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  • अब अवैध शराब पर चौतरफा वार: अचानक छापे, रात में गश्त और वाहनों की जांच, गड़बड़ी नजरअंदाज करने वालों पर होगी कार्रवाई

    अब अवैध शराब पर चौतरफा वार: अचानक छापे, रात में गश्त और वाहनों की जांच, गड़बड़ी नजरअंदाज करने वालों पर होगी कार्रवाई


    भोपाल। सागर में जहरीली शराब पीने से 20 से अधिक लोगों की मौत के बाद मध्यप्रदेश में अवैध शराब के खिलाफ सरकार और आबकारी विभाग ने सख्त रुख अपनाया है। प्रदेशभर में अब विशेष अभियान चलाकर केवल अवैध शराब की बिक्री ही नहीं बल्कि इसके निर्माण संग्रहण और परिवहन से जुड़े पूरे नेटवर्क पर नजर रखी जाएगी। आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना ने सभी जिलों के कलेक्टरों और संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि अवैध मदिरा के कारोबार पर किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और गंभीर गड़बड़ी को किसी भी स्थिति में नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।

    जहरीली शराब से हुई मौतों के बाद जारी निर्देशों में प्रदेश के सभी जिलों में संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान करने को कहा गया है। ऐसे इलाकों में जहां अवैध शराब के निर्माण संग्रहण परिवहन या बिक्री की आशंका रहती है वहां नियमित जांच के साथ अचानक छापेमारी की जाएगी। संदिग्ध व्यक्तियों और स्थानों पर लगातार निगरानी रखी जाएगी ताकि अवैध शराब का कारोबार शुरू होने से पहले ही उस पर कार्रवाई की जा सके।

    विशेष अभियान में सूचना तंत्र को भी मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं। अवैध शराब से संबंधित मिलने वाली हर विश्वसनीय सूचना का तत्काल सत्यापन किया जाएगा। सूचना सही पाए जाने पर मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम 1915 और लागू नियमों के तहत कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। विभाग ने सूचना देने वाले लोगों की पहचान गोपनीय रखने के भी निर्देश दिए हैं ताकि लोग बिना किसी डर के अवैध शराब के कारोबार की जानकारी प्रशासन तक पहुंचा सकें।

    अवैध शराब बनाने वाली भट्ठियों अड्डों संग्रहण केंद्रों और बिक्री स्थलों पर विशेष दबिश देने की तैयारी है। तलाशी और जब्ती की कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के अनुसार की जाएगी और पंचनामा समेत सभी दस्तावेजों को सही तरीके से तैयार करने पर जोर दिया जाएगा। अधिकारियों को विशेष रूप से साक्ष्यों की गुणवत्ता पर ध्यान देने के लिए कहा गया है ताकि कार्रवाई के बाद मामले अदालत में मजबूती के साथ पेश किए जा सकें और आरोपी कानूनी प्रक्रिया की कमियों का फायदा न उठा सकें।

    अवैध शराब के परिवहन पर भी कड़ी नजर रखी जाएगी। संवेदनशील मार्गों जिला सीमाओं और चिन्हित स्थानों पर वाहनों की आकस्मिक जांच होगी। संदिग्ध वाहनों में अवैध शराब या अन्य प्रतिबंधित सामग्री मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी। वाहन नंबर चालक और मालिक समेत जरूरी जानकारी दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं। अंतर जिला और अंतर राज्यीय शराब तस्करी की आशंका वाले मार्गों पर संबंधित जिलों के बीच समन्वय स्थापित किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर पुलिस के साथ संयुक्त कार्रवाई भी होगी।

    आबकारी विभाग ने लंबित मामलों की समीक्षा करने के भी निर्देश दिए हैं। जिन मामलों में गिरफ्तारी की कार्रवाई बाकी है उनकी समीक्षा कर फरार और वांछित आरोपियों की अलग सूची तैयार की जाएगी। जमानत राजसात अभिरक्षा और अन्य महत्वपूर्ण न्यायालयीन मामलों में भी लंबित कार्रवाई को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं।

    लाइसेंसी शराब दुकानों और परिसरों की भी विशेष जांच की जाएगी। यदि वहां अवैध शराब के विक्रय भंडारण लाइसेंस की शर्तों के उल्लंघन या किसी अन्य गंभीर अनियमितता की सूचना मिलती है तो तत्काल निरीक्षण और नियमानुसार कार्रवाई होगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि गंभीर अनियमितताओं को किसी भी परिस्थिति में अनदेखा नहीं किया जाएगा।

    अभियान की निगरानी के लिए दैनिक प्रगति रिपोर्ट अनिवार्य की गई है। दबिश तलाशी वाहन जांच जब्ती दर्ज प्रकरण गिरफ्तारियां फरार आरोपी और जब्त शराब समेत हर कार्रवाई का विवरण प्रतिदिन दर्ज कर वरिष्ठ अधिकारियों को भेजना होगा। कोई भी कॉलम खाली नहीं छोड़ा जाएगा और कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में शून्य अंकित करना होगा।

    सबसे अहम बात यह है कि अब अधिकारियों की जवाबदेही भी तय की जाएगी। विश्वसनीय सूचना मिलने के बावजूद समय पर कार्रवाई नहीं करने गंभीर गड़बड़ी की उपेक्षा करने या दायित्व के निर्वहन में लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारी और कर्मचारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जा सकती है। सहायक आबकारी आयुक्त और जिला आबकारी अधिकारियों को अपने जिलों में व्यक्तिगत रूप से निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं।

    सागर की घटना के बाद शुरू होने वाला यह विशेष अभियान प्रदेश में अवैध शराब के पूरे नेटवर्क पर कार्रवाई की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि लगातार जांच छापेमारी और सख्त निगरानी से जहरीली और अवैध शराब के कारोबार पर कितनी प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी।

  • स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग पर नहीं माने इंटर्न डॉक्टर, MP में OPD का बहिष्कार: हमीदिया में इलाज प्रभावित, CM हाउस के रास्ते बंद

    स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग पर नहीं माने इंटर्न डॉक्टर, MP में OPD का बहिष्कार: हमीदिया में इलाज प्रभावित, CM हाउस के रास्ते बंद


    भोपाल । मध्यप्रदेश में एमबीबीएस इंटर्न डॉक्टरों का स्टाइपेंड बढ़ाने को लेकर शुरू हुआ आंदोलन अब और तेज हो गया है। सोमवार सुबह से शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन मंगलवार को भी जारी रहा। पुलिस की कार्रवाई से नाराज इंटर्न डॉक्टरों ने प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में ओपीडी बंद रखने का फैसला किया है। भोपाल के साथ ही इंदौर रतलाम और अन्य शहरों के सरकारी अस्पतालों में भी इंटर्न डॉक्टरों के आंदोलन का असर देखने को मिल रहा है। ओपीडी सेवाएं प्रभावित होने से इलाज और जांच के लिए अस्पताल पहुंचे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है हालांकि इमरजेंसी सेवाओं को चालू रखा गया है।

    राजधानी भोपाल में इंटर्न डॉक्टर रातभर से कमला पार्क क्षेत्र की सड़क पर बैठे हुए हैं। डॉक्टरों ने सड़क पर प्रदर्शन करते हुए अपनी मांगों के समर्थन में विरोध दर्ज कराया। उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर आधिकारिक रूप से बातचीत नहीं होती और स्टाइपेंड बढ़ाने को लेकर स्पष्ट निर्णय नहीं लिया जाता तब तक आंदोलन जारी रहेगा। प्रदर्शन के कारण यातायात व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। स्थिति को देखते हुए पुलिस ने मुख्यमंत्री निवास की ओर जाने वाले रास्तों को बंद कर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है। अस्पताल परिसर और आसपास के इलाकों में भी पुलिस बल तैनात किया गया है।

    भोपाल के हमीदिया अस्पताल में आंदोलन का सबसे ज्यादा असर ओपीडी सेवाओं पर दिखाई दे रहा है। प्रदर्शन के कारण ओपीडी पूरी तरह बंद रही जबकि ऑपरेशन थिएटर के काम का भी बहिष्कार किया जा रहा है। इलाज और जांच के लिए दूरदराज से पहुंचे मरीजों को परेशान होना पड़ा। अस्पताल के तीन गेटों में से केवल गेट नंबर दो से प्रवेश की व्यवस्था की गई है। इमरजेंसी गेट बंद होने के कारण आपातकालीन मरीजों को भी इसी गेट से अस्पताल में प्रवेश करना पड़ रहा है जिससे अस्पताल के बाहर वाहनों और लोगों की आवाजाही बढ़ गई है और ट्रैफिक पर भी दबाव बना हुआ है।

    इधर इंदौर में भी इंटर्न डॉक्टरों ने एमवाय अस्पताल परिसर में विरोध रैली निकालकर आंदोलन को समर्थन दिया। भोपाल में प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई के विरोध में इंटर्न और रेजिडेंट डॉक्टर एकजुट हुए और अपनी मांगों के समर्थन में नारे लगाए। डॉक्टरों का कहना है कि वे लंबे समय से स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग कर रहे हैं और शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध दर्ज करा रहे थे। उनका आरोप है कि भोपाल में प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने वाटर कैनन और लाठीचार्ज का इस्तेमाल किया जिसके विरोध में अब प्रदेश के अलग अलग शहरों में भी प्रदर्शन तेज हो गया है।

    आंदोलन के बीच डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला की अध्यक्षता में वरिष्ठ डॉक्टरों और अधिकारियों के साथ बैठक भी हुई। बैठक में इंटर्न डॉक्टरों की दो प्रमुख मांगों पर चर्चा की गई जिसमें स्टाइपेंड बढ़ाने और प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई का मुद्दा शामिल रहा। स्वास्थ्य मंत्री ने बातचीत को सकारात्मक बताया और कहा कि इंटर्न डॉक्टरों के प्रतिनिधि भी बैठक में शामिल हुए थे। मुख्यमंत्री के वापस आने के बाद इस मुद्दे पर फिर से चर्चा किए जाने की बात कही गई है।

    हालांकि इंटर्न डॉक्टरों का कहना है कि वे केवल मौखिक आश्वासन पर आंदोलन समाप्त नहीं करेंगे। उनका साफ कहना है कि स्टाइपेंड बढ़ाने का लिखित आदेश मिलने तक उनका विरोध जारी रहेगा। डॉक्टरों ने यह भी तर्क दिया है कि उत्तर प्रदेश में इंटर्न डॉक्टरों का स्टाइपेंड बढ़ाया गया है इसलिए मध्यप्रदेश सरकार को भी इस दिशा में जल्द निर्णय लेना चाहिए।

    फिलहाल सरकार और इंटर्न डॉक्टरों के बीच बातचीत जारी है लेकिन आंदोलन समाप्त होने को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। एक ओर सरकार समाधान के लिए बातचीत कर रही है तो दूसरी ओर इंटर्न डॉक्टर लिखित आदेश की मांग पर अड़े हुए हैं। ऐसे में आंदोलन का सीधा असर सरकारी अस्पतालों में आने वाले मरीजों पर पड़ रहा है और लोगों की नजर अब सरकार और डॉक्टरों के बीच होने वाली अगली बातचीत पर टिकी हुई है।

  • बैंक की नौकरी छोड़ी तो गरीब बच्चों को बनाया मिशन, 12 से 500 तक पहुंचा कारवां, ग्वालियर के मैनेजर की कहानी

    बैंक की नौकरी छोड़ी तो गरीब बच्चों को बनाया मिशन, 12 से 500 तक पहुंचा कारवां, ग्वालियर के मैनेजर की कहानी


    ग्वालियर । रिटायरमेंट के बाद आमतौर पर लोग अपने परिवार और निजी जिंदगी के लिए समय निकालते हैं लेकिन ग्वालियर के रिटायर्ड बैंक मैनेजर एमएल अहिरवार ने अपनी जिंदगी का रास्ता ही बदल दिया। पत्नी के निधन के बाद जब उनके जीवन में अकेलापन और गहरा दुख आया तो उन्होंने खुद को उस दर्द में समेटने के बजाय जरूरतमंद बच्चों की जिंदगी संवारने का फैसला किया। आज करीब छह साल से वे झुग्गी बस्तियों और मजदूर परिवारों के बच्चों को पढ़ाने में जुटे हैं। उनकी यह पहल अब 400 से 500 बच्चों तक पहुंच चुकी है।

    अहिरवार के जीवन में यह बदलाव कोरोना की दूसरी लहर के दौरान आया। करीब 2 मई 2021 को उनकी पत्नी का निधन हो गया था। इस घटना ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया। जीवन में अचानक ऐसा खालीपन आया जिसे भरना आसान नहीं था। इसी दौर में उनकी मुलाकात शिक्षा विभाग से सेवानिवृत्त ओपी दीक्षित से हुई। दीक्षित पहले से ही झुग्गी बस्तियों के बच्चों को पढ़ाने का काम कर रहे थे। पत्नी के निधन के करीब चार से पांच महीने बाद अहिरवार भी उनके साथ बच्चों को पढ़ाने लगे। शुरुआत में उनके पास सिर्फ 12 से 13 बच्चे आते थे लेकिन धीरे-धीरे यह संख्या बढ़ती चली गई।

    अहिरवार का फोकस उन बच्चों पर है जिनके माता-पिता मजदूरी या दूसरे छोटे-मोटे कामों में व्यस्त रहते हैं। आर्थिक मजबूरियों के कारण कई परिवार बच्चों की पढ़ाई पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे पाते। ऐसे बच्चे स्कूल से दूर होने के साथ गलत संगत में पड़ने के खतरे का भी सामना करते हैं। अहिरवार का प्रयास है कि इन बच्चों को शिक्षा से जोड़े रखा जाए और उन्हें ऐसा माहौल दिया जाए जिसमें वे अपने भविष्य के बारे में सोच सकें।

    ग्वालियर में काम की तलाश में आने वाले प्रवासी मजदूरों के बच्चे भी उनकी कक्षा का हिस्सा हैं। टीकमगढ़ और छतरपुर जैसे इलाकों से परिवार रोजी-रोटी के लिए दूसरे शहरों में आते हैं। बार-बार जगह बदलने के कारण बच्चों की पढ़ाई टूट जाती है। ऐसे बच्चों को लगातार पढ़ाई से जोड़े रखना अहिरवार की पहल का अहम हिस्सा है।

    सिर्फ पढ़ाने तक ही उनकी जिम्मेदारी सीमित नहीं है। वे जरूरतमंद बच्चों को कॉपी किताब और स्टेशनरी जैसी पढ़ाई की सामग्री भी उपलब्ध कराते हैं। जिन बच्चों के सामने स्कूल की फीस भरने की समस्या आती है वहां वे अपनी क्षमता के अनुसार मदद करते हैं। समाजसेवी और कुछ संगठन भी समय-समय पर इस काम में सहयोग करते हैं। कई बच्चों का स्कूल में दाखिला कराने में भी उन्होंने मदद की है ताकि उनकी शिक्षा बीच में न छूटे।

    शुरुआत में परिवार को भी चिंता थी कि अहिरवार अपना इतना समय बच्चों के बीच क्यों दे रहे हैं लेकिन जब इस पहल का असर दिखाई देने लगा तो परिवार ने उनका साथ देना शुरू कर दिया। अब उनके बच्चे भी इस काम में उनका समर्थन करते हैं। अहिरवार के लिए किसी बच्चे का पढ़ाई जारी रखना और आगे बढ़ना ही सबसे बड़ी खुशी है।

    उनका मानना है कि जरूरतमंद की आर्थिक मदद करना निश्चित रूप से जरूरी है लेकिन शिक्षा का दान किसी व्यक्ति की पूरी जिंदगी बदल सकता है। इसी सोच के साथ रिटायर्ड बैंक मैनेजर ने अपने जीवन के खालीपन को बच्चों के भविष्य की रोशनी से भर दिया। 12 बच्चों से शुरू हुई उनकी छोटी सी पहल आज सैकड़ों बच्चों तक पहुंच चुकी है और यही उनके लिए पत्नी की याद को एक सार्थक दिशा देने का सबसे बड़ा जरिया बन गई है।

  • MP में सियासत से लेकर नदी तक ‘आपदा में अवसर’! नरोत्तम का शक्ति प्रदर्शन, नेता जी की पिटाई की चर्चा

    MP में सियासत से लेकर नदी तक ‘आपदा में अवसर’! नरोत्तम का शक्ति प्रदर्शन, नेता जी की पिटाई की चर्चा


    भोपाल । मध्य प्रदेश की सियासत में इन दिनों तस्वीरों और चर्चाओं का दौर फिर तेज होता दिखाई दे रहा है। दतिया में पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा के निवास पर उमड़ी समर्थकों की भीड़ ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। जन्माष्टमी के मौके पर दिल्ली से लौटे नरोत्तम मिश्रा का समर्थकों ने जोरदार स्वागत किया। नरोत्तम मिश्रा ने भी कार्यकर्ताओं के बीच पहुंचकर उनका उत्साह बढ़ाया और अपने हाथों से मिठाई खिलाकर जन्माष्टमी की शुभकामनाएं दीं। इस दौरान कृष्ण जन्म से जुड़े भजनों और नारों से माहौल भक्तिमय नजर आया। हालांकि राजनीतिक नजरिए से देखें तो इस पूरी तस्वीर को उनके समर्थक शक्ति प्रदर्शन के तौर पर भी देख रहे हैं।

    दरअसल दतिया उपचुनाव में भाजपा की हार के बाद नरोत्तम मिश्रा की सक्रियता और राजनीतिक भविष्य को लेकर कई तरह की चर्चाएं सामने आई थीं। लेकिन पिछले कुछ समय में उनकी कई राजनीतिक मुलाकातों और सार्वजनिक मौजूदगी ने इन चर्चाओं को फिर हवा दे दी है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन से मुलाकात हो या ओरछा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ उनकी मौजूदगी या फिर भोपाल में सत्ता और संगठन से जुड़े नेताओं के साथ मेल-मुलाकात इन तस्वीरों को उनके समर्थक अलग संकेत के तौर पर देख रहे हैं। अब दतिया में समर्थकों का जुटना और उनका उत्साह यह संदेश देने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है कि दादा की राजनीतिक पकड़ अभी भी कमजोर नहीं हुई है।

    उधर छतरपुर से सामने आई एक तस्वीर प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती है। देरी रोड पर उर्मिल नदी उफान पर है और तेज बहाव के कारण पानी पुल के ऊपर से गुजर रहा है। इसके बावजूद लोगों को नदी पार करने की मजबूरी बनी हुई है। इसी मजबूरी के बीच कुछ लोगों के लिए यह स्थिति कमाई का जरिया बन गई है। दावा है कि राहगीरों से 50-50 रुपए लेकर उन्हें उफनती नदी पार कराई जा रही है। जान जोखिम में डालकर लोग तेज बहाव के बीच रास्ता पार करने को मजबूर हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि ऐसी खतरनाक स्थिति में प्रशासन की ओर से पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम क्यों नजर नहीं आए। लोगों की मजबूरी और खतरे के बीच चल रहा यह कथित कारोबार व्यवस्था की गंभीर तस्वीर सामने रखता है।

    वहीं मध्य प्रदेश की राजनीति से जुड़ी एक और दिलचस्प चर्चा पूर्व सांसद लक्ष्मण सिंह को लेकर है। कांग्रेस से निष्कासित चल रहे लक्ष्मण सिंह इन दिनों राजनीति से इतर संगीत की ओर बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। जन्माष्टमी के मौके पर उन्होंने खुद वीडियो जारी कर बताया कि वे गाना सीख रहे हैं और इस दौरान भजन भी सुनाए। राहुल गांधी पर टिप्पणी के बाद कांग्रेस से निष्कासन और उसके बाद नई पार्टी बनाने के संकेतों के बीच उनकी राजनीतिक राह को लेकर काफी चर्चा हुई थी। लेकिन फिलहाल उनके सुर राजनीति से ज्यादा संगीत में साधे जा रहे हैं। अब देखना यह होगा कि छोटे राजा साहब के सुर आगे किस दिशा में जाते हैं।

    इसी बीच राजधानी भोपाल और आसपास के राजनीतिक गलियारों में एक नेता जी की कथित पिटाई की चर्चा भी गर्म है। सूत्रों के हवाले से चर्चा है कि नेता जी के साथ दो अलग-अलग मौकों पर मारपीट हुई। दावा किया जा रहा है कि पहली घटना एक बिल्डिंग में हुई जबकि दूसरी बार उन्हें रास्ते में रोककर पीटा गया। यहां तक चर्चा है कि इस कथित मारपीट में उनके कुछ दांत भी टूट गए। हालांकि नेता जी और उनके करीबियों ने ऐसी किसी घटना से इनकार किया है और मामला पुलिस थाने तक पहुंचने की भी जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में इस चर्चा की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। बावजूद इसके सियासी और स्थानीय गलियारों में यह मामला फिलहाल खूब चर्चा में है।

    कुल मिलाकर दतिया में नरोत्तम मिश्रा के समर्थकों की भीड़ से लेकर छतरपुर की उफनती नदी और भोपाल के सियासी गलियारों में चल रही चर्चाओं तक मध्य प्रदेश में इन दिनों घटनाएं अलग-अलग रंग दिखा रही हैं। कहीं शक्ति प्रदर्शन के मायने निकाले जा रहे हैं तो कहीं व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं और कहीं राजनीति से दूर संगीत के सुर सुनाई दे रहे हैं। मध्य प्रदेश की सियासत में इन तस्वीरों और चर्चाओं का असर आने वाले दिनों में किस रूप में दिखाई देता है यह देखना दिलचस्प होगा।

  • राशन वितरण में गड़बड़ी पड़ी भारी: बड़ोखरा में सेल्समैन का मकान ध्वस्त, जिले में 6 राशन विक्रेताओं पर कानूनी कार्रवाई

    राशन वितरण में गड़बड़ी पड़ी भारी: बड़ोखरा में सेल्समैन का मकान ध्वस्त, जिले में 6 राशन विक्रेताओं पर कानूनी कार्रवाई


    शिवपुरी। शिवपुरी जिले में राशन वितरण में गड़बड़ी के खिलाफ प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। बदरवास क्षेत्र के बड़ोखरा गांव में ग्रामीणों की शिकायत के बाद हुई जांच में लापरवाही और अनियमितता सामने आने पर प्रशासन ने कार्रवाई की। कलेक्टर अर्पित वर्मा के निर्देश के बाद टीम ने सेल्समैन के खिलाफ कदम उठाते हुए सरकारी जमीन पर बने अवैध मकान को जेसीबी की मदद से ढहा दिया। इसके साथ ही जिले में राशन वितरण से जुड़े मामलों में छह विक्रेताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करते हुए उन्हें जेल भेजने की प्रक्रिया की गई है।

    मामला बड़ोखरा गांव की उचित मूल्य दुकान से जुड़ा है। कलेक्टर अर्पित वर्मा ने अचानक दुकान का निरीक्षण किया था। इस दौरान ग्रामीणों ने सेल्समैन योगेश जाट पर राशन वितरण में मनमानी करने का आरोप लगाया। ग्रामीणों का कहना था कि उन्होंने राशन लेने के लिए फिंगरप्रिंट भी लगाए थे लेकिन इसके बावजूद उन्हें करीब तीन महीने से खाद्यान्न नहीं मिल रहा था। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर ने अपनी मौजूदगी में पात्र हितग्राहियों को राशन का वितरण कराया और सेल्समैन के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए।

    प्रशासन के निर्देश के बाद भी सेल्समैन लगातार दुकान से गायब रहा। इसके बाद गुरुवार को तहसीलदार सचिन भार्गव के नेतृत्व में प्रशासनिक टीम उसके गांव सेमरी पहुंची। यहां जांच के दौरान सरकारी जमीन पर एक मकान बना मिला। प्रशासन ने निर्माण को अवैध मानते हुए कार्रवाई की और जेसीबी से मकान को ढहा दिया। इस कार्रवाई के बाद राशन वितरण व्यवस्था में गड़बड़ी करने वालों के बीच हड़कंप की स्थिति बन गई।

    प्रशासन ने केवल एक मामले तक कार्रवाई सीमित नहीं रखी है। जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में राशन दुकानों की जांच के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। कोलारस क्षेत्र की बामोरखुर्द और श्रीपुरा राशन दुकानों में पीओएस मशीन के रिकॉर्ड में खाद्यान्न दर्ज था लेकिन मौके पर राशन उपलब्ध नहीं मिला। इस मामले में विक्रेता माधौ सिंह यादव और धनपाल सिंह के खिलाफ कार्रवाई की गई और उन्हें जेल भेजा गया।

    इसी तरह रन्नौद तहसील की अकोदा राशन दुकान में भी वितरण व्यवस्था में गड़बड़ी सामने आने के बाद विक्रेता गोलू लोधी पर कार्रवाई की गई। पिछोर क्षेत्र में भी निवोदा के पुष्पेंद्र सिनावलकलां के भगवानलाल और बघावारा के सतेंद्र के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई। इन मामलों में भी आरोपित विक्रेताओं को जेल भेजने की प्रक्रिया शुरू की गई।

    कलेक्टर ने अधिकारियों को जिले की सभी उचित मूल्य दुकानों का मौके पर जाकर निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि पीओएस मशीन में दर्ज खाद्यान्न और वास्तव में हितग्राहियों को वितरित किए गए राशन में किसी तरह का अंतर नहीं होना चाहिए। पात्र लोगों को समय पर उनका राशन मिले और वितरण व्यवस्था में पारदर्शिता बनी रहे इस पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने साफ संकेत दिया है कि राशन वितरण में अनियमितता मिलने पर जांच के बाद जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

  • भोपाल में 8 हजार कारोबारियों को नोटिस, 190 दुकानें सील: चौथे दिन बदली तस्वीर, मामला सुप्रीम कोर्ट में

    भोपाल में 8 हजार कारोबारियों को नोटिस, 190 दुकानें सील: चौथे दिन बदली तस्वीर, मामला सुप्रीम कोर्ट में


    भोपाल । राजधानी भोपाल में रहवासी इलाकों में चल रहे कारोबार के खिलाफ नगर निगम की सीलिंग कार्रवाई अचानक धीमी पड़ गई है। तीन दिनों तक लगातार कार्रवाई करते हुए नगर निगम ने 190 प्रतिष्ठानों को बंद कराया लेकिन चौथे दिन शहर में एक भी सीलिंग नहीं हुई। कार्रवाई रुकने के साथ ही छोटे व्यापारियों और बड़े व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर अलग-अलग कार्रवाई को लेकर विवाद और तेज हो गया है। उधर रहवासियों नगर निगम और नगरीय प्रशासन के अधिकारी अपने-अपने पक्ष के साथ सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए हैं। इस पूरे मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी।

    भोपाल में 31 अगस्त से शुरू हुई कार्रवाई के पहले दिन नगर निगम ने 109 प्रतिष्ठानों को बंद कराया था। इसके बाद 1 सितंबर को 61 प्रतिष्ठानों पर सीलिंग की गई जबकि 2 सितंबर को केवल 20 प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई हुई। इस तरह तीन दिनों में कुल 190 प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई की गई। लेकिन चौथे दिन 3 सितंबर को शहर में कहीं भी सीलिंग नहीं हुई। अधिकारियों का कहना है कि टीम हाईकोर्ट में जमीन से जुड़े मामलों में व्यस्त रही जिसके कारण सीलिंग की कार्रवाई नहीं हो सकी। हालांकि लगातार हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बाद कार्रवाई में आई इस अचानक नरमी को लेकर कई सवाल भी खड़े हो रहे हैं।

    मामले में रहवासियों ने नगर निगम की कार्रवाई पर पक्षपात का आरोप लगाया है। याचिकाकर्ता विवेक त्रिपाठी का कहना है कि अरेरा कॉलोनी के जिन बड़े मॉल और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को लेकर रहवासियों ने शिकायतें की थीं उन पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। जबकि छोटे व्यापारियों और दुकानदारों पर नोटिस और सीलिंग की कार्रवाई की जा रही है। इसी आधार पर रहवासियों ने सुप्रीम कोर्ट में दस्तावेज पेश कर अधिकारियों की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि कानून का पालन सभी के लिए समान रूप से होना चाहिए और अवैध व्यावसायिक गतिविधियों के मामले में छोटे और बड़े प्रतिष्ठानों के बीच कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए।

    इस बीच नगरीय प्रशासन और नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारी भी दिल्ली पहुंच गए हैं। सूत्रों के अनुसार सरकार और निगम की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पक्ष रखने की तैयारी की जा रही है। अधिकारियों ने इस मामले में वरिष्ठ कानूनी विशेषज्ञों से भी चर्चा की है। 15 सितंबर को होने वाली सुनवाई में नगर निगम कार्रवाई को लेकर रिपोर्ट और आगे की स्थिति स्पष्ट कर सकता है।

    सीलिंग कार्रवाई के बीच नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी माना है कि इस कार्रवाई से भोपाल के व्यापारी परेशान हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसा रास्ता तलाशने का प्रयास कर रही है जिससे कानून का पालन भी हो और आम लोगों तथा व्यापारियों को अनावश्यक नुकसान भी न उठाना पड़े। मंत्री ने भोपाल के मास्टर प्लान को जल्द जारी करने की बात भी कही है। ऐसे में सीलिंग विवाद के बीच मास्टर प्लान को लेकर सरकार का अगला फैसला बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    नगर निगम अब तक एक महीने के भीतर 8 हजार से अधिक दुकानदारों और प्रतिष्ठान संचालकों को नोटिस जारी कर चुका है। कई स्थानों पर 24 घंटे के भीतर रहवासी भवनों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियां बंद करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद कई दुकानदारों ने प्रतिष्ठान स्वेच्छा से बंद करने के पोस्टर और बैनर भी लगा दिए।

    यह मामला सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों से जुड़ा हुआ है। अगस्त के पहले सप्ताह में हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की 10 सदस्यीय जांच समिति की कार्रवाई पर रोक लगा दी थी और हाईकोर्ट से दुकानदारों को मिले राहत आदेश भी निरस्त कर दिए थे। अब 15 सितंबर की सुनवाई में यह साफ हो सकता है कि भोपाल में सीलिंग कार्रवाई दोबारा तेज होगी या सरकार और प्रभावित व्यापारियों के लिए कोई नया समाधान निकाला जाएगा। फिलहाल 190 सीलिंग के बाद चौथे दिन की जीरो कार्रवाई ने इस पूरे विवाद को और ज्यादा चर्चा में ला दिया है।

  • माइक न मिलने पर जनपद अध्यक्ष का छलका दर्द, सिंधिया के कार्यक्रम में सियासी तकरार ने पकड़ा जोर

    माइक न मिलने पर जनपद अध्यक्ष का छलका दर्द, सिंधिया के कार्यक्रम में सियासी तकरार ने पकड़ा जोर


    शिवपुरी । शिवपुरी के बदरवास में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के कार्यक्रम के दौरान माइक को लेकर नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। सोमवार शाम बिजरौनी बायपास और दौलतपुर से खाइखेड़ा मार्ग निर्माण के भूमि पूजन कार्यक्रम में बदरवास जनपद अध्यक्ष मीरा बाई परिहार को मंच से बोलने का अवसर नहीं मिला। कार्यक्रम के बाद जनपद अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि वह अपनी बात रखने वाली थीं लेकिन उनका माइक हटा दिया गया। इसके बाद स्थानीय राजनीति में इस मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

    कार्यक्रम के दौरान जनपद अध्यक्ष मीरा बाई परिहार केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के सामने क्षेत्र से जुड़ी अपनी बात रखना चाहती थीं। उनका कहना है कि उन्होंने कोलारस विधायक महेंद्र यादव से भी उन्हें बोलने का अवसर देने की बात कही थी। जनपद अध्यक्ष के मुताबिक विधायक ने उन्हें अपनी बात वहीं से कहने के लिए कहा था लेकिन वह माइक के जरिए मंच से अपनी बात रखना चाहती थीं। उनका आरोप है कि उन्हें ऐसा करने का मौका नहीं दिया गया।

    कार्यक्रम समाप्त होने के बाद मीरा बाई परिहार ने विधायक महेंद्र यादव पर नाराजगी जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले करीब एक साल से जनपद क्षेत्र के विकास कार्यों में अड़चनें आ रही हैं। जनपद अध्यक्ष ने दावा किया कि विकास कार्यों से जुड़े मामलों को लेकर वह चार बार दिल्ली तक जा चुकी हैं लेकिन अब तक उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है।

    मीरा बाई ने कहा कि जनपद अध्यक्ष के तौर पर जनता के लिए विकास कार्य कराना उनकी जिम्मेदारी है। लेकिन यदि विकास कार्यों के लिए जरूरी प्रक्रिया और फंड से जुड़े काम ही आगे नहीं बढ़ेंगे तो सरपंचों की मांगों को पूरा करना मुश्किल होगा। उन्होंने अधिकारियों और बिचौलियों पर भी काम में बाधा डालने के आरोप लगाए। उनका कहना है कि कई मामलों में ऑनलाइन एंट्री तक नहीं होने दी जा रही है। उन्होंने मीडिया के माध्यम से विकास फंड जल्द जारी करने की मांग की और संकेत दिया कि सुनवाई नहीं होने पर वह इस मुद्दे को बड़े स्तर पर उठा सकती हैं।

    वहीं कोलारस विधायक महेंद्र यादव ने पूरे मामले पर अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि मीरा बाई परिहार ने उनसे केंद्रीय मंत्री से कुछ कहने की इच्छा जताई थी। विधायक के मुताबिक उन्होंने जनपद अध्यक्ष से अपनी बात कागज पर लिखकर देने के लिए कहा था ताकि उनकी बात केंद्रीय मंत्री तक स्पष्ट रूप से पहुंचाई जा सके।

    विधायक ने कहा कि यदि जनपद अध्यक्ष ने माइक के जरिए केंद्रीय मंत्री और जनता के सामने अपनी बात रखने की इच्छा जताई होती तो उन्हें बोलने का अवसर जरूर दिया जाता। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री कोलारस रेलवे स्टेशन पर उज्जैनी एक्सप्रेस के नियमित ठहराव को हरी झंडी दिखाने वाले थे। इसी कारण मंच से बोलने का समय सीमित था और मंडल अध्यक्ष विधायक तथा सांसद को ही वक्तव्य का अवसर दिया गया।

    महेंद्र यादव ने मीरा बाई परिहार को पार्टी की वरिष्ठ नेता बताते हुए कहा कि केंद्रीय मंत्री अभी शिवपुरी में ही हैं और जनपद अध्यक्ष उनसे मुलाकात कर अपनी बात सीधे रख सकती हैं। विधायक ने यह भी कहा कि वह स्वयं मीरा बाई से इस मामले में चर्चा करेंगे।

    इस कार्यक्रम में क्षेत्र को रेल सुविधा की सौगात भी मिली। ज्योतिरादित्य सिंधिया के प्रयासों से कोलारस रेलवे स्टेशन पर उज्जैनी एक्सप्रेस के नियमित ठहराव को मंजूरी मिली है। इसके अलावा अशोकनगर रेलवे स्टेशन पर सोगरिया दानापुर एक्सप्रेस के ठहराव को भी स्वीकृति दी गई है। विकास कार्यों और रेल सुविधाओं के बीच मंच पर बोलने को लेकर उठा यह विवाद अब स्थानीय सियासत में चर्चा का विषय बन गया है।

  • भगवा रोबोट का VIP स्वागत और मंत्री की सुरीली तान, CM मोहन यादव बोले- मोदी ने देश को उसकी ताकत का एहसास कराया

    भगवा रोबोट का VIP स्वागत और मंत्री की सुरीली तान, CM मोहन यादव बोले- मोदी ने देश को उसकी ताकत का एहसास कराया

    भोपाल । मध्य प्रदेश की राजनीति में मंगलवार को ऐसे कई रंग देखने को मिले जो आम सियासी गतिविधियों से बिल्कुल अलग रहे। कहीं भगवा गमछा पहने रोबोट ने नेता की तरह एंट्री लेकर लोगों का मनोरंजन किया तो कहीं मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने मशहूर गायिका अनुराधा पौडवाल के मंच पर अपनी गायकी का हुनर दिखाया। इसी बीच मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना रामायण के जामवंत से कर दी। इन घटनाओं ने प्रदेश की सियासत और सार्वजनिक कार्यक्रमों में एक अलग ही रंग भर दिया।

    उज्जैन में एक रेस्टोरेंट के उद्घाटन के दौरान रोबोट को मुख्य अतिथि की तरह पेश किया गया। रोबोट की एंट्री भी बेहद खास अंदाज में हुई। उसके आसपास हथियार लिए कमांडो नजर आए और कार्यक्रम स्थल पर पहुंचते ही उसे भगवा दुपट्टा पहनाया गया। तिलक लगाकर उसका स्वागत किया गया। इसके बाद रोबोट को नाश्ता और पानी भी ऑफर किया गया। उद्घाटन के इस पूरे कार्यक्रम में रोबोट आकर्षण का केंद्र बना रहा। कार्यक्रम में मौजूद लोगों के लिए सबसे दिलचस्प पल तब आया जब भगवा दुपट्टा पहने रोबोट ने डांस करना शुरू कर दिया। उसे देखने के लिए लोगों की भीड़ जुट गई और वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया।

    रोबोट की इस अंदाज में मेहमाननवाजी को लेकर लोग तरह-तरह के मजाकिया कमेंट भी कर रहे हैं। कुछ लोगों का कहना है कि मशीन बनाने वालों ने शायद कल्पना भी नहीं की होगी कि उनका रोबोट एक दिन किसी नेता की तरह VIP स्वागत पाएगा और उद्घाटन के साथ डांस भी करेगा। अब तो मजाक में यह तक कहा जा रहा है कि अगर यही सिलसिला चलता रहा तो आने वाले समय में फीता काटने से लेकर भाषण देने तक की जिम्मेदारी भी रोबोट को मिल सकती है।

    इधर भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना जामवंत से करते हुए कहा कि जिस तरह रामायण में जामवंत ने हनुमान जी को उनकी शक्ति का अहसास कराया था उसी तरह प्रधानमंत्री मोदी ने भारत को उसकी क्षमता और सामर्थ्य का एहसास कराया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश लगातार मजबूत हो रहा है और भारत अपने सामर्थ्य के दम पर हर तरह की चुनौती का सामना करने में सक्षम है। मुख्यमंत्री की इस तुलना के बाद राजनीतिक हलकों में इसकी चर्चा शुरू हो गई है।

    उधर बड़वानी जिले के खेतिया में आयोजित कानबाई उत्सव में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी अपनी अलग छाप छोड़ी। मशहूर गायिका अनुराधा पौडवाल के मंच पर पहुंचकर उन्होंने गाना गाया। उन्होंने हमें तुमसे प्यार कितना गीत की पंक्तियां गाकर अपनी आवाज का हुनर दिखाया। इतना ही नहीं उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद लोगों से भी अपने साथ गाने की अपील की। अनुराधा पौडवाल के सामने उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि उन्हें बताना है कि वे भी सुरीले हैं। मंत्री का यह अंदाज देखकर कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने जमकर तालियां बजाईं।

    इन घटनाओं के बीच एक और मामला चर्चा में है जिसमें एक फूड प्रोडक्ट को लेकर सोशल मीडिया पर विवाद खड़ा हुआ था। जांच के बाद कंपनी के उत्पाद सही पाए गए और सोशल मीडिया पर पोस्ट करने वाले व्यक्ति को कानूनी नोटिस दिए जाने की बात सामने आई। हालांकि अब वह अपनी बात से पीछे हटता नजर आ रहा है। इस पूरे मामले में कंपनी के भोपाल स्थित मुख्यालय के बाहर लगी नेमप्लेट हटाए जाने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

    कुल मिलाकर मंगलवार को मध्य प्रदेश की सियासत में बयानबाजी के साथ मनोरंजन और दिलचस्प घटनाओं का भी तड़का देखने को मिला। भगवा रोबोट की नेता जैसी एंट्री से लेकर मंत्री की गायकी और मुख्यमंत्री की जामवंत वाली तुलना तक कई घटनाएं दिनभर चर्चा में बनी रहीं।

  • निगम परिषद की बैठक में गरमाएगा भोपाल का मुद्दा! सड़कें खुदी पड़ीं और सफाई व्यवस्था बदहाल फिर भी चर्चा से बाहर

    निगम परिषद की बैठक में गरमाएगा भोपाल का मुद्दा! सड़कें खुदी पड़ीं और सफाई व्यवस्था बदहाल फिर भी चर्चा से बाहर


    भोपाल । भोपाल नगर निगम परिषद की बैठक बुधवार 19 अगस्त को ISBT स्थित मीटिंग हॉल में आयोजित होने जा रही है। साल के पहले नियमित परिषद सम्मेलन को लेकर राजनीतिक हलचल तेज है। बैठक के एजेंडे में शहर की मौजूदा समस्याओं से जुड़े जनहित के मुद्दे शामिल नहीं होने पर विपक्ष ने सवाल खड़े किए हैं। विपक्ष का कहना है कि राजधानी की सड़कें बारिश के बाद बदहाल हो चुकी हैं कई इलाकों में जलभराव की समस्या सामने आ रही है और सफाई व्यवस्था को लेकर भी लोगों की शिकायतें लगातार बनी हुई हैं। इसके बावजूद इन अहम मुद्दों को परिषद की बैठक के एजेंडे में जगह नहीं दी गई है। ऐसे में बैठक के हंगामेदार रहने के आसार जताए जा रहे हैं।

    नगर निगम परिषद की बैठक की शुरुआत पार्षदों के सवाल जवाब से होगी। इसके बाद एजेंडे में शामिल प्रस्तावों पर चर्चा की जाएगी। बैठक सुबह 11 बजे शुरू होगी। बताया गया है कि सम्मेलन में नगर निगम की खाली हुई एक बिल्डिंग को किराए पर दिए जाने से जुड़े प्रस्ताव पर भी चर्चा होनी है। विपक्ष का कहना है कि जब शहर के सामने बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कई सवाल खड़े हैं तो परिषद की बैठक में इन विषयों पर प्राथमिकता से चर्चा होनी चाहिए।

    बारिश के बाद भोपाल की सड़कों की स्थिति विपक्ष के प्रमुख मुद्दों में शामिल है। राजधानी में कई स्थानों पर सड़कें उखड़ी हुई हैं और कुछ इलाकों में सड़क निर्माण या दूसरे कामों के कारण रास्ते प्रभावित हैं। तेज बारिश के दौरान निचले इलाकों में पानी भरने की समस्या भी सामने आती है। ऐसे में आम लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। विपक्ष का सवाल है कि शहर की ऐसी स्थिति के बीच सड़क और जलभराव जैसे मुद्दे परिषद की बैठक में चर्चा का हिस्सा क्यों नहीं बनाए गए।

    सफाई व्यवस्था को लेकर भी विपक्ष नगर निगम को घेरने की तैयारी में है। कई इलाकों में बारिश के बाद कचरा जमा होने और जल निकासी से जुड़ी शिकायतों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि शहर की सफाई और बुनियादी सुविधाएं सीधे तौर पर आम लोगों के रोजमर्रा के जीवन से जुड़ी हैं। ऐसे में परिषद की बैठक में इन विषयों पर पार्षदों को सवाल पूछने और अधिकारियों से जवाब लेने का मौका मिलना चाहिए।

    नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी ने एजेंडे को लेकर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि हर बैठक में शहर सरकार की ओर से जनहित के मुद्दों को पर्याप्त जगह नहीं दी जाती। उन्होंने दावा किया कि पिछली बैठक में भी जनहित से जुड़े विषयों पर चर्चा की मांग की गई थी लेकिन विपक्ष की बात नहीं सुनी गई। अब एक बार फिर शहर की प्रमुख समस्याओं को एजेंडे से बाहर रखने को लेकर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं।

    सीनियर पार्षद योगेंद्र सिंह गुड्डू चौहान ने भी भोपाल की मौजूदा स्थिति को लेकर चिंता जताई है। उनके मुताबिक शहर की कई सड़कें जर्जर हो चुकी हैं और तेज बारिश के बाद राजधानी के बड़े हिस्से में पानी भरने की स्थिति बनी। उनका कहना है कि सफाई व्यवस्था भी कई स्थानों पर ठीक नहीं है। विपक्ष इन सभी मुद्दों को परिषद की बैठक में उठाने की तैयारी में है।

    यह सम्मेलन इस साल का पहला ऐसा परिषद सम्मेलन बताया जा रहा है जिसमें पार्षदों को सवाल जवाब के जरिए शहर से जुड़े मुद्दे उठाने का अवसर मिलेगा। इससे पहले इस साल दो सम्मेलन हुए हैं लेकिन उनमें एक महिला सशक्तिकरण और दूसरा कचरे के नए नियमों से संबंधित था। इन बैठकों में पार्षदों के सवाल जवाब का सामान्य प्रारूप नहीं था।

    अब बुधवार की बैठक में विपक्ष के तेवर और सत्ता पक्ष के जवाब पर सबकी नजर रहेगी। एजेंडे में जनहित के मुद्दों की कमी को लेकर विपक्ष पहले ही अपनी रणनीति स्पष्ट कर चुका है। ऐसे में सड़क जलभराव सफाई और शहर की बुनियादी सुविधाओं से जुड़े सवाल बैठक में जोरदार तरीके से उठने की संभावना है। अगर इन मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस होती है तो निगम परिषद का यह सम्मेलन हंगामेदार हो सकता है।

  • भोपाल में सीलिंग कार्रवाई के खिलाफ व्यापारियों का बड़ा प्रदर्शन! चक्काजाम के बीच आत्मदाह की चेतावनी से गरमाया माहौल

    भोपाल में सीलिंग कार्रवाई के खिलाफ व्यापारियों का बड़ा प्रदर्शन! चक्काजाम के बीच आत्मदाह की चेतावनी से गरमाया माहौल


    भोपाल। भोपाल में रहवासी इलाकों में चल रही कमर्शियल गतिविधियों के खिलाफ नगर निगम की कार्रवाई को लेकर व्यापारियों का गुस्सा मंगलवार को सड़क पर दिखाई दिया। दुकानों और प्रतिष्ठानों पर सीलिंग की कार्रवाई के विरोध में बड़ी संख्या में व्यापारी और महिलाएं रोशनपुरा चौराहे पर पहुंचीं और करीब पौने दो घंटे तक चक्काजाम कर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने सड़क पर बैठकर नारेबाजी की और सरकार से कार्रवाई रोककर समस्या का स्थायी समाधान निकालने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में महिला कारोबारी भी शामिल रहीं।

    व्यापारियों का कहना है कि भोपाल के कई इलाकों में वर्षों से छोटे और बड़े कारोबार संचालित हो रहे हैं। इन कारोबारों से सिर्फ दुकान मालिक ही नहीं बल्कि कर्मचारी और उनके परिवार भी जुड़े हुए हैं। ऐसे में अचानक सीलिंग की कार्रवाई होने से बड़ी संख्या में लोगों की रोजी रोटी प्रभावित होने की आशंका है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि सरकार ऐसा रास्ता निकाले जिससे नियमों का पालन भी हो सके और लंबे समय से चल रहे कारोबार भी पूरी तरह बंद न हों।

    प्रदर्शन के दौरान कुछ व्यापारी मुख्यमंत्री निवास की ओर बढ़ने की कोशिश करने लगे। हालांकि पुलिस ने उन्हें रास्ते में रोक दिया। मुख्यमंत्री निवास की ओर जाने वाली सड़कों पर सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए पुलिस बल भी तैनात किया गया था। प्रदर्शन के दौरान व्यापारियों ने सड़क पर बैठकर नारेबाजी की। बाद में प्रदर्शनकारियों ने सामूहिक रूप से राष्ट्रगान भी गाया।

    इस आंदोलन में महिला कारोबारियों की मौजूदगी भी खास रही। ब्यूटी पार्लर और छोटे व्यवसाय चलाने वाली महिलाओं ने सीलिंग कार्रवाई के खिलाफ अलग अंदाज में विरोध जताया। एक ब्यूटिशियन ने सड़क पर ही मेकअप करके अपना विरोध दर्ज कराया। महिला व्यापारियों का कहना था कि ब्यूटी पार्लर और इस तरह के छोटे कारोबार बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार देते हैं। अगर इन प्रतिष्ठानों को बंद किया जाता है तो इसका सीधा असर कारोबारियों के साथ काम करने वाले कर्मचारियों पर भी पड़ेगा।

    प्रदर्शन में शामिल व्यापारियों ने सरकार से जल्द समाधान निकालने की मांग की। उनका कहना था कि यदि उनकी समस्याओं पर तत्काल ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और बड़ा किया जा सकता है। प्रदर्शनकारियों की ओर से आंदोलन उग्र करने और आत्मदाह जैसे कदम उठाने की चेतावनी दिए जाने की बात भी सामने आई है। ऐसी चेतावनियों को लेकर प्रशासन और पुलिस के सामने स्थिति को शांतिपूर्ण बनाए रखने की चुनौती बढ़ गई है।

    व्यापारियों ने भोपाल के मास्टर प्लान को जल्द लागू करने की मांग भी उठाई है। थोक बाजार व्यापारी संघ के अभिषेक रब्बू के मुताबिक शहर में मिक्स्ड लैंड यूज का प्रावधान किया जाना चाहिए ताकि जिन इलाकों में लंबे समय से कारोबार चल रहे हैं वहां व्यावहारिक समाधान निकाला जा सके। व्यापारियों ने गुजरात की तर्ज पर अनधिकृत विकास नियमितीकरण कानून 2022 जैसे प्रावधान लागू करने की मांग भी रखी है।

    व्यापारियों का तर्क है कि कई संपत्तियों की बाकायदा रजिस्ट्री हुई है और नगर निगम की ओर से इन संपत्तियों से संपत्ति कर भी लिया जाता है। ऐसे में वर्षों से संचालित कारोबारी गतिविधियों पर अचानक नोटिस और सीलिंग की कार्रवाई से व्यापारियों में नाराजगी बढ़ी है। उनका कहना है कि यदि नियमों से जुड़ी कोई समस्या है तो सरकार को पहले समाधान और नियमितीकरण का रास्ता तलाशना चाहिए।

    फिलहाल रोशनपुरा चौराहे पर हुए प्रदर्शन के बाद व्यापारियों ने आंदोलन खत्म कर दिया है लेकिन उन्होंने साफ संकेत दिया है कि मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले दिनों में विरोध और तेज हो सकता है। अब निगाहें प्रशासन और सरकार के अगले कदम पर हैं। एक तरफ नगर निगम की कार्रवाई और दूसरी तरफ कारोबारियों की रोजी रोटी से जुड़ी चिंता के बीच भोपाल में यह मुद्दा आने वाले दिनों में और गरमाने की संभावना है।