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  • बंगाल चुनाव रुझानों में बड़ा उलटफेर: भाजपा 194 सीटों पर आगे, वोट शेयर में 6% उछाल से बढ़ी जीत की लहर; TMC को भारी नुकसान का अनुमान

    बंगाल चुनाव रुझानों में बड़ा उलटफेर: भाजपा 194 सीटों पर आगे, वोट शेयर में 6% उछाल से बढ़ी जीत की लहर; TMC को भारी नुकसान का अनुमान


    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की 293 विधानसभा सीटों पर जारी मतगणना के बीच शुरुआती रुझानों ने राज्य की राजनीति में बड़ा हलचल मचा दिया है। एक सीट फालता पर 21 मई को पुनर्मतदान होना है, जबकि बाकी सीटों की गिनती जारी है।

    ताजा रुझानों के अनुसार Bharatiya Janata Party (भाजपा) 194 सीटों पर आगे चल रही है, जबकि All India Trinamool Congress (TMC) 94 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। वोट शेयर की बात करें तो भाजपा को लगभग 45% और टीएमसी को करीब 42% वोट मिलते दिख रहे हैं।

    वोट शेयर में बड़ा बदलाव
    पिछले चुनाव की तुलना में इस बार भाजपा के वोट शेयर में करीब 6% की बढ़ोतरी देखी जा रही है। इसी बदलाव का असर सीटों पर भी दिख रहा है, जहां भाजपा को लगभग 117 सीटों का फायदा मिलता दिख रहा है, जबकि टीएमसी को उतना ही नुकसान होने का अनुमान है।

    हाई-प्रोफाइल सीटों पर कड़ा मुकाबला
    राज्य की सबसे चर्चित भवानीपुर सीट पर मुख्यमंत्री Mamata Banerjee आगे चल रही हैं। चौथे राउंड की गिनती के बाद वह लगभग 8400 वोटों से आगे बताई जा रही हैं।

    वहीं नंदीग्राम सीट से भाजपा नेता Suvendu Adhikari पहले राउंड के बाद करीब 3100 वोटों से आगे चल रहे हैं, जिससे मुकाबला और भी रोचक हो गया है।

    कई सीटों पर रोचक बढ़त
    काकद्वीप में टीएमसी उम्मीदवार मंतूराम पाखीरा 2750 वोटों से आगे हैं, जबकि हावड़ा की अमता सीट पर भाजपा उम्मीदवार अमित सामंत 734 वोटों से बढ़त बनाए हुए हैं।

    आरजी कर मेडिकल कॉलेज मामले से जुड़ी भाजपा उम्मीदवार रत्ना देबनाथ भी अपने क्षेत्र में 2763 वोटों से आगे चल रही हैं।

    जश्न और राजनीतिक माहौल
    नादिया और अन्य कई जिलों में भाजपा समर्थकों के जश्न की तस्वीरें सामने आई हैं। कार्यकर्ताओं ने ढोल-नगाड़ों के साथ खुशी जताई और इसे “बड़े बदलाव का संकेत” बताया।

    प्रशासन की निगरानी और सफाई
    मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कंट्रोल रूम से पूरे राज्य की मतगणना पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। वहीं कूड़े में मिली VVPAT पर्चियों को लेकर अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि ये मॉक पोल की थीं और वास्तविक मतदान से उनका कोई संबंध नहीं है।

    कुल मिलाकर स्थिति
    शुरुआती रुझानों ने बंगाल चुनाव को बेहद रोमांचक मोड़ पर ला दिया है। भाजपा की बढ़त और वोट शेयर में उछाल ने राजनीतिक समीकरण बदल दिए हैं, हालांकि अंतिम नतीजों का इंतजार अभी जारी है।

  • बंगाल चुनाव रुझानों में बड़ा सियासी उलटफेर: भाजपा बहुमत की ओर, 192 सीटों पर बढ़त; वोट शेयर में 6% उछाल से बदला पूरा समीकरण

    बंगाल चुनाव रुझानों में बड़ा सियासी उलटफेर: भाजपा बहुमत की ओर, 192 सीटों पर बढ़त; वोट शेयर में 6% उछाल से बदला पूरा समीकरण


    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस समय बड़ा सियासी भूचाल देखने को मिल रहा है। 293 विधानसभा सीटों पर जारी मतगणना के शुरुआती रुझानों ने राजनीतिक माहौल को पूरी तरह गर्म कर दिया है। एक सीट फालता पर 21 मई को पुनर्मतदान होना है, जबकि बाकी सीटों की गिनती जारी है।

    ताजा रुझानों के अनुसार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) 192 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जबकि सत्ताधारीअखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) 92 सीटों पर आगे चल रही है। शुरुआती आंकड़ों में भाजपा को लगभग 45% और टीएमसी को करीब 42% वोट शेयर मिलता दिख रहा है।

    रुझानों ने इस बार चुनावी तस्वीर को काफी बदल दिया है। पिछले चुनाव की तुलना में भाजपा के वोट प्रतिशत में लगभग 6% की बढ़ोतरी देखी जा रही है। इसी बढ़त का सीधा असर सीटों पर भी पड़ा है, जहां भाजपा को लगभग 115 सीटों का फायदा मिलता दिख रहा है, जबकि टीएमसी को उतना ही नुकसान होने का अनुमान लगाया जा रहा है।

    हाई-प्रोफाइल सीटों पर कांटे की टक्कर
    राज्य की सबसे चर्चित सीट भवानीपुर में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी आगे चल रही हैं। यह सीट हमेशा से बंगाल की राजनीति का केंद्र मानी जाती रही है और इस बार भी यहां मुकाबला बेहद दिलचस्प रहा।वहीं, नंदीग्राम से जुड़े प्रमुख नेता सुवेंदु अधिकारी पीछे बताए जा रहे हैं, जिससे राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाएं तेज हो गई हैं।

    इसके अलावा झाड़ग्राम, बिनपुर, गोपीबल्लभपुर और नयाग्राम जैसी सीटों पर भाजपा मजबूत स्थिति में दिख रही है। इन इलाकों में पार्टी का प्रदर्शन खासा चर्चा का विषय बना हुआ है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुनावी सभाओं और रैलियों का असर माना जा रहा है।

    जश्न का माहौल और कार्यकर्ताओं की प्रतिक्रिया
    कई जगहों से भाजपा कार्यकर्ताओं के जश्न की तस्वीरें सामने आई हैं। नादिया और दुर्गापुर जैसे इलाकों में समर्थकों ने ढोल-नगाड़ों के साथ खुशी जताई। कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह परिणाम “बदलाव की शुरुआत” है और जनता ने इस बार बड़ा संदेश दिया है।कुछ कार्यकर्ताओं ने यह भी कहा कि पहले जहां चुनावी माहौल तनावपूर्ण होता था, अब वहां जीत की खुशी दिखाई दे रही है।

    प्रशासनिक सफाई भी सामने आई
    इस बीच राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने मतगणना के दौरान कूड़े में मिलीं VVPAT पर्चियों पर सफाई दी है। उन्होंने बताया कि ये पर्चियां मॉक पोल की थीं और इनका वास्तविक मतदान से कोई संबंध नहीं है। साथ ही जांच की प्रक्रिया भी जारी है ताकि किसी तरह की गलतफहमी न रहे।

    एक और बड़ा अपडेट
    आरजी कर मेडिकल कॉलेज मामले से जुड़ी भाजपा उम्मीदवार रत्ना देबनाथ भी अपने क्षेत्र में 2763 से अधिक वोटों से आगे चल रही हैं। यह नतीजा भी इस चुनावी रुझान को और ज्यादा सुर्खियों में ला रहा है।

    राजनीतिक प्रतिक्रिया तेज
    भाजपा नेताओं का कहना है कि जनता का रुझान स्पष्ट है और वोट शेयर में बढ़ोतरी इसका प्रमाण है। वहीं टीएमसी खेमे में अभी आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे बेहद अहम और निर्णायक रुझान मान रहे हैं।

    कुल मिलाकर, बंगाल चुनाव के शुरुआती रुझानों ने राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव दिखाया है। हालांकि अंतिम नतीजों तक तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट होना बाकी है, लेकिन फिलहाल मुकाबला बेहद रोचक और कांटे का बना हुआ है।

  • 4 मई से पहले अभेद्य रणनीति, ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी की बड़ी बैठक..

    4 मई से पहले अभेद्य रणनीति, ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी की बड़ी बैठक..

    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों से ठीक पहले सियासी सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है। 4 मई को होने वाली मतगणना से पहले तृणमूल कांग्रेस ने पूरी ताकत के साथ अपनी रणनीति को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री Mamata Banerjee और पार्टी के प्रमुख नेताओं ने यह साफ संकेत दे दिया है कि इस बार मतगणना के दिन किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसी उद्देश्य से एक अहम वर्चुअल बैठक आयोजित की जा रही है, जिसमें राज्यभर के काउंटिंग एजेंट्स को शामिल किया जाएगा।

    यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब एग्जिट पोल के नतीजों ने राजनीतिक माहौल को और ज्यादा संवेदनशील बना दिया है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि चुनाव परिणाम से पहले हर स्तर पर सतर्कता जरूरी है। यही वजह है कि इस बैठक को केवल औपचारिक चर्चा तक सीमित न रखकर इसे एक रणनीतिक कदम के रूप में देखा जा रहा है, जिसका उद्देश्य मतगणना प्रक्रिया को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी बनाना है।

    सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में राज्य की लगभग सभी विधानसभा सीटों पर तैनात काउंटिंग एजेंट्स को विस्तार से दिशा-निर्देश दिए जाएंगे। एजेंट्स को स्पष्ट रूप से कहा जाएगा कि वे मतगणना के हर चरण पर पैनी नजर बनाए रखें और किसी भी असामान्य स्थिति को तुरंत रिपोर्ट करें। पार्टी यह सुनिश्चित करना चाहती है कि मतगणना के दौरान किसी भी प्रकार की तकनीकी या प्रशासनिक गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे।

    एजेंट्स की भूमिका को बेहद अहम माना जा रहा है। उन्हें निर्देश दिए जाने की संभावना है कि वे मतगणना शुरू होने से लेकर अंतिम परिणाम और प्रमाण पत्र जारी होने तक काउंटिंग सेंटर पर मौजूद रहें। इसके साथ ही उन्हें ईवीएम को स्ट्रॉन्ग रूम से बाहर लाने की प्रक्रिया, सील खोलने और हर राउंड की गिनती पर नजर रखने के लिए भी तैयार किया जा रहा है। पार्टी का मानना है कि अंतिम राउंड तक सतर्कता बनाए रखना जरूरी है, क्योंकि कई बार परिणाम आखिरी चरणों में बदल सकते हैं।

    इस बार TMC 2021 के अनुभवों से भी सबक ले रही है। पिछले चुनाव में कुछ स्थानों पर हुई अप्रत्याशित घटनाओं ने विवाद को जन्म दिया था, खासकर नंदीग्राम जैसे संवेदनशील क्षेत्र में। इन्हीं अनुभवों को ध्यान में रखते हुए इस बार अतिरिक्त सावधानी बरती जा रही है, ताकि किसी भी तरह की स्थिति को तुरंत नियंत्रित किया जा सके।

    इसके अलावा, इस बार मतगणना प्रक्रिया में कुछ नई तकनीकी व्यवस्थाएं भी लागू की गई हैं, जिनमें QR कोड आधारित सत्यापन शामिल है। ऐसे में एजेंट्स को तकनीकी रूप से भी तैयार रहने के निर्देश दिए जाएंगे, ताकि वे नई प्रक्रियाओं को आसानी से समझ सकें और उनका सही तरीके से पालन सुनिश्चित कर सकें।

    हाल के दिनों में कुछ काउंटिंग सेंटरों को लेकर उठे सवालों ने भी पार्टी की चिंता बढ़ा दी है। इसी कारण Mamata Banerjee खुद भी सक्रिय नजर आईं और उन्होंने मतगणना प्रक्रिया की पारदर्शिता पर जोर दिया। पार्टी के भीतर यह साफ संदेश दिया गया है कि इस बार किसी भी तरह का जोखिम नहीं लिया जाएगा।

     तृणमूल कांग्रेस इस बार मतगणना को लेकर पूरी तरह सतर्क और संगठित रणनीति के साथ मैदान में उतर रही है। पार्टी का लक्ष्य केवल चुनाव जीतना ही नहीं, बल्कि पूरे प्रक्रिया को निष्पक्ष और विवाद रहित बनाए रखना भी है। अब सबकी नजरें 4 मई पर टिकी हैं, जब यह तय होगा कि यह रणनीति कितनी कारगर साबित होती है।

  • ममता बनर्जी ने केन्‍द्र सरकार पर लगाया राज्य को बांटने का आरोप, केंद्रीय बलों पर भी उठाए सवाल

    ममता बनर्जी ने केन्‍द्र सरकार पर लगाया राज्य को बांटने का आरोप, केंद्रीय बलों पर भी उठाए सवाल


    नई दिल्ली।
    पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी माहौल गर्म हो गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर राज्य को तीन हिस्सों में बांटने की साजिश रचने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि कुछ क्षेत्रों को बिहार और ओडिशा में मिलाने की योजना है, जिससे बंगालियों को परेशान किया जाएगा।

    परिसीमन के जरिए राज्य विभाजन का आरोप
    बांकुरा जिले में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि भाजपा परिसीमन विधेयक के जरिए पश्चिम बंगाल की सीमाओं में बदलाव करना चाहती है। उनके मुताबिक, इस प्रक्रिया से राज्य के कुछ हिस्सों का दूसरे राज्यों में विलय किया जा सकता है।

    केंद्रीय बलों पर महिलाओं के अपमान का आरोप
    मुख्यमंत्री ने चुनाव के लिए तैनात केंद्रीय सुरक्षा बलों पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि जांच के नाम पर महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार किया जा रहा है, जो बेहद निंदनीय है।

    टीएमसी सरकार गिराने के लिए ‘1000 करोड़ की साजिश’ का दावा
    ममता बनर्जी ने भारतीय जनता पार्टी पर टीएमसी को सत्ता से हटाने के लिए 1000 करोड़ रुपये की डील करने का आरोप लगाया। उन्होंने आम जनता उन्नयन पार्टी के नेता हुमायूं कबीर के एक वायरल वीडियो का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें भाजपा नेताओं से संपर्क और अल्पसंख्यक वोटों को बांटने की बात सामने आई है।

    SIR को बताया ‘देश का सबसे बड़ा घोटाला’
    मुख्यमंत्री ने मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) को हाल के समय का सबसे बड़ा घोटाला करार दिया। उन्होंने कहा कि यदि उनकी सरकार दोबारा सत्ता में आती है तो केंद्र के सभी जनविरोधी कानूनों को रद्द कर दिया जाएगा।

    सत्ता परिवर्तन का दावा
    ममता बनर्जी ने यह भी कहा कि 2026 में केंद्र सरकार सत्ता से बाहर हो जाएगी। इसके बाद नई सरकार जनहित में फैसले लेगी और मौजूदा नीतियों में बदलाव किया जाएगा।

  • पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल के बीच अभिनेत्री रुपाली गांगुली के बयान से राज्य में नई राजनीतिक बहस शुरू हो गई है।

    पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल के बीच अभिनेत्री रुपाली गांगुली के बयान से राज्य में नई राजनीतिक बहस शुरू हो गई है।


    नई दिल्ली:पश्चिम बंगाल की राजनीति इन दिनों चुनावी गतिविधियों के बीच लगातार चर्चा में बनी हुई है। जैसे जैसे राज्य में मतदान की प्रक्रिया नजदीक आ रही है, वैसे वैसे राजनीतिक बयान और प्रतिक्रियाएं भी तेज होती जा रही हैं। इसी क्रम में अभिनेत्री Rupali Ganguly के हालिया राजनीतिक बयान ने राज्य के चुनावी माहौल में नई बहस को जन्म दे दिया है। उनके विचारों ने न केवल राजनीतिक गलियारों में चर्चा बढ़ाई है बल्कि आम जनता के बीच भी इस विषय पर अलग अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

    अपने विचार व्यक्त करते हुए उन्होंने राज्य की वर्तमान राजनीतिक स्थिति पर चिंता जाहिर की और अपने व्यक्तिगत अनुभवों का उल्लेख करते हुए कहा कि समय के साथ परिस्थितियों में बदलाव आया है। उनके अनुसार, यह बदलाव उनके दृष्टिकोण से पूरी तरह सकारात्मक नहीं रहा और इसी कारण वे राज्य में एक अलग राजनीतिक दिशा की उम्मीद रखती हैं। उनके इस बयान को लेकर समर्थक और विरोधी दोनों पक्षों में अलग अलग राय सामने आ रही है।

    इसी बातचीत के दौरान उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे आगामी चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के प्रति समर्थन रखती हैं। उनके अनुसार, यह समर्थन राज्य में परिवर्तन की आवश्यकता को देखते हुए है। उन्होंने यह भी कहा कि वे चाहती हैं कि राज्य में स्थिरता और विकास के नए अवसर सामने आएं, जिससे जनता को बेहतर भविष्य मिल सके।

    उनके इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में चर्चा और तेज हो गई है। कई राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी समय में सार्वजनिक हस्तियों के ऐसे बयान मतदाताओं की सोच पर प्रभाव डाल सकते हैं। वहीं कुछ लोग इसे व्यक्तिगत राय मानते हुए लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा बता रहे हैं, जिसमें हर व्यक्ति को अपने विचार रखने का अधिकार है।

    राज्य की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee को लेकर दिए गए अप्रत्यक्ष संदर्भों ने भी राजनीतिक बहस को और अधिक तीव्र कर दिया है। उनके नेतृत्व और नीतियों पर पहले भी विभिन्न स्तरों पर चर्चा होती रही है और चुनावी समय में यह मुद्दा और अधिक केंद्र में आ जाता है। इस बार भी राजनीतिक दल अपने अपने दृष्टिकोण से स्थिति को जनता के सामने रख रहे हैं।

    चुनावी माहौल को देखते हुए सभी प्रमुख राजनीतिक दल अपने अभियान को मजबूत करने में जुटे हैं। रैलियों, जनसभाओं और प्रचार अभियानों के बीच बयानबाजी का स्तर भी बढ़ गया है। ऐसे में सार्वजनिक हस्तियों के विचार इस माहौल को और अधिक प्रभावित कर रहे हैं और चर्चा को नई दिशा दे रहे हैं।

    राज्य में विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया पहले से निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ रही है और राजनीतिक गतिविधियां लगातार तेज हो रही हैं। विभिन्न वर्गों के मतदाता अपने निर्णय को लेकर विचार कर रहे हैं और राजनीतिक दल उन्हें अपने पक्ष में लाने की कोशिश में लगे हुए हैं।

    इस पूरे घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पश्चिम बंगाल की राजनीति केवल दलों की प्रतिस्पर्धा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सामाजिक, सांस्कृतिक और सार्वजनिक प्रभाव भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। जैसे जैसे चुनाव नजदीक आ रहे हैं, वैसे वैसे राज्य का राजनीतिक वातावरण और अधिक सक्रिय और संवेदनशील होता जा रहा है।

  • पश्चिम बंगाल चुनाव में प्रधानमंत्री की ताबड़तोड़ रैलियों से सियासी माहौल हुआ गर्म और प्रचार अभियान ने पकड़ी रफ्तार

    पश्चिम बंगाल चुनाव में प्रधानमंत्री की ताबड़तोड़ रैलियों से सियासी माहौल हुआ गर्म और प्रचार अभियान ने पकड़ी रफ्तार


    नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल अपने चरम पर पहुंच गई है। इसी क्रम में प्रधानमंत्री Narendra Modi राज्य में चुनाव प्रचार को नई गति देने के लिए एक ही दिन में तीन महत्वपूर्ण जनसभाओं को संबोधित कर रहे हैं। इन रैलियों के जरिए भारतीय जनता पार्टी अपने अभियान को मजबूती देने और विभिन्न क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।

    प्रधानमंत्री की रैलियां पूर्वी बर्धमान, मुर्शिदाबाद और दक्षिण दिनाजपुर जैसे क्षेत्रों में आयोजित की जा रही हैं, जिन्हें राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम माना जाता है। इन इलाकों में अलग अलग सामाजिक और जनसंख्या समीकरण हैं, जिन पर सभी राजनीतिक दलों की नजर बनी हुई है। भाजपा इन क्षेत्रों में अपनी स्थिति मजबूत करने के प्रयास में जुटी है, ताकि सत्तारूढ़ Mamata Banerjee के नेतृत्व वाली सरकार को कड़ी चुनौती दी जा सके।

    चुनावी कार्यक्रम घोषित होने के बाद से प्रधानमंत्री का यह तीसरा दौरा है, जो इस बात का संकेत है कि पार्टी इस चुनाव को बेहद गंभीरता से ले रही है। इससे पहले भी वे राज्य के विभिन्न हिस्सों में जनसभाओं के माध्यम से अपनी पार्टी के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश कर चुके हैं। लगातार हो रहे ये दौरे चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा माने जा रहे हैं।

    अपने पिछले संबोधनों में प्रधानमंत्री ने कानून व्यवस्था, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक पारदर्शिता जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाया था। उन्होंने जनता के सामने एक वैकल्पिक शासन दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हुए विकास और सुरक्षा से जुड़े वादों पर जोर दिया। इन मुद्दों के जरिए मतदाताओं को प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा है।

    राज्य में इस बार चुनावी मुकाबला बेहद रोचक और कड़ा माना जा रहा है। एक ओर सत्ताधारी दल अपनी पकड़ बनाए रखने के लिए प्रयासरत है, तो दूसरी ओर विपक्ष पूरी ताकत के साथ सत्ता परिवर्तन की कोशिश में लगा हुआ है। दोनों पक्षों के बीच लगातार बढ़ती बयानबाजी और रैलियों ने चुनावी माहौल को और अधिक गर्म कर दिया है।

    निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार राज्य में मतदान दो चरणों में कराया जाएगा और इसके बाद मतगणना होगी। इस बीच सभी राजनीतिक दल जनसभाओं, रैलियों और जनसंपर्क अभियानों के माध्यम से मतदाताओं तक पहुंचने में जुटे हुए हैं।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार चुनाव में राष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों का मिश्रण देखने को मिल रहा है, जो परिणामों को प्रभावित कर सकता है। प्रधानमंत्री की सक्रियता और लगातार हो रही रैलियां इस चुनाव को और अधिक महत्वपूर्ण बना रही हैं।
  • सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी विकास पर राजनीति नहीं चलेगी ममता सरकार को फटकार

    नई दिल्ली: कोलकाता मेट्रो परियोजना से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार को कड़ी फटकार लगाई इस सुनवाई की अध्यक्षता कर रहे Surya Kant ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि विकास कार्यों को चुनाव या त्योहारों के बहाने टालना संवैधानिक कर्तव्य की अवहेलना है और इस तरह की प्रवृत्ति स्वीकार्य नहीं है

    मामला कोलकाता मेट्रो की ऑरेंज लाइन परियोजना में हो रही देरी से जुड़ा था राज्य सरकार की ओर से अदालत में यह दलील दी गई कि चुनाव और त्योहारों के कारण प्रशासनिक दिक्कतें आ रही हैं जिससे परियोजना की गति प्रभावित हो रही है इसके साथ ही सरकार ने यह भी अनुरोध किया कि मेट्रो कार्यों के लिए ट्रैफिक ब्लॉक को मई तक टाल दिया जाए

    राज्य सरकार ने यह तर्क भी दिया कि संबंधित क्षेत्र से एंबुलेंस और अंग प्रत्यारोपण से जुड़े वाहनों की आवाजाही होती है इसलिए वहां काम रोकने या सीमित करने के लिए अतिरिक्त समय दिया जाना चाहिए लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि ये केवल बहाने हैं और वास्तविकता में विकास कार्यों को टालने का प्रयास किया जा रहा है

    सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने भी सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि चुनाव आयोग जैसे संस्थान चुनाव के दौरान भी अपने काम को जारी रख सकते हैं तो राज्य सरकार को भी विकास परियोजनाओं को प्राथमिकता देनी चाहिए उन्होंने कहा कि जनता के हित से जुड़े कामों को त्योहारों या अन्य कारणों से रोकना उचित नहीं है

    कोर्ट ने यह भी कहा कि इस मामले में पहले ही हाईकोर्ट ने राज्य को पर्याप्त छूट दी थी लेकिन इसके बावजूद परियोजना में कोई खास प्रगति नहीं हुई अदालत ने राज्य सरकार के रवैये को कर्तव्य में लापरवाही और जिद्दी व्यवहार का उदाहरण बताया

    सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह केवल एक प्रशासनिक देरी का मामला नहीं है बल्कि यह जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यशैली पर भी सवाल उठाता है अदालत ने यहां तक संकेत दिया कि इस मामले में राज्य के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक के खिलाफ कार्रवाई पर भी विचार किया जा सकता है

    इसके साथ ही अदालत ने कोलकाता हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखते हुए राज्य सरकार की विशेष अनुमति याचिका को खारिज कर दिया कोर्ट ने कहा कि परियोजना को तय समय सीमा में पूरा किया जाना चाहिए और इसमें किसी भी तरह की अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जाएगी

    सुनवाई के दौरान एक दिलचस्प मोड़ तब आया जब कोलकाता मेट्रो की ओर से याचिका वापस लेने की कोशिश की गई लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसकी अनुमति नहीं दी और मामले को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया

    कोलकाता मेट्रो की ऑरेंज लाइन परियोजना शहर की यातायात व्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है यह परियोजना न केवल आवागमन को सुगम बनाएगी बल्कि शहर में ट्रैफिक दबाव को भी कम करेगी ऐसे में सुप्रीम कोर्ट की यह सख्त टिप्पणी इस परियोजना को गति देने के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश के रूप में देखी जा रही है

    इस पूरे मामले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि न्यायपालिका अब विकास परियोजनाओं में किसी भी प्रकार की ढिलाई या राजनीतिक बहाने को स्वीकार करने के मूड में नहीं है और भविष्य में इस तरह की लापरवाही पर और भी सख्त रुख अपनाया जा सकता है

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  • पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन की आहट: चुनाव से पहले राजनीतिक तूफ़ान तेज, एसआईआर और दस्तावेज़ विवाद से बढ़ी चिंता

    पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन की आहट: चुनाव से पहले राजनीतिक तूफ़ान तेज, एसआईआर और दस्तावेज़ विवाद से बढ़ी चिंता

    कोलकाता। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले राष्ट्रपति शासन की अटकलों ने राजनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है। राज्यपाल के अचानक बदलाव, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के दौरे पर विवाद और चुनाव आयोग की टीम के दौरे के दौरान हुए विरोध प्रदर्शन ने इस संभावना को और गहरा कर दिया है।

    इतिहास और संवैधानिक पहलू
    पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन लागू होने का इतिहास बहुत लंबा नहीं है। 30 अप्रैल 1977 को तत्कालीन मुख्यमंत्री सिद्धार्थ शंकर रे की सरकार को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लगाया गया था, जो वाममोर्चा सरकार के शपथ ग्रहण तक 52 दिनों तक जारी रहा। अब विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राजनीतिक हलकों में सवाल उठ रहा है कि क्या बंगाल एक बार फिर राष्ट्रपति शासन की ओर बढ़ रहा है।

    चुनाव आयोग का दौरा और विरोध प्रदर्शन
    चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ ने कोलकाता दौरे के दौरान सभी राजनीतिक दलों और पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर चुनावी तैयारियों का जायजा लिया। हालांकि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस मुद्दे पर सीधे जवाब देने से परहेज किया और कहा कि कानून-व्यवस्था की समीक्षा के बाद चुनाव की तारीख और चरण तय किए जाएंगे।

    तृणमूल कांग्रेस समेत कई राजनीतिक दलों ने एक या दो चरणों में मतदान कराने की मांग की। आयोग को कोलकाता और आसपास बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन का सामना करना पड़ा। तृणमूल समर्थकों ने काले झंडे दिखाए और “लोकतंत्र का हत्यारा” जैसे पोस्टर भी लगाए।

    एसआईआर प्रक्रिया पर विवाद
    राज्य में नवंबर से चल रही एसआईआर (Special Summary Revision) प्रक्रिया के तहत लगभग 60 लाख मतदाताओं के दस्तावेज विचाराधीन हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर दस्तावेजों की जांच में न्यायिक अधिकारियों को दो महीने का समय लगने की संभावना है। राजनीतिक दलों का कहना है कि इस स्थिति में चुनाव कराना चुनौतीपूर्ण होगा।

    मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि भाजपा और चुनाव आयोग की मिलीभगत से वैध वोटरों के नाम मतदाता सूची से हटाने की साजिश की जा रही है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अचानक राज्यपाल सीवी आनंद बोस की जगह आर.एन. रवि को क्यों नियुक्त किया गया, जो तमिलनाडु में विवादित रहे हैं।

    राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का दौरा और विवाद
    राष्ट्रपति का दौरा सिलीगुड़ी में आदिवासी सम्मेलन के लिए था। हालांकि मुख्यमंत्री ने इसे लेकर असंतोष जताया और कहा कि उन्हें न्यूनतम प्रोटोकॉल तक नहीं मिला। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए तृणमूल कांग्रेस पर राष्ट्रपति के अपमान का आरोप लगाया।

    राजनीतिक माहौल और भविष्य की चुनौतियां
    राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या एसआईआर के तहत विचाराधीन 60 लाख मतदाताओं के दस्तावेज समय पर जांच कर लिए जाएंगे। यदि यह कार्य पूरा नहीं हुआ, तो या तो चुनाव टालना पड़ सकता है या बिना पूरी सूची के चुनाव कराना पड़ सकता है। इससे राष्ट्रपति शासन की संभावना बढ़ सकती है।अगले कुछ दिनों में केंद्र और चुनाव आयोग की रिपोर्ट के आधार पर पश्चिम बंगाल की राजनीतिक दिशा साफ होगी।

  • शिवराज सिंह चौहान का तीखा हमला: ममता बनर्जी पर निशाना, कहा– ‘प्रधानमंत्री’ शब्द से रोकी केंद्र की योजनाएं, हम बदलेंगे किसानों का भाग्य

    शिवराज सिंह चौहान का तीखा हमला: ममता बनर्जी पर निशाना, कहा– ‘प्रधानमंत्री’ शब्द से रोकी केंद्र की योजनाएं, हम बदलेंगे किसानों का भाग्य


    नई दिल्ली। लोकसभा में मंगलवार को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और उनकी सरकार पर तीखे तेवर अपनाए। प्रश्नकाल के दौरान शिवराज ने कहा कि बंगाल की सरकार को जनहित से ज्यादा राजनीति प्यारी है। उन्होंने कहा, “विपक्ष तख्तियां लेकर हाय-हाय करता रहे, लेकिन दुनिया भारत की कृषि नीतियों की तारीफ कर रही है। जलने वाले जला करें, हम किसानों का भाग्य बदलकर रहेंगे।”

    नाम की राजनीति: ‘प्रधानमंत्री’ शब्द पर आपत्ति
    शिवराज सिंह ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में प्रधानमंत्री कृषि धन धान्य योजना और अन्य महत्वपूर्ण केंद्र योजनाएं केवल इसलिए लागू नहीं की गईं क्योंकि इनके नाम में ‘प्रधानमंत्री’ जुड़ा हुआ है। उन्होंने इसे किसानों के साथ “खुला अन्याय और पाप” करार दिया। उनका कहना था कि यह नीतियों को रोककर आम जनता और किसानों के हक पर हमला है।

    वोट बैंक बनाम किसानों की भलाई
    केंद्रीय मंत्री ने सदन में यह भी कहा कि टीएमसी सरकार को मिट्टी की उर्वरता, किसानों की आय और जनता के स्वास्थ्य की कोई चिंता नहीं है। उन्होंने बंगाल में प्राकृतिक खेती मिशन के ठंडे बस्ते में डालने को इसका प्रमाण बताया। शिवराज ने कहा कि ममता सरकार केवल अपने वोट बैंक को साधने में लगी है और किसानों के हित की परवाह नहीं करती।

    चीन को पीछे छोड़ भारत का रिकॉर्ड
    शिवराज सिंह चौहान ने गर्व से बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने चावल उत्पादन में चीन को पछाड़ दिया है। देश का खाद्यान्न उत्पादन 357 मिलियन टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “एक समय था जब हम अनाज मांगते थे, आज हमारी फसलें इतनी हैं कि भंडार भर गए हैं। यह भाजपा सरकार की कृषि नीतियों की सफलता है।”

    शिवराज का यह बयान राज्य में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच जारी राजनीतिक टकराव को और तेज कर सकता है। विपक्ष ने केंद्र की योजनाओं को रोकने का आरोप ममता बनर्जी पर लगाया है, जबकि भाजपा इसे किसानों की भलाई और विकास की सफलता के रूप में प्रस्तुत कर रही है।

  • राष्ट्रपति प्रोटोकॉल विवाद: ममता बनर्जी का पलटवार, दिखाई पुरानी फोटो

    राष्ट्रपति प्रोटोकॉल विवाद: ममता बनर्जी का पलटवार, दिखाई पुरानी फोटो


    नई दिल्ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कार्यक्रम में प्रोटोकॉल उल्लंघन को लेकर सियासत तेज हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पश्चिम बंगाल सरकार पर राष्ट्रपति के “अपमान” का आरोप लगाए जाने के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने पुरानी तस्वीर दिखाकर पलटवार किया।

    कोलकाता में धरना स्थल से ममता बनर्जी ने एक तस्वीर दिखाते हुए दावा किया कि उसमें प्रधानमंत्री मोदी और भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी बैठे हुए हैं, जबकि राष्ट्रपति उनके बगल में खड़ी दिखाई दे रही हैं।

    ‘राष्ट्रपति का अपमान हमारी संस्कृति नहीं’

    ममता बनर्जी ने उस तस्वीर को “सबूत” बताते हुए कहा,
    “इस तस्वीर में प्रधानमंत्री बैठे हैं और राष्ट्रपति खड़ी हैं। हम ऐसा कभी नहीं करते। राष्ट्रपति का अपमान करने की संस्कृति भाजपा की है, हमारी नहीं।”

    उन्होंने कहा कि उनकी सरकार राष्ट्रपति पद और भारत के संविधान का पूरा सम्मान करती है और इस मामले में राज्य सरकार को दोष नहीं दिया जाना चाहिए।

    राष्ट्रपति ने जताई थी नाराजगी

    दरअसल, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शनिवार को बागडोगरा एयरपोर्ट पहुंची थीं, जहां उन्हें एक अंतरराष्ट्रीय आदिवासी सम्मेलन में भाग लेना था। बताया गया कि वहां मुख्यमंत्री या किसी मंत्री के मौजूद न होने पर राष्ट्रपति ने नाराजगी जताई थी।

    उन्होंने सिलीगुड़ी के पास अपने कार्यक्रम स्थल में बदलाव को लेकर भी असंतोष व्यक्त किया था।

    राज्य सरकार ने क्या कहा

    ममता बनर्जी ने सफाई देते हुए कहा कि राज्य सरकार को राष्ट्रपति के कार्यक्रम की जानकारी नहीं दी गई थी और निजी आयोजकों ने भी उनसे कोई समन्वय नहीं किया।

    उन्होंने यह भी कहा कि कार्यक्रम स्थल पर कथित अव्यवस्था—जैसे गंदगी और महिलाओं के लिए शौचालय की कमी—की जिम्मेदारी आयोजकों और भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण की है, क्योंकि कार्यक्रम उसी की जमीन पर आयोजित किया गया था।

    भाजपा का आरोप

    इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल सरकार पर हमला तेज करते हुए कहा कि एक महिला आदिवासी नेता और देश की राष्ट्रपति का अपमान किया गया है।

    उन्होंने कहा कि राज्य की जागरूक जनता इस घटना को कभी माफ नहीं करेगी। प्रधानमंत्री ने यह बात दिल्ली में दिल्ली मेट्रो के दो नए कॉरिडोर और अन्य परियोजनाओं के उद्घाटन के बाद कही।

    इस पूरे विवाद के बाद केंद्र और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच राजनीतिक टकराव और तेज हो गया है।