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  • कमजोर मानसून के बीच सरकार का बड़ा फैसला, चीनी और गन्ने से बनने वाले एथेनॉल की खरीद पर लगाई रोक

    कमजोर मानसून के बीच सरकार का बड़ा फैसला, चीनी और गन्ने से बनने वाले एथेनॉल की खरीद पर लगाई रोक


    नई दिल्ली ।
    केंद्र सरकार ने चीनी की कीमतों को नियंत्रित रखने और गन्ने से बनने वाली चीनी की उपलब्धता बनाए रखने के उद्देश्य से एथेनॉल खरीद की नीति में बदलाव किया है। नए निर्देशों के तहत सरकारी ईंधन कंपनियां एक नवंबर 2026 से शुरू होने वाले नए आपूर्ति वर्ष में चीनी और गन्ने के रस से तैयार एथेनॉल की खरीद के लिए प्रस्ताव नहीं मांगेंगी। इस फैसले के पीछे कमजोर मानसून और गन्ने के उत्पादन पर पड़ने वाले प्रभाव को प्रमुख कारण माना गया है।

    सरकारी तेल कंपनियों ने नए आपूर्ति वर्ष के लिए लगभग 1,100 करोड़ लीटर एथेनॉल खरीदने का संयुक्त टेंडर जारी किया है। इसमें इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड, नुमालीगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड और मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकेमिकल्स लिमिटेड शामिल हैं। टेंडर में एथेनॉल की खरीद के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले कच्चे माल से संबंधित शर्तें भी निर्धारित की गई हैं।

    नए टेंडर के अनुसार, गन्ने के रस, चीनी, चीनी के सिरप और बी-हेवी शीरे से तैयार एथेनॉल की आपूर्ति के लिए प्रस्ताव आमंत्रित नहीं किए गए हैं। इसका मतलब है कि सरकारी तेल कंपनियां इस आपूर्ति वर्ष में इन स्रोतों से बनने वाले एथेनॉल की खरीद नहीं करेंगी। हालांकि, एथेनॉल की कुल खरीद के लिए अन्य निर्धारित कच्चे माल का इस्तेमाल जारी रहेगा।

    भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी उत्पादक देश है। इस वर्ष देश में चीनी उत्पादन पिछले साल की तुलना में कम रहने की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। अल नीनो के प्रभाव के बीच एक दशक से अधिक समय में कमजोर मानसून दर्ज किया गया, जिससे गन्ने की फसल प्रभावित हुई है। गन्ने की उपलब्धता में कमी का असर चीनी उत्पादन पर पड़ सकता है। ऐसे में सरकार चीनी की आपूर्ति और कीमतों को ध्यान में रखते हुए एथेनॉल खरीद के लिए उपलब्ध कच्चे माल के इस्तेमाल में बदलाव कर रही है।

    भारत अपनी आयातित तेल पर निर्भरता कम करने के लिए एथेनॉल का इस्तेमाल बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। एथेनॉल को पेट्रोल में मिलाकर इस्तेमाल किया जाता है, जिससे परिवहन क्षेत्र में पेट्रोलियम ईंधन की खपत को कम करने में मदद मिल सकती है। इसके उत्पादन के लिए गन्ने के साथ-साथ अनाज और अन्य अनुमत कच्चे माल का भी उपयोग किया जाता है। नए टेंडर में भी इन वैकल्पिक स्रोतों से तैयार एथेनॉल की आपूर्ति का प्रावधान रखा गया है।

    टेंडर में भाग लेने वाले आपूर्तिकर्ता सी-हेवी शीरे, खराब हो चुके खाद्यान्न, भारतीय खाद्य निगम से खरीदे गए अतिरिक्त चावल, मक्का और राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति के तहत अनुमत अन्य कच्चे माल से उत्पादित एथेनॉल की पेशकश कर सकते हैं। इस व्यवस्था के तहत एथेनॉल की खरीद के लिए वैकल्पिक कच्चे माल के विकल्प उपलब्ध रहेंगे। इससे चीनी आधारित स्रोतों पर निर्भरता कम करते हुए निर्धारित मात्रा में एथेनॉल की खरीद की जा सकेगी।

    एथेनॉल खरीद से जुड़े बदलावों के साथ सरकार ने चीनी मिलों को अक्टूबर 2026 में उत्पादित चीनी की बिक्री के लिए भी अतिरिक्त अनुमति दी है। इसके तहत मिलें अक्टूबर में उत्पादित चीनी को अक्टूबर और नवंबर 2026 के दौरान नियमित मासिक रिलीज कोटे के अतिरिक्त बेच सकती हैं। यह अनुमति निर्धारित शर्तों के अनुसार लागू होगी।

    उदाहरण के तौर पर, यदि कोई चीनी मिल अक्टूबर में 1,000 मीट्रिक टन चीनी का उत्पादन करती है, तो वह इस मात्रा को अक्टूबर और नवंबर के दौरान बेच सकेगी। यह बिक्री दोनों महीनों के नियमित मासिक रिलीज कोटे के अतिरिक्त होगी। सरकार के इन फैसलों का उद्देश्य कमजोर मानसून के कारण गन्ने की उपलब्धता पर पड़ रहे असर के बीच चीनी की आपूर्ति और एथेनॉल उत्पादन के लिए कच्चे माल के इस्तेमाल में संतुलन बनाए रखना है।

  • MP: बांधवगढ़ रिजर्व में मानसून में शुरू हुआ प्रयोग हुआ हिट… 100 दिनों में पहुंचे 3780 पर्यटक

    MP: बांधवगढ़ रिजर्व में मानसून में शुरू हुआ प्रयोग हुआ हिट… 100 दिनों में पहुंचे 3780 पर्यटक


    उमरिया।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के विश्व प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व (Bandhavgarh Tiger Reserve) में वन्यजीव पर्यटन (Wildlife tourism) को लेकर सैलानियों का उत्साह लगातार चरम पर है. कोर जोन के साथ-साथ अब बफर जोन पर्यटन (Bandhavgarh Buffer Zone Safari) भी भारी लोकप्रियता हासिल कर रहा है. मानसून के दौरान जब कोर जोन में सफारी पूरी तरह बंद रहती है, तब बफर क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियां शुरू की गई थीं. यह प्रयोग इतना सफल रहा कि चालू पर्यटन सत्र (2026-27) के शुरुआती 100 दिनों के भीतर परासी और पचपेड़ी बफर जोन में 3,780 पर्यटकों ने जंगल सफारी का आनंद लिया।

    आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 1 जुलाई से 8 अक्टूबर तक कुल 802 वाहनों के माध्यम से पर्यटकों ने बफर जोन का भ्रमण किया. इसमें 3,758 भारतीय और 22 विदेशी पर्यटक शामिल रहे।

    परासी बफर जोन: यहां 550 वाहनों से 2,588 पर्यटकों ने भ्रमण किया. पचपेड़ी बफर जोन: यहां 252 वाहनों के जरिए 1,192 पर्यटक जंगल सफारी के लिए पहुंचे। महीनेवार आंकड़ों पर नजर डालें तो जुलाई में 243 वाहनों से 1,109, अगस्त में 265 वाहनों से 1,247 और सितंबर में 168 वाहनों से 780 पर्यटक आए. वहीं 1 से 8 अक्टूबर के दौरान 126 वाहनों से 644 सैलानी बफर जोन पहुंचे. पूरी अवधि में अगस्त माह में सबसे अधिक सैलानियों का आगमन दर्ज किया गया.


    प्राकृतिक परिवेश में बाघों के दीदार और स्थानीय रोजगार

    बफर जोन में पर्यटकों को बाघ (टाइगर) सहित अन्य दुर्लभ वन्यप्राणियों के उनके प्राकृतिक परिवेश में नियमित दीदार हो रहे हैं. कोर जोन खुलने के बाद भी बफर जोन के प्रति पर्यटकों का आकर्षण कम नहीं हुआ है। बफर क्षेत्र में पर्यटन संचालन का सबसे बड़ा फायदा स्थानीय आदिवासी और आसपास के समुदायों को मिला है. जिप्सी संचालन, गाइड सेवा, होमस्टे और स्थानीय हस्तशिल्प के माध्यम से ग्रामीणों के लिए रोजगार और आजीविका के नए अवसर पैदा हुए हैं, जिससे वन्यजीव संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है।

  • मानसून की विदाई के बाद भी कई राज्यों में बारिश का दौर जारी… आज इन राज्यों में अलर्ट

    मानसून की विदाई के बाद भी कई राज्यों में बारिश का दौर जारी… आज इन राज्यों में अलर्ट


    नई दिल्ली।
    मानसून (Monsoon) की विदाई कई राज्यों में हो गई है. लेकिन बारिश का सिलसिला है कि अभी रुकने का नाम ही नहीं ले रहा है। देश के कई हिस्सों में मौसम का मिजाज (Weather Conditions) बिगड़ सकता है. बंगाल की खाड़ी (Bay of Bengal) के आसपास सक्रिय हुए मौसमी हलचल का असर पूर्वी और दक्षिणी राज्यों के साथ उत्तर भारत में भी देखने को मिलेगा। बंगाल की खाड़ी में एक नया वेदर सिस्टम एक्टिव हो गया है। इसलिए 2 अक्टूबर को देश के कई हिस्सों में मौसम अचानक करवट ले सकता है।

    मौसम विभाग (IMD) के अनुसार बंगाल की खाड़ी और उसके आसपास बनी मौसमी हलचल का असर पूर्वी और दक्षिणी राज्यों तक दिखाई देने की संभावना है. मौसम विभाग ने दिल्ली से लेकर उत्तर प्रदेश और बिहार तक बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया है. कुछ इलाकों में तेज हवाओं के झोंके 60 से 65 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं. पहाड़ी राज्यों में भी बारिश का दौर परेशान कर सकता है. उत्तराखंड में तेज हवा के साथ भारी बारिश की चेतावनी है. हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में भी कई इलाकों में मौसम बिगड़ने का अनुमान है।

    मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत में भी मौसमी गतिविधियां बनी रहेंगी. अरुणाचल प्रदेश में भारी बारिश की संभावना है. असम से लेकर त्रिपुरा तक गरज-चमक के साथ बिजली गिरने का खतरा बना रहेगा. दक्षिण भारत में केरल और माहे से लेकर तमिलनाडु और लक्षद्वीप तक तेज हवाएं चल सकती हैं. वहीं पूर्वोत्तर बंगाल की खाड़ी के आसपास की सक्रियता का असर पूर्वी हिस्सों में देखने को मिल सकता है. उत्तरपूर्वी असम और आसपास के क्षेत्रों में निचले क्षोभमंडलीय स्तर पर साइक्लोनिक सर्कुलेशन बना हुआ है. उत्तरी तटीय तमिलनाडु और आसपास भी एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन मौजूद है. ऐसे में 2 अक्टूबर को कई राज्यों में लोगों को बारिश के साथ तेज हवा और बिजली से भी सतर्क रहना होगा।


    यूपी में 2 अक्टूबर को बारिश के साथ तेज आंधी बढ़ाएगी परेशानी

    उत्तर प्रदेश के कई जिलों में 2 अक्टूबर को मौसम खराब रहने की संभावना है. मेरठ, आगरा, मथुरा, गाजियाबाद, बहराइच, गोंडा, कानपुर, हरदोई, लखीमपुर खीरी, श्रावस्ती, उन्नाव, कन्नौज, सीतापुर, फर्रुखाबाद, बरेली, एटा, फिरोजाबाद, कासगंज, मैनपुरी, रामपुर, प्रयागराज, गोरखपुर और देवरिया में मध्यम से भारी बारिश की चेतावनी है. इस दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चल सकती है. लखनऊ में अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है. बारिश के साथ गरज-चमक की स्थिति भी बन सकती है.


    बिहार में 2 अक्टूबर को बारिश और आंधी का दोहरा अलर्ट

    बिहार के कई हिस्सों में 2 अक्टूबर को भारी बारिश के साथ तेज आंधी की चेतावनी है. पटना, गया, जहानाबाद, पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, मुजफ्फरपुर, वैशाली, समस्तीपुर, दरभंगा, मधुबनी, पूर्णिया, किशनगंज, भागलपुर, मुंगेर और कटिहार में मौसम खराब रह सकता है. यहां हवा की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने का अनुमान है. सीमांचल के जिलों में बिजली चमकने और वज्रपात का खतरा भी बना रहेगा. पटना में अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस रह सकता है।


    झारखंड में 2 अक्टूबर को 50 KM की आंधी के साथ बरसेंगे बादल

    झारखंड में 2 और 3 अक्टूबर को मौसम सक्रिय रहने वाला है. गुमला, गढ़वा, सिमडेगा, रांची, धनबाद, गिरिडीह, बोकारो, हजारीबाग, पलामू और जमशेदपुर में भारी बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है. इस दौरान हवा की रफ्तार करीब 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है. रांची में 2 अक्टूबर को अधिकतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है. बारिश और तेज हवा के कारण स्थानीय स्तर पर आवागमन प्रभावित हो सकता है.


    पश्चिम बंगाल में 2 अक्टूबर को भी बढ़ेगी गरज-चमक वाली बारिश

    पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के आसपास भी मौसमी गतिविधियां बनी रहने की संभावना है. बंगाल की खाड़ी के आसपास सक्रिय मौसमी प्रणाली का असर पूर्वी हिस्सों में देखने को मिल सकता है. अगले करीब 12 घंटे तक इसके प्रभाव में मौसम में हलचल बनी रहने का अनुमान है. राज्य के कुछ हिस्सों में गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है. पूर्वी भारत के आसपास बिजली गिरने की गतिविधियां भी बढ़ सकती हैं।


    राजस्थान में 2 अक्टूबर को कई जिलों में आंधी के साथ बारिश

    राजस्थान में भी 2 अक्टूबर को मौसम का मिजाज बदला हुआ नजर आएगा. भीलवाड़ा, टोंक, सवाई माधोपुर, बारां, कोटा, भरतपुर, बीकानेर, बूंदी, जयपुर, अजमेर और उदयपुर में बारिश और आंधी की चेतावनी है. इस दौरान हवा की रफ्तार 50 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है. जयपुर में अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है. तेज हवा के साथ बारिश होने पर तापमान में भी गिरावट देखने को मिल सकती है. कई इलाकों में अचानक मौसम बदलने की स्थिति बन सकती है।


    मध्य प्रदेश में 2 अक्टूबर को बारिश के साथ चलेंगे तेज हवा के झोंके

    मध्य प्रदेश के कई जिलों में 2 अक्टूबर को बारिश और आंधी की संभावना है. देवास, होशंगाबाद, भोपाल, इंदौर, खंडवा, गुना, मुरैना, अशोकनगर, नीमच, उमरिया, छिंदवाड़ा, कटनी और पन्ना में मौसम सक्रिय रह सकता है. यहां करीब 30 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा के झोंके चलने का अनुमान है. भोपाल में अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 22 डिग्री सेल्सियस रह सकता है. बारिश के दौरान गरज-चमक भी देखने को मिल सकती है।


    पंजाब में 2 अक्टूबर को बारिश और तेज हवा से बदलेगा मौसम

    पंजाब में 2 अक्टूबर को कई जिलों में बारिश और आंधी की संभावना है. पठानकोट, बरनाला, चंडीगढ़, जालंधर, अमृतसर, पटियाला, गुरदासपुर और लुधियाना में मौसम विभाग ने बारिश और तेज हवा की चेतावनी दी है. इस दौरान हवा की रफ्तार 50 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है. बारिश के साथ तेज झोंके चलने से मौसम में अचानक बदलाव देखने को मिल सकता है।

    हरियाणा में भी मानसून की विदाई के बीच मौसम पूरी तरह साफ नहीं रहेगा. आसपास के क्षेत्रों में पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों से आने वाली मौसमी गतिविधियों का असर देखने को मिल सकता है. बारिश और तेज हवा के दौरान स्थानीय स्तर पर मौसम बदल सकता है. ऐसे में वाहन चालकों को भी सावधानी बरतनी होगी. खासकर तेज हवा के दौरान खुले इलाकों में यात्रा करते समय अतिरिक्त सतर्कता जरूरी है।


    हिमाचल में 2 अक्टूबर को बारिश के साथ तेज हवाओं का असर

    हिमाचल प्रदेश में भी 2 अक्टूबर को मौसम सक्रिय रहने वाला है. सोलन, बिलासपुर, किन्नौर, लाहौल-स्पीति, कांगड़ा और सिरमौर में भारी बारिश और आंधी की चेतावनी है. इस दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चल सकती है. मनाली में अधिकतम तापमान 12 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 2 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है. ऊंचाई वाले इलाकों में बारिश के साथ ठंड बढ़ सकती है. पहाड़ी रास्तों पर यात्रा करने वालों को मौसम में अचानक बदलाव को ध्यान में रखना होगा।


    जम्मू-कश्मीर में भी 2 अक्टूबर को बारिश और आंधी का अलर्ट

    जम्मू-कश्मीर के कई जिलों में 2 अक्टूबर को बारिश और तेज हवा की संभावना है. राजौरी, अनंतनाग, बारामूला, पुंछ, रामबन, कठुआ, डोडा और सांबा में भारी बारिश और आंधी की चेतावनी जारी की गई है. इस दौरान हवा की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है. श्रीनगर में अधिकतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 13 डिग्री सेल्सियस रह सकता है।


    पूर्वोत्तर में 2 अक्टूबर को भारी बारिश का साया

    पूर्वोत्तर भारत में भी 2 अक्टूबर को मौसम सक्रिय रहेगा. अरुणाचल प्रदेश में भारी बारिश की संभावना जताई गई है. इसके अलावा अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की आशंका है. उत्तरपूर्वी असम और आसपास के क्षेत्रों में निचले क्षोभमंडलीय स्तर पर साइक्लोनिक सर्कुलेशन बना हुआ है. इसी वजह से इस क्षेत्र में बादलों की गतिविधि बढ़ सकती है।


    दक्षिण भारत में 2 अक्टूबर को 50 KM की रफ्तार से चल सकती है हवा

    दक्षिण भारत के तटीय और द्वीपीय इलाकों में भी मौसम सक्रिय रहने का अनुमान है. केरल और माहे, लक्षद्वीप, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में गरज-चमक के साथ 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा के झोंके चल सकते हैं. उत्तरी तटीय तमिलनाडु और आसपास के क्षेत्रों में साइक्लोनिक सर्कुलेशन बना हुआ है. इसके असर से बारिश और गरज-चमक की गतिविधियां बढ़ सकती हैं. तमिलनाडु और आसपास के तटीय क्षेत्रों में अचानक तेज हवा और बारिश की स्थिति बन सकती है।

  • MP में 10 अक्टूबर तक मानसून की विदाई, 3 दिन तेज धूप, फिर पूर्वी हिस्से में बारिश के आसार

    MP में 10 अक्टूबर तक मानसून की विदाई, 3 दिन तेज धूप, फिर पूर्वी हिस्से में बारिश के आसार


    भोपाल। मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई 10 अक्टूबर तक पूरी होने की संभावना है। इससे पहले अगले तीन दिन प्रदेशभर में तेज धूप रहेगी, जबकि 5 अक्टूबर को पूर्वी हिस्से के पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, मैहर, सीधी, सिंगरौली, शहडोल और अनूपपुर में हल्की बारिश हो सकती है। मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार, अक्टूबर में दिन के तापमान में बढ़ोतरी के साथ रात में ठंडक का दौर रहेगा।

    मध्य प्रदेश में मानसून का आधिकारिक पीरियड 30 सितंबर को खत्म हो चुका है, लेकिन अभी तक किसी भी जिले से मानसून की विदाई नहीं हुई है। मौसम विभाग के अनुसार, मानसून की वापसी रेखा फिलहाल पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान से गुजर रही है। मध्य प्रदेश में यह ग्वालियर-चंबल और उज्जैन संभाग के ऊपर बनी हुई है।

    ग्वालियर-चंबल और उज्जैन से होगी शुरुआत

    मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक, मानसून की वापसी मध्य प्रदेश में सबसे पहले ग्वालियर-चंबल और उज्जैन संभाग से शुरू हो सकती है। इसके बाद इंदौर, भोपाल, नर्मदापुरम, सागर, जबलपुर, रीवा और शहडोल संभाग से मानसून विदा होगा।

    मानसून की वापसी की शुरुआत शुक्रवार-शनिवार से होने की संभावना है और पूरी प्रक्रिया 10 अक्टूबर तक पूरी हो सकती है। यानी प्रदेश में मानसून की विदाई का दौर अगले कुछ दिनों में शुरू होने वाला है।

    अक्टूबर में दिन गर्म, रात में ठंडक

    अक्टूबर मध्य प्रदेश में मौसम के बदलाव का महीना माना जाता है। इस दौरान मानसून की विदाई के साथ आसमान धीरे-धीरे साफ होने लगता है। इसका असर तापमान पर भी दिखाई देता है। दिन में धूप तेज होने से गर्मी का अहसास बढ़ता है, जबकि रात में तापमान गिरने से ठंडक महसूस होने लगती है।

    मौसम विभाग के अनुसार, इस बार भी अक्टूबर में बारिश, गर्मी और ठंड का मिला-जुला असर देखने को मिल सकता है। अक्टूबर के पहले दिन ही प्रदेश के कई शहरों में रात के तापमान में गिरावट दर्ज की गई।

    ज्यादातर हिस्सों में सामान्य से ज्यादा रहेगा दिन का तापमान

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक, अक्टूबर में प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना है। हालांकि, कुछ इलाकों में हल्की बारिश भी हो सकती है।

    5 अक्टूबर को पन्ना, सतना, रीवा, मऊगंज, मैहर, सीधी, सिंगरौली, शहडोल और अनूपपुर में हल्की बारिश होने का अनुमान है। इसके अलावा प्रदेश के बाकी हिस्सों में मौसम मुख्य रूप से शुष्क रहने और धूप खिलने की संभावना है।

    इस बार 35.8 इंच बारिश रिकॉर्ड

    मध्य प्रदेश में इस बार दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान कुल 908.4 मिमी यानी 35.8 इंच बारिश दर्ज हुई है। यह सामान्य बारिश 949.5 मिमी यानी 37.3 इंच की तुलना में करीब 1.5 इंच कम है। ओवरऑल प्रदेश में सामान्य से 4 प्रतिशत कम बारिश हुई है।

    क्षेत्रवार आंकड़ों में पूर्वी मध्य प्रदेश में सामान्य से 4 प्रतिशत अधिक और पश्चिमी हिस्से में औसत से 12 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है।

    पूर्वी हिस्से के कुछ जिलों में बारिश कम

    पूर्वी मध्य प्रदेश के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में कुल बारिश सामान्य से 4 प्रतिशत अधिक रही है। हालांकि, इसी क्षेत्र के कुछ जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे भी रहा।

    बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 5 से 21 प्रतिशत तक कम बारिश हुई है।

    पश्चिमी MP में 9 से 51% तक कम बारिश

    पश्चिमी हिस्से के कई जिले इस बार बारिश की कमी से प्रभावित रहे। आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 9 से 51 प्रतिशत तक कम पानी गिरा है। इसके बावजूद प्रदेश के कई जिलों में बारिश का कोटा पूरा हुआ है।

    इन 25 जिलों में बारिश का कोटा पूरा

    प्रदेश के भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडौरी, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर जिलों में बारिश का कोटा पूरा हो चुका है।

    अब मानसून की वापसी के साथ प्रदेश में मौसम का मिजाज तेजी से बदलने वाला है। अगले कुछ दिनों में दिन के तापमान में बढ़ोतरी और रात में ठंडक का असर बढ़ सकता है, जबकि पूर्वी हिस्से में कहीं-कहीं हल्की बारिश देखने को मिलेगी।

  • MP से 2-3 दिन में मानसून की विदाई, अब सिर्फ बूंदाबांदी के आसार, भारी बारिश का अलर्ट नहीं

    MP से 2-3 दिन में मानसून की विदाई, अब सिर्फ बूंदाबांदी के आसार, भारी बारिश का अलर्ट नहीं


    भोपाल। मध्य प्रदेश से दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई अगले 2 से 3 दिन में हो सकती है। मौसम विभाग के मुताबिक, अगले तीन दिन नमी के असर से कुछ जिलों में बूंदाबांदी और गरज-चमक की स्थिति बन सकती है, लेकिन प्रदेश में कहीं भी भारी बारिश का अलर्ट नहीं है। मानसून की विदाई के साथ ही बारिश का यह दौर भी खत्म हो जाएगा।

    मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून का सामान्य पीरियड 1 जून से 30 सितंबर तक माना जाता है। इस बार मानसूनी सीजन के आखिरी सप्ताह में प्रदेश में अति भारी या भारी बारिश नहीं हुई। इसका असर सीजन के कुल बारिश के आंकड़ों पर भी पड़ा है।

    प्रदेश के 55 जिलों में से 30 जिलों में अब तक सामान्य बारिश का कोटा पूरा नहीं हुआ है। भोपाल और ग्वालियर समेत 25 जिलों में सामान्य बारिश का आंकड़ा पूरा हो चुका है। आलीराजपुर में सामान्य बारिश की आधी मात्रा भी रिकॉर्ड नहीं हुई, जबकि निवाड़ी और मऊगंज में सामान्य से 150% से ज्यादा बारिश हुई है।

    अब जो बारिश होगी, वह ‘बोनस’ जैसी

    मौसम विभाग के अनुसार, मानसून की आधिकारिक विदाई होने तक नमी के कारण बूंदाबांदी का दौर जारी रह सकता है। इसे मानसूनी सीजन की सामान्य बारिश के आंकड़े में शामिल नहीं किया जाएगा। यानी विदाई से पहले होने वाली यह बारिश सीजन के आंकड़ों के लिहाज से एक तरह से अतिरिक्त यानी ‘बोनस’ बारिश होगी।

    आज इन जिलों में बूंदाबांदी-गरज चमक

    मौसम विभाग ने गुरुवार को मऊगंज, सीधी, सिंगरौली, शहडोल, अनूपपुर, डिंडौरी, मंडला और बालाघाट में बूंदाबांदी के साथ गरज-चमक का अनुमान जताया है।

    वहीं, भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, सागर, जबलपुर समेत प्रदेश के अन्य जिलों में मौसम मुख्य रूप से साफ रहेगा और तेज धूप खिलने के आसार हैं।

    प्रदेश में अब तक 35.8 इंच बारिश

    IMD के मुताबिक, मध्य प्रदेश में अब तक 908.4 मिमी यानी 35.8 इंच बारिश रिकॉर्ड हुई है। यह सामान्य बारिश 949.5 मिमी यानी 37.3 इंच के मुकाबले करीब 1.5 इंच कम है। इस तरह प्रदेश में कुल मिलाकर सामान्य से 4% कम बारिश हुई है।

    प्रदेश के पूर्वी हिस्से में सामान्य से 4% ज्यादा बारिश हुई है, जबकि पश्चिमी हिस्से में औसत से 12% कम पानी गिरा है।

    पूर्वी हिस्से में 4% ज्यादा बारिश, 9 जिलों में कमी

    पूर्वी मध्य प्रदेश के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में सामान्य से 4% ज्यादा बारिश रिकॉर्ड हुई है। पूर्वी हिस्से के अधिकांश जिलों में सामान्य कोटा पूरा हो चुका है। हालांकि, बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 5% से 21% तक कम बारिश हुई है।

    पश्चिमी MP के 20 जिलों में सामान्य से कम बारिश

    पश्चिमी मध्य प्रदेश में बारिश की स्थिति अपेक्षाकृत कमजोर रही है। आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 9% से 51% तक कम बारिश रिकॉर्ड हुई है।

    इनमें आलीराजपुर में स्थिति सबसे कमजोर रही, जहां सामान्य बारिश की आधी मात्रा भी पूरी नहीं हो सकी। इसके उलट निवाड़ी और मऊगंज में सामान्य से 150% से अधिक बारिश दर्ज की गई है।

    मानसून की विदाई के साथ अब प्रदेश में मौसम का मिजाज बदलने लगेगा। अगले कुछ दिनों तक जहां कहीं-कहीं बूंदाबांदी और गरज-चमक हो सकती है, वहीं ज्यादातर हिस्सों में धूप बढ़ने के आसार हैं।

  • MP से इसी हफ्ते मानसून की विदाई, आज 19 जिलों में बारिश का अलर्ट, भोपाल-इंदौर समेत कई शहरों में खिलेगी धूप

    MP से इसी हफ्ते मानसून की विदाई, आज 19 जिलों में बारिश का अलर्ट, भोपाल-इंदौर समेत कई शहरों में खिलेगी धूप


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई का सिलसिला इसी सप्ताह शुरू होने के आसार हैं। मौसम विभाग के मुताबिक सबसे पहले उज्जैन और ग्वालियर संभाग से मानसून लौटेगा। इसके बाद इंदौर, भोपाल, नर्मदापुरम और सागर संभाग से भी इसकी वापसी शुरू होगी। मानसून की विदाई से पहले अगले तीन दिन प्रदेश के कुछ हिस्सों में बूंदाबांदी और गरज-चमक का दौर जारी रह सकता है।

    मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी की रेखा राजस्थान और पंजाब के कई जिलों से गुजर रही है और अब मध्य प्रदेश के उत्तर-पश्चिमी हिस्से तक पहुंच चुकी है। इसी वजह से प्रदेश में बारिश का सिस्टम कमजोर पड़ने लगा है और कई इलाकों में धूप खिल रही है।

    आज 19 जिलों में बूंदाबांदी और गरज-चमक का अलर्ट

    बुधवार को प्रदेश के 19 जिलों में हल्की बारिश, बूंदाबांदी, आंधी और गरज-चमक की स्थिति बनने के आसार हैं। इनमें बैतूल, जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, पांढुर्णा, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर और पन्ना शामिल हैं।

    इन जिलों में बारिश की गतिविधियां सीमित रहने का अनुमान है। हालांकि, स्थानीय मौसम में बदलाव के कारण कहीं-कहीं गरज-चमक के साथ बूंदाबांदी हो सकती है।

    भोपाल-इंदौर, उज्जैन में खिली धूप

    दूसरी ओर भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, आलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन और नीमच में बुधवार को धूप खिलने का अनुमान है।

    इसके अलावा आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, हरदा, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, दतिया, अशोकनगर, मुरैना, भिंड, श्योपुर, सागर, दमोह, नरसिंहपुर, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में मौसम सामान्य रहने की संभावना है।

    3 अक्टूबर से साफ हो जाएगा मौसम

    मौसम विभाग के अनुसार 1 और 2 अक्टूबर को प्रदेश के कुछ ही जिलों में बूंदाबांदी हो सकती है। इसके बाद 3 अक्टूबर को बारिश के बादल पूरे प्रदेश से छंट जाएंगे। इसके बाद प्रदेश में कहीं भी गरज-चमक के साथ बारिश होने का अनुमान नहीं है।

    यानी अगले कुछ दिनों में बारिश की गतिविधियां पूरी तरह कमजोर पड़ने के साथ मानसून की विदाई का दौर भी आगे बढ़ेगा।

    4 संभागों में औसत से 4% ज्यादा बारिश

    इस मानसून सीजन में मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्से के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश का आंकड़ा औसत से 4% ज्यादा है। अधिकांश जिलों में सामान्य कोटे से अधिक पानी गिर चुका है।

    हालांकि बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी में बारिश का आंकड़ा 3% से 21% तक कम है।

    पश्चिमी MP के 20 जिलों में बारिश कम

    पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई जिलों में इस बार बारिश औसत से कम रही। आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में औसत से 9% से 51% तक कम बारिश दर्ज की गई है।

    इन जिलों में औसत से ज्यादा पानी

    वहीं अनूपपुर, छतरपुर, डिंडौरी, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी में औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।

    मानसून की विदाई की तारीख नजदीक आने के साथ अब प्रदेश में इस सीजन की कुल बारिश के 100 प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना कम है। अगले कुछ दिनों में बारिश की गतिविधियां सीमित रहने के कारण अब मौसम का रुख मानसून की विदाई और धूप बढ़ने की ओर रहेगा।

  • देश के 62% राष्ट्रीय राजमार्गों पर चलना खतरे से खाली नहीं… मॉनसून के बाद खराब हो जाती हैं हालत

    देश के 62% राष्ट्रीय राजमार्गों पर चलना खतरे से खाली नहीं… मॉनसून के बाद खराब हो जाती हैं हालत


    नई दिल्ली।
    देश में एक तरफ जहां हर दिन रिकॉर्ड गति (Record Speed) से नए एक्सप्रेस-वे (New Expressways) और राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) (National Highway – NH) बिछाए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर हाईवे बनने के बाद उनके रख-रखाव की अनदेखी हो रही है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, देश के कुल 1.46 लाख किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क में से लगभग 62 फीसदी हिस्सा स्थायी डेवलपर या डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड (डीएलपी) (Defect Liability Period – DLP) के सुरक्षा कवच में नहीं हैं। यानी नेटवर्क पर सफर सुरक्षित नहीं है। क्योंकि, इन सड़कों को महज अल्पकालिक अनुबंधों (एसटीसी) और पेचवर्क की खानापूर्ति के भरोसे छोड़ दिया गया है, जो हाईवे पर सफर करने वाले करोड़ों यात्रियों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय के सूत्रों ने बताया, देश के 90,000 किलोमीटर से अधिक लंबा हाईवे नेटवर्क बिना किसी स्थायी जवाबदेही के केवल अल्पकालिक अनुबंधों और प्रदर्शन-आधारित रखरखाव अनुबंधों के भरोसे है।


    चालकों को गंवानी पड़ती है जान

    विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे के दावों के बीच पेचवर्क की इस खानापूर्ति का सबसे दर्दनाक और सीधा परिणाम देश के आम वाहन चालकों को अपनी जान गंवाकर भुगतना पड़ रहा है। कोई पारदर्शी केंद्रीय डेटाबेस न होने से जवाबदेही किसी एक बड़ी कंपनी के बजाय छोटे-छोटे स्थानीय ठेकेदारों में बंट जाती है, जिससे काम की गुणवत्ता की निगरानी लगभग न के बराबर हो जाती है। शॉर्ट-टर्म मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट्स की औसतन अवधि केवल 1 से 2 वर्ष होती है। इतने कम समय के लिए कोई भी ठेकेदार सड़क के डामरीकरण या उसकी नींव को मजबूत करने जैसा स्थायी कार्य नहीं करता। इन अनुबंधों का दायरा केवल गड्ढे भरने, नालियों की सफाई या साइनबोर्ड लगाने तक सीमित रह जाता है।


    ब्लैक स्पॉट्स कई साल तक नहीं सुधारे जाते

    दीर्घकालिक डेवलपर न होने के कारण सड़कों के ब्लैक स्पॉट्स वर्षों तक नहीं सुधारे जाते हैं। इसके अलावा क्रैश बैरियर, रेट्रो-रिफ्लेक्टिव साइनेज, सोलर स्टड्स और पर्याप्त स्ट्रीट लाइटों का रखरखाव समय पर न होने से रात या कोहरे में वाहन चालकों को किनारे या डिवाइडर का सही अंदाजा नहीं लगता। मानसून में ड्रेनेज खराब होने से सड़क पर पानी जमा होने से गाड़ियों का फिसलना और बड़े गड्ढे जानलेवा साबित होते हैं।


    जिन हाईवे का रखरखाव नहीं, वहां ज्यादा मौतें

    मंत्रालय और सेवलाइफ फाउंडेशन के आंकड़ों के अनुसार, हाईवे पर होने वाली कुल मौतों में से लगभग 55 से 62 फीसदी मौतें उन्हीं हिस्सों पर होती हैं, जहां दीर्घकालिक रखरखाव का अभाव है। राष्ट्रीय राजमार्गों के 58 फीसदी से 60 प्रतिशत हादसे इन 90,000 किमी से अधिक फैले शॉर्ट-टर्म मेंटेनेंस वाले हिस्सों में होते हैं। हाईवे पर हर साल 55 हजार से 60 हजार मौतें दर्ज की जाती हैं।


    मानसून के बाद हर बार सड़कें हो जाती हैं बदहाल

    हाईवे विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी राष्ट्रीय राजमार्ग की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए पूरी लाइफ-साइकिल मेंटेनेंस (5 से 10 वर्ष की दीर्घकालिक जवाबदेही) आवश्यक होती है। 1-2 साल के टुकड़ों में बांटे गए अनुबंध सड़क की उम्र बढ़ाने में पूरी तरह विफल साबित हो रहे हैं और हर मानसून के बाद सड़कें फिर बदहाल हो जाती हैं। वहीं, रखरखाव में पर्याप्त धनराशि खर्च नहीं की जाती है।

  • MP में अब तक 37.7 इंच हुई बारिश, एक सप्ताह में हो सकती है मानसून की विदाई, कल से खिलेगी तेज धूप

    MP में अब तक 37.7 इंच हुई बारिश, एक सप्ताह में हो सकती है मानसून की विदाई, कल से खिलेगी तेज धूप


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून अब विदाई की ओर बढ़ रहा है। रविवार तक प्रदेश में औसतन 37.7 इंच बारिश दर्ज हो चुकी है, जो सामान्य बारिश के कोटे का 95.8% है। अब महज 0.2% बारिश होने पर प्रदेश सामान्य बारिश की कैटेगरी में आ जाएगा। मौसम विभाग के मुताबिक अगले चार दिन प्रदेश में कहीं भी अति भारी या भारी बारिश की संभावना नहीं है और एक सप्ताह के भीतर दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई शुरू हो सकती है।

    मंगलवार से कई हिस्सों में तेज धूप

    मौसम केंद्र, भोपाल के अनुसार सोमवार से प्रदेश में बारिश की गतिविधियां कमजोर रहेंगी। मंगलवार से उज्जैन, इंदौर और ग्वालियर-चंबल संभाग में तेज धूप खिलने का अनुमान है। अगले तीन दिनों में प्रदेश के आधे से ज्यादा हिस्से में धूप का असर देखने को मिल सकता है।

    पिछले 48 घंटे से पूर्वी मध्य प्रदेश में बारिश करा रहा गहरा अवदाब अब कमजोर हो गया है। इसके असर से पूर्वी हिस्से में अति भारी और भारी बारिश का दौर चला था। बारिश के कारण कई नदियां उफान पर आ गईं और कई बांधों के गेट खोलने पड़े।

    रविवार से सिस्टम कमजोर पड़ना शुरू हुआ, जिसके बाद भारी बारिश का दौर थम गया। भोपाल, इंदौर, जबलपुर समेत कई जिलों में रविवार को धूप-छांव वाला मौसम रहा। अब सिस्टम की सक्रियता कम होने के साथ ही कई जिलों में तीखी धूप निकलने की संभावना है।

    सामान्य बारिश के आंकड़े तक पहुंचने से सिर्फ 0.2% दूर

    इस मानसूनी सीजन में प्रदेश में अब तक 37.7 इंच बारिश हो चुकी है। यह सामान्य बारिश के मुकाबले 95.8% है। यानी प्रदेश सामान्य बारिश की कैटेगरी से सिर्फ 0.2% दूर है। मौसम विभाग के अनुसार अगले तीन दिनों में कहीं हल्की बारिश भी होती है तो प्रदेश सामान्य बारिश की श्रेणी में पहुंच सकता है।

    हालांकि, इस बार पूरे प्रदेश में सामान्य बारिश का आंकड़ा 100% तक पहुंचने की संभावना कम बताई जा रही है।

    पूर्वी MP में औसत से 4% ज्यादा पानी

    प्रदेश के पूर्वी हिस्से में इस बार बारिश की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रही है। जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश का आंकड़ा औसत से करीब 4% ज्यादा है। अधिकांश जिलों में सामान्य कोटे से अधिक पानी गिर चुका है।

    इसके बावजूद बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 2% से 20% तक कम बारिश दर्ज हुई है।

    पश्चिमी MP के 20 जिलों में कम बारिश

    पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई जिलों में बारिश सामान्य से पीछे है। आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में औसत से 9% से 51% तक कम बारिश दर्ज हुई है।

    इन जिलों में मानसून के दौरान हुई बारिश सामान्य कोटे की तुलना में कम रही है। वहीं प्रदेश के कुछ जिलों में बारिश ने सामान्य आंकड़े को पार कर लिया है।

    इन जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश

    IMD के आंकड़ों के मुताबिक अनूपपुर, छतरपुर, डिंडौरी, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी में औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है।

    मानसून की सक्रियता अब लगातार कमजोर पड़ रही है। अगले कुछ दिनों में बारिश की गतिविधियों में और कमी आने तथा धूप का असर बढ़ने की संभावना है। इसी के साथ दक्षिण-पश्चिम मानसून की विदाई का सिलसिला भी शुरू हो सकता है। हालांकि, प्रदेश के सामान्य बारिश के आंकड़े तक पहुंचने के लिए अभी 0.2% बारिश की जरूरत है।

  • एमपी में 33.2 इंच बारिश, मानसून को 11 दिन बाकी, 22 सितंबर तक हल्की बारिश की संभावना

    एमपी में 33.2 इंच बारिश, मानसून को 11 दिन बाकी, 22 सितंबर तक हल्की बारिश की संभावना


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून सीजन के अब 11 दिन ही बाकी हैं और प्रदेश में अब तक औसतन 33.2 इंच बारिश रिकॉर्ड हो चुकी है। यह सामान्य बारिश के कोटे का 89.3 प्रतिशत है। मौसम विभाग के अनुसार अगले चार दिन प्रदेश में हल्की बारिश का दौर जारी रह सकता है, जबकि मानसून के अंतिम सप्ताह में कुछ जिलों में तेज बारिश होने की संभावना है। ऐसे में सीजन खत्म होने तक प्रदेश का कुल बारिश का कोटा पूरा होने की उम्मीद बनी हुई है।

    हालांकि, प्रदेश के सभी हिस्सों में बारिश का वितरण एक जैसा नहीं रहा है। इंदौर, उज्जैन, जबलपुर और नर्मदापुरम संभाग के ज्यादातर जिलों में सामान्य बारिश का आंकड़ा अब भी पीछे है। इंदौर, धार, आलीराजपुर, रायसेन, विदिशा, जबलपुर, छिंदवाड़ा, सिवनी, पांढुर्णा, सागर, उज्जैन, रतलाम और शाजापुर में अब तक सामान्य बारिश का 80 प्रतिशत पानी भी नहीं गिरा है। इन जिलों को सामान्य बारिश के आंकड़े तक पहुंचने के लिए अगले दिनों में लगातार तीन से चार दिन अच्छी बारिश की जरूरत होगी।

    इसके उलट मऊगंज और निवाड़ी में सामान्य कोटे से दोगुना पानी गिर चुका है। वहीं भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, छतरपुर, निवाड़ी, मैहर, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल और उमरिया में सामान्य या उससे अधिक बारिश रिकॉर्ड हुई है। प्रदेश के बाकी 37 जिलों में बारिश सामान्य से कम है।

    22 सितंबर तक हल्की बारिश का अनुमान

    मौसम विभाग ने अगले चार दिन यानी 22 सितंबर तक प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में हल्की बारिश होने का अनुमान जताया है। मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक इस समय पश्चिमी हिस्से में साइक्लोनिक सर्कुलेशन सिस्टम सक्रिय है। इसके असर से पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई जिलों में बारिश का दौर बना हुआ है।

    मौसम की अगली गतिविधि भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। 19 सितंबर की शाम के आसपास उत्तर अंडमान सागर में नया निम्न दबाव क्षेत्र बनने की संभावना है। इसके बाद इसके दक्षिण ओडिशा और उत्तर आंध्र प्रदेश तट की ओर पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ने के संकेत हैं। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक इस सिस्टम के बनने और आगे बढ़ने से मध्य प्रदेश के मौसम में एक बार फिर बदलाव की स्थिति बन सकती है।

    मानसून की विदाई का समय नजदीक होने के बावजूद प्रदेश में अभी बारिश की संभावनाएं बनी हुई हैं। ऐसे में अंतिम सप्ताह में यदि कुछ जिलों में अच्छी बारिश होती है तो जिन इलाकों में फिलहाल बारिश का आंकड़ा कम है, वहां सामान्य के करीब पहुंचने की उम्मीद बढ़ सकती है।

  • MP में मानसून विदाई की ओर, फिर भी सक्रियता बरकरार, 21 सितंबर तक बारिश का रहेगा दौर

    MP में मानसून विदाई की ओर, फिर भी सक्रियता बरकरार, 21 सितंबर तक बारिश का रहेगा दौर


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून अब अंतिम चरण में पहुंच चुका है, लेकिन इसकी सक्रियता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। मौसम विभाग के मुताबिक 18 से 21 सितंबर के बीच प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश, गरज-चमक और आंधी का दौर बना रह सकता है। इसके बाद 22 सितंबर से गतिविधियां सीमित होने के संकेत हैं। इस दौरान कम बारिश वाले जिलों को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।

    मानसून की विदाई की शुरुआत पश्चिमी राजस्थान से होने का अनुमान है। मध्य प्रदेश में इसकी सक्रियता सितंबर के अंतिम सप्ताह तक बनी रह सकती है। मौसम विभाग के मौजूदा पूर्वानुमान में भी 21 सितंबर तक पश्चिमी मध्य प्रदेश में गरज-चमक और आंधी की गतिविधियों का संकेत है, जबकि फिलहाल भारी बारिश की कोई बड़ी चेतावनी जारी नहीं है।

    18 से 21 सितंबर तक बन सकता है बारिश का दौर

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार अगले कुछ दिनों में प्रदेश के मौसम में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। सात दिन के पूर्वानुमान के मुताबिक 18 से 21 सितंबर के बीच वर्षा गतिविधियां बनी रह सकती हैं। 22 सितंबर से इसमें कमी आने लगेगी।

    मानसून की विदाई के पहले होने वाली यह गतिविधि उन जिलों के लिए महत्वपूर्ण है, जहां इस सीजन में बारिश सामान्य से कम हुई है। प्रदेश के 18 जिलों में सामान्य या उससे ज्यादा बारिश दर्ज की जा चुकी है। इनमें भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, छतरपुर, निवाड़ी, मैहर, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल और उमरिया शामिल हैं।

    इसके उलट इंदौर, उज्जैन और जबलपुर समेत 37 जिलों में बारिश सामान्य से कम है। आलीराजपुर में सामान्य बारिश की आधी ही बारिश हुई है, जबकि निवाड़ी में सामान्य से 54% ज्यादा पानी गिर चुका है।

    भोपाल, सीहोर और देवास में तेज बारिश

    गुरुवार दोपहर भोपाल, सीहोर और देवास जिलों में तेज बारिश हुई। भोपाल-इंदौर रोड पर सोनकच्छ में बारिश के दौरान कुछ देर के लिए दिन में ही अंधेरा छा गया। वाहन चालकों को हेडलाइट जलाकर सफर करना पड़ा।

    ग्वालियर में दिनभर उमस और गर्मी के बाद शाम को झमाझम बारिश हुई। इससे लोगों को गर्मी से राहत मिली और मौसम सुहाना हो गया।

    अरब सागर में कम दबाव का क्षेत्र

    शैलेंद्र कुमार नायक के मुताबिक इस समय सौराष्ट्र और उससे लगे उत्तर-पूर्वी अरब सागर के ऊपर लो प्रेशर एरिया बना हुआ है। इससे जुड़ा चक्रवाती परिसंचरण समुद्र तल से करीब 5.8 किलोमीटर की ऊंचाई तक फैला है। मानसून ट्रफ भी इस निम्न दबाव क्षेत्र से होते हुए राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल से बंगाल की खाड़ी तक फैली हुई है।

    इन मौसमी प्रणालियों से मध्य भारत में नमी और बारिश की गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। इसी वजह से 18 और 19 सितंबर के दौरान मध्य प्रदेश में अलग-अलग चरणों में बारिश हो सकती है।

    19 सितंबर के बाद बन सकता है नया सिस्टम

    मौसम विशेषज्ञ के अनुसार उत्तर थाईलैंड के ऊपर बना ऊपरी वायु चक्रवाती परिसंचरण 18 सितंबर की शाम तक उत्तर अंडमान सागर के आसपास पहुंच सकता है। इसके प्रभाव से 19 सितंबर की शाम के आसपास उत्तर अंडमान सागर में नया निम्न दबाव क्षेत्र बनने की संभावना है।

    इसके बाद इसके दक्षिण ओडिशा और उत्तर आंध्र प्रदेश के तट की ओर पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ने के संकेत हैं। यह सिस्टम मध्य प्रदेश के मौसम में एक और बदलाव का आधार बन सकता है। IMD ने भी 19 सितंबर के आसपास अंडमान सागर और आसपास के क्षेत्र में निम्न दबाव क्षेत्र बनने की संभावना जताई है।

    अब तक 33.1 इंच बारिश, सामान्य से 2.5 इंच कम

    मध्य प्रदेश में इस मानसूनी सीजन में अब तक 842.1 मिमी यानी 33.1 इंच बारिश रिकॉर्ड हुई है। यह सामान्य बारिश 35.6 इंच (905.3 मिमी) से करीब 2.5 इंच कम है। कुल मिलाकर प्रदेश में सामान्य से 7% कम बारिश दर्ज हुई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में कमी 2% और पश्चिमी हिस्से में 11% है।

    32 जिलों में 4 से 50% तक कम बारिश

    पूर्वी मध्य प्रदेश के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में औसतन 1% तक बारिश कम हुई है। बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 4% से 25% तक कम बारिश हुई है। पिछले एक सप्ताह में इन जिलों की स्थिति में सुधार आया है।

    पश्चिमी हिस्से में आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 4% से 50% तक कम पानी गिरा है।

    ऐसे में सितंबर के अंतिम दौर में होने वाली बारिश इन जिलों के लिए महत्वपूर्ण रहेगी। हालांकि, अभी उपलब्ध मौसम पूर्वानुमान में 21 सितंबर तक भारी बारिश का व्यापक अलर्ट नहीं है; बारिश के साथ गरज-चमक और आंधी की गतिविधियां अधिक प्रमुख रहने की संभावना है।