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  • मौसम विभाग ने उत्तर भारत में भारी बारिश का अलर्ट किया जारी, पहाड़ी राज्यों में भूस्खलन और बाढ़ का बढ़ा खतरा

    मौसम विभाग ने उत्तर भारत में भारी बारिश का अलर्ट किया जारी, पहाड़ी राज्यों में भूस्खलन और बाढ़ का बढ़ा खतरा

    नई दिल्ली ।देश के कई हिस्सों में दक्षिण-पश्चिम मानसून के तीव्र होने से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर समेत कई राज्यों में अगले तीन से चार दिनों तक मूसलाधार बारिश का अलर्ट जारी किया है। भारी बारिश के चलते पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन और मैदानी क्षेत्रों में जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो गई है।

    मौसम विभाग के अनुसार उत्तर-पश्चिम, मध्य, पूर्वी और दक्षिण भारत के विभिन्न हिस्सों में 20 से 25 अगस्त के बीच भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना व्यक्त की गई है। पहाड़ी राज्यों में बारिश के साथ तेज हवाएं चलने और बिजली गिरने की चेतावनी दी गई है, जिसको देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने आम नागरिकों को सतर्क रहने और आवश्यक न होने पर यात्रा से बचने की सलाह दी है।

    उत्तराखंड के सीमांत जिले पिथौरागढ़ में भारी बारिश के कारण बड़ा नुकसान हुआ है। धारचूला-तवाघाट मार्ग पर स्थित वैली ब्रिज टूटकर गिर जाने से चीन सीमा से सटे दारमा, व्यास और चौंदास घाटियों के दर्जनों गांवों का मुख्य मार्ग से संपर्क पूरी तरह कट गया है। भूस्खलन और मलबे के कारण सीमावर्ती क्षेत्रों में आवाजाही पूरी तरह बाधित हो गई है और राहत कार्य शुरू कर दिए गए हैं।

    हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में भी स्थिति गंभीर बनी हुई है। गांदरबल क्षेत्र में बादल फटने की घटना के बाद निचले इलाकों में जलभराव की समस्या पैदा हो गई। वहीं कालका-शिमला रेलखंड पर मलबा आने से रेल यातायात प्रभावित हुआ है। मैदानी इलाकों की बात करें तो पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों में लगातार हो रही वर्षा से तापमान में गिरावट दर्ज की गई है।

    मध्य प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों में भी मानसून की गतिविधियां बेहद सक्रिय बनी हुई हैं। राज्य के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों में आगामी दिनों में तेज हवाओं के साथ भारी वर्षा का अनुमान जताया गया है, जिससे नदी-नालों के जलस्तर में बढ़ोतरी हो सकती है। राज्य शासन ने बाढ़ संभावित क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है।

    पूर्वी भारत के राज्यों जैसे झारखंड, बिहार और ओडिशा में भी भारी बारिश और बाढ़ का प्रभाव देखा जा रहा है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार मानसून की यह स्थिति अगले कुछ दिनों तक बनी रहेगी। पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन के खतरे को देखते हुए आपदा प्रबंधन टीमों को अलर्ट पर रखा गया है ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।

  • संसद के मानसून सत्र में विपक्षी एकजुटता और छात्र आंदोलनों के कारण बैकफुट पर आई एनडीए सरकार।

    संसद के मानसून सत्र में विपक्षी एकजुटता और छात्र आंदोलनों के कारण बैकफुट पर आई एनडीए सरकार।

    नई दिल्ली । संसद के हाल ही में संपन्न हुए मानसून सत्र के दौरान देश की राजनीतिक फिजां में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। सत्र की शुरुआत से पहले जहां सत्तारूढ़ गठबंधन मजबूत स्थिति में नजर आ रहा था, वहीं सत्र के दौरान हुए घटनाक्रमों और छात्र आंदोलनों के कारण विपक्षी दल सरकार पर रणनीतिक दबाव बनाने में पूरी तरह सफल रहे।

    मानसून सत्र की शुरुआत से ठीक पहले राजनीतिक समीकरण एनडीए के पक्ष में दिखाई दे रहे थे। विभिन्न राज्यों के राजनीतिक घटनाक्रमों से विपक्षी दल मनोवैज्ञानिक दबाव महसूस कर रहे थे। हालांकि, सत्र के दौरान देश के कई हिस्सों में शुरू हुए छात्र आंदोलनों, पेपर लीक विवादों और पुलिस कार्रवाई के मुद्दों ने पूरे परिदृश्य को बदलकर रख दिया।

    संसद भवन के भीतर और बाहर कांग्रेस की अगुवाई में एकजुट हुए विपक्षी दलों ने इन संवेदनशील मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। सरकार के खिलाफ बने इस माहौल को बांकीपुर और दतिया उप-चुनावों में सत्तारूढ़ दल को मिली शिकस्त ने और अधिक बल दिया। इन चुनावी नतीजों से विपक्षी सांसदों का उत्साह और आक्रामकता दोनों में बढ़ोतरी दर्ज की गई।

    विपक्ष के कड़े तेवरों और लगातार जारी हंगामे के कारण सरकार को कई महत्वपूर्ण विधायी प्रस्तावों पर अपने कदम पीछे खींचने पड़े। एफसीआरए संशोधन विधेयक को आगे की समीक्षा के लिए संसद की स्थायी समिति के पास भेजने का निर्णय लिया गया। इसके अलावा महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे बड़े विधेयकों पर भी विस्तृत चर्चा संभव नहीं हो सकी।

    सत्र के दौरान विभिन्न क्षेत्रीय दलों के बीच अभूतपूर्व समन्वय देखने को मिला। तमिलनाडु की सत्तारूढ़ डीएमके, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने अलग-अलग मुद्दों पर एक-दूसरे का पुरजोर समर्थन किया। नीट परीक्षा में अनियमितताओं और छात्रों पर हुई कार्रवाई के मुद्दे पर पूरा विपक्ष एक सुर में गृह मंत्री से जवाब मांगने पर अड़ा रहा, जिससे सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई।

    संसदीय गतिरोध का असर देश के विभिन्न राज्यों की राजनीति पर भी स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। मध्य प्रदेश के दतिया उप-चुनाव में आए नतीजों और राज्य के युवाओं से जुड़े रोजगार व परीक्षा संबंधी मुद्दों को लेकर स्थानीय स्तर पर भी राजनीतिक सरगर्मी बढ़ गई है। मध्य प्रदेश में भी छात्र संगठनों द्वारा इन मुद्दों को लेकर लगातार संवाद और प्रदर्शन किए जा रहे हैं।

    मानसून सत्र के दौरान नीट परीक्षा विवाद, विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक और जनहित से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा अधूरी रह गई। लगातार होते स्थगन के कारण विभिन्न क्षेत्रों के सांसदों द्वारा उठाए जाने वाले शून्यकाल के मुद्दे भी सदन के पटल पर प्रस्तुत नहीं किए जा सके।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मानसून सत्र में जिस तरह से विपक्षी दलों ने एकजुटता दिखाई है, उससे आने वाले राज्य विधानसभा चुनावों में मुकाबला दिलचस्प होने की संभावना है। छात्र आंदोलनों और जनहित के मुद्दों को आगे भी बरकरार रखना विपक्ष के लिए एक बड़ी चुनौती सिद्ध होगा।

  • मॉनसून सत्र के आखिरी दिन गृहमंत्री अमित शाह के बयान पर विपक्ष हमलावर, पत्र लिखने के समय को लेकर उठाए सवाल

    मॉनसून सत्र के आखिरी दिन गृहमंत्री अमित शाह के बयान पर विपक्ष हमलावर, पत्र लिखने के समय को लेकर उठाए सवाल

    नई दिल्ली । मॉनसून सत्र के आखिरी दिन केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के सदन में बयान को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सियासी खींचतान तेज हो गई है। विपक्ष लगातार मांग करता रहा है कि गृहमंत्री सदन में आकर संबंधित मुद्दों पर अपना पक्ष रखें। इसी बीच अमित शाह की ओर से चर्चा के लिए तैयार होने की बात सामने आने के बाद भी विपक्ष का रुख नरम नहीं हुआ है।

    समाजवादी पार्टी के नेताओं ने गृहमंत्री के रुख और सदन में बयान देने की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए। सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने कहा कि विपक्ष लगातार अमित शाह के सदन में आने की मांग करता रहा है, लेकिन अब तक वह सदन में नहीं आए। उन्होंने कहा कि सत्र का अंतिम दिन है और सदन की कार्यवाही भी बार-बार स्थगित हो रही है।

    अवधेश प्रसाद ने सवाल उठाया कि यदि गृहमंत्री को बयान देना था तो उन्हें सदन में आने में क्या परेशानी थी। उनके मुताबिक विपक्ष की मांग लगातार बनी रही, लेकिन सरकार की ओर से इस दिशा में अपेक्षित पहल नहीं हुई।

    सपा सांसद राम गोपाल यादव ने भी गृहमंत्री के बयान को लेकर अपनाई गई प्रक्रिया पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि गृहमंत्री बयान देने के लिए तैयार हैं, लेकिन विपक्ष से पहले सवाल लिखित रूप में देने को कहा गया है। उनके अनुसार संसद में सामान्य परंपरा यह रही है कि मंत्री सदन में बयान देते हैं और इसके बाद सांसद उनसे संबंधित विषयों पर स्पष्टीकरण मांगते हैं।

    कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने भी गृहमंत्री के पत्र लिखने के समय पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जब मॉनसून सत्र समाप्त होने की स्थिति में पहुंच चुका है, तब 17वें दिन पत्र लिखे जाने का क्या उद्देश्य है। उन्होंने सवाल किया कि क्या गृहमंत्री सदन में आने के बजाय घर से ही जवाब देना चाहते हैं।

    भगत ने कहा कि 19 दिन के सत्र में 17वें दिन पत्र लिखना अपने आप में सवाल खड़े करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की प्रक्रिया के जरिए जनता और विपक्ष को भ्रमित करने की कोशिश की जा रही है। हालांकि इन आरोपों पर सत्ता पक्ष की ओर से सदन में आगे क्या रुख अपनाया जाता है, यह कार्यवाही के दौरान स्पष्ट होगा।

    सपा नेता हरेंद्र सिंह मलिक ने इस दौरान राम मंदिर से जुड़े चंदा और चोरी के आरोपों का मुद्दा उठाने की बात कही। उन्होंने कहा कि पार्टी इस मामले को लेकर प्रदर्शन करेगी और इसे लोगों की आस्था तथा भावनाओं से जुड़ा विषय बताया।

    मॉनसून सत्र के अंतिम दिन अब सभी की नजर सदन की कार्यवाही पर है। विपक्ष गृहमंत्री के बयान और विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की मांग को लेकर लगातार दबाव बना रहा है। दूसरी ओर गृहमंत्री की ओर से चर्चा के लिए तैयार होने की बात कही गई है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आखिरी दिन सदन में दोनों पक्षों के बीच सहमति बनती है या राजनीतिक गतिरोध आगे भी जारी रहता है।

  • मानसून में स्वाइन फ्लू का बढ़ता खतरा, जानिए किन लोगों में संक्रमण गंभीर होने की आशंका रहती है और कब लें चिकित्सा मदद

    मानसून में स्वाइन फ्लू का बढ़ता खतरा, जानिए किन लोगों में संक्रमण गंभीर होने की आशंका रहती है और कब लें चिकित्सा मदद

    नई दिल्ली ।देश के कुछ हिस्सों में मानसून और बदलते मौसम के बीच इन्फ्लूएंजा ए H1N1, जिसे आमतौर पर स्वाइन फ्लू कहा जाता है, के मामलों में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। दिल्ली में भी इस साल संक्रमण के मामलों में वृद्धि दर्ज की गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 6 अगस्त 2026 तक राजधानी में H1N1 के 1,349 पुष्ट मामले सामने आ चुके थे। इसके बाद कुछ अस्पतालों में भी ऐसे मरीजों की संख्या बढ़ने की जानकारी सामने आई है।

    स्वाइन फ्लू एक वायरल श्वसन संक्रमण है, जिसके लक्षण सामान्य फ्लू जैसे दिखाई दे सकते हैं। मानसून के दौरान मौसम में बदलाव, तापमान में उतार-चढ़ाव और लोगों के बीच संपर्क बढ़ने जैसी परिस्थितियां श्वसन संक्रमण के फैलाव के लिए अनुकूल वातावरण बना सकती हैं। हालांकि, ज्यादातर मामलों में बीमारी हल्की रहती है और उचित आराम, निगरानी तथा चिकित्सकीय सलाह से मरीज ठीक हो जाते हैं।

    स्वाइन फ्लू का खतरा सभी लोगों को हो सकता है, लेकिन कुछ समूहों में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है। छोटे बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोग विशेष सावधानी की श्रेणी में आते हैं। इनके अलावा पहले से फेफड़ों की बीमारी, हृदय रोग, डायबिटीज या किडनी से जुड़ी गंभीर समस्या वाले मरीजों में भी जटिलताओं का जोखिम अधिक हो सकता है।

    H1N1 संक्रमण होने पर अचानक बुखार, खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, शरीर में दर्द, थकान और नाक से संबंधित परेशानी जैसे लक्षण सामने आ सकते हैं। कुछ मरीजों में लक्षण अपेक्षाकृत हल्के होते हैं, जबकि जोखिम वाले लोगों में बीमारी तेजी से गंभीर हो सकती है। इसलिए लगातार बने रहने वाले या बढ़ते लक्षणों को सामान्य वायरल समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

    विशेष रूप से सांस लेने में परेशानी, ऑक्सीजन का स्तर कम होना, सीने में बेचैनी, अत्यधिक कमजोरी, असामान्य रूप से ज्यादा नींद आना या तेजी से बिगड़ती तबीयत गंभीर स्थिति के संकेत हो सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर मरीज को जल्द चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए। बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से गंभीर बीमारी वाले मरीजों में लक्षण दिखने पर डॉक्टर से सलाह लेने में देरी नहीं करनी चाहिए।

    स्वाइन फ्लू के उपचार में मरीज की स्थिति और लक्षणों के आधार पर चिकित्सा प्रबंधन किया जाता है। कुछ परिस्थितियों में डॉक्टर शुरुआती चरण में ओसेल्टामिविर जैसी एंटीवायरल दवा की सलाह दे सकते हैं। हालांकि, दवा की जरूरत, उसकी मात्रा और उपचार की अवधि मरीज की स्थिति देखकर चिकित्सक तय करते हैं। केवल लक्षणों के आधार पर खुद से एंटीवायरल या अन्य दवाएं लेना उचित नहीं है।

    संक्रमण से बचाव के लिए हाथों को नियमित रूप से साबुन से धोना, खांसते या छींकते समय मुंह और नाक ढकना तथा बीमार व्यक्ति के संपर्क में अनावश्यक रूप से आने से बचना महत्वपूर्ण है। भीड़भाड़ वाली जगहों पर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। संक्रमित व्यक्ति को भी दूसरों से दूरी बनाए रखनी चाहिए ताकि संक्रमण फैलने का खतरा कम किया जा सके।

    फ्लू से बचाव के लिए टीकाकरण भी एक विकल्प हो सकता है, लेकिन इसे लेकर डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। बदलते मौसम के दौरान सावधानी, शुरुआती लक्षणों पर निगरानी और जोखिम वाले लोगों की समय पर चिकित्सकीय जांच संक्रमण को गंभीर होने से रोकने में मदद कर सकती है।

  • बारिश में आलू-प्याज के पराठे से हैं बोर, तो बनाएं क्रिस्पी चीज़ कॉर्न पराठा, स्वाद ऐसा कि बार-बार खाने का करेगा मन

    बारिश में आलू-प्याज के पराठे से हैं बोर, तो बनाएं क्रिस्पी चीज़ कॉर्न पराठा, स्वाद ऐसा कि बार-बार खाने का करेगा मन

    नई दिल्ली । बारिश के मौसम में गरमा-गरम और कुछ अलग खाने का मन अक्सर करता है। अगर रोजाना आलू, प्याज या गोभी के पराठे खाकर आप भी बोर हो चुके हैं, तो इस मॉनसून चीज़ कॉर्न पराठा जरूर ट्राई कर सकते हैं। स्वीट कॉर्न, चीज़ और मसालों से तैयार यह पराठा स्वाद में बेहद लाजवाब होता है। बाहर से कुरकुरा और अंदर से चीज़ी होने की वजह से यह बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को पसंद आ सकता है। इसे सुबह के नाश्ते के अलावा शाम की चाय के साथ भी परोसा जा सकता है।

    चीज़ कॉर्न पराठा बनाने के लिए सबसे पहले इसकी फिलिंग तैयार करनी होगी। इसके लिए करीब एक कप उबले हुए स्वीट कॉर्न लें। इसमें एक कप कद्दूकस किया हुआ चीज़, बारीक कटा हरा धनिया, दो बारीक कटी या कुटी हुई लहसुन की कलियां और स्वाद के अनुसार हरी मिर्च डालें। इसके बाद इसमें चाट मसाला, लाल मिर्च पाउडर, थोड़ी काली मिर्च और ऑरेगैनो मिलाएं। नमक डालते समय थोड़ी सावधानी रखें, क्योंकि चीज़ में पहले से नमक मौजूद हो सकता है। सभी सामग्री को अच्छी तरह मिलाकर एक तरफ रख दें।

    अब पराठे के लिए आटा तैयार करें। गेहूं के आटे में थोड़ा नमक और एक चम्मच तेल डालकर मिलाएं। धीरे-धीरे पानी डालते हुए नरम आटा गूंथ लें। आटे को कुछ देर ढककर रखने से यह अच्छी तरह सेट हो जाएगा और पराठा बेलने में आसानी होगी। इसके बाद आटे की छोटी-छोटी लोइयां बना लें।

    एक लोई लेकर उसे थोड़ा बेलें और बीच में तैयार चीज़ कॉर्न की फिलिंग रखें। अब आटे के किनारों को चारों तरफ से उठाकर फिलिंग को अच्छी तरह बंद कर दें। भरी हुई लोई को हल्के हाथों से बेलकर पराठे का आकार दें। पराठा बेलते समय ज्यादा दबाव न डालें, वरना चीज़ और कॉर्न की फिलिंग बाहर निकल सकती है।

    अब तवे को अच्छी तरह गर्म करें और उस पर पराठा डाल दें। इसे मध्यम आंच पर दोनों तरफ से सेंकें। जब पराठा हल्का सुनहरा होने लगे, तब ऊपर से थोड़ा घी या तेल लगाकर दोनों तरफ से कुरकुरा होने तक पकाएं। मध्यम आंच पर पकाने से पराठा अंदर तक अच्छी तरह सिकेगा और बाहर से भी क्रिस्पी बनेगा।

    गरमा-गरम चीज़ कॉर्न पराठे को हरी चटनी, दही या टोमैटो सॉस के साथ परोसा जा सकता है। बारिश के मौसम में एक कप गर्म चाय के साथ इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है। पराठा बनाते समय इस बात का ध्यान रखें कि कॉर्न की फिलिंग में अतिरिक्त पानी न हो। गीली फिलिंग होने पर पराठा बेलना मुश्किल हो सकता है और वह तवे पर फट भी सकता है। इसके अलावा चीज़ की मात्रा संतुलित रखें और पराठे को तेज आंच के बजाय मध्यम आंच पर पकाएं।

    मॉनसून में खाद्य सामग्री की ताजगी पर विशेष ध्यान देना भी जरूरी है। स्वीट कॉर्न, चीज़ और अन्य सामग्री ताजा होनी चाहिए। अगर आप रोज के पारंपरिक पराठों से कुछ अलग और स्वादिष्ट बनाना चाहते हैं, तो चीज़ कॉर्न पराठा एक आसान विकल्प है। इसकी मसालेदार कॉर्न फिलिंग और पिघला हुआ चीज़ इसे खास स्वाद देते हैं।

  • MP में मानसून पड़ा सुस्‍त, औसत से 18% कम बरसा पानी, 43 जिले पिछड़े, आज 5 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

    MP में मानसून पड़ा सुस्‍त, औसत से 18% कम बरसा पानी, 43 जिले पिछड़े, आज 5 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट


    भोपाल। मध्य प्रदेश में मानसून की रफ्तार धीमी पड़ने से बारिश का आंकड़ा लगातार गिर रहा है। प्रदेश में अब तक सामान्य से 18 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है और 55 में से 43 जिले औसत से पीछे चल रहे हैं। पिछले पांच दिनों से कहीं भी भारी बारिश रिकॉर्ड नहीं हुई है। हालांकि मौसम विभाग ने नए पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के बाद मौसम में बदलाव की संभावना जताई है। बुधवार को पांच जिलों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

    मौसम विभाग के अनुसार, पिछले तीन-चार दिनों से प्रदेश के ऊपर मौसम संबंधी सिस्टम सक्रिय तो रहे, लेकिन पर्याप्त मजबूत नहीं होने के कारण व्यापक और तेज बारिश नहीं हो सकी। इसके चलते बारिश का कुल आंकड़ा लगातार घटता गया। फिलहाल प्रदेश के उत्तरी हिस्से में दो चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय हैं, जिनके प्रभाव से ग्वालियर-चंबल, सागर और रीवा संभाग के कुछ क्षेत्रों में बारिश हुई है।

    मौसम वैज्ञानिक शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार, एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हुआ है, जिसका असर अगले कुछ दिनों में प्रदेशभर में दिखाई देगा। इसके प्रभाव से कई इलाकों में तेज बारिश का दौर शुरू होने की संभावना है।

    इन जिलों में भारी बारिश का अलर्ट
    बुधवार को दतिया, भिंड, छतरपुर, पन्ना और सतना में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। इसके अलावा भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, अलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, अशोकनगर, मुरैना, श्योपुर, जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, पांढुर्णा, रीवा, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, दमोह, टीकमगढ़ और निवाड़ी में कहीं हल्की तो कहीं तेज बारिश होने की संभावना है।

    कोटे से 3.5 इंच कम बारिश
    मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में अब तक औसतन 407.2 मिमी (16 इंच) बारिश हुई है, जबकि इस समय तक 495.2 मिमी (19.5 इंच) बारिश हो जानी चाहिए थी। यानी प्रदेश में अब तक करीब 3.5 इंच (18 प्रतिशत) बारिश की कमी दर्ज की गई है।

    पूर्वी हिस्से की स्थिति सबसे खराब
    पूर्वी मध्य प्रदेश के जबलपुर, शहडोल, रीवा और सागर संभाग में औसतन 22 प्रतिशत कम बारिश हुई है। इन संभागों का कोई भी जिला सामान्य बारिश के आंकड़े तक नहीं पहुंच पाया है। अनूपपुर, बालाघाट, छतरपुर, छिंदवाड़ा, दमोह, डिंडौरी, जबलपुर, कटनी, मैहर, मंडला, मऊगंज, नरसिंहपुर, निवाड़ी, पांढुर्णा, पन्ना, रीवा, सागर, सतना, सिवनी, शहडोल, सीधी, सिंगरौली, टीकमगढ़ और उमरिया में सामान्य से 1 से 42 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई है।

    वहीं पश्चिमी मध्य प्रदेश के भोपाल, इंदौर, उज्जैन, नर्मदापुरम और ग्वालियर-चंबल संभाग में औसतन 15 प्रतिशत कम बारिश हुई है। भोपाल, दतिया, धार, गुना, ग्वालियर, हरदा, झाबुआ, मुरैना, मंदसौर, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, राजगढ़, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, श्योपुर, शिवपुरी, उज्जैन और विदिशा समेत कई जिले अभी भी औसत से पीछे हैं। अब तक बड़वानी, भिंड, बुरहानपुर, देवास, इंदौर, खंडवा और खरगोन ऐसे जिले हैं, जहां सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की गई है।

  • बारिश में ऑयली स्किन से बढ़ सकती हैं त्वचा की समस्याएं, सही फेस वॉश का चुनाव बन सकता है असरदार उपाय

    बारिश में ऑयली स्किन से बढ़ सकती हैं त्वचा की समस्याएं, सही फेस वॉश का चुनाव बन सकता है असरदार उपाय

    नई दिल्ली । बारिश का मौसम गर्मी से राहत जरूर देता है, लेकिन बढ़ी हुई नमी और उमस त्वचा से जुड़ी कई परेशानियों को भी बढ़ा सकती है। विशेष रूप से ऑयली और कॉम्बिनेशन स्किन वाले लोगों को इस मौसम में अतिरिक्त सीबम, पसीना और धूल-मिट्टी के कारण चेहरे पर चिपचिपाहट महसूस होती है। यदि त्वचा की नियमित सफाई पर ध्यान न दिया जाए, तो मुंहासे, ब्लैकहेड्स, खुले रोमछिद्र और त्वचा की चमक कम होने जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। ऐसे में त्वचा के प्रकार के अनुसार सही फेस वॉश का चयन करना महत्वपूर्ण माना जाता है।

    त्वचा विशेषज्ञों के अनुसार मानसून के दौरान ऐसा फेस वॉश चुनना चाहिए जो त्वचा की गहराई से सफाई करे, अतिरिक्त तेल को नियंत्रित रखे और साथ ही त्वचा की प्राकृतिक नमी को भी बनाए रखे। अत्यधिक कठोर उत्पादों का इस्तेमाल करने से त्वचा रूखी हो सकती है, जबकि हल्के और संतुलित फॉर्मूले वाले फेस वॉश त्वचा को साफ रखने के साथ उसे ताजगी भी प्रदान करते हैं।

    ऑयली और मुंहासों की समस्या से परेशान लोगों के लिए सैलिसिलिक एसिड युक्त फेस वॉश उपयोगी विकल्प माना जाता है। यह रोमछिद्रों के भीतर जमा अतिरिक्त तेल और गंदगी को साफ करने में मदद करता है तथा ब्लैकहेड्स और पिंपल्स बनने की संभावना को कम करने में सहायक हो सकता है। विशेषज्ञ इसकी सलाह त्वचा की आवश्यकता के अनुसार दिन में एक या दो बार तक उपयोग करने की देते हैं।

    नीम और टी ट्री ऑयल वाले फेस वॉश भी मानसून में काफी लोकप्रिय माने जाते हैं। इन प्राकृतिक तत्वों में एंटीबैक्टीरियल और एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं, जो त्वचा पर मौजूद बैक्टीरिया को कम करने और मुंहासों की समस्या को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं। ऑयली और एक्ने-प्रोन स्किन वाले लोगों के लिए यह संयोजन लाभदायक माना जाता है।

    यदि त्वचा पर धूल, प्रदूषण और अतिरिक्त तेल अधिक जमा होता है, तो एक्टिवेटेड चारकोल युक्त फेस वॉश भी एक अच्छा विकल्प हो सकता है। यह त्वचा की गहराई से सफाई करने में मदद करता है और चेहरे को ताजगी का एहसास देता है। हालांकि विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि इसका अत्यधिक उपयोग नहीं करना चाहिए, क्योंकि बार-बार इस्तेमाल करने से कुछ लोगों की त्वचा रूखी महसूस हो सकती है।

    जेल बेस्ड फेस वॉश भी मानसून के मौसम में व्यापक रूप से उपयोग किए जाते हैं। इनमें एलोवेरा, खीरा या हायल्यूरोनिक एसिड जैसे तत्व शामिल हो सकते हैं, जो त्वचा को बिना अधिक रूखा किए साफ करने में मदद करते हैं। यह फेस वॉश अतिरिक्त तेल हटाने के साथ त्वचा की हल्की नमी बनाए रखते हैं, जिससे चेहरा लंबे समय तक फ्रेश महसूस होता है। ऑयली और कॉम्बिनेशन स्किन वाले लोगों के लिए इन्हें उपयुक्त माना जाता है।

    विटामिन सी युक्त फेस वॉश भी त्वचा की देखभाल में उपयोगी माने जाते हैं। यह चेहरे की डलनेस कम करने, त्वचा को ताजगी देने और पर्यावरणीय प्रभावों से होने वाले नुकसान से बचाने में सहायक हो सकते हैं। नियमित स्किनकेयर रूटीन के साथ इनका उपयोग त्वचा की प्राकृतिक चमक बनाए रखने में मदद कर सकता है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि केवल फेस वॉश बदलना ही पर्याप्त नहीं है। मानसून में दिन में दो बार चेहरे की सफाई करना, पर्याप्त पानी पीना, हल्का मॉइश्चराइजर लगाना और त्वचा के अनुसार उपयुक्त स्किनकेयर उत्पादों का इस्तेमाल करना भी जरूरी है। सही देखभाल और संतुलित दिनचर्या अपनाकर बारिश के मौसम में भी त्वचा को साफ, ताजा और स्वस्थ बनाए रखा जा सकता है।

  • तेलंगाना में घर के आंगन में पहुंचा 12 फीट लंबा अजगर, सुबह-सुबह विशालकाय जीव को देख फैली भारी दहशत।

    तेलंगाना में घर के आंगन में पहुंचा 12 फीट लंबा अजगर, सुबह-सुबह विशालकाय जीव को देख फैली भारी दहशत।

    नई दिल्ली। मानसून के मौसम में वन्यजीवों का प्राकृतिक आवासों से निकलकर आबादी वाले इलाकों की ओर रुख करने की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। इसी क्रम में तेलंगाना के मंचेरियल जिले से एक बेहद चौंकाने वाला और भयावह मामला प्रकाश में आया है। मंचेरियल के मंदामर्री सेकेंड जोन इलाके में एक आवासीय मकान के आंगन में अचानक लगभग 12 फीट लंबा विशालकाय अजगर दिखाई देने से पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया। सुबह-सुबह घटी इस घटना के बाद स्थानीय निवासियों और पीड़ित परिवार के सदस्यों के बीच भारी दहशत का माहौल बन गया।

    घटना की शुरुआत सुबह के समय हुई जब घर के सदस्य अपने दैनिक कार्यों में व्यस्त थे। इसी दौरान आंगन में एक कोने में कुंडली मारकर बैठे विशालकाय अजगर पर गृहस्वामी रमेश और उनके परिजनों की नजर पड़ी। इतने बड़े जीव को अचानक अपने घर के परिसर में देखकर परिवार के सदस्य घबरा गए और तुरंत शोर मचाना शुरू कर दिया। चीख-पुकार सुनकर आसपास के पड़ोसी भी अपने-अपने घरों से बाहर निकल आए और देखते ही देखते मौके पर भारी भीड़ एकत्रित हो गई।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अजगर की लंबाई करीब 12 फीट थी और वह काफी विशाल था। रिहायशी बस्ती के बीचों-बीच इतने बड़े अजगर को देखकर लोग भयभीत हो गए। अनहोनी की आशंका को देखते हुए परिजनों ने तुरंत बच्चों को सुरक्षित कमरों के भीतर बंद कर दिया। हालांकि, इस दौरान कुछ स्थानीय निवासियों ने सुरक्षित दूरी बनाए रखते हुए इस दुर्लभ दृश्य को अपने मोबाइल कैमरों में कैद कर लिया। देखते ही देखते यह वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से प्रसारित होने लगा, जिससे आसपास के अन्य इलाकों में भी चर्चा का बाजार गर्म हो गया।

    स्थानीय निवासियों का कहना है कि क्षेत्र में छोटी-मोटी प्रजातियों के सांप अक्सर देखे जाते हैं, लेकिन इतने बड़े आकार का अजगर पहली बार किसी के घर के भीतर पहुंचा है। विशेषज्ञों और स्थानीय लोगों का मानना है कि बारिश के कारण प्राकृतिक आवासों और जंगलों में पानी भर जाने की वजह से यह जीव सूखे और सुरक्षित स्थान की तलाश में भटकते हुए आबादी वाले क्षेत्र में प्रवेश कर गया। इस घटना के बाद से पूरे मोहल्ले में सतर्कता बढ़ा दी गई है और लोग आसपास की झाड़ियों और खाली पड़े भूखंडों पर विशेष निगरानी रख रहे हैं।

    पर्यावरण और वन्यजीव विशेषज्ञों ने मानसून के दौरान लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। जानकारों का कहना है कि बारिश के दिनों में झाड़ियों, पुरानी लकड़ियों के ढेर और पानी जमा होने वाले स्थानों पर विषैले व विशालकाय जीवों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसी स्थिति में किसी भी वन्यजीव को नुकसान पहुंचाने या उकसाने के बजाय उनसे सुरक्षित दूरी बनाए रखनी चाहिए और तुरंत संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों या वन विभाग की टीम को सूचित करना चाहिए ताकि समय रहते सुरक्षित रेस्क्यू किया जा सके।

  • कल से मॉनसून पकड़ेगा रफ्तार…. अगस्त में होगी झमाझम बारिश, कई राज्यों में अलर्ट

    कल से मॉनसून पकड़ेगा रफ्तार…. अगस्त में होगी झमाझम बारिश, कई राज्यों में अलर्ट

    नई दिल्ली। मॉनसून (Monsoon) की रफ्तार अगस्त के पहले हफ्ते में और तेज होने वाली है. मौसम विभाग यानी आईएमडी (IMD) के मुताबिक देश में बारिश (Rain) की कमी घटकर 14 फीसदी रह गई है, जो पिछले हफ्तों के मुकाबले काफी बेहतर स्थिति है. महाराष्ट्र (Maharashtra) के ऊपर बना गहरा दबाव इस सीजन का सबसे मजबूत मौसमी सिस्टम बन गया है और अरब सागर (Arabian Sea) और बंगाल की खाड़ी (Bay of Bengal) से भारी मात्रा में नमी खींच रहा है।

    इसी बीच गुजरात, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली-एनसीआर समेत कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है. गुजरात में सेना को स्टैंडबाय पर रखा गया है, अहमदाबाद में स्कूल बंद कर दिए गए हैं, वहीं दिल्ली, गुरुग्राम, अलवर, बुलंदशहर, लुधियाना और बिहार में जलभराव और कटाव से जुड़ी घटनाएं सामने आई हैं. जम्मू-कश्मीर में शुक्रवार यानि आज के लिए अमरनाथ यात्रा स्थगित कर दी गई है।

    आईएमडी की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, देश भर में मॉनसून कमजोर पड़ने की बजाय और मजबूत होने जा रहा है. मध्य भारत और उत्तर पश्चिम भारत में अब सामान्य बारिश दर्ज हो रही है, जबकि दक्षिण प्रायद्वीप और पूर्वोत्तर भारत में अब भी कमी बनी हुई है।

    महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में पिछले हफ्ते बारिश में साफ सुधार देखा गया है. मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि बंगाल की खाड़ी में जल्द ही नए कम दबाव के क्षेत्र बनने की उम्मीद है, जिससे अगस्त की शुरुआत में भी बारिश का दौर जारी रहेगा. अगर यही रुझान बना रहा तो जलाशयों में पानी बढ़ेगा और खरीफ फसलों को फायदा मिलेगा।

    गुजरात में 31 जुलाई से 2 अगस्त तक 13 जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी दी गई है. अहमदाबाद में रेड अलर्ट जारी करते हुए स्कूल कॉलेज बंद कर दिए गए हैं. सूरत, वडोदरा, भावनगर, भरूच, आणंद, नर्मदा, तापी, डांग, छोटा उदयपुर, पंचमहल, दाहोद और महिसागर में भी हाई अलर्ट है।

    गांधीनगर में अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. जयंती रवि ने सभी जिलों के अधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए तैयारियों की समीक्षा की और सभी अफसरों की छुट्टियां रद्द कर दी गई हैं. हर जिले में 24 घंटे कंट्रोल रूम काम कर रहे हैं और एनडीआरएफ-एसडीआरएफ की टीमें तैनात कर दी गई हैं. जरूरत पड़ने पर सेना, नौसेना और वायुसेना को भी राहत कार्य के लिए तैयार रखा गया है।

    हिमाचल प्रदेश में भी 27 जुलाई से 1 अगस्त तक मानसून सक्रिय रहेगा. ऊना, बिलासपुर, चंबा, कांगड़ा और शिमला में 31 जुलाई को ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है. राज्य में जुलाई महीने में बारिश लगभग सामान्य रही है, हालांकि हमीरपुर, कांगड़ा, मंडी और लाहौल-स्पीति में सामान्य से कम बारिश दर्ज हुई है।

    दिल्ली में यमुना का जलस्तर बढ़ने से ओखला बैराज के चार गेट खोल दिए गए हैं. गुरुग्राम में साइबर सिटी में जलभराव को लेकर लापरवाही बरतने पर जूनियर इंजीनियर को सस्पेंड कर दिया गया और ठेकेदार पर भारी जुर्माना लगाया गया है।

    अलवर में भिवाड़ी-अलवर बाइपास पर एक बस पानी में फंस गई, जिसे जेसीबी की मदद से निकाला गया. बुलंदशहर में बारिश के दौरान नाले में गिरी छात्रा की तलाश तीसरे दिन भी जारी है. लुधियाना में सड़क धंसने से एक कार गड्ढे में गिर गई, हालांकि किसी को चोट नहीं आई. बिहार के कटिहार में गंगा और कोसी नदी के कटाव से गांव वाले दहशत में हैं और प्रशासन बचाव कार्य में जुटा है।

    जम्मू-कश्मीर में भी भारी बारिश का दौर जारी है. लगातार बारिश के कारण शुक्रवार के लिए अमरनाथ यात्रा को स्थगित कर दिया गया है. पवित्र गुफा के पास अचानक पानी का तेज बहाव देखा गया है।

  • झांसी में फिर सक्रिय हुआ मानसून, बूंदाबांदी से बदला मौसम, अगले पांच दिन बारिश का पूर्वानुमान

    झांसी में फिर सक्रिय हुआ मानसून, बूंदाबांदी से बदला मौसम, अगले पांच दिन बारिश का पूर्वानुमान

    झांसी। एक सप्ताह की सुस्ती के बाद झांसी में मानसून ने दोबारा रफ्तार पकड़ ली है। मंगलवार रात हुई हल्की बूंदाबांदी से मौसम का मिजाज बदल गया और लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिली। मौसम विभाग ने अगले पांच दिनों तक जिले में बारिश की संभावना जताई है, जिससे तापमान में भी गिरावट आने के आसार हैं।

    बीते कई दिनों से बारिश नहीं होने के कारण जिले में धान की फसल प्रभावित हो रही थी। वहीं लगातार बढ़ते तापमान और उमस ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी थी। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव के क्षेत्र के सक्रिय होने से मानसूनी गतिविधियां एक बार फिर तेज हुई हैं।

    मंगलवार शाम करीब पांच बजे आसमान में घने बादल छा गए। इसके बाद ठंडी हवाएं चलीं और रात करीब आठ बजे हल्की बूंदाबांदी शुरू हो गई, जिससे वातावरण में ठंडक घुल गई।

    कृषि विज्ञान केंद्र, भरारी के मौसम वैज्ञानिक डॉ. आदित्य कुमार सिंह ने बताया कि बुधवार से अगले पांच दिनों तक जिले में वर्षा होने की संभावना है। 31 जुलाई तक हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है, जबकि 1 और 2 अगस्त को तेज बारिश होने का अनुमान है। बारिश के असर से अधिकतम तापमान घटकर 32 से 33 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है।

    प्रदेश में सबसे गर्म जिलों में रहा झांसी
    मंगलवार को झांसी का अधिकतम तापमान 36.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 4.3 डिग्री अधिक रहा। वहीं न्यूनतम तापमान 27.1 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो सामान्य से 2.2 डिग्री अधिक था। प्रदेश में बस्ती (36.7 डिग्री सेल्सियस) के बाद झांसी दूसरे सबसे अधिक तापमान वाला जिला रहा।