Tag: Monsoon 2026

  • मानसून पर मंडराया संकट मजबूत हो रहा ,अल नीनो भारत में बारिश और खेती पर पड़ सकता है असर

    मानसून पर मंडराया संकट मजबूत हो रहा ,अल नीनो भारत में बारिश और खेती पर पड़ सकता है असर


    नई दिल्ली ।देश के कई हिस्सों में मानसून की दस्तक के बावजूद अपेक्षित बारिश नहीं होने से चिंता बढ़ रही है। इसी बीच प्रशांत महासागर से सामने आए नए वैज्ञानिक संकेतों ने मौसम विशेषज्ञों और किसानों की बेचैनी और बढ़ा दी है। अंतरिक्ष अनुसंधान से जुड़े ताजा आंकड़ों के अनुसार प्रशांत महासागर में एक शक्तिशाली अल नीनो प्रणाली विकसित होने की प्रक्रिया तेज हो रही है। यदि यह और मजबूत होती है तो इसका असर दुनिया भर के मौसम पैटर्न के साथ भारत के मानसून पर भी पड़ सकता है।

    वैज्ञानिकों के अनुसार भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के कई हिस्सों में समुद्र की सतह सामान्य से अधिक ऊंची दर्ज की गई है। यह स्थिति इस बात का संकेत मानी जाती है कि समुद्र के भीतर बड़ी मात्रा में गर्म पानी जमा हो रहा है। जब समुद्र का पानी सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है तो वह फैलता है और समुद्र की सतह का स्तर बढ़ जाता है। यही प्रक्रिया आगे चलकर अल नीनो की स्थिति को जन्म देती है।

    अल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु घटना है जो प्रशांत महासागर के तापमान में असामान्य वृद्धि के कारण उत्पन्न होती है। इसके प्रभाव केवल समुद्री क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहते बल्कि यह दुनिया के कई देशों में मौसम के स्वरूप को बदल सकती है। कई क्षेत्रों में अत्यधिक गर्मी पड़ सकती है तो कुछ स्थानों पर सामान्य से कम या अधिक वर्षा देखने को मिल सकती है।

    मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि वर्तमान परिस्थितियां वर्ष 1997 में बने अत्यंत शक्तिशाली अल नीनो से कुछ हद तक मेल खाती हैं। उस समय विकसित हुई प्रणाली को गॉडजिला अल नीनो कहा गया था क्योंकि उसके प्रभाव व्यापक और बेहद गंभीर थे। वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि मौजूदा परिस्थितियां इसी तरह बनी रहीं तो आने वाले महीनों में इसका असर और अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई दे सकता है।

    विशेषज्ञों ने समुद्र में बनने वाली गर्म पानी की विशाल लहरों पर भी ध्यान दिलाया है। इन्हें केल्विन वेव कहा जाता है जो हजारों किलोमीटर तक फैल सकती हैं और समुद्री तापमान में तेजी से बदलाव लाती हैं। ऐसी गतिविधियां आमतौर पर अल नीनो के मजबूत होने का संकेत मानी जाती हैं।

    भारत के लिए यह स्थिति विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि देश की कृषि व्यवस्था काफी हद तक मानसूनी बारिश पर निर्भर करती है। यदि अल नीनो के कारण मानसून कमजोर पड़ता है या वर्षा का वितरण असंतुलित होता है तो खेती और जल संसाधनों पर असर पड़ सकता है। इससे खाद्यान्न उत्पादन, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और महंगाई जैसी चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं।

    हालांकि मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि केवल प्रारंभिक संकेतों के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। आने वाले हफ्तों में समुद्री तापमान और मौसमीय गतिविधियों की लगातार निगरानी की जाएगी। इसके बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि अल नीनो कितना मजबूत होगा और उसका वास्तविक प्रभाव किन क्षेत्रों पर पड़ेगा।

    फिलहाल वैज्ञानिक समुदाय की नजर प्रशांत महासागर की बदलती परिस्थितियों पर टिकी हुई है, क्योंकि इनके परिणाम आने वाले महीनों में वैश्विक मौसम और भारत के मानसून की दिशा तय कर सकते हैं।

  • MP Weather Update: 37 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट, 6 दिन लेट मानसून 25 जून तक देगा दस्तक

    MP Weather Update: 37 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट, 6 दिन लेट मानसून 25 जून तक देगा दस्तक


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश में मानसून की देरी अब चिंता का कारण बनती जा रही है। सामान्य तौर पर 15 जून तक प्रदेश में दस्तक देने वाला मानसून इस बार 6 दिन पीछे चल रहा है और मौसम विभाग ने इसके 25 जून तक पहुंचने की संभावना जताई है। मानसून के इंतजार के बीच प्रदेश में प्री-मानसून गतिविधियां जारी हैं, जिसके चलते कई जिलों में आंधी और बारिश का दौर बना हुआ है। रविवार को इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, शिवपुरी, रीवा, शहडोल, सतना, मुरैना, धार, झाबुआ और अलीराजपुर समेत 37 जिलों में आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

    शनिवार को भी प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम ने करवट ली। उज्जैन में 2.4 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई, जबकि भोपाल में 1.3 इंच पानी बरसा। इंदौर, ग्वालियर, श्योपुर, सीहोर और धार के पीथमपुर सहित कई इलाकों में तेज बारिश हुई। बारिश और बादलों की वजह से तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई। धार में अधिकतम तापमान 32.8 डिग्री सेल्सियस रहा, जबकि भोपाल में 33.4 और इंदौर में 35.2 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया।

    मौसम विभाग के अनुसार मानसून फिलहाल तेलंगाना क्षेत्र में धीमी गति से आगे बढ़ रहा है। यदि इसकी रफ्तार बनी रही तो 23 जून तक छत्तीसगढ़ पहुंच सकता है और इसके बाद 25 जून के आसपास मध्य प्रदेश में प्रवेश करेगा। पिछले वर्ष मानसून 16 जून को ही प्रदेश में पहुंच गया था, लेकिन इस बार इसकी गति काफी धीमी है।

    मानसून की देरी का असर जून महीने की बारिश पर भी दिखाई दे रहा है। प्रदेश में अब तक सामान्य से 46 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। सबसे ज्यादा असर पूर्वी मध्य प्रदेश पर पड़ा है, जहां जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग के 24 जिलों में सामान्य से करीब 65 प्रतिशत कम बारिश हुई है। वहीं भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, चंबल और नर्मदापुरम संभाग में भी वर्षा का आंकड़ा सामान्य से लगभग 30 प्रतिशत कम है।

    कम बारिश के कारण किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है। खरीफ सीजन की प्रमुख फसलें जैसे सोयाबीन, उड़द, मूंग और तुअर की बुवाई प्रभावित हो रही है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि बुवाई के लिए कम से कम चार इंच बारिश आवश्यक है ताकि मिट्टी में पर्याप्त नमी बन सके। कई किसानों ने मानसून आने की उम्मीद में पहले ही सोयाबीन की बुवाई कर दी थी, लेकिन पर्याप्त बारिश नहीं होने से बीज खराब होने का खतरा बढ़ गया है। ऐसी स्थिति में किसानों को दोबारा बुवाई करनी पड़ सकती है, जिससे उनकी लागत बढ़ेगी।

    फिलहाल प्रदेशभर के किसानों और आम लोगों की नजरें आसमान पर टिकी हुई हैं। मौसम विभाग को उम्मीद है कि अगले चार दिनों में मानसून सक्रिय होकर मध्य प्रदेश में प्रवेश करेगा, जिससे गर्मी और बारिश की अनिश्चितता के बीच राहत मिलने की संभावना बनेगी।

  • मानसून की दस्तक में देरी से बढ़ी किसानों की चिंता, एमपी के 13 जिलों में आधा इंच भी बारिश नहीं

    मानसून की दस्तक में देरी से बढ़ी किसानों की चिंता, एमपी के 13 जिलों में आधा इंच भी बारिश नहीं


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश में मानसून की दस्तक का इंतजार लगातार लंबा होता जा रहा है। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में मानसून अब 22 से 24 जून के बीच प्रवेश कर सकता है। मानसून की इस देरी का सबसे बड़ा असर किसानों पर पड़ रहा है, क्योंकि खरीफ सीजन की प्रमुख फसलों की बोवनी प्रभावित होने लगी है। प्रदेश के कई हिस्सों में प्री-मानसून गतिविधियां तो देखने को मिली हैं, लेकिन बारिश की मात्रा खेती के लिए पर्याप्त नहीं मानी जा रही है।

    मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार 1 जून से 17 जून के बीच मध्य प्रदेश में औसतन 41.6 मिमी यानी करीब 1.6 इंच बारिश होनी चाहिए थी, लेकिन इस बार केवल लगभग 1 इंच बारिश ही दर्ज की गई है। इस तरह प्रदेश में सामान्य से करीब 37 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। स्थिति यह है कि प्रदेश के 13 जिलों में आधा इंच यानी 12.5 मिमी से भी कम बारिश रिकॉर्ड की गई है। इनमें बालाघाट, दमोह, कटनी, मैहर, रीवा, शहडोल, टीकमगढ़, बड़वानी, भिंड, दतिया, धार और खरगोन शामिल हैं। वहीं आलीराजपुर ऐसा जिला है जहां अब तक बारिश का आंकड़ा शून्य है।

    कम बारिश और मानसून की देरी के कारण किसानों की चिंता बढ़ गई है। सोयाबीन, उड़द, मूंग और तुअर जैसी खरीफ फसलों की बुवाई समय पर नहीं हो पा रही है। शाजापुर कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एसएस धाकड़ का कहना है कि सफल बोवनी के लिए कम से कम 4 इंच बारिश आवश्यक है। इतनी बारिश होने पर मिट्टी में पर्याप्त नमी बनती है, जिससे बीजों का अंकुरण बेहतर होता है। उन्होंने किसानों को सलाह दी है कि जल्दबाजी में बोवनी करने से बचें।

    दरअसल, मानसून के समय पर आने की उम्मीद में कई किसानों ने पहले ही सोयाबीन की बोवनी कर दी थी। अब बारिश नहीं होने से उनके बीज खराब होने का खतरा बढ़ गया है। यदि पर्याप्त नमी नहीं मिली तो किसानों को दोबारा बोवनी करनी पड़ सकती है, जिससे लागत और मेहनत दोनों बढ़ेंगी। हालांकि जिन किसानों के पास सिंचाई की व्यवस्था है, उन्हें कुछ राहत मिल सकती है।

    बुधवार को प्रदेश के कई हिस्सों में आंधी और बारिश का दौर देखने को मिला। भोपाल और राजगढ़ में आधा इंच से अधिक बारिश दर्ज की गई, जबकि बैतूल, गुना, इंदौर और छिंदवाड़ा में भी अच्छी बारिश हुई। बारिश के कारण तापमान में गिरावट आई और मौसम सुहावना हुआ। बैतूल में तापमान एक दिन में करीब 10 डिग्री तक नीचे आ गया।

    मौसम विभाग ने गुरुवार को रतलाम, छिंदवाड़ा और बालाघाट में हीटवेव का अलर्ट जारी किया है। वहीं प्रदेश के 28 जिलों में आंधी और बारिश की संभावना जताई गई है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि अगले कुछ दिनों तक प्रदेश में गर्मी और बारिश दोनों का मिला-जुला असर देखने को मिलेगा। किसानों और आम लोगों की निगाहें अब मानसून की वास्तविक एंट्री पर टिकी हुई हैं, क्योंकि यही खरीफ सीजन और जल संसाधनों की स्थिति तय करेगा।

  • अल नीनो और बदलते मौसम के बीच किसानों के लिए अलर्ट: तैयारी ही बनेगी सबसे बड़ी ताकत

    अल नीनो और बदलते मौसम के बीच किसानों के लिए अलर्ट: तैयारी ही बनेगी सबसे बड़ी ताकत


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश के किसानों के लिए खरीफ सीजन हमेशा उम्मीदों और चुनौतियों का संगम लेकर आता है। खेती की सफलता काफी हद तक मानसून पर निर्भर रहती है और यही वजह है कि भारतीय कृषि को अक्सर मानसून का जुआ कहा जाता है। इस वर्ष भी मौसम का मिजाज सामान्य नहीं दिख रहा है। प्रशांत महासागर में सक्रिय अल नीनो की स्थिति और जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव ने किसानों की चिंताओं को बढ़ा दिया है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार प्रदेश में मानसून 20 जून के बाद दक्षिण-पूर्वी हिस्सों से प्रवेश कर सकता है, लेकिन बारिश का वितरण सामान्य रहेगा या नहीं, इस पर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है।

    ऐसे हालात में किसानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण सलाह यही है कि वे जल्दबाजी में बुवाई न करें। मानसून की पहली बारिश होते ही खेतों में बीज डाल देना कई बार भारी नुकसान का कारण बन जाता है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि खेत में कम से कम तीन से चार इंच अच्छी वर्षा होने और मिट्टी के भीतर पर्याप्त नमी पहुंचने के बाद ही बोनी की जानी चाहिए। यदि मिट्टी में पर्याप्त नमी नहीं होगी तो बीज अंकुरित नहीं होंगे या सड़ सकते हैं, जिससे दोबारा बुवाई की नौबत आ सकती है।

    किसानों को अपनी मिट्टी की प्रकृति को समझना भी बेहद जरूरी है। मध्य प्रदेश के अधिकांश क्षेत्रों में काली मिट्टी पाई जाती है, जो नमी को लंबे समय तक रोककर रख सकती है। अच्छी बारिश के बाद यह मिट्टी 15 से 20 दिनों तक फसल को नमी प्रदान कर सकती है। वहीं दोमट मिट्टी में यह क्षमता 7 से 10 दिनों तक सीमित रहती है, जबकि रेतीली मिट्टी केवल 3 से 5 दिन तक ही नमी बनाए रख पाती है। इसलिए बोनी और सिंचाई की रणनीति मिट्टी की प्रकृति को ध्यान में रखकर ही बनाई जानी चाहिए।

    अल नीनो के प्रभाव वाले इस सीजन में फसल विविधीकरण भी किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच साबित हो सकता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि पूरे खेत में एक ही किस्म की फसल लगाने के बजाय अलग-अलग अवधि में पकने वाली किस्मों का चयन किया जाए। यदि किसी एक किस्म को मौसम की मार झेलनी पड़े तो दूसरी किस्म उत्पादन देकर नुकसान की भरपाई कर सकती है। सोयाबीन, मक्का और दलहनी फसलों में यह रणनीति विशेष रूप से उपयोगी मानी जाती है।

    इसके साथ ही प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ लेना भी जरूरी है। मौसम की अनिश्चितता को देखते हुए बीमा किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करता है। यदि सूखा, कम वर्षा या अन्य प्राकृतिक आपदा के कारण फसल प्रभावित होती है तो बीमा योजना राहत का आधार बन सकती है।

    जल संरक्षण भी इस सीजन की सबसे बड़ी जरूरत है। खेतों में मजबूत मेड़बंदी, रिज-फरो पद्धति और मल्चिंग जैसी तकनीकों का उपयोग कर वर्षा जल को खेत में रोका जा सकता है। इससे न केवल मिट्टी में नमी बनी रहती है बल्कि फसल को लंबे समय तक पानी उपलब्ध होता है। सब्जी उत्पादक किसानों के लिए प्लास्टिक मल्च या सूखी घास का उपयोग भी लाभकारी साबित हो सकता है।

    विशेषज्ञों का कहना है कि मौसम विभाग के पूर्वानुमान, कृषि मौसम सलाह और डिजिटल एप्स की जानकारी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। आज के दौर में खेती केवल अनुभव नहीं बल्कि वैज्ञानिक जानकारी और तकनीक पर भी निर्भर है। बदलते मौसम और अल नीनो की चुनौती के बीच वही किसान सफल होगा जो समय रहते तैयारी करेगा और परिस्थितियों के अनुसार अपनी रणनीति बदलेगा। इस खरीफ सीजन में सावधानी, वैज्ञानिक सोच और सही प्रबंधन ही बेहतर उत्पादन की कुंजी साबित होंगे।

  • एक इंच बारिश के बाद फिर बढ़ी उमस, इंदौर में रात का तापमान 6 डिग्री उछला; आज फिर बारिश की संभावना

    एक इंच बारिश के बाद फिर बढ़ी उमस, इंदौर में रात का तापमान 6 डिग्री उछला; आज फिर बारिश की संभावना


    मध्यप्रदेश । इंदौर में रविवार अलसुबह हुई करीब एक इंच बारिश ने लोगों को कुछ समय के लिए गर्मी से राहत जरूर दी, लेकिन यह राहत ज्यादा देर तक नहीं टिक सकी। बारिश के बाद दिन चढ़ते ही तेज धूप और बढ़ी हुई नमी ने मौसम को फिर से असहज बना दिया। पूरे दिन उमस भरी गर्मी के कारण लोग परेशान रहे, वहीं रात के तापमान में अचानक हुई बढ़ोतरी ने भी लोगों की मुश्किलें बढ़ा दीं।

    मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार रविवार को शहर का अधिकतम तापमान 36.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से लगभग एक डिग्री कम रहा। हालांकि तापमान में गिरावट के बावजूद वातावरण में मौजूद नमी के कारण उमस काफी अधिक महसूस हुई। वहीं न्यूनतम तापमान में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह 25.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। पिछले दिन की तुलना में रात के तापमान में करीब 6 डिग्री का उछाल देखा गया।

    सोमवार सुबह शहर का मौसम बदला-बदला नजर आया। आसमान में हल्के बादल छाए रहे और बीच-बीच में धूप भी निकलती रही। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि दिन के दौरान इंदौर और आसपास के इलाकों में फिर से बारिश या हल्की बौछारें देखने को मिल सकती हैं। स्थानीय स्तर पर बन रहे बादल और वातावरण में मौजूद नमी के कारण प्री-मानसून गतिविधियां जारी रहने की संभावना है।

    इस सीजन में अब तक इंदौर में लगभग 2 इंच बारिश दर्ज की जा चुकी है, जबकि केवल जून महीने में औसतन करीब 5 इंच बारिश होती है। ऐसे में अभी भी सामान्य आंकड़े तक पहुंचने के लिए अच्छी बारिश की जरूरत बनी हुई है। शहर के जलस्रोतों और भूजल स्तर को देखते हुए पर्याप्त वर्षा बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

    मानसून की सुस्त चाल फिलहाल मौसम विशेषज्ञों और प्रशासन दोनों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। जून के शुरुआती दिनों में अपेक्षित वर्षा नहीं होने के कारण शहर के तालाबों और जलाशयों का जलस्तर लगातार घट रहा है। बढ़ती आबादी और पानी की बढ़ती मांग को देखते हुए इंदौर को हर साल अच्छी बारिश की आवश्यकता रहती है। विशेषज्ञों का मानना है कि शहर को दीर्घकालिक जल संकट से बचाने के लिए सामान्य से बेहतर वर्षा जरूरी है।

    मौसम विभाग के अनुसार इंदौर में मानसून की औपचारिक एंट्री 18 जून के बाद होने की संभावना है। फिलहाल अरब सागर और आसपास के क्षेत्रों में मजबूत मौसमी सिस्टम सक्रिय नहीं होने के कारण मानसून की गति धीमी बनी हुई है। हालांकि मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों में अनुकूल परिस्थितियां बनती हैं तो मानसून तेजी पकड़ सकता है और जून के अंत तक बारिश का आंकड़ा सामान्य स्तर के करीब पहुंच सकता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि अच्छी वर्षा केवल तालाबों को भरने के लिए ही नहीं, बल्कि भूजल स्तर को बनाए रखने के लिए भी आवश्यक है। पर्याप्त बारिश होने पर बोरवेल, ट्यूबवेल और अन्य जलस्रोतों को भी राहत मिलेगी। ऐसे में शहरवासियों की निगाहें अब मानसून की जोरदार दस्तक पर टिकी हुई हैं।

  • एमपी में मानसून से पहले मौसम का यू-टर्न, भोपाल-जबलपुर समेत 28 जिलों में बारिश; सीहोर में 61 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से चली आंधी

    एमपी में मानसून से पहले मौसम का यू-टर्न, भोपाल-जबलपुर समेत 28 जिलों में बारिश; सीहोर में 61 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से चली आंधी


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश में मानसून पूर्व गतिविधियां तेज हो गई हैं और प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में आंधी-बारिश का दौर जारी है। सोमवार को राजधानी भोपाल, जबलपुर, ग्वालियर सहित 28 जिलों में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश दर्ज की गई। मौसम के इस बदले मिजाज ने लोगों को भीषण गर्मी से राहत दी है, वहीं कई इलाकों में तेज हवाओं के कारण जनजीवन प्रभावित भी हुआ।

    मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश के कई जिलों में बादल छाए रहे और बारिश के साथ तेज हवाएं चलीं। सीहोर में दोपहर बाद अचानक मौसम बदला और तेज आंधी के साथ बारिश हुई। यहां हवा की अधिकतम रफ्तार 61 किलोमीटर प्रतिघंटा रिकॉर्ड की गई, जो प्रदेश में सबसे अधिक रही। मौसम विभाग ने भोपाल और ग्वालियर संभाग के जिलों में अगले दो दिनों तक बारिश की संभावना जताई है। वहीं आगर-मालवा और राजगढ़ जिलों के लिए तेज आंधी का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।

    बीते 24 घंटों के दौरान भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, अशोकनगर, मुरैना, श्योपुर, नीमच, मंदसौर, खरगोन, देवास, हरदा, छिंदवाड़ा, सिवनी, बालाघाट, डिंडौरी, जबलपुर, सागर, दमोह, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर और आगर-मालवा सहित कुल 28 जिलों में बारिश दर्ज की गई। कई स्थानों पर बादलों की गरज और तेज हवाओं के साथ मौसम ने अचानक करवट ली।

    तेज हवाओं की बात करें तो सीहोर के अलावा सागर और गुना में 59 किमी प्रतिघंटा, भोपाल में 57 किमी प्रतिघंटा, जबलपुर में 50 किमी प्रतिघंटा तथा नर्मदापुरम में 48 किमी प्रतिघंटा की रफ्तार से हवाएं चलीं। इंदौर और अशोकनगर में 44 किमी, ग्वालियर में 43 किमी, राजगढ़ में 39 किमी तथा आगर-मालवा, रीवा, खंडवा और बड़वानी में 37 किमी प्रतिघंटा की गति से तेज आंधी दर्ज की गई।

    रविवार को भी प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम खराब रहा। भोपाल में दिनभर रुक-रुक कर बारिश होती रही, जबकि सीहोर, इंदौर, रायसेन और खरगोन में भी अच्छी बारिश दर्ज की गई। रायसेन में तेज हवाओं के कारण कुछ मकानों के छप्पर उड़ गए, जबकि कई जिलों में बिजली आपूर्ति भी प्रभावित हुई। खरगोन और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को निंदाई और बुआई के कार्यों में परेशानी का सामना करना पड़ा।

    बारिश और बादलों के कारण तापमान में भी उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। प्रदेश के पांच प्रमुख शहरों में अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से नीचे रहा। भोपाल में अधिकतम तापमान 35.4 डिग्री, इंदौर में 36.3 डिग्री, ग्वालियर में 39.2 डिग्री, उज्जैन में 36.5 डिग्री और जबलपुर में 38.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

    प्रदेश में केवल खजुराहो, दतिया, नौगांव और मंडला ऐसे स्थान रहे जहां तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक रहा। वहीं शिवपुरी सबसे ठंडा शहर रहा, जहां अधिकतम तापमान 33.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। पचमढ़ी में 35 डिग्री, सिवनी में 36 डिग्री, राजगढ़ में 36.4 डिग्री तथा नर्मदापुरम और श्योपुर में 36.6 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया।

    मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी के कारण प्रदेश में अगले कुछ दिनों तक आंधी-बारिश का दौर जारी रह सकता है। इससे तापमान में और गिरावट आने की संभावना है तथा मानसून की प्रगति को भी बल मिल सकता है।

  • पहली बारिश में डूबा भोपाल! सड़कों पर तालाब, फ्लाइओवर पर जाम और खुले नालों ने बढ़ाया खतरा

    पहली बारिश में डूबा भोपाल! सड़कों पर तालाब, फ्लाइओवर पर जाम और खुले नालों ने बढ़ाया खतरा


    मध्यप्रदेश । मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में मानसून के आगमन से पहले हुई बारिश ने शहर की व्यवस्थाओं की हकीकत उजागर कर दी है। नगर निगम और प्रशासन की ओर से नाले-नालियों की सफाई, ड्रेनेज व्यवस्था को दुरुस्त करने और जलभराव वाले क्षेत्रों में विशेष इंतजाम के दावे किए गए थे, लेकिन पहली ही तेज बारिश में ये दावे धरातल पर कमजोर नजर आए। शहर के कई हिस्सों में सड़कें तालाब में तब्दील हो गईं, जबकि जलभराव के कारण यातायात व्यवस्था चरमरा गई।

    बारिश का सबसे ज्यादा असर शहर के व्यस्त मार्गों और प्रमुख चौराहों पर देखने को मिला। बोर्ड ऑफिस से ज्योति टॉकीज तक का मार्ग महज कुछ मिनटों की बारिश में पानी से भर गया। सड़क पर इतना पानी जमा हो गया कि वाहन चालकों को रास्ता पहचानने में भी परेशानी हुई। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल बारिश के दौरान इस इलाके में यही स्थिति बनती है, लेकिन स्थायी समाधान आज तक नहीं निकल पाया है।

    रानी कमलापति रेलवे स्टेशन से एम्स की ओर जाने वाले फ्लाइओवर पर भी भारी जलभराव देखने को मिला। सड़क पर पानी भरने के कारण लंबा ट्रैफिक जाम लग गया। इस दौरान एक एम्बुलेंस भी वाहनों की कतार में फंस गई, जिससे आपातकालीन सेवाओं पर भी असर पड़ा। कई स्थानों पर वाहन रेंगते हुए नजर आए और लोगों को अपने गंतव्य तक पहुंचने में काफी समय लगा।

    शहर के पॉश इलाकों में शामिल रानी कमलापति स्टेशन रोड, एमपी नगर, अरेरा कॉलोनी और सात नंबर क्षेत्र भी जलभराव से अछूते नहीं रहे। इन क्षेत्रों में सड़कों पर घंटों पानी जमा रहा। कई जगहों पर जल निकासी की व्यवस्था नाकाफी साबित हुई, जिसके कारण लोगों को आवागमन में दिक्कतों का सामना करना पड़ा।

    भोपाल में अधूरी सड़क परियोजनाएं भी बारिश के दौरान बड़ी समस्या बनकर सामने आई हैं। कई इलाकों में सीवेज पाइपलाइन और अन्य निर्माण कार्यों के लिए महीनों पहले सड़कें खोदी गई थीं, लेकिन अब तक उनका पुनर्निर्माण नहीं किया गया। रचना नगर समेत कई कॉलोनियों में सड़कें गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं। बारिश के कारण ये गड्ढे पानी से भर गए, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा और बढ़ गया है।

    वहीं खुले नाले भी शहरवासियों के लिए गंभीर खतरा बने हुए हैं। बागसेवनियां से कटारा हिल्स मार्ग और दस नंबर मार्केट सहित कई क्षेत्रों में नालों को अब तक ढंका नहीं गया है। बारिश के दौरान नाले और सड़क के बीच का अंतर मिट जाता है, जिससे लोगों के गिरने की आशंका बनी रहती है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि कई बार बच्चे और राहगीर नालों में गिर चुके हैं। क्षेत्रवासियों के अनुसार पहले भी एक बच्चे की जान नाले में गिरने से जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ।

    नगर निगम ने मानसून से पहले विशेष सफाई अभियान चलाने और जलभराव की समस्या को नियंत्रित करने का दावा किया था। हालांकि पहली ही बारिश ने इन तैयारियों की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शहरवासियों का कहना है कि यदि मानसून की शुरुआत में ही यह स्थिति है, तो आगामी दिनों में भारी बारिश के दौरान हालात और गंभीर हो सकते हैं।

    अब लोगों की नजर प्रशासन और नगर निगम पर है कि वे मानसून के दौरान जलभराव, खुले नालों और अधूरी सड़कों जैसी समस्याओं का समाधान कितनी तेजी से कर पाते हैं। राजधानी के नागरिक उम्मीद कर रहे हैं कि इस बार बारिश उनके लिए राहत लेकर आए, परेशानी नहीं।

  • इंदौर में मानसून का इंतजार बढ़ा, गर्मी और उमस से बेहाल शहर; प्री-मानसून गतिविधियां भी कमजोर

    इंदौर में मानसून का इंतजार बढ़ा, गर्मी और उमस से बेहाल शहर; प्री-मानसून गतिविधियां भी कमजोर


    मध्‍य प्रदेश । मालवा की आर्थिक राजधानी इंदौर में जून का दूसरा सप्ताह समाप्ति की ओर है, लेकिन शहरवासियों को अब तक मानसून पूर्व राहत नहीं मिल सकी है। गर्मी और उमस का दोहरा असर लोगों को परेशान कर रहा है। पिछले कई दिनों से मौसम लगभग एक जैसा बना हुआ है। दिन का तापमान करीब 38 डिग्री सेल्सियस और रात का तापमान 26 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है। सुबह से तेज धूप और हवा में नमी के कारण लोगों को लगातार उमस का सामना करना पड़ रहा है।

    मौसम विभाग के अनुसार फिलहाल इंदौर और आसपास के क्षेत्रों में मौसम साफ रहने की संभावना है। हालांकि प्रदेश के अन्य हिस्सों में प्री-मानसून गतिविधियां सक्रिय हैं, लेकिन इंदौर क्षेत्र पर उनका अपेक्षित प्रभाव नहीं दिखाई दे रहा है। यही वजह है कि जून के दूसरे सप्ताह तक शहर में केवल लगभग एक इंच बारिश दर्ज की गई है, जो सामान्य स्थिति की तुलना में काफी कम मानी जा रही है।

    आमतौर पर जून माह में इंदौर के तापमान में उल्लेखनीय गिरावट देखने को मिलती है। पिछले छह वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2020 से 2025 के बीच जून महीने में अधिकतम तापमान 39.6 से 41.6 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा है। पिछले वर्ष अधिकतम तापमान 41.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा था, लेकिन साथ ही अच्छी बारिश ने मौसम को राहतभरा बनाए रखा था। सामान्य तौर पर जून महीने में इंदौर अपने वार्षिक वर्षा कोटे का लगभग 20 प्रतिशत प्राप्त कर लेता है। वर्ष 2025 में जून के दौरान करीब साढ़े पांच इंच बारिश दर्ज की गई थी।

    इंदौर के मौसम इतिहास पर नजर डालें तो जून महीने में कई रिकॉर्ड दर्ज हैं। वर्ष 1980 में शहर में जून के दौरान 17 इंच से अधिक बारिश हुई थी, जो अब भी एक बड़ा रिकॉर्ड माना जाता है। वहीं 23 जून 2003 को 24 घंटे में लगभग पांच इंच बारिश दर्ज की गई थी। तापमान के लिहाज से 3 जून 1991 को अधिकतम तापमान 45.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था, जबकि 12 जून 1958 को न्यूनतम तापमान 18.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था।

    मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून ने देश के कई हिस्सों में दोबारा गति पकड़ ली है। इसके चलते मध्य प्रदेश में मानसून के प्रवेश की संभावनाएं मजबूत हुई हैं। वर्तमान अनुमान के अनुसार 15 से 18 जून के बीच मानसून प्रदेश में दस्तक दे सकता है। हालांकि तब तक प्रदेश में प्री-मानसून गतिविधियां जारी रहेंगी।

    प्रदेश के कई जिलों में हाल के दिनों में तेज आंधी, बारिश और कहीं-कहीं ओलावृष्टि भी दर्ज की गई है। लेकिन इंदौर और उसके आसपास के इलाकों में इन गतिविधियों का प्रभाव बेहद सीमित रहा है। मौसम विभाग का मानना है कि मानसून के सक्रिय होते ही इंदौर में बारिश की स्थिति बेहतर होगी और लोगों को उमस और गर्मी से राहत मिलने की संभावना है।

    फिलहाल शहरवासी आसमान की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं और मानसून की पहली जोरदार बारिश का इंतजार कर रहे हैं, जो न केवल तापमान में गिरावट लाएगी बल्कि लंबे समय से बनी उमस से भी राहत दिलाएगी।

  • MP में मानसून की दस्तक से पहले मौसम का बदला मिजाज, 5 जिलों में तेज आंधी का अलर्ट; 15 से 18 जून के बीच प्रदेश में प्रवेश की संभावना

    MP में मानसून की दस्तक से पहले मौसम का बदला मिजाज, 5 जिलों में तेज आंधी का अलर्ट; 15 से 18 जून के बीच प्रदेश में प्रवेश की संभावना


    मध्‍य प्रदेश । मध्य प्रदेश में मानसून के आगमन की आहट के साथ मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है। दक्षिण-पश्चिम मानसून ने देश के कई हिस्सों में अपनी रफ्तार बढ़ा दी है और मौसम विभाग का अनुमान है कि 15 से 18 जून के बीच मानसून प्रदेश में प्रवेश कर सकता है। इससे पहले पूरे प्रदेश में प्री-मानसून गतिविधियां सक्रिय हैं, जिसके चलते कई जिलों में तेज आंधी, बारिश और कहीं-कहीं ओलावृष्टि भी देखने को मिल रही है।

    शुक्रवार को प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम ने अचानक करवट ली। श्योपुर, सागर, डिंडौरी, जबलपुर, नरसिंहपुर और सिवनी सहित कई जिलों में तेज हवाओं और बारिश का असर दिखाई दिया। सबसे ज्यादा नुकसान श्योपुर जिले में हुआ, जहां आंधी और बारिश से जुड़े अलग-अलग हादसों में चार लोगों की जान चली गई। जिले में करीब एक इंच बारिश दर्ज की गई, जबकि सागर में आधा इंच पानी बरसा।

    मौसम विभाग के अनुसार शनिवार को भिंड, दतिया, छतरपुर, पन्ना और सागर जिलों में 50 से 60 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से तेज आंधी चलने के साथ बारिश होने की संभावना है। इसके अलावा भोपाल, रायसेन, सीहोर, विदिशा, नर्मदापुरम, बैतूल, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, अशोकनगर, मुरैना, श्योपुर, जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर समेत 33 जिलों में गरज-चमक और बारिश का दौर जारी रहने की संभावना जताई गई है।

    दूसरी ओर इंदौर, उज्जैन, रतलाम, मंदसौर, नीमच, झाबुआ, अलीराजपुर, धार, खरगोन, बड़वानी, देवास, शाजापुर और आगर-मालवा सहित पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई जिलों में मौसम साफ रहने और तेज धूप खिलने के आसार हैं।

    श्योपुर जिले के रजपुरा गांव में तेज हवाओं के कारण एक कच्ची दीवार गिर गई, जिससे एक ही परिवार के चार सदस्य मलबे में दब गए। इस हादसे में भीमा आदिवासी, उनकी पत्नी सीमा और बहू राजवती की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक बच्चा गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे उपचार के लिए राजस्थान रेफर किया गया है। वहीं जिले में ही तेज आंधी के दौरान एक ऑटो पलटने से एक महिला की भी मौत हो गई।

    पिछले 24 घंटों के दौरान प्रदेश के 35 से अधिक जिलों में आंधी और बारिश दर्ज की गई। जबलपुर और सीहोर में हवा की रफ्तार सबसे अधिक 74 किलोमीटर प्रतिघंटा रिकॉर्ड की गई। भोपाल में 56, ग्वालियर में 57 और अशोकनगर में 59 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से हवाएं चलीं। कई स्थानों पर धूलभरी आंधी ने भी जनजीवन को प्रभावित किया।

    हालांकि, जून माह में अब तक प्रदेश में बारिश का आंकड़ा सामान्य से पीछे चल रहा है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार मध्य प्रदेश में अब तक औसत से 23 प्रतिशत कम वर्षा हुई है। पूर्वी मध्य प्रदेश के जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग में सामान्य से 55 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है, जबकि पश्चिमी हिस्से में औसतन 2 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई है।

    मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि अगले चार दिनों तक प्रदेश में प्री-मानसून गतिविधियां जारी रहेंगी। इसके बाद मानसून की औपचारिक एंट्री होने पर बारिश का दायरा और व्यापक हो सकता है। इससे तापमान में और गिरावट आने के साथ किसानों को भी राहत मिलने की उम्मीद है।

  • MP: भिंड-मुरैना समेत 6 जिलों में आज ओलावृष्टि का अलर्ट, 17-18 जून तक प्रदेश में दस्तक दे सकता है मानसून

    MP: भिंड-मुरैना समेत 6 जिलों में आज ओलावृष्टि का अलर्ट, 17-18 जून तक प्रदेश में दस्तक दे सकता है मानसून


    भोपाल। मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की एंट्री अब 3 से 4 दिन की देरी से होने के संकेत हैं। मौसम विभाग (IMD) के अनुसार मानसून 17 से 18 जून के बीच प्रदेश के दक्षिणी जिलों में पहुंच सकता है। अनुकूल परिस्थितियां बनी रहीं तो अगले 10 से 15 दिनों के भीतर यह पूरे प्रदेश को कवर कर लेगा।

    मानसून के आगमन से पहले प्रदेश में प्री-मानसून गतिविधियां लगातार सक्रिय बनी हुई हैं। मौसम वैज्ञानिक अरुण शर्मा के मुताबिक शुक्रवार को मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर जिलों में ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है।

    इसके अलावा भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, बुरहानपुर, खंडवा, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, अशोकनगर, श्योपुर, जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, पांढुर्णा, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, पन्ना और दमोह जिलों में तेज हवाओं के साथ बारिश होने का अनुमान है। आंधी की रफ्तार 40 से 60 किलोमीटर प्रतिघंटा तक पहुंच सकती है।

    इन जिलों में बरकरार रहेगा गर्मी का असर
    मौसम विभाग ने शुक्रवार के लिए इंदौर, उज्जैन, रतलाम, झाबुआ, अलीराजपुर, धार, बड़वानी और खरगोन जिलों में आंधी या बारिश का कोई अलर्ट जारी नहीं किया है। ऐसे में इन क्षेत्रों में गर्मी का असर जारी रहने की संभावना है।

    ग्वालियर में आधा इंच बारिश, कई जिलों में बदला मौसम
    गुरुवार को प्रदेश में आंधी और बारिश के बीच गर्मी का प्रभाव भी बना रहा। ग्वालियर में करीब आधा इंच बारिश दर्ज की गई। वहीं मंडला, सिवनी, दतिया समेत कई जिलों में शाम तक बारिश हुई। दूसरी ओर कई शहरों के तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की गई। प्रदेश के प्रमुख शहरों में ग्वालियर सबसे गर्म रहा, जहां अधिकतम तापमान 42 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। जबलपुर में 41.3 डिग्री, भोपाल और उज्जैन में 39.7 डिग्री तथा इंदौर में 38 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया।

    खजुराहो और नौगांव रहे सबसे गर्म
    प्रदेश में सबसे अधिक तापमान खजुराहो और नौगांव में 43 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके अलावा दमोह में 42.8 डिग्री, सतना में 42.7 डिग्री, रीवा में 42.5 डिग्री, दतिया में 42.2 डिग्री, टीकमगढ़ और मंडला में 42 डिग्री, उमरिया में 41.6 डिग्री, छिंदवाड़ा में 41.4 डिग्री, मलाजखंड में 41.1 डिग्री, रायसेन और राजगढ़ में 41 डिग्री, गुना में 40.7 डिग्री, खंडवा में 40.5 डिग्री, सागर में 40.4 डिग्री तथा श्योपुर में 40 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया।

    ब्रेक के बाद फिर सक्रिय हुआ मानसून
    मौसम विभाग के अनुसार एक दिन के विराम के बाद 11 जून को दक्षिण-पश्चिम मानसून ने कर्नाटक, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में फिर से प्रगति की है। यदि मौसमीय परिस्थितियां अनुकूल बनी रहीं तो मानसून तेजी से आगे बढ़ेगा और 17 या 18 जून तक मध्य प्रदेश में प्रवेश कर सकता है।

    इन मौसम प्रणालियों का दिख रहा असर
    मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार प्रदेश के पूर्वी हिस्से से एक टर्फ लाइन गुजर रही है। इसके साथ ही ऊपरी हवा में एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन और एक अन्य ट्रफ सक्रिय है। इन्हीं मौसम प्रणालियों के प्रभाव से प्रदेश में मौसम में बदलाव देखने को मिल रहा है।