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  • मुरैना में रफ्तार का कहर: यात्री बस ने खड़े ई-रिक्शा को मारी टक्कर, पहिया चढ़ने से महिला की दर्दनाक मौत; एक ही परिवार के 5 लोग घायल

    मुरैना में रफ्तार का कहर: यात्री बस ने खड़े ई-रिक्शा को मारी टक्कर, पहिया चढ़ने से महिला की दर्दनाक मौत; एक ही परिवार के 5 लोग घायल


    मुरैना। मध्य प्रदेश के मुरैना जिले में सोमवार सुबह करीब 10 बजे नेशनल हाईवे 552 पर एक दिल दहला देने वाला हादसा हो गया। माता बसैया थाना क्षेत्र के खैरा मोड़ पर एक तेज रफ्तार यात्री बस ने सड़क किनारे खड़े ई-रिक्शा को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि ई-रिक्शा में बैठी महिला उछलकर सड़क पर गिर गई और बस का पिछला टायर उसके ऊपर से निकल गया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। हादसे में मृतिका के बेटे सहित परिवार के पांच अन्य सदस्य गंभीर रूप से घायल हुए हैं।

    खड़े रिक्शे पर काल बनकर आई बस प्राप्त जानकारी के अनुसार, सुनीता प्रजापति पत्नी पप्पू प्रजापति अपने परिवार के साथ ई-रिक्शा में सवार होकर कहीं जा रही थीं। खैरा मोड़ के पास ई-रिक्शा साइड में खड़ा हुआ था, तभी मुरैना से अंबाह की ओर जा रही ‘शीतला बस’ क्रमांक MP06 P 0524 के चालक ने लापरवाही से वाहन चलाते हुए रिक्शे को टक्कर मार दी। सुनीता प्रजापति सड़क पर गिर गईं और बस का पहिया उनके ऊपर से गुजर गया।

    परिवार के 5 सदस्य जिला अस्पताल में भर्ती हादसे में ई-रिक्शा में सवार अन्य लोग सड़क पर बिखर गए और उन्हें गंभीर चोटें आईं। घायलों में मृतिका का 26 वर्षीय बेटा लवकुश भी शामिल है। अन्य घायलों की पहचान इस प्रकार है: शुभम 18 वर्ष, अर्चना पत्नी मांगी लाल गौर 40 वर्ष, मणि गौर पुत्र दाताराम गौर 45 वर्ष ,मुन्नी पत्नी दाताराम गौर 60 वर्ष , लवकुश पुत्र पप्पू प्रजापति 26 वर्ष सभी घायलों को तत्काल एंबुलेंस की मदद से जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ उनका उपचार जारी है।

    बस छोड़कर फरार हुआ चालक हादसे के तुरंत बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई। ग्रामीणों को इकट्ठा होते देख बस चालक मौके पर ही बस छोड़कर फरार हो गया। माता बसैया थाना प्रभारी एसआई अरुण कुशवाहा ने बताया कि पुलिस ने बस को जब्त कर थाने में रखवा लिया है। मृतिका के शव का पंचनामा बनाकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पुलिस ने आरोपी चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी है।

  • इंदौर में रैपिडो चालक की दरिंदगी: नाबालिग को झांसा देकर फ्लैट में ले गया, फिर किया दुष्कर्म; पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज

    इंदौर में रैपिडो चालक की दरिंदगी: नाबालिग को झांसा देकर फ्लैट में ले गया, फिर किया दुष्कर्म; पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज


    इंदौर। मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में मानवता को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ एक रैपिडो बाइक चालक ने राजवाड़ा खरीदारी करने जा रही एक नाबालिग लड़की को अपनी हवस का शिकार बनाया। आरोपी ने न केवल सुरक्षा के भरोसे को तोड़ा, बल्कि नाबालिग को सस्ते कपड़ों का लालच देकर सुनसान फ्लैट पर ले गया और उसके साथ दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया। पुलिस ने इस मामले में कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है।

    राजवाड़ा जाने के लिए बुक की थी बाइक पीड़िता ने पुलिस को बताया कि वह खरीदारी करने के लिए राजवाड़ा जाना चाहती थी, जिसके लिए उसने मोबाइल ऐप के माध्यम से रैपिडो बाइक बुक की थी। चालक उसे राजवाड़ा तो ले गया, लेकिन वहां उसने पीड़िता को अपनी बातों के जाल में फंसाना शुरू कर दिया। आरोपी ने नाबालिग से कहा कि वह एक ऐसी जगह जानता है जहाँ बहुत ही सस्ते दामों पर अच्छे कपड़े मिलते हैं। मासूम लड़की उसकी बातों में आ गई।

    परदेसीपुरा ले जाकर किया दुष्कर्म आरोपी चालक नाबालिग को राजवाड़ा से परदेसीपुरा स्थित अपने एक कमरे पर ले गया। वहां पहुँचते ही आरोपी ने अपना असली रंग दिखाया और पीड़िता के साथ जबरदस्ती की। डरी-सहमी नाबालिग जब बदहवास हालत में अपने घर पहुँची और परिजनों को आपबीती सुनाई, तो परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई। तत्काल रावजी बाजार थाने पहुँचकर शिकायत दर्ज कराई गई।

    पुलिस की तलाश और तकनीक का सहारा रावजी बाजार पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल अज्ञात आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट की गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया है। पुलिस की टीमें अब दो स्तरों पर काम कर रही हैं डिजिटल फुटप्रिंट: रैपिडो ऐप से उस समय की गई बुकिंग और चालक की आईडी की जानकारी निकाली जा रही है।

    CCTV फुटेज: राजवाड़ा से लेकर परदेसीपुरा तक के पूरे रूट के कैमरों को खंगाला जा रहा है ताकि बाइक नंबर और आरोपी के चेहरे की स्पष्ट पहचान हो सके। यह घटना उन हजारों महिलाओं और लड़कियों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा करती है जो रोजाना निजी ट्रांसपोर्ट एप्स का इस्तेमाल करती हैं। पुलिस ने जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार करने का दावा किया है।

  • MP में ठंड और बारिश का 'डबल अटैक': 20 जिलों में घने कोहरे का पहरा, 2 फरवरी तक बिगड़ा रहेगा मौसम का मिजाज

    MP में ठंड और बारिश का 'डबल अटैक': 20 जिलों में घने कोहरे का पहरा, 2 फरवरी तक बिगड़ा रहेगा मौसम का मिजाज


    भोपाल । मध्य प्रदेश में कुदरत के दोहरे रंग देखने को मिल रहे हैं। एक तरफ जहाँ उत्तर भारत से आ रही बर्फीली हवाओं ने ठिठुरन बढ़ा दी है, वहीं दूसरी ओर एक शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से प्रदेश के बड़े हिस्से में बारिश का खतरा मंडरा रहा है। मौसम विभाग IMD ने चेतावनी जारी की है कि अगले तीन दिनों तक मध्य प्रदेश के आसमान पर बादलों का पहरा रहेगा और कई जिलों में गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं।

    अगले 24 घंटे: 14 जिलों में बारिश का अलर्ट मौसम केंद्र भोपाल के अनुसार, स्ट्रॉन्ग वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के प्रभाव से अगले 24 घंटों के भीतर प्रदेश के 14 जिलों में हल्की से मध्यम बारिश होने की प्रबल संभावना है। विशेष रूप से ग्वालियर, मुरैना, दतिया, भिंड, श्योपुर, शिवपुरी, अशोकनगर और गुना जैसे उत्तरी बेल्ट के साथ-साथ विदिशा, सागर, निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर में मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी किया है। यहाँ बारिश के साथ कहीं-कहीं ओलावृष्टि की स्थिति भी बन सकती है।

    कोहरे की सफेद चादर में लिपटे 20 जिले बारिश की चेतावनी के साथ ही प्रदेश के उत्तरी और पूर्वी हिस्सों में घने कोहरे ने जनजीवन प्रभावित कर दिया है। आज सुबह ग्वालियर-चंबल संभाग समेत रीवा, सागर और शहडोल संभाग के करीब 20 जिलों में दृश्यता (Visibility) बेहद कम रही। ग्वालियर, दतिया और छतरपुर जैसे जिलों में तो विजिबिलिटी शून्य तक पहुँच गई, जिससे सड़क यातायात के साथ-साथ रेल और हवाई सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं। भोपाल और इंदौर जैसे बड़े शहरों में भी सुबह के वक्त धुंध का असर देखा गया।

    2 फरवरी तक राहत के आसार नहीं मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यह स्थिति 2 फरवरी तक लगातार बनी रह सकती है। वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के कारण फिलहाल न्यूनतम तापमान में थोड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे रात की ठंड से आंशिक राहत मिली है, लेकिन दिन के तापमान में गिरावट आने से ‘कोल्ड डे’ जैसी स्थिति बनी हुई है। 2 फरवरी के बाद जैसे ही बादल छंटेंगे, एक बार फिर बर्फीली हवाएं चलेंगी और कड़ाके की ठंड का दूसरा दौर शुरू होगा। प्रशासन ने खराब मौसम और कोहरे को देखते हुए वाहन चालकों को सावधानी बरतने की सलाह दी है।

    मध्य प्रदेश में कुदरत के दोहरे रंग देखने को मिल रहे हैं। एक तरफ जहाँ उत्तर भारत से आ रही बर्फीली हवाओं ने ठिठुरन बढ़ा दी है, वहीं दूसरी ओर एक शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से प्रदेश के बड़े हिस्से में बारिश का खतरा मंडरा रहा है। मौसम विभाग (IMD) ने चेतावनी जारी की है कि अगले तीन दिनों तक मध्य प्रदेश के आसमान पर बादलों का पहरा रहेगा और कई जिलों में गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं।

    अगले 24 घंटे: 14 जिलों में बारिश का अलर्ट मौसम केंद्र भोपाल के अनुसार, स्ट्रॉन्ग वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के प्रभाव से अगले 24 घंटों के भीतर प्रदेश के 14 जिलों में हल्की से मध्यम बारिश होने की प्रबल संभावना है। विशेष रूप से ग्वालियर, मुरैना, दतिया, भिंड, श्योपुर, शिवपुरी, अशोकनगर और गुना जैसे उत्तरी बेल्ट के साथ-साथ विदिशा, सागर, निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर में मौसम विभाग ने येलो अलर्ट जारी किया है। यहाँ बारिश के साथ कहीं-कहीं ओलावृष्टि की स्थिति भी बन सकती है।

    कोहरे की सफेद चादर में लिपटे 20 जिले बारिश की चेतावनी के साथ ही प्रदेश के उत्तरी और पूर्वी हिस्सों में घने कोहरे ने जनजीवन प्रभावित कर दिया है। आज सुबह ग्वालियर-चंबल संभाग समेत रीवा, सागर और शहडोल संभाग के करीब 20 जिलों में दृश्यता (Visibility) बेहद कम रही। ग्वालियर, दतिया और छतरपुर जैसे जिलों में तो विजिबिलिटी शून्य तक पहुँच गई, जिससे सड़क यातायात के साथ-साथ रेल और हवाई सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं। भोपाल और इंदौर जैसे बड़े शहरों में भी सुबह के वक्त धुंध का असर देखा गया।

    2 फरवरी तक राहत के आसार नहीं मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यह स्थिति 2 फरवरी तक लगातार बनी रह सकती है। वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के कारण फिलहाल न्यूनतम तापमान में थोड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे रात की ठंड से आंशिक राहत मिली है, लेकिन दिन के तापमान में गिरावट आने से ‘कोल्ड डे’ जैसी स्थिति बनी हुई है। 2 फरवरी के बाद जैसे ही बादल छंटेंगे, एक बार फिर बर्फीली हवाएं चलेंगी और कड़ाके की ठंड का दूसरा दौर शुरू होगा। प्रशासन ने खराब मौसम और कोहरे को देखते हुए वाहन चालकों को सावधानी बरतने की सलाह दी है।

  • इंदौर की जल त्रासदी: भागीरथपुरा में मौत का तांडव जारी, दूषित पानी ने ली 31वीं जान; वेंटिलेटर पर अब भी थमी हैं साँसें

    इंदौर की जल त्रासदी: भागीरथपुरा में मौत का तांडव जारी, दूषित पानी ने ली 31वीं जान; वेंटिलेटर पर अब भी थमी हैं साँसें


    इंदौर । स्वच्छता में सात बार से देश का सिरमौर रहने वाला इंदौर आज अपनी ही एक बस्ती, भागीरथपुरा, में सिसक रहा है। यहाँ दूषित पेयजल के कारण उपजी त्रासदी रुकने का नाम नहीं ले रही है। शुक्रवार शाम एक और बुजुर्ग की मौत के साथ इस जलजनित बीमारी ने अब तक कुल 31 लोगों को अपना ग्रास बना लिया है। 72 वर्षीय एकनाथ सूर्यवंशी, जो पिछले एक महीने से अस्पताल के बिस्तर पर जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे, अंततः जिंदगी की जंग हार गए। उनकी मृत्यु ने एक बार फिर नगर निगम के दावों और शहर की ‘स्मार्ट’ स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की कलई खोल दी है।

    अस्पताल में अब भी जारी है संघर्ष मृतक एकनाथ सूर्यवंशी के परिजनों के अनुसार, वे लगभग 20 से 25 दिनों तक वेंटिलेटर पर रहे। दूषित पानी के सेवन से शुरू हुए उल्टी-दस्त के मामूली दिखने वाले लक्षणों ने धीरे-धीरे उनके शरीर के महत्वपूर्ण अंगों पर हमला बोल दिया। संक्रमण इतना घातक था कि उनकी किडनी और लिवर ने काम करना बंद कर दिया, जिससे ‘मल्टी ऑर्गन फेलियर’ की स्थिति बन गई। वर्तमान में भी अस्पताल में स्थिति चिंताजनक बनी हुई है; दो मरीज अभी भी जीवन रक्षक प्रणाली वेंटिलेटर और आईसीयू पर हैं, जबकि 8-10 अन्य मरीजों का उपचार जारी है।

    लापरवाही की गंदी नालियाँ और टूटता भरोसा भागीरथपुरा की यह त्रासदी एक प्रशासनिक चूक का भयावह परिणाम है। यहाँ पेयजल की पाइपलाइनों में सीवर और ड्रेनेज का गंदा पानी रिसकर मिल गया। जिस पानी से लोगों की प्यास बुझनी थी, उसी ने उनके घरों में जहर घोल दिया। देखते ही देखते 450 से अधिक लोग संक्रमण की चपेट में आ गए। शुरुआत में मौतों का आंकड़ा कम था, लेकिन संक्रमण के गहरे जख्मों के कारण अब यह संख्या 31 तक जा पहुँची है। हालांकि निगम अब हाईटेक निगरानी की बातें कर रहा है, लेकिन स्थानीय लोगों का आक्रोश चरम पर है। उनका कहना है कि जब अपनों को खो दिया, तब प्रशासन की नींद टूटी है।

    सियासी तापमान और प्रशासनिक कवायद इस मुद्दे ने अब राजनीतिक रंग भी अख्तियार कर लिया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी के दौरे के बाद अब कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार और निगम प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। 3 फरवरी को इंदौर में एक बड़े धरना-प्रदर्शन की चेतावनी दी गई है। दूसरी ओर, नगर निगम आयुक्त और महापौर का दावा है कि प्रभावित क्षेत्र में पानी की आपूर्ति रोक दी गई है और टैंकरों के माध्यम से शुद्ध पेयजल पहुँचाया जा रहा है। सैंपलिंग और टेस्टिंग बढ़ा दी गई है, लेकिन सवाल वही है कि “स्वच्छता के नंबर 1” शहर में ऐसी बुनियादी और घातक चूक हुई ही कैसे यह घटना एक सबक है कि केवल सतही सफाई ही स्वच्छता नहीं है, बल्कि जमीन के नीचे दौड़ती पाइपलाइनों में शुद्धता और सुरक्षा सुनिश्चित करना भी प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

  • सिस्टम की लापरवाही ने ली जान: बैटरी चलित ट्राईसाइकिल बनी 'चलता-फिरता बम', विस्फोट में दिव्यांग की दर्दनाक मौत

    सिस्टम की लापरवाही ने ली जान: बैटरी चलित ट्राईसाइकिल बनी 'चलता-फिरता बम', विस्फोट में दिव्यांग की दर्दनाक मौत


    बैतूल । मध्य प्रदेश के बैतूल जिले से एक ऐसी हृदयविदारक और खौफनाक घटना सामने आई है, जिसने न केवल सुरक्षा मानकों की पोल खोल दी है, बल्कि पूरे प्रशासनिक अमले को कटघरे में खड़ा कर दिया है। सारनी थाना क्षेत्र में एक दिव्यांग को शासन से मिली मदद ही उसकी मौत का कारण बन गई। अपनी ट्राईसाइकिल पर सवार होकर आत्मनिर्भरता की राह पर चलने वाले एक व्यक्ति की, बैटरी में हुए भीषण धमाके के कारण मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।

    धमाके से थर्रा उठा इलाका प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह रूह कंपा देने वाला हादसा बीती रात सारनी के व्यस्तम ‘जय स्तंभ चौक’ के पास घटित हुआ। मृतक सुनील कुमार लोखंडे अपनी तीन पहिया बैटरी चलित साइकिल से गुजर रहे थे, तभी अचानक साइकिल की बैटरी में किसी शक्तिशाली बम की तरह जोरदार विस्फोट हुआ। धमाका इतना तीव्र था कि आसपास के लोग सहम गए। विस्फोट के साथ ही साइकिल ने आग का गोला रूप ले लिया। सुनील को संभलने या वाहन से उतरने का मौका तक नहीं मिला और वे आग की लपटों के बीच बुरी तरह झुलस गए, जिससे उनकी मौके पर ही तड़प-तड़प कर मौत हो गई।

    मेहनतकश शिक्षक की दुखद विदाई मृतक सुनील कुमार लोखंडे की पहचान एक जुझारू व्यक्तित्व के रूप में होती थी। शारीरिक अक्षमता के बावजूद वे समाज पर बोझ नहीं थे; वे लोगों को शिक्षित करने का कार्य करते थे और कड़ी मेहनत कर अपना जीवनयापन कर रहे थे। जिस साइकिल ने उनकी जान ली, वह संभवतः नगर पालिका द्वारा दिव्यांग सहायता योजना के अंतर्गत प्रदान की गई थी। एक शिक्षित और कर्मठ व्यक्ति का इस तरह तकनीक की खामी की भेंट चढ़ जाना बेहद दुखद है।

    सवालों के घेरे में प्रशासन और गुणवत्ता इस हादसे ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या दिव्यांगों को वितरित किए जाने वाले इन उपकरणों की गुणवत्ता की जांच की जाती है? क्या इन बैटरियों के सुरक्षा मानकों (Safety Standards) का नियमित ऑडिट होता है? यदि यह साइकिल नगर पालिका द्वारा दी गई थी, तो क्या इसके रखरखाव के निर्देश दिए गए थे? स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि घटिया क्वालिटी के उपकरणों की आपूर्ति के कारण एक मासूम जान चली गई।

    पुलिस ने फिलहाल मर्ग कायम कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की तकनीकी जांच शुरू कर दी है। क्षेत्रवासी अब इस मामले में उच्च स्तरीय जांच और पीड़ित परिवार के लिए न्याय व मुआवजे की मांग कर रहे हैं।

  • शहडोल में बीज भंडार में भीषण आगजनी: लाखों का धान जलकर खाक, हादसा या लापरवाही? भंडारण व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

    शहडोल में बीज भंडार में भीषण आगजनी: लाखों का धान जलकर खाक, हादसा या लापरवाही? भंडारण व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल


    शहडोल । जिले में किसानों की मेहनत और सरकारी व्यवस्था पर उस वक्त बड़ा सवाल खड़ा हो गया, जब कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत नर्सरहा स्थित बीज भंडार के धान गोदाम में भीषण आग लग गई। आग इतनी भयावह थी कि कुछ ही देर में गोदाम में रखा लाखों रुपये मूल्य का धान जलकर पूरी तरह खाक हो गया। धुएं के घने गुबार और उठती लपटों ने पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बना दिया, वहीं किसानों और स्थानीय लोगों में गहरी चिंता और आक्रोश भी देखने को मिला।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, गुरुवार को अचानक गोदाम से धुआं उठता दिखाई दिया और कुछ ही मिनटों में आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। देखते ही देखते धान से भरी बोरियां आग की चपेट में आ गईं। सूचना मिलते ही दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने का प्रयास शुरू किया गया। घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू तो पा लिया गया, लेकिन तब तक गोदाम में रखा अधिकांश धान नष्ट हो चुका था।

    घटना की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर, एसडीएम सहित अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों ने प्रारंभिक तौर पर नुकसान का आकलन शुरू कर दिया है। प्रशासन का कहना है कि आग लगने के वास्तविक कारणों की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल आग लगने का कारण अज्ञात बताया जा रहा है, लेकिन जिस तरह से आग तेजी से फैली, उसने कई तरह के संदेह पैदा कर दिए हैं।

    इस घटना ने जिले की धान खरीदी और भंडारण व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। उल्लेखनीय है कि हाल ही में शहडोल जिले में धान खरीदी को लेकर कई गड़बड़ियों के मामले सामने आ चुके हैं। कुछ दिन पहले ही धान की बोरियों से पत्थर और कंकड़ निकलने का मामला उजागर हुआ था, जिसने पूरी व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवालिया निशान लगा दिया था। अब बीज भंडार में आग लगने की इस घटना ने संदेह को और गहरा कर दिया है।

    स्थानीय लोगों और किसानों का कहना है कि यदि यह हादसा है तो सुरक्षा इंतजामों में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई, और यदि यह लापरवाही या किसी साजिश का नतीजा है तो इसके पीछे जिम्मेदार कौन है किसानों की चिंता इस बात को लेकर भी है कि जलकर नष्ट हुआ धान आखिर किसका था और इसका असर उनकी भुगतान प्रक्रिया पर तो नहीं पड़ेगा।

    प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दे दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि आगजनी के कारणों की हर पहलू से जांच की जाएगी और यदि किसी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता सामने आती है, तो जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल इस घटना ने न केवल सरकारी भंडारण व्यवस्था की पोल खोल दी है, बल्कि किसानों के भरोसे को भी गहरी ठेस पहुंचाई है।

  • मसीहा बने डिप्टी सीएम: सड़क किनारे तड़प रहे घायल बालक के लिए रुकवाया काफिला, सरकारी वाहन से भेजा अस्पताल

    मसीहा बने डिप्टी सीएम: सड़क किनारे तड़प रहे घायल बालक के लिए रुकवाया काफिला, सरकारी वाहन से भेजा अस्पताल


    भोपाल। राजनीति के व्यस्त गलियारों के बीच मानवता की एक बेहद मार्मिक और प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है। मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री श्री राजेंद्र शुक्ल ने एक सड़क दुर्घटना में घायल बालक की जान बचाकर संवेदनशीलता की अनूठी मिसाल पेश की है। यह वाकया उस समय हुआ जब श्री शुक्ल सागर प्रवास से वापस भोपाल लौट रहे थे। विदिशा-भोपाल मार्ग पर जैसे ही उनकी नजर एक अचेत अवस्था में पड़े बालक पर पड़ी, उन्होंने बिना एक पल की देरी किए तत्काल अपना काफिला रुकवा दिया।

    घटनास्थल पर पहुँचकर उप मुख्यमंत्री ने देखा कि बालक अंकित कुमार यादव गंभीर रूप से घायल है और उसे तत्काल इलाज की आवश्यकता है। एम्बुलेंस का इंतजार करने के बजाय श्री शुक्ल ने अपने सुरक्षा प्रोटोकॉल को किनारे रखा और अपने ही काफिले के ‘फॉलो वाहन’ से बालक को तुरंत निकटतम अस्पताल रवाना किया। इतना ही नहीं, उन्होंने स्वयं संबंधित जिले के प्रशासनिक अधिकारियों और मेडिकल स्टाफ को फोन कर घायल बच्चे के उपचार के लिए विशेष निर्देश दिए।

    उप मुख्यमंत्री की इस तत्परता का सुखद परिणाम यह रहा कि बालक अंकित को ‘गोल्डन ऑवर’ में इलाज मिल सका। डॉक्टरों के अनुसार, समय पर अस्पताल पहुँचने के कारण अब बालक का स्वास्थ्य स्थिर है और उसकी जान खतरे से बाहर है। स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीम अब आगे की चिकित्सकीय प्रक्रिया पूरी कर रही है। सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में उप मुख्यमंत्री के इस कदम की सराहना की जा रही है, जो यह संदेश देता है कि पद और पावर से ऊपर किसी की जान बचाना सबसे बड़ा धर्म है।

  • मां नर्मदा प्रकटोत्सव: कड़ाके की ठंड में भी नहीं डिगी आस्था, बरमान घाट पर उमड़ी श्रद्धालुओं की अपार भीड़

    मां नर्मदा प्रकटोत्सव: कड़ाके की ठंड में भी नहीं डिगी आस्था, बरमान घाट पर उमड़ी श्रद्धालुओं की अपार भीड़


    नरसिंहपुर । मध्यप्रदेश में मां नर्मदा प्रकटोत्सव का पावन पर्व रविवार को पूरे श्रद्धा, आस्था और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। कड़ाके की ठंड के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नजर नहीं आई। नरसिंहपुर जिले के प्रसिद्ध और पवित्र बरमान घाट पर रविवार तड़के से ही नर्मदा भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। श्रद्धालुओं ने मां नर्मदा में आस्था की डुबकी लगाकर पुण्य लाभ अर्जित किया और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।
    नर्मदा जन्मोत्सव को लेकर बरमान घाट पर श्रद्धालुओं की आवाजाही शनिवार रात से ही शुरू हो गई थी। आधी रात के बाद से ही घाट पर भक्तों का सैलाब उमड़ने लगा। जैसे ही सुबह सूर्य की पहली किरण मां नर्मदा के जल पर पड़ी श्रद्धालुओं ने जयकारों के साथ पवित्र स्नान कर पूजा-अर्चना प्रारंभ की। पूरा घाट नर्मदे हर के जयघोष से गूंज उठा।

    कड़ाके की ठंड के बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी। ठंड से बचने के लिए लोग ऊनी कपड़ों में घाट पहुंचे लेकिन स्नान के समय आस्था ने ठंड पर जीत हासिल कर ली। श्रद्धालुओं का कहना था कि मां नर्मदा में स्नान मात्र से तन-मन दोनों पवित्र हो जाते हैं और जीवन के कष्ट दूर होते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बरमान घाट का विशेष महत्व है। कहा जाता है कि इसी स्थान पर सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा ने कठोर तपस्या की थी। यही कारण है कि नर्मदा प्रकटोत्सव के अवसर पर यहां स्नान और पूजन करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। इसी आस्था के चलते आज लाखों की संख्या में श्रद्धालु मां रेवा के दर्शन और पूजन के लिए बरमान घाट पहुंचे।

    घाट पर सुबह से ही धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला शुरू हो गया था। श्रद्धालुओं ने मां नर्मदा की आरती की, दीपदान किया और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। कई श्रद्धालु दूर-दराज के क्षेत्रों से पैदल यात्रा कर यहां पहुंचे। भक्तों का कहना है कि नर्मदा केवल एक नदी नहीं बल्कि जीवनदायिनी मां हैं जिनके दर्शन मात्र से मन को शांति मिलती है। प्रशासन की ओर से भी आयोजन को लेकर व्यापक इंतजाम किए गए थे। सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस बल तैनात रहा, वहीं गोताखोरों की टीम और स्वास्थ्य अमला भी घाट पर मौजूद रहा। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए साफ-सफाई, पेयजल और यातायात व्यवस्था का विशेष ध्यान रखा गया।

    नर्मदा प्रकटोत्सव को लेकर पूरे क्षेत्र में धार्मिक उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला। मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की गई और कई स्थानों पर भंडारे का आयोजन भी किया गया। दोपहर तक घाट पर श्रद्धालुओं का आना-जाना जारी रहने की संभावना है। कुल मिलाकर, मां नर्मदा प्रकटोत्सव ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि आस्था के आगे ठंड, दूरी और कठिनाइयां कोई मायने नहीं रखतीं। मां नर्मदा के प्रति श्रद्धालुओं की भक्ति और विश्वास हर साल इसी तरह बरमान घाट पर उमड़ता रहता है।

  • नेशनल रिकॉर्ड होल्डर देव मीणा के साथ बदसलूकी: टीटीई ने पोल को बताया ‘पाइप’, 5 घंटे स्टेशन पर बैठाया और वसूला जुर्माना

    नेशनल रिकॉर्ड होल्डर देव मीणा के साथ बदसलूकी: टीटीई ने पोल को बताया ‘पाइप’, 5 घंटे स्टेशन पर बैठाया और वसूला जुर्माना


    भोपाल । मध्य प्रदेश के गौरव और देश के उभरते हुए पोल वॉल्टर देव कुमार मीणा को अपनी खेल प्रतिभा के बदले महाराष्ट्र के पनवेल रेलवे स्टेशन पर प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। नेशनल रिकॉर्ड होल्डर खिलाड़ी और उनके साथी कुलदीप यादव को न केवल ट्रेन से उतार दिया गया, बल्कि खेल उपकरण पोल साथ रखने के जुर्म में उन पर भारी जुर्माना भी थोपा गया।

    क्या है पूरा मामला

    17 जनवरी को देव मीणा और कुलदीप यादव महाराष्ट्र में आयोजित ऑल इंडिया इंटर-यूनिवर्सिटी एथलेटिक्स प्रतियोगिता में भाग लेकर भोपाल लौट रहे थे। जब वे पनवेल स्टेशन पर ट्रेन बदल रहे थे तब रेलवे स्टाफ और टीटीई ने उनके पास मौजूद पोल खेल उपकरण को लेकर आपत्ति जताई। टीटीई ने इसे ‘स्टील पाइप’ और असुरक्षित सामान करार देते हुए उन्हें ट्रेन में चढ़ने से रोक दिया।

    मेडल की भी नहीं की कद्र

    देव मीणा ने बताया कि उन्होंने रेलवे स्टाफ को अपनी पहचान बताई, अपने जीते हुए मेडल दिखाए और नेशनल रिकॉर्ड के प्रमाण भी दिए। उन्होंने समझाने की कोशिश की कि वे एथलीट हैं और यह उनका खेल उपकरण है, न कि कोई कबाड़ या पाइप। इसके बावजूद टीटीई का रवैया अड़ियल बना रहा। लगभग 5 घंटे तक दोनों खिलाड़ियों को स्टेशन पर मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी।

    वीडियो बनाकर बयां किया दर्द

    स्टेशन पर रोके जाने के दौरान देव मीणा ने एक वीडियो जारी कर अपना दुख साझा किया। उन्होंने सवाल उठाया, “हम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करते हैं। अगर हमारे जैसे सीनियर एथलीटों के साथ ऐसा बर्ताव हो रहा है, तो छोटे गांवों से आने वाले जूनियर खिलाड़ियों की क्या स्थिति होग अंत में, अपनी यात्रा जारी रखने के लिए दोनों खिलाड़ियों को मजबूरी में 1865 रुपये का जुर्माना भरना पड़ा। जुर्माना भरने के बाद ही उन्हें दूसरी ट्रेन में पोल ले जाने की अनुमति मिली, जिससे न केवल उनका समय बर्बाद हुआ बल्कि उन्हें आर्थिक नुकसान और मानसिक तनाव भी झेलना पड़ा।

    कौन हैं देव मीणा

    19 वर्षीय देव कुमार मीणा मध्य प्रदेश के खातेगांव देवास जिला के रहने वाले हैं। उन्होंने पोल वॉल्ट में नेशनल रिकॉर्ड बनाकर प्रदेश का नाम रोशन किया है और वे भारत के टॉप एथलीटों में शुमार हैं।

  • सीधी में भीषण सड़क हादसा: अनियंत्रित होकर पलटा रेत से भरा हाइवा; क्लीनर की दर्दनाक मौत

    सीधी में भीषण सड़क हादसा: अनियंत्रित होकर पलटा रेत से भरा हाइवा; क्लीनर की दर्दनाक मौत

    सीधी । मध्यप्रदेश में तेज रफ्तार वाहनों का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला सीधी जिले से सामने आया है जहां देर रात रेत से लदा एक अनियंत्रित हाइवा ट्रक पलट गया। इस दर्दनाक हादसे में ट्रक के क्लीनर की मौके पर ही दबने से मौत हो गई जबकि ड्राइवर की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है।

    गांधी चौक इलाके में मची अफरा-तफरी यह हादसा सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र के अंतर्गत गांधी चौक से अस्पताल चौक की ओर जाने वाले मुख्य मार्ग पर हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार रेत से भरा हाइवा ट्रक काफी तेज रफ्तार में था। जैसे ही वह गांधी चौक बाजार क्षेत्र के पास पहुँचा चालक ने वाहन पर से अपना नियंत्रण खो दिया और ट्रक बीच सड़क पर ही पलट गया। टक्कर और पलटने की आवाज इतनी जोरदार थी कि आसपास के लोग सहम गए।

    क्लीनर की मौके पर मौत ड्राइवर की हालत नाजुक हादसे में हाइवा के क्लीनर की ट्रक के नीचे दबने से मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। वहीं ट्रक का ड्राइवर गंभीर रूप से घायल हो गया। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस की टीम मौके पर पहुँची और राहत कार्य शुरू किया। घायल ड्राइवर को तत्काल जिला अस्पताल ले जाया गया जहाँ उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए रीवा रेफर कर दिया गया है।

    जांच में जुटी पुलिस मंगलवार सुबह घटनास्थल पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। पुलिस ने क्रेन की मदद से क्षतिग्रस्त वाहन को सड़क से हटवाया ताकि यातायात सुचारु हो सके। सिटी कोतवाली पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हादसा केवल रफ्तार की वजह से हुआ या वाहन में कोई तकनीकी खराबी आई थी।