निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार भगवान श्री चन्द्रमौलेश्वर की पालकी शाम चार बजे श्री महाकालेश्वर मंदिर से प्रारंभ होगी। इसके बाद पालकी महाकाल रोड, गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार, कहारवाड़ी और हरसिद्धि पाल होते हुए रामघाट पहुंचेगी। रामघाट पर मां शिप्रा के तट पर पालकी में विराजित भगवान श्री चन्द्रमौलेश्वर और गजराज पर आरूढ़ भगवान श्री मनमहेश का पूजन-अर्चन किया जाएगा। इसके साथ ही आरती भी होगी।
भाद्रपद माह की दूसरी और अंतिम सवारी को प्रमुख राजसी सवारी के रूप में निकाला जाएगा। इस दौरान भगवान श्री महाकालेश्वर अपने भक्तों को छह अलग-अलग स्वरूपों में दर्शन देंगे। राजसी सवारी के दौरान निकलने वाले इन स्वरूपों में भगवान के अलग-अलग रथ और पालकी शामिल रहेंगी।
रजत पालकी में श्री चन्द्रमौलेश्वर विराजित होंगे, जबकि हाथी पर श्री मनमहेश का स्वरूप रहेगा। गरुड़ रथ पर श्री शिवतांडव और नंदी रथ पर श्री उमा-महेश विराजित रहेंगे। डोल रथ पर श्री होल्कर स्टेट के मुखारविंद तथा छठी सवारी में श्री सप्तधान के मुखारविंद शामिल रहेंगे। इस तरह राजसी सवारी के दौरान श्रद्धालुओं को भगवान श्री महाकालेश्वर के छह स्वरूपों के दर्शन प्राप्त होंगे।
राजसी सवारी के नगर भ्रमण से पहले श्री महाकालेश्वर मंदिर के सभामंडप में भगवान श्री चन्द्रमौलेश्वर का विधिवत पूजन-अर्चन किया जाएगा। पूजन के बाद भगवान श्री चन्द्रमौलेश्वर को रजत पालकी में विराजित किया जाएगा। इसके पश्चात पालकी मंदिर से बाहर निकलकर नगर भ्रमण के लिए रवाना होगी।
सवारी के दौरान निर्धारित मार्ग पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी विशेष इंतजाम रहेंगे। करीब दो हजार पुलिस जवानों के साथ अधिकारी भी तैनात रहेंगे। राजसी सवारी के दौरान व्यवस्थाओं की निगरानी के लिए प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहेंगे।
सवारी के मंदिर से निकलने से पहले मंदिर के मुख्य द्वार पर सशस्त्र पुलिस बल के जवानों द्वारा भगवान श्री चन्द्रमौलेश्वर की पालकी को सलामी दी जाएगी। इसके साथ ही भगवान को गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया जाएगा। इसके बाद राजसी सवारी अपने निर्धारित मार्ग से आगे बढ़ेगी।
राजसी सवारी के रामघाट पहुंचने पर मां शिप्रा के तट पर भगवान श्री चन्द्रमौलेश्वर और गजराज पर विराजित भगवान श्री मनमहेश का पूजन-अर्चन और आरती की जाएगी। इसके साथ ही भाद्रपद माह की दूसरी और अंतिम प्रमुख राजसी सवारी का महत्वपूर्ण धार्मिक क्रम पूरा होगा। सवारी के दौरान भगवान के छह स्वरूपों के दर्शन श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख आकर्षण रहेंगे।
