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  • SCO शिखर सम्मेलन में PM मोदी के पाकिस्तान दौरे पर सस्पेंस, इस्लामाबाद ने सभी सदस्य देशों को आमंत्रित करने की तैयारी शुरू की

    SCO शिखर सम्मेलन में PM मोदी के पाकिस्तान दौरे पर सस्पेंस, इस्लामाबाद ने सभी सदस्य देशों को आमंत्रित करने की तैयारी शुरू की

    नई दिल्ली । शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के आगामी शिखर सम्मेलन को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक गतिविधियां चर्चा में हैं। साल 2027 में पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में आयोजित होने वाले SCO सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शामिल होने को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है, लेकिन पाकिस्तान की ओर से सभी सदस्य देशों को आमंत्रित करने की बात कही गई है।

    पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने संकेत दिए हैं कि SCO के नियमों और प्रोटोकॉल के तहत सम्मेलन में सभी सदस्य देशों को निमंत्रण भेजा जाएगा। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने कहा कि संगठन के सभी सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्षों और शासनाध्यक्षों को सम्मेलन में आमंत्रित करना मेजबान देश की जिम्मेदारी है।

    इस बयान के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी SCO सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए पाकिस्तान जाएंगे। हालांकि, भारत की ओर से इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। प्रधानमंत्री की किसी भी विदेश यात्रा का फैसला समय, परिस्थितियों और कूटनीतिक प्राथमिकताओं के आधार पर लिया जाता है।

    SCO एक महत्वपूर्ण बहुपक्षीय संगठन है, जिसमें भारत, चीन, रूस, पाकिस्तान, ईरान सहित कई अन्य देश सदस्य हैं। इस संगठन का उद्देश्य क्षेत्रीय सहयोग, सुरक्षा, आर्थिक विकास और आपसी संबंधों को मजबूत करना है। हर साल सदस्य देशों के बीच अध्यक्षता बदलती रहती है और जिस देश के पास अध्यक्षता होती है, वही शिखर सम्मेलन की मेजबानी करता है।

    2027 में SCO की अध्यक्षता पाकिस्तान के पास रहने की संभावना है, जिसके तहत इस्लामाबाद में राष्ट्राध्यक्षों और शासनाध्यक्षों की बैठक आयोजित की जाएगी। ऐसे सम्मेलनों में सदस्य देशों के शीर्ष नेता क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा करते हैं।

    भारत और पाकिस्तान के रिश्ते लंबे समय से चुनौतीपूर्ण रहे हैं। दोनों देशों के बीच कई मुद्दों को लेकर मतभेद हैं, जिनमें सीमा सुरक्षा और आतंकवाद जैसे विषय प्रमुख हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी के पाकिस्तान दौरे का फैसला केवल SCO की बैठक तक सीमित नहीं होगा, बल्कि व्यापक कूटनीतिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर लिया जाएगा।

    इस बीच पाकिस्तान ने भारत और अन्य सदस्य देशों के साथ SCO प्रक्रिया के तहत सामान्य राजनयिक प्रोटोकॉल का पालन करने की बात कही है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता से भारत और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों के बीच संभावित बैठक को लेकर भी सवाल किया गया था, जिस पर उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसी किसी प्रस्तावित मुलाकात की जानकारी नहीं है।

    SCO की स्थापना वर्ष 2001 में हुई थी। संगठन का मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाना और क्षेत्र में शांति, स्थिरता तथा आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है। समय के साथ इसका दायरा बढ़ा है और यह एशिया के प्रमुख बहुपक्षीय मंचों में शामिल हो गया है।

    अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि भारत इस सम्मेलन को लेकर क्या रुख अपनाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संभावित भागीदारी को लेकर अंतिम फैसला आने वाले समय में भारत सरकार की कूटनीतिक रणनीति और क्षेत्रीय परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।

  • पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून की तैयारी, 10 साल जेल और 50 लाख जुर्माने के प्रावधान पर सियासत तेज

    पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून की तैयारी, 10 साल जेल और 50 लाख जुर्माने के प्रावधान पर सियासत तेज

    नई दिल्ली । देश में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। एंटी-पेपर लीक संशोधन विधेयक, 2026 को संसद के दोनों सदनों से मंजूरी मिल गई है। राज्यसभा में लंबी चर्चा के बाद विधेयक पारित किया गया। अब इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा और स्वीकृति मिलने के बाद यह कानून के रूप में लागू हो जाएगा।

    नए कानून में परीक्षा से जुड़े पेपर लीक और अन्य गंभीर अनियमितताओं पर सख्ती बढ़ाने का प्रावधान किया गया है। इसके तहत दोषी पाए जाने वाले लोगों को 10 साल तक की सजा और 50 लाख रुपये तक के जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है। सरकार का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली में विश्वास बहाल करना और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है।

    विधेयक पारित होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक वीडियो संदेश जारी कर इसे परीक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि सरकार छात्रों के भविष्य को सुरक्षित रखने और परीक्षा प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। प्रधानमंत्री ने पेपर लीक जैसी गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का संदेश दिया।

    हालांकि, प्रधानमंत्री के बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रिया भी सामने आई। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया के माध्यम से सरकार और प्रधानमंत्री पर टिप्पणी करते हुए अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने परीक्षा व्यवस्था और कानून की प्रभावशीलता को लेकर सवाल उठाए।

    राज्यसभा में इस विधेयक पर करीब सात घंटे तक चर्चा हुई। चर्चा के दौरान विपक्षी दलों ने परीक्षा एजेंसियों की कार्यप्रणाली और कानून के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर कई सवाल उठाए। कुछ दलों ने संशोधन प्रस्ताव भी पेश किए, जिन्हें सदन में मंजूरी नहीं मिली।

    केंद्रीय कार्मिक मामलों के मंत्री जितेंद्र सिंह ने चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि सरकार पेपर लीक जैसी घटनाओं को गंभीरता से ले रही है। उन्होंने कहा कि यह कानून परीक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है।

    राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) को लेकर उठाए गए सवालों पर सरकार ने कहा कि देश में पेपर लीक के ज्यादातर मामले राज्य स्तरीय भर्ती और परीक्षा एजेंसियों से जुड़े रहे हैं। सरकार के अनुसार, परीक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए तकनीक के इस्तेमाल, सुरक्षा मानकों और निगरानी तंत्र को मजबूत किया जा रहा है।

    इस संशोधन विधेयक के जरिए वर्ष 2024 में बनाए गए कानून को और प्रभावी बनाने का प्रयास किया गया है। इसमें पेपर लीक, परीक्षा में धोखाधड़ी और संगठित तरीके से गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का प्रावधान शामिल है। साथ ही मामलों की तेजी से जांच और सुनवाई के लिए विशेष व्यवस्था बनाने पर भी जोर दिया गया है।

    पेपर लीक की घटनाएं लंबे समय से छात्रों और अभ्यर्थियों के बीच चिंता का कारण रही हैं। कई बार परीक्षाओं के रद्द होने और परिणामों में देरी से लाखों छात्रों को परेशानी का सामना करना पड़ा है। ऐसे में सरकार का दावा है कि नया कानून परीक्षा प्रणाली में भरोसा बढ़ाने और भविष्य में होने वाली गड़बड़ियों को रोकने में मदद करेगा।

    अब सभी की नजर राष्ट्रपति की मंजूरी पर है। इसके बाद यह कानून लागू होने के साथ ही परीक्षा संबंधी अपराधों पर कार्रवाई के लिए नया कानूनी ढांचा प्रभावी हो जाएगा।

  • बस्तर के विकास का नया रोडमैप लेकर पीएम मोदी से मिले सीएम साय, रेल, शिक्षा, स्वास्थ्य और उद्योग पर हुई बड़ी चर्चा

    बस्तर के विकास का नया रोडमैप लेकर पीएम मोदी से मिले सीएम साय, रेल, शिक्षा, स्वास्थ्य और उद्योग पर हुई बड़ी चर्चा

    नई दिल्ली । छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर राज्य के विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। इस दौरान मुख्यमंत्री ने बस्तर के कायाकल्प की योजना और राज्य में चल रही विभिन्न विकास परियोजनाओं की जानकारी प्रधानमंत्री के सामने रखी। उन्होंने बस्तर को विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग और पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने के लिए केंद्र सरकार से सहयोग का आग्रह किया।

    मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री के सामने राज्य की तीन प्रमुख मांगें रखीं। इनमें राजनांदगांव में प्रस्तावित 10,500 करोड़ रुपये की गैस आधारित यूरिया परियोजना को जल्द मंजूरी देने का आग्रह प्रमुख रहा। मुख्यमंत्री ने बताया कि इस परियोजना के लिए भूमि उपलब्ध करा दी गई है और राज्य स्तर की सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी की जा चुकी हैं। परियोजना शुरू होने से किसानों को उर्वरक की उपलब्धता में सुविधा मिलेगी और औद्योगिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।

    इसके अलावा मुख्यमंत्री ने उन 461 गांवों को स्थायी बिजली ग्रिड से जोड़ने के लिए विशेष सहायता की मांग की, जहां सुरक्षा और भौगोलिक चुनौतियों के कारण अब तक ऑफ-ग्रिड बिजली व्यवस्था संचालित हो रही है। उन्होंने रायपुर या बस्तर में ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद की स्थापना के प्रस्ताव पर भी सकारात्मक पहल करने का अनुरोध किया।

    बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने बस्तर विजन के तहत किए जा रहे कार्यों की जानकारी देते हुए कहा कि कभी नक्सल प्रभावित क्षेत्र के रूप में पहचाने जाने वाला बस्तर अब विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि सरकारी योजनाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं, जिनसे लाखों लोगों को लाभ मिल रहा है। राशन, स्वास्थ्य बीमा, जनधन खाते, वन अधिकार और आवास जैसी योजनाओं का लाभ दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है।

    शिक्षा के क्षेत्र में हुए बदलावों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में लंबे समय से बंद पड़े स्कूलों को दोबारा शुरू किया गया है। इसके साथ ही दूरदराज के इलाकों में बेहतर शिक्षा सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए नई एजुकेशन सिटी विकसित की जा रही हैं। सरकार का लक्ष्य है कि बस्तर के बच्चों को बेहतर अवसर और आधुनिक शिक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए।

    स्वास्थ्य क्षेत्र में मुख्यमंत्री ने बताया कि विशेष स्वास्थ्य अभियान के तहत बड़ी संख्या में लोगों की जांच कर उन्हें चिकित्सा सुविधाओं से जोड़ा गया है। उन्होंने कहा कि बस्तर में स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के लिए अस्पतालों और मेडिकल संस्थानों का विस्तार किया जा रहा है, जिससे लोगों को इलाज के लिए दूर नहीं जाना पड़े।

    मुख्यमंत्री ने बस्तर में बढ़ती कनेक्टिविटी का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि सड़क, रेल और हवाई संपर्क को मजबूत करने की दिशा में लगातार काम हो रहा है। रेल परियोजनाओं, एक्सप्रेस-वे और सिंचाई योजनाओं से क्षेत्र के आर्थिक विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।

    बस्तर की संस्कृति और पर्यटन को बढ़ावा देने पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर दशहरा, चित्रकोट और तीरथगढ़ जैसे स्थलों को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने युवाओं की भागीदारी और खेल गतिविधियों को बढ़ावा देने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी भी दी।

    बैठक में छत्तीसगढ़ में बढ़ते निवेश और उद्योगों के विस्तार का मुद्दा भी प्रमुख रहा। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में नई औद्योगिक नीतियों के कारण बड़े निवेश प्रस्ताव आए हैं और कई क्षेत्रों में नई परियोजनाओं पर काम शुरू हो चुका है। एआई, डेटा सेंटर, इलेक्ट्रॉनिक्स, विनिर्माण और अन्य आधुनिक उद्योगों को बढ़ावा देने की योजना बनाई गई है।

    मुख्यमंत्री ने महिला सशक्तिकरण, डिजिटल सेवाओं और सुशासन से जुड़े कार्यों की जानकारी भी प्रधानमंत्री को दी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार नागरिकों को आसान और पारदर्शी सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार काम कर रही है।

    मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और केंद्र सरकार के सहयोग से छत्तीसगढ़ विकास के नए लक्ष्य हासिल करेगा। उन्होंने कहा कि बस्तर में हो रहे बदलाव से क्षेत्र की तस्वीर बदल रही है और आने वाले समय में यह विकास और अवसरों का केंद्र बनेगा।

  • कॉकरोच प्रोटेस्ट से जुड़े कथित आपत्तिजनक पोस्ट पर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई, पीएम मोदी के खिलाफ अभद्र भाषा मामले में एफआईआर दर्ज

    कॉकरोच प्रोटेस्ट से जुड़े कथित आपत्तिजनक पोस्ट पर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई, पीएम मोदी के खिलाफ अभद्र भाषा मामले में एफआईआर दर्ज


    नई दिल्ली । कॉकरोच प्रोटेस्ट से जुड़े कथित आपत्तिजनक पोस्ट और वीडियो को लेकर दिल्ली पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित रूप से अभद्र और आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल के आरोप में पुलिस ने मामला दर्ज किया है। इस कार्रवाई के तहत कुछ न्यूज पोर्टलों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सक्रिय कई हैंडल को नोटिस जारी कर संबंधित जानकारी मांगी गई है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच कानून के प्रावधानों के तहत आगे बढ़ाई जा रही है।

    पुलिस के अनुसार दर्ज एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कथित आपत्तिजनक वीडियो और पोस्ट सबसे पहले किस माध्यम से प्रसारित किए गए, उन्हें किन-किन सोशल मीडिया खातों से साझा किया गया और उनका मूल स्रोत क्या था। इस संबंध में संबंधित व्यक्तियों और संस्थाओं से आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने के लिए नोटिस भी भेजे गए हैं।

    प्राथमिक जानकारी के अनुसार आरोप है कि कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) से जुड़े एक विरोध प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री के खिलाफ कथित रूप से अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया। इसके बाद उससे जुड़े वीडियो और अन्य सामग्री सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म पर प्रसारित हुई। जांच के दौरान पुलिस ने संबंधित प्लेटफॉर्म से ऐसे वीडियो हटाने और उनके प्रसार से जुड़ी तकनीकी जानकारी उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि संबंधित सामग्री किन खातों के माध्यम से व्यापक स्तर पर साझा की गई।

    दिल्ली पुलिस की सोशल मीडिया मॉनिटरिंग टीम लगातार विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सामग्री की निगरानी कर रही है। अधिकारियों के अनुसार यदि किसी पोस्ट या वीडियो में कानून का उल्लंघन या आपत्तिजनक सामग्री पाए जाने की आशंका होती है, तो संबंधित सोशल मीडिया इंटरमीडियरी को नोटिस जारी कर आवश्यक कार्रवाई के लिए कहा जाता है। अधिकारियों का दावा है कि ऐसे कई पोस्ट और वीडियो पहले ही हटाए जा चुके हैं, जिनमें प्रधानमंत्री के खिलाफ कथित रूप से अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया था।

    इसी क्रम में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से जुड़े एक अन्य मामले का भी उल्लेख सामने आया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 23 जुलाई को साझा की गई एक सेल्फी वीडियो कुछ समय के लिए प्लेटफॉर्म से हटाए जाने के बाद केंद्र सरकार ने संबंधित कंपनी से स्पष्टीकरण मांगा था। कंपनी ने इसे तकनीकी त्रुटि बताते हुए खेद व्यक्त किया, लेकिन सरकार ने उपलब्ध कराए गए जवाब को पर्याप्त नहीं माना और विस्तृत जानकारी की मांग की।

    मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित कंपनी के अधिकारी को भी तलब किया गया है। सरकार का कहना है कि वह इस पूरे घटनाक्रम से जुड़े तकनीकी और प्रशासनिक पहलुओं की विस्तृत जानकारी चाहती है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि संबंधित सामग्री हटाने की परिस्थितियां क्या थीं और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न हो। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस का कहना है कि कॉकरोच प्रोटेस्ट से जुड़े कथित आपत्तिजनक पोस्ट और वीडियो की जांच तथ्यों एवं उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ाई जा रही है। जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई नियमानुसार की जाएगी।

  • विकसित भारत के लिए मंत्रालयों में बेहतर तालमेल, स्वदेशी तकनीक और साइबर सुरक्षा पर जोर: प्रधानमंत्री मोदी

    विकसित भारत के लिए मंत्रालयों में बेहतर तालमेल, स्वदेशी तकनीक और साइबर सुरक्षा पर जोर: प्रधानमंत्री मोदी


    नई दिल्ली।
    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को केंद्र सरकार के सचिवों के साथ दूसरी उच्चस्तरीय बैठक में विकसित भारत के लक्ष्य को तेजी से हासिल करने के लिए मंत्रालयों के बीच बेहतर तालमेल, महत्वपूर्ण क्षेत्रों में स्वदेशी तकनीक के विकास, ऊर्जा आत्मनिर्भरता, साइबर सुरक्षा को मजबूत करने और रणनीतिक क्षेत्रों से जुड़ी गलत सूचनाओं का प्रभावी जवाब देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सरकार को हमेशा युवा सोच, गतिशील और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप काम करना चाहिए।

    प्रधानमंत्री ने अपने आवास पर बैठक में वित्त एवं अर्थव्यवस्था, वाणिज्य एवं उद्योग तथा प्रौद्योगिकी से जुड़े मंत्रालयों के कामकाज और विकसित भारत के लक्ष्य को आगे बढ़ाने की रणनीति पर चर्चा की।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि सभी मंत्रालयों और विभागों को टीम भावना के साथ काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि विभागों के बीच बेहतर तालमेल होगा तो योजनाओं का लाभ लोगों तक तेजी और प्रभावी ढंग से पहुंचेगा।

    उन्होंने कहा कि सरकार की हर नीति और फैसला आम नागरिक को ध्यान में रखकर होना चाहिए। लोगों का हित और उनकी अपेक्षाएं ही शासन का आधार होना चाहिए।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में बुनियादी ढांचे का तेजी से विकास हो रहा है, लेकिन इसके साथ ही स्वदेशी तकनीक को बढ़ावा देना भी जरूरी है। उन्होंने महत्वपूर्ण क्षेत्रों में देश की अपनी तकनीकी क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया।

    उन्होंने कहा कि ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनना राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक मजबूती और लोगों के हित के लिए जरूरी है। इसके लिए नवाचार, नए ऊर्जा स्रोतों और क्षमता बढ़ाने पर ध्यान देना होगा।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि अच्छी व्यवस्था के लिए समय-समय पर सुधार जरूरी हैं। कार्यप्रणाली, कामकाज की संस्कृति और संस्थागत क्षमता में लगातार सुधार किया जाना चाहिए।

    उन्होंने कहा कि डिजिटल तकनीक के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर सुरक्षा को भी मजबूत करना होगा। उन्होंने युवाओं, स्टार्टअप और नवाचार करने वाले उद्यमियों को साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में आगे आने का आह्वान किया।

    प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि रणनीतिक क्षेत्रों में सरकार की बड़ी पहलों के बारे में सही जानकारी लोगों तक समय पर पहुंचनी चाहिए, ताकि गलत सूचनाओं और अफवाहों का प्रभावी ढंग से मुकाबला किया जा सके।

    उन्होंने कहा कि भविष्य के उद्योगों की जरूरतों के अनुसार उद्योग जगत के सहयोग से नए शैक्षणिक पाठ्यक्रम तैयार किए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार को हमेशा नई सोच के साथ काम करना चाहिए और बदलती चुनौतियों के अनुसार खुद को लगातार तैयार रखना चाहिए।

    बैठक में विभिन्न मंत्रालयों के सचिवों ने अपने-अपने क्षेत्रों की प्रगति, प्राथमिकताओं, नई संभावनाओं और कामकाज में आने वाली चुनौतियों पर अपने विचार रखे। बैठक में कैबिनेट सचिव, विभिन्न मंत्रालयों के सचिव, प्रधानमंत्री कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारी और अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।

    बैठक के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा कि बैठक में वित्त एवं अर्थव्यवस्था, वाणिज्य एवं उद्योग तथा प्रौद्योगिकी जैसे अहम क्षेत्रों पर चर्चा हुई। उन्होंने नागरिक-केंद्रित शासन, बेहतर बुनियादी ढांचे, स्वदेशी तकनीक के विकास और युवाओं की अधिक भागीदारी पर जोर देने की बात कही।

  • एंटी पेपर लीक विधेयक पर चर्चा से पहले एनडीए बैठक में शामिल हुए नए सहयोगी सांसद, पीएम मोदी की मौजूदगी में हुई रणनीतिक चर्चा

    एंटी पेपर लीक विधेयक पर चर्चा से पहले एनडीए बैठक में शामिल हुए नए सहयोगी सांसद, पीएम मोदी की मौजूदगी में हुई रणनीतिक चर्चा

    नई दिल्ली । संसद के मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में एंटी पेपर लीक विधेयक पर चर्चा से पहले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) की साप्ताहिक ‘मंगल मिलन’ बैठक आयोजित की गई। संसद भवन परिसर स्थित लाइब्रेरी भवन में हुई इस बैठक की खास बात यह रही कि पहली बार एनसीपीआई के सांसद भी इसमें शामिल हुए। ये सांसद पहले तृणमूल कांग्रेस से जुड़े थे और बाद में अपनी नई राजनीतिक भूमिका के तहत एनडीए का समर्थन कर चुके हैं।

    बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी सहित कई वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री और एनडीए के सांसद मौजूद रहे। संसदीय रणनीति और आगामी विधायी कार्यों को लेकर हुई इस बैठक में गठबंधन के सहयोगी दलों के बीच समन्वय बढ़ाने और संसद में प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करने पर चर्चा की गई।

    बैठक में शामिल होने के बाद एनसीपीआई सांसद सायोनी घोष ने इसे सकारात्मक और ज्ञानवर्धक अनुभव बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में हुई चर्चा से कई महत्वपूर्ण विषयों को समझने का अवसर मिला। उनके अनुसार बैठक में मुक्त व्यापार समझौतों सहित विभिन्न राष्ट्रीय मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया, जिससे सांसदों को व्यापक दृष्टिकोण प्राप्त हुआ।

    सायोनी घोष के साथ एनसीपीआई की अन्य सांसद काकोली घोष और शताब्दी रॉय भी पहली बार एनडीए संसदीय दल की बैठक में शामिल हुईं। तीनों सांसद पहले तृणमूल कांग्रेस का हिस्सा थीं। एनसीपीआई में शामिल होने के बाद उन्होंने एनडीए के प्रति अपना समर्थन दोहराया और गठबंधन की संसदीय गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी की शुरुआत की।

    बैठक के दौरान सरकार ने सांसदों से ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अमेंडमेंट बिल, 2026’ के समर्थन की भी अपील की। यह विधेयक सार्वजनिक परीक्षाओं में होने वाली गड़बड़ियों और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से लाया गया है। सरकार का कहना है कि इस कानून के जरिए परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, विश्वसनीयता और छात्रों के भविष्य की सुरक्षा को और मजबूत किया जाएगा।

    प्रस्तावित संशोधनों के तहत परीक्षा में अनियमितताओं के मामलों में कड़े दंड का प्रावधान किया गया है। इसमें दोषी पाए जाने पर लंबी अवधि की सजा, भारी आर्थिक दंड, अवैध गतिविधियों से जुड़ी संपत्ति जब्त करने तथा मामलों के शीघ्र निपटारे की व्यवस्था जैसे प्रावधान शामिल हैं। सरकार का मानना है कि इन उपायों से संगठित परीक्षा अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सकेगा।

    यह बैठक ऐसे समय आयोजित हुई, जब संसद के भीतर एंटी पेपर लीक विधेयक पर चर्चा की तैयारी चल रही है और दूसरी ओर विपक्ष जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन तथा प्रदर्शन के दौरान कथित पुलिस बल प्रयोग के मुद्दे को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है। ऐसे राजनीतिक माहौल में एनडीए की यह बैठक संसदीय समन्वय और रणनीतिक तैयारी के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    ‘मंगल मिलन’ बैठक एनडीए संसदीय दल की नियमित रणनीतिक बैठक का नया स्वरूप है। इसका उद्देश्य सहयोगी दलों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना, संसद में विभिन्न विषयों पर प्रभावी चर्चा सुनिश्चित करना और फ्लोर मैनेजमेंट को मजबूत बनाना है। साथ ही यह मंच गठबंधन के सभी घटक दलों को अपनी भूमिका स्पष्ट करने, जिम्मेदारियों का समन्वय करने और संसद के भीतर साझा रणनीति के साथ आगे बढ़ने का अवसर भी प्रदान करता है।

  • 'मन की बात' के 136वें एपिसोड की एनडीए नेताओं ने की सराहना, बोले- समाज के सकारात्मक प्रयासों को मिलती है राष्ट्रीय पहचान

    'मन की बात' के 136वें एपिसोड की एनडीए नेताओं ने की सराहना, बोले- समाज के सकारात्मक प्रयासों को मिलती है राष्ट्रीय पहचान

    नई दिल्ली ।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 136वें एपिसोड को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के कई नेताओं ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने इस कार्यक्रम को जनभागीदारी, सामाजिक जागरूकता और राष्ट्र निर्माण को प्रोत्साहित करने वाला प्रभावी मंच बताया। नेताओं का कहना है कि यह कार्यक्रम राजनीति से अलग समाज के सकारात्मक प्रयासों, नवाचारों और प्रेरणादायी कहानियों को राष्ट्रीय पहचान देने का कार्य करता है।

    भाजपा नेताओं ने कहा कि ‘मन की बात’ के माध्यम से देश के अलग-अलग हिस्सों में हो रहे उल्लेखनीय कार्यों को व्यापक स्तर पर सामने लाया जाता है। उनका मानना है कि इस कार्यक्रम से आम नागरिकों, सामाजिक संगठनों और स्थानीय स्तर पर काम कर रहे लोगों के प्रयासों को सम्मान मिलता है, जिससे अन्य लोगों को भी प्रेरणा मिलती है। उन्होंने इसे समाज में सकारात्मक सोच विकसित करने का माध्यम बताया।

    छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कार्यक्रम में राज्य से जुड़े विभिन्न प्रयासों का उल्लेख किए जाने पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि हाल के महीनों में बस्तर ओलंपिक्स, बस्तर पांडुम, मल्हार से जुड़े ऐतिहासिक संदर्भ और इस बार जल संरक्षण अभियान के तहत कोरबा की पहल का जिक्र राज्य के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने स्थानीय मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमाओं और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने की अपील को भी महत्वपूर्ण बताया।

    त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने कहा कि ‘मन की बात’ की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सकारात्मक सोच और जनता से लगातार संवाद बनाए रखना है। उनके अनुसार, कार्यक्रम में त्रिपुरा में स्वदेशी रूप से तैयार किए गए पहले संगीत वाद्ययंत्र का उल्लेख होने से राज्य के कारीगरों और कलाकारों का उत्साह बढ़ा है। उन्होंने इसे स्थानीय प्रतिभाओं को राष्ट्रीय पहचान दिलाने वाला प्रयास बताया।

    केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कार्यक्रम में कारगिल विजय दिवस के अवसर पर वीर सैनिकों को दी गई श्रद्धांजलि, पूर्व राष्ट्रपति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के योगदान के स्मरण और राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के संदर्भ को विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय हस्तशिल्प, हथकरघा और स्वदेशी उत्पादों को प्रोत्साहित करने का संदेश देश के कारीगरों के लिए उत्साहवर्धक है।

    केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि कार्यक्रम में राजनीतिक विषयों के बजाय समाज के विभिन्न वर्गों द्वारा किए जा रहे प्रेरक कार्यों को प्रमुखता दी जाती है। उन्होंने जल संरक्षण, वृक्षारोपण, स्थानीय उत्पादों और पारंपरिक हस्तशिल्प जैसे विषयों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने को इस कार्यक्रम की विशेषता बताया। वहीं भाजपा सांसद राधामोहन दास अग्रवाल ने कहा कि कार्यक्रम नागरिकों के योगदान को महत्व देता है और वर्षों से देशभर की प्रेरक कहानियों को लोगों तक पहुंचा रहा है।

    उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री स्वतंत्र देव सिंह ने ‘मन की बात’ को दुनिया के लोकप्रिय मासिक कार्यक्रमों में से एक बताते हुए कहा कि इसके माध्यम से ऐसे लोगों की प्रेरक कहानियां सामने आती हैं, जिनकी मेहनत और उपलब्धियां सामान्यतः चर्चा में नहीं आ पातीं। वहीं बिहार सरकार के मंत्री दिलीप जायसवाल ने इसे देश के विभिन्न क्षेत्रों और समुदायों को जोड़ने वाला मंच बताया। पूर्व मंत्री राजेंद्र प्रताप सिंह ने कारगिल विजय दिवस पर वीर सैनिकों के साहस और बलिदान को याद करने को नई पीढ़ी के लिए प्रेरणादायी संदेश बताया।

  • इंडोनेशिया के साथ रक्षा समझौतों का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा, वैश्विक स्तर पर बढ़ी भारतीय रक्षा तकनीक की साख

    इंडोनेशिया के साथ रक्षा समझौतों का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा, वैश्विक स्तर पर बढ़ी भारतीय रक्षा तकनीक की साख

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को प्रसारित ‘मन की बात’ कार्यक्रम के 136वें एपिसोड में भारत की बढ़ती रक्षा क्षमताओं और स्वदेशी रक्षा तकनीक पर दुनिया के बढ़ते विश्वास का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि रक्षा उत्पादन, रक्षा निर्यात और मित्र देशों के साथ रणनीतिक सहयोग के क्षेत्र में भारत लगातार नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है। प्रधानमंत्री ने हाल ही में हुई अपनी इंडोनेशिया यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच ब्रह्मोस और अस्त्र मिसाइलों से जुड़े महत्वपूर्ण समझौते भारत की रक्षा तकनीक पर वैश्विक भरोसे को दर्शाते हैं।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का रक्षा क्षेत्र अब केवल घरेलू जरूरतों तक सीमित नहीं है, बल्कि देश स्वदेशी तकनीक के दम पर मित्र देशों के लिए भी एक भरोसेमंद रक्षा साझेदार बनकर उभर रहा है। उन्होंने कहा कि आधुनिक रक्षा उपकरणों के विकास और निर्यात में भारत की बढ़ती भागीदारी आत्मनिर्भर भारत अभियान की सफलता को भी मजबूत कर रही है।

    इंडोनेशिया के साथ हुए समझौतों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने बताया कि दोनों देशों ने ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल और अस्त्र एयर-टू-एयर मिसाइल से जुड़े महत्वपूर्ण रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाया है। इसके अलावा समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने के लिए भी दोनों देशों ने साझा रूपरेखा तैयार की है। उन्होंने कहा कि इस तरह के समझौते भारत की तकनीकी क्षमता और वैश्विक विश्वसनीयता को नई पहचान दे रहे हैं।

    प्रधानमंत्री मोदी ने कारगिल विजय दिवस के अवसर पर वर्ष 1999 के युद्ध में शहीद हुए सैनिकों को श्रद्धांजलि भी अर्पित की। उन्होंने कहा कि 26 जुलाई हर भारतीय के लिए गर्व का दिन है, क्योंकि इसी दिन भारतीय सैनिकों ने कठिन परिस्थितियों में अदम्य साहस और वीरता का परिचय देते हुए कारगिल की चोटियों पर विजय प्राप्त की थी। उन्होंने कहा कि देश अपने वीर सैनिकों के बलिदान को कभी नहीं भूल सकता और नई पीढ़ी तक उनकी गाथाएं पहुंचाना सभी की जिम्मेदारी है।

    उन्होंने बताया कि इसी उद्देश्य से इस वर्ष विशेष ‘शौर्य विजय यात्रा’ का आयोजन किया गया है। यह मोटरसाइकिल अभियान राष्ट्रीय युद्ध स्मारक, नई दिल्ली से शुरू होकर कारगिल युद्ध स्मारक, द्रास तक पहुंचेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह अभियान देशवासियों को सैनिकों के बलिदान और राष्ट्र के प्रति उनके समर्पण की याद दिलाने का माध्यम बनेगा।

    प्रधानमंत्री ने भारतीय नौसेना में शामिल आधुनिक युद्धपोत आईएनएस महेंद्रगिरी का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह युद्धपोत भारत में डिजाइन और निर्मित किया गया है तथा इसमें 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग हुआ है। उनके अनुसार यह भारत की बढ़ती तकनीकी क्षमता और रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का सशक्त उदाहरण है।

    उन्होंने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन द्वारा विकसित पिनाका लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट प्रणाली और अन्य स्वदेशी रक्षा प्रणालियों का भी जिक्र किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि इन उपलब्धियों के पीछे भारतीय वैज्ञानिकों और इंजीनियरों की वर्षों की मेहनत और नवाचार की भावना है। उन्होंने हाल में सफल रहे स्वदेशी मिसाइल परीक्षणों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत लगातार अपनी रक्षा तैयारियों को आधुनिक और सशक्त बना रहा है।

    प्रधानमंत्री ने देशवासियों से कारगिल विजय दिवस के अवसर पर वीर शहीदों को श्रद्धांजलि देने और सुरक्षित, सक्षम तथा आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के संकल्प को और मजबूत करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत अपने सैनिकों के साहस और स्वदेशी तकनीक की शक्ति के बल पर वैश्विक मंच पर नई पहचान बना रहा है।

  • कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के लिए पीएम मोदी का भारतीय दल को संदेश, कहा- खिलाड़ियों का जज्बा देश को नई प्रेरणा देगा

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के लिए पीएम मोदी का भारतीय दल को संदेश, कहा- खिलाड़ियों का जज्बा देश को नई प्रेरणा देगा

    नई दिल्ली । कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के शुभारंभ के साथ भारत ने भी अपने अभियान की शुरुआत कर दी है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय दल को शुभकामनाएं देते हुए विश्वास जताया कि देश के खिलाड़ी पूरे जोश, दृढ़ संकल्प और उत्कृष्ट प्रदर्शन के साथ प्रतियोगिता में उतरेंगे। उन्होंने कहा कि भारतीय एथलीट केवल पदक जीतने के लिए ही नहीं, बल्कि अपने अनुशासन, मेहनत और समर्पण से देश के करोड़ों लोगों को प्रेरित करने के लिए भी पहचाने जाते हैं। प्रधानमंत्री का यह संदेश ऐसे समय आया है जब भारतीय खेल जगत की निगाहें ग्लासगो में होने वाले मुकाबलों पर टिकी हैं।

    प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि भारतीय खिलाड़ियों की प्रतिभा और कठिन परिश्रम हमेशा देशवासियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस बार भी भारतीय दल खेल भावना का परिचय देते हुए शानदार प्रदर्शन करेगा और अंतरराष्ट्रीय मंच पर तिरंगे का मान बढ़ाएगा। उनके संदेश को खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों के लिए उत्साहवर्धक माना जा रहा है।

    स्कॉटलैंड के ग्लासगो शहर में आयोजित कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का उद्घाटन रंगारंग समारोह के साथ हुआ। उद्घाटन की औपचारिक घोषणा किंग चार्ल्स तृतीय ने की। वर्ष 2014 के बाद दूसरी बार ग्लासगो इस बहु-खेल प्रतियोगिता की मेजबानी कर रहा है। उद्घाटन समारोह में विभिन्न देशों के खिलाड़ियों ने परेड ऑफ नेशंस में भाग लिया और अपनी सांस्कृतिक पहचान का प्रदर्शन किया।

    भारतीय दल की अगुवाई इस बार ओलंपिक पदक विजेता मीराबाई चानू और मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन ने की। मीराबाई चानू ने हाथों में तिरंगा लेकर भारतीय खिलाड़ियों का नेतृत्व किया, जबकि लवलीना बोरगोहेन ने कॉमनवेल्थ बैटन के साथ समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व किया। दोनों खिलाड़ियों की मौजूदगी ने भारतीय दल का उत्साह और बढ़ा दिया।

    भारत ने इस बार 126 सदस्यीय दल भेजा है, जो पैरा स्पोर्ट्स सहित 13 खेलों में चुनौती पेश करेगा। भारतीय खिलाड़ियों का लक्ष्य कॉमनवेल्थ खेलों में अपने मजबूत प्रदर्शन की परंपरा को आगे बढ़ाना है। प्रतियोगिता के शुरुआती चरण में ही भारत का अभियान शुरू हो चुका है और कुछ खिलाड़ियों ने प्रभावशाली शुरुआत भी की है। मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन पहले ही सेमीफाइनल में पहुंचकर भारत के लिए एक पदक सुनिश्चित कर चुकी हैं, जिससे दल का आत्मविश्वास बढ़ा है।

    भारत की पदक उम्मीदें कई अनुभवी और स्टार खिलाड़ियों पर टिकी हैं। भाला फेंक में नीरज चोपड़ा, वेटलिफ्टिंग में मीराबाई चानू और मुक्केबाजी में लवलीना बोरगोहेन से शानदार प्रदर्शन की अपेक्षा की जा रही है। इनके अलावा कई युवा खिलाड़ी भी पहली बार बड़े अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी प्रतिभा दिखाने के लिए तैयार हैं। खेल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भारतीय खिलाड़ी अपनी क्षमता के अनुरूप प्रदर्शन करते हैं तो इस बार भी पदक तालिका में भारत मजबूत स्थान हासिल कर सकता है।

    कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में 74 देशों और क्षेत्रों के खिलाड़ी 11 दिनों तक विभिन्न खेलों में प्रतिस्पर्धा करेंगे। यह आयोजन न केवल खिलाड़ियों के कौशल की परीक्षा है, बल्कि खेल भावना, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का भी महत्वपूर्ण मंच माना जाता है। भारतीय दल का लक्ष्य बेहतर प्रदर्शन के साथ देश का गौरव बढ़ाना और वैश्विक खेल मंच पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराना रहेगा।

  • पेपर लीक मामलों में फास्ट ट्रैक कोर्ट के फैसले का मंत्रियों ने किया स्वागत, युवाओं के हित में बताया बड़ा कदम

    पेपर लीक मामलों में फास्ट ट्रैक कोर्ट के फैसले का मंत्रियों ने किया स्वागत, युवाओं के हित में बताया बड़ा कदम

    नई दिल्ली । पेपर लीक के मामलों में त्वरित सुनवाई और दोषियों को शीघ्र सजा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन के केंद्र सरकार के फैसले को केंद्रीय मंत्रिपरिषद के कई वरिष्ठ सदस्यों ने महत्वपूर्ण कदम बताया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश के बाद संबंधित विभागों द्वारा आवश्यक प्रक्रिया शुरू किए जाने की बात कही गई है। मंत्रियों का कहना है कि यह व्यवस्था युवाओं के भविष्य की सुरक्षा और भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता को मजबूत करने की दिशा में अहम भूमिका निभाएगी।

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि देश के युवाओं का भविष्य सुरक्षित रखना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। उनके अनुसार, पेपर लीक जैसे मामलों में तेजी से न्याय सुनिश्चित करने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन युवाओं को सशक्त बनाने की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था से ऐसे लोगों के खिलाफ शीघ्र और कठोर कार्रवाई संभव होगी जो युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करते हैं।

    केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने भी इस निर्णय का समर्थन करते हुए कहा कि युवाओं का हित और उनका उज्ज्वल भविष्य सरकार के संकल्प का हिस्सा है। उनके अनुसार, फास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से पेपर लीक के मामलों में त्वरित सुनवाई और दोषियों को सख्त दंड देने की व्यवस्था लागू होने से भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और विश्वास को मजबूती मिलेगी। उन्होंने इसे युवाओं के हित में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम बताया।

    केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि सरकार युवाओं के भविष्य की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उनके अनुसार, पेपर लीक जैसी गंभीर चुनौती से निपटने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई का निर्णय सरकार की संवेदनशीलता और जवाबदेही को दर्शाता है। उन्होंने इस मुद्दे पर विपक्ष की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इस विषय पर सार्थक चर्चा होनी चाहिए।

    कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि देश की युवा शक्ति विकसित भारत की सबसे बड़ी पूंजी है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक के मामलों में त्वरित न्याय सुनिश्चित करने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन एक महत्वपूर्ण पहल है। उनके अनुसार, सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को कानून के दायरे से बाहर न रहने दिया जाए।

    पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि सरकार का यह निर्णय युवाओं के विश्वास और उनके सपनों की रक्षा के लिए उठाया गया कदम है। उन्होंने कहा कि त्वरित न्यायिक प्रक्रिया से भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता और निष्पक्षता को बढ़ावा मिलेगा। वहीं केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि फास्ट ट्रैक कोर्ट यह सुनिश्चित करेंगे कि पेपर लीक में शामिल लोगों को शीघ्र सजा मिले और युवाओं को निष्पक्ष अवसर प्राप्त हों।

    केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने भी इस मुद्दे पर विपक्ष की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार ने केवल बयानबाजी नहीं बल्कि व्यवस्था को मजबूत करने के लिए ठोस कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि कड़े कानूनों के बाद अब फास्ट ट्रैक कोर्ट का निर्णय न्याय प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाएगा। साथ ही उन्होंने कहा कि संसद इस विषय पर चर्चा के लिए सर्वोत्तम मंच है और युवाओं को राजनीतिक विवाद नहीं बल्कि निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली और समयबद्ध न्याय की आवश्यकता है।