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  • युद्धविराम के पीछे कौन सा बड़ा खेल? अमेरिका–इजरायल रिश्तों पर ईरानी विदेश मंत्री के तीखे सवाल

    युद्धविराम के पीछे कौन सा बड़ा खेल? अमेरिका–इजरायल रिश्तों पर ईरानी विदेश मंत्री के तीखे सवाल


    नई दिल्ली । मध्य-पूर्व में जारी तनाव और सैन्य गतिविधियों के बीच ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने अमेरिका और इजरायल के बीच संबंधों और युद्धविराम प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया है कि क्षेत्र में हालात जिस दिशा में बढ़ रहे हैं, उसमें कई अंतरराष्ट्रीय पक्षों की भूमिकाएं स्पष्ट नहीं हैं और विभिन्न स्तरों पर विरोधाभासी बयान सामने आ रहे हैं। अराघची के इन बयानों ने कूटनीतिक हलकों में नई बहस को जन्म दे दिया है।

    विदेश मंत्री अराघची ने सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से आरोप लगाया कि व्हाइट हाउस और ईरान के बीच बातचीत को लेकर अलग-अलग संकेत दिए जा रहे हैं, जिससे स्थिति और अधिक जटिल हो रही है। उन्होंने यह भी दावा किया कि हजारों अमेरिकी सैनिक मध्य-पूर्व क्षेत्र की ओर तैनात किए जा रहे हैं, जिससे तनाव और बढ़ने की आशंका है। उनके अनुसार, यदि किसी स्तर पर युद्धविराम की कोशिश सफल भी होती है, तो यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिका और इजरायल इस संघर्ष के अंतिम परिणाम को लेकर समान दृष्टिकोण रखते हैं या नहीं।

    अराघची ने अपने बयान में यह भी कहा कि क्षेत्र में जारी संघर्ष के एक महीने बाद अब दुनिया भर की सरकारें इसके राजनीतिक और आर्थिक प्रभावों का आकलन करने में जुटी हैं। उनके अनुसार, यह स्थिति केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति पर भी गंभीर प्रभाव डाल सकती है। उन्होंने विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि वहां से ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होती है, तो इसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर भी पड़ेगा।

    उन्होंने आगे आरोप लगाया कि अमेरिका और इजरायल की संयुक्त कार्रवाई क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा रही है। ईरान का दावा है कि कुछ हालिया सैन्य गतिविधियां अंतरराष्ट्रीय नियमों और संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन हैं। ईरानी पक्ष का कहना है कि वह इन कार्रवाइयों को गंभीरता से देख रहा है और आवश्यक प्रतिक्रिया देने का अधिकार सुरक्षित रखता है।

    मध्य-पूर्व में स्थिति उस समय और संवेदनशील हो गई जब होर्मुज क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों की खबरें सामने आईं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, यह कार्रवाई आत्मरक्षा में की गई थी और इसका उद्देश्य अपने सैनिकों और नौसैनिक इकाइयों की सुरक्षा सुनिश्चित करना था। वहीं ईरान ने इन दावों को खारिज करते हुए इसे आक्रामक कदम बताया है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के आरोप-प्रत्यारोप से क्षेत्र में कूटनीतिक तनाव और बढ़ सकता है, जिसका असर वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर भी देखने को मिल सकता है। फिलहाल स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है और सभी पक्षों की नजर आगामी घटनाक्रम पर टिकी हुई है।

  • ईरान पर सख्त रुख: ट्रंप बोले- परमाणु हथियार की इजाजत नहीं दी जा सकती

    ईरान पर सख्त रुख: ट्रंप बोले- परमाणु हथियार की इजाजत नहीं दी जा सकती


    नई दिल्ली । अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा है कि ईरान को परमाणु हथियार रखने की इजाजत किसी भी हालत में नहीं दी जा सकती। ट्रंप ने चेतावनी दी कि यदि तेहरान परमाणु शक्ति बनने की दिशा में आगे बढ़ता है तो इससे पूरे मध्य पूर्व में बड़े युद्ध की स्थिति पैदा हो सकती है, जिसका असर यूरोप और अमेरिका तक महसूस किया जाएगा। व्हाइट हाउस में मीडिया से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा कि उनकी सरकार बातचीत के जरिए समाधान चाहती है, लेकिन जरूरत पड़ने पर सैन्य विकल्प भी खुला रहेगा।

    दूसरी ओर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी ईरान को लेकर सख्त रुख अपनाया। भारत रवाना होने से पहले मियामी होमस्टेड एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में किसी भी प्रकार का टोल सिस्टम या शुल्क अमेरिका और उसके सहयोगियों को स्वीकार नहीं होगा। रुबियो ने कहा कि अमेरिका बहरीन समर्थित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव का समर्थन कर रहा है, जिसका उद्देश्य समुद्री मार्गों को सुरक्षित और बाधारहित बनाए रखना है।

    रुबियो ने बताया कि इस प्रस्ताव को दुनिया भर के सौ से अधिक देशों का समर्थन मिला है। उन्होंने कहा कि वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बेहद महत्वपूर्ण है और यहां किसी तरह की बाधा पूरी दुनिया के लिए गंभीर संकट पैदा कर सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि ईरान जहाजों से शुल्क वसूलने जैसी कार्रवाई करता है तो किसी भी कूटनीतिक समझौते की संभावना कमजोर पड़ जाएगी।

    ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और दबाव के कारण ईरान की सैन्य क्षमता पहले की तुलना में काफी कमजोर हो चुकी है। उन्होंने कहा कि ईरान की नौसेना, वायुसेना और मिसाइल सिस्टम को भारी नुकसान पहुंचा है। ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिकी नौसेना की मौजूदगी के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अमेरिका का पूरा नियंत्रण है और उसकी मंजूरी के बिना कोई जहाज वहां से नहीं गुजर सकता।

    इस पूरे घटनाक्रम के बीच भारत का भी जिक्र अहम रहा। मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका भारत की ऊर्जा जरूरतों को समझता है और वह भारत को पर्याप्त ऊर्जा आपूर्ति देने के लिए तैयार है। उन्होंने भारत को अमेरिका का बेहतरीन सहयोगी और रणनीतिक साझेदार बताया। रुबियो ने कहा कि भारत यात्रा के दौरान ऊर्जा सहयोग, क्षेत्रीय सुरक्षा और क्वाड देशों के बीच सहयोग को लेकर अहम चर्चा होगी।

    उधर, खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल आपूर्ति को लेकर चिंता गहराने लगी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में किसी तरह का टकराव बढ़ता है तो इसका सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ेगा। फिलहाल दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के बीच जारी बातचीत और संभावित कूटनीतिक समाधान पर टिकी हुई है।

  • ईरान-US वार्ता में नया तनाव, शांति प्रस्ताव के जवाब में अमेरिका ने रखी ये 5 कड़ी शर्तें

    ईरान-US वार्ता में नया तनाव, शांति प्रस्ताव के जवाब में अमेरिका ने रखी ये 5 कड़ी शर्तें



    नई दिल्ली । ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव और शांति वार्ता के प्रयासों के बीच एक नया मोड़ सामने आया है। ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी फार्स के अनुसार, अमेरिका ने ईरान के हालिया शांति प्रस्ताव के जवाब में पांच कड़ी शर्तें रखी हैं। इन शर्तों के बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक हलचल एक बार फिर तेज हो गई है।

    हालांकि, अब तक न तो वॉशिंगटन और न ही तेहरान की ओर से इन शर्तों पर कोई आधिकारिक बयान आया है, लेकिन माना जा रहा है कि इससे दोनों देशों के बीच सुलह की संभावनाओं को झटका लगा है।

    अमेरिका की 5 शर्तें

    ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने ईरान के प्रस्ताव के जवाब में ये प्रमुख शर्तें रखी हैं:-

    मुआवजे से इनकार: अमेरिका ने किसी भी प्रकार के युद्ध हर्जाने या मुआवजे देने से साफ इनकार कर दिया है।
    यूरेनियम ट्रांसफर की शर्त: ईरान को अपने पास मौजूद 400 किलोग्राम समृद्ध यूरेनियम अमेरिका को सौंपना होगा।
    परमाणु गतिविधियों पर सीमा: ईरान में केवल एक परमाणु संयंत्र को संचालन की अनुमति दी जाएगी।
    फ्रीज संपत्तियों पर रोक: विदेशों में जब्त ईरानी संपत्तियों और फंड्स को जारी करने से अमेरिका ने इनकार किया है।
    सीजफायर की शर्त: युद्धविराम तभी आगे बढ़ेगा जब दोनों पक्षों के बीच औपचारिक वार्ता शुरू होगी।

    ईरान की प्रतिक्रिया
    ईरानी विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका का यह रुख समाधान की बजाय राजनीतिक दबाव बनाने का प्रयास है। उनका आरोप है कि वॉशिंगटन बातचीत की आड़ में ऐसे लक्ष्य हासिल करना चाहता है जो वह सैन्य रूप से हासिल नहीं कर सका।

    ईरान की ओर से भी प्रस्ताव
    इससे पहले ईरान ने भी अमेरिका के सामने पांच शर्तें रखी थीं, जिनमें सभी मोर्चों पर दुश्मनी खत्म करना, प्रतिबंध हटाना, फ्रीज संपत्तियों को जारी करना, युद्ध हर्जाना देना और होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान की संप्रभुता स्वीकार करना शामिल था।

    रिपोर्ट्स के मुताबिक, 28 फरवरी को हुए हमलों के बाद क्षेत्र में तनाव बढ़ा था और करीब 40 दिनों तक संघर्ष की स्थिति रही। इसके बाद 8 अप्रैल को दोनों पक्षों के बीच युद्धविराम पर सहमति बनी। 11 और 12 अप्रैल को इस्लामाबाद में हुई शुरुआती वार्ता भी बिना नतीजे के खत्म हो गई थी। इसके बाद से पाकिस्तान के माध्यम से दोनों देशों के बीच ड्राफ्ट प्रस्तावों का आदान-प्रदान जारी है, लेकिन नई अमेरिकी शर्तों के बाद बातचीत और अधिक जटिल हो गई है।

  • होर्मुज में हमला, दुनिया में हड़कंप! फ्रांसीसी जहाज बना निशाना, ट्रंप ने अचानक रोका ऑपरेशन,क्या बढ़ने वाला है बड़ा युद्ध?

    होर्मुज में हमला, दुनिया में हड़कंप! फ्रांसीसी जहाज बना निशाना, ट्रंप ने अचानक रोका ऑपरेशन,क्या बढ़ने वाला है बड़ा युद्ध?



    नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव ने वैश्विक समुद्री व्यापार को गहरे संकट में डाल दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य में हालात उस समय और बिगड़ गए, जब फ्रांस की शिपिंग कंपनी CMA CGM के एक कार्गो जहाज पर हमला कर दिया गया। बताया जा रहा है कि ‘सैन एंटोनियो’ नाम का यह जहाज जब होर्मुज से गुजर रहा था, तभी उस पर मिसाइल या ड्रोन से हमला हुआ, जिसमें कई क्रू मेंबर घायल हो गए। हालांकि कंपनी ने पुष्टि की है कि सभी घायलों को सुरक्षित निकालकर इलाज के लिए भेज दिया गया है।

    इस हमले के बाद क्षेत्र में पहले से जारी तनाव और गहरा गया है। खासतौर पर इसलिए क्योंकि होर्मुज दुनिया के सबसे अहम तेल आपूर्ति मार्गों में से एक है, जहां से हर दिन सैकड़ों जहाज गुजरते हैं। लेकिन मौजूदा हालात में यह संख्या बुरी तरह प्रभावित हुई है।

    इसी बीच अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा फैसला लेते हुए ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ ऑपरेशन को अचानक बंद कर दिया। यह ऑपरेशन होर्मुज में फंसे जहाजों को सुरक्षित निकालने के लिए शुरू किया गया था, लेकिन दो दिनों में महज तीन जहाजों को ही सुरक्षित निकाल पाने के बाद इसे रोक दिया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस ऑपरेशन को रोकने के पीछे क्षेत्रीय दबाव और बढ़ते सैन्य जोखिम बड़ी वजह माने जा रहे हैं।

    संयुक्त राष्ट्र में भी इस संकट को लेकर हलचल तेज हो गई है। अमेरिका ने सुरक्षा परिषद में एक प्रस्ताव पेश कर ईरान से हमले रोकने, समुद्री मार्ग सुरक्षित रखने और अवरोध हटाने की मांग की है। वहीं, चीन ने भी दोनों देशों से तुरंत तनाव कम करने और युद्ध जैसे हालात खत्म करने की अपील की है।

    इस पूरे घटनाक्रम के बीच खाड़ी क्षेत्र में हमलों का सिलसिला थमता नजर नहीं आ रहा। ब्रिटेन की समुद्री एजेंसी के अनुसार, हाल के महीनों में इस क्षेत्र में 40 से ज्यादा घटनाएं दर्ज की गई हैं, जिनमें 26 सीधे हमले शामिल हैं। इसके अलावा संदिग्ध गतिविधियां और जहाजों के अपहरण की घटनाएं भी सामने आई हैं।

    इस तनाव का असर सिर्फ क्षेत्रीय नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी दिखाई दे रहा है। तेल सप्लाई प्रभावित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनिश्चितता बढ़ रही है, जबकि हजारों नाविक समुद्र में फंसे हुए हैं। अनुमान है कि इस इलाके में 1500 से ज्यादा जहाज और हजारों क्रू मेंबर अभी भी जोखिम के बीच मौजूद हैं।

    कुल मिलाकर, होर्मुज में बढ़ता टकराव अब सिर्फ एक क्षेत्रीय संकट नहीं रह गया है, बल्कि यह वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है। अब नजर इस बात पर है कि क्या कूटनीतिक प्रयास इस तनाव को कम कर पाएंगे या हालात और बिगड़ेंगे

  • होर्मुज पर टकराव तेज! अमेरिका की एंट्री पर ईरान का सीधा वार्निंग, ‘घुसे तो हमला होगा’

    होर्मुज पर टकराव तेज! अमेरिका की एंट्री पर ईरान का सीधा वार्निंग, ‘घुसे तो हमला होगा’


    नई दिल्ली। मध्य पूर्व में तनाव खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। ईरान ने साफ चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका की सेना स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में घुसने की कोशिश करती है, तो उस पर सीधा हमला किया जाएगा।

    ईरान की संयुक्त सैन्य कमान खातम अल-अंबिया मुख्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि यह जलमार्ग उसकी निगरानी में है और किसी भी विदेशी सैन्य दखल को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। खासतौर पर अमेरिकी सेना को “आक्रामक ताकत” बताते हुए कड़ा संदेश दिया गया है।

    यह बयान ऐसे समय आया है जब डोनाल्ड ट्रंप ने ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ नाम के मिशन का ऐलान किया है। इसके तहत अमेरिका होर्मुज में फंसे अंतरराष्ट्रीय जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने के लिए सैन्य अभियान शुरू करने जा रहा है।

    अमेरिका का दावा है कि कई देशों ने मदद मांगी है, क्योंकि उनके जहाज इस अहम समुद्री रास्ते में फंसे हुए हैं। ट्रंप के मुताबिक, इन जहाजों का मौजूदा संघर्ष से कोई लेना-देना नहीं है और वे “निर्दोष” हैं, जिन्हें सुरक्षित निकालना जरूरी है।

    CENTCOM के अनुसार 4 मई से शुरू होने वाले इस ऑपरेशन में गाइडेड मिसाइल विध्वंसक जहाज, 100 से ज्यादा विमान, ड्रोन और करीब 15,000 सैनिक शामिल होंगे। इसका मकसद व्यापारिक जहाजों के लिए सुरक्षित समुद्री रास्ता सुनिश्चित करना है।

    हालांकि, ईरान ने साफ कर दिया है कि इस तरह की किसी भी सैन्य गतिविधि को वह अपनी संप्रभुता के खिलाफ मानेगा। ऐसे में दोनों देशों के बीच सीधा टकराव बढ़ने की आशंका और गहरा गई है।

    स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में यहां बढ़ता तनाव न सिर्फ क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक स्तर पर भी बड़े संकट का संकेत दे रहा है।

  • मिडिल ईस्ट तनाव का असर: भारत के हवाई यातायात में अप्रैल में बड़ी गिरावट, यात्रियों की संख्या घटी

    मिडिल ईस्ट तनाव का असर: भारत के हवाई यातायात में अप्रैल में बड़ी गिरावट, यात्रियों की संख्या घटी

    नई दिल्ली।अप्रैल के महीने में भारत के हवाई यातायात में आई गिरावट ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि वैश्विक परिस्थितियों का असर देश के परिवहन क्षेत्र पर कितना गहरा पड़ सकता है। हाल के आंकड़ों के अनुसार, मार्च के मुकाबले अप्रैल में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों श्रेणियों में यात्रियों की संख्या में कमी दर्ज की गई है। यह गिरावट सामान्य परिस्थितियों का परिणाम नहीं है, बल्कि इसके पीछे मध्य पूर्व में चल रहे तनाव और अस्थिर हालात को मुख्य कारण माना जा रहा है, जिसने अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को सीधे प्रभावित किया है।

    घरेलू उड़ानों में यात्रियों की संख्या अप्रैल में लगभग 140.8 लाख रही, जो महीने-दर-महीने और साल-दर-साल आधार पर करीब 4 प्रतिशत कम है। आमतौर पर इस समय यात्रा की मांग स्थिर या बढ़ती हुई देखी जाती है, लेकिन इस बार वैश्विक परिस्थितियों ने घरेलू बाजार को भी प्रभावित किया। दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में गिरावट और अधिक गंभीर रही, जहां यात्रियों की संख्या घटकर लगभग 28.3 लाख रह गई। यह आंकड़ा मार्च के मुकाबले करीब 20 प्रतिशत की कमी को दर्शाता है, जो बताता है कि विदेश यात्रा करने वाले यात्रियों पर इस संकट का सबसे अधिक प्रभाव पड़ा।

    मध्य पूर्व क्षेत्र भारत के लिए एक महत्वपूर्ण एयर ट्रांजिट मार्ग है, जहां से बड़ी संख्या में उड़ानें संचालित होती हैं। इस क्षेत्र में सुरक्षा कारणों से लगाए गए प्रतिबंधों और एयरस्पेस के अस्थायी बंद होने से कई उड़ानों को रद्द या पुनर्निर्धारित करना पड़ा। इससे यात्रियों की आवाजाही में बाधा आई और एयरलाइंस के संचालन पर भी असर पड़ा। कई यात्रियों को अपनी यात्रा योजनाएं बदलनी पड़ीं, जबकि कुछ को लंबे रूट्स के जरिए सफर करना पड़ा।

    हालांकि अब स्थिति धीरे-धीरे सामान्य होती नजर आ रही है। कई देशों ने अपने एयरस्पेस को फिर से खोलना शुरू कर दिया है और उड़ानों का संचालन बहाल किया जा रहा है। इसके साथ ही भारत और अन्य देशों की एयरलाइंस ने उड़ानों की संख्या बढ़ाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है, जिससे आने वाले समय में यात्रियों की संख्या में सुधार की उम्मीद की जा रही है।

    इसके बावजूद, विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक क्षेत्र में पूरी तरह स्थिरता नहीं आती, तब तक एयर ट्रैफिक में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है। यह स्थिति एयरलाइन कंपनियों के लिए भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है, क्योंकि उन्हें लगातार बदलती परिस्थितियों के अनुसार अपनी सेवाओं में बदलाव करना पड़ रहा है।

    पूरे घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आज के दौर में हवाई यात्रा केवल एक परिवहन साधन नहीं, बल्कि वैश्विक हालात से जुड़ा एक संवेदनशील क्षेत्र बन चुका है। यात्रियों के लिए भी यह जरूरी हो गया है कि वे अपनी यात्रा योजनाओं में लचीलापन रखें और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लें। आने वाले महीनों में हवाई यातायात की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि वैश्विक स्तर पर स्थिरता कितनी जल्दी लौटती है।

  • ट्रंप-ईरान आमने-सामने: ‘गेंद अमेरिका के पाले में’, शांति प्रस्ताव के साथ तेहरान की दो टूक, युद्ध भी मंजूर

    ट्रंप-ईरान आमने-सामने: ‘गेंद अमेरिका के पाले में’, शांति प्रस्ताव के साथ तेहरान की दो टूक, युद्ध भी मंजूर


    नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के रिश्ते एक नए मोड़ पर पहुंच गए हैं। तेहरान ने जहां शांति की पहल करते हुए 14 सूत्रीय प्रस्ताव भेजा है, वहीं सख्त लहजे में यह भी साफ कर दिया है कि अब फैसला वॉशिंगटन को करना है कूटनीति या टकराव। पाकिस्तान के जरिए भेजे गए इस प्रस्ताव को लेकर दोनों देशों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है और हालात फिर से टकराव की ओर बढ़ते नजर आ रहे हैं।

    ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने दो टूक कहा कि “गेंद अब अमेरिका के पाले में है।” उन्होंने स्पष्ट किया कि तेहरान ने शांति का रास्ता खोल दिया है, लेकिन अगर अमेरिका टकराव चाहता है तो ईरान भी हर स्थिति के लिए तैयार है। उनका कहना है कि देश अपने हितों और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा और जरूरत पड़ी तो जवाब भी उसी अंदाज में दिया जाएगा।

    दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस प्रस्ताव पर संदेह जताते हुए साफ संकेत दिए हैं कि इसे स्वीकार करना आसान नहीं होगा। ट्रंप ने कहा कि वह प्रस्ताव की समीक्षा कर रहे हैं, लेकिन उन्हें नहीं लगता कि यह अमेरिका के लिए स्वीकार्य होगा। उन्होंने ईरान पर पिछले कई दशकों के व्यवहार को लेकर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि तेहरान ने अभी तक “पर्याप्त कीमत” नहीं चुकाई है।

    दरअसल, यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता बार-बार विफल हो रही है। पाकिस्तान की मध्यस्थता में बातचीत की कोशिशें भी नतीजे तक नहीं पहुंच सकी हैं। अमेरिका का रुख साफ है कि वह तब तक युद्ध खत्म नहीं करेगा जब तक ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर ठोस और विश्वसनीय नियंत्रण सुनिश्चित नहीं हो जाता। वहीं ईरान की प्राथमिकता है कि पहले युद्ध पूरी तरह खत्म हो, नाकेबंदी हटे और उसके बाद ही अन्य मुद्दों पर चर्चा हो।

    ईरान के 14 सूत्रीय प्रस्ताव में कई अहम मांगें शामिल हैं। इसमें होर्मुज जलडमरूमध्य से अमेरिकी नाकेबंदी हटाने, क्षेत्र से अमेरिकी सैनिकों की वापसी, जब्त ईरानी संपत्तियों की रिहाई, युद्ध में हुए नुकसान का मुआवजा और भविष्य में हमले न करने की गारंटी जैसे मुद्दे प्रमुख हैं। इसके अलावा लेबनान समेत सभी मोर्चों पर संघर्ष समाप्त करने और होर्मुज में नया तंत्र लागू करने की बात भी कही गई है।

    इसी बीच अमेरिका ने शिपिंग कंपनियों को चेतावनी दी है कि यदि वे होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने के लिए ईरान को किसी भी रूप में भुगतान करती हैं, तो उन्हें कड़े प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है। इस चेतावनी में नकद के साथ डिजिटल और अनौपचारिक लेन-देन भी शामिल हैं, जिससे क्षेत्र में व्यापारिक गतिविधियों पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।

    कुल मिलाकर, एक तरफ शांति प्रस्ताव है तो दूसरी ओर सख्त बयानबाजी—ऐसे में मिडिल ईस्ट का माहौल अभी भी बेहद संवेदनशील बना हुआ है। आने वाले दिनों में यह तय होगा कि हालात बातचीत की मेज तक पहुंचते हैं या फिर टकराव और गहराता है।

  • Donald Trump vs Iran: बढ़ता टकराव, ‘महायुद्ध’ की धमकी से वैश्विक तनाव चरम पर

    Donald Trump vs Iran: बढ़ता टकराव, ‘महायुद्ध’ की धमकी से वैश्विक तनाव चरम पर


    नई दिल्ली। अमेरिका और Iran के बीच एक बार फिर टकराव तेज हो गया है, जहां हालात खुली जंग की ओर बढ़ते नजर आ रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के ताजा बयानों ने तनाव को और भड़का दिया है, जबकि ईरान ने पलटवार करते हुए ‘महायुद्ध’ की चेतावनी दे दी है। दोनों देशों के बीच यह बयानबाजी ऐसे समय में हो रही है जब क्षेत्र पहले से ही अस्थिर है और वैश्विक समुदाय की नजरें इस टकराव पर टिकी हैं।

    ईरानी सेना ने साफ संकेत दिया है कि अमेरिका और इजरायल किसी भी समय दोबारा हमला शुरू कर सकते हैं। ईरान के सैन्य मुख्यालय के उप-प्रमुख मोहम्मद जाफर असादी ने कहा कि अमेरिका पर भरोसा नहीं किया जा सकता और उसकी नीतियां अस्थिरता पैदा कर रही हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका कोई “नई हिमाकत” करता है, तो ईरान पूरी ताकत से जवाब देगा।

    दूसरी ओर, Donald Trump ने भी सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि ईरान के साथ बातचीत अभी अनिश्चित है और अगर जरूरत पड़ी तो सैन्य कार्रवाई से पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा समझौते के प्रस्ताव उन्हें स्वीकार नहीं हैं और आगे क्या होगा, यह हालात तय करेंगे। ट्रंप ने ईरान के नेतृत्व को “बिखरा हुआ” बताते हुए दावा किया कि वहां अंदरूनी मतभेद गहरे हैं, जिससे बातचीत मुश्किल हो रही है।

    तनाव के बीच एक और बड़ी खबर सामने आई है, जिसमें Islamic Revolutionary Guard Corps के 14 जवानों की मौत हो गई। यह हादसा तेहरान के पास जंजन इलाके में हुआ, जहां युद्ध के दौरान बचे विस्फोटक सामग्री में धमाका हो गया। युद्धविराम के बाद यह सबसे बड़ा नुकसान माना जा रहा है, जिसने हालात की गंभीरता को और बढ़ा दिया है।

    इधर, होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। अमेरिका लगातार ईरान पर इसे खोलने का दबाव बना रहा है, जबकि ईरान अपने रुख पर कायम है। यह जलमार्ग वैश्विक तेल सप्लाई के लिए बेहद अहम है, ऐसे में यहां किसी भी टकराव का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।

    विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा हालात में दोनों देशों के बीच कूटनीतिक रास्ते बेहद सीमित होते जा रहे हैं। एक तरफ जहां बातचीत की कोशिशें जारी हैं, वहीं दूसरी तरफ सैन्य विकल्प भी खुले हैं, जो किसी बड़े संघर्ष का संकेत दे रहे हैं। अगर तनाव इसी तरह बढ़ता रहा, तो यह टकराव क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक संकट में बदल सकता है।

  • हॉर्मुज स्ट्रेट से तनाव के बीच पहली बार निकला LNG टैंकर, शिपिंग रूट पर फिर हलचल

    हॉर्मुज स्ट्रेट से तनाव के बीच पहली बार निकला LNG टैंकर, शिपिंग रूट पर फिर हलचल


    नई दिल्ली| मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, हॉर्मुज स्ट्रेट से पहली बार एक लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) टैंकर सफलतापूर्वक गुजरने में कामयाब रहा है। यह घटनाक्रम उस समय हुआ है जब क्षेत्र में भू-राजनीतिक तनाव अपने चरम पर बना हुआ है।

    शिप ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, यह LNG टैंकर मार्च की शुरुआत में अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी के दास द्वीप प्लांट से लोड होकर रवाना हुआ था। इसके बाद यह टैंकर भारत के दक्षिणी समुद्री क्षेत्र से गुजरता हुआ आगे बढ़ा। बताया जा रहा है कि तनाव के चलते यह टैंकर कई हफ्तों तक फारस की खाड़ी में ही रुका रहा और इसके ट्रांसमिशन सिग्नल 31 मार्च के आसपास बंद हो गए थे, जो बाद में भारत के नजदीक आने पर फिर से सक्रिय हुए।

    हॉर्मुज स्ट्रेट, जो फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ने वाला एक बेहद संकरा और रणनीतिक समुद्री मार्ग है, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल और गैस का निर्यात इसी मार्ग से होकर गुजरता है।

    हाल के महीनों में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के चलते इस क्षेत्र में समुद्री गतिविधियां काफी प्रभावित हुई हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान ने इस स्ट्रेट पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश की है, जबकि अमेरिका ने ईरानी जहाजों पर प्रतिबंधात्मक कदम उठाए हैं।

    इसी तनाव के बीच कई LNG टैंकरों को कतर से रवाना होने के बाद वापस लौटना पड़ा था। हालांकि अब इस नए टैंकर के गुजरने को एक संभावित राहत संकेत के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन स्थिति अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं कही जा सकती।

    सूत्रों के अनुसार, ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने को लेकर बातचीत भी चल रही है। ईरान ने एक नया शांति प्रस्ताव पेश किया है, जिसमें हॉर्मुज स्ट्रेट खोलने की बात शामिल है, लेकिन परमाणु कार्यक्रम को लेकर असहमति के चलते अब तक कोई ठोस समझौता नहीं हो पाया है।

    इस बीच यह देखना अहम होगा कि आने वाले दिनों में यह समुद्री मार्ग पूरी तरह सामान्य होता है या फिर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर इसका असर और गहराता है।

  • अमेरिका का बयान: ईरान से संघर्ष विराम बढ़ाने का कोई अनुरोध नहीं, पाक में हो सकती है अगली वार्ता

    अमेरिका का बयान: ईरान से संघर्ष विराम बढ़ाने का कोई अनुरोध नहीं, पाक में हो सकती है अगली वार्ता

    वॉशिंगटन। अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि उसने ईरान के साथ अस्थायी संघर्षविराम को आगे बढ़ाने के लिए कोई औपचारिक अनुरोध नहीं किया है। 7 अप्रैल को घोषित यह संघर्षविराम अगले मंगलवार को समाप्त होने जा रहा है।

    व्हाइट हाउस क्‍या बोला?
    व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया कि अमेरिका ने संघर्षविराम बढ़ाने का अनुरोध किया है, जो सही नहीं है। उन्होंने कहा कि बातचीत अभी सक्रिय रूप से जारी है और दोनों पक्षों के बीच संवाद से सकारात्मक परिणाम की उम्मीद की जा रही है।

    प्रेस सचिव के अनुसार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस दोनों ही वार्ताओं को लेकर लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। अमेरिका का कहना है कि ईरान के सामने उसकी शर्तें स्पष्ट कर दी गई हैं और आगे की दिशा बातचीत के नतीजों पर निर्भर करेगी।

    पाकिस्तान में हो सकती है अगली बैठक
    व्हाइट हाउस ने संकेत दिया है कि अगली वार्ता उसी स्थान पर हो सकती है जहां पिछली बैठक हुई थी, यानी पाकिस्तान में। अमेरिका के मुताबिक, पाकिस्तान इस पूरे संवाद में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है, जबकि अन्य देश भी मदद की पेशकश कर रहे हैं।