Tag: Middle East crisis

  • ईरान के हवाई नेटवर्क की घेराबंदी में जुटा अमेरिका: 27 एयरलाइंस पर पाबंदी विमान और जरूरी सामान जुटाना होगा मुश्किल

    ईरान के हवाई नेटवर्क की घेराबंदी में जुटा अमेरिका: 27 एयरलाइंस पर पाबंदी विमान और जरूरी सामान जुटाना होगा मुश्किल


    नई दिल्ली। अमेरिका ने ईरान के एविएशन सेक्टर पर दबाव बढ़ाते हुए बड़ी कार्रवाई की है। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने ईरान से जुड़े नेटवर्क पर नई पाबंदियों का ऐलान किया है। इस कार्रवाई में ईरान की 27 एयरलाइंस को निशाना बनाया गया है। इसके साथ ही तुर्की यूएई मलेशिया और कजाकिस्तान में काम करने वाली कुछ कंपनियों पर भी प्रतिबंध लगाए गए हैं। अमेरिकी अधिकारियों का आरोप है कि ये कंपनियां ईरानी एयरलाइंस को विमान जरूरी सामान और दूसरी सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद कर रही थीं।

    अमेरिका की इस कार्रवाई का सीधा असर ईरान के एविएशन कारोबार पर पड़ सकता है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि नए प्रतिबंधों का मकसद उन रास्तों को बंद करना है जिनके जरिए ईरानी एयरलाइंस को विदेशों से पैसा विमान उपकरण और दूसरी जरूरी सुविधाएं हासिल होती हैं। प्रतिबंधों के बाद ईरानी विमानन कंपनियों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कारोबार करना और विदेशी कंपनियों से सेवाएं लेना ज्यादा मुश्किल हो सकता है।

    ईरान का एविएशन सेक्टर लंबे समय से अमेरिकी प्रतिबंधों के दबाव में रहा है। पुराने प्रतिबंधों के कारण ईरानी एयरलाइंस को नए विमान हासिल करने के साथ साथ विमान के जरूरी पुर्जे और तकनीकी सेवाएं जुटाने में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। अब नई कार्रवाई के बाद यह दबाव और बढ़ने की आशंका है। खास तौर पर ऐसी कंपनियां ज्यादा मुश्किल में आ सकती हैं जो ईरानी एयरलाइंस के साथ सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से कारोबार करती हैं।

    अमेरिकी अधिकारियों ने वित्तीय संस्थानों और बैंकों को भी ईरानी एविएशन नेटवर्क से जुड़े लेनदेन पर नजर रखने को कहा है। इसका मतलब यह है कि ईरानी एयरलाइंस के लिए अंतरराष्ट्रीय भुगतान करना और विदेशों से जरूरी सामान खरीदना पहले की तुलना में और कठिन हो सकता है। अमेरिका ने साफ संकेत दिया है कि ईरान की विमानन कंपनियों को सहायता देने वाले विदेशी कारोबारी नेटवर्क भी उसकी कार्रवाई के दायरे में आ सकते हैं।

    इस कार्रवाई में Mahan Air पर भी दबाव बढ़ाया गया है। अमेरिका पहले से ही इस एयरलाइन पर प्रतिबंध लगा चुका है। अमेरिकी आरोप है कि Mahan Air ने ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स को सहायता पहुंचाने में भूमिका निभाई है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार कुछ विदेशी कंपनियों ने Mahan Air को विमान हासिल करने और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के संचालन में मदद की। इसी तरह की गतिविधियों के आरोप में तुर्की और मलेशिया की कुछ कंपनियों पर भी कार्रवाई की गई है।

    अमेरिका के अनुसार कुछ कंपनियों ने Mahan Air को कम से कम तीन Boeing 777 विमान हासिल करने में मदद की। इन विमानों को पहले दूसरे देशों में इस्तेमाल से हटाया गया था और बाद में ईरानी एयरलाइंस के उपयोग के लिए उपलब्ध कराया गया। अमेरिका का मानना है कि इस तरह के नेटवर्क प्रतिबंधों के बावजूद ईरान की विमानन क्षमता को बनाए रखने में मदद कर रहे हैं।

    नई पाबंदियों का असर केवल एयरलाइंस तक सीमित रहने की संभावना नहीं है। टिकट बिक्री विमान आपूर्ति तकनीकी सेवाओं और दूसरे एविएशन कारोबार से जुड़ी विदेशी कंपनियों को भी जोखिम का सामना करना पड़ सकता है। इससे ईरान के अंतरराष्ट्रीय हवाई संपर्क पर दबाव बढ़ सकता है। दुबई दोहा और इस्तांबुल जैसे प्रमुख एयर कनेक्शन वाले क्षेत्रों में भी इसका असर देखने को मिल सकता है।

    यह कार्रवाई ईरान पर अमेरिकी आर्थिक दबाव बढ़ाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। अमेरिका पहले से ही ईरान के तेल और दूसरे आर्थिक क्षेत्रों पर प्रतिबंधों के जरिए दबाव बना रहा है। अब एविएशन सेक्टर को भी निशाना बनाकर अमेरिका ईरान तक पहुंचने वाले विदेशी पैसे सामान और तकनीकी सहायता के रास्तों को और सीमित करना चाहता है। आने वाले समय में यदि ऐसी कार्रवाई और बढ़ती है तो ईरान की एयरलाइंस के लिए विमान संचालन और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को बनाए रखना बड़ी चुनौती बन सकता है।

  • अमेरिका-ईरान तनाव फिर चरम पर IRGC के ठिकानों पर हमला ट्रंप बोले- पलटवार की भारी कीमत चुकानी होगी

    अमेरिका-ईरान तनाव फिर चरम पर IRGC के ठिकानों पर हमला ट्रंप बोले- पलटवार की भारी कीमत चुकानी होगी


    नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बेहद गंभीर दौर में पहुंच गया है। अमेरिकी सेना ने ईरान में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC के ठिकानों को निशाना बनाकर सैन्य कार्रवाई की है। हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। ट्रंप ने साफ संकेत दिया है कि अगर ईरान ने अमेरिकी हमले का जवाब देने की कोशिश की तो वाशिंगटन की ओर से पहले से कहीं ज्यादा जोरदार कार्रवाई की जा सकती है।

    अमेरिकी सेंट्रल कमांड की ओर से बताया गया कि स्थानीय समय के अनुसार दोपहर करीब 12 बजे अमेरिकी बलों ने ईरान में IRGC से जुड़े ठिकानों पर हमले शुरू किए। अमेरिकी पक्ष के मुताबिक यह कार्रवाई होर्मुज स्ट्रेट में वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैनिकों के खिलाफ IRGC की ओर से किए गए कथित हमलों के प्रयासों के बाद की गई है।

    यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव पहले से बढ़ा हुआ है। सोमवार रात दोनों पक्षों के बीच हमलों का आदान प्रदान भी हुआ था। बताया जा रहा है कि एक महीने से अधिक समय के बाद दोनों देशों के बीच फिर से इस तरह की सीधी सैन्य कार्रवाई हुई है। नए हमले ने क्षेत्र में बड़े संघर्ष की आशंका को और बढ़ा दिया है।

    राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए भी अमेरिकी कार्रवाई की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट के आसपास मौजूद ईरानी ठिकानों को निशाना बना रहा है। ट्रंप ने इस कार्रवाई को बड़ा और शक्तिशाली बताया। उनके मुताबिक ईरान की ओर से होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री माइन बिछाने की कथित कोशिश और जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर आठ मिसाइल दागे जाने के बाद यह कदम उठाया गया।

    दूसरी तरफ ईरान ने भी अमेरिकी हमले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। IRGC के प्रवक्ता सरदार मोहेबी ने कहा कि अमेरिका को ईरान पर किए गए ताजा हमले पर पछताना पड़ेगा और उसे कठोर जवाब का सामना करना होगा। ईरानी सशस्त्र बलों के जनरल स्टाफ और खातम अल-अनबिया मुख्यालय की ओर से भी अमेरिकी कार्रवाई की निंदा की गई है।

    ईरानी पक्ष ने कहा है कि अमेरिकी सेना की ओर से की जा रही कार्रवाई का जवाब दिया जाएगा। ईरानी बयान में अमेरिका को क्षेत्र में अपनी सैन्य गतिविधियां बढ़ाने के खिलाफ चेतावनी दी गई है। इससे दोनों देशों के बीच सैन्य टकराव बढ़ने की आशंका बनी हुई है।

    इस बीच अमेरिका ने अपने नागरिकों की सुरक्षा को लेकर भी कदम उठाया है। अमेरिकी विदेश विभाग ने मध्य पूर्व में मौजूद अमेरिकी नागरिकों के लिए सुरक्षा अलर्ट जारी किया है। लोगों को ज्यादा सतर्क रहने और संभावित उड़ान रद्द होने तथा हवाई क्षेत्र बंद होने जैसी परिस्थितियों के लिए तैयार रहने को कहा गया है। यात्रा में बाधा आने की आशंका के बीच क्षेत्र में रह रहे अमेरिकी नागरिकों को स्थानीय परिस्थितियों पर नजर रखने की सलाह दी गई है।

    अमेरिकी हमले और ईरान की जवाबी धमकी के बाद अब दुनिया की नजर इस बात पर है कि दोनों देशों के बीच तनाव आगे किस दिशा में जाता है। होर्मुज स्ट्रेट की रणनीतिक अहमियत को देखते हुए किसी भी नए सैन्य टकराव का असर पूरे मध्य पूर्व के साथ अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।

  • सभी को कराना PNG कनेक्शन …. मीडिल ईस्ट संकट के बीच केन्द्र ने राज्यों को दिए आदेश

    सभी को कराना PNG कनेक्शन …. मीडिल ईस्ट संकट के बीच केन्द्र ने राज्यों को दिए आदेश


    नई दिल्‍ली।
    भारत सरकार (Indian Government) ने देश में रसोई गैस (LPG – Liquefied Petroleum Gas) यानी LPG सिलेंडर को लेकर एक बड़ा निर्देश जारी किया है. पेट्रोलियम मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आदेश दिया है कि LPG सिलेंडर की जगह पाइपलाइन वाली नेचुरल गैस (Piped Natural Gas- PNG) के इस्‍तेमाल को तेजी से बढ़ाव दें, ताकि एलपीजी की सप्‍लाई को कम किया जा सके।

    साथ में यह भी कहा गया है कि जिन इलाकों में पीएनजी कनेक्‍शन पहुंचा है और लोग फिर भी एलपीजी गैस का यूज कर रहे हैं तो उनका कनेक्‍शन अपने आप ही कैंसिल हो जाएगा, जिसका मतलब है कि उन्‍हें रसोई गैस की समस्‍या का सामना करना पड़ सकता है।

    इसका मकसद गैस आपूर्ति व्यवस्था को डिजिटल और सुरक्षित बनाना है. नए ‘एलपीजी कंट्रोल ऑर्डर 2026’ और ‘नैचुरल गैस डिस्ट्रीब्यूशन ऑर्डर 2026’ के तहत नए निर्देश जारी किया गया है. इस निर्देश के तहत PNG और LPG दोनों तरह के कनेक्‍शन रखना प्रतिबंधित है. इसका मतलब है कि ऐसे लोगों को अपना एलपीजी सिलेंडर सरेंडर करना होगा।


    कराना ही होगा पीएनजी कनेक्‍शन?

    पेट्रोलियम सचिव नीरज मित्तल ने राज्‍यों के भेजे लेटर में कहा कि सरकार ने एलपीजी से पीएनजी शिफ्ट होने के नियमों को सख्‍त कर दिया है. उन्‍होंने कहा‍ कि जिन सोसायटीज या इलाकों में पीएनजी नेटवर्क आ चुका है, वहां के यूजर्स को नोटिस दिया जाएगा. अगर नोटिस मिलने के बाद भी समय से कोई ग्राहक पीएनजी कनेक्‍शन नहीं लेता है, तो उसका एलपीजी सिलेंडर कनेक्‍शन अपने आप ही कैंसिल कर दिया जाएगा।


    मिडिल ईस्‍ट में संकट जारी

    अमेरिका-ईरान के बीच जंग को लेकर अनिश्‍चतता बनी हुई है. दोनों देश होर्मुज पर अपना-अपना दावा कर रहे है, जिस कारण मिडिल ईस्‍ट से एशिया क्षेत्र की ओर, होर्मुज से होकर आने वाली तेल-गैस से भरी जहाजें प्रभावित हो रही हैं. इसी कारण, गैस की सप्‍लाई को लेकर समस्‍या आ रही है. हालांकि, भारत कई देशों के साथ तेल-गैस की सप्‍लाई कर रहा है, लेकिन लागत में बढ़ोतरी हुई है. ऐसे में भारत अब LPG से निर्भरता को कम करने के लिए PNG की ओर शिफ्ट कर रहा है. इस कारण पाइपलाइन गैस लगाने को प्रमुखता दे रहा है।


    हर जिले में PNG कोऑर्डिनेशन कमेटी

    PNG कनेक्‍शन प्रॉसेस को तेजी से लागू करने के लिए सरकार ने खास इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर तैयार किया है. तेल डिस्‍ट्रीब्‍यूशन कंपन‍ियों और सिटी गैस डिस्‍ट्रीब्‍यूशन संस्‍थाओं को हर क्षेत्र में पीएनजी कोऑर्डिनेशन कमेटी में बनाने का निर्देश दिया गया है. राज्‍यो से कहा गया है कि वे खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के जिला आपूर्ति अधिकारी (DSO) स्तर के अधिकारी को जिले का नोडल ऑफिसर बनाएं।

  • मिसाइल हमले के आरोपों पर ईरान का यूएई को जवाब, तेहरान बोला- पहले सबूत दें, फिर लगाएं इल्जाम

    मिसाइल हमले के आरोपों पर ईरान का यूएई को जवाब, तेहरान बोला- पहले सबूत दें, फिर लगाएं इल्जाम


    नई दिल्ली। ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के बीच तनाव एक बार फिर गंभीर मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। यूएई की ओर से ईरान पर दो बैलिस्टिक मिसाइल दागने का आरोप लगाए जाने के बाद तेहरान ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा है कि बिना ठोस सबूत के इस तरह के गंभीर आरोप लगाने से क्षेत्रीय तनाव और बढ़ सकता है। ईरान ने यह भी संकेत दिया है कि मिसाइल घटना के पीछे किसी फॉल्स फ्लैग ऑपरेशन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

    यूएई के रक्षा मंत्रालय के अनुसार ईरान से दो बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गई थीं। दोनों मिसाइलें समुद्र में गिरीं। इनमें से एक यूएई के क्षेत्रीय जल क्षेत्र में जबकि दूसरी उसके बाहर गिरी। यूएई का दावा है कि मिसाइलों का निशाना समुद्री यातायात हो सकता था। हालांकि इस घटना में किसी व्यक्ति के घायल होने या किसी तरह के नुकसान की जानकारी सामने नहीं आई है। यूएई प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों और गलत सूचनाओं पर भरोसा न करें और सुरक्षा से जुड़ी जानकारी के लिए केवल आधिकारिक स्रोतों पर विश्वास करें।

    मिसाइल घटना के बाद यूएई के गृह मंत्रालय ने लोगों के मोबाइल फोन पर सुरक्षा अलर्ट भी भेजा। शुरुआती खतरे की चेतावनी के बाद प्रशासन ने स्थिति को सुरक्षित बताया और लोगों से सामान्य गतिविधियां फिर शुरू करने की अपील की। दूसरी तरफ ईरान ने यूएई के आरोपों पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले ठोस और विश्वसनीय सबूत सामने रखे जाने चाहिए। तेहरान ने चेतावनी दी कि बिना प्रमाण के आरोप क्षेत्र में किसी बड़े टकराव की वजह बन सकते हैं।

    इस पूरे घटनाक्रम के बीच यूएई ने ईरान के साथ अपने संबंधों को लेकर बड़ा फैसला भी लिया है। यूएई के विदेश मंत्रालय की संचार निदेशक अफरा अल हमेली के मुताबिक क्षेत्रीय परिस्थितियों को देखते हुए ईरान के साथ सभी व्यापारिक वाणिज्यिक और वित्तीय लेनदेन अगले आदेश तक निलंबित कर दिए गए हैं। इस फैसले से दोनों देशों के बीच पहले से तनावपूर्ण संबंधों पर और असर पड़ने की आशंका है।

    मिसाइल विवाद ऐसे समय सामने आया है जब होर्मुज स्ट्रेट को लेकर क्षेत्रीय तनाव पहले से बेहद संवेदनशील बना हुआ है। यह समुद्री मार्ग खाड़ी क्षेत्र के लिए रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। यहां किसी भी सैन्य गतिविधि या सुरक्षा संकट का असर केवल ईरान और यूएई तक सीमित नहीं रह सकता बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर भी पड़ सकता है।

    फिलहाल ईरान जहां मिसाइल हमले के आरोपों को पूरी तरह नकार रहा है वहीं यूएई अपने सुरक्षा आकलन के आधार पर घटना को गंभीर मान रहा है। दोनों देशों के बीच बढ़ते आरोप प्रत्यारोप ने खाड़ी क्षेत्र में नई चिंता पैदा कर दी है। आने वाले दिनों में इस घटना को लेकर और तथ्य सामने आने के साथ ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मिसाइलें वास्तव में कहां से दागी गई थीं और उनका वास्तविक उद्देश्य क्या था। फिलहाल इतना तय है कि इस विवाद ने ईरान और यूएई के बीच तनाव को और गहरा कर दिया है और होर्मुज क्षेत्र में किसी भी नए घटनाक्रम पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।

  • अमेरिका ईरान से क्यों मांग रहा मुआवजा? ट्रंप ने रखी लंबी सूची, शांति वार्ता पर भी डाला नया दबाव

    अमेरिका ईरान से क्यों मांग रहा मुआवजा? ट्रंप ने रखी लंबी सूची, शांति वार्ता पर भी डाला नया दबाव


    नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब मुआवजे का मुद्दा उठाकर विवाद को एक नया मोड़ दे दिया है। ट्रंप ने कहा है कि यदि ईरान पिछले कुछ महीनों में हुए नुकसान के लिए मुआवजे की मांग कर सकता है तो अमेरिका भी उससे मुआवजा मांग सकता है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए साफ संकेत दिया कि भविष्य में अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली बातचीत में यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया जाएगा। उनके इस रुख से दोनों देशों के बीच पहले से जारी तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

    ट्रंप ने अपनी पोस्ट में कहा कि उन्हें यह विचार दिलचस्प लगा कि ईरान हालिया संघर्ष में हुए नुकसान की भरपाई की मांग कर रहा है। इसी आधार पर उन्होंने अमेरिका की ओर से भी ईरान से मुआवजा मांगने की बात कही। अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि ईरान से जुड़े संघर्षों में कई अमेरिकी नागरिकों और सैन्यकर्मियों की जान गई है जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल भी हुए हैं। ट्रंप का कहना है कि ऐसे पीड़ित परिवारों को मुआवजा मिलना चाहिए।

    अपने बयान में ट्रंप ने पुराने हमलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने यमन के बंदरगाह पर अमेरिकी नौसेना के युद्धपोत यूएसएस कोल पर हुए घातक हमले का हवाला दिया। अक्टूबर 2000 में हुए इस हमले में 17 अमेरिकी नाविकों की मौत हुई थी और कई अन्य घायल हुए थे। इस हमले की जिम्मेदारी अलकायदा पर डाली गई थी। ट्रंप ने इसके अलावा जनरल कासिम सुलेमानी से जुड़े घटनाक्रम और दूसरे संघर्षों में मारे गए लोगों का भी जिक्र किया।

    ट्रंप ने कहा कि पिछले कई दशकों के दौरान विरोध प्रदर्शनों और विभिन्न संघर्षों में मारे गए लोगों के परिवारों को भी मुआवजे की सूची में शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने पिछले पांच महीनों में मारे गए हजारों लोगों के परिजनों के लिए भी नुकसान की भरपाई की बात कही। हालांकि इन दावों और मुआवजे की संभावित प्रक्रिया को लेकर अभी विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।

    अमेरिकी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि उन्होंने अपने प्रतिनिधियों को इस मुद्दे को भविष्य की बातचीत में शामिल करने के निर्देश दे दिए हैं। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने और संभावित समझौते को लेकर बातचीत की कोशिशें चल रही हैं। ट्रंप ने इससे पहले संकेत दिया था कि वह सैन्य कार्रवाई बढ़ाने के बजाय ईरान पर आर्थिक दबाव बनाए रखने को प्राथमिकता दे सकते हैं।

    दूसरी ओर ईरान भी अमेरिका के सामने अपनी कई शर्तें रख रहा है। ईरान की ओर से खाड़ी क्षेत्र में जारी नाकाबंदी हटाने के साथ युद्ध के दौरान हुए नुकसान की भरपाई आर्थिक प्रतिबंधों में राहत और विदेशों में फंसी संपत्तियों को जारी करने जैसी मांगें उठाई गई हैं। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी अपना रुख स्पष्ट रखा है और अमेरिका से क्षेत्रीय मामलों में हस्तक्षेप कम करने की मांग की है।

    ट्रंप ने यह भी संकेत दिया है कि अमेरिका फिलहाल ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ने का इंतजार कर रहा है। उनका मानना है कि महंगाई और कमजोर होती आर्थिक स्थिति ईरानी नेतृत्व को समझौते की दिशा में आगे बढ़ने के लिए मजबूर कर सकती है। ऐसे में दोनों देशों के बीच बातचीत भले ही जारी रहने के संकेत दे रही हो लेकिन मुआवजे युद्ध के नुकसान और होर्मुज जैसे मुद्दों ने समझौते की राह को और मुश्किल बना दिया है। आने वाले दिनों में ट्रंप का यह नया रुख अमेरिका ईरान संबंधों और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी असर डाल सकता है।

  • स्विट्जरलैंड वार्ता में दिखे कूटनीतिक संकेत ईरानी डेलिगेशन लौटा वेंस और कतर के मंत्री की मुलाकात बनी चर्चा का विषय

    स्विट्जरलैंड वार्ता में दिखे कूटनीतिक संकेत ईरानी डेलिगेशन लौटा वेंस और कतर के मंत्री की मुलाकात बनी चर्चा का विषय


    नई दिल्ली । मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और क्षेत्रीय अस्थिरता को कम करने के उद्देश्य से स्विट्जरलैंड में आयोजित ईरान और अमेरिका के बीच शांति वार्ता का नया दौर कई वजहों से सुर्खियों में आ गया है। बातचीत का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में बढ़ते तनाव को कम करना और ऊर्जा बाजार पर पड़ रहे प्रभाव को नियंत्रित करना था लेकिन वार्ता के दौरान सामने आए कुछ घटनाक्रमों ने राजनीतिक और कूटनीतिक हलकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

    स्विस रिसॉर्ट बुर्गेनस्टॉक में आयोजित इस बैठक में अमेरिका और ईरान के वरिष्ठ प्रतिनिधि लंबे समय तक बातचीत में शामिल रहे। दोनों पक्षों के बीच कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई लेकिन किसी ठोस सहमति तक पहुंचने की खबर सामने नहीं आई। रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कुछ हालिया बयानों के बाद ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने असंतोष जताया और कुछ समय के लिए वार्ता प्रक्रिया से अलग हो गया। हालांकि बाद में यह स्पष्ट किया गया कि बातचीत पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है और आने वाले हफ्तों में इस पर आगे विचार विमर्श जारी रहेगा।

    इस बीच सम्मेलन से जुड़े कुछ दृश्य सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगे। इन वीडियो और तस्वीरों के आधार पर कई तरह के दावे और व्याख्याएं सामने आने लगीं। सबसे ज्यादा चर्चा उस समय हुई जब यह दावा किया गया कि कतर के एक वरिष्ठ मंत्री और अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के बीच औपचारिक अभिवादन के दौरान हाथ नहीं मिलाया गया। हालांकि इस संबंध में किसी भी पक्ष की ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी सामने नहीं आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि कूटनीतिक कार्यक्रमों में प्रोटोकॉल समय प्रबंधन और मंच व्यवस्था जैसी कई वजहों से ऐसी स्थितियां बन सकती हैं इसलिए किसी एक दृश्य के आधार पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं माना जा सकता।

    एक अन्य घटनाक्रम जिसने लोगों का ध्यान आकर्षित किया वह ईरानी प्रतिनिधिमंडल का सामूहिक फोटो सत्र में शामिल न होना था। रिपोर्टों के मुताबिक ईरानी प्रतिनिधि कार्यक्रम स्थल से बिना तस्वीर खिंचवाए रवाना हो गए। हालांकि इसके पीछे की वास्तविक वजह सार्वजनिक नहीं की गई है। अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कई बार देश अपनी कूटनीतिक प्राथमिकताओं या राजनीतिक संदेशों के तहत कुछ औपचारिक गतिविधियों से दूरी बनाते हैं। इसलिए इस घटना को भी उसी संदर्भ में देखा जा रहा है।

    बैठक में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर की मौजूदगी को लेकर भी सोशल मीडिया पर कई तरह की चर्चाएं देखने को मिलीं। वायरल तस्वीरों और वीडियो के आधार पर लोगों ने अलग अलग अनुमान लगाए लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि किसी व्यक्ति के चेहरे के भाव या शारीरिक हावभाव के आधार पर उसकी मानसिक स्थिति या राजनीतिक रुख का आकलन नहीं किया जा सकता।

    अंतरराष्ट्रीय राजनीति में अक्सर छोटे दिखने वाले घटनाक्रम भी बड़े संदेशों के रूप में देखे जाते हैं। यही कारण है कि ऐसे सम्मेलनों में नेताओं की गतिविधियां मीडिया और विश्लेषकों की नजर में रहती हैं। हालांकि किसी भी घटना की सही व्याख्या के लिए आधिकारिक बयानों और विश्वसनीय तथ्यों का इंतजार करना जरूरी होता है।

    फिलहाल स्विट्जरलैंड में हुई यह वार्ता किसी निर्णायक नतीजे तक नहीं पहुंची है लेकिन इससे जुड़े कूटनीतिक संकेत और चर्चाएं वैश्विक राजनीति में आने वाले दिनों तक चर्चा का विषय बने रहने की संभावना है।

  • ईरान बोला- अमेरिका की धमकियों से नहीं डरते, इजराइल पर बातचीत बिगाड़ने का आरोप; होर्मुज और समझौते को लेकर बढ़ा तनाव

    ईरान बोला- अमेरिका की धमकियों से नहीं डरते, इजराइल पर बातचीत बिगाड़ने का आरोप; होर्मुज और समझौते को लेकर बढ़ा तनाव




    नई दिल्ली। ईरान ने एक बार फिर अमेरिका के साथ चल रही बातचीत के बीच सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि वह किसी भी तरह की धमकियों से डरने वाला नहीं है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ईस्माइल बघाई ने साफ कहा कि अमेरिका पर भरोसा करना मुश्किल है, क्योंकि यह गारंटी नहीं है कि वह किसी संभावित समझौते का पूरी तरह पालन करेगा।

    ईरान ने आरोप लगाया है कि इजराइल लगातार अमेरिका-ईरान वार्ता को कमजोर करने और उसे पटरी से उतारने की कोशिश कर रहा है। बघाई के मुताबिक, कुछ देश युद्ध और टकराव का माहौल बनाकर बातचीत को प्रभावित करने का प्रयास कर रहे हैं।

    इसी बीच ईरान ने संकेत दिया है कि हाल के कूटनीतिक बदलावों में कुछ देशों, जिनमें पाकिस्तान और अन्य क्षेत्रीय साझेदार शामिल हैं, की मध्यस्थता की भूमिका रही है, हालांकि तेहरान आने को लेकर कोई आधिकारिक कार्यक्रम तय नहीं है।

    वहीं, पिछले 24 घंटे में बातचीत से जुड़े कई अहम अपडेट सामने आए हैं। अमेरिका और ईरान के बीच अपेक्षित समझौते पर अभी तक हस्ताक्षर नहीं हो पाए हैं, जबकि ओमान के जरिए दोनों पक्षों के बीच संदेशों का आदान-प्रदान जारी है।

    ईरान ने दोहराया है कि देश में किसी भी बड़े फैसले के लिए सुप्रीम लीडर की मंजूरी जरूरी होती है, जिससे अंतिम निर्णय प्रक्रिया और जटिल हो जाती है।

    उधर, अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते को लेकर इजराइल की चिंता बढ़ी हुई है, खासकर होर्मुज जलमार्ग से जुड़े रणनीतिक मुद्दों को लेकर। ब्रिटेन और यूरोपीय संघ ने बातचीत का स्वागत करते हुए क्षेत्रीय स्थिरता और परमाणु अप्रसार पर जोर दिया है।

    फिलहाल अमेरिका की ओर से भी यह संकेत दिए गए हैं कि बातचीत जारी है और जल्द कोई बड़ा अपडेट सामने आ सकता है, लेकिन अंतिम समझौते पर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है।

  • होर्मुज स्ट्रेट खुलने के संकेत, अमेरिका-ईरान समझौते की बढ़ी उम्मीद; दुनिया को मिल सकती है राहत

    होर्मुज स्ट्रेट खुलने के संकेत, अमेरिका-ईरान समझौते की बढ़ी उम्मीद; दुनिया को मिल सकती है राहत



    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में महीनों से जारी तनाव अब कम होता दिखाई दे रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम और व्यापक समझौते को लेकर कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों देश एक संभावित डील के काफी करीब पहुंच चुके हैं। इसी बीच ईरान ने बड़ा संकेत देते हुए कहा है कि अगर समझौता अंतिम रूप लेता है तो रणनीतिक रूप से बेहद अहम होर्मुज स्ट्रेट में अगले 30 दिनों के भीतर जहाजों की आवाजाही फिर से सामान्य हो सकती है।

    दरअसल 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर हमलों के बाद पूरे पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर पहुंच गया था। इसके बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर निगरानी और नियंत्रण सख्त कर दिया था, जिससे इस समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की संख्या में भारी गिरावट आ गई। दुनिया की करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस सप्लाई इसी समुद्री रास्ते से गुजरती है, इसलिए इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने से वैश्विक ऊर्जा बाजार में भी उथल-पुथल मच गई थी।

    ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार संभावित समझौते में युद्ध को खत्म करने, क्षेत्र में तनाव कम करने और समुद्री यातायात बहाल करने जैसे मुद्दों पर सहमति बनने की कोशिश हो रही है। ईरान ने संकेत दिए हैं कि यदि सभी पक्ष सहमत होते हैं तो एक महीने के भीतर जहाजों की आवाजाही युद्ध-पूर्व स्थिति में लौट सकती है।

    उधर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी हाल के दिनों में दावा कर चुके हैं कि ईरान के साथ समझौते को लेकर सकारात्मक प्रगति हुई है। हालांकि परमाणु कार्यक्रम और हाईली एनरिच्ड यूरेनियम जैसे मुद्दों पर अभी दोनों देशों के बीच मतभेद बने हुए हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अगर होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह सामान्य होता है तो इसका सबसे बड़ा असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर पड़ेगा। इससे कच्चे तेल की कीमतों में राहत मिल सकती है और भारत समेत कई देशों को ऊर्जा संकट से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

  • ट्रंप का बड़ा दावा: ईरान से डील लगभग तय, खुल सकता है होर्मुज़ स्ट्रेट; मिडिल ईस्ट में शांति की उम्मीद बढ़ी

    ट्रंप का बड़ा दावा: ईरान से डील लगभग तय, खुल सकता है होर्मुज़ स्ट्रेट; मिडिल ईस्ट में शांति की उम्मीद बढ़ी

    नई दिल्ली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ संभावित शांति समझौते को लेकर बड़ा दावा करते हुए कहा है कि दोनों देशों के बीच डील “काफी हद तक तय” हो चुकी है और जल्द ही इसे अंतिम रूप दिया जा सकता है। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर कहा कि अमेरिका, ईरान और मध्य-पूर्व के कई सहयोगी देशों के बीच शांति को लेकर महत्वपूर्ण बातचीत हुई है। उन्होंने बताया कि इस प्रस्तावित समझौते में होर्मुज़ स्ट्रेट को दोबारा पूरी तरह खोलने का मुद्दा भी शामिल है, जिससे वैश्विक तेल और गैस सप्लाई पर पड़ा दबाव कम हो सकता है। ट्रंप ने यह भी कहा कि उनकी इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू  से फोन पर सकारात्मक बातचीत हुई है।
    हालांकि ट्रंप ने समझौते की पूरी डिटेल साझा नहीं की, लेकिन साफ कहा कि किसी भी डील के तहत ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से पूरी तरह रोका जाएगा। दूसरी ओर ईरान ने संकेत दिए हैं कि बातचीत में कुछ नरमी जरूर आई है, लेकिन अभी मुख्य मुद्दों पर सहमति नहीं बनी है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmail Baghaei ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच 14 बिंदुओं वाले एक ढांचे पर चर्चा चल रही है, जिसे अगले 30 से 60 दिनों में अंतिम समझौते की दिशा में आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने अमेरिका पर विरोधाभासी बयान देने का आरोप भी लगाया।
    गौरतलब है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान पर बड़े हमलों के बाद पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ गया था, जिसके जवाब में ईरान ने इजराइल और अमेरिकी सहयोगी देशों को निशाना बनाया था। अप्रैल की शुरुआत में युद्धविराम के बाद से दोनों देशों के बीच बैकडोर बातचीत जारी है और अब ट्रंप के ताजा बयान ने संभावित डील और होर्मुज़ स्ट्रेट खुलने की अटकलों को और तेज कर दिया है।
  • ट्रंप की एक पोस्ट से फिर गरमाया पश्चिम एशिया! ईरान पर नए हमले की अटकलों से दुनिया में हलचल

    ट्रंप की एक पोस्ट से फिर गरमाया पश्चिम एशिया! ईरान पर नए हमले की अटकलों से दुनिया में हलचल


    नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सोशल मीडिया पोस्ट ने नए सैन्य टकराव की आशंकाओं को हवा दे दी है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक तस्वीर साझा की, जिसमें वह युद्धपोत पर सैन्य अधिकारियों के साथ खड़े नजर आए। तस्वीर के साथ उन्होंने लिखा— “तूफान से पहले की शांति।” इस एक लाइन ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है और माना जा रहा है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ फिर बड़ा कदम उठा सकता है।

    तस्वीर में ट्रंप समुद्र के बीच युद्धपोत पर खड़े दिखाई दे रहे हैं। पीछे ईरान का झंडा लगे जहाज और तूफानी मौसम जैसे दृश्य नजर आ रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह पोस्ट केवल प्रतीकात्मक नहीं बल्कि ईरान को सीधी चेतावनी भी हो सकती है। खास बात यह है कि हाल के दिनों में ट्रंप कई बार सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि अगर ईरान के साथ समझौता नहीं हुआ तो उसे “गंभीर परिणाम” भुगतने पड़ सकते हैं।

    इसी बीच अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स ने तनाव और बढ़ा दिया है। द न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिकी रक्षा विभाग ने ईरान के खिलाफ संभावित सैन्य कार्रवाई के लिए “ऑपरेशन एपिक फ्यूरी 2.0” नाम की योजना तैयार की है। रिपोर्ट के मुताबिक इस योजना में ईरान के सैन्य ठिकानों और अहम बुनियादी ढांचे पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा विशेष सैन्य अभियान और रणनीतिक इलाकों पर कब्जे जैसे विकल्पों पर भी चर्चा चल रही है।

    अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने भी संकेत दिए हैं कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका सैन्य कार्रवाई तेज कर सकता है। हालांकि उन्होंने यह साफ नहीं किया कि हमला कब और किस स्तर पर हो सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी सेना के पास कई विकल्प तैयार हैं, लेकिन अंतिम फैसला अब भी राष्ट्रपति ट्रंप के हाथ में है।

    दूसरी तरफ ईरान ने भी कड़ा रुख अपना लिया है। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि ईरान किसी भी हमले का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका ने गलत कदम उठाया तो उसका जवाब भी उसी भाषा में मिलेगा। ईरान ने साफ कर दिया है कि वह बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन युद्ध की स्थिति में पीछे हटने वाला नहीं है।

    गौरतलब है कि अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान से जुड़े ठिकानों पर संयुक्त कार्रवाई की थी। इसके बाद 8 अप्रैल को अस्थायी सीजफायर जरूर हुआ, लेकिन दोनों पक्षों के बीच तनाव खत्म नहीं हुआ। अब ट्रंप की नई पोस्ट और अमेरिकी सैन्य तैयारियों की खबरों ने पश्चिम एशिया में फिर बड़े संघर्ष की आशंका बढ़ा दी है। दुनिया की नजरें अब वॉशिंगटन और तेहरान पर टिकी हैं, क्योंकि एक गलत फैसला पूरे क्षेत्र को युद्ध की आग में झोंक सकता है।