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  • देश में तेजी से बढ़ रहीं डायबिटीज और मानसिक तनाव जैसी समस्याएं…. हर 10 में से 4 इससे पीड़ित

    देश में तेजी से बढ़ रहीं डायबिटीज और मानसिक तनाव जैसी समस्याएं…. हर 10 में से 4 इससे पीड़ित


    नई दिल्ली।
    देश में डायबिटीज (Diabetes) और मानसिक तनाव (Mental stress) जैसी स्वास्थ्य समस्याएं तेजी से बढ़़ रही हैं, इसका अंदाजा हाल के हेल्थ डेटा (Health data) से लगाया जा सकता है. डाटा के मुताबिक, देश में बड़ी संख्या में लोगों की ब्लड शुगर (Blood sugar) सामान्य से अधिक पाई गई है. वहीं करीब 40 फीसदी लोगों ने अपने शरीर में मानसिक तनाव का लेवल काफी ज्यादा बताया. आंकड़े यह भी दिखाते हैं कि स्वास्थ्य जांच कराने के मामले में लोगों की आर्थिक स्थिति का बड़ा असर पड़ता है.

    Workforce Health Index 2026 के डाटा के मुताबिक, 10 में से लगभग 4 रिपोर्ट में बढ़ी शुगर आई है. कुल 7,088 लोगों के HbA1c टेस्ट रिपोर्ट में 38.7 फीसदी रिपोर्ट ऐसी थीं, जिनमें ब्लड शुगर का लेवल प्री-डायबिटीज या डायबिटीज पर था. HbA1c एक तरह का ब्लड टेस्ट है, जिससे पिछले करीब 2-3 महीनों के दौरान शरीर में ब्लड शुगर के औसत स्तर का अंदाजा लगाया जाता है. इसलिए इस टेस्ट की रिपोर्ट व्यक्ति के लंबे समय के ब्लड शुगर कंट्रोल के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी देती है।


    10 में 4 लोगों ने बताया ज्यादा मानसिक तनाव

    ब्लड शुगर के साथ मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा एक और आंकड़ा सामने आया. कुल 7,346 लोगों में से 40.4 फीसदी लोगों ने पिछले एक सप्ताह में अपने शरीर में मानसिक तनाव लेवल बहुत ज्यादा बताया है. यानी बड़ी संख्या में लोगों ने खुद को काफी ज्यादा मानसिक तनाव महसूस किया है।

    आंकड़ों में यह भी सामने आया कि हेल्थ इंश्योरेंस से जुड़े दावों में कर्मचारियों की तुलना में उनके परिवार की हिस्सेदारी ज्यादा रही. कुल दावों में 66.5 फीसदी परिवार के सदस्यों से जुड़े थे, जबकि कर्मचारियों से जुड़े दावों की हिस्सेदारी 33.5 फीसदी रही. यह आंकड़ा बताता है कि स्वास्थ्य बीमा का इस्तेमाल केवल कर्मचारी ही नहीं, बल्कि उनके परिवार के सदस्य भी बड़ी संख्या में कर रहे हैं.


    आय बढ़ी तो फुल-बॉडी हेल्थ टेस्ट भी बढ़ा

    स्वास्थ्य जांच को लेकर आर्थिक स्थिति का बड़ा अंतर भी देखने को मिला. सालाना 3 लाख रुपये से कम आय वाले लोगों में केवल 15.6 फीसदी ने फुल-बॉडी डायग्नोस्टिक टेस्ट कराने की जानकारी दी. इसग्वालियर हाईकोर्ट का फैसला, OBC क्रीमी लेयर तय करने में सिर्फ वेतन नहीं, अन्य पहलू भी जरूरीके मुकाबले 40 लाख रुपये या उससे अधिक सालाना आय वाले लोगों में यह आंकड़ा बढ़कर 54.3 फीसदी हो गया है।

  • नींद में बोलना सिर्फ सपना नहीं हो सकता बार बार बड़बड़ाने की आदत के पीछे छिपी हो सकती है ये वजह

    नींद में बोलना सिर्फ सपना नहीं हो सकता बार बार बड़बड़ाने की आदत के पीछे छिपी हो सकती है ये वजह


    नई दिल्ली। रात में सोते समय अचानक बोलना या बड़बड़ाना कई लोगों के साथ होता है। अक्सर परिवार के दूसरे सदस्य इस आदत को नोटिस करते हैं जबकि बोलने वाले व्यक्ति को सुबह उठने के बाद इसकी जानकारी भी नहीं होती। आमतौर पर नींद में बोलना किसी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होता और कई मामलों में यह अपने आप होने वाली सामान्य नींद संबंधी प्रक्रिया है। फिर भी अगर यह समस्या लगातार होने लगे या इसके साथ नींद में अन्य असामान्य गतिविधियां दिखाई दें तो इसके पीछे छिपे कारण को समझना जरूरी हो जाता है।

    नींद में बोलने या बड़बड़ाने की स्थिति को सोमनीलोक्वी कहा जाता है। इसे पैरासोमनिया यानी नींद के दौरान होने वाले असामान्य व्यवहारों की श्रेणी में रखा जाता है। इस दौरान व्यक्ति नींद में शब्द बोल सकता है या कभी कभी पूरे वाक्य भी कह सकता है। कई लोगों को सुबह उठने पर यह याद नहीं रहता कि उन्होंने रात में कुछ कहा था। कुछ स्थितियों में नींद में बोलने के साथ हाथ पैर हिलाना या अचानक करवट बदलना जैसी गतिविधियां भी देखी जा सकती हैं।

    नींद में बड़बड़ाने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। सपने इसका एक सामान्य कारण माने जाते हैं। जब व्यक्ति सपने देख रहा होता है तो दिमाग अलग अलग भावनाओं और घटनाओं को संसाधित करता रहता है। इसी दौरान कभी कभी नींद में आवाज निकल सकती है। दिनभर की घटनाओं का मानसिक दबाव भी नींद के दौरान व्यक्ति के व्यवहार को प्रभावित कर सकता है। खासकर तनाव और चिंता की स्थिति में नींद प्रभावित हो सकती है और नींद में बोलने की संभावना बढ़ सकती है।

    बुरे सपने भी नींद में बोलने का एक कारण हो सकते हैं। डर या तनाव से जुड़े सपने के दौरान कुछ लोग नींद में बोलते हैं। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति जो नींद में बोलता है वह किसी मानसिक या शारीरिक बीमारी से परेशान है। कई स्वस्थ लोगों में भी कभी कभी ऐसा देखा जा सकता है।

    नींद की कमी और अनियमित सोने का समय भी इस समस्या को बढ़ा सकता है। अगर व्यक्ति लगातार देर रात तक जागता है या पर्याप्त नींद नहीं लेता है तो नींद का सामान्य चक्र प्रभावित हो सकता है। इसी वजह से सोने और जागने का समय नियमित रखना जरूरी है। इसके साथ ही सोने से पहले चाय कॉफी जैसे कैफीन वाले पेय पदार्थों का अधिक सेवन करने से बचना चाहिए क्योंकि ये कुछ लोगों में नींद को प्रभावित कर सकते हैं। शराब का सेवन भी नींद की गुणवत्ता पर असर डाल सकता है।

    बेहतर नींद के लिए सोने से पहले मोबाइल और दूसरे स्क्रीन टाइम को कम करना भी मददगार हो सकता है। कमरे का वातावरण शांत और आरामदायक रखना चाहिए। किताब पढ़ना हल्का संगीत सुनना या कुछ देर शांत होकर बैठना दिमाग को आराम देने वाली दिनचर्या का हिस्सा बनाया जा सकता है।

    अगर नींद में बोलना कभी कभी होता है और इससे व्यक्ति की नींद या रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित नहीं हो रही है तो आमतौर पर घबराने की जरूरत नहीं होती। लेकिन अगर यह समस्या बहुत अधिक बढ़ जाए या इसके साथ नींद में हिंसक हरकतें तेज चीखना चलना बार बार बुरे सपने आना या दिन में अत्यधिक नींद जैसी परेशानी हो तो डॉक्टर या स्लीप विशेषज्ञ से सलाह लेना उचित हो सकता है। सही कारण की पहचान के बाद ही यह तय किया जा सकता है कि समस्या सामान्य है या किसी अन्य स्लीप डिसऑर्डर से जुड़ी हुई है।

  • राहु-चंद्र की युति बिगाड़ सकती है मानसिक संतुलन, हर समय डर-उलझन और बेचैनी का बनता है कारण

    राहु-चंद्र की युति बिगाड़ सकती है मानसिक संतुलन, हर समय डर-उलझन और बेचैनी का बनता है कारण



    नई दिल्ली। ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा को मन, भावनाओं और मानसिक संतुलन का कारक ग्रह माना गया है। माना जाता है कि अगर कुंडली में चंद्रमा कमजोर हो जाए या राहु, शनि जैसे अशुभ ग्रहों के साथ युति बना ले, तो व्यक्ति को मानसिक तनाव, डर, भ्रम, बेचैनी और डिप्रेशन जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार आजकल बढ़ती एंजायटी और मानसिक अस्थिरता के पीछे कई बार ग्रहों की स्थिति भी अहम भूमिका निभाती है।

    विशेष रूप से राहु और चंद्रमा की युति को बेहद संवेदनशील माना जाता है। इस योग में व्यक्ति हर समय किसी न किसी उलझन में फंसा रहता है। छोटे-छोटे फैसले लेना भी मुश्किल हो जाता है और मन लगातार नकारात्मक विचारों से घिरा रहता है। ऐसे लोगों में भौतिक सुख पाने की इच्छा तो अधिक होती है, लेकिन संतोष की कमी बनी रहती है। बाहर से सब कुछ सामान्य दिखने के बावजूद अंदर बेचैनी बनी रहती है।

    ज्योतिष विशेषज्ञों का मानना है कि जिन लोगों की कुंडली में राहु-चंद्र की युति होती है, उन्हें खुद को हमेशा व्यस्त रखना चाहिए। लंबे समय तक खाली रहने पर नकारात्मक सोच और तनाव तेजी से बढ़ सकता है। यही स्थिति धीरे-धीरे एंजायटी और डिप्रेशन का रूप भी ले सकती है।

    वहीं शनि और चंद्रमा की युति भी मानसिक बोझ और उदासी का कारण मानी जाती है। ऐसे लोगों को रात में डरावने सपने आना, बार-बार नींद टूटना, पुरानी बातें याद कर परेशान होना और हर छोटी बात को जरूरत से ज्यादा सोचने की आदत हो सकती है। यदि यह योग कुंडली के अष्टम भाव में बन जाए तो व्यक्ति की इच्छाशक्ति कमजोर पड़ सकती है और जीवन में निराशा बढ़ सकती है।

    ज्योतिष में चंद्रमा और बुध को भी मानसिक स्थिति से जुड़ा ग्रह माना गया है। अगर इन ग्रहों पर राहु, केतु या शनि की अशुभ दृष्टि पड़ जाए, तो व्यक्ति बेहद संवेदनशील हो सकता है। वह छोटी-छोटी बातों को दिल पर लेने लगता है और धीरे-धीरे अकेलेपन की ओर बढ़ सकता है।

    मान्यताओं के अनुसार मानसिक तनाव कम करने के लिए भगवान शिव की उपासना लाभकारी मानी गई है। चंद्रमा का संबंध शिव से माना जाता है, इसलिए “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का नियमित जाप मन को शांत रखने में मदद कर सकता है। सोमवार का व्रत, शिवलिंग पर जल अर्पित करना और ध्यान लगाना भी सकारात्मक प्रभाव देने वाला माना जाता है। ज्योतिषाचार्यों का कहना है कि सही दिनचर्या, सकारात्मक सोच और आध्यात्मिक उपायों से मानसिक संतुलन बेहतर किया जा सकता है।

  • झांसी में गर्मी और बिजली कटौती से बिगड़ रही लोगों की नींद, बढ़े मानसिक तनाव के मरीज

    झांसी में गर्मी और बिजली कटौती से बिगड़ रही लोगों की नींद, बढ़े मानसिक तनाव के मरीज



    झांसी । झांसी में भीषण गर्मी और लगातार हो रही बिजली कटौती लोगों के स्वास्थ्य और मानसिक स्थिति पर गहरा असर डाल रही है। रात के समय बिजली न आने और तेज गर्मी के कारण लोगों की नींद पूरी नहीं हो पा रही है, जिससे चिड़चिड़ापन, बेचैनी और तनाव जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं।

    जिला अस्पताल की मनोचिकित्सक डॉ. शिकाफा जाफरीन के अनुसार ओपीडी में आने वाले मानसिक रोगियों में हर चौथा मरीज नींद की कमी से जुड़ी समस्याओं से परेशान है। काउंसलिंग के दौरान यह सामने आया है कि अधिकतर लोग या तो गर्मी के कारण सो नहीं पा रहे हैं या फिर रात में बिजली कटौती उनकी नींद बाधित कर रही है।

    डॉक्टरों का कहना है कि पर्याप्त नींद न मिलने से मानसिक स्वास्थ्य पर सीधा असर पड़ता है। इससे मेनिया, पैनिक डिसऑर्डर और इनसोमनिया (अनिद्रा) जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। मेनिया की स्थिति में व्यक्ति अत्यधिक उत्तेजित हो जाता है, बहुत अधिक या बहुत कम बोलता है, मूड स्विंग होता है और व्यवहार असामान्य हो जाता है।

    वहीं पैनिक डिसऑर्डर के मरीजों में बार-बार घबराहट, दिल की धड़कन तेज होना और सांस फूलने जैसी समस्याएं देखी जा रही हैं।

    इनसोमनिया के मरीज अधिक सोचने लगते हैं और छोटी-छोटी बातों पर चिड़चिड़ापन और गुस्सा दिखाने लगते हैं।

    डॉक्टरों के अनुसार नींद की कमी का असर केवल मानसिक ही नहीं बल्कि शारीरिक स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है, जिससे लोगों की दिनचर्या प्रभावित हो रही है। लगातार नींद न पूरी होने से मरीजों में तनाव बढ़ता जा रहा है और कई लोग सामान्य बातचीत में भी आक्रामक व्यवहार करने लगे हैं।

    फिलहाल विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि वे गर्मी से बचाव के उपाय अपनाएं, पर्याप्त पानी पिएं और जितना संभव हो नींद का नियमित समय बनाए रखें, ताकि मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर रखा जा सके।

  • रियलिटी शो के अंदर की सच्चाई पर बोलीं तनीषा, कहा- स्क्रीन टाइम के लिए लोग रिश्तों और नामों का इस्तेमाल करते हैं

    रियलिटी शो के अंदर की सच्चाई पर बोलीं तनीषा, कहा- स्क्रीन टाइम के लिए लोग रिश्तों और नामों का इस्तेमाल करते हैं

    नई दिल्ली ।
    अभिनेत्री Tanisha Mukerji ने वर्षों बाद अपने रियलिटी शो अनुभव को लेकर कई ऐसे पहलुओं पर रोशनी डाली है, जिन पर अक्सर दर्शकों का ध्यान नहीं जाता। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि इस तरह के शो बाहर से जितने मनोरंजक दिखते हैं, अंदर से उतने ही मानसिक दबाव और भावनात्मक उथल-पुथल से भरे होते हैं। उनके अनुसार यह पूरा अनुभव उनके लिए आसान नहीं था और कई बार यह स्थिति मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण बन गई थी।

    तनीषा मुखर्जी ने बताया कि उन्होंने उस शो में हिस्सा लेने का निर्णय बहुत जल्दी में लिया था। उस समय उन्हें लगा था कि यह एक ऐसा मंच होगा जहां वे अपनी असली पहचान और व्यक्तित्व को लोगों के सामने रख पाएंगी। लेकिन जैसे-जैसे समय आगे बढ़ा, उन्हें यह समझ आने लगा कि वहां हर चीज़ कंट्रोल और एडिटिंग के जरिए दर्शकों तक पहुंचाई जाती है। उनके मुताबिक, असली व्यक्तित्व से ज्यादा महत्व ड्रामा और टकराव को दिया जाता है।

    उन्होंने यह भी बताया कि शो के दौरान कई प्रतिभागी अपनी उपस्थिति मजबूत करने के लिए किसी भी तरह की रणनीति अपनाते थे। तनीषा के अनुसार, कुछ लोग चर्चा में बने रहने के लिए उनके परिवार के नाम का भी इस्तेमाल करते थे। खासकर उनके परिवार से जुड़े बड़े नामों का बार-बार जिक्र किया जाता था ताकि कैमरे का ध्यान अपनी ओर खींचा जा सके। यह स्थिति उनके लिए कई बार असहज और अप्रत्याशित रही।

    एक्ट्रेस ने यह भी साझा किया कि वह शो में बहुत अधिक विवादों और झगड़ों से दूरी बनाए रखती थीं। उनका मानना था कि हर स्थिति पर प्रतिक्रिया देना जरूरी नहीं होता। भाषा की सहजता और व्यक्तिगत सीमाओं के कारण उन्होंने कई बार चुप रहना ही बेहतर समझा। उनका उद्देश्य यह भी था कि किसी भी तरह की अनावश्यक स्थिति उनके परिवार या निजी जीवन पर असर न डाले।

    तनीषा ने आगे कहा कि इस अनुभव ने उन्हें यह समझने में मदद की कि रियलिटी शो का वास्तविक स्वरूप क्या होता है। उनके अनुसार वहां कई बार रिश्ते वास्तविक भावनाओं से नहीं बल्कि परिस्थितियों और दबाव में बनते हैं, जिन्हें बाद में दर्शकों के सामने अलग तरीके से प्रस्तुत किया जाता है। इसी कारण उन्होंने इसे एक भावनात्मक रूप से कठिन अनुभव बताया।

    उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस अनुभव के बाद वह भविष्य में कभी भी ऐसे माहौल का हिस्सा नहीं बनना चाहेंगी जहां व्यक्तिगत जीवन और परिवार को लेकर अनावश्यक चर्चाएं या गलत व्याख्याएं की जाएं। उनके अनुसार मानसिक शांति किसी भी शो या लोकप्रियता से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।

    इस पूरे अनुभव के जरिए तनीषा मुखर्जी ने यह संकेत दिया कि मनोरंजन की दुनिया जितनी चमकदार दिखती है, उसके पीछे उतनी ही जटिल और दबाव भरी सच्चाई भी छिपी होती है, जिसे दर्शक अक्सर नहीं देख पाते।

  • बैतूल जेल में महिला कैदी ने चूड़ियां निगलकर आत्मघाती प्रयास किया, गम्भीर हालत में भोपाल रेफर

    बैतूल जेल में महिला कैदी ने चूड़ियां निगलकर आत्मघाती प्रयास किया, गम्भीर हालत में भोपाल रेफर

    नई दिल्ली। बैतूल जिला जेल की महिला बैरक में शनिवार सुबह हड़कंप मच गया, जब पति की हत्या के आरोप में बंद 21 वर्षीय कैदी पूनम उईके ने कांच की चूड़ियां पीसकर निगल लीं। घटना के बाद जेल प्रशासन तुरंत सक्रिय हुआ और महिला को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। स्थिति गंभीर होने के कारण उसे भोपाल रेफर कर दिया गया।

    पूनम अपने पति राजू उईके की हत्या के मामले में 18 दिसंबर 2025 से जेल में बंद है। घटना के समय बैरक में 18 अन्य महिला कैदी मौजूद थीं, लेकिन किसी को इसका पता नहीं चला। जेल में कड़ा सुरक्षा नियम होने के बावजूद पूनम के पास चूड़ियां कैसे पहुंचीं, यह एक गंभीर सवाल बन गया है। प्रभारी जेलर योगेश शर्मा ने बताया कि उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेज दी गई है और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जा रही है।

    जिला अस्पताल के सिविल सर्जन के अनुसार, पूनम के गले के अंदरूनी हिस्से में कांच के टुकड़ों से गहरे जख्म हुए हैं। इन जख्मों को और गंभीर नुकसान न पहुंचे, इसके लिए महिला को बेहतर इलाज के लिए भोपाल रेफर किया गया है।

    पूनम की पर्सनल लाइफ और आपराधिक रिकॉर्ड काफी जटिल है। वह अपने पति की हत्या में महाराष्ट्र के तीन युवकों के साथ शामिल थी। शुरुआती जांच में ऐसा प्रतीत होता है कि पूनम ने आत्मग्लानि या मानसिक तनाव के चलते यह कदम उठाया। चर्चा है कि पूनम का जेल में बॉयफ्रेंड भी मौजूद है, और यह घटना किसी दबाव या डिप्रेशन का नतीजा हो सकती है।

    घटना के बाद जेल प्रशासन ने महिला बैरक की निगरानी बढ़ा दी है। पुलिस और प्रशासन दोनों ही महिला के स्वास्थ्य पर नजर बनाए हुए हैं और उसके विस्तृत बयान लेने की तैयारी कर रहे हैं। इस घटना ने न केवल जेल की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य और कैदियों की सुरक्षा के महत्व को भी उजागर किया है।

  • बुधवार 25 फरवरी: रोहिणी नक्षत्र और विष्कुम्भ योग में करें ये असरदार उपाय, दूर होगा तनाव और सुधरेगी सेहत

    बुधवार 25 फरवरी: रोहिणी नक्षत्र और विष्कुम्भ योग में करें ये असरदार उपाय, दूर होगा तनाव और सुधरेगी सेहत


    नई दिल्ली । बुधवार 25 फरवरी को रोहिणी नक्षत्र और विष्कुम्भ योग का संयोग रहेगा जो आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में मदद कर सकता है। इस दिन कुछ विशेष उपाय करने से न केवल आपके मानसिक तनाव में कमी आएगी बल्कि सेहत परिवार व्यवसाय और जीवनसाथी संबंधों में भी सुधार देखने को मिलेगा। यदि आपको भूलने की आदत है और आप चीज़ें रखकर भूल जाते हैं तो आज शाम को चंद्रदेव को प्रणाम करें और चांदी का चंद्रमा धारण करें।
    यह उपाय आपकी याददाश्त को तेज करने में सहायक होगा। स्वास्थ्य के लिए भी यह दिन विशेष है। एक सुंदर और स्वस्थ जीवन के लिए जामुन का पेड़ लगाना चाहिए और उसकी जड़ों में पानी डालना चाहिए। यदि आज पेड़ लगाना संभव न हो तो संकल्प लेकर भविष्य में इसे जरूर करें। माता के स्वास्थ्य को लेकर चिंता हो तो शिव मंदिर जाकर शिवलिंग पर जल में दूध मिलाकर अर्पित करें। इससे माता का स्वास्थ्य जल्द ही सुधरेगा। वहीं यदि जीवनसाथी के मन में किसी बात को लेकर तनाव या शक की स्थिति बनी रहती है तो उनके हाथों से मोती का दान कराना लाभकारी होगा।

    काम के बोझ और मानसिक तनाव से राहत पाने के लिए आज 2 मुखी रुद्राक्ष गले में धारण करें। इससे आप मानसिक रूप से स्वस्थ और तनावमुक्त रहेंगे। घर में किसी मांगलिक कार्यक्रम की सफलता सुनिश्चित करनी हो तो शिव मंदिर जाकर अपने हाथ के बराबर लंबा सफेद सूत का धागा भेंट करें। इससे कार्यक्रम सफल होंगे और घर में सुख-शांति बनी रहेगी। यदि कार्यों की सफलता को लेकर घबराहट रहती है तो माता से आशीर्वाद स्वरूप मुट्ठी भर चावल प्राप्त कर उसे पोटली में संभालकर रखें। इससे कार्य से जुड़ी चिंता दूर होगी और आत्मविश्वास बढ़ेगा। आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए चंद्रमा की रोशनी में ॐ श्रां श्रीं श्रौं स: चन्द्रमसे नम: मंत्र का 108 बार जप करना लाभकारी रहेगा।

    घर में बहस और तनाव का माहौल दूर करने के लिए सफेद कपड़ा मंदिर में दान करें। यह उपाय परिवार में सुख-शांति बनाए रखने में मदद करेगा। व्यवसायिक प्रतिष्ठा बनाए रखने के लिए शाम के समय चंद्रदेव को अर्घ्य दें और सौं सोमाय नमः मंत्र का जप करें। इससे व्यवसाय में आपकी स्थिति मजबूत होगी। घर की सुख-समृद्धि बनाए रखने के लिए मंदिर में दूध का दान करें और घर के बड़ों का आशीर्वाद प्राप्त करें। इन उपायों को करने से न केवल आपका जीवन तनावमुक्त होगा बल्कि परिवारिक स्वास्थ्य और व्यवसायिक जीवन में भी सुधार आएगा। बुधवार 25 फरवरी का यह दिन इन उपायों के माध्यम से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाने के लिए उत्तम अवसर है।

  • अपनी बात मनवाने के लिए जान जोखिम में डालने का ट्रेंड: प्रेमी और नाराज पत्नी मोबाइल टावर पर चढ़े, समाज के लिए चेतावनी

    अपनी बात मनवाने के लिए जान जोखिम में डालने का ट्रेंड: प्रेमी और नाराज पत्नी मोबाइल टावर पर चढ़े, समाज के लिए चेतावनी


    सिंगरौली । अपनी बात मनवाने और भावनात्मक दबाव बनाने के लिए जान जोखिम में डालने का चलन अब चिंताजनक रूप लेता जा रहा है। सिंगरौली जिले में बीते दो दिनों के भीतर सामने आई दो अलग-अलग घटनाओं ने न केवल लोगों को चौंकाया है, बल्कि समाज के सामने कई गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं। परिस्थितियां भले ही अलग रही हों, लेकिन दोनों मामलों में तरीका एक ही थामोबाइल टावर पर चढ़कर आत्मघाती कदम जैसा खतरनाक विरोध।

    प्रेम प्रसंग में उठाया फिल्मी कदम

    पहली घटना 23 जनवरी की है। देवसर जियावन थाना क्षेत्र के धनहा गांव में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब रवि कुशवाहा नामक युवक गांव में बने मोबाइल टावर पर चढ़ गया। बताया गया कि युवक प्रेम प्रसंग और अंतरजातीय विवाह को लेकर अपने परिजनों की सहमति चाहता था। परिवार के विरोध से आहत युवक ने परिजनों को मनाने के लिए खतरनाक रास्ता चुना। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार युवक ने फिल्म शोले की तर्ज पर यह कदम उठाया जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही पुलिस और परिजन मौके पर पहुंचे। घंटों की समझाइश और भावनात्मक संवाद के बाद युवक

  • सोशल मीडिया की दोस्ती ने किया मानसिक बेहाल: बैतूल में हाईटेंशन टावर पर चढ़ा युवक, पुलिस ने बचाई जान

    सोशल मीडिया की दोस्ती ने किया मानसिक बेहाल: बैतूल में हाईटेंशन टावर पर चढ़ा युवक, पुलिस ने बचाई जान


    बैतूल मुलताई । सोशल मीडिया की आभासी दुनिया कभी-कभी हकीकत में जानलेवा साबित हो सकती है। मध्यप्रदेश के बैतूल जिले के मुलताई से एक ऐसा ही सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहाँ ‘हेलो ऐप’ पर हुई एक दोस्ती एक युवक के लिए जी का जंजाल बन गई। इस दोस्ती से उपजे मानसिक तनाव के कारण युवक ने आत्महत्या की नीयत से एक हाईटेंशन विद्युत टावर पर चढ़कर पुलिस और प्रशासन के हाथ-पांव फुला दिए। हालांकि, पुलिस की मुस्तैदी और घंटों चली काउंसलिंग के बाद युवक को सुरक्षित नीचे उतार लिया गया।

    खुद कॉल कर दी टावर पर चढ़ने की सूचना घटना देर रात की है, जब ज्ञान मंदिर क्षेत्र के पास स्थित एक विशाल हाईटेंशन टावर पर युवक को चढ़ते देखा गया। चौंकाने वाली बात यह रही कि युवक ने टावर पर चढ़ने के बाद खुद ही डायल 112 पर कॉल किया और पुलिस को बताया कि वह अपनी जीवनलीला समाप्त करने जा रहा है। सूचना मिलते ही डायल 112 की टीम और स्थानीय पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची। अंधेरी रात होने के कारण युवक की सटीक लोकेशन ढूंढना मुश्किल था, लेकिन पुलिसकर्मियों ने मोबाइल टॉर्च की रोशनी की मदद से युवक को काफी ऊंचाई पर चिन्हित किया।

    2 घंटे चला ‘हाई वोल्टेज’ ड्रामा टावर पर चढ़ा युवक बेहद भावुक और मानसिक रूप से परेशान था। पुलिस टीम ने सूझबूझ का परिचय देते हुए सीधे ऊपर चढ़ने के बजाय नीचे से ही युवक से फोन पर बातचीत जारी रखी। करीब दो घंटे तक पुलिसकर्मी उसे समझाते रहे और उसकी बातों को सुनकर उसे ढांढस बंधाया। इस मानसिक काउंसलिंग का सकारात्मक असर हुआ और युवक का इरादा बदल गया। कड़ी मशक्कत के बाद पुलिस की टीम उसे सुरक्षित नीचे उतारने में कामयाब रही।

    हेलो ऐप से शुरू हुई थी परेशानी पूछताछ में युवक की पहचान 27 वर्षीय अरविंद वाघने (पिता यशवंत), निवासी नागपुर के रूप में हुई है। अरविंद मुलताई के एक ढाबे पर अचारी रसोइया का काम करता है। उसने पुलिस को बताया कि कुछ समय पहले ‘हेलो ऐप’ के माध्यम से उसकी एक व्यक्ति से दोस्ती हुई थी। इस दोस्ती के बाद कुछ ऐसी परिस्थितियां बनीं कि वह लगातार मानसिक तनाव में रहने लगा। युवक का कहना था कि वह इस उलझन से इतना तंग आ चुका था कि उसे मौत ही एकमात्र रास्ता नजर आ रही थी।
    पुलिस ने युवक को सुरक्षित बचाकर उसके परिजनों को सूचित कर दिया है और उसकी काउंसलिंग की जा रही है ताकि वह दोबारा ऐसा आत्मघाती कदम न उठाए। यह घटना सोशल मीडिया के बढ़ते खतरों और उनसे होने वाले मानसिक आघात की ओर एक गंभीर इशारा करती है।

  • ग्वालियर: ड्यूटी से लौटकर युवक ने लगाया मौत को गले, सूने कमरे में फंदे से झूलती मिली लाश

    ग्वालियर: ड्यूटी से लौटकर युवक ने लगाया मौत को गले, सूने कमरे में फंदे से झूलती मिली लाश


    ग्वालियर। शहर के हजीरा थाना क्षेत्र में मंगलवार की शाम एक हृदयविदारक घटना सामने आई जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। एक 27 वर्षीय ऊर्जावान युवक जो कुछ ही घंटों पहले अपनी ड्यूटी पूरी कर घर लौटा था उसने अज्ञात कारणों के चलते अपने ही कमरे में फांसी लगाकर जीवनलीला समाप्त कर ली। जब पिता ने कमरे का दरवाजा खोला तो सामने का मंजर देख उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। घर की खुशियाँ पल भर में मातम में बदल गईं और चीख-पुकार से पूरा मोहल्ला दहल उठा।

    सामान्य दिनचर्या और अचानक उठाया खौफनाक कदम मृतक की पहचान लाइन नंबर-8 निवासी राकेश दुरखरिया 27 के रूप में हुई है। राकेश एक निजी फर्म में नौकरी करता था और अपने परिवार का सहारा था। परिजनों के अनुसार मंगलवार का दिन भी अन्य दिनों की तरह सामान्य था। राकेश सुबह तैयार होकर काम पर गया और दिन भर मेहनत करने के बाद शाम को घर लौटा। घर आने के बाद उसने परिजनों से सामान्य बातचीत की और अपने कमरे में चला गया। किसी को अंदाजा भी नहीं था कि कमरे के बंद दरवाजे के पीछे वह मौत का रास्ता चुन लेगा।

    जब पिता ने देखा हृदयविदारक दृश्य काफी देर तक जब राकेश कमरे से बाहर नहीं आया और भीतर से कोई आहट नहीं हुई तो पिता को चिंता हुई। उन्होंने आवाज लगाई लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। अनहोनी की आशंका में जब उन्होंने दरवाजा खोलकर भीतर झांका तो राकेश फंदे से लटका हुआ था। पिता की चीख सुनकर परिवार के अन्य सदस्य और पड़ोसी मौके पर दौड़े। आनन-फानन में उसे नीचे उतारा गया और नब्ज टटोली गई लेकिन तब तक राकेश की सांसें थम चुकी थीं।

    बिना सुसाइड नोट के उलझी गुत्थी सूचना मिलते ही हजीरा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का मुआयना किया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि पुलिस को तलाशी के दौरान कमरे से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। राकेश के व्यवहार में भी हाल-फिलहाल कोई बदलाव नहीं देखा गया था जिससे आत्महत्या की वजह और भी रहस्यमयी हो गई है। पुलिस अब युवक के मोबाइल कॉल डिटेल्स और सोशल मीडिया अकाउंट्स को खंगाल रही है ताकि मौत के पीछे छिपे संभावित तनाव या कारणों का पता लगाया जा सके।

    सदमे में परिवार जांच जारी हजीरा थाना पुलिस का कहना है कि प्राथमिक तौर पर मामला आत्महत्या का ही नजर आ रहा है लेकिन बिना किसी पुख्ता सबूत के ठोस कारण बताना जल्दबाजी होगी। फिलहाल मर्ग कायम कर लिया गया है। परिजनों की स्थिति अभी बयान देने लायक नहीं है; उनके सामान्य होने पर विस्तृत पूछताछ की जाएगी। क्या यह कदम किसी कार्यस्थल के दबाव आर्थिक तंगी या किसी निजी उलझन का परिणाम था यह जांच का मुख्य विषय है। इस घटना ने एक बार फिर युवाओं में बढ़ते मानसिक तनाव और अचानक लिए जाने वाले घातक फैसलों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।ग्वालियर के हजीरा थाना क्षेत्र में 27 वर्षीय निजी कर्मचारी राकेश दुरखरिया ने ड्यूटी से लौटने के बाद घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है जिससे मौत के कारण रहस्य बने हुए हैं। पुलिस मोबाइल और अन्य साक्ष्यों के जरिए मामले की जांच कर रही है।