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  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का किसानों से सीधा संवाद, प्राकृतिक खेती, आधुनिक तकनीक और सिंचाई योजनाओं पर दिया विकास का नया रोड

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का किसानों से सीधा संवाद, प्राकृतिक खेती, आधुनिक तकनीक और सिंचाई योजनाओं पर दिया विकास का नया रोड

    मध्य प्रदेश। झाबुआ में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेशभर के किसानों से ऑनलाइन संवाद करते हुए कृषि को अधिक लाभकारी, टिकाऊ और आधुनिक बनाने की दिशा में सरकार की विभिन्न योजनाओं और प्राथमिकताओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने, आधुनिक तकनीकों के विस्तार और कृषि आधारित रोजगार के नए अवसर विकसित करने के लिए लगातार काम कर रही है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में “कृषक कल्याण वर्ष” के अंतर्गत बलराम कृषि महोत्सव-2026 का आयोजन किया जा रहा है। इसकी शुरुआत इंदौर से हुई थी और आगामी दिनों में आलीराजपुर, बड़वानी, खरगौन, बुरहानपुर तथा खंडवा सहित कई जिलों में भी महोत्सव आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने इसे किसानों को नई तकनीकों, सरकारी योजनाओं और विशेषज्ञों की सलाह से जोड़ने का महत्वपूर्ण अभियान बताया।

    डॉ. यादव ने मौसम विभाग द्वारा इस वर्ष सामान्य से कम वर्षा की संभावना जताए जाने का उल्लेख करते हुए प्रशासन को किसानों की हरसंभव सहायता के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि किसानों को तीन लाख रुपये तक का कृषि ऋण शून्य प्रतिशत ब्याज पर उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके अलावा मात्र पांच रुपये में बिजली कनेक्शन देने और डेयरी विकास योजनाओं में 40 लाख रुपये तक की परियोजनाओं पर 33 प्रतिशत अनुदान की व्यवस्था भी की गई है।

    मुख्यमंत्री ने किसानों से आधुनिक कृषि तकनीकों, वैज्ञानिक सलाह, प्राकृतिक खेती और जल संरक्षण के उपाय अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री के प्राकृतिक खेती अभियान के तहत झाबुआ जिले में 50 कृषि सखियों का चयन किया गया है। वर्तमान में जिले में तीन हजार एकड़ से अधिक क्षेत्र में प्राकृतिक खेती की जा रही है और किसानों की फसलों का प्रमाणीकरण भी कराया जा रहा है, जिससे उन्हें बाजार में बेहतर अवसर मिल सकें।

    उन्होंने कहा कि “एक जिला-एक उत्पाद” योजना के तहत झाबुआ के कड़कनाथ को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने के प्रयास जारी हैं। वर्ष 2025 के दौरान कड़कनाथ पालन से एक हजार से अधिक नए हितग्राहियों को जोड़ा गया। साथ ही पशुपालन, बकरी पालन, डेयरी और मुर्गी पालन जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देकर किसानों की नियमित आय सुनिश्चित करने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि जिले में मत्स्य पालन को भी प्रोत्साहन दिया जा रहा है। 760 से अधिक तालाबों में लगभग तीन हजार हेक्टेयर क्षेत्र में मत्स्य उत्पादन किया जा रहा है। वहीं खरीफ-2026 सीजन में कपास की बुवाई पिछले वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है। उन्होंने कहा कि धार जिले के बदनावर स्थित पीएम मित्रा पार्क के विकसित होने से झाबुआ के कपास उत्पादकों को खेत से उद्योग तक बेहतर बाजार और मूल्य संवर्धन का लाभ मिलेगा।

    झाबुआ के टमाटर उत्पादन का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जिले में हजारों हेक्टेयर क्षेत्र में टमाटर की खेती हो रही है। यहां स्थापित प्रसंस्करण इकाई में टमाटर सॉस, केचअप और डिहाइड्रेटेड उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं, जिनकी आपूर्ति देश के कई राज्यों में की जा रही है। इससे किसानों को बेहतर बाजार और अतिरिक्त आय के अवसर प्राप्त हो रहे हैं।

    उन्होंने कहा कि नर्मदा-झाबुआ-पेटलावद-थांदला माइक्रो उद्वहन सिंचाई परियोजना पूरी होने पर लगभग 32 हजार हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी और करीब 50 हजार किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। इससे जल संरक्षण के साथ कृषि उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि बलराम कृषि महोत्सव केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि किसानों की आय बढ़ाने, कृषि तकनीक, प्रसंस्करण, विपणन और कृषि उद्यमिता को बढ़ावा देने का व्यापक अभियान है। प्रदेश के सभी जिलों में 13 नवंबर तक विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से किसानों को आधुनिक खेती, डिजिटल कृषि सेवाओं, स्मार्ट सिंचाई, ड्रोन तकनीक, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन और जलवायु अनुकूल कृषि पद्धतियों की जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी। इसके साथ ही उत्कृष्ट किसानों का सम्मान, हितग्राहियों को लाभ वितरण और विभिन्न विभागों की प्रदर्शनी के माध्यम से खेती को अधिक समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास किया जाएगा।

  • ई-बस से मंत्री परिषद बैठक के लिए रवाना हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, सादगी, मितव्ययिता और सुशासन का दिया व्यवहारिक संदेश

    ई-बस से मंत्री परिषद बैठक के लिए रवाना हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, सादगी, मितव्ययिता और सुशासन का दिया व्यवहारिक संदेश


    मध्य प्रदेश।
    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को मंत्री परिषद की बैठक के लिए एक अलग और संदेशात्मक पहल करते हुए मंत्रियों तथा वरिष्ठ अधिकारियों के साथ इलेक्ट्रिक बस से जगदीशपुर की यात्रा की। इस दौरान उन्होंने अपना शासकीय वाहन और सुरक्षा काफिला मुख्यमंत्री निवास पर ही छोड़ दिया। मुख्यमंत्री के साथ मंत्रिपरिषद के सदस्य भी अपने व्यक्तिगत वाहनों का उपयोग किए बिना सामूहिक रूप से ई-बसों में बैठक स्थल पहुंचे। इस पहल को शासन में सादगी, मितव्ययिता और संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

    मुख्यमंत्री निवास से सुबह निर्धारित समय पर तीन इलेक्ट्रिक बसों के माध्यम से मुख्यमंत्री, सभी मंत्री और उनका स्टाफ बैठक के लिए रवाना हुए। यात्रा के दौरान किसी भी मंत्री के व्यक्तिगत वाहन, पायलट वाहन या फॉलो वाहन का उपयोग नहीं किया गया। सरकार का उद्देश्य यह संदेश देना था कि शासकीय कार्यों में आवश्यकता के अनुरूप संसाधनों का उपयोग किया जाए और अनावश्यक खर्च से बचा जाए।

    मंत्री परिषद की बैठक में शामिल होने वाले वरिष्ठ अधिकारियों ने भी इस पहल में भागीदारी निभाई। अधिकारियों ने अपने वाहनों को कुशाभाऊ ठाकरे परिसर में ही पार्क किया और वहां से इलेक्ट्रिक बसों के जरिए सामूहिक रूप से जगदीशपुर पहुंचे। शासन स्तर पर इस सामूहिक व्यवस्था को प्रशासनिक सादगी और बेहतर समन्वय का उदाहरण माना जा रहा है।

    मुख्यमंत्री की इस यात्रा के दौरान राजधानी के विभिन्न क्षेत्रों में लोगों ने उत्साह के साथ उनका स्वागत किया। पातरा पुल, लांबाखेड़ा और जगदीशपुर सहित कई स्थानों पर ई-बसों पर पुष्पवर्षा की गई। स्थानीय नागरिकों ने इस पहल को पर्यावरण संरक्षण और सार्वजनिक संसाधनों के बेहतर उपयोग से जोड़ते हुए सकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त की। जगदीशपुर पहुंचने पर मुख्यमंत्री का पारंपरिक तरीके से स्वागत किया गया और जनप्रतिनिधियों ने उनका अभिनंदन किया।

    बैठक स्थल पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जगदीशपुर दुर्ग में आयोजित धरोहर प्रदर्शनी का शुभारंभ किया। उन्होंने प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए जनजातीय कलाकारों से संवाद किया और उनके कार्यों की सराहना की। प्रदर्शनी में प्रदेश के जनजातीय नायकों, राष्ट्रभक्तों, ऐतिहासिक शासकों तथा सुशासन और शौर्य से जुड़े महत्वपूर्ण व्यक्तित्वों के चित्र और विरासत को प्रदर्शित किया गया था। इसका उद्देश्य प्रदेश की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर से लोगों को जोड़ना बताया गया।

    राज्य सरकार का मानना है कि प्रशासनिक कार्यों में पर्यावरण अनुकूल साधनों को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है। इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग न केवल ईंधन की बचत में सहायक है, बल्कि कार्बन उत्सर्जन कम करने और स्वच्छ वातावरण बनाने की दिशा में भी प्रभावी कदम माना जाता है। मुख्यमंत्री की यह पहल इसी व्यापक सोच का हिस्सा है, जिसमें शासन व्यवस्था को अधिक जिम्मेदार, पारदर्शी और संसाधन-संवेदनशील बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

    मंत्री परिषद की बैठक के लिए अपनाई गई यह व्यवस्था केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं बल्कि शासन की कार्यशैली का सार्वजनिक संदेश भी मानी जा रही है। सरकार ने संकेत दिया है कि यदि शासकीय स्तर पर सादगी, सामूहिकता और संसाधनों के संतुलित उपयोग की संस्कृति विकसित होती है, तो इसका सकारात्मक प्रभाव प्रशासनिक व्यवस्था के साथ-साथ समाज में भी देखने को मिल सकता है।

  • विधानसभा पहुंचे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, मॉनसून सत्र के पहले दिन कार्य मंत्रणा समिति से विधायक दल की बैठक तक व्यस्त रहेगा पूरा कार्यक्रम

    विधानसभा पहुंचे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, मॉनसून सत्र के पहले दिन कार्य मंत्रणा समिति से विधायक दल की बैठक तक व्यस्त रहेगा पूरा कार्यक्रम

    मध्य प्रदेश विधानसभा का मॉनसून सत्र सोमवार से शुरू हो गया, जिसके साथ ही राज्य की राजनीति एक बार फिर गर्मा गई है। सत्र के पहले दिन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का कार्यक्रम पूरी तरह विधानसभा और उससे जुड़ी बैठकों पर केंद्रित रहा। सरकार की ओर से कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की तैयारी है, वहीं विपक्ष भी विभिन्न जनहित और प्रशासनिक मामलों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति के साथ सदन में उतरा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सुबह विधानसभा पहुंचे। इसके बाद कार्य मंत्रणा समिति की बैठक आयोजित हुई, जिसमें सत्र के दौरान सदन की कार्यवाही, विभिन्न विधायी कार्यों और चर्चा के एजेंडे पर विचार किया गया। इसके उपरांत मुख्यमंत्री विधानसभा की कार्यवाही में शामिल हुए, जहां पहले दिन की गतिविधियों पर सभी की नजर बनी रही।

    इस मॉनसून सत्र की सबसे महत्वपूर्ण चर्चाओं में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) से संबंधित विधेयक को माना जा रहा है। मंत्रिपरिषद से मंजूरी मिलने के बाद सरकार इसे सदन में प्रस्तुत करने की तैयारी कर चुकी है। यदि विधेयक पेश होता है तो इस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच व्यापक चर्चा होने की संभावना है। सरकार इसे महत्वपूर्ण विधायी पहल के रूप में देख रही है, जबकि विपक्ष इसके विभिन्न पहलुओं पर सवाल उठाने की तैयारी में है।

    मुख्यमंत्री के दिनभर के कार्यक्रम में दोपहर के समय जनप्रतिनिधियों और अन्य लोगों से मुलाकात का समय भी निर्धारित रहा। इसके बाद समिति कक्ष में गुरु पूर्णिमा महोत्सव से संबंधित बैठक आयोजित की गई, जिसमें आयोजन और अन्य व्यवस्थाओं पर चर्चा की गई। आधिकारिक बैठकों के बाद मुख्यमंत्री के निवास लौटने का कार्यक्रम तय रहा। शाम को समत्व भवन में विधायक दल की बैठक भी आयोजित की गई, जिसमें आगामी सदन की रणनीति और विभिन्न विधायी विषयों पर विचार-विमर्श किया जाना प्रस्तावित है।

    विधानसभा का यह मॉनसून सत्र 24 जुलाई तक चलेगा। इस दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयकों के साथ-साथ विभिन्न विभागों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। सरकार विकास योजनाओं, प्रशासनिक निर्णयों और नई नीतियों को सदन के माध्यम से आगे बढ़ाने की तैयारी में है, जबकि विपक्ष राज्य से जुड़े अनेक मामलों को लेकर सरकार से जवाब मांगने की रणनीति बना चुका है।

    सत्र के दौरान केन-बेतवा परियोजना से प्रभावित विस्थापितों के मुआवजे, उज्जैन में भूमि खरीद से जुड़े मामलों, नीट यूजी परीक्षा से संबंधित विवाद, सीबीएसई परीक्षा में कथित अनियमितताओं सहित कई अन्य विषयों के सदन में उठने की संभावना है। विपक्ष इन मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है, जबकि सत्ता पक्ष अपने फैसलों और योजनाओं का पक्ष मजबूती से रखने का प्रयास करेगा।

    राजनीतिक दृष्टि से यह सत्र काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसमें राज्य सरकार की कई नीतियों और निर्णयों की परीक्षा भी होगी। सत्ता पक्ष जहां अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने का प्रयास करेगा, वहीं विपक्ष जनहित से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाकर सरकार की जवाबदेही तय करने की कोशिश करेगा। ऐसे में आने वाले दिनों में विधानसभा की कार्यवाही पर प्रदेश की राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियों की नजर बनी रहेगी।

  • बलराम कृषि महोत्सव में किसानों को मिला आधुनिक खेती का संदेश, प्राकृतिक कृषि, सोलर पंप और नवाचार से समृद्ध मध्यप्रदेश बनाने का आह्वान

    बलराम कृषि महोत्सव में किसानों को मिला आधुनिक खेती का संदेश, प्राकृतिक कृषि, सोलर पंप और नवाचार से समृद्ध मध्यप्रदेश बनाने का आह्वान

     प्रदेश में कृषि को अधिक लाभकारी, आधुनिक और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने किसानों को नई तकनीकों और प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि बदलते समय में खेती को केवल पारंपरिक तरीकों तक सीमित रखने के बजाय वैज्ञानिक तकनीकों, प्राकृतिक कृषि पद्धतियों और कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन को अपनाना आवश्यक है। इससे किसानों की आय में स्थायी वृद्धि होगी और प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि समृद्ध और आत्मनिर्भर कृषि ही विकसित मध्यप्रदेश की मजबूत नींव है।

    मुख्यमंत्री ने धार जिले में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव को वर्चुअल माध्यम से संबोधित करते हुए कृषक कल्याण वर्ष-2026 के तहत किसानों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार कृषि क्षेत्र में नवाचार, आधुनिक तकनीकों और शासकीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान दे रही है। किसानों को इन योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाकर अपनी उत्पादन क्षमता और आय दोनों में वृद्धि करनी चाहिए।

    उन्होंने प्राकृतिक खेती को भविष्य की आवश्यकता बताते हुए कहा कि इससे खेती की लागत कम होती है, मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर बनी रहती है और पर्यावरण संरक्षण को भी बल मिलता है। साथ ही कृषि उत्पादों के मूल्य संवर्धन के माध्यम से किसान अपनी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त कर सकते हैं। मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री कुसुम-बी योजना के अंतर्गत सोलर पंपों की स्थापना को भी किसानों के लिए लाभकारी बताते हुए ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में इसे महत्वपूर्ण कदम बताया।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने समान नागरिक संहिता को लेकर भी सरकार की मंशा स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि प्रदेश में इस विषय पर व्यापक जनसंवाद किया गया है तथा विभिन्न राजनीतिक दलों, धार्मिक और सामाजिक समुदायों के प्रतिनिधियों से विचार-विमर्श के बाद आगामी विधानसभा के वर्षाकालीन सत्र में आवश्यक विधायी प्रक्रिया पूरी करने की दिशा में कदम बढ़ाया जाएगा। उनका कहना था कि सभी नागरिकों के लिए समान अधिकार और समान कानून लोकतांत्रिक व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाएंगे।

    बलराम कृषि महोत्सव का उद्देश्य किसानों तक आधुनिक कृषि तकनीकों, कृषि यंत्रीकरण, प्राकृतिक खेती, मूल्य संवर्धन और विभिन्न शासकीय योजनाओं की जानकारी पहुंचाना रहा। महोत्सव में कृषि आधारित और देशभक्ति की भावना से ओतप्रोत सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आयोजित की गईं। इसके साथ ही नशा मुक्ति अभियान के तहत किसानों और नागरिकों को नशामुक्त समाज के निर्माण का संदेश दिया गया।

    महोत्सव में कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केन्द्र, प्राकृतिक खेती, बलराम तालाब, सूक्ष्म सिंचाई, जल संरक्षण, श्रीअन्न, पशुपालन विभाग, मत्स्य विभाग, इफको, कृभको तथा अन्य कृषि सहयोगी संस्थाओं द्वारा प्रदर्शनी लगाई गई। किसानों ने इन प्रदर्शनों का अवलोकन कर नई तकनीकों, उन्नत कृषि पद्धतियों और सरकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। इससे उन्हें खेती को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने के नए विकल्पों की जानकारी मिली।

    जिलेभर से लगभग दो हजार किसानों ने इस महोत्सव में भाग लिया। किसान उत्पादक संगठनों, कृषि संगठनों के प्रतिनिधियों, कृषि आदान विक्रेताओं तथा कृषि एवं संबद्ध विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। आयोजन किसानों के लिए वैज्ञानिक कृषि, आधुनिक नवाचार, प्राकृतिक खेती और सरकारी योजनाओं की जानकारी प्राप्त करने का प्रभावी मंच साबित हुआ। इस अवसर पर जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी कार्यक्रम में भाग लेकर किसानों से संवाद किया और कृषि विकास से जुड़े विभिन्न प्रयासों की जानकारी साझा की।

  • सांदीपनि विद्यालयों पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का बड़ा दावा, बोले- निजी स्कूल छोड़कर सरकारी विद्यालयों में बढ़ रहा विद्यार्थियों का भरोसा

    सांदीपनि विद्यालयों पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का बड़ा दावा, बोले- निजी स्कूल छोड़कर सरकारी विद्यालयों में बढ़ रहा विद्यार्थियों का भरोसा

    मध्य प्रदेश: के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कटनी जिले के स्लीमनाबाद क्षेत्र में दो नए सांदीपनि विद्यालयों के लोकार्पण अवसर पर कहा कि प्रदेश में सरकारी शिक्षा व्यवस्था लगातार मजबूत हो रही है और आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित सांदीपनि विद्यालयों के कारण अब विद्यार्थी निजी विद्यालयों से निकलकर शासकीय संस्थानों में प्रवेश ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर संसाधनों के माध्यम से राज्य सरकार बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के निर्माण के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

    मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मैत्री भारतीय संस्कृति में समानता, आत्मीयता और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण ने उज्जैन स्थित सांदीपनि आश्रम में शिक्षा प्राप्त कर ज्ञान और संस्कार का महत्व स्थापित किया था। उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए प्रदेश में आधुनिक सुविधाओं से युक्त सांदीपनि विद्यालय विकसित किए जा रहे हैं, जहां पारंपरिक मूल्यों और आधुनिक शिक्षा का संतुलित समावेश किया गया है।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने झिंझरी और बहोरीबंद में निर्मित दो नए सांदीपनि विद्यालयों का लोकार्पण किया। इन विद्यालयों में आधुनिक शैक्षणिक सुविधाओं के साथ डिजिटल शिक्षा, प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय और अन्य आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार विद्यार्थियों को निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें, साइकिलें और विभिन्न प्रोत्साहन योजनाओं का लाभ उपलब्ध करा रही है। बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को लैपटॉप तथा विद्यालय में सर्वोच्च अंक प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं को स्कूटी प्रदान की जा रही है।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा के साथ-साथ किसानों के कल्याण और सिंचाई सुविधाओं के विस्तार पर भी सरकार समान रूप से कार्य कर रही है। उन्होंने स्लीमनाबाद टनल परियोजना को बघेलखंड और बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि इससे रीवा, सतना, मैहर, पन्ना और कटनी सहित कई जिलों में सिंचाई और पेयजल की उपलब्धता मजबूत होगी। उन्होंने कहा कि इस परियोजना के लिए लगभग 1400 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं और इसका लाभ बड़ी संख्या में किसानों को मिलेगा।

    उन्होंने आगे कहा कि केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना तथा पार्वती-कालीसिंध-चंबल परियोजना भी प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में जल उपलब्धता बढ़ाने और कृषि उत्पादन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से प्रदेश के कई जिलों में खेती की स्थिति बेहतर होगी और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने आगामी विधानसभा सत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार समान नागरिक संहिता के प्रारूप को मंत्रिपरिषद के समक्ष प्रस्तुत करने की तैयारी कर रही है। उन्होंने बताया कि विधानसभा के वर्षाकालीन सत्र से पहले जगदीशपुर में मंत्रिपरिषद की बैठक आयोजित कर इस संबंध में आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार सभी नागरिकों के लिए समान व्यवस्था लागू करने की दिशा में कार्य कर रही है।

    अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री ने कहा कि रक्षाबंधन के अवसर पर मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना के तहत पात्र हितग्राहियों के बैंक खातों में 1500 रुपये की राशि हस्तांतरित की जाएगी। उन्होंने दोहराया कि शिक्षा, सिंचाई, सामाजिक सुरक्षा और आधारभूत विकास से जुड़ी योजनाओं के माध्यम से प्रदेश के सर्वांगीण विकास को गति देना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बोले- विश्व स्तरीय विज्ञान कृतियां नई पीढ़ी को देंगी नवाचार की नई उड़ान

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव बोले- विश्व स्तरीय विज्ञान कृतियां नई पीढ़ी को देंगी नवाचार की नई उड़ान

    मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में विज्ञान शिक्षा और अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि जुड़ गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने आंचलिक विज्ञान केंद्र में अत्याधुनिक अंतरिक्ष अन्वेषण दीर्घा का लोकार्पण किया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने गैलरी का अवलोकन किया और अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़े आधुनिक प्रदर्शों को करीब से देखा। कार्यक्रम में विभिन्न वैज्ञानिक मॉडल और तकनीकी प्रदर्शनियों की भी सराहना की गई।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि यह अंतरिक्ष अन्वेषण दीर्घा प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने बताया कि कम लागत में तैयार की गई इस गैलरी में अधिकतम वैज्ञानिक जानकारी उपलब्ध कराने का प्रयास किया गया है। यहां स्थापित विभिन्न वैज्ञानिक कृतियां विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान करने के साथ उन्हें विज्ञान और नवाचार की ओर प्रेरित करेंगी। उन्होंने कहा कि विज्ञान से जुड़ी ये प्रस्तुतियां विश्व स्तरीय हैं और प्रदेश की वैज्ञानिक पहचान को नई मजबूती देंगी।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने विज्ञान और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। भारत आज स्पेस टेक्नोलॉजी से लेकर अनुसंधान और नवाचार तक नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है। ऐसे समय में भोपाल में अंतरिक्ष अन्वेषण दीर्घा की स्थापना विद्यार्थियों और युवाओं के लिए प्रेरणादायक पहल साबित होगी। उन्होंने कहा कि यह गैलरी भविष्य की वैज्ञानिक पीढ़ी तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

    केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि मध्य प्रदेश देश के विकास और सांस्कृतिक विरासत दोनों में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। उन्होंने कहा कि यह नई दीर्घा विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान के नवीनतम ज्ञान, शोध और तकनीकों से जोड़ने का प्रभावी माध्यम बनेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि यह पहल राज्य की स्पेस पॉलिसी को मजबूती देने के साथ वैज्ञानिक सोच और नवाचार की संस्कृति को भी बढ़ावा देगी। नई शिक्षा नीति में भी स्पेस टेक्नोलॉजी को विशेष महत्व दिया गया है और यह गैलरी उसी दिशा में एक सार्थक प्रयास है।

    आंचलिक विज्ञान केंद्र में विकसित ‘हॉल ऑफ स्पेस एक्सप्लोरेशन’ को अत्याधुनिक और अनुभवात्मक विज्ञान गैलरियों में शामिल किया गया है। इसे राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद और भोपाल जिला प्रशासन के सहयोग से विकसित किया गया है। गैलरी में आगंतुकों को ब्रह्मांड की उत्पत्ति से लेकर आधुनिक अंतरिक्ष अभियानों तक की वैज्ञानिक यात्रा को आकर्षक और इंटरैक्टिव तरीके से समझने का अवसर मिलेगा। यहां प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक खगोल विज्ञान और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के साथ जोड़कर प्रस्तुत किया गया है।

    गैलरी में 30 से अधिक इंटरैक्टिव और इमर्सिव प्रदर्श स्थापित किए गए हैं। इनमें स्पेस फ्लाइट सिम्युलेटर, स्पेस वॉक, तीन-आयामी खगोलीय पिंडों का अवलोकन, अंतरिक्ष अनुसंधान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग, स्पेस टूरिज्म, रॉकेट और अंतरिक्ष यान की कार्यप्रणाली, कक्षीय यांत्रिकी तथा अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन जैसी अवधारणाओं को सरल और रोचक तरीके से प्रदर्शित किया गया है। साथ ही भारत की अंतरिक्ष यात्रा को भी विस्तार से दर्शाया गया है, जिसमें आर्यभट्ट, चंद्रयान, मंगलयान, आदित्य-एल1 और आगामी गगनयान मिशन जैसी उपलब्धियों को प्रमुखता से शामिल किया गया है।

    राज्य सरकार का मानना है कि यह अंतरिक्ष अन्वेषण दीर्घा विद्यार्थियों, शोधार्थियों और आम नागरिकों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, जिज्ञासा, नवाचार और अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति रुचि विकसित करने का महत्वपूर्ण माध्यम बनेगी। साथ ही यह मध्य प्रदेश की स्पेस पॉलिसी के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने और विज्ञान आधारित शिक्षा को नई दिशा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

  • जनकल्याण और बुनियादी ढांचे पर सरकार का बड़ा निवेश, 8,445 करोड़ रुपये शहरी विकास के लिए स्वीकृत, मूंग उपार्जन और सिंचाई परियोजनाओं को भी मिली मंजूरी

    जनकल्याण और बुनियादी ढांचे पर सरकार का बड़ा निवेश, 8,445 करोड़ रुपये शहरी विकास के लिए स्वीकृत, मूंग उपार्जन और सिंचाई परियोजनाओं को भी मिली मंजूरी

    मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और जनकल्याण योजनाओं को गति देने के उद्देश्य से 10 हजार 800 करोड़ रुपये से अधिक के विभिन्न विकास प्रस्तावों को मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में शहरी अधोसंरचना, सिंचाई, कृषि, महिला एवं बाल विकास तथा प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। सरकार का मानना है कि इन फैसलों से प्रदेश के विकास कार्यों को नई दिशा मिलेगी और विभिन्न वर्गों को प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त होगा।

    बैठक में सबसे बड़ी स्वीकृति नगरीय क्षेत्रों के अधोसंरचना विकास के लिए दी गई। राज्य सरकार ने आगामी पांच वर्षों के लिए 8 हजार 445 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की है। यह धनराशि नगर निगम, नगर पालिका और नगर परिषद क्षेत्रों में सड़क, जल निकासी, पेयजल, सार्वजनिक सुविधाओं और अन्य आधारभूत विकास परियोजनाओं पर खर्च की जाएगी। साथ ही स्थानीय निकायों द्वारा विकास कार्यों के लिए लिए गए ऋणों के पुनर्भुगतान में भी इसका उपयोग किया जाएगा, जिससे शहरी विकास परियोजनाओं को गति मिलेगी।

    मंत्रिपरिषद ने किसानों के हित में भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया। रबी वर्ष 2023-24 के दौरान लक्ष्य से अधिक खरीदी गई मूंग के भुगतान के लिए 1,587 करोड़ रुपये की निःशुल्क शासकीय प्रत्याभूति उपलब्ध कराने को मंजूरी दी गई। इस निर्णय के तहत विभिन्न बैंकों से ली गई साख सीमा के शेष दायित्वों के लिए सरकारी गारंटी प्रदान की जाएगी। सरकार का उद्देश्य किसानों के हितों की रक्षा करना और उपार्जन प्रक्रिया को वित्तीय रूप से सुचारु बनाए रखना है।

    सिंचाई सुविधाओं के विस्तार को लेकर भी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राजगढ़ जिले की कुण्डलिया वृहद सिंचाई परियोजना के संचालन को वर्ष 2031 तक जारी रखने के लिए 245 करोड़ 45 लाख रुपये की स्वीकृति प्रदान की गई है। इस परियोजना के माध्यम से राजगढ़ और आगर-मालवा जिलों के लगभग 1 लाख 39 हजार 600 हेक्टेयर क्षेत्र में सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली के जरिए सिंचाई क्षमता विकसित करने का लक्ष्य है। सरकार का मानना है कि इससे कृषि उत्पादन में वृद्धि होगी और किसानों को स्थायी सिंचाई सुविधा उपलब्ध होगी।

    बैठक में महिला एवं बाल विकास से जुड़ा भी अहम निर्णय लिया गया। टेक-होम राशन के उत्पादन और वितरण की व्यवस्था को राज्य आजीविका फोरम से वापस लेकर महिला एवं बाल विकास विभाग को सौंपने का निर्णय लिया गया है। अंतरिम व्यवस्था के तहत स्व-सहायता समूहों के माध्यम से पूरक पोषण आहार उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही भविष्य में केंद्र सरकार के नए दिशा-निर्देशों के अनुरूप स्थायी व्यवस्था विकसित की जाएगी, जिससे पोषण योजनाओं का संचालन अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सके।

    मंत्रिपरिषद ने वाणिज्यिक कर विभाग की स्थापना योजनाओं के संचालन के लिए भी 521 करोड़ 4 लाख रुपये की स्वीकृति दी है। यह राशि आगामी पांच वर्षों तक मुख्यालय, जिला और परिक्षेत्रीय कार्यालयों के संचालन, कर्मचारियों के वेतन-भत्तों, कार्यालय व्यय, व्यावसायिक सेवाओं तथा आवश्यक संसाधनों के रखरखाव पर खर्च की जाएगी। सरकार का मानना है कि इन निर्णयों से प्रशासनिक व्यवस्था और सेवा वितरण प्रणाली को मजबूती मिलेगी।

    राज्य सरकार का कहना है कि शहरी विकास, कृषि, सिंचाई, पोषण और प्रशासनिक सुधारों से जुड़े इन फैसलों का उद्देश्य प्रदेश के समग्र विकास को नई गति देना है। विभिन्न विभागों को मिली वित्तीय स्वीकृतियों के माध्यम से विकास परियोजनाओं के समयबद्ध क्रियान्वयन, किसानों के हितों की सुरक्षा, शहरी सुविधाओं के विस्तार और जनकल्याण कार्यक्रमों को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति होने की उम्मीद है।

  • मध्य प्रदेश के 41 लाख तेंदूपत्ता संग्राहकों को बड़ी सौगात, राज्य सरकार इस वर्ष बांटेगी 139 करोड़ रुपये का बोनस, वन विभाग ने शुरू की तैयारियां

    मध्य प्रदेश के 41 लाख तेंदूपत्ता संग्राहकों को बड़ी सौगात, राज्य सरकार इस वर्ष बांटेगी 139 करोड़ रुपये का बोनस, वन विभाग ने शुरू की तैयारियां

    मध्य प्रदेश सरकार ने तेंदूपत्ता संग्राहकों के लिए इस वर्ष बड़ी आर्थिक राहत का ऐलान करते हुए 139 करोड़ रुपये के बोनस वितरण की तैयारी शुरू कर दी है। राज्य के लगभग 41 लाख तेंदूपत्ता संग्राहकों को इस योजना का लाभ मिलेगा। वन विभाग के अंतर्गत कार्यरत राज्य लघु वनोपज संघ ने बोनस वितरण की पूरी कार्ययोजना तैयार कर ली है और इस संबंध में विस्तृत प्रस्तुतीकरण भी मुख्य सचिव अनुराग जैन के समक्ष प्रस्तुत किया गया है। सरकार का उद्देश्य वन क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों की आय बढ़ाना और उन्हें समय पर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है।

    राज्य में तेंदूपत्ता संग्रहण लाखों ग्रामीण और वनवासी परिवारों की आजीविका का प्रमुख आधार है। हर वर्ष संग्रहण सीजन के दौरान बड़ी संख्या में लोग इस कार्य से जुड़ते हैं और इससे होने वाली आय उनके परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने बोनस वितरण की प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा करने की तैयारी शुरू कर दी है ताकि पात्र संग्राहकों तक राशि शीघ्र पहुंचाई जा सके।

    वन विभाग की योजना के अनुसार वर्ष 2026-27 के लिए 17.72 लाख मानक बोरा तेंदूपत्ता संग्रहण का भौतिक लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए विभिन्न वन मंडलों में आवश्यक तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। अधिकारियों का मानना है कि बेहतर प्रबंधन और संगठित व्यवस्था के माध्यम से संग्रहण कार्य को प्रभावी ढंग से संचालित किया जाएगा, जिससे संग्राहकों को भी अधिक लाभ मिल सके।

    सरकार ने संग्रहण वर्ष 2026 के दौरान तेंदूपत्ता संग्रहण करने वाले 41 लाख संग्राहकों को कुल 708 करोड़ रुपये संग्रहण पारिश्रमिक के रूप में देने की व्यवस्था की है। इसके अतिरिक्त संग्रहण वर्ष 2024 के लाभांश का 75 प्रतिशत हिस्सा, जो 139 करोड़ रुपये है, इस वर्ष बोनस के रूप में वितरित किया जाएगा। इससे लाखों परिवारों को अतिरिक्त आर्थिक सहायता मिलेगी और उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

    वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार बोनस वितरण की प्रक्रिया को पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। पात्र हितग्राहियों की जानकारी का सत्यापन, भुगतान से जुड़ी औपचारिकताओं का समय पर निष्पादन और सभी आवश्यक प्रशासनिक तैयारियां तेजी से पूरी की जा रही हैं। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि बोनस राशि बिना किसी अनावश्यक विलंब के लाभार्थियों तक पहुंच सके।

    राज्य सरकार का मानना है कि तेंदूपत्ता संग्रहण केवल वन उपज से जुड़ी गतिविधि नहीं, बल्कि ग्रामीण और आदिवासी अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार भी है। इसलिए इस क्षेत्र में कार्यरत संग्राहकों को नियमित पारिश्रमिक और लाभांश उपलब्ध कराना उनकी आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम है। सरकार भविष्य में भी लघु वनोपज आधारित गतिविधियों को प्रोत्साहित करने, वनवासी परिवारों की आय बढ़ाने और रोजगार के अवसरों का विस्तार करने के लिए विभिन्न योजनाओं पर कार्य करती रहेगी। बोनस वितरण की इस पहल से प्रदेश के लाखों तेंदूपत्ता संग्राहकों को प्रत्यक्ष आर्थिक लाभ मिलेगा और वन आधारित आजीविका को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषित किए कई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और हजारों रोजगार देने वाली परियोजनाएं

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषित किए कई सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और हजारों रोजगार देने वाली परियोजनाएं

    मध्य प्रदेश ने तकनीकी और डिजिटल उद्योगों के क्षेत्र में अपनी विकास रणनीति को नई गति देते हुए एमपी टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 3.0 के दौरान कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। राज्य सरकार ने सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर और आईटी अवसंरचना के विस्तार को प्राथमिकता देते हुए निवेशकों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने का भरोसा जताया। कॉन्क्लेव में लगभग 40 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, जिनसे राज्य में 34 हजार से अधिक रोजगार के अवसर सृजित होने का अनुमान है। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी 51 प्रमुख गतिविधियों का आयोजन किया गया।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकार भविष्य की तकनीकों को अपनाने और उद्योगों के लिए आधुनिक पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने पर लगातार काम कर रही है। इसी दिशा में प्रदेश में सेमीकंडक्टर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किया जाएगा, जो कौशल विकास, अनुसंधान, उद्योगों के साथ सहयोग और क्षमता निर्माण को बढ़ावा देगा। इसके साथ ही एवीजीसी-एक्सआर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना भी की जाएगी, जिससे एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग, कॉमिक्स और एक्सटेंडेड रियलिटी जैसे क्षेत्रों को प्रोत्साहन मिलेगा।

    राज्य सरकार ने आईटी अवसंरचना को मजबूत करने के लिए कई नई परियोजनाओं की भी घोषणा की है। भोपाल आईटी पार्क में नया आईटी टॉवर विकसित किया जाएगा, जहां जीसीसी, आईटी और डिजिटल सेवा कंपनियों के लिए आधुनिक प्लग-एंड-प्ले कार्यालय उपलब्ध होंगे। भोपाल के कोलार क्षेत्र में भी इसी सुविधा से युक्त नया आईटी पार्क बनाया जाएगा, ताकि नई तकनीकी कंपनियां कम समय में अपना संचालन शुरू कर सकें। वहीं इंदौर के सुपर कॉरिडोर क्षेत्र में लगभग तीन लाख वर्ग फीट निर्मित क्षेत्र वाला अत्याधुनिक आईटी पार्क विकसित किया जाएगा, जहां विश्वस्तरीय डिजिटल और आईटी कंपनियों को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।

    मुख्यमंत्री ने बताया कि भारत सरकार के सहयोग से मंथन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और ग्लोबल स्किल्स पार्क में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सेंटर ऑफ एक्सीलेंस भी स्थापित किए जाएंगे। इन संस्थानों के माध्यम से नवाचार, अनुसंधान, उद्योग-अकादमिक सहयोग और आधुनिक तकनीकी कौशल को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश साइंस सिटी, डीप टेक पार्क, डेटा सेंटर और एआई आधारित परियोजनाओं के माध्यम से नई तकनीकों को तेजी से अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

    सरकार के अनुसार ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2025 के बाद तकनीकी क्षेत्र में 12 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश पर काम शुरू हो चुका है। वहीं पिछले दो टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव के माध्यम से राज्य को 46 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए थे। मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि आठ देशों की दस प्रमुख कंपनियों की 28 हजार 200 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाएं वर्तमान में ग्राउंडब्रेकिंग चरण में हैं। इनमें एआई-रेडी डेटा सेंटर, फूड प्रोसेसिंग, फार्मास्यूटिकल्स और स्पेशियलिटी फिल्म्स जैसे क्षेत्रों की परियोजनाएं शामिल हैं। इनमें स्पेन की कंपनी द्वारा भोपाल में बड़े एआई-रेडी डेटा सेंटर की स्थापना भी प्रस्तावित है।

    कॉन्क्लेव के दौरान आठ कंपनियों को भूमि आवंटन के आशय-पत्र भी सौंपे गए। इन परियोजनाओं में 203.58 करोड़ रुपये का निवेश और 1,242 नए रोजगार सृजित होने का अनुमान है। यह निवेश इंदौर के सिंहासा आईटी पार्क और भोपाल के बड़वई आईटी पार्क में आईटी, आईटीईएस, इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण, आईटी अवसंरचना और स्टार्टअप इकोसिस्टम को मजबूत करेगा। कार्यक्रम के दौरान गूगल प्ले के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल क्षमता विकास के क्षेत्र में सहयोग को लेकर समझौता भी किया गया। राज्य सरकार का मानना है कि इन पहलों से मध्य प्रदेश तकनीकी निवेश, नवाचार और डिजिटल उद्योगों के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में अपनी मजबूत पहचान स्थापित करेगा।

  • एमपी टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 3.0 से तकनीकी निवेश को नई रफ्तार, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ग्लोबल कंपनियों के साथ बनाई रणनीति, डेटा सेंटर और सेमीकंडक्टर हब बनने की दिशा में मध्यप्रदेश का बड़ा कदम

    एमपी टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 3.0 से तकनीकी निवेश को नई रफ्तार, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ग्लोबल कंपनियों के साथ बनाई रणनीति, डेटा सेंटर और सेमीकंडक्टर हब बनने की दिशा में मध्यप्रदेश का बड़ा कदम

    मध्यप्रदेश सरकार ने राज्य को देश के प्रमुख प्रौद्योगिकी और डिजिटल निवेश केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए एमपी टेक ग्रोथ कॉन्क्लेव 3.0 के विशेष सत्र का आयोजन किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने देश और विदेश की दस प्रतिष्ठित संस्थाओं तथा अग्रणी उद्योग समूहों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों के साथ अलग-अलग स्तर पर विस्तृत चर्चा की। इन बैठकों का उद्देश्य राज्य में उच्च तकनीकी क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा देना, नई परियोजनाओं के क्रियान्वयन को गति देना और भविष्य के लिए दीर्घकालिक औद्योगिक सहयोग का मजबूत आधार तैयार करना रहा।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकार ऐसी औद्योगिक और तकनीकी नीतियों पर कार्य कर रही है, जिनसे मध्यप्रदेश को ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर, डेटा सेंटर और सेमीकंडक्टर निर्माण जैसे उच्च-विकास वाले क्षेत्रों में राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी स्थान मिल सके। उन्होंने निवेशकों को भरोसा दिलाया कि सरकार उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण, आवश्यक आधारभूत सुविधाएं और तेज प्रशासनिक सहयोग उपलब्ध कराने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

    कॉन्क्लेव के दौरान विभिन्न कंपनियों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिजाइन एंड मैन्युफैक्चरिंग, डेटा सेंटर, हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग और अनुसंधान एवं विकास से जुड़ी अपनी प्रस्तावित परियोजनाओं का विस्तृत खाका प्रस्तुत किया। निवेशकों ने प्रदेश में तकनीकी अवसंरचना के विस्तार, आधुनिक उद्योगों की स्थापना और नवाचार आधारित परियोजनाओं में संभावनाओं पर अपने विचार साझा किए।

    इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र से जुड़ी कई प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री के साथ निवेश योजनाओं पर चर्चा की। इस दौरान उन्नत विनिर्माण, तकनीकी समाधान, डिजिटल सेवाओं और ऊर्जा आधारित औद्योगिक परियोजनाओं को लेकर संभावित सहयोग पर विचार-विमर्श हुआ। राज्य सरकार ने इन क्षेत्रों में निवेश को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक नीतिगत सहयोग और सुविधाएं उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता दोहराई।

    बैठक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल नवाचार को लेकर भी विशेष जोर दिया गया। आधुनिक कंप्यूटिंग, उन्नत तकनीकी समाधान और भविष्य की डिजिटल आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए राज्य में नई तकनीकों के विकास और उनके औद्योगिक उपयोग पर विस्तार से चर्चा हुई। इस दौरान वैश्विक तकनीकी कंपनियों के प्रतिनिधियों ने मध्यप्रदेश के साथ दीर्घकालिक सहयोग और निवेश की संभावनाओं को सकारात्मक बताया।

    सेमीकंडक्टर निर्माण और अनुसंधान के क्षेत्र में भी कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव सामने आए। संबंधित कंपनियों ने उत्पादन इकाइयों की स्थापना, अनुसंधान सुविधाओं के विकास और उच्च तकनीकी विनिर्माण को बढ़ावा देने की योजनाओं पर मुख्यमंत्री के साथ विस्तार से चर्चा की। इन प्रस्तावों से प्रदेश में अत्याधुनिक औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र विकसित होने और तकनीकी उत्पादन क्षमता बढ़ने की संभावना व्यक्त की गई।

    विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा आयोजित इस कॉन्क्लेव का उद्देश्य केवल निवेश आकर्षित करना ही नहीं, बल्कि प्रदेश में तकनीकी कौशल, नवाचार और उद्योगों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना भी है। सरकार का मानना है कि ऐसे प्रयासों से स्थानीय युवाओं के लिए उच्च गुणवत्ता वाले रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और आधुनिक तकनीकी क्षेत्रों में विशेषज्ञ मानव संसाधन तैयार होगा।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विश्वास व्यक्त किया कि सरकार की उद्योग समर्थक नीतियां, तेज निर्णय प्रक्रिया और निवेशकों के साथ निरंतर संवाद मध्यप्रदेश को तकनीकी विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाएगा। उन्होंने कहा कि ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर, डेटा सेंटर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में बढ़ते निवेश से प्रदेश की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी और आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के लक्ष्य को मजबूत आधार प्राप्त होगा। इससे राज्य देश के उभरते प्रौद्योगिकी मानचित्र पर एक महत्वपूर्ण और भरोसेमंद निवेश गंतव्य के रूप में अपनी मजबूत पहचान स्थापित कर सकेगा।