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  • मध्य प्रदेश कैबिनेट की अहम बैठक में कई बड़े निर्णय, युवाओं, किसानों, कारोबारियों और पंचायतों के लिए नई योजनाओं का खुला रास्ता

    मध्य प्रदेश कैबिनेट की अहम बैठक में कई बड़े निर्णय, युवाओं, किसानों, कारोबारियों और पंचायतों के लिए नई योजनाओं का खुला रास्ता

    मध्य प्रदेश: सरकार ने राज्य के विकास को नई दिशा देने के उद्देश्य से मंगलवार को आयोजित कैबिनेट बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णयों को मंजूरी दी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में युवाओं, किसानों, कारोबारियों, पंचायतों और सामाजिक कल्याण से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। सरकार ने वर्ष 2027 को प्रदेश में ‘युवा वर्ष’ के रूप में मनाने का ऐलान करते हुए स्पष्ट किया कि आने वाले समय में युवाओं को रोजगार, कौशल विकास, नवाचार और उद्यमिता के अधिक अवसर उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके साथ ही प्रशासनिक सुधार, डिजिटल सेवाओं के विस्तार और जनकल्याण योजनाओं को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में भी कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए।

    सरकार ने बताया कि वर्ष 2025 को उद्योग एवं रोजगार वर्ष और वर्ष 2026 को कृषि वर्ष के रूप में आगे बढ़ाने के बाद अब वर्ष 2027 पूरी तरह युवाओं को समर्पित रहेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की विकास यात्रा में युवाओं की भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण है। इसी उद्देश्य से सभी विभागों से सुझाव मांगे जाएंगे ताकि युवा वर्ष के दौरान रोजगार, शिक्षा, स्टार्टअप, खेल, कौशल प्रशिक्षण और नवाचार से जुड़े कार्यक्रम व्यापक स्तर पर संचालित किए जा सकें। सरकार आम नागरिकों और युवाओं से भी सुझाव लेकर अंतिम कार्ययोजना तैयार करेगी।

    कैबिनेट बैठक में डिजिटल माध्यम से रचनात्मक कार्य करने वाले युवाओं को प्रोत्साहित करने का भी निर्णय लिया गया। हाल ही में आयोजित ‘मेरा युवा मेरा गौरव’ कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए सरकार ने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सकारात्मक और रचनात्मक योगदान देने वाले युवाओं को सम्मानित करने के लिए विशेष डिजिटल पुरस्कार शुरू किए जाएंगे। इस पहल का उद्देश्य नई पीढ़ी को तकनीक के माध्यम से समाज और प्रदेश के विकास में योगदान देने के लिए प्रेरित करना है।

    बैठक में सार्वजनिक वितरण प्रणाली और आंगनबाड़ी सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने पर भी जोर दिया गया। सरकार ने घर-घर पोषण आहार वितरण व्यवस्था में आवश्यक सुधारों को मंजूरी दी है, ताकि पात्र हितग्राहियों तक पोषण सामग्री समय पर और बेहतर गुणवत्ता के साथ पहुंच सके। इसके साथ ही योजनाओं की निगरानी और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए नई व्यवस्थाओं को भी स्वीकृति दी गई। सरकार का मानना है कि इन सुधारों से महिलाओं और बच्चों को मिलने वाली पोषण सेवाएं अधिक प्रभावी होंगी।

    ग्रामीण विकास और स्थानीय प्रशासन को मजबूत बनाने के उद्देश्य से पंचायतों के लिए नए डिजिटल पोर्टल को भी मंजूरी दी गई। इस पोर्टल के माध्यम से पंचायतों के प्रशासनिक कार्यों, विकास योजनाओं और वित्तीय प्रबंधन को अधिक पारदर्शी तथा तकनीक आधारित बनाया जाएगा। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी आसान होगी और आम नागरिकों को भी विभिन्न सेवाओं का लाभ अधिक व्यवस्थित तरीके से मिल सकेगा।

    बैठक में कारोबार और कर व्यवस्था से जुड़े विषयों पर भी विचार किया गया। सरकार ने जीएसटी से संबंधित आवश्यक बदलावों और व्यापारिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने की दिशा में आगे बढ़ने का संकेत दिया। साथ ही किसानों के हितों, कृषि क्षेत्र के विकास और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर भी चर्चा हुई। सरकार का कहना है कि इन निर्णयों का उद्देश्य विकास की गति को तेज करना और सभी वर्गों को योजनाओं का बेहतर लाभ उपलब्ध कराना है।

    कैबिनेट बैठक के बाद सरकार ने स्पष्ट किया कि प्रदेश में विकास, सुशासन और जनभागीदारी को केंद्र में रखकर आगे की नीतियां तैयार की जाएंगी। युवा वर्ष की घोषणा को राज्य के दीर्घकालिक विकास एजेंडे का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। सरकार का विश्वास है कि युवाओं की सक्रिय भागीदारी, डिजिटल तकनीक के व्यापक उपयोग और प्रशासनिक सुधारों के माध्यम से मध्य प्रदेश को विकास के नए चरण में पहुंचाने का लक्ष्य अधिक प्रभावी ढंग से हासिल किया जा सकेगा।

  • मध्य प्रदेश में UCC की दिशा में बड़ा कदम, उच्च स्तरीय समिति ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को सौंपी अंतिम रिपोर्ट, अब विधेयक की तैयारी तेज

    मध्य प्रदेश में UCC की दिशा में बड़ा कदम, उच्च स्तरीय समिति ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को सौंपी अंतिम रिपोर्ट, अब विधेयक की तैयारी तेज

    मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राज्य सरकार द्वारा गठित उच्च स्तरीय समिति ने अपना अंतिम प्रतिवेदन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को सौंप दिया है। मुख्यमंत्री ने निर्धारित समय-सीमा के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने पर समिति के अध्यक्ष और सभी सदस्यों का आभार व्यक्त किया। इसके साथ ही राज्य में यूसीसी को लेकर आगे की विधायी प्रक्रिया शुरू होने का मार्ग भी प्रशस्त हो गया है। सरकार ने रिपोर्ट को विधि विभाग को भेज दिया है, जहां आवश्यक परीक्षण और संशोधन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

    समिति द्वारा प्रस्तुत अंतिम प्रतिवेदन तीन अलग-अलग खंडों में तैयार किया गया है। पहले खंड में समिति की सिफारिशें शामिल हैं, जिनमें अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर लागू विभिन्न कानूनों, परंपराओं और व्यवस्थाओं का अध्ययन कर सुझाव दिए गए हैं। इस भाग में कुल दस अध्याय शामिल किए गए हैं, जिनमें विभिन्न कानूनी और सामाजिक पहलुओं का विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया गया है।

    रिपोर्ट का दूसरा खंड प्रस्तावित विधेयक के प्रारूप से संबंधित है। समिति ने मध्य प्रदेश में लागू कानूनों और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को ध्यान में रखते हुए विधेयक का मसौदा तैयार किया है। प्रस्तावित प्रारूप में चार भाग, 404 धाराएं और सात अनुसूचियां शामिल हैं। इसका उद्देश्य राज्य की परिस्थितियों के अनुरूप समान नागरिक संहिता का व्यावहारिक और कानूनी ढांचा तैयार करना है।

    तीसरे खंड में व्यापक जन-परामर्श का विवरण दिया गया है। समिति ने जिला स्तर, राज्य स्तर और ऑनलाइन माध्यमों से सुझाव आमंत्रित किए थे। इस प्रक्रिया में 9.58 लाख से अधिक सुझाव प्राप्त हुए। रिपोर्ट में इन सुझावों का प्रश्नवार, लिंगवार और समुदायवार विश्लेषण भी शामिल किया गया है। समिति ने अपनी सिफारिशों में अनुसूचित जनजातियों को समान नागरिक संहिता के दायरे से बाहर रखने की अनुशंसा भी की है।

    राज्य सरकार ने समिति को विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण और लिव-इन संबंधों जैसे व्यक्तिगत एवं पारिवारिक कानूनों का अध्ययन कर मध्य प्रदेश की सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप सुझाव तैयार करने का दायित्व सौंपा था। समिति ने अपने प्रतिवेदन में लैंगिक समानता, संवैधानिक मूल्यों, प्रचलित परंपराओं और सामाजिक विविधता के बीच संतुलन बनाए रखने पर विशेष जोर दिया है। साथ ही यह भी सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया है कि विभिन्न समुदायों की परंपरागत धार्मिक और सांस्कृतिक प्रथाएं अनावश्यक रूप से प्रभावित न हों।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस अवसर पर समिति के अध्यक्ष, सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई सहित अन्य सदस्यों के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि अब रिपोर्ट विधि विभाग के पास है, जहां आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसे वरिष्ठ सचिव समिति और मंत्रिपरिषद के समक्ष रखा जाएगा। इसके बाद सरकार इसे विधानसभा के आगामी मानसून सत्र में विधेयक के रूप में प्रस्तुत करने पर विचार कर सकती है।

    मुख्यमंत्री ने इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों से भी स्पष्ट रुख अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता जैसे विषय पर सभी पक्षों को अपने विचार स्पष्ट रूप से रखने चाहिए। सरकार का कहना है कि व्यापक जन-परामर्श और कानूनी अध्ययन के आधार पर तैयार यह प्रतिवेदन राज्य में समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में महत्वपूर्ण आधार दस्तावेज के रूप में काम करेगा।

  • मुख्यमंत्री राजा हरिश्चंद्र नहीं हैं, सच बताइए 7669 करोड़ कहां गए, सरदार सरोवर समझौते पर कांग्रेस का तीखा हमला

    मुख्यमंत्री राजा हरिश्चंद्र नहीं हैं, सच बताइए 7669 करोड़ कहां गए, सरदार सरोवर समझौते पर कांग्रेस का तीखा हमला


    मध्यप्रदेश । सरदार सरोवर परियोजना से जुड़े अंतरराज्यीय वित्तीय समझौते को लेकर मध्यप्रदेश की राजनीति में नया विवाद खड़ा हो गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि मध्यप्रदेश के हितों से समझौता किया गया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री जो कह दें वही अंतिम सत्य नहीं हो जाता। सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि जब मध्यप्रदेश ने सरदार सरोवर परियोजना में हुए नुकसान के आधार पर 7669 करोड़ रुपए का दावा किया था तो आखिर वह दावा किस आधार पर छोड़ दिया गया। पटवारी ने पूरे समझौते पर श्वेत पत्र जारी करने और विधानसभा में विस्तृत चर्चा कराने की मांग भी की।

    भोपाल में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में जीतू पटवारी ने कहा कि नर्मदा नदी मध्यप्रदेश की जीवनरेखा है और सरदार सरोवर परियोजना के कारण सबसे अधिक नुकसान भी प्रदेश को ही उठाना पड़ा। उन्होंने कहा कि सबसे अधिक कृषि भूमि वन क्षेत्र और आदिवासी गांव मध्यप्रदेश में डूब क्षेत्र में आए। हजारों परिवारों का विस्थापन हुआ और पुनर्वास का सबसे बड़ा दायित्व भी प्रदेश ने निभाया। ऐसे में तत्कालीन आकलन के आधार पर मध्यप्रदेश ने 7669 करोड़ रुपए का दावा किया था। अब सरकार यह बताए कि वह दावा अचानक समाप्त कैसे हो गया।

    कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार केवल यह प्रचार कर रही है कि गुजरात की लगभग 1500 करोड़ रुपए की देनदारी को कम कर 231 करोड़ रुपए में निपटा दिया गया और इसे बड़ी उपलब्धि बताया जा रहा है। लेकिन सरकार यह नहीं बता रही कि मध्यप्रदेश के हजारों करोड़ रुपए के दावे का क्या हुआ। उन्होंने कहा कि जनता को पूरे समझौते की सच्चाई जानने का अधिकार है और सरकार को सभी दस्तावेज सार्वजनिक करने चाहिए।

    पटवारी ने सरकार से कई सीधे सवाल भी पूछे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री बताएं यह फैसला किस कानूनी और वित्तीय आधार पर लिया गया। क्या इस विषय पर राज्य मंत्रिमंडल में चर्चा हुई थी। क्या विधानसभा को विश्वास में लिया गया था। क्या पर्यावरण विशेषज्ञों और परियोजना से जुड़े जानकारों की राय ली गई थी। उन्होंने दावा किया कि दिल्ली में हुई बैठक में शामिल होने जा रहे अधिकारियों से उनकी विमान यात्रा के दौरान बातचीत हुई थी और अधिकारियों ने बताया था कि मध्यप्रदेश अपने दावे को लेकर पूरी तैयारी के साथ बैठक में जा रहा है। ऐसे में समझौते के बाद दावा समाप्त होने पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

    कांग्रेस ने प्रदेश की आर्थिक स्थिति को भी इस मुद्दे से जोड़ते हुए सरकार पर निशाना साधा। पटवारी ने कहा कि मध्यप्रदेश पर पांच लाख इकसठ हजार करोड़ रुपए से अधिक का कर्ज हो चुका है और सरकार लगातार नया कर्ज लेकर खर्च कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि विकास की ठोस योजना के बजाय सरकार केवल प्रचार और आयोजनों पर ध्यान दे रही है। हाल ही में लिए गए नए कर्ज का उल्लेख करते हुए उन्होंने वित्तीय प्रबंधन पर भी सवाल उठाए।

    दरअसल नर्मदा नदी पर बने सरदार सरोवर बांध को लेकर मध्यप्रदेश गुजरात महाराष्ट्र और राजस्थान के बीच कई वर्षों से वित्तीय विवाद चल रहा था। मध्यप्रदेश का कहना था कि परियोजना से सबसे अधिक भूमि और गांव उसके प्रभावित हुए हैं इसलिए उसे मुआवजा मिलना चाहिए जबकि गुजरात परियोजना की लागत में अन्य राज्यों की हिस्सेदारी की मांग कर रहा था। हाल ही में नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की मौजूदगी में चारों राज्यों ने वन टाइम सेटलमेंट पर हस्ताक्षर कर वर्षों पुराने विवाद को समाप्त करने पर सहमति जताई। समझौते के तहत मध्यप्रदेश महाराष्ट्र और राजस्थान गुजरात को 550 550 करोड़ रुपए देंगे जबकि पुराने सभी वित्तीय दावों को समाप्त माना जाएगा। इसी समझौते को लेकर अब प्रदेश में सियासी घमासान तेज हो गया है और कांग्रेस सरकार से पूरे मामले में पारदर्शिता की मांग कर रही है।

  • मध्य प्रदेश में आज रहेगा सियासी और प्रशासनिक हलचल का दिन, सीएम के कार्यक्रम, बीजेपी की ऑनलाइन परीक्षा और राज्यपाल के कार्यकाल पर रहेगी नजर

    मध्य प्रदेश में आज रहेगा सियासी और प्रशासनिक हलचल का दिन, सीएम के कार्यक्रम, बीजेपी की ऑनलाइन परीक्षा और राज्यपाल के कार्यकाल पर रहेगी नजर


    मध्य प्रदेश:  में शुक्रवार का दिन राजनीतिक, प्रशासनिक और सामाजिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण रहने वाला है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव दिनभर राजधानी भोपाल में आयोजित विभिन्न सरकारी और सार्वजनिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। वहीं लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान समारोह, भारतीय जनता पार्टी के डिजिटल प्रशिक्षण अभियान, राज्यपाल के कार्यकाल को लेकर संभावित चर्चाओं और प्रशासनिक समीक्षा बैठकों से जुड़े मुद्दों पर भी पूरे प्रदेश की नजर बनी रहेगी।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का दिन दोपहर से शुरू होने वाले कई सार्वजनिक कार्यक्रमों से व्यस्त रहेगा। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार वह दोपहर 12 बजे रविंद्र भवन पहुंचकर लोकतंत्र सेनानी सम्मेलन में शामिल होंगे। इसके बाद शाम साढ़े चार बजे अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतने वाले खिलाड़ियों के सम्मान समारोह में भाग लेंगे। शाम पांच बजे आयोजित अभिनंदन कार्यक्रम में उनकी मौजूदगी रहेगी, जबकि शाम छह बजे मानस भवन में आयोजित एक स्थानीय कार्यक्रम में भी मुख्यमंत्री सहभागिता करेंगे।

    आपातकाल दिवस के अवसर पर राजधानी भोपाल में लोकतंत्र सेनानियों और मीसाबंदी परिवारों के सम्मान के लिए विशेष समारोह आयोजित किया जाएगा। इस कार्यक्रम में करीब दो हजार मीसाबंदी परिवारों के सदस्य शामिल होंगे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले मीसाबंदियों और उनके परिजनों का सम्मान करेंगे। कार्यक्रम का उद्देश्य आपातकाल के दौरान लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा में योगदान देने वाले लोगों के प्रति सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करना है।

    भारतीय जनता पार्टी भी शुक्रवार को अपने संगठनात्मक अभियान के तहत बड़े स्तर पर डिजिटल प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करेगी। बूथ और मंडल स्तर के लगभग सात लाख कार्यकर्ताओं की ऑनलाइन परीक्षा संगठन के डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से आयोजित की जाएगी। इस प्रशिक्षण में पार्टी की विचारधारा, संगठन का विकास, केंद्र सरकार की प्रमुख योजनाएं और नेतृत्व से जुड़े विषय शामिल किए गए हैं। पार्टी का लक्ष्य छह जुलाई तक पूरे प्रदेश में डिजिटल प्रशिक्षण अभियान को सफलतापूर्वक पूरा करना है।

    प्रदेश की राजनीति में राज्यपाल के पद को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। वर्तमान राज्यपाल मंगूभाई पटेल का कार्यकाल छह जुलाई को पूरा होने जा रहा है। करीब डेढ़ दशक बाद ऐसा अवसर आया है जब मध्य प्रदेश का कोई राज्यपाल अपना निर्धारित पांच वर्षीय कार्यकाल पूरा करेगा। अब यह निर्णय राष्ट्रपति स्तर पर लिया जाएगा कि मंगूभाई पटेल को दूसरा कार्यकाल दिया जाएगा या राज्य को नया राज्यपाल मिलेगा। इस विषय पर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों की नजर बनी हुई है।

    इधर प्रशासनिक स्तर पर भी हाल ही में आयोजित कलेक्टर-कमिश्नर सम्मेलन की चर्चा जारी है। मुख्य सचिव अनुराग जैन ने स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा के दौरान कई जिलों के प्रदर्शन पर असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने स्वास्थ्य संकेतकों में अपेक्षित सुधार नहीं होने और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में कमी पर अधिकारियों को गंभीरता से काम करने के निर्देश दिए। विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को लेकर अधिकारियों से जवाबदेही सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।

    कुल मिलाकर शुक्रवार को मध्य प्रदेश में शासन, प्रशासन और राजनीति से जुड़े कई महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आने वाले हैं। मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों से लेकर संगठनात्मक गतिविधियों, प्रशासनिक समीक्षा और संवैधानिक पदों से जुड़े संभावित निर्णयों तक, पूरे दिन प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक गतिविधियां सुर्खियों में बनी रहने की संभावना है।

  • मुख्यमंत्री पर आरोपों को बीजेपी ने बताया बेबुनियाद, हेमंत खंडेलवाल बोले- विकास से घबराकर कांग्रेस कर रही दुष्प्रचार की राजनीति

    मुख्यमंत्री पर आरोपों को बीजेपी ने बताया बेबुनियाद, हेमंत खंडेलवाल बोले- विकास से घबराकर कांग्रेस कर रही दुष्प्रचार की राजनीति

    मध्य प्रदेश:  की राजनीति में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को लेकर लगाए गए आरोपों पर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी की प्रदेश इकाई ने मुख्यमंत्री के खिलाफ लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें पूरी तरह तथ्यहीन और भ्रामक बताया है। पार्टी का कहना है कि कांग्रेस राजनीतिक लाभ हासिल करने के उद्देश्य से भ्रम की स्थिति पैदा करने का प्रयास कर रही है, लेकिन प्रदेश की जनता ऐसे प्रयासों को स्वीकार नहीं करेगी।

    भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के खिलाफ लगाए गए आरोप वास्तविक तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस द्वारा जानबूझकर ऐसी परिस्थितियां बनाई जा रही हैं जिससे जनता के बीच गलत संदेश पहुंचे। उनके अनुसार आरोपों में प्रस्तुत की गई जानकारी वास्तविक दस्तावेजों और रिकॉर्ड से मेल नहीं खाती।

    खंडेलवाल ने मुख्यमंत्री और उनके परिवार की भूमि संबंधी जानकारी का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2023 में चुनावी नामांकन के दौरान जो संपत्ति विवरण प्रस्तुत किया गया था, उसमें और वर्तमान स्थिति में कोई महत्वपूर्ण बदलाव नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के नाम दर्ज भूमि का क्षेत्रफल पहले जैसा ही है और उनकी पत्नी के नाम दर्ज कृषि भूमि में भी कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। पार्टी का दावा है कि आरोपों के माध्यम से तथ्यों को तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत किया गया है।

    भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने उन व्यावसायिक संस्थाओं और भूमि स्वामित्व से जुड़े आरोपों का भी खंडन किया जिनका उल्लेख राजनीतिक विवाद में किया गया है। उन्होंने कहा कि जिन कंपनियों और संपत्तियों का नाम लेकर आरोप लगाए गए हैं, उनके संबंध में उपलब्ध रिकॉर्ड सार्वजनिक हैं और उनमें किसी प्रकार की अनियमितता का प्रमाण नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री संबंधित एक कंपनी के निदेशक पद से वर्षों पहले अलग हो चुके थे और उसके बाद की गतिविधियों से उनका कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है।

    मुख्यमंत्री के परिवार के अन्य सदस्यों को लेकर लगाए गए आरोपों पर भी भाजपा ने आपत्ति जताई है। पार्टी का कहना है कि परिवार के सदस्यों के नाम पर दर्ज भूमि और संपत्तियों के संबंध में जो दावे किए गए हैं, वे वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाते। साथ ही जिन रिश्तेदारों का उल्लेख आरोपों में किया गया है, उनका स्वतंत्र अस्तित्व है और उनके कार्यों को मुख्यमंत्री या उनके परिवार से जोड़ना उचित नहीं है। भाजपा नेताओं का कहना है कि यदि आवश्यक हुआ तो संबंधित पक्ष स्वयं भी कानूनी और सार्वजनिक स्तर पर अपनी स्थिति स्पष्ट करेंगे।

    भाजपा ने इस पूरे विवाद को राजनीतिक षड्यंत्र का हिस्सा बताते हुए कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। पार्टी का कहना है कि प्रदेश सरकार विकास, निवेश, उद्योग, कृषि और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में लगातार काम कर रही है, जिससे विपक्ष असहज महसूस कर रहा है। इसी कारण ध्यान भटकाने के लिए आरोपों की राजनीति की जा रही है।

    खंडेलवाल ने यह भी कहा कि मध्य प्रदेश में पिछड़े वर्ग के नेतृत्व को लेकर कांग्रेस का रवैया हमेशा नकारात्मक रहा है। उन्होंने दावा किया कि जब-जब प्रदेश में पिछड़े वर्ग से आने वाले नेताओं ने नेतृत्व संभाला, तब-तब उन्हें राजनीतिक रूप से घेरने और कमजोर करने की कोशिश की गई। भाजपा का आरोप है कि वर्तमान मुख्यमंत्री के खिलाफ भी इसी मानसिकता के तहत अभियान चलाया जा रहा है।

    प्रदेश की राजनीति में इस मुद्दे को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। भाजपा जहां आरोपों को निराधार बता रही है, वहीं विपक्ष अपने दावों पर कायम है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह विवाद मध्य प्रदेश की राजनीति में चर्चा का प्रमुख विषय बना रह सकता है।

  • डिजिटल जनगणना 2027 पर पीएम मोदी का जोर भोपाल में सीएम मोहन यादव ने मन की बात के जरिए जोड़ा संवाद

    डिजिटल जनगणना 2027 पर पीएम मोदी का जोर भोपाल में सीएम मोहन यादव ने मन की बात के जरिए जोड़ा संवाद


    भोपाल । मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में रविवार को एक अलग ही माहौल देखने को मिला जब मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम मन की बात के 133वें संस्करण का जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों के साथ सामूहिक श्रवण किया। वीआईपी रोड स्थित एक रेस्टोरेंट में आयोजित इस कार्यक्रम में आमजन की भी बड़ी भागीदारी देखने को मिली जिससे यह एक जनसंवाद का मंच बन गया।

    मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि मन की बात आज देशवासियों के दिलों में अपनी खास जगह बना चुका है और यह सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं बल्कि करोड़ों लोगों को जोड़ने वाला एक सशक्त माध्यम बन गया है। उन्होंने कहा कि इसके जरिए समाज के प्रेरक कार्यों नवाचारों और सकारात्मक प्रयासों को सामने लाया जाता है जिससे लोगों को नई दिशा और प्रेरणा मिलती है।

    कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को संबोधित करते हुए 2027 में होने वाली डिजिटल जनगणना को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने इसे दुनिया की सबसे बड़ी जनगणना बताते हुए कहा कि इस बार पूरी प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से की जाएगी। घर घर जाकर जानकारी एकत्र करने वाले कर्मचारियों के पास मोबाइल ऐप होगा जिसमें नागरिकों की जानकारी सीधे दर्ज की जाएगी।

    प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि इस बार नागरिकों को खुद अपनी जानकारी दर्ज करने की सुविधा भी दी जा रही है। कर्मचारी के आने से लगभग 15 दिन पहले यह सुविधा शुरू होगी जिससे लोग अपने समय अनुसार जानकारी भर सकेंगे। इसके बाद उन्हें एक विशेष आईडी मिलेगी जिसे वे कर्मचारी के आने पर दिखाकर अपनी जानकारी की पुष्टि कर सकेंगे। इससे प्रक्रिया सरल होगी और समय की बचत भी होगी।

    उन्होंने जानकारी दी कि जिन राज्यों में स्व गणना का कार्य पूरा हो चुका है वहां घरों के सूचीकरण का काम भी शुरू हो गया है और अब तक करीब 1 करोड़ 20 लाख परिवारों का मकान सूचीकरण किया जा चुका है। प्रधानमंत्री ने नागरिकों से अपील की कि वे इस प्रक्रिया में बढ़ चढ़कर भाग लें क्योंकि यह केवल सरकारी कार्य नहीं बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी है।

    इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने उपस्थित युवाओं और आमजनों से आत्मीय संवाद भी किया। उन्होंने महिला सशक्तिकरण बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान और स्वरोजगार जैसे विषयों पर चर्चा की और बताया कि राज्य सरकार महिलाओं की शिक्षा सुरक्षा और आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए लगातार प्रयास कर रही है।

    कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने बच्चों से भी मुलाकात की और उनसे संवाद कर उनका हौसला बढ़ाया। उन्होंने बच्चों को शिक्षा के महत्व और बड़ों के सम्मान की सीख दी तथा उनके साथ समय बिताया।

    कार्यक्रम के बाद मीडिया से चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मन की बात देश को सकारात्मक दिशा देने का एक अनूठा प्रयास है। उन्होंने यह भी बताया कि मध्यप्रदेश जल संरक्षण के क्षेत्र में अग्रणी बन रहा है और जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत पुराने जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने का कार्य किया जा रहा है।

    कुल मिलाकर भोपाल में आयोजित यह कार्यक्रम सिर्फ एक रेडियो प्रसारण नहीं बल्कि जनसंवाद और जनभागीदारी का उदाहरण बनकर सामने आया जिसमें सरकार और जनता के बीच संवाद को मजबूत करने की झलक देखने को मिली।

  • भोपाल में सीएम मोहन यादव का अनोखा अंदाज जनता के बीच पहुंचे कांग्रेस पर साधा निशाना

    भोपाल में सीएम मोहन यादव का अनोखा अंदाज जनता के बीच पहुंचे कांग्रेस पर साधा निशाना


    भोपाल । मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में रविवार को एक अलग ही राजनीतिक और जनसंवाद का नजारा देखने को मिला जब मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव अचानक वीआईपी रोड स्थित एक रेस्टोरेंट पहुंच गए। उनके इस अचानक दौरे ने वहां मौजूद लोगों को चौंका दिया और माहौल उत्साह से भर गया। मुख्यमंत्री ने यहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय कार्यक्रम मन की बात को सुना और आम लोगों के साथ बैठकर संवाद भी किया।

    सीएम का यह अंदाज काफी अलग और सहज था जहां उन्होंने बिना किसी औपचारिकता के युवाओं और आम नागरिकों से बातचीत की। उन्होंने लोगों के साथ बैठकर स्वल्पाहार किया और विभिन्न मुद्दों पर खुलकर चर्चा की। इस दौरान उन्होंने प्रदेश में चल रहे जल गंगा संवर्धन अभियान का जिक्र करते हुए कहा कि लगातार तीसरे साल यह अभियान सफलतापूर्वक चल रहा है और इसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस अभियान के जरिए पुराने जल स्रोतों जैसे कुएं और बावड़ियों को नया जीवन मिल रहा है और मध्यप्रदेश जल संरक्षण के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

    मुख्यमंत्री ने किसानों के मुद्दे पर भी अपनी बात रखी और कहा कि राज्य सरकार पूरी तरह किसान हितैषी है। उन्होंने बताया कि सरकार गेहूं के साथ साथ चना और मसूर की भी खरीद कर रही है जिससे किसानों को बेहतर लाभ मिल रहा है। इसके साथ ही उन्होंने केंद्र सरकार की योजनाओं का जिक्र करते हुए महिलाओं के सशक्तिकरण पर जोर दिया।

    इस दौरान सीएम मोहन यादव ने विपक्ष विशेषकर कांग्रेस पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि बहनों के साथ जो अन्याय हुआ है उसे देश कभी नहीं भूलेगा और कांग्रेस को इसके लिए जनता से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय तक सत्ता में रहने के बावजूद कांग्रेस ने महिलाओं के अधिकारों के प्रति सकारात्मक रवैया नहीं अपनाया।

    सीएम ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम का उल्लेख करते हुए कहा कि महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का निर्णय ऐतिहासिक है लेकिन विपक्षी दलों के रवैये के कारण यह पूरी तरह लागू नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि सरकार महिलाओं की शिक्षा सुरक्षा और रोजगार के लिए लगातार प्रयास कर रही है और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही हैं।

    इस पूरे कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री का सहज और जनसरोकारों से जुड़ा रूप देखने को मिला जहां उन्होंने सीधे जनता के बीच जाकर संवाद स्थापित किया। लोगों ने भी उनके इस अंदाज की सराहना की और खुलकर अपने विचार साझा किए।

    कुल मिलाकर यह दौरा सिर्फ एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं बल्कि आम लोगों से जुड़ने और उनके बीच भरोसा मजबूत करने की एक पहल के रूप में देखा जा रहा है जिसमें मुख्यमंत्री ने विकास योजनाओं के साथ साथ राजनीतिक मुद्दों पर भी अपनी स्पष्ट राय रखी।

  • एमपी में नारी शक्ति वंदन पर सियासी घमासान कल से पदयात्रा विधानसभा में निंदा प्रस्ताव की तैयारी

    एमपी में नारी शक्ति वंदन पर सियासी घमासान कल से पदयात्रा विधानसभा में निंदा प्रस्ताव की तैयारी


    भोपाल । भोपाल में नारी शक्ति वंदन को लेकर मध्यप्रदेश की सियासत एक बार फिर गर्मा गई है जहां सत्ताधारी दल ने इस मुद्दे पर बड़ा जनआंदोलन छेड़ने का ऐलान किया है। प्रदेश बीजेपी कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने विपक्ष पर तीखे आरोप लगाते हुए कहा कि महिलाओं के सम्मान और सशक्तिकरण के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा और इसे लेकर प्रदेशभर में व्यापक अभियान चलाया जाएगा।

    मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि प्रदेश में कल से नारी शक्ति वंदन पदयात्रा शुरू की जाएगी जो गांव गांव और शहर शहर तक पहुंचेगी। इसके साथ ही विधानसभा का एक दिन का विशेष सत्र बुलाकर विपक्ष के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाने की भी तैयारी है। उन्होंने कहा कि यह केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं बल्कि समाज की आधी आबादी के सम्मान से जुड़ा विषय है और इसे लेकर जनता के बीच जाकर सच्चाई रखी जाएगी।

    प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुख्यमंत्री ने विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सदन में जो व्यवहार देखने को मिला वह निंदनीय है और इससे महिलाओं के प्रति उनकी सोच उजागर होती है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को सशक्त बनाने के हर प्रयास का विरोध करना एक तरह की अलगाववादी मानसिकता को दर्शाता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ नेताओं ने अवसरवादिता दिखाते हुए अपने रुख बदल लिए और महिलाओं के सम्मान के मुद्दे पर भी राजनीति की।

    इस मुद्दे को लेकर प्रदेश में बड़े स्तर पर जनजागरण अभियान चलाने की रणनीति बनाई गई है। नेताओं ने बताया कि केवल पदयात्रा ही नहीं बल्कि नगर निगम से लेकर ग्राम पंचायत स्तर तक विरोध और निंदा प्रस्ताव पारित किए जाएंगे। इसके जरिए जनता को यह बताया जाएगा कि कौन महिला सशक्तिकरण के पक्ष में है और कौन इसके खिलाफ खड़ा है।

    प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम देश की आधी आबादी से जुड़ा हुआ महत्वपूर्ण विषय है लेकिन विपक्ष ने इसे गंभीरता से लेने के बजाय राजनीतिक अवसर के रूप में देखा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और उसके नेताओं ने इस मुद्दे पर जिस तरह का रुख अपनाया वह महिलाओं के प्रति उनकी सोच को दर्शाता है।

    उन्होंने कहा कि महिलाओं के सम्मान से जुड़े ऐसे विषय पर जश्न मनाना दुर्भाग्यपूर्ण है और इससे समाज में गलत संदेश जाता है। पार्टी इस मुद्दे को लेकर पूरी तरह गंभीर है और हर स्तर पर इसका विरोध दर्ज कराएगी।

    नेताओं ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रदेशभर में आक्रोश रैलियां आयोजित की जाएंगी और व्यापक स्तर पर लोगों को इस मुद्दे से जोड़ा जाएगा। पंचायत स्तर तक आंदोलन को ले जाने की योजना बनाई गई है ताकि हर वर्ग तक यह संदेश पहुंचे कि महिलाओं के अधिकारों और सम्मान के लिए सरकार और संगठन पूरी मजबूती से खड़े हैं।

    कुल मिलाकर नारी शक्ति वंदन का मुद्दा अब मध्यप्रदेश की राजनीति में एक बड़ा जनआंदोलन बनने की ओर बढ़ रहा है जिसमें सियासी बयानबाजी के साथ साथ जमीनी स्तर पर भी सक्रियता देखने को मिलेगी।

  • राष्ट्रीय गीत के अपमान पर सियासी संग्राम तेज सीएम मोहन यादव ने कांग्रेस से मांगा जवाब

    राष्ट्रीय गीत के अपमान पर सियासी संग्राम तेज सीएम मोहन यादव ने कांग्रेस से मांगा जवाब


    इंदौर । इंदौर नगर निगम में वंदे मातरम को लेकर शुरू हुआ विवाद अब प्रदेश की सियासत में बड़ा मुद्दा बन गया है इस मामले में डॉ. मोहन यादव ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए राष्ट्रीय गीत के सम्मान को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं उन्होंने साफ तौर पर कहा कि इस तरह की घटनाएं केवल एक व्यक्ति की सोच नहीं बल्कि पार्टी के चरित्र को उजागर करती हैं

    घटना उस समय की है जब इंदौर नगर निगम के बजट सम्मेलन के दौरान कांग्रेस की पार्षद रुबीना इकबाल खान और फौजिया शेख अलीम ने धर्म का हवाला देते हुए वंदे मातरम गाने से इनकार कर दिया उनके इस रुख का सदन में मौजूद अन्य सदस्यों ने विरोध किया लेकिन कांग्रेस की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है इसी चुप्पी को लेकर मुख्यमंत्री ने कांग्रेस को घेरा और कहा कि इस मुद्दे पर पूरी प्रदेश कांग्रेस को अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए

    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कड़े शब्दों में प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बड़े दुर्भाग्य की बात है कि जनप्रतिनिधि होने के बावजूद पार्षद ने राष्ट्रीय गीत गाने से मना किया और यह कहते हुए पीछे हट गई कि वह इसे नहीं गाएंगी उन्होंने इसे बेशर्मी की पराकाष्ठा बताते हुए कहा कि यह कांग्रेस की विचारधारा और मानसिकता को दर्शाता है उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस के कई नेता भारत माता की जय बोलने से भी बचते हैं जो देशभक्ति की भावना के विपरीत है

    मुख्यमंत्री ने सीधे तौर पर राहुल गांधी और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी से जवाब मांगा उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या वह ऐसे बयानों और आचरण का समर्थन करता है या नहीं यदि पार्टी इस मामले में कार्रवाई करने में असमर्थ है तो उसे नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे देना चाहिए

    उन्होंने आगे कहा कि देशभक्ति और राष्ट्रीय सम्मान के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता हजारों स्वतंत्रता सेनानियों ने भारत माता की जय के उद्घोष के साथ अपने प्राण न्योछावर किए ऐसे में इस प्रकार की घटनाएं न केवल उन बलिदानों का अपमान हैं बल्कि समाज में गलत संदेश भी देती हैं मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर दोहरे चरित्र का आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी समय समय पर धार्मिक और सांस्कृतिक प्रतीकों पर विवाद खड़ा करती रही है

    इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर वंदे मातरम जैसे राष्ट्रीय प्रतीक को लेकर बहस छेड़ दी है जहां एक ओर इसे देशभक्ति और एकता का प्रतीक माना जाता है वहीं दूसरी ओर कुछ वर्गों द्वारा इसे लेकर अलग विचार भी सामने आते रहे हैं फिलहाल यह मुद्दा राजनीतिक बयानबाजी के केंद्र में है और आने वाले दिनों में इस पर और तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं

  • कृषि महोत्सव के लिए रायसेन रवाना हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भोपाल में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने किया आत्मीय स्वागत

    कृषि महोत्सव के लिए रायसेन रवाना हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भोपाल में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने किया आत्मीय स्वागत


    भोपाल । भोपाल के स्टेट हैंगर पर शनिवार का दिन खास गरिमा और राजनीतिक ऊर्जा से भरपूर नजर आया जब डॉ. मोहन यादव ने देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की आत्मीय अगवानी कर प्रदेश की मेहमाननवाजी की परंपरा को सजीव कर दिया यह अवसर केवल औपचारिक स्वागत तक सीमित नहीं रहा बल्कि इसमें प्रदेश और केंद्र के बीच समन्वय और विकास की झलक भी स्पष्ट रूप से दिखाई दी

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भोपाल ट्रांजिट विजिट पर पहुंचे थे जहां से उन्हें रायसेन में आयोजित कृषि महोत्सव प्रदर्शनी एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम के शुभारंभ के लिए रवाना होना था स्टेट हैंगर पर मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने पुष्प गुच्छ भेंट कर और शॉल ओढ़ाकर उनका आत्मीय स्वागत किया साथ ही उन्हें स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित भी किया इस दौरान वातावरण में आत्मीयता और गरिमा का संतुलित संगम देखने को मिला

    अल्प विश्राम के पश्चात रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मुख्यमंत्री मोहन यादव तथा केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान भारतीय सेना के हेलीकॉप्टर से रायसेन के लिए रवाना हुए जहां कृषि महोत्सव के माध्यम से किसानों को नई तकनीक और नवाचार से जोड़ने की पहल की जा रही है यह यात्रा केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि कृषि क्षेत्र में नवाचार और विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है

    इस अवसर पर प्रदेश के कई वरिष्ठ जनप्रतिनिधि और अधिकारी भी मौजूद रहे जिनमें पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास कैलाश सारंग राज्य मंत्री कृष्णा गौर भोपाल सांसद आलोक शर्मा विधायक विष्णु खत्री महापौर मालती राय और जिलाध्यक्ष रविन्द्र यति शामिल रहे सभी ने रक्षा मंत्री का पुष्प भेंट कर स्वागत किया जिससे आयोजन की भव्यता और भी बढ़ गई

    भोपाल का यह दृश्य केवल एक स्वागत समारोह नहीं बल्कि राजनीतिक समन्वय और विकासात्मक दृष्टिकोण का प्रतीक बन गया जहां केंद्र और राज्य सरकार के बीच तालमेल की मजबूत तस्वीर उभर कर सामने आई रायसेन में होने वाला कृषि महोत्सव इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य है जो किसानों को सशक्त बनाने और आधुनिक कृषि पद्धतियों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा