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  • MP: CM यादव ने 3.69 लाख तेंदूपत्ता संग्राहकों को बांटा 30 करोड़ का बोनस,,, बैतूल को दी विकास कार्यों की सौगात

    MP: CM यादव ने 3.69 लाख तेंदूपत्ता संग्राहकों को बांटा 30 करोड़ का बोनस,,, बैतूल को दी विकास कार्यों की सौगात


    भोपाल/बैतूल।
    मुख्यमंत्री मोहन यादव (Chief Minister Mohan Yadav) 31 अक्टूबर को बैतूल (Betul) पहुंचे. उन्होंने यहां पुलिस ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम में जिले को कई सौगातें प्रदान कीं. उन्होंने 3.69 लाख तेंदूपत्ता संग्राहकों (Tendu leaf Collectors) के खातों में 30 करोड़ से अधिक की बोनस राशि (Bonus amount) ट्रांसफर की. इसके अलावा उन्होंने ग्राम वन समितियों के सदस्यों को 13 करोड़ से अधिक की काष्ठ लाभांश राशि भी  सिंगल क्लिक के माध्यम से अंतरण किया. इस मौके पर उन्होंने 297 करोड़ से अधिक की लागत के 52 विकास कार्यों का भूमि-पूजन और 145 करोड़ से अधिक की लागत के 55 विकास कार्यों का लोकार्पण किया. इससे पहले मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कार्यक्रम में आए स्थानीय नागरिकों का पुष्पवर्षा कर स्वागत-अभिनंदन किया. उन्होंने विकास एवं जनकल्याणकारी योजनाओं पर केंद्रित प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया।

    इस मौके पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार सच्चा वादा और पक्का काम के संकल्प के साथ जनहितैषी कार्यों को आगे बढ़ा रही है. प्रदेश के गरीब, किसान, युवा और नारी कल्याण के लिए अनेकों कार्य हो रहे हैं. कल ही किसानों को पीएम किसान सम्मान निधि की राशि की सौगात मिली है. प्रदेश के किसानों को पर्याप्त बिजली और सिंचाई सुविधाएं मिल रही हैं. उन्होंने कहा कि आज बैतूल में चार जिलों के 3.69 लाख तेंदूपत्ता संग्राहकों को 30 करोड़ रुपये से अधिक की बोनस राशि मिली है. यह दक्षिण बैतूल, पश्चिम बैतूल, उत्तर बैतूल, पांढुर्णा (दक्षिण छिंदवाड़ा), पूर्व छिंदवाड़ा, पश्चिम छिंदवाड़ा एवं नर्मदापुरम वन मंडल के तेंदूपत्ता संग्राहकों के हक की राशि है. प्रदेश के तेंदूपत्ता संग्राहकों को अब तक 80 करोड़ से अधिक राशि दी गई है।


    छात्रों का पूरा ख्याल रख रही सरकार

    सीएम मोहन यादव ने कहा कि हमारी सरकार माताओं-बहनों के कल्याण के लिए निरंतर लाड़ली बहनों को लाभ दे रही है. ग्राम वन समितियों को 13 करोड़ से अधिक काष्ठ लाभांश राशि भी मिली है. अद्भुत वन संपदा और नैसर्गिक सौन्दर्य के मामले में बैतूल जिला अतुलनीय है. बैतूल जिले के समग्र विकास के लिए यहां 443 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्यों की अनुपम सौगात मिली है. प्रदेशभर में बन रहे सांदीपनि विद्यालय बेहतर और गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा का मॉडल बन चुके हैं. उन्होंने कहा कि बैतूल में जनजातीय बेटियों के लिए 50 करोड़ की लागत से कन्या शिक्षा परिसर और छात्रावास का भूमि-पूजन किया गया है. राज्य सरकार मेधावी योजना के अंतर्गत बोर्ड परीक्षाओं में 70 प्रतिशत से अधिक अंक अर्जित करने वाले बच्चों को 25 हजार रुपए कीमत के लैपटॉप और स्कूल टॉपर्स को स्कूटी प्रदान कर रही है।


    सरकार ने खोले नौकरियों के रास्ते

    मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि हमारी सरकार विद्यार्थियों के स्वर्णिम भविष्य के लिए किताबें, साइकिल, ड्रेस और छात्रवृत्ति देकर उनकी हर तरीके से मदद कर रही है. बच्चे और युवा मध्यप्रदेश का भविष्य हैं. उनके लिए पर्याप्त रोजगार उपलब्ध हों, इसके लिए प्रदेशभर में उद्योग स्थापित किए जा रहे हैं. हमारे बच्चे पढ़-लिखकर नौकरी मांगने की बजाय रोजगार देने वाले बनें, इसके लिए उन्हें कौशल विकास का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. राज्य सरकार ने अब तक 85 हजार शासकीय पदों पर युवाओं को नियुक्ति दी है. उन्होंने कहा कि अब एक लाख नए पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया जारी है. पुलिस विभाग में 18 हजार से अधिक पदों पर नियुक्ति की गई है. प्रदेश में असिस्टेंट प्रोफेसर, माइनिंग इंस्पेक्टर, डॉक्टर जैसे पदों पर भी भर्ती हुई है. प्रदेश के 1 लाख से अधिक अधिकारी-कर्मचारियों को पदोन्नति का लाभ मिला है. हमारी सरकार सबका साथ-सबका विकास की भावना से काम कर रही है. उन्होंने कहा कि दीपावली से पहले कर्मचारियों को 2 प्रतिशत अतिरिक्त डीए की सौगात भी मिली है।


    बैतूल-मुलताई में लगेंगे नए कारखाने

    मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि बैतूल के कुकरू खामला का सौंदर्य देखती ही बनता है. यहां 15 करोड़ रुपए की लागत से पर्यटन सुविधिओं को विस्तार दिया जा रहा है. यहां कॉफी के बागान लगाए जाएंगे. बैतूल-मुलताई में 24 करोड़ के नए कारखाने लगाए जाएंगे. भगवान बिरसा मुंडा की जन्म जयंती के अवसर प्रदेशभर में 15 नवंबर से 17 नवंबर तक तीन दिन उत्सव मनाया जाएगा. राज्य सरकार ने जनजातीय नायकों को सम्मान देने के लिए विशेष कैबिनेट आयोजित कीं. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने गोवर्धन पूजा के अवसर पर वृंदावन गांवों में अच्छे पशुधन की प्रतियोगिताएं आयोजित करने और पशुपालकों को पुरस्कृत करने का निर्णय लिया है. हमारे किसान भाई, जनजातीय बंधु गोपालन और दूध उत्पादन से आय बढ़ाएं. राज्य सरकार कोदो-कुटकी सहित सभी मोटे अनाज को प्रोत्साहन प्रदान कर रही है. मजरे-टोले में रहने वाले जनजातीय भाई-बहनों को भी बेहतर सड़कों और मुख्यमंत्री सुगम परिवहन बसों की सौगात मिल रही है. मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित संपत्तियों की नि:शुल्क रजिस्ट्री करवाई जा रही है. हमारे जनजातीय किसान भाइयों को भी सम्मान से जीने का हक मिले. इसके लिए लगातार जनकल्याणकारी कार्यों को आगे बढ़ा रही है. सीएम मोहन यादव ने सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती पर उनका स्मरण करते हुए कहा कि प्रदेश सरकार गरीब, किसान, युवा, नारी और जनजातीय सहित सभी वर्गों के कल्याण के लिए समान रूप से काम करेगी. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने प्रदेशवासियों को दीपावली और गोवर्धनपूजा की अग्रिम शुभकामनाएं दीं।


    मुख्यमंत्री की प्रमुख घोषणाएं

    1. नल जल योजना के कार्यों के लिए 50 करोड़ राशि दी जाएगी .
    2. बैतूल में 15 करोड़ की लागत से गीता भवन और हाट बाजार बनेगा.
    3. सड़क चौड़ीकरण के लिए 47 करोड़ रुपए दिए जाएंगे.
    4. जिले में 70 करोड़ की लागत से चार जलाशयों को निर्माण किया जाएगा.
    5. 154 करोड़ की लागत से रामघाटी मध्यम सिंचाई परियोजना विकसित की जाएगी.
    6. घोड़ाडोंगरी में बैराज और जलाशय बनाएं जाएंगे.
    7. शासकीय हाई स्कूलों में 50 करोड़ की लागत से सुविधाएं बढ़ाई जाएंगी.
    8. 100 करोड़ से अधिक लगात से फुटबॉल टर्फ, इनडोर और आउटडोर स्टेडियम बनाएं जाएंगे.
    9. बैतूल में जनजातीय संग्रहालय बनाया जाएगा.
    10. प्रदेश के पहले ताप्ती कंजर्वेशन रिजर्व फॉरेस्ट में 7 करोड़ की लागत से सफारी गेट का निर्माण किया जाएगा.
    11. ताप्ती कंजर्वेशन रिजर्व फॉरेस्ट के पास 3 करोड़ की लागत से बटर फ्लाई पार्क विकसित किया जाएगा।

  • तूफान 'अर्नब' के चलते MP में बदला मौसम, आज 27 जिलों में आंधी-बारिश की चेतावनी

    तूफान 'अर्नब' के चलते MP में बदला मौसम, आज 27 जिलों में आंधी-बारिश की चेतावनी


    भोपाल। चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ कमजोर होकर कम दबाव के क्षेत्र में बदल गया है, लेकिन इसके असर से मध्य प्रदेश में आंधी और बारिश का सिलसिला जारी है। पिछले तीन दिनों से प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में रुक-रुककर बारिश हो रही है। शुक्रवार को भी कई जिलों में पानी गिरा। मौसम विभाग ने शनिवार को ग्वालियर-जबलपुर समेत 27 जिलों में आंधी और बारिश का अलर्ट जारी किया है। वहीं, भोपाल और इंदौर सहित कई जिलों में मौसम साफ रहने और धूप निकलने की संभावना है।

    मौसम केंद्र भोपाल के मुताबिक, शनिवार को ग्वालियर, शिवपुरी, दतिया, मुरैना, भिंड, श्योपुर, जबलपुर, कटनी, छिंदवाड़ा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, पांढुर्णा, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में आंधी-बारिश की संभावना है।

    दूसरी ओर भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, इंदौर, धार, आलीराजपुर, बुरहानपुर, बड़वानी, खंडवा, खरगोन, झाबुआ, उज्जैन, नीमच, आगर-मालवा, मंदसौर, शाजापुर, देवास, रतलाम, नर्मदापुरम, बैतूल, गुना, अशोकनगर, सागर, दमोह, नरसिंहपुर और हरदा में धूप निकलने के आसार हैं।

    2 नवंबर तक बना रहेगा बदला मौसम
    मौसम विशेषज्ञ शैलेंद्र कुमार नायक के अनुसार, प्रदेश में अगले चार दिन तक मौसम का यही मिजाज बना रह सकता है। इस दौरान कुछ इलाकों में तेज धूप निकलेगी, जबकि दक्षिणी और पूर्वी मध्य प्रदेश में मौसमी सिस्टम का असर अधिक रहने से आंधी और बारिश की गतिविधियां जारी रहेंगी।

    38 जिलों के 155 शहरों-कस्बों में हुई बारिश
    इससे पहले प्रदेश के 38 जिलों के करीब 155 शहरों और कस्बों में बारिश दर्ज की गई। इनमें भोपाल, रायसेन, सीहोर, राजगढ़, विदिशा, शाजापुर, नर्मदापुरम, ग्वालियर, श्योपुर, दतिया, शिवपुरी, गुना, मुरैना और भिंड शामिल हैं।

    इसके अलावा जबलपुर, कटनी, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा, पांढुर्णा, सिवनी, बालाघाट, मंडला, डिंडौरी, रीवा, सतना, सीधी, सिंगरौली, मऊगंज, मैहर, शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, सागर, पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़ और निवाड़ी में भी बारिश हुई। अनूपपुर शहर में सबसे ज्यादा तीन इंच से अधिक पानी गिरा। अमरकंटक में सवा दो इंच और सिंगरौली में दो इंच बारिश रिकॉर्ड की गई। अनूपपुर में आंधी की रफ्तार 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच गई।

    पांढुर्णा में हजारों क्विंटल मक्का खराब होने की आशंका
    बेमौसम बारिश का असर खेती और मंडियों में रखी उपज पर भी पड़ा है। जिन जिलों में धान की फसल खेतों में खड़ी है, वहां किसानों को नुकसान की चिंता सता रही है। वहीं, मंडियों में खुले में रखे अनाज के भीगने से भी परेशानी बढ़ गई है। पांढुर्णा में बारिश के कारण हजारों क्विंटल मक्का खराब होने की आशंका है।

    दिन के तापमान में 3 डिग्री तक गिरावट
    आंधी और बारिश के चलते गुरुवार के बाद शुक्रवार को भी प्रदेश के कई हिस्सों में दिन के समय ठंडक महसूस की गई। बादलों और बारिश के कारण दिन के तापमान में दो से तीन डिग्री सेल्सियस तक की गिरावट दर्ज की गई। कुछ शहरों में रात के तापमान में भी कमी आई है।

  • MP: ग्वालियर में करवा चौथ के दिन पत्नी की हत्या कर थाने पहुंचा पति… दोनों ने थी लव मैरिज

    MP: ग्वालियर में करवा चौथ के दिन पत्नी की हत्या कर थाने पहुंचा पति… दोनों ने थी लव मैरिज


    ग्वालियर।
    करवा चौथ (Karwa Chauth) का दिन. इस दिन सुहाग की लंबी उम्र की कामना की जाती है. घरों में पूजा की तैयारी होती है और पति-पत्नी (Husband and wife) साथ में त्योहार मनाते हैं. लेकिन मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के ग्वालियर (Gwalior) में इसी दिन एक ऐसी घटना सामने आई, जिसने एक परिवार की खुशियां छीन लीं. मुरार थाना क्षेत्र (Murar police station area) के त्यागी नगर में मधु श्रीवास्तव की हत्या हो गई. आरोप मधु के पति आनंद श्रीवास्तव पर है. शुरुआती जानकारी के मुताबिक, मधु के सिर पर कई बार वार किए गए, जिससे मधु की मौत हो गई. घटना के बाद आनंद खुद थाने पहुंचा. पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।

    फिलहाल इस घटना के पीछे की वजह साफ नहीं है. पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि पति ने अपनी पत्नी की हत्या कर दी. घटना ग्वालियर के मुरार थाना क्षेत्र के त्यागी नगर की है. मृतका की पहचान मधु श्रीवास्तव के रूप में हुई है. शुरुआती जानकारी के अनुसार, मधु के सिर पर कई बार वार किए गए थे. गंभीर चोटों के कारण उनकी मौत हो गई. घटना की खबर सामने आने के बाद आसपास सनसनी फैल गई. जिस दिन कई घरों में करवा चौथ की पूजा हो रही थी, उसी दिन एक महिला की हत्या की खबर ने लोगों को सन्न कर दिया।

    हालांकि, घटना से पहले घर में क्या हुआ था, पति-पत्नी के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ था या नहीं और वारदात किस परिस्थिति में हुई, इन सवालों के जवाब अभी सामने नहीं आए हैं. पुलिस इन सभी पहलुओं की जांच कर रही है.

    हत्या के बाद आरोपी पति आनंद श्रीवास्तव खुद थाने पहुंचा. शुरुआती जानकारी के मुताबिक, उसने वहां हत्या की बात कबूल की. हालांकि, उसके बयान और घटनाक्रम से जुड़े तथ्यों की जांच की जा रही है. पुलिस ने आनंद को हिरासत में ले लिया है और उससे पूछताछ की जा रही है. जांच में यह समझने की कोशिश की जा रही है कि घटना के समय क्या हुआ था. इसी के साथ पुलिस को घटनास्थल से मिले सबूतों, बयानों और दूसरे तथ्यों को भी जोड़ना होगा।

    शुरुआती जानकारी में सामने आया है कि आनंद और मधु ने लव मैरिज की थी. दोनों की मैरिड लाइफ में किसी तरह का विवाद था या नहीं, इस बारे में पूछताछ की जा रही है. यह भी अभी साफ नहीं है कि घटना से ठीक पहले दोनों के बीच कोई कहासुनी हुई थी या वारदात के पीछे कोई दूसरी वजह थी. पुलिस की ओर से फिलहाल सामने आई जानकारी के मुताबिक, आनंद श्रीवास्तव को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है और हत्या के कारणों का पता लगाया जा रहा है. जांच के दौरान घटनास्थल से जुड़े सबूतों और अन्य जानकारियों को ध्यान में रखकर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

  • MP: इंदौर में करवा चौथ पर पति को दूसरी महिला के संग देख भड़की पत्नी… सड़क पर जमकर हुई मारपीट

    MP: इंदौर में करवा चौथ पर पति को दूसरी महिला के संग देख भड़की पत्नी… सड़क पर जमकर हुई मारपीट


    इंदौर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के इंदौर (Indore) में एक महिला के साथ मारपीट (Beating) का वीडियो सोशल मीडिया (Social Media) पर वायरल होने के बाद मामला चर्चा में आ गया है. घटना लसूड़िया थाना क्षेत्र की बताई जा रही है. सोशल मीडिया पर किए जा रहे दावों के मुताबिक, शालीमार टाउनशिप (Shalimar Township) के बाहर एक पत्नी ने अपने पति को दूसरी महिला के साथ देख लिया. इसके बाद मौके पर विवाद हुआ और मारपीट की नौबत आ गई. घटना के दौरान आसपास लोगों की भीड़ भी जमा हो गई. हालांकि, वीडियो में दिखाई दे रही घटना की वजह और उसकी वास्तविक लोकेशन की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है. पुलिस ने वायरल वीडियो का संज्ञान लेकर जांच शुरू कर दी है।

    सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो को लेकर दावा किया जा रहा है कि एक पत्नी ने अपने पति को दूसरी महिला के साथ पकड़ लिया था. इसके बाद महिला ने दूसरी महिला के साथ मारपीट की. बताया जा रहा है कि घटना इंदौर की शालीमार टाउनशिप के बाहर हुई, जहां विवाद के बाद लोगों की भीड़ जमा हो गई. इस घटना को करवाचौथ से पहले पति-पत्नी के बीच विवाद से जोड़कर भी चर्चा की जा रही है. हालांकि, पुलिस की ओर से अभी तक इस पूरे घटनाक्रम की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है. इसलिए पति के साथ मौजूद महिला की पहचान और विवाद की असली वजह को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।


    वायरल वीडियो में महिला के साथ मारपीट करती दिख रही दूसरी महिला

    वायरल वीडियो में एक महिला दूसरी महिला के साथ मारपीट करती नजर आ रही है. घटनास्थल पर आसपास कुछ लोग भी खड़े दिखाई दे रहे हैं. वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर घटना को लेकर चर्चा तेज हो गई है. हालांकि, वीडियो में दिखाई दे रहे घटनाक्रम के आधार पर अभी यह तय नहीं किया जा सकता कि विवाद किस वजह से शुरू हुआ. यह भी स्पष्ट नहीं है कि घटना कब हुई और इसमें शामिल महिलाओं के बीच पहले से क्या संबंध था. सोशल मीडिया पर घटना को पति और दूसरी महिला से जुड़े विवाद के रूप में पेश किया जा रहा है, लेकिन इस दावे की पुष्टि होना अभी बाकी है. पुलिस जांच के बाद ही घटना से जुड़े तथ्यों की सही जानकारी सामने आ सकेगी।

    वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने मामले का संज्ञान लिया है. अधिकारियों के मुताबिक, लसूड़िया थाना क्षेत्र से संबंधित इस वीडियो के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है. फिलहाल संबंधित थाने में घटना को लेकर कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है. इसके बावजूद पुलिस ने वायरल वीडियो को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है. पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि वीडियो कहां का है, घटना किन परिस्थितियों में हुई और इसमें कौन-कौन लोग शामिल हैं।

    पुलिस के सामने फिलहाल सबसे अहम सवाल यही है कि वायरल वीडियो में दिखाई दे रही घटना की वास्तविकता क्या है. इसके साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि मारपीट के पीछे क्या वजह थी. मामले को लेकर एडिशनल डीसीपी राजेश दंडोतिया के मुताबिक, पुलिस वायरल वीडियो की वास्तविकता और घटना से जुड़ी परिस्थितियों की जानकारी जुटा रही है. इसमें शामिल लोगों के संबंध में भी जानकारी एकत्र की जा रही है. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि तथ्यों की पुष्टि होने के बाद आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी. फिलहाल किसी शिकायत के नहीं मिलने के बावजूद वीडियो के आधार पर मामले की पड़ताल की जा रही है।


    जांच के बाद स्पष्ट होगी घटना की असली वजह

    इंदौर में महिला के साथ मारपीट का यह वीडियो सामने आने के बाद घटना को लेकर कई तरह के दावे किए जा रहे हैं. हालांकि, अभी तक पुलिस की ओर से इन दावों की पुष्टि नहीं हुई है. घटना की तारीख, वास्तविक लोकेशन और विवाद की वजह भी स्पष्ट नहीं है. पुलिस वीडियो की जांच कर रही है और इसमें शामिल लोगों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है. जांच पूरी होने और तथ्यों की पुष्टि के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि घटना के समय क्या हुआ था और मारपीट किस वजह से हुई. फिलहाल पुलिस मामले से जुड़ी जानकारी जुटाने में लगी है. अधिकारियों के मुताबिक, जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

  • MP के DGP कैलाश मकवाणा 30 नवंबर को हो रहे रिटायर, अगले दावेदारों के नाम आए सामने!

    MP के DGP कैलाश मकवाणा 30 नवंबर को हो रहे रिटायर, अगले दावेदारों के नाम आए सामने!


    भोपाल।
    मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा (DGP Kailash Makwana) की सेवानिवृत्ति की तारीख को लेकर चल रही अटकलों पर विराम लग गया है। राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि मकवाणा 30 नवंबर 2026 को सेवानिवृत्त (Retired) होंगे। गृह विभाग ने बुधवार को इस संबंध में आदेश जारी कर दिया। इससे अब प्रदेश के अगले पुलिस प्रमुख की नियुक्ति को लेकर प्रक्रिया पर सबकी नजरें टिक गई हैं। वरुण कपूर (Varun Kapoor), उपेंद्र जैन (Upendra Jain) और प्रज्ञा ऋचा श्रीवास्तव (Pragya Richa Srivastava) के नाम प्रमुख दावेदारों के रूप में चर्चा में हैं।

    1 दिसंबर को प्रदेश के नए डीजीपी ज्वाइंन करेंगे। 1988 बैच के IPS अधिकारी मकवाणा को दिसंबर 2024 में प्रदेश का डीजीपी बनाया गया था। गृह विभाग की ओर से जारी आदेश के मुताबिक, वे 30 नवंबर को सेवानिवृत्त होंगे। आदेश में सुप्रीम कोर्ट के 2006 और 2018 में दिए गए फैसलों का भी उल्लेख किया गया है।


    दो साल के कार्यकाल को लेकर उठा था सवाल

    मकवाणा की सेवानिवृत्ति की तारीख तय होने से पहले पुलिस मुख्यालय (पीएचक्यू) और शासन के बीच इस विषय पर चर्चा हुई थी। बताया गया कि पीएचक्यू ने गृह विभाग को प्रस्ताव भेजकर मकवाणा का कार्यकाल दो दिसंबर 2026 तक रखने का सुझाव दिया था। इसके पीछे उनकी जॉइनिंग की तारीख और डीजीपी के लिए निर्धारित दो साल के कार्यकाल का तर्क दिया गया था। इस प्रस्ताव के बाद उनकी सेवानिवृत्ति की तारीख को लेकर स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार किया जा रहा था। मामला मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तक भी पहुंचा। इसके बाद सरकार ने 30 नवंबर को ही सेवानिवृत्ति तय करते हुए आदेश जारी कर दिया।


    नए डीजीपी की दौड़ में तीन नामों की चर्चा ज्यादा

    मध्यप्रदेश के अगले पुलिस महानिदेशक के चयन के लिए राज्य सरकार 12 आईपीएस अधिकारियों के नाम यूपीएससी को भेज चुकी है। निर्धारित प्रक्रिया के तहत यूपीएससी तीन अधिकारियों का पैनल राज्य सरकार को भेजेगा। इसके बाद सरकार नए डीजीपी के नाम पर निर्णय लेगी। संभावित दावेदारों में जेल विभाग के महानिदेशक वरुण कपूर, आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) के प्रमुख उपेंद्र जैन और होमगार्ड की महानिदेशक प्रज्ञा ऋचा श्रीवास्तव के नाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। हालांकि, अंतिम चयन यूपीएससी से आने वाले पैनल और सरकार के फैसले पर निर्भर करेगा।


    वरुण कपूर की दावेदारी पर क्यों टिकी नजरें?

    नए डीजीपी के चयन में अधिकारियों की सेवानिवृत्ति की तारीख भी अहम मानी जा रही है। सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुसार, डीजीपी के पद पर नियुक्ति के लिए संबंधित अधिकारी की सेवानिवृत्ति में कम से कम छह महीने का समय शेष होना चाहिए। इसी वजह से वरुण कपूर की दावेदारी को लेकर भी चर्चा चल रही थी। यदि मकवाणा की सेवानिवृत्ति दिसंबर में आगे बढ़ती, तो कपूर के पास बची सेवा अवधि के कारण उनकी पात्रता प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही थी।

  • MP से भाजपा ने हरदीप पुरी को बनाया राज्यसभा उम्मीदवार तो भड़की कांग्रेस…. की आलोचना

    MP से भाजपा ने हरदीप पुरी को बनाया राज्यसभा उम्मीदवार तो भड़की कांग्रेस…. की आलोचना


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) में राज्यसभा (Rajya Sabha) की एक सीट पर 12 नवंबर को होने वाले उपचुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janata Party) ने केन्द्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी (Hardeep Singh Puri) को उम्मीदवार घोषित किया है। प्रत्याशी के रूप में पुरी के नाम की घोषणा के बाद कांग्रेस ने भाजपा पर जबरदस्त तरीके से हमला बोला है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी (Jeetu Patwari) से लेकर नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार एवं अन्य कांग्रेस नेताओं ने इस फैसले के लिए भाजपा की कड़ी आलोचना की है और पूछा है कि आखिर पुरी ने भाजपा की ऐसी कौन सी नस दबा रखी है, जिसके चलते पार्टी को ब्लैकमेल होना पड़ रहा है।

    इस बारे में मीडिया से बातचीत करते हुए विधानसभा में विपक्ष के नेता उमंग सिंघार ने एपस्टीन फाइल्स के संदर्भ में पुरी का नाम सामने आने का उल्लेख किया और भाजपा से पूछा कि नैतिकता की बात करने वाली पार्टी उन्हें राज्यसभा भेजने का निर्णय कैसे ले सकती है। सिंघार ने कहा कि भाजपा महिलाओं की सुरक्षा और लाडली बहना योजना की बात करती है, लेकिन उसे यह स्पष्ट करना चाहिए कि ऐसे विवादों के बीच पुरी को उम्मीदवार बनाने का आधार क्या है।


    ‘MP से कोई दलित, आदिवासी, ओबीसी नहीं मिला’

    उन्होंने सवाल किया कि राज्यसभा भेजने के लिए क्या भारतीय जनता पार्टी को मध्यप्रदेश से दलित, आदिवासी तथा अन्य पिछड़ा वर्ग का कोई योग्य नेता नहीं मिला। उन्होंने कहा कि पुरी को उम्मीदवार बनाए जाने से मध्यप्रदेश के साथ भाजपा के कथित भेदभाव का मुद्दा फिर सामने आया है। विपक्ष के नेता ने कहा कि भाजपा की इस राजनीति से स्पष्ट है कि वह मध्यप्रदेश को अपने राजनीतिक प्रयोगों की प्रयोगशाला समझती है।


    ‘आखिर किससे ब्लैकमेल हो रही है भाजपा’

    इस बारे में शेयर की अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में पुरी ने लिखा, ‘आखिर किससे ब्लैकमेल हो रही है भाजपा? ‘एपस्टीन फाइल्स’ में जिसका नाम सामने आया हो, उस हरदीप सिंह पुरी को मध्यप्रदेश से राज्यसभा का टिकट देना भाजपा के खौफ को साफ दर्शाता है। उत्तर प्रदेश से टिकट न देकर मध्यप्रदेश की सीट को अपने निजी स्वार्थों के लिए इस्तेमाल करना यह साबित करता है कि भाजपा ने मध्यप्रदेश को अपनी प्रयोगशाला (लैब) समझ रखा है। हम मध्यप्रदेश को भाजपा की प्रयोगशाला नहीं बनने देंगे। लोकतंत्र के हत्यारों को सत्ता की गद्दी से उखाड़ फेंकने का वक्त आ गया है।’


    पटवारी बोले- कहीं कुछ तो जरूर है…

    उधर कांग्रेस की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि हरदीप सिंह पुरी को सत्ता में शामिल रखने के पीछे की विवशता बता रही है कि कहीं कुछ तो ऐसा जरूर है, जिसने भाजपा की नस दबा रखी है। उन्होंने कहा कि भाजपा को यह बताना ही चाहिए, पुरी के नाम से जुड़े एपस्टीन प्रकरण पर उठे सवालों का जवाब, देश को आखिर कब मिलेगा? उन्होंने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘मध्यप्रदेशवासियो, मत के मद में डूबी भाजपा राज्य के साथ, आपके वोट का भी खुला अपमान कर रही है। कांग्रेस इसका विरोध करती है।’


    दिग्विजय के बेटे बोले- एपस्टीन के दोस्त को राज्यसभा भेजा

    उधर इसी मुद्दे को लेकर प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह के बेटे और कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह ने सोशल मीडिया पर लिखा, ‘एक कहावत है कि “Partners in crime are the best kind of friends!” (जुर्म में साथ देने वाले दोस्त सबसे अच्छे दोस्त होते हैं) भाजपा एक दुराचारी को राज्यपाल बनाती है और नाबालिग बच्चियों के यौन शोषण एवं तस्करी के अंतरराष्ट्रीय अपराधी जेफरी एप्स्टीन के मित्र हरदीप सिंह पुरी को मध्य प्रदेश से राज्यसभा भेजती है।’


    ‘एप्स्टीन की दोस्ती- जिंदगी के साथ भी, जिंदगी के बाद भी’

    आगे उन्होंने लिखा, ‘क्या भाजपा के पास मध्य प्रदेश में एक भी ऐसा योग्य नेता नहीं था, जिसे राज्यसभा भेजा जा सकता था? और अगर नहीं था, तो हरदीप सिंह पुरी ही क्यों? आखिर ऐसी कौन-सी नस थी, जो हरदीप सिंह पुरी के हाथ में थी? मध्य प्रदेश की जनता जानना चाहती है। एप्स्टीन की मित्रता— जिंदगी के साथ भी, जिंदगी के बाद भी।’


    घोषित बाल यौन अपराधी है जेफ्री एप्स्टीन

    बता दें कि जेफ्री एप्स्टीन एक घोषित अमेरिकी बाल यौन अपराधी है, और कांग्रेस इस साल की शुरुआत से ही अमेरिका में जारी ‘एप्स्टीन फाइल्स’ में पुरी का नाम होने का दावा करते हुए उनके इस्तीफे की मांग कर रही है। कांग्रेस का दावा है कि अमेरिकी न्याय विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध ‘एप्स्टीन फाइल्स’ के अनुसार, 2014 से 2017 के बीच एप्स्टीन और पुरी के बीच कम से कम 62 ईमेल का आदान-प्रदान हुआ था तथा 14 बैठकें हुईं थीं। हालांकि पुरी मुख्य विपक्षी दल के आरोपों को पहले खारिज कर चुके हैं। पुरी ने कहा था कि वह एप्स्टीन से कुछ मौकों पर जरूर मिले थे, लेकिन उसके साथ उनकी बातचीत और उसके अपराधों से कोई वास्ता नहीं है। इसके बाद ये मुद्दा हाल ही में उस वक्त एकबार फिर चर्चा में आ गया, जब अमेरिकी न्याय विभाग ने इस साल 21 अक्टूबर को इसी एपस्टीन से जुड़े दस्तावेज जारी किए थे, जिनमें केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और जेफ्री एपस्टीन की 2014 की तस्वीरों को भी शेयर किया गया था।

    12 नवंबर को होना है राज्यसभा सीट के लिए उपचुनाव
    इससे पहले भाजपा महासचिव तरुण चुग की ओर से बुधवार को जारी विज्ञप्ति के अनुसार पार्टी की केन्द्रीय चुनाव समिति ने श्री पुरी को मध्य प्रदेश से राज्यसभा का उम्मीदवार बनाने का निर्णय लिया है। पुरी का राज्यसभा का मौजूदा कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त हो रहा है। वह इस समय उत्तर प्रदेश से उच्च सदन के सदस्य हैं। यह सीट पूर्व केन्द्रीय मंत्री एल. मुरुगन के इस्तीफे से खाली हुई है। इस सीट के लिए नामांकन की प्रक्रिया 26 अक्टूबर से शुरू हो चुकी है और दो नंवबर तक चलेगी। तीन नवंबर को नामांकन पत्राें की जांच होगी और पांच नवंबर तक नाम वापस लिये जा सकेंगे।

  • MP: कूनो में 19 माह के चीते की गोली लगने से हुई मौत….. जांच के लिए केंद्र ने भेजी उच्च स्तरीय टीम

    MP: कूनो में 19 माह के चीते की गोली लगने से हुई मौत….. जांच के लिए केंद्र ने भेजी उच्च स्तरीय टीम


    भोपाल।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के जंगलों में क्या दुनिया के सबसे तेज दौड़ने वाले जानवर भी सुरक्षित नहीं हैं. कूनो नेशनल पार्क (Kuno National Park) से जुड़े 19 महीने के नर चीते KNG22 की मौत ने इस सवाल को गंभीर बना दिया है. चीते के शरीर से एक-दो नहीं, बल्कि पांच गोली के छर्रे निकाले गए. उसे बचाने के लिए इलाज किया गया, विशेषज्ञों की मदद ली गई और सर्जरी भी हुई, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद 27 अक्टूबर को उसकी मौत हो गई. अब इस घटना की जांच के लिए मध्य प्रदेश सरकार (Madhya Pradesh Government) ने विशेष कार्यबल यानी एसटीएफ गठित की है. वहीं केंद्र सरकार ने भी उच्चस्तरीय टीम को जांच के लिए मध्य प्रदेश भेजा है.

    यह घटना सिर्फ एक चीते की मौत तक सीमित नहीं है. इसने भारत में चीतों को फिर से बसाने के लिए शुरू किए गए प्रोजेक्ट चीता की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं. सवाल यह है कि जिस परियोजना के तहत चीतों की निगरानी के लिए टीमें और आधुनिक तकनीक इस्तेमाल की जा रही है, वहां एक चीता गोली के छर्रों से गंभीर रूप से घायल कैसे हो गया. हालांकि, घटना के पीछे किसका हाथ है और चीते को गोली किन परिस्थितियों में लगी, इसका जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।


    25 अक्टूबर को घायल मिला था KNG22

    कूनो नेशनल पार्क की मादा चीता निरवा का 19 महीने का नर शावक KNG22, 25 अक्टूबर को घायल हालत में मिला था. वह कूनो के संरक्षित क्षेत्र से बाहर एमपी के मुरैना इलाके के जंगल में था. उसे रेस्क्यू कर इलाज के लिए कूनो लाया गया. शुरुआती जांच के बाद उसकी हालत को देखते हुए बेहतर इलाज के लिए जबलपुर स्थित पशु चिकित्सा सुविधा में भेजा गया.

    डॉक्टरों ने चीते की चोटों की गंभीरता का पता लगाने के लिए एक्स-रे और सीटी स्कैन किया. जांच में उसके शरीर के अलग-अलग हिस्सों में बाहरी वस्तुएं दिखाई दीं. इसके बाद इलाज के दौरान सर्जरी की गई. सर्जरी में उसके शरीर से पांच फायरआर्म पेलेट्स यानी गोली के छर्रे निकाले गए. इन छर्रों के कारण उसके आंतरिक अंगों, मांसपेशियों और तंत्रिका तंत्र को गंभीर नुकसान पहुंचा था.

    डॉक्टरों ने उसे बचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन चोटें इतनी गंभीर थीं कि 27 अक्टूबर की सुबह KNG22 ने दम तोड़ दिया. इसके बाद साफ हो गया कि यह मामला सामान्य चोट या किसी जानवर के हमले तक सीमित नहीं था. चीते के शरीर से मिले छर्रों ने गोली लगने की आशंका को सामने ला दिया और मामले की गंभीरता बढ़ गई.


    निगरानी के बावजूद कैसे घायल हुआ चीता

    KNG22 की मौत के बाद सबसे बड़ा सवाल निगरानी व्यवस्था को लेकर उठ रहा है. प्रोजेक्ट चीता के तहत चीतों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए निगरानी टीमें तैनात हैं. रेडियो या सैटेलाइट कॉलर जैसी तकनीक से उनकी लोकेशन का पता लगाने में मदद मिलती है. इसके बावजूद चीता संरक्षित क्षेत्र से बाहर घायल हालत में मिला और उसकी जान नहीं बचाई जा सकी.

    ऐसे में सवाल उठता है कि क्या चीते की गतिविधियों पर नजर रखने में कोई चूक हुई. क्या उसके घायल होने के बाद समय रहते मदद पहुंच पाई. क्या संरक्षित क्षेत्र के आसपास वन्यजीवों के लिए खतरा बन सकने वाली गतिविधियों पर पर्याप्त निगरानी थी. इन सवालों के जवाब फिलहाल जांच के दायरे में हैं.

    यह भी समझना जरूरी है कि किसी जानवर की लोकेशन का पता चलना और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना दो अलग-अलग बातें हैं. कॉलर या दूसरी तकनीक से जानवर की मौजूदगी का संकेत मिल सकता है, लेकिन खतरे की स्थिति में समय पर मौके पर पहुंचना और उसे सुरक्षित रखना भी उतना ही जरूरी है. KNG22 की मौत के बाद निगरानी से लेकर मैदानी कार्रवाई तक की व्यवस्था की जांच महत्वपूर्ण हो गई है.


    राज्य सरकार ने बनाई एसटीएफ, केंद्र ने भेजी टीम

    घटना की गंभीरता को देखते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने वन और पुलिस अधिकारियों को शामिल करते हुए विशेष कार्यबल यानी एसटीएफ का गठन किया है. यह टीम चीते के घायल होने और उसकी मौत के कारणों की जांच करेगी. जांच में यह पता लगाने की कोशिश होगी कि चीते को गोली कैसे लगी और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

    केंद्र सरकार ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए 28 अक्टूबर को उच्चस्तरीय टीम मध्य प्रदेश भेजी. इस टीम में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण यानी एनटीसीए के वन महानिरीक्षक, वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो यानी डब्ल्यूसीसीबी के अतिरिक्त निदेशक और डब्ल्यूसीसीबी के क्षेत्रीय उपनिदेशक शामिल हैं.

    केंद्रीय टीम घटना से जुड़े सबूतों की जांच करेगी और मध्य प्रदेश वन विभाग के साथ मिलकर काम करेगी. उसे यह भी देखना है कि चीतों की सुरक्षा के लिए बनाए गए नियमों, निगरानी व्यवस्था और सुरक्षा उपायों को किस तरह लागू किया जा रहा है. जांच के बाद टीम अपनी रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपेगी. इसके आधार पर आगे की कार्रवाई और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी कदम तय किए जा सकते हैं।

    फिर भी इस घटना ने यह सवाल जरूर खड़ा किया है कि जंगलों में वन्यजीवों को गोली लगने जैसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या पर्याप्त कदम उठाए जा रहे हैं. अगर संरक्षित क्षेत्र से बाहर जाने वाले चीतों को खतरा है, तो उनकी निगरानी के साथ आसपास के इलाकों में सुरक्षा और वन्यजीव अपराधों पर रोक लगाने की व्यवस्था भी मजबूत करनी होगी।


    विशेषज्ञों ने उठाए सवाल, कांग्रेस ने सरकार को घेरा

    चीते की मौत के बाद वन्यजीव विशेषज्ञों ने सुरक्षा व्यवस्था और घटना की जांच को लेकर सवाल उठाए हैं. वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट अजय दुबे ने इस मामले पर चिंता जताई है. वहीं, मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी चीते की मौत के बाद प्रोजेक्ट चीता और बीजेपी सरकार पर सवाल उठाए हैं।

    इस मामले में राजनीतिक बयानबाजी के साथ-साथ जांच के निष्कर्ष भी महत्वपूर्ण होंगे. सबसे जरूरी यह पता लगाना है कि चीते को गोली कैसे लगी, घटना के समय उसकी निगरानी किस तरह की जा रही थी और क्या सुरक्षा व्यवस्था में कोई कमी रही. जांच से यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या बदलाव जरूरी हैं।

    सितंबर 2022 में भारत में चीतों की वापसी के साथ प्रोजेक्ट चीता की शुरुआत हुई थी. इस परियोजना का उद्देश्य देश में चीतों को फिर से बसाना और उनके लिए सुरक्षित वातावरण तैयार करना है. अब तक इस परियोजना को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है. चीतों की मौतों के अलग-अलग कारण रहे हैं, लेकिन KNG22 की मौत इस वजह से अलग है कि उसके शरीर से पांच गोली के छर्रे निकाले गए।

  • MP: भोपाल में नाबालिगों के यौन शोषण मामले में कोर्ट का बड़ा फैसला…78 वर्षीय प्यारे मियां को 10 बार उम्रकैद

    MP: भोपाल में नाबालिगों के यौन शोषण मामले में कोर्ट का बड़ा फैसला…78 वर्षीय प्यारे मियां को 10 बार उम्रकैद


    भोपाल।
    भोपाल (Bhopal) में नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण के मामले में विशेष पॉक्सो अदालत (Special POCSO Court) ने पहले एक अखबार चलाने वाले मालिक प्यारे मियां (Pyare Miyan) को 10 बार उम्रकैद (Life imprisonment) की सजा सुनाई है. एजेंसी के मुताबिक अदालत ने उस पर 77.64 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है. इस मामले में उसकी सहयोगी राबिया बी को भी 20 साल जेल की सजा सुनाई गई है. अभियोजन पक्ष के मुताबिक, प्यारे मियां पांच नाबालिग लड़कियों के साथ बलात्कार और यौन उत्पीड़न के मामले में दोषी ठहराया गया है।


    नौकरी का लालच देकर बुलाने का आरोप

    अभियोजन पक्ष के अनुसार 78 वर्षीय प्यारे मियां साल 2014 से नाबालिग लड़कियों को निशाना बना रहा था. आरोप था कि वह लड़कियों को हर महीने 10 हजार रुपये की नौकरी देने का लालच देकर अपने पास बुलाता था. इसके बाद उनका यौन शोषण और बलात्कार करता था. मामले में राबिया बी पर भी उसके अपराधों में मदद करने का आरोप साबित हुआ।


    काउंसलिंग के दौरान सामने आया था मामला

    यह मामला 11 जुलाई 2020 को सामने आया था. अभियोजन पक्ष के मुताबिक काउंसलिंग के दौरान एक पीड़िता ने अपने साथ हुए यौन शोषण की जानकारी दी थी. उसने बताया कि उसे भोपाल के शाहपुरा इलाके में स्थित एक फ्लैट पर जन्मदिन मनाने के बहाने बुलाया गया था।

    पीड़िता के आरोप के अनुसार, वहां उसे जबरन शराब पिलाई गई और प्यारे मियां ने उसका यौन उत्पीड़न किया. इसके बाद अन्य नाबालिग लड़कियों ने भी इसी तरह के शोषण की घटनाओं के बारे में खुलासा किया।


    आठ मामलों में मृत्यु तक उम्रकैद

    अभियोजन पक्ष के अधिकारी के मुताबिक, विशेष पॉक्सो अदालत ने प्यारे मियां को पॉक्सो एक्ट और भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के तहत सजा सुनाई. उसे आठ मामलों में मृत्यु तक उम्रकैद और दो मामलों में उम्रकैद की सजा दी गई है. ये सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।

    सरकारी वकील पीएन सिंह राजपूत के अनुसार, पुलिस ने मामले की जांच के बाद प्यारे मियां को गिरफ्तार किया था. इसके बाद राबिया बी और अन्य सहयोगियों के खिलाफ भी मुकदमा चलाया गया. अदालत ने आरोप साबित होने के बाद प्यारे मियां को 10 बार उम्रकैद की सजा सुनाईष

  • MP: ग्वालियर में बाइक पार्क करने गया पति…. चिडियाघर के बाहर से गायब हो गई नवविवाहिता

    MP: ग्वालियर में बाइक पार्क करने गया पति…. चिडियाघर के बाहर से गायब हो गई नवविवाहिता


    ग्वालियर।
    मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के ग्वालियर (Gwalior) से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. यहां चिड़ियाघर (Zoo) के बाहर से लापता हुई 18 साल की नवविवाहिता (Newlywed Woman) को पुलिस ने करीब 20 दिन बाद दस्तयाब किया. महिला अपने 21 वर्षीय पति के साथ शिवपुरी जिले (Shivpuri district) के नरवर से ग्वालियर घूमने आई थी. पति का कहना था कि वह बाइक पार्क करने गया था और पत्नी को चिड़ियाघर के गेट के पास छोड़ गया था. जब वह वापस लौटा तो पत्नी वहां नहीं मिली. इसके बाद उसकी तलाश शुरू हुई. पुलिस ने आसपास के CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली तो महिला एक दूसरे युवक की बाइक पर बैठकर जाती दिखाई दी. अब महिला मिल गई है और उसने पुलिस को बताया है कि वह रास्ता भटक गई थी और उसने एक शख्स से लिफ्ट ली थी. पुलिस अब उसके बयान दर्ज कराने की प्रक्रिया अपना रही है।

    यह मामला ग्वालियर के पड़ाव थाना क्षेत्र का है. शिवपुरी जिले के नरवर क्षेत्र का रहने वाला 21 वर्षीय युवक अपनी 18 वर्षीय पत्नी को बाइक से ग्वालियर घुमाने और रिश्तेदारों से मिलवाने आया था. पत्नी की इच्छा पर दोनों चिड़ियाघर पहुंचे थे. बताया जा रहा है कि चिड़ियाघर पहुंचने के बाद पति बाइक पार्क करने चला गया. इस दौरान उसने पत्नी को गेट के पास ही छोड़ दिया था. कुछ देर बाद जब वह वापस आया तो पत्नी वहां मौजूद नहीं थी. उसने आसपास तलाश की, लेकिन पत्नी का कोई पता नहीं चला।


    CCTV फुटेज में दूसरे युवक की बाइक पर जाती दिखी महिला

    तलाश के दौरान उसे जानकारी मिली कि उसकी पत्नी किसी दूसरे युवक की बाइक पर बैठकर वहां से चली गई है. इसके बाद पति अपने चाचा के साथ थाने पहुंचा और पुलिस को घटना की जानकारी दी. अचानक पत्नी के गायब होने से वह परेशान था और उसने पुलिस से उसे तलाशने की मांग की. महिला के लापता होने की सूचना मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की. चिड़ियाघर और आसपास के इलाकों में लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली गई।

    पति ने फुटेज देखकर पत्नी को पहचाना. उसने बाइक सवार युवक की पहचान अरमान खान के रूप में बताते हुए उसके साथ प्रेम संबंध होने का दावा भी किया. पति की तरफ से लगाए गए इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है. पुलिस ने शुरुआत में अज्ञात आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर महिला की तलाश शुरू की थी. मामले में CCTV फुटेज अहम कड़ी बनी, क्योंकि इसमें महिला को एक अन्य युवक के साथ जाते हुए देखा गया था. हालांकि, फुटेज में दिखाई देने वाली घटना के पीछे की पूरी वजह उस समय स्पष्ट नहीं थी।

    करीब 20 दिन तक तलाश किए जाने के बाद पुलिस ने महिला को दस्तयाब कर लिया. महिला के मिलने के बाद मामले में नया मोड़ आया है. पूछताछ के दौरान उसने पुलिस को बताया कि वह रास्ता भटक गई थी. इसके बाद उसने एक व्यक्ति से लिफ्ट मांगी थी और उसके साथ चली गई थी. महिला के इस बयान के बाद पुलिस अब पूरे घटनाक्रम को समझने की कोशिश कर रही है. महिला ने जिस तरह रास्ता भटकने और लिफ्ट लेने की बात कही है, उसकी परिस्थितियों की विस्तृत पूछताछ की जाएगी. पुलिस यह भी स्पष्ट करेगी कि महिला अपनी मर्जी से गई थी या उसके साथ किसी तरह की जबरदस्ती हुई थी।


    CSP बोले, न्यायालय में बयान दर्ज होने के बाद होगी कार्रवाई

    सीएसपी रॉबिन जैन ने बताया कि कुछ दिन पहले पड़ाव थाना क्षेत्र से एक महिला के लापता होने की सूचना मिली थी. उसके पति ने इस संबंध में मामला दर्ज कराया था. बाद में CCTV फुटेज में महिला एक युवक के साथ मोटरसाइकिल पर जाती दिखाई दी थी. सीएसपी के मुताबिक, महिला को दस्तयाब कर लिया गया है. उसने बताया है कि वह रास्ता भटक गई थी और किसी से लिफ्ट मांगकर चली गई थी. पुलिस उससे और विस्तृत पूछताछ करेगी. उन्होंने बताया कि महिला बालिग है. यदि उसे जबरदस्ती नहीं ले जाया गया है, तो वह अपनी मर्जी से जा सकती है. अब न्यायालय में महिला के बयान दर्ज कराए जाएंगे. इसके बाद सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

    महिला के मिलने के बाद पुलिस की जांच अब अगले चरण में पहुंच गई है. पुलिस महिला के बयान, उसके लापता रहने के दौरान की परिस्थितियों और CCTV फुटेज में दिखाई देने वाले युवक की भूमिका की जांच करेगी. फिलहाल महिला ने रास्ता भटकने और लिफ्ट लेने की बात कही है. वहीं, पति ने पहले युवक पर संदेह जताते हुए उसके साथ प्रेम संबंध होने का दावा किया था. इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी. न्यायालय में महिला के बयान दर्ज होने के बाद मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट होगी।

  • MP: भारी घाटे में चल रही भोपाल मेट्रो…. जितनी महीने की कमाई, उतना एक दिन का खर्च!

    MP: भारी घाटे में चल रही भोपाल मेट्रो…. जितनी महीने की कमाई, उतना एक दिन का खर्च!


    भोपाल।
    राजधानी भोपाल (Bhopal) में मेट्रो (Metro) की चमक तो दिखाई दे रही है, लेकिन यात्रियों की संख्या और कमाई के आंकड़े इसकी रफ्तार पर सवाल खड़े कर रहे हैं. आधुनिक सफर का सपना लेकर शुरू हुई मेट्रो फिलहाल सीमित यात्रियों के सहारे दौड़ रही है. हर दिन करीब 5 लाख रुपये के संचालन खर्च के मुकाबले पूरे महीने में टिकटों से महज 4 से 5 लाख रुपये की आय हो रही है. यानी एक दिन के संचालन पर जितनी रकम खर्च हो रही है, उतनी कमाई जुटाने में मेट्रो को पूरा महीना लग रहा है. हालांकि, मेट्रो प्रबंधन (Metro Management) का कहना है कि इसे केवल मुनाफे के नजरिए से नहीं देखा जा सकता, क्योंकि यह शहर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था (Public Transport System) का अहम हिस्सा है।


    सात किलोमीटर के ट्रैक पर सवारी का इंतजार

    भोपाल में एम्स से सुभाष नगर के बीच करीब सात किलोमीटर लंबे प्रायोरिटी कॉरिडोर पर दिसंबर 2025 में मेट्रो सेवा शुरू हुई थी. शुरुआत में उम्मीद जताई गई थी कि मेट्रो शहर के यातायात को नई दिशा देगी और लोगों को जाम से राहत दिलाने में मदद करेगी. लेकिन फिलहाल आठ स्टेशनों तक सीमित इस रूट पर यात्रियों की संख्या उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ सकी है. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, महीनेभर में करीब 13 से 15 हजार यात्री मेट्रो से सफर कर रहे हैं. सीमित नेटवर्क के चलते मेट्रो अभी शहर के बड़े हिस्से को सीधे जोड़ने में सक्षम नहीं हैं, जिसका असर इसकी उपयोगिता और कमाई दोनों पर पड़ रहा है।


    एक दिन का खर्च पांच लाख, महीने की कमाई भी इतनी नहीं

    मेट्रो के संचालन पर प्रतिदिन करीब पांच लाख रुपये खर्च हो रहे हैं. इस हिसाब से मासिक संचालन खर्च लगभग डेढ़ करोड़ रुपये तक पहुंचता है. वहीं, यात्रियों से मिलने वाला किराया पूरे महीने में केवल 4 से 5 लाख रुपये के आसपास है. इन आंकड़ों के बीच का अंतर मेट्रो के सामने खड़ी आर्थिक चुनौती को साफ तौर पर दिखाता है. हालांकि, यह गणना संचालन खर्च और टिकटों से होने वाली आय पर आधारित है. मेट्रो को विज्ञापन और दूसरी व्यावसायिक गतिविधियों से मिलने वाला राजस्व अलग है, इसलिए कुल आय का आकलन करने के लिए सभी स्रोतों के आंकड़े जरूरी हैं।


    जनसंपर्क अधिकारी धीरज शुक्ला क्या बोले ?

    मेट्रो के खर्च और कमाई के बीच बड़े अंतर पर मेट्रो के जनसंपर्क अधिकारी धीरज शुक्ला का कहना है कि भोपाल मेट्रो लगातार यात्री सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में काम कर रही है. उनके मुताबिक मेट्रो का एक दिन का संचालन खर्च करीब पांच लाख रुपये है, जबकि महीनेभर में 13 से 15 हजार यात्री सफर करते हैं. इन यात्रियों से लगभग 4 से 5 लाख रुपये की आय होती है।

    धीरज शुक्ला का कहना है कि मेट्रो सार्वजनिक परिवहन का साधन है, इसलिए इसे केवल मौजूदा कमाई के आधार पर नहीं देखा जा सकता. फिलहाल नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है. जब शहर के अलग-अलग हिस्सों तक मेट्रो की कनेक्टिविटी पहुंचेगी, तब यात्रियों की संख्या बढ़ने के साथ आय में भी इजाफा होने की उम्मीद है. उन्होंने कहा कि यात्री सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है और मेट्रो को ज्यादा से ज्यादा लोगों के लिए उपयोगी बनाने के प्रयास लगातार जारी हैं।


    जन्मदिन, प्री-वेडिंग शूट और विज्ञापन से कमाई की कोशिश

    टिकटों से सीमित आय के बीच मेट्रो प्रबंधन गैर-किराया राजस्व बढ़ाने के विकल्पों पर भी काम कर रहा है. इसके तहत मेट्रो के अंदर जन्मदिन मनाने, किटी पार्टी और प्री-वेडिंग शूट जैसे आयोजनों की सुविधा दी जा रही है. इसके अलावा विज्ञापनों के जरिए भी राजस्व जुटाने की कोशिश की जा रही है. प्रबंधन का मानना है कि ऐसी गतिविधियां मेट्रो की कमाई बढ़ाने में मददगार साबित हो सकती हैं. हालांकि, इन माध्यमों से अब तक कितनी अतिरिक्त आय हुई है, इसका विस्तृत आंकड़ा सामने आना बाकी है।


    स्टेशन तक पहुंच आसान नहीं, तो यात्री क्यों चुनेंगे मेट्रो?

    मेट्रो में कम यात्रियों की एक बड़ी वजह सीमित रूट के साथ-साथ लास्ट माइल कनेक्टिविटी की चुनौती भी मानी जा रही है. किसी भी मेट्रो सेवा की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि यात्री अपने घर से स्टेशन तक और स्टेशन से अंतिम गंतव्य तक कितनी आसानी से पहुंच पाते हैं. यदि स्टेशन तक पहुंचने के लिए पर्याप्त फीडर बसें, ई-रिक्शा या दूसरे साधन उपलब्ध नहीं होंगे, तो लोग निजी वाहनों और पारंपरिक सार्वजनिक परिवहन को प्राथमिकता दे सकते हैं।

    इसके अलावा रोजाना कार्यालय जाने वाले कर्मचारियों, विद्यार्थियों और दूसरे नियमित यात्रियों के लिए मेट्रो तभी सुविधाजनक विकल्प बनेगी, जब उसका नेटवर्क शहर के प्रमुख व्यावसायिक, शैक्षणिक और रिहायशी इलाकों से बेहतर तरीके से जुड़ेगा।


    विस्तार से उम्मीद, लेकिन फिलहाल घाटे का दबाव

    भोपाल मेट्रो के नेटवर्क का विस्तार भविष्य में यात्रियों की संख्या बढ़ाने की उम्मीद जरूर जगाता है, लेकिन तब तक संचालन खर्च और सीमित आय के बीच संतुलन बनाना प्रबंधन के लिए बड़ी चुनौती रहेगा. बेहतर कनेक्टिविटी, नियमित यात्रियों के लिए सुविधाजनक योजनाएं, स्टेशनों तक पहुंचने के साधन और विज्ञापन जैसी गतिविधियों से होने वाली आय इस चुनौती को कम करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।

    फिलहाल भोपाल मेट्रो के सामने सवाल सिर्फ यह नहीं है कि ट्रेनें कितनी रफ्तार से दौड़ रही हैं, बल्कि यह भी है कि उनमें सफर करने वालों की संख्या कब बढ़ेगी. प्रबंधन को उम्मीद है कि पूरे शहर में नेटवर्क फैलने के बाद तस्वीर बदलेगी. लेकिन मौजूदा स्थिति यही बताती है कि मेट्रो को शहर की रोजमर्रा की जरूरत बनाने के लिए अभी यात्रियों का भरोसा जीतना होगा. अब देखना होगा कि विस्तार की योजनाएं कब तक मेट्रो को खाली सीटों से आगे बढ़ाकर आम लोगों की पहली पसंद बना पाती हैं।