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  • BRICS में ईरानी पत्रकार ने पाकिस्तान पर उठाए सवाल, बोले- पीएम मोदी की कूटनीति के आगे आसिम मुनीर की भूमिका कमजोर

    BRICS में ईरानी पत्रकार ने पाकिस्तान पर उठाए सवाल, बोले- पीएम मोदी की कूटनीति के आगे आसिम मुनीर की भूमिका कमजोर

    नई दिल्ली ।भारत की मेजबानी में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान पश्चिम एशिया के बदलते कूटनीतिक समीकरणों को लेकर भी चर्चा हुई। ईरान से आए पत्रकार बसीम लालेह ने पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि पश्चिम एशिया के संकट के बीच भारत संवाद और कूटनीति के स्तर पर अधिक प्रभावी भूमिका निभा रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की कूटनीतिक सक्रियता की सराहना की और पाकिस्तान के सैन्य प्रमुख आसिम मुनीर पर भी टिप्पणी की।

    लालेह के मुताबिक, ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के दौरान पाकिस्तान ने मध्यस्थता में अपनी भूमिका को प्रमुखता से पेश करने की कोशिश की, लेकिन वह इसमें सफल नहीं रहा। इसके विपरीत, भारत ने विभिन्न देशों के साथ सीधे संवाद के जरिए अपनी कूटनीतिक स्थिति मजबूत की है। उन्होंने कहा कि BRICS सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की ईरान और यूएई के नेताओं के साथ बातचीत इसका उदाहरण है।

    ईरानी पत्रकार ने बताया कि भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन के बीच बातचीत हुई। इसके साथ ही अबू धाबी के क्राउन प्रिंस के साथ भी प्रधानमंत्री की चर्चा हुई। उनके अनुसार, इसके बाद यूएई और ईरान के बीच बातचीत का रास्ता बनना पश्चिम एशिया में भारत की कूटनीतिक भूमिका को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि होर्मुज और खाड़ी क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर भी संवाद के जरिए आगे बढ़ने की संभावना बन सकती है।

    आसिम मुनीर को लेकर लालेह ने तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि मुनीर कई मोर्चों पर असफल रहे हैं और भारत की बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता के बाद पश्चिम एशिया में पाकिस्तान की भूमिका कमजोर पड़ती दिखाई दे रही है। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने आसिम मुनीर की छुट्टी कर दी है। हालांकि, यह टिप्पणी राजनीतिक और कूटनीतिक प्रभाव के संदर्भ में की गई थी।

    लालेह ने BRICS सम्मेलन की मेजबानी और प्रधानमंत्री मोदी की कूटनीति की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि भारत ने मतभेदों को पीछे छोड़कर बातचीत और सहयोग पर जोर दिया है। उनके मुताबिक, पश्चिम एशिया में जारी संकट के समाधान के लिए संवाद महत्वपूर्ण है और भारत इस दिशा में उपयोगी भूमिका निभा सकता है। उन्होंने उम्मीद जताई कि अगले दो महीनों में क्षेत्र में चल रहे संघर्ष को लेकर सकारात्मक बदलाव दिखाई दे सकते हैं।

    पाकिस्तान की विदेश नीति पर सवाल उठाते हुए लालेह ने कहा कि पाकिस्तान खुद कई मामलों में दूसरे देशों पर निर्भर है। उनके अनुसार, इसी वजह से पाकिस्तान के लिए स्वतंत्र तरीके से विदेश नीति तय करना मुश्किल है। उन्होंने पाकिस्तान की कूटनीति को कमजोर बताते हुए कहा कि वह क्षेत्रीय शांति को लेकर कोई प्रभावी उदाहरण स्थापित नहीं कर पाया है।

    ईरानी पत्रकार ने पाकिस्तान पर आतंकवाद के मुद्दे को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जो देश आतंकवाद से जुड़े आरोपों का सामना करता रहा है, उसके लिए शांति की पहल का नेतृत्व करना मुश्किल होता है। उन्होंने पश्चिम एशिया में पाकिस्तान की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को लगातार अधिक महत्व मिल रहा है।

    लालेह ने सऊदी अरब की सुरक्षा से जुड़े घटनाक्रम का भी जिक्र किया। उनके मुताबिक, सऊदी अरब पर हमले करने वालों के खिलाफ पाकिस्तान अपेक्षित भूमिका नहीं निभा पाया है। उन्होंने सऊदी क्राउन प्रिंस के साथ पाकिस्तान और तुर्की से जुड़े मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट का भी उल्लेख किया और कहा कि इस मामले में पाकिस्तान की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

    BRICS सम्मेलन के दौरान भारत की सक्रिय कूटनीति और पश्चिम एशिया में बदलते समीकरणों के बीच पाकिस्तान की भूमिका पर बहस तेज है। ईरानी पत्रकार बसीम लालेह की टिप्पणियों ने इस चर्चा को और बढ़ा दिया है। वहीं, भारत की ओर से विभिन्न देशों के साथ संवाद और सहयोग बढ़ाने की कोशिशों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नजर बनी हुई है।

  • कंगना रनौत ने राखी सावंत के बयान पर किया पलटवार, बोलीं- सफल महिलाओं के चरित्र पर सवाल उठाना बंद करें

    कंगना रनौत ने राखी सावंत के बयान पर किया पलटवार, बोलीं- सफल महिलाओं के चरित्र पर सवाल उठाना बंद करें

    नई दिल्ली ।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कंगना रनौत और स्मृति ईरानी को लेकर राखी सावंत की विवादित टिप्पणी के बाद मामला चर्चा में आ गया है। राखी की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए कंगना रनौत ने सोशल मीडिया के जरिए पलटवार किया और सफल महिलाओं के चरित्र पर सवाल उठाने की प्रवृत्ति पर निशाना साधा।

    यह पूरा विवाद एक पॉडकास्ट में हुई बातचीत के बाद शुरू हुआ। बातचीत के दौरान राखी सावंत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कई महिला नेताओं को लेकर टिप्पणी की। उन्होंने प्रधानमंत्री से सवाल करते हुए कंगना रनौत और स्मृति ईरानी का जिक्र किया और पूछा कि उन्हें मंत्री बनाने के लिए इन महिलाओं ने क्या दिया है।

    राखी ने अपनी टिप्पणी में कहा कि अगर इन महिलाओं ने प्रधानमंत्री को कुछ दिया है तो वह भी ऐसा कर सकती हैं। उनके इस बयान के बाद विवाद बढ़ गया और सोशल मीडिया पर उनकी आलोचना होने लगी। इसी विवाद के बीच कंगना रनौत ने अपनी प्रतिक्रिया सामने रखी।

    कंगना ने सोशल मीडिया स्टोरी के जरिए राखी के बयान का जवाब दिया। उन्होंने कहा कि केवल राखी ही नहीं, बल्कि कई असफल और कड़वाहट से भरे लोग सफल महिलाओं के चरित्र पर सवाल उठाकर अपनी जलन, ईर्ष्या, असफलता और अहंकार को सही साबित करने की कोशिश करते हैं।

    कंगना ने आगे कहा कि अब समय आ गया है कि लोग लगातार और जानबूझकर किए जाने वाले ऐसे हमलों के सामने कमजोर पड़ना बंद करें। उन्होंने लोगों से ऐसी बातों के कारण खुद को अपमानित या आहत महसूस करना बंद करने और हर बात पर सफाई देने की जरूरत नहीं समझने की बात कही।

    इसके बाद कंगना ने राखी सावंत पर सीधे तौर पर निशाना साधते हुए सफलता और प्रतिभा को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि केवल किसी को खुश करने या किसी तरह का फायदा पहुंचाने की कोशिश से सफलता हासिल नहीं की जा सकती।

    कंगना ने अपनी पोस्ट में राखी को संबोधित करते हुए कहा कि सफलता के लिए कोई भी कुछ करने को तैयार हो सकता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि सामने वाले को उसकी जरूरत होगी। उन्होंने यह भी कहा कि केवल किसी को दिए गए फेवर किसी व्यक्ति को नौकरी तक नहीं दिला सकते, क्योंकि उसके लिए भी गुणवत्ता और प्रतिभा जरूरी होती है।

    कंगना ने अपनी प्रतिक्रिया में यह भी कहा कि राखी चाहे फेवर करें या न करें, इससे उनके लिए कोई बदलाव नहीं होने वाला। उन्होंने राखी को अपनी रील्स देखने और रोते रहने की बात भी कही।

    इस पूरे विवाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कंगना रनौत और स्मृति ईरानी का नाम राखी सावंत की टिप्पणी के कारण सामने आया। इसके बाद कंगना ने अपने जवाब में सफल महिलाओं के खिलाफ होने वाली व्यक्तिगत टिप्पणियों और चरित्र पर सवाल उठाने की प्रवृत्ति को मुद्दा बनाया।

    राखी की टिप्पणी और कंगना की प्रतिक्रिया के बाद दोनों के बीच बयानबाजी चर्चा में है। कंगना ने अपने जवाब में जहां महिलाओं की सफलता और प्रतिभा का मुद्दा उठाया, वहीं राखी की टिप्पणी पर सीधे तौर पर अपनी नाराजगी भी जाहिर की।

  • राखी सावंत के पीएम मोदी पर बयान से भड़कीं कंगना रनौत, बोलीं- सफल महिलाओं का चरित्र हनन करना बंद करें

    राखी सावंत के पीएम मोदी पर बयान से भड़कीं कंगना रनौत, बोलीं- सफल महिलाओं का चरित्र हनन करना बंद करें

    नई दिल्ली ।एक्ट्रेस और बीजेपी सांसद कंगना रनौत ने राखी सावंत की एक पॉडकास्ट में की गई टिप्पणी पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। राखी ने बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कंगना रनौत और स्मृति ईरानी का नाम लेते हुए ऐसी टिप्पणी की थी, जिसके बाद विवाद खड़ा हो गया। अब कंगना ने सोशल मीडिया पर पोस्ट साझा कर राखी को जवाब दिया है।

    कंगना ने अपनी पोस्ट में कहा कि अक्सर असफल और निराश लोग अपनी नाकामी का जिम्मेदार सफल महिलाओं को ठहराते हैं। उन्होंने लिखा कि जलन और अहंकार के कारण कई बार सफल महिलाओं को निशाना बनाया जाता है। कंगना के मुताबिक, महिलाओं को इस तरह की टिप्पणियों से शर्मिंदा होने या बार-बार खुद को सही साबित करने की जरूरत नहीं है।

    कंगना ने कहा कि महिलाओं को ऐसे हमलों में उलझने के बजाय अपने काम पर ध्यान देना चाहिए। हालांकि, इसके बाद उन्होंने राखी सावंत पर सीधे तौर पर तीखा तंज भी किया। कंगना ने राखी की सफलता पाने की कोशिशों को लेकर टिप्पणी करते हुए कहा कि वह भी सफलता हासिल करने के लिए सब कुछ करने को तैयार हैं, लेकिन दुर्भाग्य से अब किसी को उनसे कुछ चाहिए ही नहीं।

    कंगना ने अपनी पोस्ट में आगे राखी को लेकर बेहद तीखी भाषा का इस्तेमाल किया। उन्होंने तंज करते हुए कहा कि राखी की तमाम कोशिशें मिलकर भी उन्हें स्वीपर की नौकरी नहीं दिला सकीं। कंगना ने यह भी कहा कि ऐसी नौकरी के लिए भी गुणवत्ता और प्रतिभा की जरूरत होती है। अपनी पोस्ट के अंत में उन्होंने राखी से कहा कि वह उनकी रील्स देखती रहें और रोती रहें।

    विवाद की शुरुआत राखी सावंत के हालिया पॉडकास्ट से हुई थी। बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कंगना रनौत और स्मृति ईरानी का जिक्र हुआ। राखी ने सवाल किया कि आखिर प्रधानमंत्री मोदी को कंगना और दूसरी महिलाओं से ऐसा क्या मिला कि उन्हें मंत्री बनाया गया।

    इसके बाद पॉडकास्ट के होस्ट ने राखी से पूछा कि वह किस चीज की बात कर रही हैं। इस पर राखी ने जवाब देते हुए कहा कि वह प्यार और सम्मान की बात कर रही हैं। उन्होंने कहा कि अगर कंगना और स्मृति ईरानी ने प्रधानमंत्री मोदी को सम्मान दिया है, तो वह भी उन्हें सम्मान दे सकती हैं।

    राखी की इस टिप्पणी के बाद कंगना ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की। उन्होंने अपने जवाब में एक तरफ सफल महिलाओं को निशाना बनाए जाने की बात कही, वहीं दूसरी तरफ राखी की टिप्पणी पर व्यक्तिगत और तीखा पलटवार किया।

    इस पूरे विवाद में कंगना की प्रतिक्रिया सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है। कंगना ने अपनी पोस्ट में महिलाओं को लेकर होने वाली टिप्पणियों पर आपत्ति जताई और कहा कि उन्हें अपने काम पर ध्यान देना चाहिए। साथ ही उन्होंने राखी सावंत की टिप्पणी के जवाब में उनकी सफलता और करियर को लेकर भी कटाक्ष किया।

  • सेमीकॉन इंडिया 2026 का 17 सितंबर को पीएम मोदी करेंगे उद्घाटन, 600 से अधिक कंपनियां लेंगी आयोजन में हिस्सा

    सेमीकॉन इंडिया 2026 का 17 सितंबर को पीएम मोदी करेंगे उद्घाटन, 600 से अधिक कंपनियां लेंगी आयोजन में हिस्सा

    नई दिल्ली ।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 17 सितंबर को नई दिल्ली स्थित यशोभूमि में सेमीकॉन इंडिया 2026 के पांचवें संस्करण का उद्घाटन करेंगे। तीन दिवसीय यह आयोजन 17 से 19 सितंबर तक चलेगा। इसमें दुनिया की सेमीकंडक्टर कंपनियों के साथ नीति निर्माता, निवेशक, शोधकर्ता, स्टार्टअप और शिक्षाविद एक मंच पर जुटेंगे।

    इस वर्ष सम्मेलन की थीम “सिलिकॉन टू सिस्टम्स: बिल्डिंग द इकोसिस्टम” रखी गई है। आयोजन में भारत की सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स मूल्य शृंखला में विकसित हो रही क्षमताओं को प्रदर्शित किया जाएगा। यह सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है जब भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति शृंखला में अपनी भूमिका मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

    आयोजन में सरकार की नीतिगत सहायता, बढ़ते निवेश और विविध एवं लचीली वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं की मांग से भारत के लिए पैदा हुए अवसरों को भी सामने रखा जाएगा। कार्यक्रम का आयोजन इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और वैश्विक उद्योग संगठन एसईएमआई संयुक्त रूप से कर रहे हैं।

    सेमीकॉन इंडिया 2026 में 600 से अधिक प्रदर्शक हिस्सा लेंगे। इनमें करीब 300 अंतरराष्ट्रीय कंपनियां होंगी। प्रदर्शनी के लिए 15,000 वर्ग मीटर क्षेत्र निर्धारित किया गया है। आयोजन के दौरान 150 से अधिक विशेषज्ञ और उद्योग जगत के नेता तकनीकी तथा रणनीतिक मुद्दों पर चर्चा करेंगे।

    कार्यक्रम में छह देशों के पवेलियन और 12 राज्य सरकारों के पवेलियन भी स्थापित किए जाएंगे। इसके अलावा स्टार्टअप, नवाचार, छात्रों, कौशल विकास और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए विशेष मंच तैयार किए जाएंगे।

    स्टार्टअप पवेलियन में करीब 40 स्टार्टअप अपनी तकनीक और नवाचार प्रस्तुत करेंगे। वहीं वर्कफोर्स डेवलपमेंट पवेलियन में माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में कौशल विकास, रोजगार और करियर से जुड़े अवसरों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।

    आयोजन का एक प्रमुख आकर्षण “सैंड टू सिलिकॉन टू सिस्टम्स वैल्यू चेन एक्सपीरियंस” होगा। इसके जरिए आगंतुकों को सेमीकंडक्टर उद्योग की पूरी मूल्य शृंखला को समझने का अवसर मिलेगा। इसमें कच्चे माल से लेकर विनिर्माण, एडवांस्ड पैकेजिंग, चिप डिजाइन, इलेक्ट्रॉनिक्स और अंतिम सिस्टम निर्माण तक की प्रक्रिया प्रदर्शित की जाएगी।

    कार्यक्रम के दौरान स्टार्टअप पिच प्रतियोगिता, स्टूडेंट हैकाथॉन और इनोवेशन शोकेस भी आयोजित होंगे। इनमें युवा उद्यमी, शोधकर्ता और छात्र अपने विचारों और तकनीकों को प्रस्तुत करेंगे।

    सम्मेलन में सेमीकंडक्टर विनिर्माण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सप्लाई चेन रेजिलिएंस, एडवांस्ड पैकेजिंग, सामग्री एवं उपकरण, चिप डिजाइन, अनुसंधान एवं विकास, स्टार्टअप, नवाचार और प्रतिभा विकास जैसे विषयों पर मुख्य भाषण, पैनल चर्चा और विशेष सत्र होंगे।

    इसके अलावा छह अंतरराष्ट्रीय देशों के साथ विशेष राउंडटेबल बैठकें आयोजित की जाएंगी। महिलाओं के नेतृत्व और सशक्तिकरण, कार्यबल विकास तथा इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन और विनिर्माण क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा होगी। इस आयोजन के जरिए सेमीकंडक्टर क्षेत्र से जुड़े विभिन्न पक्षों को एक मंच पर लाने के साथ भारत की क्षमताओं और उद्योग से जुड़े अवसरों को प्रदर्शित किया जाएगा।

  • कॉपीराइट कारणों से पोस्ट ब्लॉक होने पर सौरव दास ने Meta से मांगा जवाब, सोशल मीडिया दबाव को लेकर सरकार पर निशाना

    कॉपीराइट कारणों से पोस्ट ब्लॉक होने पर सौरव दास ने Meta से मांगा जवाब, सोशल मीडिया दबाव को लेकर सरकार पर निशाना

    नई दिल्ली ।सौरव दास ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट की कुछ पोस्ट लगातार ब्लॉक किए जाने को लेकर Meta की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पोस्ट हटाए जाने या ब्लॉक होने से उनके अकाउंट की रीच भी प्रभावित हो रही है। उन्होंने इस पूरे मामले में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की शिकायतों की जांच करने की प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं।

    सौरव दास के मुताबिक, उनके इंस्टाग्राम अकाउंट की कई पोस्ट लगातार ब्लॉक की जा रही हैं। उन्होंने सवाल किया कि क्या Meta किसी शिकायत के आधार पर कार्रवाई करने से पहले उसकी उचित तरीके से जांच करता है या नहीं। उनका कहना है कि इस तरह की कार्रवाई का सीधा असर उनके अकाउंट की पहुंच पर पड़ रहा है।

    सौरव ने इस मामले से जुड़ा एक स्क्रीनशॉट भी एक्स पर साझा किया। स्क्रीनशॉट में बताया गया कि 10 सितंबर को इंस्टाग्राम पर प्रकाशित उनकी एक पोस्ट को कॉपीराइट से जुड़े कारणों के चलते ब्लॉक किया गया। इसी कार्रवाई को लेकर उन्होंने Meta की व्यवस्था और शिकायतों के निपटारे की प्रक्रिया पर सवाल उठाए।

    उन्होंने सोशल मीडिया कंपनियों की भूमिका को लेकर भी अपनी चिंता जाहिर की। सौरव का कहना है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को यूजर्स की शिकायतों और रिपोर्ट पर खुद उचित जांच करनी चाहिए। उनके अनुसार, कंपनियों को किसी सरकारी दबाव में काम नहीं करना चाहिए और प्लेटफॉर्म से जुड़ी कार्रवाई पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए।

    इस मामले में सौरव दास ने मोदी सरकार पर भी निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके अकाउंट को लगातार टारगेट किया जा रहा है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार उन्होंने अपने इस दावे के समर्थन में सरकार की ओर से किसी खास दबाव का कोई सार्वजनिक सबूत पेश नहीं किया है। इसलिए सरकार की ओर से कथित दबाव का आरोप फिलहाल उनके दावे के स्तर पर ही है।

    सौरव दास की ओर से उठाए गए सवालों का एक प्रमुख हिस्सा अकाउंट की रीच से भी जुड़ा है। उनका कहना है कि पोस्ट के ब्लॉक होने और हटाए जाने की घटनाओं से उनके अकाउंट की पहुंच में कमी आई है। इसी वजह से उन्होंने Meta की कार्रवाई के तरीके और शिकायतों की जांच को लेकर सवाल उठाए हैं।

    सौरव दास के LinkedIn प्रोफाइल के अनुसार, वह दिल्ली में रहते हैं और खोजी पत्रकार के तौर पर भी काम कर चुके हैं। उन्होंने जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की है। उन्होंने 2017 में RTI के जरिए जानकारी जुटाना शुरू किया था। उस समय उनकी उम्र 18 साल थी।

    बाद में सौरव दास ने पत्रकारिता में काम शुरू किया और वर्ष 2020 से पेशेवर तौर पर लिखना शुरू किया। उनके लेख कानून, सरकार, अदालत, अपराध और व्यवस्था से जुड़े विषयों पर रहे हैं। उनके लेख विभिन्न मीडिया संस्थानों में भी प्रकाशित हुए हैं। इनमें द कारवां, अल जजीरा, द वायर और द हिंदू शामिल हैं।

    फिलहाल विवाद का मुख्य केंद्र 10 सितंबर की वह इंस्टाग्राम पोस्ट है, जिसे कॉपीराइट से जुड़े कारणों के चलते ब्लॉक किए जाने की जानकारी स्क्रीनशॉट में सामने आई। सौरव दास ने इस कार्रवाई के साथ अपने अकाउंट की घटती रीच और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।

  • ब्रिक्स की 20वीं वर्षगांठ पर पीएम मोदी ने रखा अगले दो दशकों का रोडमैप, निरंतरता और कार्यान्वयन तंत्र का प्रस्ताव

    ब्रिक्स की 20वीं वर्षगांठ पर पीएम मोदी ने रखा अगले दो दशकों का रोडमैप, निरंतरता और कार्यान्वयन तंत्र का प्रस्ताव

    नई दिल्ली ।भारत मंडपम में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का औपचारिक आगाज हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदस्य देशों के प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए सम्मेलन का उद्घाटन किया। अपने संबोधन में उन्होंने ब्रिक्स की भूमिका को स्पष्ट करते हुए कहा कि यह समूह किसी के विरुद्ध नहीं है, बल्कि सभी का सम्मान करने और साथ लेकर आगे बढ़ने की सोच के साथ काम करता है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता पीपल सेंट्रिक और ह्यूमैनिटी फर्स्ट अप्रोच पर आधारित रही है। इस दौरान लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता को प्राथमिकता दी गई। उन्होंने कहा कि भारत ने इन प्राथमिकताओं के जरिए ब्रिक्स सहयोग को सामान्य जन से जोड़ने पर विशेष ध्यान दिया है।

    उन्होंने बताया कि भारत की अध्यक्षता के दौरान 350 से अधिक बैठकों का आयोजन किया गया और करीब 30 शहरों में सदस्य देशों की टीमों का स्वागत किया गया। प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स अध्यक्षता को सफल बनाने में सक्रिय योगदान और समर्थन देने के लिए सभी सदस्य देशों का आभार भी जताया।

    ब्रिक्स के 20 वर्ष पूरे होने को प्रधानमंत्री मोदी ने संगठन के लिए महत्वपूर्ण पड़ाव बताया। उन्होंने कहा कि मानव जीवन में 20 वर्ष की उम्र परिपक्वता और जिम्मेदारी के नए चरण की शुरुआत का संकेत देती है। इसी तरह ब्रिक्स भी अपने विकास के ऐसे दौर में पहुंच चुका है, जहां सपनों के साथ जिम्मेदारियां जुड़ती हैं और सामर्थ्य को नई दिशा देने की जरूरत होती है।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 20 वर्षों में ब्रिक्स ने वैश्विक मंच पर अपनी अलग पहचान बनाई है। सदस्य देश एक-दूसरे के दृष्टिकोण का सम्मान करते हुए आगे बढ़ते हैं। उन्होंने जोर दिया कि ब्रिक्स की सोच किसी के खिलाफ खड़े होने की नहीं, बल्कि सभी को साथ लेकर आगे बढ़ने की है।

    अपने संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने अगले 20 वर्षों के लिए नए और महत्वाकांक्षी एजेंडे पर काम करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि अब ब्रिक्स के भीतर बनी एकता और सहमति को वैश्विक मंच पर ठोस परिणामों में बदलने का समय है। इसके लिए संगठन को अपनी कार्यप्रणाली पर भी ध्यान देना होगा।

    प्रधानमंत्री ने ब्रिक्स की अध्यक्षता हर वर्ष बदलने की व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि अध्यक्षता बदलने से संस्थागत गति प्रभावित नहीं होनी चाहिए। इसी उद्देश्य से उन्होंने ब्रिक्स में निरंतरता और कार्यान्वयन तंत्र विकसित करने का प्रस्ताव रखा।

    उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था के तहत ट्रोइका के माध्यम से ब्रिक्स की विभिन्न पहलों और उनके परिणामों का फॉलोअप किया जा सकेगा। इससे अलग-अलग अध्यक्षताओं के बीच निरंतरता बनाए रखने में मदद मिलेगी और पहले से तय पहलों के क्रियान्वयन पर भी ध्यान दिया जा सकेगा।

    18वें शिखर सम्मेलन के उद्घाटन संबोधन में प्रधानमंत्री मोदी ने इस तरह ब्रिक्स के मौजूदा स्वरूप, भारत की अध्यक्षता की प्राथमिकताओं और संगठन के अगले 20 वर्षों की दिशा पर अपना दृष्टिकोण रखा। उनके संबोधन में सहयोग, निरंतरता, कार्यान्वयन और वैश्विक स्तर पर ठोस परिणाम हासिल करने पर विशेष जोर रहा।

  • भारत मंडपम में शुरू हुआ 18वां BRICS शिखर सम्मेलन, पीएम मोदी ने सदस्य देशों के योगदान और समर्थन के लिए जताया आभार

    भारत मंडपम में शुरू हुआ 18वां BRICS शिखर सम्मेलन, पीएम मोदी ने सदस्य देशों के योगदान और समर्थन के लिए जताया आभार

    नई दिल्ली ।भारत की मेजबानी में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन का शनिवार को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आधिकारिक आगाज हो गया। दो दिन तक चलने वाला यह सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को आयोजित किया जा रहा है। इसमें BRICS देशों के साथ पार्टनर देशों के नेता भी हिस्सा ले रहे हैं। इसके अलावा आउटरीच कार्यक्रम के लिए आमंत्रित किए गए देशों के प्रतिनिधि भी सम्मेलन में पहुंचे हैं।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन के साथ शिखर सम्मेलन की औपचारिक शुरुआत हुई। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने भारत की BRICS अध्यक्षता को सफल बनाने में सभी देशों की ओर से मिले सक्रिय योगदान और समर्थन के लिए आभार जताया।

    पीएम मोदी ने कहा कि इस वर्ष का BRICS शिखर सम्मेलन एक ऐतिहासिक पड़ाव है। इसकी वजह यह है कि इस वर्ष BRICS अपनी स्थापना के 20 साल पूरे कर रहा है। उन्होंने संगठन की दो दशक लंबी यात्रा का उल्लेख करते हुए इसके अगले चरण को लेकर भी अपनी बात रखी।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि इंसानी जिंदगी में 20 साल की उम्र परिपक्वता और जिम्मेदारी के एक नए दौर की शुरुआत होती है। इसी संदर्भ में उन्होंने BRICS की 20 साल की यात्रा को भी महत्वपूर्ण बताया और आगे की दिशा तय करने की जरूरत पर जोर दिया।

    अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने भारत की BRICS अध्यक्षता के दौरान सहयोग और समर्थन देने वाले सभी प्रतिभागी देशों का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि भारत की अध्यक्षता को सफल बनाने में सभी के सक्रिय योगदान की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

    18वां BRICS शिखर सम्मेलन ऐसे समय आयोजित हो रहा है जब संगठन अपनी स्थापना के दो दशक पूरे होने के पड़ाव पर है। सम्मेलन के दौरान सदस्य देशों और साझेदार देशों के नेता एक साथ मौजूद हैं। इसके अलावा आउटरीच के लिए आमंत्रित देशों के प्रतिनिधियों की भागीदारी भी हो रही है।

    प्रधानमंत्री मोदी ने BRICS की आगे की यात्रा के संदर्भ में अगले 20 वर्षों के लिए नए एजेंडे पर काम करने की जरूरत बताई। उनके संबोधन का प्रमुख संदेश संगठन की अब तक की यात्रा के बाद भविष्य की प्राथमिकताओं और दिशा को लेकर रहा।

    भारत मंडपम में आयोजित इस दो दिवसीय सम्मेलन में BRICS देशों के साथ पार्टनर देशों की भागीदारी हो रही है। सम्मेलन के लिए आमंत्रित प्रतिनिधियों की मौजूदगी से भी इसका दायरा व्यापक हुआ है।

    BRICS के 20 वर्ष पूरे होने के मौके पर आयोजित यह शिखर सम्मेलन भारत की मेजबानी में हो रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में इस अवसर को संगठन की यात्रा के महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में रेखांकित किया।

    उन्होंने भारत की अध्यक्षता के दौरान मिले सहयोग के लिए सभी का आभार व्यक्त करते हुए संगठन के आगामी वर्षों की दिशा पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता बताई। उनके मुताबिक 20 साल की यात्रा के बाद BRICS के लिए आगे के दो दशकों को ध्यान में रखते हुए नए एजेंडे पर काम करना होगा।

    शिखर सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में जारी रहेगा। इसमें BRICS सदस्य देशों, पार्टनर देशों और आउटरीच के लिए आमंत्रित देशों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। सम्मेलन के पहले दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संबोधन के साथ इसकी औपचारिक शुरुआत हुई।

  • ब्रिक्स सम्मेलन में अफ्रीकी कारोबारी बोले, पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत ‘विकसित भारत 2047’ लक्ष्य समय से पहले हासिल करेगा

    ब्रिक्स सम्मेलन में अफ्रीकी कारोबारी बोले, पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत ‘विकसित भारत 2047’ लक्ष्य समय से पहले हासिल करेगा

    नई दिल्ली ।भारत में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बीच अफ्रीकी कारोबारियों ने देश की आर्थिक प्रगति और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की सराहना की है। नाइजीरिया के डिप्लोमैटिक कॉरेस्पोंडेंट्स एसोसिएशन के चेयरमैन इदेहाई फ्रेडरिक ने कहा कि भारत जिस तेजी से आगे बढ़ रहा है, उसे देखते हुए देश ‘विकसित भारत 2047’ का लक्ष्य निर्धारित समय से पहले हासिल कर सकता है।

    इदेहाई फ्रेडरिक के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक शानदार नेता हैं और उनके पास देश के विकास को लेकर बड़ा विजन है। उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था में हो रही तेज प्रगति प्रधानमंत्री के नेतृत्व में उठाए जा रहे कदमों, नीतियों और साझेदारी में दिखाई देती है। उनके मुताबिक ब्रिक्स की अध्यक्षता के दौरान भी भारत के नेतृत्व और दृष्टिकोण का प्रभाव स्पष्ट नजर आ रहा है।

    फ्रेडरिक ने भारत और नाइजीरिया के संबंधों को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि दोनों देश दशकों से मित्र रहे हैं और दोनों के बीच कारोबार का भी बड़ा आधार है। उन्होंने भारत को नाइजीरिया के लिए एक महत्वपूर्ण साझेदार बताते हुए दोनों देशों के बीच व्यापार में आगे और बढ़ोतरी की उम्मीद जताई।

    उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है। इसी आर्थिक प्रगति के आधार पर उनका मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत 2047’ के विजन को भारत लक्ष्य से पहले प्राप्त कर सकता है।

    ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान भारत और अफ्रीकी देशों के बीच संबंधों को लेकर भी चर्चा सामने आई। अबिसीनिया बिजनेस नेटवर्क के प्रबंध निदेशक डैनियल तिरुनेह ने भारत और इथियोपिया के बीच लंबे समय से चले आ रहे संबंधों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों देश व्यापार, निवेश, नवाचार और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम कर रहे हैं।

    डैनियल तिरुनेह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इथियोपिया यात्रा का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार कुछ महीने पहले हुई इस यात्रा से भारत और इथियोपिया के संबंधों को नई ऊर्जा मिली। उन्होंने कहा कि इसका प्रभाव ब्रिक्स के मंच पर भी दिखाई दे रहा है और इथियोपिया के लिए यह एक महत्वपूर्ण मंच है।

    भारत इस वर्ष 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। ब्रिक्स में वर्तमान में 11 सदस्य देश और 10 साझेदार देश हैं। सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए सदस्य देशों के राष्ट्राध्यक्ष और प्रतिनिधि नई दिल्ली पहुंच रहे हैं। सम्मेलन के दौरान विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी के बीच भारत की भूमिका और उसकी साझेदारियों पर भी ध्यान केंद्रित है।

    ब्रिक्स शिखर सम्मेलन को देखते हुए राजधानी नई दिल्ली में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। सुरक्षा व्यवस्था के लिए 15,000 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। इसके अलावा पैरामिलिट्री फोर्स की 200 कंपनियां भी सुरक्षा व्यवस्था में लगाई गई हैं।

    अफ्रीकी कारोबारियों की टिप्पणियों में भारत की आर्थिक प्रगति, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और ब्रिक्स के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय साझेदारी को प्रमुखता दी गई। नाइजीरिया और इथियोपिया से जुड़े प्रतिनिधियों ने भारत के साथ व्यापार, निवेश, नवाचार और शिक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को महत्वपूर्ण बताया।

    इस बीच नई दिल्ली में हो रहा ब्रिक्स शिखर सम्मेलन भारत की मेजबानी में आयोजित हो रहा है। सदस्य और साझेदार देशों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी के कारण राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है।

  • BRICS Summit 2026 केदिल्ली पहुंचे चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, प्रधानमंत्री मोदी से शाम को द्विपक्षीय बैठक में कई मुद्दों पर होगी चर्चा

    BRICS Summit 2026 केदिल्ली पहुंचे चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, प्रधानमंत्री मोदी से शाम को द्विपक्षीय बैठक में कई मुद्दों पर होगी चर्चा

    नई दिल्ली ।18वें BRICS शिखर सम्मेलन 2026 में शामिल होने के लिए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग शनिवार को दिल्ली पहुंच गए। उनके भारत आगमन पर केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने दिल्ली के पालम हवाई अड्डे पर उनका स्वागत किया। शी जिनपिंग के दिल्ली पहुंचने के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी प्रस्तावित द्विपक्षीय बैठक को लेकर भी गतिविधियां तेज हो गई हैं।

    जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच आज शाम करीब पौने छह बजे द्विपक्षीय बैठक होने वाली है। BRICS शिखर सम्मेलन से इतर होने वाली इस मुलाकात में दोनों देशों से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।

    शी जिनपिंग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने भारत पहुंचे हैं। उनके साथ चीन का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी दिल्ली आया है। इस प्रतिनिधिमंडल में चीन कम्युनिस्ट पार्टी के राजनीतिक ब्यूरो के सदस्य काई ची और चीन के विदेश मंत्री वांग यी शामिल हैं।

    काई ची चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की केंद्रीय समिति के जनरल ऑफिस के निदेशक भी हैं। शी जिनपिंग के साथ उनकी मौजूदगी को दोनों देशों के बीच होने वाली महत्वपूर्ण बातचीत के संदर्भ में देखा जा रहा है।

    प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग की द्विपक्षीय बैठक में सीमा विवाद और दोनों देशों के संबंधों से जुड़े मुद्दों पर बातचीत होने की संभावना है। इसके अलावा व्यापार, कृषि क्षेत्र और बाजार में आपूर्ति श्रृंखला से संबंधित विषय भी चर्चा में शामिल हो सकते हैं।

    बैठक के दौरान आर्थिक और तकनीकी सहयोग से जुड़े मुद्दों पर भी बातचीत होने की उम्मीद है। इसके साथ ही वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी LAC पर मजबूत सैन्य सुरक्षा व्यवस्था और आयात से जुड़े विषयों पर भी दोनों नेताओं के बीच चर्चा हो सकती है।

    BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए कई देशों के प्रमुख नेता पहले ही दिल्ली पहुंच चुके हैं। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन 11 सितंबर को दिल्ली पहुंचे थे। भारत पहुंचने पर केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने उनका स्वागत किया था।

    ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान भी BRICS शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए दिल्ली पहुंचे हैं। उनका स्वागत केंद्रीय राज्य मंत्री शंतनु ठाकुर ने किया था। इस तरह शिखर सम्मेलन के लिए कई प्रमुख देशों के नेताओं की दिल्ली में मौजूदगी हो चुकी है।

    शी जिनपिंग के भारत दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी के साथ होने वाली बैठक पर विशेष ध्यान रहेगा। दोनों नेताओं के बीच बातचीत में द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े विभिन्न मुद्दों के साथ व्यापार, आर्थिक और तकनीकी विषयों पर चर्चा की संभावना है।

    सीमा से जुड़े विषय और LAC पर सुरक्षा व्यवस्था भी प्रस्तावित बातचीत के महत्वपूर्ण मुद्दों में शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा कृषि, आपूर्ति श्रृंखला और आयात से संबंधित विषयों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है।

    फिलहाल शी जिनपिंग के दिल्ली पहुंचने के बाद BRICS शिखर सम्मेलन की गतिविधियों के बीच प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी द्विपक्षीय बैठक अहम कार्यक्रमों में शामिल है। दोनों नेताओं की मुलाकात आज शाम करीब पौने छह बजे प्रस्तावित है, जिसके दौरान दोनों देशों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर बातचीत होने की उम्मीद है।

  • मोदी-पुतिन बैठक में रक्षा और व्यापार पर फोकस, Su-57, S-400 और ब्रह्मोस-NG सहयोग पर चर्चा की उम्मीद

    मोदी-पुतिन बैठक में रक्षा और व्यापार पर फोकस, Su-57, S-400 और ब्रह्मोस-NG सहयोग पर चर्चा की उम्मीद

    नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच भारत मंडपम में अहम बैठक हो रही है। दोनों नेताओं की मुलाकात के दौरान भारत और रूस के बीच रक्षा सहयोग सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर बातचीत जारी है। बैठक में दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल भी मौजूद हैं। बातचीत का दायरा रक्षा सौदों के अलावा व्यापार, उद्योग, परमाणु ऊर्जा और रोजगार से जुड़े क्षेत्रों तक रहने की संभावना है।

    मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और व्लादिमीर पुतिन ने एक-दूसरे से गले मिलकर अभिवादन किया। इसके बाद दोनों देशों के बीच सहयोग से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा शुरू हुई। रक्षा क्षेत्र में Su-57 फाइटर जेट, S-400 की बाकी खेप और एडवांस ब्रह्मोस-NG जैसे विषयों पर बातचीत होने की संभावना जताई जा रही है।

    रूस की ओर से भारत में Su-57 फाइटर जेट के उत्पादन और इससे जुड़ी जरूरी तकनीक साझा करने की पेशकश पर भी समझौते की उम्मीद है। Su-57 को एडवांस स्टेल्थ फाइटर जेट के तौर पर पेश किया गया है। इस विमान की क्षमताओं को लेकर भी बातचीत में चर्चा होने की संभावना है।

    भारत-रूस संबंधों में रक्षा सहयोग के अलावा आर्थिक और औद्योगिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के मुद्दे भी महत्वपूर्ण रहेंगे। दोनों देशों के बीच उद्योग, रेलवे, स्टील और टनलिंग जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा संभव है। इसके साथ भारतीय कंपनियों के लिए रूसी बाजार में अधिक अवसर उपलब्ध कराने के विषय पर भी बातचीत हो सकती है।

    परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाना भी बैठक के संभावित एजेंडे में शामिल है। इसके अलावा महत्वपूर्ण खनिजों, कुशल कामगारों और उर्वरक से जुड़े क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग को और मजबूत करने पर विचार किया जा सकता है। खनिजों की खोज और उनकी आपूर्ति के क्षेत्र में साझेदारी बढ़ाने तथा नए संयुक्त प्रोजेक्ट शुरू करने पर भी चर्चा संभव है।

    व्यापारिक संबंधों को लेकर भी दोनों देशों के बीच महत्वपूर्ण बातचीत की संभावना है। भारत और रूस के बीच वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय कारोबार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने के लक्ष्य पर चर्चा हो सकती है। इसके लिए विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने और दोनों देशों की कंपनियों के लिए नए अवसर तैयार करने पर विचार किया जा सकता है।

    राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन गुरुवार देर रात भारत की राजधानी दिल्ली पहुंचे थे। उनके आगमन पर एयरपोर्ट पर विदेश राज्य मंत्री केवी सिंह ने उनका स्वागत किया था। इसके बाद अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति के बीच भारत मंडपम में बैठक हो रही है।

    बैठक में रक्षा सहयोग से जुड़े प्रस्तावों के साथ आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी के विभिन्न पहलुओं पर बातचीत पर नजर है। Su-57, S-400 और ब्रह्मोस-NG जैसे रक्षा विषयों के अलावा उद्योग, रेलवे, स्टील, टनलिंग, परमाणु ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, उर्वरक और कुशल कामगारों से जुड़े संभावित सहयोग पर भी चर्चा होने की संभावना है। दोनों देशों के बीच व्यापार को 2030 तक 100 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य भी बातचीत के प्रमुख मुद्दों में शामिल हो सकता है।