Tag: Middle East Tension

  • ट्रंप के ऐलान के बाद भी संशय कायम, इस्लामाबाद में बातचीत से पहले बढ़ी सुरक्षा और चिंता

    ट्रंप के ऐलान के बाद भी संशय कायम, इस्लामाबाद में बातचीत से पहले बढ़ी सुरक्षा और चिंता


    नई दिल्ली । अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ दो हफ्ते के संघर्षविराम की घोषणा के बाद दुनिया को उम्मीद थी कि हालात सामान्य होंगे और तनाव कम होगा लेकिन घटनाक्रम ने एक अलग ही तस्वीर पेश कर दी है। सीजफायर के ऐलान के बावजूद जमीनी हालात और प्रमुख नेताओं के बयानों ने इस समझौते की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    ट्रंप ने पाकिस्तान की मध्यस्थता का उल्लेख करते हुए संघर्षविराम की घोषणा की थी जिसे वैश्विक स्तर पर राहत के रूप में देखा गया। पाकिस्तान ने भी इसे अपनी कूटनीतिक सफलता के तौर पर प्रस्तुत किया लेकिन इसके तुरंत बाद इजरायल की सैन्य गतिविधियां और अमेरिका के शीर्ष नेताओं के बयान इस उम्मीद पर पानी फेरते नजर आए।

    अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के बयानों में कई ऐसे संकेत मिले जिससे यह स्पष्ट हुआ कि सीजफायर को लेकर पूरी तरह सहमति और स्पष्टता नहीं है। इजरायल द्वारा लेबनान पर किए गए हमले और हिज्बुल्लाह को लेकर अस्पष्ट स्थिति ने इस समझौते को और अधिक उलझा दिया है। खुद ट्रंप ने यह कहा कि हिज्बुल्लाह को लेकर इस समझौते में कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं है जबकि पाकिस्तान का दावा था कि यह भी समझौते का हिस्सा है।

    इसी बीच पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में एक अलग ही माहौल देखने को मिल रहा है। आम दिनों की चहल-पहल की जगह अब सन्नाटा और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था ने ले ली है। शहर के कई हिस्सों में आवागमन सीमित कर दिया गया है और सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है। इसका मुख्य कारण ईरान के उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल का आगमन है जो अमेरिका के साथ संवेदनशील कूटनीतिक वार्ता के लिए यहां पहुंच रहा है।

    पाकिस्तान इस पूरी प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है और उसने दोनों पक्षों को बातचीत की मेज तक लाने में अहम भूमिका निभाई है। हालांकि इस प्रयास को जितनी सराहना मिल रही है उतनी ही शंका भी इसके परिणामों को लेकर बनी हुई है।

    इस वार्ता के सफल होने में सबसे बड़ी बाधा भरोसे की कमी है। ईरान के भीतर ही इस बात को लेकर संदेह है कि क्या यह बातचीत किसी ठोस नतीजे तक पहुंचेगी या केवल तनाव को अस्थायी रूप से टालने का एक प्रयास साबित होगी। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबफ ने पहले ही अमेरिका पर सीजफायर के 10 में से तीन बिंदुओं के उल्लंघन का आरोप लगा दिया है जिससे स्थिति और जटिल हो गई है।

    वहीं पाकिस्तान में ईरान के राजदूत रेजा अमीरी मोगादम द्वारा सोशल मीडिया पर किया गया पोस्ट और उसका बाद में डिलीट होना भी इस पूरे घटनाक्रम की संवेदनशीलता को दर्शाता है। उनके पोस्ट में ईरानी प्रतिनिधिमंडल के इस्लामाबाद पहुंचने और 10 बिंदुओं पर गंभीर बातचीत की बात कही गई थी लेकिन पोस्ट हटाए जाने से कूटनीतिक गोपनीयता और अनिश्चितता दोनों उजागर हुई हैं।

    यह वार्ता केवल अमेरिका और ईरान के बीच संबंधों तक सीमित नहीं है बल्कि इसका असर पूरे पश्चिम एशिया की स्थिरता वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर पड़ सकता है। ऐसे में दुनिया की नजरें इस्लामाबाद पर टिकी हैं जहां सन्नाटे और सख्त सुरक्षा के बीच शांति की एक कठिन कोशिश जारी है।

  • तेहरान के पास पुल पर हमला, अमेरिका-ईरान टकराव गहराया, ट्रंप ने दी बड़ी चेतावनी

    तेहरान के पास पुल पर हमला, अमेरिका-ईरान टकराव गहराया, ट्रंप ने दी बड़ी चेतावनी


    वाशिंगटन । अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव अब और गहराता नजर आ रहा है। अमेरिकी सेना ने तेहरान के पास एक महत्वपूर्ण हाईवे पुल पर हमला किया है, जिससे क्षेत्रीय हालात और ज्यादा संवेदनशील हो गए हैं। यह हमला उस पुल पर किया गया जो तेहरान को करज शहर से जोड़ता है और जिसे रणनीतिक रूप से अहम माना जाता है।

    अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यह पुल ईरान की मिसाइल और ड्रोन प्रणाली के लिए जरूरी आपूर्ति मार्ग के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था। इसी वजह से इसे निशाना बनाया गया। उनका कहना है कि यह कार्रवाई ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करने की एक व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य हथियारों और सैन्य उपकरणों की आवाजाही को रोकना है।

    हालांकि ईरान ने इस दावे को खारिज कर दिया है। सरकारी मीडिया के अनुसार, यह पुल अभी पूरी तरह चालू नहीं था और सेना द्वारा इसका इस्तेमाल नहीं किया जा रहा था। ईरानी अधिकारियों ने बताया कि इस हमले में कम से कम आठ लोगों की मौत हुई है और कई अन्य घायल हुए हैं। घायलों में आम नागरिक भी शामिल हैं, जो नवरोज के मौके पर बाहर मौजूद थे।

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस हमले के बाद कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर इस कार्रवाई की सराहना करते हुए कहा कि ईरान का एक बड़ा पुल नष्ट कर दिया गया है और अब इसका उपयोग संभव नहीं होगा। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि अभी बहुत कुछ होना बाकी है और ईरान को जल्द से जल्द समझौता कर लेना चाहिए, अन्यथा आगे और कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।

    ईरान की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। संसद अध्यक्ष मोहम्मद गालिबाफ ने कहा कि जब देश की सुरक्षा की बात आती है तो हर नागरिक सैनिक बन जाता है। उन्होंने साफ किया कि ईरान इस तरह के हमलों से डरने वाला नहीं है और पूरी मजबूती के साथ जवाब देगा।

    इस बीच, तेहरान ने अमेरिका के साथ किसी भी तरह की बातचीत से इनकार कर दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि मौजूदा हालात में वार्ता संभव नहीं है। इससे यह साफ हो गया है कि कूटनीतिक स्तर पर भी हालात सामान्य होने के आसार फिलहाल नजर नहीं आ रहे हैं।

    स्थिति को और गंभीर बनाते हुए अन्य क्षेत्रों में भी तनाव बढ़ गया है। इजरायल ने दावा किया है कि उसने ईरान से दागी गई मिसाइलों को बीच में ही रोक दिया। वहीं यमन के हूती विद्रोहियों ने भी इजरायल की ओर मिसाइल दागी, जिससे संघर्ष का दायरा और फैलता नजर आ रहा है।

    अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस मुद्दे पर मतभेद देखने को मिले हैं। रूस चीन और फ्रांस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने के लिए बल प्रयोग की अनुमति देने के प्रस्ताव को रोक दिया है।इस पूरे घटनाक्रम ने वैश्विक चिंता को बढ़ा दिया है और विशेषज्ञों का मानना है कि अगर जल्द ही कूटनीतिक समाधान नहीं निकाला गया तो यह संघर्ष और व्यापक रूप ले सकता है।

  • ईरान पर अमेरिकी रणनीति पर मीडिया परेशान, ट्रंप ने नहीं बताई जमीनी कार्रवाई की योजना

    ईरान पर अमेरिकी रणनीति पर मीडिया परेशान, ट्रंप ने नहीं बताई जमीनी कार्रवाई की योजना

    वॉशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान को लेकर हाल ही में दिए गए भाषण ने अमेरिकी मीडिया में सवाल खड़े कर दिए हैं। ट्रंप ने ईरान पर अपने पुराने दावों को दोहराया और कहा कि लड़ाई जल्दी खत्म होने वाली है लेकिन उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि जमीनी स्तर पर अमेरिकी सैनिक तैनात किए जाएंगे या नहीं। इसके अलावा उन्होंने लड़ाई को बढ़ाने की रणनीति और युद्ध के बाद के दिशा-निर्देशों पर कोई नई जानकारी साझा नहीं की।

    द न्यूयॉर्क टाइम्स और द वॉशिंगटन पोस्ट ने रिपोर्ट किया कि ट्रंप ने किसी भी डिप्लोमैटिक रास्ते बाहर निकलने की योजना या क्षेत्रीय गठबंधन सहयोग पर विस्तार से बात नहीं की। उन्होंने केवल होर्मुज स्ट्रेट का छोटा सा जिक्र किया और दूसरे देशों से तेल शिपिंग रूट को फिर से खोलने की अपील की।

    मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रंप ने इजरायल सऊदी अरब कतर यूएई कुवैत और बहरीन जैसे क्षेत्रीय साझेदारों का उल्लेख किया लेकिन उनके रणनीतिक योगदान और नाटो सहयोग पर कोई विस्तार नहीं दिया गया। ईरान की नई नेतृत्व संरचना या वरिष्ठ अधिकारियों की मौत के बाद उभरते नेताओं का कोई विवरण भी ट्रंप ने साझा नहीं किया।

    विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिकी मीडिया के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या अमेरिका ईरान के न्यूक्लियर मैटीरियल को सुरक्षित करने के लिए जमीन पर ऑपरेशन करेगा। द न्यूयॉर्क टाइम्स ने बताया कि विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि जमीन के नीचे दबे संवर्धित यूरेनियम को निकालने के लिए जोखिम भरे ग्राउंड ऑपरेशन की जरूरत होगी।

    हालांकि ट्रंप ने दावा किया कि ईरान की सैन्य क्षमता काफी कमजोर हो गई है लेकिन रिपोर्ट्स में यह भी बताया गया कि तेहरान अब भी इलाके में मिसाइल और ड्रोन हमलों की क्षमता बनाए हुए है। अमेरिकी मीडिया ने इस बात पर निराशा जताई कि ट्रंप के भाषण में सैन्य या डिप्लोमैटिक मोर्चों पर कोई नई घोषणा नहीं की गई।

    विशेषज्ञों का कहना है कि जमीनी कार्रवाई होर्मुज स्ट्रेट में सुरक्षा और युद्ध के बाद शासन-प्रबंधन पर पर्याप्त जानकारी न होने से अगले चरण की लड़ाई की दिशा अस्पष्ट बनी हुई है। युद्ध अब अपने दूसरे महीने में प्रवेश कर चुका है और बढ़ते खतरों के बीच मध्य पूर्व में स्थिरता और अमेरिका की लंबी रणनीति पर सवाल उठ रहे हैं।

    सैन्य और डिप्लोमैटिक विशेषज्ञ मानते हैं कि ट्रंप की चुप्पी से अमेरिकी नीति में अनिश्चितता बनी है। मीडिया रिपोर्ट्स में यह भी संकेत दिया गया कि स्पष्ट दिशा-निर्देश न होने से न केवल अमेरिका बल्कि उसके क्षेत्रीय साझेदारों के लिए भी योजना बनाना कठिन हो गया है। ऐसे में आने वाले हफ्तों में यह देखा जाएगा कि अमेरिकी प्रशासन किस रणनीति के साथ आगे बढ़ता है और क्या जमीनी स्तर पर सेना तैनात की जाएगी या नहीं।

  • ट्रंप का तीखा संदेश: ईरान की सैन्य ताकत खत्म, समझौता न हुआ तो और बढ़ेगा तनाव

    ट्रंप का तीखा संदेश: ईरान की सैन्य ताकत खत्म, समझौता न हुआ तो और बढ़ेगा तनाव


    वॉशिंगटन । अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर एक बार फिर से तीखी चेतावनी जारी की है। उनका कहना है कि अगर ईरान के साथ कोई समझौता नहीं हुआ तो अमेरिकी सेना कुछ ही हफ्तों में ईरान को पाषाण युग में वापस भेज सकती है। ट्रंप ने बुधवार को टीवी पर अपने भाषण में कहा कि अमेरिकी अभियान एपिक फ्यूरी ने केवल एक महीने में ईरान की सैन्य क्षमताओं को बुरी तरह से कमजोर कर दिया है।

    ट्रंप ने दावा किया कि ईरान की नेवी अब खत्म हो चुकी है उनकी एयरफोर्स बर्बाद हो गई है और ईरान के नेताओं की मौत हो चुकी है। उन्होंने कहा कि ईरान की मिसाइल और ड्रोन क्षमता काफी हद तक कम कर दी गई है और महत्वपूर्ण हथियार फैसिलिटी ध्वस्त कर दी गई हैं। उन्होंने इस अभियान को ईरान को न्यूक्लियर हथियार हासिल करने से रोकने के लिए जरूरी बताया।

    उन्होंने जोर देते हुए कहा मैंने कसम खाई है कि मैं ईरान को कभी न्यूक्लियर हथियार नहीं रखने दूंगा। इसके अलावा ट्रंप ने ईरान की मौजूदा सरकार को धरती की सबसे हिंसक सरकार बताया। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका का मकसद ईरान में सत्ता परिवर्तन नहीं है लेकिन कई वास्तविक नेताओं की मौत के कारण शासन में बदलाव पहले ही हो चुका है।

    ट्रंप ने ऑपरेशन मिडनाइट हैमर और पहले के अमेरिकी हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि हमने ईरान की न्यूक्लियर साइट्स को पूरी तरह से नष्ट कर दिया है। ईरान कहीं और अपना प्रोग्राम बनाने की कोशिश कर रहा था लेकिन उसे रोक दिया गया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिकी सेना की प्राथमिकता ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करना और अपनी सीमाओं के बाहर ताकत दिखाने की उसकी काबिलियत को खत्म करना है।

    ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर बातचीत में असफलता हुई तो तनाव और बढ़ेगा। उन्होंने कहा अगले दो से तीन हफ्तों में हम उन्हें स्टोन एज में वापस ले जाएंगे। अगर कोई समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका ईरान के इलेक्ट्रिक इंफ्रास्ट्रक्चर को भी निशाना बना सकता है।

    राष्ट्रपति ट्रंप ने दुनियाभर में तेल की बढ़ती कीमतों के लिए ईरान को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि कमर्शियल तेल टैंकरों पर हुए आतंकी हमलों से यह समस्या पैदा हुई। उन्होंने मिडिल ईस्ट के तेल पर निर्भर देशों से शिपिंग रूट सुरक्षित करने और क्षेत्र पर निर्भरता कम करने की अपील भी की।

    ट्रंप ने इजरायल सऊदी अरब कतर यूएई कुवैत और बहरीन जैसे क्षेत्रीय साथियों की सराहना करते हुए कहा कि ये अभियान में अच्छे साझेदार साबित हुए। उन्होंने अमेरिका की आर्थिक मजबूती पर भी जोर दिया और कहा कि देश दुनिया में तेल और गैस का सबसे बड़ा उत्पादक है और किसी भी लड़ाई से उत्पन्न रुकावटों को झेलने में सक्षम है।

    अमेरिकी राष्ट्रपति ने 13 सैनिकों की हताहत होने की बात स्वीकार की और कहा कि उनके परिवारों ने उनसे काम पूरा करने की अपील की थी। ट्रंप ने अपने भाषण में इसे ऐतिहासिक रूप से तेज अभियान बताते हुए कहा कि सिर्फ एक महीने में एक बड़े खतरे को खत्म किया जा चुका है और अमेरिका और दुनिया के लिए ईरान के खतरनाक खतरे को पूरी तरह समाप्त करने की कगार पर है।

  • ईरान ने अमेरिकी विश्वविद्यालयों पर हमले की दी चेतावनी, स्टूडेंट्स और प्रोफेसर से कैंपस खाली करने की अपील

    ईरान ने अमेरिकी विश्वविद्यालयों पर हमले की दी चेतावनी, स्टूडेंट्स और प्रोफेसर से कैंपस खाली करने की अपील


    नई दिल्ली । ईरान ने मिडिल ईस्ट में स्थित अमेरिकी विश्वविद्यालयों को निशाना बनाने की चेतावनी दी है ईरानी सरकार का आरोप है कि अमेरिका और इजरायल जानबूझकर ईरान के विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों को टारगेट कर रहे हैं इसी संदर्भ में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स आईआरजीसी ने अमेरिकी विश्वविद्यालयों को हमला करने की खुली धमकी दी है

    आईआरजीसी ने कहा कि अमेरिका और इजरायल के हमलों में ईरान की दो प्रमुख यूनिवर्सिटी पहले ही तबाह हो चुकी हैं और अमेरिकी सरकार को 30 मार्च को तेहरान टाइम के अनुसार दोपहर 12 बजे तक एक आधिकारिक बयान में ईरानी यूनिवर्सिटी पर बमबारी की निंदा करनी चाहिए इसके साथ ही आईआरजीसी ने मिडिल ईस्ट में अमेरिकी विश्वविद्यालयों के कर्मचारियों, प्रोफेसरों और छात्रों से अपील की कि वे कैंपस से कम से कम एक किलोमीटर दूर रहें

    ईरानी मीडिया के अनुसार खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका के कई विश्वविद्यालय संचालित हैं इनमें कतर में टेक्सास एएंडएम यूनिवर्सिटी और यूएई में न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी शामिल हैं हाल ही में तेहरान और इस्फहान की यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी पर हमले हुए जिनमें भवनों को नुकसान पहुंचा लेकिन कोई हताहत नहीं हुआ

    ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि अमेरिका और इजरायल ने युद्ध के दौरान जानबूझकर विश्वविद्यालयों और रिसर्च सेंटर पर हमला किया ताकि ईरान की वैज्ञानिक नींव और सांस्कृतिक विरासत को कमजोर किया जा सके उन्होंने बताया कि इस्फहान यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी और तेहरान की यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी उन कई संस्थानों में से दो हैं जिन पर पिछले 30 दिनों में हमले हुए

    बघाई ने यह भी कहा कि ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम और अन्य संभावित खतरे सिर्फ बहाने हैं और असली मकसद देश की शिक्षा और शोध क्षमता को नुकसान पहुंचाना है ईरान की रेड क्रिसेंट सोसाइटी के अनुसार युद्ध की वजह से कम से कम 600 शैक्षणिक संस्थानों को नुकसान हुआ है या वे पूरी तरह नष्ट हो गई हैं

    आईआरजीसी की चेतावनी के बाद मिडिल ईस्ट में अमेरिकी विश्वविद्यालयों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है और स्टूडेंट्स तथा प्रोफेसरों को सलाह दी गई है कि वे कैंपस से दूरी बनाए रखें ताकि किसी भी अप्रत्याशित हमले से बचा जा सके इस स्थिति ने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया है और खाड़ी देशों में अमेरिकी शैक्षणिक संस्थानों के संचालन को चुनौतीपूर्ण बना दिया है

  • निजी ईंधन विक्रेता नायरा एनर्जी ने बढ़ाया दाम, पेट्रोल 5 और डीजल 3 रुपए महंगा

    निजी ईंधन विक्रेता नायरा एनर्जी ने बढ़ाया दाम, पेट्रोल 5 और डीजल 3 रुपए महंगा


    नई दिल्ली। निजी ईंधन विक्रेता नायरा एनर्जी ने गुरुवार को पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बड़ा इजाफा किया है। कंपनी ने पेट्रोल के दाम 5 रुपए प्रति लीटर और डीजल के दाम 3 रुपए प्रति लीटर बढ़ा दिए हैं। इस कदम के साथ नायरा एनर्जी उन शुरुआती कंपनियों में शामिल हो गई है, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर सीधे ग्राहकों तक पहुंचाया।

    कीमतों में राज्यवार अंतर, पेट्रोल 5.30 रुपए तक महंगा

    कंपनी ने बताया कि राज्यों में वैट (वीएटी) जैसे स्थानीय टैक्स के कारण दामों में मामूली अंतर हो सकता है। कुछ राज्यों में पेट्रोल की कीमत 5.30 रुपए प्रति लीटर तक बढ़ गई है। विशेषज्ञों के अनुसार यह बढ़ोतरी वैश्विक बाजार में तेल के महंगे होने के साथ हुई है, जिससे ईंधन की कीमतें घरेलू स्तर पर भी प्रभावित हुई हैं।

    मिडिल ईस्ट तनाव और तेल की बढ़ती कीमतें

    तेल की कीमतों में यह उछाल मिडिल ईस्ट के तनाव के चलते हुआ। फरवरी के आखिर से अब तक कच्चे तेल की कीमतें लगभग 50 प्रतिशत बढ़ चुकी हैं। हाल ही में इजरायल द्वारा ईरान पर हमला और उसके जवाब में कार्रवाई के चलते तेल सप्लाई में बाधा की आशंका बढ़ गई। अंतरराष्ट्रीय कच्चा तेल कुछ समय के लिए 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचा, जो बाद में घटकर लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया।
    सार: मिडिल ईस्ट में तनाव और तेल सप्लाई पर असर की वजह से अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई।

    सरकारी कंपनियों ने अभी तक दाम स्थिर रखे

    इस दौरान सरकारी तेल कंपनियां जैसे इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने अभी तक पेट्रोल और डीजल के दाम नहीं बढ़ाए। ये कंपनियां देश के लगभग 90 प्रतिशत फ्यूल रिटेल मार्केट को नियंत्रित करती हैं। अप्रैल 2022 से सरकारी कीमतें स्थिर बनी हुई हैं।
    सार: सरकारी कंपनियां अभी दाम नहीं बढ़ा रही हैं और देश में ईंधन आपूर्ति सामान्य बनी हुई है।

    भारत की ऊर्जा निर्भरता और सरकार का भरोसा

    भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए लगभग 88 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है, जिसमें बड़ी मात्रा होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आती है। इस मार्ग पर तनाव के चलते सप्लाई प्रभावित हो सकती है। सरकार ने कहा कि देश में पेट्रोल और डीजल का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और सभी पेट्रोल पंप सामान्य रूप से काम कर रहे हैं। पीएनजी कनेक्शन तेजी से बढ़ाए जा रहे हैं और रिफाइनरियां उच्च क्षमता पर काम कर रही हैं।

    अफवाहों से बचें, घबराहट में खरीदारी न करें

    कुछ क्षेत्रों में अफवाहों के चलते लोग घबराहट में ईंधन खरीदने लगे, लेकिन सरकार ने साफ किया कि किसी तरह की कमी नहीं है। विशेषज्ञों ने भी लोगों से शांत रहने और घबराहट में खरीदारी न करने की सलाह दी।

  • मिडिल ईस्ट तनाव से ऊर्जा संकट गहराया होर्मुज स्ट्रेट बना वैश्विक चिंता का केंद्र

    मिडिल ईस्ट तनाव से ऊर्जा संकट गहराया होर्मुज स्ट्रेट बना वैश्विक चिंता का केंद्र


    नई दिल्ली:
    पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक स्तर पर चिंता को बढ़ा दिया है इस स्थिति को लेकर International Energy Agency के प्रमुख फतिह बिरोल ने कड़ी चेतावनी जारी की है उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात केवल क्षेत्रीय समस्या नहीं हैं बल्कि इसका प्रभाव पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ना तय है

    बिरोल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था एक गंभीर संकट के दौर से गुजर रही है और यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो इसके परिणाम बेहद व्यापक होंगे उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ऊर्जा आपूर्ति में बाधा के कारण तेल और गैस की कीमतों में अस्थिरता बढ़ सकती है जिससे कई देशों की आर्थिक स्थिति प्रभावित होगी

    उन्होंने खासतौर पर होर्मुज स्ट्रेट की अहमियत पर जोर दिया जो वैश्विक तेल आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण मार्ग है सामान्य परिस्थितियों में दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत इसी मार्ग से गुजरता है लेकिन मौजूदा तनाव के कारण यहां से शिपिंग प्रभावित हो रही है जिससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बढ़ गया है

    आईईए प्रमुख ने यह भी चेतावनी दी कि इस संकट का असर किसी एक देश तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि हर देश इसकी चपेट में आएगा उन्होंने कहा कि चाहे विकसित देश हों या विकासशील सभी को इस ऊर्जा संकट के प्रभाव का सामना करना पड़ेगा

    इसी बीच ईरान की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह से बंद नहीं किया गया है और वहां से समुद्री यातायात जारी है हालांकि तनावपूर्ण हालात के चलते सुरक्षा उपायों को सख्त किया गया है जिससे शिपिंग की गति प्रभावित हुई है

    आईईए ने पहले भी सरकारों और नागरिकों को ऊर्जा खपत कम करने के लिए कुछ सुझाव दिए हैं इनमें घर से काम करना अनावश्यक यात्रा से बचना और ऊर्जा की बचत करने वाले आधुनिक उपाय अपनाना शामिल है इन कदमों का उद्देश्य ऊर्जा की मांग को कम करना और संकट के प्रभाव को सीमित करना है

    विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है तो ऊर्जा बाजार में अस्थिरता और बढ़ सकती है जिससे महंगाई और आर्थिक दबाव भी बढ़ेगा यह स्थिति वैश्विक मंदी के खतरे को भी जन्म दे सकती है

    फतिह बिरोल ने अपने बयान में यह भी कहा कि मध्य पूर्व में जारी संघर्ष वैश्विक ऊर्जा संकट को और गहरा कर रहा है और यदि समय रहते इसका समाधान नहीं हुआ तो इसके प्रभाव आने वाले समय में और अधिक गंभीर हो सकते हैं

    इस प्रकार पश्चिम एशिया का यह तनाव अब केवल एक क्षेत्रीय संघर्ष न रहकर वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा जोखिम बन गया है जिस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है

  • ईरान-इजरायल तनाव के बीच राष्ट्रपति हर्जोग का कड़ा संदेश न्यूक्लियर ठिकानों पर हमले के बाद बढ़ा संघर्ष

    ईरान-इजरायल तनाव के बीच राष्ट्रपति हर्जोग का कड़ा संदेश न्यूक्लियर ठिकानों पर हमले के बाद बढ़ा संघर्ष


    नई दिल्ली:ईरान और इजरायल के बीच जारी तनाव ने एक बार फिर गंभीर मोड़ ले लिया है हाल ही में 28 फरवरी 2026 से शुरू हुए सैन्य संघर्ष के दौरान ईरान ने इजरायल के न्यूक्लियर शहर अराद और डिमोना को निशाना बनाते हुए मिसाइल हमले किए इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय चिंता को और बढ़ा दिया है क्योंकि पहली बार इस संघर्ष में न्यूक्लियर ठिकानों पर सीधा हमला हुआ

    हमले के बाद इजरायली राष्ट्रपति Isaac Herzog ने तुरंत प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और हालात का जायजा लिया अराद में स्थित एक बेकरी को भी इस हमले में नुकसान पहुंचा जहां उन्होंने बेकरी मालिक से मुलाकात कर उनकी स्थिति को जाना हालांकि इस हमले में किसी भी नागरिक की मौत नहीं हुई लेकिन इमारतों को क्षति पहुंची

    राष्ट्रपति हर्जोग ने अपने दौरे के दौरान स्थानीय लोगों से बातचीत करते हुए बताया कि संकट के बावजूद नागरिकों ने सतर्कता और अनुशासन का परिचय दिया उन्होंने कहा कि सायरन बजते ही लोग सुरक्षित स्थानों और बंकरों में चले गए जिससे बड़ी जनहानि टल गई यह दर्शाता है कि नागरिक सुरक्षा और प्रशासनिक तैयारी ने संभावित बड़े नुकसान को रोका

    हर्जोग ने सोशल मीडिया पर भी अपनी प्रतिक्रिया साझा करते हुए एक परिवार की कहानी का उल्लेख किया जिनका बेकरी व्यवसाय हमले की चपेट में आया उन्होंने बताया कि इस परिवार के बेटे को 7 अक्टूबर 2023 के हमास हमले के दौरान अगवा कर लिया गया था और बाद में उसे एक बंधक समझौते के तहत वापस लाया गया यह परिवार कई कठिनाइयों का सामना कर चुका है लेकिन इसके बावजूद उनकी हिम्मत और सकारात्मकता इजरायली समाज की मजबूती को दर्शाती है

    उन्होंने आगे कहा कि छोटे व्यवसायों का समर्थन करना केवल आर्थिक सहायता नहीं बल्कि राष्ट्र की भावना को मजबूत करना है उन्होंने नागरिकों के धैर्य और साहस की सराहना करते हुए कहा कि इजरायली आत्मा इन कठिन परिस्थितियों में भी मजबूत बनी हुई है

    ईरान को सीधी चेतावनी देते हुए राष्ट्रपति हर्जोग ने कहा कि मिसाइलों और हिंसा के जरिए इंसानियत को नुकसान पहुंचाने का प्रयास गलत है और इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इजरायल अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर संभव कदम उठाएगा और किसी भी खतरे का जवाब देने में सक्षम है

    अपने बयान में उन्होंने यह भी दोहराया कि इजरायल की रणनीति स्पष्ट है और वह अपने उद्देश्यों को हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध है उन्होंने जोर देकर कहा कि संघर्ष का अंत तभी संभव है जब ईरान के पास न्यूक्लियर हथियार और बैलिस्टिक क्षमताएं नहीं रहेंगी

    यह पूरा घटनाक्रम पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को दर्शाता है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता को और गहरा करता है इस संघर्ष का भविष्य क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक सुरक्षा पर भी महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है

  • मिडिल ईस्ट तनाव के बीच Donald Trump का दावा, ईरान की मिलिट्री कमजोर

    मिडिल ईस्ट तनाव के बीच Donald Trump का दावा, ईरान की मिलिट्री कमजोर


    नई दिल्ली अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान की सैन्य क्षमता “पूरी तरह खत्म” हो गई है। हालाँकि, जमीनी स्तर पर संघर्ष अभी भी जारी है और वैश्विक स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति, विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर चिंता बनी हुई है।

    व्हाईट हाउस के साउथ लॉन में अविश्वास से बातचीत के दौरान अख्तर ने कहा कि अमेरिका अपने सैन्य अभियान के लक्ष्य को हासिल करने के बेहद करीब पहुंच चुका है। उन्होंने संकेत दिया कि मध्य पूर्व में ईरान के खिलाफ चल रहा बड़ा सैन्य अभियान जल्द ही समाप्त हो सकता है।

    अमेरिका के सैन्य लक्ष्य क्या हैं?

    स्केल ने स्पष्ट किया कि अमेरिका का मुख्य उद्देश्य ईरान की मिसाइल क्षमता, लॉन्च किए गए सिस्टम और डिफेंस सैटेलाइट को पूरी तरह से तैयार करना है। इसके अलावा ईरान के रक्षा उद्योग, नौसेना, परमाणु ऊर्जा संयंत्र और एंटी-एयरक्राफ्ट सिस्टम को भी खत्म करना इस अभियान का हिस्सा है।

    उन्होंने कहा कि अमेरिका यह सुनिश्चित करना चाहता है कि ईरान किसी भी हाल में परमाणु हथियार विकसित न कर सके और वह इस दिशा में आगे न बढ़ सके।

    “हम जीत गए हैं” – बायस्ट

    असलहे ने परमाणु हथियारबंद सामान में कहा कि सैन्य स्थिति पूरी तरह से अमेरिका के पक्ष में है। उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि हम जीत गए हैं। हमने अपनी सैन्य ताकत खत्म कर दी है।”

    हालाँकि, अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कई देशों द्वारा विराम की अपील की जा रही है, लेकिन किआल ने साफ कर दिया कि अमेरिका से युद्ध की दिशा इस दिशा में नहीं सोची जा रही है। उनके अनुसार, जब विरोध पूर्ण तरह से हो रहा हो, तब युद्धविराम करना नहीं होता।

    होर्मुज जलडमरूमध्य पर जिम्मेदारी का प्रश्न

    रियल ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अहम स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ का भी ज़िक्र किया। उन्होंने कहा कि इस मार्ग पर अमेरिका को ज्यादा छूट नहीं है, लेकिन यूरोप, जापान, चीन और दक्षिण कोरिया जैसे देशों को इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है, इसलिए उन्हें अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी उठानी चाहिए।

    उन्होंने यह भी कहा कि इस मार्ग को फिर से खोलना “आसान सैन्य कदम” हो सकता है, लेकिन इसके लिए अंतर्राष्ट्रीय सहायता आवश्यक होगी।

    सहयोगी सहयोगियों की भूमिका पर प्रश्न

    विद्रोहियों ने नाटो की भूमिका पर भी सवाल उठाया और कहा कि अब तक गठबंधन ने इस मुद्दे पर कोई ठंडा कदम नहीं उठाया है। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया जैसे देशों से भी सक्रिय भूमिका की अपील की।

    इजराइल के साथ संस्तुति

    अछूत ने इजराइल के साथ अमेरिका के मजबूत संतुलन का ज़िक्र करते हुए कहा कि दोनों देश इस संघर्ष में अपने लक्ष्य को हासिल करने के करीब हैं।

    आर्थिक प्रभाव को खारिज कर दिया गया

    तेल के गोदामों में प्लांट और बाजार में प्लॉट को लेकर उठती रही कंपनी को दिवालिया घोषित करते हुए कहा कि यह सैन्य कार्रवाई जरूरी थी। उन्होंने कहा कि अमेरिका किसी भी कीमत पर “परमाणु हथियार” हासिल नहीं कर पाएगा।

  • ग्लोबल टेंशन बढ़ा, ईरान ने 4,000 किलोमीटर दूर डिएगो गार्सिया पर मिसाइल दागी

    ग्लोबल टेंशन बढ़ा, ईरान ने 4,000 किलोमीटर दूर डिएगो गार्सिया पर मिसाइल दागी


    नई दिल्ली। ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी तनाव अब वैश्विक स्तर पर प्रभाव डाल रहा है। शुरूआत में यह झड़पें मिडिल ईस्ट तक ही सीमित थीं, लेकिन हाल ही में ईरान ने हिंद महासागर में अमेरिका और ब्रिटेन के मिलिट्री बेस डिएगो गार्सिया को बनाया।

    अमेरिकी अखबार द वॉल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार, ईरान ने डिएगो गार्सिया पर कम से कम दो मिड-रेंज बैलिस्टिक मिसाइलें दागी। इस बेस पर अमेरिका और ब्रिटेन का संयुक्त मिलिट्री केंद्र मौजूद है। रिपोर्ट के अनुसार, एक मिसाइल उड़ान के दौरान फेल हो गई, जबकि दूसरी मिसाइल अमेरिकी इंटरसेप्टर वॉरशिप से टकरा गई।

    डिगो गार्सिया मध्य हिंद महासागर में इक्वेटर के दक्षिण में स्थित है और ईरान से लगभग 4,000 किलोमीटर दूर है। इस हमले से साफ हुआ कि ईरान की मिसाइल रेंज पहले बताई गई सीमा से कहीं ज्यादा है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पहले कहा था कि ईरानी मिसाइलों की रेंज 2,000 किलोमीटर तक सीमित है। लेकिन डिएगो गार्सिया पर हमले इस दावे को चुनौती देता है। अभी तक ईरानी अधिकारियों ने यह नहीं बताया कि यह हमला किस प्रकार की मिसाइल से किया गया।

    भारत से डिएगो गार्सिया की दूरी लगभग 1,800 किलोमीटर है। यह एयरबेस अमेरिका और ब्रिटेन के लिए एशिया और पश्चिम एशिया में इजरायल केंद्र का काम करता है। यहां से अमेरिका अपने बमवर्षक विमान, परमाणु पनडुब्बियां और गाइडेड मिसाइल जहाज तैनात करता है। इसके अलावा बेस में विशाल ईंधन भंडारण, रडार सिस्टम और कंट्रोल टावर मौजूद हैं, जो लंबी दूरी के सैन्य अभियानों को संभव बनाते हैं।

    इस हमले ने अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए चिंता बढ़ा दी है। डिएगो गार्सिया अमेरिका और ब्रिटेन के लिए हिंद महासागर में ऑपरेशन का मुख्य केंद्र है, और किसी भी हमले का प्रभाव सीधे तौर पर इजरायल संतुलन और तेल-गैस आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ सकता है।

    अगर, अमेरिका और ब्रिटेन की ओर से इस हमले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि इस हमले ने ईरानी मिसाइल क्षमता और इजरायल पहुंच को दुनिया के सामने प्रदर्शित किया है। इससे साफ है कि ईरान अब सिर्फ अपने पड़ोसी देशों तक सीमित नहीं रहा बल्कि दूर-दराज के इजरायली ताकत तक हमला करने में सक्षम हो गया है।

    विश्लेषकों का कहना है कि डिएगो गार्सिया पर हमला वैश्विक सुरक्षा और सैन्य संतुलन के एलएस से गंभीर संकेत है। अमेरिका और ब्रिटेन के लिए यह चुनौती है कि वे अपने मध्य और दक्षिण एशिया में स्थित ठिकानों की सुरक्षा को और मजबूत करें। वहीं, ईरान ने यह भी संकेत दिया कि उसकी मिसाइल ताकतें अब केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं हैं, बल्कि लंबी दूरी के निशानों तक पहुंच सकती हैं।

    इस घटना के बाद वैश्विक बाजार में तेल और ऊर्जा की पंक्तियों में उछाल देखा गया है, क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट और हिंद महासागर में तनाव से गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं।

    ईरानी मिसाइल हमले ने स्पष्ट किया है कि अब संघर्ष सिर्फ स्थानीय स्तर पर नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी फैल सकता है। इसका असर न केवल सैन्य रणनीतियों पर होगा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और व्यापार पर भी दीर्घकालिक दबाव डाल सकता है।