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  • भारतीय मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में स्थिर सुधार, अप्रैल में PMI ने दिखाया मजबूत प्रदर्शन

    भारतीय मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में स्थिर सुधार, अप्रैल में PMI ने दिखाया मजबूत प्रदर्शन

    नई दिल्ली।भारत का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर लगातार मजबूती की ओर बढ़ रहा है और ताजा आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि औद्योगिक गतिविधियों में स्थिर सुधार देखा जा रहा है। अप्रैल महीने में मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स यानी पीएमआई बढ़कर 54.7 पर पहुंच गया, जो पिछले महीने के 53.9 की तुलना में बेहतर प्रदर्शन को दर्शाता है। यह वृद्धि मुख्य रूप से नए ऑर्डर में बढ़ोतरी, उत्पादन में तेजी और रोजगार के अवसरों में सुधार के कारण सामने आई है।
    अप्रैल के आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि देश के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में मांग अभी भी मजबूत बनी हुई है। खासकर निर्यात के क्षेत्र में सुधार देखने को मिला है, जहां पिछले कई महीनों की तुलना में सबसे तेज वृद्धि दर्ज की गई है। इसका संकेत है कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय उत्पादों की मांग बढ़ रही है, जिससे उद्योग जगत को नई ऊर्जा मिल रही है।
    हालांकि, इस सकारात्मक रुझान के साथ कुछ चुनौतियां भी सामने आई हैं। वैश्विक स्तर पर जारी तनाव और अनिश्चितताओं, विशेषकर मध्य पूर्व में चल रहे हालात, का असर लागत पर दिखाई दे रहा है। इनपुट कॉस्ट में बढ़ोतरी हुई है, जिससे उत्पादन खर्च में भी इजाफा दर्ज किया गया है। इसके साथ ही आउटपुट कीमतों में भी तेजी देखी गई है, जो पिछले कई महीनों में सबसे अधिक मानी जा रही है।
    इसके बावजूद उत्पादन गतिविधियां स्थिर बनी हुई हैं। कंपनियों ने बताया है कि घरेलू मांग और विज्ञापन गतिविधियों ने बिक्री और उत्पादन को समर्थन दिया है। हालांकि, प्रतिस्पर्धा का दबाव और कुछ ग्राहकों द्वारा ऑर्डर को अंतिम रूप देने में देरी के कारण विकास की गति थोड़ी प्रभावित हुई है।
    उद्योग जगत के प्रतिभागियों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों के बावजूद भविष्य को लेकर भरोसा बना हुआ है। कंपनियां आने वाले महीनों में बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद कर रही हैं और नए निवेश तथा उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर ध्यान दे रही हैं। हालांकि, इस विश्वास में पिछले महीने की तुलना में हल्की कमी जरूर देखी गई है, लेकिन यह अभी भी एक सकारात्मक स्तर पर बना हुआ है।
    कुल मिलाकर भारत का मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर एक स्थिर और मजबूत विकास पथ पर आगे बढ़ रहा है। घरेलू मांग, निर्यात में सुधार और उत्पादन गतिविधियों की निरंतरता इस वृद्धि के प्रमुख आधार हैं। यदि वैश्विक परिस्थितियां अनुकूल रहती हैं, तो आने वाले समय में इस क्षेत्र में और भी मजबूती देखने को मिल सकती है।
  • खंडवा में प्रशासन का बड़ा खुलासा: चर्बी से नकली घी-आइसक्रीम बनाने वाला अवैध कारखाना पकड़ा

    खंडवा में प्रशासन का बड़ा खुलासा: चर्बी से नकली घी-आइसक्रीम बनाने वाला अवैध कारखाना पकड़ा

    खंडवा। मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में जिला प्रशासन ने एक चौंकाने वाली कार्रवाई करते हुए अवैध तरीके से संचालित हो रहे कारखाने का पर्दाफाश किया है। यहां पशुओं की चर्बी से नकली घी और आइसक्रीम बनाने का गोरखधंधा चल रहा था। संयुक्त टीम ने मौके से भारी मात्रा में सामग्री जब्त कर आरोपी को हिरासत में ले लिया है।

    शुक्रवार सुबह सिटी मजिस्ट्रेट, नगर निगम, खाद्य विभाग और पशु चिकित्सा विभाग की संयुक्त टीम ने मुखबिर की सूचना पर मोघट थाना क्षेत्र के इमलीपुरा वार्ड स्थित बेगम पार्क के पास दबिश दी। संकरी गलियों में बने कमरों की तलाशी के दौरान टीम को एक के बाद एक चौंकाने वाले तथ्य मिले।

    कार्रवाई के दौरान 79 टीन कनस्तरों और 9 नीले ड्रमों में भरा चर्बी से बना नकली घी बरामद किया गया। इसके अलावा बड़ी संख्या में बोरे भरकर पशुओं के अवशेष भी मिले। प्राथमिक जांच में सामने आया कि मृत पशुओं की चर्बी, खाल और हड्डियों का इस्तेमाल कर घी तैयार किया जा रहा था, जिसे बाजार में सप्लाई किया जाता था।

    मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने पूरे परिसर को सील कर दिया और जब्त सामग्री के सैंपल जांच के लिए लैब भेज दिए हैं। पशु चिकित्सा विभाग ने भी चर्बी और अन्य अवशेषों के नमूने लेकर यह पता लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है कि किन पशुओं का उपयोग किया गया।

    इस मामले में आरोपी अनवर कुरैशी को पुलिस के हवाले कर दिया गया है। सिटी मजिस्ट्रेट बजरंग बहादुर ने बताया कि आरोपी से पूछताछ जारी है और उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

    वहीं स्थानीय विधायक ने इस कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के अवैध कारोबार से लोगों के स्वास्थ्य के साथ गंभीर खिलवाड़ हो रहा है। उन्होंने दोषियों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) जैसी कड़ी कार्रवाई की मांग भी की है।

    प्रशासन का कहना है कि पूरे जिले में इस तरह के अन्य अवैध ठिकानों की भी जांच की जाएगी, ताकि खाद्य सुरक्षा से जुड़े इस तरह के खतरनाक नेटवर्क पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।