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  • शिवपुरी हाईवे पर बड़ा हादसा टला, अनियंत्रित बस मीडियन में उतरी, चालक फरार, यात्रियों ने लगाए लापरवाही के आरोप

    शिवपुरी हाईवे पर बड़ा हादसा टला, अनियंत्रित बस मीडियन में उतरी, चालक फरार, यात्रियों ने लगाए लापरवाही के आरोप


    शिवपुरी । शिवपुरी जिले के बदरवास थाना क्षेत्र में बुधवार तड़के राष्ट्रीय राजमार्ग 46 पर एक बड़ा सड़क हादसा होते होते टल गया। इंदौर से ग्वालियर जा रही कृष्णा ट्रेवल्स की स्लीपर कोच बस अचानक अनियंत्रित होकर हाईवे के मीडियन में उतर गई। राहत की बात यह रही कि मीडियन की गीली और नरम मिट्टी में बस फंस गई जिससे वह पलटने से बच गई और बस में सवार यात्रियों की जान सुरक्षित रही। यदि बस पलट जाती तो हादसा बेहद भयावह हो सकता था और बड़ी जनहानि से इनकार नहीं किया जा सकता था।

    जानकारी के अनुसार यह दुर्घटना बुधवार सुबह करीब साढ़े चार बजे बदरवास के सड़ बाईपास के पास हुई। बस इंदौर से ग्वालियर की ओर जा रही थी और उसमें कई यात्री सवार थे। अचानक संतुलन बिगड़ने के बाद बस सीधे हाईवे के मीडियन में उतर गई। तेज झटके के कारण बस में बैठे यात्रियों में अफरा तफरी मच गई। कई लोग घबरा गए और चीख पुकार शुरू हो गई लेकिन कुछ ही देर में सभी को यह एहसास हुआ कि बस पलटी नहीं है जिससे लोगों ने राहत की सांस ली।

    घटना की सूचना मिलते ही बदरवास थाना पुलिस मौके पर पहुंची और तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। पुलिस ने बस में फंसे यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला और उनके गंतव्य तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक वाहन की व्यवस्था कराई। हादसे में बामौरकला निवासी मोनिका जाटव सहित कुछ यात्रियों को मामूली चोटें आईं जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद घर भेज दिया गया। किसी भी यात्री को गंभीर चोट नहीं आई जिससे एक बड़ा हादसा टल गया।

    हादसे के बाद बस चालक और बस का अन्य स्टाफ मौके से फरार हो गया। इससे यात्रियों में नाराजगी देखी गई। यात्रियों का आरोप है कि चालक शुरुआत से ही तेज रफ्तार में बस चला रहा था और कई बार यात्रियों ने उसे सावधानी से वाहन चलाने की सलाह भी दी थी लेकिन उसने किसी की बात पर ध्यान नहीं दिया। यात्रियों का कहना है कि यदि चालक समय रहते गति नियंत्रित कर लेता तो यह हादसा नहीं होता।

    स्थानीय लोगों का भी मानना है कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर तेज रफ्तार और लापरवाही से वाहन चलाना लगातार हादसों का कारण बन रहा है। परिवहन विभाग और संबंधित एजेंसियों को ऐसे मामलों में सख्ती बरतने की जरूरत है ताकि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। विशेषज्ञों का कहना है कि लंबी दूरी की बसों के चालकों की नियमित निगरानी और समय समय पर फिटनेस जांच भी जरूरी है।

    फिलहाल बदरवास थाना पुलिस ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है। दुर्घटना के कारणों का पता लगाया जा रहा है और बस चालक की तलाश भी की जा रही है। पुलिस यात्रियों के बयान दर्ज कर रही है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि हादसा तेज रफ्तार की वजह से हुआ या इसके पीछे कोई तकनीकी खराबी भी जिम्मेदार थी। जांच पूरी होने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • रीलबाजी से लेकर सड़क पर विरोध तक, मध्यप्रदेश की राजनीति के तीन वीडियो बने चर्चा का विषय

    रीलबाजी से लेकर सड़क पर विरोध तक, मध्यप्रदेश की राजनीति के तीन वीडियो बने चर्चा का विषय


    मध्यप्रदेश। । मध्यप्रदेश की राजनीति में मंगलवार का दिन कई ऐसे घटनाक्रमों का गवाह बना जिन्होंने सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक बहस छेड़ दी। कहीं मंत्री खेत में हल चलाते नजर आए तो कहीं विधायक कार्यकर्ताओं के दिए गुलदस्ते फेंकते दिखाई दिए। दूसरी ओर मुख्यमंत्री के काफिले के लिए ट्रैफिक रोके जाने से नाराज लोगों ने वीआईपी संस्कृति पर सवाल उठाए। इन तीनों घटनाओं ने आम लोगों के बीच शासन व्यवस्था नेताओं की कार्यशैली और जनता की अपेक्षाओं को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी।

    बड़वानी दौरे के दौरान प्रदेश के मंत्री गौतम टेटवाल अचानक सड़क किनारे एक खेत में पहुंच गए और किसानों की तरह बैलों के साथ हल चलाने लगे। इस दौरान कैमरे भी चालू रहे और पूरा घटनाक्रम सोशल मीडिया पर लाइव प्रसारित किया गया। हालांकि यह प्रयास उस समय चर्चा का विषय बन गया जब बैलों की रफ्तार तेज होने पर मंत्री उनके पीछे खिंचते चले गए और उनका संतुलन बिगड़ गया। यह वीडियो कुछ ही देर में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

    वीडियो सामने आने के बाद लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने इसे किसानों से जुड़ने का प्रयास बताया तो कई लोगों ने इसे केवल प्रचार और रीलबाजी करार दिया। कई यूजर्स का कहना था कि किसानों की वास्तविक समस्याओं जैसे खाद बीज सिंचाई और फसल की कीमतों पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है। वहीं कुछ लोगों ने मंत्री के प्रयास को सकारात्मक बताते हुए इसे खेतों से जुड़ाव का प्रतीक भी माना।

    इसी दिन भोपाल से भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा का भी एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। जन्मदिन के अवसर पर समर्थक उन्हें लगातार गुलदस्ते भेंट कर रहे थे लेकिन विधायक उन्हें लेते ही एक ओर रख या फेंकते नजर आए। वीडियो सामने आने के बाद कई लोगों ने इसे कार्यकर्ताओं की भावनाओं के प्रति असम्मान बताया जबकि कुछ लोगों का कहना था कि बड़ी संख्या में आए समर्थकों के कारण गुलदस्ते संभालना संभव नहीं था इसलिए ऐसा दृश्य दिखाई दिया।

    उधर ग्वालियर में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के काफिले के गुजरने के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के तहत कुछ समय के लिए ट्रैफिक रोक दिया गया। इससे सड़क पर वाहनों की लंबी कतार लग गई और लोगों को इंतजार करना पड़ा। कई वाहन चालकों ने नाराजगी जताई और हॉर्न बजाकर विरोध दर्ज कराया। मौके पर मौजूद कुछ लोगों ने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किया जिसमें वीआईपी मूवमेंट के कारण आम नागरिकों को होने वाली असुविधा पर सवाल उठाए गए। कुछ स्थानों पर लोगों और पुलिस के बीच बहस भी देखने को मिली।

    इन घटनाओं ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया कि जनप्रतिनिधियों की सार्वजनिक गतिविधियों और आम जनता की अपेक्षाओं के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। सोशल मीडिया के दौर में नेताओं का हर कदम कुछ ही मिनटों में लाखों लोगों तक पहुंच जाता है और उस पर तुरंत प्रतिक्रिया भी सामने आने लगती है। ऐसे में राजनीतिक व्यक्तित्वों के व्यवहार और सार्वजनिक कार्यक्रमों को लेकर लोगों की संवेदनशीलता पहले से कहीं अधिक बढ़ गई है।

    विशेषज्ञों का मानना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनप्रतिनिधियों का जनता से संवाद और जुड़ाव महत्वपूर्ण है लेकिन साथ ही सार्वजनिक आचरण और प्रशासनिक व्यवस्थाओं में जनता की सुविधा को भी सर्वोच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए। यही कारण है कि दिनभर की इन घटनाओं ने प्रदेश की राजनीति में नई बहस को जन्म दिया और सोशल मीडिया पर भी लंबे समय तक चर्चा का विषय बनी रहीं।

  • NEET पेपर लीक के विरोध में इंदौर में सातवें दिन भी धरना जारी: कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी

    NEET पेपर लीक के विरोध में इंदौर में सातवें दिन भी धरना जारी: कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी


    इंदौर । इंदौर में NEET पेपर लीक मामले और छात्रों से जुड़ी विभिन्न मांगों को लेकर शुरू हुआ आंदोलन लगातार सातवें दिन भी जारी रहा। टंट्याभील चौराहे पर छात्र संगठनों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि बारिश के बावजूद धरनास्थल पर डटे रहे। प्रदर्शनकारियों ने टेंट लगाकर अपना आंदोलन जारी रखा और नारेबाजी, कैंडल मार्च, हवन तथा क्रांतिकारी गीतों के माध्यम से अपनी मांगों को सरकार और प्रशासन तक पहुंचाने का प्रयास किया।

    आंदोलन का नेतृत्व कर रहे छात्र संगठनों का कहना है कि देशभर में सामने आए NEET पेपर लीक मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग उठाते हुए राष्ट्रीय स्तर पर परीक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने पर भी जोर दिया। इसके साथ ही उन्होंने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के संबंध में कार्रवाई और केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग भी दोहराई।

    धरने में केवल NEET परीक्षा का मुद्दा ही नहीं बल्कि प्रदेश के छात्रों से जुड़े कई अन्य विषय भी शामिल किए गए हैं। प्रदर्शनकारियों ने छात्रवृत्ति का समय पर भुगतान, छात्रावास की बेहतर सुविधाएं, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और कुल 23 मांगों को लेकर अपना आंदोलन जारी रखा है। उनका कहना है कि छात्रों की समस्याओं का लंबे समय से समाधान नहीं हो रहा है, इसलिए उन्हें सड़क पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ा।

    धरनास्थल पर पिछले सात दिनों के दौरान कई प्रतीकात्मक कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। प्रदर्शनकारियों ने दिवंगत छात्रों की स्मृति में कैंडल मार्च निकाला, हवन किया और थाली बजाकर प्रशासन का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया। उनका कहना है कि यह आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण है और इसका उद्देश्य छात्रों की आवाज शासन तक पहुंचाना है।

    प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। उनका कहना है कि संबंधित अधिकारियों के सामने सभी मांगें रखी जा चुकी हैं, लेकिन अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है। ऐसे में आगामी दिनों में विरोध प्रदर्शन का दायरा बढ़ाया जा सकता है।

    छात्र संगठनों का कहना है कि लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों से लाखों विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित होता है। उनका आग्रह है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के साथ ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रभावी और पारदर्शी व्यवस्था बनाई जाए। साथ ही मध्य प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था से जुड़े लंबित मुद्दों के समाधान की दिशा में भी शीघ्र कदम उठाए जाएं।

  • राजगढ़ में दर्दनाक हादसा पानी से भरी खदान में समा गया पूरा परिवार भाई बहन और बुआ की मौत से गांव में मातम

    राजगढ़ में दर्दनाक हादसा पानी से भरी खदान में समा गया पूरा परिवार भाई बहन और बुआ की मौत से गांव में मातम


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले में सोमवार शाम एक दर्दनाक हादसे ने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया। ब्यावरा के जगनियापुरा गांव स्थित पानी से भरी क्रेशर खदान में डूबने से एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हो गई। हादसे में पांच वर्षीय मासूम निखरा पारदी उसकी ग्यारह वर्षीय बहन नम्रता पारदी और दोनों को बचाने के लिए पानी में कूदी उनकी पैंतीस वर्षीय बुआ सायराबाई पारदी की जान चली गई। इस घटना के बाद पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई और परिजनों का रो रोकर बुरा हाल है।

    जानकारी के अनुसार सोमवार शाम करीब चार बजे गांव के कुछ बच्चे क्रेशर की खदान के पास खेल रहे थे। खेलते समय उनकी गेंद गहरे पानी से भरी खदान में गिर गई। गेंद निकालने के प्रयास में निखरा और उसकी बहन नम्रता खदान के किनारे पहुंचे लेकिन अचानक उनका संतुलन बिगड़ गया और दोनों गहरे पानी में गिर गए। देखते ही देखते दोनों बच्चे डूबने लगे और मदद के लिए चीखने लगे।

    बच्चों की आवाज सुनते ही उनकी बुआ सायराबाई पारदी दौड़कर मौके पर पहुंचीं। उन्होंने बिना अपनी जान की परवाह किए दोनों बच्चों को बचाने के लिए तुरंत खदान में छलांग लगा दी। बताया जा रहा है कि उन्होंने एक बच्चे को पकड़कर बाहर निकालने की कोशिश भी की लेकिन दूसरे बच्चे को बचाने के प्रयास में उनका संतुलन बिगड़ गया। खदान का पानी काफी गहरा होने के कारण वह भी खुद को संभाल नहीं सकीं और तीनों कुछ ही पलों में पानी में समा गए।

    घटना की जानकारी मिलते ही गांव में अफरा तफरी मच गई। बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंचे और तत्काल पुलिस तथा प्रशासन को सूचना दी गई। ब्यावरा सिटी थाना पुलिस और स्थानीय प्रशासन की टीम ने ग्रामीणों की मदद से राहत और बचाव अभियान शुरू किया। करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद तीनों को पानी से बाहर निकाला गया और तुरंत सिविल अस्पताल ले जाया गया लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद तीनों को मृत घोषित कर दिया।

    पुलिस ने तीनों शवों का पोस्टमार्टम कराने के बाद उन्हें परिजनों को सौंप दिया है। मामले में मर्ग कायम कर हादसे की जांच शुरू कर दी गई है। प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि दुर्घटना पानी से भरी गहरी खदान के किनारे खेलते समय हुई।

    यह घटना एक बार फिर परित्यक्त और पानी से भरी खदानों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी खदानों के आसपास मजबूत घेराबंदी चेतावनी बोर्ड और निगरानी की व्यवस्था होना बेहद जरूरी है ताकि बच्चे अनजाने में वहां न पहुंच सकें। अभिभावकों को भी बच्चों को खतरनाक और गहरे जलाशयों के पास अकेले खेलने से रोकना चाहिए। थोड़ी सी सावधानी कई अनमोल जिंदगियों को बचा सकती है।

  • रेवाबाग में आबकारी का छापा, 63 बल्क लीटर अवैध शराब बरामद; तस्कर फरार

    रेवाबाग में आबकारी का छापा, 63 बल्क लीटर अवैध शराब बरामद; तस्कर फरार


    देवास । देवास में अवैध शराब के कारोबार के खिलाफ आबकारी विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 7 पेटी देशी शराब जब्त की है। मुखबिर से मिली सूचना पर रेवाबाग क्षेत्र में की गई इस कार्रवाई के दौरान करीब 63 बल्क लीटर अवैध शराब बरामद हुई, जिसकी अनुमानित कीमत 33,400 रुपए बताई जा रही है। हालांकि कार्रवाई के दौरान आरोपी मौके से फरार होने में सफल रहा। आबकारी विभाग ने उसके खिलाफ प्रकरण दर्ज कर तलाश शुरू कर दी है।

    आबकारी विभाग को सूचना मिली थी कि रेवाबाग क्षेत्र में एक व्यक्ति अपने घर के पास बड़ी मात्रा में अवैध शराब छिपाकर रखता है और स्कूटर के जरिए शहर की अलग-अलग गलियों में इसकी सप्लाई करता है। सूचना के आधार पर विभाग की टीम ने शुक्रवार को इलाके में दबिश दी।

    छापेमारी के दौरान टीम ने मौके से 4 पेटी देशी मसाला और 3 पेटी देशी प्लेन शराब बरामद की। कुल मिलाकर 63 बल्क लीटर अवैध मदिरा जब्त की गई। अधिकारियों के मुताबिक आरोपी आबकारी टीम के पहुंचने से पहले ही मौके से भाग निकला।

    आबकारी विभाग ने जब्त शराब को अपने कब्जे में लेकर आरोपी के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है। अब उसके ठिकानों और संभावित संपर्कों की जानकारी जुटाई जा रही है ताकि जल्द गिरफ्तारी की जा सके।

    कार्रवाई आबकारी उपनिरीक्षक प्रेम यादव के नेतृत्व में की गई। विभाग का कहना है कि जिले में अवैध शराब के निर्माण, भंडारण और तस्करी के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा तथा ऐसे कारोबार में शामिल लोगों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।

  • नौकरी दिलाने के नाम पर युवक से 44 हजार ऐंठे, इंटरव्यू और GST के बहाने करते रहे वसूली

    नौकरी दिलाने के नाम पर युवक से 44 हजार ऐंठे, इंटरव्यू और GST के बहाने करते रहे वसूली


    इंदौर  इंदौर में ऑनलाइन नौकरी दिलाने के नाम पर साइबर ठगी का मामला सामने आया है। डेटा एंट्री जॉब का झांसा देकर ठगों ने एक छात्र से अलग-अलग बहानों से करीब 44 हजार रुपए ऑनलाइन ट्रांसफर करा लिए। नौकरी और रिफंड का भरोसा देते हुए आरोपियों ने कई किस्तों में रकम वसूली, लेकिन न तो नौकरी दी और न ही पैसा लौटाया। शिकायत के बाद एमआईजी थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी हैइंदौर 

    पुलिस के अनुसार नेहरू नगर निवासी छात्र राजेश पाटीदार ने शिकायत में बताया कि 17 जून को उसके मोबाइल पर एक युवती का फोन आया। उसने अपना नाम अनुष्का बताया और कहा कि नौकरी के लिए किया गया उसका आवेदन चयनित हो गया है। बातचीत के दौरान उसने व्यक्तिगत जानकारी और कार्य से जुड़ी कुछ जानकारियां लीं तथा बताया कि डेटा एंट्री की नौकरी के लिए उसका चयन किया गया है। साथ ही जल्द ही टेलीफोनिक इंटरव्यू कराने की बात कही गई।

    कुछ देर बाद युवती ने चयन प्रक्रिया पूरी करने के लिए 1800 रुपए जमा करने को कहा। उसने भरोसा दिलाया कि प्रक्रिया पूरी होने के बाद 50 रुपए काटकर बाकी रकम वापस कर दी जाएगी। इसके बाद एक अन्य व्यक्ति ने फोन कर इंटरव्यू की जानकारी दी और मोबाइल पर ही इंटरव्यू लेने की बात कही।

    शिकायत के मुताबिक इंटरव्यू के बाद आरोपियों ने चयन होने का दावा करते हुए फिर 1800 रुपए जमा कराए। इसके बाद सुरक्षा राशि, सर्विस चार्ज और जीएसटी समेत अलग-अलग मदों के नाम पर लगातार पैसे मांगे जाते रहे। हर बार यह आश्वासन दिया गया कि पूरी प्रक्रिया समाप्त होने पर जमा की गई पूरी राशि वापस कर दी जाएगी।

    आरोपियों ने राजेश से कुल आठ ऑनलाइन ट्रांजेक्शन कराए और करीब 44 हजार रुपए अपने खातों में ट्रांसफर करा लिए। रकम जमा कराने के बाद भी न तो नियुक्ति पत्र भेजा गया और न ही किसी प्रकार की नौकरी उपलब्ध कराई गई। जब लगातार संपर्क करने के बावजूद कोई जवाब नहीं मिला, तब छात्र को ठगी का एहसास हुआ।

    इसके बाद पीड़ित ने साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर एमआईजी थाना पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस मोबाइल नंबर, बैंक खातों और ऑनलाइन ट्रांजेक्शन की जानकारी के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।

    पुलिस ने युवाओं से अपील की है कि नौकरी दिलाने के नाम पर रजिस्ट्रेशन फीस, प्रोसेसिंग फीस, सिक्योरिटी डिपॉजिट या जीएसटी जैसी कोई भी रकम मांगने वाले कॉल और मैसेज से सतर्क रहें। किसी भी कंपनी या भर्ती एजेंसी की सत्यता की पुष्टि किए बिना ऑनलाइन भुगतान न करें और संदिग्ध मामलों की तुरंत साइबर हेल्पलाइन या पुलिस को सूचना दें।

  • इंदौर के चर्चित हाउसिंग घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच तेज, करोड़ों की अनियमितताओं पर ED का एक्शन

    इंदौर के चर्चित हाउसिंग घोटाले में मनी लॉन्ड्रिंग की जांच तेज, करोड़ों की अनियमितताओं पर ED का एक्शन


    इंदौर  इंदौर की चर्चित नवभारत हाउसिंग सोसायटी घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय ने अपनी जांच तेज करते हुए बड़ी कार्रवाई की है। करीब 4.64 करोड़ रुपए की कथित वित्तीय अनियमितताओं और जमीन घोटाले से जुड़े मामले में ईडी ने पांच आरोपियों के खिलाफ धनशोधन निवारण अधिनियम के तहत विशेष न्यायालय इंदौर में अभियोजन चालान पेश किया है। अदालत ने मामले का संज्ञान लेते हुए आरोपियों को नोटिस जारी कर सुनवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

    ईडी की कार्रवाई उन आरोपों पर आधारित है जिनमें नवभारत गृह निर्माण सहकारी समिति के तत्कालीन पदाधिकारियों पर सोसायटी की संपत्तियों और फंड में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी करने का आरोप है। इस मामले की शुरुआत इंदौर के एमजी रोड थाना में दर्ज एफआईआर से हुई थी। इसी एफआईआर के आधार पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग के पहलुओं की जांच शुरू की और वित्तीय लेनदेन की गहन पड़ताल की।

    जांच एजेंसी के अनुसार आरोपी श्रीकांत घंटे सुभाष चंद्र दुबे राकेश जैन अंतिम जोशी और आनंद शाह ने कथित रूप से सोसायटी की संपत्तियों का दुरुपयोग करते हुए योजनाबद्ध तरीके से करोड़ों रुपए की हेराफेरी की। आरोप है कि सोसायटी के फंड से खरीदी गई जमीनों को विभिन्न संस्थाओं और अन्य पक्षों को बेच दिया गया तथा बिक्री से प्राप्त रकम का सही हिसाब सोसायटी के रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किया गया। इससे सोसायटी के सदस्यों को आर्थिक नुकसान पहुंचा और फंड का कथित रूप से गबन किया गया।

    ईडी का दावा है कि इस पूरे मामले में सोसायटी के सदस्यों को वास्तविक जानकारी से दूर रखा गया। जांच के दौरान ऐसे संकेत भी मिले कि जमीन बिक्री और वित्तीय लेनदेन से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों को नष्ट या गायब किया गया ताकि कथित गड़बड़ियों का खुलासा न हो सके। एजेंसी का आरोप है कि गबन की गई राशि को बाद में अलग-अलग माध्यमों से वैध दिखाने का प्रयास किया गया और उससे अचल संपत्तियां भी खरीदी गईं। इसी आधार पर मामले में धनशोधन के प्रावधान लागू किए गए हैं।

    इससे पहले भी ईडी इस मामले में कार्रवाई कर चुकी है। एजेंसी ने 12 फरवरी को पीएमएलए के तहत आरोपी श्रीकांत घंटे और सुभाष चंद्र दुबे से जुड़ी करीब 64 लाख रुपए मूल्य की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया था। जांच एजेंसी का कहना है कि यह कार्रवाई कथित अवैध आय से अर्जित संपत्तियों के आधार पर की गई थी।

    ईडी के अनुसार मामले की जांच अभी जारी है और वित्तीय लेनदेन की कई अन्य कड़ियों की भी पड़ताल की जा रही है। यदि जांच में नए तथ्य सामने आते हैं तो आगे और लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। फिलहाल विशेष अदालत में प्रस्तुत चालान के बाद अब मामले की न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और आरोपों की सुनवाई होगी।

  • पोस्टर राजनीति से लेकर शराबी टीचर तक, मध्य प्रदेश में सियासी तंज और प्रशासनिक चर्चाओं का बड़ा दिन

    पोस्टर राजनीति से लेकर शराबी टीचर तक, मध्य प्रदेश में सियासी तंज और प्रशासनिक चर्चाओं का बड़ा दिन


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश में शुक्रवार का दिन राजनीति प्रशासन और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी कई चर्चित घटनाओं के नाम रहा। कहीं उपचुनाव की तैयारियों के बीच पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा की वापसी की अटकलों ने जोर पकड़ा तो कहीं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर चंदे को लेकर अपने ही अंदाज में सियासी संदेश दे दिया। दूसरी ओर नर्मदापुरम जिले में एक सरकारी स्कूल के शिक्षक का शराब के नशे में क्लासरूम में सोते हुए वीडियो सामने आने से शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए। इन सबके बीच मंत्रालय के गलियारों में एक महिला मंत्री और उनके विभाग से जुड़ी चर्चाएं भी खूब सुर्खियां बटोरती रहीं।

    दतिया विधानसभा उपचुनाव की घोषणा के बाद पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा एक बार फिर राजनीतिक केंद्र में आ गए हैं। उनका पुराना शायराना बयान कि समुद्र का पानी उतरता देख किनारे पर घर मत बना लेना मैं लौटकर आऊंगा एक बार फिर चर्चाओं में है। उपचुनाव को लेकर उनकी सक्रियता लगातार बढ़ रही है। हाल ही में आयोजित एक कार्यक्रम में उन्होंने जनता के बीच विनम्रता के साथ स्वीकार किया कि यदि उनसे कोई गलती हुई है तो उसे सुधारेंगे और अपने व्यवहार तथा कार्यशैली में बदलाव लाकर लोगों का विश्वास दोबारा जीतने का प्रयास करेंगे। हालांकि भारतीय जनता पार्टी ने अब तक उम्मीदवार के नाम की घोषणा नहीं की है लेकिन राजनीतिक हलकों में नरोत्तम मिश्रा का नाम सबसे आगे माना जा रहा है।

    उधर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने राम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे में कथित अनियमितताओं को लेकर अपने भोपाल स्थित निवास के बाहर एक बड़ा पोस्टर लगा दिया। पोस्टर में साफ लिखा गया है कि भगवान श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के लिए दिए गए चंदे के चोरों और चढ़ावा चोरों का उनके घर में प्रवेश निषिद्ध है। इसके साथ ही उन्होंने उज्जैन से अयोध्या तक पदयात्रा निकालने का ऐलान भी किया है। उनका कहना है कि यह यात्रा पूरी तरह गैर राजनीतिक होगी और इसका उद्देश्य केवल चंदे में पारदर्शिता की मांग करना है। राजनीतिक विश्लेषक इसे आगामी राजनीतिक रणनीति के रूप में भी देख रहे हैं।

    राजनीतिक हलचल के बीच नर्मदापुरम जिले के केसला क्षेत्र से आई एक घटना ने शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। यहां एक सरकारी स्कूल का शिक्षक शराब के नशे में धुत होकर कक्षा में ही सोता मिला। ग्रामीणों ने इसका वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। सूचना मिलते ही पुलिस ने शिक्षक के खिलाफ मामला दर्ज किया जबकि शिक्षा विभाग ने तत्काल प्रभाव से उसे निलंबित कर दिया। बाद में शिक्षक ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए भविष्य में शराब नहीं पीने का वादा किया लेकिन घटना ने सरकारी स्कूलों की निगरानी व्यवस्था पर बहस छेड़ दी।

    इधर मंत्रालय के गलियारों में भी एक महिला मंत्री को लेकर चर्चाएं तेज हैं। बताया जा रहा है कि वे अपने विभाग में प्रमुख सचिव स्तर के अधिकारी की नियुक्ति चाहती हैं ताकि विभागीय कामकाज पर बेहतर नियंत्रण स्थापित हो सके। चर्चा यह भी है कि विभाग में बड़े टेंडर और तबादलों को लेकर मंत्री और विभाग की वरिष्ठ अधिकारी के बीच मतभेद सामने आए हैं। हालांकि इस संबंध में किसी भी स्तर पर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है लेकिन प्रशासनिक हलकों में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।

    प्रदेश में एक ही दिन सामने आई इन घटनाओं ने साफ कर दिया कि मध्य प्रदेश में राजनीति प्रशासन और व्यवस्था से जुड़े मुद्दे लगातार नए रंग दिखा रहे हैं। आने वाले दिनों में उपचुनाव पदयात्रा और प्रशासनिक फैसलों के साथ इन घटनाओं का असर प्रदेश की सियासत में और अधिक दिखाई दे सकता है।

  • शिवपुरी में दर्दनाक सड़क हादसा पोहरी SDM के रीडर की पत्नी की मौत खड़ी ट्रैक्टर ट्रॉली से टकराई कार

    शिवपुरी में दर्दनाक सड़क हादसा पोहरी SDM के रीडर की पत्नी की मौत खड़ी ट्रैक्टर ट्रॉली से टकराई कार


    शिवपुरी  शिवपुरी में देर रात हुए दर्दनाक सड़क हादसे ने एक परिवार की खुशियां छीन लीं। सड़क किनारे खड़ी ट्रैक्टर ट्रॉली से तेज रफ्तार कार टकरा गई जिससे पोहरी एसडीएम कार्यालय के रीडर श्याम सिंह दोहरे की पत्नी मनीषा दोहरे की मौत हो गई। हादसे में श्याम सिंह दोहरे सहित चार अन्य लोग घायल हुए हैं जिनका मेडिकल कॉलेज शिवपुरी में उपचार जारी है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।

    जानकारी के अनुसार पोहरी एसडीएम कार्यालय में पदस्थ रीडर श्याम सिंह दोहरे का हाल ही में भिंड तबादला हुआ था। शुक्रवार को जिला मुख्यालय शिवपुरी से कार्यमुक्त होने के बाद वे अपने परिवार और परिचितों के साथ कार से पोहरी लौट रहे थे। कार में उनकी पत्नी मनीषा दोहरे के अलावा एक शिक्षक उनकी पत्नी और उनका बच्चा भी सवार थे।

    बताया जा रहा है कि शिवपुरी पोहरी मुख्य मार्ग की खराब स्थिति के कारण उन्होंने झिरी मार्ग से जाने का फैसला किया। शुक्रवार देर रात करीब साढ़े बारह बजे मुद्गल पेट्रोल पंप के पास उनकी कार सड़क किनारे खड़ी ट्रैक्टर ट्रॉली से पीछे से जा टकराई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार के अगले हिस्से के परखच्चे उड़ गए और उसमें सवार सभी लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।

    घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोगों और पुलिस की मदद से घायलों को तत्काल मेडिकल कॉलेज शिवपुरी पहुंचाया गया। इलाज के दौरान मनीषा दोहरे ने दम तोड़ दिया जबकि श्याम सिंह दोहरे और अन्य घायलों का इलाज जारी है। चिकित्सकों की निगरानी में उनका उपचार किया जा रहा है।

    शनिवार को मेडिकल कॉलेज चौकी पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया। प्रारंभिक जांच में हादसे की वजह सड़क किनारे खड़ी ट्रैक्टर ट्रॉली से कार की टक्कर मानी जा रही है। पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है और यह भी पता लगाया जा रहा है कि ट्रैक्टर ट्रॉली सड़क पर किस परिस्थिति में खड़ी थी तथा सुरक्षा संबंधी नियमों का पालन किया गया था या नहीं।

    यह हादसा एक बार फिर सड़क किनारे बिना पर्याप्त संकेतों के खड़े भारी वाहनों से होने वाले खतरों की ओर इशारा करता है। पुलिस मामले की विस्तृत जांच के बाद आगे की कार्रवाई करेगी।

  • सरकारी नौकरी का झांसा, लाखों की वसूली: भोपाल में फर्जी भर्ती रैकेट का बड़ा खुलासा

    सरकारी नौकरी का झांसा, लाखों की वसूली: भोपाल में फर्जी भर्ती रैकेट का बड़ा खुलासा


    भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में बेरोजगार युवाओं को सरकारी नौकरी का सपना दिखाकर लाखों रुपये की ठगी करने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। मामले का खुलासा उस समय हुआ जब अटल आवास योजना में फ्लैट दिलाने के नाम पर धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार की गई प्रमिला तिवारी के खिलाफ कई अन्य पीड़ित भी सामने आए। जांच आगे बढ़ी तो एक ऐसे फर्जी भर्ती रैकेट का खुलासा हुआ जिसने सरकारी नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के भरोसे और सपनों दोनों को निशाना बनाया।

    जानकारी के अनुसार गिरोह बेरोजगार युवाओं को विभिन्न सरकारी विभागों में नौकरी दिलाने का झांसा देता था। आरोप है कि युवाओं से दो लाख से पांच लाख रुपये तक की रकम वसूली जाती थी और बदले में उन्हें फर्जी नियुक्ति पत्र थमा दिए जाते थे। इन नियुक्ति पत्रों में एम्स, वन विभाग, रेलवे, बैंक और नगर निगम जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में नियुक्ति दर्शाई जाती थी। कई युवाओं को तो भारतीय वन सेवा अधिकारी, बैंक क्लर्क और रेलवे कर्मचारी तक नियुक्त किए जाने का दावा किया गया।

    मामले को और गंभीर बनाता है फर्जी दस्तावेजों का स्वरूप। जांच में ऐसे नियुक्ति पत्र सामने आए हैं जिनमें लोक निर्माण विभाग से संबंधित भर्ती दिखाते हुए मंत्री के कथित फर्जी हस्ताक्षर भी किए गए हैं। आरोप है कि जालसाजों ने दस्तावेजों को इतना वास्तविक बनाने की कोशिश की कि पीड़ितों को किसी प्रकार का संदेह न हो। यही वजह रही कि कई युवा लंबे समय तक खुद को चयनित कर्मचारी मानते रहे और बाद में ठगी का शिकार होने का पता चला।

    पीड़ितों के अनुसार गिरोह भरोसा जीतने के लिए बेहद सुनियोजित तरीके से काम करता था। युवाओं को सरकारी कार्यालयों के आसपास बुलाया जाता था ताकि उन्हें लगे कि पूरी प्रक्रिया वैध है। गिरोह के अन्य सदस्य खुद को पहले से चयनित कर्मचारी बताकर विश्वास पैदा करते थे। वे दावा करते थे कि उनकी नियुक्ति भी इसी माध्यम से हुई है, जिससे नए अभ्यर्थी आसानी से उनके जाल में फंस जाते थे।

    जांच में एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। प्रमिला तिवारी और उसके सहयोगियों के पास बेरोजगार युवाओं की शैक्षणिक जानकारी और मोबाइल नंबर पहले से उपलब्ध थे। इससे यह आशंका पैदा हो गई है कि युवाओं का व्यक्तिगत डाटा कहीं से अवैध रूप से प्राप्त किया गया था। अब पुलिस इस पहलू की भी गहन जांच कर रही है कि आखिर यह संवेदनशील जानकारी आरोपियों तक कैसे पहुंची।

    टीटी नगर थाना पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है। अधिकारियों का कहना है कि फर्जी नियुक्ति पत्रों, बैंक लेनदेन और आरोपियों के नेटवर्क की जांच की जा रही है। साथ ही यह पता लगाया जा रहा है कि इस रैकेट में और कौन-कौन लोग शामिल हैं तथा कितने युवाओं को अब तक ठगी का शिकार बनाया गया है।

    यह मामला बेरोजगारी की समस्या का फायदा उठाकर युवाओं के साथ किए जा रहे संगठित अपराध की गंभीर तस्वीर पेश करता है। पुलिस ने युवाओं से अपील की है कि सरकारी नौकरी से संबंधित किसी भी प्रस्ताव पर भरोसा करने से पहले उसकी आधिकारिक पुष्टि अवश्य करें और किसी भी व्यक्ति को नौकरी दिलाने के नाम पर रकम न दें।