Tag: MP weather update

  • अर्नब’ चक्रवात से MP में बदला मौसम, सतना-कटनी में बारिश से ठंड की दस्तक, करवा चौथ पर चांद दिखने में हो सकती है परेशानी

    अर्नब’ चक्रवात से MP में बदला मौसम, सतना-कटनी में बारिश से ठंड की दस्तक, करवा चौथ पर चांद दिखने में हो सकती है परेशानी


    भोपाल। बंगाल की खाड़ी में उठे चक्रवाती तूफान अर्नब का असर मध्य प्रदेश के मौसम पर दिखाई देने लगा है। प्रदेश के कई हिस्सों में बादल छाने के साथ बारिश और बूंदाबांदी का दौर शुरू हो गया है। बुधवार को सतना और कटनी में बारिश दर्ज की गई जबकि महाकौशल और विंध्य क्षेत्र में अगले तीन दिनों तक मौसम बदला रहने के आसार हैं। दूसरी ओर धार और झाबुआ में न्यूनतम तापमान में गिरावट आने से सुबह के समय ठंड बढ़ गई है। मौसम विभाग ने प्रदेश के अलग-अलग जिलों में बारिश आंधी और गरज चमक की संभावना जताई है। ऐसे में अक्टूबर के आखिरी दिनों में लोगों को एक साथ बारिश ठंड और गर्मी के बदलते मिजाज का सामना करना पड़ सकता है।

    मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक बुधवार को सीधी सिंगरौली अनूपपुर डिंडौरी मंडला और बालाघाट में भारी बारिश की संभावना है। इसके अलावा भोपाल नर्मदापुरम भिंड दतिया रायसेन सीहोर विदिशा जबलपुर छिंदवाड़ा सिवनी नरसिंहपुर पांढुर्णा रीवा मऊगंज मैहर शहडोल उमरिया सागर पन्ना दमोह छतरपुर टीकमगढ़ और निवाड़ी में हल्की बारिश या बूंदाबांदी हो सकती है। अगले चार दिनों तक प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश के साथ तेज हवा और गरज चमक का दौर देखने को मिल सकता है।

    धार में तापमान में अचानक गिरावट ने मौसम का मिजाज बदल दिया है। यहां न्यूनतम तापमान मंगलवार को 15.4 डिग्री सेल्सियस था जो बुधवार सुबह घटकर 11.2 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। इस तरह केवल एक दिन में पारे में 4.2 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई। मंगलवार को जिले का अधिकतम तापमान 32.9 डिग्री सेल्सियस रहा था। मौसम में बदलाव के चलते दिन के तापमान में भी गिरावट आने की संभावना है। सुबह के समय तेज हवाओं और कम तापमान के कारण लोगों को ठंड का एहसास होने लगा है।

    विंध्य क्षेत्र में भी आसमान पर बादलों का डेरा है। सतना में बुधवार सुबह से बादल छाए रहे जबकि मैहर में कुछ देर के लिए बूंदाबांदी हुई। यहां करीब पांच से सात मिनट तक बारिश होने से बाजार में मौजूद लोगों को अपना सामान बचाना पड़ा। सब्जी मंडी में दुकानदार सामान को भीगने से बचाते नजर आए। मौसम विभाग के अनुसार 28 से 30 अक्टूबर के बीच विंध्य क्षेत्र में बादल छाए रह सकते हैं और कुछ स्थानों पर बारिश होने की संभावना है। मंगलवार को सतना में अधिकतम तापमान 31.4 डिग्री और न्यूनतम तापमान 18.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था।

    झाबुआ में भी सुबह की ठंड बढ़ गई है। जिले में न्यूनतम तापमान 27 अक्टूबर को 17.6 डिग्री सेल्सियस था जो 28 अक्टूबर को गिरकर 14.4 डिग्री सेल्सियस रह गया। एक दिन में 3.2 डिग्री की गिरावट दर्ज की गई। हालांकि दोपहर में तापमान 34 से 36 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने के कारण गर्मी महसूस हो रही है। मौसम विभाग ने 30 अक्टूबर को हल्की बारिश गरज चमक बिजली गिरने और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चलने की संभावना जताई है।

    मौसम में यह बदलाव करवा चौथ के त्योहार पर भी असर डाल सकता है। 29 अक्टूबर को चक्रवात का प्रभाव बढ़ने की संभावना के बीच प्रदेश के कई हिस्सों में बादल बारिश और तेज हवाएं चल सकती हैं। मौसम विभाग ने 11 जिलों में अति भारी और नौ जिलों में भारी बारिश की चेतावनी दी है जबकि अन्य जिलों में हल्की बारिश या बूंदाबांदी हो सकती है। ऐसे में करवा चौथ का व्रत रखने वाली महिलाओं को चंद्रमा के दर्शन के लिए इंतजार करना पड़ सकता है। बादल घने रहने पर चांद दिखाई देने में परेशानी हो सकती है। 30 और 31 अक्टूबर को भी प्रदेश में मौसम पूरी तरह साफ होने की संभावना नहीं है। लोगों को मौसम के ताजा पूर्वानुमान पर नजर रखने और बारिश व तेज हवाओं के दौरान सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

  • मध्य प्रदेश में मौसम का बदला मिजाज, कई जिलों में बारिश से गिरा तापमान, 20 अक्टूबर के बाद बढ़ेगी रात की ठंडक

    मध्य प्रदेश में मौसम का बदला मिजाज, कई जिलों में बारिश से गिरा तापमान, 20 अक्टूबर के बाद बढ़ेगी रात की ठंडक


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश में मानसून की विदाई के बाद भी बारिश का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। प्रदेश के कई हिस्सों में पिछले 72 घंटे से आंधी और बारिश का दौर जारी है। ग्वालियर-चंबल संभाग के जिलों में भी मौसम का असर देखने को मिल रहा है। लगातार बदलते मौसम के कारण दिन के तापमान में 2.8 डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई है। मौसम विभाग ने रविवार को प्रदेश के 15 जिलों में बारिश की संभावना जताते हुए अलर्ट जारी किया है। वहीं अनुमान है कि 20 अक्टूबर के बाद रात के तापमान में गिरावट के साथ ठंडक बढ़ने लगेगी।
    मौसम केंद्र भोपाल के मुताबिक रविवार को नीमच मंदसौर श्योपुर शिवपुरी गुना अशोकनगर निवाड़ी टीकमगढ़ छतरपुर पन्ना मऊगंज सीधी सिंगरौली सिवनी और बालाघाट में बारिश हो सकती है। कुछ स्थानों पर तेज हवाओं और गरज-चमक के साथ मौसम बदलने की संभावना है। पश्चिमी और उत्तरी मध्य प्रदेश में सक्रिय चक्रवाती परिसंचरण के प्रभाव से इंदौर उज्जैन ग्वालियर चंबल और जबलपुर संभाग के कई जिलों में मौसम प्रभावित हुआ है। शुक्रवार और शनिवार को भी इन क्षेत्रों में बारिश दर्ज की गई थी। बड़वानी जिले के सेंधवा सीहोर और पीथमपुर में भी पानी गिरा जबकि रीवा और सागर संभाग के कई इलाकों में बादल छाए रहे।
    मौसम विभाग के अनुसार 18 और 19 अक्टूबर को प्रदेश के कुछ जिलों में आंधी और बारिश का दौर जारी रह सकता है। इसके बाद मौसम में बदलाव आने की संभावना है। 20 अक्टूबर के बाद रात के तापमान में गिरावट होने से ठंडक बढ़ सकती है। अक्टूबर में दिन के समय गर्मी रात में हल्की ठंडक और बीच-बीच में बारिश का मौसम देखने को मिलता है। इस बार भी प्रदेश में मौसम का यही मिला-जुला रूप दिखाई दे रहा है।
    गौर करने वाली बात यह है कि मध्य प्रदेश से दक्षिण-पश्चिम मानसून 3 अक्टूबर को ही लौट चुका है। इसके बावजूद नए मौसमी सिस्टम सक्रिय होने से बारिश का दौर दोबारा शुरू हो गया है। मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार पिछले दस वर्षों के आंकड़ों में अक्टूबर के दौरान बारिश गर्मी और ठंड तीनों का असर देखने को मिलता रहा है। इस बार भी प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में ऐसी ही परिस्थितियां बन रही हैं। महीने की शुरुआत में कई जिलों में मौसम साफ हुआ था और तेज धूप निकली थी लेकिन बाद में आंधी और बारिश ने मौसम का मिजाज बदल दिया।
    प्रदेश में बारिश के आंकड़ों पर नजर डालें तो पूर्वी हिस्से के जबलपुर रीवा सागर और शहडोल संभाग में कुल बारिश का आंकड़ा सामान्य से करीब चार प्रतिशत अधिक बताया गया है। हालांकि कुछ जिलों में अब भी बारिश की कमी बनी हुई है। बालाघाट छिंदवाड़ा दमोह जबलपुर नरसिंहपुर पांढुर्णा रीवा सागर और सिवनी में सामान्य के मुकाबले पांच से 21 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई है।
    पश्चिमी मध्य प्रदेश के कई जिलों में भी बारिश की कमी सामने आई है। आलीराजपुर अशोकनगर बड़वानी बैतूल देवास धार हरदा इंदौर झाबुआ खंडवा मंदसौर मुरैना नर्मदापुरम नीमच रायसेन रतलाम सीहोर शाजापुर उज्जैन और विदिशा में सामान्य से नौ से 51 प्रतिशत तक कम बारिश हुई है। वहीं भोपाल राजगढ़ बुरहानपुर खरगोन कटनी मंडला डिंडौरी ग्वालियर गुना दतिया पन्ना छतरपुर टीकमगढ़ निवाड़ी मैहर आगर-मालवा भिंड श्योपुर सिंगरौली सीधी सतना मऊगंज शहडोल उमरिया और अनूपपुर सहित 25 जिलों में बारिश का कोटा पूरा होने की जानकारी दी गई है।
    इस साल जून में सामान्य से 14 प्रतिशत कम बारिश हुई थी। जुलाई की शुरुआत में तेज बारिश के कारण आंकड़ों में सुधार हुआ लेकिन बाद में मानसून के दो बार कमजोर पड़ने से कई दिनों तक बारिश नहीं हुई। मानसून के अंतिम दौर में सक्रिय हुए मजबूत सिस्टम के बावजूद जून की कमी पूरी नहीं हो सकी। इसी वजह से प्रदेश में कुल बारिश सामान्य से करीब चार प्रतिशत कम रही। मध्य प्रदेश में औसत मौसमी बारिश लगभग 37.3 इंच मानी जाती है।
    राजधानी भोपाल सहित इंदौर ग्वालियर जबलपुर और उज्जैन में अक्टूबर के दौरान तापमान में उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। ग्वालियर में इस महीने दिन का तापमान कई बार 38 डिग्री के पार पहुंच चुका है जबकि इंदौर में अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में रात की ठंडक बढ़ने लगती है। जबलपुर और उज्जैन में भी इस महीने बारिश के साथ तापमान में बदलाव का इतिहास रहा है। फिलहाल प्रदेश के कई जिलों में लोगों को गर्मी से राहत मिल रही है लेकिन मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए बारिश और तेज हवाओं की संभावना वाले इलाकों में सतर्क रहने की जरूरत है।

  • तीन दिन की गर्मी और उमस के बाद MP में फिर बारिश का दौर 12 जिलों में अलर्ट बंगाल की खाड़ी के सिस्टम से बदलेगा मौसम

    तीन दिन की गर्मी और उमस के बाद MP में फिर बारिश का दौर 12 जिलों में अलर्ट बंगाल की खाड़ी के सिस्टम से बदलेगा मौसम


    भोपाल। मध्य प्रदेश में तीन दिन के ब्रेक के बाद मानसून एक बार फिर सक्रिय हो गया है। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश के कई हिस्सों में शुक्रवार से बारिश का नया दौर शुरू हो सकता है। जबलपुर रीवा और शहडोल संभाग के कई जिलों में भारी बारिश को लेकर अलर्ट जारी किया गया है। वहीं 12 सितंबर से इंदौर नर्मदापुरम और उज्जैन संभाग में भी बारिश की गतिविधियां बढ़ने का अनुमान है। इससे पिछले कुछ दिनों से गर्मी और उमस झेल रहे लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।

    मौसम विभाग के मुताबिक शुक्रवार को सतना रीवा मऊगंज सीधी मैहर शहडोल डिंडौरी अनूपपुर मंडला बालाघाट सिवनी और छिंदवाड़ा में भारी बारिश हो सकती है। इन जिलों के लिए मौसम को लेकर विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। प्रदेश के बाकी हिस्सों में कहीं धूप तो कहीं हल्की बारिश होने की संभावना है। भोपाल रायसेन सीहोर राजगढ़ विदिशा इंदौर धार आलीराजपुर बुरहानपुर बड़वानी खंडवा खरगोन झाबुआ उज्जैन नीमच मंदसौर देवास रतलाम नर्मदापुरम बैतूल हरदा समेत कई जिलों में मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है।

    पिछले तीन दिनों से प्रदेश में भारी बारिश का दौर थमा हुआ था। इसके चलते कई शहरों में तेज धूप निकलने लगी थी और उमस ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी थी। भोपाल समेत इंदौर उज्जैन ग्वालियर और जबलपुर में भी दिन के समय गर्मी का असर दिखाई दिया। हालांकि अब मौसम का मिजाज फिर बदल रहा है। बंगाल की खाड़ी में बना निम्न दबाव क्षेत्र मानसून ट्रफ और पश्चिमी हिस्से में सक्रिय चक्रवाती परिसंचरण बारिश के लिए अनुकूल परिस्थितियां बना रहे हैं।

    मध्य प्रदेश में इस मानसून सीजन अब तक सामान्य से करीब 8 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। प्रदेश में अब तक करीब 795.3 मिलीमीटर बारिश हुई है जबकि सामान्य तौर पर इस अवधि तक लगभग 862.5 मिलीमीटर बारिश होनी चाहिए थी। यानी प्रदेश में सामान्य से करीब 2.6 इंच कम पानी गिरा है। पूर्वी हिस्से में बारिश की कमी करीब 2 प्रतिशत जबकि पश्चिमी हिस्से में यह कमी करीब 13 प्रतिशत बताई गई है।

    प्रदेश के कई जिलों में बारिश की कमी अभी भी बनी हुई है। वहीं कुछ जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश रिकॉर्ड की गई है। अनूपपुर छतरपुर मैहर मऊगंज निवाड़ी पन्ना सतना शहडोल सीधी सिंगरौली टीकमगढ़ उमरिया समेत कई जिलों में औसत से ज्यादा बारिश दर्ज की गई है। भोपाल बुरहानपुर दतिया गुना ग्वालियर खरगोन राजगढ़ श्योपुर और शिवपुरी जैसे जिलों में भी बारिश सामान्य से अधिक रही है।

    इस सीजन की शुरुआत में जून में बारिश की कमी ने प्रदेश के आंकड़ों को प्रभावित किया था। जून में सामान्य से करीब 14 प्रतिशत कम बारिश हुई थी। इसके बाद जुलाई और अगस्त में अच्छी बारिश होने से स्थिति में सुधार आया। हालांकि मानसून में कई बार ब्रेक आने के कारण जून की कमी पूरी तरह खत्म नहीं हो सकी। अब सितंबर में सक्रिय हो रहे नए सिस्टम से बारिश के आंकड़ों में और सुधार की उम्मीद है।

    भोपाल में भी सितंबर के दौरान बारिश की गतिविधियां बनी रहने की संभावना है। राजधानी में सितंबर महीने की औसत बारिश करीब 7 इंच मानी जाती है। पिछले कई वर्षों में सितंबर के दौरान सामान्य से ज्यादा बारिश भी दर्ज होती रही है। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में मानसून की सक्रियता बढ़ने से प्रदेश के अलग अलग हिस्सों में बारिश का सिलसिला फिर तेज हो सकता है।

  • मध्य प्रदेश में आफत की बारिश! नदियों का जलस्तर बढ़ा, कई इलाकों में पानी घुसने से मचा हड़कंप

    मध्य प्रदेश में आफत की बारिश! नदियों का जलस्तर बढ़ा, कई इलाकों में पानी घुसने से मचा हड़कंप


    मध्य प्रदेश। मध्य प्रदेश में मानसून की सक्रियता के बीच लगातार बारिश ने कई इलाकों में हालात बिगाड़ दिए हैं। प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में तेज बारिश के कारण नदियां और नाले उफान पर हैं, वहीं निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बनने लगी है। कई गांवों का संपर्क प्रभावित हुआ है और नदी किनारे स्थित मंदिरों तथा धार्मिक स्थलों में भी पानी पहुंचने की तस्वीरें सामने आई हैं। बारिश के बढ़ते असर को देखते हुए प्रशासन और आपदा प्रबंधन की टीमें संवेदनशील इलाकों पर नजर बनाए हुए हैं। मौसम के इस बदले मिजाज ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है और नदी-नालों के आसपास रहने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है।

    विदिशा समेत कई जिलों में नदियों के बढ़ते जलस्तर ने प्रशासन की चिंता बढ़ाई है। बेतवा नदी में पानी बढ़ने के बाद नदी किनारे के घाट और आसपास के क्षेत्रों में पानी पहुंचने की स्थिति बनी। कई धार्मिक स्थलों और मंदिरों के आसपास भी जलस्तर बढ़ने से श्रद्धालुओं की आवाजाही प्रभावित हुई। नदी के उफान को देखते हुए प्रशासन की ओर से लोगों को नदी और तेज बहाव वाले इलाकों से दूर रहने की सलाह दी जा रही है। बारिश के दौरान नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने की आशंका बनी रहती है इसलिए स्थानीय लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।

    मंडला और डिंडोरी जैसे जिलों में भी बारिश का असर देखने को मिला है। कई जगह सड़क और पुल-पुलियों के ऊपर से पानी बहने के कारण आवागमन प्रभावित हुआ। ग्रामीण इलाकों में बारिश का पानी खेतों और बस्तियों तक पहुंचने से लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लगातार बारिश के कारण प्रशासन की चुनौती भी बढ़ गई है क्योंकि कई इलाकों में राहत और बचाव कार्य के लिए टीमों को तैयार रखना पड़ रहा है। जलभराव वाले स्थानों पर बिजली व्यवस्था और यातायात को लेकर भी विशेष सतर्कता बरती जा रही है।

    प्रदेश में बारिश के साथ बाढ़ का खतरा इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि कई नदियों का जलस्तर आसपास के जिलों में होने वाली बारिश और बांधों से छोड़े जाने वाले पानी पर भी निर्भर करता है। ऐसे में किसी एक इलाके में बारिश कम होने के बावजूद नदी का पानी बढ़ सकता है। प्रशासन की ओर से लोगों को पुलों पर पानी होने की स्थिति में उसे पार नहीं करने और नदी किनारे पिकनिक या धार्मिक गतिविधियों के लिए जाने से बचने की सलाह दी जा रही है। खासकर बच्चों और बुजुर्गों को ऐसे स्थानों से दूर रखना जरूरी है।

    मौसम विभाग की बारिश संबंधी चेतावनियों के बीच आने वाले दिनों में भी प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। ऐसे में लोगों को स्थानीय प्रशासन की एडवाइजरी पर ध्यान देने और जलभराव वाले रास्तों से बचने की जरूरत है। फिलहाल मध्य प्रदेश में बारिश ने जहां किसानों को राहत दी है वहीं नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए खतरे की स्थिति भी पैदा कर दी है। प्रशासन की निगरानी और लोगों की सतर्कता ही संभावित बाढ़ से होने वाले नुकसान को कम करने में अहम भूमिका निभा सकती है।

  • MP Weather Update: 60 घंटे की बारिश से बदली तस्वीर, नर्मदा-बेतवा उफान पर; डैम के गेट खुले, बड़े तालाब को भरने में बस कुछ फीट बाकी

    MP Weather Update: 60 घंटे की बारिश से बदली तस्वीर, नर्मदा-बेतवा उफान पर; डैम के गेट खुले, बड़े तालाब को भरने में बस कुछ फीट बाकी


    भोपाल । मध्य प्रदेश में पिछले करीब 60 घंटे से लगातार बारिश का दौर जारी है। कई इलाकों में बारिश अब राहत के साथ आफत भी बनती दिखाई दे रही है। प्रदेश की नर्मदा काली सिंध और बेतवा समेत कई प्रमुख नदियां उफान पर हैं। कई जगह नदी नालों का जलस्तर बढ़ने से रास्ते प्रभावित हुए हैं तो कुछ इलाकों में पुल और सड़कें पानी में डूब गई हैं। दूसरी ओर लंबे समय से पानी की कमी और सूखे जैसे हालात से जूझ रहे बांधों में तेजी से पानी पहुंचने लगा है। आगर मालवा के कुंडालिया और उमरिया के जोहिला डैम से पानी छोड़ा जा रहा है। इससे जलस्रोतों में नई उम्मीद जगी है।

    मौसम केंद्र के आंकड़ों के मुताबिक मध्य प्रदेश में अब तक 498.3 मिलीमीटर यानी करीब 19.6 इंच बारिश रिकॉर्ड की जा चुकी है। हालांकि यह सामान्य बारिश के आंकड़े 579.7 मिलीमीटर यानी करीब 22.8 इंच से अभी 3.2 इंच कम है। प्रदेश में अब तक करीब 14 प्रतिशत कम बारिश दर्ज हुई है। इसके बावजूद पिछले दो दिनों से सक्रिय स्ट्रॉन्ग सिस्टम ने प्रदेश के अधिकांश हिस्सों को जमकर भिगो दिया है।

    भोपाल में रुक रुककर हो रही बारिश से शहर का मौसम पूरी तरह बदल गया है। सुबह से बारिश और बादलों के कारण कई इलाकों में धुंध जैसा नजारा देखने को मिला। राजधानी की लाइफलाइन कहे जाने वाले बड़े तालाब में भी लगातार पानी की आवक बनी हुई है। पिछले दो दिनों में बड़े तालाब का जलस्तर करीब तीन फीट बढ़ा है और यह 1663 फीट तक पहुंच गया है। इसकी कुल भराव क्षमता 1666.80 फीट बताई जा रही है। यानी तालाब को अपनी पूरी क्षमता तक पहुंचने में अब करीब चार फीट पानी की जरूरत रह गई है। बारिश का सिलसिला इसी तरह जारी रहा तो बड़े तालाब के जल्द लबालब होने की उम्मीद बढ़ गई है।

    भोपाल के कोलार केरवा और कलियासोत डैम में भी पानी का स्तर बढ़ा है। कोलार डैम का अधिकतम जलस्तर 1516.40 फीट है और मंगलवार दोपहर तक यहां 1496.65 फीट पानी दर्ज किया गया। केरवा डैम में जलस्तर 1652.52 फीट पहुंच चुका है जबकि इसकी क्षमता 1673 फीट है। दो दिनों में केरवा में करीब तीन फीट पानी बढ़ा है। वहीं कलियासोत डैम का जलस्तर 1650.09 फीट तक पहुंच गया है। इसकी कुल क्षमता 1659 फीट है। आने वाले समय में कैचमेंट एरिया में तेज बारिश होने पर इन बांधों में पानी की आवक और बढ़ सकती है।

    बारिश का असर प्रदेश के दूसरे हिस्सों में भी साफ नजर आया। रायसेन के सेमरा स्थित सरकारी स्कूल में कमर तक पानी भर गया। सांची रोड और भोपाल रोड पर बेतवा नदी के छोटे पुल पानी में डूब गए। शिवपुरी में NH-46 पर करीब एक फीट तक बारिश का पानी भरने से यातायात प्रभावित हुआ। इसी जिले में बारिश के पानी से भरे गड्ढे में स्कूल वैन फंस गई और बच्चों ने पत्थर डालकर उसे निकालने की कोशिश की।

    सीहोर में मूसलाधार बारिश के कारण एक मकान पानी से घिर गया और परिवार के फंसने की सूचना पर पुलिस तथा ग्रामीणों ने रेस्क्यू कर सभी को सुरक्षित बाहर निकाला। भोपाल के ईंटखेड़ी इलाके में मंदिर और दुकानों में पानी भर गया। वहीं इच्छावर में श्मशान घाट तक पुल नहीं होने के कारण ग्रामीणों को शव को कंधे पर लेकर नदी पार करनी पड़ी।

    नर्मदा नदी का जलस्तर भी लगातार बढ़ रहा है। कई स्थानों पर नदी उफान पर है और नर्मदा से जुड़े बांधों में पानी की आवक बढ़ी है। इंदिरा सागर और ओंकारेश्वर डैम में भी जलस्तर बढ़ने की खबर है। आगर मालवा के कुंडालिया और उमरिया के जोहिला डैम से पानी छोड़ा जा रहा है। मऊगंज में सेलार नदी के बढ़े जलप्रवाह के कारण करीब 650 फीट की ऊंचाई से गिरती दूधिया जलधारा लोगों के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

    कुल मिलाकर दो दिन पहले तक सूखे जैसे हालात का सामना कर रहे मध्य प्रदेश में बारिश ने तस्वीर काफी हद तक बदल दी है। नदियों और बांधों में बढ़ता पानी जहां किसानों और जलस्रोतों के लिए राहत की खबर है वहीं निचले इलाकों में जलभराव और नदी नालों के बढ़ते जलस्तर ने प्रशासन की चिंता भी बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में बारिश की स्थिति यह तय करेगी कि प्रदेश में जल संकट की चिंता कितनी कम होती है और किन इलाकों में भारी बारिश नई चुनौती बनती है।

  • MP Weather Update: 37 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट, 6 दिन लेट मानसून 25 जून तक देगा दस्तक

    MP Weather Update: 37 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट, 6 दिन लेट मानसून 25 जून तक देगा दस्तक


    मध्यप्रदेश । मध्य प्रदेश में मानसून की देरी अब चिंता का कारण बनती जा रही है। सामान्य तौर पर 15 जून तक प्रदेश में दस्तक देने वाला मानसून इस बार 6 दिन पीछे चल रहा है और मौसम विभाग ने इसके 25 जून तक पहुंचने की संभावना जताई है। मानसून के इंतजार के बीच प्रदेश में प्री-मानसून गतिविधियां जारी हैं, जिसके चलते कई जिलों में आंधी और बारिश का दौर बना हुआ है। रविवार को इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, शिवपुरी, रीवा, शहडोल, सतना, मुरैना, धार, झाबुआ और अलीराजपुर समेत 37 जिलों में आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

    शनिवार को भी प्रदेश के कई हिस्सों में मौसम ने करवट ली। उज्जैन में 2.4 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई, जबकि भोपाल में 1.3 इंच पानी बरसा। इंदौर, ग्वालियर, श्योपुर, सीहोर और धार के पीथमपुर सहित कई इलाकों में तेज बारिश हुई। बारिश और बादलों की वजह से तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई। धार में अधिकतम तापमान 32.8 डिग्री सेल्सियस रहा, जबकि भोपाल में 33.4 और इंदौर में 35.2 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया।

    मौसम विभाग के अनुसार मानसून फिलहाल तेलंगाना क्षेत्र में धीमी गति से आगे बढ़ रहा है। यदि इसकी रफ्तार बनी रही तो 23 जून तक छत्तीसगढ़ पहुंच सकता है और इसके बाद 25 जून के आसपास मध्य प्रदेश में प्रवेश करेगा। पिछले वर्ष मानसून 16 जून को ही प्रदेश में पहुंच गया था, लेकिन इस बार इसकी गति काफी धीमी है।

    मानसून की देरी का असर जून महीने की बारिश पर भी दिखाई दे रहा है। प्रदेश में अब तक सामान्य से 46 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। सबसे ज्यादा असर पूर्वी मध्य प्रदेश पर पड़ा है, जहां जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभाग के 24 जिलों में सामान्य से करीब 65 प्रतिशत कम बारिश हुई है। वहीं भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, चंबल और नर्मदापुरम संभाग में भी वर्षा का आंकड़ा सामान्य से लगभग 30 प्रतिशत कम है।

    कम बारिश के कारण किसानों की चिंता बढ़ती जा रही है। खरीफ सीजन की प्रमुख फसलें जैसे सोयाबीन, उड़द, मूंग और तुअर की बुवाई प्रभावित हो रही है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि बुवाई के लिए कम से कम चार इंच बारिश आवश्यक है ताकि मिट्टी में पर्याप्त नमी बन सके। कई किसानों ने मानसून आने की उम्मीद में पहले ही सोयाबीन की बुवाई कर दी थी, लेकिन पर्याप्त बारिश नहीं होने से बीज खराब होने का खतरा बढ़ गया है। ऐसी स्थिति में किसानों को दोबारा बुवाई करनी पड़ सकती है, जिससे उनकी लागत बढ़ेगी।

    फिलहाल प्रदेशभर के किसानों और आम लोगों की नजरें आसमान पर टिकी हुई हैं। मौसम विभाग को उम्मीद है कि अगले चार दिनों में मानसून सक्रिय होकर मध्य प्रदेश में प्रवेश करेगा, जिससे गर्मी और बारिश की अनिश्चितता के बीच राहत मिलने की संभावना बनेगी।

  • मध्य प्रदेश में मौसम का मिजाज बदला: 33 जिलों में आंधी-बारिश, जून में अब तक 35% कम वर्षा

    मध्य प्रदेश में मौसम का मिजाज बदला: 33 जिलों में आंधी-बारिश, जून में अब तक 35% कम वर्षा


    मध्य प्रदेश । मध्य प्रदेश में मानसून के आगमन से पहले मौसम का मिजाज लगातार बदल रहा है। प्रदेश के 33 जिलों में पिछले 24 घंटों के दौरान तेज आंधी और बारिश ने लोगों को गर्मी से राहत दी है। राजधानी भोपाल, जबलपुर, रायसेन, सीहोर, ग्वालियर, सागर, श्योपुर, छिंदवाड़ा, बैतूल, रीवा और सतना समेत कई जिलों में मौसम ने अचानक करवट ली, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की गई और वातावरण सुहावना हो गया।

    भोपाल में बुधवार सुबह से ही बादलों की आवाजाही बनी रही। दोपहर के समय अचानक मौसम बदला और तेज बारिश शुरू हो गई। करीब 15 मिनट तक हुई बारिश ने शहर की सड़कों को तरबतर कर दिया। इसके बाद धूप और बादलों के बीच आंख-मिचौली का दौर जारी रहा। इसी तरह रायसेन, सागर और श्योपुर में भी अच्छी बारिश दर्ज की गई, जबकि भिंड, बुरहानपुर और श्योपुर में धूलभरी आंधी चली।

    मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार ग्वालियर में सबसे तेज 70 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से हवाएं चलीं। जबलपुर में 65 किलोमीटर, अशोकनगर में 52 किलोमीटर, भोपाल में 48 किलोमीटर और सीहोर में 46 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार दर्ज की गई। कई अन्य जिलों में भी तेज हवाओं के साथ बारिश हुई, जिससे लोगों को भीषण गर्मी से बड़ी राहत मिली।

    बारिश के प्रभाव से प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में दिन के तापमान में गिरावट देखने को मिली। शिवपुरी में अधिकतम तापमान 35 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो प्रदेश में सबसे कम रहा। पचमढ़ी, सिवनी और बैतूल में भी तापमान सामान्य से नीचे दर्ज किया गया। हालांकि खजुराहो और नौगांव जैसे क्षेत्रों में अभी भी गर्मी का असर बना हुआ है, जहां तापमान 42 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहा।

    प्रदेश के पांच प्रमुख शहरों की बात करें तो भोपाल में अधिकतम तापमान 37 डिग्री, इंदौर में 37.3 डिग्री, उज्जैन में 38.5 डिग्री, ग्वालियर में 39.5 डिग्री और जबलपुर में 40.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि आगामी कुछ दिनों तक प्री-मानसून गतिविधियां जारी रहेंगी, जिससे कई जिलों में आंधी और बारिश का दौर बना रह सकता है।

    हालांकि राहत की इस बारिश के बावजूद प्रदेश में जून माह की कुल वर्षा सामान्य से काफी कम बनी हुई है। मौसम विभाग के अनुसार 1 जून से 16 जून तक मध्य प्रदेश में औसतन 35 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई है। पूर्वी मध्य प्रदेश की स्थिति और अधिक चिंताजनक है, जहां सामान्य वर्षा का आधा पानी भी नहीं गिर पाया है। कई जिलों में वर्षा का आंकड़ा सामान्य से काफी नीचे चल रहा है।

    मौसम विभाग का कहना है कि इस बार मानसून सामान्य तिथि से लगभग एक सप्ताह की देरी से प्रदेश में प्रवेश करेगा। सामान्य रूप से मानसून 15 जून तक मध्य प्रदेश पहुंच जाता है, लेकिन इस बार इसकी रफ्तार धीमी रही है। इसके बावजूद विशेषज्ञों को उम्मीद है कि मानसून सक्रिय होने के बाद वर्षा की कमी काफी हद तक पूरी हो सकती है।

    बुधवार के लिए मौसम विभाग ने 34 जिलों में आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया है। ऐसे में आने वाले दिनों में प्रदेश के मौसम में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। किसानों और आम लोगों को मौसम विभाग की चेतावनियों पर नजर बनाए रखने की सलाह दी गई है।

  • MP में जल्‍द दस्‍तक देगा मानसून, आज 5 जिलों में तेज आंधी और 33 में बारिश का अलर्ट

    MP में जल्‍द दस्‍तक देगा मानसून, आज 5 जिलों में तेज आंधी और 33 में बारिश का अलर्ट


    भोपाल। मध्य प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की रफ्तार एक बार फिर बढ़ गई है। मौसम विभाग के अनुमान के अनुसार, प्रदेश में मानसून 15 से 18 जून के बीच प्रवेश कर सकता है। मानसून के आगमन से पहले राज्यभर में प्री-मानसून गतिविधियां तेज बनी हुई हैं। कई इलाकों में आंधी, बारिश और ओलावृष्टि का दौर जारी है।

    शुक्रवार को श्योपुर जिले में तेज आंधी ने भारी नुकसान पहुंचाया। अलग-अलग घटनाओं में चार लोगों की मौत हो गई। जिले में करीब एक इंच बारिश दर्ज की गई। वहीं सागर में आधा इंच पानी गिरा। जबलपुर, नरसिंहपुर, सिवनी सहित कई जिलों में भी आंधी और बारिश हुई, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की गई।

    हालांकि जून माह में अब तक प्रदेश में सामान्य से कम बारिश हुई है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में औसत से 23 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। पूर्वी क्षेत्र के जबलपुर, रीवा, शहडोल और सागर संभागों में औसत से 55 प्रतिशत कम बारिश हुई है, जबकि पश्चिमी हिस्से के भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, चंबल और नर्मदापुरम संभागों में औसत से 2 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई है।

    मौसम विभाग ने शनिवार को भिंड, दतिया, छतरपुर, पन्ना और सागर जिलों में तेज आंधी और बारिश की संभावना जताई है। इन जिलों में हवा की रफ्तार 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंच सकती है।

    इसके अलावा भोपाल, रायसेन, सीहोर, विदिशा, नर्मदापुरम, बैतूल, ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, अशोकनगर, मुरैना, श्योपुर, जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, पांढुर्णा, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, दमोह, टीकमगढ़ और निवाड़ी जिलों में गरज-चमक, तेज हवाओं और बारिश का दौर बना रह सकता है।

    वहीं इंदौर, उज्जैन, नीमच, मंदसौर, रतलाम, झाबुआ, अलीराजपुर, बड़वानी, धार, खरगोन, बुरहानपुर, खंडवा, हरदा, देवास, आगर-मालवा, राजगढ़ और शाजापुर जिलों में मौसम साफ रहने और तेज धूप निकलने की संभावना है।

    बारिश और बादलों के असर से कई जिलों में तापमान में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई। ग्वालियर में 5.8 डिग्री की कमी के बाद अधिकतम तापमान 36.2 डिग्री सेल्सियस रहा। दतिया में तापमान 4 डिग्री गिरकर 38.2 डिग्री पर पहुंच गया। रीवा में 7.3 डिग्री की गिरावट के साथ तापमान 35.2 डिग्री दर्ज किया गया, जबकि सतना में 6.6 डिग्री की कमी आई। सिवनी में तापमान 3 डिग्री और खजुराहो में 4 डिग्री तक नीचे आया।

  • मध्य प्रदेश में प्री-मानसून का असर तेज: 34 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट, 6 जिलों में ओलावृष्टि की चेतावनी

    मध्य प्रदेश में प्री-मानसून का असर तेज: 34 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट, 6 जिलों में ओलावृष्टि की चेतावनी


    मध्‍य प्रदेश । मध्य प्रदेश में मानसून की दस्तक से पहले प्री-मानसून गतिविधियां लगातार मजबूत होती जा रही हैं। प्रदेश के कई हिस्सों में बीते कुछ दिनों से मौसम का मिजाज बदला हुआ है और तेज हवाओं, गरज-चमक के साथ बारिश का सिलसिला जारी है। मौसम विभाग ने गुरुवार को ग्वालियर, जबलपुर सहित 34 जिलों में तेज आंधी और बारिश की संभावना जताई है। साथ ही कुछ क्षेत्रों में ओलावृष्टि की चेतावनी भी जारी की गई है।

    मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार प्रदेश के ऊपर सक्रिय ट्रफ लाइन और साइक्लोनिक सर्कुलेशन सिस्टम के कारण वातावरण में पर्याप्त नमी पहुंच रही है, जिससे प्री-मानसून गतिविधियां तेज बनी हुई हैं। यही वजह है कि कई जिलों में दिनभर गर्मी रहने के बावजूद शाम होते-होते मौसम अचानक बदल रहा है और बारिश के साथ तेज हवाएं चल रही हैं।

    बुधवार को बालाघाट, उमरिया और सौंसर सहित कई क्षेत्रों में तेज हवा के साथ बारिश दर्ज की गई। प्रदेश के 20 से अधिक जिलों में मौसम का असर देखने को मिला। मौसम विभाग का अनुमान है कि अगले सप्ताह मानसून के और सक्रिय होने तक प्रदेश में इसी तरह का मौसम बना रह सकता है।

    गुरुवार के लिए जारी पूर्वानुमान के अनुसार ग्वालियर, मुरैना, भिंड, दतिया, रायसेन, नर्मदापुरम, बैतूल, हरदा, जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, नरसिंहपुर, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, पांढुर्णा, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी सहित कई जिलों में 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं। इन क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना भी व्यक्त की गई है।

    मौसम विभाग ने मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़ और छतरपुर जिलों में ओलावृष्टि की आशंका जताई है। वहीं 13 जून के लिए ग्वालियर-चंबल और बुंदेलखंड क्षेत्र के कुछ जिलों में तेज आंधी को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इन जिलों में मौसम अधिक प्रभावशाली रहने की संभावना है।

    हालांकि बारिश और आंधी के बावजूद प्रदेश के कई हिस्सों में गर्मी का असर पूरी तरह कम नहीं हुआ है। खजुराहो लगातार दूसरे दिन प्रदेश का सबसे गर्म शहर रहा, जहां अधिकतम तापमान 45 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके अलावा ग्वालियर में 43.1 डिग्री, जबलपुर में 40.5 डिग्री, भोपाल में 40.4 डिग्री, उज्जैन में 39.5 डिग्री और इंदौर में 38.9 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया।

    मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान मौसमीय परिस्थितियां मानसून की प्रगति के लिए अनुकूल संकेत हैं। यदि यही स्थिति बनी रहती है तो आने वाले दिनों में प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में मानसूनी गतिविधियां और तेज हो सकती हैं। किसानों के लिए भी यह मौसम महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि खरीफ फसलों की तैयारी का दौर शुरू हो चुका है।

    फिलहाल नागरिकों को तेज हवाओं, बिजली गिरने और खराब मौसम के दौरान सतर्क रहने की सलाह दी गई है। विशेष रूप से खुले स्थानों, पेड़ों और बिजली के खंभों के आसपास सावधानी बरतने की आवश्यकता बताई गई है।

  • एमपी में मौसम का डबल अटैक: कहीं ओलावृष्टि-बारिश, कहीं 46 डिग्री की भीषण गर्मी

    एमपी में मौसम का डबल अटैक: कहीं ओलावृष्टि-बारिश, कहीं 46 डिग्री की भीषण गर्मी


    मध्यप्रदेश। मध्य प्रदेश में मौसम इन दिनों दोहरे रंग दिखा रहा है। एक ओर प्रदेश के कई जिलों में प्री-मानसून की गतिविधियों ने जोर पकड़ लिया है, जहां तेज आंधी, बारिश और ओलावृष्टि से लोगों को गर्मी से राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर कई इलाके अब भी भीषण गर्मी की चपेट में हैं। मंगलवार को प्रदेश के कई जिलों में मौसम का मिजाज अचानक बदला और तेज हवाओं के साथ बारिश हुई। जबलपुर और दमोह में ओले गिरने की घटनाएं भी सामने आईं, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की गई।

    मौसम विभाग के अनुसार, पिछले 24 घंटों के दौरान भिंड, दतिया, मुरैना, ग्वालियर, शिवपुरी, सागर, छतरपुर, छिंदवाड़ा, रीवा, सीधी, सिंगरौली, कटनी, मंडला, नरसिंहपुर, सतना और मऊगंज सहित 18 जिलों में तेज आंधी और बारिश हुई। सिंगरौली और नरसिंहपुर में धूलभरी आंधी ने जनजीवन को प्रभावित किया। कई स्थानों पर पेड़ गिरने और बिजली आपूर्ति बाधित होने की घटनाएं भी सामने आईं।

    सबसे ज्यादा असर जबलपुर में देखने को मिला, जहां 74 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से आंधी चली। तेज हवाओं के कारण कई स्थानों पर पेड़ गिर गए और वाहनों को नुकसान पहुंचा। सीधी में 68 किलोमीटर प्रति घंटे, सागर में 59 किलोमीटर प्रति घंटे और ग्वालियर में 46 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलीं। इसके अलावा आगर-मालवा, अशोकनगर, रीवा, गुना, शिवपुरी और शहडोल में भी तेज हवाओं का असर देखा गया।

    बारिश और आंधी के बीच गर्मी का प्रकोप भी कम नहीं हुआ है। खजुराहो मंगलवार को प्रदेश का सबसे गर्म शहर रहा, जहां अधिकतम तापमान 46 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। कई अन्य जिलों में भी तापमान 42 से 45 डिग्री सेल्सियस के बीच बना रहा, जिससे लोगों को उमस और गर्म हवाओं का सामना करना पड़ा।

    मौसम विभाग ने बुधवार को बड़वानी, खरगोन, खंडवा, बुरहानपुर, हरदा, नर्मदापुरम, बैतूल, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, जबलपुर, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी और अनूपपुर जिलों में बारिश और गरज-चमक की संभावना जताई है। वहीं भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर, सागर और रीवा संभाग के कई जिलों में गर्मी का असर बरकरार रह सकता है।

    दिलचस्प बात यह है कि मौसम विभाग ने पहले 10 और 11 जून के लिए कुछ जिलों में लू का अलर्ट जारी किया था, लेकिन ताजा पूर्वानुमान में स्थिति बदल गई है। अब 12 जून को मुरैना, भिंड, टीकमगढ़ और छतरपुर में ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है। इसके साथ ही प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में तेज आंधी और बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से आ रही नमी तथा सक्रिय प्री-मानसून सिस्टम के कारण मौसम में यह बदलाव देखने को मिल रहा है। आने वाले दिनों में भी प्रदेशवासियों को गर्मी, आंधी और बारिश के मिले-जुले मौसम का सामना करना पड़ सकता है।