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  • प्रधानमंत्री मोदी और लिकटेंस्टाइन के प्रिंस एलोइस की मुलाकात, भारत-यूरोप व्यापारिक सहयोग पर बढ़ा जोर

    प्रधानमंत्री मोदी और लिकटेंस्टाइन के प्रिंस एलोइस की मुलाकात, भारत-यूरोप व्यापारिक सहयोग पर बढ़ा जोर


    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को नई दिल्ली स्थित हैदराबाद हाउस में लिकटेंस्टाइन के हेरिडिटरी प्रिंस एलोइस और उनकी पत्नी हेरिडिटरी प्रिंसेस सोफी से मुलाकात की। इस दौरान भारत और लिकटेंस्टाइन के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने और सहयोग के नए अवसरों पर चर्चा हुई। प्रिंस एलोइस भारत की राजकीय यात्रा पर आए हैं। इस यात्रा को दोनों देशों के संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    मुलाकात के दौरान दोनों पक्षों ने आपसी साझेदारी को आगे बढ़ाने से जुड़े विषयों पर विचार-विमर्श किया। भारत और यूरोपीय देशों के बीच व्यापारिक सहयोग बढ़ाने के प्रयासों के बीच यह बैठक हुई है। खास तौर पर भारत और यूरोपीय मुक्त व्यापार संघ (ईएफटीए) के बीच हुए व्यापार एवं आर्थिक भागीदारी समझौते से मिलने वाले अवसरों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

    इससे पहले विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी प्रिंस एलोइस से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने भारत और लिकटेंस्टाइन के संबंधों के साथ-साथ ईएफटीए के साथ व्यापार एवं आर्थिक भागीदारी समझौते के तहत उभरने वाले अवसरों पर चर्चा की। जयशंकर ने कहा कि इस समझौते से मिलने वाले अवसरों के कारण दोनों देशों की साझेदारी विभिन्न क्षेत्रों में आगे बढ़ रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रधानमंत्री मोदी के साथ प्रिंस की बैठक से आपसी सहयोग को और गति मिलेगी।

    प्रिंस एलोइस का राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में औपचारिक स्वागत भी किया गया। इस अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मौजूद रहे। स्वागत समारोह के बाद प्रिंस ने भारत की अपनी पहली राजकीय यात्रा को सम्मान की बात बताया। उन्होंने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के स्वागत के लिए आभार जताया।

    प्रिंस एलोइस ने कहा कि भारत जैसे देश की पहली राजकीय यात्रा उनके लिए विशेष महत्व रखती है। उन्होंने इस यात्रा को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह भारत के साथ अपने संबंधों को लिकटेंस्टाइन की ओर से दिए जाने वाले महत्व को दर्शाती है। उनके इस बयान से दोनों देशों के बीच संबंधों को आगे बढ़ाने की इच्छा स्पष्ट हुई।

    प्रिंस की यात्रा के कार्यक्रम में भारत सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों के साथ बैठकें भी शामिल हैं। मंगलवार को उनकी वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री जयंत चौधरी से मुलाकात प्रस्तावित है। इन बैठकों में आर्थिक संबंधों और सहयोग के संभावित क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।

    इसके बाद प्रिंस एलोइस राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात करेंगे। उनके सम्मान में आधिकारिक भोज का आयोजन भी किया गया है। यह कार्यक्रम भारत और लिकटेंस्टाइन के बीच राजनयिक संपर्कों को आगे बढ़ाने के व्यापक कार्यक्रम का हिस्सा है।

    प्रिंस एलोइस सोमवार को गुजरात के वडोदरा से नई दिल्ली पहुंचे थे। हवाई अड्डे पर केंद्रीय राज्य मंत्री जयंत सिंह ने उनका स्वागत किया था। इसके बाद उनकी राजकीय यात्रा से जुड़े औपचारिक कार्यक्रम शुरू हुए।

    भारत और लिकटेंस्टाइन के बीच संपर्कों को मजबूत करने की यह पहल ऐसे समय में हो रही है, जब ईएफटीए समझौते के माध्यम से व्यापार और आर्थिक साझेदारी के विस्तार पर जोर दिया जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी, विदेश मंत्री जयशंकर और अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ प्रिंस की बैठकों से दोनों देशों के बीच सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों को आगे बढ़ाने का अवसर मिला है।

  • खड़गे की टिप्पणी पर एनडीए नेताओं का विरोध, प्रधानमंत्री मोदी के दिवंगत पिता पर बयान को लेकर माफी की मांग तेज

    खड़गे की टिप्पणी पर एनडीए नेताओं का विरोध, प्रधानमंत्री मोदी के दिवंगत पिता पर बयान को लेकर माफी की मांग तेज


    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ की गई टिप्पणी को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले समेत एनडीए के कई नेताओं ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है। इन नेताओं ने टिप्पणी को अनुचित बताते हुए खड़गे से माफी मांगने की मांग की है। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री और उनके परिवार से जुड़े विषयों पर इस तरह की भाषा का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।

    केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने नागपुर में बातचीत के दौरान कहा कि मल्लिकार्जुन खड़गे एक ऐसी राजनीतिक पार्टी के अध्यक्ष हैं, जो लगभग 60 से 70 वर्षों तक सत्ता में रही है। ऐसे में पार्टी के प्रमुख का प्रधानमंत्री का अपमान करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि इस तरह की टिप्पणियां करना गलत है और इसे स्वीकार नहीं किया जाएगा।

    आठवले ने कहा कि प्रधानमंत्री के खिलाफ इस तरह की भाषा का इस्तेमाल उनके पद के प्रति सम्मान से जुड़ा विषय है। उन्होंने खड़गे की टिप्पणी पर नाराजगी जताते हुए कहा कि इस तरह के बयान से प्रधानमंत्री का अपमान हुआ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि एनडीए नेता ऐसी टिप्पणियों को सहन नहीं करेंगे।

    उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने भी इस मामले में कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि खड़गे और राहुल गांधी सहित कांग्रेस के नेताओं की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के माता-पिता को लेकर समय-समय पर की गई टिप्पणियां भारतीय संस्कृति और मूल्यों के अनुरूप नहीं हैं। पाठक ने कहा कि देश की जनता इस तरह के बयानों को स्वीकार नहीं करेगी और संबंधित नेताओं को माफी मांगनी चाहिए।

    पाठक ने आरोप लगाया कि विपक्षी दल सत्ता से बाहर रहने के कारण निराश हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेताओं के बयानों का असर चुनावों में भी दिखाई दे सकता है। उनके मुताबिक, भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के खिलाफ आचरण करने वाले नेताओं को जनता चुनाव के दौरान जवाब देती है।

    मध्य प्रदेश सरकार में मंत्री विश्वास सारंग ने भी खड़गे की टिप्पणी पर नाराजगी जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिवंगत माता-पिता को लेकर लगातार अनुचित टिप्पणियां कर रहे हैं और उनकी छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। सारंग ने कहा कि लोकतंत्र में इस तरह की भाषा के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए।

    सारंग ने कहा कि भारतीय परंपराओं में दिवंगत व्यक्तियों के बारे में अपमानजनक टिप्पणी करना उचित नहीं माना जाता। उन्होंने राहुल गांधी और सोनिया गांधी का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस के नेता पहले भी इस तरह के बयान देते रहे हैं। सारंग के अनुसार, यदि कोई बात अनजाने में एक बार कही जाती है, तो उसे अलग तरह से देखा जा सकता है, लेकिन उन्होंने दावा किया कि खड़गे ने तीन बार ऐसी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जनता इस मामले पर अपना जवाब देगी।

    महाराष्ट्र भाजपा विधायक राम कदम ने भी खड़गे से माफी की मांग की। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या किसी नेता के दिवंगत माता-पिता को राजनीतिक विवाद का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। कदम ने कहा कि खड़गे को अपने बयान के लिए हाथ जोड़कर माफी मांगनी चाहिए।

    राम कदम ने यह भी पूछा कि यदि किसी नेता के अपने पिता के बारे में इसी तरह की अभद्र टिप्पणी की जाए, तो उसे कैसा महसूस होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस के पास राजनीतिक मुद्दों की कमी है और इसी कारण इस तरह की भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि टिप्पणी से प्रधानमंत्री के साथ देश के लोगों की भावनाएं भी आहत हुई हैं।

    भाजपा विधायक पलटू राम ने भी खड़गे की टिप्पणी को निंदनीय बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी नेताओं के बीच प्रधानमंत्री मोदी और एनडीए नेताओं के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल को लेकर प्रतिस्पर्धा चल रही है। उन्होंने खड़गे और राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि राजनीतिक मतभेदों के बावजूद सार्वजनिक संवाद में मर्यादा बनाए रखना जरूरी है।

  • वाराणसी के नमो घाट पर पीएम मोदी ने देखा वायुसेना का शौर्य, राफेल-सुखोई समेत 100 विमानों के प्रदर्शन ने खींचा ध्यान

    वाराणसी के नमो घाट पर पीएम मोदी ने देखा वायुसेना का शौर्य, राफेल-सुखोई समेत 100 विमानों के प्रदर्शन ने खींचा ध्यान

    नई दिल्ली । उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित नमो घाट पर रविवार को भारतीय वायुसेना के ‘विंग्स ओवर गंगा’ एयर शो का आयोजन किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कार्यक्रम में शामिल होकर आसमान में लड़ाकू विमानों की कलाबाजी और वायुसेना की हवाई क्षमताओं का प्रदर्शन देखा। इस दौरान रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहे। भारतीय वायुसेना की 94वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम को देखने के लिए गंगा घाटों पर बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।

    एयर शो के दौरान विमानों की उड़ान, उनके बीच समन्वय और हवाई करतब दर्शकों के आकर्षण का केंद्र रहे। कार्यक्रम में राफेल और सुखोई जैसे लड़ाकू विमानों सहित कुल 100 विमानों के शामिल होने की जानकारी दी गई। इनमें 52 लड़ाकू विमान बताए गए। गंगा के ऊपर विमानों की गतिविधियों को देखने के लिए सुबह से ही नमो घाट और आसपास के घाटों पर लोगों की भीड़ जुटने लगी थी।

    प्रधानमंत्री मोदी कार्यक्रम के दौरान सफेद टोपी और चश्मा पहने नजर आए। उनके साथ मंच पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी उपस्थित थे। वायुसेना प्रमुख ने प्रधानमंत्री का स्वागत करते हुए उन्हें एक पेंटिंग भेंट की। आयोजन के जरिए भारतीय वायुसेना की परिचालन क्षमता और हवाई प्रदर्शन से जुड़ी दक्षता को प्रदर्शित किया गया।

    एयर शो से पहले प्रधानमंत्री ने वाराणसी के रूपापुर में अरविंद टेक्सटाइल मिल की नई इकाई का उद्घाटन किया। इस परियोजना की लागत करीब 100 करोड़ रुपये बताई गई है। उद्घाटन के दौरान उन्होंने वहां काम करने वाली महिला कर्मचारियों से भी बातचीत की। इस इकाई को क्षेत्र में विनिर्माण गतिविधियों और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देने से जोड़कर देखा जा रहा है।

    टेक्सटाइल इकाई के उद्घाटन के बाद प्रधानमंत्री पुलिस लाइन से नमो घाट तक रोड शो करते हुए पहुंचे। इस मार्ग की दूरी करीब सात किलोमीटर बताई गई। रास्ते में प्रधानमंत्री की एक झलक पाने के लिए बड़ी संख्या में लोग जमा हुए। उनके स्वागत में ढोल-नगाड़े बजाए गए और भजन गाए गए। इस दौरान समर्थकों ने प्रधानमंत्री के काफिले पर फूल भी बरसाए।

    ‘विंग्स ओवर गंगा’ का आयोजन भारतीय वायुसेना की 94वीं वर्षगांठ के अवसर पर किया गया। कार्यक्रम में लड़ाकू विमानों के प्रदर्शन के साथ वायुसेना की हवाई संचालन क्षमता को आम लोगों के सामने प्रस्तुत किया गया। राफेल और सुखोई जैसे विमानों की भागीदारी ने आयोजन को विशेष आकर्षण दिया। गंगा के किनारे से आसमान में विमानों की गतिविधियां देखने के लिए स्थानीय निवासियों के अलावा अन्य दर्शक भी पहुंचे।

    वाराणसी में आयोजित इस एयर शो में प्रधानमंत्री की मौजूदगी के साथ औद्योगिक परियोजना का उद्घाटन भी दौरे का हिस्सा रहा। एक ओर टेक्सटाइल इकाई के माध्यम से विनिर्माण और रोजगार से जुड़ी पहल सामने आई, वहीं दूसरी ओर एयर शो ने भारतीय वायुसेना की क्षमताओं को प्रदर्शित किया। नमो घाट पर आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति ने इसे वाराणसी के प्रमुख आयोजनों में शामिल कर दिया।

  • पीएम मोदी का यूपी और ओडिशा दौरा कल, वाराणसी में एयर डिस्प्ले और भुवनेश्वर में RBI की नई सुविधाओं का उद्घाटन

    पीएम मोदी का यूपी और ओडिशा दौरा कल, वाराणसी में एयर डिस्प्ले और भुवनेश्वर में RBI की नई सुविधाओं का उद्घाटन


    नई दिल्ली ।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 25 अक्टूबर 2026 को उत्तर प्रदेश और ओडिशा के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वाराणसी में औद्योगिक विकास से जुड़ी नई गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का उद्घाटन किया जाएगा। इसके बाद प्रधानमंत्री भारतीय वायुसेना के ‘विंग्स ओवर गंगा’ एयर डिस्प्ले में शामिल होंगे। दौरे के अगले चरण में वह ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर पहुंचेंगे, जहां भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नए डेटा सेंटर और साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान का उद्घाटन करेंगे।

    प्रधानमंत्री का कार्यक्रम उद्योग, रोजगार, महिला भागीदारी, रक्षा क्षमताओं और डिजिटल वित्तीय बुनियादी ढांचे से जुड़ी पहलों पर केंद्रित रहेगा। दोनों राज्यों में प्रस्तावित कार्यक्रमों के जरिए विनिर्माण क्षेत्र और वित्तीय तकनीक से संबंधित सुविधाओं को आगे बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।

    वाराणसी में प्रधानमंत्री सुबह करीब 11 बजे अरविंद लिमिटेड की नई गारमेंट मैन्युफैक्चरिंग यूनिट का उद्घाटन करेंगे। आधुनिक विनिर्माण प्रक्रियाओं पर आधारित इस इकाई से क्षेत्र में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। परियोजना में महिलाओं की भागीदारी पर विशेष ध्यान दिया गया है, जिससे महिला-नेतृत्व वाले विकास को प्रोत्साहन मिलने की संभावना है।

    इस इकाई में तैयार होने वाले परिधानों को कंपनी के वैश्विक ग्राहक नेटवर्क के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाया जाएगा। इससे वाराणसी और आसपास के क्षेत्रों में विनिर्माण गतिविधियों के विस्तार की संभावनाएं बन सकती हैं। परियोजना को उत्तर प्रदेश में औद्योगिक निवेश बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर विकसित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    वाराणसी में प्रधानमंत्री दोपहर करीब एक बजे नमो घाट पर भारतीय वायुसेना के एयर डिस्प्ले-2026 में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। ‘विंग्स ओवर गंगा’ थीम पर आयोजित इस कार्यक्रम में वायुसेना की 94वीं वर्षगांठ के अवसर पर उसकी परिचालन क्षमता और हवाई कौशल प्रदर्शित किया जाएगा।

    एयर डिस्प्ले में तेजस, एलसीएच प्रचंड, सुखोई-30 एमकेआई और राफेल जैसे लड़ाकू विमान हिस्सा लेंगे। इनके साथ परिवहन विमानों की भी भागीदारी होगी। भारतीय थलसेना और नौसेना की मौजूदगी के माध्यम से तीनों सेनाओं के बीच समन्वय और संयुक्त संचालन क्षमता को भी प्रदर्शित किया जाएगा।

    कार्यक्रम में वायुसेना की सूर्य किरण एरोबैटिक टीम और सारंग हेलीकॉप्टर डिस्प्ले टीम हवाई करतब दिखाएंगी। इन प्रदर्शनों में विमानों और हेलीकॉप्टरों के बीच सटीक तालमेल, नियंत्रित उड़ान और संचालन संबंधी दक्षता देखने को मिलेगी।

    वाराणसी के कार्यक्रमों के बाद प्रधानमंत्री ओडिशा रवाना होंगे। शाम करीब 4:45 बजे भुवनेश्वर में वह RBI के नए डेटा सेंटर और साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान का उद्घाटन करेंगे। इस अवसर पर वह जनसभा को भी संबोधित करेंगे।

    RBI का नया डेटा सेंटर देश की वित्तीय प्रणाली के डिजिटल बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें चार अत्याधुनिक डेटा सेंटर होंगे, जहां महत्वपूर्ण भुगतान और निपटान प्रणालियों सहित RBI की प्रमुख डिजिटल सेवाओं से जुड़े सिस्टम संचालित किए जाएंगे। इस सुविधा को अपटाइम इंस्टीट्यूट के टियर-IV मानक का प्रमाणन मिला है, जो डेटा सेंटर की परिचालन मजबूती और विश्वसनीयता से संबंधित उच्च स्तर का मानक है।

    भुवनेश्वर में स्थापित होने वाला साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान वित्तीय क्षेत्र में तकनीकी विशेषज्ञता, शोध और प्रशिक्षण को बढ़ावा देगा। यहां क्वांटम कंप्यूटिंग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और अन्य उन्नत तकनीकों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसका उद्देश्य वित्तीय संस्थानों की साइबर सुरक्षा क्षमता मजबूत करना और नई तकनीकी चुनौतियों से निपटने के लिए विशेषज्ञ तैयार करना है।

  • पीएम मोदी ने राहुल गांधी को बताया ‘फेल्ड प्रोडक्ट’, कांग्रेस पर विदेशों में भारत की छवि खराब करने का लगाया आरोप

    पीएम मोदी ने राहुल गांधी को बताया ‘फेल्ड प्रोडक्ट’, कांग्रेस पर विदेशों में भारत की छवि खराब करने का लगाया आरोप

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधते हुए उन्हें ‘फेल्ड प्रोडक्ट’ करार दिया। अपने संबोधन में उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस अपने नेता को बार-बार राजनीतिक रूप से स्थापित करने की कोशिश करती है, लेकिन इसके लिए देश की प्रतिष्ठा को दांव पर लगाने से भी पीछे नहीं हटती। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई। प्रधानमंत्री ने विपक्ष की भूमिका, संसद की कार्यवाही और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की छवि से जुड़े मुद्दों पर भी अपनी बात रखी।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक कार्यक्रम में कहा कि जब दुनिया नई वैश्विक व्यवस्था की तलाश कर रही है, उस समय कुछ लोग भारत में अव्यवस्था की स्थिति पैदा करने की उम्मीद कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। प्रधानमंत्री के अनुसार, मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में दुनिया के सामने एक मजबूत और स्थिर भारत की तस्वीर प्रस्तुत की जानी चाहिए, लेकिन विपक्ष के कुछ नेता विदेशों में जाकर देश की आलोचना करते हैं और बाहरी हस्तक्षेप की मांग करते हैं।

    राहुल गांधी पर तंज कसते हुए प्रधानमंत्री ने कांग्रेस के नेतृत्व को लेकर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि एक साल में श्रीहरिकोटा से जितने रॉकेट प्रक्षेपित नहीं होते, उससे अधिक बार कांग्रेस अपने नेता को लॉन्च करने की नाकाम कोशिश करती है। उनके इस बयान को राहुल गांधी को बार-बार राजनीतिक रूप से स्थापित करने के प्रयासों पर कटाक्ष के रूप में देखा गया। प्रधानमंत्री ने कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी आखिर कब तक अपने नेता को आगे बढ़ाने के लिए देश को दांव पर लगाती रहेगी।

    प्रधानमंत्री ने कांग्रेस पर संसद की कार्यवाही बाधित करने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि पार्टी को आशंका है कि यदि संसद में दूसरे नेताओं को पर्याप्त अवसर मिला, तो वे भी अपनी पहचान बना सकते हैं। उनके मुताबिक, कांग्रेस अपने राजनीतिक मंच पर केवल एक नेता को प्रमुखता देना चाहती है। उन्होंने इसे विपक्ष के युवा सांसदों के साथ अन्याय बताते हुए कहा कि ऐसे रवैये से पार्टी के भीतर अन्य नेताओं को अपनी क्षमता दिखाने के अवसर सीमित हो सकते हैं।

    अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने कांग्रेस को ‘परजीवी’ भी कहा। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी राजनीतिक सुर्खियों में बने रहने के लिए लगातार अपने नेतृत्व को केंद्र में रखती है। हालांकि, ये टिप्पणियां प्रधानमंत्री की राजनीतिक आलोचना का हिस्सा थीं और इनके जरिए उन्होंने विपक्ष की कार्यशैली पर सवाल उठाए।

    प्रधानमंत्री के बयान के बाद भाजपा के राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने भी राहुल गांधी और कांग्रेस पर हमला बोला। उन्होंने कांग्रेस की तुलना ऐसी मछली से की, जो सत्ता से बाहर रहने पर पानी के बिना तड़पती है। त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि सत्ता में रहने के दौरान कांग्रेस का रवैया लूट-खसोट और समाज में विभाजन को बढ़ावा देने वाला रहा है। उन्होंने पार्टी पर भारतीय धर्म और संस्कृति के प्रति नकारात्मक दृष्टिकोण रखने का आरोप भी लगाया।

    त्रिवेदी ने राहुल गांधी की राजनीतिक भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का राजनीतिक रिकॉर्ड उपलब्धियों से जुड़ा है, जबकि राहुल गांधी का रिकॉर्ड कांग्रेस के लिए समस्याएं पैदा करने वाला रहा है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस ने अपने राजनीतिक भविष्य के साथ-साथ देश के संवैधानिक ढांचे को भी जोखिम में डाल दिया है। उन्होंने राहुल गांधी को देश और उनकी अपनी पार्टी, दोनों के लिए पहेली बताया।

    प्रधानमंत्री मोदी और सुधांशु त्रिवेदी की टिप्पणियों से कांग्रेस और भाजपा के बीच राजनीतिक टकराव एक बार फिर चर्चा में आ गया है। राहुल गांधी पर प्रधानमंत्री का ‘फेल्ड प्रोडक्ट’ वाला तंज और विदेशों में भारत की छवि को लेकर लगाए गए आरोप इस राजनीतिक बहस के प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं। हालांकि, इन बयानों के जवाब में कांग्रेस की प्रतिक्रिया इस खबर में उपलब्ध जानकारी में शामिल नहीं है।

  • भारत मंडपम में पीएम मोदी ने किया चिन्मय अमृत महोत्सव सम्मेलन का उद्घाटन, युवा शक्ति को बताया मजबूत भारत की आधारशिला

    भारत मंडपम में पीएम मोदी ने किया चिन्मय अमृत महोत्सव सम्मेलन का उद्घाटन, युवा शक्ति को बताया मजबूत भारत की आधारशिला

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के भारत मंडपम में चिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने युवा शक्ति को मजबूत और सक्षम भारत के निर्माण का आधार बताया। प्रधानमंत्री ने स्वामी चिन्मयानंद के साथ अपनी मुलाकात और उनसे मिले आशीर्वाद को याद करते हुए कहा कि युवाओं की क्षमता का विकास देश के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है। इस वैश्विक सम्मेलन में भारत और विदेशों से 9,000 से अधिक प्रतिभागियों के शामिल होने की जानकारी दी गई है।

    कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने आधुनिक तकनीक के माध्यम से स्वामी चिन्मयानंद के होलोग्राम को देखने और उनसे बातचीत का अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि यह उनके लिए भावुक क्षण था, जिसने उन्हें वर्ष 1993 में वडोदरा में हुई मुलाकात की याद दिला दी। उस समय स्वामी चिन्मयानंद के साथ हुई बातचीत, उनका स्नेह और आशीर्वाद आज भी उनके स्मरण में हैं। प्रधानमंत्री ने इस अनुभव को संभव बनाने के लिए चिन्मय मिशन के सदस्यों के प्रति आभार भी व्यक्त किया।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वामी चिन्मयानंद के साथ उनकी बातचीत में युवा शक्ति के विकास और उसके माध्यम से मजबूत भारत के निर्माण का विषय प्रमुख रहा था। उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन की यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभालने से लेकर सरकार के मुखिया के तौर पर काम करने तक गुरुदेव का आशीर्वाद उनके साथ रहा है। उनके संबोधन में युवाओं को देश की प्रगति और राष्ट्र निर्माण से जोड़ने पर विशेष जोर दिखाई दिया।

    मोदी ने कहा कि युवाओं को सक्षम बनाने, उनकी प्रतिभा को निखारने और उन्हें आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराने से भारत मजबूत बन सकता है। युवाओं की ऊर्जा और क्षमता का सही उपयोग देश को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने में मदद कर सकता है। उन्होंने अपने संबोधन में युवाओं को राष्ट्र निर्माण में भागीदारी के लिए प्रेरित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी नीतियों के केंद्र में देश के युवा हैं।

    प्रधानमंत्री ने भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का उल्लेख करते हुए आजादी के 75 वर्ष पूरे होने के अवसर को भी याद किया। उन्होंने कहा कि यह पड़ाव केवल विकसित भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने का अवसर नहीं था, बल्कि भारत की उस ज्ञान परंपरा को दुनिया के सामने रखने का भी मौका था, जो प्राचीन विचारों और अनुभवों के माध्यम से संपूर्ण मानवता के कल्याण की बात करती है।

    उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि देश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत आने वाली पीढ़ियों को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। भारत के प्राचीन विचारों और अनुभवों को वर्तमान समय के संदर्भ में समझना तथा उन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाना भी इस विरासत को आगे बढ़ाने का हिस्सा है।

    चिन्मय अमृत महोत्सव वैश्विक सम्मेलन 23 से 25 अक्टूबर 2026 तक भारत मंडपम में आयोजित किया जा रहा है। यह चिन्मय मिशन की स्थापना के 75 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में साल भर आयोजित कार्यक्रमों का समापन है। चिन्मय मिशन की स्थापना स्वामी चिन्मयानंद ने वर्ष 1951 में की थी। मिशन का प्रमुख उद्देश्य वेदांत और भगवद गीता के ज्ञान को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना है।

    समय के साथ चिन्मय मिशन ने आध्यात्मिक शिक्षा, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, युवा सशक्तिकरण और सामुदायिक सेवा जैसे क्षेत्रों में भी काम किया है। सम्मेलन के माध्यम से आध्यात्मिक विचारों, भारतीय ज्ञान परंपरा और समकालीन समाज में उनके महत्व पर चर्चा की जा रही है। प्रधानमंत्री का संबोधन भी युवा शक्ति, सांस्कृतिक मूल्यों और विकसित भारत के लक्ष्य के बीच संबंध को रेखांकित करने पर केंद्रित रहा।

  • भारत-पोलैंड के रिश्तों में नहीं हितों का टकराव, भरोसे और साझा मूल्यों से मजबूत होगी रणनीतिक साझेदारी: डोनाल्ड टस्क

    भारत-पोलैंड के रिश्तों में नहीं हितों का टकराव, भरोसे और साझा मूल्यों से मजबूत होगी रणनीतिक साझेदारी: डोनाल्ड टस्क


    नई दिल्ली ।
    भारत और पोलैंड के बीच संबंधों को मजबूत करने के लिए भरोसे, साझा मूल्यों और आपसी सहयोग को महत्वपूर्ण आधार बताते हुए पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने कहा कि दोनों देशों के हितों में कोई टकराव नहीं है। गुरुवार, 22 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक के बाद संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने भारत-पोलैंड मित्रता को स्वाभाविक और मजबूत साझेदारी बताया। टस्क ने कहा कि दोनों देशों के बीच भौगोलिक दूरी के अलावा ऐसा कोई बड़ा अंतर नहीं है, जो उनके संबंधों को आगे बढ़ाने में बाधा बने।

    डोनाल्ड टस्क ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ हुई बातचीत को सार्थक और महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं ने रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने, अब तक हुई प्रगति की समीक्षा करने और आने वाले वर्षों में सहयोग की प्राथमिकताएं तय करने पर चर्चा की। भारत और पोलैंड के बीच रणनीतिक साझेदारी स्थापित करने का निर्णय अगस्त 2024 में प्रधानमंत्री मोदी की वारसॉ यात्रा के दौरान लिया गया था। टस्क के अनुसार, मौजूदा बातचीत में इस साझेदारी के शुरुआती परिणामों का आकलन किया गया और भविष्य के सहयोग की दिशा पर जोर दिया गया।

    पोलैंड के प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों देशों के संबंध केवल साझा हितों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि भरोसे और समान विचारों पर भी आधारित हैं। उन्होंने विशेष रूप से अहिंसा के विचार का उल्लेख किया। टस्क ने बताया कि पोलैंड की ऐतिहासिक सॉलिडेरिटी क्रांति अहिंसा पर आधारित थी और भारत की परंपराओं तथा इतिहास ने उनके देश को प्रेरित किया है। उनके मुताबिक, दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक विभाजन पैदा करने वाले मुद्दों का अभाव भी आपसी संबंधों को सहज बनाने में मदद करता है।

    टस्क ने वैश्विक स्तर पर भारत की भूमिका की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना मित्र कहने पर गर्व जताया। उन्होंने कहा कि मौजूदा दौर में दुनिया अस्थिरता, अनिश्चितता और राजनीतिक उथल-पुथल का सामना कर रही है। ऐसे समय में भारत की भूमिका उम्मीद की किरण जैसी है। उन्होंने भारत को एक शक्तिशाली देश बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में वैश्विक मामलों में भारत की भूमिका को पोलैंड सम्मान और सराहना की दृष्टि से देखता है।

    दोनों देशों की आर्थिक प्रगति का जिक्र करते हुए पोलिश प्रधानमंत्री ने पिछले 35 वर्षों को तेज विकास और आर्थिक सफलता का महत्वपूर्ण दौर बताया। उन्होंने कहा कि भारत और पोलैंड की विकास यात्रा को दुनिया ध्यान से देखती है। टस्क ने जी20 के मंच पर भी दोनों देशों के बीच करीबी सहयोग की उम्मीद जताई। उन्होंने कहा कि भारत और पोलैंड इन अंतरराष्ट्रीय बैठकों में एक-दूसरे का समर्थन कर सकते हैं, जिससे दोनों देशों के साथ-साथ व्यापक वैश्विक समुदाय को भी लाभ होगा।

    अपने संबोधन में टस्क ने यूक्रेन संघर्ष के दौरान भारतीय छात्रों की सहायता का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि रूस के हमले के बाद यूक्रेन में फंसे भारतीय छात्रों की देखभाल में पोलैंड की भूमिका दोनों देशों के बीच एकजुटता और दोस्ती का व्यावहारिक उदाहरण है। उन्होंने इस सहयोग को गर्व का विषय बताते हुए कहा कि ऐसी मदद के लिए समर्पण और मानवीय संवेदनशीलता जरूरी थी।

    टस्क ने ‘गुड महाराजा’ का भी उल्लेख किया, जो पोलैंड की सामूहिक स्मृति में सम्मान के साथ याद किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि यह संबंध केवल प्रतीकों तक सीमित नहीं है, बल्कि वास्तविक सहायता और ऐतिहासिक अनुभवों से भी जुड़ा है। अपने संबोधन के अंत में उन्होंने भरोसा जताया कि भारत और पोलैंड भविष्य में भी एक-दूसरे का साथ देंगे और अपनी रणनीतिक साझेदारी को लगातार मजबूत करेंगे।

  • यूपी चुनाव 2027 के लिए बीजेपी की तैयारी तेज, पीएम मोदी की संभावित 12 रैलियों और 133 सीटों पर खास नजर

    यूपी चुनाव 2027 के लिए बीजेपी की तैयारी तेज, पीएम मोदी की संभावित 12 रैलियों और 133 सीटों पर खास नजर

    नई दिल्ली ।उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी ने अपनी चुनावी तैयारियों को गति देने की रणनीति बनाई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संभावित प्रदेश दौरों, विकास परियोजनाओं के उद्घाटन और शिलान्यास तथा संगठन को बूथ स्तर पर मजबूत करने की योजना पर काम किया जा रहा है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, नवंबर 2026 के मध्य से प्रधानमंत्री के उत्तर प्रदेश दौरे शुरू हो सकते हैं। चुनाव की घोषणा से पहले करीब 12 कार्यक्रमों और रैलियों के जरिए जनता तक सरकार के कामकाज और विकास योजनाओं को पहुंचाने की तैयारी है।

    प्रधानमंत्री के संभावित कार्यक्रमों की रूपरेखा प्रदेश की 18 कमिश्नरियों को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है। पार्टी की योजना केंद्र सरकार और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली राज्य सरकार की उपलब्धियों को सामने रखने की है। इसके लिए विकास योजनाओं, परिवहन सुविधाओं, धार्मिक पर्यटन और निवेश से जुड़ी परियोजनाओं को प्रमुखता दिए जाने की संभावना है। हालांकि, रैलियों और दौरों का अंतिम कार्यक्रम अभी आधिकारिक रूप से घोषित नहीं हुआ है।

    विकास परियोजनाओं को चुनावी तैयारी का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जा रहा है। संभावित कार्यक्रमों में वाराणसी अर्बन रोपवे, कानपुर मेट्रो के अगले चरण और आगरा मेट्रो के नए भूमिगत स्टेशनों का उद्घाटन शामिल हो सकता है। लखनऊ मेट्रो के ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर के शिलान्यास की संभावना भी जताई गई है। इन परियोजनाओं के जरिए शहरी परिवहन और कनेक्टिविटी से जुड़े कामों को जनता के सामने रखने की योजना है।

    इसके अलावा अयोध्या में राम मंदिर परिसर की चारदीवारी और संग्रहालय, जेवर में एचसीएल-फॉक्सकॉन की सेमीकंडक्टर इकाई, चित्रकूट लिंक एक्सप्रेसवे और वाराणसी के गंजारी में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम से जुड़े कार्यक्रमों पर भी विचार किया जा रहा है। नोएडा में एक्वा लाइन मेट्रो के सेक्टर-142 से बॉटनिकल गार्डन तक विस्तार, जेवर एयरपोर्ट के कार्गो हब और वृंदावन के बांके बिहारी कॉरिडोर से संबंधित परियोजनाएं भी संभावित एजेंडे में शामिल बताई गई हैं।

    संगठन के स्तर पर बीजेपी की नजर 133 विधानसभा सीटों पर है। वाराणसी में प्रस्तावित बैठक में काशी और गोरक्ष प्रांत की इन सीटों को लेकर रणनीति पर चर्चा हो सकती है। बूथ कार्यकर्ताओं से संपर्क, विभिन्न सामाजिक समूहों के साथ बैठकें और सरकार के कामकाज की जानकारी लोगों तक पहुंचाने पर जोर देने की योजना है।

    पार्टी करीब 12 हजार विस्तारकों की तैनाती की तैयारी भी कर रही है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत प्रत्येक 15 बूथ पर एक विस्तारक लगाने पर विचार किया जा रहा है। इसके साथ लगभग 80 हजार संगठनात्मक बैठकें आयोजित करने की योजना बताई गई है। कमजोर बूथों और उन विधानसभा क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जहां पार्टी को अपनी संगठनात्मक स्थिति मजबूत करने की जरूरत महसूस होती है।

    चुनावी अभियान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत कई वरिष्ठ नेताओं की भूमिका रहने की संभावना है। नितिन गडकरी, स्मृति ईरानी, केशव प्रसाद मौर्य, स्वतंत्र देव सिंह और हेमा मालिनी सहित अन्य नेताओं को भी प्रचार अभियान में शामिल किया जा सकता है। संगठन से जुड़े नितिन नवीन और विनोद तावड़े समेत अन्य नेताओं की जिम्मेदारियां भी महत्वपूर्ण हो सकती हैं।

    दिसंबर 2026 से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के आनुषंगिक संगठनों के संगठन प्रभारियों के उत्तर प्रदेश में प्रवास की संभावना भी जताई गई है। यह अभियान करीब तीन महीने तक चल सकता है। इस दौरान जनसंपर्क, सामाजिक संपर्क और संगठनात्मक समन्वय पर ध्यान दिए जाने की बात कही गई है।इस तरह बीजेपी की तैयारी में प्रधानमंत्री की संभावित रैलियों, विकास परियोजनाओं, वरिष्ठ नेताओं के प्रचार और बूथ स्तर पर संगठन मजबूत करने जैसे कई पहलू शामिल हैं। हालांकि, प्रस्तावित कार्यक्रमों और परियोजनाओं से जुड़े आयोजनों की अंतिम तारीखों तथा विस्तृत कार्यक्रम की आधिकारिक पुष्टि होना बाकी है।

  • मार्को रुबियो के मुंबई दौरे पर राहुल गांधी का पीएम मोदी से सवाल, विदेश मंत्रालय की भूमिका पर उठाए सवाल

    मार्को रुबियो के मुंबई दौरे पर राहुल गांधी का पीएम मोदी से सवाल, विदेश मंत्रालय की भूमिका पर उठाए सवाल

    नई दिल्ली ।अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के प्रस्तावित भारत दौरे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी शुरू हो गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने रुबियो की मुंबई यात्रा को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कटाक्ष किया है। उन्होंने विदेश मंत्रालय के अधिकारियों के बीच कथित भ्रम का मुद्दा उठाते हुए प्रधानमंत्री से स्थिति स्पष्ट करने को कहा। रुबियो इसी महीने भारत आने वाले हैं और उनके मुंबई के साथ गुजरात के जामनगर जाने का भी कार्यक्रम बताया गया है।

    राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर अपनी टिप्पणी में कहा कि रुबियो ने अपने कर्मचारी को मुंबई बुलाया है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को संबोधित करते हुए कहा कि विदेश मंत्रालय के अधिकारी इस बात को लेकर उलझन में हैं कि आखिर क्या हो रहा है। राहुल ने तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री चाहें तो अधिकारियों को स्थिति समझा सकते हैं, या फिर वह स्वयं इस बारे में समझाने के लिए तैयार हैं।

    राहुल गांधी की यह टिप्पणी भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के उस बयान के बाद आई, जिसमें उन्होंने कहा था कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर के भी मुंबई में मार्को रुबियो से मिलने की उम्मीद है। इसी बयान को लेकर कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि भारतीय विदेश मंत्री की संभावित मुलाकात के बारे में आधिकारिक जानकारी विदेश मंत्रालय की ओर से सामने क्यों नहीं आई।

    विपक्ष का सवाल मुख्य रूप से इस बात पर केंद्रित है कि भारत के विदेश मंत्री की देश के भीतर होने वाली बैठक से जुड़ी जानकारी किस माध्यम से सार्वजनिक की जा रही है। राहुल गांधी ने इस मुद्दे को उठाते हुए प्रधानमंत्री से विदेश मंत्रालय में स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह स्पष्ट नहीं है कि रुबियो और जयशंकर की मुलाकात का अंतिम कार्यक्रम क्या होगा।

    कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी इस मामले में प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अमेरिकी राजदूत की ओर से मार्को रुबियो की आगामी मुंबई यात्रा के बारे में अतिरिक्त जानकारी दिया जाना आश्चर्यजनक नहीं है। हालांकि, उन्होंने इस बात को असाधारण बताया कि अमेरिकी राजदूत ने यह भी कहा कि डॉ. एस. जयशंकर के अन्य लोगों के साथ वहां शामिल होने की उम्मीद है।

    जयराम रमेश ने सवाल उठाया कि भारत के विदेश मंत्री की देश के भीतर होने वाली बैठकों की जानकारी विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता के बजाय किसी दूसरे पक्ष की ओर से कब से दी जाने लगी। उनके बयान का केंद्र यह था कि ऐसी महत्वपूर्ण राजनयिक गतिविधियों के बारे में जानकारी देने की जिम्मेदारी भारतीय विदेश मंत्रालय की होनी चाहिए।
    इस विवाद के बीच जयराम रमेश ने ऑपरेशन सिंदूर का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि भारत को 10 मई 2025 की शाम अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के माध्यम से पहली बार जानकारी मिली थी कि ऑपरेशन सिंदूर रोक दिया गया है। इस संदर्भ को उठाते हुए उन्होंने भारत-अमेरिका के बीच संवेदनशील कूटनीतिक मामलों में संवाद और आधिकारिक जानकारी के तरीके पर सवाल खड़े किए।

    मार्को रुबियो का प्रस्तावित दौरा ऐसे समय चर्चा में आया है, जब उनकी मुंबई यात्रा और जामनगर जाने की योजना को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। फिलहाल राहुल गांधी और जयराम रमेश की टिप्पणियों में विदेश मंत्रालय की संचार प्रक्रिया और संभावित उच्चस्तरीय बैठक की जानकारी सार्वजनिक किए जाने के तरीके पर सवाल उठाए गए हैं। रुबियो और जयशंकर की मुलाकात को लेकर अंतिम आधिकारिक कार्यक्रम सामने आने के बाद ही इस संबंध में स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।

  • पीएम मोदी ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय को दिया केंद्र की मदद का भरोसा, 13 हजार करोड़ की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास

    पीएम मोदी ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय को दिया केंद्र की मदद का भरोसा, 13 हजार करोड़ की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार, 11 अक्टूबर 2026 को तमिलनाडु के विकास के लिए केंद्र सरकार की ओर से हर जरूरी सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिया। चेन्नई में आयोजित कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि केंद्र पूरी प्रतिबद्धता के साथ तमिलनाडु के साथ खड़ा है। उन्होंने राज्य के मुख्यमंत्री विजय के नेतृत्व में तमिलनाडु के विकास और देश को विकसित बनाने के साझा लक्ष्य पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि दोनों मिलकर विकसित तमिलनाडु के माध्यम से विकसित भारत के संकल्प को साकार कर सकते हैं।

    प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि केंद्र सरकार तमिलनाडु को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए आवश्यक सहयोग देने को तैयार है। उन्होंने कहा कि राज्य को केंद्र से जिस भी सहायता की जरूरत होगी, उसे उपलब्ध कराने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। उनके मुताबिक, तमिलनाडु के विकास को आगे बढ़ाने के लिए केंद्र और राज्य के बीच सहयोग महत्वपूर्ण है। उन्होंने राज्य के लोगों को विकास परियोजनाओं से जुड़े इस अवसर पर बधाई भी दी।

    चेन्नई में आयोजित कार्यक्रम में लगभग 13 हजार करोड़ रुपये की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया गया। प्रधानमंत्री ने इसे तमिलनाडु के लिए ऐतिहासिक दिन बताया। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम के तहत कुछ ऐसी परियोजनाएं जनता को समर्पित की जा रही हैं, जिनका काम पूरा हो चुका है, जबकि कई नई परियोजनाओं की आधारशिला रखी जा रही है। इन योजनाओं का संबंध परिवहन, उद्योग, व्यापार और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों से है।

    मोदी ने कहा कि विकास परियोजनाओं में से कुछ लोगों की रोजमर्रा की यात्रा को आसान बनाएंगी। वहीं, दूसरी परियोजनाओं से उद्योग और व्यापार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि इन पहलों का संयुक्त उद्देश्य तमिलनाडु के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर तैयार करना है। प्रधानमंत्री ने राज्य के विकास में बुनियादी ढांचे की भूमिका को भी रेखांकित किया।

    अपने दौरे के दौरान प्रधानमंत्री ने चेन्नई मेट्रो के एक अन्य चरण को जनता को समर्पित करने का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि उन्हें भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान में ब्रेन रिसर्च सेंटर जाने का अवसर मिला। प्रधानमंत्री के अनुसार, इस क्षेत्र में होने वाला अनुसंधान सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में कई नए अवसर पैदा कर सकता है। इस तरह उनके कार्यक्रम में आधुनिक परिवहन व्यवस्था के साथ वैज्ञानिक अनुसंधान और स्वास्थ्य से जुड़े विषय भी शामिल रहे।

    प्रधानमंत्री ने तमिलनाडु की सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक विकास के बीच संबंध पर भी बात की। उन्होंने कहा कि मंदिरों से लेकर मेट्रो तक राज्य के अनुभव आज के भारत की भावना को दर्शाते हैं। उनके अनुसार, भारत अपनी सांस्कृतिक शक्ति से प्रेरणा लेते हुए विज्ञान में प्रगति कर रहा है और आधुनिक बुनियादी ढांचे के माध्यम से नए अवसर तैयार कर रहा है। उन्होंने विरासत और भविष्य की आकांक्षाओं को साथ लेकर आगे बढ़ने की आवश्यकता पर जोर दिया।

    प्रधानमंत्री का यह संबोधन तमिलनाडु में विकास परियोजनाओं के उद्घाटन और शिलान्यास के अवसर पर हुआ। उन्होंने राज्य के विकास के लिए केंद्र की प्रतिबद्धता दोहराते हुए कहा कि सरकार तमिलनाडु को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक सहायता देने को तैयार है। 13 हजार करोड़ रुपये की परियोजनाओं के जरिए परिवहन, उद्योग, व्यापार और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में विकास को गति देने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में मुख्यमंत्री विजय की ओर से इस प्रस्ताव पर किसी प्रतिक्रिया का उल्लेख नहीं है।