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  • चिप डिजाइन से GCC और ड्रोन तक MP में निवेश की तैयारी: बेंगलुरु में मिले ₹1200 करोड़ के प्रस्ताव निवेशकों को सरकार देगी जमीन

    चिप डिजाइन से GCC और ड्रोन तक MP में निवेश की तैयारी: बेंगलुरु में मिले ₹1200 करोड़ के प्रस्ताव निवेशकों को सरकार देगी जमीन


    भोपाल । मध्यप्रदेश में निवेश बढ़ाने की दिशा में सरकार को बेंगलुरु में आयोजित निवेशक संवाद से बड़ी प्रतिक्रिया मिली है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 22 सितंबर को बेंगलुरु में उद्योगपतियों और प्रमुख निवेशकों के साथ वन-टू-वन बैठकें कीं। इन मुलाकातों के दौरान मध्यप्रदेश के लिए 1200 करोड़ रुपए से अधिक के नए निवेश प्रस्ताव सामने आए। खास बात यह रही कि निवेशकों की रुचि केवल पारंपरिक उद्योगों तक सीमित नहीं रही बल्कि चिप डिजाइन ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर डेटा सेंटर ड्रोन स्पेसटेक और अन्य तकनीकी क्षेत्रों में भी निवेश की संभावनाओं पर चर्चा हुई।

    मुख्यमंत्री के साथ केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया भी मौजूद रहे। बैठक में ग्वालियर में विकसित किए जा रहे टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन यानी TMZ को विशेष रूप से निवेशकों के सामने रखा गया। सरकार की ओर से बताया गया कि इस क्षेत्र में निवेश के लिए बढ़ती रुचि को देखते हुए अब दूसरे चरण की तैयारी की जाएगी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक TMZ में पहले से करीब 5000 करोड़ रुपए के निवेश का आधार तैयार हो चुका है और नए प्रस्ताव आने के बाद अतिरिक्त जमीन की जरूरत होगी।

    मुख्यमंत्री ने निवेशकों से कहा कि मध्यप्रदेश में उद्योगों की जरूरत के मुताबिक जमीन उपलब्ध कराने की दिशा में सरकार काम करेगी। सरकार का फोकस निवेशकों को जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने और अनुमति प्रक्रिया को आसान बनाने पर भी है। मुख्यमंत्री ने प्रदेश में सिंगल विंडो व्यवस्था नीतिगत सहयोग और औद्योगिक अधोसंरचना का उल्लेख करते हुए निवेशकों को राज्य में विस्तार के अवसरों से अवगत कराया।

    बेंगलुरु की बैठक में थोलोन्स की ओर से मध्यप्रदेश में 210 करोड़ रुपए के निवेश से ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर स्थापित करने के प्रस्ताव पर चर्चा हुई। वहीं असेइक मावेन सिलिकॉन की ओर से करीब 100 करोड़ रुपए के निवेश से चिप डिजाइन हाउस स्थापित करने का प्रस्ताव रखा गया। कोर-आईसी टेक्नोलॉजीज ने भी लगभग 100 करोड़ रुपए के निवेश से चिप डिजाइन सर्विसेज विकसित करने में रुचि दिखाई। इससे मध्यप्रदेश में सेमीकंडक्टर और चिप डिजाइन जैसे तकनीकी क्षेत्रों में संभावित विस्तार की तस्वीर सामने आती है।

    स्टार्टअप सेक्टर को लेकर भी बैठक में महत्वपूर्ण चर्चा हुई। डीपटेक वेंचर कैपिटल फंड सीफंड की ओर से मध्यप्रदेश के स्टार्टअप्स के लिए करीब 200 करोड़ रुपए की फंडिंग उपलब्ध कराने की योजना पर बात हुई। इसके अलावा आधुनिक डेटा सेंटर स्थापित करने और स्पेसटेक क्षेत्र में संभावित सहयोग को लेकर भी निवेशकों के साथ बातचीत हुई। मोबिलिटी और पर्यावरण से जुड़े क्षेत्रों की कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भी प्रदेश में अपनी योजनाओं को लेकर चर्चा की।

    ड्रोन तकनीक को लेकर भी निवेश की संभावनाएं तलाशी गईं। एयरबाउंड आइडियाफोर्ज नॉटिकल विंग्स न्यूस्पेस एंड रिसर्च टेक्नोलॉजीज और अनमैन्ड सिस्टम्स से जुड़े प्रतिनिधियों के साथ मध्यप्रदेश में ड्रोन निर्माण और परीक्षण का इकोसिस्टम विकसित करने पर बातचीत हुई। तकनीक आधारित इन क्षेत्रों में निवेश आने से प्रदेश में नए औद्योगिक अवसरों के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और कौशल विकास की संभावनाएं भी बन सकती हैं।

    बेंगलुरु संवाद के दौरान मुख्यमंत्री ने ग्वालियर TMZ की विशेषताओं के साथ मध्यप्रदेश के अन्य शहरों में उद्योग विस्तार की संभावनाओं पर भी चर्चा की। अब इन निवेश प्रस्तावों को अगले चरण में ले जाने के लिए जमीन और अन्य जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था पर काम किया जाएगा। निवेश प्रस्ताव फिलहाल कंपनियों की रुचि और प्रस्तावित निवेश हैं इसलिए वास्तविक निवेश का आकार और परियोजनाओं का क्रियान्वयन आगे की प्रक्रिया और औपचारिक मंजूरियों पर निर्भर करेगा।

  • बिजली संकट से जूझता एमपी अब सरप्लस राज्य, 32 हजार मेगावॉट क्षमता के बीच ग्रीन एनर्जी पर बड़ा जोर

    बिजली संकट से जूझता एमपी अब सरप्लस राज्य, 32 हजार मेगावॉट क्षमता के बीच ग्रीन एनर्जी पर बड़ा जोर

    मध्यप्रदेश: अब बिजली के मामले में सरप्लस राज्य बन चुका है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में बिजली उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भी लगातार नए आयाम स्थापित किए जा रहे हैं। सरकार का लक्ष्य प्रदेशवासियों को सस्ती दरों पर पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराना है।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 22 सितंबर को भोपाल में आयोजित नवीकरणीय ऊर्जा एवं ऊर्जा भंडारण की किफायती विद्युत खरीद विषयक कार्यशाला का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में उन्होंने दीप प्रज्ज्वलित किया और एसोसिएशन की पुस्तक का विमोचन भी किया।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि मौजूदा समय में बिजली हर क्षेत्र की अनिवार्य जरूरत बन चुकी है। राज्य सरकार बढ़ती खपत को ध्यान में रखते हुए बिजली उत्पादन, वितरण और संधारण की क्षमता पर लगातार काम कर रही है। नई तकनीक के साथ बिजली उत्पादन की नई इकाइयां भी शुरू की गई हैं।

    उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश ने बिजली संकट और लंबे समय तक पावर कट का दौर देखा है, लेकिन अब स्थिति काफी बदल गई है। प्रदेश नवीकरणीय ऊर्जा के उत्पादन में लगातार अपनी क्षमता बढ़ा रहा है और अपने ही पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

    मुख्यमंत्री के अनुसार, मध्यप्रदेश की बिजली उत्पादन क्षमता राज्य गठन से लेकर वर्ष 2002-03 तक लगभग 5 हजार मेगावॉट थी। वर्तमान में यह क्षमता बढ़कर करीब 32 हजार मेगावॉट हो चुकी है। इसमें लगभग 30 प्रतिशत हिस्सेदारी ग्रीन एनर्जी की है।

    नीमच-मंदसौर क्षेत्र में 2 हजार मेगावॉट क्षमता की परियोजना का भी उल्लेख किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इतनी बड़ी परियोजनाओं को सामान्य तौर पर पूरा होने में चार से छह वर्ष तक लग सकते हैं, लेकिन मध्यप्रदेश में इसे करीब दो से ढाई वर्ष में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

    प्रदेश में पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों के साथ सौर, पवन और पंप स्टोरेज के माध्यम से बिजली उत्पादन पर भी जोर दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अब पानी से ही नहीं, बल्कि पानी के ऊपर भी बिजली उत्पादन की दिशा में काम हो रहा है।

    ग्वालियर-चंबल क्षेत्र के मुरैना में स्थापित सोलर इलेक्ट्रिसिटी स्टोरेज परियोजना से करीब 2.70 रुपये प्रति यूनिट की दर पर बिजली उपलब्ध होने की बात कही गई। सरकार का कहना है कि ऊर्जा क्षेत्र की योजनाओं को तेज गति से लागू करने के कारण उत्पादन क्षमता में लगातार वृद्धि हुई है।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में लगभग 42 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश चौबीसों घंटे अक्षय ऊर्जा उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ रहा है। बिजली कंपनियों को अपनी क्षमता बढ़ाने के साथ घाटा कम करने पर भी ध्यान देने की जरूरत है।

    कार्यशाला में ऊर्जा भंडारण और किफायती विद्युत खरीद से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि कार्यशाला में होने वाला मंथन बिजली कंपनियों की कार्यप्रणाली और भविष्य की ऊर्जा योजनाओं के लिए उपयोगी साबित होगा।

    ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने वर्चुअल संबोधन में कहा कि कार्यशाला से विद्युत वितरण कंपनियों को अधिक सक्षम और मजबूत बनाने के लिए उपयोगी निष्कर्ष सामने आएंगे। सरकार का जोर बिजली की बढ़ती जरूरत के साथ उत्पादन और वितरण व्यवस्था को मजबूत करने पर है।

  • स्वामित्व योजना के कार्यक्रम में रणदिवे को लेकर चर्चा: सीएम ने बताया आयोजन का सूत्रधार विजयवर्गीय बोले राज की बात बता दी

    स्वामित्व योजना के कार्यक्रम में रणदिवे को लेकर चर्चा: सीएम ने बताया आयोजन का सूत्रधार विजयवर्गीय बोले राज की बात बता दी


    इंदौर । इंदौर में गुरुवार को स्वामित्व अधिकार योजना के तहत फ्री रजिस्ट्री बांटने के अभियान की शुरुआत के दौरान भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की मौजूदगी में मंच से हुई एक टिप्पणी चर्चा में आ गई। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भाजपा के प्रदेश महामंत्री गौरव रणदिवे का उल्लेख करते हुए उन्हें आयोजन का सूत्रधार बताया। इसके बाद नगरीय विकास एवं आवास विभाग मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने अपने संबोधन में मुख्यमंत्री की इसी टिप्पणी का संदर्भ लेते हुए कहा कि उन्होंने एक राज की बात बता दी। कार्यक्रम का यह हिस्सा सामने आए वीडियो के बाद राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया।

    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने संबोधन के दौरान आयोजन की तैयारियों और उसे आकार देने में गौरव रणदिवे की भूमिका का उल्लेख किया। उन्होंने रणदिवे को आयोजन का सूत्रधार बताया। इसके बाद जब मंत्री कैलाश विजयवर्गीय अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए मंच पर आए तो उन्होंने मुख्यमंत्री की बात को पकड़ते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने एक राज की बात बताई है। उन्होंने इसके लिए गौरव रणदिवे का भी आभार जताया।

    विजयवर्गीय की यह टिप्पणी सामने आने के बाद कार्यक्रम के राजनीतिक मायने निकाले जाने लगे। हालांकि सार्वजनिक तौर पर विजयवर्गीय और रणदिवे के बीच किसी औपचारिक विवाद की जानकारी सामने नहीं आई है। कार्यक्रम में हुई टिप्पणी को लेकर अलग-अलग राजनीतिक व्याख्याएं जरूर की जा रही हैं। भाजपा नेताओं से जुड़े समर्थक इसे विजयवर्गीय के सार्वजनिक मंचों पर दिखने वाले सहज और चुटीले अंदाज के रूप में देख रहे हैं।

    गौरव रणदिवे इंदौर भाजपा की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं। इंदौर भाजपा के नगर अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभालने के बाद संगठन में उनकी भूमिका बढ़ी और बाद में उन्हें प्रदेश महामंत्री की जिम्मेदारी मिली। स्थानीय राजनीतिक चर्चाओं में उनके संगठनात्मक कद को लेकर समय-समय पर चर्चा होती रही है। इसी वजह से मंच से उनका नाम लिए जाने और मुख्यमंत्री की ओर से आयोजन के सूत्रधार के तौर पर उल्लेख किए जाने को भी राजनीतिक हलकों में ध्यान से देखा गया।

    विजयवर्गीय और रणदिवे की राजनीतिक पृष्ठभूमि को लेकर भी इंदौर में चर्चा होती रही है। इससे पहले विजयवर्गीय एक कार्यक्रम में राजनीतिक संदर्भ में यह कह चुके हैं कि वे अपने द्वारा उगे हुए पौधों को नहीं काटते। उस समय भी उनके बयान को अलग-अलग राजनीतिक संदर्भों से जोड़कर देखा गया था। अब इंदौर के इस कार्यक्रम में रणदिवे को लेकर की गई टिप्पणी के बाद पुराना बयान भी सोशल मीडिया चर्चाओं में फिर सामने आया है।

    वहीं कांग्रेस की ओर से इस पूरे घटनाक्रम को भाजपा के भीतर गुटबाजी से जोड़कर टिप्पणी की गई। कांग्रेस मीडिया को-ऑर्डिनेटर नीलाभ शुक्ला ने कहा कि राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की मौजूदगी वाले कार्यक्रम में भाजपा के नेताओं के बीच कथित खींचतान सामने आई है। उन्होंने मुख्यमंत्री और मंत्री के बयानों को आधार बनाकर संगठन के भीतर समन्वय पर सवाल उठाए।

    हालांकि कार्यक्रम के मंच से सामने आए बयानों के अलावा दोनों नेताओं के बीच किसी नए विवाद की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में इस घटनाक्रम का राजनीतिक अर्थ निकालने से पहले नेताओं के वास्तविक बयानों और पूरे कार्यक्रम के संदर्भ को देखना महत्वपूर्ण है। फिलहाल रणदिवे को लेकर मुख्यमंत्री की टिप्पणी और उसके बाद विजयवर्गीय का जवाब इंदौर के राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है।

  • लाड़ली बहना योजना में घटती जा रही महिलाओं की संख्या 2026 में अब तक 21 हजार नाम बाहर

    लाड़ली बहना योजना में घटती जा रही महिलाओं की संख्या 2026 में अब तक 21 हजार नाम बाहर


    भोपाल। मध्य प्रदेश की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना में पात्र हितग्राहियों की संख्या लगातार कम होती जा रही है। विधानसभा चुनाव 2023 से पहले शुरू हुई इस योजना में जहां शुरुआत में बड़ी संख्या में महिलाओं को शामिल किया गया था वहीं अब पात्रता की शर्तों और अन्य कारणों के चलते हजारों महिलाओं के नाम सूची से बाहर हो रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक जनवरी 2026 से सितंबर 2026 के बीच करीब 21 हजार 150 महिलाओं के नाम योजना से हटाए गए हैं। इसके साथ ही योजना शुरू होने के बाद तीन साल में करीब 6 लाख 26 हजार महिलाओं के नाम सूची से बाहर हो चुके हैं।

    विभागीय आंकड़ों के अनुसार 1 जनवरी 2026 को लाड़ली बहना योजना में 1 करोड़ 25 लाख 31 हजार महिलाएं पात्र हितग्राही थीं। सितंबर 2026 तक यह संख्या घटकर 1 करोड़ 25 लाख 10 हजार 150 रह गई। यानी करीब आठ महीने की अवधि में ही 21 हजार से ज्यादा नाम कम हो गए। यह गिरावट इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि फिलहाल योजना में नए नाम जोड़ने की प्रक्रिया नहीं चल रही है। ऐसे में एक तरफ नए हितग्राही नहीं जुड़ रहे हैं और दूसरी तरफ पात्रता पूरी नहीं करने वाली महिलाओं के नाम लगातार हटाए जा रहे हैं।

    योजना की शुरुआत में अक्टूबर 2023 में करीब 1 करोड़ 31 लाख 35 हजार 985 महिलाएं योजना में शामिल थीं। इसके बाद आपत्तियों और पात्रता की जांच के दौरान 2 लाख 18 हजार 858 नाम हटाए गए। इसके बाद पात्र हितग्राहियों की संख्या करीब 1 करोड़ 29 लाख 5 हजार 457 रह गई थी। समय के साथ यह संख्या और कम होती चली गई।

    अधिकारियों के मुताबिक लाड़ली बहना योजना में पात्रता के लिए अधिकतम उम्र 60 वर्ष निर्धारित है। जिन महिलाओं की उम्र 60 वर्ष पूरी हो जाती है उनके नाम योजना की सूची से हटा दिए जाते हैं। इसके अलावा किसी हितग्राही की मृत्यु होने या अन्य पात्रता शर्तें पूरी नहीं होने की स्थिति में भी नाम बाहर किया जाता है। इसी वजह से योजना के आंकड़ों में लगातार कमी देखने को मिल रही है।

    दूसरी ओर नए नाम नहीं जुड़ने के कारण योजना में शामिल महिलाओं की संख्या बढ़ने की संभावना फिलहाल कम है। योजना की शुरुआत जून 2023 में 1000 रुपए प्रतिमाह की आर्थिक सहायता के साथ हुई थी। सरकार ने इसे पांच साल में बढ़ाकर 3000 रुपए प्रतिमाह करने का निर्णय लिया था। शुरुआत के करीब चार महीने बाद मासिक राशि बढ़ाकर 1250 रुपए कर दी गई थी। इसके बाद नवंबर 2025 से इसमें 250 रुपए की और बढ़ोतरी की गई और वर्तमान में पात्र महिलाओं को हर महीने 1500 रुपए दिए जा रहे हैं।

    विभाग की ओर से पात्रता के आधार पर हितग्राहियों की समीक्षा लगातार जारी है। ऐसे में दिसंबर 2026 के अंत तक योजना में शामिल महिलाओं की संख्या और घट सकती है। खासकर उम्र की सीमा पूरी करने वाली महिलाओं और अन्य कारणों से अपात्र पाए जाने वाले हितग्राहियों के नाम सूची से हटाए जाने की प्रक्रिया जारी रहेगी। इस बीच योजना में नए नाम जोड़ने की प्रक्रिया शुरू नहीं होने से मौजूदा संख्या में बढ़ोतरी की संभावना फिलहाल नजर नहीं आ रही है।

  • MP की सियासत में एक दिन में तीन बड़े सीन ट्रंप के ऐलान से शिवराज ट्रेंड में CM मोहन ने हेमंत को बीच में बैठाया दिग्विजय ने भाजपा पर साधा निशाना

    MP की सियासत में एक दिन में तीन बड़े सीन ट्रंप के ऐलान से शिवराज ट्रेंड में CM मोहन ने हेमंत को बीच में बैठाया दिग्विजय ने भाजपा पर साधा निशाना


    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजनीति में शुक्रवार को अलग अलग घटनाओं ने सियासी माहौल को खासा दिलचस्प बना दिया। एक तरफ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक ऐलान के बाद मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगे तो दूसरी तरफ प्रदेश भाजपा में सत्ता और संगठन के बीच कथित मनमुटाव की चर्चाओं के बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल एक मंच पर साथ नजर आए। इसी बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भाजपा को लेकर पूछे गए सवाल पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भाजपा भाड़ में जाए।

    दरअसल ट्रंप ने कहा है कि अगर उनकी रिपब्लिकन पार्टी चुनाव जीतती है तो हर अमेरिकी वयस्क को 5000 डॉलर दिए जाएंगे। इस घोषणा के बाद सोशल मीडिया पर शिवराज सिंह चौहान की लाड़ली बहना योजना से जोड़कर कई पोस्ट और तस्वीरें वायरल होने लगीं। शिवराज समर्थकों ने इसे मामा के मॉडल की वैश्विक चर्चा से जोड़ दिया। इसके बाद शिवराज सिंह चौहान ट्रेंड में आ गए।

    जब उनसे पूछा गया कि सोशल मीडिया पर यह चर्चा है कि ट्रंप भी आपके मॉडल को अपना रहे हैं तो शिवराज ने कहा कि लाड़ली बहना योजना सस्ती लोकप्रियता के लिए नहीं लाई गई थी। उनका कहना था कि इस योजना का उद्देश्य महिलाओं को उनका अधिकार और न्याय दिलाना था। इसके बाद सोशल मीडिया पर तरह तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं और लोगों ने ट्रंप के ऐलान को लाड़ली बहना योजना से जोड़कर अपनी राय जाहिर की।

    इधर मध्य प्रदेश भाजपा में सत्ता और संगठन के बीच कथित खटपट की चर्चाओं के बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने साथ आकर अलग संदेश देने की कोशिश की। दोनों नेता भाजपा कार्यालय में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक साथ नजर आए। जब दोनों की दोस्ती को लेकर सवाल किया गया तो मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी दोस्ती तो पहले से ही प्रगाढ़ है। इस दौरान दोनों नेता मुस्कुराते दिखाई दिए।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले भी दोनों नेताओं की मुलाकात हुई। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के घर पहुंचे। वहां दोनों के बीच बंद कमरे में बातचीत हुई। इसके बाद दोनों एक ही वाहन से भाजपा कार्यालय पहुंचे। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान भी मुख्यमंत्री ने प्रदेश अध्यक्ष को बीच की कुर्सी पर बैठने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि आप प्रदेश अध्यक्ष हैं इसलिए यहां बैठिए। इस पूरे घटनाक्रम को भाजपा के भीतर एकजुटता का संदेश देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

    उधर दतिया में कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह अपनी सनातन स्वाभिमान यात्रा को लेकर जानकारी दे रहे थे। इसी दौरान भाजपा की ओर से यात्रा पर उठाए जा रहे सवालों को लेकर उनसे सवाल किया गया। पत्रकार के सवाल पर दिग्विजय सिंह ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भाजपा भाड़ में जाए और इसके बाद वहां से चले गए।

    इसी बीच सागर के जहरीली शराबकांड की न्यायिक जांच से जुड़ी फाइल को लेकर भी मंत्रालय के गलियारों में चर्चा है। सरकार ने मामले की जांच के लिए एक सदस्यीय आयोग बनाने का ऐलान किया है लेकिन दावा किया जा रहा है कि जांच से संबंधित फाइल वल्लभ भवन की चौथी मंजिल पर पिछले कुछ दिनों से आगे नहीं बढ़ी है। अब सवाल उठ रहे हैं कि जब सरकार जांच का ऐलान कर चुकी है तो प्रक्रिया में देरी क्यों हो रही है। इस पूरे घटनाक्रम ने मध्य प्रदेश की सियासत में एक बार फिर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

  • नीम करौली बाबा की यादों ने भावुक किया भक्तों को पोते ने सुनाया बचपन का वो किस्सा जब बाबा के साथ बिताते थे वक्त

    नीम करौली बाबा की यादों ने भावुक किया भक्तों को पोते ने सुनाया बचपन का वो किस्सा जब बाबा के साथ बिताते थे वक्त


    भोपाल। नीम करोली बाबा पर बनी फिल्म हनुमान अंश इन दिनों चर्चा में है। फिल्म की सफलता के बीच बाबा से जुड़ी कई ऐसी बातें भी सामने आ रही हैं जो उनके भक्तों के लिए बेहद खास हैं। बाबा का भोपाल से भी पुराना पारिवारिक रिश्ता रहा है। उनके पोते डॉ. धनंजय शर्मा आज भी भोपाल में रहते हैं और उनके पास बाबा के साथ बिताए बचपन के कई ऐसे किस्से हैं जिन्हें याद करके वह आज भी भावुक हो जाते हैं। डॉ. धनंजय बताते हैं कि जब उनका जन्म भोपाल में हुआ था तब नीम करोली बाबा खुद यहां आए थे और उन्होंने ही उनका नामकरण किया था।

    डॉ. धनंजय के मुताबिक बचपन में गर्मी की छुट्टियों के दौरान वह करीब दो महीने के लिए आगरा जाते थे। उस समय बाबा से उनकी मुलाकात होती थी और उन्हें बाबा का भरपूर लाड़ प्यार मिला। करीब 13 साल तक उन्होंने बाबा को बेहद करीब से देखा। धनंजय कहते हैं कि उनके लिए नीम करोली बाबा पहले किसी बड़े संत या आध्यात्मिक गुरु से ज्यादा उनके अपने बाबा थे। घर में बाबा का व्यवहार भी बिल्कुल सामान्य रहता था। उन्होंने कभी बच्चों को यह महसूस नहीं होने दिया कि वह कोई बहुत बड़े संत हैं।

    नीम करोली बाबा करीब 40 साल तक गांव के प्रधान भी रहे थे। उनके व्यक्तित्व का यह पहलू भी उनके पोते की यादों में दर्ज है। धनंजय बताते हैं कि बाबा से जुड़े भक्त जब अपने अनुभव सुनाते हैं तो उन्हें कई बार हैरानी होती है। भक्तों का मानना है कि बाबा की कृपा से उनके जीवन की मुश्किल परिस्थितियां आसान हुईं और कई कठिन काम पूरे हुए।

    साल 1973 में जब नीम करोली बाबा का निधन हुआ तब धनंजय का परिवार भोपाल में ही था। उन्हें सुबह करीब आठ बजे ऑल इंडिया रेडियो के समाचार से बाबा के निधन की जानकारी मिली। उनके मुताबिक बाबा के निधन के बाद भी भक्तों की आस्था कम नहीं हुई। इसी संदर्भ में वह देवरहा बाबा से जुड़ा एक प्रसंग भी बताते हैं। उनके अनुसार जब कुछ भक्त देवरहा बाबा के पास पहुंचे और उन्हें बताया कि नीम करोली बाबा अब नहीं रहे तो वह भावुक होकर रोने लगे। उन्होंने भक्तों से कहा था कि नीम करोली बाबा कहीं नहीं गए और वह अपने भक्तों के साथ बने रहेंगे।

    डॉ. धनंजय शर्मा ने भोपाल में डॉक्टर के रूप में सेवाएं दीं। उन्होंने हमीदिया समेत कई अस्पतालों में काम किया और बाद में सेवानिवृत्त हुए। फिल्म हनुमान अंश की रिलीज से पहले इसके निर्देशक भी भोपाल पहुंचे थे और उन्होंने धनंजय को फिल्म दिखाई थी। शुरुआत में भोपाल में फिल्म को पर्याप्त शो नहीं मिल रहे थे और टिकटों की बिक्री भी कम थी। इसके बाद कुछ भक्तों ने पहल की। उन्होंने करीब 50 से 100 लोगों के टिकट खुद बुक किए और उन्हें फिल्म मुफ्त में दिखाई। धीरे धीरे दर्शकों की संख्या बढ़ने लगी और फिल्म ने रफ्तार पकड़ ली। धनंजय इसे बाबा का चमत्कार मानते हैं।

    धनंजय की पत्नी शैलजा भी शादी के बाद बाबा से जुड़ीं। उनकी शादी 1987 में हुई थी। परिवार और भक्तों से बाबा के बारे में जानने के बाद उन्होंने कई किताबें पढ़ीं और धीरे धीरे उनकी भी बाबा के प्रति आस्था बढ़ती चली गई।

    वहीं नीम करोली बाबा के पुश्तैनी घर को लेकर भी विवाद सामने आया है। बताया जाता है कि बाबा का बचपन उत्तर प्रदेश के अकबरपुर गांव में बीता था। उनके पुश्तैनी घर और उससे जुड़े परिसर के रखरखाव को लेकर परिवार और ट्रस्ट के बीच विवाद की स्थिति है। परिवार की ओर से ट्रस्ट के पदाधिकारी पर कब्जे का आरोप लगाए जाने की बात भी सामने आई है। दूसरी ओर डॉ. धनंजय का कहना है कि उत्तराखंड के कैंची धाम और उत्तर प्रदेश के नीम करोली को लेकर लोगों में भ्रम है। उनके अनुसार दोनों अलग स्थान हैं और इनकी सही पहचान स्पष्ट होना जरूरी है।

    नीम करोली बाबा से जुड़ी इन पारिवारिक यादों ने एक बार फिर उनके जीवन और व्यक्तित्व को चर्चा में ला दिया है। फिल्म हनुमान अंश के जरिए बाबा की कहानी बड़े पर्दे तक पहुंची है और अब उनके परिवार की यादें लोगों को उनके जीवन का एक अलग और निजी पहलू दिखा रही हैं।

  • दुबई में MP की बल्ले-बल्ले: 53 हजार करोड़ के निवेश प्रस्तावों से बदली तस्वीर, AI डेटा सेंटर और सोलर प्रोजेक्ट बने सबसे बड़ा आकर्षण

    दुबई में MP की बल्ले-बल्ले: 53 हजार करोड़ के निवेश प्रस्तावों से बदली तस्वीर, AI डेटा सेंटर और सोलर प्रोजेक्ट बने सबसे बड़ा आकर्षण


    भोपाल । दुबई में मध्यप्रदेश ने निवेश की संभावनाओं को लेकर बड़ा असर छोड़ा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दुबई दौरे के तीसरे दिन प्रदेश को 53 हजार करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव मिलने की जानकारी सामने आई है। ग्रीन एनर्जी से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस डेटा सेंटर हेल्थकेयर लॉजिस्टिक्स शिक्षा मैन्युफैक्चरिंग और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर तक कई क्षेत्रों में विदेशी निवेशकों और कारोबारी समूहों ने मध्यप्रदेश में रुचि दिखाई है। मुख्यमंत्री ने निवेशकों से वन टू वन मुलाकात कर प्रदेश की खूबियां गिनाईं और साफ संदेश दिया कि मध्यप्रदेश निवेश के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने निवेशकों को अगले साल जनवरी में भोपाल में होने वाली ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2027 में शामिल होने का न्योता देते हुए कहा कि वेलकम टू मध्यप्रदेश।

    दुबई दौरे के दौरान मुख्यमंत्री की मुलाकात कई बड़े कारोबारी समूहों के प्रतिनिधियों से हुई। इनमें राणा होल्डिंग्स जेम्स एजुकेशन क्रेसेंट ग्रुप प्योर हेल्थ शराफ ग्रुप चोइथराम्स डीपी वर्ल्ड ब्यूमर्क कॉरपोरेशन वेस्ट जोन केजीके ग्रुप विस्टास मीडिया कैपिटल वीएफएस ग्लोबल और एनआईडीआई सर्विसेज से जुड़े प्रतिनिधि शामिल रहे। बैठकों का मुख्य उद्देश्य मध्यप्रदेश में निवेश की संभावनाओं को अलग अलग सेक्टर में सामने रखना और संभावित परियोजनाओं को आगे बढ़ाना रहा।

    इनमें राणा होल्डिंग्स की ओर से सबसे बड़े प्रस्तावों में रुचि दिखाई गई। कंपनी ने मध्यप्रदेश में 2000 मेगावॉट के सौर ऊर्जा पोर्टफोलियो 200 मेगावॉट के ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट 50 मेगावॉट क्षमता के एआई और कंप्यूट डेटा सेंटर क्रिटिकल मिनरल्स रिकवरी एवं रीसाइक्लिंग कॉम्प्लेक्स और स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग हब जैसी परियोजनाओं में रुचि दिखाई। इन प्रस्तावित परियोजनाओं से करीब 35 हजार 200 करोड़ रुपए के निवेश की संभावना बताई गई है।

    इसके अलावा औद्योगिक स्तर के एआई कंप्यूट कैंपस और सॉवरेन एआई फैक्ट्री को लेकर भी चर्चा हुई। 50 मेगावॉट क्षमता वाले एआई फैक्ट्री प्रोजेक्ट के लिए करीब 1.5 से 2 अरब डॉलर यानी लगभग 18 हजार करोड़ रुपए के निवेश का कॉन्सेप्ट सामने रखा गया। भविष्य में इसकी क्षमता को 100 मेगावॉट से अधिक तक बढ़ाने की संभावना भी बताई गई है। इससे साफ है कि मध्यप्रदेश अब पारंपरिक उद्योगों के साथ साथ एआई डेटा सेंटर और हाई टेक इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे नए क्षेत्रों पर भी अपना फोकस बढ़ा रहा है।

    मुख्यमंत्री की बातचीत केवल ऊर्जा और तकनीक तक सीमित नहीं रही। हेल्थ सेक्टर में मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल डिजिटल हेल्थ टेलीमेडिसिन मेडिकल और नर्सिंग शिक्षा के क्षेत्र में संभावनाओं पर चर्चा हुई। लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक्स पार्क वेयरहाउसिंग कोल्ड चेन और ग्लोबल सप्लाई चेन से मध्यप्रदेश को जोड़ने पर जोर दिया गया। वहीं खाद्य प्रसंस्करण रिटेल कृषि उत्पादों की खरीद वितरण नेटवर्क और कोल्ड चेन को लेकर भी निवेश की संभावनाएं तलाशीं गईं।

    शारजाह चैंबर ऑफ कॉमर्स के साथ हुई बैठक में भी मध्यप्रदेश और शारजाह के बीच व्यापार और निवेश बढ़ाने पर चर्चा हुई। इसमें लॉजिस्टिक्स फूड प्रोसेसिंग टेक्सटाइल फार्मास्यूटिकल्स पर्यटन नवीकरणीय ऊर्जा और एसएमई सहयोग जैसे क्षेत्रों को प्रमुखता दी गई। मुख्यमंत्री ने शारजाह के निवेशकों को भी मध्यप्रदेश आने और ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2027 में शामिल होने का निमंत्रण दिया।

    दुबई दौरे में मुख्यमंत्री ने वेस्ट टू एनर्जी और सस्टेनेबल डेवलपमेंट से जुड़ी परियोजनाओं को भी करीब से समझा। बीईईएएच के साथ इंटीग्रेटेड सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट सर्कुलर इकोनॉमी स्मार्ट सिटी और हरित ऊर्जा को लेकर सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा हुई। वहीं एमार समूह की लीडरशिप से मुलाकात में इंदौर पीथमपुर उज्जैन डेवलपमेंट कॉरिडोर के साथ टाउनशिप हॉस्पिटैलिटी और आधुनिक शहरी विकास परियोजनाओं में निवेश की संभावनाओं पर बात हुई।

    इस पूरे दौरे में मध्यप्रदेश की निवेश क्षमता को वैश्विक मंच पर पेश करने के साथ राज्य की निवेश नीति इंफ्रास्ट्रक्चर भूमि उपलब्धता लॉजिस्टिक्स और सिंगल विंडो व्यवस्था को भी प्रमुखता से बताया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश तेजी से विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है और सरकार निवेशकों के लिए जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए तैयार है। उन्होंने निवेशकों को भरोसा दिलाया कि प्रदेश में उद्योग लगाने के लिए अनुकूल माहौल बनाया जा रहा है।

    इसी दौरान मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम को एआईएम इन्वेस्टमेंट अवॉर्ड्स 2026 में विनर एशिया सम्मान भी मिला। यह पुरस्कार निवेश संवर्धन विदेशी निवेश आकर्षित करने रोजगार सृजन नवाचार और सतत विकास के क्षेत्र में प्रदर्शन के लिए दिया गया। ऐसे में दुबई दौरे से मिले 53 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के निवेश प्रस्ताव मध्यप्रदेश के लिए बड़ी संभावनाओं का संकेत जरूर हैं। अब सबसे बड़ी चुनौती इन प्रस्तावों को जमीन पर उतारने और वास्तविक परियोजनाओं में बदलने की होगी।

  • दुबई में गूंजी मध्यप्रदेश की शिल्प कला, मोहन यादव ने वैश्विक निवेशकों के सामने रखा MP का मॉडल

    दुबई में गूंजी मध्यप्रदेश की शिल्प कला, मोहन यादव ने वैश्विक निवेशकों के सामने रखा MP का मॉडल


    भोपाल।
    मध्यप्रदेश को वैश्विक निवेश और व्यापार के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में राज्य का उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल संयुक्त अरब अमीरात के दुबई पहुंचा है। चार दिवसीय दौरे के पहले दिन निवेश, व्यापार और औद्योगिक साझेदारी के साथ मध्यप्रदेश की पारंपरिक शिल्प एवं हथकरघा कला को भी अंतरराष्ट्रीय मंच मिला।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने दुबई के ताज होटल, बिजनेस बे में आयोजित वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) और जीआई उत्पाद प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। प्रदर्शनी में मध्यप्रदेश की पारंपरिक कला, हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पादों को वैश्विक समुदाय के सामने पेश किया गया।

    छह विरासत उत्पादों ने खींचा ध्यान

    प्रदर्शनी में मध्यप्रदेश के छह प्रमुख उत्पाद प्रदर्शित किए गए। इनमें बैतूल का बेल मेटल क्राफ्ट, अशोकनगर की चंदेरी साड़ी, खरगोन के महेश्वर की महेश्वरी साड़ी, उज्जैन का बाटिक प्रिंट, भोपाल की जरी-जरदोजी और ग्वालियर कारपेट शामिल हैं।

    इन उत्पादों के जरिए राज्य की सांस्कृतिक विविधता और पारंपरिक कारीगरों के हुनर को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य विदेशी खरीदारों तक इन उत्पादों की पहुंच बढ़ाने और स्थानीय कारीगरों के लिए नए कारोबारी अवसर तैयार करना है।

    प्रवासी भारतीयों ने किया मुख्यमंत्री का स्वागत

    दुबई पहुंचने पर भारतीय मिशन के अधिकारियों ने मध्यप्रदेश के प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया। इसके बाद होटल फॉर्च्यून एट्रियम में यूएई में रहने वाले प्रवासी भारतीयों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात की। जितेंद्र वैद्य के नेतृत्व में करीब 50 प्रवासी भारतीय इस कार्यक्रम में शामिल हुए।

    मुख्यमंत्री ने प्रवासी भारतीय समुदाय को मध्यप्रदेश के विकास और राज्य की वैश्विक ब्रांडिंग का महत्वपूर्ण साझेदार बताया।

    भारतीय राजनयिकों के साथ निवेश पर चर्चा

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने यूएई में भारत के राजदूत डॉ. दीपक मित्तल और दुबई एवं नॉर्थ अमीरात में भारत के महावाणिज्य दूत डॉ. ई. विष्णु वर्धन रेड्डी के साथ भी बैठक की। इसमें मध्यप्रदेश में निवेश आकर्षित करने और भारत-यूएई आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।

    बैठक में राज्य की औद्योगिक भूमि, कनेक्टिविटी, लॉजिस्टिक्स, निवेशक-अनुकूल नीतियों और औद्योगिक अधोसंरचना को प्रमुखता से रखा गया। मुख्यमंत्री ने यूएई के सॉवरेन वेल्थ फंड, बड़े कॉरपोरेट समूहों और संस्थागत निवेशकों के साथ संपर्क बढ़ाने में भारतीय मिशन से सहयोग का आग्रह किया। साथ ही उन्हें ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2027 में भाग लेने का न्योता दिया।

    अरब संसद के अध्यक्ष से भी हुई मुलाकात

    दौरे के दौरान अरब संसद के अध्यक्ष मोहम्मद अहमद अल यामाही के सम्मान में आयोजित विशेष भोज में मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हिस्सा लिया। इस दौरान मध्यप्रदेश और अरब देशों के बीच व्यापार, निवेश, कृषि, पर्यटन तथा शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग की संभावनाओं पर बातचीत हुई।

    मुख्यमंत्री ने अरब निवेशकों को मध्यप्रदेश में नवकरणीय ऊर्जा, फार्मा, मेडिकल डिवाइस, टेक्सटाइल, लॉजिस्टिक्स, उन्नत विनिर्माण और शहरी अधोसंरचना से जुड़े निवेश अवसरों की जानकारी दी।

    खाद्य प्रसंस्करण, कृषि मूल्य श्रृंखला, कोल्ड चेन और कृषि लॉजिस्टिक्स को लेकर भी संभावित साझेदारी पर चर्चा हुई।

    22 देशों के संसदीय नेताओं को GIS-2027 का न्योता

    ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2027 के लिए मध्य पूर्व और अफ्रीका के कई देशों के संसदीय नेताओं को आमंत्रित करने की पहल भी की गई। इनमें अल्जीरिया, बहरीन, कोमोरोस, जिबूती, मिस्र, इराक, जॉर्डन, कुवैत, लेबनान, लीबिया, मॉरिटानिया, मोरक्को, ओमान, फिलिस्तीन, कतर, सऊदी अरब, सोमालिया, सूडान, सीरिया, ट्यूनीशिया, यूएई और यमन शामिल हैं।

    इस पहल का उद्देश्य निवेश, उद्योग, व्यापार, अवसंरचना, नवाचार और आर्थिक सहयोग के लिए मध्यप्रदेश के साथ इन देशों के रिश्तों को और मजबूत करना है।

    वैश्विक मीडिया के सामने रखा निवेश का रोडमैप

    मुख्यमंत्री ने मीडिया संवाद के दौरान मध्यप्रदेश की औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स क्षमता के साथ पर्यटन एवं अवसंरचना क्षेत्र की संभावनाओं को भी सामने रखा। उन्होंने कहा कि राज्य का लक्ष्य केवल निवेश हासिल करना नहीं, बल्कि निवेशकों के साथ लंबे समय की विकास साझेदारी स्थापित करना है।

    उन्होंने सिंगल विंडो सिस्टम, तेज स्वीकृति प्रक्रिया, प्रगतिशील औद्योगिक नीतियों और रणनीतिक भौगोलिक स्थिति को मध्यप्रदेश की प्रमुख ताकत बताया।

    AIM कांग्रेस के ‘टाइकून्स डिनर’ में वैश्विक निवेशकों से संवाद

    दुबई दौरे के पहले दिन का समापन AIM कांग्रेस 2026 के ‘टाइकून्स रात्रि भोज’ में मुख्यमंत्री की भागीदारी के साथ हुआ। कार्यक्रम की मेजबानी AIM कांग्रेस के अध्यक्ष डॉ. थानी बिन अहमद अल ज़ेयूदी ने की।

    इस हाई-प्रोफाइल कार्यक्रम में सॉवरेन वेल्थ फंड, फैमिली ऑफिस, संस्थागत निवेशकों, वित्तीय संस्थानों, वैश्विक कंपनियों और विभिन्न देशों के नीति-निर्माताओं ने हिस्सा लिया।

    मुख्यमंत्री ने इस दौरान वैश्विक निवेशकों और नीति-निर्माताओं के साथ मध्यप्रदेश की निवेश संभावनाओं पर चर्चा की। उन्होंने विनिर्माण, खाद्य प्रसंस्करण, नवीकरणीय ऊर्जा, लॉजिस्टिक्स, शहरी अधोसंरचना, टेक्नोलॉजी और निर्यात आधारित उद्योगों में निवेश के अवसरों को रेखांकित किया।

    दुबई दौरे के पहले ही दिन मध्यप्रदेश ने एक तरफ अपनी पारंपरिक शिल्प विरासत को वैश्विक बाजार के सामने रखा, वहीं दूसरी ओर निवेशकों और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों के साथ आर्थिक साझेदारी का रोडमैप भी पेश किया। अब नजर इस बात पर रहेगी कि इन बैठकों और संवादों से मध्यप्रदेश में निवेश के कितने नए रास्ते खुलते हैं।

  • देश में तेजी से हो रहा धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन का विकास : मोहन यादव

    देश में तेजी से हो रहा धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन का विकास : मोहन यादव

    भोपाल । मध्‍य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में मप्र के उज्जैन और गुजरात की द्वारिका नगरी सहित देशभर में लगातार धार्मिक पर्यटन आध्यात्मिक पर्यटन का विकास हो रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने हमारी सरकार भारतीय संस्कृति के गौरवशाली अतीत को पुन: स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध होकर कार्य कर रही है।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरुवार को सपत्नीक गुजरात की देवभूमि द्वारका के पावन द्वारकाधीश मंदिर पहुंचकर सपत्नीक भगवान श्री द्वारकाधीश के अलौकिक रूप का दर्शन एवं विधि-विधान से पूजन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने भगवान श्री द्वारकाधीश के दर्शन-पूजन के बाद मंदिर परिसर के बाहर स्थानीय मीडिया प्रतिनिधियों से चर्चा की। उन्‍होंने भगवान द्वारकाधीश से सभी प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि एवं कल्याण की कामना की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने शुक्रवार को मनाई जाने वाली जन्माष्टमी से पहले देश-प्रदेशवासियों को भगवान श्रीकृष्ण के जन्म पर्व की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं भी दीं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव के साथ उनकी धर्मपत्नी सीमा यादव एवं अन्य परिजनों सहित सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय के डॉ. इलैया राजा टी. भी उपस्थित थे।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन में श्री महाकाल लोक के निर्माण के बाद श्रद्धालुओं की संख्या 20 गुना बढ़ गई है। वर्तमान में लगभग 10 करोड़ से अधिक तीर्थ यात्री उज्जैन आ रहे हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी के कर कमलों से उज्जैन में बाबा महाकाल लोक के लोकार्पण के बाद बनारस में भी काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरीडोर का निर्माण हुआ, जिससे बाबा विश्वनाथ की नगरी में धार्मिक पर्यटन को नई ऊंचाइयां मिली हैं।

    जन्माष्टमी से पहले भगवान श्री द्वारकाधीश के दर्शन का मिला सौभाग्य
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि द्वारकाधीश मंदिर आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित सनातन संस्कृति के चार धामों में से एक प्रमुख तीर्थ है। जन्माष्टमी से ठीक पहले भगवान श्री द्वारकाधीश के भव्य दर्शन का अवसर मिलना हम सभी के लिए सौभाग्य की बात है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि कुछ समय पहले ही वे सोमनाथ धाम गये थे। इसके बाद आज द्वारका के प्रसिद्ध श्री द्वारकाधीश मंदिर में विधिवत् दर्शन-पूजन-अर्चन कर यहां की सभी व्यवस्थाओं का जायजा लिया है। हम भी अपने देवस्थानों में बेहतर से बेहतर प्रबंधन की सभी व्यवस्थाएं कर रहे हैं।

    म.प्र. में श्रद्धालुओं के लिए विकसित की जा रहीं सुगम व्यवस्थाएं
    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मीडिया प्रतिनिधियों से कहा कि मध्यप्रदेश सरकार लगातार धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन के विस्तार के लिए योजनाबद्ध तरीके से कार्य कर रही है। प्रदेश के सभी प्रमुख धार्मिक स्थलों एवं देवस्थानों पर सहज एवं सुगम आवागमन, श्रद्धालुओं के ठहरने, उनकी सुरक्षा और पर्यटकों की वृद्धि को देखते हुए वहां सभी जरूरी अधोसंरचनाओं का तेजी से विकास किया जा रहा है।

  • कर्नल सोफिया कुरैशी विवाद में सियासत तेज, पटवारी ने राष्ट्रपति को लिखा पत्र; CM समेत पूरे मंत्रिमंडल की बर्खास्तगी की मांग

    कर्नल सोफिया कुरैशी विवाद में सियासत तेज, पटवारी ने राष्ट्रपति को लिखा पत्र; CM समेत पूरे मंत्रिमंडल की बर्खास्तगी की मांग


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश में मंत्री विजय शाह से जुड़ा कर्नल सोफिया कुरैशी विवाद एक बार फिर राजनीतिक रूप से गरमा गया है। मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस मामले को लेकर राष्ट्रपति को पत्र लिखकर विजय शाह को मंत्री पद से बर्खास्त करने की मांग की है। पटवारी ने अपने पत्र में मध्य प्रदेश सरकार के उस फैसले पर भी सवाल उठाए हैं जिसमें सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित विशेष जांच दल द्वारा मांगी गई अभियोजन की मंजूरी को राज्य सरकार ने कथित तौर पर स्वीकार नहीं किया। कांग्रेस ने इसे न्यायिक प्रक्रिया और संवैधानिक जवाबदेही से जुड़ा गंभीर विषय बताया है।

    जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि मंत्री विजय शाह को राजनीतिक संरक्षण दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणी केवल एक व्यक्ति का अपमान नहीं बल्कि सेना की गरिमा से जुड़ा मामला है। पटवारी ने कहा कि सेना का सम्मान किसी राजनीतिक दल की संपत्ति नहीं बल्कि पूरे देश के नागरिकों का राष्ट्रीय स्वाभिमान है। इसी आधार पर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर भी सवाल उठाते हुए उनसे इस मामले में स्पष्ट रुख सामने रखने की मांग की।

    पटवारी ने राष्ट्रपति को लिखे पत्र में मुख्यमंत्री मोहन यादव समेत पूरे मंत्रिमंडल की बर्खास्तगी की मांग भी की है। उनका आरोप है कि यदि सरकार किसी मंत्री के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया में अभियोजन की मंजूरी रोकती है तो इससे यह सवाल खड़ा होता है कि क्या सत्ता में बैठे लोगों को कानून से अलग कोई संरक्षण हासिल है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने इस पूरे घटनाक्रम को मध्य प्रदेश के राजनीतिक इतिहास का शर्मनाक अध्याय बताते हुए संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और न्यायिक प्रक्रिया की गरिमा बनाए रखने की अपील की है।

    इस विवाद की शुरुआत 11 मई 2025 को इंदौर के महू के रायकुंडा गांव में हुए हलमा कार्यक्रम के दौरान हुई थी। यहां जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह ने ऑपरेशन सिंदूर के संदर्भ में भारतीय सेना की कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर विवादित टिप्पणी की थी। उनके बयान को लेकर व्यापक राजनीतिक और सामाजिक विरोध हुआ था। मामले की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने विशेष जांच दल यानी SIT के जरिए जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ाई। जांच के बाद मंत्री के खिलाफ अभियोजन की अनुमति को लेकर राज्य सरकार के सामने मामला पहुंचा।

    अब राज्य सरकार की ओर से अभियोजन की मंजूरी नहीं दिए जाने के आरोप ने विवाद को फिर हवा दे दी है। कांग्रेस का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित SIT की कार्रवाई के बावजूद सरकार का रुख कई सवाल खड़े करता है। वहीं मामले में अगली सुनवाई 31 अगस्त को होनी है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट की ओर से अभियोजन की मंजूरी में देरी को लेकर सख्त रुख अपनाए जाने की बात भी सामने आई है।

    मामले में अब सरकार के सामने कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तर पर चुनौती है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक यदि अभियोजन की मंजूरी दी जाती है तो सरकार को इसकी जानकारी सुप्रीम कोर्ट के समक्ष देनी होगी और इसके बाद नियमानुसार आगे की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है। वहीं अभियोजन की मंजूरी नहीं मिलने की स्थिति में भी मामला पूरी तरह खत्म नहीं होता। मंत्री पद से हटने के बाद विजय शाह के खिलाफ कार्रवाई के लिए पूर्व सरकारी अनुमति की आवश्यकता नहीं रहने की स्थिति बन सकती है।

    ऐसे में 31 अगस्त की सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से पहले जीतू पटवारी की राष्ट्रपति को चिट्ठी ने इस मामले को एक बार फिर प्रदेश की राजनीति के केंद्र में ला दिया है। कांग्रेस जहां इसे सेना के सम्मान और संवैधानिक जवाबदेही से जोड़ रही है वहीं अब सबकी नजर राज्य सरकार के अगले कदम और सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई पर टिकी है।