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  • महाराष्ट्र: सिर से टोपी को लेकर हुआ झगड़ा, बीच-बचाव करने गई गर्भवती महिला के बच्चे की गर्भ में मौत

    महाराष्ट्र: सिर से टोपी को लेकर हुआ झगड़ा, बीच-बचाव करने गई गर्भवती महिला के बच्चे की गर्भ में मौत


    महाराष्ट्र। के कल्याण, मोहने गांव के लहूजीनगर इलाके से एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है, जहाँ एक छोटी सी बात पर शुरू हुई पड़ोसियों की लड़ाई ने एक मासूम की जान ले ली। आरोप है कि लड़ाई रोकने गई एक गर्भवती महिला पर हमला कर उसके पेट में लात मारी गई, जिसके परिणामस्वरूप गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत हो गई।

    मामूली बहस बनी जानलेवा हमला
    जानकारी के अनुसार, विवाद की शुरुआत एक पड़ोसी द्वारा दूसरे के सिर से टोपी उतारने को कहने जैसी मामूली बात पर हुई। यह बहस देखते ही देखते मारपीट में बदल गई। इसी दौरान, जब एक गर्भवती महिला ने बीच-बचाव करने की कोशिश की, तो कथित तौर पर आरोपी ने उसके पेट में जोरदार लात मार दी। इस क्रूर हमले के कारण महिला गंभीर रूप से घायल हो गई और उसके गर्भस्थ शिशु की दुर्भाग्यपूर्ण मौत हो गई।

    पुलिस की कार्यशैली पर उठे सवाल
    इस हृदय विदारक घटना ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। साथ ही, क्षेत्र में लगातार बढ़ रही ऐसी घटनाओं के कारण स्थानीय पुलिस की कार्यक्षमता पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

    पीड़ित परिवार ने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि शिकायत दर्ज कराने के बावजूद पुलिस द्वारा तत्काल कोई कार्रवाई नहीं की गई। इस तरह की घटनाओं का बार-बार होना कानून-व्यवस्था के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बन गया है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए घटनास्थल पर पहुँचकर जाँच शुरू कर दी है।

    अतिरिक्त खबर का अंश (संबंधित जानकारी)
    राजनीतिक बयान: इसी बीच, महाराष्ट्र में राजनीतिक गलियारों से एक खबर यह भी है, जहाँ शिवसेना नेता उदय सामंत ने उद्धव ठाकरे से सवाल किया है, “क्या आपमें कांग्रेस के उपमुख्यमंत्रियों से इस्तीफा मांगने की हिम्मत है?”

    सड़क हादसा: महाराष्ट्र के बीड में एक डीजल टैंकर से कार टकराने के बाद हाइवे पर धुएं का गुबार छा गया, जिससे एक बड़ा हादसा होते-होते बचा।

  • अन्ना हजारे ने 30 जनवरी 2026 से अनशन का किया ऐलान, बोले- "कानून लागू होने तक अंतिम सांस तक करेंगे आंदोलन

    अन्ना हजारे ने 30 जनवरी 2026 से अनशन का किया ऐलान, बोले- "कानून लागू होने तक अंतिम सांस तक करेंगे आंदोलन


    नई दिल्‍ली । समाजसेवी(social worker) अन्ना हजारे ने एक बार फिर देश को हिला देने वाला ऐलान कर दिया है। 30 जनवरी 2026 से महाराष्ट्र(Maharashtra) के रालेगण सिद्धि में वे आमरण अनशन(Hunger Strike till death) पर बैठने जा रहे हैं और यह अनशन उनकी अंतिम सांस तक चलेगा। अन्ना ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस(Devendra Fadnavis) को पत्र लिखकर चेतावनी दी है कि अगर कानून तुरंत लागू नहीं हुआ तो वे प्राण त्याग देंगे, लेकिन पीछे नहीं हटेंगे। अन्ना के इस ऐलान से एक बार फिर महाराष्ट्र से लेकर दिल्ली तक सियासी गलियारे में हड़कंप मच गया है। गौरतलब है कि इससे पहले 2011 में अन्ना हजारे ने दिल्ली के रामलीला मैदान में अनशन किया था। उस वक्त आंदोलन का ऐसा असर हुआ था कि केंद्र के साथ-साथ दिल्ली की कांग्रेस सरकार की विदाई हो गई थी।

    फिर आंदोलन पर क्यों उतरे अन्ना हजारे?
    अब सवाल यह है कि अन्ना हजारे ने अचानक फिर आंदोलन की घोषणा क्यों की? दरअसल, इस बार अनशन का कारण महाराष्ट्र में लोकायुक्त कानून को लागू करने में हो रही देरी है। बता दें कि राज्य में लोकायुक्त कानून को मंजूरी मिले दो साल से ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन इसे अभी तक लागू नहीं किया गया है। इसी से नाराज समाजसेवी अन्ना हजारे एक बार फिर आंदोलन के मूड में हैं।

    रालेगण सिद्धि में होगा आमरण अनशन
    अन्ना हजारे ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर साफ कहा है कि अगर लोकायुक्त कानून तुरंत लागू नहीं किया गया तो वे 30 जनवरी 2026 से अपने गांव रालेगण सिद्धि में आमरण अनशन शुरू कर देंगे। पत्र में उन्होंने लिखा है कि हार्ट अटैक से मरने की बजाय देश और समाज के हित में प्राण त्यागना उनके लिए सौभाग्य की बात होगी। बता दें कि अन्ना हजारे लंबे समय से महाराष्ट्र में मजबूत लोकायुक्त कानून लागू करने की मांग करते आ रहे हैं।

    2024 में राज्यपाल ने दी थी मंजूरी
    अन्ना हजारे के मुताबिक, लोकायुक्त विधेयक 2022 में विधानसभा से और 2023 में विधान परिषद से पारित हो चुका है। 2024 में राज्यपाल की मंजूरी भी मिल गई, इसके बावजूद आज तक कानून लागू नहीं हुआ। अन्ना ने कहा कि राज्य सरकार ने यह विधेयक राष्ट्रपति की स्वीकृति के लिए केंद्र को भेज दिया है, पर एक साल से ज्यादा समय बीतने के बाद भी कोई प्रगति नहीं हुई है।

    मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में अन्ना हजारे ने साफ-साफ शब्दों में कहा कि यह उनका निजी मुद्दा नहीं, बल्कि देश की जनता और भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई का सवाल है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार में इस कानून को लागू करने की इच्छाशक्ति नजर नहीं आ रही। इसलिए उनके पास आमरण अनशन के अलावा अब कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है।