Tag: Maharashtra

  • नर्मदा जल विवाद पर बड़ा फैसला…. महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त क्षेत्रों को गुजरात के उकाई डैम से मिलेगा 5 TMC पानी

    नर्मदा जल विवाद पर बड़ा फैसला…. महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त क्षेत्रों को गुजरात के उकाई डैम से मिलेगा 5 TMC पानी


    मुंबई/गांधीनगर।
    महाराष्ट्र (Maharashtra) को नर्मदा जल विवाद (Narmada Water Dispute) के तहत गुजरात के उकाई बांध से 5 TMC पानी मिलेगा. मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Chief Minister Devendra Fadnavis) ने नर्मदा नियंत्रण प्राधिकरण की समीक्षा समिति की बैठक में महाराष्ट्र के हिस्से का पानी उपलब्ध कराने का मुद्दा उठाया. यह घोषणा ऐसे समय में हुई है, जब राज्य के 80 प्रतिशत से अधिक तालुका सूखे से प्रभावित बताए गए हैं।

    जारी विज्ञप्ति के मुताबिक, नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण ने महाराष्ट्र के लिए कुल 10 TMC पानी आवंटित किया है. इसमें से 5 TMC पानी डायवर्जन नहर के जरिए दिया जाएगा, जबकि बाकी 5 TMC पानी गुजरात के उकाई बांध से उपलब्ध कराया जाएगा।

    मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बैठक में उकाई बांध से 5 TMC पानी छोड़े जाने की मंजूरी मांगी. उन्होंने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ हुई पिछली बैठक में महाराष्ट्र को उसके हिस्से का पानी देने का निर्णय लिया गया था।


    सीआर पाटिल ने दिए जरूरी निर्देश

    विज्ञप्ति के अनुसार, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने बैठक में आवश्यक निर्देश दिए. बैठक में नर्मदा जल बंटवारे और महाराष्ट्र को उसके निर्धारित हिस्से का पानी उपलब्ध कराने से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।

    वर्चुअल माध्यम से आयोजित बैठक में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के अलावा गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा भी शामिल हुए।


    सूखे के बीच पानी की मांग

    महाराष्ट्र में सूखे की गंभीर स्थिति के बीच पानी की उपलब्धता का मुद्दा अहम हो गया है. जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि राज्य के 80 प्रतिशत से अधिक तालुका सूखे से प्रभावित हैं. ऐसे में नर्मदा जल बंटवारे के तहत निर्धारित पानी उपलब्ध होने से राज्य की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलने की उम्मीद है. हालांकि, पानी की आपूर्ति कब शुरू होगी और इसका वितरण किन क्षेत्रों में किया जाएगा, इसकी विस्तृत जानकारी विज्ञप्ति में नहीं दी गई है।


    नर्मदा परियोजना की जिम्मेदारियों पर भी चर्चा

    बैठक के दौरान फडणवीस ने नर्मदा परियोजना के तहत महाराष्ट्र की जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी भी दी. अब उकाई बांध से पानी छोड़े जाने की प्रक्रिया, आपूर्ति का समय और संबंधित व्यवस्थाओं पर आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।

  • महाराष्ट्र में इंटर्न डॉक्टरों का प्रदर्शन, 18 हजार का स्टाइपेंड बढ़ाकर 30 हजार करने की मांग, 2 नवंबर से हड़ताल की चेतावनी

    महाराष्ट्र में इंटर्न डॉक्टरों का प्रदर्शन, 18 हजार का स्टाइपेंड बढ़ाकर 30 हजार करने की मांग, 2 नवंबर से हड़ताल की चेतावनी

    नई दिल्ली । महाराष्ट्र में इंटर्न डॉक्टरों ने मासिक स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन तेज कर दिया है। गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 को मुंबई के जे.जे. अस्पताल में एसोसिएशन ऑफ स्टेट मेडिकल इंटर्न्स (ASMI) के बैनर तले सैकड़ों इंटर्न डॉक्टरों ने प्रदर्शन किया। उनकी प्रमुख मांग है कि मौजूदा मासिक स्टाइपेंड 18,000 रुपये से बढ़ाकर 30,000 रुपये किया जाए। डॉक्टरों ने राज्य सरकार को चेतावनी दी है कि यदि 1 नवंबर तक उनकी मांग पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो वे 2 नवंबर से हड़ताल शुरू कर देंगे। हालांकि, प्रस्तावित हड़ताल के दौरान आपातकालीन सेवाएं जारी रखने की बात कही गई है।

    प्रदर्शन कर रहे डॉक्टरों का कहना है कि महाराष्ट्र में इंटर्न डॉक्टरों को मिलने वाला स्टाइपेंड दूसरे राज्यों की तुलना में कम है। उनके मुताबिक, उत्तर प्रदेश, बिहार और कई अन्य राज्यों में इंटर्न डॉक्टरों को 25,000 रुपये या उससे अधिक मासिक मानदेय दिया जा रहा है। इसके विपरीत, महाराष्ट्र में उन्हें 18,000 रुपये ही मिलते हैं। डॉक्टरों ने कहा कि मुंबई जैसे महंगे महानगर में आवास, भोजन और रोजमर्रा की जरूरतों पर खर्च काफी अधिक है। ऐसे में मौजूदा स्टाइपेंड से जीवनयापन करना मुश्किल हो रहा है। उनका तर्क है कि काम की जिम्मेदारियों और मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए मानदेय बढ़ाना जरूरी है।

    एसोसिएशन ऑफ स्टेट मेडिकल इंटर्न्स के महासचिव डॉ. रमन पवार ने बताया कि स्टाइपेंड बढ़ाने का मुद्दा वर्ष 2024 से लंबित है। उस समय भी इंटर्न डॉक्टरों ने प्रदर्शन कर मासिक स्टाइपेंड 30,000 रुपये करने की मांग उठाई थी, लेकिन उनके अनुसार सरकार की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। अब डॉक्टरों ने एक बार फिर इसी मांग को लेकर आंदोलन शुरू किया है।

    डॉ. पवार के मुताबिक, संगठन ने अगस्त से अक्टूबर के बीच राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों को कई पत्र भेजे। इनमें शिक्षा मंत्री, प्रधान सचिव, उपमुख्यमंत्री, मुख्यमंत्री और मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव सहित अन्य अधिकारियों को मांग से अवगत कराया गया। सितंबर में भी अनुरोध पत्र भेजकर सरकार को जवाब देने के लिए 15 से 20 दिन का समय दिया गया था। इसके बाद 5 अक्टूबर को पुनर्विचार के लिए एक और पत्र सौंपा गया। संगठन का कहना है कि इसके बाद भी करीब 10 दिन तक इंतजार करने के बावजूद कोई ठोस जवाब नहीं मिला।

    डॉक्टरों ने बताया कि अधिकारियों से मुलाकात की कोशिश भी की गई और दो बार बातचीत हुई, लेकिन उन्हें केवल आश्वासन मिले। किसी निश्चित बैठक या निर्णय की जानकारी नहीं दी गई। इसी वजह से मामला अब तक लंबित है। संगठन के अनुसार, यह आंदोलन सिर्फ मुंबई तक सीमित नहीं है, बल्कि महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों के इंटर्न डॉक्टर भी इसमें शामिल हैं।

    अस्पताल प्रशासन के स्तर पर भी इस मुद्दे को उठाया गया है। डॉ. पवार ने बताया कि पिछले तीन महीनों में डीन को तीन बार पत्र दिए गए। डीन की ओर से स्टाइपेंड बढ़ाने का प्रस्ताव चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान निदेशालय (DMER) को भेजा गया है। संगठन ने भी इसी अवधि में डीएमईआर को लगभग छह पत्र सौंपे हैं। डॉ. पवार के अनुसार, प्रस्ताव आगे भेजे जाने के बावजूद अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मामला वित्त मंत्रालय तक पहुंच चुका है, तो फैसला लेने में देरी क्यों हो रही है।

    फिलहाल इंटर्न डॉक्टरों ने अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखते हुए सरकार से 1 नवंबर तक निर्णय लेने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि तय समय सीमा तक स्टाइपेंड बढ़ाने पर ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो 2 नवंबर से हड़ताल शुरू की जाएगी। डॉक्टरों ने स्पष्ट किया है कि आंदोलन के दौरान आपातकालीन सेवाएं चालू रहेंगी। अब इस मामले में राज्य सरकार के फैसले पर नजर है, क्योंकि समय सीमा समाप्त होने पर अस्पतालों की नियमित सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका हो सकती है।

  • महाराष्ट्र के लातूर में युवक को निर्वस्त्र कर बेल्ट से पीटा, निजी अंगों पर पेट्रोल डालने के आरोप से मचा हड़कंप

    महाराष्ट्र के लातूर में युवक को निर्वस्त्र कर बेल्ट से पीटा, निजी अंगों पर पेट्रोल डालने के आरोप से मचा हड़कंप

    नई दिल्ली । महाराष्ट्र के लातूर में एक युवक के साथ बर्बरता से मारपीट करने का मामला सामने आया है। युवक को निर्वस्त्र कर बेल्ट से पीटा गया और उसके निजी अंगों पर पेट्रोल डालकर हमला किया गया। घटना का वीडियो हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, यह घटना करीब दो महीने पुरानी है।

    सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में कुछ लोग एक युवक को घेरकर उसके साथ मारपीट करते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में युवक के कपड़े उतारकर उसे बेल्ट से पीटते हुए देखा जा सकता है। हमलावर उस पर लात-घूंसे भी बरसाते नजर आ रहे हैं। आरोप है कि मारपीट के दौरान युवक के निजी अंगों पर पेट्रोल भी डाला गया। घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने वीडियो सामने आने के बाद मामले की पड़ताल शुरू कर दी है।

    बताया जा रहा है कि हमलावरों ने मारपीट की पूरी घटना को मोबाइल फोन से रिकॉर्ड किया था। इसके बाद वीडियो को सोशल मीडिया समूहों में साझा कर दिया गया, जहां से यह फैलता हुआ लोगों तक पहुंचा। वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस का ध्यान इस घटना की ओर गया और जांच की प्रक्रिया शुरू की गई।

    प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि युवक के साथ हुई यह घटना लगभग दो महीने पहले की है। मारपीट और हमले के बाद पीड़ित युवक कथित तौर पर उस जगह को छोड़कर चला गया था। घटना के बाद उसने पुलिस में शिकायत दर्ज नहीं कराई थी। अब वीडियो सामने आने के बाद पुलिस उसकी पहचान कर उससे संपर्क करने की कोशिश कर रही है, ताकि मामले से जुड़ी जानकारी जुटाई जा सके।

    एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। अधिकारी ने बताया कि पीड़ित युवक की पहचान कर ली गई है और उसे अपना बयान दर्ज कराने के लिए पुलिस स्टेशन आने को कहा गया है। पुलिस का मानना है कि पीड़ित का बयान दर्ज होने के बाद घटना से जुड़ी परिस्थितियों और अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं को समझने में मदद मिलेगी।

    फिलहाल पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि युवक पर हमला किस वजह से किया गया था। इसके साथ ही उन लोगों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है, जो कथित तौर पर मारपीट में शामिल थे। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि घटना का वीडियो रिकॉर्ड करने और उसे सोशल मीडिया पर प्रसारित करने में किन लोगों की भूमिका रही।

    इस मामले में अभी तक पीड़ित की ओर से औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। ऐसे में पुलिस की जांच में उसका बयान अहम माना जा रहा है। बयान दर्ज होने के बाद ही हमले की वजह, घटनाक्रम और इसमें शामिल लोगों के संबंध में अधिक स्पष्ट जानकारी सामने आ सकेगी। फिलहाल पुलिस वायरल वीडियो और उपलब्ध शुरुआती जानकारी के आधार पर मामले की जांच कर रही है।

  • CM फडणवीस से बैठक के बाद MPSC छात्रों का 2 अक्टूबर का आंदोलन स्थगित, ऑफलाइन परीक्षा और जांच की मांग पर बनी सहमति

    CM फडणवीस से बैठक के बाद MPSC छात्रों का 2 अक्टूबर का आंदोलन स्थगित, ऑफलाइन परीक्षा और जांच की मांग पर बनी सहमति

    नई दिल्ली। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग यानी MPSC के छात्र प्रतिनिधिमंडल के बीच 30 सितंबर 2026 को हुई बैठक के बाद 2 अक्टूबर को प्रस्तावित छात्रों का आंदोलन फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। बैठक में छात्रों की विभिन्न मांगों पर विस्तार से चर्चा हुई और मुख्यमंत्री की ओर से कई मांगों पर सकारात्मक आश्वासन दिया गया। इस दौरान फडणवीस ने स्पष्ट किया कि MPSC की परीक्षाएं ऑफलाइन ही आयोजित की जाएंगी। परीक्षा प्रणाली में किसी तरह का बदलाव सभी छात्र संगठनों और संबंधित पक्षों से चर्चा किए बिना नहीं किया जाएगा। छात्रों की ओर से आयोग के पूर्व और वर्तमान अध्यक्षों तथा सदस्यों को हटाने की मांग भी रखी गई थी।

    बैठक में MPSC सचिव के तबादले और आयोग के कामकाज से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि MPSC अध्यक्ष का पद संवैधानिक है और राज्य सरकार या राज्यपाल को अध्यक्ष को हटाने का अधिकार नहीं है। अध्यक्ष को हटाने का अधिकार राष्ट्रपति के पास है और यह प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट की सलाह के आधार पर होती है। छात्रों ने आयोग के पूर्व और वर्तमान अध्यक्षों तथा सदस्यों के आचरण को लेकर शिकायतें रखी थीं। इन शिकायतों के संबंध में मुख्यमंत्री ने कहा कि तीन महीने के भीतर न्यायिक जांच कराई जाएगी। जांच में सामने आने वाले निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। इस तरह छात्रों की ओर से उठाए गए पदाधिकारियों के आचरण और आयोग के कामकाज से जुड़े मुद्दे पर जांच का आश्वासन दिया गया।

    MPSC छात्रों की मांगों में परीक्षा व्यवस्था और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े मुद्दे भी शामिल थे। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि आगामी MPSC परीक्षाएं ऑफलाइन ही होंगी और परीक्षा के तरीके में बदलाव से पहले सभी संबंधित पक्षों से चर्चा की जाएगी। भर्ती को लेकर भी सरकार की ओर से अधिक संख्या में रिक्त पदों को भरने की बात कही गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने आगामी परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर रिक्तियों को शामिल करने और रिकॉर्ड संख्या में पद भरने का आश्वासन दिया है। विशेष रूप से 3 जनवरी को होने वाली ग्रुप सी परीक्षा में बड़ी संख्या में रिक्त पद शामिल किए जाने की बात कही गई। छात्रों की मांग के अनुसार भर्ती प्रक्रिया में रिक्तियों की संख्या बढ़ाने पर भी चर्चा हुई।

    मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य में बड़ी संख्या में रिक्त पदों को भरने की योजना बनाई गई है। सरकार की ओर से भर्ती प्रक्रिया से जुड़े नियमों में बदलाव की दिशा में काम किए जाने की जानकारी दी गई। बैठक के दौरान छात्रों की उन मांगों पर भी चर्चा हुई, जिनका संबंध आयोग के कामकाज और भर्ती प्रक्रिया को अधिक स्पष्ट तरीके से आगे बढ़ाने से है। छात्रों ने पूर्व और वर्तमान MPSC अध्यक्षों तथा सदस्यों के खिलाफ कार्रवाई की मांग रखी थी, जबकि सरकार की ओर से इस मामले में न्यायिक जांच के बाद निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई का आश्वासन दिया गया।

    मुख्यमंत्री के साथ हुई इस बैठक के बाद MPSC छात्र प्रतिनिधिमंडल ने 2 अक्टूबर को प्रस्तावित आंदोलन को फिलहाल स्थगित करने का फैसला किया। बैठक में छात्रों की प्रमुख मांगों पर चर्चा और सरकार की ओर से दिए गए आश्वासनों के बाद यह निर्णय लिया गया। इस दौरान परीक्षा प्रणाली को ऑफलाइन रखने, आयोग के पदाधिकारियों के आचरण की तीन महीने में न्यायिक जांच कराने और भर्ती प्रक्रिया में रिक्त पदों को बड़े स्तर पर शामिल करने जैसे मुद्दों पर सरकार का रुख स्पष्ट किया गया। छात्रों की ओर से रखी गई मांगों और मुख्यमंत्री के साथ हुई बातचीत के बाद 2 अक्टूबर का प्रस्तावित आंदोलन फिलहाल टाल दिया गया है।

  • महाराष्ट्र में सूखे का गहराता संकट: 80% फसलें तबाह, जलाशयों में 12% पानी

    महाराष्ट्र में सूखे का गहराता संकट: 80% फसलें तबाह, जलाशयों में 12% पानी


    मुंबई। महाराष्ट्र के मराठवाड़ा में इस बार बारिश की कमी ने खरीफ की फसलों को बर्बाद कर दिया है। लातूर, बीड और धाराशिव समेत प्रभावित इलाकों में करीब 80 फीसदी फसलें सूख चुकी हैं, जबकि लातूर जिले के 158 जलाशयों में औसत जल भंडारण महज 12.5 फीसदी रह गया है। किसान अब सिर्फ मौजूदा फसल के नुकसान से नहीं, बल्कि अगली फसल के लिए पूंजी जुटाने और परिवार का खर्च चलाने के संकट से भी जूझ रहे हैं।

    आसमान से देखने पर मराठवाड़ा के कई हिस्से भले ही हरे दिखाई दें, लेकिन जमीन पर पहुंचते ही सूखे की भयावह तस्वीर सामने आती है। खेतों में सोयाबीन पीली पड़ चुकी है, कपास की बढ़वार रुक गई है, अरहर मुरझा गई है और गन्ना अपनी सामान्य ऊंचाई तक पहुंचने से पहले ही सूखने लगा है। लातूर, बीड और धाराशिव के आसपास बारिश की बेरुखी ने किसानों की खरीफ की उम्मीदों को बड़ा झटका दिया है।

    खर्च भी नहीं निकलने की चिंता

    मराठवाड़ा में लातूर, बीड, परभणी और धाराशिव सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में हैं। जून से सितंबर के बीच इन इलाकों में सामान्य बारिश 679.5 मिमी के मुकाबले सिर्फ 424.5 मिमी बारिश दर्ज हुई। बारिश की कमी का असर केवल खेतों तक सीमित नहीं है। पशुओं के चारे, ग्रामीण मजदूरी, घरेलू आमदनी और अगली फसल के लिए जरूरी पूंजी पर भी इसका असर दिखाई देने लगा है।

    लातूर जिले के देवकरा गांव में पहली बार किसी किसान की आत्महत्या का मामला सामने आया है। दो एकड़ जमीन के काश्तकार तुकाराम गुट्टे ने आत्महत्या कर ली। कीनगांव से आगे बढ़ने पर खेतों में खड़ी फसलों के बजाय सूखे का असर साफ दिखाई देता है। सोयाबीन, कपास और अरहर की फसलें सूख रही हैं।

    हिंगणगांव के किसान तुकाराम अंबाजी करीब 40 एकड़ में खेती करते हैं। उन्होंने फसल पर प्रति एकड़ 30 से 35 हजार रुपए खर्च किए हैं। उनका कहना है कि मौजूदा हालात देखकर ऐसा लगता है कि फसल से लागत निकलना भी मुश्किल होगा।

    डेढ़ लाख खर्च कर बोई फसल, हटाने में भी 40 हजार लगेंगे

    हगदल गांव के किसान बालाजी मुंडे गन्ने के खेत की ओर इशारा करते हुए बताते हैं कि सामान्य स्थिति में गन्ना 20 से 25 फुट तक ऊंचा होता है, लेकिन इस बार 10 से 12 फुट पर ही उसकी बढ़वार रुक गई है। अब फसल सूखने लगी है।

    मुंडे के मुताबिक, वर्ष 2025 में ज्यादा बारिश ने परेशान किया था और इस साल बारिश की कमी ने संकट खड़ा कर दिया है। सावरगांव रोकड़े के किसान राम बेल्लाडे सोयाबीन, अरहर और ज्वार की खेती करते हैं। उन्होंने आठ एकड़ की फसल पर करीब डेढ़ लाख रुपए खर्च किए हैं।

    अब स्थिति यह है कि यदि फसल पूरी तरह खराब हो जाती है तो खेत साफ करने के लिए भी प्रति एकड़ करीब 5 हजार रुपए खर्च करने पड़ेंगे। यानी आठ एकड़ की फसल हटाने में करीब 40 हजार रुपए और लगेंगे। बेल्लाडे के मुताबिक, फसल में कुछ बचा तो वह सिर्फ मवेशियों के चारे के काम आएगा।

    नदियां सूखीं, जलाशयों में सिर्फ 12.5% पानी

    लातूर और बीड जिलों में तालाबों और जलाशयों में पानी का स्तर भी तेजी से नीचे गया है। लातूर की जीवनवाहिनी मानी जाने वाली माजरा नदी भी सूखने की स्थिति में पहुंच गई है। लातूर शहर से करीब 70 किलोमीटर दूर धाराशिव और बीड की सीमा के पास स्थित माजरा बांध का जलस्तर बेहद नीचे पहुंच चुका है।

    लातूर जिले के 158 जलाशयों में औसत स्टोरेज करीब 12.5 फीसदी ही बचा है। क्षेत्र का नवाबकालीन साइ डैम भी इसी जल इतिहास का हिस्सा है। स्थानीय पत्रकार शशिकांत पाटिल बताते हैं कि कभी साइ डैम के पानी से लातूर की प्यास बुझती थी, लेकिन अब यह इस्तेमाल में नहीं है। उनका कहना है कि जल रिसाव रोकने और पानी के बेहतर प्रबंधन पर पर्याप्त ध्यान दिया जाता तो संकट की तीव्रता कुछ कम की जा सकती थी।

    बुआई से अब फसल हटाने तक पहुंचा संकट

    लातूर और आसपास के किसानों से बातचीत में वर्ष 1972 का सूखा बार-बार सामने आता है। पूर्व जिला परिषद सदस्य त्र्यंबक नारायण गुट्टे इसे 1972 के बाद की सबसे गंभीर सूखा परिस्थितियों में से एक मानते हैं।

    इस बार संकट के संकेत मानसून के शुरुआती महीनों में ही दिखाई देने लगे थे। पहले किसानों के सामने बुआई का संकट था। इसके बाद बारिश की कमी के बीच खड़ी फसल को बचाने की चुनौती आई। अब तीसरा और सबसे गंभीर चरण सामने है—खराब हो चुकी फसल को खेत से हटाना और अगली खेती के लिए पूंजी जुटाना।

    किसानों के लिए समस्या सिर्फ इस साल की फसल के नुकसान तक सीमित नहीं है। यदि मौजूदा फसल से लागत नहीं निकलती और अगली बुआई के लिए पैसा नहीं बचता है तो इसका असर अगले कृषि चक्र पर भी पड़ सकता है।

    राहत के लिए 50 हजार करोड़ तक का बोझ

    महाराष्ट्र सरकार ने सूखा प्रभावित इलाकों में राहत प्रक्रिया शुरू करने की दिशा में कदम उठाए हैं। सितंबर के अंत में राज्य के 265 तालुकों के बाद 43 और तालुकों को सूखा प्रभावित सूची में जोड़ा गया है। फसल नुकसान के पंचनामे, पानी और चारे की व्यवस्था समेत राहत उपायों पर चर्चा हुई है।

    अधिकारियों का अनुमान है कि सूखे से निपटने के लिए सरकारी खजाने पर करीब 50 हजार करोड़ रुपए का अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। हालांकि किसानों के सामने राहत की जरूरत तत्काल है। फसल नुकसान की भरपाई, पीने और खेती के लिए पानी, पशुओं के लिए चारा उपलब्ध कराने के साथ ही अगली फसल तक परिवार का खर्च चलाने के लिए आय का सहारा भी जरूरी है।

    मराठवाड़ा के खेतों में सूखती फसलें इस संकट की सबसे साफ तस्वीर पेश कर रही हैं। किसानों के लिए अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि इस सीजन की फसल कितनी बची, बल्कि यह भी है कि अगली खेती शुरू करने के लिए वे पूंजी कहां से जुटाएंगे।

  • महाराष्ट्र में SIR को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट पहुंचा मामला, ज्ञानेश कुमार के 14 फैसलों को चुनौती देने वाली याचिकाएं दाखिल

    महाराष्ट्र में SIR को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट पहुंचा मामला, ज्ञानेश कुमार के 14 फैसलों को चुनौती देने वाली याचिकाएं दाखिल

    नई दिल्ली । महाराष्ट्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर बॉम्बे हाई कोर्ट में दो याचिकाएं दाखिल की गई हैं। इनमें से एक याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल के पिछले करीब दस महीनों के दौरान लिए गए 14 प्रशासनिक फैसलों और कार्रवाइयों को चुनौती दी गई है। याचिका में इन फैसलों को रद्द करने के साथ ही SIR के दौरान हटाए गए मतदाताओं के नाम बहाल करने की मांग की गई है।

    याचिका में दावा किया गया है कि इन 14 मामलों में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से औपचारिक आपत्तियां दर्ज कराई गई थीं। याचिकाकर्ताओं ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता पंजीकरण, नाम हटाने और बहाल करने, मतदाता सूची के डेटाबेस, चुनाव पंजीकरण अधिकारियों तथा तकनीकी व्यवस्था से जुड़े कई फैसलों पर सवाल उठाए हैं। हालांकि, याचिका में लगाए गए आरोपों पर अदालत की ओर से अभी कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया गया है।

    याचिका में मतदाता सूची तैयार करने और उसके प्रबंधन से जुड़े विभिन्न प्रशासनिक फैसलों को चुनौती दी गई है। इसमें फॉर्म-6 में बदलाव, मतदाता पंजीकरण की प्रक्रिया, मतदाताओं के नाम हटाने और फिर बहाल करने तथा चुनावी डेटाबेस के प्रबंधन से जुड़े मुद्दे शामिल हैं। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि कुछ फैसले दोनों अन्य चुनाव आयुक्तों की जानकारी या मंजूरी के बिना लिए गए थे।

    महाराष्ट्र में चल रही SIR प्रक्रिया को लेकर भी याचिका में कई मांगें रखी गई हैं। इसमें प्रक्रिया के दौरान हटाए गए मतदाताओं के नाम बहाल करने और SIR पर रोक लगाने की मांग शामिल है। इसके अलावा उन राज्यों में आगामी विधानसभा चुनाव स्थगित करने की मांग की गई है, जहां SIR प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। यह मांग तब तक के लिए की गई है, जब तक नई और कानूनी प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची तैयार नहीं हो जाती।

    याचिकाकर्ताओं ने पूरे मामले की जांच के लिए स्वतंत्र न्यायिक समिति गठित करने की मांग भी की है। इसके साथ ही संविधान के अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 326 से जुड़े सवाल उठाए गए हैं। याचिका में मतदाता सूची में पात्र नागरिकों के नाम सुरक्षित रखने और गलत तरीके से नाम हटाए जाने से बचाने के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की गई है।

    दूसरी याचिका महाराष्ट्र में SIR के क्रियान्वयन से जुड़े सवालों पर केंद्रित है। इसमें SIR कराने के आदेश, उसके आधार और अपनाई जा रही प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए गए हैं। याचिका में कहा गया है कि चुनाव आयोग मतदाता की चुनावी पात्रता का आकलन कर सकता है, लेकिन किसी व्यक्ति की नागरिकता पर अंतिम निर्णय करने का अधिकार उसके पास नहीं है।

    याचिका में यह भी आरोप लगाया गया है कि SIR के दौरान कुछ बूथ लेवल अधिकारी लोगों से फॉर्म लेते समय सहायक दस्तावेज मांग रहे हैं। याचिकाकर्ताओं ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए पात्र मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए जाने से बचाने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश और सुरक्षा उपायों की मांग की है।

    मामले की सुनवाई 28 सितंबर को होने की संभावना है। दोनों याचिकाएं अलग-अलग पीठों के समक्ष सूचीबद्ध हो सकती हैं। फिलहाल अदालत ने याचिकाओं में लगाए गए आरोपों और मांगों पर कोई अंतिम फैसला नहीं दिया है। आगे की सुनवाई में संबंधित पक्षों के तर्क और अदालत की कार्यवाही के बाद मामले की स्थिति स्पष्ट होगी।

  • 500 करोड़ के मानहानि नोटिस पर आदित्य ठाकरे का 25 पेज में जवाब, माफी मांगने और पोस्ट हटाने से किया इनकार

    500 करोड़ के मानहानि नोटिस पर आदित्य ठाकरे का 25 पेज में जवाब, माफी मांगने और पोस्ट हटाने से किया इनकार

    नई दिल्ली ।शिवसेना यूबीटी नेता आदित्य ठाकरे ने दिवंगत दिशा सालियान के पिता सतीश सालियान की ओर से भेजे गए 500 करोड़ रुपये के मानहानि नोटिस का 25 पन्नों में जवाब दिया है। जवाब में आदित्य ठाकरे ने नोटिस में लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए माफी मांगने, सोशल मीडिया पोस्ट हटाने और 500 करोड़ रुपये का मुआवजा देने से इनकार किया है।

    कानूनी जवाब के मुताबिक, 16 सितंबर 2026 को आदित्य ठाकरे के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से अंग्रेजी और मराठी में किए गए दो पोस्ट में सतीश सालियान का नाम नहीं लिया गया था। जवाब में यह भी कहा गया है कि पोस्ट में ऐसा कोई स्पष्ट संदर्भ नहीं था, जिससे सतीश सालियान की पहचान की जा सके।

    आदित्य ठाकरे की ओर से यह भी दोहराया गया है कि वह दिशा सालियान से कभी मिले या उन्हें जानते तक नहीं थे। उन्होंने अपने इस बयान पर कायम रहने की बात कही है। कानूनी जवाब में कहा गया है कि संबंधित पोस्ट का उद्देश्य किसी व्यक्ति को बदनाम करना नहीं था।

    जवाब में दावा किया गया है कि दोनों पोस्ट का संदर्भ उनके नाम को दिशा सालियान की मौत से जोड़ने वाले लंबे समय से चल रहे राजनीतिक और मीडिया अभियान से था। इसमें कहा गया कि कुछ व्यक्तियों और कथित हित समूहों की ओर से उनके नाम को इस मामले से जोड़ने की कोशिशों पर सवाल उठाए गए थे।

    सतीश सालियान की ओर से भेजे गए नोटिस में आदित्य ठाकरे के बयानों और मामले से जुड़े उनके सोशल मीडिया पोस्ट पर आपत्ति जताई गई थी। नोटिस में पोस्ट हटाने, सार्वजनिक रूप से माफी मांगने और अंग्रेजी तथा मराठी में माफीनामा प्रकाशित करने की मांग की गई थी।

    आदित्य ठाकरे के जवाब में इन सभी मांगों को अस्वीकार कर दिया गया है। उनकी ओर से कहा गया है कि संबंधित पोस्ट में कोई झूठा या मानहानिकारक बयान नहीं दिया गया। 500 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग को भी जवाब में खारिज किया गया है।

    कानूनी जवाब में यह भी कहा गया है कि किसी मामले में जांच शुरू होना अपने आप में किसी व्यक्ति की संलिप्तता या अपराध साबित नहीं करता। जवाब में जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचने की बात कही गई है।

    दिशा सालियान की मौत जून 2020 में मुंबई के मलाड इलाके में एक इमारत से गिरने के बाद हुई थी। उनकी मौत के बाद इस मामले को लेकर अलग-अलग तरह के दावे सामने आए और इसे लेकर लंबे समय से जांच तथा कानूनी प्रक्रिया चलती रही है।

    आदित्य ठाकरे की ओर से कहा गया है कि वह दिशा सालियान के पिता के साथ व्यक्तिगत विवाद में नहीं पड़ना चाहते। साथ ही उन्होंने मामले की जांच को तथ्यों के आधार पर आगे बढ़ने देने की बात कही है।

    25 पन्नों के जवाब में नोटिस वापस लेने की मांग भी की गई है। इस तरह 500 करोड़ रुपये के मानहानि नोटिस पर दोनों पक्षों के बीच कानूनी विवाद अब आगे बढ़ने की स्थिति में है। फिलहाल आदित्य ठाकरे ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट वापस लेने या माफी मांगने से साफ इनकार कर दिया है।

  • भाजपा में जाने की तैयारी कर चुके थे राहुल बोंडरे, फिर राहुल गांधी के एक फोन से बदल गया पूरा राजनीतिक घटनाक्रम

    भाजपा में जाने की तैयारी कर चुके थे राहुल बोंडरे, फिर राहुल गांधी के एक फोन से बदल गया पूरा राजनीतिक घटनाक्रम

    नई दिल्ली ।महाराष्ट्र में कांग्रेस के पूर्व विधायक राहुल बोंडरे के भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने की चर्चाओं के बीच राजनीतिक घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया। बोंडरे के भाजपा में जाने की तैयारी की खबरों के बाद कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने उनसे फोन पर बातचीत की। इसके बाद बोंडरे के अपने फैसले पर दोबारा विचार करने की बात सामने आई है।

    राहुल बोंडरे बुलढाना जिले के चिखली विधानसभा क्षेत्र से पूर्व विधायक रह चुके हैं। पिछले कुछ समय से उनके भाजपा में शामिल होने की अटकलें चल रही थीं। बताया गया कि उन्होंने सोशल मीडिया पर लाइव प्रसारण के दौरान भाजपा में जाने का फैसला सार्वजनिक भी किया था।

    इस दौरान उन्होंने कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल और पार्टी के अन्य नेताओं का धन्यवाद भी किया था। बोंडरे इससे पहले भी दो बार भाजपा में जाने के संकेत दे चुके थे। इसलिए उनके संभावित दल-बदल को महाराष्ट्र कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम के तौर पर देखा जा रहा था।

    इसी बीच राहुल गांधी का बोंडरे से फोन पर संपर्क हुआ। बातचीत के दौरान राहुल गांधी ने उनकी पार्टी के लिए भूमिका और योगदान की सराहना की तथा उनसे कांग्रेस में बने रहने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि पार्टी को बोंडरे की जरूरत है और उन्हें अपने फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए।

    बातचीत के बाद बोंडरे ने राहुल गांधी के फोन का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने उनकी सुध ली। उन्होंने यह भी कहा कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, वह कांग्रेस के लिए काम करते रहेंगे। इस घटनाक्रम के बाद उनके भाजपा में शामिल होने की योजना फिलहाल बदलती हुई दिखाई दी।

    राहुल गांधी और राहुल बोंडरे के बीच बातचीत का एक वीडियो भी सामने आया है। हालांकि, इस वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। वीडियो में दोनों नेताओं के बीच बातचीत होती दिखाई देती है और बोंडरे कांग्रेस में बने रहने की बात कहते नजर आते हैं।

    बोंडरे के भाजपा में शामिल होने की संभावित तारीख को लेकर भी चर्चा सामने आई थी। चिखली से भाजपा विधायक श्वेता महाले ने उनके भाजपा में शामिल होने की बात कही थी। यह भी बताया गया था कि 22 सितंबर को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की मौजूदगी में उन्हें पार्टी में शामिल कराया जा सकता है। हालांकि, बाद के घटनाक्रम में बोंडरे के रुख में बदलाव की बात सामने आई।

    बोंडरे ने 2024 का विधानसभा चुनाव चिखली सीट से लड़ा था। इस चुनाव में उनका मुकाबला श्वेता महाले से हुआ था। वह करीब 3,702 मतों के अंतर से चुनाव हार गए थे। इसके बाद भी दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक मुकाबला क्षेत्र में चर्चा का विषय रहा है।

    महाराष्ट्र में हाल के दिनों में नेताओं के संभावित दल-बदल को लेकर लगातार राजनीतिक चर्चाएं चल रही हैं। सितंबर की शुरुआत में शिवसेना के कुछ विधायकों के दूसरे गुट के संपर्क में होने के दावे भी सामने आए थे।

    शिवसेना विधायक मुर्जी पटेल ने दावा किया था कि उद्धव ठाकरे गुट के 14 विधायक एकनाथ शिंदे गुट के संपर्क में हैं और आने वाले दिनों में उनके शामिल होने की संभावना है। उन्होंने इसे संभावित ‘ऑपरेशन टाइगर’ से जोड़कर भी बताया था।

    हालांकि, इन दावों पर संबंधित विधायकों की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई थी और उनके नाम भी सार्वजनिक नहीं किए गए थे। इससे पहले उद्धव ठाकरे गुट के पांच सांसदों के दूसरे गुट में शामिल होने की बात सामने आ चुकी थी। ऐसे राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच राहुल बोंडरे का मामला महाराष्ट्र की राजनीति में चर्चा का नया विषय बन गया है।

  • महाराष्ट्र के BJP मंत्री की भतीजी नीला विखे पाटिल बनीं स्वीडन की सांसद, स्टॉकहोम सिटी से जीता चुनाव

    महाराष्ट्र के BJP मंत्री की भतीजी नीला विखे पाटिल बनीं स्वीडन की सांसद, स्टॉकहोम सिटी से जीता चुनाव


    स्टॉकहोम सिटी। महाराष्ट्र के BJP मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटिल की भतीजी नीला विखे पाटिल ने स्वीडन की राजनीति में अहम मुकाम हासिल किया है। ग्रीन पार्टी की नेता नीला ने स्टॉकहोम सिटी से चुनाव जीतकर 349 सदस्यीय स्वीडिश संसद में जगह बनाई है। चुनाव परिणाम के बाद उन्होंने अपने परिवार, खासकर अपने दादा और पूर्व केंद्रीय मंत्री बालासाहेब विखे पाटिल से जुड़ी यादें साझा कीं।

    अहमदनगर में बीता बचपन, महाराष्ट्र से आज भी गहरा जुड़ाव

    नीला का जन्म स्वीडन में हुआ, लेकिन उनके बचपन के शुरुआती साल महाराष्ट्र के अहमदनगर में बीते। बाद में वह स्वीडन लौट गईं और वहीं से उन्होंने राजनीति में अपना सफर आगे बढ़ाया। महाराष्ट्र से उनका पारिवारिक रिश्ता कई पीढ़ियों पुराना है। उनके दादा बालासाहेब विखे पाटिल पूर्व केंद्रीय मंत्री रहे हैं, जबकि पिता अशोक विखे पाटिल शिक्षाविद हैं। उनके चाचा राधाकृष्ण विखे पाटिल महाराष्ट्र सरकार में मंत्री हैं।

    चुनाव जीतने के बाद नीला ने अपने दादा को याद करते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद है कि बालासाहेब विखे पाटिल को उन पर गर्व होता। उन्होंने बताया कि जब वह 15 साल की थीं, तब उनके दादा उन्हें महाराष्ट्र का बजट पढ़ने के लिए दिया करते थे। नीला ने अपने दादा के साथ बिताए आखिरी वर्षों की याद भी साझा की। उन्होंने बताया कि उस दौरान उनके दादा लगभग हर सप्ताह उन्हें फोन करते थे और अब उन्हें उनकी बहुत याद आती है।

    प्रधानमंत्री कार्यालय में भी कर चुकी हैं काम

    नीला विखे पाटिल कई वर्षों से स्वीडन की राजनीति में सक्रिय रही हैं। पूर्व प्रधानमंत्री स्टीफन लोफवेन के कार्यकाल में उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय में सलाहकार के तौर पर काम किया। इस दौरान वित्त, टैक्स और आवास से जुड़े विषयों पर उनकी जिम्मेदारी रही।

    इसके बाद वह स्टॉकहोम सिटी काउंसिल के लिए चुनी गईं। उन्होंने ग्रीन पार्टी की चुनाव समिति में भी काम किया। इसके अलावा वह स्वीडिश यंग ग्रीन्स और ग्रीन पार्टी की अन्य इकाइयों से जुड़ी रहीं।

    शिक्षा के क्षेत्र में भी नीला की पृष्ठभूमि विविध रही है। उन्होंने गोथेनबर्ग स्कूल ऑफ बिजनेस से अर्थशास्त्र और कानून की पढ़ाई की है। इसके साथ ही उन्होंने MBA की डिग्री हासिल की और मैड्रिड की कॉम्प्लूटेंस यूनिवर्सिटी में भी अध्ययन किया है।

    बच्चों के कल्याण और पर्यावरण पर रहेगा फोकस

    सांसद बनने के बाद नीला ने बच्चों के कल्याण और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल करने की बात कही है। उनका कहना है कि वह उन लोगों की आवाज बनना चाहती हैं, जो खुद वोट नहीं दे सकते। साथ ही वह स्टॉकहोम और पूरे स्वीडन के लिए योगदान देना चाहती हैं।

    भारत के साथ अपने रिश्ते पर भी नीला ने बात की। उन्होंने कहा कि वह भारत से बहुत प्यार करती हैं और देश से उनका गहरा जुड़ाव है। उनके कई करीबी दोस्त भी भारतीय हैं।

    सहकारिता आंदोलन से भी जुड़ा है विखे पाटिल परिवार

    नीला के परिवार का महाराष्ट्र की राजनीति और शिक्षा के साथ-साथ सहकारिता आंदोलन से भी पुराना संबंध रहा है। उनके परदादा विठ्ठलराव विखे पाटिल ने एशिया की पहली सहकारी चीनी मिल की स्थापना की थी। इसी वजह से परिवार की सामाजिक और सहकारी क्षेत्र में भी अलग पहचान रही है।

    स्वीडन में विपक्ष को तीन सीटों का बहुमत

    स्वीडन के चुनाव में वामपंथी विचारों वाली चार विपक्षी पार्टियों ने कुल 176 सीटें हासिल की हैं, जबकि मौजूदा रूढ़िवादी सरकार का समर्थन करने वाली पार्टियों को 173 सीटें मिली हैं। इस तरह विपक्षी दलों को तीन सीटों का अंतर मिला है।

    नतीजे सामने आने के बाद प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टरसन ने अपने इस्तीफे का ऐलान कर दिया। पूर्व प्रधानमंत्री मैग्डालेना एंडरसन की सोशल डेमोक्रेट्स पार्टी 99 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी है। हालांकि, विपक्षी दलों के बीच कई मुद्दों पर मतभेद हैं। ऐसे में नई सरकार बनाने के लिए एंडरसन को अलग-अलग दलों के साथ बातचीत करनी होगी।

  • महाराष्ट्र के आदिवासी छात्रावासों में छात्राओं की शिकायतें सामने आईं, दीपके ने 17 सितंबर से स्कूल सुधार अभियान शुरू किया

    महाराष्ट्र के आदिवासी छात्रावासों में छात्राओं की शिकायतें सामने आईं, दीपके ने 17 सितंबर से स्कूल सुधार अभियान शुरू किया

    नई दिल्ली ।महाराष्ट्र के नागपुर में आदिवासी छात्राओं ने छात्रावासों से जुड़ी कई समस्याएं सामने रखीं। अभिजीत दीपके के साथ हुई बातचीत के दौरान छात्राओं ने हॉस्टल में रहने की परिस्थितियों, बुनियादी सुविधाओं, छात्रवृत्ति, वॉशरूम और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी। कुछ छात्राओं ने आश्रम स्कूलों में कथित यौन शोषण और प्रेग्नेंसी टेस्ट कराए जाने को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए।

    बातचीत में विदर्भ और मराठवाड़ा क्षेत्र से आई कई छात्राओं ने अपने अनुभव साझा किए। छात्राओं का कहना था कि आदिवासी आवासीय स्कूलों और हॉस्टलों में उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कुछ छात्राओं ने आरोप लगाया कि हॉस्टल से जुड़ी व्यवस्थाओं में उनकी निजता और सुविधा का पर्याप्त ध्यान नहीं रखा जाता।

    भंडारा के एक आदिवासी हॉस्टल का मुद्दा भी बातचीत के दौरान सामने आया। एक छात्रा ने बताया कि वहां करीब 15 लड़कियों को एक ही कमरे में रखा जाता है। छात्राओं ने हॉस्टल में जगह की कमी के अलावा वॉशरूम से जुड़ी परेशानियों की भी जानकारी दी। उनके अनुसार, रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने से उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

    छात्राओं ने आश्रम स्कूलों में कथित तौर पर प्रेग्नेंसी टेस्ट कराए जाने का आरोप भी लगाया। उनका कहना था कि कुछ छात्राओं को ऐसी जांच से गुजरना पड़ता है। इस मुद्दे को लेकर छात्राओं ने अपनी नाराजगी और असहजता व्यक्त की। हालांकि, सामने रखे गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस जानकारी में नहीं हुई है।

    छात्राओं ने कथित यौन शोषण से जुड़े मामलों का भी उल्लेख किया। उनका आरोप था कि कुछ मामलों में मुख्य आरोपियों को बचाने के लिए आदिवासी समुदाय के बच्चों को ही आरोपी बनाया जा रहा है। छात्राओं ने ऐसी परिस्थितियों में निष्पक्ष जांच और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित किए जाने की जरूरत पर जोर दिया।

    हॉस्टल की समस्याओं में केवल सुरक्षा और जांच से जुड़े मुद्दे ही शामिल नहीं थे। छात्राओं ने छात्रवृत्ति, वॉशरूम और दूसरी बुनियादी सुविधाओं की कमी की शिकायत भी की। उनका कहना था कि सरकारी आदिवासी स्कूलों और आवासीय संस्थानों में विद्यार्थियों को पर्याप्त सुविधाएं मिलनी चाहिए, ताकि पढ़ाई और रहने के दौरान उन्हें अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।

    इन शिकायतों के बीच अभिजीत दीपके ने आदिवासी छात्रों के आंदोलन को समर्थन देने की बात कही। नागपुर स्थित आदिवासी विकास भवन में छात्र अपनी समस्याओं को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। छात्रों से उनकी परेशानियों और हॉस्टल की स्थिति से जुड़ी जानकारी साझा करने को कहा गया है। इसके लिए आपसी संपर्क और जानकारी जुटाने की व्यवस्था बनाने की बात भी कही गई।

    अभिजीत दीपके ने 17 सितंबर से ‘आदिवासी स्कूल ठीक करो’ अभियान शुरू करने की घोषणा की है। अभियान की शुरुआत महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले से करने की बात कही गई है। इसके तहत आदिवासी क्षेत्रों में संचालित स्कूलों और आवासीय विद्यालयों की स्थिति को सामने लाने का प्रयास किया जाएगा।

    उन्होंने आदिवासी विद्यार्थियों की समस्याओं और स्कूलों की स्थिति को लेकर सरकार की जिम्मेदारी का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि आदिवासी क्षेत्रों के स्कूलों को पर्याप्त संसाधन और सुविधाएं मिलनी चाहिए। उन्होंने आदिवासी विद्यार्थियों की सुरक्षा और शिक्षा से जुड़े मामलों को प्राथमिकता देने की जरूरत बताई।

    आदिवासी छात्राओं की ओर से सामने आई शिकायतों के बाद हॉस्टल की व्यवस्थाओं, बुनियादी सुविधाओं, छात्राओं की सुरक्षा और कथित प्रेग्नेंसी टेस्ट से जुड़े आरोपों पर ध्यान केंद्रित हुआ है। इन आरोपों की जांच और संबंधित व्यवस्थाओं में सुधार को लेकर आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी।