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  • Iran-US War : लेबनान में तनाव बढ़ा, इजरायल ने 9 इलाकों को खाली करने का दिया आदेश; होर्मुज को लेकर भी बढ़ी चिंता

    Iran-US War : लेबनान में तनाव बढ़ा, इजरायल ने 9 इलाकों को खाली करने का दिया आदेश; होर्मुज को लेकर भी बढ़ी चिंता



    नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। सीजफायर के दावों के बीच हालात फिर से बिगड़ते दिख रहे हैं, जहां एक तरफ अमेरिका संभावित सैन्य कार्रवाई की तैयारी कर रहा है, वहीं दूसरी ओर इजरायल ने लेबनान के कई इलाकों को खाली करने का आदेश जारी कर दिया है।

    दक्षिणी लेबनान में इजरायल ने 9 से अधिक कस्बों को खाली करने की चेतावनी दी है, जिससे पहले से विस्थापित लाखों लोगों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। कई लोग सीजफायर के बाद लौटे थे, लेकिन नए हालात के चलते एक बार फिर पलायन का खतरा पैदा हो गया है।

    इस बीच अमेरिका और ईरान के बीच तनाव भी कम नहीं हुआ है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यदि बातचीत विफल होती है तो अमेरिका और इजरायल मिलकर ईरान पर दोबारा बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई कर सकते हैं। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अगले हफ्तों में हमलों की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है।

    होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी स्थिति गंभीर बनी हुई है। ईरान ने संकेत दिए हैं कि वह इसे “दोस्त देशों के लिए खुला और दुश्मनों के लिए सीमित” कर सकता है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ सकता है। वहीं अमेरिका इसे खोलने के लिए दबाव बना रहा है।

    संयुक्त राष्ट्र में भी इस मुद्दे पर टकराव देखने को मिला है, जहां ईरान ने चेतावनी दी है कि किसी भी अमेरिकी समर्थित प्रस्ताव का समर्थन करने वाले देशों को भविष्य के तनाव के लिए जिम्मेदार माना जाएगा।

  • Middle East Crisis में भारत के प्लान-बी का कमाल….. ग्लोबल संकट के बीच Import-Export में वृद्धि

    Middle East Crisis में भारत के प्लान-बी का कमाल….. ग्लोबल संकट के बीच Import-Export में वृद्धि


    नई दिल्ली।
    अमेरिका-ईरान तनाव (US-Iran Tensions), होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) बंद और इससे क्रूड की कीमतों (Crude Prices) में लगी आग के चलते ग्लोबल टेंशन चरम पर है. दुनिया के तमाम देशों में इससे उपजे तेल-गैस संकट (Oil and Gas Crisis) से हाहाकार मचा है और महंगाई की मार आम आदमी पर पड़ रही है. भारत भी इससे अछूता नहीं है, शुक्रवार को ही देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की गई. हालांकि, ये अन्य देशों के मुकाबले काफी कम है और करीब चार साल बाद इसमें इजाफा हुआ है।

    लेकिन बड़े ग्लोबल संकटों के बावजूद भारत सही ट्रैक पर आगे बढ़ रहा है. इसका एक ताजा उदाहरण देश के निर्यात के आंकड़े हैं. तमाम चुनौतियों के बाद भी भारतीय सामानों का एक्सपोर्ट अप्रैल महीने में बढ़कर 43.56 अरब डॉलर रहा है, जबकि आयात में भी तेज उछाल देखने को मिला है. कुल निर्यात की बात करें, तो ये 80.80 अरब डॉलर रहा है।

    इन चीजों का खूब हुआ निर्यात
    कॉमर्स सेक्रेटरी राजेश अग्रवाल ने शुक्रवार ये आंकड़े जारी करते हुए कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद देश का निर्यात बढ़ रहा है. अप्रैल में ये 13.78 फीसदी की उछाल के साथ बढ़कर 43.56 अरब डॉलर हो गया. इसके अलावा अप्रैल में भारतीय आयात भी सालाना आधार पर 10 फीसदी बढ़कर 71.94 अरब डॉलर हो गया।

    इस दौरान कई क्षेत्रों में निर्यात में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई. अनाजों के निर्यात में सबसे अधिक 210.19% का उछाल आया, इसके बाद मीट, डेयरी और पोल्ट्री उत्पादों में 48.03% और इलेक्ट्रॉनिक सामानों में 40.31% की तेजी आई. पेट्रोलियम प्रोडक्ट, हस्तशिल्प, मरीन प्रोडक्ट, इंजीनियरिंग सामान, दवाएं और कॉफी में भी ग्रोथ देखने को मिली है.


    होर्मुज संकट का यहां पड़ा असर

    अप्रैल महीने में भारत का व्यापार घाटा 28.38 अरब डॉलर रहा. होर्मुज संकट के असर की बात करें, तो राजेश अग्रवाल ने बताया कि पिछले महीने पश्चिम एशिया को भारत का निर्यात 28% घटकर 4.16 अरब डॉलर रह गया, जबकि अप्रैल 2025 में यह 5.78 अरब डॉलर था. इस क्षेत्र से आयात अप्रैल में 31.64% घटा और 10.47 अरब डॉलर रह गया।


    दुनिया में हाय-तौबा, भारत ने ऐसा संभाला

    आयात-निर्यात के इन ताजा आंकड़ों को देखकर साफ हो जाता है कि ट्रंप का टैरिफ अटैक हो या फिर अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध से पैदा हुआ तेल-गैस संकट. मोदी सरकार का प्लान-बी (Modi Govt Plan-B) काम कर रहा है और इसका असर भी देखने को मिल रहा है।

    अमेरिका-ईरान युद्ध से मिडिल ईस्ट में तनाव के बीच पाकिस्तान से लेकर साउथ कोरिया तक में हायतौबा मची नजर आई. लेकिन देश के आयात-निर्यात को सुचारू रखने के लिए सरकार कई बड़े कदम उठाए, इनमें आयात डेस्टिनेशंस की संख्या बढ़ाने के साथ ही ग्लोबल टेंशन के बीच भारतीय निर्यात के लिए नए बाजारों तक पहुंच शामिल है. बीते कुछ समय में भारत ने न्यूजीलैंड, यूरोपीय यूनियन समेत कई देशों से बड़े FTA साइन किए हैं।

  • ईरान की 'शर्तों' पर भड़के ट्रंप: बोले-बिल्कुल मंजूर नहीं! जंग या समझौता? फैसला अब अमेरिका के हाथ

    ईरान की 'शर्तों' पर भड़के ट्रंप: बोले-बिल्कुल मंजूर नहीं! जंग या समझौता? फैसला अब अमेरिका के हाथ

    नई दिल्ली। मध्य पूर्व (Middle East) की धरती एक बार फिर बारूद के ढेर पर खड़ी नजर आ रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान द्वारा भेजे गए कूटनीतिक प्रस्ताव को ‘कचरे के डिब्बे’ में डालते हुए उसे “पूरी तरह अस्वीकार्य” करार दिया है। इस एक बयान ने दुनिया भर के बाजारों और कूटनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है।

    ट्रंप का ‘ट्रुथ सोशल’ धमाका: “मुझे यह बिल्कुल मंजूर नहीं!”
    सोमवार रात डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर ईरान के प्रस्ताव की धज्जियां उड़ाते हुए लिखा। “मैंने ईरान के तथाकथित प्रतिनिधियों का जवाब पढ़ा है। मुझे यह जरा भी पसंद नहीं आया बिल्कुल भी मंजूर नहीं!”

    ट्रंप के इस कड़े तेवर के बाद उनके करीबी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने भी आग में घी डालने का काम किया है। उन्होंने संकेत दिया कि अब बातचीत का समय खत्म हो चुका है और ‘प्रोजेक्ट फ़्रीडम प्लस’ (सैन्य विकल्प) ही एकमात्र रास्ता बचा है।

    ईरान की ‘रेड लाइन’: वो शर्तें जिन पर भड़का अमेरिका
    लेबनानी नेटवर्क ‘अल-मयादीन’ के अनुसार, ईरान ने समझौते के बदले जो मांगें रखी हैं, वे अमेरिका के लिए किसी ‘सरेंडर’ से कम नहीं थीं:

    आर्थिक घेराबंदी का अंत: ईरान ने मांग की है कि उसके तेल निर्यात पर लगी रोक तुरंत हटाई जाए।

    फ्रीज फंड की रिहाई: विदेशों में जप्त ईरान की अरबों डॉलर की संपत्ति को तत्काल मुक्त किया जाए।

    होर्मुज पर कब्ज़ा: दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ पर ईरान का पूर्ण नियंत्रण हो।

    लेबनान युद्धविराम: ईरान ने इसे अपनी ‘रेड लाइन’ घोषित किया है।

    परमाणु दांव: क्या यह ईरान की चाल है?
    दिलचस्प बात यह है कि ईरान ने पहली बार ‘लचीलापन’ दिखाते हुए 30 दिनों के भीतर परमाणु मुद्दे पर चर्चा करने की बात कही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह युद्ध टालने या वक्त हासिल करने की एक सोची-झीली रणनीति हो सकती है।

    दूसरी ओर, अमेरिका की मांग बेहद सख्त है: “ईरान अपना 60% शुद्ध यूरेनियम सौंप दे, परमाणु प्लांट नष्ट करे और अगले 20 साल तक संवर्धन भूल जाए।”

    ईरान का पलटवार: “हम ट्रंप को खुश करने के लिए नहीं बैठे”
    तेहरान ने भी साफ कर दिया है कि वह दबाव में नहीं झुकेगा। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने कहा कि ईरान ट्रंप को खुश करने के लिए अपनी नीतियां नहीं बनाता। सरकारी मीडिया ने तो यहां तक कह दिया कि ट्रंप की मांगें “बेतुकी” हैं और ईरान उनके आगे घुटने नहीं टेकेगा।

     युद्ध या कूटनीति?
    दुनिया के सामने अब तीन ही रास्ते बचे हैं:इजरायल के साथ मिलकर अमेरिका ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला करे। युद्ध के बिना ईरान का दम घोंटने के लिए समुद्र में उसकी घेराबंदी और सख्त की जाए। ट्रंप अपनी ‘आर्ट ऑफ द डील’ का इस्तेमाल कर ईरान से कोई ऐसी बड़ी रियायत छीन लें जो अब तक असंभव मानी जाती थी।अगर तनाव कम नहीं हुआ, तो वैश्विक तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है, जिसका असर भारत समेत पूरी दुनिया की जेब पर पड़ेगा।

  • ईरान की अमेरिका को खुली धमकी, बोला- तेल टैंकरों पर हमला हुआ तो US ठिकानों और जहाजों पर बरसेंगी मिसाइलें

    ईरान की अमेरिका को खुली धमकी, बोला- तेल टैंकरों पर हमला हुआ तो US ठिकानों और जहाजों पर बरसेंगी मिसाइलें



    नई दिल्ली। मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने अमेरिका को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर फारस की खाड़ी या Strait of Hormuz में ईरानी तेल टैंकरों और व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाया गया, तो अमेरिकी सैन्य ठिकानों और युद्धपोतों पर बड़ा हमला किया जाएगा।

    IRGC की नौसेना इकाई ने सोशल मीडिया पर पोस्ट जारी कर दावा किया कि क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी जहाज अब ईरानी मिसाइलों और ड्रोन की रेंज में हैं। इसके बाद IRGC की एयरोस्पेस फोर्स ने भी कहा कि उनके ड्रोन और मिसाइल सिस्टम अमेरिकी ठिकानों पर “लॉक” किए जा चुके हैं और अब सिर्फ आदेश का इंतजार है।

    इस बीच The Wall Street Journal की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिका ने ईरान को 14 बिंदुओं वाला एक प्रस्ताव भेजा है, जिस पर तेहरान के जवाब का इंतजार किया जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने उम्मीद जताई थी कि जल्द जवाब मिल सकता है, लेकिन ईरान ने फिलहाल किसी समयसीमा को मानने से इनकार कर दिया है।

    ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघई ने कहा कि अमेरिकी प्रस्ताव की समीक्षा जारी है और जवाब “उचित समय” पर दिया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान किसी बाहरी दबाव या समयसीमा के तहत फैसला नहीं करेगा।

    उधर, क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है। दक्षिणी Lebanon में इजराइली हमलों और Hezbollah की जवाबी कार्रवाई ने हालात और गंभीर बना दिए हैं। वहीं होर्मुज स्ट्रेट के आसपास बढ़ते सैन्य तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार भी प्रभावित हुआ है और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी दर्ज की गई है।

    कुवैत ने भी अपने एयरस्पेस में संदिग्ध ड्रोन देखे जाने की पुष्टि की है, जबकि कतर से पाकिस्तान जा रहे एक गैस जहाज के होर्मुज स्ट्रेट पार करने के दौरान कुछ समय तक उसका सिग्नल गायब रहने से क्षेत्र में चिंता और बढ़ गई।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर वैश्विक तेल सप्लाई, समुद्री व्यापार और पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति पर गंभीर रूप से पड़ सकता है।

  • ईरान-यूएस टकराव चरम पर: IRGC की सीधी चेतावनी, अमेरिकी ठिकाने और जहाज निशाने पर 14-पॉइंट प्रस्ताव पर तनाव जारी

    ईरान-यूएस टकराव चरम पर: IRGC की सीधी चेतावनी, अमेरिकी ठिकाने और जहाज निशाने पर 14-पॉइंट प्रस्ताव पर तनाव जारी


    नई दिल्ली। मध्य पूर्व में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं, जहां ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने खुली चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि यदि फारस की खाड़ी या होर्मुज स्ट्रेट में ईरानी तेल टैंकरों और व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाया गया, तो जवाब में सीधे अमेरिकी सैन्य ठिकानों और युद्धपोतों पर हमला किया जाएगा।

    IRGC नौसेना कमांड ने सोशल मीडिया पोस्ट में साफ कहा है कि क्षेत्र में किसी भी तरह की “आक्रामक कार्रवाई” को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वहीं एयरोस्पेस फोर्स ने दावा किया है कि उसके मिसाइल और ड्रोन पहले से ही अमेरिकी ठिकानों और संभावित लक्ष्यों पर लॉक हैं और केवल आदेश का इंतजार है।

    इस बीच, अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, वॉशिंगटन ने ईरान के सामने 14 सूत्रीय प्रस्ताव रखा है, जिसमें परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने, यूरेनियम संवर्धन पर रोक और क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे को लेकर कई सख्त शर्तें शामिल हैं। पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया था कि इस प्रस्ताव पर जल्द जवाब की उम्मीद है, लेकिन ईरान ने किसी समयसीमा को मानने से इनकार कर दिया है।

    ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा है कि अमेरिकी प्रस्ताव अभी समीक्षा में है और इसका जवाब “उचित समय पर और राष्ट्रीय हितों को देखते हुए” दिया जाएगा। उन्होंने साफ किया कि ईरान किसी बाहरी दबाव में निर्णय नहीं करेगा।

    तनाव के बीच खाड़ी क्षेत्र में स्थिति और भी संवेदनशील हो गई है। कतर के पास एक मालवाहक जहाज पर संदिग्ध प्रोजेक्टाइल से हमला और ईरान के खार्ग द्वीप के पास बड़े तेल रिसाव ने समुद्री सुरक्षा और पर्यावरणीय चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेल रिसाव 20 वर्ग मील तक फैल चुका है, जिससे क्षेत्रीय पारिस्थितिकी पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

    इसी बीच अमेरिका के प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि समझौते की स्थिति में ईरान पर लगे प्रतिबंध धीरे-धीरे हटाए जा सकते हैं और उसकी जमी हुई संपत्ति भी जारी की जा सकती है, लेकिन इसके बदले परमाणु गतिविधियों पर सख्त नियंत्रण जरूरी होगा।

    क्षेत्रीय तनाव को देखते हुए ब्रिटेन और फ्रांस ने भी अपनी नौसैनिक तैनाती बढ़ा दी है, जबकि रूस ने प्रस्ताव दिया है कि वह ईरान के एनरिच्ड यूरेनियम को सुरक्षित रखने के लिए तैयार है।

    मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट अब वैश्विक ऊर्जा और व्यापार का सबसे संवेदनशील क्षेत्र बन गया है, जहां किसी भी टकराव का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

  • सीजफायर के बीच फिर भड़की जंग! अमेरिका की ईरान पर बमबारी, ट्रम्प की खुली धमकी से मचा हड़कंप

    सीजफायर के बीच फिर भड़की जंग! अमेरिका की ईरान पर बमबारी, ट्रम्प की खुली धमकी से मचा हड़कंप



    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में युद्धविराम के दावों के बीच हालात एक बार फिर विस्फोटक मोड़ पर पहुंच गए हैं। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव तेजी से बढ़ता दिख रहा है। ईरान ने आरोप लगाया है कि अमेरिका ने सीजफायर तोड़ते हुए ओमान की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य के पास ईरानी तेल टैंकरों को निशाना बनाया। इसके बाद तेहरान ने साफ चेतावनी दी है कि अब किसी भी हमले का जवाब बेहद कड़े और सीधे सैन्य एक्शन से दिया जाएगा।

    ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, खातम अल-अनबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर के प्रवक्ता ने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने जास्क क्षेत्र के पास उस तेल टैंकर पर हमला किया, जो होर्मुज स्ट्रेट की ओर बढ़ रहा था। ईरान ने इसे युद्धविराम का खुला उल्लंघन बताया है। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने पलटवार करते हुए कहा कि अगर ईरान परमाणु समझौते पर आगे नहीं बढ़ता तो अमेरिका और भी बड़े हमले करेगा।

    ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर रहे अमेरिकी युद्धपोतों पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया गया था, लेकिन अमेरिकी सेना ने सभी हमलों को हवा में ही नष्ट कर दिया। उन्होंने कहा कि जवाबी कार्रवाई में ईरान की कई सैन्य नावों और ठिकानों को तबाह कर दिया गया। ट्रम्प ने दो टूक कहा कि अमेरिका ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देगा।

    बढ़ते संघर्ष का सबसे बड़ा असर दुनिया की सबसे अहम समुद्री व्यापारिक लाइन होर्मुज स्ट्रेट पर दिखाई दे रहा है। संयुक्त राष्ट्र की समुद्री एजेंसी IMO के मुताबिक, संकट के कारण खाड़ी क्षेत्र में करीब 1500 जहाज फंस गए हैं। इन जहाजों पर लगभग 20 हजार नाविक मौजूद हैं। इससे वैश्विक तेल सप्लाई, गैस कारोबार और अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन पर गंभीर असर पड़ने लगा है। कई देशों में ईंधन और जरूरी सामानों की कीमतें बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

    इस बीच अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के बीच बैक चैनल बातचीत की खबरें भी सामने आई हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों देश 30 दिन के अस्थायी समझौते और होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने के प्रस्ताव पर चर्चा कर रहे हैं। हालांकि जमीन पर जारी सैन्य गतिविधियां किसी स्थायी शांति की संभावना को कमजोर करती नजर आ रही हैं।

    ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने अमेरिका के उस दावे को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि ईरान का मिसाइल भंडार खत्म हो चुका है। अराघची ने कहा कि ईरान की सैन्य ताकत पूरी तरह सक्रिय है और देश अपनी सुरक्षा के लिए हर स्तर पर तैयार है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी कूटनीतिक समाधान की उम्मीद बनती है, अमेरिका सैन्य कार्रवाई शुरू कर देता है।

    उधर संयुक्त अरब अमीरात ने दावा किया है कि उसने ईरान की ओर से दागी गई दो बैलिस्टिक मिसाइल और तीन ड्रोन को हवा में ही नष्ट कर दिया। वहीं लेबनान में भी तनाव तेजी से बढ़ रहा है। इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच संघर्ष फिर तेज हो गया है और दक्षिणी लेबनान में लगातार हवाई हमलों की खबरें सामने आ रही हैं।

    भारत सरकार ने भी पश्चिम एशिया के हालात पर करीबी नजर बनाए रखी है। विदेश मंत्रालय ने कहा है कि खाड़ी देशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसके लिए विशेष कंट्रोल रूम सक्रिय किए गए हैं और जरूरत पड़ने पर तुरंत मदद पहुंचाने की तैयारी की गई है।

  • वेस्ट एशिया में तनाव के बीच ट्रंप का बड़ा दावा, बोले- ईरान विवाद जल्द होगा खत्म; परमाणु मुद्दे पर अमेरिका का सख्त रुख

    वेस्ट एशिया में तनाव के बीच ट्रंप का बड़ा दावा, बोले- ईरान विवाद जल्द होगा खत्म; परमाणु मुद्दे पर अमेरिका का सख्त रुख



    नई दिल्ली। 28 फरवरी से जारी संघर्ष के बीच क्षेत्र में हालात अब भी बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं, हालांकि युद्धविराम के प्रयासों और अमेरिका-ईरान बातचीत की कोशिशों ने कूटनीतिक हलचल बढ़ा दी है। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान विवाद जल्द सुलझ सकता है।

    ट्रंप का दावा: जल्द खत्म होगा विवाद
    रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप ने अपने समर्थकों से बातचीत में कहा कि ईरान के साथ युद्ध जैसी स्थिति जल्द खत्म हो जाएगी। उन्होंने कहा कि अमेरिका का मुख्य उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना है और इसी वजह से कड़े कदम उठाए जा रहे हैं।

    ट्रंप ने अपनी नीति का बचाव करते हुए कहा कि यह कार्रवाई राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है और अधिकतर लोग इसे सही मानते हैं।

    क्षेत्र में लगातार हिंसा जारी
    हालात अब भी गंभीर बने हुए हैं

    दक्षिणी तेहरान में अमेरिकी-इस्राइली हमलों में 12 लोगों की मौत

    लेबनान में पिछले 24 घंटों में 33 लोगों की मौत, जिनमें एक किशोर भी शामिल

    लेबनान से उत्तरी इस्राइल पर रॉकेट हमले में 1 व्यक्ति की मौत और 2 घायल

    ईरानी हमले में बहरीन में मोरक्को के सैनिक की मौत और कई घायल

    ईरान का पलटवार और बयान
    ईरान की संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने ट्रंप के दावों को खारिज करते हुए उन्हें अफवाह बताया। उन्होंने कहा कि ऐसे बयान वैश्विक वित्तीय और तेल बाजार को प्रभावित करने के लिए दिए जा रहे हैं।उन्होंने अमेरिकी सैन्य अभियानों पर तंज कसते हुए इन्हें “ऑपरेशन ट्रस्ट मी ब्रो” और “ऑपरेशन फॉक्सियोस” कहा और कहा कि ये रणनीतियां विफल साबित हो रही हैं।


    अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
    ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने जर्मनी के राष्ट्रपति के उस बयान का समर्थन किया, जिसमें अमेरिका-इस्राइल की कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया गया था।

    वेस्ट एशिया में हालात अभी भी विस्फोटक बने हुए हैं। एक तरफ सैन्य टकराव और जवाबी हमले जारी हैं, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका-ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत की उम्मीदें भी जिंदा हैं, जिससे आने वाले दिनों में बड़ा बदलाव संभव माना जा रहा है।

  • UAE पर ईरानी हमला, 3 भारतीय घायल, भारत सख्त; मोदी बोले- नागरिकों और इंफ्रास्ट्रक्चर पर वार ‘अस्वीकार्य’

    UAE पर ईरानी हमला, 3 भारतीय घायल, भारत सख्त; मोदी बोले- नागरिकों और इंफ्रास्ट्रक्चर पर वार ‘अस्वीकार्य’



    नई दिल्ली। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के फुजैराह ऑयल पोर्ट पर हुए हमले ने पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ा दिया है। इस हमले में 3 भारतीय नागरिकों के घायल होने पर भारत ने कड़ी नाराजगी जताई है और साफ कहा है कि आम नागरिकों को निशाना बनाना किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

    सरकारी सूत्रों के मुताबिक, फुजैराह के इंडस्ट्रियल जोन को निशाना बनाकर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया गया। हालांकि UAE की एयर डिफेंस सिस्टम ने कई खतरों को बीच में ही नष्ट कर दिया, लेकिन मलबा गिरने से कुछ जगहों पर नुकसान हुआ और भारतीय नागरिक घायल हो गए।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस घटना पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि निर्दोष लोगों और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाना पूरी तरह अस्वीकार्य है। भारत ने सभी पक्षों से संयम बरतने और हिंसा तुरंत रोकने की अपील की है।

    भारत सरकार ने यह भी दोहराया कि होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री यातायात अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत बिना किसी बाधा के जारी रहना चाहिए। यह मार्ग वैश्विक तेल सप्लाई के लिए बेहद अहम माना जाता है।

    UAE अधिकारियों का दावा है कि उन्होंने 12 बैलिस्टिक मिसाइल, 3 क्रूज मिसाइल और 4 ड्रोन को सफलतापूर्वक इंटरसेप्ट किया। हालांकि ईरान ने अब तक इस हमले को लेकर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, जिससे स्थिति और संवेदनशील बनी हुई है।

    इस बीच, फुजैराह की रणनीतिक अहमियत को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। यह इलाका UAE के तेल निर्यात का बड़ा केंद्र है और यहां से हबशन-फुजैराह पाइपलाइन के जरिए बड़ी मात्रा में कच्चा तेल दुनिया के बाजारों तक पहुंचाया जाता है, वह भी होर्मुज स्ट्रेट को बायपास करते हुए।

    पिछले 24 घंटे में घटनाक्रम तेजी से बदला है। ईरान पर ड्रोन हमले के आरोप, होर्मुज में जहाजों पर हमले, अमेरिका का ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ और क्षेत्रीय देशों की बढ़ती प्रतिक्रिया ने हालात को और जटिल बना दिया है।

    दक्षिण कोरिया के एक जहाज में धमाके के बाद आग लगने की घटना ने भी सुरक्षा चिंताएं बढ़ा दी हैं। वहीं, अमेरिका ने समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर नई एडवाइजरी जारी की है, हालांकि ईरान ने इसे असुरक्षित बताया है।

    इसी बीच, ईरान के विदेश मंत्री का चीन दौरा भी अहम माना जा रहा है, जहां क्षेत्रीय तनाव और कूटनीतिक समाधान पर चर्चा हो सकती है।

    कुल मिलाकर, फुजैराह हमले के बाद पश्चिम एशिया में हालात नाजुक बने हुए हैं। भारत ने जहां अपने नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी है, वहीं कूटनीतिक समाधान और शांति की अपील भी दोहराई है। आने वाले दिनों में इस पूरे घटनाक्रम पर दुनिया की नजर बनी रहेगी।

  • ईरान-अमेरिका टकराव पर सस्पेंस गहराया: हमले के दावे पर नहीं लगी मुहर, दुनिया की नजरें खाड़ी पर टिकीं

    ईरान-अमेरिका टकराव पर सस्पेंस गहराया: हमले के दावे पर नहीं लगी मुहर, दुनिया की नजरें खाड़ी पर टिकीं


    नई दिल्ली। ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच समुद्री टकराव को लेकर बड़ा सस्पेंस खड़ा हो गया है। ईरान ने जहां रणनीतिक जलमार्ग में कार्रवाई का दावा किया है, वहीं अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं होने की बात कही है। इससे पूरे घटनाक्रम पर सवाल खड़े हो गए हैं और हालात अब भी धुंधले बने हुए हैं।

    सबसे अहम बात यह है कि अमेरिका की ओर से अब तक इस मुद्दे पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में यह साफ नहीं हो पा रहा कि जमीनी स्तर पर वास्तव में क्या हुआ है और दोनों देशों के बीच टकराव किस स्तर तक पहुंच चुका है।

    इससे पहले ईरान ने कड़ा रुख अपनाते हुए चेतावनी दी थी कि अगर अमेरिकी सेना इस रणनीतिक जलमार्ग में प्रवेश करती है तो उसे करारा जवाब दिया जाएगा। यह बयान उस वक्त आया था जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खाड़ी में फंसे जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए अभियान शुरू करने की घोषणा की थी।

    मौजूदा हालात में एक ओर ईरान के सख्त तेवर हैं, तो दूसरी ओर अमेरिका की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। दावों और हकीकत के बीच की दूरी ने पूरे घटनाक्रम को और ज्यादा रहस्यमयी बना दिया है। फिलहाल दुनिया की नजरें इस संवेदनशील टकराव पर टिकी हैं, जहां हर नया अपडेट हालात को और गंभीर बना सकता है।

  • होर्मुज में भड़का टकराव! ईरान का अमेरिकी युद्धपोत पर मिसाइल हमले का दावा, सीजफायर टूटने के संकेत

    होर्मुज में भड़का टकराव! ईरान का अमेरिकी युद्धपोत पर मिसाइल हमले का दावा, सीजफायर टूटने के संकेत


    नई दिल्ली। मध्य पूर्व में हालात तेजी से बिगड़ते नजर आ रहे हैं। ईरान ने दावा किया है कि उसने अमेरिका के एक युद्धपोत पर होर्मुज जलडमरूमध्य के पास मिसाइल हमला किया है। ईरान की सरकारी एजेंसी फार्स न्यूज एजेंसी के मुताबिक, जास्क के नजदीक अमेरिकी जहाज पर दो मिसाइलें दागी गईं, क्योंकि उसने रिवोल्यूशनरी गार्ड की चेतावनियों को नजरअंदाज किया था।

    इस घटनाक्रम के बाद यह माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच जारी युद्धविराम अब खत्म हो चुका है और हालात फिर से युद्ध की ओर बढ़ सकते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही ईरानी युद्धपोतों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के संकेत दे चुके हैं।

    यह कथित हमला ऐसे समय हुआ है जब अमेरिका ने “प्रोजेक्ट फ्रीडम” मिशन शुरू करने का ऐलान किया है। CENTCOM के मुताबिक इस ऑपरेशन में 15,000 सैनिक, 100 से ज्यादा एयर और सी प्लेटफॉर्म, युद्धपोत और ड्रोन शामिल हैं, जिनका मकसद होर्मुज में फंसे जहाजों को सुरक्षित रास्ता देना है।

    अमेरिका ने समुद्री मार्गों के पास एक “उन्नत सुरक्षा क्षेत्र” भी बनाया है और जहाजों को ओमान के अधिकारियों के साथ समन्वय करने की सलाह दी है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि सामान्य रूट के आसपास से गुजरना खतरनाक हो सकता है, क्योंकि वहां बारूदी सुरंगों की आशंका है।

    वहीं यूरोप ने इस मिशन से दूरी बना ली है। इमैनुएल मैक्रों ने साफ कहा कि फ्रांस “प्रोजेक्ट फ्रीडम” में शामिल नहीं होगा और वह बातचीत के जरिए समाधान चाहता है। उन्होंने इसे अस्पष्ट योजना बताते हुए यूरोप के अलग सुरक्षा समाधान पर जोर दिया।

    कुल मिलाकर, होर्मुज जैसे रणनीतिक मार्ग पर बढ़ता तनाव वैश्विक स्तर पर ऊर्जा सप्लाई और समुद्री व्यापार के लिए बड़ा खतरा बनता जा रहा है। अगर हालात नहीं सुधरे, तो यह टकराव बड़े युद्ध का रूप ले सकता है।