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  • दतिया के जनादेश पर कांग्रेस का बड़ा संदेश, जीतू पटवारी ने CM से की श्वेत पत्र जारी करने की मांग

    दतिया के जनादेश पर कांग्रेस का बड़ा संदेश, जीतू पटवारी ने CM से की श्वेत पत्र जारी करने की मांग


    भोपाल । दतिया विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद मध्य प्रदेश की राजनीति में नया सियासी संदेश सामने आया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को खुला पत्र लिखकर सरकार से नई राजनीतिक परंपरा शुरू करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि दतिया का जनादेश केवल एक सीट का चुनाव परिणाम नहीं बल्कि पूरे प्रदेश की जनता की सोच और अपेक्षाओं का संकेत है। जनता अब केवल घोषणाएं और वादे नहीं बल्कि पारदर्शी शासन जवाबदेही और ठोस परिणाम चाहती है। यही समय है जब सत्ता और विपक्ष दोनों मिलकर लोकतंत्र को और मजबूत बनाने की दिशा में सकारात्मक कदम उठाएं।

    जीतू पटवारी ने अपने पत्र में कहा कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत जनता का विश्वास होता है और यह विश्वास तभी कायम रह सकता है जब सरकार अपने कामकाज का पूरा ब्यौरा जनता के सामने रखे। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि प्रदेश में श्वेत पत्र जारी करने की नई परंपरा शुरू की जाए ताकि सरकार की उपलब्धियां चुनौतियां और भविष्य की योजनाएं पूरी पारदर्शिता के साथ जनता तक पहुंच सकें। उनका कहना है कि इससे लोकतांत्रिक व्यवस्था अधिक मजबूत होगी और जनता को सही जानकारी भी मिलेगी।

    कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने सुझाव दिया कि सरकार बिजली और पेयजल व्यवस्था शिक्षा स्वास्थ्य किसानों की स्थिति कृषि क्षेत्र युवाओं के रोजगार कानून व्यवस्था महिलाओं की सुरक्षा आदिवासी समाज और दलित पिछड़ा वर्ग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर क्रमवार श्वेत पत्र जारी करे। इन दस्तावेजों में वर्तमान स्थिति अब तक हुए कार्य भविष्य की योजनाएं और चुनौतियों का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए ताकि जनता वास्तविक तस्वीर देख सके और सरकार की जवाबदेही भी तय हो सके।

    पत्र में उन्होंने यह भी कहा कि दतिया का परिणाम इस बात का संकेत है कि लोग अब राजनीतिक आरोप प्रत्यारोप से आगे बढ़कर विकास और परिणाम आधारित राजनीति देखना चाहते हैं। प्रदेश की जनता चाहती है कि राजनीतिक दल केवल एक दूसरे पर आरोप लगाने के बजाय समस्याओं के समाधान पर चर्चा करें। ऐसे में सरकार यदि श्वेत पत्र जारी करती है तो इससे जनता के बीच पारदर्शिता का संदेश जाएगा और लोकतांत्रिक संवाद को भी मजबूती मिलेगी।

    जीतू पटवारी ने भरोसा दिलाया कि कांग्रेस भी इस पहल में पूरी जिम्मेदारी के साथ भागीदारी निभाने को तैयार है। उन्होंने कहा कि विपक्ष के तौर पर कांग्रेस सरकार के सामने तथ्य आधारित सुझाव और अपने विचार रखेगी। लोकतंत्र में स्वस्थ बहस का आधार आंकड़े और तथ्य होने चाहिए न कि केवल राजनीतिक बयानबाजी। यदि सरकार इस दिशा में कदम बढ़ाती है तो यह मध्य प्रदेश की राजनीति में एक नई और सकारात्मक शुरुआत होगी।

    उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि दतिया के जनादेश को केवल चुनावी जीत या हार के नजरिए से न देखा जाए बल्कि इसे प्रदेश की जनता की उम्मीदों और बदलते राजनीतिक संदेश के रूप में स्वीकार किया जाए। यदि सरकार और विपक्ष दोनों जनहित के मुद्दों पर खुलकर संवाद करेंगे तो इससे शासन व्यवस्था अधिक जवाबदेह बनेगी और प्रदेश के विकास को भी नई दिशा मिलेगी। कांग्रेस का मानना है कि पारदर्शिता और उत्तरदायित्व ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत हैं और अब मध्य प्रदेश की राजनीति को इसी दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।

  • कोबरा से सामना, वोट का खुलासा और भ्रष्टाचार पर हमला, मध्य प्रदेश की राजनीति में दिनभर रही हलचल

    कोबरा से सामना, वोट का खुलासा और भ्रष्टाचार पर हमला, मध्य प्रदेश की राजनीति में दिनभर रही हलचल


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजनीति में शुक्रवार को कई ऐसे घटनाक्रम सामने आए, जिन्होंने राजनीतिक गलियारों से लेकर प्रशासनिक महकमे तक चर्चा का माहौल बना दिया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने छात्र जीवन का एक रोमांचक अनुभव साझा किया, जिसमें उनके हाथ पर जहरीला कोबरा लिपट गया था। दूसरी ओर दतिया उपचुनाव में मतदान करने के बाद पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने खुले तौर पर बताया कि उन्होंने भाजपा और पार्टी प्रत्याशी के पक्ष में मतदान किया। वहीं गुना से भाजपा विधायक पन्नालाल शाक्य ने सार्वजनिक मंच से खनिज विभाग पर भ्रष्टाचार और अवैध वसूली के आरोप लगाकर अपनी ही सरकार के अधिकारियों पर सवाल खड़े कर दिए।

    उज्जैन में बन रहे स्नेक पार्क के निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने कॉलेज जीवन का एक दिलचस्प किस्सा सुनाया। उन्होंने बताया कि विज्ञान महाविद्यालय में पढ़ाई के दौरान उन्होंने जादू की कुछ ट्रिक्स सीखी थीं। गणेश उत्सव के एक कार्यक्रम में प्रदर्शन के लिए वे एक सांप लेकर पहुंचे और उससे जादू का खेल दिखाया। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद दोस्तों के कहने पर जब उन्होंने सांप को बाहर निकाला तो वह अचानक सक्रिय हो गया। मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने सांप को मजबूती से पकड़ लिया, लेकिन वह उनके हाथ पर लिपट गया और दूसरे हाथ पर काटने की कोशिश करने लगा। बाद में जब वे सांप को वापस छोड़ने पहुंचे तो पता चला कि वह साधारण सांप नहीं बल्कि जहरीला कोबरा था और उसके विषैले दांत भी सुरक्षित थे। यह सुनकर वे भी हैरान रह गए। मुख्यमंत्री का यह अनुभव सुनकर कार्यक्रम में मौजूद लोग भी आश्चर्यचकित रह गए।

    उधर दतिया विधानसभा उपचुनाव में मतदान के बाद भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उन्होंने कमल के फूल के निशान पर वोट दिया है और भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के पक्ष में मतदान किया है। उनके इस बयान की राजनीतिक हलकों में काफी चर्चा रही। नरोत्तम मिश्रा ने भाजपा की जीत का दावा भी किया। दूसरी ओर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी अपनी पार्टी की जीत का भरोसा जताते हुए कहा कि कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह बड़ी बढ़त से चुनाव जीतेंगे। अब सभी की निगाहें मतगणना पर टिकी हैं।

    गुना में उद्योग विभाग के एक कार्यक्रम के दौरान भाजपा विधायक पन्नालाल शाक्य ने खनिज विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि वैध रसीद होने के बावजूद रेत लेकर जा रहे व्यक्ति पर जुर्माना लगाने का प्रयास किया गया। विधायक ने कहा कि कार्रवाई असली दोषियों पर होने के बजाय आम लोगों को परेशान किया जा रहा है। उन्होंने मंच से ही विभागीय अधिकारियों पर अवैध वसूली के आरोप लगाए और कहा कि इस संबंध में अधिकारियों से बात करने की कोशिश भी की, लेकिन उनकी बात तक नहीं सुनी गई। भाजपा विधायक के इन आरोपों ने प्रशासनिक व्यवस्था पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

    इसी बीच दतिया उपचुनाव से जुड़ा एक दिलचस्प घटनाक्रम भी सामने आया। चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं की एक टीम वोट मांगने के लिए ऐसे गांव पहुंच गई, जो दतिया विधानसभा क्षेत्र में आता ही नहीं था। जब कार्यकर्ताओं ने ग्रामीणों से भाजपा के पक्ष में मतदान की अपील की तो लोगों ने बताया कि वे इस उपचुनाव के मतदाता ही नहीं हैं क्योंकि उनका गांव भांडेर विधानसभा क्षेत्र में आता है। यह सुनकर कार्यकर्ता असहज हो गए और उन्हें वहां से लौटना पड़ा।

    एक ही दिन में सामने आए इन घटनाक्रमों ने मध्य प्रदेश की राजनीति में अलग-अलग कारणों से हलचल पैदा कर दी। मुख्यमंत्री का रोचक अनुभव, चुनावी बयानबाजी, सरकारी विभागों पर भ्रष्टाचार के आरोप और चुनाव प्रचार की चूक—इन सभी ने राजनीतिक चर्चा को नया विषय दे दिया।

  • सीएम से मुलाकात क्यों नहीं हो पा रही? किसानों का गुस्सा क्यों भड़का? 5 सवाल-जवाब में समझिए पूरा मामला

    सीएम से मुलाकात क्यों नहीं हो पा रही? किसानों का गुस्सा क्यों भड़का? 5 सवाल-जवाब में समझिए पूरा मामला

    मध्यप्रदेश। मध्य प्रदेश में किसानों का आंदोलन एक बार फिर सुर्खियों में है। नर्मदापुरम में संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले हजारों किसानों ने प्रदर्शन किया और भोपाल कूच की तैयारी की, लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक दिया। 40 से अधिक किसान नेताओं को हिरासत में ले लिया गया। किसानों का आरोप है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मिलने का समय तीन बार तय हुआ, लेकिन हर बार अंतिम समय में मुलाकात टाल दी गई। इससे किसानों में नाराजगी और बढ़ गई। आखिर यह आंदोलन क्यों भड़का और इसकी वजह क्या है? आइए 5 सवाल-जवाब में समझते हैं।

    1. किसान अचानक आंदोलन पर क्यों उतर आए?

    इस आंदोलन के पीछे दो बड़े मुद्दे हैं। पहला मुद्दा मूंग की समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदी का है। केंद्र सरकार के नियमों के अनुसार मूंग की खरीद अनुमानित उत्पादन के केवल 25 प्रतिशत तक ही की जा सकती है। जबकि इस वर्ष मूंग का समर्थन मूल्य 8,768 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। किसानों का कहना है कि उनकी अधिकांश उपज खुले बाजार में 6,000 से 7,000 रुपये प्रति क्विंटल के बीच बिक रही है, जिससे उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

    दूसरा बड़ा मुद्दा खाद वितरण के लिए लागू किया गया ई-टोकन सिस्टम है। किसानों का आरोप है कि पोर्टल में तकनीकी खामियां हैं। कई बार सर्वर काम नहीं करता और कई किसानों का टोकन दूसरे जिलों के डिपो के नाम पर जारी हो जाता है, जिससे उन्हें खाद लेने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है।

    2. मुख्यमंत्री से मुलाकात तीन बार क्यों टली?

    संयुक्त किसान मोर्चा का कहना है कि उन्होंने 20 जुलाई को मुख्यमंत्री और कृषि मंत्री से मुलाकात कराने की मांग की थी। पहले 23 जुलाई तक मुलाकात कराने का भरोसा दिया गया, लेकिन बैठक नहीं हो सकी। इसके बाद 26 जुलाई की तारीख तय हुई, फिर समय बदलता रहा और आखिर में किसानों को बताया गया कि मुख्यमंत्री दिल्ली रवाना हो गए हैं। इससे किसानों में यह संदेश गया कि सरकार उनकी बात सुनने को तैयार नहीं है। हालांकि सरकार की ओर से अब तक मुलाकात टलने की आधिकारिक वजह सार्वजनिक नहीं की गई है।

    3. केंद्र और राज्य सरकार का पक्ष क्या है?

    केंद्र सरकार का कहना है कि मध्य प्रदेश को जितना मूंग खरीदने का कोटा मिला है, उसका भी पूरा उपयोग नहीं हो पाया है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में बताया कि स्वीकृत कोटे का बहुत कम हिस्सा ही खरीदा गया है। इसलिए फिलहाल कोटा बढ़ाने का औचित्य नहीं बनता। दूसरी ओर, राज्य सरकार की ओर से किसानों की शिकायतों पर विस्तृत प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है।

    4. पुलिस कार्रवाई पर किसानों की आपत्ति क्यों है?

    किसानों का आरोप है कि वे शांतिपूर्ण तरीके से भोपाल जाकर मुख्यमंत्री को ज्ञापन देना चाहते थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें नर्मदापुरम में ही रोक दिया। 40 से ज्यादा नेताओं को हिरासत में ले लिया गया। किसान नेताओं का कहना है कि सरकार बातचीत के बजाय आंदोलन दबाने की कोशिश कर रही है।

    5. अब आगे क्या हो सकता है?

    संयुक्त किसान मोर्चा ने साफ कर दिया है कि जब तक हिरासत में लिए गए नेताओं की रिहाई नहीं होती और सरकार किसानों से औपचारिक बातचीत नहीं करती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। यदि सरकार और किसान संगठनों के बीच जल्द संवाद नहीं हुआ तो आंदोलन प्रदेश के अन्य जिलों तक भी फैल सकता है।

    किसानों की नाराजगी केवल समर्थन मूल्य या खाद वितरण तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि अब यह संवादहीनता का मुद्दा भी बन चुका है। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार और किसान संगठनों के बीच होने वाली बातचीत ही तय करेगी कि यह आंदोलन शांत होगा या और व्यापक रूप लेगा।

  • झांसी पहुंचे मुख्यमंत्री मोहन यादव, कहा- प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश विकास कर रहा

    झांसी पहुंचे मुख्यमंत्री मोहन यादव, कहा- प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश विकास कर रहा


    झांसी।
    मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव रविवार को निवाड़ी में विभिन्न विकास कार्यों का भूमि-पूजन और लोकार्पण करने के बाद अपने आध्यात्मिक गुरु ऋतेश्वरमहाराज से मिलने झांसी सर्किट हाउस पहुंचे। यहां उन्होंने मीडिया से संक्षिप्त बातचीत में कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश निरंतर विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि सभी मिलकर जनकल्याण के कार्यों को आगे बढ़ाने में जुटे हैं।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि दतिया उपचुनाव के मद्देनजर उन्होंने भाजपा पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ समीक्षा बैठक की। हालांकि मीडिया द्वारा पूछे गए अन्य सवालों का जवाब दिए बिना वह वहां से रवाना हो गए।

    झांसी पहुंचने पर पुलिस लाइन से हेलीकॉप्टर से सर्किट हाउस पहुंचे मुख्यमंत्री का सदर विधायक पं. रवि शर्मा, बबीना विधायक राजीव सिंह पारीछा, भाजपा पार्षद सुनील नैनवानी सहित भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने फूल-मालाओं से स्वागत किया। सर्किट हाउस में उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया। यहां उन्होंने भाजपा पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं से मुलाकात कर विभिन्न विषयों पर चर्चा की। इसके बाद वह पुलिस लाइन से हेलीकॉप्टर द्वारा मध्यप्रदेश के सागर जिले के लिए रवाना हो गए।

    इससे पहले, मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने ओरछा पहुंचकर प्रसिद्ध रामराजा मंदिर में दर्शन किए और जहांगीर महल का भ्रमण किया। इसके बाद निवाड़ी में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने 46 राजस्व स्टाफ आवास (निवाड़ी) तथा 29 राजस्व स्टाफ आवास (पृथ्वीपुर) का लोकार्पण किया। साथ ही जिला चिकित्सालय निवाड़ी के 100 बिस्तरीय भवन के उन्नयन कार्य, ग्राम जेवरा, पृथ्वीपुर और सेंधरी में नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भवनों तथा संजीवनी क्लिनिक का भी लोकार्पण किया। कार्यक्रम संपन्न होने के बाद मुख्यमंत्री अपराह्न झांसी पहुंचे और निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आगे के दौरे पर रवाना हो गए।

  • एमपी विधानसभा में UCC विधेयक पेश, आज होगी चर्चा; उज्जैन जमीन विवाद पर हंगामे से कार्यवाही दो बार स्थगित

    एमपी विधानसभा में UCC विधेयक पेश, आज होगी चर्चा; उज्जैन जमीन विवाद पर हंगामे से कार्यवाही दो बार स्थगित


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के पहले ही दिन सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक टकराहट देखने को मिली। राज्य सरकार ने सदन में मध्य प्रदेश समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक-2026 पेश कर दिया, जबकि विपक्ष ने उज्जैन जमीन खरीद मामले को लेकर जोरदार हंगामा किया। लगातार शोर-शराबे के चलते विधानसभा की कार्यवाही दो बार स्थगित करनी पड़ी। विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने स्पष्ट किया कि UCC विधेयक पर मंगलवार को विस्तृत चर्चा कराई जाएगी, जिसके बाद आगे की प्रक्रिया पूरी होगी।

    सत्र की शुरुआत से पहले ही कांग्रेस ने विरोध का अनोखा तरीका अपनाया। कांग्रेस विधायक मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और प्रदेश के कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना के मुखौटे पहनकर विधानसभा पहुंचे। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि सरकार किसानों के मुद्दों से ध्यान भटकाने में लगी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में किसानों को समय पर खाद और बीज नहीं मिल रहे हैं, लेकिन सरकार इन समस्याओं के समाधान के बजाय दूसरे मुद्दों में उलझी हुई है।

    सदन के भीतर भी विपक्ष ने सरकार को कई मुद्दों पर घेरा। उमंग सिंघार ने बरगी क्रूज हादसे में जान गंवाने वाले लोगों और कथित रूप से अव्यवस्था से परेशान नीट परीक्षार्थियों का मुद्दा उठाते हुए विधानसभा सचिवालय पर श्रद्धांजलि सूची में नाम शामिल नहीं करने का सवाल खड़ा किया। इसके बाद उज्जैन में मुख्यमंत्री और उनके परिवार की जमीन खरीद से जुड़े मामले पर विपक्ष ने स्थगन प्रस्ताव रखा, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया। इस फैसले के बाद कांग्रेस विधायकों ने तीखा विरोध किया और सदन में नारेबाजी शुरू हो गई। हंगामा बढ़ने पर विधानसभा की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।

    सरकार ने इस दौरान केवल UCC विधेयक ही नहीं, बल्कि एक साथ कई महत्वपूर्ण विधेयक भी सदन के पटल पर रखे। इनमें मध्य प्रदेश निरसन विधेयक, अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाएं विधेयक, राजमार्ग संशोधन विधेयक, निजी विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक, आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय संशोधन विधेयक, धन्वंतरि स्वास्थ्य विश्वविद्यालय विधेयक, श्रम और उद्योग से जुड़े कई नए विधेयक शामिल हैं। कांग्रेस ने एक साथ इतने विधेयक पेश किए जाने पर भी आपत्ति जताई और कहा कि इन्हें पहले कार्यसूची में शामिल नहीं किया गया था। संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने जवाब दिया कि कार्य मंत्रणा समिति की बैठक में इस पर चर्चा हो चुकी थी और सभी विधायकों को विधेयकों का अध्ययन करने का पर्याप्त समय मिलेगा।

    इसी बीच ओबीसी महासभा ने भी विधानसभा के बाहर 27 प्रतिशत आरक्षण लागू करने और 13 प्रतिशत पदों को होल्ड मुक्त करने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। संगठन के सदस्यों ने आरोप लगाया कि वर्षों से आंदोलन करने के बावजूद उनकी मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द फैसला नहीं लिया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

    विधानसभा के पहले दिन की कार्यवाही ने साफ संकेत दे दिए हैं कि मानसून सत्र काफी हंगामेदार रहने वाला है। एक तरफ सरकार समान नागरिक संहिता समेत कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने की तैयारी में है, वहीं विपक्ष किसानों, आरक्षण, उज्जैन जमीन विवाद और अन्य जनहित के मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बना चुका है। अब सबकी निगाहें UCC विधेयक पर होने वाली चर्चा और उज्जैन जमीन मामले में सरकार के अगले रुख पर टिकी हैं।

  • मंत्री की दौड़ सिंधिया का मजाकिया अंदाज और प्रतिमा बागरी का प्रयोग मध्य प्रदेश की राजनीति के दिलचस्प पल

    मंत्री की दौड़ सिंधिया का मजाकिया अंदाज और प्रतिमा बागरी का प्रयोग मध्य प्रदेश की राजनीति के दिलचस्प पल


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश की राजनीति में रविवार का दिन कई दिलचस्प घटनाओं और हल्के फुल्के राजनीतिक प्रसंगों के कारण चर्चा में रहा। कहीं मुख्यमंत्री के हेलिकॉप्टर तक पहुंचने के लिए मंत्री दौड़ लगाते नजर आए तो कहीं केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपनी पत्नी को मुस्कुराते हुए हाईकमान बताया। वहीं एक महिला मंत्री ने अपने ऊपर लगे आरोपों का जवाब देने के लिए मंच पर अनोखा प्रयोग कर सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया।

    टीकमगढ़ में आयोजित एक सरकारी कार्यक्रम के बाद मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को हेलिकॉप्टर से खजुराहो रवाना होना था। मुख्यमंत्री हेलिकॉप्टर में बैठ चुके थे और उड़ान की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी थीं। इसी दौरान मंत्री दिलीप अहिरवार तेज कदमों से दौड़ते हुए हेलिकॉप्टर तक पहुंचे और समय रहते उसमें सवार हो गए। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इसे अपने अपने अंदाज में साझा कर रहे हैं।

    दूसरी ओर अशोकनगर में आयोजित आजीविका मिशन के कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया का एक अलग ही अंदाज देखने को मिला। विभिन्न स्वयं सहायता समूहों के स्टॉलों का निरीक्षण करते हुए उनकी नजर चूड़ियों के स्टॉल पर पड़ी। उन्होंने अपनी पत्नी के लिए पीले रंग की चूड़ियां खरीदीं और मुस्कुराते हुए कहा कि यह मेरी हाईकमान के लिए हैं। उनकी इस टिप्पणी पर वहां मौजूद लोग भी मुस्कुरा उठे और यह वीडियो भी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया।

    इंदौर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने अपने चिरपरिचित अंदाज में कहा कि वह सत्तर वर्ष के हो चुके हैं और अब सठिया गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वह जो भी कहते हैं सामने कहते हैं और सही को सही तथा गलत को गलत कहने में विश्वास रखते हैं। उनके इस बयान के बाद कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने ठहाके लगाए जबकि राजनीतिक गलियारों में भी इसके अलग अलग अर्थ निकाले जाने लगे।

    उधर मंत्री प्रतिमा बागरी ने अपने जाति प्रमाण पत्र को लेकर उठे विवाद पर सफाई देने का अनोखा तरीका अपनाया। उन्होंने मंच पर तीन अलग अलग पेय पदार्थ रखे और उन्हें अलग प्रकार के ग्लासों में डालकर यह समझाने का प्रयास किया कि पात्र बदल जाने से किसी वस्तु की वास्तविक पहचान नहीं बदलती। इसी उदाहरण के माध्यम से उन्होंने कहा कि किसी पर आरोप लगा देने भर से उसकी वास्तविक पहचान या कानूनी स्थिति नहीं बदल जाती। उनका यह प्रयोग भी सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

    इन घटनाओं ने एक बार फिर यह दिखाया कि राजनीति केवल गंभीर फैसलों और बहसों तक सीमित नहीं रहती बल्कि नेताओं के व्यवहार उनके अंदाज और छोटे छोटे प्रसंग भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बन जाते हैं। सोशल मीडिया के दौर में ऐसे दृश्य तेजी से वायरल होते हैं और आम लोगों के बीच राजनीतिक चर्चाओं को नया रंग दे देते हैं।

  • एमपी में यूसीसी लागू करने की बड़ी तैयारी कैबिनेट से मिली मंजूरी अब विधानसभा में पेश होगा ऐतिहासिक विधेयक

    एमपी में यूसीसी लागू करने की बड़ी तैयारी कैबिनेट से मिली मंजूरी अब विधानसभा में पेश होगा ऐतिहासिक विधेयक


    भोपाल । मध्य प्रदेश सरकार ने समान नागरिक संहिता यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर बड़ा और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की अध्यक्षता में रविवार को आयोजित कैबिनेट बैठक में यूसीसी विधेयक 2026 के मसौदे को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी गई। इसके साथ ही राज्य में समान नागरिक संहिता लागू करने की प्रक्रिया ने औपचारिक रूप से नया चरण पार कर लिया है। अब इस विधेयक को 20 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र में चर्चा और पारित कराने के लिए सदन के पटल पर रखा जाएगा।

    यदि विधानसभा से यह विधेयक पारित हो जाता है और आगे की संवैधानिक प्रक्रिया पूरी होती है तो मध्य प्रदेश उन राज्यों की श्रेणी में शामिल हो जाएगा जिन्होंने समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने इस निर्णय को ऐतिहासिक बताते हुए मंत्रिमंडल के सभी सदस्यों और प्रदेशवासियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि समानता भारतीय संस्कृति और संविधान की मूल भावना का हिस्सा है और सरकार इसी विचार को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि अब विधेयक विधानसभा में प्रस्तुत किया जाएगा जहां इस पर विस्तार से चर्चा होगी। लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत सदन की मंजूरी मिलने के बाद आगे की वैधानिक कार्रवाई पूरी की जाएगी। सरकार का कहना है कि यूसीसी का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए समान नागरिक कानून की व्यवस्था सुनिश्चित करना है।

    कैबिनेट बैठक भोपाल के समीप जगदीशपुर स्थित ऐतिहासिक चमन महल में आयोजित की गई जहां जनजातीय संस्कृति और विरासत को भी विशेष रूप से प्रदर्शित किया गया। बैठक स्थल पर जनजातीय कलाकारों ने पारंपरिक लोक कलाओं की प्रस्तुति दी जबकि सभागार में जनजातीय वीर नायकों के चित्र लगाए गए थे। मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल के सदस्य पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए इलेक्ट्रिक बसों से बैठक स्थल पहुंचे।

    बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने भोपाल के गौरवशाली इतिहास का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र राजा भोज परमार राजवंश और गोंड शासकों की समृद्ध विरासत का केंद्र रहा है। उन्होंने रानी कमलापति के साहस और त्याग को याद करते हुए कहा कि उनका संघर्ष आज भी समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है। मुख्यमंत्री ने भोपाल के ऐतिहासिक विकास में विभिन्न शासकों और संस्कृतियों के योगदान का भी उल्लेख किया।

    देश में समान नागरिक संहिता को लेकर पहले भी कई राज्यों ने पहल की है। उत्तराखंड स्वतंत्र भारत में यूसीसी लागू करने वाला पहला राज्य बना जहां विधेयक पारित होने के बाद जनवरी 2025 से इसे लागू किया गया। इसके बाद गुजरात विधानसभा ने भी यूसीसी विधेयक पारित किया। वहीं असम विधानसभा ने भी समान नागरिक संहिता संबंधी विधेयक को मंजूरी दी है हालांकि वहां कुछ अनुसूचित जनजातियों और पारंपरिक धार्मिक प्रथाओं को इसके दायरे से बाहर रखा गया है। गोवा में लंबे समय से पुर्तगाली सिविल कोड के तहत समान नागरिक कानून की व्यवस्था लागू है।

    अब पूरे प्रदेश की निगाहें 20 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र पर टिकी हैं जहां यूसीसी विधेयक पर चर्चा होगी। सदन में पारित होने के बाद यह विधेयक आगे की संवैधानिक प्रक्रिया से गुजरेगा। सरकार इसे समानता और न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बता रही है जबकि इस पर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर व्यापक चर्चा होने की संभावना भी है।

  • एमपी बनेगा देश का अगला टेक हब, 40 हजार करोड़ के निवेश से 35 हजार युवाओं को मिलेगा रोजगार

    एमपी बनेगा देश का अगला टेक हब, 40 हजार करोड़ के निवेश से 35 हजार युवाओं को मिलेगा रोजगार


    मध्य प्रदेश। भोपाल में आयोजित एमपी टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 3.0 के साथ मध्यप्रदेश ने खुद को देश के उभरते तकनीकी और औद्योगिक केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में बड़ा कदम बढ़ाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कॉन्क्लेव का शुभारंभ करते हुए प्रदेश के भविष्य का ऐसा विजन पेश किया जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर और आधुनिक आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की नई पहचान बनने जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने भरोसा जताया कि इस आयोजन के जरिए प्रदेश में करीब 40 हजार करोड़ रुपए का निवेश आकर्षित होगा और लगभग 35 हजार नए रोजगार के अवसर तैयार होंगे।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत ने दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। मध्यप्रदेश भी अब केवल कृषि प्रधान राज्य नहीं रहा बल्कि यहां ड्रोन, रक्षा उपकरण और मिसाइल जैसे अत्याधुनिक उत्पादों का निर्माण हो रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य भविष्य की तकनीकों को अपनाते हुए नई औद्योगिक क्रांति की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है।

    कॉन्क्लेव के दौरान 51 विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया जाएगा जिनका उद्देश्य निवेशकों को प्रदेश की संभावनाओं से जोड़ना और उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण प्रस्तुत करना है। मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले वर्ष उनकी बार्सिलोना यात्रा के बाद स्पेन, अमेरिका और कनाडा की कंपनियों ने मध्यप्रदेश में 228 करोड़ रुपए का निवेश किया। इसी यात्रा के दौरान एक गीगावाट क्षमता वाले एआई डेटा सेंटर के लिए समझौता हुआ था और अब संबंधित कंपनी के प्रतिनिधि भोपाल पहुंच चुके हैं जिससे परियोजना को आगे बढ़ाया जाएगा।

    राज्य सरकार ने आईटी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार की भी बड़ी घोषणा की। इंदौर के सुपर कॉरिडोर में आधुनिक आईटी पार्क विकसित किया जाएगा जहां प्लग एंड प्ले सुविधा उपलब्ध होगी ताकि कंपनियां बिना अतिरिक्त निर्माण के तुरंत संचालन शुरू कर सकें। इसी तरह भोपाल आईटी पार्क का लगभग चार लाख वर्गफुट तक विस्तार किया जाएगा जबकि कोलार रोड पर पांच एकड़ भूमि में नया अत्याधुनिक आईटी पार्क बनाया जाएगा। इन परियोजनाओं से प्रदेश के युवाओं के लिए आईटी, इंजीनियरिंग और डिजिटल क्षेत्र में उच्च गुणवत्ता वाले रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, अनुसंधान, नवाचार और उद्योग तथा शिक्षण संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय को बढ़ावा देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उनका मानना है कि तकनीकी निवेश केवल उद्योगों को नहीं बल्कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था, शिक्षा और रोजगार व्यवस्था को भी नई दिशा देगा।

    कॉन्क्लेव में देश और विदेश की कई प्रतिष्ठित कंपनियां शामिल हुई हैं जिनमें CtrlS Datacenters, Kaynes Technologies, Fujiyama Power और Nyobolt Limited प्रमुख हैं। इसके अलावा आईआईएम इंदौर और आईआईएसईआर जैसे प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान भी भाग ले रहे हैं जो कौशल विकास, अनुसंधान और नवाचार को नई गति देंगे। कार्यक्रम के दौरान कई महत्वपूर्ण एमओयू और रणनीतिक साझेदारियों पर भी सहमति बनने की उम्मीद है जो राज्य के डिजिटल ढांचे को मजबूत करेंगी।

    मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि एमपी टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव का तीसरा संस्करण निवेश, रोजगार और तकनीकी विकास के मामले में नया रिकॉर्ड बनाएगा। उनका कहना है कि मध्यप्रदेश आने वाले वर्षों में देश के सबसे बड़े टेक्नोलॉजी और इनोवेशन हब के रूप में उभरने की पूरी क्षमता रखता है और सरकार इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए हर आवश्यक कदम उठा रही है।

  • तकनीकी गड़बड़ी से ई-कैबिनेट व्यवस्था प्रभावित, मुख्यमंत्री मंत्रियों को बताएंगे नर्मदा समझौते की पूरी जानकारी

    तकनीकी गड़बड़ी से ई-कैबिनेट व्यवस्था प्रभावित, मुख्यमंत्री मंत्रियों को बताएंगे नर्मदा समझौते की पूरी जानकारी


    भोपाल । भोपाल में बुधवार को होने वाली मध्यप्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक से पहले तकनीकी गड़बड़ी ने प्रशासनिक व्यवस्था की परीक्षा ले ली। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में प्रस्तावित कैबिनेट बैठक से पहले ई-कैबिनेट पोर्टल अचानक काम करना बंद कर गया जिससे मंत्रियों और उनके स्टाफ को बैठक का एजेंडा समय पर उपलब्ध नहीं हो सका। डिजिटल व्यवस्था पर आधारित कैबिनेट प्रक्रिया में आई इस बाधा के कारण सचिवालय स्तर पर देर रात तक हलचल बनी रही और तकनीकी टीम को पोर्टल को दोबारा चालू करने के लिए लगाया गया।

    मुख्य सचिव सचिवालय की ओर से बाद में आधिकारिक सूचना जारी कर बताया गया कि तकनीकी कारणों से ई-कैबिनेट पोर्टल फिलहाल उपलब्ध नहीं है और विशेषज्ञों की टीम लगातार इसे ठीक करने में जुटी हुई है। अधिकारियों का कहना है कि समस्या दूर होते ही संबंधित दस्तावेज और एजेंडा मंत्रियों को उपलब्ध करा दिए जाएंगे ताकि बैठक निर्धारित समय पर सुचारु रूप से संचालित हो सके।

    आज की कैबिनेट बैठक का सबसे महत्वपूर्ण विषय नर्मदा परियोजना से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे विवाद का समाधान रहेगा। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव हाल ही में दो दिवसीय दिल्ली दौरे से लौटे हैं जहां उन्होंने केंद्रीय नेतृत्व के साथ कई महत्वपूर्ण बैठकों में हिस्सा लिया। इसी दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में सरदार सरोवर बांध और उससे जुड़े मुआवजा विवाद पर अंतिम सहमति बनी। मुख्यमंत्री इस पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी मंत्रियों के साथ साझा करेंगे और बताएंगे कि किन परिस्थितियों में मध्यप्रदेश को गुजरात से सात हजार करोड़ रुपए से अधिक का दावा छोड़ना पड़ा तथा राज्य को गुजरात को लगभग 550 करोड़ रुपए का भुगतान करना होगा।

    कैबिनेट बैठक में केवल नर्मदा परियोजना ही नहीं बल्कि आगामी विधानसभा मानसून सत्र की रणनीति पर भी चर्चा होगी। 20 जुलाई से शुरू होकर 24 जुलाई तक चलने वाले विधानसभा सत्र के लिए सरकार लगभग एक दर्जन विधेयक तैयार कर रही है। इन प्रस्तावित विधेयकों को कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद विधानसभा में पेश किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य विभिन्न प्रशासनिक सुधारों और विकास योजनाओं को कानूनी आधार प्रदान करना है ताकि उनकी प्रभावी क्रियान्विति सुनिश्चित हो सके।

    बैठक में पहले अनुपूरक बजट को भी स्वीकृति दिए जाने की संभावना है। इसके साथ ही वर्ष 2031 तक विभिन्न विभागों की संचालित योजनाओं को जारी रखने संबंधी प्रस्तावों पर भी विचार किया जाएगा। इन योजनाओं के माध्यम से अधोसंरचना विकास शिक्षा स्वास्थ्य ग्रामीण विकास सिंचाई और सामाजिक कल्याण जैसे क्षेत्रों में चल रही परियोजनाओं को निरंतर गति देने की तैयारी है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि शासन की डिजिटल प्रणाली जितनी सुविधाजनक है उतनी ही उसकी तकनीकी मजबूती भी आवश्यक है। ई-कैबिनेट जैसी व्यवस्था का उद्देश्य कागजरहित प्रशासन को बढ़ावा देना और निर्णय प्रक्रिया को अधिक तेज और पारदर्शी बनाना है। ऐसे में तकनीकी बाधाएं शासन की कार्यप्रणाली को प्रभावित कर सकती हैं। हालांकि अधिकारियों का दावा है कि समस्या का शीघ्र समाधान कर लिया जाएगा और भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न आए इसके लिए भी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

    आज होने वाली कैबिनेट बैठक में लिए जाने वाले फैसलों पर पूरे प्रदेश की नजर रहेगी क्योंकि नर्मदा परियोजना से जुड़े निर्णयों के साथ विधानसभा सत्र की तैयारियां और विकास योजनाओं को लेकर सरकार की आगामी रणनीति भी इसी बैठक से तय होगी।

  • एमपी की राजनीति और नौकरशाही में हलचल: सिंधिया के भाषण पर सीएम का ‘मक्खन’ वाला तंज, एसीएस की नाराजगी और विजय शाह के बयान चर्चा में

    एमपी की राजनीति और नौकरशाही में हलचल: सिंधिया के भाषण पर सीएम का ‘मक्खन’ वाला तंज, एसीएस की नाराजगी और विजय शाह के बयान चर्चा में


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश की राजनीति और नौकरशाही में इन दिनों कई घटनाएं चर्चा का विषय बनी हुई हैं। एक ओर कैबिनेट मंत्री विजय शाह अपने भाषण को लेकर सुर्खियों में हैं तो दूसरी ओर केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के संबोधन पर मुख्यमंत्री मोहन यादव की टिप्पणी ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। इसी बीच रीवा की स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल और भोपाल के एक होटल से जुड़ा एक चर्चित प्रशासनिक किस्सा भी लोगों के बीच चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

    वीबीजी राम जी योजना के शुभारंभ कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री विजय शाह ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बेटियों की सुरक्षा और सम्मान को प्राथमिकता मिली है तथा बेटी बचाओ जैसे अभियानों का सकारात्मक असर देखने को मिला है। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने बचपन का एक प्रसंग भी सुनाया जिसमें उनकी मां खुले में शौच के लिए जाते समय सावधानी बरतने की सीख देती थीं। उनके इस भाषण की राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर अलग अलग तरह से चर्चा हो रही है।

    उधर रीवा जिले के मनगवां क्षेत्र से सामने आई एक घटना ने ग्रामीण स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। गांव तक सड़क नहीं होने और बारिश से रास्ता खराब होने के कारण एक बीमार महिला को परिजन खाट पर उठाकर अस्पताल ले जाने के लिए मजबूर हुए। समय पर इलाज नहीं मिलने से महिला की मौत हो गई। यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब प्रदेश में एयर एंबुलेंस जैसी आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं की घोषणा की जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सड़क और एंबुलेंस सुविधा की कमी को लेकर विपक्ष और स्थानीय लोग लगातार सवाल उठा रहे हैं।

    इधर शिवपुरी में हथियार निर्माण फैक्ट्री के शुभारंभ कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने संबोधन में मुख्यमंत्री मोहन यादव और निवेश परियोजना की सराहना की। भाषण के दौरान उनका उत्साह देखकर मुख्यमंत्री ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा कि आज महाराज की आवाज में वैसा आनंद आया जैसा मां रोटी पर थोड़ा ज्यादा मक्खन लगा दे। मुख्यमंत्री की इस टिप्पणी पर मंच पर मौजूद नेताओं के साथ कार्यक्रम में शामिल लोग भी मुस्कुराते नजर आए। इसके बाद यह टिप्पणी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई।

    इसी बीच भोपाल में एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी से जुड़ा एक चर्चित किस्सा भी सामने आया है। चर्चा है कि एक होटल में सामान्य ग्राहक की तरह व्यवहार किए जाने के कुछ समय बाद संबंधित विभाग की जांच टीम वहां पहुंच गई। हालांकि इस मामले को लेकर किसी भी स्तर पर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और न ही संबंधित अधिकारी या विभाग की ओर से कोई औपचारिक बयान जारी किया गया है। इसलिए इस घटना को केवल चर्चाओं और अपुष्ट दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

    इन घटनाओं ने एक बार फिर प्रदेश की राजनीति प्रशासनिक कार्यशैली और जनसुविधाओं को लेकर बहस तेज कर दी है। जहां नेताओं के बयान और मंचीय संवाद सुर्खियां बटोर रहे हैं वहीं स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दे आम लोगों की चिंता का कारण बने हुए हैं।