Tag: Middle East Tension

  • साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमला: ब्रेंट क्रूड पहुंचा 112 डॉलर पर, भारत में पेट्रोल-डीजल महंगा होने की संभावना

    साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमला: ब्रेंट क्रूड पहुंचा 112 डॉलर पर, भारत में पेट्रोल-डीजल महंगा होने की संभावना


    नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और ईरान-इजरायल संघर्ष के बीच ग्लोबल क्रूड मार्केट में बड़ी तेजी देखने को मिल रही है। इजरायल ने दुनिया की सबसे बड़ी ऑयल और नेचुरल गैस फील्ड साउथ पार्स पर हमला किया है। इसके बाद ब्रेंट क्रूड के दाम 112 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गए हैं। अमेरिकी क्रूड (WTI) भी 99 डॉलर प्रति बैरल के करीब कारोबार कर रहा है।

    साउथ पार्स पर हमला और उसके असर
    इजरायल के हमले के जवाब में ईरान ने कतर के रास लाफान इंडस्ट्रियल सिटी पर मिसाइल दागी। एक मिसाइल सीधे लक्ष्य पर लगी जबकि चार को बीच में ही रोका गया। रास लाफान दुनिया की सबसे बड़ी LNG प्रोडक्शन साइट है जो इस महीने की शुरुआत से बंद पड़ी थी। हमले से काफी नुकसान हुआ है।

    साउथ पार्स गैस फील्ड ईरान की घरेलू गैस सप्लाई के साथ पड़ोसी देशों इराक और टर्की को भी गैस भेजता है। हमले में असलुयेह के ऑयल और पेट्रोकेमिकल प्लांट्स को भी नुकसान पहुंचा है। यह फील्ड ईरान और कतर के बीच बंटा हुआ है और दुनिया के सबसे बड़े नेचुरल गैस भंडार का करीब एक-तिहाई हिस्सा है।

    ब्रेंट क्रूड और गैस में उछाल

    एशियाई ट्रेडिंग में गुरुवार सुबह क्रूड ऑयल 112 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। अमेरिकी नेचुरल गैस में भी 5% की तेजी आई है। विश्लेषकों का कहना है कि यदि हमले जारी रहे तो क्रूड की कीमतें और बढ़ सकती हैं।

    भारत पर असर

    भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए मिडिल ईस्ट पर काफी निर्भर है। देश का लगभग 85-90% क्रूड आयात इसी क्षेत्र से आता है जिसमें 45-50% सीधे मिडिल ईस्ट से है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव और सप्लाई बाधित होने से भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने की संभावना है।

    महंगाई पर असर

    क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर पेट्रोल-डीजल ट्रांसपोर्ट लॉजिस्टिक्स और घरेलू LPG सिलेंडर के दाम पर पड़ेगा। स्टोरेज सीमित होने और सप्लाई बाधित होने से शॉर्टेज का खतरा भी है जिससे आम परिवारों की जेब पर दबाव बढ़ सकता है।

  • ट्रंप का दावा: अमेरिकी हमलों में ईरान की नौसेना और वायु रक्षा प्रणाली पूरी तरह नष्ट, अभियान अभी जारी

    ट्रंप का दावा: अमेरिकी हमलों में ईरान की नौसेना और वायु रक्षा प्रणाली पूरी तरह नष्ट, अभियान अभी जारी


    नई दिल्ली । वाशिंगटन से रवाना होते समय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के खिलाफ जारी अमेरिकी सैन्य अभियान को लेकर बेहद चौंकाने वाला दावा किया। उन्होंने पत्रकारों को बताया कि अमेरिकी सेना ने ईरान के सैन्य ढांचे को इतनी भयंकर क्षति पहुँचाई है कि अब वहां कुछ भी सुरक्षित नहीं बचा है। ट्रंप ने जोर देकर कहा कि ईरान की नौसेना की पूरी क्षमता और उसकी वायु रक्षा प्रणाली अब पूरी तरह से ध्वस्त हो चुकी है।

    ट्रंप के अनुसार अमेरिकी हमलों ने ईरानी एयरबेस, नौसैनिक जहाजों और रडार सिस्टम को पूरी तरह नष्ट कर दिया है। इसके अलावा, उन्होंने दावा किया कि ईरान के कई शीर्ष सैन्य और राजनीतिक नेता भी इस अभियान में प्रभावित हुए हैं, जिससे नेतृत्व संकट उत्पन्न हो गया है। व्हाइट हाउस के बाहर पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने अमेरिकी सेना की ताकत और कार्यक्षमता की तारीफ करते हुए इसे विश्व की सबसे शक्तिशाली सेना बताया।

    दिलचस्प बात यह है कि ट्रंप ने यह भी खुलासा किया कि अमेरिकी सेना ने कुछ महत्वपूर्ण ईरानी ठिकानों को जानबूझकर सुरक्षित छोड़ दिया है। उनके अनुसार, यदि अमेरिका चाहे तो केवल एक घंटे में उन बचे हुए ठिकानों को भी पूरी तरह से नष्ट कर सकता है। उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्रवाई ईरान के लिए अपने देश को फिर से खड़ा करना लगभग असंभव बना देगी।

    ट्रंप ने यह साफ किया कि अमेरिकी हमले केवल जवाबी कार्रवाई नहीं थे, बल्कि ईरान की सैन्य क्षमता को जड़ से समाप्त करने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा थे। उनके अनुसार ईरान की नौसेना के अधिकांश जहाज अब समुद्र की गहराई में डूब चुके हैं और वायुसेना भी गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त है। इस बयान से स्पष्ट होता है कि अमेरिका ने ईरान को सैन्य रूप से पंगु बनाने की पूरी योजना बनाई है।

    पत्रकारों ने उनसे पूछा कि क्या अमेरिकी कार्रवाई अब रोक दी जाएगी। ट्रंप ने कड़ा जवाब देते हुए कहा कि अभियान अभी जारी है और सेना आगे की कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ा संदेश है कि अमेरिका की सुरक्षा से खिलवाड़ भारी पड़ेगा। उन्होंने इसे एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया, जिसे अमेरिका ने पहले कभी नहीं देखा।

    विश्व के रक्षा विशेषज्ञ और राजनेता अब ट्रंप के इस दावे पर बहस कर रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति के बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक और सैन्य पटल पर हलचल मचा दी है। पूरी दुनिया की नजरें अब इस बात पर हैं कि ईरान इस विनाशकारी दावे और सैन्य क्षति के बारे में क्या प्रतिक्रिया देता है।

  • मिडिल ईस्ट तनाव का असर मध्यप्रदेश पर: 10 हजार टूरिस्ट ने रोकी विदेश यात्रा, करीब 60 करोड़ का ट्रैवल कारोबार प्रभावित

    मिडिल ईस्ट तनाव का असर मध्यप्रदेश पर: 10 हजार टूरिस्ट ने रोकी विदेश यात्रा, करीब 60 करोड़ का ट्रैवल कारोबार प्रभावित


    नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट और यूरोप में बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव का असर अब मध्यप्रदेश के टूरिज्म सेक्टर पर भी साफ दिखाई देने लगा है। दुबई और आसपास के देशों की यात्रा करने वाले हजारों लोगों ने फिलहाल अपने ट्रैवल प्लान रोक दिए हैं। ट्रैवल इंडस्ट्री के अनुसार इस सीजन में प्रदेश से करीब 10 हजार लोगों के मिडिल ईस्ट जाने की संभावना थी, लेकिन मौजूदा हालात के कारण बड़ी संख्या में यात्रियों ने अपनी बुकिंग रद्द कर दी या नई बुकिंग ही नहीं कराई।

    ऑनलाइन ट्रैवल प्लेटफॉर्म MakeMyTrip की भोपाल लोकेशन हेड Richa Singh Bhadauria के मुताबिक लगभग 2 से 2.5 हजार यात्रियों ने पहले से फ्लाइट और टूर पैकेज बुक कर लिए थे, जो सीधे प्रभावित हुए हैं। वहीं करीब 7 से 8 हजार संभावित यात्रियों ने अनिश्चित हालात को देखते हुए अपनी यात्रा योजनाएं टाल दी हैं। हालांकि फिलहाल इंटरनेशनल ट्रैवल पूरी तरह बंद नहीं हुआ है, लेकिन पर्यटन कारोबार में साफ तौर पर सुस्ती देखी जा रही है।

    60 करोड़ का संभावित कारोबार अटका
    मिडिल ईस्ट देशों के लिए औसतन एक ट्रैवल पैकेज 60 से 70 हजार रुपए प्रति व्यक्ति का होता है। यदि 60 हजार रुपए का औसत और 10 हजार यात्रियों का अनुमान लगाया जाए तो करीब 60 करोड़ रुपए का संभावित ट्रैवल कारोबार प्रभावित माना जा रहा है। हालांकि सभी मामलों में पूरी राशि का नुकसान नहीं हुआ है, क्योंकि कई एयरलाइंस यात्रियों को रिफंड या क्रेडिट शेल का विकल्प दे रही हैं।

    60–70% यात्रियों को मिला पूरा रिफंड
    ट्रैवल एजेंसियों के अनुसार प्रभावित बुकिंग्स में से लगभग 60 से 70 प्रतिशत यात्रियों को पूरा रिफंड मिल गया है। ऐसा उन मामलों में हुआ जहां एयरलाइंस ने खुद फ्लाइट रद्द की या शेड्यूल बदला। वहीं करीब 15 से 25 प्रतिशत यात्रियों को आंशिक नुकसान हुआ है, जो मुख्य रूप से वीजा फीस, होटल कैंसिलेशन पॉलिसी या नॉन-रिफंडेबल बुकिंग के कारण हुआ। कई यात्रियों ने रिफंड लेने के बजाय भविष्य के लिए ट्रैवल क्रेडिट या क्रेडिट शेल का विकल्प चुना है।

    भोपाल और इंदौर से सबसे ज्यादा कैंसिलेशन
    ट्रैवल ट्रेड के अनुभव के अनुसार मध्यप्रदेश में इंटरनेशनल लीजर ट्रैवल सबसे ज्यादा भोपाल और इंदौर से होता है। इसलिए इन शहरों से कैंसिलेशन का असर भी ज्यादा दिखाई दे रहा है। जबलपुर और ग्वालियर में भी कुछ प्रभाव देखा गया है, लेकिन फिलहाल पूरे प्रदेश में पर्यटन गतिविधियां पूरी तरह ठप नहीं हुई हैं बल्कि धीमी पड़ गई हैं।

    क्रूज ट्रैवल में भी 30–40% गिरावट
    वैश्विक अनिश्चितता का असर इंटरनेशनल क्रूज ट्रैवल पर भी पड़ा है। इस सीजन में क्रूज बुकिंग में लगभग 30 से 40 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि अधिकतर यात्री अपनी यात्रा पूरी तरह रद्द करने के बजाय उसे आगे की तारीख के लिए टालना पसंद कर रहे हैं।

    लीजर ट्रैवल सबसे ज्यादा प्रभावित
    मौजूदा हालात का सबसे ज्यादा असर लीजर ट्रैवल सेगमेंट पर पड़ा है, जिसमें फैमिली हॉलीडे, हनीमून ट्रिप और ग्रुप टूर शामिल हैं। इसके मुकाबले कॉर्पोरेट ट्रैवल अपेक्षाकृत स्थिर बना हुआ है, क्योंकि बिजनेस मीटिंग और काम से जुड़े यात्राओं को पूरी तरह टालना कई बार संभव नहीं होता।

    एयरलाइंस दे रही लचीले विकल्प
    मौजूदा स्थिति को देखते हुए कई एयरलाइंस यात्रियों को राहत देने की कोशिश कर रही हैं। कुछ कंपनियां क्रेडिट शेल की वैधता बढ़ा रही हैं, जबकि कई एयरलाइंस बिना अतिरिक्त शुल्क के भविष्य की तारीख पर रीबुकिंग की सुविधा दे रही हैं। ट्रैवल इंडस्ट्री का फोकस फिलहाल यात्रियों का भरोसा बनाए रखने और सुरक्षित समय पर यात्रा की सुविधा उपलब्ध कराने पर है।

    तनाव लंबा चला तो बढ़ सकता है असर
    ट्रैवल इंडस्ट्री का मानना है कि फिलहाल स्थिति कोविड जैसी नहीं है, क्योंकि फ्लाइट्स चालू हैं और यात्रा पूरी तरह बंद नहीं हुई है। लेकिन अगर मिडिल ईस्ट में जियोपॉलिटिकल तनाव अगले दो से तीन महीने तक जारी रहता है, तो इंटरनेशनल टूरिज्म में गिरावट और बढ़ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे ही वैश्विक हालात सामान्य होंगे, यात्रियों की मांग फिर तेजी से वापस लौट सकती है।

    Keywords: मिडिल ईस्ट तनाव, मध्यप्रदेश पर्यटन, दुबई ट्रैवल कैंसिलेशन, इंटरनेशनल टूरिज्म स्लोडाउन, मेकमायट्रिप भोपाल, ट्रैवल इंडस्ट्री असर, भोपाल इंदौर टूरिस्ट, क्रूज ट्रैवल गिरावट, इंटरनेशनल ट्रिप कैंसिलेशन, जियोपॉलिटिकल तनाव, पर्यटन कारोबार 60 करोड़.

  • मिडिल ईस्ट तनाव का असर मध्यप्रदेश के पर्यटन पर: 10 हजार यात्रियों ने रोकी विदेश यात्रा, 60 करोड़ का कारोबार प्रभावित

    मिडिल ईस्ट तनाव का असर मध्यप्रदेश के पर्यटन पर: 10 हजार यात्रियों ने रोकी विदेश यात्रा, 60 करोड़ का कारोबार प्रभावित



    नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट और यूरोप क्षेत्र में बढ़ते जियोपॉलिटिकल तनाव का असर अब मध्यप्रदेश के पर्यटन कारोबार पर भी दिखाई देने लगा है। दुबई और आसपास के देशों की यात्रा करने वाले हजारों पर्यटकों ने फिलहाल अपने प्लान रोक दिए हैं। ट्रैवल इंडस्ट्री से जुड़े आंकड़ों के अनुसार इस सीजन में प्रदेश से करीब 10 हजार लोगों के मिडिल ईस्ट जाने की उम्मीद थी, लेकिन मौजूदा वैश्विक हालात के कारण बड़ी संख्या में यात्रियों ने यात्रा टाल दी है।

    हजारों बुकिंग प्रभावित, कई यात्रियों ने नए प्लान ही नहीं बनाए
    ट्रैवल कंपनियों के मुताबिक करीब 2 से 2.5 हजार यात्रियों ने पहले ही फ्लाइट और टूर पैकेज बुक कर लिए थे, जिन पर सीधे असर पड़ा है। वहीं करीब 7 से 8 हजार संभावित यात्रियों ने हालात को देखते हुए नई बुकिंग ही नहीं कराई या अपनी यात्रा संबंधी पूछताछ वापस ले ली। फिलहाल अंतरराष्ट्रीय यात्रा पूरी तरह बंद नहीं हुई है, लेकिन ट्रैवल इंडस्ट्री में साफ तौर पर मंदी का संकेत दिखाई देने लगा है।

    करीब 60 करोड़ रुपये का संभावित कारोबार प्रभावित
    मिडिल ईस्ट देशों के लिए औसतन एक ट्रैवल पैकेज 60 से 70 हजार रुपये प्रति व्यक्ति का होता है। अगर औसत 60 हजार रुपये प्रति व्यक्ति और 10 हजार यात्रियों का अनुमान लगाया जाए तो करीब 60 करोड़ रुपये का संभावित कारोबार प्रभावित माना जा रहा है। हालांकि कई एयरलाइंस यात्रियों को रिफंड, क्रेडिट शेल या रीबुकिंग का विकल्प दे रही हैं, जिससे पूरा नुकसान नहीं माना जा रहा।

    भोपाल और इंदौर से सबसे ज्यादा असर
    ट्रैवल एजेंसियों के अनुसार मध्यप्रदेश में इंटरनेशनल लीजर ट्रैवल सबसे ज्यादा भोपाल और इंदौर से होता है। इसलिए इन शहरों से बुकिंग कैंसिलेशन का असर भी ज्यादा दिखाई दे रहा है। जबलपुर और ग्वालियर में भी प्रभाव है, लेकिन फिलहाल पूरे प्रदेश में पर्यटन गतिविधियां पूरी तरह रुकी नहीं हैं बल्कि धीमी पड़ी हैं।

    क्रूज ट्रैवल में भी आई गिरावट
    वैश्विक अनिश्चितता का असर इंटरनेशनल क्रूज ट्रैवल पर भी पड़ा है। इस सीजन में क्रूज बुकिंग में लगभग 30 से 40 प्रतिशत तक गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि अधिकतर यात्री क्रूज ट्रिप रद्द करने के बजाय उसे आगे की तारीख के लिए टालना पसंद कर रहे हैं।

    घरेलू पर्यटन की ओर बढ़ा रुझान
    अंतरराष्ट्रीय हालात को देखते हुए अब कई यात्री घरेलू पर्यटन की ओर रुख कर रहे हैं। ट्रैवल एजेंसियों के मुताबिक हाल के दिनों में हिमाचल, गोवा, केरल और राजस्थान जैसे पर्यटन स्थलों के लिए पूछताछ बढ़ी है। जो परिवार पहले दुबई या यूरोप की योजना बना रहे थे, वे अब भारत के भीतर ही छुट्टियां मनाने के विकल्प तलाश रहे हैं।

    साउथ-ईस्ट एशिया बन रहा नया विकल्प
    मिडिल ईस्ट के विकल्प के रूप में अब यात्रियों का रुझान दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों की ओर भी बढ़ रहा है। सिंगापुर, थाईलैंड, मलेशिया, श्रीलंका और मालदीव जैसे देशों के लिए इंक्वायरी बढ़ने लगी है। आसान वीजा प्रक्रिया और अपेक्षाकृत सुरक्षित माहौल के कारण पर्यटक इन्हें बेहतर विकल्प मान रहे हैं।

    अगर तनाव लंबा चला तो और बढ़ सकता है असर
    ट्रैवल इंडस्ट्री का कहना है कि फिलहाल स्थिति कोविड जैसी नहीं है क्योंकि फ्लाइट्स चालू हैं और यात्रा पूरी तरह बंद नहीं हुई है। लेकिन यदि मिडिल ईस्ट में तनाव अगले दो से तीन महीने तक जारी रहता है तो अंतरराष्ट्रीय पर्यटन पर असर और बढ़ सकता है। उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे ही वैश्विक हालात सामान्य होंगे, यात्रियों का भरोसा लौटेगा और पर्यटन बाजार फिर तेजी से उभर सकता है।

  • रूस से तेल खरीदने की भारत को मिली मोहलत, ट्रंप बोले- वैश्विक दबाव कम करने का कदम

    रूस से तेल खरीदने की भारत को मिली मोहलत, ट्रंप बोले- वैश्विक दबाव कम करने का कदम


    वॉशिंगटन। पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा स्थिति बिगड़ने के बीच अमेरिका ने भारत को रूसी तेल खरीदने की अस्थायी अनुमति दे दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे ‘थोड़ा दबाव कम करने’ के लिए उठाया गया कदम बताया। उन्होंने कहा कि यह फैसला वैश्विक तेल बाजार पर बढ़ते दबाव को कम करने के उद्देश्य से लिया गया है। ट्रंप ने यह बयान एयर फोर्स वन में मीडिया से बातचीत के दौरान दिया।

    स्थिति जल्द सामान्य होगी: ट्रंप

    ट्रंप ने कहा कि जरूरत पड़ने पर अमेरिका वैश्विक तेल बाजार पर दबाव कम करने के और कदम उठा सकता है। उन्होंने बताया कि दुनिया में तेल की कोई कमी नहीं है और अमेरिका के पास पर्याप्त तेल उपलब्ध है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने भी इस बात की पुष्टि की कि यह निर्णय वैश्विक तेल आपूर्ति में अस्थायी कमी को दूर करने के लिए लिया गया है।

    खाड़ी क्षेत्र में संकट

    खाड़ी क्षेत्र में तनाव के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले शिपिंग मार्ग प्रभावित हो रहे हैं। यह मार्ग तेल परिवहन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत अपनी लगभग 40 प्रतिशत तेल आयात मध्य पूर्व से करता है, जिसमें से एक बड़ा हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होकर गुजरता है। इस स्थिति को देखते हुए अमेरिका ने भारत को रूसी तेल खरीदने के लिए 30 दिन की अस्थायी मोहलत दी है।

    ऊर्जा बाजार पर प्रभाव और भारत की सुरक्षा

    अमेरिकी ऊर्जा सचिव क्रिस राइट ने बताया कि भारत को रूसी तेल खरीदने की 30 दिन की मोहलत, मध्य पूर्व में तनाव के कारण वैश्विक तेल कीमतों को नियंत्रण में रखने के लिए उठाए गए अल्पकालिक उपायों का हिस्सा है।

    भारतीय अधिकारियों के अनुसार, देश अपनी ऊर्जा सुरक्षा की स्थिति की लगातार समीक्षा कर रहा है और वर्तमान में पर्याप्त एलपीजी, एलएनजी और कच्चे तेल की उपलब्धता है। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि ऊर्जा उपभोक्ताओं को चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं है। भारत को विभिन्न स्रोतों से पहले से अधिक ऊर्जा आपूर्ति मिल रही है, जो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से संभावित बाधाओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त है।

    रूसी तेल का बढ़ता हिस्सा

    भारत ने पिछले कुछ वर्षों में अपने कच्चे तेल के आयात स्रोतों में विविधता लाई है। 2022 में रूस भारत के कुल कच्चे तेल आयात का केवल 0.2 प्रतिशत था, लेकिन फरवरी 2026 में यह लगभग 20 प्रतिशत यानी करीब 1.04 मिलियन बैरल प्रति दिन पहुंच गया।

    ईरान पर सैन्य अभियान: ट्रंप का दावा

    ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने ईरान के पूरे नेतृत्व का सफाया कर दिया है और इसे पृथ्वी से एक बड़े ‘कैंसर’ को हटाने जैसा बताया। उन्होंने बताया कि अमेरिकी सैन्य अभियान ईरान में कुछ समय तक जारी रहेगा। ट्रंप के अनुसार, अमेरिकी सेना ने ईरान की नौसेना के 44 जहाजों, सभी विमान और अधिकांश मिसाइलों को नष्ट कर दिया है। साथ ही मिसाइल निर्माण के क्षेत्रों को भारी नुकसान पहुंचाने के कारण उनकी ड्रोन क्षमता में कमी आई है। उन्होंने कहा कि नेतृत्व के लगभग हर स्तर पर सफाया कर दिया गया है।

  • रूस ईरान को खुफिया जानकारी दे रहा! ट्रंप बोले- इससे कोई खास फायदा नहीं

    रूस ईरान को खुफिया जानकारी दे रहा! ट्रंप बोले- इससे कोई खास फायदा नहीं



    नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने शनिवार को उन रिपोर्टों को कम महत्व दिया, जिनमें कहा गया कि रूस ने ईरान को अमेरिकी सैनिकों और ठिकानों पर हमले के लिए खुफिया जानकारी दी है। ट्रंप ने कहा कि अगर ऐसा हुआ भी है, तो इससे ईरान को कोई खास लाभ नहीं हो रहा। यह टिप्पणी उन्होंने एयर फोर्स वन से मियामी के लिए रवाना होते समय की।

    अमेरिकी सैनिकों की मौत के बाद बढ़ा तनाव

    ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया जब अमेरिका और इजराइल द्वारा ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू करने के बाद क्षेत्र में तनाव चरम पर है। युद्ध शुरू होने के एक दिन बाद कुवैत में ड्रोन हमले में अमेरिकी सेना के छह रिजर्व सैनिक मारे गए।

    राष्ट्रपति ने सीधे तौर पर पुष्टि नहीं की कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को रूस द्वारा ईरान को लक्ष्य संबंधी जानकारी देने के ठोस सबूत मिले हैं या नहीं, लेकिन उन्होंने कहा कि इससे युद्ध की दिशा पर बड़ा असर नहीं पड़ा है।

    रूस और अमेरिका संबंधों पर सवाल टाले

    जब ट्रंप से पूछा गया कि अगर रूस ईरान की मदद कर रहा है तो अमेरिका-रूस संबंधों पर क्या असर पड़ेगा, तो उन्होंने सवाल टालते हुए कहा कि “हम भी उनके खिलाफ वैसा ही कर सकते हैं।” उन्होंने यूक्रेन का उदाहरण देते हुए कहा कि पिछले चार वर्षों से अमेरिका यूक्रेन को खुफिया सहायता दे रहा है ताकि वह रूस के हमलों से बच सके।

    तेल बाजार पर युद्ध का असर

    पश्चिम एशिया में संघर्ष बढ़ने के साथ ही तेल बाजार में भारी उथल-पुथल देखने को मिल रही है। फारस की खाड़ी के प्रवेश द्वार Hormuz Strait से रोजाना लगभग दो करोड़ बैरल तेल ले जाने वाले जहाज गुजरते हैं, लेकिन मौजूदा हालात में उनके आवागमन में रुकावट आई है। ईरान के जवाबी हमलों और क्षेत्र की ऊर्जा सुविधाओं को हुए नुकसान के कारण वैश्विक आपूर्ति पर दबाव बढ़ा, जिससे तेल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं।

    रणनीतिक तेल भंडार पर ट्रंप का रुख

    तेल की कीमतों को नियंत्रित करने के सवाल पर ट्रंप ने कहा कि जरूरत पड़ी तो कदम उठाने को तैयार हैं, लेकिन फिलहाल अमेरिका के पास पर्याप्त तेल भंडार मौजूद है। उन्होंने बताया कि अमेरिकी रणनीतिक तेल भंडार में पिछले महीने के अंत तक लगभग 41.5 करोड़ बैरल तेल था, जबकि इसकी कुल क्षमता 70 करोड़ बैरल से अधिक है। ट्रंप ने कहा कि देश में पर्याप्त तेल है और बाजार में आपूर्ति जल्दी सामान्य हो सकती है।

  • ईरान पर हमला क्यों था जरूरी? इजरायली पीएम बोले– खतरा बढ़ने से पहले लिया एक्शन

    ईरान पर हमला क्यों था जरूरी? इजरायली पीएम बोले– खतरा बढ़ने से पहले लिया एक्शन


    नई दिल्ली। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान के खिलाफ हालिया सैन्य कार्रवाई को “जरूरी और समयबद्ध” बताते हुए कहा कि अगर अभी कदम नहीं उठाया जाता, तो भविष्य में कार्रवाई करना लगभग असंभव हो जाता। फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में नेतन्याहू ने आरोप लगाया कि ईरान जानबूझकर आम नागरिकों को निशाना बना रहा है, जबकि इजरायल और अमेरिका “आतंकियों” पर फोकस कर रहे हैं।

    बैलिस्टिक मिसाइलों पर तीखी टिप्पणी
    नेतन्याहू ने ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल हमलों को बेहद खतरनाक बताते हुए कहा कि ऐसी मिसाइल “टीएनटी से भरी बस की तरह होती है, जो मैक 8 की रफ्तार से आकर गिरती है।”

    उन्होंने दावा किया कि हालिया हमलों में नौ लोगों की जान गई और कहा:
    “यही तेहरान और हमारे बीच फर्क है। तेहरान के सामूहिक हत्यारे नागरिकों को निशाना बनाते हैं, जबकि इजरायल और अमेरिका आतंकियों को निशाना बनाते हैं।”

    “परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम रोकना जरूरी था”
    नेतन्याहू के मुताबिक, इजरायल ने ईरान के परमाणु ठिकानों और बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर पहले भी प्रहार किया था, लेकिन तेहरान ने अपनी सैन्य क्षमताओं को आगे बढ़ाना जारी रखा। उनका दावा है कि ईरान नए भूमिगत ठिकाने बना रहा था, जिससे उसका परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम भविष्य की सैन्य कार्रवाई से सुरक्षित हो सकता था।

    उन्होंने कहा,
    “अगर हम अभी कार्रवाई नहीं करते, तो भविष्य में ईरान को रोकना संभव नहीं होता। वह अमेरिका को निशाना बना सकता था, ब्लैकमेल कर सकता था और हमें व अन्य देशों को धमका सकता था।”

    ट्रंप की सराहना
    नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump की सराहना करते हुए कहा कि ऐसी कार्रवाई के लिए “पक्के इरादों वाले राष्ट्रपति” की जरूरत थी। उन्होंने कहा, हमारा गठबंधन आज बेहद मजबूत है। हमें अभी कार्रवाई करनी थी और हमने की।”

    बढ़ता क्षेत्रीय तनाव
    ईरान पर हमले और उसके बाद जवाबी कार्रवाइयों के चलते पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर है। इजरायल का कहना है कि यह कदम आत्मरक्षा और वैश्विक सुरक्षा के लिए जरूरी था, जबकि तेहरान इसे आक्रामक और गैरकानूनी कार्रवाई बता रहा है।

  • ईरान के मिसाइल हमलों पर अमेरिका और खाड़ी देशों का कड़ा रुख, क्षेत्रीय तनाव बढ़ा

    ईरान के मिसाइल हमलों पर अमेरिका और खाड़ी देशों का कड़ा रुख, क्षेत्रीय तनाव बढ़ा


    नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका और खाड़ी देशों ने ईरान की ओर से किए गए मिसाइल और ड्रोन हमलों की तीखी आलोचना की है। घटनाक्रम तब तेज हुआ जब इजरायल और अमेरिका की कार्रवाई के बाद ईरान ने जवाबी हमले किए। इसके बाद जारी संयुक्त बयान में अमेरिका, बहरीन, जॉर्डन, कुवैत, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने इन हमलों को “लापरवाही भरा और अस्थिर करने वाला” बताया।

    अमेरिकी विदेश विभाग की ओर से जारी बयान में कहा गया कि ईरान द्वारा संप्रभु क्षेत्रों को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय नियमों का सीधा उल्लंघन है। बयान के मुताबिक, इन हमलों का असर बहरीन, इराक (जिसमें इराकी कुर्दिस्तान क्षेत्र भी शामिल है), जॉर्डन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और यूएई पर पड़ा। देशों ने आरोप लगाया कि हमलों में आम नागरिकों की जान जोखिम में डाली गई और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा।

    ‘खतरनाक बढ़त’ से क्षेत्रीय स्थिरता पर खतरा
    संयुक्त बयान में कहा गया कि इस तरह की कार्रवाई कई देशों की संप्रभुता का उल्लंघन है और यह पूरे इलाके की स्थिरता को खतरे में डालती है। सरकारों ने यह भी आरोप लगाया कि ईरान ने उन देशों को भी निशाना बनाया जो सीधे तौर पर किसी सैन्य टकराव में शामिल नहीं थे। इसे गैर-जिम्मेदाराना और उकसावे वाली कार्रवाई करार दिया गया।

    बयान में साफ कहा गया कि आम नागरिकों और तटस्थ देशों को टारगेट करना अस्वीकार्य है। सातों देशों ने इस बात पर जोर दिया कि वे अपनी संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा के लिए एकजुट हैं और आत्मरक्षा के अधिकार को दोहराते हैं।

    एयर डिफेंस सहयोग पर जोर, सुरक्षा रणनीति मजबूत
    क्षेत्र में बढ़ते मिसाइल और ड्रोन खतरों के बीच संयुक्त बयान में एयर और मिसाइल डिफेंस सहयोग की सराहना की गई। देशों ने कहा कि समन्वित प्रयासों के कारण बड़े पैमाने पर जान-माल के नुकसान को रोका जा सका। अमेरिका की खाड़ी क्षेत्र में सैन्य मौजूदगी और बहरीन, कतर, कुवैत, सऊदी अरब व यूएई के साथ उसकी रक्षा साझेदारी लंबे समय से क्षेत्रीय सुरक्षा रणनीति का हिस्सा रही है।

    पश्चिमी और खाड़ी देशों का मानना है कि हाल के वर्षों में ईरान ने अपनी बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं में उल्लेखनीय विस्तार किया है, जिससे क्षेत्रीय शक्ति संतुलन प्रभावित हुआ है। हालांकि तेहरान लगातार यह दावा करता रहा है कि उसका मिसाइल कार्यक्रम पूरी तरह रक्षात्मक है। मौजूदा घटनाक्रम ने मिडिल ईस्ट में तनाव को और बढ़ा दिया है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि कूटनीतिक प्रयास इस टकराव को कितना थाम पाते हैं या हालात और गंभीर मोड़ लेते हैं।

  • युद्ध की आशंका के बीच अमेरिका-इजरायल का ईरान पर बड़ा हमला, तनाव चरम पर!

    युद्ध की आशंका के बीच अमेरिका-इजरायल का ईरान पर बड़ा हमला, तनाव चरम पर!



    नई दिल्ली। अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी 2026 को एक संयुक्त सैन्य हमला शुरू किया, जिसे कोड‑नेम “Operation Epic Fury / Lion’s Roar” कहा जा रहा है। इस बड़े ऑपरेशन में दोनों देशों ने ईरान के कई शहरों और सैन्य‑रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया, जिसमें तेहरान, इस्फ़हान, नतांज़ और फ़ोर्डो सहित कई प्रमुख लक्ष्य शामिल थे।

    अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरानी जनता से अपील की कि वे “अपने भाग्य की बागडोर अपने हाथ में लें” और **1979 से शासन कर रहे इस्लामी नेतृत्व के खिलाफ विद्रोह करें।” इस हमले को उन्होंने “आगामी खतरों को ख़त्म करने” और ईरान की सैन्य क्षमता को क्षतिग्रस्थ बनाने का लक्ष्य बताया।

    हमले की मौजूदा स्थिति
    संयुक्त हमले में 200 से अधिक लक्ष्य पर हमला किया गया, और ईरानी सुरक्षा नेतृत्व के कई वरिष्ठ अधिकारी मारे गए या प्रभावित हुए हैं।

    ईरान की ओर से जवाबी मिसाइलें दागी गईं, जिसमें मिसाइल और ड्रोन हमले शामिल हैं और कई देशों में (जैसे अरब अमीरात, कुवैत, बहरैन और कतर) सुरक्षा व्यवस्था सक्रिय कर दी गई है।

    ईरानी नागरिकों में भय और पैनिक फैल चुका है; लोगों ने राजधानी से बाहर भागने और पेट्रोल आदि सामान जमा करने जैसे हालात देखे जा रहे हैं।
    नागरिक असर और क्षेत्रीय तनाव

    बड़े पैमाने पर विस्फोटों और हमलों के कारण ईरान में भारी जनहानि और जन‑जीवन प्रभावित हुआ है, और कई देशों ने अपने नागरिकों को सावधानी बरतने की चेतावनी जारी की है। इस तनाव के चलते कई देशों का एयरस्पेस भी अस्थायी रूप से बंद हुआ है और यात्रियों की उड़ानों में व्यवधान आया है।
    ये हमला एक मध्य पूर्व में सबसे बड़े सैन्य संघर्षों में से एक माना जा रहा है, जो पहले की 12‑दिन की जंग के बाद क्षेत्रीय अस्थिरता को और बढ़ा रहा है।

  • खामेनेई के निधन के बाद ईरान में सत्ता संकट, सेना में भ्रम; नए सुप्रीम लीडर की जल्द नियुक्ति की मांग तेज

    खामेनेई के निधन के बाद ईरान में सत्ता संकट, सेना में भ्रम; नए सुप्रीम लीडर की जल्द नियुक्ति की मांग तेज

    नई दिल्ली । ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के निधन की पुष्टि के बाद देश की सत्ता और सैन्य ढांचे में गहरा संकट उभर आया है। ईरानी मीडिया में आई खबरों के अनुसार खामेनेई के 47 साल लंबे प्रभावशाली नेतृत्व का अंत होते ही इस्लामिक गणतंत्र की चेन ऑफ कमांड में अस्थिरता और भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है। अब सत्ता के शीर्ष पद पर नए नेतृत्व की नियुक्ति को लेकर अंदरूनी हलचल तेज हो गई है।

    रिपोर्टों के मुताबिक इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स ने नए सुप्रीम लीडर के चयन की प्रक्रिया को तेज करने के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया है। सूत्रों का दावा है कि IRGC कानूनी प्रक्रिया से हटकर जल्द से जल्द नए नेता को तख्त पर बैठाने के पक्ष में है। सामान्यतः सुप्रीम लीडर का चुनाव संवैधानिक संस्था असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स द्वारा किया जाता है लेकिन जारी हवाई हमलों और अस्थिर सुरक्षा हालात के कारण उसका सत्र बुलाना मुश्किल बताया जा रहा है।

    बताया जा रहा है कि IRGC का बचा हुआ कमांड ढांचा 1 मार्च की सुबह तक नए नेतृत्व पर अंतिम निर्णय चाहता है। सूत्रों का कहना है कि खामेनेई की मौत के बाद सुरक्षा और सैन्य तंत्र में तालमेल की कमी साफ दिख रही है। आदेशों के प्रवाह में बाधा आ रही है और कुछ हिस्सों में कमांड संरचना लगभग बिखर गई है। इससे संकट प्रबंधन और जमीनी स्तर पर फैसले लेने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।

    रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया है कि कुछ सैन्य कमांडर और निचले रैंक के कर्मी अपने बेस पर रिपोर्ट नहीं कर रहे हैं। इस स्थिति ने IRGC की चिंता और बढ़ा दी है। आशंका जताई जा रही है कि रविवार सुबह तक देश के अलग-अलग हिस्सों में लोग सड़कों पर उतर सकते हैं और विरोध प्रदर्शनों का नया दौर शुरू हो सकता है। राजनीतिक अनिश्चितता और संभावित जन असंतोष ने हालात को और जटिल बना दिया है।

    इस पूरे घटनाक्रम के बीच अमेरिका की प्रतिक्रिया भी सामने आई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि ईरान पर हालिया हमले विफल कूटनीतिक प्रयासों का परिणाम थे। अधिकारी के अनुसार अमेरिका ने ईरान को स्थायी रूप से मुफ्त परमाणु ईंधन देने की पेशकश की थी लेकिन तेहरान ने यूरेनियम संवर्धन की अपनी क्षमता छोड़ने से इनकार कर दिया। अमेरिका इसे परमाणु हथियार विकसित करने की संभावित कोशिश के रूप में देखता रहा है। साथ ही ईरान ने बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय उग्रवादी समूहों के समर्थन जैसे मुद्दों पर भी बातचीत से दूरी बनाए रखी।

    खामेनेई की मौत ऐसे समय में हुई है जब ईरान पहले से ही बाहरी सैन्य दबाव और आंतरिक असंतोष का सामना कर रहा है। नेतृत्व का यह खालीपन न केवल राजनीतिक बल्कि सैन्य और वैचारिक स्तर पर भी बड़ा बदलाव ला सकता है। अब नजर इस बात पर टिकी है कि क्या ईरान संवैधानिक प्रक्रिया के तहत नया सुप्रीम लीडर चुनेगा या IRGC के दबाव में कोई त्वरित और असाधारण फैसला लिया जाएगा।