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  • मोदी-आबे की दोस्ती से भारत-जापान संबंधों तक, काशी में स्मारक उद्घाटन के दौरान योगी ने बताई इस रिश्ते की खास कहानी

    मोदी-आबे की दोस्ती से भारत-जापान संबंधों तक, काशी में स्मारक उद्घाटन के दौरान योगी ने बताई इस रिश्ते की खास कहानी

    नई दिल्ली । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के पूर्व प्रधानमंत्री दिवंगत शिंजो आबे की दोस्ती को पद से नहीं बल्कि विश्वास से बना रिश्ता बताया। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं के पद बदलते रहे, लेकिन उनकी मित्रता कायम रही। वाराणसी के रुद्राक्ष इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में शिंजो आबे मेमोरियल कॉरिडोर के उद्घाटन समारोह में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की जनसेवा यात्रा के 25 वर्ष पूरे होने के दिन आबे की स्मृति को समर्पित गलियारे का उद्घाटन विशेष संयोग है।

    मुख्यमंत्री योगी ने जापान की पूर्व प्रथम महिला और शिंजो आबे की पत्नी अकी आबे के साथ कॉरिडोर का अनावरण किया। उन्होंने इसे उत्तर प्रदेश की 25 करोड़ जनता, प्रधानमंत्री मोदी और 140 करोड़ भारतीयों की ओर से शिंजो आबे को श्रद्धांजलि बताया। योगी ने कहा कि जापान ने काशी को रुद्राक्ष दिया और अब काशी उसी रुद्राक्ष में जापान के पूर्व प्रधानमंत्री की स्मृति को स्थायी रूप से संजो रही है।

    योगी ने दोनों नेताओं की पहली मुलाकात का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2007 में गुजरात के मुख्यमंत्री रहते प्रधानमंत्री मोदी जापान गए थे, जहां उनकी शिंजो आबे से पहली मुलाकात हुई। उसी साल आबे ने भारत की संसद में भारत और जापान की मजबूती को एक-दूसरे के हित से जोड़ा था। वर्ष 2014 में काशी-क्योटो पार्टनर सिटी समझौता हुआ और 2015 में शिंजो आबे ने प्रधानमंत्री मोदी के साथ काशी में गंगा आरती में हिस्सा लिया। 2017 में दोनों नेताओं ने अहमदाबाद में बुलेट ट्रेन परियोजना का शिलान्यास किया, जबकि 2018 में आबे ने प्रधानमंत्री मोदी को यामानाशी स्थित अपने निजी आवास पर आमंत्रित किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि जब दो नेताओं की मित्रता दो देशों के विश्वास में बदलती है तो उसके व्यापक प्रभाव होते हैं। उन्होंने बताया कि 2021 में शिंजो आबे को भारत के प्रमुख नागरिक सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। सितंबर 2022 में प्रधानमंत्री मोदी अपने मित्र को अंतिम विदाई देने टोक्यो पहुंचे और भारत में राष्ट्रीय शोक रखा गया। योगी ने इसे प्रोटोकॉल के बजाय व्यक्तिगत रिश्ते से जुड़ा कदम बताया।

    उन्होंने भारत-जापान संबंधों को विश्वास पर आधारित बताते हुए कहा कि करीब 1400 जापानी कंपनियां भारत में काम कर रही हैं। दोनों देशों का सहयोग अब सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ग्रीन हाइड्रोजन और क्रिटिकल मिनरल्स जैसे क्षेत्रों तक पहुंच चुका है। उनके अनुसार जापान के पास तकनीक और अनुभव है, जबकि भारत के पास प्रतिभा और युवा ऊर्जा है।

    योगी ने इसी वर्ष फरवरी में अपनी जापान यात्रा का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि टोक्यो और यामानाशी में जापानी कंपनियों के साथ हजारों करोड़ रुपये के निवेश समझौते हुए। उन्होंने जापान में मैग्लेव ट्रेन की प्रिसिजन इंजीनियरिंग को करीब से देखने की बात कही। यामानाशी को उत्तर प्रदेश का ग्रीन हाइड्रोजन एनर्जी पार्टनर बताया गया। उन्होंने कहा कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के ईडा क्षेत्र में 500 एकड़ में जापानी सिटी विकसित की जा रही है और इन्वेस्ट यूपी में यामानाशी डेस्क भी बनाई गई है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि जापान के पास प्रिसिजन है तो उत्तर प्रदेश के पास बड़े स्तर पर काम करने की क्षमता, 25 करोड़ लोगों का बाजार, देश का सबसे युवा वर्कफोर्स और एक्सप्रेसवे तथा एयरपोर्ट का बड़ा नेटवर्क है। उन्होंने बताया कि 2027 में भारत-जापान राजनयिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे होंगे और आबे मेमोरियल कॉरिडोर इस अवसर की शुरुआती भेंट है। उन्होंने काशी और क्योटो को अपनी-अपनी सभ्यताओं की आत्मा बताते हुए कहा कि दोनों शहर विरासत के संरक्षण के साथ विकास का संदेश देते हैं।

    योगी ने कॉरिडोर को नई पीढ़ी के लिए जीवंत क्लासरूम बताया। अकी आबे ने शिंजो आबे और प्रधानमंत्री मोदी के आत्मीय संबंधों को याद किया और कहा कि 2015 में काशी आने के बाद उनके पति उनसे गंगा आरती और वाराणसी की यादें साझा करते थे। उन्होंने कहा कि आबे जीवित होते तो अपने नाम पर बने स्मारक को देखकर खुश होते। अकी आबे ने रुद्राक्ष कन्वेंशन सेंटर की बाहरी दीवारों पर लगे 108 रुद्राक्षों की भी प्रशंसा की और बताया कि जापान में भी 108 संख्या का विशेष महत्व है।

  • GST के अगले चरण से कारोबार और आसान होगा, रिफंड प्रक्रिया सरल बनेगी; PM मोदी ने निवेश बढ़ने की उम्मीद जताई

    GST के अगले चरण से कारोबार और आसान होगा, रिफंड प्रक्रिया सरल बनेगी; PM मोदी ने निवेश बढ़ने की उम्मीद जताई

    नई दिल्ली ।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी सुधारों का अगला चरण कारोबारियों के लिए अनुपालन प्रक्रिया को और आसान बनाएगा। इसके साथ ही रिफंड प्रक्रिया को सरल और तेज करने पर जोर दिया जाएगा। प्रधानमंत्री के अनुसार, इन सुधारों से उद्योग जगत का विश्वास बढ़ने, निवेश को प्रोत्साहन मिलने और विकसित भारत के लक्ष्य को मजबूत आधार मिलने की उम्मीद है। उन्होंने यह बात वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के उस लेख का उल्लेख करते हुए कही, जिसमें जीएसटी सुधारों के अगले चरण की रूपरेखा बताई गई है। जीएसटी में प्रक्रिया सुधारों का उद्देश्य कारोबारियों के लिए अनुपालन को आसान बनाना और लागत कम करना है।

    वित्त मंत्री ने बताया कि नई पीढ़ी के जीएसटी सुधारों में करदाताओं को राहत देने और अर्थव्यवस्था को गति देने पर ध्यान दिया जा रहा है। आगामी प्रक्रिया सुधारों में रजिस्ट्रेशन, रिटर्न फाइलिंग, रिफंड, विवाद निपटान और इनपुट टैक्स क्रेडिट यानी आईटीसी से जुड़ी प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर मुख्य जोर रहेगा। जीएसटी परिषद की सात अक्टूबर को होने वाली बैठक से पहले रखी गई रूपरेखा में अनुपालन में लगने वाले समय और लागत को कम करने की बात कही गई है। इसका उद्देश्य कारोबारियों के लिए कागजी कार्रवाई घटाकर प्रक्रिया को अधिक सुविधाजनक बनाना है।

    सुधारों के संदर्भ में सितंबर 2025 में लागू हुई दर युक्तिकरण प्रक्रिया के बाद जीएसटी संग्रह और कर योग्य आपूर्ति के प्रदर्शन का भी उल्लेख किया गया है। सरकार का मानना है कि जीएसटी ने राजस्व संग्रह को मजबूत करने के साथ आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने में भूमिका निभाई है। आगामी बदलाव प्रक्रिया को सरल बनाने की दिशा में आगे बढ़ेंगे। जीएसटी परिषद की लॉ कमेटी जीएसटी कानून और नियमों से जुड़े कानूनी मामलों की समीक्षा करती है तथा जरूरी संशोधनों और स्पष्टीकरणों की सिफारिश परिषद के समक्ष रखती है।

    आगामी जीएसटी परिषद की बैठक में कानून से जुड़े एक महत्वपूर्ण मुद्दे पर भी विचार होने की संभावना है। प्रस्तावित चर्चा में जीएसटी कानून के उस प्रावधान की समीक्षा शामिल हो सकती है, जिसके तहत जांच के दौरान कुछ गंभीर मामलों में कर अधिकारियों को गिरफ्तारी का अधिकार मिलता है। यह विषय जीएसटी कानूनों के अपराधमुक्तिकरण से जुड़े व्यापक प्रस्तावों का हिस्सा बताया गया है। जीएसटी परिषद के दस्तावेजों में पहले भी कुछ अपराधों को अपराधमुक्त करने, अभियोजन की सीमा में बदलाव और कंपाउंडिंग प्रक्रिया को आसान बनाने जैसे प्रस्तावों पर चर्चा दर्ज है।

    वर्तमान व्यवस्था में सीजीएसटी अधिनियम की धारा 69 के तहत आयुक्त को कुछ परिस्थितियों में गिरफ्तारी की अनुमति देने का अधिकार है, जब उन्हें यह विश्वास हो कि किसी व्यक्ति ने धारा 132 के तहत गंभीर अपराध किया है। प्रस्तावित सोच के तहत फर्जी चालान, फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट और फर्जी रिफंड दावों जैसे गंभीर मामलों में कार्रवाई सामान्य आपराधिक कानूनों के तहत किए जाने की व्यवस्था पर भी विचार हो सकता है। इसका उद्देश्य गंभीर धोखाधड़ी के मामलों में कार्रवाई जारी रखते हुए अन्य करदाताओं के लिए अनुपालन व्यवस्था को अधिक सहज बनाना है। हालांकि, इन प्रस्तावों पर अंतिम निर्णय संबंधित प्रक्रिया और जीएसटी परिषद के विचार-विमर्श के बाद ही होगा।

  • यूपी चुनाव से पहले दिल्ली पहुंचे योगी आदित्यनाथ, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात में चुनाव और राज्य के मुद्दों पर चर्चा

    यूपी चुनाव से पहले दिल्ली पहुंचे योगी आदित्यनाथ, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात में चुनाव और राज्य के मुद्दों पर चर्चा

    नई दिल्ली ।उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार, 26 सितंबर को दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच यह बैठक उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले हुई है। मुलाकात के कारण राज्य की राजनीति में चुनावी तैयारियों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बीच इससे पहले भी इस साल मुलाकातें हो चुकी हैं।

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दिल्ली दौरे को उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के संदर्भ में देखा जा रहा है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में बैठक के दौरान हुई चर्चाओं का विस्तृत आधिकारिक ब्योरा सामने नहीं आया है। ऐसे में मुलाकात के एजेंडे को लेकर सामने आई अलग-अलग राजनीतिक व्याख्याओं को तथ्य के रूप में नहीं माना जा सकता।

    उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव अगले साल होने हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के बीच हुई बैठक ने राज्य के राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर स्वाभाविक रूप से ध्यान आकर्षित किया है। मुख्यमंत्री के दिल्ली दौरे और प्रधानमंत्री से मुलाकात के बीच चुनावी तैयारियों से जुड़े विषयों पर चर्चा की अटकलें लगाई जा रही हैं।

    मुलाकात से एक दिन पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ग्रेटर नोएडा में आयोजित उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो 2026 में शामिल हुए थे। इस दौरान उत्तर प्रदेश में निवेश से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों पर भी चर्चा हुई थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री ने रूस, वियतनाम, बेलारूस, जापान और सिंगापुर सहित भागीदार देशों की कंपनियों के साथ बैठक की थी और प्रदेश में रक्षा, फार्मास्यूटिकल्स, विमानन, मेडिकल डिवाइस, कृषि तथा विनिर्माण क्षेत्र में निवेश का आमंत्रण दिया था।

    दिल्ली दौरे के दौरान मुख्यमंत्री की केंद्रीय नेतृत्व के साथ अन्य बैठकों की भी जानकारी सामने आई है। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद उनकी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन से भी मुलाकात प्रस्तावित थी।

    योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री मोदी के बीच उत्तर प्रदेश को लेकर संवाद पहले भी होता रहा है। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, मुख्यमंत्री ने 11 जून 2026 को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री से मुलाकात की थी। इससे पहले 8 अगस्त 2026 को भी दोनों नेताओं की मुलाकात हुई थी। इन मुलाकातों की आधिकारिक जानकारी में मुख्य रूप से दोनों नेताओं के मिलने की पुष्टि की गई थी।

    वर्तमान दिल्ली दौरा ऐसे समय हुआ है जब उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां बढ़ रही हैं। राज्य सरकार और केंद्रीय नेतृत्व के बीच होने वाली बैठकों को इसी व्यापक राजनीतिक और प्रशासनिक संदर्भ में देखा जा रहा है।

    फिलहाल 26 सितंबर की मुलाकात में किन-किन विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई, इसे लेकर आधिकारिक स्तर पर विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है। इसलिए बैठक को लेकर सामने आ रही चुनावी रणनीति संबंधी चर्चाओं को अटकलों के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। इतना स्पष्ट है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और यह मुलाकात उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले हुई है।

  • मंत्रियों की प्रस्तुतियों से तय होगी आगे की प्राथमिकताएं, विकसित भारत 2047 पर रहेगा फोकस

    मंत्रियों की प्रस्तुतियों से तय होगी आगे की प्राथमिकताएं, विकसित भारत 2047 पर रहेगा फोकस


    नई दिल्ली ।
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट मंत्रियों का दो दिवसीय चिंतन शिविर 23 और 24 सितंबर को आयोजित हो रहा है। इस उच्चस्तरीय बैठक का मुख्य विषय विकसित भारत 2047 है। इसमें सरकार के अब तक के कामकाज की समीक्षा के साथ आगे की योजनाओं, सुधारों और प्राथमिकताओं पर विचार किया जा रहा है।

    चिंतन शिविर के पहले दिन कैबिनेट मंत्रियों की ओर से अपने-अपने मंत्रालयों के कामकाज से संबंधित प्रस्तुतियां रखी जा रही हैं। इन प्रस्तुतियों में अब तक किए गए कार्यों, प्रमुख योजनाओं की स्थिति, उपलब्धियों और आगे की कार्ययोजना से जुड़े विषय शामिल हैं।

    दूसरे दिन मंत्रियों और मंत्रालयों के कामकाज की समीक्षा की जाएगी। मूल जानकारी के अनुसार, इस समीक्षा के बाद मंत्रियों के कामकाज का रिपोर्ट कार्ड तैयार किया जाना है। हालांकि, कैबिनेट में फेरबदल को लेकर अंतिम निर्णय के संबंध में कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है।

    इस बार का चिंतन शिविर कैबिनेट मंत्रियों पर केंद्रित है। इससे पहले राज्य मंत्रियों और स्वतंत्र प्रभार वाले मंत्रियों के साथ अलग-अलग स्तर पर समीक्षा बैठकें हो चुकी हैं। इसके बाद कैबिनेट मंत्रियों के लिए अलग से दो दिवसीय मंथन रखा गया है।

    बैठक में युवाओं से जुड़े मुद्दों को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। खासतौर पर जेन जी के साथ बेहतर तालमेल, उनके प्रमुख मुद्दों और सरकार की योजनाओं के साथ उनके जुड़ाव को लेकर मंत्रियों से जानकारी मांगी जा रही है।

    मंत्रियों को अपने-अपने क्षेत्रों में युवाओं की प्राथमिकताओं को समझने और उनके साथ संवाद के लिए किए गए प्रयासों के बारे में भी प्रस्तुति देनी है। रोजगार से जुड़े विषयों पर युवाओं की सोच, उनकी संतुष्टि और असंतुष्टि को समझने के लिए किए गए प्रयास भी चर्चा का हिस्सा हैं।

    महिला आरक्षण से संबंधित संविधान के 131वें संशोधन विधेयक को लेकर भी मंथन किया जाना है। दिए गए विवरण के अनुसार, अप्रैल में यह विधेयक पारित नहीं हो पाया था। अब इसे आगे बढ़ाने के तरीकों और इससे जुड़े सुझावों पर मंत्रियों के विचार लिए जाने हैं।

    विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी यूजीसी से जुड़े मुद्दे को भी प्रस्तुतियों में शामिल किया गया है। इस विषय को लेकर जेन जी की सोच, संबंधित क्षेत्र में इसके प्रभाव और आगे की कार्ययोजना पर मंत्रियों से जानकारी रखने को कहा गया है।

    चिंतन शिविर का व्यापक उद्देश्य सरकार के कामकाज का जायजा लेने के साथ अगले चरण के लिए सुधारों और प्राथमिकताओं की पहचान करना है। विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के अनुरूप विभिन्न मंत्रालयों के काम को आगे बढ़ाने और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी चर्चा हो रही है।

    सरकार की यह समीक्षा प्रक्रिया केवल वर्तमान बैठक तक सीमित नहीं है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, विकसित भारत 2047 से जुड़ी चर्चाओं और प्रस्तुतियों का क्रम पहले से जारी है। आने वाले समय में भी इस विषय पर आगे के मंथन के दौर आयोजित किए जाने की योजना है।

    वर्ष 2021 में भी केंद्रीय मंत्रिपरिषद के साथ पांच चिंतन शिविर आयोजित किए गए थे। पहला शिविर 14 सितंबर को हुआ था, जबकि अंतिम बैठक नवंबर में हुई थी। प्रत्येक सत्र करीब पांच घंटे चला था। इनमें मंत्रियों के कामकाज, कार्यकुशलता, समय और संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल, योजनाओं की निगरानी और शासन सुधार जैसे विषयों पर चर्चा हुई थी।

    नवंबर 2021 में 77 मंत्रियों को आठ समूहों में बांटकर अलग-अलग प्रशासनिक विषयों पर काम आगे बढ़ाने की कवायद भी की गई थी। वर्तमान चिंतन शिविर में भी सरकार के मौजूदा कामकाज की समीक्षा के साथ भविष्य की योजनाओं और सुधारों की दिशा तय करने पर जोर है।

  • पीएम मोदी के 76वें जन्मदिन पर काशी में विशेष पूजा, राजनाथ सिंह और योगी ने शुरू की सेवा संकल्प बाइक यात्रा

    पीएम मोदी के 76वें जन्मदिन पर काशी में विशेष पूजा, राजनाथ सिंह और योगी ने शुरू की सेवा संकल्प बाइक यात्रा

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन के अवसर पर वाराणसी में विशेष धार्मिक और सेवा कार्यक्रम आयोजित किए गए। काशी विश्वनाथ धाम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान समेत कई प्रमुख नेताओं ने पूजा-अर्चना की। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दीर्घायु और मंगलकामना के लिए विशेष अनुष्ठान किए गए।

    काशी विश्वनाथ मंदिर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूजा की गई। 11 हवन कुंडों पर आहुतियां दी गईं और बाबा विश्वनाथ का महारुद्राभिषेक किया गया। नेताओं ने मंदिर में विधि-विधान से पूजन कर प्रधानमंत्री के लिए मंगलकामना की। वाराणसी में प्रधानमंत्री के जन्मदिन से जुड़े कार्यक्रमों में धार्मिक आयोजन के साथ सेवा और जनसंपर्क से जुड़े कार्यक्रम भी शामिल किए गए हैं।

    जन्मदिन के अवसर पर वाराणसी से वडनगर तक सेवा संकल्प बाइक यात्रा भी शुरू की गई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यात्रा को हरी झंडी दिखाई। इस यात्रा का उद्देश्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 25 वर्ष के सार्वजनिक जीवन से जुड़े कार्यक्रमों के तहत सेवा और जनसंपर्क गतिविधियों को आगे बढ़ाना है। यात्रा में बड़ी संख्या में युवा और बाइक सवार शामिल हुए हैं।

    वाराणसी और वडनगर को इस आयोजन में विशेष रूप से जोड़ा गया है। वडनगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मस्थान है, जबकि वाराणसी उनका संसदीय क्षेत्र है। इसी वजह से दोनों स्थानों पर जन्मदिन से जुड़े कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। वडनगर से भी वाराणसी की दिशा में बाइक यात्रा रवाना की गई है। इस आयोजन के जरिए दोनों शहरों को सेवा संकल्प अभियान से जोड़ा गया है।

    प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन के मौके पर देश के अलग-अलग हिस्सों में भी विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। वाराणसी में धार्मिक अनुष्ठान और बाइक यात्रा के अलावा सेवा गतिविधियों पर जोर दिया गया। वहीं गुजरात के वडनगर में भी पूजा-अर्चना और अन्य कार्यक्रम हुए। इस दौरान प्रधानमंत्री के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने से जुड़े आयोजनों को भी अभियान का हिस्सा बनाया गया है।

    वाराणसी में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन से जुड़े कई प्रमुख नेता भी मौजूद रहे। राजनाथ सिंह, योगी आदित्यनाथ, चंद्रबाबू नायडू और चिराग पासवान की मौजूदगी में काशी विश्वनाथ धाम में पूजा हुई। कार्यक्रम में धार्मिक अनुष्ठान के साथ सेवा संकल्प यात्रा को भी जोड़ा गया। प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर आयोजित इन कार्यक्रमों के जरिए वाराणसी और वडनगर को एक साथ जोड़ा गया है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्म 17 सितंबर 1950 को गुजरात के वडनगर में हुआ था। इस वर्ष उनके 76वें जन्मदिन के साथ उनके सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने से जुड़े कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। जन्मदिन के मौके पर देशभर में सेवा, रक्तदान, धार्मिक अनुष्ठान और अन्य सामाजिक गतिविधियां आयोजित की गईं। वाराणसी का कार्यक्रम इन्हीं आयोजनों की कड़ी में प्रमुख रहा, जहां पूजा-अर्चना के बाद सेवा संकल्प बाइक यात्रा को आगे बढ़ाया गया।

  • पीएम मोदी के 76वें जन्मदिन पर तमिलनाडु CM सी. जोसेफ विजय ने दी शुभकामनाएं, मजबूत भारत बनाने के प्रयासों की सराहना

    पीएम मोदी के 76वें जन्मदिन पर तमिलनाडु CM सी. जोसेफ विजय ने दी शुभकामनाएं, मजबूत भारत बनाने के प्रयासों की सराहना

    नई दिल्ली ।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन पर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने उन्हें शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री विजय के संदेश में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व और मजबूत भारत के निर्माण के लिए किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख किया गया। विजय ने प्रधानमंत्री के अच्छे स्वास्थ्य और लंबी उम्र की कामना भी की।

    मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से साझा किए गए संदेश में विजय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मजबूत भारत के निर्माण के लिए समर्पण के साथ नेतृत्व कर रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री के स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की कामना की। विजय का यह संदेश 17 सितंबर को प्रधानमंत्री मोदी के 76वें जन्मदिन के अवसर पर सामने आया।

    मुख्यमंत्री विजय के संदेश में इस्तेमाल की गई भाषा को लेकर राजनीतिक चर्चा भी शुरू हुई है। इसकी वजह यह है कि विजय ने प्रधानमंत्री को केवल औपचारिक जन्मदिन की शुभकामना देने के बजाय उनके नेतृत्व और मजबूत भारत के निर्माण के प्रयासों का विशेष रूप से उल्लेख किया। संदेश में प्रधानमंत्री के प्रति सम्मान और सकारात्मक भाषा दिखाई दी।

    सी. जोसेफ विजय तमिलनाडु के मुख्यमंत्री होने के साथ तमिलगा वेत्री कषगम के प्रमुख भी हैं। उनके राजनीतिक रुख को देखते हुए प्रधानमंत्री मोदी के लिए इस्तेमाल किए गए शब्दों पर विशेष ध्यान गया है। हालांकि, जन्मदिन की शुभकामना में व्यक्त किए गए विचारों से किसी व्यापक राजनीतिक बदलाव का निष्कर्ष निकालना अलग विषय है। फिलहाल संदेश में प्रधानमंत्री के नेतृत्व और मजबूत भारत के निर्माण के प्रयासों की सराहना स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।

    विजय और भारतीय जनता पार्टी के बीच राजनीतिक मतभेद सार्वजनिक रूप से सामने आते रहे हैं। विधानसभा चुनाव से पहले विजय ने भाजपा को अपनी पार्टी का वैचारिक विरोधी बताया था। इसके बावजूद मुख्यमंत्री बनने के बाद केंद्र और तमिलनाडु सरकार के बीच विकास से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर संवाद और समन्वय भी देखने को मिला है। ऐसे में प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर दिया गया यह संदेश राजनीतिक रूप से चर्चा का विषय बना है।

    प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन पर देश के अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेताओं ने भी उन्हें शुभकामनाएं दीं। इनमें विपक्षी दलों के नेता भी शामिल रहे। तमिलनाडु में मुख्यमंत्री विजय के अलावा राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर और अन्य राजनीतिक नेताओं ने भी प्रधानमंत्री को जन्मदिन की बधाई दी।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्म 17 सितंबर 1950 को गुजरात के वडनगर में हुआ था। इस वर्ष उनका 76वां जन्मदिन मनाया जा रहा है। जन्मदिन के अवसर पर देशभर में अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित किए गए। इस दौरान राजनीतिक नेताओं ने प्रधानमंत्री के अच्छे स्वास्थ्य और लंबी उम्र की कामना की।

    मुख्यमंत्री विजय का संदेश ऐसे समय आया है जब तमिलनाडु की राजनीति में केंद्र और राज्य के संबंधों को लेकर लगातार चर्चा बनी हुई है। उनके संदेश में प्रधानमंत्री के साथ राजनीतिक मुद्दों पर मतभेदों का कोई उल्लेख नहीं था। इसके बजाय संदेश पूरी तरह जन्मदिन की शुभकामनाओं और मजबूत भारत के निर्माण के लिए प्रधानमंत्री के नेतृत्व की सराहना पर केंद्रित रहा।

  • पीएम मोदी के जन्मदिन पर अन्नपूर्णा दिवस, बंगाल में महिलाओं के खातों में पहुंच रही 3000 रुपये की वित्तीय सहायता

    पीएम मोदी के जन्मदिन पर अन्नपूर्णा दिवस, बंगाल में महिलाओं के खातों में पहुंच रही 3000 रुपये की वित्तीय सहायता

    नई दिल्ली ।पश्चिम बंगाल में 17 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर अन्नपूर्णा दिवस मनाया जा रहा है। इस मौके पर अन्नपूर्णा योजना के तहत राज्य की पात्र महिलाओं के बैंक खातों में 3000 रुपये की वित्तीय सहायता भेजी जा रही है। इस महीने करीब 1.58 करोड़ महिलाओं को योजना का लाभ मिलने की जानकारी दी गई है।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर पश्चिम बंगाल में इस दिन को अन्नपूर्णा दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। योजना के तहत लाभार्थी महिलाओं को सीधे उनके बैंक खातों में राशि भेजी जा रही है। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल की माताओं और बहनों के प्रति अपने लगाव का भी उल्लेख किया।

    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उन्हें हमेशा पश्चिम बंगाल की माताओं और बहनों से बहुत प्यार मिला है। उन्होंने विश्वकर्मा पूजा की शुभकामनाएं देते हुए अन्नपूर्णा योजना का भी जिक्र किया। उनके अनुसार, इस योजना के जरिए बंगाल की महिलाओं को नई ताकत मिली है। उन्होंने योजना का लाभ उठाने वाली प्रत्येक महिला को बधाई भी दी।

    प्रधानमंत्री ने बंगाल में हुए राजनीतिक बदलाव का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस साल 4 मई को बंगाल ने बदलाव का एक नया रास्ता चुना और उन्हें पता है कि इस बदलाव में बंगाल की माताओं और बहनों ने सबसे अहम भूमिका निभाई।

    अन्नपूर्णा योजना के तहत सितंबर महीने में करीब 1.58 करोड़ महिलाओं को सीधे उनके बैंक खातों में 3000 रुपये की राशि मिलने की जानकारी मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की ओर से दी गई है। इस योजना के लाभार्थियों की संख्या पिछले कुछ महीनों के दौरान बढ़ी है।

    जानकारी के अनुसार जून महीने में अन्नपूर्णा योजना के तहत 28 लाख महिलाओं को राशि मिली थी। इसके बाद जुलाई में लाभार्थियों की संख्या बढ़कर 1.19 करोड़ हो गई। सितंबर महीने में करीब 1.58 करोड़ महिलाओं को सहायता पहुंचाने की बात कही गई है।

    इस भुगतान की खास बात यह बताई गई है कि राशि सीधे महिलाओं के बैंक खातों में भेजी जा रही है। इसके साथ ही किसी तरह के बिचौलिये या कट-मनी की व्यवस्था नहीं होने की बात भी कही गई है। योजना के माध्यम से पात्र महिलाओं तक वित्तीय सहायता सीधे पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है।

    प्रधानमंत्री के जन्मदिन के मौके पर राज्य में अन्नपूर्णा दिवस मनाए जाने के साथ महिलाओं के खातों में सहायता राशि भेजी जा रही है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी को देशभर से जन्मदिन की शुभकामनाएं भी दी जा रही हैं।

    अन्नपूर्णा योजना से जुड़ी इस पहल के तहत सितंबर महीने की राशि बड़ी संख्या में महिलाओं तक पहुंचाई जा रही है। 1.58 करोड़ लाभार्थियों का आंकड़ा जून और जुलाई की तुलना में अधिक है। इस तरह 17 सितंबर का दिन योजना के लाभार्थियों के लिए वित्तीय सहायता मिलने के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

    पश्चिम बंगाल में अन्नपूर्णा दिवस के रूप में मनाए जा रहे इस दिन के दौरान योजना के लाभार्थियों को 3000 रुपये की राशि सीधे बैंक खातों में भेजने की प्रक्रिया जारी है। योजना के तहत लाभ पाने वाली महिलाओं को इस वित्तीय सहायता का लाभ मिल रहा है।

  • सेमीकॉन इंडिया 2026 में पीएम मोदी ने विकसित भारत, स्टार्टअप और सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम की दिशा पर विस्तार से बात रखी

    सेमीकॉन इंडिया 2026 में पीएम मोदी ने विकसित भारत, स्टार्टअप और सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम की दिशा पर विस्तार से बात रखी

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार 17 सितंबर को नई दिल्ली के यशोभूमि में सेमीकॉन इंडिया 2026 का उद्घाटन किया। सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र से जुड़े इस आयोजन का आयोजन 17 से 19 सितंबर तक किया जा रहा है। इस वर्ष कार्यक्रम की थीम ‘सिलिकॉन टू सिस्टम्स: बिल्डिंग द इकोसिस्टम’ रखी गई है। आयोजन में प्रधानमंत्री मोदी ने विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर अपनी बात रखी और कार्यक्रम में शामिल प्रतिभागियों को संबोधित किया।

    सेमीकॉन इंडिया 2026 में भारत के साथ 52 अन्य देशों की कंपनियां भी भाग ले रही हैं। आयोजन में सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र से जुड़े कंपनियों के प्रतिनिधियों के अलावा निवेशक, वैज्ञानिक, स्टार्टअप, छात्र और सरकारी अधिकारी भी शामिल हो रहे हैं। कार्यक्रम का उद्देश्य भारत में सेमीकंडक्टर से जुड़े काम और कारोबार को आगे बढ़ाने से संबंधित विषयों पर चर्चा के लिए विभिन्न पक्षों को एक मंच पर लाना है।

    इस आयोजन में 600 से ज्यादा प्रदर्शक शामिल हुए हैं। इनमें करीब 300 विदेशी कंपनियां हैं। प्रदर्शकों के लिए 15 हजार वर्ग मीटर का प्रदर्शनी क्षेत्र तैयार किया गया है। कार्यक्रम में 150 से ज्यादा विशेषज्ञ और वक्ता भी हिस्सा ले रहे हैं। वे सेमीकंडक्टर उद्योग से जुड़े नए काम, उपलब्ध अवसर और क्षेत्र के सामने मौजूद चुनौतियों पर चर्चा करेंगे।

    सेमीकॉन इंडिया 2026 में छह देशों के विशेष पवेलियन भी बनाए गए हैं। इनमें जापान, दक्षिण कोरिया, मलेशिया, नीदरलैंड, सिंगापुर और स्वीडन शामिल हैं। इनके अलावा 12 राज्य सरकारों के पवेलियन भी प्रदर्शनी में मौजूद हैं। इससे विभिन्न देशों और राज्यों की ओर से सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र से जुड़े प्रयासों तथा गतिविधियों को सामने रखने का अवसर मिल रहा है।

    कार्यक्रम में स्टार्टअप और छात्रों के लिए भी विशेष स्थान रखा गया है। करीब 40 स्टार्टअप अपने प्रोजेक्ट और नए विचारों को प्रदर्शित कर रहे हैं। इस तरह आयोजन में उद्योग से जुड़े बड़े संस्थानों के साथ नई तकनीक और नए विचारों पर काम कर रहे स्टार्टअप और छात्रों को भी भागीदारी का अवसर मिला है।

    कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेमीकॉन इंडिया में मौजूद सभी लोगों का स्वागत किया और विश्वकर्मा जयंती की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने भगवान विश्वकर्मा को निर्माण और सृजन की शक्ति के प्रतीक के रूप में बताते हुए कहा कि संयोग है कि इसी दिन से सेमीकॉन इंडिया की शुरुआत हो रही है।

    प्रधानमंत्री ने विकसित भारत के लक्ष्य का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि देश का प्रत्येक नागरिक एक प्रतिबद्धता के साथ विकसित भारत के निर्माण में जुटा है। उन्होंने बीते 15 दिनों के दौरान भारत में हुए विभिन्न घटनाक्रमों का जिक्र करते हुए देश की विकास यात्रा की दिशा और गति पर बात रखी।

    प्रधानमंत्री ने सितंबर में मुंबई में आयोजित ग्लोबल फिनटेक फेस्ट का उल्लेख किया, जहां एजेंटिक एआई, टोकनाइजेशन और क्वांटम टेक्नोलॉजी के माध्यम से समावेशी वित्त पर चर्चा हुई। उन्होंने इसी अवधि में करीब 3,000 किलोमीटर लंबे डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के पूरी तरह चालू होने का भी उल्लेख किया। इसके साथ ही उन्होंने सितंबर में जारी भारत की तिमाही जीडीपी रिपोर्ट का जिक्र करते हुए विकास से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों की जानकारी सामने रखी।

  • सेमीकंडक्टर उद्योग में भारत की तेज बढ़त, वैश्विक चुनौतियों के बीच पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत विकास दर

    सेमीकंडक्टर उद्योग में भारत की तेज बढ़त, वैश्विक चुनौतियों के बीच पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत विकास दर

    नई दिल्ली ।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को सेमीकॉन इंडिया 2026 के उद्घाटन के बाद कहा कि भारत का सेमीकंडक्टर उद्योग तेजी से आगे बढ़ रहा है और देश में तैयार होने वाली चिप्स आने वाले समय में दुनिया के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचेंगी। उन्होंने वैश्विक स्तर पर चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत विकास दर और तकनीकी क्षेत्र में हो रही प्रगति का भी उल्लेख किया।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत ने 7.8 प्रतिशत की विकास दर दर्ज की है। उनके अनुसार, वैश्विक माहौल चुनौतीपूर्ण होने के बावजूद यह वृद्धि भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाती है। उन्होंने पिछले कुछ समय में देश में हुए कई महत्वपूर्ण आयोजनों और विकास से जुड़ी गतिविधियों का भी उल्लेख किया।

    इस दौरान उन्होंने मुंबई में आयोजित ग्लोबल फिनटेक फेस्ट का जिक्र किया। यहां एजेंटिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, टोकनाइजेशन और क्वांटम टेक्नोलॉजी के जरिए वित्तीय सेवाओं को अधिक व्यापक स्तर तक पहुंचाने पर चर्चा हुई थी। प्रधानमंत्री ने इन तकनीकी क्षेत्रों को देश के डिजिटल और वित्तीय ढांचे से जोड़ते हुए भारत में हो रहे बदलावों का उल्लेख किया।

    प्रधानमंत्री ने देश में करीब 3,000 किलोमीटर लंबे डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के चालू होने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि इन कॉरिडोर से देशभर में माल की आवाजाही तेज होगी, लॉजिस्टिक्स व्यवस्था बेहतर होगी और विनिर्माण क्षेत्र को गति मिलेगी। इससे उत्पादन और आपूर्ति से जुड़े बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलने की उम्मीद जताई गई।

    सेमीकंडक्टर क्षेत्र को लेकर प्रधानमंत्री ने भारत की बढ़ती क्षमता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश की चिप इंडस्ट्री तेजी से आगे बढ़ रही है और भारत में तैयार होने वाली चिप्स दुनिया भर में जाएंगी। सेमीकॉन इंडिया 2026 का आयोजन इसी व्यापक सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को विकसित करने के उद्देश्य से किया जा रहा है।

    प्रधानमंत्री ने भारत की सॉवरेन रेटिंग में सुधार का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि रेटिंग में सुधार भारतीय अर्थव्यवस्था में बढ़ते वैश्विक भरोसे का संकेत है। भारत की मेजबानी में हाल ही में हुए ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का जिक्र करते हुए उन्होंने आम सहमति से नई दिल्ली घोषणापत्र अपनाए जाने को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के प्रति भरोसे का एक संकेत बताया।

    केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने सेमीकॉन 2.0 के तहत भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को विकसित करने की योजना की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इसके छह प्रमुख स्तंभों में चिप डिजाइन, मशीन और मटेरियल, फैब्स, एडवांस्ड पैकेजिंग, रिसर्च एंड डेवलपमेंट और टैलेंट शामिल हैं।

    उन्होंने बताया कि सेमीकंडक्टर कार्यक्रम के पहले चरण में 105 से अधिक स्टार्टअप्स ने हिस्सा लिया। इनमें करीब 20 स्टार्टअप्स ने लगभग 800 करोड़ रुपये की वेंचर कैपिटल फंडिंग हासिल की। सेमीकॉन 2.0 के तहत कम से कम 200 चिप डिजाइन स्टार्टअप और कंपनियों को सहायता देने का लक्ष्य रखा गया है।

    अश्विनी वैष्णव के अनुसार, भारत ने 10 वर्षों में 85,000 डिजाइन इंजीनियर तैयार करने का शुरुआती लक्ष्य रखा था, लेकिन चार वर्षों में ही 70,000 इंजीनियर तैयार किए जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि देशभर की 400 से अधिक यूनिवर्सिटीज में इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन टूल्स उपलब्ध हैं। सेमीकॉन इंडिया 2026 के जरिए भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र में डिजाइन, निर्माण, पैकेजिंग, शोध और प्रतिभा विकास से जुड़े प्रयासों को एक व्यापक ढांचे में आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।

  • UPI चार्ज को लेकर राहुल गांधी का केंद्र पर हमला, प्रधानमंत्री मोदी से शुल्क वापस लेने की मांग

    UPI चार्ज को लेकर राहुल गांधी का केंद्र पर हमला, प्रधानमंत्री मोदी से शुल्क वापस लेने की मांग


    नई दिल्ली ।
    2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा मर्चेंट UPI भुगतानों पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR की नई व्यवस्था को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए व्यवस्था को वापस लेने की मांग की है। उन्होंने अपने बयान में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का भी उल्लेख किया।

    राहुल गांधी ने बुधवार को सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा किया। इसमें उन्होंने UPI पर लागू होने वाली नई शुल्क व्यवस्था को लेकर सरकार की आलोचना की। उन्होंने इंदिरा गांधी के एक पुराने कथन का जिक्र करते हुए कहा कि उनका झुकाव न बाईं ओर था और न दाईं ओर, बल्कि उनकी सोच सीधी थी।

    इसके बाद राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सरकार ने अमेरिका के सामने झुकने का रास्ता अपनाया है। उन्होंने UPI पर शुल्क व्यवस्था को लेकर सरकार से अपना फैसला वापस लेने की अपील की। राहुल गांधी ने कहा कि सरकार को इस मामले में हिम्मत दिखाते हुए UPI शुल्क व्यवस्था को वापस लेना चाहिए।

    इस मुद्दे पर कांग्रेस की ओर से भी सरकार पर सवाल उठाए गए हैं। कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने 2,000 रुपये से अधिक के मर्चेंट UPI भुगतान पर लागू होने वाली MDR व्यवस्था को लेकर भुगतान कंपनियों के संभावित लाभ का मुद्दा उठाया। उन्होंने दावा किया कि PhonePe और Google Pay का डिजिटल भुगतान बाजार में बड़ा हिस्सा है और MDR से इनके राजस्व तथा मूल्यांकन पर असर पड़ सकता है।

    हालांकि, सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि MDR को टैक्स नहीं माना जा सकता। नई व्यवस्था के तहत UPI से व्यक्ति-से-व्यक्ति यानी P2P भुगतान पूरी तरह मुफ्त रहेंगे। 2,000 रुपये तक के मर्चेंट भुगतान पर भी MDR नहीं लगेगा। छोटे व्यापारियों के लिए भी शून्य MDR की व्यवस्था जारी रहेगी। सरकार के अनुसार करीब 96 प्रतिशत मर्चेंट UPI लेनदेन नई व्यवस्था से प्रभावित नहीं होंगे।

    नई व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से लागू होगी। 2,000 रुपये से अधिक के पात्र व्यक्ति-से-व्यापारी यानी P2M लेनदेन पर सामान्य MDR दर 0.4 प्रतिशत निर्धारित की गई है। कुछ विशेष क्षेत्रों में अलग शुल्क व्यवस्था रखी गई है। उच्च मूल्य वाले पात्र लेनदेन में MDR की अधिकतम सीमा 300 रुपये प्रति लेनदेन निर्धारित की गई है।

    सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि MDR का भुगतानकर्ता ढांचे में इस्तेमाल होने वाला शुल्क है और इसे सरकार द्वारा टैक्स के रूप में वसूल नहीं किया जाएगा। व्यक्ति से व्यक्ति के बीच पैसे भेजने वाले UPI लेनदेन पर राशि की कोई सीमा लागू नहीं होगी और ऐसे भुगतान मुफ्त रहेंगे।

    छोटे व्यापारियों को भी नई व्यवस्था में राहत दी गई है। UPI QR के माध्यम से हर महीने एक लाख रुपये तक प्राप्त करने वाले पात्र छोटे व्यापारियों के लेनदेन पर शून्य MDR का प्रावधान रखा गया है। इसका उद्देश्य छोटे कारोबारियों पर अतिरिक्त भुगतान लागत का असर सीमित रखना है।

    नई व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बहस ऐसे समय में सामने आई है, जब UPI देश में डिजिटल भुगतान का प्रमुख माध्यम बन चुका है। विपक्ष इसे लेकर सरकार की नीति पर सवाल उठा रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि व्यवस्था का उद्देश्य UPI के संचालन और विस्तार को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाना है। इस पूरे मामले में राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं और नई MDR व्यवस्था के लागू होने के बाद इसके प्रभाव को लेकर चर्चा तेज हो गई है।