हमलावर उनका फायदा न उठा सकें।

    इसी के तहत सरकारी वेबसाइटों और सर्वरों का प्रबंधन करने वाली तकनीकी टीमों को सॉफ्टवेयर अपडेट करने और उपलब्ध सुरक्षा पैच लागू करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही सर्वरों पर आने वाले इंटरनेट ट्रैफिक की लगातार निगरानी करने को कहा गया है। किसी भी संदिग्ध गतिविधि या अनधिकृत पहुंच की कोशिश सामने आने पर तत्काल कार्रवाई करना इस निगरानी व्यवस्था का प्रमुख उद्देश्य है।

    प्रदेश में साइबर सुरक्षा की स्थिति को लेकर वैभव श्रीवास्तव, एसपी एटीएस एवं ज्वाइंट डायरेक्टर CERT ने बताया कि सुरक्षा संबंधी अलर्ट प्राप्त हुआ है और उनकी टीम लगातार सातों दिन, 24 घंटे निगरानी कर रही है। उन्होंने कहा कि इस दिशा में पिछले दो वर्षों से काम किया जा रहा है और अब तक ऐसी कोई घटना सामने नहीं आई है। टीम लगातार स्थिति पर नजर रख रही है।

    सरकारी पोर्टल्स की सुरक्षा के लिए फिलहाल सॉफ्टवेयर अपडेट, सर्वर मॉनिटरिंग और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने को प्राथमिकता दी जा रही है। तकनीकी टीमों के सामने चुनौती यह है कि संभावित कमजोरियों को जल्द दूर किया जाए और सरकारी डिजिटल सेवाओं को सुरक्षित तथा सुचारु बनाए रखा जाए।

  • खाद्य सुरक्षा पर सवाल, देश में 1.85 लाख नमूने फेल, राजस्थान में सिर्फ 31 मामलों में दोषियों को सजा

    खाद्य सुरक्षा पर सवाल, देश में 1.85 लाख नमूने फेल, राजस्थान में सिर्फ 31 मामलों में दोषियों को सजा

    नई दिल्ली ।देश में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और मिलावट रोकने के लिए की जा रही कार्रवाई के आंकड़े खाद्य सुरक्षा व्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती दिखाते हैं। वर्ष 2025-26 में देशभर में 2,23,808 खाद्य नमूनों की जांच की गई। इनमें 40,023 नमूने तय मानकों पर खरे नहीं उतरे। इसके बावजूद दोषियों को सजा मिलने वाले मामलों की संख्या 1,918 रही। यानी जांच में खामियां सामने आने के मुकाबले सजा तक पहुंचने वाले मामले काफी कम हैं।

    पिछले पांच वर्षों के आंकड़े भी इसी स्थिति की ओर इशारा करते हैं। वर्ष 2021-22 से 2025-26 के बीच देशभर में 8.86 लाख खाद्य नमूनों की जांच हुई। इनमें 1,85,780 नमूने फेल पाए गए। इन मामलों में 1,39,507 का निपटारा जुर्माना लगाकर किया गया, जबकि केवल 6,203 मामलों में दोषियों को सजा सुनाई गई। इससे स्पष्ट होता है कि खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई के अलग-अलग परिणाम सामने आए हैं।

    सजा की दर में पिछले वर्षों के दौरान कुछ सुधार जरूर हुआ है, लेकिन यह अब भी पांच प्रतिशत से कम है। वर्ष 2021-22 में 32,935 नमूने फेल हुए और 671 मामलों में सजा हुई। अगले वर्ष 44,626 नमूनों के फेल होने पर 1,188 मामलों में दोषियों को सजा मिली। वर्ष 2023-24 में सजा की दर 3.4 प्रतिशत और 2024-25 में 3.7 प्रतिशत रही। वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 4.8 प्रतिशत हो गई।

    राजस्थान के आंकड़े विशेष रूप से ध्यान खींचते हैं। वर्ष 2025-26 में राज्य में 17,325 खाद्य नमूनों की जांच की गई, जिनमें 4,594 नमूने फेल पाए गए। यह कुल जांचे गए नमूनों का 26.5 प्रतिशत है। फेल नमूनों की संख्या के मामले में राजस्थान देश में दूसरे स्थान पर रहा। हालांकि, राज्य में केवल 31 मामलों में दोषियों को सजा मिली। फेल नमूनों की संख्या के मुकाबले यह दर एक प्रतिशत से भी कम है।

    मध्य प्रदेश में भी स्थिति में सुधार की जरूरत दिखाई देती है। वर्ष 2025-26 के दौरान राज्य में फेल हुए खाद्य नमूनों के करीब चार प्रतिशत मामलों में ही सजा हुई। यह राष्ट्रीय औसत 4.8 प्रतिशत से कम है। ऐसे में राज्य में खाद्य सुरक्षा से जुड़े मामलों की जांच, कानूनी प्रक्रिया और दोषियों को सजा दिलाने की व्यवस्था पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है।

    छत्तीसगढ़ में इसी अवधि के दौरान 2,065 खाद्य नमूनों की जांच हुई। इनमें 214 नमूने फेल पाए गए, जो कुल नमूनों का लगभग 10.4 प्रतिशत है। हालांकि, नमूनों के फेल होने की दर अपेक्षाकृत कम होने के बावजूद खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नियमित निगरानी आवश्यक बनी रहती है।

    दूसरी ओर, उत्तर प्रदेश में खाद्य नमूनों के फेल होने का आंकड़ा काफी अधिक रहा। वर्ष 2025-26 में वहां 39,519 नमूनों की जांच की गई, जिनमें 20,427 फेल मिले। यह कुल नमूनों का 51.7 प्रतिशत है। इसके बावजूद राज्य में 342 मामलों में ही सजा हुई। हरियाणा में 31 प्रतिशत और झारखंड में 27.8 प्रतिशत नमूने फेल हुए। महाराष्ट्र में यह आंकड़ा 17.4 प्रतिशत और पंजाब में 13.2 प्रतिशत रहा।

    कुछ राज्यों में दोषियों को सजा मिलने की दर बेहतर दर्ज की गई। तमिलनाडु में 3,984 फेल नमूनों के मुकाबले 857 मामलों में सजा हुई, जबकि केरल में 1,863 फेल नमूनों के मुकाबले 330 मामलों में दोषियों को सजा मिली। इसके विपरीत, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, झारखंड, गोवा, असम, बिहार और पुडुचेरी में दिए गए आंकड़ों के अनुसार किसी मामले में सजा दर्ज नहीं हुई।

    दूध और डेयरी उत्पादों की जांच भी चिंता का विषय है। वर्ष 2025-26 में इनके 39,351 नमूनों की जांच की गई, जिनमें 14,668 फेल मिले। यानी लगभग 37.3 प्रतिशत नमूने तय मानकों पर खरे नहीं उतरे। दूध रोजमर्रा के इस्तेमाल की वस्तु है, इसलिए इसकी गुणवत्ता सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है।

    खाद्य सुरक्षा कानून, 2006 के तहत नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माने और जेल का प्रावधान है। असुरक्षित खाद्य पदार्थ से गंभीर नुकसान होने पर छह साल तक की कैद और पांच लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। यदि असुरक्षित भोजन से किसी की मौत होती है, तो उम्रकैद और कम से कम 10 लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान है।

    हालांकि, हर फेल नमूना मिलावट का मामला नहीं होता। इसमें असुरक्षित खाद्य पदार्थ, निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरने वाले उत्पाद और गलत लेबल वाले सामान भी शामिल हो सकते हैं। सरकार के मुताबिक, करीब 98 प्रतिशत खाद्य कारोबारी राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।

    खाद्य पदार्थों की निगरानी के लिए वर्ष 2025-26 में देशभर में 5,20,566 निरीक्षण किए गए। वर्ष 2024-25 में 4,01,391 और 2023-24 में 3,57,072 निरीक्षण हुए थे। पिछले पांच वर्षों में 4,461 लाइसेंस निलंबित और 11,493 लाइसेंस रद्द किए गए। इन आंकड़ों के बीच सबसे अहम चुनौती यह है कि जांच में खामी मिलने के बाद मामलों का प्रभावी निपटारा हो और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ समय पर कानूनी कार्रवाई हो।

  • मोहन सरकार ने मध्य प्रदेश में 1.24 लाख पदों को दी मंजूरी, ऊर्जा और स्वास्थ्य विभाग में सबसे ज्यादा पद

    मोहन सरकार ने मध्य प्रदेश में 1.24 लाख पदों को दी मंजूरी, ऊर्जा और स्वास्थ्य विभाग में सबसे ज्यादा पद

    मध्य प्रदेश: में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए राज्य सरकार ने विभिन्न विभागों में बड़े पैमाने पर पदों को मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार ने कैबिनेट के माध्यम से कुल 1.24 लाख पद स्वीकृत किए हैं। इनमें ऊर्जा, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, गृह और परिवहन विभाग सहित अन्य पद शामिल हैं। इस फैसले से प्रदेश में सरकारी क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ाने की योजना सामने आई है।

    स्वीकृत पदों की संख्या के लिहाज से ऊर्जा और स्वास्थ्य विभाग सबसे आगे हैं। हालांकि, पदों को मंजूरी मिलने का अर्थ यह नहीं है कि सभी पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया एक साथ शुरू हो जाएगी। उम्मीदवारों को संबंधित विभागों की आधिकारिक भर्ती अधिसूचनाओं और नियुक्ति कार्यक्रम का इंतजार करना होगा।

    उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, ऊर्जा विभाग में 52 हजार पदों को मंजूरी दी गई है। वहीं, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में 47 हजार पद स्वीकृत किए गए हैं। इन दोनों विभागों में पदों की संख्या सबसे अधिक है। भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ने पर इन क्षेत्रों में विभिन्न योग्यताओं वाले अभ्यर्थियों के लिए अवसर सामने आ सकते हैं। हालांकि, पदों के अनुसार शैक्षणिक योग्यता, अनुभव और अन्य पात्रता शर्तों की जानकारी संबंधित भर्ती विज्ञापन जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

    महिला एवं बाल विकास विभाग में 13,200 पदों को मंजूरी दी गई है। इसके अलावा गृह विभाग में 9,662 और परिवहन विभाग में 1,800 पद स्वीकृत किए गए हैं। राज्य में तीन नए जिलों के लिए भी 1,240 पदों को मंजूरी मिली है। इन विभागों और नए जिलों से जुड़े पदों पर नियुक्तियों की प्रक्रिया किस चरण में और कब शुरू होगी, इसकी जानकारी आगे जारी होने वाले सरकारी आदेशों और भर्ती सूचनाओं से मिलेगी।

    पुलिस में नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए भी भर्ती बोर्ड से जुड़ा प्रस्ताव महत्वपूर्ण है। मध्य प्रदेश में पुलिस भर्ती के लिए अलग बोर्ड गठित करने की योजना है। फिलहाल इसका गठन प्रस्तावित है और प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार है। बोर्ड के गठन के बाद पुलिस भर्ती से संबंधित व्यवस्था को स्वतंत्र रूप से संचालित करने की दिशा में कदम उठाए जा सकते हैं। हालांकि, भर्ती बोर्ड के गठन, पदों की संख्या और आवेदन की तारीख को लेकर आधिकारिक घोषणा के बिना किसी निश्चित समयसीमा का अनुमान लगाना उचित नहीं होगा।

    सरकार की योजना में नियमित नियुक्तियों के साथ संविदा और आउटसोर्स पद भी शामिल हैं। इसलिए मंजूर किए गए 1.24 लाख पदों को एक साथ निकलने वाली सरकारी नौकरियों की संख्या समझना सही नहीं होगा। स्वीकृत पदों में से किस विभाग में कितनी नियुक्तियां होंगी और भर्ती किस चरण में आगे बढ़ेगी, यह संबंधित विभागों की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

    सरकारी नौकरी के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए अब विभागवार भर्ती विज्ञापनों पर नजर रखना अहम होगा। आवेदन करने से पहले पद का विवरण, शैक्षणिक योग्यता, आयु सीमा, चयन प्रक्रिया और आवेदन की अंतिम तारीख की जानकारी आधिकारिक अधिसूचना से जांचनी चाहिए। पदों को मंजूरी मिलना भर्ती की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन वास्तविक अवसरों की स्थिति भर्ती प्रक्रिया शुरू होने और अधिसूचनाएं जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

  • मध्य प्रदेश में वित्तीय गड़बड़ियों पर बड़ी कार्रवाई, 392 अधिकारी-कर्मचारी कार्रवाई के दायरे में, सात बर्खास्त

    मध्य प्रदेश में वित्तीय गड़बड़ियों पर बड़ी कार्रवाई, 392 अधिकारी-कर्मचारी कार्रवाई के दायरे में, सात बर्खास्त


    मध्य प्रदेश: में नगरीय निकायों के भीतर वित्तीय अनियमितताओं और प्रशासनिक लापरवाही के मामलों में अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। नगरीय प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे के मुताबिक, अब तक विभिन्न स्तरों के 392 अधिकारियों-कर्मचारियों पर कार्रवाई हो चुकी है। इनमें करीब 135 मुख्य नगरपालिका अधिकारी यानी सीएमओ स्तर के अधिकारी शामिल हैं। कार्रवाई के तहत सात अधिकारियों-कर्मचारियों को बर्खास्त किया गया है। संबंधित मामलों में लगभग 3 से 4 करोड़ रुपये की वसूली भी की गई है।

    विभाग के अनुसार, नगरीय निकायों में सामने आई वित्तीय गड़बड़ियों को गंभीरता से लेते हुए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ अलग-अलग स्तर पर कदम उठाए गए हैं। जांच में अनियमितता या लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों से वसूली के साथ वेतन वृद्धि रोकने, पदावनति और बर्खास्तगी जैसी कार्रवाई की गई है। कार्रवाई का स्वरूप मामले की गंभीरता और जिम्मेदारी के स्तर के आधार पर तय किया गया।

    अधिकारियों के अलावा गलत दरों पर सामान उपलब्ध कराने वाले 80 से अधिक ठेकेदारों और सप्लायर्स के खिलाफ भी कदम उठाए गए हैं। विभाग का कहना है कि सरकारी खरीद और खर्च में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए अनियमितताओं पर निगरानी की जा रही है। वित्तीय गड़बड़ियों से जुड़े मामलों में जिम्मेदारी तय करने और सरकारी धन के दुरुपयोग को रोकने पर जोर दिया जा रहा है।

    नगरीय प्रशासन विभाग निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने के लिए तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई का भी इस्तेमाल कर रहा है। इसका उद्देश्य वित्तीय अनियमितताओं की पहचान करना, सरकारी खर्च पर नजर रखना और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में जवाबदेही बढ़ाना है। तकनीक की मदद से विभाग सरकारी संसाधनों के उपयोग की निगरानी को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में काम कर रहा है।

    विभाग के मुताबिक, सरकारी धन का इस्तेमाल पारदर्शी तरीके से होना और योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचना प्राथमिकता है। नगरीय निकाय नागरिकों को स्थानीय स्तर पर कई जरूरी सेवाएं उपलब्ध कराते हैं। ऐसे में वित्तीय प्रबंधन में अनियमितता और प्रशासनिक लापरवाही का असर सरकारी कामकाज तथा नागरिक सुविधाओं पर पड़ सकता है। इसी कारण विभाग ने जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया जारी रखने की बात कही है।

    मध्य प्रदेश सरकार सुशासन, पारदर्शिता और प्रशासनिक जवाबदेही को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल कर रही है। विभाग का कहना है कि नागरिक सेवाओं को बेहतर बनाने, जनसमस्याओं का समय पर समाधान करने और सरकारी योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है।

    संजय दुबे के अनुसार, नगरीय निकायों में वित्तीय अनियमितताओं और लापरवाही के मामलों में कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। विभाग का लक्ष्य सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग को रोकना, जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करना और सार्वजनिक धन के इस्तेमाल में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। अब तक की कार्रवाई में 392 अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ कदम उठाए गए हैं, सात लोगों को बर्खास्त किया गया है और संबंधित मामलों में करोड़ों रुपये की वसूली की गई है।

  • सिंगापुर के पर्यटन मंच पर छाया मध्यप्रदेश, टाइगर स्टेट से मोगली लैंड और लजीज व्यंजनों तक दुनिया को न्योता

    सिंगापुर के पर्यटन मंच पर छाया मध्यप्रदेश, टाइगर स्टेट से मोगली लैंड और लजीज व्यंजनों तक दुनिया को न्योता

    नई दिल्ली । मध्यप्रदेश ने सिंगापुर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय पर्यटन व्यापार प्रदर्शनी आईटीबी एशिया में अपनी प्राकृतिक सुंदरता, वन्यजीव संपदा, सांस्कृतिक विविधता, ऐतिहासिक धरोहरों और पारंपरिक व्यंजनों को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत किया। सैंड्स एक्सपो एंड कन्वेंशन सेंटर में आयोजित राष्ट्रीय पर्यटन संगठनों के विशेष सत्र में मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड के प्रबंध संचालक डॉ. इलैयाराजा टी ने अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों और टूर ऑपरेटरों को राज्य की यात्रा करने के लिए आमंत्रित किया। उन्होंने कहा कि जो पर्यटक स्थापित और भीड़भाड़ वाले पर्यटन स्थलों से अलग हटकर वास्तविक, प्राकृतिक और स्थानीय जीवन से जुड़े अनुभव चाहते हैं, उनके लिए मध्यप्रदेश एक आकर्षक विकल्प है।

    डॉ. इलैयाराजा टी ने मध्यप्रदेश को भारत का दिल बताते हुए कहा कि राज्य की पहचान केवल उसकी भौगोलिक स्थिति तक सीमित नहीं है। यहां की सांस्कृतिक विविधता, स्थानीय परंपराएं और लोगों का आत्मीय व्यवहार पर्यटकों को अलग अनुभव प्रदान करते हैं। उनके अनुसार, बदलते वैश्विक पर्यटन परिदृश्य में यात्रियों की रुचि नए स्थानों और स्थानीय जीवनशैली को करीब से जानने में बढ़ रही है। ऐसे में मध्यप्रदेश अपनी विविध पर्यटन संभावनाओं के जरिए अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को आकर्षित कर सकता है।

    उन्होंने अत्यधिक पर्यटन दबाव की समस्या का उल्लेख करते हुए कहा कि दुनिया के कई प्रमुख पर्यटन स्थलों पर सीमित स्थानों और खास समय के दौरान पर्यटकों की भीड़ बढ़ जाती है। इस समस्या का दीर्घकालिक समाधान पर्यटन गतिविधियों को नए क्षेत्रों तक पहुंचाना और कम चर्चित स्थलों की खोज को प्रोत्साहित करना है। उनके मुताबिक, नए गंतव्यों को पर्यटन मानचित्र पर लाने से यात्रियों को अलग अनुभव मिल सकते हैं और लोकप्रिय स्थानों पर भीड़ का दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।

    मध्यप्रदेश की प्राकृतिक संपदा को प्रस्तुत करते हुए उन्होंने बताया कि राज्य के 25 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र में जंगल हैं। वन्यजीवों के मामले में मध्यप्रदेश को टाइगर स्टेट के रूप में विशेष पहचान मिली हुई है। इसके अलावा राज्य चीता, तेंदुआ, गिद्ध और घड़ियाल जैसे वन्यजीवों के लिए भी जाना जाता है। यहां के राष्ट्रीय उद्यान, वन क्षेत्र और प्राकृतिक रास्ते वन्यजीव प्रेमियों तथा प्रकृति के बीच समय बिताने के इच्छुक पर्यटकों के लिए खास आकर्षण हैं।

    पेंच राष्ट्रीय उद्यान को मोगली और जंगल बुक की कहानियों से जोड़कर प्रस्तुत किया गया। यहां की प्रकृति भ्रमण गतिविधियां पर्यटकों को जंगल और वन्यजीवों के वातावरण को करीब से समझने का अवसर देती हैं। ऐतिहासिक ओरछा में बेतवा नदी पर रिवर राफ्टिंग भी पर्यटन के प्रमुख आकर्षणों में शामिल है। राज्य की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत में सांची स्तूप, खजुराहो के मंदिर और भीमबेटका के शैलचित्रों का विशेष स्थान है। प्रस्तुति में मध्यप्रदेश के 22 यूनेस्को धरोहर स्थलों का भी उल्लेख किया गया।

    राज्य की पहचान उसके पारंपरिक हस्तशिल्प और जनजातीय संस्कृति से भी जुड़ी है। मध्यप्रदेश में सात प्रमुख जनजातियों और 45 उप-जनजातियों की सांस्कृतिक परंपराएं मौजूद हैं। चंदेरी और महेश्वरी वस्त्र, गोंड चित्रकला तथा भोपाल की जरी-जरदोजी कला स्थानीय शिल्प की विशिष्ट पहचान हैं। इन परंपराओं के माध्यम से पर्यटक राज्य की सांस्कृतिक विरासत और कारीगरों के कौशल को समझ सकते हैं।

    पर्यटन के नए अवसर विकसित करने के लिए राज्य में हेली पर्यटन सेवा का विस्तार किया जा रहा है, ताकि कम पहुंच वाले पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान हो सके। मध्यप्रदेश ने स्पेनिश फिल्म आयोग के साथ समझौता कर अंतरराष्ट्रीय फिल्म पर्यटन को बढ़ावा देने की पहल भी की है। महिला सफारी चालकों और महिलाओं द्वारा संचालित होटलों को सुरक्षित तथा जिम्मेदार पर्यटन के प्रयासों के रूप में प्रस्तुत किया गया।

    डॉ. इलैयाराजा टी ने ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने पर जोर देते हुए कहा कि किसी स्थान की असली सुंदरता केवल उसकी इमारतों और ऐतिहासिक स्थलों में नहीं, बल्कि वहां के लोगों के व्यवहार और आतिथ्य में भी दिखाई देती है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को स्थानीय जीवन, संस्कृति और परंपराओं का अनुभव लेने के लिए आमंत्रित किया।

    मध्यप्रदेश के खानपान को भी प्रस्तुति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया। मालवा का पोहा-जलेबी, रतलामी सेव, पारंपरिक दाल-बाफला, मुरैना और ग्वालियर की गजक तथा नवाबी और बुंदेली शैली की मटन करी का उल्लेख किया गया। उन्होंने विश्वास जताया कि हेलीकॉप्टर संपर्क, सालभर आयोजित होने वाले सांस्कृतिक उत्सव और सुरक्षित पर्यटन वातावरण राज्य की यात्रा को यादगार बनाने में मदद करेंगे।

  • देवास में जवारा विसर्जन के दौरान मधुमक्खियों का हमला, 20 से अधिक ग्रामीण घायल और 11 अस्पताल में भर्ती

    देवास में जवारा विसर्जन के दौरान मधुमक्खियों का हमला, 20 से अधिक ग्रामीण घायल और 11 अस्पताल में भर्ती

    मध्यप्रदेश: के देवास जिले के रजोदा गांव में मंगलवार सुबह जवारा विसर्जन के पारंपरिक अनुष्ठान के दौरान मधुमक्खियों के अचानक हमले से अफरा-तफरी मच गई। इस घटना में 20 से अधिक ग्रामीण घायल हो गए। घायलों में से 11 लोगों को इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। चिकित्साकर्मी घायलों का उपचार कर रहे हैं। धार्मिक आयोजन के दौरान हुई इस घटना से मौके पर मौजूद लोगों में दहशत फैल गई और कई ग्रामीणों को अपनी जान बचाने के लिए भागना पड़ा।

    जानकारी के अनुसार, घटना मंगलवार सुबह करीब 9 बजे की है। रजोदा गांव में ग्रामीण जवारा विसर्जन की परंपरा निभाने के लिए एक कुएं के पास एकत्रित हुए थे। इसी दौरान पांच से छह लोग नहाने के लिए कुएं में कूद गए। कुएं के ठीक ऊपर स्थित एक बड़े पीपल के पेड़ पर मधुमक्खियों का छत्ता बना हुआ था। नहाते समय पानी की कुछ छींटें छत्ते पर जा गिरीं। इसके बाद मधुमक्खियां आक्रामक हो गईं और वहां मौजूद लोगों पर हमला कर दिया।

    अचानक हुए हमले के कारण लोगों को संभलने का मौका नहीं मिला। मधुमक्खियों के झुंड ने ग्रामीणों को निशाना बनाया और कई लोगों के सिर, हाथ तथा शरीर के अन्य हिस्सों पर डंक मारे। हमले के बाद घटनास्थल पर भगदड़ जैसी स्थिति बन गई। लोग मधुमक्खियों से बचने के लिए अलग-अलग दिशाओं में भागने लगे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कुछ लोग अपनी जान बचाने के लिए करीब दो किलोमीटर तक दौड़ते रहे।

    मधुमक्खियों के हमले से बचने के लिए ग्रामीणों ने अलग-अलग तरीके अपनाए। कुछ लोगों ने नीम की टहनियों का सहारा लिया और हाथों से मधुमक्खियों को दूर भगाने की कोशिश की। वहीं, कुछ ग्रामीणों ने खुद को जालों से ढककर सुरक्षित रखने का प्रयास किया। ऐसे लोग करीब 15 मिनट तक जाल के नीचे छिपे रहे। इस दौरान मधुमक्खियों का झुंड उनके आसपास मंडराता रहा। वे तब तक बाहर नहीं निकले, जब तक मधुमक्खियां वहां से चली नहीं गईं।

    घटना के बाद घायलों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। कुल 20 से अधिक लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है, जबकि 11 ग्रामीणों को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। चिकित्साकर्मी घायलों का प्राथमिकता के आधार पर इलाज कर रहे हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में सभी घायलों की स्थिति और उन्हें लगी चोटों की गंभीरता का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है।

    देवास जिले में इस तरह की घटना पहले भी सामने आ चुकी है। सोनकच्छ क्षेत्र के अगेरा गांव में मूर्ति विसर्जन के दौरान मधुमक्खियों ने श्रद्धालुओं पर हमला कर दिया था। उस घटना में लगभग 25 लोग घायल हुए थे, जिनमें से 13 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने धार्मिक आयोजनों के दौरान आसपास के वातावरण और सुरक्षा व्यवस्था पर ध्यान देने की जरूरत को रेखांकित किया है।

    रजोदा गांव की घटना के बाद सामूहिक कार्यक्रमों में सावधानी बरतने की आवश्यकता पर जोर दिया गया है। पेड़ों पर मधुमक्खियों के छत्ते होने की स्थिति में उनके आसपास भीड़ जुटाने या ऐसी गतिविधियां करने से बचना जरूरी है, जिनसे मधुमक्खियां उत्तेजित हो सकती हैं। विशेष रूप से कुओं, तालाबों और खुले स्थानों पर होने वाले धार्मिक आयोजनों के दौरान आसपास के पेड़ों तथा संभावित जोखिम वाले स्थानों का ध्यान रखना महत्वपूर्ण है।

    जवारा विसर्जन के दौरान हुई इस घटना में बड़ी संख्या में ग्रामीणों के घायल होने से गांव में चिंता का माहौल बना। फिलहाल अस्पताल में भर्ती लोगों का उपचार जारी है। यह घटना बताती है कि पारंपरिक आयोजनों के दौरान आसपास मौजूद प्राकृतिक परिस्थितियों को नजरअंदाज करना जोखिम भरा हो सकता है और थोड़ी सी सावधानी से ऐसी परिस्थितियों में नुकसान कम करने में मदद मिल सकती है।

  • मध्यप्रदेश में 750 पुलिस बैंड पदों पर भर्ती की तैयारी, मोहन यादव सरकार 2027 को मनाएगी युवा वर्ष

    मध्यप्रदेश में 750 पुलिस बैंड पदों पर भर्ती की तैयारी, मोहन यादव सरकार 2027 को मनाएगी युवा वर्ष


    मध्यप्रदेश:
    में युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने और पुलिस विभाग की व्यवस्थाओं को मजबूत करने के लिए करीब 750 पुलिस बैंड पदों पर भर्ती की तैयारी की जा रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि सरकार आगामी वर्ष को युवा वर्ष के रूप में मनाने की योजना बना रही है। इसके साथ ही मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) की विशेष परीक्षा जनवरी-फरवरी में आयोजित कराने की भी तैयारी है। इन पहलों का उद्देश्य युवाओं को अवसर उपलब्ध कराने के साथ पुलिस विभाग की कार्यक्षमता और व्यवस्थाओं को बेहतर बनाना है।

    मुख्यमंत्री के अनुसार, राज्य सरकार चाहती है कि प्रदेश के प्रत्येक जिले में पुलिस बैंड की व्यवस्था हो। इसके लिए करीब 750 पदों पर भर्ती की जा रही है। इस पहल से जिलों में पुलिस बैंड तैयार करने और राष्ट्रीय पर्वों पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों को अधिक व्यवस्थित तथा आकर्षक बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस जैसे अवसरों पर पुलिस बैंड की प्रस्तुति समारोह का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है।

    मुख्यमंत्री ने गार्ड ऑफ ऑनर के दौरान पुलिस बैंड की प्रस्तुति, मधुर भजनों और पुलिसकर्मियों की दक्षता की सराहना की। उन्होंने कहा कि 26 जनवरी और 15 अगस्त जैसे राष्ट्रीय पर्व शासन के लिए भी दीपावली के समान महत्व रखते हैं। इन आयोजनों के माध्यम से देशभक्ति, राष्ट्रीय गौरव और अनुशासन की भावना व्यक्त होती है। प्रत्येक जिले में पुलिस बैंड की उपलब्धता से ऐसे आयोजनों को बेहतर ढंग से संपन्न कराने में सहायता मिल सकती है।

    सरकार की योजना केवल पुलिस बैंड तक सीमित नहीं है। मुख्यमंत्री ने पुलिस विभाग को नए संशोधित कानूनों के अनुरूप मजबूत बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। इसके लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने और विभिन्न स्तरों पर नई भर्तियों सहित अन्य व्यवस्थाओं को विकसित करने पर काम किया जा रहा है। पुलिस की विवेचना और अनुसंधान प्रक्रिया को प्रभावी बनाने के साथ न्यायालयों में मामलों की बेहतर पैरवी तथा संचालन पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

    पुलिस विभाग की जिम्मेदारियों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिसकर्मी चौबीसों घंटे जनसेवा में जुटे रहते हैं। कानून-व्यवस्था बनाए रखने और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उन्हें कई बार लंबे समय तक ड्यूटी करनी पड़ती है। इस दौरान वे अपने परिवार से दूर भी रहते हैं। ऐसे में पुलिसकर्मियों के साथ उनके परिवारों का योगदान भी महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि उन्हें भी ड्यूटी की परिस्थितियों के अनुसार अपने जीवन में बदलाव करने पड़ते हैं।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार पुलिसकर्मियों के व्यक्तिगत और पारिवारिक जीवन से जुड़ी जरूरतों के प्रति संवेदनशील है। उनके कल्याण और आवश्यक सहयोग के लिए उचित कदम उठाने की प्रतिबद्धता भी जताई गई। पुलिसकर्मियों की कार्य परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उनकी जरूरतों पर ध्यान देना विभाग की कार्यक्षमता और सेवा व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है।

    गार्ड ऑफ ऑनर में महिला पुलिसकर्मियों की भागीदारी को भी मुख्यमंत्री ने सराहनीय बताया। उन्होंने कहा कि महिलाओं की क्षमताओं को लेकर पुरानी सोच बदलने की जरूरत है। महिलाएं अपनी योग्यता, दक्षता और सामर्थ्य के बल पर हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकती हैं और जिम्मेदारियों को प्रभावी ढंग से निभा सकती हैं। महिला पुलिसकर्मियों की भागीदारी को इसी दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण बताया गया।

    मुख्यमंत्री ने विजयादशमी के अवसर पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं भी दीं। उन्होंने कामना की कि दशहरे का पर्व लोगों के जीवन में सुख, समृद्धि और मंगल लेकर आए। उन्होंने इस त्योहार को असत्य पर सत्य की विजय का प्रतीक बताया।

    मध्यप्रदेश में करीब 750 पुलिस बैंड पदों पर भर्ती, हर जिले में बैंड स्थापित करने की तैयारी और एमपीपीएससी की विशेष परीक्षा की योजना युवाओं तथा पुलिस विभाग से जुड़ी महत्वपूर्ण घोषणाएं हैं। सरकार ने आगामी वर्ष को युवा वर्ष के रूप में मनाने की तैयारी भी जताई है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में भर्ती की विस्तृत अधिसूचना, आवेदन की तारीख और पात्रता संबंधी शर्तों का उल्लेख नहीं किया गया है।

  • मध्य प्रदेश में बिजली संकट गहराया, किसानों को 10 घंटे के वादे के बदले सिर्फ 2 घंटे आपूर्ति का आरोप

    मध्य प्रदेश में बिजली संकट गहराया, किसानों को 10 घंटे के वादे के बदले सिर्फ 2 घंटे आपूर्ति का आरोप

    मध्य प्रदेश: में बिजली की मांग बढ़ने और उत्पादन प्रभावित होने के बीच बिजली आपूर्ति का मुद्दा राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। प्रदेश में खेती और सिंचाई के लिए बिजली की जरूरत बढ़ी है। इसी बीच कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि किसानों को निर्धारित समय के अनुसार बिजली नहीं मिल रही है। पार्टी का कहना है कि कई क्षेत्रों में किसानों को प्रतिदिन मुश्किल से दो घंटे बिजली मिल पा रही है, जबकि खेती और सिंचाई के लिए 10 घंटे बिजली देने का वादा किया गया था।

    प्रदेश में बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए सरकार ने पंजाब और उत्तर प्रदेश से बिजली मांगी है। बिजली उत्पादन पर असर पड़ने और बोवनी में देरी के कारण मांग बढ़ने की बात सामने आई है। ऐसे हालात में बिजली की उपलब्धता और नियमित आपूर्ति को लेकर सवाल उठने लगे हैं। किसानों के साथ घरेलू उपभोक्ता भी बिजली कटौती से प्रभावित हो रहे हैं।

    प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने बिजली संकट को लेकर सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि किसान गंभीर बिजली संकट का सामना कर रहे हैं। खेती के काम और सिंचाई के लिए पर्याप्त बिजली नहीं मिलने से उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं। किसानों को जरूरत के मुताबिक बिजली उपलब्ध नहीं होने पर खेतों में सिंचाई का काम प्रभावित हो रहा है। इससे कृषि कार्यों को समय पर पूरा करने में भी परेशानी आ सकती है।

    पटवारी ने यह भी कहा कि बिजली की समस्या केवल किसानों तक सीमित नहीं है। आम लोगों को भी अघोषित बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है। प्रदेश के कई इलाकों में 10-10 घंटे तक बिजली गुल रहने की शिकायतें सामने आने का दावा किया गया है। इस वजह से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के घरेलू उपभोक्ताओं की रोजमर्रा की जरूरतें प्रभावित हो रही हैं।

    बिजली की अनियमित आपूर्ति से ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई के अलावा पेयजल व्यवस्था पर भी असर पड़ने की बात कही गई है। बार-बार बिजली जाने से छोटे दुकानदारों और कारोबारियों को भी कामकाज में परेशानी होती है। घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली की नियमित उपलब्धता जरूरी है, लेकिन लंबे समय तक आपूर्ति बाधित रहने से दैनिक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं।

    किसानों के लिए सिंचाई के समय बिजली उपलब्ध होना महत्वपूर्ण है। यदि जरूरत के अनुसार बिजली नहीं मिलती, तो फसलों की बढ़वार और उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका रहती है। इससे किसानों की आमदनी और आर्थिक स्थिति पर भी दबाव पड़ सकता है। खेती की बढ़ती लागत और अन्य चुनौतियों के बीच बिजली की कमी किसानों के लिए अतिरिक्त परेशानी बन सकती है।

    कांग्रेस ने सरकार से सवाल किया है कि किसानों को तय समय के मुताबिक बिजली क्यों नहीं मिल रही है और घरेलू उपभोक्ताओं को अघोषित कटौती से राहत कब मिलेगी। पार्टी ने नियमित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग उठाई है। साथ ही, बिजली कटौती होने पर उसकी पूर्व सूचना देने और कटौती के कारणों की जानकारी सार्वजनिक करने की जरूरत पर जोर दिया है।

    बिजली की मांग और उपलब्धता के बीच बने अंतर को दूर करना सरकार के सामने चुनौती है। ऐसे में किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराने और घरेलू उपभोक्ताओं की परेशानी कम करने का मुद्दा अहम बना हुआ है। फिलहाल, बिजली संकट को लेकर कांग्रेस ने सरकार से जवाब मांगा है और नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग की है।