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  • आसमान से बरस रही आग: कई राज्यों में भीषण गर्मी का प्रकोप, लू से बेहाल लोग, मानसून बनने लगा उम्मीद

    आसमान से बरस रही आग: कई राज्यों में भीषण गर्मी का प्रकोप, लू से बेहाल लोग, मानसून बनने लगा उम्मीद

    नई दिल्ली। देशभर में गर्मी का असर अब अपने सबसे खतरनाक दौर में पहुंचता दिखाई दे रहा है। उत्तर से लेकर मध्य भारत तक कई राज्यों में तापमान तेजी से बढ़ रहा है और लोगों को भीषण गर्मी के साथ लू की मार झेलनी पड़ रही है। मई के अंतिम दिनों में मौसम की यह स्थिति आम जनजीवन पर गंभीर असर डाल रही है। कई शहरों की सड़कें दोपहर के समय सूनी नजर आने लगी हैं, जबकि तेज धूप और गर्म हवाओं ने लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। लगातार बढ़ती गर्मी ने लोगों को घरों के भीतर रहने पर मजबूर कर दिया है।

    महाराष्ट्र के ब्रह्मपुरी इलाके ने इस बार गर्मी के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। यहां अधिकतम तापमान 47.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो देश में सबसे अधिक रहा। इसके अलावा उत्तर प्रदेश, हरियाणा और कई अन्य राज्यों में तापमान 45 से 47 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है। देश के अधिकांश हिस्सों में तापमान सामान्य स्तर से काफी ऊपर पहुंच चुका है। गर्म हवाओं और तेज धूप ने हालात को और अधिक गंभीर बना दिया है। दोपहर के समय लोगों को घर से बाहर निकलने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

    मध्य भारत के कई हिस्सों में आने वाले दिनों में भी राहत मिलने की संभावना कम दिखाई दे रही है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और विदर्भ क्षेत्र के कई इलाकों में लू की स्थिति अभी कुछ दिन और बनी रह सकती है। इसके अलावा पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान जैसे राज्यों में भी तेज गर्म हवाएं चलने की आशंका बनी हुई है। कुछ स्थानों पर भीषण लू जैसी परिस्थितियां बनने की संभावना भी जताई जा रही है। लगातार बढ़ती गर्मी ने स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को भी बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मौसम में बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।

    पूर्वी भारत के कई हिस्सों में भी गर्मी लोगों की परीक्षा ले रही है। बिहार, झारखंड, ओडिशा और छत्तीसगढ़ के कुछ क्षेत्रों में गर्म हवाओं का असर देखने को मिल सकता है। वहीं तटीय इलाकों में गर्मी के साथ उमस लोगों की परेशानी को दोगुना कर सकती है। ऐसे हालात में लोगों को पर्याप्त पानी पीने और तेज धूप से बचने की सलाह दी जा रही है।

    हालांकि इस भीषण गर्मी के बीच लोगों के लिए राहत की उम्मीद अब मानसून से जुड़ी हुई है। दक्षिण-पश्चिम मानसून धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है और इसके केरल पहुंचने की संभावना अगले कुछ दिनों में जताई जा रही है। यदि मानसून तय समय के आसपास सक्रिय होता है तो देश के कई हिस्सों को तेज गर्मी से राहत मिल सकती है। इसके साथ ही दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर क्षेत्रों में कुछ स्थानों पर भारी बारिश की स्थिति बनने की संभावना भी बनी हुई है।

    फिलहाल देश के करोड़ों लोगों की निगाहें अब आसमान पर टिकी हुई हैं। एक ओर जहां गर्मी अपने चरम पर है, वहीं दूसरी ओर मानसून की पहली बारिश राहत की सबसे बड़ी उम्मीद बनती जा रही है। आने वाले कुछ दिन मौसम के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

  • देश में मौसम बदल रहा रंग, अंडमान में समय से पहले पहुंचा मानसून, उत्तर भारत लू की चपेट में

    देश में मौसम बदल रहा रंग, अंडमान में समय से पहले पहुंचा मानसून, उत्तर भारत लू की चपेट में



    नई दिल्ली। देशभर में मौसम ने दो अलग-अलग तस्वीरें पेश कर दी हैं। जहां एक ओर अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में मानसून ने तय समय से पहले दस्तक दे दी है, वहीं दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान समेत उत्तर एवं मध्य भारत भीषण गर्मी और लू से झुलस रहा है। एक तरफ लोग बारिश का आनंद ले रहे हैं, तो दूसरी ओर तेज धूप और गर्म हवाओं ने जनजीवन मुश्किल बना दिया है।

    मौसम विभाग के अनुसार दक्षिणी समुद्री क्षेत्रों में मानसून तेजी से सक्रिय हो रहा है। अरब सागर और बंगाल की खाड़ी तक मानसून पहुंच चुका है, जिसके असर से केरल और तमिलनाडु के तटीय इलाकों में प्री-मानसून बारिश शुरू हो गई है। विभाग का कहना है कि इस बार मानसून सामान्य समय से करीब पांच दिन पहले आगे बढ़ रहा है और 26 मई तक केरल पहुंच सकता है, जबकि आमतौर पर इसकी एंट्री 1 जून को होती है।

    केरल के कई हिस्सों में लगातार तेज बारिश हो रही है। पटनामथिट्टा और अलाप्पुझा समेत कई इलाकों में भारी बारिश का अनुमान जताया गया है। वहीं पश्चिम बंगाल के कुछ क्षेत्रों में भी पिछले 24 घंटों के दौरान अच्छी बारिश दर्ज की गई।

    दूसरी ओर उत्तर भारत में गर्मी का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। उत्तर प्रदेश के अधिकांश शहरों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बना हुआ है। बांदा सबसे गर्म रहा, जहां तापमान 46.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। झांसी, प्रयागराज, वाराणसी और लखनऊ में भी लोग भीषण गर्मी से परेशान हैं। दिल्ली में भी सामान्य से अधिक तापमान दर्ज किया गया है।

    हरियाणा और पंजाब के सिरसा, रोहतक, हिसार और बठिंडा जैसे शहरों में तापमान 42 से 44 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है। सुबह 10 बजे के बाद ही तेज गर्म हवाओं के कारण लोगों का बाहर निकलना मुश्किल हो रहा है।

    पहाड़ी राज्यों में भी गर्मी का असर साफ दिखाई दे रहा है। हिमाचल प्रदेश के ऊना में तापमान 37.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जो सामान्य से काफी अधिक माना जा रहा है। हालांकि मौसम विभाग ने 19 मई से मौसम में बदलाव की संभावना जताई है। पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने से पहाड़ी इलाकों में बारिश और तेज हवाएं चल सकती हैं। चंबा, कांगड़ा और कुल्लू के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। 22 और 23 मई को कुछ क्षेत्रों में बारिश होने से राहत मिलने की उम्मीद है।

    राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों में भी भीषण गर्मी बनी हुई है, जहां तापमान 42 से 44 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया जा रहा है। चंडीगढ़ में भी पारा 40 डिग्री के पार पहुंच चुका है। मौसम विभाग ने अगले 24 घंटों में उत्तर प्रदेश और आसपास के राज्यों में और तेज लू चलने की चेतावनी दी है।

    भीषण गर्मी को देखते हुए मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। विभाग ने कहा है कि दोपहर 12 बजे से 3 बजे के बीच धूप में निकलने से बचें। शरीर में पानी की कमी न होने दें और नियमित रूप से पानी, ओआरएस, नींबू पानी, छाछ या लस्सी का सेवन करें। बाहर जाते समय हल्के रंग के सूती कपड़े पहनें और सिर को कपड़े, टोपी या छतरी से ढककर रखें। खासतौर पर बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों का विशेष ध्यान रखने की अपील की गई है।

  • Weather: केरल में इस दिन दस्तक देगा मानसून, दक्षिण में भारी और उत्तर-मध्य में सामान्य से कम बारिश का अनुमान

    Weather: केरल में इस दिन दस्तक देगा मानसून, दक्षिण में भारी और उत्तर-मध्य में सामान्य से कम बारिश का अनुमान


    नई दिल्ली।
    इस मानसून सत्र (Monsoon Session) में देश के लगभग आधे हिस्से, उत्तर और मध्य भारत (North and Central India) में भीषण सूखा पड़ने की आशंका है। जून से सितंबर के बीच होने वाली मानसूनी बारिश (Monsoon Rains) के भी सामान्य से कम रहने का अनुमान है। इसका प्रमुख कारण प्रशांत महासागर (Pacific Ocean) में बन रहा शक्तिशाली अल नीनो है। इसकी वजह से दक्षिण भारत के तटीय क्षेत्रों में भीषण बाढ़ का खतरा भी है। कृषि प्रधान भारत के लिए मानसून की यह स्थिति बहुत भयावह है, जो बहुत हद तक मानसूनी वर्षा पर निर्भर है।

    भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार, अल नीनो तेजी से आकार ले रहा है। भारत के लिए अल नीनो हमेशा से ही खराब रहा है। इस बार मजबूत अल नीनो बन रहा है, जिसका भयावह परिणाम हो सकता है। मजबूत अल नीनो दक्षिण पश्चिम मानसून की हवाओं को कमजोर कर देता है। इसका नतीजा यह होता है कि देश के अधिकांश हिस्से में बारिश कम होती है और सूखे जैसे हालात पैदा हो जाता हैं। इस बार उत्तर और मध्य भारत में कुछ ऐसी ही स्थिति की आशंका है। दूसरी तरफ, तमिनलाडु, आंध्र प्रदेश जैसे तटीय राज्यों में तबाही वाली बढ़ आ सकती है। आईएमडी के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून इस बार सामान्य तिथि से करीब चार दिन पहले, यानी 26 मई के आसपास केरल तट पर दस्तक दे सकता है। शनिवार को यह दक्षिण बंगाल की खाड़ी, अंडमान सागर और अंडमान- निकोबार द्वीप समूह के कुछ हिस्सों में और आगे बढ़ा है। इसके आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं।


    यूपी, हरियाणा-पंजाब में सबसे ज्यादा असर

    शक्तिशाली अल नीनो का सबसे अधिक उत्तर और मध्य भारत पर प्रभाव पड़ने की आशंका है। पश्चिम भारत के कुछ हिस्से भी प्रभावित हो सकते हैं। इनमें पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और राजस्थान जैसे कृषि प्रधान राज्यों पर बुरा असर पड़ सकता है। दिल्ली-एनसीआर के लिए गर्मी और सूखे के दोहरे संकट का सामना करना पड़ सकता है।

    मानसूनी बारिश कम होने से प्रमुख फसलों को नुकसान हो सकता है। इससे खाद्य पदार्थों की कीमतों, बिजली आपूर्ति और ग्रामीण आय पर दबाव बढ़ सकता है। भारत की वार्षिक वर्षा का लगभग 70 फीसदी मानसून से आता है और लगभग आधी आबादी कृषि पर निर्भर है, ऐसे में कम बारिश वाला वर्ष भी व्यापक आर्थिक प्रभाव डाल सकता है।


    आईओडी कम कर सकता है असर

    इस भयावह आशंका के बीच इंडियन ओशन डिपोल’ (आईओडी) के रूप में एक उम्मीद की किरण भी नजर आ रही है। जलवायु मॉडल के अनुसार मानसून के आखिरी महीनों में आईओडी सकाकात्मक हो सकता है। अगर ऐसा हुआ तो यह अल नीनो के नकारात्मक प्रभाव को कुछ हद तक कम कर सकता है। मानसूनी हवाओं को थोड़ी मजबूती मिल सकती है जिससे कुछ इलाकों में बारिश की वापसी संभव है।


    लू घोषित करने के मापदंडों में बदलाव करेगा आईएमडी

    आईएमडी अपने विशेषज्ञों के साथ मिलकर जल्द ही देश में लू की स्थिति घोषित करने के मानदंडों में संशोधन करेगा। मौजूदा मापदंड भारत की भौगोलिक परिस्थितियों के अनुकूल नहीं हैं। आधिकारिक सूत्रों ने शनिवार को बताया कि इस गर्मी के मौसम में लोगों को भीषण गर्मी और उमस का सामना करना पड़ा तथा पहली बार कर्नाटक-महाराष्ट्र तट के पास बने चक्रवाती तंत्र के आधार पर मौसम पूर्वानुमान जारी किए गए। इससे पहले कभी भी दक्षिण के इतने करीब कोई चक्रवाती तंत्र नहीं बना था और इस बार हमें इसी के आधार पर मौसम का पूर्वानुमान लगाना पड़ा।


    870 मिलीमीटर होनी चाहिए औसत बारिश

    आईएमडी के पूर्वानुमान एक अनुसार, इस साल मानसूनी बारिश दीर्घकालिक औसत (एलपीए) के केवल 92 फीसदी होने की संभावना है। एलपीए का यह स्तर सामान्य से कम बारिश की श्रेणी में आता है। साल 1971 से 2020 के डाटा के आधार पर भारत में औसत बारिश 870 मिलीमीटर होनी चाहिए, लेकिन इस बार इससे कम बारिश होने की आशंका है। आंकड़ों के मुताबिक इस बार सूखे की स्थिति बनने की संभावना 35% है। यह सामान्य वर्षों की तुलना में दोगुने से भी ज्यादा है। जून या जुलाई में अल नीनो के पूरी तरह सक्रिय होने की संभावना है।


    44.8 डिग्री पर तपा बांदा

    उत्तर प्रदेश में भी भीषण गर्मी पड़ रही है। शनिवार को राज्य में अधिकतम स्थानों पर पारा 40 डिग्री सेल्सियस के ऊपर ही रहा। बांदा में सबसे अधिक तापमान 44.8 डिग्री सेल्सियस रहा। वहीं, झांसी में 44.1 डिग्री, प्रयागराज में 44 डिग्री सेल्सियस अधिकतम तापमान रहा। आगरा में 43 डिग्री सेल्सियस, गाजीपुर में 42 डिग्री सेल्सियस और वाराणसी हवाई अड्डे पर 41.3 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया।

  • एमपी, यूपी और राजस्थान में पारा 47°C तक पहुंचने की आशंका, कई राज्यों में हीटवेव और बारिश दोनों के अलर्ट

    एमपी, यूपी और राजस्थान में पारा 47°C तक पहुंचने की आशंका, कई राज्यों में हीटवेव और बारिश दोनों के अलर्ट


    नई दिल्ली। मौसम विभाग के अनुसार इस बार मानसून सामान्य समय से पहले 26 मई के आसपास केरल पहुंच सकता है, लेकिन इसके बावजूद देश में मौसम का मिजाज चिंताजनक बना हुआ है। अमेरिकी एजेंसी NOAA की रिपोर्ट के अनुसार इस साल सुपर अल-नीनो की स्थिति बनने की संभावना है, जिससे मानसून कमजोर रह सकता है और देश के कई हिस्सों में सूखा व भीषण गर्मी बढ़ सकती है।

    अल-नीनो एक जलवायु घटना है, जिसमें प्रशांत महासागर का तापमान बढ़ने से मानसूनी हवाओं की दिशा प्रभावित होती है, जिससे भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया में बारिश कम होने और तापमान बढ़ने की आशंका रहती है। इसी कारण इस बार बारिश सामान्य से कम और गर्मी अधिक रहने का अनुमान लगाया जा रहा है।

    मौसम विभाग के मुताबिक इस बार मानसून केरल से 1 जून के बजाय 26 मई के आसपास प्रवेश कर सकता है, लेकिन इसके बाद अलग-अलग राज्यों में इसकी गति अलग-अलग रहेगी। अनुमान के अनुसार राजस्थान में 20 जून, मध्य प्रदेश में 12 जून, उत्तर प्रदेश में 18 जून और बिहार में 8 से 10 जून के बीच मानसून पहुंच सकता है।

    फिलहाल देश के कई हिस्सों में भीषण गर्मी और लू का असर जारी है। राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, झारखंड और विदर्भ में हीटवेव का अलर्ट जारी किया गया है, जहां तापमान 46 से 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। कई इलाकों में रात के समय भी लू चलने की संभावना जताई गई है, जिससे लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

    मध्य प्रदेश के भोपाल में तापमान 42 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया, जिससे सड़कों का डामर तक पिघलने की स्थिति बन गई। वहीं राजस्थान के फलौदी में 44.8 डिग्री और महाराष्ट्र के अमरावती में 45.6 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया, जिससे कई क्षेत्रों में जनजीवन प्रभावित हुआ है।

    इसके साथ ही मौसम विभाग ने अलग-अलग राज्यों में बारिश और आंधी-तूफान के अलर्ट भी जारी किए हैं। झारखंड में ऑरेंज अलर्ट, बिहार और हरियाणा के कुछ जिलों में आंधी-बारिश की चेतावनी है, जबकि जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है।

    वहीं उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और महाराष्ट्र में हीटवेव का असर अगले एक सप्ताह तक जारी रहने की आशंका है। कई राज्यों में तापमान 45 से 47 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है, जिससे लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
     

  • यूपी में 18 जून तक मानसून की दस्तक संभव, भीषण गर्मी और लू से बढ़ी परेशानी

    यूपी में 18 जून तक मानसून की दस्तक संभव, भीषण गर्मी और लू से बढ़ी परेशानी


    नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश में मानसून इस बार 18 जून के आसपास दस्तक दे सकता है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, मानसून केरल में 26 मई के करीब पहुंचेगा और वहां से आगे बढ़ते हुए 18 जून तक गोरखपुर के रास्ते यूपी में प्रवेश कर सकता है। हालांकि मौसम विशेषज्ञों ने इसे संभावित तारीख बताया है और स्पष्टता मानसून की वास्तविक गति के आधार पर ही आएगी।

    लखनऊ स्थित मौसम वैज्ञानिक Atul Kumar Singh ने बताया कि मौजूदा मौसम परिस्थितियों को देखते हुए यह अनुमान लगाया गया है। उन्होंने कहा कि जब मानसून केरल से आगे बढ़ेगा, तभी इसकी सटीक तारीख तय की जा सकेगी।

    फिलहाल प्रदेश में मौसम शुष्क बना हुआ है और तेज धूप के कारण तापमान लगातार बढ़ रहा है। पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश में गर्मी का असर तेज है और कई जिलों में हीटवेव का अलर्ट जारी किया गया है। झांसी और ललितपुर सहित करीब 8 जिलों में लू चलने की चेतावनी दी गई है।

    पिछले 24 घंटों में कुछ जिलों में हल्की बारिश जरूर दर्ज की गई है, लेकिन उससे गर्मी में कोई खास राहत नहीं मिली। बांदा प्रदेश का सबसे गर्म शहर रहा, जहां तापमान 45.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। मौसम विभाग का अनुमान है कि आने वाले दिनों में तापमान 47 डिग्री तक भी जा सकता है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ का असर खत्म हो चुका है, जिसके कारण अब दिन के साथ-साथ रातें भी गर्म रहेंगी। हीटवेव की स्थिति और तेज होने की संभावना जताई गई है, जिससे लोगों को अतिरिक्त सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

    मौसम विभाग ने यह भी बताया कि इस साल मानसून सामान्य से कमजोर रह सकता है। इसके पीछे प्रशांत महासागर में अल नीनो जैसी परिस्थितियों का प्रभाव और उत्तरी गोलार्ध में कम बर्फबारी को कारण माना जा रहा है, जिससे वर्षा प्रभावित हो सकती है।

    हालांकि पिछले वर्ष उत्तर प्रदेश में मानसून अपेक्षाकृत बेहतर रहा था और सामान्य से 10 से 15 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई थी। लेकिन इस बार मौसम पैटर्न बदलने से बारिश कम होने की संभावना जताई जा रही है, जिससे कृषि और जलस्तर पर असर पड़ सकता है।

  • इस साल भारत में चुनौतीपूर्ण रहेगा मानसून…. WMO की चेतावनी- औसत से कम होगी बारिश

    इस साल भारत में चुनौतीपूर्ण रहेगा मानसून…. WMO की चेतावनी- औसत से कम होगी बारिश


    नई दिल्ली।
    दक्षिण एशिया (South Asia), विशेषकर भारत (India) के लिए 2026 का मानसून (Monsoon) चुनौतीपूर्ण रहने के संकेत दे रहा है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) (World Meteorological Organization -WMO). के अनुसार जून से सितंबर के बीच मानसूनी वर्षा (Monsoon Rain) औसत से कम रह सकती है, जबकि दिन और रात दोनों समय तापमान सामान्य से अधिक रहने का अनुमान है।

    भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने भी 13 अप्रैल 2026 को जारी अपने पहले दीर्घावधि पूर्वानुमान में मानसून के सामान्य से कमजोर रहने की आशंका जताई है। ऐसे में कम बारिश और बढ़ती गर्मी का संयुक्त प्रभाव कृषि, जल संसाधनों और आम जीवन पर व्यापक दबाव डाल सकता है। मानसून की कमी का सबसे अधिक असर मध्य भारत के कृषि प्रधान क्षेत्रों में दिख सकता है, जहां वर्षा सामान्य से कम रहने की आशंका है।


    कई राज्यों में सामान्य से ज्यादा बारिश की संभावना

    हालांकि उत्तर-पश्चिम, उत्तर-पूर्व और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में सामान्य या सामान्य से अधिक बारिश संभव है, लेकिन पूरे क्षेत्र में वर्षा का वितरण असमान रहने की संभावना है। दक्षिण एशिया में कुल सालाना वर्षा का लगभग 75 से 90 प्रतिशत हिस्सा जून से सितंबर के बीच होता है। ऐसे में इस अवधि में कमी का सीधा असर खेती, जल उपलब्धता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। मानसून को लेकर अनिश्चितता ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। भारत, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान और पाकिस्तान में बुवाई की तैयारी कर रहे किसानों के लिए शुरुआती संकेत अनुकूल नहीं हैं।


    सूखे की आशंका के साथ बाढ़ का भी जोखिम

    डब्ल्यूएमओ के अनुसार 2026 में मानसून का स्वरूप असंतुलित रह सकता है, जिसमें एक ओर लंबे सूखे दौर की संभावना है तो दूसरी ओर कम समय में अत्यधिक वर्षा की घटनाएं बढ़ सकती हैं। ऐसी स्थिति बाढ़ का खतरा भी बढ़ा सकती है। डब्ल्यूएमओ के अनुसार दक्षिण एशिया में अधिकतम और न्यूनतम दोनों तापमान सामान्य से ऊपर रहने की संभावना है। इसका अर्थ है कि दिन के साथ-साथ रात में भी गर्मी से राहत नहीं मिलेगी। लगातार उच्च तापमान लू की घटनाओं को बढ़ा सकता है, जिससे बुजुर्गों, बच्चों और कमजोर वर्गों के लिए स्वास्थ्य जोखिम बढ़ेंगे। इसके साथ ही कूलिंग की मांग बढ़ने से बिजली व्यवस्था पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।


    अल नीनो रहेगा प्रभावी

    डब्ल्यूएमओ के अनुसार 2026 के मानसून पर अल नीनो का प्रभाव पड़ सकता है। अल नीनो एक ऐसी जलवायु प्रक्रिया है जिसमें प्रशांत महासागर के पूर्वी हिस्से का पानी सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है, जिससे वैश्विक स्तर पर हवाओं और मौसम के पैटर्न में बदलाव आता है। इसका प्रभाव भारतीय मानसून को कमजोर करने के रूप में देखा जाता है।

    वैज्ञानिकों के अनुसार फिलहाल स्प्रिंग प्रेडिक्टेबिलिटी बैरियर का प्रभाव भी बना हुआ है। यह मार्च से मई के बीच का वह दौर होता है जब समुद्र और वायुमंडल में तेजी से बदलाव होते हैं, जिससे लंबी अवधि के मौसम पूर्वानुमान पूरी तरह सटीक नहीं रह पाते।

  • मध्य प्रदेश मौसम अपडेट: बालाघाट और डिंडौरी में बारिश का अलर्ट, भोपाल-इंदौर में धूप

    मध्य प्रदेश मौसम अपडेट: बालाघाट और डिंडौरी में बारिश का अलर्ट, भोपाल-इंदौर में धूप


    मध्य प्रदेश में मंगलवार को भी मौसम ने अपना मूड बदला रखा है। मौसम विभाग ने कई जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। बालाघाट, मंडला, अनूपपुर, सिवनी और डिंडौरी में पानी गिरने की संभावना जताई गई है। दक्षिणी हिस्से में लो प्रेशर एरिया सक्रिय होने के कारण मौसम में बदलाव देखने को मिल रहा है। वहीं, राजधानी भोपाल और इंदौर में धूप खिली रहेगी, जिससे मौसम में स्थानीय अंतर बना हुआ है।

    मौसम विभाग के मुताबिक, प्रदेश के दक्षिणी हिस्से में लो प्रेशर एरिया एक्टिव है। इसके साथ ही दक्षिणी-पश्चिमी हिस्सों में दो ट्रफ भी सक्रिय हैं। इन सक्रियताओं के चलते प्रदेश के इन हिस्सों में बारिश का सिलसिला जारी है और लोगों को पानी गिरने की संभावना के लिए सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

    सोमवार को भी प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश देखने को मिली थी। दोपहर में जबलपुर, सीधी और रीवा में बारिश हुई, जबकि रात में ग्वालियर, सीधी, सिंगरौली, सागर, मऊगंज, मुरैना, बड़वानी, रीवा, धार, खरगोन, दमोह और दतिया में गरज-चमक के साथ पानी गिरा।

    बारिश के चलते प्रदेश में दिन का तापमान भी गिरा है। वहीं, रात का तापमान सामान्य से थोड़ा अधिक दर्ज किया गया। रविवार और सोमवार की रात के आंकड़ों के अनुसार पचमढ़ी में सबसे कम 11.2 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया। मंदसौर में रात का तापमान 11.7 डिग्री और राजगढ़ में 12.4 डिग्री दर्ज हुआ।

    मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में दक्षिणी-पश्चिमी हिस्सों में बारिश की गतिविधियां बनी रह सकती हैं। ग्रामीण और शहरी इलाकों में लोगों को विशेष सतर्क रहने की सलाह दी गई है। वहीं भोपाल और इंदौर जैसे शहरों में धूप खिलने से स्थानीय लोगों को हल्की गर्मी का अनुभव हो सकता है।

    इस प्रकार, मध्य प्रदेश में मंगलवार को मौसम ने बारिश और धूप दोनों का मिश्रित प्रभाव दिखाया। प्रदेश के दक्षिणी हिस्सों में बारिश की संभावना के बीच राजधानी और पश्चिमी शहरों में धूप का आनंद लिया जा सकेगा, जबकि तापमान में गिरावट और बढ़त के कारण दिन और रात का अंतर स्पष्ट रूप से महसूस होगा।