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  • कहीं कीचड़ में बच्चों की प्रस्तुति तो कहीं भाजपा नेता की पार्टी में SI का गाना, MP में आजादी के जश्न पर उठे सवाल

    कहीं कीचड़ में बच्चों की प्रस्तुति तो कहीं भाजपा नेता की पार्टी में SI का गाना, MP में आजादी के जश्न पर उठे सवाल


    भोपाल । मध्य प्रदेश में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर जहां देशभक्ति और तिरंगे के रंग में पूरा प्रदेश रंगा नजर आया वहीं अलग अलग जिलों से कुछ ऐसी तस्वीरें भी सामने आईं जिन्होंने व्यवस्थाओं और प्रशासनिक तौर तरीकों पर सवाल खड़े कर दिए। रतलाम में कलेक्टर के भाषण के दौरान स्वतंत्रता दिवस समारोह के मैदान में कुत्तों के पहुंचने का मामला चर्चा में रहा तो नर्मदापुरम में बारिश के बाद कीचड़ से भरे मैदान में स्कूली बच्चों को प्रस्तुति देनी पड़ी। मंदसौर के गरोठ में महिला सरपंच का घूंघट में तिरंगा फहराने का वीडियो भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बना। वहीं मंदसौर में भाजपा नेता की बर्थडे पार्टी में एक सब इंस्पेक्टर के गाना गाने का वीडियो सामने आने के बाद पुलिस विभाग में भी मामला सुर्खियों में रहा।

    रतलाम में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान उस समय अजीब स्थिति बन गई जब आयोजन स्थल पर कुत्ते खुलेआम घूमते दिखाई दिए। बताया गया कि यह घटना उस समय हुई जब कलेक्टर का भाषण चल रहा था। कुत्ते काफी देर तक मैदान में घूमते रहे और बाद में एक पुलिसकर्मी ने उन्हें बाहर निकाला। पूरे घटनाक्रम का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोग व्यवस्थाओं को लेकर तरह तरह की प्रतिक्रियाएं देते नजर आए। लोगों ने तंज कसते हुए कहा कि जब पूरा देश आजादी का जश्न मना रहा है तो कुत्ते भी आजादी के जश्न में शामिल होने पहुंच गए। हालांकि इस घटना ने नगर निगम और आयोजन स्थल की सुरक्षा तथा साफ सफाई व्यवस्था पर सवाल जरूर खड़े कर दिए।

    नर्मदापुरम से आई तस्वीर भी कम चौंकाने वाली नहीं रही। बारिश के कारण स्वतंत्रता दिवस समारोह का मैदान कीचड़ से भर गया था। इसके बावजूद स्कूली बच्चों को उसी मैदान में अपनी प्रस्तुति देनी पड़ी। दूसरी ओर मैदान के एक हिस्से में गिट्टी की चूरी डालकर उसे पुलिस परेड के लिए तैयार किया गया था। इसी अंतर को लेकर लोगों ने सवाल उठाया कि जब पुलिसकर्मियों की परेड के लिए मैदान को व्यवस्थित किया जा सकता था तो बच्चों के कार्यक्रम के लिए ऐसी व्यवस्था क्यों नहीं की गई। बच्चों को कीचड़ में खड़े होकर प्रस्तुति देने की स्थिति को लेकर व्यवस्थापकों पर सवाल उठे।

    मंदसौर के गरोठ क्षेत्र से सामने आया घूंघट वाला मामला भी चर्चा में रहा। मेलखेड़ा पंचायत में महिला सरपंच ने घूंघट में तिरंगा फहराया। वीडियो में उनका चेहरा पूरी तरह घूंघट से ढका दिखाई दिया। समारोह में स्कूली बच्चों और ग्रामीणों के साथ पंचायत के अन्य प्रतिनिधि भी मौजूद थे। इस तस्वीर को लेकर महिला सशक्तिकरण और स्थानीय स्तर पर महिलाओं की वास्तविक भागीदारी को लेकर सवाल उठाए गए। हालांकि किसी महिला का घूंघट करना अपने आप में किसी नियम का उल्लंघन नहीं है लेकिन सार्वजनिक पद पर निर्वाचित महिला प्रतिनिधि की सार्वजनिक भूमिका और सामाजिक परंपराओं के बीच संतुलन को लेकर बहस जरूर छिड़ गई।

    मंदसौर में ही भाजपा नेता की बर्थडे पार्टी में कचनारा पुलिस चौकी प्रभारी सब इंस्पेक्टर भीम सिंह के पहुंचने और उनके लिए गाना गाने का वीडियो चर्चा में आया। वीडियो में एसआई भाजपा नेता की बर्थडे पार्टी में गाना गाते नजर आए। गाने के बोल भी दोस्ती को लेकर थे जिसके बाद सोशल मीडिया पर पुलिस और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के बीच नजदीकी को लेकर सवाल उठने लगे। मामले की जानकारी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों तक पहुंचने के बाद एसआई को कारण बताओ नोटिस दिए जाने की बात सामने आई है। यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि केवल किसी कार्यक्रम में शामिल होने या गाना गाने से किसी राजनीतिक पक्षधरता का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। लेकिन पुलिसकर्मी और राजनीतिक दलों के नेताओं के सार्वजनिक मेलजोल को लेकर उठने वाले सवालों के कारण यह मामला चर्चा में जरूर आ गया।

    अंदर की बात पर भी सियासी नजर

    दतिया विधानसभा उपचुनाव के नतीजे के बाद भाजपा संगठन में समीक्षा और संभावित कार्रवाई को लेकर भी चर्चा तेज रही। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने परिणामों की समीक्षा की बात कही थी। बाद में मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में वरिष्ठ नेताओं की बैठक हुई और हार के कारणों की समीक्षा के लिए दो सदस्यीय समिति गठित की गई। समिति को चुनाव से जुड़े पदाधिकारियों और वरिष्ठ नेताओं से चर्चा कर रिपोर्ट प्रदेश अध्यक्ष को सौंपने की जिम्मेदारी दी गई। इससे साफ है कि दतिया के नतीजे को पार्टी ने गंभीरता से लिया है।

    कुल मिलाकर स्वतंत्रता दिवस के उत्सव के बीच सामने आई ये तस्वीरें मध्य प्रदेश में व्यवस्था प्रशासन राजनीति और सामाजिक परंपराओं से जुड़े अलग अलग सवालों को सामने लाती हैं। कहीं लापरवाही पर सवाल है तो कहीं समान व्यवस्था की मांग उठ रही है और कहीं सार्वजनिक पदों पर बैठे लोगों के आचरण को लेकर बहस छिड़ी है। यही वजह है कि आजादी के जश्न के साथ इन घटनाओं ने भी लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा।

  • मध्य प्रदेश में पुलिस महकमे को बड़ी मजबूती, 3 नई SISF बटालियन बनेंगी; हजारों पुलिसकर्मियों को प्रमोशन और भर्ती का ऐलान

    मध्य प्रदेश में पुलिस महकमे को बड़ी मजबूती, 3 नई SISF बटालियन बनेंगी; हजारों पुलिसकर्मियों को प्रमोशन और भर्ती का ऐलान


    भोपाल । मध्यप्रदेश में औद्योगिक संस्थानों और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को भोपाल के रवीन्द्र भवन में आयोजित पुलिस विभाग की नवीन भर्ती और पदोन्नति आभार प्रदर्शन समारोह में राज्य औद्योगिक सुरक्षा बल यानी एसआईएसएफ की तीन नई बटालियन गठित करने का ऐलान किया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि इन तीन बटालियनों में से एक का गठन खंडवा में किया जाएगा, जबकि बाकी दो बटालियन कहां स्थापित होंगी इसका फैसला बाद में किया जाएगा। सरकार के इस कदम को औद्योगिक और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसी कार्यक्रम में राज्य के अति पिछड़े जनजातीय समूहों के युवाओं को सुरक्षा बल में अवसर देने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि बैगा, भारिया और सहरिया समुदायों की अलग-अलग कंपनियां गठित की जाएंगी। इन कंपनियों में संबंधित जनजातीय समुदायों के युवाओं को शामिल किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य इन समुदायों के युवाओं को रोजगार और सुरक्षा बल में प्रतिनिधित्व देने के साथ उन्हें मुख्यधारा से जोड़ना भी है। इस फैसले से आदिवासी क्षेत्रों के युवाओं के लिए सरकारी सेवा में नए अवसर खुलने की उम्मीद है।

    कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने पुलिस विभाग में पदोन्नति को लेकर भी सरकार की उपलब्धियां गिनाईं। उन्होंने बताया कि जुलाई 2026 में प्रदेश के विभिन्न विभागों में पदोन्नति की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई और पुलिस विभाग में 58 संवर्गों के कुल 27,534 अफसरों और कर्मचारियों को पदोन्नति मिली। इनमें 30 रक्षित निरीक्षक पदोन्नत होकर उप पुलिस अधीक्षक बने हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि लंबे समय से पदोन्नति का इंतजार कर रहे पुलिसकर्मियों के लिए यह फैसला उनके मनोबल को बढ़ाने वाला है। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों के कंधों पर लगे सितारे सिर्फ पदोन्नति का प्रतीक नहीं बल्कि बढ़ी हुई जिम्मेदारी और क्षमता का भी संकेत हैं।

    मुख्यमंत्री ने यह भी स्वीकार किया कि पदोन्नति में लंबे समय तक आई रुकावट के कारण 20 हजार से ज्यादा पुलिसकर्मी सेवानिवृत्त हो गए और उन्हें अपने सेवाकाल में पदोन्नति का लाभ नहीं मिल सका। उन्होंने कहा कि इस बात का उन्हें मलाल है, लेकिन अब पदोन्नति का रास्ता खोल दिया गया है और आगे पात्रता के आधार पर पुलिसकर्मियों को आगे बढ़ने के अवसर मिलते रहेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस विभाग को मजबूत बनाने के लिए नए पदों की स्वीकृति और नियमित भर्ती पर सरकार लगातार काम कर रही है।

    डीजीपी कैलाश मकवाना ने बताया कि दिसंबर 2024 में पदभार संभालने के बाद पुलिस विभाग की विभिन्न शाखाओं की विस्तृत समीक्षा की गई थी। इस दौरान भर्ती एवं चयन शाखा में करीब 20 हजार पद खाली मिले। इनमें सब इंस्पेक्टर, सूबेदार, स्टेनो और एएसआई एम जैसे महत्वपूर्ण पद भी शामिल थे। डीजीपी के मुताबिक इन पदों पर करीब आठ साल से भर्ती नहीं हुई थी। लंबे समय तक रिक्तियां रहने के कारण मौजूदा पुलिसकर्मियों पर काम का दबाव बढ़ रहा था और इसका असर विभाग की कार्यक्षमता पर भी पड़ रहा था।

    सरकार ने अब इस स्थिति को बदलने के लिए भर्ती प्रक्रिया तेज की है। डीजीपी ने बताया कि वर्ष 2025 में करीब 6,500 पदों पर भर्ती का प्रस्ताव सरकार को भेजा गया था। इसके बाद विभिन्न पदों पर भर्ती की अनुमति मिली। वर्ष 2026 में भी पुलिस विभाग के अलग-अलग पदों पर 9,662 भर्तियों की अनुमति दी गई है। विभिन्न संवर्गों में 14,704 उम्मीदवारों का चयन हो चुका है, जबकि पुलिस बैंड और एफएसएल से जुड़ी भर्तियां दूसरे चरण में हैं। कुल मिलाकर 9,751 से अधिक पदों पर भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।

    नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए भी सरकार ने अतिरिक्त पदों को मंजूरी दी है। डीजीपी ने बताया कि मुख्यमंत्री की स्वीकृति से हॉक फोर्स में 325 और विशेष सहयोगी दस्ते में 882 पद स्वीकृत किए गए हैं। उन्होंने कहा कि लगातार उठाए गए कदमों और सुरक्षा बलों को मजबूत करने के परिणामस्वरूप मध्यप्रदेश नक्सल समस्या से मुक्त होने वाला देश का पहला राज्य बना है।

    मुख्यमंत्री ने पुलिसकर्मियों का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि पुलिस की वर्दी पहनने के बाद व्यक्ति के भीतर जिम्मेदारी और साहस का अलग भाव पैदा होता है। उन्होंने कहा कि पुलिस देशभक्ति और जनसेवा की भावना के साथ अपनी अलग पहचान बनाती है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि गृह विभाग की जिम्मेदारी उनके पास होने के कारण वह पुलिस और आंतरिक सुरक्षा से जुड़े विषयों पर विशेष ध्यान देने का प्रयास करते हैं। कार्यक्रम में गृह विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और पुलिस विभाग के आला अधिकारियों की मौजूदगी में मुख्यमंत्री का अभिनंदन किया गया और नई भर्तियों तथा पदोन्नतियों के लिए आभार व्यक्त किया गया।

  • राजबाड़ा बाजार में अचानक बिगड़ी तबीयत, देवास से खरीदारी करने आए व्यक्ति ने अस्पताल में तोड़ा दम

    राजबाड़ा बाजार में अचानक बिगड़ी तबीयत, देवास से खरीदारी करने आए व्यक्ति ने अस्पताल में तोड़ा दम


    इंदौर ।  इंदौर के व्यस्त राजबाड़ा बाजार में उस समय अफरा तफरी का माहौल बन गया जब देवास जिले के बागली से खरीदारी करने आए 50 वर्षीय व्यक्ति की अचानक तबीयत बिगड़ गई और कुछ ही देर बाद उनकी मौत हो गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार डॉक्टरों ने हार्ट अटैक की आशंका जताई है जबकि मौत के वास्तविक कारणों की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद होगी। इस घटना ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि हृदय संबंधी समस्याएं बिना किसी बड़े संकेत के भी अचानक सामने आ सकती हैं।

    मृतक की पहचान विक्रम पुत्र नाथूलाल चौहान निवासी बागली जिला देवास के रूप में हुई है। बताया गया कि वह अपने एक रिश्तेदार के साथ घरेलू खरीदारी के लिए इंदौर आए थे। दोनों राजबाड़ा क्षेत्र में अलग अलग दुकानों पर सामान खरीद रहे थे। इसी दौरान विक्रम एक दुकान पर बैठे हुए थे तभी उन्हें अचानक घबराहट महसूस हुई। आसपास मौजूद लोगों के अनुसार कुछ ही क्षणों में उनकी तबीयत और बिगड़ गई और वह बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़े।

    घटना होते ही वहां मौजूद लोगों ने तुरंत मानवता का परिचय दिया और बिना समय गंवाए उन्हें ऑटो की मदद से महाराजा यशवंतराव अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल में डॉक्टरों ने तत्काल जांच की लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। शुरुआती जांच में मौत की वजह हार्ट अटैक मानी जा रही है हालांकि पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने तक अंतिम कारण पर कुछ भी कहने से इनकार किया है।

    घटना की सूचना मिलते ही सराफा थाना पुलिस अस्पताल पहुंची और आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू की। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद ही मौत के कारणों की आधिकारिक पुष्टि की जाएगी। यदि किसी अन्य चिकित्सकीय कारण का पता चलता है तो उसी के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

    परिजनों के अनुसार विक्रम सामाजिक कार्यों से जुड़े हुए थे और बागली क्षेत्र में एक गैर सरकारी संस्था के साथ काम करते थे। उनका व्यवहार मिलनसार था और समाज सेवा में उनकी सक्रिय भूमिका रही थी। परिवार में पत्नी चार बच्चे और अन्य सदस्य हैं। अचानक हुई इस घटना से पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। जैसे ही मौत की खबर गांव पहुंची परिवार और परिचितों में शोक की लहर दौड़ गई।

    चिकित्सकों का कहना है कि लगातार बढ़ती भागदौड़ तनाव अनियमित दिनचर्या और हृदय रोगों के प्रति लापरवाही के कारण इस तरह की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। यदि किसी व्यक्ति को अचानक सीने में दर्द घबराहट सांस लेने में तकलीफ अत्यधिक पसीना या बेहोशी जैसे लक्षण महसूस हों तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेना बेहद जरूरी है। समय पर इलाज मिलने से कई मामलों में मरीज की जान बचाई जा सकती है।

    यह दुखद घटना एक बार फिर स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने की जरूरत को रेखांकित करती है। नियमित स्वास्थ्य जांच संतुलित जीवनशैली और समय पर चिकित्सा सलाह हृदय संबंधी गंभीर जोखिमों को काफी हद तक कम कर सकती है। वहीं सार्वजनिक स्थानों पर मौजूद लोगों की तत्परता भी आपातकालीन परिस्थितियों में किसी की जान बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

  • भोपाल के मिक्स लैंड यूज विवाद पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, हजारों भूखंड मालिकों की निगाहें फैसले पर

    भोपाल के मिक्स लैंड यूज विवाद पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, हजारों भूखंड मालिकों की निगाहें फैसले पर


    भोपाल । भोपाल में आवासीय भवनों में वर्षों से संचालित हो रही व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर आज सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई होने जा रही है। इस मामले पर शहर के हजारों व्यापारी और बड़ी संख्या में रहवासी नजर बनाए हुए हैं क्योंकि अदालत का फैसला आगे की कार्रवाई की दिशा तय कर सकता है। रहवासियों का कहना है कि वे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई में शामिल होंगे और हाल ही में नगर निगम द्वारा की गई कार्रवाई के फोटो और वीडियो भी अदालत के समक्ष प्रस्तुत करेंगे।

    दरअसल राजधानी के अरेरा कॉलोनी रोहित नगर बावड़ियाकलां 10 नंबर 11 नंबर और 12 नंबर मार्केट सहित कई इलाकों में लंबे समय से आवासीय भवनों से व्यवसाय संचालित किए जा रहे हैं। इसको लेकर स्थानीय रहवासियों ने लगातार आपत्ति जताई और हाईकोर्ट में याचिका भी दायर की थी। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा जहां से सख्त रुख अपनाए जाने के बाद नगर निगम ने कई प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी कर कार्रवाई शुरू की। कुछ दुकानों को सील किया गया जबकि कई व्यापारियों ने स्वेच्छा से अपने प्रतिष्ठान बंद कर दिए थे।

    हालांकि इसके बाद मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की अध्यक्षता में जनप्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक हुई जिसमें व्यापारियों की समस्याओं पर भी चर्चा की गई। बैठक में निर्णय लिया गया कि पूरे मामले की समीक्षा के लिए वरिष्ठ अधिकारियों की एक उच्च स्तरीय समिति बनाई जाएगी। यह समिति सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का अध्ययन कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि समिति की रिपोर्ट आने तक व्यापारियों को अनावश्यक घबराने की जरूरत नहीं है। इसी निर्णय के बाद सोमवार को अधिकांश बंद दुकानें दोबारा खुल गईं।

    रहवासी संगठन इस फैसले से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बावजूद नगर निगम ने अपेक्षित कार्रवाई पूरी नहीं की और जिन प्रतिष्ठानों को बंद किया गया था उनके दोबारा खुलने से अदालत के आदेशों की भावना प्रभावित हुई है। उनका मानना है कि आवासीय क्षेत्रों में लगातार बढ़ती व्यावसायिक गतिविधियों से ट्रैफिक जाम पार्किंग की समस्या शोर प्रदूषण और सुरक्षा संबंधी चुनौतियां बढ़ रही हैं जिससे लोगों का सामान्य जीवन प्रभावित हो रहा है।

    दूसरी ओर व्यापारी संगठन इस पूरे मामले को व्यावहारिक नजरिए से देखने की मांग कर रहे हैं। भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज का कहना है कि वर्ष 2005 के बाद नया मास्टर प्लान लागू नहीं होने के कारण शहर में पर्याप्त व्यावसायिक भूखंड उपलब्ध नहीं हो सके। ऐसी स्थिति में हजारों व्यापारियों ने मजबूरी में आवासीय परिसरों से अपना कारोबार शुरू किया। संगठन का कहना है कि व्यापारी नियमित रूप से व्यावसायिक दर पर संपत्ति कर बिजली बिल और अन्य सभी सरकारी शुल्क का भुगतान कर रहे हैं जिससे शासन को करोड़ों रुपए का राजस्व भी प्राप्त हो रहा है।

    व्यापारियों ने गुजरात की तर्ज पर मिक्स लैंड यूज व्यवस्था लागू करने की मांग दोहराई है ताकि आवासीय क्षेत्रों में नियंत्रित और नियमानुसार व्यवसाय संचालित किए जा सकें। उनका कहना है कि इससे व्यापार भी प्रभावित नहीं होगा और आम नागरिकों को आवश्यक सेवाएं भी अपने क्षेत्र में मिलती रहेंगी।

    अब सभी की निगाहें सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं। अदालत के निर्देश न केवल भोपाल बल्कि प्रदेश के अन्य शहरों में भी आवासीय और व्यावसायिक उपयोग से जुड़े मामलों के लिए महत्वपूर्ण आधार साबित हो सकते हैं। सरकार की समीक्षा समिति की रिपोर्ट और न्यायालय के निर्देशों के बाद ही इस लंबे समय से चले आ रहे विवाद का स्थायी समाधान निकलने की उम्मीद है।

  • उज्जैन में भोर होते ही गूंजा हर हर महादेव पंचामृत अभिषेक के बाद राजाधिराज स्वरूप में सजे बाबा महाकाल ने दिए दिव्य दर्शन

    उज्जैन में भोर होते ही गूंजा हर हर महादेव पंचामृत अभिषेक के बाद राजाधिराज स्वरूप में सजे बाबा महाकाल ने दिए दिव्य दर्शन


    मध्यप्रदेश । विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में मंगलवार तड़के आयोजित होने वाली भस्म आरती के दौरान आध्यात्मिक आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। ब्रह्म मुहूर्त में सुबह चार बजे मंदिर के पट खुलते ही पूरा मंदिर परिसर हर हर महादेव और वैदिक मंत्रोच्चार से गूंज उठा। गर्भगृह में विराजमान भगवान महाकाल सहित सभी देवी देवताओं का विधि विधान से पूजन संपन्न हुआ। इसके बाद बाबा महाकाल का पवित्र जल से अभिषेक किया गया और दूध दही घी शक्कर तथा फलों के रस से तैयार पंचामृत से विशेष स्नान कराया गया। इस दिव्य अनुष्ठान के बाद भगवान महाकाल को राजाधिराज स्वरूप में अलंकृत कर भक्तों को दिव्य दर्शन कराए गए।

    भस्म आरती की शुरुआत प्रथम घंटानाद के साथ हुई। मंदिर के पुजारियों ने वैदिक मंत्रों के उच्चारण के बीच भगवान महाकाल का ध्यान कर हरिओम का पवित्र जल अर्पित किया। इसके पश्चात कपूर आरती संपन्न हुई और भगवान के मस्तक पर भांग चंदन तथा त्रिपुंड का तिलक लगाया गया। जटाधारी बाबा महाकाल का श्रृंगार अत्यंत आकर्षक और भव्य स्वरूप में किया गया जिसने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।

    श्रृंगार पूर्ण होने के बाद ज्योतिर्लिंग को परंपरा के अनुसार वस्त्र से आच्छादित कर पवित्र भस्म अर्पित की गई। महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से संपन्न इस विशेष अनुष्ठान का सनातन परंपरा में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में अपने भक्तों को दर्शन देते हैं और उन पर विशेष कृपा बरसाते हैं।

    भस्म अर्पित करने के बाद बाबा महाकाल को रजत निर्मित शेषनाग का मुकुट रजत की मुंडमाला रुद्राक्ष की मालाएं और आकर्षक आभूषणों से सजाया गया। इसके साथ ही मोगरा और गुलाब के सुगंधित पुष्पों की मालाओं से भगवान का अलौकिक श्रृंगार किया गया। अंत में फल और मिष्ठान का भोग अर्पित कर विश्व कल्याण और सुख समृद्धि की कामना की गई।

    भस्म आरती के दौरान देश और विदेश से आए हजारों श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन किए। मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं और पूरा वातावरण शिव भक्ति में डूबा दिखाई दिया। भक्तों ने बाबा महाकाल के दर्शन कर परिवार की सुख समृद्धि उत्तम स्वास्थ्य और जीवन में मंगल की कामना की।

    महाकाल मंदिर की भस्म आरती केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि सनातन आस्था की जीवंत परंपरा है। प्रतिदिन ब्रह्म मुहूर्त में होने वाली यह आरती भगवान शिव के महाकाल स्वरूप की महिमा का अद्भुत प्रतीक मानी जाती है। यही कारण है कि इस दिव्य आरती के दर्शन करने के लिए देश ही नहीं बल्कि दुनिया भर से श्रद्धालु उज्जैन पहुंचते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से बाबा महाकाल के दर्शन और भस्म आरती में शामिल होने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और उनके जीवन में सुख शांति तथा समृद्धि का वास होता है।

  • सरकारी खजाने पर डाका इंदौर में 8 करोड़ के गबन मामले में नया खुलासा आरोपी के खाते में पहुंचे थे 13.72 लाख रुपए

    सरकारी खजाने पर डाका इंदौर में 8 करोड़ के गबन मामले में नया खुलासा आरोपी के खाते में पहुंचे थे 13.72 लाख रुपए


    इंदौर । इंदौर में करीब 8 करोड़ रुपए के शासकीय धन के गबन से जुड़े बहुचर्चित मामले में पुलिस को एक और बड़ी सफलता मिली है। रावजी बाजार थाना पुलिस ने इस मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार कर अदालत से तीन दिन की पुलिस रिमांड हासिल की है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपी के बैंक खाते में शासकीय मद से 13 लाख 72 हजार रुपए ट्रांसफर किए गए थे। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस रकम का इस्तेमाल कहां और किस तरह किया गया तथा इस पूरे घोटाले में और कौन-कौन लोग शामिल थे।

    यह मामला मार्च 2023 में सामने आया था जब तत्कालीन संयुक्त कलेक्टर मुनीष सिंह सिकरवार की शिकायत के आधार पर रावजी बाजार थाने में एफआईआर दर्ज की गई थी। जांच के दौरान पुलिस ने मिलाप चौहान रंजीत करोड़ मनीषा चौहान राहुल चौहान सहित कई लोगों को आरोपी बनाया था। इसके बाद लगातार जांच का दायरा बढ़ता गया और कई अहम जानकारियां सामने आईं।

    पुलिस जांच में खुलासा हुआ कि आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों के बैंक खातों से जुड़ी जानकारी का दुरुपयोग किया। जिन खातों में तकनीकी कारणों से भुगतान नहीं हो पाया था उन खातों की जानकारी हासिल कर आरोपियों ने फर्जी स्वीकृति आदेश तैयार किए। इसके बाद वास्तविक हितग्राहियों के बैंक खातों की जगह अपने परिजनों दोस्तों और परिचितों के बैंक खातों की जानकारी दर्ज कर दी गई। इसी फर्जीवाड़े के जरिए सरकारी राशि दोबारा जनरेट कर अलग-अलग निजी खातों में ट्रांसफर की जाती रही।

    जांच एजेंसियों के अनुसार इसी तरीके से लगभग 8 करोड़ रुपए की शासकीय राशि का गबन किया गया। यह मामला सामने आने के बाद प्रशासन और पुलिस ने संयुक्त रूप से जांच शुरू की थी। अब तक कई आरोपियों की भूमिका सामने आ चुकी है और लगातार नए तथ्य भी उजागर हो रहे हैं।

    इसी कड़ी में पुलिस ने सोमवार को सर्वहारा नगर परदेशीपुरा निवासी मनोज उर्फ हल्लू को गिरफ्तार किया। जांच में पता चला कि सह आरोपी रंजीत करोड़ ने सरकारी मद से मनोज के बैंक खाते में 13 लाख 72 हजार रुपए ट्रांसफर किए थे। पुलिस का दावा है कि इस रकम का उपयोग आरोपी और उसके सहयोगियों ने विभिन्न कार्यों में किया। फिलहाल पुलिस यह भी जांच कर रही है कि इस राशि का कितना हिस्सा निकाला गया कितना खर्च हुआ और क्या इसे आगे अन्य खातों में भी भेजा गया।

    पुलिस रिमांड के दौरान आरोपी से लगातार पूछताछ की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ में इस पूरे घोटाले से जुड़े कई और नाम सामने आ सकते हैं। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि सरकारी धन के गबन की इस साजिश में किसकी क्या भूमिका थी और किन लोगों ने फर्जी दस्तावेज तैयार करने तथा बैंक खातों में राशि ट्रांसफर कराने में मदद की।

    यह मामला सरकारी वित्तीय व्यवस्था में पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। प्रशासन का कहना है कि पूरे प्रकरण की गहन जांच की जा रही है और दोषी पाए जाने वाले सभी लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस का उद्देश्य केवल आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है बल्कि गबन की पूरी राशि का हिसाब जुटाना और सरकारी धन की रिकवरी सुनिश्चित करना भी है।

  • इंदौर में दो दर्दनाक घटनाएं ई रिक्शा चालक ने इलाज के दौरान तोड़ा दम मासूम की मौत के मामले में ठेकेदार पर कसा शिकंजा

    इंदौर में दो दर्दनाक घटनाएं ई रिक्शा चालक ने इलाज के दौरान तोड़ा दम मासूम की मौत के मामले में ठेकेदार पर कसा शिकंजा


    इंदौर । इंदौर में दो अलग-अलग घटनाओं ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा और निर्माण स्थलों पर बरती जाने वाली लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर सड़क हादसे में घायल ई रिक्शा चालक ने कई दिनों तक जिंदगी और मौत से जूझने के बाद अस्पताल में दम तोड़ दिया तो दूसरी ओर चार साल के मासूम की निर्माणाधीन मकान की खुली पानी की टंकी में डूबकर हुई मौत के मामले में पुलिस ने ठेकेदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। दोनों घटनाओं ने शहरवासियों को गहरे सदमे में डाल दिया है।

    पहली घटना बाणगंगा थाना क्षेत्र की है जहां पंचम की फेल निवासी 38 वर्षीय कपिल रमनवाल बीते 24 जुलाई की शाम अपने ई रिक्शा से गुजर रहे थे। इसी दौरान सामने से आ रहे दूसरे वाहन को बचाने के प्रयास में उनका ई रिक्शा असंतुलित होकर पलट गया। हादसा इतना गंभीर था कि कपिल के सिर हाथ और पैर में गहरी चोटें आईं। राहगीरों और स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें तत्काल एमवाय अस्पताल पहुंचाया गया जहां डॉक्टरों की निगरानी में उनका उपचार चल रहा था। कई दिनों तक इलाज के बाद सोमवार देर रात उन्होंने अंतिम सांस ली।

    पुलिस ने बताया कि कपिल पिछले कई वर्षों से ई रिक्शा चलाकर अपने परिवार का पालन पोषण कर रहे थे। उनके परिवार में माता पिता दो बच्चे और एक भाई हैं। उनकी असमय मौत से पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। पुलिस ने मर्ग कायम कर हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है ताकि यह स्पष्ट हो सके कि दुर्घटना किन परिस्थितियों में हुई और क्या इसमें किसी अन्य वाहन की भी भूमिका थी।

    दूसरी घटना कनाड़िया क्षेत्र की है जिसने पूरे शहर को झकझोर दिया। यहां चार वर्षीय रुद्र चौहान की निर्माणाधीन मकान परिसर में बनी खुली पानी की टंकी में गिरने से मौत हो गई थी। घटना 10 जुलाई की बताई गई है। पुलिस जांच में सामने आया कि बच्चे के पिता गोलू काम पर गए हुए थे जबकि मां पूजा घर पर दोनों बच्चों के साथ मौजूद थीं। खेलते खेलते रुद्र घर से निकलकर पास के निर्माणाधीन मकान तक पहुंच गया जहां सुरक्षा के कोई पर्याप्त इंतजाम नहीं थे। खुली पानी की टंकी में गिरने से उसकी मौत हो गई।

    घटना के बाद परिजनों ने बच्चे को तुरंत अस्पताल पहुंचाया लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मामले की जांच के बाद पुलिस ने निर्माण कार्य से जुड़े ठेकेदार राजेश पवैया के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। जांच में यह सामने आया कि निर्माण स्थल पर सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया था जिससे यह दुखद हादसा हुआ।

    दोनों घटनाएं यह संकेत देती हैं कि सड़क पर सावधानी और निर्माण स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही सीधे लोगों की जान पर भारी पड़ सकती है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि दोनों मामलों में निष्पक्ष जांच की जाएगी और यदि किसी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं स्थानीय लोगों ने भी मांग की है कि शहर में निर्माण स्थलों पर सुरक्षा नियमों का कड़ाई से पालन कराया जाए और सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं ताकि भविष्य में ऐसी दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

  • पेपर लीक मामलों पर अब होगी त्वरित सुनवाई मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 4 विशेष अदालतों का किया गठन

    पेपर लीक मामलों पर अब होगी त्वरित सुनवाई मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 4 विशेष अदालतों का किया गठन


    जबलपुर । मध्य प्रदेश में पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं के मामलों पर अब तेजी से न्यायिक कार्रवाई होगी। प्रदेश हाईकोर्ट ने भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में चार विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों के गठन का नोटिफिकेशन जारी किया है। इन अदालतों का उद्देश्य परीक्षा संबंधी अपराधों की शीघ्र सुनवाई सुनिश्चित करना और दोषियों के खिलाफ समयबद्ध फैसला देना है। माना जा रहा है कि इस व्यवस्था से लंबे समय से लंबित मामलों के निपटारे में तेजी आएगी और भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता मजबूत होगी।

    मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने यह निर्णय भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 8(3) के तहत प्राप्त अधिकारों का उपयोग करते हुए लिया है। जारी अधिसूचना में राज्य के विधि एवं विधायी कार्य विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि इस नई व्यवस्था को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए। अदालत का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि परीक्षा संबंधी गंभीर अपराधों की सुनवाई सामान्य मामलों की तरह लंबी प्रक्रिया में न फंसे और समयबद्ध तरीके से न्याय मिल सके।

    इन विशेष अदालतों में पब्लिक एग्जामिनेशन प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स एक्ट 2024 के तहत दर्ज मामलों की सुनवाई की जाएगी। इसके अलावा भारतीय न्याय संहिता 2023 के अंतर्गत पंजीकृत परीक्षा संबंधी अपराध तथा राज्य या केंद्र सरकार की अधिकृत जांच एजेंसियों द्वारा जांचे जा रहे मामलों को भी इन्हीं अदालतों में भेजा जाएगा। इससे पेपर लीक, भर्ती परीक्षा में धोखाधड़ी, नकल माफिया और अन्य परीक्षा अपराधों से जुड़े मामलों के लिए अलग न्यायिक व्यवस्था उपलब्ध होगी।

    हाईकोर्ट ने इन विशेष अदालतों को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी की शक्तियां भी प्रदान की हैं। इसके तहत अदालतें मामलों का संज्ञान लेने, प्रारंभिक न्यायिक प्रक्रिया पूरी करने और आवश्यक कानूनी कार्रवाई करने में सक्षम होंगी। इससे मामलों को अलग अदालतों में भेजने की आवश्यकता कम होगी और सुनवाई की प्रक्रिया अधिक तेज तथा प्रभावी बन सकेगी।

    पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न प्रतियोगी और भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक तथा अनियमितताओं के मामलों ने प्रदेश सहित पूरे देश में चिंता बढ़ाई है। कई अभ्यर्थियों को परीक्षाएं रद्द होने और दोबारा आयोजित होने के कारण कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है। ऐसे मामलों में लंबी न्यायिक प्रक्रिया के कारण दोषियों के खिलाफ कार्रवाई में भी देरी होती रही है। नई विशेष अदालतों के गठन से इन मामलों का जल्द निपटारा होने और दोषियों को शीघ्र सजा मिलने की संभावना बढ़ेगी।

    कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों की स्थापना से जांच एजेंसियों और अभियोजन पक्ष को भी मामलों की सुनवाई में बेहतर समन्वय मिलेगा। साथ ही यह व्यवस्था भविष्य में परीक्षा माफिया और संगठित अपराधों पर अंकुश लगाने में प्रभावी साबित हो सकती है। इससे भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी और अभ्यर्थियों का सरकारी परीक्षाओं पर भरोसा भी मजबूत होगा।

    प्रदेश सरकार और न्यायपालिका की यह पहल परीक्षा प्रणाली को निष्पक्ष और विश्वसनीय बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। अब सभी की निगाह इस बात पर होगी कि नई अदालतें कितनी तेजी से मामलों का निपटारा करती हैं और पेपर लीक जैसे अपराधों पर कितना प्रभावी नियंत्रण स्थापित हो पाता है।

  • MP की सियासत में हलचल: भुट्टा बेचने वाले युवक ने सीएम को सुनाई बेरोजगारी की हकीकत, कांग्रेस नेता को मंच से लौटते वक्त थप्पड़

    MP की सियासत में हलचल: भुट्टा बेचने वाले युवक ने सीएम को सुनाई बेरोजगारी की हकीकत, कांग्रेस नेता को मंच से लौटते वक्त थप्पड़


    मध्यप्रदेश। मध्य प्रदेश की राजनीति में शनिवार का दिन कई ऐसे घटनाक्रमों का गवाह बना, जिन्होंने राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक चर्चा बटोरी। एक ओर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने एक दिव्यांग युवक ने अपनी बेरोजगारी की कहानी सुनाकर व्यवस्था पर सवाल खड़े किए, वहीं राजगढ़ में एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस नेता और जिला पंचायत अध्यक्ष चंदर सिंह सोंधिया के साथ हुई बदसलूकी ने सियासी माहौल गरमा दिया। इसके अलावा दतिया उपचुनाव में टिकट नहीं मिलने के बाद भावुक हुए पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा के आंसुओं पर भाजपा नेताओं के अलग-अलग बयान भी चर्चा का विषय बने रहे।

    धार जिले के राजगढ़ में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का काफिला गुजर रहा था, तभी सड़क किनारे भुट्टा बेच रहे एक दिव्यांग युवक ने उन्हें आवाज लगाई। मुख्यमंत्री ने काफिला रुकवाया, युवक से भुट्टा खरीदा, बातचीत की और उसे 500 रुपए भी दिए। बातचीत के दौरान युवक ने बताया कि उसने मास्टर ऑफ सोशल वर्क की पढ़ाई की है, लेकिन नौकरी नहीं मिलने के कारण उसे भुट्टा बेचने और चाय-पकौड़े की दुकान चलाकर परिवार का पालन-पोषण करना पड़ रहा है। युवक की यह बात सामने आने के बाद बेरोजगारी को लेकर नई बहस शुरू हो गई। कई लोगों ने इसे पढ़े-लिखे युवाओं की मौजूदा स्थिति का उदाहरण बताया, जबकि राजनीतिक हलकों में भी इस घटना की चर्चा होती रही।

    उधर राजगढ़ जिले के नरसिंहगढ़ में एक सरकारी कार्यक्रम के दौरान बड़ा विवाद हो गया। प्रभारी मंत्री चैतन्य काश्यप की मौजूदगी में जिला पंचायत अध्यक्ष और कांग्रेस नेता चंदर सिंह सोंधिया को पहले कार्यक्रम में प्रवेश से रोका गया। बाद में अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद उन्हें अंदर जाने दिया गया, लेकिन इस घटनाक्रम से नाराज होकर उन्होंने मंच के सामने बैठकर विरोध जताया। बाद में जब वह कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे, तभी एक व्यक्ति ने उन्हें थप्पड़ मार दिया। घटना के बाद पुलिस उन्हें थाने ले गई, जबकि कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने थाने का घेराव कर विरोध प्रदर्शन किया। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ।

    इसी बीच दतिया उपचुनाव में टिकट नहीं मिलने के बाद सार्वजनिक मंच पर भावुक हुए पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा को लेकर भाजपा के भीतर भी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं। भाजपा विधायक पन्नालाल शाक्य ने कहा कि वर्ष 2018 में उनका भी टिकट कटा था और तब उनकी आंखों में भी आंसू आए थे, लेकिन किसी ने उनकी चिंता नहीं की। उन्होंने पार्टी के फैसले को उचित बताते हुए कहा कि नए लोगों को अवसर देने के लिए कभी-कभी पुराने नेताओं को पीछे हटना पड़ता है।

    वहीं भाजपा के वरिष्ठ विधायक गोपाल भार्गव ने अलग राय रखते हुए कहा कि राजनीति में सक्रिय व्यक्ति का भविष्य कभी समाप्त नहीं होता। उन्होंने संकेत दिया कि नरोत्तम मिश्रा की राजनीतिक भूमिका आगे भी महत्वपूर्ण रह सकती है। इन बयानों के बाद यह चर्चा तेज हो गई कि भाजपा में नेतृत्व परिवर्तन और भविष्य की रणनीति को लेकर अलग-अलग सोच मौजूद है।

    इधर प्रशासनिक गलियारों में भी नई चर्चाओं ने जोर पकड़ा। नए मुख्य सचिव की नियुक्ति के बाद वरिष्ठ अधिकारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव को लेकर मंत्रालय में हलचल बनी रही। आदेश जारी होने से पहले ही एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा मंत्रालय छोड़ने की तैयारी और बाद में उनकी नई पदस्थापना को लेकर भी चर्चाओं का बाजार गर्म रहा।

    इन तीनों घटनाओं ने एक बार फिर यह दिखाया कि मध्य प्रदेश की राजनीति में जमीनी मुद्दों, राजनीतिक टकराव और सत्ता के भीतर की हलचल लगातार सुर्खियां बटोर रही हैं।

  • पेपर लीक के खिलाफ MP में छात्रों का उबाल, इंदौर से श्योपुर तक सड़कों पर प्रदर्शन; पारदर्शी परीक्षा और कार्रवाई की मांग तेज

    पेपर लीक के खिलाफ MP में छात्रों का उबाल, इंदौर से श्योपुर तक सड़कों पर प्रदर्शन; पारदर्शी परीक्षा और कार्रवाई की मांग तेज


    इंदौर । प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों और दिल्ली में आंदोलनरत छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई के विरोध की आग अब मध्य प्रदेश तक पहुंच गई है। प्रदेश के कई शहरों में छात्रों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया है। इंदौर के टंट्या भील चौराहे पर बड़ी संख्या में युवा धरने पर बैठे हैं। लगातार हो रही बारिश भी उनके हौसलों को डिगा नहीं सकी। प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि जब तक परीक्षा प्रणाली पूरी तरह पारदर्शी नहीं बनाई जाती और पेपर लीक के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

    इंदौर में छात्र हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर सरकार के खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज बुलंद कर रहे हैं। उनका कहना है कि लाखों युवाओं की वर्षों की मेहनत पेपर लीक जैसी घटनाओं से बर्बाद हो जाती है। इसलिए केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस और प्रभावी कार्रवाई की जरूरत है। छात्रों ने निष्पक्ष परीक्षा व्यवस्था और दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग दोहराई।

    उधर, श्योपुर में भी छात्र संगठनों ने बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन किया। “समस्त छात्र शक्ति” के बैनर तले बड़ी संख्या में छात्र पीजी कॉलेज से रैली निकालकर कलेक्ट्रेट पहुंचे। करीब चार किलोमीटर लंबी इस पदयात्रा के दौरान छात्रों ने हाथों में पोस्टर और बैनर लेकर परीक्षा प्रणाली में सुधार तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग उठाई। कलेक्ट्रेट पहुंचकर छात्रों ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा और लगभग दो घंटे तक धरना देकर नारेबाजी की।

    रीवा, उमरिया और बड़वानी सहित अन्य जिलों में भी छात्र अलग-अलग स्थानों पर धरने और प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका कहना है कि पेपर लीक जैसी घटनाओं ने प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। छात्रों का आरोप है कि मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है, इसलिए सरकार को दोषियों के खिलाफ त्वरित और कठोर कार्रवाई करनी चाहिए।

    प्रदर्शनकारी युवाओं ने यह भी कहा कि केवल जांच बैठाने से समस्या का समाधान नहीं होगा। परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी बनाने के लिए मजबूत कानून, तकनीकी निगरानी और जवाबदेही तय करना जरूरी है। छात्रों का कहना है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में ऐसे आंदोलन और व्यापक रूप ले सकते हैं।

    प्रदेशभर में बढ़ते छात्र आंदोलनों ने साफ कर दिया है कि युवाओं का धैर्य अब जवाब देने लगा है। प्रतियोगी परीक्षाओं में निष्पक्षता और पारदर्शिता की मांग को लेकर उठी यह आवाज अब सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं रही, बल्कि मध्य प्रदेश के कई जिलों में भी आंदोलन का रूप ले चुकी है।