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  • MP में मानसून पड़ा सुस्‍त, औसत से 18% कम बरसा पानी, 43 जिले पिछड़े, आज 5 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

    MP में मानसून पड़ा सुस्‍त, औसत से 18% कम बरसा पानी, 43 जिले पिछड़े, आज 5 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की रफ्तार धीमी पड़ने से बारिश का आंकड़ा लगातार गिर रहा है। प्रदेश में अब तक सामान्य से 18 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है और 55 में से 43 जिले औसत से पीछे चल रहे हैं। पिछले पांच दिनों से कहीं भी भारी बारिश रिकॉर्ड नहीं हुई है। हालांकि मौसम विभाग ने नए पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के बाद मौसम में बदलाव की संभावना जताई है। बुधवार को पांच जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

    मौसम विभाग के अनुसार, पिछले तीन-चार दिनों से प्रदेश के ऊपर मौसम संबंधी सिस्टम सक्रिय तो रहे, लेकिन पर्याप्त मजबूत नहीं होने के कारण व्यापक और तेज बारिश नहीं हो सकी। इसके चलते बारिश का कुल आंकड़ा लगातार घटता गया। फिलहाल प्रदेश के उत्तरी हिस्से में दो चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय हैं, जिनके प्रभाव से ग्वालियर-चंबल, सागर और रीवा संभाग के कुछ क्षेत्रों में बारिश हुई है।

    मौसम वैज्ञानिक शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार, एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हुआ है, जिसका असर अगले कुछ दिनों में प्रदेशभर में दिखाई देगा। इसके प्रभाव से कई इलाकों में तेज बारिश का दौर शुरू होने की संभावना है।

    इन जिलों में भारी बारिश का अलर्ट
    बुधवार को दतिया, भिंड, छतरपुर, पन्ना और सतना में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। इसके अलावा भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, अलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, अशोकनगर, मुरैना, श्योपुर, जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, पांढुर्णा, रीवा, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, दमोह, टीकमगढ़ और निवाड़ी में कहीं हल्की तो कहीं तेज बारिश होने की संभावना है।

    कोटे से 3.5 इंच कम बारिश
    मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में अब तक औसतन 407.2 मिमी (16 इंच) बारिश हुई है, जबकि इस समय तक 495.2 मिमी (19.5 इंच) बारिश हो जानी चाहिए थी। यानी प्रदेश में अब तक करीब 3.5 इंच (18 प्रतिशत) बारिश की कमी दर्ज की गई है।

    पूर्वी हिस्से की स्थिति सबसे खराब
    पूर्वी मध्य प्रदेश के जबलपुर, शहडोल, रीवा और सागर संभाग में औसतन 22 प्रतिशत कम बारिश हुई है। इन संभागों का कोई भी जिला सामान्य बारिश के आंकड़े तक नहीं पहुंच पाया है। अनूपपुर, बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, डिंडौरी, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सतना, सिवनी, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़ और उमरिया में सामान्य से 1 से 42 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई है।

    वहीं पश्चिमी मध्य प्रदेश के भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम और ग्वालियर-चंबल संभाग में औसतन 15 प्रतिशत कम बारिश हुई है। भोपाल, दतिया, धार, गुना, ग्वालियर, हरदा, झाबुआ, मुरैना, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, राजगढ़, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, उज्जैन और विदिशा समेत कई जिले अभी भी औसत से पीछे हैं। अब तक बड़वानी, भिंड, बुरहानपुर, देवास, इंदौर, खंडवा और खरगोन ऐसे जिले हैं, जहां सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की गई है।

  • बारिश में ऑयली स्किन से बढ़ सकती हैं त्वचा की समस्याएं, सही फेस वॉश का चुनाव बन सकता है असरदार उपाय

    बारिश में ऑयली स्किन से बढ़ सकती हैं त्वचा की समस्याएं, सही फेस वॉश का चुनाव बन सकता है असरदार उपाय

    नई दिल्ली । बारिश का मौसम गर्मी से राहत जरूर देता है, लेकिन बढ़ी हुई नमी और उमस त्वचा से जुड़ी कई परेशानियों को भी बढ़ा सकती है। विशेष रूप से ऑयली और कॉम्बिनेशन स्किन वाले लोगों को इस मौसम में अतिरिक्त सीबम, पसीना और धूल-मिट्टी के कारण चेहरे पर चिपचिपाहट महसूस होती है। यदि त्वचा की नियमित सफाई पर ध्यान न दिया जाए, तो मुंहासे, ब्लैकहेड्स, खुले रोमछिद्र और त्वचा की चमक कम होने जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। ऐसे में त्वचा के प्रकार के अनुसार सही फेस वॉश का चयन करना महत्वपूर्ण माना जाता है।

    त्वचा विशेषज्ञों के अनुसार मानसून के दौरान ऐसा फेस वॉश चुनना चाहिए जो त्वचा की गहराई से सफाई करे, अतिरिक्त तेल को नियंत्रित रखे और साथ ही त्वचा की प्राकृतिक नमी को भी बनाए रखे। अत्यधिक कठोर उत्पादों का इस्तेमाल करने से त्वचा रूखी हो सकती है, जबकि हल्के और संतुलित फॉर्मूले वाले फेस वॉश त्वचा को साफ रखने के साथ उसे ताजगी भी प्रदान करते हैं।

    ऑयली और मुंहासों की समस्या से परेशान लोगों के लिए सैलिसिलिक एसिड युक्त फेस वॉश उपयोगी विकल्प माना जाता है। यह रोमछिद्रों के भीतर जमा अतिरिक्त तेल और गंदगी को साफ करने में मदद करता है तथा ब्लैकहेड्स और पिंपल्स बनने की संभावना को कम करने में सहायक हो सकता है। विशेषज्ञ इसकी सलाह त्वचा की आवश्यकता के अनुसार दिन में एक या दो बार तक उपयोग करने की देते हैं।

    नीम और टी ट्री ऑयल वाले फेस वॉश भी मानसून में काफी लोकप्रिय माने जाते हैं। इन प्राकृतिक तत्वों में एंटीबैक्टीरियल और एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं, जो त्वचा पर मौजूद बैक्टीरिया को कम करने और मुंहासों की समस्या को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं। ऑयली और एक्ने-प्रोन स्किन वाले लोगों के लिए यह संयोजन लाभदायक माना जाता है।

    यदि त्वचा पर धूल, प्रदूषण और अतिरिक्त तेल अधिक जमा होता है, तो एक्टिवेटेड चारकोल युक्त फेस वॉश भी एक अच्छा विकल्प हो सकता है। यह त्वचा की गहराई से सफाई करने में मदद करता है और चेहरे को ताजगी का एहसास देता है। हालांकि विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि इसका अत्यधिक उपयोग नहीं करना चाहिए, क्योंकि बार-बार इस्तेमाल करने से कुछ लोगों की त्वचा रूखी महसूस हो सकती है।

    जेल बेस्ड फेस वॉश भी मानसून के मौसम में व्यापक रूप से उपयोग किए जाते हैं। इनमें एलोवेरा, खीरा या हायल्यूरोनिक एसिड जैसे तत्व शामिल हो सकते हैं, जो त्वचा को बिना अधिक रूखा किए साफ करने में मदद करते हैं। यह फेस वॉश अतिरिक्त तेल हटाने के साथ त्वचा की हल्की नमी बनाए रखते हैं, जिससे चेहरा लंबे समय तक फ्रेश महसूस होता है। ऑयली और कॉम्बिनेशन स्किन वाले लोगों के लिए इन्हें उपयुक्त माना जाता है।

    विटामिन सी युक्त फेस वॉश भी त्वचा की देखभाल में उपयोगी माने जाते हैं। यह चेहरे की डलनेस कम करने, त्वचा को ताजगी देने और पर्यावरणीय प्रभावों से होने वाले नुकसान से बचाने में सहायक हो सकते हैं। नियमित स्किनकेयर रूटीन के साथ इनका उपयोग त्वचा की प्राकृतिक चमक बनाए रखने में मदद कर सकता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि केवल फेस वॉश बदलना ही पर्याप्त नहीं है। मानसून में दिन में दो बार चेहरे की सफाई करना, पर्याप्त पानी पीना, हल्का मॉइश्चराइजर लगाना और त्वचा के अनुसार उपयुक्त स्किनकेयर उत्पादों का इस्तेमाल करना भी जरूरी है। सही देखभाल और संतुलित दिनचर्या अपनाकर बारिश के मौसम में भी त्वचा को साफ, ताजा और स्वस्थ बनाए रखा जा सकता है।

  • तेलंगाना में घर के आंगन में पहुंचा 12 फीट लंबा अजगर, सुबह-सुबह विशालकाय जीव को देख फैली भारी दहशत।

    तेलंगाना में घर के आंगन में पहुंचा 12 फीट लंबा अजगर, सुबह-सुबह विशालकाय जीव को देख फैली भारी दहशत।

    नई दिल्ली। मानसून के मौसम में वन्यजीवों का प्राकृतिक आवासों से निकलकर आबादी वाले इलाकों की ओर रुख करने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। इसी क्रम में तेलंगाना के मंचेरियल जिले से एक बेहद चौंकाने वाला और भयावह मामला प्रकाश में आया है। मंचेरियल के मंदामर्री सेकेंड जोन इलाके में एक आवासीय मकान के आंगन में अचानक लगभग 12 फीट लंबा विशालकाय अजगर दिखाई देने से पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया। सुबह-सुबह घटी इस घटना के बाद स्थानीय निवासियों और पीड़ित परिवार के सदस्यों के बीच भारी दहशत का माहौल बन गया।

    घटना की शुरुआत सुबह के समय हुई जब घर के सदस्य अपने दैनिक कार्यों में व्यस्त थे। इसी दौरान आंगन में एक कोने में कुंडली मारकर बैठे विशालकाय अजगर पर गृहस्वामी रमेश और उनके परिजनों की नजर पड़ी। इतने बड़े जीव को अचानक अपने घर के परिसर में देखकर परिवार के सदस्य घबरा गए और तुरंत शोर मचाना शुरू कर दिया। चीख-पुकार सुनकर आसपास के पड़ोसी भी अपने-अपने घरों से बाहर निकल आए और देखते ही देखते मौके पर भारी भीड़ एकत्रित हो गई।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अजगर की लंबाई करीब 12 फीट थी और वह काफी विशाल था। रिहायशी बस्ती के बीचों-बीच इतने बड़े अजगर को देखकर लोग भयभीत हो गए। अनहोनी की आशंका को देखते हुए परिजनों ने तुरंत बच्चों को सुरक्षित कमरों के भीतर बंद कर दिया। हालांकि, इस दौरान कुछ स्थानीय निवासियों ने सुरक्षित दूरी बनाए रखते हुए इस दुर्लभ दृश्य को अपने मोबाइल कैमरों में कैद कर लिया। देखते ही देखते यह वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से प्रसारित होने लगा, जिससे आसपास के अन्य इलाकों में भी चर्चा का बाजार गर्म हो गया।

    स्थानीय निवासियों का कहना है कि क्षेत्र में छोटी-मोटी प्रजातियों के सांप अक्सर देखे जाते हैं, लेकिन इतने बड़े आकार का अजगर पहली बार किसी के घर के भीतर पहुंचा है। विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का मानना है कि बारिश के कारण प्राकृतिक आवासों और जंगलों में पानी भर जाने की वजह से यह जीव सूखे और सुरक्षित स्थान की तलाश में भटकते हुए आबादी वाले क्षेत्र में प्रवेश कर गया। इस घटना के बाद से पूरे मोहल्ले में सतर्कता बढ़ा दी गई है और लोग आसपास की झाड़ियों और खाली पड़े भूखंडों पर विशेष निगरानी रख रहे हैं।

    पर्यावरण और वन्यजीव विशेषज्ञों ने मानसून के दौरान लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। जानकारों का कहना है कि बारिश के दिनों में झाड़ियों, पुरानी लकड़ियों के ढेर और पानी जमा होने वाले स्थानों पर विषैले व विशालकाय जीवों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसी स्थिति में किसी भी वन्यजीव को नुकसान पहुंचाने या उकसाने के बजाय उनसे सुरक्षित दूरी बनाए रखनी चाहिए और तुरंत संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों या वन विभाग की टीम को सूचित करना चाहिए ताकि समय रहते सुरक्षित रेस्क्यू किया जा सके।

  • कल से मॉनसून पकड़ेगा रफ्तार…. अगस्त में होगी झमाझम बारिश, कई राज्यों में अलर्ट

    कल से मॉनसून पकड़ेगा रफ्तार…. अगस्त में होगी झमाझम बारिश, कई राज्यों में अलर्ट

    नई दिल्ली। मॉनसून (Monsoon) की रफ्तार अगस्त के पहले हफ्ते में और तेज होने वाली है. मौसम विभाग यानी आईएमडी (IMD) के मुताबिक देश में बारिश (Rain) की कमी घटकर 14 फीसदी रह गई है, जो पिछले हफ्तों के मुकाबले काफी बेहतर स्थिति है. महाराष्ट्र (Maharashtra) के ऊपर बना गहरा दबाव इस सीजन का सबसे मजबूत मौसमी सिस्टम बन गया है और अरब सागर (Arabian Sea) और बंगाल की खाड़ी (Bay of Bengal) से भारी मात्रा में नमी खींच रहा है।

    इसी बीच गुजरात, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर समेत कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है. गुजरात में सेना को स्टैंडबाय पर रखा गया है, अहमदाबाद में स्कूल बंद कर दिए गए हैं, वहीं दिल्ली, गुरुग्राम, अलवर, बुलंदशहर, लुधियाना और बिहार में जलभराव और कटाव से जुड़ी घटनाएं सामने आई हैं. जम्मू-कश्मीर में शुक्रवार यानि आज के लिए अमरनाथ यात्रा स्थगित कर दी गई है।

    आईएमडी की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, देश भर में मॉनसून कमजोर पड़ने की बजाय और मजबूत होने जा रहा है. मध्य भारत और उत्तर पश्चिम भारत में अब सामान्य बारिश दर्ज हो रही है, जबकि दक्षिण प्रायद्वीप और पूर्वोत्तर भारत में अब भी कमी बनी हुई है।

    महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में पिछले हफ्ते बारिश में साफ सुधार देखा गया है. मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि बंगाल की खाड़ी में जल्द ही नए कम दबाव के क्षेत्र बनने की उम्मीद है, जिससे अगस्त की शुरुआत में भी बारिश का दौर जारी रहेगा. अगर यही रुझान बना रहा तो जलाशयों में पानी बढ़ेगा और खरीफ फसलों को फायदा मिलेगा।

    गुजरात में 31 जुलाई से 2 अगस्त तक 13 जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी दी गई है. अहमदाबाद में रेड अलर्ट जारी करते हुए स्कूल कॉलेज बंद कर दिए गए हैं. सूरत, वडोदरा, भावनगर, भरूच, आणंद, नर्मदा, तापी, डांग, छोटा उदयपुर, पंचमहल, दाहोद और महिसागर में भी हाई अलर्ट है।

    गांधीनगर में अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. जयंती रवि ने सभी जिलों के अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए तैयारियों की समीक्षा की और सभी अफसरों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं. हर जिले में 24 घंटे कंट्रोल रूम काम कर रहे हैं और एनडीआरएफ-एसडीआरएफ की टीमें तैनात कर दी गई हैं. जरूरत पड़ने पर सेना, नौसेना और वायुसेना को भी राहत कार्य के लिए तैयार रखा गया है।

    हिमाचल प्रदेश में भी 27 जुलाई से 1 अगस्त तक मानसून सक्रिय रहेगा. ऊना, बिलासपुर, चंबा, कांगड़ा और शिमला में 31 जुलाई को ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है. राज्य में जुलाई महीने में बारिश लगभग सामान्य रही है, हालांकि हमीरपुर, कांगड़ा, मंडी और लाहौल-स्पीति में सामान्य से कम बारिश दर्ज हुई है।

    दिल्ली में यमुना का जलस्तर बढ़ने से ओखला बैराज के चार गेट खोल दिए गए हैं. गुरुग्राम में साइबर सिटी में जलभराव को लेकर लापरवाही बरतने पर जूनियर इंजीनियर को सस्पेंड कर दिया गया और ठेकेदार पर भारी जुर्माना लगाया गया है।

    अलवर में भिवाड़ी-अलवर बाइपास पर एक बस पानी में फंस गई, जिसे जेसीबी की मदद से निकाला गया. बुलंदशहर में बारिश के दौरान नाले में गिरी छात्रा की तलाश तीसरे दिन भी जारी है. लुधियाना में सड़क धंसने से एक कार गड्ढे में गिर गई, हालांकि किसी को चोट नहीं आई. बिहार के कटिहार में गंगा और कोसी नदी के कटाव से गांव वाले दहशत में हैं और प्रशासन बचाव कार्य में जुटा है।

    जम्मू-कश्मीर में भी भारी बारिश का दौर जारी है. लगातार बारिश के कारण शुक्रवार के लिए अमरनाथ यात्रा को स्थगित कर दिया गया है. पवित्र गुफा के पास अचानक पानी का तेज बहाव देखा गया है।

  • झांसी में फिर सक्रिय हुआ मानसून, बूंदाबांदी से बदला मौसम, अगले पांच दिन बारिश का पूर्वानुमान

    झांसी में फिर सक्रिय हुआ मानसून, बूंदाबांदी से बदला मौसम, अगले पांच दिन बारिश का पूर्वानुमान

    झांसी। एक सप्ताह की सुस्ती के बाद झांसी में मानसून ने दोबारा रफ्तार पकड़ ली है। मंगलवार रात हुई हल्की बूंदाबांदी से मौसम का मिजाज बदल गया और लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिली। मौसम विभाग ने अगले पांच दिनों तक जिले में बारिश की संभावना जताई है, जिससे तापमान में भी गिरावट आने के आसार हैं।

    बीते कई दिनों से बारिश नहीं होने के कारण जिले में धान की फसल प्रभावित हो रही थी। वहीं लगातार बढ़ते तापमान और उमस ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी थी। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव के क्षेत्र के सक्रिय होने से मानसूनी गतिविधियां एक बार फिर तेज हुई हैं।

    मंगलवार शाम करीब पांच बजे आसमान में घने बादल छा गए। इसके बाद ठंडी हवाएं चलीं और रात करीब आठ बजे हल्की बूंदाबांदी शुरू हो गई, जिससे वातावरण में ठंडक घुल गई।

    कृषि विज्ञान केंद्र, भरारी के मौसम वैज्ञानिक डॉ. आदित्य कुमार सिंह ने बताया कि बुधवार से अगले पांच दिनों तक जिले में वर्षा होने की संभावना है। 31 जुलाई तक हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है, जबकि 1 और 2 अगस्त को तेज बारिश होने का अनुमान है। बारिश के असर से अधिकतम तापमान घटकर 32 से 33 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है।

    प्रदेश में सबसे गर्म जिलों में रहा झांसी
    मंगलवार को झांसी का अधिकतम तापमान 36.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 4.3 डिग्री अधिक रहा। वहीं न्यूनतम तापमान 27.1 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो सामान्य से 2.2 डिग्री अधिक था। प्रदेश में बस्ती (36.7 डिग्री सेल्सियस) के बाद झांसी दूसरे सबसे अधिक तापमान वाला जिला रहा।

  • बारिश ने बढ़ाई मुश्किलें: उत्तराखंड में यात्रा पर ब्रेक, छत्तीसगढ़ में बिजली गिरने से पांच की मौत, कई राज्यों में रेड अलर्ट

    बारिश ने बढ़ाई मुश्किलें: उत्तराखंड में यात्रा पर ब्रेक, छत्तीसगढ़ में बिजली गिरने से पांच की मौत, कई राज्यों में रेड अलर्ट


    नई दिल्ली । देशभर में मानसून ने एक बार फिर रफ्तार पकड़ ली है और कई राज्यों में लगातार हो रही बारिश आम जनजीवन पर भारी पड़ रही है। उत्तराखंड में मूसलाधार बारिश और भूस्खलन की घटनाओं को देखते हुए प्रशासन ने चारधाम यात्रा को एहतियातन दो दिनों के लिए स्थगित कर दिया है। वहीं चंपावत बागेश्वर और टिहरी जिलों में खराब मौसम के चलते कक्षा 12 तक के सभी स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों में अवकाश घोषित किया गया है ताकि बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

    राजस्थान में भी तेज बारिश ने लोगों की परेशानियां बढ़ा दी हैं। धौलपुर सहित कई शहरों के बाजारों और निचले इलाकों में पानी भर गया जिससे यातायात प्रभावित हुआ और व्यापारिक गतिविधियां भी प्रभावित रहीं। चित्तौड़गढ़ के बेगूं क्षेत्र में लगातार बारिश के बाद प्रसिद्ध मेनाल जलप्रपात पूरे वेग से बहने लगा जबकि रणथंभौर क्षेत्र में कई स्थानों पर जलस्तर बढ़ने से रास्तों पर पानी बहता दिखाई दिया।

    छत्तीसगढ़ में बारिश के साथ आकाशीय बिजली ने कहर बरपाया। राज्य के अलग अलग हिस्सों में बिजली गिरने की तीन घटनाओं में पांच लोगों की मौत हो गई जबकि ग्यारह लोग घायल हो गए। मौसम विभाग ने अगले दो दिनों तक राज्य के कई जिलों में भारी बारिश और बिजली गिरने की आशंका जताते हुए लोगों से सतर्क रहने की अपील की है।

    गुजरात में भी लगातार हो रही भारी बारिश और बाढ़ जैसी स्थिति का असर औद्योगिक गतिविधियों पर देखने को मिला। साणंद स्थित टाटा मोटर्स प्लांट और उसके आसपास स्थित कई सप्लायर इकाइयों का संचालन अस्थायी रूप से प्रभावित हुआ। वहीं महिसागर जिले का प्रसिद्ध सात कुंड जलप्रपात भी बारिश के बाद पूरे उफान पर पहुंच गया।

    उत्तर प्रदेश के मेरठ सहित कई शहरों में सड़कों पर जलभराव की स्थिति बन गई जिससे लोगों को आवागमन में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। बिहार के कई जिलों में भी लगातार बारिश के कारण नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है और निचले इलाकों में पानी भरने लगा है।

    भारतीय मौसम विभाग के अनुसार इस समय देश के ऊपर दो मजबूत मानसूनी सिस्टम सक्रिय हैं। बंगाल की खाड़ी में बना कम दबाव का क्षेत्र ओडिशा झारखंड और छत्तीसगढ़ से आगे बढ़ते हुए मध्य एवं उत्तर पश्चिम भारत को प्रभावित कर रहा है। इसी कारण मध्य भारत उत्तर पश्चिम भारत और पूर्वी राज्यों में अगले चार से पांच दिनों तक सामान्य से अधिक तथा कई स्थानों पर भारी से अत्यधिक भारी बारिश होने की संभावना है।

    दिल्ली में भी मंगलवार को 50 मिलीमीटर से अधिक बारिश दर्ज की गई। राजधानी के कई इलाकों में जलभराव हुआ मेट्रो स्टेशनों और प्रमुख सड़कों पर पानी भर गया तथा कई पेड़ गिरने की घटनाएं सामने आईं। प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है और लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई है।

    मौसम विभाग ने लोगों से नदी नालों के पास जाने से बचने सुरक्षित स्थानों पर रहने तथा प्रशासन द्वारा जारी दिशा निर्देशों का पालन करने की अपील की है क्योंकि आने वाले दिनों में मानसून का प्रभाव और अधिक बढ़ सकता है।

  • बारिश में जानलेवा रोमांच! प्रतिबंध के बावजूद झरनों तक पहुंच रहे लोग, पांच साल में 70 मौतों के बाद भी नहीं सबक

    बारिश में जानलेवा रोमांच! प्रतिबंध के बावजूद झरनों तक पहुंच रहे लोग, पांच साल में 70 मौतों के बाद भी नहीं सबक


    इंदौर । बारिश का मौसम आते ही इंदौर और आसपास के झरने व प्राकृतिक पर्यटन स्थल लोगों को अपनी ओर आकर्षित करने लगते हैं। हालांकि यह रोमांच कई बार जानलेवा साबित हो रहा है। प्रशासन, पुलिस और वन विभाग की बार-बार चेतावनी के बावजूद प्रतिबंधित क्षेत्रों में लोगों की आवाजाही थमने का नाम नहीं ले रही है। नतीजा यह है कि पिछले पांच वर्षों में इंदौर और महू क्षेत्र के 13 प्रमुख पिकनिक स्पॉट पर 70 युवाओं की जान जा चुकी है। इसके बावजूद लोग बैरिकेड्स पार कर और जंगल के रास्तों से प्रतिबंधित इलाकों तक पहुंच रहे हैं।

    बीते दो दिनों में ही इंदौर के तीन लोगों की अलग-अलग हादसों में मौत हो चुकी है। इन घटनाओं ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर लगातार हादसों और प्रशासनिक प्रतिबंधों के बावजूद लोग अपनी जान जोखिम में डालने से क्यों नहीं बच रहे हैं। सोशल मीडिया पर फोटो और वीडियो बनाने की चाहत भी इस लापरवाही की बड़ी वजह मानी जा रही है।

    महू और उसके आसपास स्थित कई पर्यटन स्थलों पर मानसून के दौरान प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित है। इनमें तिंछा फॉल, चोरल फॉल, चोरल डैम, शीतला माता फॉल, कजलीगढ़, गेंदी कुंड, जामन्या कुंड, मोहदी फॉल, रतवी फॉल, लोधिया कुंड, जूनापानी, चिड़िया भड़क, बामनिया कुंड, जोगी भड़क और हत्यारी खो जैसे स्थान शामिल हैं। इन जगहों पर तेज जलधारा, फिसलन, गहरी खाई और अचानक बढ़ते जलस्तर के कारण हर साल हादसे होते हैं। इसके बावजूद कई पर्यटक चेतावनी बोर्ड और बैरिकेड्स को नजरअंदाज कर खतरनाक इलाकों तक पहुंच जाते हैं।

    हाल ही में महेश्वर के सहस्त्रधारा घाट पर हुआ हादसा भी ऐसी ही लापरवाही का उदाहरण है। इंदौर निवासी अजीत हाड़ा अपने परिवार और दोस्तों के साथ घूमने पहुंचे थे। नर्मदा की तेज धारा में बहने के बाद उनका शव करीब 200 मीटर दूर एक खोह में फंसा मिला। यह घटना उनके परिजनों की आंखों के सामने हुई और पूरे परिवार को गहरा सदमा दे गई।

    विशेषज्ञों का कहना है कि बारिश के दौरान झरनों और नदियों का जलस्तर कुछ ही मिनटों में तेजी से बढ़ सकता है। ऊपर के इलाकों में हुई बारिश का असर नीचे अचानक दिखाई देता है, जिससे सुरक्षित दिखने वाली जगह भी पलभर में खतरनाक बन जाती है। ऐसे में बैरिकेड्स और प्रतिबंध केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि लोगों की सुरक्षा के लिए लगाए जाते हैं।

    प्रशासन लगातार लोगों से अपील कर रहा है कि मानसून के दौरान प्रतिबंधित पिकनिक स्पॉट और झरनों के मुहानों तक जाने से बचें। थोड़ी सी लापरवाही न केवल अपनी बल्कि पूरे परिवार की जिंदगी को हमेशा के लिए बदल सकती है। रोमांच का आनंद तभी तक अच्छा है, जब तक वह सुरक्षित हो। चेतावनियों को नजरअंदाज करना साहस नहीं, बल्कि गंभीर लापरवाही है।

  • मानसून में टायर प्रेशर से न करें समझौता, सही हवा और बेहतर ग्रिप से कम होगा हादसों का जोखिम

    मानसून में टायर प्रेशर से न करें समझौता, सही हवा और बेहतर ग्रिप से कम होगा हादसों का जोखिम


    नई दिल्ली ।
    बारिश का मौसम शुरू होते ही सड़कें फिसलन भरी हो जाती हैं और ऐसे में सुरक्षित ड्राइविंग के लिए वाहन की तकनीकी स्थिति पर विशेष ध्यान देना आवश्यक हो जाता है। अधिकांश चालक इस दौरान वाइपर, ब्रेक और हेडलाइट की जांच तो कराते हैं, लेकिन टायर प्रेशर की अनदेखी कर देते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, सही टायर प्रेशर वाहन की ग्रिप, ब्रेकिंग क्षमता और सड़क पर संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए मानसून के दौरान टायर में हवा का स्तर हमेशा निर्माता कंपनी की सिफारिश के अनुरूप ही होना चाहिए।

    हर वाहन के लिए टायर प्रेशर अलग-अलग निर्धारित किया जाता है। इसकी जानकारी आमतौर पर ड्राइवर साइड के दरवाजे पर लगे स्टिकर या वाहन के ओनर मैनुअल में उपलब्ध रहती है। मौसम बदलने के कारण अपनी ओर से टायर में हवा कम या ज्यादा करना उचित नहीं माना जाता। वाहन निर्माता जिस प्रेशर की सलाह देते हैं, उसी का पालन करने से टायर का सड़क से संपर्क संतुलित बना रहता है और वाहन की पकड़ बेहतर रहती है।

    यदि टायर में आवश्यकता से अधिक हवा भर दी जाए तो उसका सड़क से संपर्क क्षेत्र कम हो जाता है। ऐसी स्थिति में गीली सड़क पर टायर की ग्रिप कमजोर पड़ सकती है। तेज गति में अचानक ब्रेक लगाने या मोड़ लेने पर वाहन के फिसलने की आशंका बढ़ जाती है। अधिक हवा होने से बारिश के दौरान नियंत्रण बनाए रखना कठिन हो सकता है, जिससे दुर्घटना का जोखिम भी बढ़ सकता है।

    दूसरी ओर, कई लोगों का मानना है कि बारिश में टायर का प्रेशर थोड़ा कम रखने से सड़क पर पकड़ बेहतर होती है। हालांकि विशेषज्ञ इस धारणा को सही नहीं मानते। कम हवा होने पर टायर का घिसाव तेजी से बढ़ सकता है, ईंधन की खपत अधिक हो सकती है और लंबी दूरी की यात्रा के दौरान टायर का तापमान भी सामान्य से अधिक बढ़ सकता है। इससे टायर की कार्यक्षमता प्रभावित होने के साथ उसके क्षतिग्रस्त होने की संभावना भी बढ़ जाती है।

    मानसून के दौरान केवल टायर प्रेशर ही नहीं, बल्कि टायर की स्थिति की नियमित जांच भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। यदि टायर का ट्रेड काफी घिस चुका हो या उसकी ग्रिप कमजोर हो गई हो, तो समय रहते उसे बदल देना चाहिए। घिसे हुए टायर गीली सड़क पर पानी को प्रभावी ढंग से बाहर नहीं निकाल पाते, जिससे वाहन के फिसलने का खतरा बढ़ सकता है।

    विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि महीने में कम से कम एक बार टायर प्रेशर की जांच अवश्य करानी चाहिए। यदि लंबी यात्रा पर जाना हो तो प्रस्थान से पहले टायर की हवा, ट्रेड की गहराई और किसी भी प्रकार की क्षति की जांच कर लेना बेहतर होता है। साथ ही स्पेयर टायर की स्थिति भी देखनी चाहिए ताकि आपात स्थिति में परेशानी न हो।

    बारिश के मौसम में सुरक्षित ड्राइविंग केवल सावधानी से वाहन चलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि वाहन के रखरखाव पर भी समान रूप से निर्भर करती है। सही टायर प्रेशर, अच्छी ग्रिप वाले टायर और नियमित निरीक्षण न केवल वाहन के प्रदर्शन को बेहतर बनाते हैं, बल्कि दुर्घटनाओं की संभावना को भी कम करने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। ऐसे में मानसून के दौरान टायरों की नियमित देखभाल को अपनी ड्राइविंग आदत का अनिवार्य हिस्सा बनाना चाहिए।

  • चार दिन तक बारिश का डबल अटैक एमपी के कई जिलों में भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट

    चार दिन तक बारिश का डबल अटैक एमपी के कई जिलों में भारी से अति भारी बारिश की चेतावनी मौसम विभाग ने जारी किया अलर्ट


    मध्य प्रदेश  मध्य प्रदेश में मानसून एक बार फिर पूरी ताकत के साथ सक्रिय हो गया है। प्रदेश में बने मजबूत मानसूनी सिस्टम के कारण अगले चार दिनों तक तेज बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। भारतीय मौसम विभाग ने सोमवार के लिए उमरिया शहडोल अनूपपुर डिंडौरी मंडला और बालाघाट जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। वहीं प्रदेश के 50 से अधिक जिलों में कहीं हल्की तो कहीं तेज बारिश होने की संभावना जताई गई है। मौसम विभाग का कहना है कि 27 से 30 जुलाई के बीच कई इलाकों में भारी से अति भारी बारिश दर्ज की जा सकती है इसलिए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

    मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार प्रदेश के ऊपर से मानसून ट्रफ गुजर रही है। इसके साथ ही एक निम्न दबाव क्षेत्र और डिप्रेशन सक्रिय है जबकि पश्चिमी विक्षोभ भी जल्द प्रभाव दिखाएगा। इन सभी मौसम प्रणालियों के एक साथ सक्रिय होने से प्रदेश में बारिश की गतिविधियां तेजी से बढ़ने लगी हैं। रविवार को पूर्वी मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में अच्छी बारिश दर्ज की गई और अब इसका असर पूरे प्रदेश में देखने को मिलेगा।

    भोपाल रायसेन सीहोर राजगढ़ विदिशा इंदौर धार आलीराजपुर बुरहानपुर बड़वानी खंडवा खरगोन झाबुआ उज्जैन नीमच आगर मालवा मंदसौर शाजापुर देवास रतलाम नर्मदापुरम बैतूल हरदा ग्वालियर गुना शिवपुरी दतिया अशोकनगर मुरैना भिंड श्योपुर जबलपुर कटनी छिंदवाड़ा सिवनी नरसिंहपुर पांढुर्णा रीवा सतना सीधी सिंगरौली मऊगंज मैहर सागर पन्ना दमोह छतरपुर टीकमगढ़ और निवाड़ी समेत अधिकांश जिलों में बारिश का सिलसिला जारी रहने का अनुमान है। कई स्थानों पर गरज चमक के साथ तेज बारिश और बिजली गिरने की भी संभावना जताई गई है।

    मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में अब तक औसतन 13.2 इंच यानी 334.9 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है जबकि इस समय तक 15.5 इंच यानी 395.2 मिलीमीटर बारिश हो जानी चाहिए थी। इस तरह प्रदेश में अब भी करीब 15 प्रतिशत बारिश की कमी बनी हुई है। पूर्वी मध्य प्रदेश में औसत से 18 प्रतिशत और पश्चिमी हिस्से में करीब 13 प्रतिशत कम बारिश रिकॉर्ड की गई है।

    प्रदेश के 55 जिलों में से केवल 14 जिलों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज हुई है जबकि 41 जिले अब भी सामान्य से कम बारिश वाले क्षेत्रों में शामिल हैं। निवाड़ी पूर्वी मध्य प्रदेश का एकमात्र जिला है जहां औसत से अधिक वर्षा हुई है। दूसरी ओर भोपाल इंदौर सीहोर राजगढ़ देवास हरदा बुरहानपुर नीमच मंदसौर दमोह सिवनी आगर मालवा और भिंड जैसे जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य से बेहतर रहा है।

    मौसम विभाग का कहना है कि जून महीने में कमजोर मानसून के कारण बारिश का आंकड़ा काफी पीछे रह गया था। जुलाई के शुरुआती दिनों में अच्छी बारिश से स्थिति सुधरी लेकिन पिछले कुछ दिनों तक बारिश कमजोर रहने से प्रदेश फिर औसत से नीचे पहुंच गया। अब सक्रिय मानसूनी सिस्टम से उम्मीद है कि बारिश की कमी काफी हद तक पूरी हो सकती है।

    विशेषज्ञों के अनुसार जुलाई मध्य प्रदेश के लिए सबसे महत्वपूर्ण बारिश वाला महीना होता है क्योंकि पूरे मानसून की लगभग 40 प्रतिशत वर्षा इसी महीने में होती है। प्रदेश की सामान्य वार्षिक बारिश 37.3 इंच मानी जाती है जबकि भोपाल इंदौर जबलपुर और ग्वालियर जैसे बड़े शहरों में सामान्य वर्षा 38 से 39 इंच के बीच रहती है। मौसम विभाग ने लोगों को नदी नालों से दूर रहने और भारी बारिश के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी है।

  • उत्तर प्रदेश में मानसून का प्रकोप, उफान पर नदियां, पेड़ गिरने से युवक की मौत

    उत्तर प्रदेश में मानसून का प्रकोप, उफान पर नदियां, पेड़ गिरने से युवक की मौत


    उत्तर प्रदेश । उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही मानसूनी बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। पिछले दस दिनों से जारी बारिश के कारण प्रदेश की कई प्रमुख नदियां उफान पर हैं। लखीमपुर खीरी में शारदा नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, जिससे तटीय गांवों में बाढ़ का पानी घुस गया है। खेत, सड़कें और निचले इलाके जलमग्न हो गए हैं। कई स्थानों पर मगरमच्छ आबादी वाले क्षेत्रों तक पहुंचते दिखाई दिए, जिससे लोगों में दहशत का माहौल है।

    सोनभद्र जिले में घाघरा नदी के तेज बहाव ने जिला जेल को जोड़ने वाली सड़क का बड़ा हिस्सा बहा दिया, जिससे आवागमन बाधित हो गया। वहीं गोंडा में घाघरा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और चेतावनी स्तर के पार पहुंचने के बाद प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है। जिले की सभी बाढ़ चौकियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है और नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

    वाराणसी में गंगा का जलस्तर भी तेजी से बढ़ा है। पिछले एक सप्ताह में नदी करीब 10 फीट ऊपर आ चुकी है। अस्सी घाट से नमो घाट तक करीब 50 छोटे-बड़े मंदिर जलमग्न हो गए हैं। घाटों पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है और श्रद्धालुओं से सावधानी बरतने की अपील की गई है।

    मौसम का असर राजधानी लखनऊ, नोएडा, कानपुर, आगरा और अन्य शहरों में भी देखने को मिल रहा है। बुधवार सुबह से कई स्थानों पर रुक-रुक कर बारिश हो रही है, जबकि पूरे प्रदेश के सभी 75 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने 10 जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है।

    बारिश के बीच हादसों का सिलसिला भी जारी है। उन्नाव में तेज हवा के दौरान चलती बाइक पर अचानक पेड़ गिर गया, जिससे युवक की गर्दन टूट गई और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। यह घटना लगातार खराब मौसम के बीच सावधानी बरतने की जरूरत को भी रेखांकित करती है।

    मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र और सक्रिय मानसूनी सिस्टम के कारण पिछले कुछ दिनों से प्रदेश में व्यापक बारिश हुई। अब मानसूनी ट्रफ दक्षिण की ओर खिसक रही है, जिससे अगले एक-दो दिनों में कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश जारी रह सकती है। इसके बाद बारिश में कुछ कमी आने की संभावना है, लेकिन 26 जुलाई से मानसून फिर सक्रिय होकर प्रदेश में तेज बारिश का नया दौर शुरू कर सकता है।