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  • सिस्टम की लापरवाही ने ली जान: बैटरी चलित ट्राईसाइकिल बनी 'चलता-फिरता बम', विस्फोट में दिव्यांग की दर्दनाक मौत

    सिस्टम की लापरवाही ने ली जान: बैटरी चलित ट्राईसाइकिल बनी 'चलता-फिरता बम', विस्फोट में दिव्यांग की दर्दनाक मौत


    बैतूल । मध्य प्रदेश के बैतूल जिले से एक ऐसी हृदयविदारक और खौफनाक घटना सामने आई है, जिसने न केवल सुरक्षा मानकों की पोल खोल दी है, बल्कि पूरे प्रशासनिक अमले को कटघरे में खड़ा कर दिया है। सारनी थाना क्षेत्र में एक दिव्यांग को शासन से मिली मदद ही उसकी मौत का कारण बन गई। अपनी ट्राईसाइकिल पर सवार होकर आत्मनिर्भरता की राह पर चलने वाले एक व्यक्ति की, बैटरी में हुए भीषण धमाके के कारण मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।

    धमाके से थर्रा उठा इलाका प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह रूह कंपा देने वाला हादसा बीती रात सारनी के व्यस्तम ‘जय स्तंभ चौक’ के पास घटित हुआ। मृतक सुनील कुमार लोखंडे अपनी तीन पहिया बैटरी चलित साइकिल से गुजर रहे थे, तभी अचानक साइकिल की बैटरी में किसी शक्तिशाली बम की तरह जोरदार विस्फोट हुआ। धमाका इतना तीव्र था कि आसपास के लोग सहम गए। विस्फोट के साथ ही साइकिल ने आग का गोला रूप ले लिया। सुनील को संभलने या वाहन से उतरने का मौका तक नहीं मिला और वे आग की लपटों के बीच बुरी तरह झुलस गए, जिससे उनकी मौके पर ही तड़प-तड़प कर मौत हो गई।

    मेहनतकश शिक्षक की दुखद विदाई मृतक सुनील कुमार लोखंडे की पहचान एक जुझारू व्यक्तित्व के रूप में होती थी। शारीरिक अक्षमता के बावजूद वे समाज पर बोझ नहीं थे; वे लोगों को शिक्षित करने का कार्य करते थे और कड़ी मेहनत कर अपना जीवनयापन कर रहे थे। जिस साइकिल ने उनकी जान ली, वह संभवतः नगर पालिका द्वारा दिव्यांग सहायता योजना के अंतर्गत प्रदान की गई थी। एक शिक्षित और कर्मठ व्यक्ति का इस तरह तकनीक की खामी की भेंट चढ़ जाना बेहद दुखद है।

    सवालों के घेरे में प्रशासन और गुणवत्ता इस हादसे ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या दिव्यांगों को वितरित किए जाने वाले इन उपकरणों की गुणवत्ता की जांच की जाती है? क्या इन बैटरियों के सुरक्षा मानकों (Safety Standards) का नियमित ऑडिट होता है? यदि यह साइकिल नगर पालिका द्वारा दी गई थी, तो क्या इसके रखरखाव के निर्देश दिए गए थे? स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि घटिया क्वालिटी के उपकरणों की आपूर्ति के कारण एक मासूम जान चली गई।

    पुलिस ने फिलहाल मर्ग कायम कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की तकनीकी जांच शुरू कर दी है। क्षेत्रवासी अब इस मामले में उच्च स्तरीय जांच और पीड़ित परिवार के लिए न्याय व मुआवजे की मांग कर रहे हैं।

  • शहडोल में बीज भंडार में भीषण आगजनी: लाखों का धान जलकर खाक, हादसा या लापरवाही? भंडारण व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

    शहडोल में बीज भंडार में भीषण आगजनी: लाखों का धान जलकर खाक, हादसा या लापरवाही? भंडारण व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल


    शहडोल । जिले में किसानों की मेहनत और सरकारी व्यवस्था पर उस वक्त बड़ा सवाल खड़ा हो गया, जब कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत नर्सरहा स्थित बीज भंडार के धान गोदाम में भीषण आग लग गई। आग इतनी भयावह थी कि कुछ ही देर में गोदाम में रखा लाखों रुपये मूल्य का धान जलकर पूरी तरह खाक हो गया। धुएं के घने गुबार और उठती लपटों ने पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बना दिया, वहीं किसानों और स्थानीय लोगों में गहरी चिंता और आक्रोश भी देखने को मिला।

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, गुरुवार को अचानक गोदाम से धुआं उठता दिखाई दिया और कुछ ही मिनटों में आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। देखते ही देखते धान से भरी बोरियां आग की चपेट में आ गईं। सूचना मिलते ही दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने का प्रयास शुरू किया गया। घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू तो पा लिया गया, लेकिन तब तक गोदाम में रखा अधिकांश धान नष्ट हो चुका था।

    घटना की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर, एसडीएम सहित अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों ने प्रारंभिक तौर पर नुकसान का आकलन शुरू कर दिया है। प्रशासन का कहना है कि आग लगने के वास्तविक कारणों की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल आग लगने का कारण अज्ञात बताया जा रहा है, लेकिन जिस तरह से आग तेजी से फैली, उसने कई तरह के संदेह पैदा कर दिए हैं।

    इस घटना ने जिले की धान खरीदी और भंडारण व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। उल्लेखनीय है कि हाल ही में शहडोल जिले में धान खरीदी को लेकर कई गड़बड़ियों के मामले सामने आ चुके हैं। कुछ दिन पहले ही धान की बोरियों से पत्थर और कंकड़ निकलने का मामला उजागर हुआ था, जिसने पूरी व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवालिया निशान लगा दिया था। अब बीज भंडार में आग लगने की इस घटना ने संदेह को और गहरा कर दिया है।

    स्थानीय लोगों और किसानों का कहना है कि यदि यह हादसा है तो सुरक्षा इंतजामों में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई, और यदि यह लापरवाही या किसी साजिश का नतीजा है तो इसके पीछे जिम्मेदार कौन है किसानों की चिंता इस बात को लेकर भी है कि जलकर नष्ट हुआ धान आखिर किसका था और इसका असर उनकी भुगतान प्रक्रिया पर तो नहीं पड़ेगा।

    प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दे दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि आगजनी के कारणों की हर पहलू से जांच की जाएगी और यदि किसी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता सामने आती है, तो जिम्मेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल इस घटना ने न केवल सरकारी भंडारण व्यवस्था की पोल खोल दी है, बल्कि किसानों के भरोसे को भी गहरी ठेस पहुंचाई है।

  • मसीहा बने डिप्टी सीएम: सड़क किनारे तड़प रहे घायल बालक के लिए रुकवाया काफिला, सरकारी वाहन से भेजा अस्पताल

    मसीहा बने डिप्टी सीएम: सड़क किनारे तड़प रहे घायल बालक के लिए रुकवाया काफिला, सरकारी वाहन से भेजा अस्पताल


    भोपाल। राजनीति के व्यस्त गलियारों के बीच मानवता की एक बेहद मार्मिक और प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है। मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री श्री राजेंद्र शुक्ल ने एक सड़क दुर्घटना में घायल बालक की जान बचाकर संवेदनशीलता की अनूठी मिसाल पेश की है। यह वाकया उस समय हुआ जब श्री शुक्ल सागर प्रवास से वापस भोपाल लौट रहे थे। विदिशा-भोपाल मार्ग पर जैसे ही उनकी नजर एक अचेत अवस्था में पड़े बालक पर पड़ी, उन्होंने बिना एक पल की देरी किए तत्काल अपना काफिला रुकवा दिया।

    घटनास्थल पर पहुँचकर उप मुख्यमंत्री ने देखा कि बालक अंकित कुमार यादव गंभीर रूप से घायल है और उसे तत्काल इलाज की आवश्यकता है। एम्बुलेंस का इंतजार करने के बजाय श्री शुक्ल ने अपने सुरक्षा प्रोटोकॉल को किनारे रखा और अपने ही काफिले के ‘फॉलो वाहन’ से बालक को तुरंत निकटतम अस्पताल रवाना किया। इतना ही नहीं, उन्होंने स्वयं संबंधित जिले के प्रशासनिक अधिकारियों और मेडिकल स्टाफ को फोन कर घायल बच्चे के उपचार के लिए विशेष निर्देश दिए।

    उप मुख्यमंत्री की इस तत्परता का सुखद परिणाम यह रहा कि बालक अंकित को ‘गोल्डन ऑवर’ में इलाज मिल सका। डॉक्टरों के अनुसार, समय पर अस्पताल पहुँचने के कारण अब बालक का स्वास्थ्य स्थिर है और उसकी जान खतरे से बाहर है। स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीम अब आगे की चिकित्सकीय प्रक्रिया पूरी कर रही है। सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में उप मुख्यमंत्री के इस कदम की सराहना की जा रही है, जो यह संदेश देता है कि पद और पावर से ऊपर किसी की जान बचाना सबसे बड़ा धर्म है।

  • मां नर्मदा प्रकटोत्सव: कड़ाके की ठंड में भी नहीं डिगी आस्था, बरमान घाट पर उमड़ी श्रद्धालुओं की अपार भीड़

    मां नर्मदा प्रकटोत्सव: कड़ाके की ठंड में भी नहीं डिगी आस्था, बरमान घाट पर उमड़ी श्रद्धालुओं की अपार भीड़


    नरसिंहपुर । मध्यप्रदेश में मां नर्मदा प्रकटोत्सव का पावन पर्व रविवार को पूरे श्रद्धा, आस्था और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। कड़ाके की ठंड के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नजर नहीं आई। नरसिंहपुर जिले के प्रसिद्ध और पवित्र बरमान घाट पर रविवार तड़के से ही नर्मदा भक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। श्रद्धालुओं ने मां नर्मदा में आस्था की डुबकी लगाकर पुण्य लाभ अर्जित किया और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।
    नर्मदा जन्मोत्सव को लेकर बरमान घाट पर श्रद्धालुओं की आवाजाही शनिवार रात से ही शुरू हो गई थी। आधी रात के बाद से ही घाट पर भक्तों का सैलाब उमड़ने लगा। जैसे ही सुबह सूर्य की पहली किरण मां नर्मदा के जल पर पड़ी श्रद्धालुओं ने जयकारों के साथ पवित्र स्नान कर पूजा-अर्चना प्रारंभ की। पूरा घाट नर्मदे हर के जयघोष से गूंज उठा।

    कड़ाके की ठंड के बावजूद श्रद्धालुओं के उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी। ठंड से बचने के लिए लोग ऊनी कपड़ों में घाट पहुंचे लेकिन स्नान के समय आस्था ने ठंड पर जीत हासिल कर ली। श्रद्धालुओं का कहना था कि मां नर्मदा में स्नान मात्र से तन-मन दोनों पवित्र हो जाते हैं और जीवन के कष्ट दूर होते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बरमान घाट का विशेष महत्व है। कहा जाता है कि इसी स्थान पर सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा ने कठोर तपस्या की थी। यही कारण है कि नर्मदा प्रकटोत्सव के अवसर पर यहां स्नान और पूजन करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। इसी आस्था के चलते आज लाखों की संख्या में श्रद्धालु मां रेवा के दर्शन और पूजन के लिए बरमान घाट पहुंचे।

    घाट पर सुबह से ही धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला शुरू हो गया था। श्रद्धालुओं ने मां नर्मदा की आरती की, दीपदान किया और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। कई श्रद्धालु दूर-दराज के क्षेत्रों से पैदल यात्रा कर यहां पहुंचे। भक्तों का कहना है कि नर्मदा केवल एक नदी नहीं बल्कि जीवनदायिनी मां हैं जिनके दर्शन मात्र से मन को शांति मिलती है। प्रशासन की ओर से भी आयोजन को लेकर व्यापक इंतजाम किए गए थे। सुरक्षा व्यवस्था के लिए पुलिस बल तैनात रहा, वहीं गोताखोरों की टीम और स्वास्थ्य अमला भी घाट पर मौजूद रहा। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए साफ-सफाई, पेयजल और यातायात व्यवस्था का विशेष ध्यान रखा गया।

    नर्मदा प्रकटोत्सव को लेकर पूरे क्षेत्र में धार्मिक उत्सव जैसा माहौल देखने को मिला। मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की गई और कई स्थानों पर भंडारे का आयोजन भी किया गया। दोपहर तक घाट पर श्रद्धालुओं का आना-जाना जारी रहने की संभावना है। कुल मिलाकर, मां नर्मदा प्रकटोत्सव ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि आस्था के आगे ठंड, दूरी और कठिनाइयां कोई मायने नहीं रखतीं। मां नर्मदा के प्रति श्रद्धालुओं की भक्ति और विश्वास हर साल इसी तरह बरमान घाट पर उमड़ता रहता है।

  • नेशनल रिकॉर्ड होल्डर देव मीणा के साथ बदसलूकी: टीटीई ने पोल को बताया ‘पाइप’, 5 घंटे स्टेशन पर बैठाया और वसूला जुर्माना

    नेशनल रिकॉर्ड होल्डर देव मीणा के साथ बदसलूकी: टीटीई ने पोल को बताया ‘पाइप’, 5 घंटे स्टेशन पर बैठाया और वसूला जुर्माना


    भोपाल । मध्य प्रदेश के गौरव और देश के उभरते हुए पोल वॉल्टर देव कुमार मीणा को अपनी खेल प्रतिभा के बदले महाराष्ट्र के पनवेल रेलवे स्टेशन पर प्रताड़ना का सामना करना पड़ा। नेशनल रिकॉर्ड होल्डर खिलाड़ी और उनके साथी कुलदीप यादव को न केवल ट्रेन से उतार दिया गया, बल्कि खेल उपकरण पोल साथ रखने के जुर्म में उन पर भारी जुर्माना भी थोपा गया।

    क्या है पूरा मामला

    17 जनवरी को देव मीणा और कुलदीप यादव महाराष्ट्र में आयोजित ऑल इंडिया इंटर-यूनिवर्सिटी एथलेटिक्स प्रतियोगिता में भाग लेकर भोपाल लौट रहे थे। जब वे पनवेल स्टेशन पर ट्रेन बदल रहे थे तब रेलवे स्टाफ और टीटीई ने उनके पास मौजूद पोल खेल उपकरण को लेकर आपत्ति जताई। टीटीई ने इसे ‘स्टील पाइप’ और असुरक्षित सामान करार देते हुए उन्हें ट्रेन में चढ़ने से रोक दिया।

    मेडल की भी नहीं की कद्र

    देव मीणा ने बताया कि उन्होंने रेलवे स्टाफ को अपनी पहचान बताई, अपने जीते हुए मेडल दिखाए और नेशनल रिकॉर्ड के प्रमाण भी दिए। उन्होंने समझाने की कोशिश की कि वे एथलीट हैं और यह उनका खेल उपकरण है, न कि कोई कबाड़ या पाइप। इसके बावजूद टीटीई का रवैया अड़ियल बना रहा। लगभग 5 घंटे तक दोनों खिलाड़ियों को स्टेशन पर मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ी।

    वीडियो बनाकर बयां किया दर्द

    स्टेशन पर रोके जाने के दौरान देव मीणा ने एक वीडियो जारी कर अपना दुख साझा किया। उन्होंने सवाल उठाया, “हम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करते हैं। अगर हमारे जैसे सीनियर एथलीटों के साथ ऐसा बर्ताव हो रहा है, तो छोटे गांवों से आने वाले जूनियर खिलाड़ियों की क्या स्थिति होग अंत में, अपनी यात्रा जारी रखने के लिए दोनों खिलाड़ियों को मजबूरी में 1865 रुपये का जुर्माना भरना पड़ा। जुर्माना भरने के बाद ही उन्हें दूसरी ट्रेन में पोल ले जाने की अनुमति मिली, जिससे न केवल उनका समय बर्बाद हुआ बल्कि उन्हें आर्थिक नुकसान और मानसिक तनाव भी झेलना पड़ा।

    कौन हैं देव मीणा

    19 वर्षीय देव कुमार मीणा मध्य प्रदेश के खातेगांव देवास जिला के रहने वाले हैं। उन्होंने पोल वॉल्ट में नेशनल रिकॉर्ड बनाकर प्रदेश का नाम रोशन किया है और वे भारत के टॉप एथलीटों में शुमार हैं।

  • सीधी में भीषण सड़क हादसा: अनियंत्रित होकर पलटा रेत से भरा हाइवा; क्लीनर की दर्दनाक मौत

    सीधी में भीषण सड़क हादसा: अनियंत्रित होकर पलटा रेत से भरा हाइवा; क्लीनर की दर्दनाक मौत

    सीधी । मध्यप्रदेश में तेज रफ्तार वाहनों का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। ताजा मामला सीधी जिले से सामने आया है जहां देर रात रेत से लदा एक अनियंत्रित हाइवा ट्रक पलट गया। इस दर्दनाक हादसे में ट्रक के क्लीनर की मौके पर ही दबने से मौत हो गई जबकि ड्राइवर की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है।

    गांधी चौक इलाके में मची अफरा-तफरी यह हादसा सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र के अंतर्गत गांधी चौक से अस्पताल चौक की ओर जाने वाले मुख्य मार्ग पर हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार रेत से भरा हाइवा ट्रक काफी तेज रफ्तार में था। जैसे ही वह गांधी चौक बाजार क्षेत्र के पास पहुँचा चालक ने वाहन पर से अपना नियंत्रण खो दिया और ट्रक बीच सड़क पर ही पलट गया। टक्कर और पलटने की आवाज इतनी जोरदार थी कि आसपास के लोग सहम गए।

    क्लीनर की मौके पर मौत ड्राइवर की हालत नाजुक हादसे में हाइवा के क्लीनर की ट्रक के नीचे दबने से मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। वहीं ट्रक का ड्राइवर गंभीर रूप से घायल हो गया। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस की टीम मौके पर पहुँची और राहत कार्य शुरू किया। घायल ड्राइवर को तत्काल जिला अस्पताल ले जाया गया जहाँ उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए रीवा रेफर कर दिया गया है।

    जांच में जुटी पुलिस मंगलवार सुबह घटनास्थल पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। पुलिस ने क्रेन की मदद से क्षतिग्रस्त वाहन को सड़क से हटवाया ताकि यातायात सुचारु हो सके। सिटी कोतवाली पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हादसा केवल रफ्तार की वजह से हुआ या वाहन में कोई तकनीकी खराबी आई थी।

  • ग्वालियर JAH में स्वास्थ्य सेवाएं वेंटिलेटर पर: 700 आउटसोर्स कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल गंदगी और अव्यवस्था के बीच सिसक रहे मरीज

    ग्वालियर JAH में स्वास्थ्य सेवाएं वेंटिलेटर पर: 700 आउटसोर्स कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल गंदगी और अव्यवस्था के बीच सिसक रहे मरीज


    ग्वालियर। ग्वालियर-चंबल अंचल के सबसे बड़े जीवनदायिनी संस्थान जयारोग्य अस्पताल JAH में स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह पटरी से उतर गई हैं। अस्पताल की सुरक्षा सफाई और वार्ड व्यवस्था संभालने वाले लगभग 700 आउटसोर्स कर्मचारी मंगलवार से अनिश्चितकालीन कामबंद हड़ताल पर चले गए हैं। ‘एजाइल सिक्युरिटी फोर्स प्राइवेट लिमिटेड’ के अधीन काम करने वाले इन कर्मचारियों के अचानक मोर्चे पर उतरने से अस्पताल परिसर में कचरे के ढेर लग गए हैं वहीं स्ट्रेचर और वार्ड बॉय न मिलने के कारण मरीजों के परिजन उन्हें हाथों में उठाकर ले जाने को मजबूर हैं।

    वादाखिलाफी से फूटा कर्मचारियों का गुस्सा हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों का आरोप है कि एजाइल कंपनी उनके हकों का शोषण कर रही है। प्रदर्शनकारियों ने बताया कि उन्हें समय पर वेतन नहीं दिया जा रहा है और पिछले 2 साल का एरियर भी बकाया है। कंपनी द्वारा बोनस का भुगतान भी नहीं किया गया है। कर्मचारियों के अनुसार नवंबर 2025 में भी उन्होंने इन्हीं मांगों को लेकर आंदोलन किया था तब कंपनी प्रबंधन ने लिखित आश्वासन देकर हड़ताल खत्म करवाई थी। लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी जब वादा पूरा नहीं हुआ तो कर्मचारियों ने एक बार फिर ‘आर-पार’ की लड़ाई का ऐलान कर दिया है।

    अस्पताल की लाइफलाइन ठप मरीजों का बुरा हाल जयारोग्य अस्पताल में रोजाना हजारों की संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुँचते हैं। हड़ताल के कारण सफाईकर्मी सुरक्षा गार्ड वार्ड बॉय स्ट्रेचर बॉय और फार्मेसी कर्मचारियों ने काम छोड़ दिया है। इसका सीधा असर अस्पताल की सफाई व्यवस्था और सुरक्षा पर पड़ा है। ओटी OT और वार्डों में स्ट्रेचर न मिलने से गंभीर मरीजों को शिफ्ट करने में भारी परेशानी आ रही है। सुरक्षा गार्डों की अनुपस्थिति से अस्पताल की व्यवस्थाएं अनियंत्रित हो रही हैं और फार्मेसी काउंटर पर दवाओं के वितरण में भी बाधा आ रही है।

    मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा आंदोलन हड़ताली कर्मचारियों ने दोटूक शब्दों में कहा है कि इस बार वे केवल आश्वासन से नहीं मानेंगे। जब तक वेतन विसंगतियां दूर नहीं होतीं एरियर का भुगतान नहीं किया जाता और बोनस की राशि खाते में नहीं आती तब तक काम बंद रहेगा। दूसरी ओर अस्पताल प्रबंधन वैकल्पिक व्यवस्थाएं जुटाने की कोशिश कर रहा है लेकिन इतनी बड़ी संख्या में कर्मचारियों की कमी को पूरा करना चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। यदि यह गतिरोध जल्द समाप्त नहीं हुआ तो अंचल की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह ठप हो सकती है।

  • जबलपुर संभाग में वाहन फिटनेस का 'संकट': एक एजेंसी के भरोसे हजारों गाड़ियां, दूर-दराज के जिलों से आना पड़ेगा जबलपुर

    जबलपुर संभाग में वाहन फिटनेस का 'संकट': एक एजेंसी के भरोसे हजारों गाड़ियां, दूर-दराज के जिलों से आना पड़ेगा जबलपुर


    जबलपुर । केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय मोर्थ के एक नए आदेश ने जबलपुर संभाग के हजारों वाहन मालिकों और चालकों की रातों की नींद उड़ा दी है। नए निर्देशों के अनुसार, अब व्यावसायिक और सवारी वाहनों की फिटनेस जांच जिला स्तर पर बंद कर दी गई है। अब संभाग के सभी 8 जिलों के वाहनों को फिटनेस सर्टिफिकेट के लिए जबलपुर स्थित एकमात्र ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन पर निर्भर रहना होगा। इस फैसले ने न केवल व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि दूर-दराज के जिलों से आने वाले आवेदकों के लिए यह “जी का जंजाल” बन गया है।

    8 जिलों का बोझ और महज एक टेस्टिंग स्टेशन जबलपुर संभाग के अंतर्गत आने वाले जबलपुर, नरसिंहपुर, सिवनी, बालाघाट, छिंदवाड़ा, कटनी, मंडला और डिंडौरी जैसे जिलों के हजारों वाहनों का जिम्मा अब अकेले जबलपुर की एक निजी एजेंसी के भरोसे है। परेशानी की बात यह है कि वर्तमान में शहर में केवल एक ही एटीएस कार्यशील है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या एक ही केंद्र पर संभाग भर के हजारों वाहनों की वैज्ञानिक और तकनीकी जांच समय पर पूरी हो पाएगी? जानकारों का मानना है कि इस व्यवस्था से भारी भीड़ और काम में देरी होने के कारण भ्रष्टाचार और व्यावहारिक समस्याएं बढ़ना तय है।

    1,000 की फीस और 12,000 का खर्च: वाहन चालकों का फूटा गुस्सा इस नए आदेश का सबसे ज्यादा असर वाहन संचालकों की जेब पर पड़ रहा है। बालाघाट, छिंदवाड़ा और डिंडौरी जैसे जिलों से जबलपुर की दूरी 200 से 210 किलोमीटर तक है। वाहन चालकों का कहना है कि फिटनेस सर्टिफिकेट की निर्धारित सरकारी फीस भले ही महज 1,000 रुपये के आसपास हो, लेकिन लंबी दूरी तय कर जबलपुर आने-जाने का खर्च कमर तोड़ रहा है। ईंधन डीजल , ड्राइवर-खलासी का भत्ता, रास्ते में रुकने का खर्च और एक-दो दिन का समय बर्बाद होने के कारण कुल खर्च 10 से 12 हजार रुपये तक पहुँच रहा है।

    व्यवसाय पर संकट और सुरक्षा के दावे एक तरफ सरकार का तर्क है कि ऑटोमेटेड टेस्टिंग से वाहनों की जांच अधिक सटीक होगी और सड़क हादसों में कमी आएगी, लेकिन दूसरी तरफ जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। वाहन संचालकों का कहना है कि यदि सरकार को यह व्यवस्था लागू ही करनी थी, तो पहले प्रत्येक जिले में एटीएस केंद्र स्थापित किए जाने चाहिए थे। बिना तैयारी के थोपे गए इस नियम से परिवहन व्यवसाय से जुड़े लोग खासे परेशान हैं। फिलहाल, जबलपुर के एकमात्र एटीएस पर वाहनों का दबाव बढ़ना शुरू हो गया है, जिससे आने वाले दिनों में आवेदकों की परेशानी और बढ़ने की आशंका है।

  • MP में कांग्रेस विधायक के विवादित बयान से सियासी तूफान, शिवराज चौहान बोले- बेटियां देवी स्वरूप, ऐसी सोच शर्मनाक

    MP में कांग्रेस विधायक के विवादित बयान से सियासी तूफान, शिवराज चौहान बोले- बेटियां देवी स्वरूप, ऐसी सोच शर्मनाक


    भोपाल। मध्य प्रदेश में कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया द्वारा लड़कियों को लेकर दिए गए विवादित बयान ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी हलचल मचा दी है। उनके बयान को लेकर चौतरफा विरोध शुरू हो गया है। केंद्रीय कृषि मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस बयान की कड़ी निंदा करते हुए इसे शर्मनाक और अस्वीकार्य बताया।

    शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि बेटियां उनके लिए केवल संतान नहीं, बल्कि देवी का स्वरूप हैं।

    उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस तरह की सोच समाज को गलत दिशा में ले जाती है और महिलाओं के खिलाफ अपराधों को बढ़ावा देने का काम करती है।

    दरअसल, कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया ने एक सार्वजनिक बयान में कहा था कि “अगर खूबसूरत लड़की दिख जाए तो दिमाग विचलित हो सकता है और रेप जैसी घटनाएं हो सकती हैं।” इस बयान के सामने आने के बाद विपक्ष, महिला संगठनों और आम लोगों में गहरा आक्रोश देखने को मिल रहा है। लोगों का कहना है कि इस तरह के बयान अपराधियों को मानसिक रूप से ठहराने का प्रयास हैं।

    बेटियां मां दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती का रूप” शिवराज
    भोपाल में मीडिया से बातचीत करते हुए शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि हमारी संस्कृति में बेटियों को मां दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती का स्वरूप माना गया है। उन्होंने कहा कि बेटियों को जाति, धर्म या किसी भी वर्ग में बांटना गलत है। सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा क्या अब बेटियों को भी बांटने की कोशिश की जाएगी?

    उन्होंने यह भी कहा कि बेटियां पूजा के लिए हैं, उन पर टिप्पणी नहीं की जानी चाहिए। महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान केवल सरकार नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है।

    दुष्कर्म पीड़िता को आर्थिक सहायता का ऐलान
    शिवराज सिंह चौहान ने हाल ही में अपने संसदीय क्षेत्र में हुई एक मासूम बेटी के साथ दुष्कर्म की घटना पर गहरा दुख और आक्रोश व्यक्त किया।

    उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं समाज को शर्मसार करती हैं। उन्होंने बताया कि पीड़िता के खाते में तत्काल 10 लाख रुपये जमा किए जाएंगे और उसकी पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। साथ ही, पीड़िता के बालिग होने पर उसे 28 लाख रुपये की अतिरिक्त सहायता दी जाएगी, ताकि उसका भविष्य सुरक्षित हो सके।

    बीजेपी का कांग्रेस पर तीखा हमला
    इस मामले में बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने भी कांग्रेस विधायक पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर लिखा कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस विधायक का बयान बेहद चौंकाने वाला है और इसमें रेप जैसी जघन्य घटना को धार्मिक संदर्भों से जोड़ने की कोशिश की गई है।

    पूनावाला ने कांग्रेस नेता प्रियंका वाड्रा से सवाल किया कि क्या वह इस तरह के बयान से सहमत हैं।

    महिला सुरक्षा पर फिर तेज हुई बहस
    फूल सिंह बरैया का यह बयान ऐसे समय में सामने आया है जब देशभर में महिलाओं के खिलाफ अपराधों को लेकर संवेदनशीलता चरम पर है। इस बयान ने एक बार फिर महिला सुरक्षा, नेताओं की जिम्मेदारी और समाज की सोच पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    इस पूरे विवाद ने साफ कर दिया है कि महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा को लेकर समाज किसी भी तरह की असंवेदनशील टिप्पणी को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है। शिवराज सिंह चौहान ने दो टूक कहा कि बेटियां सिर्फ परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी हैं और उनके सम्मान से कोई समझौता नहीं किया जा सकता।

  • एमपी में निगम-मंडलों की नियुक्तियों पर मंथन तेज: पूर्व मंत्री-विधायक रेस में इसी महीने हो सकता है फैसला

    एमपी में निगम-मंडलों की नियुक्तियों पर मंथन तेज: पूर्व मंत्री-विधायक रेस में इसी महीने हो सकता है फैसला

    भोपाल। मध्य प्रदेश में निगम मंडल प्राधिकरण और आयोगों में लंबे समय से अटकी राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। माना जा रहा है कि प्रदेश में जल्द ही इन नियुक्तियों का ऐलान किया जा सकता है। हाल ही में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के उस बयान के बाद उम्मीदों को और बल मिला है जिसमें उन्होंने निगम-मंडलों की सूची तैयार होने और शीघ्र नियुक्तियां किए जाने की बात कही थी। इसके बाद से ही सत्ता और संगठन से जुड़े कई नेता सक्रिय हो गए हैं। सूत्रों के अनुसार इसी महीने निगम-मंडलों के अध्यक्ष-उपाध्यक्ष प्राधिकरण और विभिन्न आयोगों में राजनीतिक नियुक्तियां की जा सकती हैं। इसे लेकर पार्टी के भीतर कवायद और लॉबिंग तेज हो गई है। कई ऐसे नेता जिन्हें हालिया चुनावों या राज्यसभा में मौका नहीं मिल पाया अब निगम-मंडलों के जरिए संगठन और सरकार में भूमिका की उम्मीद लगाए बैठे हैं।

    बताया जा रहा है कि पूर्व मंत्री लालसिंह आर्य जिन्हें राज्यसभा में स्थान नहीं मिल सका निगम या प्राधिकरण में अहम जिम्मेदारी दी जा सकती है। इसके अलावा पूर्व कैबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त विनोद गोटिया पूर्व मंत्री अरविंद भदौरिया और कांग्रेस से बीजेपी में आए पूर्व मंत्री रामनिवास रावत के नाम भी चर्चा में हैं। पार्टी संगठन इन नेताओं को समायोजित करने की रणनीति पर काम कर रहा है। पूर्व मंत्रियों की सूची यहीं खत्म नहीं होती। सूत्रों के मुताबिक पूर्व मंत्री उमाशंकर गुप्ता कमल पटेल रामपाल सिंह इमरती देवी भी दावेदारी पेश कर रहे हैं। वहीं अंचल सोनकर संजय शुक्ला अलकेश आर्य और कलसिंह भाबर जैसे नेताओं के नाम भी संभावित सूची में बताए जा रहे हैं। संगठनात्मक संतुलन क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखकर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

    पूर्व मंत्रियों के साथ-साथ मौजूदा और पूर्व विधायकों को भी निगम-मंडलों में जिम्मेदारी मिलने की संभावना है। इस रेस में विधायक अजय बिश्नोई अर्चना चिटनीस शैलेंद्र जैन प्रदीप लारिया और पूर्व विधायक ध्रुव नारायण सिंह के नाम सामने आ रहे हैं। माना जा रहा है कि जिन विधायकों को संगठन या सरकार में फिलहाल कोई बड़ा पद नहीं मिला है उन्हें निगम-मंडलों के जरिए संतुलित किया जा सकता है।गौरतलब है कि फरवरी 2024 में प्रदेश सरकार ने 46 निगम-मंडलों की राजनीतिक नियुक्तियां रद्द कर दी थीं। इसके बाद से ही नए सिरे से नियुक्तियों का इंतजार किया जा रहा था। अब जब पार्टी नेतृत्व की ओर से संकेत मिल चुके हैं तो माना जा रहा है कि जल्द ही तस्वीर साफ हो जाएगी। आने वाले दिनों में घोषित होने वाली यह सूची मध्य प्रदेश की राजनीति में नए समीकरण भी तय कर सकती है।