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  • MP में मानसून की विदाई से पहले फिर होगी बारिश, 19 सितंबर के बाद नया सिस्टम

    MP में मानसून की विदाई से पहले फिर होगी बारिश, 19 सितंबर के बाद नया सिस्टम


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई से पहले एक बार फिर बारिश का दौर तेज हो सकता है। मौसम विशेषज्ञ के मुताबिक 19 सितंबर के बाद नया सिस्टम सक्रिय होने की संभावना है, जो मजबूत रहा तो प्रदेश में बारिश का कोटा पूरा हो सकता है; अभी सामान्य औसत 37.3 इंच के मुकाबले 33 इंच बारिश हुई है।

    88.5% बारिश, लक्ष्य तक पहुंचने 4.3 इंच बाकी

    प्रदेश में मानसून सीजन खत्म होने में अब करीब 14 दिन बाकी हैं। मंगलवार तक 33 इंच यानी सामान्य बारिश की 88.5% बारिश हो चुकी है। सामान्य औसत 37.3 इंच है, ऐसे में सामान्य आंकड़े तक पहुंचने के लिए अभी 4.3 इंच बारिश और चाहिए।

    मौसम विभाग के अनुसार मानसूनी सीजन 1 जून से 30 सितंबर तक माना जाता है। इस अवधि में होने वाली बारिश ही मानसून के आंकड़ों में शामिल की जाती है। हालांकि कई बार मानसून अक्टूबर के पहले या दूसरे सप्ताह तक विदा होता है। इस बार सितंबर के आखिरी हिस्से में इसकी विदाई शुरू होने की संभावना जताई जा रही है। ऐसे में उससे पहले होने वाली बारिश प्रदेश के कुल आंकड़े को सामान्य के करीब ले जा सकती है।

    17 से 21 सितंबर के बीच बारिश का जोर

    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार 17 से 19 सितंबर के दौरान पश्चिमी मध्य प्रदेश में बारिश की गतिविधियां अधिक व्यापक हो सकती हैं। वहीं, 18 से 21 सितंबर तक पूर्वी मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में कहीं तेज तो कहीं हल्की बारिश होने की संभावना है।

    इसके बाद 19 सितंबर के बाद बनने वाला नया सिस्टम प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि इसकी ताकत अच्छी रही और इसका प्रभाव व्यापक रहा तो मानसून के बचे दिनों में होने वाली बारिश से प्रदेश सामान्य बारिश के आंकड़े को छू सकता है।

    मंगलवार को लो प्रेशर एक्टिव, लेकिन तेज बारिश नहीं

    मंगलवार को पश्चिमी मध्य प्रदेश में लो प्रेशर एरिया (निम्न दाब क्षेत्र) सक्रिय रहा। मानसून ट्रफ की गतिविधि भी देखने को मिली, लेकिन इसका असर तेज बारिश के रूप में सामने नहीं आया। प्रदेश के किसी भी जिले में भारी बारिश दर्ज नहीं हुई।

    भोपाल में दिनभर धूप खिली रही। इंदौर और उज्जैन में भी मौसम लगभग ऐसा ही रहा। यानी सिस्टम सक्रिय होने के बावजूद मंगलवार को प्रदेश में बारिश का जोर देखने को नहीं मिला।

    18 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश

    अब तक प्रदेश के 18 जिलों में सामान्य से अधिक बारिश हो चुकी है। इनमें भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, ग्वालियर, शिवपुरी, गुना, छतरपुर, निवाड़ी, मैहर, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल और उमरिया शामिल हैं।

    इन जिलों में सामान्य से अधिक पानी गिर चुका है। ऐसे में मानसून के बचे दिनों में यहां होने वाली बारिश को अतिरिक्त बारिश के तौर पर देखा जाएगा।

    37 जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से नीचे

    दूसरी ओर इंदौर, उज्जैन और जबलपुर समेत 37 जिले अभी सामान्य बारिश के आंकड़े से पीछे हैं। इनमें आलीराजपुर की स्थिति सबसे कमजोर है, जहां सामान्य की आधी बारिश भी अब तक नहीं हुई है।

    इसके विपरीत निवाड़ी में सामान्य से 49% ज्यादा बारिश दर्ज हो चुकी है। इस तरह प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश का वितरण काफी असमान रहा है। अब निगाह 19 सितंबर के बाद सक्रिय होने वाले संभावित सिस्टम पर है कि वह कितनी व्यापक बारिश कराता है और प्रदेश को मानसून के सामान्य आंकड़े के कितने करीब पहुंचाता है।

  • उत्तर प्रदेश में गड्ढामुक्ति अभियान तेज होगा, योगी ने बारिश के बाद जरूरत के अनुसार स्थायी नवीनीकरण के दिए निर्देश

    उत्तर प्रदेश में गड्ढामुक्ति अभियान तेज होगा, योगी ने बारिश के बाद जरूरत के अनुसार स्थायी नवीनीकरण के दिए निर्देश

    नई दिल्ली ।उत्तर प्रदेश में बारिश और बाढ़ से खराब हुई सड़कों की स्थिति सुधारने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जिन सड़कों की हालत बारिश के कारण खराब हुई है, उन्हें पहले आवागमन के योग्य बनाया जाए और बरसात खत्म होने के बाद जरूरत के अनुसार उनका स्थायी नवीनीकरण कराया जाए। मुख्यमंत्री ने यह निर्देश शुक्रवार को लोक निर्माण विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान दिए।

    योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्रदेश में अभी बारिश जारी है, इसलिए सड़कों की स्थिति पर लगातार नजर रखने की जरूरत है। उन्होंने बारिश के कारण नए क्षतिग्रस्त मार्गों का भी सर्वे कराने के निर्देश दिए। आगामी पर्व और त्योहारों के दौरान बड़ी संख्या में लोगों के आवागमन को देखते हुए उन्होंने प्रमुख मार्गों पर यातायात में किसी तरह की परेशानी नहीं होने देने को कहा।

    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि त्योहारों से पहले जरूरी मरम्मत और नवीनीकरण के कार्य पूरे किए जाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि गड्ढामुक्ति अभियान केवल पैचवर्क तक सीमित नहीं रहना चाहिए। जहां सड़क तत्काल खराब स्थिति में है, वहां पहले उसे मोटरेबल बनाया जाए और बारिश का मौसम समाप्त होने के बाद आवश्यकता के अनुसार स्थायी नवीनीकरण कराया जाए।

    बैठक में बताया गया कि अतिवृष्टि के अलावा एक्सप्रेस-वे, राष्ट्रीय मार्ग और रेलवे सहित निर्माणाधीन परियोजनाओं के कारण भारी वाहनों की आवाजाही से भी कई सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं। इन सड़कों का विभागवार सर्वे कराया जा रहा है। सर्वे के आधार पर खराब मार्गों को चिन्हित किया जाएगा और गड्ढामुक्ति के लिए विभागवार लक्ष्य तय किए जाएंगे।

    आगामी पर्वों को ध्यान में रखते हुए प्रदेश में 681 महत्वपूर्ण मार्ग चिन्हित किए गए हैं। इनमें गणेश चतुर्थी, विश्वकर्मा पूजा, नवरात्रि, दीपावली, छठ पूजा और कार्तिक पूर्णिमा जैसे पर्वों के दौरान अधिक आवागमन वाले मार्ग शामिल हैं। इन मार्गों को प्राथमिकता के आधार पर बेहतर स्थिति में रखने की तैयारी की जा रही है।

    मुख्यमंत्री ने केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अधिकारियों से भी उनकी कार्ययोजना की जानकारी ली। इसके अलावा मंडी परिषद, पंचायती राज, सिंचाई, ग्राम्य विकास, नगर विकास, आवास एवं शहरी नियोजन तथा अवस्थापना एवं औद्योगिक विकास विभाग की योजनाओं की भी समीक्षा की गई। उन्होंने सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय के साथ काम करने पर जोर दिया।

    विभागीय प्रस्तुतिकरण के अनुसार गड्ढामुक्ति अभियान में नौ विभागों के अधीन आने वाले मार्ग शामिल हैं। इन विभागों के तहत करीब 4.36 लाख किलोमीटर सड़कें हैं। मौजूदा लक्ष्य के तहत करीब 50 हजार किलोमीटर सड़कों को गड्ढामुक्त किया जाना है। अब तक करीब 5,751 किलोमीटर सड़कों पर काम पूरा होने की जानकारी दी गई।

    बैठक में नवीनीकरण और विशेष मरम्मत के कार्यों की भी समीक्षा हुई। नवीनीकरण के लिए करीब 30 हजार किलोमीटर और विशेष मरम्मत के लिए करीब पांच हजार किलोमीटर का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अब तक करीब 14 हजार किलोमीटर में नवीनीकरण और करीब 700 किलोमीटर में विशेष मरम्मत की प्रगति बताई गई।

    मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़कें आम लोगों के रोजमर्रा के जीवन से सीधे जुड़ी हैं। उन्होंने शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों, मुख्य बाजारों, सरकारी कार्यालयों और अधिक जन आवागमन वाले अन्य स्थानों की सड़कों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। साथ ही अधिकारियों से कहा कि जहां मरम्मत की जरूरत है, वहां बिना देरी काम शुरू कराया जाए और सड़क को जल्द आवागमन योग्य बनाया जाए। उन्होंने काम की गति के साथ गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।

  • एमपी में मानसूनी सिस्टम कमजोर, आज पूरे प्रदेश में कोई अलर्ट नहीं, कल हो सकती है तेज बारिश

    एमपी में मानसूनी सिस्टम कमजोर, आज पूरे प्रदेश में कोई अलर्ट नहीं, कल हो सकती है तेज बारिश


    भोपाल। मध्य प्रदेश में फिलहाल मानसून की रफ्तार सुस्त पड़ गई है। बुधवार को सैटेलाइट तस्वीरों में प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों से बादल छंटे नजर आए और कहीं भी तेज बारिश नहीं हुई। मौसम विभाग के अनुसार अगले तीन दिन भी भारी बारिश से राहत रहेगी। IMD भोपाल ने गुरुवार को प्रदेश के किसी भी जिले में तेज बारिश का अलर्ट जारी नहीं किया है। शुक्रवार को उमरिया, मंडला, बालाघाट और डिंडौरी में भारी बारिश की संभावना जताई गई है।

    मौसम विभाग के मुताबिक प्रदेश में इस समय बारिश कराने वाला कोई सक्रिय सिस्टम नहीं है। पश्चिमी क्षेत्र में एक साइक्लोनिक सर्कुलेशन जरूर बना हुआ है, लेकिन इसका प्रदेश पर खास असर नहीं पड़ रहा है।

    धूप तेज, कुछ जगह हल्की बारिश के आसार

    सिस्टम कमजोर होने के कारण बुधवार को प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में तेज धूप निकली। भोपाल में भी अचानक बदले मौसम के कारण लोगों को गर्मी और उमस का सामना करना पड़ा। गुरुवार को भी मौसम का मिजाज लगभग ऐसा ही रहने का अनुमान है। ज्यादातर स्थानों पर धूप रहेगी, हालांकि कुछ इलाकों में हल्की बारिश हो सकती है।

    13 सितंबर से पश्चिमी एमपी में बढ़ेगा असर

    मौसम विभाग के अनुसार फिलहाल प्रदेश में कोई सक्रिय सिस्टम नहीं है, इसलिए तेज बारिश की संभावना कम है। हालांकि 13 सितंबर से मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है। इस दिन पश्चिमी मध्य प्रदेश के जिलों में तेज बारिश का दौर शुरू होने का अनुमान है।

    पूर्वी हिस्से में बारिश की कमी अब कम हुई

    प्रदेश के पूर्वी हिस्से में बारिश का आंकड़ा पिछले एक सप्ताह में काफी सुधरा है। जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में बारिश सामान्य से 1% तक कम है। वहीं बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 5% से 25% तक कम बारिश दर्ज की गई है।

    पिछले एक सप्ताह के दौरान पूर्वी हिस्से के कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात बने रहे। इससे बारिश के आंकड़ों में सुधार आया और सीजन में पहली बार पूर्वी क्षेत्र की स्थिति बेहतर हुई। हालांकि बुधवार तक यहां बारिश सामान्य से करीब 1% कम रही।

    पश्चिमी एमपी के 21 जिलों में बारिश कम

    पश्चिमी मध्य प्रदेश के आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में औसत से 7% से 55% तक कम बारिश दर्ज की गई है। कॉपी में खंडवा का नाम दो बार दर्ज है।

    इन जिलों में औसत से ज्यादा बारिश

    IMD के अनुसार अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी में औसत से अधिक बारिश दर्ज की गई है।

  • MP में मानसून का ब्रेक, 3 दिन तेज बारिश नहीं, 12 से फिर सक्रिय होगा नया सिस्‍टम

    MP में मानसून का ब्रेक, 3 दिन तेज बारिश नहीं, 12 से फिर सक्रिय होगा नया सिस्‍टम


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की गतिविधियां फिलहाल कमजोर पड़ गई हैं। मौसम केंद्र भोपाल के मुताबिक 9 से 11 सितंबर तक प्रदेश में कहीं भी अति भारी या भारी बारिश का अनुमान नहीं है। इन तीन दिनों में कुछ इलाकों में हल्की बारिश हो सकती है। स्थानीय सिस्टम सक्रिय होने और पर्याप्त नमी मिलने पर कुछ जिलों में तेज बारिश की स्थिति बन सकती है।

    मौसम विभाग के मुताबिक 11 सितंबर को पश्चिम-मध्य और उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में लो प्रेशर एरिया यानी कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना है। इसका असर 12 सितंबर से मध्य प्रदेश में दिखाई देने लगेगा। मौसम वैज्ञानिक अरुण शर्मा के अनुसार फिलहाल प्रदेश में कोई सक्रिय सिस्टम नहीं है, इसलिए तेज बारिश का दौर थमा हुआ है।

    सैटेलाइट तस्वीरों में ज्यादातर हिस्से साफ
    मंगलवार को मौसम विभाग की नई सैटेलाइट तस्वीरों में प्रदेश के अधिकांश हिस्सों से बादल छंटे नजर आए। भोपाल समेत कई जिलों में तेज धूप रही। हालांकि श्योपुर, उज्जैन, इंदौर, धार, खरगोन और बड़वानी में हल्की बारिश के साथ बादल छाए रहे।

    12 सितंबर को इन जिलों में भारी बारिश का अनुमान
    नए सिस्टम के सक्रिय होने के बाद 12 सितंबर को छतरपुर, पन्ना, दमोह और कटनी में भारी बारिश का अनुमान जताया गया है। इसके बाद प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है।

    पूर्वी MP में बारिश का आंकड़ा सुधरा
    बारिश के आंकड़ों में पिछले एक सप्ताह में पूर्वी मध्य प्रदेश की स्थिति में सुधार आया है। जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में अब बारिश करीब 1 प्रतिशत तक कम है। बालाघाट, छिंदवाड़ा, डिंडौरी, दमोह, जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, मंडला, रीवा, सागर और सिवनी में सामान्य से 4% से 24% तक कम बारिश हुई है।

    पिछले सप्ताह कई जिलों में लगातार बारिश और बाढ़ जैसे हालात बनने से पूर्वी हिस्से का बारिश का आंकड़ा तेजी से सुधरा। सोमवार तक यह हिस्सा पहली बार सीजन में सामान्य से 1 प्रतिशत अधिक दर्ज किया गया था।

    पश्चिमी हिस्से में अब भी बारिश की कमी
    इसके उलट पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई जिलों में बारिश का आंकड़ा अभी भी सामान्य से काफी नीचे है। आलीराजपुर, अशोकनगर, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, बड़वानी, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से 7% से 55% तक कम बारिश दर्ज की गई है।

    इन 23 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश
    IMD के आंकड़ों के मुताबिक अनूपपुर, छतरपुर, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पन्ना, सतना, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़, उमरिया, आगर-मालवा, भिंड, भोपाल, बुरहानपुर, दतिया, गुना, ग्वालियर, खरगोन, राजगढ़, श्योपुर और शिवपुरी में सामान्य से ज्यादा बारिश हुई है।

    प्रदेश में अब तक कुल 31.2 इंच बारिश दर्ज हो चुकी है। आने वाले दिनों में बंगाल की खाड़ी में बनने वाला कम दबाव का क्षेत्र बारिश के आंकड़ों में और सुधार ला सकता है।

  • मॉनसून ने बढ़ाई मुश्किलें…. केदारनाथ मार्ग पर पत्थर गिरने से 1 महिला की मौत, सैकड़ों यात्री फंसे

    मॉनसून ने बढ़ाई मुश्किलें…. केदारनाथ मार्ग पर पत्थर गिरने से 1 महिला की मौत, सैकड़ों यात्री फंसे


    देहरादून।
    उत्तराखंड (Uttarakhand) में मॉनसून (Monsoon) की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। रविवार को भारी बारिश (Heavy rain) के चलते केदारनाथ (Kedarnath) पैदल मार्ग पर चीरबासा के पास पहाड़ी से पत्थर गिरने ( Landslide) से महिला यात्री की मौत हो गई। खतरे को देखते हुए पुलिस ने केदारनाथ यात्रा को दिनभर रोके रखा। सैकड़ों यात्री अलग-अलग जगहों पर रोके जाने फंस गए। जल्द यात्रियों की आवाजाही शुरू कराई जाएगी।

    रविवार को पुलिस ने सोनप्रयाग और गौरीकुंड से 11 बजे बाद यात्रियों की आवाजाही रोकी। हालांकि इससे पहले चार हजार से अधिक यात्री केदारनाथ के लिए रवाना हो गए थे। लगभग 2500 यात्री केदारनाथ से वापस लौट गए थे। पैदल मार्ग पर जो भी यात्री आवाजाही कर रहे थे उन्हें पुलिस, एसडीआरएफ, वाईएमएफ और डीडीआरएफ के जवानों की मौजूदगी में सुरक्षित गंतव्य तक पहुंचा दिया गया। दिनभर बारिश के चलते यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए उन्हें सोनप्रयाग से आगे जाने की अनुमति नहीं दी गई। कोतवाली प्रभारी सोनप्रयाग सुरेश चन्द्र बलूनी ने बताया कि चीरबासा और अन्य स्थानों में पत्थर गिरते रहे।


    पत्थर की चपेट में आने से महिला यात्री की मौत

    गौरीकुंड से केदारनाथ जा रहे महाराष्ट्र के यात्री जैसे ही चीरबासा के पास पहुंचे तो पहाड़ी से अचानक पत्थर गिरे और इसकी चपेट में आने से एक महिला यात्री की मौत हो गई। जिला आपदा प्रबंधन कंट्रोल रूम के अनुसार 60 वर्षीय मंगल अपाराव सिंधे पत्नी अपाराव सिंधे निवासी निम गांव जिला सोहलपुर महाराष्ट्र की मौत हो गई।


    आज पौड़ी समेत छह जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

    देहरादून। उत्तराखंड में मौसम एक बार फिर करवट लेने जा रहा है। सोमवार को छह जिलों में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के मुताबिक, पौड़ी, नैनीताल, बागेश्वर, चंपावत, यूएसनगर और चमोली में कहीं-कहीं भारी बारिश के आसार हैं। बाकी जिलों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती हैं। मौसम निदेशक डॉ. सीएस तोमर ने आमजन से बारिश के दौरान विशेष सतर्कता बरतने की अपील की है।


    बदरीनाथ-हेमकुंड में बर्फबारी

    गढ़वाल में हो रही बारिश के बीच रविवार को बदरीनाथ-हेमकुंड की ऊंची चोटियों पर हल्की बर्फबारी हुई। बदरीनाथ धाम के नर-नारायण और नीलकंठ पर्वत हिमपा हुआ। इसके अलावा हेमकुंड साहिब की पहाड़ियों, फूलों की घाटी, चिनाप वैली, सोना शिखर और वैली ऑफ फ्लावर्स नेशनल पार्क के कुंठखाल व टिपरा खरक की ऊंची पहाड़ियों पर इस साल की पहली बर्फबारी हुई।

  • देश में फिर सक्रिय हुआ मानसून…. 19 राज्यों में एक सप्ताह भारी बारिश के आसार… अलर्ट जारी

    देश में फिर सक्रिय हुआ मानसून…. 19 राज्यों में एक सप्ताह भारी बारिश के आसार… अलर्ट जारी


    नई दिल्ली।
    दक्षिण-पश्चिम मानसून (South-West Monsoon) एक बार फिर देश के अधिकांश हिस्सों में सक्रिया हुआ है। इसके प्रभाव से उत्तराखंड से लेकर ओडिशा, छत्तीसगढ़ और पूर्वोत्तर के राज्यों में भारी बारिश हुई है। उत्तराखंड में अलग-अलग घटनाओं में 3 बच्चों समेत 11 लोगों की मौत हो गई है, जबकि असम के गुवाहाटी में भूस्खलन में एक ही परिवार के तीन सदस्य समेत चार जिंदा दफन हो गए। मौसम विभाग ने सक्रिय मानसून के चलते 7 सितंबर तक हिमाचल प्रदेश और हरियाणा समेत कम से कम 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश में भारी बारिश की चेतावनी (Heavy rain warning) दी है। छत्तीसगढ़, ओडिशा, बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में तेज बारिश होने की संभावना है।


    भूस्खलन के कारण जनहानि

    हल्द्वानी से मिली जानकारी के मुताबिक, अल्मोड़ा जिले के हवालबाग ब्लॉक के वडयूड़ा गांव में सोमवार रात भूस्खलन की चपेट में आए घर में सो रही एक महिला और उसके दो बच्चों की दबने से मौत हो गई। जिले के धार की तूनी क्षेत्र में देर रात पहाड़ी से आए मलबे की चपेट में आने से दो लोगों की जान चली गई, जबकि भीमताल बाईपास पर नाले में बहने से चार साल की बच्ची की जान चली गई।


    नदी के उफान में बह गईं मां-बेटी

    देहरादून के प्रेमनगर क्षेत्र में मंगलवार तड़के बरसाती रपटे में आए तेज बहाव से दो गाड़ियां बह गई। इसमें तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि दो लोगों को बचा लिया गया। कोटद्वार में कोल्हू नदी के उफान में महिला और उसकी एक साल की बेटी बह गई।


    उत्तराखंड में नदियां उफनाई, रास्ते बंद

    उत्तराखंड में कई नदियां उफान पर हैं। ऊधमसिंह नगर जिले में बारिश से सभी नदियों का जल स्तर खतरे के निशान के करीब पहुंच गया है। नानकसागर बांध से 4000 क्यूसेक पानी छोड़ा गया। शारदा नदी का जलस्तर मंगलवार को एक लाख क्यूसेक से अधिक होने के कारण बैराज पर चार पहिया वाहनों का संचालन रोक दिया गया। दोपहर दो बजे नदी का जलस्तर 1,48,813 क्यूसेक दर्ज किया गया।


    जम्मू-कश्मीर में बारिश से कई रास्ते बाधित

    जम्मू-कश्मीर के कई जिलों में मंगलवार को भारी बारिश हुई। पुंछ जिले में कई नाले उफान पर आ गए। पुंछ-मेंढर मार्ग पर गांव मंगनाड़ में मंगनाड़ नाले के उफान पर आने से मार्ग करीब दो घंटे बाधित रहा। इससे वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। कठुआ जिले के बिलावर और रामकोट क्षेत्रों में भी बारिश हुई। पिछले 24 घंटे में कठुआ में 73 मिलीमीटर, कटड़ा में 62, पुंछ में 38.5 मिमी बारिश हुई।


    नदी का जलस्तर बढ़ा, 6 बच्चों समेत 10 फंसे

    जम्मू-कश्मीर के ही राजोरी जिले में मंगलवार को हुई भारी बारिश के बीच विभिन्न इलाकों में नदी-नालों का जलस्तर अचानक बढ़ गया। इसी दौरान बढून क्षेत्र में जमौला नदी में जलस्तर बढ़ने से 6 बच्चों समेत 10 लोग नदी के बीच फंस गए। सूचना मिलते ही पुलिस और एसडीआरएफ की टीमों ने तत्काल संयुक्त बचाव अभियान चलाकर सभी 10 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। जमौला नदी में पानी बढ़ने से कुछ लोग अचानक उसमें फंस गए थे। पुलिस जवानों और एसडीआरएफ टीम ने तुरंत पहुंचकर राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। संयुक्त टीम ने सावधानीपूर्वक कार्रवाई करते हुए नदी में फंसे 10 लोगों, जिनमें 6 बच्चे भी शामिल थे, को सुरक्षित बाहर निकाला।


    कालका-शिमला ट्रैक 13 तक बंद

    हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश के कारण कालका-शिमला रेलवे ट्रैक पर ब्रिज नंबर 57 के पास मिट्टी बहने से नैरो गेज ट्रेनों का संचालन बुरी तरह से प्रभावित हुआ है। यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए रेलवे प्रशासन ने इस ट्रैक पर चलने वाली सभी ट्रेनों को 13 सितंबर तक रद्द कर दिया है। क्षतिग्रस्त हिस्से की मरम्मत और ट्रैक को सुरक्षित बनाने का काम युद्धस्तर पर चल रहा है।

  • बरसात में डेंगू का खतरा बढ़ा, प्लेटलेट्स ही नहीं, ये संकेत भी बताते हैं बीमारी हो रही गंभीर

    बरसात में डेंगू का खतरा बढ़ा, प्लेटलेट्स ही नहीं, ये संकेत भी बताते हैं बीमारी हो रही गंभीर


    नई दिल्ली।
    बरसात (Rain) के दिनों में मच्छरों (Mosquitoes) के कारण होने वाली डेंगू (Dengue) जैसी बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बीते दिनों हुई बारिश और जगह-जगह जल जमाव के कारण राजधानी दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) में डेंगू के मामले बढ़ने लगे हैं।

    दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में इस साल अब तक डेंगू के 272 मामले सामने आए हैं। इसके अलावा मलेरिया के 95 और चिकनगुनिया के 21 मामले दर्ज हो चुके हैं। इतना ही नहीं पिछले एक सप्ताह में डेंगू के 26, मलेरिया के 15 और चिकनगुनिया के दो नए मामले सामने आए हैं।

    राजधानी दिल्ली पहले से ही स्वाइन फ्लू का प्रकोप झेल रही है ऐसे में डेंगू के मामलों ने डबल अटैक कर दिया है। एडीज एजिप्टी मच्छरों के कारण होने वाली ये बीमारी कुछ लोगों में गंभीर और जानलेवा भी हो सकती है। इन्हीं खतरों को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को मच्छरों से बचाव को लेकर अलर्ट रहने की सलाह दे रहे हैं।


    गंभीर हो सकती है डेंगू की बीमारी

    डेंगू का नाम आते ही सबसे पहले दिमाग में प्लेटलेट्स काउंट घूमने लगता है। डेंगू के टेस्ट में इसका कम होना चिंता बढ़ाने लगता है। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं कि डेंगू की गंभीरता सिर्फ प्लेटलेट्स काउंट से तय नहीं होती।

    कई बार मरीज की हालत बिगड़ने लगती है। शरीर प्लेटलेट्स की रिपोर्ट से पहले ही खतरे के संकेत देता है। डॉक्टर कहते हैं, अगर आपको तेज बुखार के साथ लगातार पेट में तेज दर्द, उल्टी, नाक या मसूड़ों से खून आने, बहुत ज्यादा सुस्ती जैसी परेशानी हो रही है तो इसे बिल्कुल इग्नोर न करें। ये भी इशारा करते हैं कि बीमारी गंभीर रूप ले सकती है।


    डेंगू में पेट की दिक्कतों पर भी दें ध्यान

    बुखार के साथ या बुखार कम होने के बाद भी अगर अचानक तेज पेट दर्द शुरू हो जाए तो इसे बिल्कुल हल्के में न लें। पेट में दर्द गंभीर डेंगू का संकेत हो सकता है। डेंगू के मरीजों को उल्टी होने की भी दिक्कत रहती है। बार-बार उल्टी होने की स्थिति में अगर मरीज पानी और दूसरे तरल पदार्थ ठीक से नहीं ले रहा है तो इससे शरीर में डिहाइड्रेशन की दिक्कत बढ़ सकती है।


    नाक या मसूड़ों से खून आना

    नाक या मसूड़ों से खून आना डेंगू का गंभीर संकेत हो सकता है। कुछ लोगों में उल्टी या मल में भी खून दिखाई दे सकता है। डॉक्टर कहते हैं, गंभीर स्थिति में डेंगू अत्यधिक रक्तस्राव का कारण बनता है। इसलिए डेंगू के मरीज में किसी भी तरह का असामान्य रक्तस्राव दिखाई दे तो इसे सिर्फ प्लेटलेट्स कम होने का सामान्य असर मानकर घर पर इंतजार नहीं करना चाहिए। ऐसे लक्षणों में तुरंत डॉक्टर के पास ले जाएं।


    थकान-कमजोरी की दिक्कत

    गंभीर डेंगू में शरीर से तरल पदार्थ निकलने के कारण खून का संचार प्रभावित हो सकता है। इससे लो ब्लड प्रेशर और शॉक जैसी समस्याओं का भी जोखिम हो सकता है। इस स्थिति में मरीज को अचानक बहुत ज्यादा कमजोरी, चक्कर, बेहोशी जैसा महसूस होती है। लगातार बढ़ती कमजोरी को सिर्फ बुखार के बाद की थकान मानना सही नहीं है। अगर डेंगू के मरीज की अचानक सांस फूलने लगे या सांस लेने में दिक्कत हो तो उसे तुरंत डॉक्टर के पास ले जाएं।


    क्या कहते हैं डॉक्टर?

    डॉक्टर कहते हैं, डेंगू को लेकर सबसे बड़ी गलतफहमी यह है कि बुखार उतर जाने पर अक्सर लोग मान लेते हैं कि बीमारी ठीक हो गई। हालांकि कई बार डेंगू के गंभीर संकेत अक्सर बुखार कम होने के 24 से 48 घंटे बाद दिखाई दे सकते हैं। इसलिए बुखार उतरने के बाद भी मरीज की सेहत पर लगातार ध्यान देते रहें। पेट में तेज दर्द, लगातार उल्टी, खून आने, बहुत ज्यादा सुस्ती, बेचैनी या सांस लेने में परेशानी जैसे संकेत दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। डेंगू में प्लेटलेट्स की जांच महत्वपूर्ण है, लेकिन केवल प्लेटलेट्स काउंट से ही बीमारी की गंभीरता तय नहीं की जा सकती।

  • इस साल 2009 के बाद होगी सबसे कम बारिश… मॉनसून की जल्द हो सकती है वापसी !

    इस साल 2009 के बाद होगी सबसे कम बारिश… मॉनसून की जल्द हो सकती है वापसी !


    नई दिल्ली।
    भारत (India) में इस साल का मानसून (Monsoon) करीब दो दशक में सबसे कमजोर रहने का अनुमान है। एक रिपोर्ट में मौसम विभाग (IMD) के दो वरिष्ठ अधिकारियों ने मानसून के अंतिम माह सितंबर (September) में भी कम बारिश (Rain) होने की आशंका जताई है। इस दौरान देश में सामान्य से करीब 15 प्रतिशत कम बारिश हो सकती है। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा हुआ तो 2009 के बाद यह सबसे कमजोर मानसून होगा।

    भारत की करीब 70 प्रतिशत वार्षिक बारिश मानसून से होती है। बारिश में बड़ी कमी का असर खरीफ फसलों के उत्पादन, खाद्य कीमतों और ग्रामीण आय पर पड़ सकता है। खासकर सितंबर में पर्याप्त बारिश नहीं होने पर कपास, सोयाबीन, मक्का और दलहन जैसी फसलों की पैदावार प्रभावित हो सकती है। इससे गेहूं और सरसों जैसी रबी फसलों के लिए जरूरी मिट्टी की नमी पर भी असर पड़ सकता है। फिलहाल सितंबर की बारिश मानसून और कृषि दोनों के लिए निर्णायक मानी जा रही है।


    सितंबर में बारिश पर सबसे नजर

    रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर में एल नीनो का असर और मजबूत होने की आशंका है। मौसम विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सितंबर में बारिश की कमी दो अंकों में पहुंच सकती है। कुछ पूर्वी राज्यों को छोड़कर अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने का अनुमान है। फिलहाल इस साल के पूरे मानसून सीजन में बारिश सामान्य से 13 प्रतिशत कम है। जुलाई में एक प्रतिशत अधिक बारिश ने कुछ राहत दी। अगस्त में मानसून फिर कमजोर पड़ा।


    मानसून की वापसी भी जल्दी संभव

    मौसम विभाग के एक अन्य अधिकारी के अनुसार, अगर कोई नई मौसम प्रणाली विकसित नहीं हुई तो मानसून अगले महीने उत्तर-पश्चिम भारत से सामान्य समय से कुछ दिन पहले लौटना शुरू कर सकता है। आमतौर पर मानसून की वापसी उत्तर-पश्चिम भारत से करीब 17 सितंबर के आसपास शुरू होती है और अक्टूबर के मध्य तक पूरे देश से इसकी वापसी हो जाती है।


    तमिलनाडु में जलभराव से आमजन परेशान

    चेन्नई और आसपास के तिरुवल्लूर, कांचीपुरम और चेंगलपट्टू जिलों में तेज बारिश से कई इलाकों में पानी भर गया। सड़कों पर जलभराव से यातायात प्रभावित हुआ। चेन्नई में सोमवार सुबह तक कई इलाकों में बारिश दर्ज की गई।


    पश्चिम बंगाल के कई जिलों में चलेगी तेज हवा

    पश्चिम बंगाल के उत्तर और दक्षिण 24 परगना, मेदिनीपुर, झाड़ग्राम, पुरुलिया, कोलकाता और हावड़ा में 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलेंगी। दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी और अलीपुरद्वार में भारी बारिश की संभावना है।


    छत्तीसगढ़ में अगले सात दिन भारी बारिश के आसार

    छत्तीसगढ़ में मौसम विभाग ने अगले सात दिनों तक मध्यम से भारी बारिश जारी रहने का अनुमान जताया है। वहीं, पूर्वी राजस्थान में भारी बारिश की संभावना है। कोटा, भरतपुर और जयपुर संभाग के कुछ इलाकों में भारी बारिश की संभावना है।

  • डेंगू के बढ़ते खतरे के बीच बरतें सावधानी, तेज बुखार के साथ पेट दर्द, रक्तस्राव या सांस फूलने पर तुरंत डॉक्टर से मिलें

    डेंगू के बढ़ते खतरे के बीच बरतें सावधानी, तेज बुखार के साथ पेट दर्द, रक्तस्राव या सांस फूलने पर तुरंत डॉक्टर से मिलें

    नई दिल्ली । बारिश के मौसम में मच्छरों से होने वाली बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। जुलाई से अक्तूबर के बीच डेंगू और मलेरिया जैसे संक्रमण के मामले बढ़ने की आशंका रहती है। डेंगू की शुरुआत कई बार सामान्य वायरल बुखार जैसी ही दिखाई देती है, इसलिए मरीज और परिवार के लोग शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं। तेज बुखार, सिरदर्द, शरीर में दर्द, कमजोरी, जी मिचलाना और उल्टी जैसी शिकायतें डेंगू में देखी जा सकती हैं। हालांकि केवल लक्षणों के आधार पर डेंगू की पुष्टि नहीं की जा सकती और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी होता है।

    डेंगू संक्रमित एडीज मच्छर के काटने से फैलता है। बारिश के बाद घरों और आसपास जमा साफ पानी मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल वातावरण तैयार कर सकता है। ऐसे में पानी जमा होने वाली जगहों की नियमित सफाई और मच्छरों से बचाव के उपाय बेहद महत्वपूर्ण हो जाते हैं। दिन के समय भी मच्छरों से बचने के लिए शरीर को ढककर रखना और आवश्यकता के अनुसार मच्छररोधी उपाय अपनाना उपयोगी हो सकता है।

    डेंगू के मरीज में कमजोरी और शरीर में दर्द होना आम लक्षण हो सकते हैं, लेकिन अगर कमजोरी अचानक बहुत ज्यादा बढ़ जाए और मरीज को उठने-बैठने में परेशानी होने लगे तो इसे सामान्य मानकर घर पर इंतजार नहीं करना चाहिए। अत्यधिक सुस्ती, बेचैनी या तेजी से बिगड़ती तबीयत भी चिकित्सकीय मदद लेने का संकेत हो सकती है।

    तेज बुखार के साथ पेट में गंभीर दर्द या पेट दबाने पर अधिक दर्द होना भी चिंता का कारण है। डेंगू के गंभीर मामलों में शरीर में तरल संतुलन और रक्तसंचार से जुड़ी जटिलताएं हो सकती हैं। इसलिए लगातार पेट दर्द या असामान्य बेचैनी होने पर डॉक्टर से तत्काल संपर्क करना जरूरी है।

    सांस सामान्य से बहुत तेज चलना या सांस लेने में परेशानी होना भी गंभीर संकेत माना जाता है। ऐसी स्थिति में मरीज को घर पर केवल सामान्य बुखार समझकर इलाज करते रहना उचित नहीं है। चिकित्सकीय जांच के बाद ही स्थिति की गंभीरता और आवश्यक उपचार तय किया जा सकता है।

    नाक या मसूड़ों से खून आना, उल्टी में खून दिखाई देना अथवा मल में रक्त आना भी डेंगू के गंभीर चेतावनी संकेतों में शामिल हो सकते हैं। बुखार के साथ इनमें से कोई लक्षण दिखाई दे तो तत्काल चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए। अत्यधिक रक्तस्राव गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है।

    डेंगू के इलाज में आमतौर पर लक्षणों को नियंत्रित करने, शरीर में पर्याप्त तरल बनाए रखने और जटिलताओं की निगरानी पर ध्यान दिया जाता है। बुखार या दर्द के लिए दवा डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही लेनी चाहिए। एस्पिरिन और आइबुप्रोफेन जैसी दवाओं का इस्तेमाल चिकित्सकीय सलाह के बिना नहीं करना चाहिए, क्योंकि कुछ परिस्थितियों में रक्तस्राव का खतरा बढ़ सकता है। तेज बुखार होने पर स्वयं दवा लेने के बजाय डॉक्टर से परामर्श करना अधिक सुरक्षित है।

    बरसात में डेंगू से बचाव के लिए घर और आसपास पानी जमा न होने दें, कूलर, गमले, टंकियों और अन्य पात्रों की नियमित सफाई करें तथा मच्छरों से बचाव के उपाय अपनाएं। बुखार आने पर पर्याप्त आराम और तरल पदार्थ लेना महत्वपूर्ण है, लेकिन गंभीर चेतावनी संकेत दिखाई देने पर घरेलू देखभाल तक सीमित रहना उचित नहीं है। समय पर चिकित्सकीय सलाह और आवश्यक जांच से स्थिति को गंभीर होने से रोकने में मदद मिल सकती है।

  • सावन में नॉनवेज क्यों छोड़ते हैं लोग, जानिए धार्मिक मान्यता के साथ मानसून और खाद्य सुरक्षा से जुड़े प्रमुख कारण

    सावन में नॉनवेज क्यों छोड़ते हैं लोग, जानिए धार्मिक मान्यता के साथ मानसून और खाद्य सुरक्षा से जुड़े प्रमुख कारण

    नई दिल्ली ।सावन का महीना शुरू होते ही देश के कई हिस्सों में लोग खानपान में बदलाव करते हैं। बहुत से परिवारों में इस दौरान मांस, मछली, चिकन और अंडे से दूरी बनाई जाती है। कुछ लोग प्याज और लहसुन का सेवन भी छोड़ देते हैं। आमतौर पर इसे धार्मिक आस्था से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन इसके पीछे जीवनशैली, संयम, जीवदया और मानसून के दौरान खाद्य सुरक्षा जैसे पहलुओं को भी समझा जा सकता है।

    हिंदू परंपरा में सावन भगवान शिव की आराधना के लिए विशेष माना जाता है। इस दौरान श्रद्धालु व्रत रखते हैं, पूजा करते हैं और ध्यान तथा धार्मिक गतिविधियों में समय देते हैं। धार्मिक दृष्टि से साधना के समय भोजन में सादगी और संयम को महत्व दिया जाता है। इसी सोच के तहत कई लोग मांसाहार छोड़कर हल्का और सात्त्विक भोजन अपनाते हैं।

    सात्त्विक भोजन की अवधारणा ताजे, पौष्टिक और अपेक्षाकृत हल्के भोजन से जुड़ी है। इसका उद्देश्य केवल खानपान को बदलना नहीं, बल्कि इंद्रियों पर नियंत्रण और मन को शांत रखने की साधना से भी जोड़ा जाता है। हालांकि धार्मिक ग्रंथों में सावन के दौरान हर व्यक्ति के लिए मांसाहार पूरी तरह प्रतिबंधित होने का सीधा निर्देश नहीं मिलता। यह परंपरा धार्मिक आचार, स्थानीय मान्यताओं और लंबे समय से चली आ रही जीवनशैली का हिस्सा बनी है।

    सावन चातुर्मास की अवधि में भी आता है। परंपरागत रूप से यह समय तप, व्रत, दान और आत्मसंयम के लिए महत्वपूर्ण माना गया है। वर्षा ऋतु में साधु-संतों द्वारा यात्राएं सीमित करने की परंपरा भी रही है। इसे मौसम की कठिन परिस्थितियों के साथ-साथ छोटे जीवों को अनजाने में नुकसान से बचाने की भावना से भी जोड़ा जाता है।

    बारिश के मौसम में वातावरण में नमी बढ़ जाती है और कई प्रकार के सूक्ष्मजीवों की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। मांस, मछली, चिकन और अंडे जैसे खाद्य पदार्थ जल्दी खराब होने वाले होते हैं। इनके सुरक्षित भंडारण और उचित तापमान पर रखे जाने की जरूरत होती है। कच्चे मांस को गलत तरीके से रखने या संभालने पर उसमें मौजूद हानिकारक सूक्ष्मजीव दूसरे खाद्य पदार्थों तक भी पहुंच सकते हैं।

    मानसून में जलभराव, दूषित पानी, अस्वच्छ बाजार और बिजली आपूर्ति में बाधा जैसी परिस्थितियां खाद्य पदार्थों की स्वच्छता को प्रभावित कर सकती हैं। पुराने समय में रेफ्रिजरेशन और सुरक्षित परिवहन की सुविधाएं सीमित थीं। ऐसे वातावरण में जल्दी खराब होने वाले भोजन से दूरी बनाना व्यावहारिक सावधानी भी रही होगी।

    हालांकि विज्ञान यह नहीं कहता कि सावन के महीने में मांसाहार अपने आप हानिकारक हो जाता है। बीमारी का जोखिम मुख्य रूप से भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता, भंडारण और पकाने की प्रक्रिया पर निर्भर करता है। यदि मांस या मछली ताजा हो, उचित तापमान पर रखी गई हो और पूरी तरह पकाई जाए तो संक्रमण का खतरा कम किया जा सकता है।

    इसी तरह यह दावा भी सही नहीं है कि सावन में हर व्यक्ति की पाचन शक्ति निश्चित रूप से कमजोर हो जाती है। उमस, कम शारीरिक गतिविधि, अनियमित खानपान और बहुत अधिक तला या मसालेदार भोजन कुछ लोगों में अपच और भारीपन बढ़ा सकता है, लेकिन इसका प्रभाव व्यक्ति की स्थिति और खानपान पर निर्भर करता है।

    इसलिए सावन में नॉनवेज खाना या छोड़ना व्यक्तिगत आस्था, पारिवारिक परंपरा और स्वास्थ्य संबंधी प्राथमिकताओं पर निर्भर कर सकता है। धार्मिक दृष्टि से इसे संयम और जीवदया का माध्यम माना जाता है, जबकि स्वास्थ्य की दृष्टि से मानसून में भोजन की स्वच्छता और सुरक्षित रखरखाव पर विशेष ध्यान देना अधिक महत्वपूर्ण है।

    सावन की इस परंपरा को केवल डर या बीमारी से जोड़कर देखने के बजाय इसके व्यापक भाव को समझना जरूरी है। इसमें कुछ समय के लिए स्वाद और इच्छाओं पर नियंत्रण, सादगी अपनाने, प्रकृति के प्रति संवेदनशील रहने और भोजन को लेकर सावधानी बरतने की भावना शामिल है।